Sansad TV Special: MiG 21 | फाइनल सैल्यूट | 30 September, 2025

Sansad TV www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो मिग 21 लड़ाकू विमान की कहानी बताता है, जिसने छह दशकों तक भारतीय वायुसेना में सेवा की। यह विमान 1963 में शामिल किया गया था और इसने 1965, 1971 और 1999 के भारत-पाक युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अपनी खूबियों के बावजूद, मिग 21 को "उड़ता ताबूत" भी कहा गया क्योंकि इसके कई दुर्घटनाएं हुईं। विमान को आधुनिक बनाने के प्रयास किए गए, लेकिन अंततः इसे नए विमानों से बदलने का निर्णय लिया गया। मिग 21 भारतीय वायुसेना के इतिहास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और हमेशा साहस और बलिदान के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा।

मुख्य बातें:

  • मिग 21 ने 6 दशकों तक भारतीय वायुसेना में सेवा की।
  • इसने कई युद्धों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • इसे "उड़ता ताबूत" भी कहा गया।
  • इसे आधुनिक बनाने के प्रयास किए गए।
  • इसे नए विमानों से बदलने का निर्णय लिया गया।

परिचय

संसद टेलीविजन के इस विशेष कार्यक्रम में आपका स्वागत है। यह कार्यक्रम मिग 21 सुपरसोनिक फाइटर जेट की कहानी बताता है, जिसने छह दशकों तक भारतीय आसमान की रक्षा की। इसे दुनिया ने फ्लाइंग कॉफिन और वॉर मशीन दोनों कहा। मिग 21 ने इंडियन एयरफोर्स को आसमान की ऊंचाई जैसी ताकत दी। 1963 से 2025 तक चली मिग 21 की यह कहानी गौरव, विजय और बलिदान से भरी है।

मिग 21 का इतिहास और भूमिका

1963 में भारत ने सोवियत संघ से मिग 21 खरीदा, जो भारतीय वायुसेना का पहला सुपरसोनिक जेट था। इस विमान ने भारत को वायु शक्ति की नई ऊंचाइयां दी। 1965 में पहली बार यह जेट युद्ध में उतरा, लेकिन 1971 का युद्ध मिग 21 की असली परीक्षा थी। कारगिल से लेकर बालाकोट तक, मिग 21 ने हर बार यह साबित किया कि उसकी धार और उसका वार पूरे कार्यकाल में तेज ही रहा। इसने F104 स्टार फाइटर जैसे आधुनिक जेट को भी मात दी। भारत ने मिग 21 को सिर्फ खरीदा ही नहीं, बल्कि बनाया भी। 850 से अधिक मिग 21 में से 600 भारत में बने, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ी और भारतीय वायुसेना को सबसे बड़ा बेड़ा मिला।

मिग 21: एक फ्लाइंग कॉफिन

1980 और 1990 के दशक में मिग 21 भारतीय वायुसेना की रीढ़ था, लेकिन हादसों की संख्या बढ़ने लगी थी, जिसके कारण इसे "फ्लाइंग कॉफिन" कहा जाने लगा। उस समय कोई ट्रेनर नहीं थे, और पहला सोलो मिग 21 पर ही था। कॉकपिट में सब कुछ रूसी भाषा में लिखा था, जिससे पायलटों को काफी मुश्किल होती थी। इसके बावजूद, मिग 21 ने 1965, 1971 और 1999 के भारत-पाक युद्धों में, 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक में और हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में भी अहम भूमिका निभाई।

मिग 21 के विभिन्न संस्करण और आधुनिकीकरण

1963 में मिकोयान गुरेविच द्वारा डिजाइन किए गए पहले MIG2 F13 टाइप 74 से शुरुआत हुई थी। इसके बाद करीब 850 MIG 21 वेरिएंट्स भारतीय वायुसेना में शामिल हुए, जिनमें से ज्यादातर हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड बेंगलुरु में लाइसेंस के तहत बनाए गए थे। मिग 21 की खरीद 1980 के दशक के मध्य तक चलती रही और 1990 तक यह विमान भारतीय वायुसेना की करीब 60% लड़ाकू ताकत का हिस्सा बन चुका था। 1983 में मिग 21 को बदलने के लिए एक कार्यक्रम शुरू किया गया था, लेकिन जब कार्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाया तो भारतीय वायुसेना ने 1990 के दशक के अंत में 125 बिग2 बिस विमानों को अपग्रेड करके 22 वर्जन में बदला। इसमें भारतीय, रूसी, फ्रेंच और इजराइली टेक्नोलॉजी जैसे रडार, एवियोनिक्स और कई अन्य सिस्टम लगाए गए।

