सहज जीवन जीने के सूत्र || आचार्य प्रशांत कार्यशाला (2023)

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो "वास्तविक महाभारत" की अवधारणा पर केंद्रित है, जिसमें अर्जुन और कृष्ण के बीच का संघर्ष शामिल है। यह सहजता के महत्व पर प्रकाश डालता है, जो मान्यताओं और कंडीशनिंग से मुक्त है। वीडियो में बताया गया है कि कैसे पूर्व निर्धारित विचार और सामाजिक कंडीशनिंग हमें स्पष्ट सत्य को देखने से रोक सकते हैं, और कैसे सहज ज्ञान और विवेक के माध्यम से सच्चाई तक पहुंचा जा सकता है।

मुख्य बातें:

  • सहजता का महत्व: मान्यताओं और कंडीशनिंग से मुक्त होकर सीधे और स्पष्ट रूप से चीजों को देखना।
  • मान्यताओं का पर्दा: कैसे पूर्व निर्धारित विचार और सामाजिक कंडीशनिंग हमें सत्य को देखने से रोकते हैं।
  • विवेक का महत्व: विश्वास और विचारों से ऊपर विवेक को प्राथमिकता देना, क्योंकि विचार भी कंडीशनिंग से प्रभावित हो सकते हैं।

वास्तविक महाभारत: अर्जुन और कृष्ण का संघर्ष

वास्तविक महाभारत की लड़ाई अर्जुन और कृष्ण के बीच है। इस लड़ाई में हिंसा नहीं है क्योंकि अर्जुन की भलाई उसकी हार में ही है। यह एक प्रतीकात्मक युद्ध है जिसमें अर्जुन को अपनी मान्यताओं और अहंकार को त्यागना है ताकि वह सत्य को प्राप्त कर सके।

सहजता: पूर्व निर्धारित विचारों से मुक्ति

सहजता का अर्थ है किसी भी घटना को बिना किसी पूर्व निर्धारित विचार के सीधे स्वीकार करना। जब हम किसी घटना को देखते हैं, तो हमारे और उस घटना के बीच में कोई मान्यता नहीं आनी चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि कोई बच्चा किसी धार्मिक स्थान पर जानवर की हत्या देखता है, तो वह तुरंत प्रतिक्रिया देगा कि यह गलत है, जबकि एक धार्मिक व्यक्ति अपनी मान्यताओं के कारण इसे सही ठहरा सकता है।

मान्यताओं का पर्दा: सत्य को देखने में बाधा

मान्यताएं हमारी आंखों पर एक पर्दे की तरह काम करती हैं, जो हमें सत्य को देखने से रोकती हैं। एक कहानी के माध्यम से समझाया गया है कि कैसे राजा को कुछ लोगों ने बेवकूफ बनाया और कहा कि वे उसके लिए एक झीना वस्त्र सिल रहे हैं, जो केवल पापियों को दिखाई नहीं देगा। राजा और उसके दरबारियों ने भी वस्त्र की प्रशंसा की, जबकि वास्तव में वहां कुछ भी नहीं था। इसी तरह, मान्यताएं हमें वह दिखा सकती हैं जो है ही नहीं, और जो है उसे नहीं देखने देतीं।

सामाजिक कंडीशनिंग: विकृतियों को सामान्य मानना

सामाजिक कंडीशनिंग हमें उन चीजों को भी सामान्य मानने पर मजबूर कर सकती है जो वास्तव में विकृत हैं। एक फिल्म का उदाहरण दिया गया है जिसमें चार पुरुष सोफे पर बैठे हैं और एक महिला उनके लिए चाय बना रही है। यह दृश्य सामाजिक असमानता को दर्शाता है, लेकिन कई लोगों को यह सामान्य लग सकता है क्योंकि वे इस तरह की कंडीशनिंग के आदी हैं। सती प्रथा और हिटलर के अत्याचारों का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें लाखों लोगों की हत्या कर दी गई लेकिन किसी को कुछ अजीब नहीं लगा क्योंकि वे यहूदियों के खिलाफ मान्यताओं से ग्रस्त थे।

