0:00 सतयुग में तो हिरण्यकश्यप था जो भगवान विष्णु का नाम नहीं लेने देता था कि मैं मार दूंगा। यहां पे तो सारी आजादी है। भगवान विष्णु क्या कृष्ण जी क्या राम जी क्या सबकी पूजा करो। कोई मना नहीं कर रहा आपको। भगवान से कनेक्शन हम बिठाते हैं या भगवान हमारे से कनेक्शन बिठाते हैं। भगवान को देख के रोना आ रहा है। ये प्रेम आपका ना कुछ स्पेशल कनेक्शन होता है तब होता है। तो आप माला जब जपते हो तो स्पेशल कनेक्शन बनता है। अपनापन सा आता है। कितने तपस्या करनी पड़ती थी सतयुग में तब जाके भगवान आते थे। यहां पर तो आप 10 दिन की साधना करते हो। आपको दर्शन हो जाते हैं। सिद्धि कैसे हासिल की जा सकती है? सिद्धि आपको भटकाती है। जब भी आप जाप करने शुरू करते हो ना, अलग-अलग प्रकार की सिद्धियां आपसे कनेक्ट करने लगती है। मैंने ओम नमः शिवाय का जाप शुरू किया था। मुझे ना हनुमान जी के दर्शन होने शुरू हो गए थे। सिद्धियों से क्या-क्या कार्य करवाए जा
0:45 सकते हैं? सिद्धियां कुछ भी कर सकें। कुछ सिद्धियां तो ऐसी भी है कि आपको शायद हवा में भी उड़ा दे। हवा में उड़ सकते हैं, छोटे हो सकते हैं, बड़े हो सकते हैं। लेकिन आप उस लेवल पे होने चाहिए कि आप प्राप्त कर सकें। कुंडलिनी कैसे जागृत की जाती है? कुंडलिनी का नेटवर्क आपका यूनिवर्सल लेवल पर काम करता है। आप फोन मिला सकते हो पूरे यूनिवर्स में कहीं पर भी। किसी से भी कनेक्ट कर सकते हो। आप बहुत से संतों को देखोगे ना वो कह देंगे आपका लड़का होगा तो हो ही जाएगा फिर। ये विशुद्धि चक्र की बात है। तो कुंडलिनी जागृत करने में कितना समय लगता है? कितनी साधना करनी पड़ती है? एक जन्म में कोई भी पूरी कुंडलिनी जागृत नहीं कर सकता। जबरदस्ती जागृत करना है तो तो हो जाएगा लेकिन उस केस में आप पागल हो सकते हो। किस मंत्र के जरिए कुंडलिनी को जागृत किया जा सकता है? किसी भी मंत्र से जागृत हो सकती है। मंत्र भी बगलामुखी साधना क्या होती है? किसको करनी चाहिए? उन्होंने क्लेम किया है कि उन्होंने राहुल
1:30 गांधी जी पर मां बगलामुखी जी की साधना का प्रयोग किया है। सवाल का जवाब की जगह जवाब का सवाल बोल दिया था एक बारी। तो कहते हैं जो फिसलते हैं ना यह मां बगलामुखी जी की फिसलते हैं। क्योंकि मां बगलामुखी जी वाक पकड़ लेते हैं। अपनी जीभ पकड़ लेती है। तो मां बगलामुखी की साधना क्या उल्टी भी पड़ जाती है? बहुत हैवी एनर्जी होती है। आप जाप करो तो आपके आसपास ना धुआं होने लगता है। हनुमान जी की साधना कर रहे हैं तो आप लाल रंग के वस्त्र धारण करिए। आप भैरव जी की कर रहे हैं तो आप काले रंग के वस्त्र धारण करिए। तो रंगों का क्या? काली सिद्धि है, तंत्र वाली है तो आकर्षित हो जाएंगी आपके प्रति। आपको तांत्रिक समझकर तांत्रिक की वेशभूषा है क्योंकि काली। ऐसे व्यक्तियों को सिद्धियां प्राप्त नहीं होती जो ब्रह्मचर्य नहीं पालन करते हैं। आपको सेक्सुअल विचारों को बहुत कम करना होता है। आज की जनरेशन मास्टरबेशन में फंसी हुई है। यह लोग नहीं अध्यात्म में कभी प्रगति कर सकते हैं ना नॉर्मल लाइफ में प्रगति करेंगे। नमस्कार अनफिल्टर्ड विद अता जैन पडकास्ट
2:18 में आज अध्यात्म की उन तमाम परतों को अनफिल्टर्ड तरीके से खोलेंगे जो आपको सिद्धि की दुनिया में ले जाएंगी। सिद्धि कैसे हासिल की जाती है? कुंडलिनी को कैसे जागृत किया जाता है और कैसे आप वह सब कुछ देख सकते हैं जो अच्छे-अच्छों के बस की बात नहीं। यह सब कुछ बताएंगे हमारे साथ मौजूद हमारे आज के गेस्ट जिनको देखना और सुनना आपको बहुत पसंद है। हम बात कर रहे हैं उदित अरोड़ा की जो कि यंग मेडिटेशन कोच और हीलर हैं। बहुत स्वागत है आपका उदित जी एक बार फिर से अनफिल्टर्ड विद अता जैन पडकास्ट। थैंक यू सो मच। जय माता दी। हर हर महादेव। जय माता दी। हर हर महादेव। हमारे पिछले पॉडकास्ट को लोगों ने बहुत प्यार दिया।
3:04 बहुत लोगों की ढेर सारी रिक्वेस्ट हमारे पास आई। वो चाहते थे कि आपके साथ हम एक बार फिर से पॉडकास्ट करें। तो आज की चर्चा तो बनती ही थी। बिल्कुल। तो सबसे पहले आज आपकी स्पिरिचुअल जर्नी से शुरुआत करते हैं। आपकी स्पिरिचुअल जर्नी किस तरह की रही है? कैसे इसकी शुरुआत हुई? कैसे आप स्पिरिचुअलिटी में आए? स्टार्टिंग में जब मैं पढ़ाई कर रहा था उस समय मैंने एक YouTube पर वीडियोस देखी थी ऐसी दिव्य दृष्टि को लेकर कि आप कुछ चीजें ऐसी हैं जो आप शायद आप आंखों से नहीं देख सकते फिजिकल आंखों से लेकिन आप तब भी देख पाओगे अपनी सिक्स्थ सेंस से यानी एक एक और आंख है आपके माथे पर जो फिजिकल नहीं है और जो फिजिकल आंखें से नहीं दिखता ना आप उसे देख पाओगे कुछ ऐसी चीजें हैं जैसे भूत हो गया आत्माएं हो गई भगवान हो गई या फिजिकल आंखों से नहीं देख सकते हम लेकिन हम थर्ड
3:50 आई से देख पाएंगे तो ऐसे ही मैं YouTube पे देख रहा था तो मैंने वहां पे ना बहुत से लोगों वो एजुकेटेड भी थे काफी इंजीनियरिंग करके बैठे हैं। डॉक्टर्स हैं। वो आंखें बंद कर रहे हैं और सामने एक लेडी है जो बहुत परेशान है। मेंटली डिस्टर्ब है और वो उसको एनर्जी देख के बता पा रहे हैं कि इसको ना नेगेटिविटी है। इसके पेट में प्रॉब्लम है। तो जब उन्होंने देखा पेट में प्रॉब्लम है तो वो बता भी रही है कि अच्छा हां इनके पेट में ना नेगेटिविटी है। वो लेडी बता भी रही है यस मेरा पेट दर्द रहता है। तो मैं ये देख के बहुत ज्यादा मेरे में एक्साइटमेंट आई कि ये होता क्या है? तब मैंने वहां पे पहुंच गया मैं नेक्स्ट डे वो चैनल देखकर कि अच्छा ये क्या होता है? ये मुझे बताओ। तो उन्होंने बताया इसके ना आपको बहुत चटिंग करनी पड़ती है। मैंने बोला अच्छा जाप से पॉसिबल है। उन्होंने बोला हां तो उन्होंने बोला कि मैंने पूछा कितना करना पड़ेगा? उन्होंने बोला आपको करनी पड़ेगी एटलीस्ट 100 माला एक दिन में। तो मुझे तो लगा है तो एक माला ही मुझे किसी ने करने को बोली थी तो मैंने नहीं
4:36 की। 100 माला तो बहुत ज्यादा है। मैंने मंत्र पूछा तो उन्होंने बोला ओम नमः शिवाय करो। क्यों करो ओम नमः शिवाय? क्योंकि शिव जी आदि गुरु हैं। तो कोई गुरु नहीं है ना आपके तो ओम नमः शिवाय से शुरुआत करो। तो मैंने माला लेके स्टार्ट कर दिया जाप करना। मैं बैठ गया। सोफा पे बैठा था मैं क्योंकि जमीन पे बैठने की आदत नहीं ना उस वक्त पैर दर्द होंगे हमारे तो बोला एक आसन बिछाओ माला लो और बैठ जाओ तो स्टार्टिंग में मुझे लगते थे अबाउट अबाउट दो से तीन घंटा करने में अब मैं बीच में सबके साथ प्रॉब्लम होती है माला जाप करते हैं ना तो बीच में खो जाते हैं काउंटिंग भूल जाते हैं तो मैंने क्या किया दो ले ली बॉल्स बाउल्स ले लिया उसमें कटोरिया ले ली 100 राजमा रख दिए किडनी बींस तो मैं क्या करके ट्रांसफर करता था कि मेरे 100 माला हो गई ऐसे करते-करते ना कुछ अनुभव शुरू हुए मुझे सबसे पहले तो मुझे नींद नहीं आ रही उबासी आनी शुरू हो गई अब उबासी क्यों आ रही है। आंखों से आंसू आ रहा है। फिर ना बॉडी में हल्का-कुल्का करंट सा महसूस हुआ। जैसे बॉडी हल्की आगे पीछे और बॉडी में करंट सा
5:23 दौड़ने लगा। कुछ टाइम तक तो मुझे भी बिलीव नहीं था मंत्र से कुछ होता है। बट जब यह सब होने लगा ना मेरे साथ तो मुझे लगा कुछ तो एनर्जी है जो मुझे फील हो रही है। कुछ करंट जैसा फील हो रहा है। कुछ बॉडी में वाइबेशंस फील हो रही हैं। ये सब जब फील होने लगा तब मैं मानने लगा कि मंत्र में कुछ तो होता है। फिर धीरे-धीरे करते-करते ना मैंने कुंडलिनी पर गया। कुंडलिनी के बाद कुंडलिनी अवेकनिंग सीखा, ध्यान लगाना सीखा, त्राटक करना सीखा और साधनाएं सीखी। ऐसे करते करते मेरी जर्नी शुरू हुई। एक YouTube वीडियो से एक इंटरेस्ट आ गया कि अच्छा थर्ड आई या दिव्य दृष्टि क्या होती है? साधना क्या होती है? सिद्धि क्या होती है? उस इंटरेस्ट की वजह से आज मैं आपके सामने बैठा हूं। तो ये पहला अनुभव कब हुआ था आपको? जब आपको लगा कि कुछ अनयूजुअल सा हो रहा है? देखो एज इन मैं सही बताऊं तो लोग कहते हैं आपको ना सवा लाख यानी अबाउट 125000 मंत्र चट करने होते हैं तो अनुभव शुरू होता है।
6:09 मेरा मानना ऐसा नहीं है। मेरे को ऐसा लगता है कि हर किसी पे ना हर कोई पूर्व जन्म से भजन आनंदी रहा है। मंत्र जाप करता आया तो इस अध्यात्म में उतनी जल्दी आध्यात्मिक बना है। तो किसी को अनुभव जल्दी शुरू होते हैं। किसी को लेट होते हैं। मुझे लगभग शुरू हुए थे 10 से 15 दिन में। लेकिन एक हफ्ते में आपको थोड़े बहुत होने लगते हैं। बट एक होता है ना कि आपको लग गया कि नहीं अब तो कुछ ज्यादा ही फील हो रहा है बॉडी में। हम मंत्र कुछ ज्यादा ही फील होने लग गए। तो तब वो मुझे लगभग 15 दिन में एहसास वाइबेशंस बॉडी में रोंगटे खड़े होना, वाइब्रेशन शुरू हुई, हाथ हल्के बहुत कांपने शुरू हुई। बॉडी हल्की कांपनी शुरू हुई तो लगा कि कुछ तो बॉडी पे करंट जैसा गिर रहा है। तो सभी के साथ ऐसा होता है या सिर्फ आपके साथ हुआ? नहीं 90% लोगों के साथ अनुभव जल्दी शुरू हो जाते हैं। कुछ लोगों के साथ लेट भी होते हैं। बट अनुभव हर किसी को होते हैं। जो स्पिरिचुअलिटी में ज्यादा गहराई में जाता है। जो चटिंग करेगा। देखो मेरा सिर्फ सिर्फ ये