मिग 21 बायसन का आधुनिकीकरण

मिग 21 में लगे पुराने टमांस की R25 इंजन नहीं बदले गए, लेकिन उन्हें थोड़ा अपग्रेड किया गया ताकि भारी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और नए उपकरणों को संभाल सकें। इसके साथ ही इसमें रूसी सुपरकpo मल्टीमोड रडार और फ्रांस का टॉटम 221 जी रिंग लेजर गाइडेड नेविगेशन सिस्टम लगाया गया। इन सबको देश में बने नेविगेशन और अटैक कंप्यूटर से जोड़ा गया जिससे पायलट को हथियार छोड़ने की जानकारी हेड अप डिस्प्ले एचयूडी पर दिखाई देने लगी। इस अपग्रेड में और भी आधुनिक उपकरण जोड़े गए जैसे फेल्स का ईडब्ल्यूएस 21 रडार चेतावनी सिस्टम, इजराइली काउंटर मेजर डिस्पेंसर सीएमडीएस, वीडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम और भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स काउंटर मेजर ईसीएम सिस्टम। अब मिग-21 बायसन कई तरह के हथियार ले जाने में सक्षम था, जैसे रूसी R73 और R77 एयर टू एयर मिसाइलें, KH31 मध्यम दूरी की एयर टू सरफेस मिसाइलें और जीएसए 23 दो नली वाली 23 एमएम तोप।

मिग 21 के मिशन और भारतीय वायुसेना पर निर्भरता

मिग 21 ने कई तरह के मिशन किए, जैसे कि बमबारी, दुश्मन विमानों को रोकना, जासूसी, बॉम्बर्स को स्कॉट देना और नए पायलटों को ट्रेनिंग देना। इसे बड़े पैमाने पर किए गए अभियानों, लार्ज फोर्स एंगेजमेंट्स में भी शामिल किया गया। इसका मकसद दुश्मन को भ्रमित करना और असली लक्ष्य को छुपाना था, जिससे दुश्मन को बड़ी संख्या में अपनी फोर्स भेजनी पड़ती थी और उसे रणनीतिक नुकसान होता था। पश्चिमी वायु सेना तो छोड़िए, खुद रूसियों ने भी कभी यह नहीं सोचा होगा कि MI-2-21 को इतने बड़े स्तर के युद्ध अभियानों में इस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। वायुसेना की मिग 21 पर निर्भरता चॉइस नहीं बल्कि मजबूरी थी।

मिग 21: वीरता और विरासत

मिग 21 वीरतापूर्ण कृत्यों का साक्षी रहा है और इसका योगदान किसी एक घटना तक सीमित नहीं है। 1971 के युद्ध से लेकर कारगिल के युद्ध तक और बालाकोटिया स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक, मिग 21 ने हमेशा भारतीय आर्म्ड फोर्सेस को जबरदस्त मजबूती प्रदान की है। मिग 21 भारतीय वायुसेना का वर्कहॉर्स रहा है और 60 से अधिक देशों ने इसका संचालन किया है। यह एक अद्भुत विमान है जो बहुत ही सरल डिजाइन का है, लेकिन इसके लिए कुछ शुरुआती प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

मिग 21 का भविष्य और निष्कर्ष

विदेशी लड़ाकू विमानों की धीमी खरीद और देसी विमान निर्माण में देरी के कारण भारतीय वायुसेना के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे थे। उसे अपनी स्ट्रेटजी और टैक्टिक्स मिग 21 जैसे पुराने विमानों के इर्द-गिर्द ही तैयार करनी पड़ी। लेकिन अब बहुत समय हो चुका था और मिग 21 को रिटायर करने का निर्णय लिया गया है। मिग 21 भारतीय वायु सेना का वो जेट है जिसने छह दशकों से ज्यादा समय तक आसमान में परचम लहराया। आज जब यह लड़ाकू विमान इतिहास के पन्नों में दर्ज हो रहा है तो इसके साथ जुड़ी शौर्य गाथाएं हमेशा ही हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। मिग 21 महज एक विमान का नाम भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय वायु सेना के साहस, समर्पण और पराक्रम का प्रतीक है।