सामान्य और असामान्य: दृष्टिकोण का महत्व

जो कुछ भी हमें सामान्य या असामान्य लगता है, वह हमारी मानसिक स्थिति और संस्कारों पर निर्भर करता है। यदि हमारी आंखों पर मान्यताओं का पर्दा है, तो जो बात एकदम सहज होगी, वह हमें अजीब लगेगी, और जो एकदम टेढ़ी-मेढ़ी होगी, वह हमें ठीक लगेगी। उदाहरण के लिए, रेलवे के शुरुआती दिनों में, लोगों को इस बात पर आपत्ति थी कि कोई भी किसी के बगल में बैठ सकता है, लेकिन आज यह बात हमें असामान्य लगती है।

संस्कार और कंडीशनिंग: पूर्वाग्रहों से मुक्ति

संस्कार का अर्थ केवल धार्मिक संस्कार नहीं है, बल्कि कंडीशनिंग भी है। हमें अपनी कंडीशनिंग के प्रति सचेत रहना चाहिए और उन चीजों पर सवाल उठाना चाहिए जिन्हें हम सामान्य मानते हैं। यदि कोई बच्चा हमसे कोई सवाल पूछता है और हम अचकचा जाते हैं, तो इसका मतलब है कि हम किसी चीज में बहुत गहराई से विश्वास करने लगे हैं बिना उस चीज को जाने। हमें सच्चाई को अपनी मान्यताओं से ऊपर रखना चाहिए।

विवेक: सत्य तक पहुंचने का मार्ग

सत्य विश्वास की वस्तु नहीं है, बल्कि विवेक से पाया जाता है। विश्वास, विचार और विवेक में, विवेक सबसे ऊपर है। विचार भी कंडीशनिंग से प्रभावित हो सकते हैं, लेकिन विवेक हमें सत्य को जानने की इच्छा से प्रेरित करता है। विवेक के माध्यम से हम मोह और भ्रम से मुक्त हो सकते हैं और सत्य के मार्ग पर चल सकते हैं।

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Transcript

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0:00 [संगीत] वास्तविक महाभारत की लड़ाई हुई है अर्जुन और कृष्ण के बीच में और इस लड़ाई में हिंसा इसीलिए नहीं है क्योंकि अर्जुन के हारने में ही अर्जुन की भलाई है मेरा क्वेश्चन नोट्स में से है बीइंग अवेयर ऑफ डिमांड्स ऑफ बॉडी बीइंग अवेयर ऑफ स्ट्रे थॉट्स दिस इ इंटेलिजेंस इट अकर्स थॉट इज एन इन एडिक्ट रिस्पांस टू

0:45 स्टिमसन एडिक्ट रिस्पांस स्पन निटी हमने देखा था कि हम खुद भी खुद को पास्ट में ही देख रहे हैं तो स्पन निटी को कैसे समझे य पर स्पन का यही अर्थ होता है जो एकदम सीधा है स्पष्ट ही है उसको स्वीकार कर लेना सर झुका देना बीच में मान्यता नहीं ले आना उदाहरण के लिए आप किसी धार्मिक जगह पर किसी जानवर का कत्ल होता देखें

1:31 बच्चा भी उसको देख के रो पड़ेगा और बच्चा भी तुरंत बोल देगा कुछ गलत हो रहा है लेकिन जो धर्म में एक मजहबी आदमी होता है उसे लगता ही नहीं कुछ गलत हो रहा है क्यों क्योंकि उसके और घटना के बीच में एक पूर्व निर्धारित विचार आ गया है वह विचार नहीं आया होता तो व्यक्ति तत्काल बोल देता है कि यह चीज गलत है और विचार क्या बोल रहा है विचार यह बोल रहा है कि जो यहां पर कृत्य चल रहा है कुर्बानी दी जा रही है यह एक धार्मिक चीज है इस विचार ने उसको जो स्पष्ट था सामने था बिल्कुल ओबवियस प्रत्यक्ष उसको देखने से भी वंचित कर दिया है तो चीज आखों के सामने पर अब दिखाई नहीं दे रही है क्योंकि

