SSC vs BANK : Which one you should choose in 2026?

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो एसएससी (SSC) और बैंक की नौकरियों की तुलना करता है, जिसमें जॉब प्रोफाइल, डिपार्टमेंट, वर्क प्रोफाइल, ग्रोथ, लाइफस्टाइल, वैकेंसी और सिलेबस शामिल हैं। वीडियो में यह भी बताया गया है कि दोनों परीक्षाओं की तैयारी कैसे करें और सफलता के लिए कितना समय चाहिए।

मुख्य बातें:

  • एसएससी में असिस्टेंट, क्लर्क, ऑडिटर और इंस्पेक्टर जैसे पद होते हैं, जबकि बैंक में पीओ, क्लर्क और स्पेशलिस्ट ऑफिसर जैसे पद होते हैं।
  • एसएससी की नौकरियां मंत्रालयों और सरकारी कार्यालयों से संबंधित होती हैं, जबकि बैंक की नौकरियां पब्लिक सेक्टर के बैंकों और आरबीआई से संबंधित होती हैं।
  • एसएससी की नौकरियों में आमतौर पर एडमिनिस्ट्रेटिव और क्लेरिकल काम होता है, जबकि बैंक की नौकरियों में कस्टमर सर्विस और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन शामिल होते हैं।
  • एसएससी में प्रमोशन धीरे-धीरे होते हैं, जबकि बैंक में तेजी से होते हैं।
  • एसएससी की नौकरियों में जॉब सिक्योरिटी अधिक होती है, जबकि बैंक की नौकरियों में वर्क प्रेशर अधिक होता है।
  • एसएससी और बैंक दोनों में हर साल वैकेंसी निकलती हैं।
  • दोनों परीक्षाओं के सिलेबस में 80-85% समानता है।
  • सफल होने के लिए, उम्मीदवारों को कम से कम 1-1.5 साल की तैयारी करनी चाहिए।

एसएससी और बैंक: जॉब रोल्स और डिपार्टमेंट

एसएससी में असिस्टेंट, क्लर्क, ऑडिटर, इंस्पेक्टर और जूनियर इंजीनियर जैसे जॉब रोल्स होते हैं। बैंक में बैंक पीओ, क्लर्क, स्पेशलिस्ट ऑफिसर, आरबीआई और नाबार्ड ऑफिसर्स जैसे जॉब रोल्स होते हैं। एसएससी के अंतर्गत आने वाले डिपार्टमेंट मिनिस्ट्रियल लेवल के होते हैं और सेंट्रल गवर्नमेंट ऑफिसिसेस द्वारा देखे जाते हैं। बैंक के डिपार्टमेंट पब्लिक सेक्टर बैंक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया और नाबार्ड के अंतर्गत आते हैं।

वर्क प्रोफाइल: एसएससी बनाम बैंक

एसएससी में वर्क प्रोफाइल में एडमिनिस्ट्रेटिव और क्लेरिकल काम शामिल होता है, जिसमें फिक्स टाइमिंग और कम कस्टमर इंटरेक्शन होता है। बैंक में वर्क प्रोफाइल में कस्टमर फेसिंग, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन, लोन प्रोसेसिंग और ब्रांच मैनेजमेंट शामिल होता है। एसएससी की तुलना में बैंक में कस्टमर इंटरेक्शन अधिक होता है।

ग्रोथ, लाइफस्टाइल और प्रेशर

एसएससी में प्रमोशन धीरे-धीरे होते हैं, लेकिन जॉब स्टेबल होती है और ट्रांसफर लिमिटेड होते हैं। बैंक में प्रमोशन तेजी से होते हैं, लेकिन ट्रांसफर लगातार होते रहते हैं। एसएससी में लाइफस्टाइल लिमिटेड समय के साथ काम करने की होती है और जॉब सिक्योरिटी स्ट्रांग होती है। बैंक में लाइफस्टाइल अधिक डिमांडिंग होती है, जिसमें टारगेट और प्रेशर होते हैं। एसएससी में बैंक के मुकाबले वर्क प्रेशर कम होता है। बैंक में सैलरी ग्रोथ और प्रमोशन तेजी से होते हैं।