6:56 मानना है कि अगर आप नहीं मानते भी हो ना तो स्टार्टिंग में आप माला लेकर शुरू हो जाओ। मेरा भी ऐसा नहीं था कि मेरे को भगवान से बहुत अटूट प्रेम था। ऐसा नहीं था। मतलब ठीक है भगवान जी हैं रिस्पेक्ट करते थे। बट एक होता है ना अब तो भगवान के लिए रो ही देंगे हम। कि मतलब अब तो भगवान को देख के रोना आ रहा है। ये प्रेम आपका ना कुछ स्पेशल कनेक्शन होता है तब होता है। तो आप माला जब जपते हो तो स्पेशल कनेक्शन बनता है। अपनापन सा आता है। अब जैसे मैं आपको बोलूं कि अगर आपको आज ना प्राण त्यागने पड़ रहे हैं। आपके सामने भगवान आ जाए। जैसे अगर 10 लोग मैं खड़े करूं तो 10 में से नौ नहीं जाएंगे भगवान के पास जानते हुए भी कि आपको अंत भगवान के पास जाना है लेकिन नहीं मॉम का प्रेम है नहीं मैं घर नहीं छोड़ सकता या मेरा यह काम है मेरी बेटी है तो यह नहीं छोड़ पाओगे आप भगवान के पास नहीं जा पाओगे तो ये प्रेम आपका मंत्र जाप से आता है माया से हटने लगते हो आप तो ये जो कनेक्शन है जिसकी बात आप कर रहे हैं भगवान से कनेक्शन हम बिठाते हैं या
7:45 भगवान हमारे से कनेक्शन बिठाते हैं दोनों तरफ से होना चाहिए भगवान भी चाहते हैं आप बिठाओ लेकिन आपके कर्मों पर निर्भर करता है अभी समय समय नहीं आया तो भगवान नहीं चाहेंगे। अभी भगवान चाहते हैं आप समय बढ़िया से अभी काटो। अभी मेरे पास आने का समय नहीं आया। अभी कर्म वरम आपके बचे हैं। एंजॉय करो। जब वो पूरे हो जाएंगे तब आप मेरे पास आना। तब भगवान मन भी लगाते हैं। कुछ लोगों का अगर जल्दी मन लग रहा है तो भगवान की वजह से मन लग रहा है। इसमें दो फैक्टर्स आते हैं। जहां तक मैंने देखा है। या तो आपके पेरेंट्स स्पिरिचुअल होते हैं या तो आप पूर्व जन्म से स्पिरिचुअल रहे होते हो। क्योंकि कई बार ना पेरेंट्स की तपस्या का फल होते हो आप। तब आप आध्यात्मिक बन सकते हो। तो आपके पेरेंट्स से तो स्पिरिचुअल रहे हो या पूर्व जन्म में आपने कोई भक्ति की है या उनका कोई था ऐसा कुछ पूर्व जन्म का कर्म आपके माता-पिता का कि एक ऐसी सोल भेजी है भगवान ने जो आपके शायद पूरे कुल का उद्धार कर देगी। एक भजन करने वाला व्यक्ति अगर आपके
8:31 कुल में आ गया जो मंत्र जाप करता है तो आपका पूरा कुल सिक्योर हो जाएगा। जो गए हैं वो तो खुश ही खुश जो जा रहे हैं वो भी खुशी ही खुश। तो मुझे बताइए धर्म और अध्यात्म में क्या फर्क है? देखो अध्यात्म तो होता है स्पिरिचुअलिटी। भगवान से प्रेम यह आप इसमें ना यह नहीं देख सकते कि भगवान की क्या शेप है। अब आप जीसस में भी फिर जाओगे। आप मुस्लिम में भी फिर प्रेम स्पिरिचुअलिटी ढूंढ रहे हो। आप हिंदू में भी ढूंढ रहे हो। आप जैन में भी ढूंढ रहे हो आप। आप हर जगह ढूंढ रहे हो। स्पिरिचुअलिटी भेद नहीं करती धर्म के आधार पर। लेकिन धर्म जो होता है ना वो जैसे एक हिंदू हो गया। है ना? तो वो फोकस कर रहा है थोड़ा सा कि आपके ये भगवान है। इन्हीं की तरफ रहो आप। वह आपको एक्सपोज़र नहीं दे रहा है। स्पिरिचुअलिटी हर कोई फॉलो कर सकता है। लेकिन धर्म सबका अलग-अलग होता है। लेकिन सारे धर्म वाले जाएंगे स्पिरिचुअलिटी में ही। तो स्पिरिचुअलिटी
9:18 ज्यादा बढ़ा है। तो व्यक्ति को धर्म फॉलो करना चाहिए या अध्यात्म फॉलो करना चाहिए? अध्यात्म फॉलो करना चाहिए। क्योंकि धर्म तो एक तरीके से हमारा हम लोगों के बनाए हुए हैं। धर्म को लेके ऐसा कुछ कहा नहीं। देखो हिंदूइज़्म में तो सब समान है। हिंदुस्तान में आप ऐसा नहीं है कि हम किसी से हेट करते हैं या किसी से धर्म पूछते हैं। आप कौन हो? जैसे कोई मेरा फ्रेंड है। अब वो तो नाम से पता लग जाता है जरूर सरनेम से। लेकिन अगर किसी का सरनेम है नाम दूसरा हो तो हम देख के नहीं पता लगा सकते कौन कैसा है। सब मिलजुल के रहते हैं। तो ये इंसानों के बनाई हुई चीजें हैं जो भेदभाव लोग करते हैं। अदरवाइज आप आराम से रहिए। आपको धर्म के बीच में ज्यादा नहीं फंसना चाहिए। अगर ट्रू आध्यात्मिक व्यक्ति कोई है तो वो धर्म में इतना नहीं फंसेगा। वो स्पिरिचुअलिटी फॉलो करेगा और सब साथ में एक साथ बढ़ेंगे आगे। जिसको जो पसंद हो। तो आध्यात्मिक जो लोग होते हैं वो धार्मिक नहीं होते हैं। हो सकते हैं। सबकी अपनी चॉइस है। देखो
10:04 डिपेंड करता है आप आध्यात्मिक में आपके बोलने के तरीके से पता लग जाएगा। अगर आप अभी भी धर्म में फंसे हुए हो ना कि आपको बस यही समझ में आ रहा है कि नहीं हिंदू ही हिंदू होता है। मुस्लिम गलत होते हैं या क्रिश्चियन गलत होते हैं। देखो हो सकता है उनमें कुछ आदतें गलत हो। है ना? हो सकता है कि देखो गलत लोग तो हर धर्म में है। हिंदू में भी बहुत से लोग हैं जो बहुत गलत कार्य करते हैं। अभी अमेरिका में एक वीडियो वायरल हो रही है एक लेडी की जो कि चुरा के जा रही थी सामान Instagram पे बहुत वीडियो वायरल हो रही हैं। तो वो पूरे हिंदुस्तान का नाम बिगाड़ दिया ना उन्होंने। पूरे हिंदुस्तान पे नाम गलत लगा कि इंडियंस तो ऐसे होते हैं। तो इंडियंस में वो नहीं देख रहे कि वो मुस्लिम थी या हिंदू थी। इंडिया का नाम खराब हुआ। तो एज एन इंडिया आप सबसे ऊपर रखो। उसके बाद धर्म को रखो। पहले आप हिंदुस्तानी हो। तो धर्म में यह जो वर्चस्व की लड़ाई है आपको लगता है कि कोई धर्म जो है वह दूसरे धर्म से
10:50 ऊपर होता है या इन बातों का कोई मतलब नहीं है। अध्यात्म फॉलो करना चाहिए अगर सही रास्ता पकड़ना है तो। बिल्कुल सही बात है। देखो अध्यात्म फॉलो करना चाहिए। धर्म तो हम लोगों ने बनाए हैं। सारे धर्म में अगर आप सबकी बुक्स पढ़ोगे ना तो गोल तो आपका एक ही है। माया से अलग कर रहे हैं आपको सारे धर्म। कह रहे हैं कि फंसो मत आप इन चीजों में। आपका अल्टीमेट गोल एक अलग है। वहां पर आप जाइए। मेन आपका गोल होता है भगवान तक पहुंचना। सीढ़ियां भले ही अलग-अलग है लेकिन एक ही द्वार तक आपको पहुंचा रही है। लेकिन ना आज के समय पे क्या हो रहा है? सिचुएशन के हिसाब से हमें बदलना पड़ता है। बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें मैं मुस्लिम या हिंदू कह के नहीं कहूंगा। मैं कहूंगा कि वो पढ़े लिखे नहीं है ज्यादा। हम जिन्होंने ज्ञान नहीं लिया है ना, पढ़े लिखे नहीं है। चाहे वो हिंदू हो, चाहे वो मुस्लिम हो, चाहे वो क्रिश्चियन हो, वो
11:35 गलत ही बातें करेंगे। तो आपको पढ़ाई करनी जरूरी है। जब आप पढ़ाई करने लगोगे तभी आप समझ पाओगे। तो मैं उन्हें अनपढ़ लोग जो हैं मैं उनसे कहूंगा आप सावधान रहो। धर्म में मत फंसो। अगर कोई मुस्लिम भी है, पढ़ा लिखा है तो वह बहुत अच्छा होगा। आप कभी बात करके देखना। मैंने बहुत से एजुकेटेड मुस्लिम लोगों से बात की है। क्रिश्चियन लोगों से बात की है। उनको कोई फर्क नहीं पड़ता आप कौन से धर्म से हो। वो आराम से रहते हैं। लेकिन हां कोई अनजुटेड है तो तो वो हिंदू भी खराब है और कोई अनजुटेड है तो वो मुस्लिम भी खराब है। तो ज्ञान बहुत जरूरी है। विद्या माता के पास जाना बहुत जरूरी है आपके लिए। धर्म क्या अध्यात्म की ओर ले जाता है? ले जा सकता है। अगर आपको गाइड करने वाला सही है तो अगर आपको कोई कट्टर इन चीजों में फंसा रहा है तो आप गड़बड़ करोगे। अगर सही तरीके से आपको टीचर अच्छा मिल गया जो धर्म भी फॉलो कर रहा है अध्यात्म की तरफ ले जाना चाह रहा है तो वो सही तरीके से
12:21 लेके जाएगा। आमतौर पर तो मोस्टली सारे अच्छे ही हैं। बट कहीं ना कहीं कुछ एंगल आ जाता है। लेकिन आज की स्थिति को लेके थोड़े से लोग चेंज हो रहे हैं क्योंकि अभी बहुत से लोग कह रहे हैं कि हमें हिंदू राष्ट्र चाहिए। वो उनकी मांग अभी स्थिति के हिसाब से चल रही है। मेरे अकॉर्डिंग ना हिंदू राष्ट्र नहीं हिंदुस्तान राष्ट्र चाहिए। हिंदुस्तान कैसे कि मतलब जो अपने आप को इंडियन मतलब कह रहा है, एक्सेप्ट कर रहा है कि मैं इंडियन हूं। मैं इंडिया को रिप्रेजेंट कर रहा हूं। मैं इंडियन हूं उसके लिए राष्ट्र है। जो अपने आप को इंडिया नहीं मानता है, धरती को माता नहीं मानता या अपने देश के झंडे से प्रेम नहीं करता है। उसके लिए जगह नहीं है हमारे मन में। चाहे फिर आप मुस्लिम हो, चाहे आप क्रिश्चियन हो, चाहे आप हिंदू हो। अगर आप देश के झंडे से प्यार करते हो, देश से प्यार करते हो, देश की भूमि से प्यार करते हो, जय हिंद बोलते हो, भारत माता की जय बोलते हो तो आप इस देश में बिल्कुल रह सकते हैं। आपका ही राष्ट्र है ये।
13:07 बिल्कुल। अध्यात्म की ओर आते हैं क्योंकि हमारे पास तो अध्यात्म का मार्ग भी है जो ज्यादा गहरा है और आपको वाकई में ईश्वर से कनेक्ट करता है। तो सिद्धि की बात कर लेते हैं। सिद्धि कैसे हासिल की जा सकती है? सिद्धि एक खिलौना है। जैसे दिव्य दृष्टि एक खिलौना है ना सिद्धि भी एक खिलौना है। अब क्या होता है कि आपको भगवान तक जाना है तो भगवान कुछ खिलौने फेंक देते हैं आपकी तरफ। अब आप रोने बंद कर देते हो। खिलौने में मस्त रहते हो। अगर आप अभी भी रोते रहोगे तो भगवान तक पहुंचोगे। सिद्धि ना आपको पावर दे देती है। लेकिन एक ऐसी पावर जो कि शायद आपको मिलनी तो बहुत बड़ी थी। सोचिए आपको गाड़ी मिलनी थी लेकिन साइकिल फेंक दी। साइकिल भी खुश हो गए आप। तो छोटी पावर मिल गई आपको एक। तो सिद्धि आपको भटकाती है। जब भी आप जाप करने शुरू करते
