राजनीतिक समाजशास्त्र का अर्थ, प्रकृति और क्षेत्र political sociology meaning, nature and scope hindi

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो राजनीतिक समाजशास्त्र के अर्थ, प्रकृति और क्षेत्र पर केंद्रित है। यह बताता है कि कैसे राजनीतिक समाजशास्त्र, राजनीति और समाज के बीच संबंधों का अध्ययन करता है, और यह राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र से कैसे अलग है। वीडियो राजनीतिक समाजशास्त्र के विकास, इसकी परिभाषाओं, विषय क्षेत्र और अध्ययन के तरीकों पर भी प्रकाश डालता है।

  • राजनीतिक समाजशास्त्र राजनीति और समाज के बीच संबंधों का अध्ययन है।
  • यह राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र दोनों से अलग है, लेकिन दोनों से जानकारी लेता है।
  • राजनीतिक समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र व्यापक है और इसमें राजनीतिक संरचनाएं, प्रक्रियाएं और व्यवहार शामिल हैं।
  • राजनीतिक समाजशास्त्र के अध्ययन के लिए कई तरह के तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें अनुभवजन्य, प्रणालीगत, संरचनात्मक-कार्यात्मक और व्यवहारवादी दृष्टिकोण शामिल हैं।

राजनीतिक समाजशास्त्र: परिचय

राजनीति समाजशास्त्र, राजनीति और समाज के बीच के संबंधों का अध्ययन है। यह सामाजिक संदर्भ में राजनीतिक गतिविधियों और संस्थानों की जांच करता है। आधुनिक युग में, राजनीति को एक सामाजिक गतिविधि के रूप में देखा जाता है जो सामाजिक कार्यों, विधान और अंतर्निहित सिद्धांतों से जुड़ी होती है। राजनीति का उद्देश्य कुछ लोगों या वर्गों को दूसरों पर नियंत्रण रखने और उसे बनाए रखने में मदद करना है। यह एक गतिशील सामाजिक गतिविधि है जो लोगों के सामाजिक और आर्थिक संबंधों से जुड़ी है, जो समय और स्थान के अनुसार बदलती रहती है।

राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र का संबंध

आधुनिक राजनीति विज्ञान एक बहु-अनुशासनात्मक क्षेत्र है जो सामाजिक और प्राकृतिक विज्ञानों से उपयोगी सामग्री लेता है। राजनीति और राजनीतिक संस्थाएं समाज का हिस्सा हैं, और सामाजिक तत्व जैसे संस्कृति, परंपराएं और विचारधाराएं व्यक्ति और समूहों पर गहरा प्रभाव डालती हैं। राजनीति विज्ञान, समाजशास्त्र से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है, क्योंकि राजनीतिक विश्लेषण के लिए सामाजिक संदर्भ को समझना आवश्यक है। सामान्य व्यवस्था सिद्धांत और संरचनात्मक-कार्यात्मक दृष्टिकोण जैसे अवधारणाएं समाजशास्त्र से ही आई हैं। राजनीति संगठित समाज का अध्ययन है और इसे समाजशास्त्र से अलग नहीं किया जा सकता।

राजनीतिक समाजशास्त्र का विकास

राजनीतिक समाजशास्त्र एक विषय के रूप में प्रथम विश्व युद्ध के बाद उभरा। हालाँकि, 18वीं और 19वीं शताब्दी में शुरू हुए कई अध्ययन आज राजनीतिक समाजशास्त्र के अंतर्गत आते हैं। अरस्तू की पुस्तक 'पॉलिटिक्स' को राजनीतिक समाजशास्त्र की पहली रचना माना जा सकता है। मॉन्टेस्क्यू और अन्य विचारकों ने उन तथ्यों पर विचार किया जिन्हें आज हम राजनीतिक समाजशास्त्र की विषय वस्तु मानते हैं। कार्ल मार्क्स और अन्य के अध्ययनों में राजनीतिक विश्लेषण के लिए सामाजिक-आर्थिक संदर्भ का महत्व मिलता है। 19वीं शताब्दी के मध्य में, औद्योगिक क्रांति और राज्य और समाज के बीच अंतर के स्पष्टीकरण ने इस विषय के विकास में मदद की। 20वीं शताब्दी के प्रारंभ में, व्यवहारवादी क्रांति और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद राजनीतिक समाजशास्त्र को एक स्वतंत्र विषय का दर्जा मिला।

राजनीतिक समाजशास्त्र की परिभाषा

राजनीतिक समाजशास्त्र की परिभाषा को लेकर विद्वानों में मतभेद है। कुछ इसे "राजनीतिक समाजशास्त्र" कहते हैं, जबकि अन्य इसे "राजनीति का समाजशास्त्र" कहना पसंद करते हैं। यह विषय समाज और राजनीति के बीच संबंधों की व्याख्या करता है। समाजशास्त्रियों के लिए, यह समाज के अंदर शक्ति, निरीक्षण, सामाजिक और राजनीतिक संघर्षों से संबंधित है। राजनीति विज्ञान के लिए, यह राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले अंतर्संबंधों से संबंधित है। राजनीतिक समाजशास्त्र एक नया विषय होने के कारण, इसे परिभाषित करना कठिन है, लेकिन यह राजनीतिक तंत्र के अंतर्गत सामाजिक जीवन के राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं के बीच होने वाली अंतर्क्रियाओं का विश्लेषण करता है।

विभिन्न विद्वानों के अनुसार राजनीतिक समाजशास्त्र की परिभाषा

विभिन्न विद्वानों ने राजनीतिक समाजशास्त्र को अलग-अलग तरह से परिभाषित किया है। डेविड ईस्टन के अनुसार, यह राजनीति और समाज में अंतर्क्रिया का विश्लेषण करता है। एस.एम. लिपसेट के अनुसार, यह राजनीतिक तंत्र को समाज और राजनीतिक व्यवस्था के प्रति सामाजिक संरचना और राजनीतिक संस्थाओं के पारस्परिक संबंधों के अध्ययन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। ब्रेंट कहते हैं कि राजनीति विज्ञान राज्य से शुरू होता है और समाज को कैसे प्रभावित करता है, इसकी जांच करता है, जबकि राजनीतिक समाजशास्त्र समाज से शुरू होता है और राज्य को कैसे प्रभावित करता है, इसकी जांच करता है।

राजनीतिक समाजशास्त्र की विशेषताएं

राजनीतिक समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान नहीं है क्योंकि यह राज्य और सरकार की औपचारिक संरचना का अध्ययन नहीं करता है। यह समाजशास्त्र भी नहीं है क्योंकि यह मात्र सामाजिक संस्थाओं का अध्ययन नहीं करता है। यह समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान के गुणों को मिलाकर दोनों के अधिक विकसित रूप का प्रतिनिधित्व करता है। एसएम लिपसेट के अनुसार, समाज व्यवस्था समाजशास्त्र की केंद्रीय समिति है, तो राजनीतिक व्यवस्था स्थापित अथवा जनतंत्र की सामाजिक स्थिति राजनीतिक समाजशास्त्र का मुख्य विषय है।

राजनीतिक समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र

राजनीतिक समाजशास्त्र एक नया विषय होने के कारण, इसका विषय क्षेत्र निर्धारित करना कठिन है। इसमें समुदाय और राज्य में मतदान व्यवहार, आर्थिक शक्ति का केंद्रीकरण, राजनीतिक आंदोलन, विचारधारा, सामाजिक स्तरीकरण, राजनीतिक व्यवहार, सरकार और नौकरशाहों की भूमिका जैसे पहलुओं को शामिल किया जाता है। राजनीतिक समाजशास्त्र के अंतर्गत संवैधानिक और अनौपचारिक राजनीतिक संस्थाओं, अभिजन वर्ग, संघर्ष, हित समूह, मतदान व्यवहार, राजनीतिक दलों जैसे विविध विषयों के अध्ययन पर बल दिया जाता है।

राजनीतिक समाजशास्त्र और राजनीति का समाजशास्त्र

राजनीतिक समाजशास्त्र (Political Sociology) और राजनीति का समाजशास्त्र (Sociology of Politics) के बीच अंतर को लेकर कई प्रश्न उठते हैं। कुछ विद्वानों का मानना है कि इन दोनों में कोई अंतर नहीं है, जबकि अन्य इन्हें अलग-अलग मानते हैं। राजनीतिक समाजशास्त्र में समाजशास्त्र को राजनीति से अधिक प्राथमिकता दी जाती है, जबकि राजनीति का समाजशास्त्र द्विपक्षीय संबंधों को महत्व देता है। राजनीतिक समाजशास्त्र का विकास समाजशास्त्र के राजनीतिक हालात पर बढ़ते हुए प्रभाव के कारण हुआ।

राजनीति का समाजशास्त्र बनाम राजनीतिक समाजशास्त्र: एक तुलना

राजनीति का समाजशास्त्र (Sociology of Politics) और राजनीतिक समाजशास्त्र (Political Sociology) के बीच अंतर और उनके आपसी संबंधों को समझना अनिवार्य है। कुछ विद्वानों ने इन दोनों पदों के अंतर को मिटाने का प्रयास किया है, जबकि अन्य इन्हें समानार्थी नहीं मानते हैं। राजनीति का समाजशास्त्र, समाजशास्त्र का एक उपक्षेत्र है, जबकि राजनीतिक समाजशास्त्र एक व्यापक क्षेत्र है जो मनुष्य को राजनीतिक और सामाजिक प्राणी दोनों मानता है।

राजनीतिक समाजशास्त्र के उदय के कारण

राजनीतिक समाजशास्त्र के उदय के कई कारण हैं, जिनमें राजनीति विज्ञान के परंपरागत उपायों के प्रति असंतोष, अनुशासनात्मक अध्ययन की प्रवृत्ति, समाजशास्त्रीय अध्ययन करने की प्रवृत्ति और व्यवहारिक उपायों का प्रचलन शामिल हैं। राजनीतिक समाजशास्त्र राजनीति विज्ञान और समाज को जोड़ने का काम करता है और राजनीति में अनौपचारिक पहलुओं के अध्ययन पर जोर देता है।

राजनीतिक समाजशास्त्र की प्रकृति

राजनीतिक समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान नहीं है क्योंकि यह राज्य और शासन का अध्ययन नहीं करता है। यह समाजशास्त्र भी नहीं है, लेकिन राजनीति में दिलचस्पी रखता है। राजनीतिक समाजशास्त्र सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं के बीच आकृति की एकरूपता और समरूपता विमान करता है। यह सामाजिक व्यवहार और राजनीतिक व्यवहार के मध्य पाई जाने वाली अंतर क्रियात्मकता का अध्ययन है।

राजनीतिक समाजशास्त्र के अध्ययन की पद्धतियाँ

राजनीतिक समाजशास्त्र के अध्ययन के लिए कई तरह के तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिनमें अनुभवजन्य पद्धति, प्रणाली पद्धति, संरचनात्मक-कार्यात्मक उपागम और व्यवहारवादी उपागम शामिल हैं। अनुभवजन्य पद्धति में पर्यवेक्षण और अवलोकन के आधार पर प्राप्त तथ्यों और आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है। प्रणाली पद्धति में संपूर्ण राज्य व्यवस्था, उसके निवेश और निर्गत प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है। संरचनात्मक-कार्यात्मक उपागम में राजनीतिक व्यवस्था में राजनीतिक संगठनों द्वारा व्यवस्था की संरचना का अध्ययन किया जाता है। व्यवहारवादी उपागम में मानव व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।

व्यवहारवाद और उत्तर व्यवहारवाद

व्यवहारवाद एक ऐसा आंदोलन है जिसका उद्देश्य राजनीतिक अध्ययन को आधुनिक मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र में विकसित सिद्धांतों, पद्धतियों, खोजों और दृष्टिकोणों के निकट संपर्क में लाना है। उत्तर व्यवहारवाद, व्यवहारवाद की प्रतिक्रिया स्वरूप उभरा और इसने प्रासंगिकता, सामाजिक परिवर्तन और मूल्यों के महत्व पर जोर दिया।