एसएससी और बैंक: वैकेंसी

एसएससी में सीजीएल, सीएचएसएल, सीपीओ, एमटीएस और जीडी जैसी वैकेंसी आती हैं। दिल्ली पुलिस कांस्टेबल की वैकेंसी भी एसएससी द्वारा कंडक्ट करवाई जाती है। बैंकिंग में बैंक पीओ और क्लर्क की वैकेंसी एसबीआई, आईबीपीएस और आरआरबी द्वारा निकाली जाती हैं। बैंक में एसएससी की तुलना में हर साल अधिक वैकेंसी आती हैं।

एसएससी और बैंक: सिलेबस

एसएससी और बैंक दोनों के सिलेबस में क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड (मैथ्स), जनरल अवेयरनेस, इंग्लिश और रीजनिंग शामिल हैं। एसएससी में मैथ्स का लेवल अधिक होता है, जिसमें एडवांस मैथ (ज्योमेट्री, मेंसुरेशन, ट्रिगोनोमेट्री, अलजेब्रा) शामिल है। बैंक में अरिथमेटिक का रोल अधिक होता है, जिसमें डीआई, सिंपलीफिकेशन और नंबर सीरीज जैसे टॉपिक शामिल हैं। एसएससी में स्टैटिक जीके पर अधिक ध्यान दिया जाता है, जबकि बैंक में बैंकिंग अवेयरनेस, इकोनॉमिक्स और करंट अफेयर्स पर अधिक ध्यान दिया जाता है। इंग्लिश का सिलेबस दोनों में समान है। रीजनिंग में एसएससी में वर्बल, नॉनवर्बल और एनालिटिकल रीजनिंग शामिल हैं, जबकि बैंक में वर्बल रीजनिंग, पजल और सीटिंग अरेंजमेंट पर अधिक ध्यान दिया जाता है। बैंक में कंप्यूटर नॉलेज आवश्यक है, जबकि एसएससी में कुछ वैकेंसी में इसकी आवश्यकता नहीं होती है। दोनों के सिलेबस में 15-20% का अंतर होता है।

तैयारी कैसे करें और कितना समय चाहिए

एसएससी या बैंक की तैयारी शुरू करने से पहले, यह तय करें कि आपको किस परीक्षा की तैयारी करनी है। एसएससी या बैंक दोनों की तैयारी एक साथ की जा सकती है, लेकिन इसमें अधिक समय और मेहनत लगेगी। दोनों में हर साल वैकेंसी आती हैं। एक बिगिनर को एसएससी या बैंक का एग्जाम क्वालीफाई करने के लिए कम से कम 1-1.5 साल का समय चाहिए, जिसमें सिलेबस कंप्लीट करने और प्रैक्टिस करने का समय शामिल है। डेली 6-7 घंटे रेगुलर पढ़ाई करके एसएससी या बैंक का कोई भी एग्जाम क्वालीफाई किया जा सकता है।

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0:00 वंदे मातरम नमस्कार प्यारे साथियों जय हिंद मैं विवेक चौधरी साथियों आज की वीडियो में बात करने वाला हूं एसएससी वर्सेस बैंक के बारे में एसएससी का सिलेबस बैंक का सिलेबस अगर मैं एसएससी की तैयारी कर रहा हूं साथ ही साथ बैंक की तैयारी भी कर सकता हूं क्या या एसएससी की जॉब अच्छी है या बैंक की जॉब अच्छी है इन दोनों की जॉब प्रोफाइल क्या है हम लोग एसएससी का एग्जाम क्वालीफाई करने के बाद क्या बन सकता बैंक के एग्जाम को क्वालीफाई करने के बाद बैंक में क्या-क्या जॉब जॉब प्रोफाइल होती यह सब कुछ इस वीडियो में बताने वाला हूं। मेरे द्वारा दी गई जानकारी आपको अच्छी लगे चैनल को सब्सक्राइब कर लीजिएगा। वीडियो को शेयर कर दीजिएगा और अपनी वैलएबल कमेंट जरूर दीजिए। साथियों यहां पर देखिए आप लोग नेक्स्ट पेज लगाता हूं और दोनों को मैंने अलग-अलग लिखा है। एसएससी यहां है,