13:53 हो ना अलग-अलग प्रकार की सिद्धि आपसे कनेक्ट करने लगती है। मैंने ओम नमः शिवाय का जाप शुरू किया था। मुझे ना हनुमान जी के दर्शन होने शुरू हो गए थे। जैसे सबके टीचर होते हैं मेरे भी टीचर थे। मैंने भी उनसे पूछा कि चेक चेकिंग कराते हैं। चेकिंग एज इन कि हमारी एनर्जी देखो कि कैसी क्या मतलब मैं जो भी चटिंग कर रहा हूं हाउ इट इज़ वर्किंग? तो मेरे को खुद भी बहुत ज्यादा अनुभव हो रहे थे हनुमान जी की जिस किसी के साथ भी हनुमान जी कनेक्ट करते हैं ना कुछ अनुभव होते हैं। एक तो हनुमान जी की जब एनर्जी कनेक्ट करती है तो आपकी बॉडी में ना आप जब भी सोओगे तो आपको या तो मंकी या उड़ने के सपने बहुत आते हैं। आप उड़ रहे हो, छलांगे मार रहे हो, बंदर दिखेंगे बहुत ज्यादा आपको। अगर आप हनुमान जी की ब्लेसिंग है तो हनुमान जी के मंदिर दिख रहे हैं तो ये सब अनुभव होने शुरू हो जाते हैं। ये जब अनुभव होने शुरू हुए तो मुझे पता लगा हनुमान जी कनेक्ट कर रहे हैं। वो हनुमान जी ने हनुमान जी की सिद्धि कनेक्ट करती है। फॉर्म होती है एक उनकी ना
14:38 एनर्जी की फॉर्म होती है। एक वो एनर्जी हमारे साथ कनेक्ट करती है। अब आप वो सिद्धि किस काम की है? सपोज आप प्रार्थना कर रहे हैं कि मेरे को नेगेटिविटी परेशान कर रही है। मेरी सुरक्षा करो। तो वो सिद्धि एक फॉर्म की तरह आपके पास खड़ी है। वो आपकी सुरक्षा करती है। आपकी सुरक्षा करेंगी। अब ये सिद्धियां ही लोग नेगेटिव भी इस्तेमाल करते हैं। अब सपोज कोई तांत्रिक है। अब आपको उसने आपके माइंड की एनर्जी को ब्लॉक करना है। आप केस करने वाले हो कोर्ट केस। तो इस केस में तांत्रिक क्या करेगा? अपनी सिद्धि को बोलेगा कि अजीता जी के जो माइंड में जो मेरे बारे में सोच रही है ना कि माइंड ब्लॉक कराओ। मेरे बारे में वो गलत ना सोचे और मेरे ऊपर केस ना करें। तो सिद्धि जाके आपके माइंड को चेंज कर सकती है। इसीलिए ये पावर है। सिद्धियां नजर आती हैं। उनको देखा जा सकता है। देखा जा सकता है। एक एनर्जी के फॉर्म में कैसे दिखती है? देखो अब हनुमान जी की सिद्धि हनुमान जी की तरह दिखेगी। पांच
15:24 जैसे अगर पावरफुल सिद्धि है तो पांच फेस के साथ पंचमुखी हनुमान जी बहुत सारे हाथों के साथ दिखेंगे। कोई हनुमान जी भजन करते हुए दिखेंगे। मतलब वो भक्ति भाव दे रहे हैं। हनुमान जी के अलग-अलग फॉर्म्स है ना शक्ति फॉर्म अलग है। एक भगवान राम के धुन में एक अलग मग्न है। एक अलग फॉर्म है। तो अलग-अलग फॉर्म कनेक्ट करती है हनुमान जी की। ऐसे लेकिन हम लोगों की जो सिद्धियां है ना यह मूल रूप से हमें प्रोटेक्ट करने के लिए ज्ञान देने के लिए होती है। तंत्र वाली सिद्धियां होती है जो बुरा करती है। हमारी सिद्धियां बुरा नहीं करेगी क्योंकि हमारी सिद्धि सात्विक है। उनमें उनको पता है कि अगर मैंने किसी का अहित किया तो इसके ऊपर जो है ना इंपैक्ट आएगा कर्मों के अनुसार। इसको मोक्ष नहीं मिलेगा। लेकिन सिद्धियां ना मोक्ष में बाधा बन जाती है। इसलिए हवन के ना लास्ट में मैं हमेशा कहता हूं हाथ में जल लेके ये बोलो कि जो भी मेरे से सिद्धियां कनेक्ट करती है ना यह मेरे मोक्ष में बाधा ना बनके मुझे मोक्ष का रास्ता दिखाए। सिद्धि आपको मोक्ष नहीं होने देती। आपको भी सिद्धि बना देती है।
16:11 सिद्धि क्या होती है? सिद्धि हम लोग ही हैं। हम सिद्धि बनेंगे। अगर मैं सही मार्ग पे नहीं चला तो मैं भी सिद्धि बनके घूम रहा और शायद आपके अगर आने वाली जनरेशन पूजा कर रही तो मैं भी कहीं उनके साथ कनेक्ट ना कर रहा हूं। तो मैं बताता हूं सिद्धि कैसे बनते हैं। हमारे बॉडी में तीन चीजें होती है। एक तो मैं आपके सामने बैठा हूं। उदित फिजिकल फॉर्म में मेरा शरीर है जो मरने के बाद टाटा बाय-ब हो जाएगा। पांच फॉर्म्स है हर धर्म के अनुसार जहांजहां ले जाओ। एक मेरी आत्मा है जो बहुत पवित्र है जिसका कोई शेप नहीं है। गोल आकार में होती है और वह पहुंच जाती है सीधा। हमारे आत्मा परमात्मा जो परम आत्मा है उनके अंदर आत्मा ऐड हो जाएगी। फिर आता है सूक्ष्म शरीर। सूक्ष्म शरीर मेरी तरह ही दिखता है। इसकी गति होती है। यह नर्क जाएगा, स्वर्ग जाएगा, पितृ में जाएगा या क्या करेगा? जब कोई व्यक्ति जाप करने वाला होता है ना, उसके सूक्ष्म शरीर बहुत सारे होते हैं। आपने कई बार ऐसा देखा है कि आप जिन गुरु
16:57 को फॉलो करते हो, उनके बहुत स्वप्न आपको आते हैं। या गाइडेंस मिलती है आपको। कोई ऐसा कोई टीचर अगर आपके मन में तो बार-बार आपके सपने में आके ना आपको गाइडेंस दे जाएगा। जो भी मन में सवाल होंगे पूरे हो रहे हैं। अब गुरु तो बैठा है वृंदावन में। आपके जो गुरु जी हैं फॉर एग्जांपल वो कैसे स्वप्न में आ रहे हैं आपके? उनके सूक्ष्म शरीर आपके स्वप्न में आ रहे हैं। उनके सूक्ष्म शरीर 24 घंटे काम करते हैं उनके स्टूडेंट्स के लिए जिन लोगों को गाइडेंस देनी है। तो एक आध्यात्मिक व्यक्ति के बहुत सारे स्वरूप होते हैं उनके अंदर। वो निकल निकल निकल निकल के अध्यात्म में अच्छा कार्य करने जाते हैं। भगवान की तरह। भगवान के अनगिनत है। हमारी गिनती कर सकते हैं। 100 50 10 20 होते हैं। तो हमारे मरने के बाद ना ये अभी भी पृथ्वी पर रहेंगे। यह सूक्ष्म शरीर कार्य करते रहेंगे। हमारी तो गति हो गई लेकिन हमारे सूक्ष्म शरीर जो हमने तपस्या करके यहां बनाया ना यह सिद्धियां बनती है। मैंने अगर जीवन भर हनुमान जी की पूजा करी है तो मेरे
17:42 हनुमान जी की सिद्धियां होंगी अंदर बहुत सारी। मतलब मेरे सूक्ष्म शरीर हनुमान जी की सिद्धि बनके पृथ्वी पर ही रह के लोग कल्याण करेंगे। लोगों की मदद करेंगे। इसीलिए तो आप देखोगे ना कि आप नोटिस करो तो कुछ लोगों के अंदर कुछ ना कुछ आ रहा है। आपने अभी देखा हो ना बड़े चीज़ हो रही है। अब आप देखोगे कि पहाड़ों में ऐसा होता है उत्तराखंड में। तो आप देखो कि उत्तराखंड में आने वाले व्यक्ति में उत्तराखंड की भाषा बोल रहा है। हरियाणा में आने वाली हरियाणा क्योंकि वहां के ही लैंग्वेज के लोग हैं जिन्हों सिद्धि बन गई। तो ये सिद्धियां आती है। एक तो ये सिद्धि होती है छोटे लेवल की। एक सिद्धि होती है डायरेक्ट भगवान के द्वारा दी गई। ये सिद्धि बड़ी होती है। ये किसी की बॉडी में नहीं आ सकती। और इसके लिए आपको ज्यादा तपस्या करनी पड़ती है। ये होता है मेन सिद्धि प्राप्त करना। ये स्पेशल पावर है। जो बड़े संतों के पास जो बड़े लेवल की पावर होती है। इन छोटे चीजों में नहीं हमें फंसना चाहिए। वैसे तो दोनों सिद्धियों में नहीं फंसना चाहिए। बट
18:29 सिद्धियां तो आएंगी क्योंकि बिना सिद्धि के ज्ञान नहीं मिलेगा आपको। जब आप ध्यान लगाते हो ना आपको ज्ञान मिलता है भगवान तक कैसे पहुंचना है ये कैसे मिला। कई चीजें मुझे खुद नहीं पता मुझे कैसे पता है। ध्यान से ध्यान में मेरी आत्मा ने मुझसे कनेक्ट करके सिद्धि ने कनेक्ट करके बहुत सी बातें बताई है। जो मैं आज खड़ा हूं मेरा कोई ऐसा तो नहीं है। बहुत से बड़े-बड़े गुरु रहे हैं या कोई मेरे से सिमिलर बातें कर रहा है। क्यों नहीं कर रहा? क्योंकि ये शायद ज्ञान मुझे आत्मज्ञान हुआ है। अपने आप से पता लगा है। मैंने कहीं से पढ़ा नहीं है या कहीं से किसी से सीखा नहीं है। अपने आप से पता लगा है। ऐसा होता है। सिद्धियां दिखाई भी देती है। दिख सकती है सिद्धियां। कौन देख महसूस भी होती है सिद्धियां जब आप जाप करोगे स्पेशली मां काली हनुमान जी ना बहुत जल्दी फील होते हैं जागृत है कलयुग में बहुत जाप करते करते आप फील करते हो आपके पीछे खड़े होकर आपको कोई देख रहा है आप कभी ट्राई करना थोड़ा लंबा जाप करोगे ना आप जाप करते-करते आपको लगेगा कोई देख रहा है आप पीछे मुड़ के देखोगे कोई नहीं होगा
19:14 और ना आपको वाइब्रेशन फील होगी जब भी आप उनका ध्यान करोगे या उनको याद करोगे तो आपकी बॉडी हल्की हिलने लगती है। करंट आता है बॉडी में। में अभी भी मैं ध्यान करूंगा तो मेरे को थोड़ा बॉडी में कुछ फील होगा कि कोई ना कोई स्पेशल एनर्जी मेरे आसपास है। पावर है। आपको एनर्जेटिक फील होगा बहुत ज्यादा। यह सारी चीजें होती है। बट सिद्धि के ना नियम होते हैं। ऐसे व्यक्तियों को सिद्धियां प्राप्त नहीं होती जो ब्रह्मचर्य नहीं पालन करते हैं। आपको सेक्सुअल विचारों को बहुत कम करना होता है। आज की जनरेशन मास्टरबेशन में फंसी हुई है। ये लोग नहीं अध्यात्म में कभी प्रगति कर सकते हैं। ना नॉर्मल लाइफ में प्रगति करेंगे। तो आपको ब्रह्मचर्य का पालन सेलेबसी कहते हैं। यह बहुत जरूरी है। इसके अलावा मंत्र जाप करना बहुत जरूरी है। जिन्होंने मंत्र जाप तपस्या नहीं की उनके पास कोई सिद्धि नहीं होती। कि भले ही वो कितना ही बोल ले नेगेटिव चीजें हो सकती है। हां शिव जी को दे दे आपको तो बात अलग है। लेकिन आपकी बॉडी नहीं झेल सकती। तो आपको बॉडी को रेडी करना पड़ता है। मंत्र जाप करके ब्रह्मचर्य का पालन करके ध्यान
19:59 करके जाप करके साधना करके खानपान आपका शुद्ध होना चाहिए। ये सारी तो आपने दो तरह की सिद्धि बताई। एक तो जो ईश्वर से आपको प्राप्त होती है और एक जो हम लोग हैं जो हम लोग हैं। तो दोनों सिद्धियों को हासिल करने का तरीका क्या अलग होता है और दोनों सिद्धियां जो होती हैं उनमें फर्क क्या होता है? भगवान के लेवल की जो सिद्धि हमें प्राप्त होती है ना वो कभी अगर आप कोई नजर से देख पाए जिनके पास दिव्य दृष्टि देख पाए तो वो बहुत आलौकिक बहुत बड़ी और बहुत विराट स्वरूप होता है। किसी के भी शरीर में नहीं आ सकती ऐसी वो बहुत बड़ा करंट है। बहुत हैवी एनर्जी है। बहुत पावरफुल है। वो आपसे कभी बात नहीं करेंगी। उनका काम आपको सुरक्षा देना है। ज्ञान देना है। बस वो आप ध्यान में दर्शन कर पाओगे। अभी आपको पता करना है ना आपके पास कौन सी स्थिति है। मैं सिंपल बात कहता हूं। आप आंखें बंद करिए दो मिनट के लिए और 510 मिनट के लिए
