Office Boy कैसे बन गया CEO? | BIZ Tak

Biz Tak www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो दादा साहब भगत की प्रेरणादायक कहानी बताता है, जिन्होंने कभी ऑफिस बॉय के रूप में काम किया था और आज दो कंपनियों के मालिक हैं। यह कहानी दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और सीखने की इच्छाशक्ति के महत्व पर प्रकाश डालती है।

  • दादा साहब भगत ने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी और अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार प्रयास करते रहे।
  • उन्होंने अपनी नौकरी के साथ-साथ ग्राफिक डिजाइनिंग और एनीमेशन का कोर्स किया और नई तकनीकों को सीखा।
  • उन्होंने डिजाइन टेम्पलेट्स को ऑनलाइन बेचना शुरू किया और बाद में दो कंपनियां शुरू कीं: निधन मोशन और दो ग्राफिक।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनके काम और लगन की तारीफ की है।

परिचय: दादा साहब भगत की प्रेरणादायक कहानी

यह वीडियो महाराष्ट्र के बीड़ के रहने वाले दादा साहब भगत की कहानी से शुरू होता है, जिन्होंने कभी ऑफिस बॉय की नौकरी की थी और आज अपनी खुद की कंपनी के मालिक हैं। यह कहानी बताती है कि कैसे दृढ़ संकल्प और जुनून के साथ कोई भी मुश्किल परिस्थिति को पार कर सकता है। दादा साहब ने इंफोसिस के दफ्तर में ऑफिस बॉय का काम करते हुए कभी हार नहीं मानी और अपने सपनों की ओर बढ़ते रहे। आज वह दो कंपनियों के मालिक हैं और प्रधानमंत्री भी उनके हौसले की तारीफ कर चुके हैं।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

दादा साहब भगत का जन्म 1994 में महाराष्ट्र के बीड़ में हुआ था। उन्होंने हाई स्कूल की पढ़ाई करने के बाद पुणे से आईटीआई का कोर्स पूरा किया। उन्हें नौकरी की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने इंफोसिस के गेस्ट हाउस में रूम सर्विस बॉय के तौर पर नौकरी कर ली। उनका काम लोगों को रूम सर्विस, चाय और पानी देना था, जिसके लिए उन्हें ₹9000 प्रति माह मिलते थे।

सॉफ्टवेयर के महत्व को समझना और सीखना

इंफोसिस में काम करते हुए, दादा साहब को सॉफ्टवेयर के महत्व का पता चला और उन्होंने इसे सीखने का फैसला किया। उन्होंने दिन में नौकरी की और रात में ग्राफिक डिजाइनिंग और एनीमेशन की पढ़ाई की। कोर्स पूरा करने के बाद उन्हें मुंबई में एक नौकरी मिल गई। कुछ दिन वहां नौकरी करने के बाद वह हैदराबाद लौट आए और वहां नौकरी के साथ-साथ C++ और पाइथन का कोर्स किया। नई चीजों के बारे में जानने और सीखने की उनकी हमेशा से कोशिश रहती थी।

स्टार्टअप की शुरुआत

एक डिजाइनर ग्राफिक कंपनी के साथ काम करते हुए, दादा साहब ने देखा कि दोबारा से इस्तेमाल होने वाले डिजाइन और टेम्पलेट्स की लाइब्रेरी पर काम करना एक अच्छा विकल्प है। यहीं से उनके स्टार्टअप की शुरुआत हुई। उन्होंने डिजाइन टेम्पलेट्स को ऑनलाइन बेचना शुरू किया। बिजनेस शुरू करते ही एक रोड एक्सीडेंट के कारण उन्हें कई महीनों तक बिस्तर पर रहना पड़ा। इस दौरान उन्होंने अपने स्टार्टअप की पूरी दिशा तय कर ली।

निधन मोशन और दो ग्राफिक की स्थापना

साल 2015 में दादा साहब ने अपनी पहली कंपनी निधन मोशन शुरू की। कुछ ही समय में उनके साथ 6000 कस्टमर जुड़ गए। उन्होंने ऑनलाइन ग्राफिक डिजाइनिंग पर लगातार काम करना जारी रखा और ग्राफिक डिजाइन का एक नया सॉफ्टवेयर डिजाइन किया जो कैनवा जैसा ही है। लॉकडाउन के दौरान उन्हें गांव जाना पड़ा, जहां उन्होंने गौशाला में अपना स्थाई ऑफिस तैयार किया। खेतों में दोस्तों को एनीमेशन और डिजाइन का काम सिखाया और फिर उन्हें अपनी कंपनी में नौकरी दी। साल 2020 में उन्होंने आसान डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर तैयार किया और अपनी दूसरी कंपनी दो ग्राफिक की शुरुआत की।

सफलता और प्रशंसा

कभी ₹9000 की नौकरी करने वाले दादा साहब आज लाखों की कमाई कर रहे हैं। 26 सितंबर 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने कार्यक्रम 'मन की बात' में दादा साहब के काम और उनके लगन की तारीफ की थी।

Summarize any YouTube video in seconds

Get summaries like this one for any video, in your language, with the free Summ app.