0:46 बैंक यहां है। सबसे पहले जॉब रोल्स के बारे में बात करते हैं। एसएससी के जो जॉब रोल है वो असिस्टेंट्स बनते हैं, क्लर्क बनते हैं, ऑडिटर्स बनते हैं, इंस्पेक्टर बनते हैं, जूनियर इंजीनियर। इसके अलावा यह मैंने मेनमेन जो है जॉब प्रोफाइल लिखी हुई हैं। और भी बहुत सारी वैकेंसीज आती हैं। नेक्स्ट पेज पर बात करूंगा। अगर मैं बैंक के जॉब रोल की बात करूं तो जैसे आपने नाम सुना बैंक पीओ आपने सुना होगा बैंक क्लर्क या स्पेशलिस्ट ऑफिसर या आरबीआई या नावार्ड ऑफिसर्स बहुत सारे ऑफिसर्स बनते हैं। वहीं अगर मैं डिपार्टमेंट की बात करूं तो एसएससी डिपार्टमेंट होता है यानी एसएससी के द्वारा जो अह वैकेंसीज आती हैं वो मिनिस्ट्रियल लेवल की होती हैं। मिनिस्ट्रीज लेवल की होती हैं या सेंट्रल

1:31 गवर्नमेंट जो है ऑफिसिसेस के द्वारा जो है उनको देखा जाता है एंड से सैचुरेरी बॉडीज आप लोगों की यहां पे काम करती हैं। इसके अलावा अगर मैं बैंक के बारे में बात करता हूं ये डिपार्टमेंट है आप लोगों का पब्लिक सेक्टर बैंक्स या रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अंतर्गत नावार्ड के अंदर। इसके अलावा वर्क प्रोफाइल की बात करें तो यहां इन दोनों के वर्क प्रोफाइल में थोड़ा-थोड़ा अंतर है। थोड़ा क्या बहुत ज्यादा अंतर हो सकता है। देखो किसी को काम करना ऑफिशियली किसी को काम करना बैंक में अच्छा लगता है। किसी को काम करना एसएससी के द्वारा जो वैकेंसीज आती है इंस्पेक्टर बन के काम करना किसी को अच्छा लगता है। ऑडिटर बनके काम करना ये सबके अलग-अलग पसंदीदा जो है वो जॉब हो सकती है। लेकिन जैसे मैं अगर अपनी पसंद की बात करूं तो मुझे वर्दी वाली

2:16 जॉब अच्छी लगती है। ऐसी आप सबकी पसंद अलग-अलग होगी। यहां पे अगर मैं वर्क प्रोफाइल की बात करता हूं तो मोस्टली यहां पे एडमिनिस्ट्रेटिव क्लेरिकल और फिक्स टाइमिंग वाली और लेस कस्टमर इंटर इंटरेक्शन वाली यह जॉब होती है। यानी कि हमें कस्टमर से बहुत ज्यादा लेना देना यहां पर नहीं होता है। वहीं बैंक की बात करें तो हमें सबसे ज्यादा यहां पर कस्टमर को फेसिंग करना होता है। आप लोग जानते हैं सैकड़ों कस्टमर डेली बैंक में आते हैं और सबसे चर्चा करनी होती है। सभी से सभी की परेशानियों का निवारण करना होता है। इसके अलावा यहां पे फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस करनी होती है। लोन प्रोसेसिंग करनी होती है। ब्रांच मैनेजर मैनेजमेंट देखना होता है। क्योंकि काम होता है यहां पे प्रोफाइल में बैंक में। यहां अगर मैं ग्रोथ पाथ की बात करूं एसएससी में यहां प्रमोशन जो है वो बड़े धीरे-धीरे होते हैं। यानी कि एकदम नहीं कि