20:45 आंखें बंद करके बैठ जाओ प्रार्थना करके कि जो भी आपके साथ एनर्जी है बताएं तो वो ना आपको अपने आप ही उस अंधेरे में फसेस दिखने लगेंगे आपके सिद्धि के हनुमान जी दिख रहे हैं या मां की आंखें दिख रही हैं या शिव जी दिख रहे हैं त्रिशूल दिख रहे हैं तो आप पता लगा पाओगे अच्छा इनकी एनर्जी कनेक्ट करती है सिद्धियां जो होती है ना ये बेसिकली ग्रामीण देवी देवता हैं एक तरीके से जैसे आप देखोगे शिव जी की सिद्धि नहीं होती कभी भी हनुमान जी की भी नहीं होती ये गण होते हैं हनुमान जी के जिन्होंने जीते जी हनुमान जी की पूजा की है वो सिद्धियां बन रहे हैं जैसे मैंने आपको बताया ना मैंने जीते जी पूजा तो मैं सिद्धि बन जाऊंगा। एक तभी तो मुझे हिंदी आ रही है। हनुमान जी संस्कृत नहीं आनी चाहिए। हनुमान जी को हनुमान जी की तो भाषा समझ ही नहीं पाए वो क्या बोल रहे हैं। हमें क्या पता हिंदी बोल रहे हैं क्या बोल रहे हैं। हिंदी क्यों बोल रहे हैं? है ना? सिद्धियों को कैसे सब कब से हनुमान जी को कब से हिंदी आने लगी? संस्कृत बोलनी चाहिए। वैसे तो उनको सब आता होगा। सारी भाषा इंग्लिश भी आती होगी। बट इन जनरल से मैं सवाल पूछ रहा हूं। तो हम लोग हैं। ये
21:31 छोटे-छोटे छोटे-छोटे एनर्जी हैं। मुख्य रूप से सिद्धि होती है बड़ी। जैसे अब आप देखेंगे कंबल वाले बाबा कैंची धाम बहुत फेमस है ना वो जो कंबल कहते हैं हनुमान जी बाबा नीम करौली। बाबा नीम करोली जी तो वो उन्होंने प्राप्त किया हनुमान जी को पूरा शिव पुराण में वर्णित है कि आप अगर 18 करोड़ की संख्या पार कर देते हो ना जप की तब आप भगवान बन जाते हो भगवान बन जाते हो का मतलब कि आपने भगवान को पा लिया एक तरीके से इसलिए आप देखोगे कि उनका कभी भी ध्यान किया जाए हमारे नीम करौली बाबा जी का तो हनुमान जी से बहुत अच्छा कनेक्शन और ये आज तक कल भी मैंने बहुत से लोगों से बात की है तो मुझे रोज एक ना कोई मिलेगा कि भैया मैं वहां गया था मुझे बहुत पॉजिटिविटी फील हुई ये है एक्चुअल में सिद्धि का कमाल ये है एनर्जी जो उन्होंने प्राप्त की है। छोटे-छोटे तो हम सब भी करके बैठे हैं। उसमें क्या है? छोटे-मोटे चमत्कार तो सब कर लेते हैं। आपके बारे में बता देंगे। ये सब कर लेंगे। चमत्कार करना आप कोई बहुत
22:17 बड़े लेवल पे नहीं हो गए। एक्चुअल में दिखावा नहीं करते वो गुरु जो एक्चुअल में गुरु हैं। वो कभी नहीं दिखाएंगे आपको। वो गुप्त रहेंगे। आप पता ही नहीं लगेगा आपको कहां पे रह रहे हैं। बड़ी मुश्किल से आप उन तक पहुंचोगे। वो भी भगवान पहुंचाना चाहेंगे तो। एक्चुअल में गुरु गुप्त हैं। आप ढूंढ नहीं सकते उन्हें कहीं। आपने बाबा नीम करौली का जिक्र किया तो बाबा नीम करौली के बहुत सारे फॉलोअर्स हैं और जिस तरह से जो बहुत सारी स्टोरीज भी हैं कि कई सेलिब्रिटीज कई बड़े लोग वो इसलिए बड़े बने क्योंकि वो बाबा नीमकरौली के आश्रम गए थे वहां पर उन्होंने दर्शन दिए और बाबा नीम करौली का आशीर्वाद उनके ऊपर है। तो मैं भी ऐसे बहुत सारे लोगों को जानती हूं जिनको लगता है कि उनके करियर में ग्रोथ नहीं हो रही है या उनको बड़ा आदमी बनना है। तो उनको लगता है कि बाबा नीम करौली का आशीर्वाद लेकर आते हैं तो ऐसा हो जाएगा। तो क्या वाकई ऐसा हो जाता है?
23:02 देखो उन्होंने बहुत तपस्या की है। उनकी तपस्या इतनी ज्यादा है कि अगर आप उनके 1% भी तपस्या कर लेते हो तो आपके कर्म मिट रहे हैं। तो भगवान का आशीर्वाद है कि आपको अगर कोई सिर्फ दर्शन ही कर ले ना आपके उस जगह के तो आपका तपस्या का कुछ फल उसको उनको मिल जाता है। और उनके 1% तपस्या के फल से 1% भी नहीं होता होगा। 1% तपस्या के फल से आपके जो कर्म जो आपने करके आए थे वो कट जाते हैं तो आपका बढ़िया होने लगता है। मैं हमेशा यह कहता हूं कि अगर आप लाइफ में प्रगति नहीं कर रहे हो ना अभी एक लेडी है मेरे साथ वो ना बहुत परेशान है कि मेरे को ना अध्यात्म नहीं फॉलो करने देते हैं घर वाले परेशान करते हैं या मैं लाइफ में कुछ कर नहीं पा रही हूं तो मैं उन्हें यह कहता हूं कि आपको अभी कुछ नहीं करना है। पृथ्वी पर सब परेशान ही आए हैं। कोई सुखी होने नहीं आया है। आप सुखी रह रहे हो ना और कोई बुरा भी काम कर रहा है तो पूर्व जन्म के कर्म के कारण कर रहा है। एक बार आपका वो कर्म फिनिश हो गया तो फिर से आपकी बर्बादी
23:48 शुरू हो जाएगी। आप सिर्फ मंत्र जाप करो। देखो 100 साल की जिंदगी है। आपको लगता है आप 100 साल के लाए हो। कोई बात नहीं 100 साल के लिए परेशान होगे ना। जिसमें से 20 साल तो आप ऐसे ही नहीं जीते हो क्योंकि खराब हमारा दिल्ली का पोलुशन अल्टीमेट लेवल पर है तो नहीं जी पाते आप इतना खान-पान भी इतना पॉजिटिव नहीं है। तो वो जो 80 साल भी जीना है आप चैंटिंग करो। इतना धन इकट्ठा कर लो। गांधी जी वाला धन नहीं मंत्र जाप का। धन कि मरने के बाद आपको एक बढ़िया सी उपाधि मिल जाए। अच्छी सी एक अच्छी पोजीशन पर आप रह रहे हो मरने के बाद। तो पृथ्वी लोक पर तो कहते हैं देवता भी तरसते हैं आने के लिए। और स्वर्ग लोक में रहने वाले लोग भी कहते हैं कि हमें भेज दो हम भी तपस्या कर ले। मैं अभी मूवी देख रहा नरसिम्हा जी की महावतार नरसिम्हा। सतयुग का समय है। हम लोग कलयुग को कोसते हैं कि यहां तो कोई भजन करने वाला नहीं। आप सोचिए सतयुग में तो हिरण्यकश्यप था जो भगवान विष्णु का नाम
24:33 नहीं लेने देता था कि मैं मार दूंगा। यहां पे तो सारी आजादी है। भगवान विष्णु क्या कृष्ण जी क्या राम जी का सबकी पूजा करो आप। कोई मना नहीं कर रहा आपको। आज का समय तो कलयुग तो मेरे अकॉर्डिंग बेस्ट है। कितने तपस्या करनी पड़ती थी सतयुग में तब जाकर भगवान आते थे यहां पर तो आप 10 दिन की साधना करते हो आपको दर्शन हो जाते हैं। तो कलयुग मेरे अकॉर्डिंग किसने कहा कलयुग बेकार है? कलयुग तो सबसे बेस्ट चीज है। मैं तो खुश हूं कि मैं कलयुग में आया हूं। मैं पहले आता तो तो कुछ कर ही नहीं पाता। अच्छा सिद्धियों पे वापस लौटते हैं। ये बताइए कि सिद्धियों से क्या-क्या कार्य करवाए जा सकते हैं? और सिद्धियां क्या सिर्फ अपना स्वयं का कार्य करती हैं या दूसरों का भी करती सिद्धिया प्रेम से कार्य करती है। अगर आप आज मेरे से कनेक्ट कर रहे हो, मैं आपको अभी बोल दूं कि आप मेरे लिए रोटी बना दो। शायद आप आज बना देंगी। खुशी-खुशी नई-नई दोस्ती हुई है।
25:18 कोई बात नहीं हेल्प कर देती हूं। लेकिन मैं आपको रोज बोलता रहूंगा तो एक टाइम पर आकर आप तंग आ जाओगे कि मेरे को अपने काम नहीं करने क्या? मैं क्यों बनाऊं? तो आपको कनेक्शन जोड़ना पड़ता है। सिद्धि जब शुरुआत में आती है ना तो प्रसन्न होती है कि इसने मेरा जाप किया। वाओ। तो आपने प्रार्थना की किसी भी कार्य के लिए तो वो मान जाती है आपकी बात। मेरे साथ भी ऐसे ही हुआ। नया-नया था। मुझे भी सिद्धियों का शौक खिलौनों में तो मैं भी था। हर कोई फंसता है। तो मैंने भी प्रार्थना की थी कि मेरे इस कॉलेज में एडमिशन नहीं हो रहा है। प्लीज हो जाए। हालांकि वो अपनी मेहनत पर निर्भर करता है। बट हां सीट बिल्कुल फुलफिल हो चुकी थी। मैं दो नंबर से रह गया था। चांसेस नहीं थे मेरे आने के। सब बंद हो गया था। बट मैंने साधना की और मेरा नंबर उसी तक ही आया कि उदित का नाम आ गया। बस उसके पीछे के लोग सब रह गए। किसकी साधना की? मां दुर्गा की साधना की थी। मेरा प्रेम उन्हीं से ज्यादा था। बट हां मंत्र जाप मेरे ओम नमः शिवाय ही होते थे। बट दुर्गा मां के दर्शन ज्यादा होते थे मेरे को। तो वो नंबर आ गया। तो मैं ऐसा चमत्कार मैंने
26:06 कभी देखा नहीं था मंत्र जाप से तो मेरी मॉम को भी आज भी दिन याद होगा कि मैं मैं कांप रहा था यह सुनके कि कैसे हो गया? चांसेस थे ही नहीं क्योंकि टू बी ऑनेस्ट कोई भी चांसेस नहीं था कि मेरे होंगे। यह बात मैं ऑन रिकॉर्ड कह रहा हूं। कोई चांसेस नहीं था। मैं हैरान हो गया था ये देख के। लेकिन फिर मैंने मांगना शुरू किया। अब मेरी डिमांड और बढ़ी कि मुझे अब ये भी चाहिए। ये मुझे अब ये भी चाहिए। ये टीचर हटा दो। अच्छा नहीं है। कुछ नहीं हो रहा था अब तो। तो आप क्या गुस्सा हो गए ये मान क्यों नहीं रहे? तो पता लगा कि अच्छा प्रेम भावना जोड़नी पड़ती है। तब तक मुझे नहीं पता था। तो मैं उदास हो गया। क्यों नहीं हुआ? मैंने चटिंग कंटिन्यू रखी तो मुझे याद आया कि शायद ना मैंने सेटिंग बदल दी मंदिर की वजह से नहीं हो रहा था मैंने मंदिर की सेटिंग फिर से नॉर्मल करी अपनी बट तब भी कोई कार्य नहीं हो रहा अब नहीं मान रहे तब भी मैंने जाप कंटिन्यू किया कंटिन्यू किया तो वो देवी एनर्जी सिद्धि यही देखती है कि इसके मैं कार्य नहीं कर रही हूं पहले तो आते ही पावर दिखा देंगी अपनी कि मैं ये सब कर सकती हूं देख ले तूने मांगा तो लेकिन अब नहीं कर रही
26:53 क्योंकि एक बार कर दिया ठीक है अब वो टेस्ट फेज हो आपको अब परीक्षा शुरू हो गई परीक्षा सिर्फ वही पार कर सकता है जिनके मन में प्रेम हो भगवान के प्रति अब देवी या एनर्जी जो हमारे साथ कनेक्ट कर रही है मां वो देखेंगे कि ये मेरे लिए क्या कर रहा है। तो अब आपने जैसे मैं मनाली गया ना तो मेरे को तो बहुत लगाव है मां से बहुत ज्यादा जैसे मेरी रियल मां है तो मैं उनके लिए जैसे मैं अपने मॉम के लिए कोई गिफ्ट लाता हूं तो मैं कभी भी जाता हूं तो उनके लिए भी गिफ्ट लेकर आता हूं तो भाव है मैं रो रहा हूं बातें करता हूं उनसे रात को सोने से पहले नॉर्मली कि आप कैसे हो अच्छा ऐसा ऐसा हुआ बताता हूं जैसे नार्मल मां से तो ये भाव देखती है वो कि अच्छा ऐसे-ऐसे बात कर रहा है तो वो कनेक्शन बैठने लगा एक बेटा स्वीकार करने लगा जैसे मैंने माता स्वीकार कर लिया लेकिन सामने से भी स्वीकार होना तो अब प्रेम आ गया पहले शायद जबरदस्ती रोटी बनानी पड़ रही थी अब हमारा एक बहुत अच्छा अगर एक बॉन्ड बन तो आप प्रेम में बना दोगे ना मेरे लिए जैसे अपने बेटे के लिए बनाते हो। है ना? तो बनाने लग
