IG - Jalwayu 3 - Asthayi Pawan & Mansoon & Its Causes By Swapnil SIr Pre hall 4 morning

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो वायु परिसंचरण, दाब पेटियों और वर्षा के कारकों पर केंद्रित है। इसमें अश्व अक्षांश, दक्षिणी गोलार्ध की तीव्र पछुआ पवनें, मानसूनी पवनें, आर्द्रता, सापेक्षिक आर्द्रता, संघनन, ओसांक बिंदु और पर्वतकृत वर्षा जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

  • दाब पेटियों और वायु परिसंचरण की व्याख्या
  • अश्व अक्षांश की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और महत्व
  • दक्षिणी गोलार्ध में तीव्र पछुआ पवनों के प्रकार और कारण
  • मानसूनी पवनों की परिभाषा और वर्षा के लिए आवश्यक कारक
  • पर्वतकृत वर्षा की प्रक्रिया और वृष्टि क्षेत्र/छाया क्षेत्र का निर्माण

वायु परिसंचरण और दाब पेटियाँ

वीडियो में वायु परिसंचरण कोषों (कोश) और दाब पेटियों (प्रेशर बेल्ट) की व्याख्या की गई है। दाब पेटियाँ उच्च और निम्न दाब के क्षेत्र हैं, जो तापमान और हवा के दबाव के कारण बनते हैं। उच्च दाब वाले क्षेत्रों में हवा दबती है, जबकि निम्न दाब वाले क्षेत्रों में हवा ऊपर उठती है। हवा का यह ऊपर उठना और दबना वायु परिसंचरण का कारण बनता है। ध्रुवीय कोष, फेरल कोष और हेडली कोष नामक तीन प्रमुख वायु परिसंचरण कोष हैं।

उपोष्ण कटिबंध और अश्व अक्षांश

उपोष्ण कटिबंध, जो 30 से 35 डिग्री अक्षांश के बीच स्थित है, एक उच्च दाब का क्षेत्र है जहाँ पवनें ऊपर से नीचे की ओर दबती हैं। ऐतिहासिक रूप से, पाल वाले जहाजों को इस क्षेत्र को पार करने में कठिनाई होती थी क्योंकि हवाएँ क्षैतिज रूप से नहीं चलती थीं। जहाजों को रोकने और डूबने के डर से नाविकों को घोड़ों को समुद्र में फेंकना पड़ता था ताकि जहाज का वजन कम हो सके। इसी कारण इस क्षेत्र को अश्व अक्षांश (हॉर्स लैटीट्यूड) कहा जाता है।

अश्व अक्षांश की पुनरावृत्ति

उच्च दाब क्षेत्र बनने का कारण तापमान नहीं है, बल्कि दोनों तरफ से हवा का आकर दबना है। भूमध्य रेखा और शीतोष्ण कटिबंध से उठने वाली हवा उपोष्ण कटिबंध में आकर दबती है, जिससे उच्च दाब का क्षेत्र बनता है।

दक्षिणी गोलार्ध में तीव्र पछुआ पवनें

उत्तरी गोलार्ध की तुलना में दक्षिणी गोलार्ध में भूमि कम है, जिसके कारण पछुआ पवनें बिना किसी बाधा के तेजी से चलती हैं। इन तीव्र पवनों को गरजता चालीसा (40°), प्रचंड पचासा (50°) और चीखता साठा (60°) कहा जाता है। ये पवनें उपोष्ण और शीतोष्ण कटिबंध के बीच चलती हैं।

दक्षिणी गोलार्ध की तीव्र पछुआ पवनें: कारण और नामकरण

दक्षिणी गोलार्ध में भूमि की कमी के कारण, पछुआ पवनें बिना किसी बाधा के तेजी से चलती हैं। 40°, 50° और 60° अक्षांशों पर चलने वाली इन पवनों को क्रमशः गरजता चालीसा, प्रचंड पचासा और चीखता साठा कहा जाता है।

दक्षिणी गोलार्ध की तीव्र पछुआ पवनें - परिभाषा

दक्षिणी गोलार्ध में भूभाग कम होने के कारण पर्वत, पठार और उच्च क्षेत्र कम हैं, जिससे पछुआ पवनों की गति उत्तरी गोलार्ध की तुलना में अधिक होती है। इन तीव्र पछुआ पवनों को गरजता चालीसा, प्रचंड पचासा और चीखता साठा कहा जाता है।

मानसूनी पवनें और वर्षा के कारक

मानसूनी पवनें वे पवनें हैं जो अपने मार्ग में जल वाष्प एकत्रित करते हुए आगे बढ़ती हैं। वर्षा के लिए आर्द्रता (वायु में जल वाष्प की मात्रा), सापेक्षिक आर्द्रता (निश्चित आयतन में जल वाष्प की मात्रा), संघनन (तापमान कम होने पर जल वाष्प के कणों का पास आना) और ओसांक बिंदु (वह तापमान जिस पर जल वाष्प जल की बूंदों में परिवर्तित होने लगती है) जैसे कारक महत्वपूर्ण हैं। सापेक्षिक आर्द्रता 100% होने या ओसांक बिंदु पर पहुंचने पर वर्षा होती है।

वर्षा के कारक - आर्द्रता, सापेक्षिक आर्द्रता और संघनन

वर्षा के लिए आर्द्रता, सापेक्षिक आर्द्रता, संघनन और ओसांक बिंदु जैसे कारक महत्वपूर्ण हैं। आर्द्रता वायु में उपस्थित जल वाष्प की मात्रा है, जबकि सापेक्षिक आर्द्रता किसी निश्चित आयतन में जल वाष्प की मात्रा है। संघनन तापमान कम होने के कारण जल वाष्प के कणों का एक दूसरे के पास आना है।

ओसांक बिंदु और वर्षा की प्रक्रिया

ओसांक बिंदु वह न्यूनतम तापमान है जिस पर जल वाष्प के कण जल की बूंदों में परिवर्तित होने लगते हैं। वर्षा तब होती है जब सापेक्षिक आर्द्रता 100% होती है या जल वाष्प अपने ओसांक बिंदु पर पहुंचती है।

वर्षा के कारक - पर्वतकृत वर्षा

पर्वतकृत वर्षा तब होती है जब जल वाष्प युक्त पवनें पर्वत से टकराती हैं और ऊपर उठती हैं। ऊंचाई के साथ तापमान कम होने के कारण जल वाष्प के कणों में संघनन होता है और वर्षा होती है। पर्वत का वह क्षेत्र जहाँ वर्षा होती है, वृष्टि क्षेत्र कहलाता है, जबकि विपरीत क्षेत्र वृष्टि छाया क्षेत्र कहलाता है।

पर्वतकृत वर्षा की प्रक्रिया

पर्वतकृत वर्षा में, जल वाष्प युक्त पवनें पर्वत से टकराकर ऊपर उठती हैं, जिससे तापमान कम होता है और संघनन होता है। जब पवनें ओसांक बिंदु पर पहुँचती हैं, तो वर्षा होती है। पर्वत का वह क्षेत्र जहाँ वर्षा होती है, वृष्टि क्षेत्र कहलाता है, जबकि विपरीत क्षेत्र वृष्टि छाया क्षेत्र कहलाता है।