3:02 आए और 2 साल बाद प्रमोशन हो गया आपका। नहीं लंबे समय बाद होता है बट स्टेबल है। होता है यहां पे ट्रांसफर और ट्रांसफर वगैरह जो होते हैं वो लिमिटेड होते हैं। ऐसा नहीं कि हर 4 महीने बाद इधर से उधर आपको भेज दिया जाए। बट बैंक में थोड़ा सा ये मुश्किल होता है। मैं बताऊंगा आपको। इसके अलावा अगर यहां की लाइफस्टाइल की बात करें। यहां के जो लाइफ स्टाइल है वह एक लिमिटेड समय आपको काम करने के लिए मिलता है। हालांकि वहां भी जो है आप लोगों के समय होता है प्रॉपर बट वहां टारगेट दिए जाते हैं। यहां कोई टारगेट नहीं होता है। तो यहां पर जो है स्ट्रांग जॉब सिक्योरिटी है। इसके अलावा यहां पर आपको जो अगर मैं प्रेशर की बात करूं ना माइंड प्रेशर या किसी भी वर्क प्रेशर की बात करूं बैंक के मुकाबले काफी हद तक कम है। ठीक है? लेकिन यहां दोस्तों देखिए अगर वर्क लोड है तो डेफिनेटली सैलरी भी तेजी से इनक्रीस होती

3:48 है। आप लोगों के प्रमोशन भी तेजी से इनक्रीज होते हैं। यहां अगर मैं लाइफस्ट की बात करूं तो मोर डिमांडिंग होती है। टारगेट्स दिए जाते हैं। टारगेट के प्रेशर्स होते हैं आप लोगों को। इसके अलावा फ्रीक्वेंट ट्रांसफरर्स होते हैं। यानी कि आप लोगों के ट्रांसफर लगातार होते रहते हैं। ठीक है? बट सैलरी जो है वह लगातार आप लोगों की ग्रोथ होती है। जब ट्रांसफर होगा सैलरी भी बढ़ेगी और आपके जो टारगेट दिए गए हैं वह पूरे होंगे तो भी सैलरी बढ़ेगी। इस तरह की चीजें यहां पर बैंक में देखने को मिलती हैं। तो आप यहां देख पाए होंगे एसएससी और बैंक की दोनों में क्या अंतर है। देखिए एसएससी अब इनमें ये बात कर लेता हूं कि दोनों में जो वैकेंसीज होती हैं वो कैसे-कैसे निकलती हैं। जैसे एसएससी की मैं बात करता हूं। एसएससी में अगर मैं ऑफिसर्स की बात करूं तो सीजीएल की वैकेंसीज आती है। सीजीएल के

4:34 अलावा सीएचएसएल की वैकेंसीज आती हैं। इसके अलावा सीपीओ की वैकेंसीज आती हैं। हालांकि ये डिफेंस का पोर्शन हो जाता है। पुलिस वगैरह जो आपने देखा होगा दिल्ली पुलिस में दरोगा वगैरह होते हैं। सीपीओ की वैकेंसी हो गई। इसके अलावा इसके अलावा मेरे भाई एमटीएस की वैकेंसी होगी। और सबसे नीचे आपकी एसएससी जीडी की वैकेंसीज भी आती हैं। हर साल यह वैकेंसी आती हैं। एसएससी सीजीएल की भी, सीएचएसएल, सीपीओ, एमटीएस, जीडी ये हर साल वैकेंसीज आती हैं। इसके अलावा दिल्ली पुलिस की वैकेंसी भी दिल्ली पुलिस की जो वैकेंसी आती हैं वो भी एसएससी के द्वारा कंडक्ट करवाई जाती है। कांस्टेबल की बात कर रहा हूं। दिल्ली पुलिस कांस्टेबल। इसके अलावा मैं बात करता हूं बैंकिंग। तो मेरे भाई बैंकिंग में अगर बात करते हैं तो दो तरह की वैकेंसीज। हालांकि मेन रोल आपके बता रहा हूं। एक तो आपके बैंक पीओ हो गया, एक क्लर्क हो गया। यह हर