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Transcript

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0:06 बादशाह पर था भरोसा दिल में था जुनून आसमान को छूने का वतन की रक्षा करने का बिग 21 तो सिर्फ विमान नहीं एक गाथा है एक जज्बा है तेरी आखरी उड़ान तेरे अमर होने का ऐलान है बिग 21 आखरी सलाम [संगीत] नमस्कार संसद टेलीविजन के इस विशेष कार्यक्रम में आपका स्वागत है। मैं हूं संजय कुमार। छह दशक सैकड़ों लड़ाईयां, हजारों उड़ाने और अनगिनत बलिदान। यह है उस सुपरसोनिक फाइटर जेट की कहानी जिसने भारतीय आसमान की रक्षा की और जिसे दुनिया

0:54 ने फ्लाइंग कॉफिन और वॉर मशीन दोनों कहा। मिग 21 एक मशीन जिसने इंडियन एयरफोर्स को आसमान की ऊंचाई जैसी ताकत दी। 62 वर्षों की एक ऐसी कहानी जिसमें गौरव, विजय और बलिदान सब है। यह है 1963 से 2025 तक चली मिग 21 की बेमिसाल कहानी। [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]

1:42 1963 जब भारत ने सोवियत संघ से मेस खरीदा तब यह आईएफ का पहला सुपर सोनिक जेट था। इस विमान ने भारत को वायु शक्ति की नई ऊंचाइयां दी। 1965 में पहली बार यह जेट युद्ध में उतरा। लेकिन 1971 का युद्ध मिगस की असली परीक्षा थी। कारगिल से लेकर बालाकोट तक मिg की ने हर बार यह साबित किया कि उसकी धार और उसका वार पूरे कार्यकाल में तेज ही रहा। F104 स्टार फाइटर जैसे आधुनिक जेट को इसने मात दी।

2:31 भारत ने मिg की सिर्फ खरीदा ही नहीं बल्कि बनाया भी। 850 से अधिक मिg की में से 600 भारत में बने। इससे आत्मनिर्भरता बढ़ी और आईएफ को सबसे बड़ा बेड़ा मिला। [प्रशंसा] 1980 और 1990 के दशक में मेगी कीस आईएफ की रीड था। लेकिन हादसों की संख्या बढ़ने लगी थी। इसे

3:16 फ्लाइंग कॉफिन कहा जाने लगा। बिग 21 केम टू अस द फर्स्ट एयरक्राफ्ट दैट केम फॉर द टाइप 74 देयर वर नो ट्रेनर्स एट दैट टाइम। सो द फर्स्ट सोलो दैट यू वेंट वाज़ ऑन द मिग 21 इटसेल्फ। ऑल दैट हैपेंड वाज़ दैट यू वेर शोन ए अ सर्किट पैटर्न ऑन द हंटर एयरक्राफ्ट। सो वी फ्लो अ हंटर इट ट्राइंग टू इमिटेट द सर्किट पैटर्न ऑफ अ मिक्स 21 व्हिच इज नथिंग लाइक इट। द डिफिकल्टी वाज़ नॉट ओनली दैट देयर वाज़ नो ट्रेनर देयर वाज़ नो सिमुलेटर बट आल्सो दैट द एंटायर कॉकपेट नथिंग वाज़ रिटन इन इंग्लिश इट वाज़ ऑल इन

4:01 रशीद। एस फॉर द इंस्ट्रूमेंट्स वेंट वेल वी वेर यूज्ड टू नॉट्स हियर सडनली वी आर चेंज फ्रॉम नॉट्स टू किलोमीटर पर आर दैट वाज़ व्हाट स्पीड गिव यू एज़ फार एज़ योर हाइट वाज़ कंसर्नड्ड वाज़ इन मीटर्स एंड किलोमीटर्स सो इट वाज़ रियली गेटिंग यूज़्ड इट वाज़ क्वाइट डिफिकल्ट। सो, द फर्स्ट सोलो वाज़ इन फैक्ट ए यू आर मोर लॉस्ट अंटिल यू केम बैक एंड यू डिड नो हाउ एक्चुअली मैनेज्ड इट। बिकॉज़ आल्सो व्हाट हैपेंड द मिग 21 वी वेर ऑल फ्लाई इन स्पेस शूट्स। बिलीव इट ओर नॉट। यूरी गैगरिन व्हेन ही वेंट अप इन स्पुटनिक वन हैड द सेम प्रेशर सूट एंड द प्रेशर हेलमेट फॉर द फर्स्ट सोलो। यू कुड हार्डली मूव योर नेक