पर्वतकृत वर्षा - परिभाषा

जब जल वाष्प युक्त पवनें अपने मार्ग में पर्वत से टकराती हैं, तो वे ऊपर उठने लगती हैं। ऊंचाई के साथ तापमान कम होने के कारण उनमें उपस्थित जल वाष्प के कणों में संघनन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जैसे ही वे अपने ओसांक बिंदु पर पहुँचती हैं, वर्षा करने लगती हैं। पर्वत का यह क्षेत्र वृष्टि क्षेत्र कहलाता है। परंतु जैसे ही पर्वत के विपरीत यह पवनें नीचे उतरने लगती हैं, यह अपने ओसांक बिंदु को खो देती हैं तथा वर्षा करना बंद कर देती हैं। इसलिए यह क्षेत्र वृष्टि छाया क्षेत्र कहलाता है।

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Transcript

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0:00 कोई समस्या कल सब वायु परिसंचण कोष देखे थे याद

1:10 प्रेशर बेल्ट ये क्या है? लो प्रेशर बेल्ट। ये हाई प्रेशर बेल्ट। ये भी हाई प्रेशर बेल्ट। ये लो प्रेशर बेल्ट। ये हाई प्रेशर। ये और ये लो प्रेशर। इसके हाई होने के कारण तापमान। क्या होता है यहां? दाब तो है तभी। हाई दाब है। ठीक है। कारण क्या है? हवा दबती है, उठती है? हवा चारों तरफ से आकर दबती है और यहां उठती है। ठीक? तो जिसके कारण यहां हवाएं चलती है। अब यह लो प्रेशर है। लो प्रेशर के कारण यहां हवाएं ऊपर उठी। और यहां आकर

1:59 नीचे दबी। ठीक? और यह नीचे दब के हवाएं फिर से इधर लो प्रेशर पर आ गई और यह चक्र चलता रहता है। सेम कहानी यहां पर है। लो प्रेशर बेल्ट है इसीलिए हवाएं ऊपर उठी और यह भी हवाएं ऊपर उठ के इस प्रकार आ गई। यह हाई में जाकर दब गई और दब के फिर से ये ऊपर उठने लगी। याद है ये? सर। फिर ये लो प्रेशर बेल्ट, हाई और ये इस प्रकार से हवाएं आगे बढ़ने लगी। ये चक्र चल रहा है। ये क्या कहलाता है? कौन सा कोष? ध्रुवीय कोष और ये कोष पेरल कोष और ये इतना याद हैस डिग्री की अगर मैं बात करूं तो यह लगभग

2:45 कौन से डिग्री की जगह है? 30 से 35 डिग्री। कोई समस्या? ठीक। अब एक कांसेप्ट यहां पर और जानना है कि यह जो 30 से 35 डिग्री का क्षेत्र है कौन सा कटिबंध है? उपोष्ण कटिबंध है। सब ट्रॉपिकल जोन है। जहां पर वायुदाब की स्थिति क्या है? उच्च है। हाई है। मतलब यहां चारों ओर से पवनें आकर क्या हो रही है? दब रही है। चारों तरफ से पवनें आकर यहां दब रही है। यहां पवन पृथ्वी पे ऐसा यानी जमीन की जगह में चल रही है क्या? ऊपर से आकर दब रही है। डायरेक्शन समझ रहे हैं? पवनें ऊपर से आके ये दब रही है। ठीक? और

3:34 यहां पर अगर पवन इस प्रकार चलेंगे तो यह हमारी जगह में पवन चल रही है। ऊपर से पवन नीचे आएगी उससे हमको मतलब नहीं है। हमको मतलब किससे है? कि जमीन में हमारी हवा चलनी चाहिए। हवा का चलना और नीचे दबना ये दो शब्द समझ में आ रहा है? दो शब्द क्लियर है? हवा चल रही है कब कहेंगे? जब हमारे जमीन के समानांतर ऐसा आढ़ा हवा चलते रहेगी। और यह नीचे दबना होगा और या यह ऊपर उठना हो। तीनों शब्द क्लियर है। ठीक। तो अब यहां एक नया शब्द आपको जानना है। तो यह 30 से 35 डिग्री के आसपास का क्षेत्र वो क्षेत्र है जहां हवाएं दोनों तरफ से आकर क्या होती है? दबती है। तो

4:20 थोड़ा सा इसका कहानी जानते हैं। ऐतिहासिक काल में जब पानी के जहाज पाल वाले जहाज पाल वाले जहाज अगर रहेंगे तो उन्हें चलने के लिए ऊपर से नीचे वाली हवा चाहिए या ये सीधी आड़ी वाली हवा चाहिए? आड़ी वाली हवा चाहिए। तो जब 30 से 35 डिग्री के बीच जहाज जब इसको क्रॉस करते थे 30 से 35 डिग्री वाली जगह को या उपोष्ण कटिबंध को सभी पाल वाले जहाज होते थे तो यहां हवा क्या थी ऊपर से नीचे आती थी ना कि सीधी-सीधी चलती थी तो यहां जहाज चल पाएंगे क्या जहाज तो पाल वाले जहाज है मतलब वो हवा के सहायता से ही चल सकते हैं तो जहाज यहां पर आकर रुक जाते थे पहला कंडीशन क्लियर है भाई जैसे ही यहां 30 से 35 डिग्री के पास पहुंचे हैं यहां हवा हवा सीधा-सीधा नहीं

5:07 चल रही है। कैसे चल रही है? ऊपर से नीचे। तो जो जहाज हवा की सहायता से इसको क्रॉस करते-करते यहां पर आए थे, अब यहां पर आकर क्या हो जा रहे हैं? रुक जा रहे हैं। क्लियर? अब हवा जो चलनी चाहिए वहां पर नहीं चल रही है जिसके कारण जहाज रुक गए हैं। प्लस हवा ऊपर से नीचे की ओर यहां पर दबती रहती है। हवा जब नीचे दबती है तो वह जहाज पर भी दबाव डालती है। जिससे जहाज में बैठे लोगों को लगता है कि अब हमारा जहाज डूबने वाला है क्योंकि जहाज हिलने लगता है। हवा ऊपर से नीचे की ओर आ रही है। तो यह वह समय था कि जब लोग विभिन्न जगहों पर जहाज लेकर के जाते थे और वहां पर व्यापार करते थे और अगर किसी जगह पर जा रहे हैं तो गाड़ीवाड़ी का समय तो था नहीं कि वहां गए