राजनीति के अध्ययन का समाजशास्त्रीय उपागम

राजनीति के अध्ययन का समाजशास्त्रीय उपागम बहुत अधिक लोकप्रिय हो गया है। इस उपागम के अनुसार, राजनीति संगठित समाज का अध्ययन है और इसलिए समाजशास्त्र से इसको अलग नहीं किया जा सकता। समाजशास्त्र अपने पति के प्रारंभिक काल से ही राजनीतिक प्रक्रिया एवं संस्थाओं का चयन कर रहा है।

राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र में अंतर

राजनीति विज्ञान और समाजशास्त्र के बीच अंतर यह है कि राजनीति विज्ञान राज्य, सरकार और राजनीतिक संस्थानों के अध्ययन पर केंद्रित है, जबकि समाजशास्त्र सामाजिक संरचना, सामाजिक व्यवहार और सामाजिक परिवर्तन के अध्ययन पर केंद्रित है। राजनीतिक समाजशास्त्र इन दोनों विषयों के बीच एक पुल का काम करता है और राजनीति और समाज के बीच संबंधों का अध्ययन करता है।

राजनीतिक समाजशास्त्र का महत्व

राजनीतिक समाजशास्त्र का महत्व यह है कि यह हमें राजनीति को सामाजिक संदर्भ में समझने में मदद करता है। यह हमें राजनीतिक व्यवहार, राजनीतिक संस्थानों और राजनीतिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करने वाले सामाजिक कारकों को समझने में मदद करता है। राजनीतिक समाजशास्त्र हमें यह भी समझने में मदद करता है कि कैसे राजनीति सामाजिक परिवर्तन को प्रभावित करती है।

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Transcript

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0:00 कर दो हेलो हेलो एंड वेलकम टू माय YouTube चैनल इस वीडियो में हम लोग करेंगे जाएंगे राजनीति समाज पास क्या होता है राजनीतिक समाजशास्त्र का अर्थ इसकी प्रकृति और राजनीतिक समाजशास्त्र का क्षेत्र पॉलीटिकल सोशल मीडिया और इसको के बारे में इससे पहले वीडियोस उसका लिंक आपको डिस्क्रिप्शन में और सब्सक्राइब करें सब्सक्राइब और हर कार्य उसके सामाजिक कार्यकलापों को

0:47 नियुक्त सब्सक्राइब बन जाती है इसी परिपेक्ष में आधुनिक युग में राजनीति को एक व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है इसका यह अभिप्राय यह है कि इसमें हम अपने सामाजिक कार्यों को सबस्क्राइब आपके विधान के संबंध में इन के अंतर्निहित सिद्धांतों और जिन साधनों से कुछ लोग या वर्ग की स्थिति पर अधिक नियंत्रण मुक्त करने और उसे बनाए रखते हैं कि बारे में समझ और व्यवस्था बंद करते इसका तात्पर्य यह कि सबसे बढ़कर राजनीति सामाजिक

1:33 कार्यकर्ता संबंधित लोगों के सामाजिक और आर्थिक संबंधों से जो अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग रूप में हमारे समस्त जाति और हर समय बदलती रहती है अर्थात् यह गत्यात्मक सामाजिक गतिविधि आधुनिक राजनीति विज्ञान अनुशासनात्मक तथा गुय विभिन्न अनुशासनों सामाजिक एवं प्राकृतिक विज्ञान से भी उपयोगी सामग्री पधार्थ पद्धति में काम कर रहा है वर्तमान काल में उसने समाज विज्ञान यानी सौंठ से सर्वाधिक सामग्री ग्रहण की

2:19 वृद्धि क्योंकि राजनीति और राजनीतिक संस्था समाज का ही अंग व्यक्ति और समूह पर असामाजिक तत्व जैसे की संस्कृति परंपरा एवं धैर्य झाल गहरा प्रभाव होता नियुक्त किया और प्रभाव ग्रहण तथा प्रयोग करते ही राजनीति जाति संघ के वैज्ञानिक विश्लेषण इस प्रकार राज्य विज्ञान और समाज बिखरा पड़ा घनिष्ठ संबंध इतना ही नहीं राज्य में सर्वाधिक प्रयुक्त जैसे सामान्य व्यवस्था सिद्धांत पध

3:09 सुधीर समाजशास्त्र की ही देन ने स्पष्ट कहा कि व्यापक रूप से राजनीति संगठित समाज अध्ययन और इसलिए समाजशास्त्र से उसको अलग नहीं किया जा सकता विज्ञान को समाज से अलग है शरीर वाले मस्तिष्क के समानता के अनुसार समाजशास्त्र और समाज मनोविज्ञान से परिचित हुए बिना एक अच्छी तरह की कल्पना करना व्यर्थ राजनीतिक समाजशास्त्र विषय के अंतर्गत जिन विचारों और समस्याओं का अध्ययन किया जाता उन्हें पूर्व में विभिन्न विषयों के अंतर्गत पृथक-पृथक

3:56 अलग-अलग अध्ययन किया जाता था व्यवसाय के रूप में राजनीतिक समाजशास्त्र का प्रचलन प्रथम विश्व युद्ध के बाद के अध्ययन हेतु अनेक है अपने आज हम राजनीति समाज शास्त्र के अंतर्गत रख सकते हैं तथा जो कि 18 वीं तथा 19 वीं शताब्दी में शुरू हुए थे है लेकिन जब तक लेकिन तब तक यह विषय विकसित नहीं हुआ था नीचे लाल के विद्वान अनुसार अरस्तु की पुस्तक पॉलिटिक्स को निश्चित रूप से राजनीति सब्सक्राइब प्रथम रचना कहा जा सकता मॉन्टेस्क्यू तथा नियुक्त सभी तथ्यों का विवेचन करते करते

4:42 रहे हैं जिन्हें आज हम राजनीतिक समाजशास्त्र विषय वस्तु मानते कर्मठ तथा पैरों के अध्ययनों में पधारें मिलता ने राजनीति का अध्ययन सामाजिक-आर्थिक परिवेश में करके राजनीतिक समाजशास्त्र की नियत कि नियुक्ति तथा इंग्लैंड में ग्राहक वाले जैसे नागरिकों ने राजनीतिक अभिजन तथा मध्य एवं विरुद्ध की प्रक्रियाओं के बारे में सब्सक्राइब झाल प्रतिपादन करके राजनीतिक समाजशास्त्र की बौद्धिक नींव रखी थी ए लिमिटेड तथा रूचि मैम जैसे विद्वानों ने राजनीतिक

5:30 समाजशास्त्र का उद्भव 19वीं शताब्दी के मध्य माना है जबकि आधुनिक समाज का उद्भव हो रहा था इस काल में एक और औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप यूरोप में परंपरागत सामाजिक व्यवस्था आधुनिक व्यवस्था में परिवर्तित हो रही थी वहीं दूसरी ओर राज्य और समाज में अंतर के स्पष्टीकरण ने भी इस विषय के विकास में सहायता प्रदान की फिर भी सच है कि राजनीतिक पार्टियों की सैद्धांतिक आधार बीसवीं शताब्दी के प्रारंभ में व्व्व बटन अधीन जैसी स्थिति और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब

6:15 स्कूल स्वतंत्र विषय का दर्जा प्रदान किया गया कि युधिष्ठिर विघ्न हिसार राजनीतिक समाचार संपादक सामान्य प्रकरण उन्नीस सौ उन्नीस सौ चालीस के दशक के प्रारंभिक वर्षों में हुआ जबकि चीन के अनुसार इसका सामान्य प्रचलन द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात की शुरुआत में इस बात को लेकर हो-हल्ला मचा की राजनीति को समाजशास्त्र विभाग बनाने का षडयंत्र किया जा रहा है कि उन्हें सब्सक्राइब ने राजनीति के अध्यक्ष अध्येताओं को सब्सक्राइब इसके बावजूद समाजशास्त्र और

7:03 राजनीति के मिलन की प्रक्रिया आगे बढ़ती गई अमेरिकी संस्थानों में 19 के बाद यूरोपीय विद्वानों के बढ़ते हुए प्रभाव से राजनीति का समाजशास्त्रीय अध्ययन करने की ओर बढ़ा और जर्मन विद्वान अपने साथ राजनीति के अध्यक्ष सब्सक्राइब भी ले गए और अमेरिकी विश्वविद्यालयों में इन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राजनीतिक समस्याओं का अध्ययन समाजशास्त्रीय सिद्धांत के संदर्भ में करना ही संपूर्ण वैज्ञानिकों ने आश्चर्य के साथ यह पाया कि उनके सब्सक्राइब उन विषयों और क्षेत्रों का चयन कर रहे हैं जिन्हें अब तक राजनीति शास्त्र

7:51 का विषय-क्षेत्र समझते थे इसके साथ ही व्यवहारवादी क्रांति हुई और राजनीति विज्ञान मनोविज्ञान समाजशास्त्र स्वास्थ्य तथा अर्थशास्त्र के अधिक निकट आने लगे इस अध्ययन के अंतरिक्ष यात्री गंभीर व इतना अधिक जोर दिया कि समाज और राजनीति विज्ञान का मधुर मिलन राजनीतिक समाजशास्त्र के जन्म का कारण बना है कि राजनीतिक समाजशास्त्र एक अंतरास्त्रीय इंटरडिसिप्लिनरी विषय है उसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय विषय है जिस प्रकार समाज मनोविज्ञान शिक्षा मनोविज्ञान कृषि अर्थशास्त्र आदि अंतरराष्ट्रीय

8:36 राजनीतिक तमाशा ना केवल एक नया विषय बल्कि एक ऐसा विषय है जो पूर्ण रूप से विकसित नहीं हुआ यह अभी भी विकास की अवस्था में भारत में अनेक विश्वविद्यालयों में पिछले एक दशक से इस विषय का अध्ययन अध्यापन और शोध है प्रारंभ हुआ राजनीतिक समाजशास्त्र की परिभाषा ईंधन 1956 में राज्य और समाज के आपसी संबंध पर वाद विवाद शुरू हुआ तथा 20वीं शताब्दी में द्वितीय विश्व युद्ध के सामाजिक विज्ञान में व्याकरण और विशिष्टीकरण की कि उदित उदय युद्ध प्रवीण तीर्थराज विज्ञान में

9:23 व्यवहारवादी क्रांति और अनुशासनात्मक उपागम के बढ़े हुए महत्व के परिणाम स्वरूप जर्मनी और अमेरिका के विद्वानों में राज्य विज्ञान के समाज उन्मुख अध्ययन की एक नूतन प्रवृत्ति शुरू हुई इस प्रवृत्ति के परिणाम स्वरूप राजनीतिक समस्याओं की समाजशास्त्री खोज एवं जांच की जाने लगी यह खोज एवं जांच पूर्ण रूप से स्थिति और ही पुख्ता नीति तथा ऐसे अभियानों को राजनीतिक समाजशास्त्र के नाम से पुकारा जाने लगा स्वतंत्र और स्वायत्त अनुशासन के रूप में राजनीतिक समाजशास्त्र का उद्भव और अध्ययन-अध्यापन एक घटना प्रथम विश्व युद्ध

10:11 19000 सब्सक्राइब टो जरूर लाइन रोज मैकिंजी लिफ्ट जैसे विद्वानों और चिंतकों की रचनाओं में राजनीतिक समाजशास्त्र में एक विशिष्ट अनुशासन के रूप में लोकप्रियता अर्जित की है लेकिन आज भी यह विषय अपनी बाल्यावस्था में ही इसकी व्यवस्था के कारण विभिन्न भारतीय विश्वविद्यालयों में राजनीतिक समाजशास्त्र के पाठ्यक्रम के अंतर्गत अध्ययन-अध्यापन नियुक्त टॉपिक्स को शामिल किया जाए और किन-किन क्षेत्रों की व्यक्ति इस बात को लेकर विद्वानों और लेखकों में गंभीर मतभेद

10:57 यहां तक कि इस विषय के नामकरण के बारे में आम सहमति नहीं बन पाई जाती है कि कतिपय विद्वान इसे राजनीतिक समाजशास्त्र पॉलीटिकल सोशियोलॉजी कहकर पुकारते हैं तो अन्य विद्वान इसे राजनीति का समाजशास्त्र यानि मिथिला राज्यक पॉलिटिक्स कहना पसंद करते हैं सही इसे राजनीतिक प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं का समाजशास्त्रीय अध्ययन लौजिकल चख पॉलीटिकल प्रोसेसेस एंड पॉलीटिकल सिस्टम्स कहकर पुकारती सब्सक्राइब और राजनीति के बीच संबंधों में घनिष्ठता का