4:48 टू वन साइड ऑन और द अदर। किसी भी दौर के बहुत कम सुपरसोनिक जेट और खासकर 1960 के दशक के विमान इतने सारे मिशनों में कामयाबी से शामिल हुए थे। मेग 21 ने 1965, 1971 और 1999 के भारतपाक युद्धों में 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक में और हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर में भी अहम भूमिका निभाई। हिंदुस्तानी हवाई फौज ने नाक में दम कर दिया है। एक हवाई जहाज जाता है और दूसरा आता है और 2020 मिनट ऊपर नाचता है। 40% फौज और तमाल हलक और तबाह हो चुका है। 21 हैज़ प्राउडली सर्व द नेशन फॉर लास्ट 62 इयर्स। फ्रॉम बीइंग द मोस्ट एडवांस

5:34 फाइटर्स ड्यूरिंग द वॉर ऑफ़ 1965 एंड 71, इट हैज़ रिमेन द वैनगार्ड ऑफ़ ऑल मिलिट्री एक्शन बाय इंडिया। इवन ड्यूरिंग ऑप सिंदूर इट वाज़ अ लेगसी फाइटर। हाउएवर इट वाज़ टास् फॉर ओआरपी ड्यूटीज़ एंड वी आर रेडी टू डिफेंड द स्काई इफ दी डिमांड राइज़। 1963 में मीयान गुरेविच द्वारा डिजाइन किए गए पहले MIG2 F13 टाइप 74 से शुरुआत हुई थी। इसके बाद करीब 850 MIG 21 वेरिएंट्स भारतीय वायुसेना में शामिल हुए। जिनमें से ज्यादातर हिंदुस्तान एयररोनॉटिक्स लिमिटेड बेंगलुरु में लाइसेंस के तहत बनाए गए थे। मेगस की खरीफ 1980 के दशक के मध्य तक चलती रही और 1990 तक यह विमान आईएफ की करीब 60%

6:22 लड़ाकू ताकत का हिस्सा बन चुका था। [संगीत] मैनेज टू टेक पार्ट इन द वॉर व्हिच वाज़ अ वेरी ग्रेट थिंग। बोथ ऑन द ईस्टर्न फ्रंट एज वेल एस द वेस्टर्न फ्रंट। वी वर इन 30 स्क्वाडन वी कॉट ऑन बोथ द फ्रंट्स। बैक टू कमांड 26 कडन दैट वास द बिरयक्राफ्ट। आई वास लकी इनफ टू फ्लाई ऑल थ्री टाइप्स यू नो द बिल द टाइप 96 एंड द टाइप 77 बोथ इन टेक डे एस वेल एस हुबरली। सो आई वाज़ लकी टू फ्लाई ऑल द थ्री टाइप्स बट द फर्स्ट लव ऑलवेज रिमेंस दी टाइप 77 व्हाट अ ब्यूटी शी वांज। टुडे इज द डे व्हेन आई थिंक वी आर बीइंग बिटिंग गुड बाय टू वन

7:08 ऑफ द मोस्ट वंडरफुल एयरक्राफ्ट इट हैड नो एड्स इट हैड नो नेविगेट्स इट हैड नो हाई प्रोफाइल सिस्टम्स वी नेविगेटेड बाय यू नो मूविंग थंब डिस्प्ले ऑन द मैप एंड मे बी अ रेडियो कंपोस्ट सम टाइम्स ऑन द डिपेंडिंग ऑन द एसइ मोस्ट ऑफ़ द टाइम बट मोस्ट ऑफ़ द टाइम वी डिपेंडेंट ऑन पायलट स्किल टू टू गेट अस थ्रू वेरियस फेरीज एंड वेरियस अदर कॉम्प्लिकेटेड सिचुएशंस। वन ऑफ़ द ग्रेट एयरक्राफ्ट। [संगीत] अपने समय में Mi-21 की उड़ान क्षमता काफी प्रभावशाली थी। इसकी अधिकतम रफ्तार मैग 2.1 यानी ध्वनि की गति से दोगुनी थी। इसमें 500 फीट से ज्यादा की ऊंचाई तक