5:52 सवारी ऑटो कर लिए हमको कहीं छोड़ देगा। तो अपने साथ चलने का गाड़ी का साधन जैसे कि घोड़ा और गाड़ी उसको लेकर के जाते थे। तो जब ऐसी स्थिति में जहाजी फंस जाते थे कि जहाज आगे नहीं बढ़ रहा है। अब उनको यह तो नहीं पता था कि हवा नहीं चल रही है इसलिए नहीं बढ़ रहा है। प्लस ऊपर से नीचे की ओर जो हवा दबाव डाल रही थी जिसके कारण उनको लगता था क्या कि ये जहाज हमारा डूबने लग गया है। तो जितने भी घोड़े रखे रहते थे घोड़ों को रस्सी से बांध के पानी में फेंक देते थे ताकि जहाज का वजन क्या हो जाए? कम हो जाए। बाद में पता चला कि ऊपर से नीचे की ओर यहां पर एक हवा दबती है जिसके कारण यहां कैसा दाब बनता है? उच्च वायु दाब का क्षेत्र बनता है। यह कब पता चला? घोड़ों को फेंकने के बाद। इसीलिए इस जगह को क्या

6:38 कहते हैं? अश्व अक्ष कहते हैं। एग्जाम में आता है हॉर्स एक्सिस या अश्व अक्ष कौन सा है? तो कौन सा है? 30 डिग्री। एक्चुअल आंसर तो इसका 30 डिग्री है। पर 30 से 35 डिग्री की जगह को क्या कहा जाता है? अश्व अक्ष कहा जाता। समझ में आ रहा है? अश्व अक्ष क्या है? तो फिर से समझ लेना एक बार कि पहले के समय जो जहाजी थे जैसे ही ये उपोष्ण कटिबंध के क्षेत्र को मतलब 30 से 35 डिग्री को क्रॉस करते थे तो यहां हवाएं ऊपर से नीचे की ओर दबती है। जिसके कारण जहाज चलना बंद हो जाते हैं। रुक जाते हैं और जहाजी लोग को लगने लगता है कि अब हमारा जहाज डूबने वाला है। क्योंकि हवा ऊपर से नीचे आ रही है। इसलिए क्या करते थे? अपने घोड़ों को जहाज से फेंक देते थे वजन कम करने के लिए और फिर उनका जहाज उनको लगता

7:25 था चलने लगेगा। बाद में पता चला कि हवा के दबाव के कारण ही उनका जहाज रुक जा रहा है। क्योंकि घोड़ों को फेंकने से इस हवा के बारे में पता चला। इसीलिए इस जगह को क्या कहते हैं? अश्व अक्ष ध्यान रहेगा। अश्व अक्ष ठीक हेडिंग डाल लीजिए। अश्व अक्ष देखिए ऑनलाइन में पूछ रहे हैं यहां का हाई प्रेशर एक बार फिर से सुन लेते हैं। हाई प्रेशर यहां बनने का कारण तापमान नहीं है और लो प्रेशर बनने का कारण भी यहां तापमान नहीं है। ठीक? यहां लो प्रेशर है और यहां

8:11 लो प्रेशर तो है ही। यहां का कारण क्या है? तापमान। लो प्रेशर है यानी हवा ऊपर उठी और किसी ना किसी स्थान पर जाकर दबेगी। वैसे ही यहां लो प्रेशर है। हवा ऊपर उठी किसी ना किसी स्थान पर जाकर दबेगी। तो जिस स्थान पर दबती है जाके वो कौन सा डिग्री का क्षेत्र है? 30 से 35 क्योंकि दोनों तरफ से हवा आकर यहां दबती है। इसीलिए क्या बनता है? उच्च वायुदाब का क्षेत्र। सेम कहानी यहां पर भी है कि यहां उच्च वायुदाब से हवा ऊपर की तरफ बढ़ी। यहां पर तापमान कम होने के कारण उच्च वायुदाब है तो हवा नीचे की ओर बढ़ी। अब ये दोनों हवा मिल तो नहीं जाएगी। टकराने के बाद कभी ना कभी क्या होगी? ऊपर उठेगी। तोकि यह आपका 60 से

8:59 65 क्या लिखा था? 65 से 70 65 से 70 डिग्री का जो क्षेत्र होता है वहां दोनों तरफ से हवा आकर ऊपर उठने लगती है। इसीलिए कौन सा वायुदाब बनता है? निम्न वायुदाब का क्षेत्र लो प्रेशर बेल्ट ध्यान रहेगा। अश्व अक्ष लिखिए। हॉर्स एक्सिस अश्व अक्ष या अश्व अक्षांश किसी किसी बुक में लिख देगा। देखिए

9:48 देखिए उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में दोनों में रहेगा ना उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में 30 से 35 डिग्री के अक्षांशी क्षेत्र में ठीक है? यहां फिर से समझ में आ जाएगा हाई प्रेशर क्यों बन रहा है? 30 से 35 डिग्री

10:35 के अक्षांशी क्षेत्र में उष्ण कटिबंध और शीतोष्ण कटिबंध उष्ण कटिबंध और शीतोष्ण कटिबंध दोनों क्षेत्र से ऊपर उठने वाली हवाएं दोनों क्षेत्र से ऊपर उठने वाली हवाएं

11:21 इस 30 से 35 डिग्री अक्षांशी क्षेत्र में आकर दबती हैं। इस 30 से 35 डिग्री के अक्षांशी क्षेत्र में आकर दबती है। जिसके कारण यहां उच्च वायुदाब की स्थिति निर्मित होती है। जिसके कारण यहां उच्च वायु दाब की स्थिति निर्मित होती है।

12:18 पहले पहले व्यापारिक जहाज जब इस क्षेत्र को पार करते थे तो इन हवा के दबाव के कारण जहाज रुक जाते थे

13:11 तथा जहाजियों को डूबने का एहसास होने लगता था। तो इस डर से जहाज में रखे घोड़ों को जहाज से फेंक देते थे।

14:09 क्योंकि इन घटनाओं के बाद ही इस क्षेत्र के उच्च वायु दाब का पता चला इसलिए इसे अश्व अक्ष या हॉर्स एक्सिस कहते हैं।

15:01 क्लियर है? अश्व अक्ष क्योंकि यहां लो बन रहा है। यहां लो बन रहा है। यहां की पूरी हवा यह भूमध्य रेखा वाली उष्णक कटिबंध की और ये शीतोष्ण कटिबंध की ये दोनों हवा जो यहां उठ रही है। कहां आकर दब रही है? इधर उपोष्ण कटिबंध में ही आकर दबती है। क्योंकि हवा का दबना ही क्या कहलाता है? उच्च वायु दाब। तो इसीलिए यहां उच्च वायुदाब का क्षेत्र निर्मित होता है। ध्यान रहेगा। ठीक। अब इसके बाद एक और कासेप्ट समझ लेते हैं।

16:29 दिख रहा है। समझ में आ रहा है दुनिया है वर्ल्ड मैप है समझ में आ रहा है ना अब कहां एचडी ढूंढते रह टाइम पास करेंगे आपको जो समझना है मुद्दे का बात वो बस समझ आ जाएगा इसमें लिखा नहीं आया देखे किसी करते