5:21 साल वैकेंसीज आती हैं। बैंक पीओ की भी और बैंक क्लर्क की भी। जैसे एसबीआई हो गई। इसके अलावा आप लोगों की जो है वो आईबीपीएस हो गई। या इसके अलावा आपका आरआरबी हो गया। ठीक है? इन तीनों में इन तीनों में बैंक पीओ की जगह निकलती है। आईबीपीएस पीओ की जगह होती है। आरआरबी पीओ की जगह निकलती है। फिर क्लर्क की जॉब भी अलग निकलती है। क्लर्क की है है ना? आईबीपीएस क्लर्क की जॉब होती है। आरआरबी क्लर्क की जॉब होती है। तो ये जो है एक साल के अंदर एसबीआई में दो तरह की जॉब हो गई पीओ क्लर्क की। ऐसे ही आईबीपीएस में ऐसे ही आरआरबी में? और अगर मैं हर साल ये देखूं ना मैं सबसे ज्यादा वैकेंसीज कहां आती हैं? क्या एसएससी में ज्यादा आती है या बैंक में ज्यादा आती हैं? तो डेफिनेटली यहां पर वैकेंसीज ज्यादा आती हैं हर साल। यहां दो-ती साल के बाद एक बार बहुत ज्यादा बढ़

6:08 के आ जाएंगी। बट फिर उसके बाद में दो-ती साल तक लगातार 4000 3000 2000 इस तरीके से आता। ठीक है? हालांकि हमें केवल एक शीट चाहिए। उसके लिए हमें जरूरी है कि पढ़ना क्या है? ये देखें। तो अब मैं इन दोनों के सिलेबस की बात करता हूं। अगर इनके सिलेबस को आप देखोगे तो ऑलमोस्ट आपको देखने में एक जैसा लगेगा। ये एसएससी एग्जाम्स की मैं बात करता हूं। ये सिलेबस है कंप्लीटली। और बैंक एग्जाम्स की बात करता हूं तो ये सिलेबस है। ठीक है? अब जैसे एग्जाम टाइप आपके एसएससी सीजीएल, सीएचएसएल, एमटीएस आदि अब जो लिखवाए हैं मैंने ऐसे यहां पर मैंने ये लिखवाए हैं। आप लोग देख सकते एग्जाम टाइप आईबीपीएस, पीओ क्लर्क, एसबीआई, पीओ क्लर्क, आरबीआई, असिस्टेंट इत्यादि। इसके अलावा देखो यहां पर जो मेन हमारे सब्जेक्ट हैं वो सबसे पहला है क्वांटिटिव

6:54 एपटीट्यूड। यानी कि इसको हम कहते हैं मैथ्स। आपने काफी मतलब डरते भी होंगे आप इससे बहुत सारे स्टूडेंट और बहुत सों को बड़ा यह इंटरेस्टिंग सब्जेक्ट लगता होगा मैथ मैथ में यहां पर आप देखो सबसे इंपॉर्टेंट ज्योमेट्री मेंसुरेशन ट्रिगोनोमेट्री के अलावा अलजेब्रा तो ये आप लोगों का एक तरीके से मैं कह सकता हूं मेंसुरेशन का पार्ट है। यानी कि एडवांस मैथ है। क्या है? मैथ्स जो है एडवांस है। मैथ्स दो टाइप का होता है भाई। एक होता है अर्थमैटिक। एक होता है अर्थमैटिक। एक होता है अर्थमैटिक और एक होता है एडवांस मैथ। एडवांस मैथ देखो यह पूरा ट्रिकी होता है और इजी होता है। यह थोड़ा सा टफ होता है। ठीक है? ये थोड़ा सा फार्मूला बेस्ड होता है टफ होता है। बट आप