7:55 उड़ान और तेजी से ऊंचाई पकड़ने की अद्भुत क्षमता थी। लेकिन इसकी फ्लाइंग रेंज और हथियार ले जाने की क्षमता यानी पेलोड सीमित था। शुरुआती मॉडलों में साधारण एवियनिक्स कम विजिबिलिटी और धीमी गति पर संभालने में दिक्कत होती थी। अनुभवी पायलटों ने इसे पायलट का विमान कहा जिसमें जरा सी गलती भी भारी पड़ सकती थी और लापरवाही की तो बिल्कुल गुंजाइश ही नहीं थी। समय के साथ लगभग 450 मिg की दुर्घटनाग्रस्त हो गए। जिनमें लगभग 200 पायलटों की जान गई और कई बार जमीन पर भी नागरिकों की मौत हुई। इन हादसों की वजह से मिग 21 को भारतीय मीडिया ने उड़ता ताबूत और विधवा बनाने वाला जैसे नाम दे दिए। फिर

8:44 भी इन विमानों को उड़ाते रहना आईएएफ की मजबूरी बन गई क्योंकि विकल्प नहीं थे। ऐसा मुख्य रूप से स्क्वाड्रन की संख्या बनाए रखने के लिए किया गया। 2019 से ही मेगी कीस को हटाने के प्रस्ताव आने लगे थे। लेकिन देशी फाइटर जेट्स के विकास में देरी और नए विमानों की धीमी खरीद प्रक्रिया के चलते वायुसेना के पास मिgस को ही कुछ और सालों तक चालू रखने के अलावा कोई चारा नहीं था। इसलिए इनकी तकनीकी उम्र बढ़ाई गई और इन्हें उनके मूल डिजाइन से कहीं आगे की भूमिकाएं निभाने पर मजबूर होना पड़ा।

9:29 [संगीत] मेग 21 की सेवा इतनी लंबी चलने का एक बड़ा कारण था। देशी हल्के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में बार-बार की देरी। यह प्रोजेक्ट 1983 में खासतौर पर मेगी 21 कीस को बदलने के लिए शुरू किया गया था। लेकिन जब कार्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाया तो अंतर की भरपाई के लिए भारतीय वायुसेना ने 1990 के दशक के अंत में 125 बिग2 बिस विमानों को अपग्रेड करके 22 वर्जन में बदला। इसमें भारतीय, रूसी, फ्रेंच और

10:15 इजराइली टेक्नोलॉजी जैसे रडार, इवनिक्स और कई अन्य सिस्टम लगाए गए। [संगीत] हालांकि MG में लगे पुराने टमांस की R25 इंजन नहीं बदले गए लेकिन उन्हें थोड़ा अपग्रेड किया गया ताकि भारी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और नए उपकरणों को संभाल सकें। इसके साथ ही इसमें रूसी सुपरकpo मल्टीमोड रडार और फ्रांस का टॉटम 221 जी रिंग लेजर गाइडेड नेविगेशन सिस्टम लगाया गया। [संगीत] यस इट्स अ लव स्टोरी। वी फेल इन लव विथ द

11:01 एयरक्राफ्ट एस सून एस वी रिपोर्टेड इन तेजपुर आफ्टर ओसी वी रिपोर्टेड टू 30 स्क्वाड टू डू अ बिग एंड स्लीक लाइन द सिंपलीसिटी ऑफ़ द एयरक्राफ्ट एंड नॉट ओनली दैट वी वर सरप्राइज़्ड। द चेकक्स एंड प्रोसीजर्स वर यू नो सिंपलर देन द एयरक्राफ्ट वी हेड फ्लोट प्रीवियसली। इज़ीियर टू लर्न एंड यस। लायबिलिटी। वी गोट गुड फ्लाइंग। वी गोट इट इन कंसंट्रेटेड डोज़। आई कैन वाच फॉर इट फॉर द 75 आवर्स दैट आई फ्लू ऑन द मिग 21 इन टेप नॉट वंस आफ्टर आई प्रेस द स्टार्टर बटन ड आई कम बैक एंड दिस इज़ द रिलायबिलिटी दैट इट डिलीवर इन द 71 वॉर द 71 वॉर इन द ईस्ट द एयर बैटल आई विल क्लियरली से वाज़ वन बाय द मिग 21 इन सबको देश में बने नेविगेशन और अटैक कंप्यूटर से जोड़ा गया जिससे पायलट