17:15 ठीक है चलो समझ जाओगे अब ये जो रेखा है ये वाली ये 0 डिग्री ठीक है जहां उंगली रखा हूं क्लियर हो रहा है ये 0 डिग्री है मतलब ये आपका इधर ये इक्वेटर ब्राजील और ये भारत के थोड़ा नीचे से जा रही है। इमेजिन कर पाओगे 0 डिग्री। बस जो समझना है वो यह है कि जब हम पछुआ पवनों की बात कर रहे हैं। पछुआ पवनें कहां चल रही है? उपोष्ण और शीतोष्ण कटिबंध के मध्य चल रही है। एक अंदाजा लगा सकते हैं यह कर्क रेखा के थोड़ा ऊपर तक यहां पर हमारा यह उष्ण कटिबंध है। यह उपोष्ण कटिबंध है। और यहां पर क्या आ जाएगा? शीतोष्ण कटिबंध। अंदाजा लग रहा है। ठीक? बना के भी उधर अपन देख लेंगे। अभी जो जानना है मेन वैसे ही दक्षिणी गोलार्ध की

18:02 बात करें। यह भूमध्य रेखा है। इसके नीचे लगभग इतना दूरी पर उपोष्ण कटिबंध आ जाएगा और उसके नीचे क्या आएगा? शीतोष्ण कटिबंध। बस समझना यह है कि भूमध्य रेखा के ऊपर उत्तरी गोलार्ध और भूमध्य रेखा के नीचे क्या है? दक्षिणी गोलार्ध। दोनों हिस्से में जमीन ज्यादा कहां दिख रहा है? उत्तरी गोलार्ध में ज्यादा जमीन है। इतना समझ में आ रहा है? इतना ही बस समझना है। क्लियर है ना यह पॉइंट? ठीक तो जो पछुआ पवनें चलती है पछुआ पवनें कहां उपोष्ण से शीतोष्ण उत्तरी गोलार्ध में भी चलेगी अब पछुआ पवनें कहां उपोष्ण से शीतोष्ण आपका दक्षिणी गोलार्ध में भी चलेगी क्लियर है और जितनी भी व्यापारिक पवनें हैं मैं आपको बताया था वो जमीन में चलती है कि ऊपर ऊंचाई में चलती

18:50 याद करो जमीन में जमीन में सारी पवनें थी एक ही पवनें ऊंचाई पर चल रही थी ऊंचाई पर कौन सी चलती है जेड पवन बाकी सारी सारी पवनें कहां चलती है? क्लियर है इतना? तो उत्तरी गोलार्ध में क्योंकि जमीन ज्यादा है और जमीन से जब पवनें चलेंगी तो कहीं पहाड़ है, कहीं मैदान है, कहीं पठार है, अलग-अलग आकृति है तो पवनों की जो गति है वो समान रहेगी कि जगह के हिसाब से कम ज्यादा होते जाएगी। क्लियर है इतना? लेकिन दक्षिणी गोलार्ध में तो ऐसी स्थिति नहीं है। दक्षिणी गोलार्ध में जमीन क्या है? कम है। खुला समुद्र मिल रहा है। हिंद महासागर है। प्रशांत महासागर है। तो पूरा महासागरीय क्षेत्र है। ठीक? तो दक्षिणी गोलार्ध में जब पछुआ पवनें चलती है तो उनका मार्ग

19:37 रोकने के लिए कोई बहुत ऊंची आकृति नहीं। बहुत सारे पर्वत पठार नहीं है। जिसके कारण उनकी गति जो है वह लगातार क्या होते जाती है? बढ़ते जाती तो दक्षिणी गोलार्ध में तीव्र गति से चलने वाली पछुआ पवनों को कहते हैं गरजता चालीसा प्रचंड पचासा और चीखता साठा याद रहेगा याद रहेगा कहां चल रही है समझ आया अभी मैं नाम सब बता रहा हूं लिखा रहा हूं कारण समझ में आ रहा है तो यह केवल पछुआ पवनें है पछवा पवन मतलब जो आपकी उपोष्ण और शीतोष्ण कटिबंध के मध्य चल रही है अब पछुआ पवनें जो चले चलेंगी उत्तरी गोलार्ध में भी चलेंगी दक्षिणी गोलार्ध में भी चलेंगी उत्तरी गोलार्ध में जैसा मैप में दिख रहा है भूभाग ज्यादा है

20:22 जमीन ज्यादा है पर्वतों से टकराएगी गति उनकी क्या हो जाएगी कम हो जाएगी लेकिन दक्षिणी गोलार्ध की हम बात करें जहां पछवा पवन चल रही है वहां जमीन क्या है कम हो गई है मतलब लगभग लगभग यहां से आपका यह तो भूमध्य रेखा है यहां आपका उपोष्ण कटिबंध शुरू होगा यह वाला हिस्सा क्या रहेगा शीतोष्ण कटिबंध का तो यहां पर जमीन के नाम पर बहुत कम जगह तो जब पछुआ पवनें चलती हैं तो इनका मार्ग अवरुद्ध करने के लिए पर्वत पठार विशेष रूप से उपस्थित नहीं है। जिसके कारण इनकी गति जो है बढ़ते ही चले जाती है। तो दक्षिणी गोलार्ध में तीव्र गति से चलने वाली पछुआ पवनों का तीन नाम दिया गया है। और 40 50 और 60 डिग्री के बीच चल रही है। इसीलिए उनका अलग-अलग नाम दिया गया है। 40 वाला जो है वो गरजता चालीसा है। 50

21:10 वाला जो है वो क्या है? प्रचंड पचासा है। और 60 वाला क्या है? चीखता साठा ध्यान रहेगा भाई 65 से 70 डिग्री से क्या शुरू हो जा रहा है आपका फिर ध्रुवीय पवन शुरू हो जा रहा है उधर का और उसके नीचे ही पछुआ चल रहा है तो 40 से 60 के बीच ही चलता है तो उसी के आधार पर उसका नाम रख दिया आपको केवल नाम याद रखना है और कहां चल रहा है केवल दक्षिणी गोलार्ध में उत्तरी गोलार्ध में नहीं चल याद रहेगा ठीक अभी यहां इतना ही समझना है कि ऊपर जमीन ज्यादा है नीचे जमीन कम छोटा सा हेडिंग डाल लीजिए। दक्षिणी गोलार्ध की तीव्र पछुआ पवन है।

22:34 ठीक अब मुझे बताइए जो मैं पवन बना रहा हूं वह कौन सी पवन है? यह वाली पवन कौन सी है? याद है ना? उपोष्ण से उष्ण की ओर जो चलती है उत्तरी गोलार्ध में भी और दक्षिणी गोलार्ध में भी। तो ये कौन सी पवन है? व्यापारिक। ठीक? और जो उपोष्ण कटिबंध है कितना से कितना डिग्री रहेगा? 30 से 35 डिग्री। फिर उसके बाद यह आपका 65 से 70 डिग्री रहेगा शीतोष्ण शीतोष्ण कटिबंध तो उपोष्ण से शीतोष्ण की ओर जो चलेगी ये कौन सी पवनें हैं पांचवा पौने पांचवा पौने यहां भी चल रही है और पांचवा पौने ये दक्षिणी गोलार्थ में