7:39 देखोगे यहां पे दो एग्जाम होते हैं एसएससी प्री एक मेंस। प्री में अर्थमैटिक के ही क्वेश्चन बनते हैं और थोड़ा बहुत जो है एडवांस पूछ लिया जाता है। बट जो मेन पेपर होता है मेंस का पेपर होता है उसमें एडवांस मैथ ज्यादा आता है। मैथ का जो लेवल है वो कहीं ना कहीं ज्यादा तो आपके एसएससी के एग्जाम में ही होता है। बाकी बैंक में अरथमैटिक का रोल है पूरा अरथमैटिक का अरथमैटिक का। लेकिन अरथमैटिक में भी कुछ टॉपिक ऐसे हैं जैसे मैं बात करता हूं। फोकस करता हूं वही। यहां देखो यहां तो मैंने बता ही दिया एडवांस के टॉपिक। बट ऐसा नहीं है कि ये कंप्लीट है। इसके अलावा पूरा कंप्लीट अर्थमैटिक वो तो आता ही आता है। बट ये एडवांस के लिए भी मैंने बताया अर्थमैटिक प्लस एडवांस दोनों आते हैं इसमें। बट इसमें अर्थमैटिक ही आता है। अर्थमैटिक में भी कुछ महत्वपूर्ण टॉपिक आप देखिए। जैसे जैसे आपका डीआई डाटा

8:26 इंटरप्रिटेशन का एक पार्ट होता है जो सर्कल बना करके आपने देखा होगा। इतना परसेंट उतना परसेंट निकालो। है ना? मैथ की स्पीड बहुत अच्छी होनी चाहिए यहां पे। हालांकि यहां भी होनी चाहिए। बट यहां भी आपकी कैलकुलेशन बहुत फास्ट होगी। सिंपलीफिकेशन ऋण सरलीकरण करना नंबर सीरीज यानी कि नंबर सिस्टम वगैरह का जो पार्ट है और आपको मोर मोर कैलकुलेशन इंटेंसिव एंड टाइम बाउंड यानी कि एक लिमिटेड टाइम के अंदर-अंदर आपको जो है कुछ मेजरमेंट आपको दिए जाएंगे। कुछ कैलकुलेशंस दी जाएंगी। उनको सॉल्व करना होगा। इसके अलावा दूसरा है अवेयरनेस यानी जीके जीएस जिसे हम बोलते हैं। तो यहां पे हैवी ऑन स्टैटिक जीके। स्टैटिक जीके जो है वो बहुत हार्ड आती है दोस्तों। हर बार बदल-बदल के आती है जबरदस्त लेवल की। इसके अलावा हिस्ट्री, ज्योग्राफी, पॉलिटी, साइंस

9:13 साइंस में तीनों पोर्शन आपका चाहे आपका फिजिक्स हो, केमिस्ट्री हो या फिर बायोलॉजी हो लेस फोकस ऑन करंट अफेयर्स यानी करंट अफेयर्स का लेवल कम होता है। हालांकि लेवल कम नहीं होता है। मैं तैयारी करवा रहा हूं। मुझे पता है लेवल कम नहीं होता। बट अगर कंपैरिजन कर रहे हैं बैंक से तो लेवल कम है करंट अफेयर का। करंट अफेयर ज्यादा जो पूछा जाता है वह बैंक में पूछा जाता है। यहां पर जनरल अवेयरनेस में बात करें तो फोकस ऑन अवेयरनेस। बैंकिंग के बारे में जो इकोनॉमिक्स वगैरह के क्वेश्चंस वो ध्यान रखने हैं और आपको करंट अफेयर्स तो याद रखना ही है। इसके साथ-साथ जो फाइनेंशियल न्यूज़ हैं वो भी टारगेट करनी होती। इसके अलावा इंग्लिश की बात करते हैं तो इंग्लिश का सिलेबस दोनों में ही है। दोनों में ही है। जैसे आपका बहुत सारे ग्रामर है, एरर सपोर्टिंग्स हैं, क्लॉज़ टेस्ट हैं। है ना? वन वर्ड