11:43 विषय की व्याख्या समाजशास्त्री और रात्रि अपने-अपने ढंग से करते हैं जहां संघ के लिए सब्सक्राइब कर संबंधित समाज के अंदर यह मध्य में निरीक्षक के कारण एवं परिणाम तथा सामाजिक और राजनीतिक द्वंद्व से जो कि दिव्य शक्ति में परिवर्तन लाते हैं राजनीति के लिए यह समाजशास्त्र की जिसका संबंध संपूर्ण समाज व्यवस्था के बजाय राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाले अंतर्संबंध से यह अंतर्संबंध राजनीतिक व्यवस्था तथा समाज की दूसरी व्यवस्था के बीच में राजनीति

12:30 राजनीति तथ्यों की व्याख्या करने वाले सामाजिक परिवर्तन तक रहती है कि इस स्त्री समस्त संबंधित घटनाओं को देखता एक नया विषय होने के कारण राजनीतिक समाजशास्त्र की परिभाषा करना थोड़ा कठिन राजनीतिक तंत्र के अंतर्गत सामाजिक जीवन के राजनीतिक एवं सामाजिक पहलुओं के बीच होने वाली अंतर्क्रियाओं का विश्लेषण करते हैं अर्थात राजनीतिक प्रथा सामाजिक कार्यों के पारस्परिक संबंधों तथा एक-दूसरे पर प्रभाव एवं प्रति टन का है शुरू करते हैं चलिए जानते हैं भिन्न-भिन्न राजनीति विज्ञान वैज्ञानिकों ने राजनीतिक समाजशास्त्र की परिभाषा दी तथा

13:17 उनके अनुसार राजनीति सब्सक्राइब जिसका संबंध मुख्य रूप से राजनीति और समाज में अंतर्क्रिया का विश्लेषण करना है वह कहते हैं व्यापकतर में राजनीतिक सब्सक्राइब पहलुओं की शक्ति के सामाजिक आधार से संबंधित पधार स्थिरीकरण के प्रति मानव तथा संगठित राजनीति में इसके परिणामों का अध्ययन करता लिप्स के अनुसार राजनीतिक तंत्र को समाज एवं राजनीतिक व्यवस्था के प्रति सामाजिक संरचना एवं राजनीतिक संस्थाओं के पारस्परिक संबंधों के अध्यक्ष के रूप में

14:03 परिभाषित किया जा सकता है है वहीं ब्रेंट कहते हैं कि राजनीति विज्ञान राज्य से प्रारंभ होता है और इस बात की जांच करता है कि समाज को कैसे प्रभावित करता राजनीतिक समाजशास्त्र से प्रारंभ होता है और इस बात की जांच करता है कि वह राज्य से प्रभावित करता है जो अपनों के अनुसार राजनीतिक समाजशास्त्र में वृहत सामाजिक संरचना तथा समाज के राजनीतिक संस्थाओं के पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है वह इस लार कहते हैं राजनीतिक समाजशास्त्र एक अंतरराष्ट्रीय मिश्रण है जो कि सामाजिक तथा राजनीतिक दलों को अर्थात राष्ट्रीय द्वारा प्रस्तावित निर्गमन लुट नीति

14:49 द्वारा प्रस्तावित निर्णय से जोड़ने का प्रयास करता है यदि सब्सक्राइब आपस में जोड़ने वाले फूलों से फिर भी सब्सक्राइब नहीं समझा जाना चाहिए थे लेविस गुर्जर राजनीतिक तस्वीर व्यवस्था है जिसके संबंधित सामाजिक कार्यों तथा तात्कालिक समाज में सबस्क्राइब करते हो सकती वितरण परिवर्तन का सूचक पधार पधार से यह शब्द का अर्थ संख्या या समूह द्वारा

15:39 नियुक्त करने व उन्हें कार्यान्वित करने और मोटे तौर पर नियुक्त करने की क्षमता जो यदि आवश्यक हो तो अन्य व्यक्ति और समूह के विरोध में प्रयुक्त हो सकती है कि राजनीति विज्ञान के परंपरावादी विद्वान अपने अध्ययन विषय का संबद्ध राज्य और सरकार जैसी औपचारिक संस्थाओं से जुड़कर थे राजनीति विज्ञान में व्यवहारवादी क्रांति के परिणामस्वरूप राजनीति का प्रयोग व्यक्तियों के राजनीतिक व्यवहार तथा विभिन्न समूह में संघर्ष के समाधान के लिए जाने लगा विडियो किसी समाज में मूल्यों के प्रति वितरण से संबंधित

16:26 राशि राज्य सरकार की औपचारिक राजनीतिक संस्थाओं का चयन करना ही नहीं बल्कि युवा क्योंकि सभी प्रकार के सामाजिक संबंधों में वृद्धि होती है कि निष्कर्ष स्वरूप यह कहा जा सकता है कि राजनीतिक समाजशास्त्र उपागम सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यों को समान महत्व देने के कारण समाजशास्त्र राजनीतिशास्त्र दोनों से भी तथा इसलिए उन्हें ज्ञानी एक अलग सामाजिक विज्ञान केंद्र के अनुसार राजनीतिक तो समाचार एवं राजनीति शास्त्र के अंतर्गत की ऊपर माना जा सकता

17:11 राजनीतिक और सामाजिक रूप में करते हुए उन पर समाज के प्रभाव तथा समय पर ऋण के प्रभाव का अध्ययन करता पधारो और संयुक्त अध्ययन करने वाला विज्ञान राजनीति सब्सक्राइब के वितरण तथा शक्ति विभाजन का चयन समिति दिव्यांशु विषय भी कहते हैं उपयोग परिभाषाओं का विश्लेषण करने से राजनीतिक समाजशास्त्र की विशेषताएं इस प्रकार सरस्वती राजनीतिक समाजशास्त्र राजनीति विज्ञान नहीं क्योंकि इसमें मात्रा और

17:57 सरकार के औपचारिक संरचना का अध्ययन नहीं होता सब्सक्राइब नहीं क्योंकि इसमें मात्र सामाजिक संस्थाओं का चयन नहीं किया जाता है कि समाजशास्त्र राजनीति सब्सक्राइब किया जाता है और समाजशास्त्र में राजनीतिक समस्याओं को आर्थिक और सामाजिक परिवेश में घृत की विषय-वस्तु और कार्यपद्धति को सबस्क्राइब स्पष्ट हो जाता है कि राजनीति सब्सक्राइब दोनों के गुणों को अपने में समाहित करते हुए उन दोनों अधिक विकसित रूप रूप में प्रतिनिधित्व करता है एसएम लिप्स

18:46 इसी बात को स्पष्ट करते हुए लिखते समाज व्यवस्था स्थापित व समाजशास्त्र की केंद्रीय समिति तो राजनीतिक व्यवस्था स्थापित अथवा जनतंत्र की सामाजिक स्थिति सब्सक्राइब मुख्य अभियुक्त प्रक्रिया और राजनीतिक प्रक्रिया में ताण और इस प्रकार राजनीति की एक नई परिभाषा प्रस्तुत करते हैं अधिकतर को राजनीति और अर्थशास्त्र की एक मात्र मानना ही होगा क्योंकि राजनीतिक subscribe निश्चित रूप से राजनीतिक एवं सामाजिक श्रम को महत्व देता है इसलिए उग्र तथा लिए राजनीतिक प्रमुख

19:35 सचिव राजेश नामक अनुपम सामाजिक संरचना का वर्णन विश्लेषण तथा व्याख्या बताया है राजनीतिक समाजशास्त्र का विषय क्षेत्र क्रमांक-4 नया विषय के रूप में समाज शास्त्र विषय और फिर राजनीति विज्ञान और समाज के प्रति सामग्री ग्रह पृथ्वी क्षेत्र निर्धारित करना एक कठिन समस्या राजनीति और राजनीति विज्ञान का पर्यायवाची का खतरा और सब्सक्राइब पर्यायवाची बनने का खतरा तथा ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत विभिन्न

20:23 पहलुओं को शामिल किया समुदाय तथा राज्य में मतदान व्यवहार आर्थिक शक्ति का केंद्रीकरण तथा राजनीतिक निर्णय राजनीतिक आंदोलन तथा विचारधारा सब्सक्राइब की समस्या तथा नियुक्त संबंधित राजनीतिक व्यवहार से संबंधित अद्यतन धैर्य एवं मनोवैज्ञानिक संबंध की समस्या तथा सरकार एवं नौकरशाहों की नियुक्ति की विषय वस्तु के अंतर्गत जिन बच्चों को शामिल किया वह राजनीति तथा समाज राजनीति सामाजिक संरचनाओं की भूमिका राजनीतिक समुदाय तथा राजनीतिक संरचना जैसे कि पंचायतीराज के अधीन नियुक्त

21:12 राजनीतिक समीकरण राजनीति राजनीतिक व्यक्ति तथा राजनीतिक इतिहास सब्सक्राइब टो और मीठे ने राजनीतिक समाजशास्त्र के अंतर्गत संवैधानिक एवं अनौपचारिक राजनीतिक संस्थाओं अभिजनों संघर्ष के अभाव नियमन हित समूह एवं औपचारिक दबाव समूह मतदान व्यवहार राजनीतिक दलों जैसे विविध विषयों के अध्ययन पर बल दिया रियल तथा ग्वालियर के अनुसार गाने लिखना शास्त्र के अंतर्गत राज्य की संरचना व्यक्ति की प्रकृति एवं 10वें शक्ति पर एकाधिकार था राज्य द्वारा इसका प्रयोग तथा हु इकाइयों की प्रकृति एवं इनके राज्य से विवाद को सम्मिलित किया है

21:58 बाद में इन दोनों विद्वानों ने यानि ग्रीस और आलिया में यह सब विषयों को तीन शीर्षकों के अंतर्गत विभाजित किया है जो इस प्रकार है सहमति एवं औचित्य को सब्सक्राइब एंड लेजिटिमेसी और प्रतिनिधित्व एवं सहभागिता रिप्रेजेंटेशन एंड पार्टिसिपेशन तथा राशि परिवर्तन एवं और आर्थिक प्रगति के बीच संबंध रिलेशनशिप बिटवीन पॉलीटिकल चेंज एंड इकोनामिक डेवलपमेंट थ्रू तथा सेल्स मीट के अनुसार राजनीतिक समाजशास्त्र मुख्य सरकार एवं राजनीति को प्रभावित करने वाली आधारभूत दिशाओं से संबंधित है दाउद तथा यूज के अनुसार राजनीतिक समाजशास्त्र के

22:45 तात्विक संबंध के क्षेत्र में सामाजिक व्यवस्था की समस्या और राजनीतिक आज्ञाकारिता रिचार्ज जीबी रोड के अनुसार राजनीति समाज व्याख्यात्मक संघ राजनीति के सामाजिक राजनीतिक संरचना रात प्रक्रिया तथा प्रति समाज और संस्कृति पर राजनीति के प्रभाव को अपना अध्ययन विषय बना घृणित राजनीति के क्षेत्र में जिन प्रकरणों को शामिल कर सकते हैं वह है राजनीतिक संरचना यानी कि सामाजिक वर्ग जाति की राजनीति और हिप्स प्रमुख नौकरशाही आदि राजनीतिक प्रक्रिया यानि कि राजनीतिक सामाजिक कारण राजनीतिक धरती हित समूह करण करण और अभिनव

23:34 परिवर्तन राजनीतिक जीवन की चुनावी प्रक्रिया राजनीतिक शरण माता शरण माता शरण आदि राजनीतिक नेतृत्व के नेतृत्व राजनीतिक संस्कृति सब्सक्राइब राजनीति विकास की अवधारणा सामाजिक परिवर्तन आधुनिकीकरण और करण के साथ संबंध में राजनीति शास्त्र की विषय वस्तु के अंतर्गत विभिन्न प्रकार की राजनीतिक व्यवस्था और राजनीतिक प्रभाव एवं राजनीतिक आंदोलनों एवं विभिन्न राजनीतिक प्रक्रिया इत्यादि विविध प्रकार के विचारों को शामिल किया जा सकता राघवन आप राजनीति सब्सक्राइब