27:39 जाओगे। तो अब वो निष्काम मतलब मेरे मन में बाद में आएगा लेकिन वो पूर्ण पहले कर देंगे क्योंकि वो माता बन गई है। पहले माता नहीं थी। पहले देवी थी ये जो बॉन्ड नहीं कनेक्ट हुआ लेकिन जब माता स्वीकार कर लिया आप प्रेम बन गया ना तब सिद्धि काम करती है। इस केस में लोग गलती क्या करते हैं? YouTube पे वीडियो देखेंगे। भैरव साधना कर लो। पावर मिलती है। भैरव साधना कर लेते हैं। आप मुझे ये बताओ भैरव जी के प्रति तो आपका प्रेम ही नहीं है। और भैरव जी तो खड़े हो गए पीछे आके। आपका तो प्रेम ही नहीं है। आप काम करते रहो। वो आप ही को ठोकते रहते हैं। आप ही की बैंड बजती रहेगी। यह लाइफ खराब होने लग जाती है। उन्होंने खराब नहीं की आपकी लाइफ। वो सिद्धि है। आप लोग हो वो सिद्धि। उन्हें क्या चाहिए? उन्हें भोग चाहिए कि आप उन्हें ना उनके लिए जाप करो। उनके लिए दिया जलाओ। उनके लिए धूप जलाओ या उनको कुछ दो। अब सिद्धियां क्या कहती हैं कि उन्हें ना कुछ खाने को दो। आप पावर दो। बलि जो मांग रही हैं क्यों मांग रही है? पावर
28:24 मिलती है सिद्धियों को। सिद्धियां कहती है मुझे पावर दो। ये बलि सिद्धियां लेती है। भगवान नहीं लेते। ऐसा होता है। तो भैरव जी की सिद्धि कौन बन रहा है? हम ज्यादातर भैरव जी या मां काली की उपासना तांत्रिक लोग करते हैं। हम भी करते हैं पॉजिटिव लेकिन हम सात्विक तरीके से करते हैं। वह तामसिक तरीके से करते हैं। सात्विक जो कर रहा है वो तो मोक्ष पा ही लेगा। तामसिक नहीं पा पाता ना। तो तामसिक सब सिद्धियां बन के घूमते हैं यहां वहां। इसलिए उनको तामसिक भोग चाहिए होता है कि उन्हें बकरा काट के दो, एग चढ़ाओ। अल्कोहल चढ़ाओ। ये सब से पावर मिलती है उनको। तो ये सब भोग देने होते हैं। तो यह पता कैसे चलता है कि सिद्धि को भोग देना है। सिद्धियां कैसे मांगती है अपने आप सपने में आके आपसे। जैसे पित मांगते हैं ना सपने में दिखेंगे मुझे कुछ दे दो। अच्छा ऐसे ही सिद्धियां भी दिखती है। आप चढ़ाते हुए लोगों को देखोगे ना चौराहे पे क्या-क्या रख के जाते रहते हैं। चौराहे पे श्मशान में आप देखोगे मैं तो एक
29:10 बार गया हूं। मेरे अभी ग्रैंडफादर की रिसेंटली डेथ हुई थी। मैंने एकमेशन ग्राउंड में गया हूं। तो मैंने देखा है पता नहीं क्या-क्या रखा हुआ था। एक तो परिवार वाले रो रहे हैं कि हमारे बेटे का कोई ऐशेस पर ही कोई कुछ कर करके चला गया। कोई यंग डेथ हुई थी ना किसी की। यंग डेथ पर तो स्पेशली तांत्रिक लोग करते हैं। उसे उठा के ले जाएंगे बच्चे को और बच्चे से अब कार्य कराएंगे। हम आत्मा तो चली गई। सूक्ष्म शरीर उठा लिया। तो आपको बहुत ध्यान रखना पड़ता है कि मतलब क्रिमेशन ग्राउंड पे बहुत सिक्योरिटी होनी चाहिए। तंत्र बहुत ज्यादा बढ़ रहा है आजकल। बहुत सी चीजें होती है। मैंने देखा पूरा यंत्र सा बनाया हुआ है ट्रायंगुलर शेप का। अब उस समय तो मैंने घर वालों को बताया भी नहीं था। मैं ये सब चीज़ स्टडी कर रहा हूं। सब लोग डर जाते हैं। तो मैंने देखा पूरा यंत्र सा बनाया हुआ है क्रिमेशन राउंड पे। यंग डेथ थी अबाउट 15 साल के लड़के की। और कुछ टाइम बाद बहुत टाइम बाद मतलब उन्होंने मुझसे कनेक्ट भी
29:56 किया और बताया भी कि ना मुझे सपने में दिखता है मेरा बेटा परेशान दिखता है। तो पता लगा कि उनको तांत्रिक जो है वो उठा के ले गया। उनसे काम करवाते हैं। जैसे आप जैसे आप उनके घर में गए कि मेरी जो ग्रैंड मदर है मुझे बहुत परेशान कर रही है। कोई सो एंड सो पड़ोसी परेशान कर रहा है तो पड़ोसी के घर में भेज देंगे इस नेगेटिविटी को। बोलेगी कि इसके घर में जाओ लड़ाई करवाओ। तो वो नेगेटिविटी जाकर लड़ाई करवाएगी। नेगेटिविटी कुछ केसेस में घुस सकती है। घर में कुछ भी नहीं। अगर आपके घर के बाहर ना दो प्रोटेक्शन होती है। एक तीन प्रोटेक्शन होती है मेनली। एक प्रोटेक्शन होती है आपके पितृ की। आप अगर घर पर खड़े हो, घर के सामने गेट है ना तो आपके राइट हैंड साइड पर पित्र खड़े होते हैं। पित यानी कि आपके एनसेेस्टर्स उनकी एस्ट्र बॉडी होती है फॉर प्रोटेक्शन। इस तरफ अगर सामने गेट है तो मैं राइट बता रहा हूं। मैं बाहर नहीं खड़ा हूं। मैं घर के अंदर ही खड़ा हूं। सामने गेट है मेन गेट। राइट पर पितृ, लेफ्ट पर कुलदेवी या देवता। कुलदेवी देवता कौन होते हैं? इनकी कुल में
30:41 पूजा होती आ रही है। सब लोग कर रहे हैं मां दुर्गा की पूजा ज्वाला मां जैसे होगी। तो ज्वाला ज्वाला ज्वाला पूजा हो रही तो उनका अधिकार हो जाता है तो उनकी सिद्धि खड़ी होती है। ज्वाला मां साक्षात नहीं उनकी सिद्धि होती है। ये दोनों करते हैं प्रोटेक्ट। तो किसी को भी आपके घर पे अगर नेगेटिविटी करनी है तो उसे आपके पितरों का और आपकी कुलदेवी देवता का नाम पता होना चाहिए। या तो तांत्रिक इतना एक्सपर्ट हो कि देख के पता लगा ले ये माता कौन सी है और यहां प्रोटेक्ट कर ले। तो इन दोनों को सबसे पहले बांधना पड़ता है। तांत्रिक ऐसे करते हैं। पहले आपके पितरों को गंदा कर देंगे। आपकी एनर्जी हटा देंगे। तब आपके घर में तंत्र भेजते हैं। हम तो आपको अगर आपके घर में कोई भी मंत्र जाप करने वाला व्यक्ति है तो तो आप बच जाओगे। अदरवाइज तो आपके घर पे नेगेटिविटी भर जाएगी और बहुत परेशानी आपको होगी। अच्छा तो सिद्धियों के जरिए क्या-क्या काम करवाया जा सकता है? नेगेटिव पॉजिटिव सिद्धियां कुछ भी कर सकती
31:27 हैं। कुछ भी कर सकती है। कुछ सिद्धियां तो ऐसी भी हैं कि आपको शायद हवा में भी उड़ा दे। लेकिन आपको पालन करना पड़ेगा ना। हनुमान जी के पास थी तो हवा में उड़ सकते हैं, छोटे हो सकते हैं, बड़े हो सकते हैं। लेकिन आप उस लेवल पे होने चाहिए कि आप प्राप्त कर सको। और जिनको प्राप्त होगी वो गुप्त हैं। वो बताएंगे ही नहीं आपको उन्हें प्राप्त है। वो क्या कर सकते हैं, क्या नहीं कर सकते। बताएंगे ही नहीं आपको। तो सिद्धियों के माध्यम से पैसा भी कमाया जा सकता है। बिल्कुल दे सकती हैं। सिद्धियां दे सकती हैं। बहुत सी ऐसे लेकिन इनके लिए जरूरत नहीं। अप्सराएं हैं ना इन कामों के लिए। भगवान ने देखो बहुत छोटी सी बात बताता हूं। जिन व्यक्तियों ने इतना जाप कर लिया ना उनको पैसों का लालच होगा ही नहीं। इतनी तो समझ आ गई ना और किसी में नहीं आई है तो मतलब आपने कुछ किया ही नहीं है। कोई साधु मुझे आज कह दे सिद्धि है कि मैं आपको बहुत पैसा दे सकता हूं तो आप किसी काम के ही नहीं हो। आपने कोई जाप ही नहीं किया। अगर आपके मन में ये भाव आ रहा है कि आप पैसा
32:13 दे सकते हो तो आप में कोई भाव ही नहीं। एक स्टोरी है। एक साधु ना बहुत महंगी घड़ी और बहुत महंगा फोन एयरपोर्ट लगा के बैठा होता है। ऐसे ही ट्रेन में बहुत सारे साथ में लोग होते हैं। वो लोग कहते हैं अरे बाबा किस काम के साधु हो तुम? ये क्या इतनी महंगी घड़ी पहन रखी है। महंगा बैग ले रखा है। वैसे तो तुम साधु के ड्रेस में में वो कहता है अच्छा बच्चा चाय पिलाएगा कहता हां पिलाऊंगा आ जाओ ट्रेन रुकी थी बाहर आकर बैठ गए तो सामानवामान साधु वहां पर रख के बाहर आ जाते हैं चाय पी रहे होते हैं वो पूछते हैं साधु से कि अरे बताओ बाबा आप तो कह रहे बताता हूं रुक जा तो चाय पी रहे होते हैं ट्रेन चलने लग जाती है अब वो कहते हैं अरे बाबा मेरा सामान है मैं जा रहा हूं तुम नहीं चलोगे तो बाबा कहते यही तो फर्क है तुझ में और मुझ में कि तेरा सामान वहां रखा है मेरा भी रखा है लेकिन मुझे नहीं चाहिए वो तुझे चाहिए तो वो भाग के जाते हैं साधु वहीं वो कहते हैं आज मैं यहां कल मैं कहां मुझे क्यों फर्क नहीं पड़ता ऐसे
32:59 हो जाते हैं साधु कि आपके पास भले ही है बट आपको ऐसा नहीं है कि आप जी नहीं पा रहे हो उन चीजों के बिना। तो जिस किसी के पास ये पैसा कमाने वाली सिद्धियां हैं उसको कोई फर्क ही नहीं पड़ता पैसों का। तभी भगवान ने दे रखी है। ट्रेडिंग में लोग सिद्धियों का इस्तेमाल करते हैं। बहुत से मैसेज आते हैं। ट्रेडिंग पता नहीं कैसे-कैसे वर्ड्स कहते हैं कि सट्टा एक और वर्ड है कि भाई इसकी कोई सिद्धि होती है क्या? तो ये हो जाओ। तो ठीक है। आपको बहुत से लोग इस इसका बिनेस बना हुआ है कि आपको सिद्धियां दे देते हैं। बट ऐसा कुछ नहीं होता। जो ट्रू में आपको देखो ये अध्यात्म है ही नहीं। वही बात आ गई। आप कहां फंस जाओगे कि अध्यात्म नहीं है। अध्यात्म को समझो। असली में आध्यात्मिक व्यक्ति आपको कभी भी यह नहीं कहेगा कि आप सिद्धियों का सिद्धियों का लालच नहीं देगा। ट्रेडिंग की सिद्धियां ले लो। ये सब कुछ नहीं होता। कोई जापवा-पाप नहीं होता इन चीजों का। और करोगे ना मैं तो कहता हूं कर लो मिल जाएगी सिद्धि। आप बदल जाओगे। दो महीने बाद आपको