23:21 भी चल रही है ठीक याद है ना दिशा और ये आपका उपोष्ण रहेगा ये भी 30 से 35 और यह वाला फिर से क्या रहेगा 65 से 70 तो कहानी कहानी यह है कि उत्तरी गोलार्ध भूमध्य रेखा के ऊपर की जो जगह है यहां भूभाग कम है और वही जो दक्षिणी गोलार्ध के ए भूभाग उत्तरी गोलार्ध में क्या है? अधिक है और दक्षिणी गोलार्ध में भूभाग क्या है? कम है। तो यह पछवा पवनें जब उत्तरी गोलार्ध में चलती है तो अपने मार्ग में ढेर सारे पर्वत पठार से टकराने के कारण उनकी गति क्या हो जाती है? कम हो जाती। लेकिन यही पछुआ पवनें जब दक्षिणी गोलार्ध में चलती है तो ढेर सारे पर्वत पठार इनको अपने मार्ग में नहीं मिलते। इसीलिए इनकी गति क्या है? लगातार बढ़ते जाती है। अब यह कहां से चलना शुरू हो रही है? लगभग 35

24:08 डिग्री से। 35 के बाद ही चलेगी। और कहां तक चल रही है? लगभग 65 तो 35 के बाद कौन सा वाला जगह? 40। फिर 40 के बाद कौन सा? 50 और 50 के बाद कौन सा? तो यह तीन अक्षांश के आधार पर ही उनका नाम रख दिया गया है। 40 से गरजता 40, 50 से प्रचंड 50सा और 60 से चीखता 60 ध्यान रहेगा। बस इतना ही याद रखना है। ठीक? हेडिंग डाल लिए दक्षिणी गोलार्ध की। क्या हेडिंग डाले? तीव्र पछवा पवने लिखिए डश करके। देखें

24:55 दक्षिणी गोलार्ध में भूभाग दक्षिणी गोलार्ध में भूभाग कम होने के कारण पर्वत पठार एवं उच्च क्षेत्रों पर्वत पठार एवं उच्च क्षेत्रों की कमी है।

25:45 जिसके कारण यहां चलने वाले पछुआ पवनों की गति यहां चलने वाले पछवा पवनों की गति उत्तरी उत्तरी गोलार्ध की अपेक्षा अधिक होती है। इन तीव्र पछवा पवनों को

26:35 इन तीव्र पछवा पवनों को ही गरजता चालीसा प्रचंड पचासा रोिंग 40 फ्यूरियस 50

27:20 और चीखता साठा स्क्रीमिंग 60 कहते हैं। ठीक गरस्ता चालीसा प्रचंड पचासा चीखता सा ध्यान रहेगा केवल कहां चलेगी? दक्षिणी गोलार्ध में उत्तरी गोलार्ध में नहीं चलेगी। उत्तरी गोलार्ध में सामान्य पशुआ पवनें हैं। उनकी गति तेज नहीं है। इनकी गति तेज है। इसलिए अलग से इनका नामकरण कर

28:07 दिया गया। तो यह है कुछ सामान्य पवनें। ध्यान रहेगा यह ध्यान रहेगा। ठीक। अब इसके बाद आते हैं अस्थाई पवन और अस्थाई पवन में सबसे पहला मानसून। अब थोड़ा वर्षा को समझते हैं। अस्थाई पवनें नॉन परमानेंट विंड सबसे पहला मानसूनी पवनें। ठीक है? मानसूनी पवनें मानसून ही अंग्रेजी

28:56 में कहेंगे। मानसून विंड मानसूनी पवनें। ठीक? मानसूनी पवनें क्या है? पहले सरल भाषा में एक लाइन में लिख लीजिए। भाई पवनें मानसूनी कब होगी? जब उसमें जलवाष्प होगी या नहीं होगी? जलवाष्प होगी। अगर जलवाष्प नहीं है तो वह सिर्फ पवनें हैं। और अगर उसमें जलवाष्प है तो मानसूनी पवनें फिर यदि उसे वर्षा करने का कारण मिलेगा तब वर्षा करेगी नहीं तो वर्षा नहीं करेगी। ठीक है? लेकिन जब पवनें जब पवनें अपने मार्ग में

29:47 जल वाष्प एकत्रित करते हुए आगे बढ़ती हैं। तो उन्हें ही मानसूनी पवनें कहते हैं। समझ में आया? मानसूनी पवन किसको बोलेंगे? हवा में यदि जल वाष्प है तो वह क्या

30:34 कहलाएगा? मानसूनी पवन। अब वर्षा कराने के लिए पहले कुछ कुछ शब्द को आपको पकड़ना है। सबसे पहला एक ही शब्द अभी लिखेंगे आर्द्रता। ह्यूमिडिटी।

31:20 आर्धता ठीक है। एक-एक लाइन लिखते जाइए फटाफट फिर समझते हैं। आर्द्रता लिखिए। वायु में उपस्थित जल वाष्प की मात्रा ठीक। अच्छा वायु और हवा में फर्क है कि नहीं है? वायु हवा पवन तीनों सेम है कि अलग-अलग है? तीनों सेम

32:05 है। पक्का। अच्छा मैं बोल रहा हूं अलग है। तो बताओ क्या अलग है? हवा और पवन सेम है। ठीक है। तो वायु और हवा जो है वो अलग है। क्या अलग है? हां। ठीक है। हवा सब जगह नहीं रहता। हम हां तो इसको क्या कहेंगे और सही बोल रहे हो? नहीं नहीं समीर भी अलग है। ठीक है। सही कह रहे हो आंसर सिंपल है। वायु की कोई दिशा नहीं है और हवा की दिशा है। भाई इस कमरे में अगर पंखा वंखा नहीं चल रहा है। इस पूरे कमरे को बंद कर दिया जाए तो क्या इस कमरे में वायु नहीं है?

32:51 लेकिन हवा है क्या? हवा कब होगी? जब कोई दरवाजा खुलेगा यानी एक वेंटिलेशन होगा। फिर जो हवा जो है वह पास होगी। पंखा घूम रहा है मतलब वो हवा को ढकेल रहा है। पंखा हवा दे रहा है क्या? पंखा हवा नहीं दे रहा है। पंखा क्या कर रहा है? हवा को ढकेल रहा है। ऊपर की जो जो हवा है उसको खींच के क्या कर रहा है? नीचे फेंक रहा है। ये हवा बना रहा है क्या? हवा यहां पहले से है। उसको केवल वो क्या करने का काम कर रहा है? दिशा देने का काम कर रहा है। तो ध्यान रखना है कि वायु मतलब दिशा नहीं है और हवा मतलब उसकी एक दिशा है। तो हम अभी परिभाषा में क्या लिखे? आद्रता मतलब क्या? वायु में उपस्थित जल वाष्प की मात्रा उसको हम क्या कह रहे हैं? आदर्दता। क्लियर है आर्द्रता? ठीक।