2:19 मान्यता का पर्दा पड़ गया है आपको बात समझ में आ रही है स्टी भी सबके साथ नहीं होगी ना स्टी भी सबके साथ नहीं होगी भी कंडीशनल हो जाएगी जिसके ऊपर मान्यता का पर्दा पड़ा है उसको तो नहीं य विचार आएगा हा उसको कैसे आएगा तो इसीलिए तो उस मान्यता के पर्दे को बार-बार चुनौती देने का ही नाम अध्यात्म है बारबार बारबार वह मान्यता हो सकती है कुछ और हो सकता है व राजा की कहानी सुनी है ना राजा को कुछ लोगों ने बेवकूफ बनाया और बोले आपके लिए लिए बड़ा हम झीना वस्त्र सिल रहे हैं और उससे पैसा लेते रहे लेते रहे लेते

3:06 रहे और बोले वो इतना झीना होगा इतना झीना होगा कि आज तक दुनिया में बनाया नहीं गया बाद में कई महीनों बाद वो राजा के पास आए बोले अब वो तैयार हो गया आपके लिए आप पहने उसको और था कुछ नहीं उसके सारे कपड़े उतार दिए उसको नंगा कर दिया बोले अब आपको तो पूरी प्रजा के सामने अपनी प्रदर्शनी लगानी चाहिए लोग देखें कि राजा के पास ये कितना वैभव वाला उत्कृष्ट अपूर्व वस्त है तो राजा अपने रथ पर सवार अपनी साथ में उन्होंने शर्त और जोड़ दी थी बोले एक बाप को हम बात बता देते हैं उसको पकड़ लीजिएगा जो एकदम पापी लोग होते हैं उनको यह वस्त्र दिखाई नहीं देता अब वह सब जो जितने थे वो दर्जी वो भी

3:55 रहे होंगे धार्मिक बंदे ही तो उन्होंने धर्म की पूरी हेकड़ी धर्म की पूरी अथॉरिटी के साथ यह बात कही होगी कि यह जो वस्त्र है यह पापियों को दिखाई नहीं देता तो अब राजा भी कैसे कहे कि नहीं दिखाई दे रहा राजा ने कहा ठीक है उन्होंने कहा चलिए आप प्रजा के सामने नुमाइश लगाइए अपनी राजा ने कहा वो भी ठीक है राजा बोल रहा क्या बढ़िया खूबसूरत है जितने मंत्री पार्षद थे वह भी जान गए थे कि जो पापी उसको नहीं दिखाई देगा तो वह भी बोल रहे हैं कि क्या खूबसूरत है प्रजा के सामने निकल रहा है प्रजा में सब लोग एक दूसरे को देख देख देख करके तारीफों के पुलिेर हैं क्या बात है क्या बच्चा था एक छोटा सा वो चिल्ला पड़ा है

4:42 नंगा यह तो नंगा है तो जब मान्यता सामने आ जाती है तो एकदम जो प्रत्यक्ष है आदमी उसको भी नहीं देख पाता एकदम नहीं दिखाई देता और जो नहीं है वह दिखाई देने लग जाता है आप यकीन रखिए बहुत सारे ऐसे लोग रहे होंगे जिन्ह सचमुच लग रहा था कि राजा ने कुछ पहन रखा है इसी को तो माया की विक्षेप शक्ति कहते हैं वह आपको वह दिखा देती है जो है ही नहीं और जो है बिल्कुल वह नहीं देखने देती तो आप मान्यता को ही माया कह सकते हैं एक तरह से जिस स्पन निटी की बात यहां कृष्ण मूर्ति कर रहे हैं वह वही है आंखों के आगे से माया का पर्दा हटा कर के सहज