33:45 कोई लालच ही नहीं होगा ट्रेडिंग का। आप कहोगे बस जो इससे बढ़िया चीज मिल गई। कुंडलिनी कैसे जागृत की जाती है? कुंडलिनी के बारे में बताइए। कुंडलिनी जागृत की। कि कुंडलिनी ना एक बॉडी में आपके एक ऐसा नेटवर्क है जो कि फोन वाले नेटवर्क से भी कई ज्यादा पावरफुल है। फोन का नेटवर्क आपसे अमेरिका में बात करा रहा है। अर्थ पे चलता है। आप मार्स पे बात नहीं कर सकते। कुंडलिनी का नेटवर्क आपका यूनिवर्सल लेवल पे काम करता है। आप फोन मिला सकते हो पूरे यूनिवर्स में कहीं पर भी। किसी से भी कनेक्ट कर सकते हो। अपने आप से भी कनेक्ट कर सकते हो। ऐसा है कुंडली का नेटवर्क। आप इसको कितना स्ट्रांग करोगे ये आप पे डिपेंड करता है। वाई-फाई है ये आपका। सिद्धियों से कनेक्ट करना है कुंडलिनी कराती है। मतलब जो चीजें दिखती नहीं है ना उन सब से कनेक्ट करवा सकती है कुंडलिनी आपकी। मतलब सिद्धि हासिल करने के लिए पहले कुंडलिनी को जागृत करना पड़ता है। बिना कुंडलिनी के कनेक्ट नहीं करेगी। भले
34:30 ही हासिल हो जाए। आप महसूस ही नहीं कर पाओगे उसको आपके आसपास है या नहीं। ओरा और कुंडलिनी जरूरी होती है। अच्छा तो कुंडलिनी को कैसे जागृत करते हैं? कुंडलिनी के सात चक्र होते हैं। दो-तीन तरीके से जागृत किया जाता है। एक तो कुंडलिनी के अपने खुद के बीज हैं। हम लम जो तिब्बत के अनुसार बताए गए हैं। तिब्बत कल्चर के अनुसार बताए गए हैं। हमारे क्रिश्चियन कल्चर के अनुसार बताई गई हैं। बहुत सी चीजें। जैपनीज ट्रेडिशन में बहुत सी चीजें हैं। बट इंडिया में कुंडलिनी को तो जागृत किया जाता है। ये किया जाता है मंत्र जप से। हमारे मंत्र ना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस है। एआई तो अब आया है। हमारा एआई भगवान का पहले से ही था। मंत्र आपको उतना देते हैं जितना आप झेल सको। ओम नमः शिवाय अगर आप कर रहे हो और आज आप हृदय चक्र तक ही जागृत कर सकते हो तो हृदय चक्रता तक ही जागृत होगी। एक भैया हैं मेरे ग्रुप में उन्होंने बोला कि भैया मेरी विशुद्धि चक्र पे कुंडली नहीं गले के
35:15 चक्र पे कुंडली नहीं। यहां चक्र होता है एक हमारे जहां गला घूम रहा है। अंदर जा रहा हूं ना मैं ऐसे सांस ले रहा हूं तो यहां चक्र होता है। इस चक्र की पावर होती है आपको वाणी में अभाव देना। यानी आपकी वोकल स्ट्रेंथ इतनी स्ट्रांग होती है कि आप कुछ बोलते हो तो लोग मोहित होते हैं आपकी बातों पर। ये वोकल स्ट्रेंथ है आपकी। ये एज एन न्यूज़ एंकर आपको चाहिए होती है। कथा वाचकों को चाहिए होती है। क्या-क्या वाणी से अट्रैक्ट हो। ये बहुत बड़े-बड़े सिद्ध होते हैं। उनसे आप सुनोगे ना तो सुनते ही लगेगा। अरे बहुत अट्रैक्टिव है जो बोलते हैं। ये सिद्धि है एक विशुद्धि चक्र की। अब वो कह रहे हैं भैया ये मेरा विशुद्धि चक्र क्लीन ही नहीं हो रहा। क्यों नहीं क्लीन हो रहा? आपको भगवान ने क्यों नहीं पावर दी विशुद्धि चक्र की? क्योंकि ना आप बहुत बुरा बुरा बोलती हो। आप मैंने बोला कि अच्छा मुझे एक बात बताओ। क्या आप में इतनी सहनशीलता आ गई कि आप लड़ाई कम कर रहे हो? आप कम गलत बोलती हो? क्योंकि विशुद्धि चक्र की पावर पे आपका बोला हुआ सच भी हो जाता है। आप बहुत से संतों को देखोगे ना वो कह देंगे आपका लड़का होगा तो हो ही जाएगा। फिर ये
36:02 विशुद्धि चक्र की पावर है। अब आप रोज लड़ते हो अपनी वाइफ को कहते हो तू मर जा या तेरे साथ ये हो जाए वो हो जाए तो भगवान ऐसे व्यक्ति को पावर क्यों देंगे? तो आपको पावर तभी मिलती है मंत्रों के अनुसार जब आप उसके लायक हो जाते हो। जबरदस्ती जागृत करना तो हो जाएगा लेकिन उस केस में आप पागल हो सकते हो। कहते है ना कुंडली जागृत करने से पागल हो सकते हैं। वो उस केस में है। बीज मंत्रों का इस्तेमाल करते हुए ओम नमः शिवाय। ओम दुम दुर्गाय नमः या ओम नमो भगवते वासुदेवाय से जागृत कर रहे हो, मंत्रों से जागृत कर रहे हो तो उतना ही मिलेगा जितना आप झेल सको। तो धीरे धीरे धीरे धीरे करते-करते सभी चक्र जागृत होते हैं। फिर सबसे आखिरी का सबसे इंटरेस्टिंग खिलौना मिलता है आपको आज्ञा चक्र जिससे आप ऐसी चीजें देख सकते हो शायद कभी नहीं देखी। नेगेटिविटी दिखेगी, पॉजिटिविटी दिखेगी सब दिखेगा आपको। सातों चक्रों के बारे में एक-एक करके बात करते हैं। सातों चक्र कौन-कौन से होते
36:47 हैं? कहां-कहां पर होते हैं? और जैसे-जैसे एक-एक चक्र जागृत होता जाता है, उसके क्या सिम्टम्स होते हैं? वो कैसे पता चलता है? क्या लक्षण होते हैं? मूलाधार चक्र होता है गणेश जी का। हर चक्र के अंदर ना पॉजिटिव पार्ट भी है, नेगेटिव पार्ट भी है। मूलाधार के अंदर ना जो हमारा चक्र है, नीचे पत्ते कम होते हैं चक्र के। चक्र के पत्ते मतलब चक्र का ना कमल का फूल है। अच्छा। ऊपर जाते जाते सहस्त्रार आखिरी चक्र के हजारों पंखुड़ियां हैं फूल की। नीचे चार से शुरू होती है। शुरू होती है। तो नीचे का सबसे जल्दी चक्र जागृत होता है। मूलाधार चक्र है आपके आगे फ्रंट और बैक के सेक्सुअल ऑर्गन्स के अंदर बीच में। ये चक्र को जागृत करना थोड़ा मुश्किल है। बिना काम वासना छोड़े नहीं जागृत हो सकता। अच्छा। काम छोड़ने पर ही चक्र खुलेगा।
37:34 लेकिन ये रूट चक्र है। मूलाधारण जड़ से शुरू हो रहा है। तो सिर्फ सन्यासी लोग कर सकते हैं। देखो ब्रह्मचर्य व्रत का पालन कह रहा हूं मैं। यानी कि आपको अपने अंदर कंट्रोल होना चाहिए। अच्छा मतलब गृहस्थ भी कर सकता है। गृहस्थ भी कर सकता है। आपको ब्रह्मचर्य पर कंट्रोल होना चाहिए ना आपको कि अब आपको एडिक्शन नहीं होनी चाहिए। काम वासना बुरी है। काम बुरा थोड़ी है। आप समझिए काम वासना मतलब आप बहुत ज्यादा ही इंटू हो गए हो। ऐसे व्यक्ति को देखो मैं भी ब्रह्मचर्य का पालन नहीं करता था। पहले मैं बहुत बोल्डली बोलता हूं। हमारी जनरेशन को ये सिखाया ही नहीं गया। फोन पे खोलते ही बुरी चीजें दिखने लग जाती है। नहीं करता। मेरा दोस्त भी अभी स्टूडियो में प्रेजेंट है। नहीं करता था ब्रह्मचर्य का पालन। मैंने इसकी एनर्जी देखी। जी से बताया जो आपके सामने ही बैठा हुआ है कि आपका रूट चक्र सही नहीं है। हम जिम में मिले थे। मैंने बताया आपका रूट चक्र सही नहीं है। अभी भी मैं नई जिम में गया हूं।
38:20 मैं वहां पे लोगों को जिसका मुझे रूट चक्र गड़बड़ दिखता है बुला के पूछता हूं उनसे कि आप नहीं फॉलो कर रहे हो ब्रह्मचर्य। आपको मास्टरबेशन की बहुत गंदी आदत है। आपका दिमाग नहीं चलेगा कुछ टाइम बाद। तो मैं देख के आराम से बता देता हूं कि आपका रूट चक्र गड़बड़ है। आपके चेहरे पे वो तेज ही नहीं दिखेगा। आप डल दिखोगे बहुत ज्यादा। आपका दिमाग नहीं काम करेगा। जल्दी गुस्सा आ जाएगा। कोई काम नहीं मैनेज कर पाओगे। परेशान रहोगे। सबसे उल्टी-पुल्टी बातें करोगे। तो काम वासना से आपको उठना पड़ता है। यह उठते ही जैसे आपने 15 दिन का ब्रह्मचर्य पालन कर लिया। मैं नहीं करूंगा। मन में विचार आने दो क्रिया में नहीं आना चाहिए। कंट्रोल होना चाहिए। मन को क्यों कंट्रोल दे रहे हो आप? आप आप मन से बड़े हो। आपने मना कर दिया नहीं तो मन जो भी बोलता रहे तो चुप रहे। मन को बोलो शांत हो जाए। बिल्कुल। तो मन को आपको काबू करना है मन आपका काबू हो गया। आपका ब्रह्मचर्य काबू हो गया। पालन हो गया। अब आप पर शुद्धि की आवश्यकता नहीं है।
39:06 शुरुआत में कैसे होगी? मंत्र जाप हेल्प करेगा ना आपकी विचार शुद्धि होने में। मंत्र जाप एक एडिशनल पुश देता है कि मैं हूं आपके साथ। जब तक वो पुश नहीं मिलेगा तब तक आपको प्रॉब्लम रहेगी। अब आपका मूलाधार जागृत हुआ। अब आएगा स्वाधिष्ठान। अब जो पता कैसे चला कि आपका मूलाधार जागृत हो गया? काम वासना थोड़ा-थोड़ा आपका आपको लगेगा हां मैं रोक पा रहा हूं अब जो मैं पहले बहुत संयम आ जाएगा। संयम आ रहा है। क्रोध, लोभ, लालच ये सारा चक्र आपका ठीक होने लगता है। अब आपके अगली बारी आ जाती है हमारे स्वाधिष्ठान चक्र की। ये जो स्वाद स्वाद आपको पसंद है चाउमीन, मोमोज, स्प्रिंग रोल, छोले भटूरे, गोलगप्पे इन सब चीजों को छोड़ना पड़ता है। ये कहां पर होता है? ये उसके जस्ट अबव ये तीन चक्र पासपास है। हमारे नाभि के पास होते हैं। नेवल है ना आपका ये नाभि के पास हमारे तीन चक्र हैं। मूलाधार हमारा सेक्सुअल ऑर्गन उसके ऊपर स्वाधिष्ठान उसके ऊपर हमारा मणिपुर।
39:53 मणिपुर के बाद से हृदय है। मैं नीचे का समझा देता हूं। स्वाधिष्ठान और मणिपुर और हमारा रूट चक्र। नीचे तीन साथ में चक्र होते हैं। स्वाधिष्ठान स्वाद का मैंने बता दिया। मणिपुर में आपकी सिद्धियों का कनेक्शन है। मणिपुर में आने के बाद ना आपके पूर्व जन्म का जाप, आपका अभी का जाप सब कलेक्ट होता है। अब आपको एक पुश मिलता है। अब आप आते हो हृदय चक्र पर। हृदय चक्र मतलब हृदय चक्र जागृत होते ही आपकी इंट्यूशन पावर बढ़िया होने लगती है। अब आपकी इंट्यूटिवनेस आ गई। एकदम इंट्यूटिव हो गया। बढ़िया से इंट्यूशन पावर है। आप बता दोगे सामने वाला आपके बारे में क्या सोच रहा है। क्या बातें कर रहा है। यह इंट्यूशन है आपके अंदर कि आज तो बारिश आएगी या आज तो इसके साथ कुछ बुरा होगा। तो इंट्यूशन आपको आने लगती है। हृदय चक्र तब जागृत मानो जब भगवान के लिए आप रोते ही जा रहे हैं। अब तो वही हृदय चक्र में आपके भगवान होते हैं। ईस्ट