33:37 जैसे ये आपको मोबाइल में दिख जाएगा। मोबाइल में मौसम वोसम का जानकारी देखें। उसमें ऐसा लिखा रहता है ह्यूमिडिटी 5% 70% 80% ऐसा कुछ देख तो जैसे यही इसी कमरे की मैं बात करूं तो जलवाष्प की मात्रा यहां है कि नहीं है जलवाष्प की मात्रा हर जगह है आप सांस छोड़ रहे हो उसमें भी जलवाष्प की मात्रा है जो सिर्फ ठंडी के मौसम में दिखाई देता है क्यों वायु दाब से कोई लेना देना नहीं है उसका ठीक है अभी पढ़ेंगे वो भी जानेंगे अभी जलवायु जैसेजैसे पढ़ते जाएंगे आपको यह भी समझ में आ जाएगा कि जब फीवर आता है यानी जब बुखार चढ़ता है तो शरीर का तापमान क्या होता है? बढ़ता है कम होता है? तो गर्मी लगना चाहिए लेकिन ठंडी ही लगता है।

34:22 समझेंगे धीरे-धीरे। ठीक है? तो आर्द्रता आर्द्रता कहने का मतलब वायु में उपस्थित जल वाष्प की मात्रा वो जितना भी प्रतिशत हो। फिर सापेक्षिक आर्ता लिखिए। आदता इतना ही जानो। अभी सापेक्षिक आर्द्रता रिलेटिव ह्यूमिडिटी देखिए वायु के किसी निश्चित आयतन में सापेक्षिक आयता में लिखना है वायु के किसी निश्चित आयतन में वॉल्यूम में उपस्थित जल वाष्प की मात्रा

35:22 ठीक तो दोनों शब्द में फर्क यह हुआ कि हवा में जल वाष्प कहीं भी फैले हुए हैं। ठीक है? और हवा कितनी हमको नहीं पता है। तो उसको हम सिर्फ क्या कह रहे हैं? आर्धता। अब हमको हवा का एक आयतन पता है। ठीक है? उसमें जो जल वाष्प की मात्रा है, वह क्या कहलाएगी? सापेक्षिक आर्धता। क्लियर है दोनों शब्द? तीसरा लिखिए संघनन। कंडेंसेशन। संघनन कंडेंसेशन। तापमान कम होने के कारण

36:15 वायु में उपस्थित जल वाष्प के कणों का एक दूसरे के पास आना तापमान कम होने के कारण वायु में उपस्थित जल वाष्प के कणों का एक दूसरे के पास आना। संघनन समझ में आ रहा है? तो संघनन में सिंपल गैस का नियम ही काम करता है। गैस की विशेषता आप बचपन में फिजिक्स में पढ़े होंगे कि जब भी गैस गर्म होती है तो वो

37:02 हल्की होने लगती है और फैलने लगती है। सरल भाषा में यही कह देते हैं। क्यों? क्योंकि जो उसके कण है वो एक दूसरे से दूर जाने लगते हैं। इसीलिए हवा क्या होती है? हल्की होती है और फैलने लगती है। अब इसी हवा में जलवाष्प भरी हुई है। तो जब गर्म किया जाएगा तो जलवाष्प के कण जो है वो एक दूसरे से दूर जाएंगे। लेकिन जब वही तापमान कम होगा, ठंडा किया जाएगा तो वही जल वाष्पिक कण क्या होंगे? एक दूसरे के पास आएंगे। तो तापमान कम होने के कारण जब हवा में उपस्थित जलवाष्प के कण एक दूसरे के पास आते हैं तो यही प्रक्रिया क्या कहलाती है? संघनन। क्लियर है संघनन शब्द? फिर अगला लिखिए ओसाक बिंदु ड्यू पॉइंट। ओसाक बिंदु ड्यू पॉइंट।

37:50 यह वह न्यूनतम तापमान है। जहां जल वाष्प के कण जल की बूंदों में परिवर्तित होने लगते हैं। यह वह न्यूनतम तापमान है जब जल वाष्प के कण जल की बूंदों में

38:36 परिवर्तित होने लगते हैं। तो उसे हम क्या कहते हैं? ओसाक बिंदु। ओसाक ओस शब्द से बना है। ठीक? ओस तो सभी को पता है। सुबह-सुबह जो पौधों पत्ति में जो जल के बूंदे रहती हैं उसे ही हम क्या कह रहे हैं? ओस कह रहे हैं। तो ओसाक बिंदु। ठीक? अब पूरा कहानी फिर से समझते हैं। अच्छा एक लाइन और लिखिए। स्टार बना के इसके नीचे लिखिए। जब सापेक्षिक आर्धता रिलेटिव ह्यूमिडिटी

39:22 जब सापेक्षिक आद्रता 100% होती है जब सापेक्षिक आरता 100% होती है या ओसाक बिंदु पर पहुंच जाते हैं। तब जलवाष्प जल की बूंदे बनकर वर्षा करती हैं। तब जलवाष्प जल की बूंदे बनकर वर्षा करती

40:10 हैं। ठीक। अब अब इसके कांसेप्ट को फिर से आते हैं। आर्ता कहने का मतलब वायु में जितना भी जल वाष्प घूम रहा है कहीं पर भी फैला हुआ है वो क्या कहलाएगा? आर्द्रता। सापेक्षिक आर्ता कहने का मतलब किसी निश्चित आयतन में गोला हो, डिब्बा हो, कैसा भी हो आयतन हो, उसमें उपस्थित जल वाष्प की मात्रा को क्या कह रहे हैं? सापेक्षिक आर्ता। ठीक? जैसे मान लेते हैं एक ये बूंद की ही आकृति है।

40:55 इसीलिए मैं इसको ऐसा ही बनाया हूं। अब इसमें अगर जल वाष्प की मात्रा आधी ही है तो मैं यहां सापेक्षिक आर्ता क्या कहूंगा? कितनी है? 50% समझ में आ रहा है सापेक्षिक आद्रता। फिर उसके बाद हम संघनन लिखे हैं। संघनन कहने का मतलब क्या होगा? यह जो जल वाष्प के कण है, वह एक दूसरे के पास आएंगे। अब एकदम बारीक-बारीक कण है तो वह इतने हल्के हैं कि हवा में उड़ रहे हैं। लेकिन वह कण जब एक दूसरे के पास आते जाएंगे, एक दूसरे से मिलते जाएंगे तो क्या है? उनका आकार बढ़ जाएगा और आकार बढ़ने से उनका वजन बढ़ जाएगा। और जब वजन बढ़ेगा तो वही वर्षा के जल के रूप में क्या है? नीचे गिरेंगे। तो यह एकदम सरल तरीका है समझने का कि जलवाष्प के बारीक-बारीक कण एक दूसरे के पास आ गए। मिल मिल के बड़ा कण बना लिए। एक बड़ी बूंद