5:28 अवलोकन सब दिख जाता है तब कोई दिक्कत नहीं आती एक फिल्म आई थी तो उसमें चार पांच बैचमेट्स थे ठीक उसकी शुरुआत हुई थी किसी कॉलेज के कैंपस से कहानी की तो उसमें चार पांच बैचमेट थे जिसमें से चार पुरुष थे एक महिला थी जो कैंपस में लड़के लड़कियां हुआ करते थे फिर कहानी आगे बढ़ती है उनके घर का एक दृश्य दिखाया जाता है जिसमें कि वह जो चारों बैचमेट है लड़के हैं वह अपना सोफे पर बैठे हुए कुछ बातें कर रहे हैं कुछ विचार विमर्श हंसी ठट्ठा कर रहे हैं मुझे ठीक से याद नहीं कुछ बातें कर रहे हैं सोफे बैठ गए हैं और उन्हीं की बैचमेट है व लड़की है वह पीछे खड़े होकर के कुछ चाय पानी खाना वगैरह कुछ

6:14 बना रही है तो आंखों से मान्यता का पर्दा हटाइए तो उसको देखते ही मैंने कहा कि यह क्या हो रहा है यह चार बैठे किस आधार पर हैं और वह अकेली खड़ी किस आधार पर है तो लोगों को ताज्जुब हुआ लोगों ने कहा तो मतलब घर की महिला है गृहिणी है अब यह सब है तो वही तो चाय पानी बनाएगी ना मान्यता जब आ जाती है तो आपको जो बहुत विकृत होता है वह भी अजीब नहीं लगता वह चीज बहुत बहुत विकृत हो सकती है पर नहीं लगती अजीब आप नहीं कोई विरोध करते आपके भीतर किसी भी तरह के आश्चर्य की जरा सी भी लहर नहीं उठती आप सती प्रथा पर जाइए एक औरत जलाई जा

7:02 रही है किसी को कुछ अजीब थोड़ी लग रहा है लग रहा है स्पन निटी का गला घोट दिया ना कोई ऐसा व्यक्ति जो कंडीशन ना हो उस बात को सही मानने के लिए जिसको आपने मान्यता ना पहना रखी हो आप उसको लेकर के आइए वह चिल्ला उठेगा व कहेगा क्या कर रहे हो पर वहां जो लोग खड़े हैं 100 200 सकता है 500 लोग खड़े हो किसी को कुछ नहीं लग रहा कुछ भी नहीं हिटलर ने कितने मार दिए श्वस सुना है लाखों में लाखों में भी नहीं मिलियंस में मार दिए किसी को कुछ अजीब लग ही नहीं रहा था

7:47 क्योंकि मान्यता थी किय जो यहूदी लोग होते हैं ना यह बड़े खराब होते हैं इन्होंने ही जर्मन राष्ट्र का खून पी लिया और यह अनार्य भी है हटाओ इनको जब मान्यता सामने आ जाती है तो एकदम एकदम जो वि भस्त और विभ और विकृत बात होती है वह भी आपको साधारण लगने लगती है स्वीकार्य लगने लगती है यह हो जाता है वही मैं पूछ रहा था आपसे कि कुछ मान्यता का पर्दा हटा जिन चीजों को आप नॉर्मल समझते थे वो थोड़ी एनर्मेक और उल्टा होगा देखिए आंखों पर मान्यता का पर्दा होगा तो जो बात एकदम सहज