40:38 आप रोते जा रहे हैं। फिर आपका विशुद्धि वाणी की पावर जो हमने डिस्कस किया वोकल स्ट्रेंथ बोलना सच उदाना फिर आज्ञा चक्र का आखिरी खिलौना हमारा। फिर आखिरी सहस्त्रार भगवान की प्राप्ति जहां तक पहुंचना थोड़ा मुश्किल है। हम क्योंकि इसी इन्हीं खिलौनों में आप रह जाते हो। तो कुंडलिनी जागृत करने में कितना समय लगता है? कितनी साधना करनी पड़ती है? कितने समय में जागृत हो जाती है? आपकी पास्ट लाइफ पर डिपेंड करता है। अगर आप पहले से आध्यात्मिक रहे हो तो जल्दी कर पाओगे। ऐसा तो कोई भी व्यक्ति नहीं है जो पहली बार आ रहा हो। सब लोगों की आध्यात्मिक जर्नी रही ही होती है। पास्ट लाइफ में कोई भी नया नहीं है। कोई भी नया होता तो शायद एक चक्र भी जागृत नहीं कर पाए। तो जब हम बैठते हैं, जाप करने लगते हैं तो ज्यादातर लोग हृदय तक पहुंच जाते हैं। हृदय के बाद विशुद्धि तक बहुत से लोग पहुंच पाते। आज्ञा पर कम पहुंचते हैं और आज्ञा से ऊपर तो बहुत ही कम। ऐसा होता है।
41:24 एक जन्म में कोई भी पूरी कुंडली जागृत नहीं कर सकता। अगर किसी की पूरी जागृत है तो वह बहुत पुरानी आत्मा है। बहुत पुरानी सोलर बहुत समय से आध्यात्मिक रही है। इसलिए वह यंग मतलब बहुत जल्दी आध्यात्मिक में पहुंच जाएगी। बहुत जल्दी और भगवान को अगर उससे अपना प्रचार करवाना है तो करवाएंगे अपने आप। तो भगवान ऑटोमेटिकली करते हैं। अब भगवान को तो उस समय बहुत से लोग बुला रहे होंगे। जब महावतार नरसिम्हा मूवी में जो दिखाया गया है लोगों पर अत्याचार हो रहा है। भगवान को तो सब बुला रहे हैं कि हे हरी आओ। तो हरि क्यों नहीं आ रहे? क्योंकि जब तक प्रह्लाद नहीं बुलाया। प्रह्लाद के बुलाने पर क्यों आया? क्योंकि प्रह्लाद दिव्य आत्मा है। प्रह्लाद ने कम तपस्यामी भी या उसके अंदर एक ऐसा भाव था, ऐसा प्रेम था प्रह्लाद के अंदर जो बाकी सबसे अलग था। ऐसे जब कल्गी अवतार भी आएगा ना अपने आप नहीं आएगा। भगवान पुकारने पर ही आते हैं। तो कल्गी अवतार के समय भी किसी ना किसी को
42:11 आना होगा और वो व्यक्ति आज भी तपस्या कर रहा होगा। रेडी हो रहा होगा कलयुग में दोबारा अवतार लेंगे भगवान तो उनके लिए वो आएगा और वो फिर से कल्कि भगवान को बुलाएगा और साथ में उनके साथ जो वैष्णो देवी उनको बुलाएगा तब जाके वो अवतार लेंगे। तो आपके अंदर वो क्षमता होनी चाहिए। करने को आप एक महीने में जागृत कर लो। लेकिन एज अ मेडिटेशन कोच आपको लगभग लगभग सिक्स मंथ मिनिमम थोड़ी बहुत एनर्जी डेवलप करने में लगते हैं कुंडलिनी में। तो बहुत सारे लोग देवी के मंत्रों का भी जाप करते हैं। जैसे आपने देवी की एनर्जी से कनेक्ट करने की बात की तो किसकी साधना करनी चाहिए और किसकी साधना सबसे जल्दी कलयुग में फलित होती है? देखो शक्ति है। कुंडलिनी शक्ति शक्ति मतलब कुंडलिनी तो है ही देवी। सबसे पहली बात तो पार्वती माता ही कहते हैं इनको। तो
42:56 कुंडलिनी देवी मां के मंत्र से ही जल्दी जागृत होती है। इंसान के अंदर दो स्वरूप है। मेरा एक भाग पुरुष का, एक भाग स्त्री का है। सबके अंदर ऐसा ही है। इसलिए माता रानी ने मां पार्वती जी ने जब युद्ध चल रहा था तो गणेश जी के अंदर से, कार्तिक जी के अंदर से, महादेव जी के अंदर से, विष्णु जी के अंदर से स्त्री तत्व निकाल दिया था लड़ाई करने के लिए। नरसिम्हा जी की भी जो फीमेल है ना नरसिं देवी है विद लयन फेस। वाराह जी के साथ देवी है वाराही। कार्तिकेय जी की देवी है कार्तिकेय। कार्तिक जी के अंदर से निकली है। महादेव जी के अंदर से देवी निकली महादेवी इंद्र जी के अंदर से निकली इंद्री। ब्रह्मा जी के अंदर से ब्रह्माणी। ऐसे उदित के अंदर से उदिता निकलेगी। तो ऐसा होता है। तो हर किसी के अंदर एक देवी तत्व ऑलरेडी प्रेजेंट होता है और वही कुंडलिनी शक्ति है। वही ऊर्जा है। तो किस मंत्र के जरिए कुंडलिनी को जागृत किया जा सकता है? किसी भी मंत्र से जागृत हो सकती है। मंत्र
43:43 में बीज होना चाहिए। जैसे देवी मां का ओम दुम दुर्गाय नमः तो बीज आ गया। मां काली का है ओम क्रीम कालिकाय नमः लेकिन मां काली को संभालने लायक अभी बॉडी नहीं है। मां काली की ऊर्जा बहुत क्योंकि काली मां ने काली मां का कब अवतार हुआ था? जब क्रोध में थी मां जब राक्षसों को मारना था तो अभी आपके आसपास राक्षस है नहीं तो इसलिए आप मां का दुर्गा स्वरूप या पार्वती स्वरूप का शांत स्वरूप से मां से प्रार्थना करके ना कुछ बेसिक मंत्रों का जाप करो। ओम दुम दुर्गा नमः या महालक्ष्मी का कर लिया आपने। महालक्ष्मी का बीज है श्री है ना। ओम श्री महालक्ष्मी नमः ध्यान करते-करते आप जाप करिए। आप कोई भी देवी मां का जाप करो परिस्थिति आने पर वही काली है, वही दुर्गा है, वही लक्ष्मी है और वही सरस्वती है। तो कोई भी बीज मंत्र से कुंडलिनी जागृत की जा सकती है। ओम नमः शिवाय से भी की जा सकती है। ओम नमो भगवते वासुदेवाय से भी की जा सकती है। राम नाम
44:30 भी बीज है उनसे भी की जा सकती है। तो ये सब मंत्रों से आप अपनी कुंडलिनी को जागृत कर सकते हो। लेकिन मंत्र के साथ ध्यान आवश्यक है। बिना ध्यान की कुंडलिनी जागृत नहीं हो पाएगी। ज्यादा नहीं हो पाएगी। हृदय से ऊपर नहीं जा पाएगी। वह कौन सी साधना होती है जिसके जरिए आप भविष्य में होने वाली घटनाओं को देख सकते हैं या फिर आप अपने पूर्व जन्म को भी देख सकते हैं। किसी भी साधना से देख सकते हो। साधना सिद्धि प्रदान करती है आपको। कोई भी सिद्धि बता देगी आपको। ये तो छोटा-मोटा काम है। कोई भी कर देगा। छोटा-मोटा इन द सेंस ऐसा नहीं कोई भी करेगा। तपस्या तो करनी पड़ेगी लेकिन कम तपस्या पे आप फ्यूचर पास्ट देखने लायक हो जाते हो। समझदार व्यक्ति नहीं बताएगा आपको कभी भी फ्यूचर। क्योंकि फ्यूचर बता दिया तो साइकिल डिस्टर्ब हो जाएगी आपकी। अब आपको पता लग गया कल आप मरने वाले हो। पहले ही बता दिया तो वो बंदा निकलेगा ही नहीं घर से बाहर। साइकिल डिस्टर्ब हो गई ना पूरी। उनको मरना
45:15 था। वह जाएगा तो कोई आएगा। तो ऐसा होता है। तो आपको किसी को फ्यूचर बताने की मेरे अकॉर्डिंग तो अनुमति नहीं है। अब कोई बता रहा है तो भगवान देखे वो देखना पड़ेगा। लेकिन मेरे अकॉर्डिंग अनुमति फ्यूचर बताने की नहीं है। पास्ट लाइफ देख सकते हो आप। लेकिन अगर आप अध्यात्म में बहुत अच्छे लेवल पर हो तो आपको कोई फर्क ही नहीं पड़ेगा। आपको ऑलरेडी पता है आपकी पास्ट लाइफ क्या आती है और आपको जाननी भी नहीं होगी। मुझे क्या करना है पास्ट लाइफ से? मुझे प्रेजेंट चाहिए अपना बढ़िया है ना मैं चटिंग करूं भगवान के पास जाऊं ऐसा है सबके अपने दिमाग की मेंटालिटी है ये बच्चों वाले क्वेश्चन लगते हैं मुझे कोई मुझसे पूछता भी है ना तो द पास्ट लाइफ तो मैं स्थिति समझ जाता हूं बोलने से ही जैसे अभी कोई मेरे पास आया पूछ रहा है भैया मैं ना 40 इयर्स से जॉब कर रहा हूं एक लेडी आई मेरे पास 40 इयर्स से अच्छा तो अब क्या करना है 40 ईयर से जॉब कर रहे हो तो मुझे पास्ट लाइफ जाननी है तो मैंने बोला आपको तो 40 साल बर्बाद हो गए कि एक तो आपको 40
46:01 साल तपस्या करने के बाद अब पास्ट लाइफ देखनी है आपको क्या करोगे पास्ट लाइफ देख के पहली बात तो पास्ट लाइफ दिख जाती आराम से किसी को भी कोई भी बहुत आध्यात्मिक व्यक्ति तो वो सब देख के आया ध्यान में सब अनुभव हो जाते हैं उसको पास्ट फ्यूचर कितने जन्म लिए कौन से भगवान की तपस्या की सब पता होता है तो आप में इतनी तपस्या करने के बाद भी समझ नहीं आई अभी भी छोटी-छोटी बातों पर फंसे हुए हो तो आपकी तपस्या का कोई फायदा नहीं है तो आपकी स्थिति आपके बात करने से ही पता लग जाती है लोगों की कि आप किस लेवल पर है अध्यात्म में आजकल लोग बगलामुखी साधना की बहुत ज्यादा बात करते हैं। यह बगलामुखी साधना क्या होती है? किसको करनी चाहिए? और क्या बगलामुखी माता की जो पूजा है वो हर कोई कर सकता है या करवा सकता है? मां बगलामुखी अष्टम महाविद्याएं यानी ए्थ महाविद्याएं हैं। महाविद्यां बहुत सारी है मां की। तो आज मां बगलामुखी जी के बारे
46:47 में बात कर लेते हैं। मां बगलामुखी जी को ना बगलामुखी भी कहा जाता है। ये पीतांबरा है। येलो कलर की इनकी एनर्जी है। बहुत स्ट्रांग। ये ऐसी माता है जिनको ना ज्यादा तामसिक भोग नहीं दिया जाता। सात्विक हैं। बिल्कुल। इनकी उपासना आराम से आप कर सकते हो। बट ये शत्रु पर विजय दिलाती है। एक ना YouTube पर बहुत बड़े गुरु हैं। मैं उनका नाम नहीं लूंगा। उन्होंने क्लेम किया है कि उन्होंने राहुल गांधी जी पर मां बगलामुखी जी की साधना का प्रयोग किया था। मैं आपको कैमरा के बाद बताऊंगा किनकी बात कर रहा हूं मैं। तो वो कहते हैं कि ना मेरे को जेल में डाल दिया राहुल गांधी जी ने। और भी मेरे साथ और भी संतों को। जेल में डलवा दिया था एक समय पर जब उनकी सरकार हुआ करती थी मनमोहन जी के टाइम पर। अब मैंने जेल से की साधना। इसलिए वह बार-बार यह कहते रहते हैं कि आलू डालोगे तो सोना निकलेगा या मुझे समाधान चाहिए जो भी लाइनें वह फिसल जाते हैं ना
47:34 सवाल का जवाब की जगह जवाब का सवाल बोल दिया था एक बारी तो कहते हैं जो फिसलते हैं ना ये मां बगलामुखी जी की फिसलते हैं क्योंकि मां बगलामुखी जी वाक पकड़ लेती है आपकी जीभ पकड़ लेती है तो कोर्ट केस आपके ऊपर झूठा किसी ने कर दिया अब आपको चाहिए कि ये कोर्ट केस मेरे साथ रहे मेरे दुश्मन बहुत आ गए हैं तब मां बगलामुखी जी की साधना की जाती है इस केस में तो क्या हम राहुल गांधी को हमेशा ऐसे ही बोलते हुए सुनेंगे उनके अकॉर्डिंग तो आप सुनोगे परेशाद उनको क्योंकि उनके ऊपर प्रयोग किया गया ऐसा उन्होंने बताया जेल में बैठ के खास करके किया ऑन कैमरा YouTube पर सबके सामने बोला है तो ये हमेशा के लिए हो गया बिल्कुल उनके अकॉर्डिंग उन्होंने कर दिया है और काफी समय से देख भी रहे हैं हम उनके जो स्टेटमेंट आती है वो थोड़ा लड़खड़ा जाते हैं तो एस पर दैट गुरु उन्होंने प्रयोग उनके ऊपर किया है बिल्कुल बाकी मां बगलामुखी जी के बीज है उनका बीज मंत्र हलीम है हलीम एक तो मां का ना बड़ा मंत्र