24:24 ए पॉलीटिकल सोशियोलॉजी राजनीतिक समाजशास्त्र यानि पॉलीटिकल सोशियोलॉजी और राजनीति का सब्सक्राइब के बारे में बहुत से प्रश्न किया कि इन दोनों में अंतर इन दोनों में अंतर नहीं तो फिर दोनों पिक्चर अलग-अलग मंत्रों का प्रयोग ना रानी का संकेत देता है कि सब्सक्राइब की तरह हैं जिसमें अनुश्रवण फ्रेमवर्क पधारे यह राजनीतिक समाजशास्त्र में समाजशास्त्र

25:10 राजनीति अधिक प्राथमिकता दी जाती राजनीति सब्सक्राइब द्विपक्षीय संबंधों को महत्व देता राजनीतिक समाजशास्त्र का विकास इस समाचार के राजनीतिक हालात पर बढ़ते हुए प्रभाव के कारण हुआ राजनीतिक समाजशास्त्र को एक अंतरराष्ट्रीय वर्णसंकर इंटरडिसिप्लिनरी हाइब्रिड और सब्सक्राइब मिशन कहा जा सकता राजनीतिक पार्टी अनुशासन राजनीति को उनके सामाजिक निर्धारण से संबंधित विचार करता है यदि सब्सक्राइब नीति को उनके सामाजिक धारकों

25:56 से संबंधित करता त्यौहार सब्सक्राइब अथवा सब्सक्राइब नीति-कुशल कहना उचित होगा नियुक्ति का समाचार अथवा राजनीतिक समाजशास्त्र के अंतर और के आपसी संबंधों को समझने अनिवार्य है इस संबंध में कुछ विद्वानों ने इन दोनों पैरों के अंतर को मिटाने का प्रयास किया कि युद्ध सऊदी अरब ने इन दोनों पैरों को समानार्थी ने व बताया कि उक्त और इन दोनों पैरों को समानार्थी नहीं मानते उनके अनुसार अग्नि तत्व राशि सब्सक्राइब नीति ऑब्स्कर्स के अतिरिक्त कुछ और भी बोध

26:44 कराता राजनीति का सब्सक्राइब राजनीति का सब्सक्रिप्शन उसी प्रकार जिस प्रकार धर्म का सब्सक्राइब कर लें अथवा सब्सक्रिप्शन राजनीति का सब्सक्राइब बोध होता इस पद में इस पर से यह उजागर होता है कि प्रधानाचार्य श्री प्रथमेश न का केंद्र समाजशास्त्रीय जबकि राजनीतिक समाजशास्त्र पद से इसकी व्यापकता का बोध

27:31 होता राजनीतिक समाजशास्त्र इंगित करता है कि मनुष्य मात्र राजनीतिक प्राणी ही नहीं वह एक सामाजिक प्राणी भी राजनीतिक कार्य ही नहीं करता उसे गैर राजनीतिक क्षेत्र में भी कार्यवाही करने के प्रति गैर राजनीतिक तत्व से संबंधित एक राजनीतिक व्यक्ति अपने सामाजिक अनुभव होता और मानव के सामाजिक अनुभव सांस्कृतिक द्वारा प्रभावित होते हैं कि सामाजिक बदलाव के फलस्वरूप उसकी सांस्कृतिक भिन्नता होती राजनीति का सब्सक्राइब के सामाजिक-सांस्कृतिक स्तर पर विचार करता

28:19 और राजनीति को सब्सक्राइब करें क्वालिटी की स्वतंत्रता का समर्थक पौराणिक पात्रों को समाजशास्त्र की संख्या बताने वाले विद्वानों के विचारों का विरोध करता है वह राजनीति द्वारा सामाजिक और आर्थिक संरचना अथवा व्यवहार पर होने वाले प्रभावों पर दलित जाति धर्म आदि राजनीतिक व्यवहार को किस प्रकार प्रभावित करते समय इस बात से बिल्कुल भिन्न है कि कैसे कोई व्यवस्था अपने राजनीतिक प्रक्रिया में वर्ग जाति धर्म को बदलती इसे पिघला सकता कि किस प्रकार सरकारी निर्णय एवं सरकारी संस्थाओं सामाजिक प्रक्रिया को प्रभावित कर बदलती

29:06 उदाहरण के लिए कि देश की निर्वाचन व्यवस्था समाज के विभिन्न इस तरह की पहचान ग्रुप आइडेंटिफिकेशन को प्रभावित नहीं करती बल्कि में राजनीति और राजनीतिक दलों की संख्या निर्धारित करती है थे कार्टून की राजनीति का समाजशास्त्र सोशलॉजी पॉलिटिक्स तथा राजनीतिक समाजशास्त्र पॉलीटिकल सोशियोलॉजी में अंतर स्थापित करता है उसके अनुसार राजनीतिक समाजशास्त्र ने संदेश अपने अंतर्गत समाजशास्त्र राजनीति का समावेश करता है फिर भी यह समाजशास्त्र राजनीति से भी इसकी अभिनेता इस बात में है कि राजनीतिक सब्सक्राइब को राजनीतिक समाजशास्त्र तक ही नहीं सीमित करता बल्कि

29:52 उससे कुछ अधिक राजनीतिक सब्सक्राइब में दोहरे संबंध स्थापित करता है यह दोनों सब्सक्राइब को ना केवल पाकिस्तान बल्कि एक ही निर्माणकर्ता राजनीति का सब्सक्राइब स्कूल प्रभुत्व राजनीति विज्ञान पर स्थापित होता राजनीति पर आधारित बना देता है जबकि राजनीतिक समाजशास्त्र राजनीति की स्वतंत्र सत्ता है और अस्तित्व बनाए रखते हुए समाज शास्त्र राजनीति विज्ञान के मध्य संबंध स्थापित करता है इस प्रकार राजनीतिक समाजशास्त्र दोनों शास्त्रों को जोड़ने का काम करता है जबकि राजनीतिक समाजशास्त्र पद से राजनीति और

30:39 समाज शास्त्र इन दोनों के संबंधों का बोध नहीं होता है राजनीतिक समाजशास्त्र की उत्पत्ति समाजशास्त्र राजनीतिशास्त्र की विभाजन रेखा के मिलन से होते हैं तार चोरी इस धारणा से अपनी असहमति प्रकट करता है कि राजनीतिक समाजशास्त्र समाजशास्त्र की एक शाखा तथा इस बात पर जोर देता है कि राजनीतिक समाजशास्त्र को अनुशासनात्मक इंटरडिसिप्लिनरी होना चाहिए तथा राजनीति को प्रमुखता देनी चाहिए का यह कथन है कि हम अनुशासनात्मक में रुचि रखते हैं तो यह निकाल देने चाहिए ताकि राजनीति सब्सक्राइब में काट उपखंड अथवा उपक्षेत्र उपरोक्त

31:27 विवेचन से रानी की समाधि पॉलीटिकल सोशियोलॉजी की विशेषताएं इस प्रकार की थीं समाचार राजनीति और सामाजिक परिवर्तनों से समान रूप से जुड़ा हुआ है और समान रूप से प्रभावित होता राजनीतिक समाजशास्त्र राजनीति विज्ञान नहीं क्योंकि इसमें राजनीति विज्ञान की तरह राज्य शासन का चयन समिति फिर भी यह राजनीति को परंपरागत दृष्टि से नहीं देखता राजनीति सबस्क्राइब भी न कि सब्सक्राइब और राजनीति में रूचि रखता है जहां राजनीति जहां राजनीति सब्सक्राइब

32:13 करें वह राजनीति सब्सक्राइब करें कि किस प्रकार की राजनीति का दौर अधिग्रहण किया है निखार स्वरूप हम कह सकते कि राजनीतिक समाजशास्त्र सोशलॉजी पॉलीटिक तथा राजनीतिक समाजशास्त्र पॉलीटिकल सोशियोलॉजी में अंतर करना बड़ा पेचीदा है राजनीतिक समाजशास्त्र की मान्यता है कि सामाजिक प्रक्रिया और राजनीतिक प्रक्रिया में अनुरूपता है इसी संदर्भ में राजनीतिक समाजशास्त्री राज्य और समाज के मध्य परंपरागत विवाद का समाधान करना चाहता है परंतु ऐसा होने पर भी राजनीतिक समाजशास्त्र को राजनीति का समाजशास्त्र शुक्ला जी पॉलिटिक्स नहीं कहा जा सकता है इसका कारण है कि राजनीति का

33:00 समाधि स्थल राजनीतिक परिवर्तनों की स्वतंत्र सत्ता एवं स्वच्छता को आविष्कार करता है जबकि राजनीतिक समाजशास्त्र राजनीति परिवर्तित हो या विचारों को मान्यता प्रदान करता है आज राजनीतिक समाजशास्त्र स्वरोजगार पॉलिटिक्स के बजाय राजनीतिक समाजशास्त्र पद्धति अधिक प्रचलित है कि राजनीतिक समाजशास्त्र के अभ्युदय के क्या कारण है पॉलीटिकल सोशियोलॉजी और सबमिट ओरिजिनल के और जिनके क्या कारण है राजनीति समाचार एक प्रगतिशील विषय रेडिकल डिसिप्लिन जो राजनीति विज्ञान और समाज को जोड़ने में काम करता है प्रतिनियुक्त क्योंकि

33:48 और सामाजिक परिवर्तन पर जोर देते हुए राजनीति में अनौपचारिक और दूसरे पहलुओं के अध्ययन पर आधारित विषयों को संबोधित करते हुए उन राजनीति और समाज एवं राजनीतिक संरचना और सामाजिक परिवेश में घनिष्ठता इस्पात स्थापित करता है आप सभी जानते हैं कि राजनीतिक समाजशास्त्र का अभ्युदय कहते हुए से क्या कारण राजनीति विज्ञान के परंपरागत उपायों के प्रति असंतोष के कारण राजनीति विज्ञान के अध्ययन की परंपरागत उपधारा राजनीतिक संस्थाओं अर्थात राज्य सरकार अध्ययन पर आधारित व संस्थागत सुधारों के प्रति

34:35 व्यक्ति वास्तविक राजनीतिक प्रक्रिया स्थिति युग निर्माण प्रक्रिया के बारे में कुछ पता नहीं चलता के प्रति असंतोष राजनीतिक समाजशास्त्र के युद्ध में योगदान किया राजनीतिक समाजशास्त्र व राजनीतिक संस्थाओं में वृद्धि होती है और व्यक्तियों के व्यवहार के माध्यम से ही राजनीतिक जीवन को समझा जा सकता व्यक्ति के व्यवहार के अध्ययन को सर्वोपरि महत्त्व देता अनुशासनात्मक अध्ययन की प्रवृति परंपरागत राज्य विज्ञान का अध्ययन अनंत नेता अर्थात अलगाव के रूप में किया जाता है और यह अपने आप को मात्र राजनीतिक क्रिया थरियांव

35:21 प्रक्रियाओं तक सीमित कर लेता है लेकिन राजनीतिक समाजशास्त्र की मान्यता यह है कि व्यक्ति के राजनीतिक जीवन को सामाजिक जीवन के संदर्भ में उचित रूप में समझा जा सकता और अध्ययन में अनुशासनात्मक दृष्टिकोण इंटरडिसिप्लिनरी अप्रोच को अपनाया जाना चाहिए का समाजशास्त्रीय अध्ययन करने की प्रवृति अनधिकृत लेखकों ने में का प्रमुख स्थान राजनीति विज्ञान के क्षेत्र को एक व्यापक रूप देने की कोशिश की जिसमें केवल राजा ही नहीं समाज को समर्पित किया जा सके कि युवा अर्थ लिया है जिसका प्रतिपादन किसने किया था इस अर्थ में ने उस क्षेत्र में उन सभी