11:47 को हथियार छोड़ने की जानकारी हेड अप डिस्प्ले एचयूडी पर दिखाई देने लगी। इस अपग्रेड में और भी आधुनिक उपकरण जोड़े गए जैसे फेल्स का ईडब्ल्यूएस 21 रडार चेतावनी सिस्टम, इजराइली काउंटर मेजर डिस्पेंसर सीएमडीएस वीडियो रिकॉर्डिंग सिस्टम और भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स काउंटर मेजर ईसीएम सिस्टम अब mग-21 बायसन कई तरह के हथियार ले जाने में सक्षम था। जैसे रूसी R73 और R77 एयर टू एयर मिसाइलें। KH31 मध्यम दूरी की एयर टू सरफेस मिसाइलें। जीएसए 23 दो नली वाली 23 एमएम

12:36 तोप MG-21 ने कई तरह के मिशन किए। जैसे कि बमबारी, दुश्मन विमानों को रोकना, जासूसी, बॉम्बर्स को स्कॉट देना और नए पायलटों को ट्रेनिंग देना। [संगीत] [प्रशंसा] बिग-2 को बड़े पैमाने पर किए गए अभियानों, लार्ज फोर्स एंगेजमेंट्स में भी शामिल किया गया। इसका मकसद दुश्मन को भ्रमित करना और असली लक्ष्य को छुपाना था। जिससे दुश्मन को

13:23 बड़ी संख्या में अपनी फोर्स भेजनी पड़ती थी और उसे रणनीतिक नुकसान होता था। पश्चिमी वायु सेना तो छोड़िए। खुद रूसियों ने भी कभी यह नहीं सोचा होगा कि MI-2-21 को इतने बड़े स्तर के युद्ध अभियानों में इस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। यह भारतीय वायुसेना की तकनीकी, ऑपरेशनल जुगाड़ की कला और बेहतर युद्ध कौशल का लोहा मानने वाली बात थी। [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] वायुसेना की मिग 21 पर निर्भरता चॉइस नहीं बल्कि मजबूरी थी।

14:09 [संगीत] [प्रशंसा] इतने लंबे समय तक मिग 21 वीरतापूर्ण कृत्यों का साक्षी रहा है। इसका योगदान किसी एक घटना तक या केवल एक युद्ध तक सीमित नहीं रहा है। 1971 के वार से लेकर कारगिल के युद्ध तक या फिर बालाकोटिया स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक ऐसा कोई क्षण नहीं रहा जब मिग 21 ने हमारी आर्म्ड फोर्सेस को जबरदस्त मजबूती ना प्रदान की हो। 1971 का वार भला कौन भूल सकता है? मिग 21 ने पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान विपरीत परिस्थितियों में जिस दिन ढाका के गवर्नर हाउस पर हमला किया

14:56 उसी दिन उस युद्ध के परिणाम की रूपरेखा तय कर दी गई। इसके अलावा भी इसके लंबे इतिहास में अनेक ऐसे मौके आए जब मिग 21 ने अपनी डिसाइसिव कैपेसिटी साबित की है। मिग 21 यस इट हेज़ बीन द वर्क हाउस ऑफ़ द इंडियन एयरफोर्स। वी हैव इंडक्टेड इट इन 1960 एंड स्टिल कंटिन्यूइंग विथ इट। एंड दिस हैज़ बीन एक्चुअली वन ऑफ द मोस्ट मास प्रोड्यूस्ड सुपरसोनिक फाइटर जेट। इफ आई कैन से अबाउट 11,000 आर और सो प्रोड्यूस्ड एंड मोर देन 60 कंट्रीज़ हैव ऑपरेटेड इट। इट्स अ यू नो डिज़ाइन व्हिच इज़ वेरी लिमिटेड नंबर्स लाइक डेल्टा विद द टेल प्लेन। एंड वी हैव यूज़्ड इट फॉर आवर

