संक्षिप्त सारांश
यह वीडियो दादा साहब भगत की प्रेरणादायक कहानी बताता है, जिन्होंने कभी ऑफिस बॉय के रूप में काम किया था और आज दो कंपनियों के मालिक हैं। यह कहानी दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और सीखने की इच्छाशक्ति के महत्व पर प्रकाश डालती है।
- दादा साहब भगत ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे।
- उन्होंने अपनी नौकरी के साथ-साथ ग्राफिक डिजाइनिंग और एनीमेशन का कोर्स किया और नई तकनीकों को सीखा।
- उन्होंने डिजाइन टेम्पलेट्स को ऑनलाइन बेचना शुरू किया और बाद में दो कंपनियां शुरू कीं: निधन मोशन और दो ग्राफिक।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके काम और लगन की तारीफ की है।
परिचय: दादा साहब भगत की प्रेरणादायक कहानी
यह वीडियो महाराष्ट्र के बीड़ के रहने वाले दादा साहब भगत की कहानी से शुरू होता है, जिन्होंने कभी ऑफिस बॉय की नौकरी की थी और आज अपनी खुद की कंपनी के मालिक हैं। यह कहानी बताती है कि कैसे दृढ़ संकल्प और जुनून के साथ कोई भी मुश्किल परिस्थिति को पार कर सकता है। दादा साहब ने इंफोसिस के दफ्तर में ऑफिस बॉय का काम करते हुए कभी हार नहीं मानी और अपने सपनों की ओर बढ़ते रहे। आज वह दो कंपनियों के मालिक हैं और प्रधानमंत्री भी उनके हौसले की तारीफ कर चुके हैं।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
दादा साहब भगत का जन्म 1994 में महाराष्ट्र के बीड़ में हुआ था। उन्होंने हाई स्कूल की पढ़ाई करने के बाद पुणे से आईटीआई का कोर्स पूरा किया। उन्हें नौकरी की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने इंफोसिस के गेस्ट हाउस में रूम सर्विस बॉय के तौर पर नौकरी कर ली। उनका काम लोगों को रूम सर्विस, चाय और पानी देना था, जिसके लिए उन्हें ₹9000 प्रति माह मिलते थे।
सॉफ्टवेयर के महत्व को समझना और सीखना
इंफोसिस में काम करते हुए, दादा साहब को सॉफ्टवेयर के महत्व का पता चला और उन्होंने इसे सीखने का फैसला किया। उन्होंने दिन में नौकरी की और रात में ग्राफिक डिजाइनिंग और एनीमेशन की पढ़ाई की। कोर्स पूरा करने के बाद उन्हें मुंबई में एक नौकरी मिल गई। कुछ दिन वहां नौकरी करने के बाद वह हैदराबाद लौट आए और वहां नौकरी के साथ-साथ C++ और पाइथन का कोर्स किया। नई चीजों के बारे में जानने और सीखने की उनकी हमेशा से कोशिश रहती थी।
स्टार्टअप की शुरुआत
एक डिजाइनर ग्राफिक कंपनी के साथ काम करते हुए, दादा साहब ने देखा कि दोबारा से इस्तेमाल होने वाले डिजाइन और टेम्पलेट्स की लाइब्रेरी पर काम करना एक अच्छा विकल्प है। यहीं से उनके स्टार्टअप की शुरुआत हुई। उन्होंने डिजाइन टेम्पलेट्स को ऑनलाइन बेचना शुरू किया। बिजनेस शुरू करते ही एक रोड एक्सीडेंट के कारण उन्हें कई महीनों तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इस दौरान उन्होंने अपने स्टार्टअप की पूरी दिशा तय कर ली।
निधन मोशन और दो ग्राफिक की स्थापना
साल 2015 में दादा साहब ने अपनी पहली कंपनी निधन मोशन शुरू की। कुछ ही समय में उनके साथ 6000 कस्टमर जुड़ गए। उन्होंने ऑनलाइन ग्राफिक डिजाइनिंग पर लगातार काम करना जारी रखा और ग्राफिक डिजाइन का एक नया सॉफ्टवेयर डिजाइन किया जो कैनवा जैसा ही है। लॉकडाउन के दौरान उन्हें गांव जाना पड़ा, जहां उन्होंने गौशाला में अपना स्थाई ऑफिस तैयार किया। खेतों में दोस्तों को एनीमेशन और डिजाइन का काम सिखाया और फिर उन्हें अपनी कंपनी में नौकरी दी। साल 2020 में उन्होंने आसान डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर तैयार किया और अपनी दूसरी कंपनी दो ग्राफिक की शुरुआत की।
सफलता और प्रशंसा
कभी ₹9000 की नौकरी करने वाले दादा साहब आज लाखों की कमाई कर रहे हैं। 26 सितंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने कार्यक्रम 'मन की बात' में दादा साहब के काम और उनके लगन की तारीफ की थी।