36:09 क्रियाओं में लिप्त करने की चेष्टा की है है जो समाज के तत्वावधान में घटित होती रहती है व्यावहारिक उपायों का प्रचलन आधुनिक व्यवहारपरक उपागमों ने अपनी उत्तम अभिव्यक्ति व्यवहार के प्रति में जहां अनेक अमेरिकी लेखक उन्हें सामाजिक और राजनीतिक प्राणी के रूप में मनुष्य की वास्तविक संख्या से संबंधित तथ्यों का संग्रह और उनके परिश्रम पर बल दिया वादी दृष्टिकोण को लोकप्रिय बनाने का श्रेय संयुक्त राज्य अमेरिका की फोर्ड फाउंडेशन को मानव कल्याण के कार्य क्षेत्र में समाज विज्ञानियों को उपयोगी बनाने के लिए उसने

36:55 एक ऐसी समिति की स्थापना की जिसने राजनीतिक यथार्थ को समझने और उसकी व्याख्या करने के लिए अंतर्दृष्टि दृष्टिकोण का इस्तेमाल करने की सिफारिश की नियुक्त की नवीनता के लक्षण इसके 4 व्यूज क्षेत्रों में निहित सबसे पहला व्यवहारवादी नई किस्म की सामग्री का विश्लेषण करना चाहते हैं जिसकी ओर अभी तक ध्यान नहीं दिया गया व्यक्तिगत और सामूहिक व्यवहार पर ध्यान केंद्रित करके राजनीति का अध्ययन करना और यह देखना चाहते हैं कि राजनीतिक संस्थाओं में क्या हो रहा है नहीं और दूसरा बात यह है कि वे एक नई नीति का समर्थन करते हुए उच्च अनुसंधान और प्रशिक्षण सामग्री व अन्य क्षेत्रीय कार्य

37:41 संबंधी विषयों पर की को लागू करना चाहते हैं है तीसरा यह कि उन्होंने सामाजिक विज्ञान विषय का समाज विज्ञान और कुछ हद तक प्राकृतिक विज्ञानों से लिए गए व्याख्यात्मक प्रभु का आविष्कार किया है इन स्कूलों में अभिजन वर्ग गज भूमि का प्रभाव निर्णय-निर्माण नीति निर्माण व्यवसाय संरचनाओं की रचना की कार्यविधि राजनीतिक संस्कृति आदि शामिल है और सभी हमारे सब्सक्राइब है कि यह संकल्पनाएं समसामयिक व्यवहारपरक राजनीतिक सिद्धांत अवतार है और इस प्रकार के प्रश्नों से संबंधित है जो एक नए विषय राजनीतिक समाजशास्त्र की विषय-वस्तु का निर्माण करते रहें राशि एकत्रित सामग्री

38:27 के समानीकरण करने और प्रतिमाओं की रचना करने से संबंधित द्वारा वैज्ञानिक परिशुद्धता से राजनीतिक प्रक्रिया के बारे में व्यक्ति की नियुक्तियों के परिणामस्वरूप राजनीति विज्ञान का बहुत व्यापक विस्तार हो गया है और यह हमारे पास बनने की ओर उन्मुख राघवन ने राज्य और समाज में अंतर किया जाता था दोनों के घनिष्ठ संबंधों पर जोर दिया जाता राजनीतिक समस्याओं की मान्यता है कि अनेक राजनीतिक संस्थाओं और राजनीतिक संस्थाओं सामाजिक संस्थाओं के गुस्से की ही एक कड़ी है कि

39:13 कि अब आप जानेंगे राजनीतिक समाजशास्त्र की प्रकृति पॉलीटिकल सोशियोलॉजी नेचर राजनीतिक समाजशास्त्र राजनीति विज्ञान नहीं है कि राजनीति विज्ञान की तरह राज्य शासन ने कहा कि राजनीति भी समान रूप से जुड़ा घृत राजनीति में दिलचस्पी रखता लेकिन यह एक नए दृष्टिकोण से और में दृष्टिकोण से अलग करके घृणित राजनीति सबस्क्राइब तब पर आधारित सामाजिक प्रक्रिया राजनीतिक प्रक्रिया के बीच आकृति की एकरूपता और समरूपता विमान

39:59 सब्सक्राइब सामाजिक और राजनीतिक प्रक्रियाओं के प्रमुख नियुक्त करता है कि यह सामाजिक व्यवहार और राजनीतिक व्यवहार के मध्य पाई जाने वाली अंतर क्रियात्मकता का अध्ययन है यह हमें राजनीति को इसके सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ में देखने का परिचय प्रदान करता है कि राजनीतिक समाजशास्त्र के विश्लेषण की प्राथमिकता है सामाजिक संरचना और राजनीतिक सामाजिक व स्रोत केंद्र स्ट्रक्चर्स आफ सोसायटी एंड स्लोगन्स फॉर लिटिल सामाजिक संरचना दो प्रकार की होती है इधर वृहद और लघु इस सवाल पर कि क्या राजनीतिक

40:46 समाजशास्त्र वृहत और दोनों तरह के समुदायों का अध्ययन करता है दो तरह के पहले दृष्टिकोण के अनुसार समूह सुनिश्चित और स्थापित सामाजिक व्यवस्था के होते हैं दूसरे दृष्टिकोण के अनुसार वृहत्तर समूह जैसे वाली कंपनी अथवा अन्य गैर सरकारी गैर सरकारी संगठनों के अंदर की राजनीति में राजनीतिक दृष्टिकोण में विशद विवेचन प्रस्तुत करते हुए तथा लिए लिखते हैं कि राजनीतिक समाजशास्त्र मुख्य रूप से नुकसान कि सामाजिक संरचना जिसे राज्य के नाम से जाना जाता है कि वर्णन विश्लेषण शुभेच्छु व्याख्या से संबद्ध है इसके विपरित

41:32 मास्टर्स की डिग्री झुक ओपन क्लोज लूप राजनीति सभी तरह के संबंध में राजनीतिक अस्तित्व पाते उनके विचारों का निचोड़ इस प्रकार लगभग सभी प्रकार के संबंधों में वृद्धि होती है कॉलेज परिवार और क्लब में विशेष रूप से नीति के निर्देशक तत्व होते हैं जो कि एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति पर अपनी इच्छा या उनके प्रतिरोध के बावजूद झुक झुक झुक और की उपस्थिति सभी प्रकार के रणनीतिक संबंधों का एक अंतर्निहित रानी संपूर्ण समाज में व्याप्त होती है प्रत्येक सामाजिक समूह घ और यहां

42:22 तक कि गैर संगठित समुदायों और पर मां की राजनीति भी राजनीति होती और राजनीतिक समाजशास्त्र की विषय-वस्तु राजनीतिक समाजशास्त्र की मान्यता है कि प्रत्येक प्रकार का मानवीय संबंध राजनीतिक होता है राजनीति में अपराधी को राज्य की सीमा से बाहर निकालता और इस धारणा का प्रतिपादन करता है कि राजनीति केवल राज्य में ही नहीं बल्कि समाज के समग्र क्षेत्र में व्याप्त राजनीतिक परिपेक्ष्य में रणनीतिक एवं राजनीतिक गैर राजनीतिक और सामाजिक और इस प्रकार राजनीति के गैर राजनीतिक और सामाजिक प्रकृति के प्रकाश में राजनीतिक

43:09 सब्सक्राइब को पाटने का प्रयास करता है और राज्यों के बीच काफी समय काफी समय से चली आ रही थी सब्सक्राइब और राजनीतिक प्रक्रिया में स्थापित करने का प्रयास है कि राजनीतिक समाजशास्त्र शक्ति की दृश्य अदृश्य सत्ता थे विनर आफ पावर को अपना प्रमुख प्रतिपाद्य विषय मानता और यह स्वीकार नहीं करता की शक्ति का एकमात्र अधिकार इसके बदले यह मानता कि समाज की प्राथमिक और द्वितीयक समूह संबंधों में सब्सक्राइब राज समाजशास्त्री की दृष्टि व्यक्ति केवल आवश्यक रूप से सामाजिक

43:56 संबंध आत्मक और परिमाणात्मक अथवा आपने इसका अर्थ यह हुआ कि किसी e.t. संबंध में शक्तिधाराएं की तुलना में व्यक्ति महत्वपूर्ण राज सब्सक्राइब लीगल अथॉरिटी के लिए अपने सब्सक्राइब व्यक्ति अधिक से अधिक विस्तृत रूप से निर्मित व्यापक स्तर पर स्वीकृत नियमों से कठोर रूप से बनी होती राजनीतिक समाजशास्त्र आधुनिक समाज में ना केवल सीमित शक्ति के प्रयोग को असंभव मानता बल्कि यह भी स्वीकार करते हैं कि

44:41 आधुनिक समाज में पत्ता कुछ हाथों में सिमटी रहती हैं यह भी मान्यता है कि समाज में राज्य का बंटवारा ठीक उसी तरह होता जिस तरह की समाज में संसाधनों का बंटवारा होता और इस बंटवारे को व्यापक जनादेश के आधार पर प्राप्त सहमति और असहमति के माध्यम से अधिक महत्वपूर्ण और बनाया जाता स्थायित्व प्राप्त और चित्र पूर्ण शक्ति संबंधों के सामान्य प्रतिरूप की पृष्ठभूमि में राजनीतिक समाजशास्त्र कुछ नितांत आवश्यक प्रासंगिकता और समस्याओं पर विचार करता उदाहरण कि राजनीतिक समाजशास्त्र

45:26 नौकरशाह चयन नीतियों को लागू करने वाले प्रकार्यों को निष्पादित करने वाले राज्य के एक तरफ परिहृत्य यंत्र या तांत्रिक के रूप में नहीं करता बल्कि एक ऐसे महत्वपूर्ण सामाजिक समूह के रूप में करता है जिसकी आधुनिक समाज की बढ़ती हुई विषमताओं के संदर्भ में एक बहुत बड़ी प्रकार्यात्मक कर सकता है दूसरे शब्दों में राजनीति सब्सक्राइब को नियुक्ति के संदर्भ में नहीं इसके वृहत्तर हमारी समझ संदर्भ में समझना चाहिए घृतराष्ट्र इस बात की परीक्षा करने में रुचि रखता है कि राजनीतिक सामाजिक संरचनाओं को और सामाजिक संरचना राजनीति को

46:12 प्रभावित करती हैं आप जानेंगे राजनीति शास्त्र के अध्ययन के बारे में इस पद्धति के बारे में सब्सक्राइब और जी ठीक है है और राजनीतिशास्त्र समाजशास्त्र के अध्ययन के लिए अनेक परंपरावादी और आधुनिक उपायों का प्रयोग किया जाता है क्योंकि राजनीति समाज शास्त्र विषय और अधिक परिष्कृत उपाय का प्रयोग किया जाता है जिनमें से यह इस प्रकार घृत पद्धति सब्सक्राइब के लिए पद्धति पद्धति रचनात्मक कार्य प्रकार्यात्मक पद्धति और व्यवहारवादी उपागम का इस्तेमाल किया जाता है पद्धति में राजनीति के

46:58 अभियुक्त सब्सक्राइब अनुभवी पद्धति सेफेरियल पद्धति का प्रयोग विधि तथा द्वारा किया गया इसे वैज्ञानिक पद्धति कहा जाता है कि एक पद्धति इस पद्धति के अंतर्गत के पर्यवेक्षण एवं अवलोकन के आधार पर प्राप्त हु एवं आंकड़ों का विश्लेषण किया जाता है इस पद्धति की आलोचना का मूल कारण यह है कि तथ्यों की खोज करने के कारण इसका प्रयोग करता राजनीतिक मूल्यों एवं आदर्शों की उपेक्षा कर देता है राजनीतिक समाजशास्त्र के अध्ययन के उपायों में पद्धति प्रणाली