Download on the Apple Store
Get it on Google Play

Transcript

YouTube Transcript Generator

0:00 कब किसकी किस्मत साथ देने लगे कुछ कहा नहीं जा सकता कुछ ऐसा ही हुआ बीट के रहने वाले दादा साहब भगत के साथ जो कभी ऑफिस बाय की नौकरी करते थे आज इनकी खुद की कंपनी है जी हां आप सही सुन रहे हैं हुनर सबके अंदर होता है जज्बा और जुनून की बातें भी सभी करते हैं लेकिन इस जुनून के साथ कुछ कर गुर्जर जान का हौसला सब नहीं रख पाते हैं परिस्थितियों चाहे कैसे भी हो लेकिन अगर आपने हौसले बुलंद हो तो मुश्किल कुछ भी नहीं जो कुछ कर गुजरते का जज्बा रखते हैं उसके लिए हालात माननीय नहीं रखते कभी इंफोसिस के दफ्तर में ऑफिस बाय का कम करने वाले दादा साहब भगत की कहानी भी कुछ ऐसी ही है ऑफिस बाय की नौकरी करते हुए उन्होंने कभी हर नहीं मनी और अपने सपनों

0:45 की और आगे बढ़ते रहे आज वो दो कंपनियां के मलिक हैं खुद प्रधानमंत्री भी दादा साहब के हौसले की तारीफ कर चुके हैं अब क्या ये पुरी खबर विस्तार से समझना की कोशिश करते हैं सबसे पहले इस कहानी की नायक के बड़े में जान लीजिए दादा साहब भगत का जन्म 1994 में महाराष्ट्र के भीड़ में हुआ था दादा साहब ने हाय स्कूल की पढ़ाई करने के बाद पुणे से आईटीआई का कोर्स पूरा किया उन्हें उसे वक्त नौकरी की बहुत जरूर थी इसलिए उन्होंने इंफोसिस के गेस्ट हाउस में रूम सर्विस बाय के तोर पर नौकरी कर ली इंफोसिस के गेस्ट हाउस में उनका कम लोगों को रूम सर्विस चाय पानी देना था इस कम के लिए सैलरी के तोर पर उन्हें ₹9000 हर महीने मिलते थे वो जानते थे की ये नौकरी उनके लिए नहीं है फोर्सेस के कम के दौरान इन्हें सॉफ्टवेयर के महत्व का पता चला

1:33 उन्होंने ते किया की वो भी इसे सीखेंगे दादा साहब भगत दिन में नौकरी करते थे और रात में ग्राफिक डिजाइनिंग और एनीमेशन की पढ़ाई करते थे स्कोर्स को पूरा करने के बाद उन्हें मुंबई में एक नौकरी मिल गई कुछ दिन वहां नौकरी करने के बाद वो हैदराबाद लोट आए उन्होंने वहां नौकरी के साथ साथ c++ और पाइथन का कोर्स किया नई चीजों के बड़े में जन और उसे सीखने की उनकी हमेशा से कोशिश रहती थी डिजाइनर ग्राफिक कंपनी के साथ कम करते हुए उन्होंने देखा की दोबारा से इस्तेमाल होने वाले डिजाइन और टेंपलेट्स की लाइब्रेरी पर कम करना बहुत अच्छा विकल्प है यही से उनके स्टार्टअप की शुरुआत हुई उन्होंने डिजाइन टेंपलेट्स को ऑनलाइन बेचना शुरू किया बिजनेस शुरू ही कर रहे थे की एक रोड एक्सीडेंट के करण उन्हें कई मीना तक बिस्तर पर रहना पड़ा उन्होंने

2:19 इस दौरान अपने स्टार्टअप की पुरी दिशा ते कर ली साल 2015 में उन्होंने अपनी पहले कंपनी निधन मोशन शुरू की कुछ ही समय में उनके साथ 6000 कस्टमर जुड़ गए दादा साहब यही नहीं रुक उन्होंने ऑनलाइन ग्राफिक डिजाइनिंग पर लगातार कम करना जारी रखा उन्होंने ग्राफिक डिजाइन का नया सॉफ्टवेयर डिजाइन कर दिया जो कैनवा जैसा ही है दरअसल लोग डॉ के दौरान उन्हें गांव जाना पड़ा गांव में गौशाला में उन्होंने अपना स्थाई ऑफिस तैयार किया खेतों में दोस्तों को एनीमेशन और डिजाइन का कम सिखाया और फिर उन्हें अपनी कंपनी में नौकरी दी साल 2020 में उन्होंने आसन डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर तैयार किया और अपनी दूसरी कंपनी दो ग्राफिक की शुरुआत की कभी ₹9000 की नौकरी करने वाले

3:05 दादा साहब आज लाखों की कमाई कर रहे हैं 26 सितंबर 2020 को पीएम मोदी ने भी अपने कार्यक्रम मां की बात में दादा साहब की कम की और उनके लगन की तारीफ की थी ब्यूटीफुल [संगीत]

Share

YouTube Video Summaries