48:21 है ओम हलीम बगलामुखी सर्व दुष्टानाम वाचम मुखम पदम स्तंभजम कील बुद्धि विनाशय ह ओम बगलामुखी नमः यह किया जाता है बहुत बड़ा मंत्र है इसको एक ही माला करने में बहुत टाइम आपको लगेगा यह किया है कि बुद्धि विनाशय बुद्धि विनाश करो मेरे शत्रुओं की सर्व दुष्टानाम है ना वाचम मुखम पदम स्तंभ स्तंभन कर दो उनको बिल्कुल भुला दो सारी चीजें स्तंभ हो जाए एकदम है ना मेरे बारे में कुछ गलत ना बोले इन केस अगर आप ट्रू हो तो अब आप ही कुछ गलत करके बैठे हो प्रयोग करोगे तो आप ही की पिटाई होगी दिमाग करेगी तेरी तो गलती थी मैं क्यों साथ दूं है ना इन केस आप सही हो तो आप साधना कर सकते हो। हल्दी की माला पर पीले आसन पर बैठकर पहले से साधना करते आ रहे हो तो पुराने आसन पर पीला आसन बिछाओ और पीली चौंकी पर मां का पीला चित्र लगाकर पीली माला हल्दी से जाप किया जाता है। लेकिन
49:06 बड़े वाले मंत्र का ना करके छोटे मंत्र का कर लो। ओम हलीम बगलामुखी नमः हलीम ह ल हलीम ओम हलीम बगलामुखी नमः इसका जाप किया जाएगा। मंत्र को पावरफुल करने के लिए कुछ टीचर कहते हैं हल रीम बोल दो। र कार लगा दो। र कार लगाने से अग्नि तत्व बढ़ जाता है। तो इनकी साधना करिए आप। एज अ बिगिनर एक माला एक दिन में करो ज्यादा मत करो पहले देखो एक हफ्ते तक करके इंपैक्ट कैसा आ रहा है पहले चेक करो और सुरक्षा के लिए ना पीली सरसों रखी जाती है और पहले शिव जी का जाप किया जाता है देखो साधना तो वैसे ना बहुत बड़ी है मां बगलामुखी जी की मां बगलामुखी जी के ना गणेश जी की पूजा जब मां बगलामुखी जी की की जाती है तो मां बगलामुखी जी के स्पेशल गणेश जी हैं हरिद्रा गणपति यह होते हैं जो दोस्तों में मित्रता कराने वाले गणेश जी हैं ये कभी भी दोस्तों में लड़ाई हो गई है रिलेशन खराब हो रहे हैं तो इनकी
49:52 पूजा की जाती तो पहले तो इनका ध्यान किया जाता है। इनके मंत्र आप Google पर देखोगे आपको एक माला या ऐसी बस स्तुति मंत्र भगवान का ध्यान कर लो। फिर मृत्युंजय शिव मृत्युंजय शिव है हमारे मां बगलामुखी जी के शिव। फिर इनका जाप किया जाता है। इनके बाद आती है मां बगलामुखी जी की साधना के बारे जिसको बड़ा अनुष्ठान करना है। रोज 11 111 माला करनी है। ऐसे ही बस कृपा चाहिए तो भली बगलामुखी नमः रोज एक-एक माला करने लग जाओ। प्रार्थना करके कि मां शत्रुओं से हमें दूर करो तो ऐसे ही दूर हो जाते हैं। हर माता का ना अपने शिव और अपने गणेश जी हैं। सिर्फ एक महाविद्या को छोड़ के माता धुमावती माता धुमावती जी की शिव नहीं है। इसलिए कहते हैं वो बहुत अनकंट्रोल्ड हैं। वो वाइट है पूरे उनके बाल कौवा उनका वाहन और भूखे एकदम मतलब सूखी हुई है। बिल्कुल वो शिवजी को ही खा गई थी अपने भूख के मारे। उनको शिवजी ने कहा था कि मैं अभी मैं बिजी हूं। जब वह दक्ष के लिए यज्ञ के
50:38 लिए जा रहे थे तो माता ने सती ने 10 दशाओं से घेरने के लिए शिव जी को कि कहीं नहीं जाओगे। 10 महाविद के रूप ले लिए थे और मां धुमावती जी खा गई थी उन्हीं को तो मां धुमावती जी को भूखा भूखा कहा जाता है कि भूखी हैं बहुत उनको अलक्ष्मी भी कहते हैं इसलिए कहते हैं कि उनको ना घर में नहीं रखना चाहिए बट वो अलक्ष्मी आपके घर में नहीं करती आपको दुश्मनों के घर में करती है जिनको तांत्रिक बहुत परेशान करते हैं ना उनको मां वो धुमावती मां की साधना करती और उनका बीज है धूम ओम धूम धूम धुमावतय नमः ऐसे करके जाप होता है धूम धूम तो ये धूम धूम ऐसा है कि आप जाप करो तो आपके आसपास में धुआ होने लगता है बहुत से लोगों ने एक्सपीरियंस किया कि फिजिकल धुआ उन्होंने फील किया अपने आसपास। अच्छा ऐसी बहुत विस्फोटक बहुत हैवी एनर्जी है। मैंने बहुत कम ही जाप किया था एक्सपीरियंस करने के लिए लेकिन मैं बहुत डर गया था। बहुत हैवी एनर्जी होती है और उनके हवन में
51:24 तो ना सूखी रोटी ऐसे ही महसूस हुआ था। मैंने धुआं नहीं फील किया बट मैंने गले में ना राख जैसे मेरे गले में कुछ राख सा हो रहा है। अजीब सा मुझे फील हो रहा था वोमिट जैसा। अभी रिसेंटली ना मैं गया था एक जगह पर राजस्थान में। वहां पर मैंने देखा एक लेडी तांत्रिक को। हम्म। और शी इज अ तांत्रिक। मैं जानता था वो मुझसे कनेक्टेड है। एक बार उन्होंने मेरे से औररा स्कैनिंग करवाई थी। तो उन्होंने मुझे इनवाइट किया था। जब मैं उनके घर में गया ना तो उन्होंने मुझे बोला कि मेरा ना गुप्त मंदिर है। इवन माय डैड वाज़ देयर। माय डैड को बोला कि आपको नहीं दिखाऊंगी। मैं दिखाती हूं। तो मेरे को लेके गई। मैंने जब उनका कमरा देखा जो उन्होंने ना एक ब्लैक कलर कपड़ा डा कपाल खोपड़ी रियल। पहले तो मैं और मैंने जो उस कमरे में एनर्जी फील की ना अजीता जी मतलब मैं अभी भी बता रहा हूं मेरे को मेरे को
52:12 घुटन होने लगी उस कमरे में मेरे को लगा कि मेरे को सांस नहीं आ रही वो सब देखने के बाद वो सेटअप देखने के बाद तंत्र की ऐसी वाइल्ड एनर्जी मैं तो एकदम सात्विक हूं मैं तो अनयन कालिक आने वाला देखो जब मैंने वो कपाल देखा मैंने पूछा ये किसका है अरे बहुत बड़े ब्राह्मण का है फीमेल तांत्रिक बहुत बोल्ड एकदम तो मैंने बोला अच्छा तो मैंने बोला कि तो ये इललीगल नहीं है मतलब कैसे निकाल निकाल लिया आपने। कह रहे हैं इनकी मैंने मतलब कोई आत्मावत्मा परेशान नहीं करेगी इसकी। कह रहे हैं इनकी पूजा पूजा होती है प्रॉपर। ऐसे नहीं निकालते। मैंने ऐसे कहीं से निकाला है। तो मैंने बोला अच्छा तो उन्होंने वो खोपड़ी दिखाई वो तो मैं वो देख के डर गया। तो वहां पर भी अल्कोहल की बॉटल्स तंत्र में तो सब चीजें चलती हैं। तो ऐसी एनर्जी मैंने फील की। तो ऐसी बहुत डिफरेंट एनर्जी मैंने फील की। तो वो भी साधना करती है। मां बगलामुखी जी, बगलामुखी जी की तो नहीं धुमावती जी इन सब
52:59 की साधनाएं होती है। इन सबको चढ़ाया जाता है सारी चीजें। तो मां बगलामुखी की साधना क्या उल्टी भी पड़ जाती है? कुछ लोग ऐसा भी कहते हैं कि उनको नुकसान मेरे फ्रेंड की ही मॉम की ऊपर पड़ी है एस पर हर कि उन्होंने गलत देखो गलत मंत्र जाप करोगे आप प्रॉपर मंत्र जाप आप नहीं कर रहे हो मां बगलामुखी जी का प्रॉपर अनुष्ठान नहीं कर रहे हो आप ही की गलती है गलत मंत्र जाप है प्रॉपर प्रोसीजर नहीं पता है कुछ भी करे जा रहे हो तो प्रॉब्लम तो होगी ही होगी अब आप बीच गलत बोल दो सद्गुरु जी का ही एक इंसिडेंट सद्गुरु जी बताते हैं एक फॉरेन की लेडी गलत गायत्री मंत्र जप करती थी पैरालाइज्ड हो गई पूरी पैरालाइज यानी कि बोल नहीं पा रही हाथ अड़ गए हम तो सद्गुरु जी ने सिर्फ हाथ रखा और ब्लेसिंग दी वो नॉर्मल हो गई कुछ टाइम बाद तो गलत मंत्र जप करने से ना होता है वो क्या करती थी गाड़ी पे लगाती थी और सुनती थी और बड़बड़ाती थी मंत्र को गलत उच्चारण किया संस्कृत तो नहीं बोल
53:45 सकते ना फॉरेनर्स वो कुछ वर्ड ही ऐसे हैं श नहीं है इंग्लिश में है ना बहुत सारे ऐसे-से वर्ड है जो नहीं है इंग्लिश में अल्फाबेट में नहीं आते ठ नहीं आता वो टी एच बोलना पड़ता है वो अलग तरीके से प्रोनाउंस करते हैं तो उस तरीके से गलत प्रोनाउंसिएशन करोगे तो आपके ऊपर उल्टी पड़ जाती है या आपकी गलती हो तो पड़ जाती है तो आपको ध्यान रखना पड़ता सिद्धियों का मामला है ना माता रानी ने अथॉरिटी सिद्धियों को दे रखी है। आप समझ रहे हैं? वो ऊपर बिजी हैं। वो क्यों आएंगे आपके चार माला करने से? चार माला करने से सिद्धियां ही आएंगी सिर्फ और मां बगलामुखी जी के तांत्रिक या जो लोग उपासना करते हैं वही सिद्धि बनते हैं। तो आप देख लो कैसे लोग सिद्धि बन रहे हैं। इसलिए कहते हैं सात्विक मंत्र जाप करो और मां बगलामुखी जी का करना है। तो प्रॉपर नॉलेज से मां मानकर प्रार्थना करिए कि मां मुझे सिद्धि का कोई लालच नहीं है। मैं बस प्रेम करता हूं। मुझे लोग फंसा रहे हैं। आप बचाओ। बस सिंपल आप कोई उद्देश्य से मुझे सिद्धि चाहिए।
54:32 मुझे ताकत चाहिए। ये सब करोगे तो फसोगे फिर और इसीलिए शायद सही और स्पष्ट उच्चारण का भी महत्व बिल्कुल इसलिए मैंने माइक पे प्रॉपर बोला अभी बीच कि हलीम है हलीम हलीम ल और र लगाने का भी बताया अर्थ का अनर्थ हो समझाना बिल्कुल आपको प्रॉपर देखना पड़ेगा ऐसे ही देवी कवच है देवी कवच में ना रक्षम भैरवी है कि रक्षा करो भैरवी र की जगह कोई भ लगा लगा दे तो भक्षम भैरवी पत्नी की बात हो रही थी कि पत्नी की रक्षा करो भैरवी हम्म राजेंद्र दास जी महाराज बता रहे हैं YouTube पर ये बात वो लेडी कहती थी वो पति कहता था अपनी वाइफ के लिए कि पत्नी भक्षम भैरवी तो पत्नी की तबीयत और ही खराब होने लग गई। अच्छा तो बाद में किसी पुजारी ने बोला मुझे पढ़ के बताओ पढ़ के आ रहे हो ऐसा कैसे हो सकता है देवी आप कवच पर हो और सुरक्षा ना हो बल्कि अहित हो ऐसा हो नहीं सकता तो पता लगा तो भक्षम पढ़ रहे थे वो चश्मा लगा
55:18 नहीं रखा था रक्षम को भक्षम भक्षम हो रहा था फिर इसीलिए ध्यान रखना पड़ता है क्योंकि सिद्धियों का मामला है माता आप बिजी हैं अपने कार्य में जगत माता इतना बड़ा यूनिवर्स है पृथ्वी के लिए क्या-क्या वो करने आएंगी
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