41:41 बना लिए। अब वजन बढ़ गया तो नीचे गिर गए। तो उसे ही हम क्या कह रहे हैं? वर्षा। टेक्निकल डेफिनेशन ये कहलाएगा कि वायु का एक निश्चित आयतन मतलब बूंद की ही आकृति समझ लो। अब उसमें 50% ही जल वाष्प भरा है। मतलब उसकी सापेक्षिक आर्ता कितनी है? 50 तो सापेक्षिक आर्द्रता 100% कब कहलाएगी? मतलब जिस जब इस आयतन में पूरा का पूरा क्या भर जाएगा? जलवाष्प। जब इस आयतन में पूरा जल वाष्प ही भरा है। मतलब कोई और वायु या गैस है क्या? मतलब केवल और केवल पानी है। और जब केवल और केवल पानी है मतलब वही क्या बन चुका है? जल की एक बूंद बन चुका है। और वजन के कारण वो नीचे गिरेगा। उसे ही हम क्या कह रहे हैं? वर्षा। तो इसीलिए वर्षा कब होती है? जब सापेक्षिक

42:28 आयता 100% होती है या जब जलवाष्प अपने ओषांक बिंदु पर पहुंचती है। तभी क्या होती है? वर्षा होती है। अगर ओसांग बिंदु पर नहीं पहुंचेगी तो वर्षा नहीं होगी। सापेक्षिक आरता भी अगर 99 98% रहेगी तो भी वर्षा नहीं होगी। तब उसके अलग-अलग रूप हो सकते हैं। जैसे वर्षा में कभी कबभार आप देखे होंगे कि जल की बूंदे मोटी मोटी रहती है। कभी एकदम बारीक रहती है और कभी एकदम फुहार टाइप का रहता है। एकदम बारीक-बारीक कण हल्का मुंह में टकराते रहेगा लेकिन वर्षा नहीं होगी। उसका कारण क्या है? सापेक्षिक आर्द्रता भी 100% तक नहीं हो पाई है। तो टेक्निकली सापेक्षिक आर्द्रता 100% होने पर ही क्या होगी? वर्षा या जल वाष्प जब कहां पहुंचेगी? अपने ओसांग बिंदु

43:16 वो दोनों चीजें सेम ही है ना। सापेक्षिक आयता 100% होना ही क्या कहलाता है? कहां पहुंचना? ओसांग बिंदु पर पहुंचना। अगर सापेक्षिक आयता 100% नहीं है। मान लेते हैं 90% है तो जो जल की बूंदे हैं वह क्या होंगी? छोटी और कम है तो और छोटी होंगी। लेकिन तापमान अगर अधिक है तो वर्षा होगी क्या? तापमान अगर अधिक है तो वर्षा होगी कि नहीं होगी? तो अप्रैल में कैसे हो गया था? अभी अप्रैल में तो था ना भाई। तापमान तो अधिक ही था लेकिन वर्षा हो गया था। भरी दोपहर में वर्षा हुआ था। सरगुजा में अमरकंटक में ओला भी गिरा था। चलो वर्षा गिर गया। हम समझ ले नलवल चालू छोड़ दिए हो हम मान लेते हैं। ओला कैसे गिर गया? ओला मतलब पूरा बर्फ का टुकड़ा। ठीक? समझेंगे सारी कहानी।

44:03 अभी वर्षा कैसे हो रहा है? क्लियर है? वर्षा कैसे हो रहा है? क्लियर है? तो वर्षा कहीं भी कराना होगा तो कारण में आपको क्या-क्या चाहिए? एकदम बारीकी से ध्यान रखना है। सबसे पहले हवा चलना चाहिए कि नहीं चलना चाहिए? हवा चलना चाहिए। हवा रुकी रहेगी तो वर्षा होगी क्या? हवा में जलवाष्प होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए? अगर शुष्क पवन है या उसमें जल वाष्प नहीं है तो कभी भी वर्षा नहीं होगी। ठीक? अब यदि हवा चल भी रही है उसमें जल वाष्प भी है तो उसमें सापेक्षिक आर्ता कितना होना चाहिए? 100% होना चाहिए। लेकिन सापेक्षिक आर्ता को हम हर बार ध्यान नहीं रख पाएंगे। तो सरल चीज को क्या पकड़ेंगे? वो कहां पहुंचना चाहिए? ओसांग बिंदु। मतलब उसका तापमान इतना न्यूनतम हो जाना चाहिए कि जल वाष्प किस

44:50 में परिवर्तित हो जाए? जल की बूंदों में परिवर्तित हो जाए तभी क्या होगी? वर्षा। क्लियर है? वर्षा कैसे हो रही है? अब वर्षा मुख्य रूप से चार पांच कारणों से ही हो सकती है। सबसे पहला देखते हैं पर्वतकृत वर्षा। हेडिंग डाल लेंगे। वर्षा के कारक वर्षा के कारक सबसे पहला और सबसे सिंपल है और हमारे यहां सर्वाधिक इसी से वर्षा होती है। पर्वतकृत वर्षा ओरोग्राफिक रेन

45:44 ओरोग्राफिक रेनफॉल

47:08 देखो समझो फिर बना लेना तो स्ट्रक्चर एकदम सिंपल है पर्वतकृत वर्षा मतलब वर्षा किसके कारण होगी? पर्वत के कारण होगी। ठीक? अगर जल क्षेत्र और जल वाष्प नहीं रहेगा। सिर्फ हवा आ रही है। पर्वत से टकराएगी। कुछ होगा क्या? कुछ नहीं होगा। क्योंकि जो हवाएं हैं उदाहरण के लिए मान लो पश्चिमी घाट है। भौतिक विभाजन पढ़ चुके हैं सभी। यह समुद्र से होते हुए हवाएं आ रही है। समुद्र से होते हुए जल क्षेत्र से होकर हवाएं आ रही है। मतलब अपने मार्ग में क्या एकत्रित कर रही हैं? जलवाष्प एकत्रित कर रही है। अब जलवाष्प एकत्रित करने के बाद यह पवनें कौन सी पवनें बन गई? मानसूनी पवनें। ठीक है? जैसे ही जलवाष्प एकत्रित होंगी कैसी पवनें

47:54 बनेंग? मानसूनी पवनें। अब यह मानसूनी पवनें अपने मार्ग में आगे बढ़ रही है। अब इनके मार्ग में पर्वत आ गया। पर्वत आ गया उसको तोड़ के आगे निकल जाएगी क्या? नहीं आगे निकलेगी। तो हवाएं अपना मार्ग जो है ऊपर की तरफ करने लगेंग। क्योंकि इनके मार्ग में पर्वत आ चुका है। इसीलिए हवाएं भी क्या होंगी? अब ऊंचाई के साथ आगे बढ़ेंगी और इस पर्वत को क्रॉस करके अपने मार्ग में आगे निकलंगी। यही होगा कहानी। ठीक? अब इन पवनों में क्या भरी हुई है? जलवाष्प। इसीलिए कैसी पवनें हैं? मानसूनी पवनें। अब जब मार्ग में पर्वत आने के कारण यह ऊपर उठती है तो हम जानते हैं ऊंचाई के साथ तापमान क्या होता है? कम होता है।