47:43 सिस्टम मेथड भी शामिल है आज पद्धति प्रणाली द्वारा भी राजनीतिक समाजशास्त्र का चयन होने लगा है राजनीतिक विज्ञान में पद्धति प्रणाली का प्रयोग आमण इस्टर्न आदि विद्वानों ने किया है पद्धति पद्धति प्रणाली की धारणा को समाजशास्त्रियों ने विकसित किया था समाजशास्त्री तथा राजनीतिशास्त्रियों में इस तथ्य का मत है कि है कि राजनीतिक पद्धति संपूर्ण सामाजिक पद्धति का एक अंश है पद्धति सिद्धांत के आधारभूत धारणा सिद्ध अमेरिकी राष्ट्र अमेरिकी समाज शास्त्रीय तमिल कोट्स की पुस्तक पर सिस्टम मिलती है जिसमें उसने संपूर्ण समाज को संपूर्ण समाज को एक पद्धति के रूप में हुआ था तथा समाज के भीतर के विविध संस्थाओं संरचनाओं तथा

48:30 प्रक्रियाओं की प्रक्रियाओं को विभिन्न पद्धतियों में विभाजित करके समझने की कोशिश की आधुनिक राजनीति शास्त्री राजनीतिक पद्धति को सामाजिक पद्धति का अभिन्न अंग मानते तथा राज्य को व्यवस्थित रूप में देखना चाहते हैं नीति के अंतर्गत विभिन्न उप अधीक्षक तरह की भूमिकाएं अदा करते हैं आप चरित्र भूमिकाओं के अलावा राजनीतिक कार्यों का संपादन भी इसके अंतर्गत होता रहता संघ की प्रणाली द्वारा संपूर्ण राज्य व्यवस्था उसके निवेश तथा निर्धारित प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता व्यवस्था अथवा पद्धति के रूप में रणनीतिक अध्ययन करके इस सिद्धांत के

49:15 समर्थकों ने राजनीति विज्ञान को परंपरागत कानूनी संस्थात्मक एवं आर्थिक प्रतिबंधों से मुक्त कर दिया पद्धति यह बहुत व्यापक है और उसमें सभी प्रकार के ओपचारिक तथा अनौपचारिक प्रक्रिया अंतर्क्रिया र कार्यसंरचना त्यौहार आदि आ जाते हैं आप जानेंगे राजनीतिक समाजशास्त्र पॉलीटिकल सोशियोलॉजी के अध्ययन की सब्सक्राइब पद्धति के बारे में पधारने की भी चर्चा की जाती सिद्धांत व उपायों का प्रतिपादन के लिए जेम्स को

50:00 सब्सक्राइब करें और इसके माध्यम से बातचीत की जा सकती कि राजनीतिक व्यवस्था में राजनीतिक संगठन द्वारा व्यवस्था की संरचना सब्सक्राइब नहीं किया जाता है कि यह प्रक्रिया के विरुद्ध संरचनाओं पर जोर नहीं दिया जाता है क्वेश्चन गुमराह करने वाला हो सकता है संरचनात्मक प्रकार्यवाद जी उपागम को तुलनात्मक सरकार के अध्ययन के लिए व्यापक रूप से अपनाया गया है क्योंकि यह दृष्टिकोण एक-दूसरे से मेल खाने वाली विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए प्रतिमान प्रस्तुतकर्ता राजनीतिक समाजशास्त्र के अध्यक्ष नियुक्त

50:46 किया है नियुक्ति ड्रॉप अध्ययन से अधिक जुड़ा हुआ कि अभियुक्त मयनअधि सकता तभी तो यह माना जाता है कि अनूप अध्ययन संचार सिद्धांत प्रतिपादित सिद्धांत और व्यवहार विक्रांत के ऊपर क्रॉस एक व्यक्ति सब्सक्राइब अंदोलन कहा जा सकता है अमेरिकी राजनीति विज्ञान की विचारधारा के साथ जोड़कर तरफ हुए दो तु MP3 जिप अध्यक्ष किरण के संबंध में वैज्ञानिक सिद्धांत तथा सत्यापन योग्य प्रक्रिया के प्रयोग पर बल देता है

51:33 चलिए जानते हैं कि व्यवहारवाद व्यवहार से हमारा तात्पर्य क्या है इसका अर्थ क्या है उसका इस प्रकार किया है वर्णन किया व्यवहारवाद वर्णन करते हुए कहा है कि वह राजनीति विज्ञान के अंतर्गत विरुद्ध आंदोलन है जिसे राजनीतिशास्त्री विशेषकर अमेरिकी संबंध है जो परंपरागत राजनीति विज्ञान की उपलब्धि सब्सक्राइब और विवरणात्मक संस्थात्मक से बहुत अधिक संतुष्ट और यह विश्वास है कि कुछ अन्य पद्धति और उपागम तो मौजूद है अथवा उनका विकास किया जा सकता की सहायता

52:22 से राजनीति विज्ञान में अनुभव था घटनाओं का और कुछ दिमाग तक व्यवस्थित सिद्धांतों का विकास किया जा सके जिन का परीक्षण राजनीतिक घटनाओं का आदि अधिक निकट से और अधिक प्रत्यक्ष और कठोरता से नियंत्रित परीक्षणों के द्वारा किया जा सके उसने आगे चलकर यह भी लिखा कि यह एक ऐसा आंदोलन है जिसका उद्देश्य राजनीतिक अध्ययन को आधुनिक मनोविज्ञान समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र में विकसित सिद्धांतों पद्धतियों खोजों और दृष्टिकोणों के निकट संपर्क में लाना है और ऐसे एक ऐसा प्रयत्न है जो राजनीति विज्ञान में अनुक्रमिक तंत्रों को अधिक

53:09 वैज्ञानिक तक प्रदान करता है वीरवार से अभिप्राय है कि अनुसंधान क्रमबद्ध हो तथा कि अनुभवात्मक पिता तरीकों का प्रयोग किया जाए किर्कपैट्रिक अनुसार व्यवहार चार तत्वों का मिश्रण है पहला है इसलिए की कई संस्थाओं व्यक्तियों तथा समूह के अध्यक्ष दूसरा सामाजिक विज्ञान की एकता पर बल तथा अंत अनुशासनात्मक अध्ययन-अध्याय उनकी की तथा परिमाणात्मक प्रबल और राजनीति विज्ञान को एक व्यवस्थित सिद्धांत के रूप में परिभाषित करने की

53:54 मानव व्यवहार है जिसका प्रत्येक व्यक्ति द्वारा पधार सत्यापन किया जा सकता है मेघनाद के अध्ययन से राजनीति की संरचनाओं प्रक्रियाओं इत्यादि के बारे में वैज्ञानिक सोच विकसित करना चाहता था व्यवहार एक ऐसा है जिसका लक्ष्य विशेष रिलेशन की नई इकाइयों नई पद्धतियों नई तकनीक को नए तथ्यों और एक व्यवस्थित सिद्धांत के विकास को प्राप्त करना है व्यवहारवाद की आधारभूत मान्यता यह है कि प्राकृतिक विज्ञानों और समाज विज्ञानों के बीच एक गुणात्मक निरंतरता है व्यावहारिक उपायों का विकास इवोल्यूशन कॉलेज की

54:42 पुस्तक ह्यूमन नेचर इन पॉलिटिक्स तथा की पुस्तक में प्रकाशित हुई पुस्तकों का प्रकाशन राजनीति विज्ञान के अध्ययन प्रणाली में परिवर्तन का प्रतीक था अब राजनीति की औपचारिक प्रक्रिया पर अधिक और राज्य की राजनीतिक संस्थाओं पर दिया जाने लगा राजनीति विज्ञान के अध्ययन में स्वास्थ्य विज्ञान सामाजिक विज्ञान के आखिरी कर प्रयोग किया जाने लगा है का व्यवहार भ्रम द्वितीय विश्व युद्ध की जटिल परिस्थितियों की उपज है द्वितीय विश्वयुद्ध के समय अनेक यूरोपीय विद्वानों को भाग पर अमेरिका जाना पड़ा युद्धकाल इन परिस्थितियों ने इन्हें

55:28 अनुभव तथा मूल्य निर्धारित बना दिया तथा इन्होंने व्यवहारवादी आंदोलन को जन्म दिया व्यवहार आधार अनुभव विज्ञान उस अनुभव का इतिहास काफी पुराना है इसका आधुनिक जनरेशन लॉक माना जाता है वर्तमान में अनुभव व्यवहारवाद की पृष्ठभूमि के रूप में उभरा है और समाजशास्त्री मनोवैज्ञानिकों के प्रभाव से उसका व्यवहार की ओर उन्मुख अमेरिका में नियुक्त की थी उनकी पुस्तक प्रकाशित हुई अनुभव की प्रेरणा का स्रोत बन गई नीति समूह ने राज्य को सबस्क्राइब विज्ञान

56:15 दर्शन साहित्य की अर्थशास्त्र एवं मानव शास्त्र जैसे विज्ञानों के निकट लाने का हर संभव प्रयत्न किया उसके बाद स्ट्रॉस की पुस्तक क्वांटिटी में सब्सक्राइब इन पुस्तकों में शक्ति संबंधों को राजनीतिक समाजशास्त्र के अध्ययन-अध्यापन शिकागो विश्वविद्यालय की मूर्ति सब्सक्राइब अभिनव राजनीति विज्ञान के संस्थापक कहा जा सकता मेघवाल को विशेष रूप से नए राजनीति विज्ञान का जनक कहा जा सकता है जिसे दूसरे शब्दों में व्यवहारवाद के संस्थापकों में

57:01 अग्रणी माना जा सकता घृणा से सुप्रसिद्ध शिकागो संप्रदाय व्यवहारवाद अमेरिका में विड्रॉल धेरै और फिर उस इत्यादि को व्यवहारवादी राजपूत समाज शास्त्री के नाम से जाना जाता है मेघनाद के प्रमुख आयाम पर ले बिहेविरिज्म परंपरागत राजनीति शास्त्र की राज्य संबंधी कानूनों एवं नियमों को स्वीकार नहीं करता अपने अनुभव एवं सैद्धांतिक विश्लेषण की व्यक्ति और समूह के व्यवहार को मानता घ्र अनुसार यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि उसे कैसा होना चाहिए तो हो सकता है लेकिन

57:46 व्यवहार में अंतर करते अध्ययन करते समय मन अध्ययन राजनीतिक संस्थाओं के औपचारिक ढांचे के अध्ययन से अधिक महत्वपूर्ण नियुक्त तथा बालों का कोई महत्व नहीं है के अनुसार का लक्ष्य की समस्त घटनाओं को मानव चिर परिचित आधार के रूप में देखना है व्यवस्थित वैज्ञानिक सिद्धांत तथा उसका सत्यापन करना चाहते वे मानते हैं कि राजनीतिक शोध संबद्ध होने के साथ-साथ आर्थिक पृष्ठभूमि पर आधारित तथा खड़ा करने के लिए विश्वसनीय हो उपलब्ध

58:33 समस्त वैज्ञानिक शोधों का प्रयोग करना चाहिए ताकि राज्य विज्ञान विज्ञान बना सके एडिसन ने व्यवहारवादी के प्रमुख उद्देश्य आधार तथा नेताओं को इस प्रकार प्रस्तुत किया नियमित यौन व्यवहार के सामान्य सिद्धांतों को खोजा जा सकता नियुक्त काफी हद तक समानता पाई जाती है यदि समान सिद्धांतों के लिए संभावना व्यक्त की जा सकती संघ के मानते हैं कि मानवीय व्यवहार के संबंध में उपलब्ध ज्ञान को अनुभव को के आधार पर सत्यापित किया जा सकता है स्वयं के अवलोकन

59:18 के आधार पर सामान्य करण परीक्षण होना चाहिए विधि का प्रयोग या व्यवहार जो है वह उपलब्ध आंकड़ों तथा सामग्री की व्यवस्था के लिए सही तकनीक के प्रयोग पर बल देते हैं उनके अनुसार व्यवहार का अध्ययन करने तथा परिणामों को अंकित करने के लिए परिषद परिवार की क्वांटिटी उपलब्ध सामग्री तथा तथ्यों में स्वच्छता एवं स्थिरता लाने के लिए परिणत किया जाना चाहिए इससे आधार-सामग्री में इस प्रस्ताव के अनुसार तथा तथ्यात्मक व्यक्ति में अंतर तथ्य को पृथक रखा जाना चाहिए