9:58 सब्स्टटशंस हैं। ये सब आप लोगों के एज इट इज़ यहां भी हैं। रीडिंग, कंप्रहेंशन, पैराजबलिंग, फिल इन द ब्लैंक्स। ये सारे के सारे दोनों में आते हैं। इंग्लिश दोनों में अच्छी चाहिए। इसके बाद बात आती है रीजनिंग की मेरे भाई। रीजनिंग यहां भी है और रीजनिंग यहां भी है। रीजनिंग में आप लोगों के यहां पे वर्बल रीजनिंग आती है। ठीक है? नॉनवर्बल रीजनिंग आती है। ठीक है? इसके अलावा आप लोगों की जो एनालिटिकल रीजनिंग है वो भी आती है। और ये सब मैंने लिखा है नॉनवर्बल में मिरर इमेज, वाटर इमेज। बहुत सारे टॉपिक आते हैं। कोई एक दो नहीं है। पेपर कटिंग, पेपर फोल्डिंग बहुत सारे टॉपिक हैं। तो टोटली इसमें कंप्लीट रीजनिंग आती है। वर्बल हो, नॉनवर्बल हो या एनालिटिकल हो। रीजनिंग की बात करते हैं बैंक के एग्जाम में। सबसे ज्यादा यहां पे वर्बल रीजनिंग एक टॉपिक है पजल यानी पहेली। दूसरा टॉपिक है सीटिंग अरेंजमेंट।

10:45 तीसरा टॉपिक है इनपुट आउटपुट। इन पर सबसे ज्यादा फोकस रखना होता है। बाकी आते और भी टॉपिक है ट्रीज या इसके अलावा मिसिंग नंबर। ये सब टॉपिक आते हैं। बट सबसे टफ जो होते हैं वो ये टॉपिक होते। इसके अलावा यहां पर आप लोगों को कंप्यूटर की नॉलेज होनी चाहिए। कम नॉलेज भी होगी चलेगा। लेकिन किस किसीकि में तो कंप्यूटर की बिल्कुल भी नॉलेज ना हो किसी किसी वैकेंसी में तो भी चलेगा। एसएससी की सीजीएल में बहुत सारी वैकेंसीज ऐसी आती है जिनमें कंप्यूटर की नॉलेज की जरूरत नहीं होती है। कई सारी वैकेंसीज में जरूरत होती है। बट यहां पे कंप्यूटर की आपको कंप्लीट हर एक हर एक वैकेंसी के लिए कंप्यूटर नॉलेज होना बहुत जरूरी है। तो ये कंप्लीट मैंने सिलेबस बताया। अब लेकिन अभी तक आप लोग यह कंपेयर नहीं कर पाए सर सिलेबस सेम है या अलग-अलग है। तो मैं आपको बताता हूं इन दोनों का जो सिलेबस है उसमें 80 से 85% जो

11:33 है चेंज होता है। जैसे मैथ्स में और करंट अफेयर्स में रिजनिंग में इन सब में मिलाकर के 15 से या मैं कहूं 15 से 20% का जो है मेरे भाई वो अंतर होता है दोनों में। ठीक है? दोनों में 15 से 20% का अंतर होता है। तो यहां अगर आप एसएससी की तैयारी कर रहे हैं। पहले आप यह तैयार करिए कि हमें एसएससी की तैयारी करनी है या बैंक की करनी है। पहले आप यह करिए और कंप्लीट सिलेबस अपना कवर करिएगा। एसएससी का करें पहले। तो एसएससी की अगर चाहते हैं तो एसएससी का कवर करें। बैंक में चाहते हैं तो बैंक में कर। क्या हम लोग एसएससी बैंक दोनों की एक साथ तैयारी कर सकते हैं? कर सकते हैं। थोड़ा समय ज्यादा लगेगा। थोड़ा पढ़ना ज्यादा पड़ेगा। अब क्या सर हर साल वैकेंसी आती है? डेफिनेटली यह दोनों ही वैकेंसी ऐसी हैं। चाहे बैंक चाहे एसएससी हर साल