48:41 क्योंकि ऊंचाई के साथ तापमान कम होगा तो जो इनमें जल वाष्प के कण हैं उनमें संघनन की प्रक्रिया शुरू होगी। संघनन की प्रक्रिया मतलब सारे कण एक दूसरे के आसपास आएंगे। अब जैसे-जैसे ऊंचाई के साथ तापमान कम होते जाएगा, संघनन की प्रक्रिया शुरू होगी, जलवाष्प के कण एक दूसरे के पास आएंगे। लेकिन तब तक वर्षा नहीं होगी जब तक वह कहां ना पहुंच जाए? अपने ओषांक बिंदु पर ना पहुंच जाए। तो ऊंचाई के साथ ऊपर जातेजाते एक ऐसा पॉइंट आएगा जब सारी पवनें कहां पहुंच जाएंगी? अपने ओसाक बिंदु पर पहुंच जाएंगी। और जैसे ही अपने ओषांक बिंदु पर पहुंचेंगी उसके बाद ये पवनें पर्वत में क्या करने लगेंगी? वर्षा। अब

49:28 पर्वत के इस तरफ भी वर्षा होगी। पर्वत के ऊपर भी वर्षा होगी। और वर्षा कब तक होगी? जब तक पवनें कहां है? अपने ओसाक बिंदु पर है। लेकिन जैसे ही पवनें इस ओषांक बिंदु वाली लाइन को क्रॉस करेगी भाई जब तक ऊपर जा रही थी तापमान कम होते जा रहा था। इसीलिए क्या हो रही थी? वर्षा। अब जब पर्वत के दूसरे तरफ पवनें आएंगी तो यहां पर अब तापमान फिर से क्या होगा? बढ़ेगा। पवनें नीचे उतरेंग अपने उषांग बिंदु को खो देंगी। अब तापमान क्या होगा? बढ़ेगा। तो तापमान बढ़ने के कारण जो जलवाष्प के कण पास आ रहे थे अब क्या जाएंगे? दूर होते जाएंगे। अब जब दूर होएंगे तो वर्षा होगी क्या? तो इसीलिए पर्वत के एक तरफ तो हमेशा वर्षा होती है लेकिन पर्वत के दूसरे तरफ वर्षा नहीं होती है। इसीलिए यह वाला

50:13 क्षेत्र वृष्टि क्षेत्र रेनी एरिया कहलाता है। और इधर का क्षेत्र क्या कहलाएगा? वृष्टि छाया या रेन शैडो एरिया। ध्यान रहेगा। ध्यान रहेगा पर्वत के कारण कैसे वर्षा हो रही है? बना लो। वृष्टि क्षेत्र और यह वाला रहेगा वृष्टि छाया क्षेत्र।

51:54 जय

52:52 हो गया बन गया ठीक क्लियर है क्लियर है ठीक एक बार फिर से जान लेते है बहुत सिंपल है। पर्वतकृत वर्षा पर्वतकृत वर्षा कहने का मतलब किसके कारण वर्षा हो रही है? पर्वत के कारण वर्षा हो रही है। तो जब पवनें अपने मार्ग में जल क्षेत्र से होकर के आएंगी तभी उनके पास क्या होगी? जल वाष्प होगी। तो वह जल वाष्प को एकत्रित करते हुए आगे बढ़ेंगी। अब इनके मार्ग में कौन आ गया है? पर्वत। जिसके कारण पवनें अब ऊपर उठने लगेंग। अब जैसे जैसे ऊपर उठेंगे तो ऊंचाई के साथ तापमान क्या होगा? कम। तो इनके ऊपर उठने के साथ ही इनमें उपस्थित जल वाष्प के कणों में संघनन की प्रक्रिया

53:39 शुरू हो जाएगी। मतलब जलवाष्प के कण अब एक दूसरे के पास आ जाएंगे। लेकिन वर्षा भी नहीं होगी। वर्षा तब होगी जब ये कहां पहुंच जाएंगे? अपने ओसाक बिंदु। ऊपर जाते-जाते तापमान इतना कम हो जाएगा कि किस बिंदु पर पहुंचेंगे? ओसांग बिंदु और जैसे ही अपने ओषंग बिंदु पर पहुंचेंगे जलवाष्प के कण जल की बूंदों में परिवर्तित हो जाएंगे और वजन के कारण नीचे गिरेंगे जिसे ही हम क्या कह रहे हैं वर्षा किसके कारण हो रही है पर्वत अब जैसे-जैसे पवनें पर्वत में मार्ग में आगे बढ़ते जाएंगी वहां ढेर वर्षा करेंगी फिर जैसे ही पवनें पर्वत के दूसरे तरफ आएंगी अब वो नीचे उतरना शुरू होंगी नीचे उतरना शुरू होंगी तो जैसे ऊंचाई के साथ तापमान कम हो रहा था अब नीचे उतरेंगे तो नीचे नीचे उतरतेउतरते तापमान

54:24 क्या होगा? बढ़ेगा। और जैसे ही अपने ओषांक बिंदु को खो देंगी तो वहां से वर्षा करना बंद कर देंगी। इसीलिए पवनें जिस तरफ से आती है उस तरफ वर्षा ज्यादा होती है तो उस क्षेत्र को क्या कहते हैं? वृष्टि क्षेत्र। अब पवनें जिस तरफ आ रही है पर्वत के विपरीत क्षेत्र जो रहेगा उसे वहां वर्षा कम होगी। इसीलिए क्या कहेंगे? वृष्टि छाया क्षेत्र। ध्यान रहेगा। ठीक? लिख लीजिए इसको एक बार फटाफट। जब जल वाष्प युक्त पवनें जब जल वाष्प युक्त पवनें

55:09 अपने मार्ग में पर्वत से टकराती हैं। तो ऊपर उठने लगते हैं तो वह ऊपर उठने लगते हैं तथा ऊंचाई के साथ तापमान कम होने के कारण उनमें संघनन की प्रक्रिया उनमें नहीं ऐसा

55:56 लिखना ऊंचाई के साथ तापमान कम होने के कारण उनमें उपस्थित जल वाष्प के कणों में संघनन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। तथा ऊंचाई के साथ बढ़ते हुए जैसे ही पर पहुंचती है।

56:48 जैसे ही अपने ओषक बिंदु पर पहुंचती है, वर्षा करने लगती है। जैसे ही अपने ओसाक बिंदु पर पहुंचती है, वर्षा करने लगती है। पर्वत का यह क्षेत्र वृष्टि क्षेत्र रेनी एरिया कहलाता है।

57:35 परंतु जैसे ही पर्वत के विपरीत यह पवनें नीचे पीछे उतरने लगते हैं। यह अपने ओषक बिंदु को खो देती हैं।

58:22 तथा वर्षा करना बंद कर देती। इसलिए यह क्षेत्र वृष्टि छाया क्षेत्र रेन शैडो एरिया कहलाता है। इसलिए यह क्षेत्र वृष्टि छाया क्षेत्र रेन शैडो एरिया कहलाता है। क्लियर है यहां तक? तो, यह है वर्षा का एक कारण। इसको अच्छे से रिवाइज करके आइए। कल बाकी कारण समझते हैं।

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