1:00:05 नियुक्ति तक मूल्य को दृष्टि में रखा जा सकता है जिस सीमा तक वे राजनीतिक व्यवहार करते हैं के अनुसंधानकर्ता के लिए स्वयं के व्यक्तिगत मूल्यों से दूर रहकर ही किसी समस्या का अध्यन करना है समिति क्रमबद्धता त्यौहार आदि कार्यक्रम अधूरा चाहिए प्रत्येक कार्य को सिद्धांत संबद्ध किया जाना चाहिए धुंध सिद्धांत और एक दूसरे से अलग नहीं रह सकते नहीं किए जा सकते हैं है विशुद्ध विज्ञान प्योर साइंस व्यवहारवादी विशुद्ध विज्ञान की दृष्टि से विचार करते हैं वे इस बात पर सहमत हैं कि

1:00:51 इस सिद्धांत की ओर से वास्तविक जीवन की समस्याओं को समझा जा सकता सिद्धांत और व्यवहार में उसका प्रयोग वैज्ञानिक धर्म राजनीति व्यवहार का बोध व्यक्ति महत्वपूर्ण त्यौहार आदि मानव व्यवहार का अध्ययन अनुसंधान अध्ययन नहीं किया जा सकता मानव व्यवहार नियुक्ति और इसी कारण समाज विज्ञान के विभिन्न विषयों के निकट प्रकार व्यवहारवादी जहां वैज्ञानिक तकनीकों के प्रयोग पर बल देते हैं वहीं दूसरी ओर समाज विज्ञान की वैज्ञानिकता एवं उनके संबंधों पर भी व्यवहार की

1:01:37 नियुक्ति पर कई विद्वानों ने प्रकाश डाला घ्र आह तथा विभिन्न व्यवहारवाद की सीमाओं की चर्चा की है व्यवहारवाद अपने आप को निरपेक्ष मानता है लेकिन उसके द्वारा विषय का अध्ययन किया जाता है व उन मूल्यों और विचारधाराओं से प्रभावित होता है व्यवहारवादी वैज्ञानिक और तकनीकी पर ज्यादा बल देते हैं और ऐतिहासिक अनुभव की उपेक्षा कर देते नीति निर्माण एवं निर्णय प्रक्रिया के मामलों में राजनीतिक नियुक्तियों का उपयोग क्योंकि निर्माण अनेक तथ्य महत्वपूर्ण होते हैं ठीक ही कहा कि व्यावहारिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण प्राथमिक मध्य एवं इतिहास के

1:02:25 विज्ञानियों द्वारा संशोधित किया जाना चाहिए व्यवहार की आलोचना की है कि यह त्योहार परंपरागत कि जिस प्रकार खिल्ली उड़ाई उसी प्रकार व्यवहार की भी आलोचना की गई प्रमुख इस प्रकार हैं एकता एक खास तौर पर अपनी विशेषताए लिए होती है और उन में समानता है ढूंढो अत्यंत कठिन है राजनीतिक घटनाओं तथा समस्याओं के आंतरिक तत्वों का साक्षात्कार एवं प्रश्नावलियों की प्रविधियों से पता नहीं लगाया जा सकता है अर्थात राजनीति के अंतः स्थल का सत्यापन असंभव है मुझे निरपेक्षता असंभव अनुसंधानकर्ता के व्यक्तिगत मूल्य कहीं ना कहीं उसकी निष्कर्षों को प्रभावित

1:03:11 करते ही हैं जब कोई शोधकर्ता अपने क्रोध का प्रारंभ करना चाहता है तो शोध संबंधी विषयों के चुनाव में वह अपने मूल्य ही तो तथा जिज्ञासाओं से प्रभावित रहता है राजनीति विज्ञान के तथ्य भौतिक विज्ञानों की तुलना में लचीले जटिल एवं परिवर्तित है अर्थात राजनीति विज्ञान को भौतिक विज्ञान की भांति विज्ञान बनाने के प्रयास निरर्थक व्यवहारवाद मानव व्यवहार विज्ञान प्रस्तुत नहीं कर पा अभी तक किसी समन्वय समन्वय आध्यात्मिक अनुभव सिद्धांत पर निर्णय नहीं कर पा रहा व्यक्ति द्वारा निरूपित सिद्धांत एवं प्रस्थापनाएं लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के प्रति पूर्ण लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार सामान्य

1:03:58 जनता की व्यक्ति में विश्वास जिसके कारण राजनीतिक प्रक्रिया में भागीदारी कर समान अधिकार प्राप्त मंत्रियों के अध्ययनों के अनुसार व्यक्ति संगठन क्षमता आदि का वितरण न होने के कारण संभ्रांत वर्ग में तंत्रीय शासन होना अनिवार्य तौर पर नियुक्त द्वारा अभिशप्त उद्देश्यों को प्राप्त करने में सर्वथा सफल रहे थे परंपरा सब्सक्राइब अंतर्दृष्टियों का समायोजन करने वैकल्पिक प्रतिमाओं को खोज निकालने एक ऐसी तकनीक कि भाषाओं का विकास में

1:04:44 जिसमें समुद्र की सामग्री पूर्ण व्याख्या की जा सके और ऐसे स्वभाव संबद्ध परिचित सिद्धांत का निरूपण करने में जो नीति-निर्माता के लिए उसके काम में सहायक हो व्यवहार की व्याख्या के अनुसार संपूर्ण समाज में रचनात्मक एवं कलात्मक प्रारंभिक शिक्षक संघ राजनीति विज्ञान को कई दृष्टियों से प्रभावित व्यक्ति राजनीति के दृष्टिकोण को व्यापक बनाया तथा उन्हें अनुशासनात्मक दृष्टिकोण प्रदान किया रविवार को तथा आधुनिकता की इस

1:05:30 प्रकार की उसका संबंध है कि क्या होना चाहिए रणनीतिक अनुसंधान में तथ्य को जानना अधिक महत्वपूर्ण में अपने वैज्ञानिक अनुभव के माध्यम से कि नई प्रविधियां एवं मापन के नए साधन विकसित किए संक्षेप में व्यवहारवाद के प्रमुख उपहार वैज्ञानिक विधियां व्यवहारवादी दृष्टिकोण एवं निर्देश कुमार राजनीति शास्त्र द्वारा आत्मसात कर लिए गए और नीतिशास्त्र के निर्माण में युवाओं की भूमिका उत्तर व्यवहारवाद post-liberalisation के प्रतिक्रिया स्वरूप एक जोरदार उत्तर व्यवहारवाद कहा जाता है

1:06:15 1968 के दशक से पहले के द्वारा व्यवहारवादी क्रांति के प्रमुख प्रतिपाद्य में थाइरॉइड शक्तिशाली निर्माण किया गया जिन्होंने अब उत्तर व्यवहारवाद का रूप ले लिया था यह मानते हैं कि उनके द्वारा नगर और निरर्थक पर बहुत अधिक समय खर्च कर दिया गया था कि वैचारिक संरचना प्रतिमान सिद्धांतों और आदर्शों सिद्धांतों के निर्माण में लगे हुए थे उनकी अपने पास ट्रैक्टर दुनिया को तीव्र सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक संस्था संकट का मुकाबला करना पड़ रहा था और वे उनके संबंध में सर्वथा अनजान थे जबकि वे

1:07:00 प्रसिद्ध विश्वविद्यालय के शानदार प्रांगणों में अपने वातनुकूलित पुस्तकालयों में बैठे स्थिरता स्वामित्व संतुलन प्रतिमानों संरक्षण आदि की समस्याओं में उलझे हुए थे और विशेषीकृत तकनीकों के आधार पर कभी-कभी क्षेत्र अनुसंधान भी कर लेते थे बाहर का सामाजिक विघटन और टूट-फूट की स्थितियों में से गुजरता हुआ दिखाई दे रहा था आणविक अस्त्रों का आतंक पर अमेरिका में बढ़ते हुए आंतरिक मतभेद जिनके कारण गृह युद्ध और तानाशाही शासन की संभावनाएं भी सूची जा रही थी ऐसी स्थिति जिनके संबंध में व्यवहारवादी राजनीतिशास्त्रियों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी उत्तर व्यवहारवाद यू का प्रश्न था कि उस अनुसंधान की उपयोगिता

1:07:48 क्या थी जिसमें समाज के इन तीव्र रोगों व समस्याओं पर ध्यान भी नहीं दिया था डेविड ने उत्तर व्यवहारवाद के दो प्रमुख दायित्व संज्ञान ले और नित्य कर्म या किसी समय व्यवहार की विशेषताओं को और आंदोलन की धार जिला का नाम दिया था अब स्कूलों का उल्लेख इस प्रकार किया प्रासंगिकता सिद्धार्थ रिलीफ एड करता प्रति पूर्व छात्र अध्ययन विषय के अध्ययन की प्रवृति पर अधिक

1:08:34 बल दिया था लेकिन उत्तर व्यवहारवाद ने इस तथ्य को स्वीकार किया कि युवराज वस्तु को अधिक उपयोगी माना चाहिए हमें संविधान के लिए परिष्कृत उपकरणों का विकास करना उपयोगी परंतु उससे भी अधिक महत्वपूर्ण बात अनुसंधान के लिए परंतु उससे भी अधिक महत्वपूर्ण उद्देश्य है कि युवाओं को प्रयोग में लाया जा रहा था कि आप सब्सक्राइब बटन

1:09:22 वीरव्रत सामाजिक परिवर्तन पर समकालीन राजनीति विज्ञान प्रमुख आगरा परीक्षण सफल होना चाहिए जैसा व्यवहार तथा प्रमुख सामाजिक परिवर्तन पर केंद्रित होना चाहिए समस्याओं की नियुक्तियां सकता है चाणोद अमृत व्यग्र धारणाओं और विकल्पों के साथ जुड़ गया था उत्तम व्यवहार समाज की समस्याओं से आंखें नहीं मूंद लेना चाहते हैं कि महत्वपूर्ण भूमिका शहरवासियों ने मूल्यों के महत्व को स्वीकार करते हुए और निर्भीकता दृष्टिकोण पर इतना अधिक जोर दिया था कि

1:10:07 युवक को सर्वथा उपयुक्त निर्णय लिया गया इस स्थिति को प्रयोजनहीन बना दिया इसके विपरीत उत्तर अभियुक्त भूमिका को स्वीकार किया इस बात पर बल दिया कि उनको प्रयोजनों के लिए प्रयोग में लाना तो मूल्य को उनकी स्थिति प्रदान करनी होगी और बुद्धिजीवियों की भूमिका उत्तर व्यवहारवाद यू ने राजनीतिशास्त्रियों को यह भी याद दिलाना चाहा कि बुद्धिजीवी होने के नाते समाज में उनकी अपनी भूमिका तय बड़े कामों को पूरा करने की जिम्मेदारी उनके ऊपर है सभ्यता के मानवीय मूल्यों में संरक्षण में अधिक से अधिक प्रयत्नशील होना उनका प्रमुख उत्तरदायित्व था वस्तुनिष्ठ

1:10:55 होने के नाते और ऐसी सुविधाओं के नाम पर जिन्हें बहुत अधिक समय खर्च होता है राजनीतिशास्त्री यदि अपने को सामाजिक समस्याओं से अलग रखेंगे तो वे केवल ऐसे तकनीक वृद्ध और यंत्र वादी बंडर रहे जाएंगे इस जो समाज के साथ खिलवाड़ में लगे हुए कर मिनिस्टर विज्ञान उत्तर व्यवहारवाद अकर्मण्यता पर बल देते हैं और उनका कथन है कि राजनीतिक विषयों के अध्ययनकर्ता को समाज के पुननिर्माण कार्य में रत होना चाहिए ज्ञान का क्रियात्मक होना आवश्यक है इस तरह के शब्दों में जाने का अर्थ में कार्य करने का उत्तरदायित्व अपने हाथों में लेना और कार्यरत होने का अर्थ है समाज के पुनर्निर्माण में अपने को लगा देना