12:20 वैकेंसी आती है। हर साल वैकेंसी आती है। और तैयारी करने के लिए मैं बता रहा हूं कम से कम अगर आप बिल्कुल जीरो हैं। जीरो मतलब होता है बिगिनर। ऐसा नहीं कि आपने अभी तो भैया रीजनिंग में आर भी नहीं आता। क्रम पे तो स्क्वायर भी नहीं आते। कैसे होते हैं? मल्टीप्लाई करना भी नहीं आता वो अलग बात है। लेकिन जो बेसिक बच्चा है जिसने आज तैयारी करना शुरू की है 12th पास करके या ग्रेजुएशन करके वो कम से कम 1ढ़ साल का समय उसको लगता है एसएससी का एग्जाम क्वालीफाई करने के लिए और कम से कम उसको 1ढ़ साल का समय लगता है आपके बैंक के एग्जाम का सिलेबस कंप्लीट के लिए। क्यों? क्योंकि एक साल में तो सिलेबस कंप्लीट होगा और 5 से छ महीने लग जाते हैं मेरे भाई उसे प्रैक्टिस करने में। तो 1ढ़ साल का समय हो गया। अगर आप डेढ़ साल छ से 7 घंटे डेली रेगुलर पढ़ के तैयारी करते हैं तो एसएससी का कोई

13:06 एग्जाम ऐसा नहीं होगा जिसे आप क्वालीफाई नहीं कर सकते। बैंक का ऐसा कोई एग्जाम नहीं होगा जिसे हम क्वालीफाई नहीं कर सकते। अगर तीन-ती महीने पढ़ के क्वालीफाई करना चाहते हो नहीं होगा। दुनिया में कोई टीचर ऐसा नहीं है जो आपको एग्जाम क्वालीफाई करा दे 3 महीने दो महीने में। ठीक है? एक से 1 1/2 साल 1 साल का समय उन्हें लगता है जो पहले से पढ़कर बैठे हैं उनको और 1ढ़ साल का समय बिगिनर को लगता है कम से कम। बता रहा हूं ज्यादा भी हो सकता है ये समय। तो यह उम्मीद है आपको सारी चीजें समझ में आ गई होंगी। अब अगर आप में से कोई भी स्टूडेंट मेरे साथ रीजनिंग कंप्लीट पढ़ना चाहते हैं तो कंप्लीट रीजनिंग का बैच मात्र ₹399 में अवेलेबल है दोस्तों। इसमें लाइव और रिकॉर्डेड क्लासेस, पीडीएफ नोट्स, टेस्ट सीरीज और लेटेस्ट पैटर्न पर कंप्लीट यह बैच करवाया जाएगा। चाहे आप एसएससी, बैंकिंग, पुलिस, सीसेट, रेलवे किसी एग्जाम की तैयारी कर

13:52 रहे हो, चाहे स्टेट लेवल का एग्जाम है, ऑल कॉम्पिटिटिव एग्जाम है, एसएससी बैंक दोनों के लिए आप इसे ले सकते हैं। 2 साल की वैलिडिटी है। करीब 5 1/2 महीने में कोर्स कंप्लीट हो जाएगा। फिर एक दूसरा बैच है हमारे पास सिलेक्शन बैच जिसमें आपको मैथ्स, रीजनिंग और जीएस तीनों सब्जेक्ट करवाए जाएंगे। चाहें फिर आप एसएससी, रेलवे, बैंक, पुलिस, यूपी, एससी के सीट एग्जाम की, स्टेट एग्जाम्स की या आप किसी भी एग्जाम की तैयारी कर रहे हैं। यह बैच ले सकते हैं। यह 599 दोनों ही बैच आपको कंपटीशन गुरु एप एप्लीकेशन पर दिखाई देंगे। तो, आप कॉम्पटीशन गुरु ऐप डाउनलोड कर लें। इसके अलावा स्पेसिफिकली किसी एक इंडिविजुअली एग्जाम का बैच लेना चाहते हैं, तो वो भी आपको मिल जाएगा। जैसे एनटीपीसी का बैच आया हुआ है। यह हमारा मोबाइल नंबर है। इस पे आप कॉल या WhatsApp करके जानकारी ले सकते हैं। आज की वीडियो में इतना ही। उम्मीद करता हूं आपको समझ में आई होंगी सारी बातें। धन्यवाद एवं नमस्कार।

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