15:43 ट्रेनिंग आफ्टर द इनिशियल कन्वर्जन मीन्स आफ्टर गेटिंग कमिशन कन्वर्जन ऑन टू फाइटर्स। सो माई फर्स्ट एक्सपीरियंस वाज़ इन 1985 व्हेन आई गट अप इमीडिएटली आफ्टर कन्वर्ज़न आई वेंट टू तेज़ फूड एंड वी ड्रू दैट टाइम कॉल्ड द टाइप 77 वन ऑफ़ द बिग 21. सो आफ्टर फ्लाइंग द किरण दैट वाज़ अ रेवेलशन दैट यू नो द एयरक्राफ्ट कुड फील लाइक दिस इट्स एन अमेजिंग एयरक्राफ्ट टू फ्लाई वैरी मनुरेबल एंड वेरी सिंपल डिज़ाइन। बट इट रिक्वायर सम काइंड ऑफ इनिशियल ट्रेनिंग फॉर यू टू गेट यूज्ड टू इट। इट इज गुड फॉर इट्स रेट ऑफ क्लाइम। इट वास मेड लाइक एज एन इंटरसेप्टर। सो एट एट मैक्स हीट इट कुड क्लाइम मोर देन 200 250

16:29 मीटर्स पर सेकंड। सो आई थिंक इट इज़ गोइंग टू बी वन एकरा व्हिच इज़ गोइंग टू बी मिस्ड बाय पीपल हु हैव फ्लो इट अर्ली। बट यस एवरीथिंग हैज़ टाइम एंड प्लेस। नाउ वी हैव टू मूव ऑन बिकॉज़ दिस टेक्नोलॉजी इज़ ओल्ड। इट्स वैरी डिफिकल्ट टू मेंटेन दिस टेक्नोलॉजी नाउ। सो वी हैव डिसाइडेड टू नाउ कॉल इट अ डे फॉर दिस एयरक्राफ्ट एंड मूव ऑन टू द न्यू प्लेटफॉर्म्स लाइक तेजस तेजस मार्क 2 रफाल्स हैव कम इन सु 30ज आर ऑलरेडी ऑपरेटिंग। सो दी प्लेटफार्म्स विल टेक दिस प्लेस। इतने विस्तृत आकाश की रक्षा विदेश से लड़ाकू विमानों की धीमी खरीद और देसी विमान निर्माण में देरी के कारण आईएफ के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे थे। उसे अपनी स्ट्रेटजी और टैिक्स मिग 21 जैसे

17:17 पुराने विमानों के इर्द-गिर्द ही तैयार करनी पड़ी। सीधी बात कहें तो यह सोवियत जमाने का फाइटर जेट एक एनालॉग युग का जीवित उदाहरण था जो डिजिटल युग में भी जूझता रहा। लेकिन अब बहुत समय हो चुका था। इन [संगीत]

18:14 [प्रशंसा] [संगीत] रिटायरमेंट जिंदगी की सच्चाई है। मानव हो या मशीन सबको एक दिन रिटायर होना पड़ता है। मिग 21 भारतीय वायु सेना का वो जेट जिसने छह दशकों से ज्यादा समय तक आसमान में परचम लहराया। कई युद्धों में अपनी ताकत और भरोसे का सबूत दिया और भारत की हवाई शक्ति का पर्याय बन गया था। आज जब यह लड़ाकू विमान इतिहास के पन्नों में दर्ज हो रहा है तो इसके साथ जुड़ी शौड़ी गाथाएं हमेशा ही हमारे दिलों में जिंदा रहेगी। मिग 21 महज एक विमान का नाम भर नहीं है। बल्कि यह भारतीय वायु सेना के साहस, समर्पण और पराक्रम का प्रतीक है। आज के इस विशेष कार्यक्रम में मेरे साथ बस इतना ही। मुझे दीजिए इजाजत। नमस्कार।

19:07 पंखों पर था भरोसा। दिल में था जुनून। आसमान को छूने का। वतन की रक्षा करने का बिग 21 तो सिर्फ विमान नहीं। एक गाथा है, एक जज्बा है। तेरी आखिरी उड़ान तेरे अमर होने का ऐलान है। बिग 21 आखिरी सलाम। [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] जीस जीसस

20:04 हे [संगीत]

20:55 संसद टीवी के और भी प्रोग्राम्स देखने के लिए सब्सक्राइब करें हमारा YouTube चैनल और हां इन्हें लाइक और शेयर करना ना भूलें।

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