1:11:41 उत्तर व्यवहारवाद यू की मांग है कि चिंतन उन्मुख ज्ञान के स्थान पर कृषि ज्ञान होना चाहिए और उनका आग्रह है कि राजनीति विज्ञान का समस्त अनुसंधान प्रतिबद्धता और क्रियाशीलता की भावनाओं से प्रेरित और प्रभावित होना चाहिए उत्तर रॉक ओं का विचार जाने के बाद निष्कर्ष यह है कि सन उन्नीस सौ सत्तर के दशक में व्यवहारवादी तथा उत्तर व्यवहारवाद देशों के बीच पारस्परिक विरोध की स्थिति समाप्त हो गई है व्यवहारवाद इस बात को स्वीकार कर लिया गया है कि राजनीति विज्ञान को अधिकाधिक मात्रा में अनुभवी अध्ययन और शोध परिणाम देने वाली पद्धतियों को अपनाते हुए इसे सही अर्थों में विज्ञान की स्थिति प्रदान करने की कोशिश की जानी चाहिए

1:12:26 है लेकिन साथ ही यह स्वीकार कर लिया गया कि राजनीति का ज्ञान वास्तविक राजनीतिक जीवन की समस्याओं और जटिलताओं से अलग रहकर नहीं किया जा सकता तथा समस्त राजनीतिक अध्ययन में मूल्य को केंद्रीय स्थिति प्राप्त होनी चाहिए पशुता आजकल व्यवहारवादी और उत्तर व्यवहारवाद की प्रविष्टियों के बीच समन्वय के प्रयत्नों को सर्वाधिक प्राथमिकता दी जा रही है है अब आप जानेंगे कि राजनीति के अध्ययन का समाजशास्त्रीय उपागम क्या है राजनीति के अध्ययन का समाजशास्त्रीय उपागम बहुत अधिक लोकप्रिय हो गया है मैं क्रायडन और रावण जैसे लेखकों ने इस तथ्य को मान्यता प्रदान की है कि समाज विज्ञान के क्षेत्र में पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध है जिसे राजनीतिक प्रभाव के अध्ययन का

1:13:13 निर्धारण किया जा सकता उन्होंने ऑफिसर रेड्युस अनधिकृत प्रति वैज्ञानिकों के इस विचार को स्वीकार कर लिया कि एक सामाजिक संस्था अधिक पर राजनीति कम अर्थात व्यक्ति को समझने और व्याख्या करने के लिए हमारी अंदर का संरक्षण आवश्यक सामग्री समग्रता ही नियुक्त किया और अपनी भूमिका निभा रहा है इसलिए इस पर चढकर यह है कि राजनीति संगठित समाज का अभियान है और इसलिए समाजशास्त्र से इसको अलग नहीं किया जा सकता समाजशास्त्र अपने

1:14:00 पति के प्रारंभिक काल से ही राजनीतिक प्रक्रिया एवं संस्थाओं का चयन कर रहा है आधुनिक काल में अनेक राजनीतिक राष्ट्रीय सिद्धांतों का प्रयोग किया जो राजनीतिक व्यवहार एवं घटनाओं पर प्रकाश डालते हुए विदित है कि कोई भी राजनीतिक कार्य और संस्थाओं सामाजिक व्यवस्था नहीं होती राजनीतिक व्यवस्था में भाग लेने वालों की सामाजिक पृष्ठभूमि और लिए समुचित महत्व होता राजनीति में होने वाली प्रक्रियाओं का अध्ययन व्यापक सामाजिक संदर्भ में ही उसी प्रकार से हो सकता राजनीति तथा सब्सक्राइब जरूर सब्सक्राइब समुदायों विचारों संगठन

1:14:48 इत्यादि का क्रमबद्ध ज्ञान जीवन के तमाम पहलुओं का श्रवण करता है सामाजिक जीवन के पहलुओं में आर्थिक धार्मिक धार्मिक सांस्कृतिक पहलू शामिल छात्रों के मूल तत्व चयनकर्ता 19वीं शताब्दी में समाजशास्त्र के जनक ने समाज के विभिन्न हिस्सों में बांटने की बजाय केवल एक ही सब्सक्राइब रखने का सुझाव दिया कि 19वीं शताब्दी के अंत तथा सब्सक्राइब में विभिन्न सामाजिक अस्तित्व समाचार अवश्य है क्योंकि स्वास्थ्य समाज के तमाम पहलुओं का अध्ययन करता समाज के अलग-अलग पहलुओं का अध्ययन करने वाले हैं यह केवल एक पहलू का

1:15:33 गहराई से अध्ययन करते सब्सक्राइब जरुर पधारें पहलू का अध्ययन करता है कि उसके लिए सब्सक्राइब संबंधित इसमें है वहीं संबंध राजनीति शास्त्र तथा समाज शास्त्र में राज्य समाज की सेवा करने वाली या समाज के एक वर्ग की सेवा करने वाली संस्था मानी जाती है और यह समाज के विकास की स्थिति में व्यक्ति समाज के विकास के नियुक्त नहीं किया जा सकता सब्सक्राइब

1:16:21 स्क्रीन पर काफी प्रभाव पड़ा कि समाज की परिस्थितियों एवं प्रक्रिया द्वारा प्रभावित होता है राजनीति को समझने के लिए नागरिकों का राजनीतिक सामाजिक तथा राजनीतिक संस्कृति एवं परंपरा सब्सक्राइब पद्धति को बहुत हद तक राजनीतिशास्त्र के अध्ययन में लगाया गया है भिवानी के साथ सभ्यता समाजशास्त्र काफी नजदीक आ गए हैं और समाजशास्त्र का प्रभार राजनीतिशास्त्र समाजशास्त्र राजनीति पर इतना अधिक प्रभाव पड़ा कि युवा स्थापित कर ली गई इसका नाम राजनीतिक

1:17:09 प्रस्ताव रखा गया है कहा जाता है कि राजनीतिक सामाजिक और राजनीतिक शरण सब्सक्राइब नियुक्त अध्यक्ष नियुक्त किया जाता है इसी प्रकार पर नियुक्त राजनीति समाज के प्रत्येक क्षेत्र में घुस गई और जिप अध्यक्ष उदय हो जाने की वजह से राज्य तथा राजनीति समाज के प्रत्येक क्षेत्र में घुस गई सब्सक्राइब पहले कि किसी रूप में राशि जुड़ गए सब्सक्राइब श्रवण राजनीति से प्रभावित होता है इसलिए

1:17:55 समाज शास्त्र का अध्ययन राजनीति से गहरे से गहरे रूप में प्रभावित होता संघ के अध्ययन के बिना अधूरा है क्योंकि समाज की हर गतिविधि राशि के साथ राजनीति में क्या डिफरेंस बिटवीन राजनीति विज्ञान और अध्यात्म विज्ञान की उत्पत्ति विकास और राजनीति को राजनीति की परिधि के अंदर घटित मानव व्यवहार और एक बहुत बड़ा क्षेत्र के दायरे से बाहर घृत ऐसे ही क्षेत्र पर अपना ध्यान केंद्रित करता है जिसे राजनीति विज्ञान

1:18:43 द्वारा कर दिया जाता राघवेंद्र के बीच अंतर बीच का अंतर बहुत कुछ समय के लिए उधर के समतुल्य हैं Bank और लिप्स आपके शब्दों में जहां राजनीति विज्ञान राज्य से आरंभ होकर इस थी कि छानविन पड़ता है कि कैसे राज्य समाज को प्रभावित करता है राजनीतिक समाजशास्त्र समाज से आरंभ होकर इस तरह की गणना करता है कि कैसे समाज राज्य को प्रभावित करते हैं दूसरे शब्दों में राजनीतिक समाजशास्त्र राजनीति विज्ञान से इस अर्थ में भिन्न है कि जहां राज्य विज्ञान राजनीति को विश्लेषणात्मक परिवर्तनों के रूप में देखता है और सब्सक्राइब के रूप में देखता है

1:19:31 आप लोग राजनीति सब्सक्राइब में अंतर सब्सक्राइब यह मान्यता है कि अनेक धार्मिक संस्थाओं में से एक है और संस्थाओं के बीच के संबंधों का अध्ययन समाजशास्त्र विषय और संस्थाओं और कार्यकर्ताओं के बीच चयन राजनीतिक समाजशास्त्र का विस्तृत अध्ययन क्षेत्र है बैंक के अनुसार राजनीतिक समाजशास्त्र की दो विशेषताएं पहला रनिंग समाचार राजनीतिक और सामाजिक पॉलीटिकल एंड सोशल के बीच के संबंधों का अध्ययन करता है और दूसरा यह कि यह प्रतिपादित करता है कि राजनीति को के साथ संबद्ध कि युवा राजनीति को नहीं समझा

1:20:17 जा सकता सब्सक्राइब है यह राजनीति समाज शास्त्रियों का मत है कि मनुष्य केवल एक राजनीतिक प्राणी ही नहीं बल्कि सामाजिक प्राणी भी अपने राजनीतिक क्रियाकलापों के अतिरिक्त उसका अपना एक गैर-राजनीतिक पॉलिटिकल साइड से भी और यह दोनों एक दूसरे से अलग नहीं बल्कि यह सब कैसे हैं खिलाड़ियों को प्रभावित करते हैं राजनीतिक गतिविधियों कार्यकलापों और प्रक्रियाओं को सही ढंग से नहीं समझा जा सकता है राजनीतिक घटनाओं तथा यथार्थ को समझने के

1:21:05 लिए उनके परिमाणात्मक मापन एवं मूल्यांकन की आवश्यकता होती परिमाणात्मक मापन और मूल्यांकन के लिए सामाजिक प्रक्रियाओं और संरचनाओं को ध्यान से देखा और परखा जाना आवश्यक राशि मैंने ऑलरेडी सब्सक्राइब करें और अपने अनुभव होता की भूमिका मात्र संविधानिक राजनीति या संधियों के द्वारा ही निर्धारित नहीं होती राघवा के साथ उसकी पारिवारिक पृष्ठभूमि सब्सक्राइब हमारी रचना के विभिन्न परिवर्तनों की पृष्ठभूमि में मतदाता सिविल सर्विस विधायकों और पार्टी नेताओं की राजनीतिक भूमिका को भली प्रकार समझा जा सकता है

1:21:52 अपनी रचना भी अनेक सांस्कृतिक प्रतिबंधों और दबाव से ग्रसित होती और इसमें धीरे-धीरे बदलाव आता रहता है इस बदलाव लाने में औद्योगिकरण आधुनिकीकरण नगरीकरण की प्रमुख भूमिका के लिए स्वस्थ और मौलवियों की धार्मिक सामाजिक भूमिका अधिक महत्वपूर्ण राजनीतिक भूमिका दृश्य-श्रव्य परिवर्तन का कारण है कि आज पुरोहित की भूमिका के निर्माण को लेकर सामाजिक व्यवस्थाओं में भी बदलाव आया है इस तरह राजनीति सब्सक्राइब के निकट आने लगा आज राजनीति का

1:22:37 सब्सक्राइब करें और अपना ध्यान सामाजिक पहलू पर केंद्रित करें और इस तथ्य को उजागर करता है कि राजनीति के क्षेत्र में जो अदृश्य उसकी तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण जो कि एक अधिक समाज शास्त्री का ध्यान आकर्षित करता है और इस प्रकार पार्टी के सबसे अमीर राजनीतिक समाजशास्त्र राजनीति विज्ञान को वृहद स्तर पर सबस्क्राइब बनाता है यह सच है कि राजनीतिक समाचार बहुत सीमा तक सबस्क्राइब पॉलिटिक्स को अपने में अंतर्निहित करता है फिर भी यह पर्यायवाची सब्सक्राइब तक अपनी पहुंच रखता है जो सामाजिक संरचना और हमारी संस्कृति के तत्व

1:23:23 से निर्धारित होती इस प्रकार राजनीति को समझने के लिए सामाजिक परिवर्तनों पर अपना पूरा जोर देता लेकिन इसके परिणामस्वरूप समाज शास्त्र राजनीति विज्ञान पर प्रभुत्व स्थापित होने का खतरा बढ़ जाता है सब्सक्राइब नीति आयोग द्वारा नियुक्त सरकारी राशि वालों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का श्रेय भी राजनीति को ही कि राजनीतिक सामाजिक राजनीतिक समाजशास्त्र के प्रभाव के कारण की राजनीति विज्ञान में शोध एवं नई तकनीकों का प्रचलन प्रारंभ हुआ है और राजनीति विज्ञान कल्पना लोक से उतरकर धरती की समस्याओं से जुड़ने लगा तो

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