8:34 होगी वो आपको बड़ी अजीब लगेगी बहुत अजीब लगेगी कोई सीधी बात बोलेगा आप कहेंगे कैसी बात बोल दी क्या बोल दिया सीधी सी तो बात थी उसमें क्या बोल दिया और जो एकदम टेढ़ा टपरा कहीं कार्यक्रम चल रहा होगा एकदम विदुप विभ वोह आपको लेगा तो ठीक ही है इसमें क्या है ये तो ठीक ही है ना ये तो ठीक ही है एक इंसान दूसरे इंसान को छू देगा तो अपवित्र हो जाएगा किसी को आपत्ति हुई इससे सैकड़ों सालों तक इस बात से किसी को आपत्ति हो रही थी क्या सैकड़ों सालों तक सबको लग रहा था ऐसा तो होता ही है यह तो ठीक ही है यह तो होता ही है मतलब इसमें गलत क्या है आप किसी आम आदमी से बात करें को तुम ही एकदम

9:22 नए आए हो ये तो चल रहा है सदियों से इसमें गलत क्या है और और यह जो सत्य निष्ठा होती है द द कमिटमेंट ट्रुथ ओनली वह आपसे कहती है मुझे सुनना ही नहीं है कि कितने हजार सालों से चल रहा है कौन-कौन बड़े लोग इस बात को मान गए हैं मुझे समझा दो और मैं कोई पूर्वाग्रह ग्रस्त नहीं हूं मैं समझने को तैयार बैठा हूं बिल्कुल हो सकता है कि आप जो कर रहे हो वही ठीक हो और आप जो कर रहे हैं अगर वही ठीक है तो मैं सर झुका के मान भी लूंगा लेकिन समझा तो दो भाई समझा तो

10:11 दो इस बात को अच्छे से समझिए आपको जो कुछ भी नॉर्मल अब नॉर्मल लगता है वह सिर्फ और सिर्फ आपकी मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है माने आपको कौन से संस्कार पकड़ा दिए गए हैं आपने किन बिलीव्स को किन धारणा को पकड़ लिया है वह चीज आपको सामान्य असामान्य लगने लगती इसलिए बारबार बोला करता हूं कॉमन सेंस से बच के रहिए कॉमन सेंस से बच के रहिए आप आज ट्रेन में बैठते हैं तो क्या आप यह करते हैं कि आपके बगल में जो बैठा हो पहले उसकी जाति पूछे आपको आपका बर्थ नंबर बता दिया गया उसको बता दिया बोले बैठ जाते हैं लेन आपको

10:56 पता है रेलवे जब एकदम नई नई आई थी तो तब इस बात से बड़ा बवाल मचा था कि पंडित जी बैठे होंगे उनके बगल में क्या कोई भी जाकर बैठ जाएगा तब कहा गया था कि यह हिंदू धर्म की रीढ़ तोड़ी जा रही है रेलवेज के द्वारा क्योंकि वहा यह तो बताया नहीं जा रहा कि आपके बगल में कौन बैठ रहा है तो ऐसे कैसे हो जाएगा कि कोई भी किसी के बगल में बैठ जाए आज आप सुन रहे हो तो देखो आप कैसी इस पर मुस्कान दे रहे हो आपको य बात कितनी अबन लग रही है और तब यह बात लोगों को नॉर्मल लगी थी तो नॉर्मल अब नॉर्मल के चक्कर में मत पढिए अगर डेढ़ दो साल पहले की बात आपको आज अब नॉर्मल लग रही है तो

11:42 बिल्कुल हो सकता है कि आज आपको बहुत कुछ जो नॉर्मल लगता हो वह नॉर्मल नहीं हो बस आपको दिखाई नहीं पड़ रहा है क्योंकि आंखों पर मान्यता चढ़ी हुई है संस्कार चढ़े हुए हैं और संस्कार का अर्थ कोई धार्मिक नहीं होता लोग सोचते हैं संस्कार से आशय 16 संस्कार होते हैं और आठ उप संस्कार होते हैं उनकी बात हो रही है हम कंडीशनिंग की बात कर रहे हैं हम कंडीशनिंग की बात कर रहे हैं एकदम चौक जाइएगा और कहिए कुछ गड़बड़ हुआ है जहां कोई आपसे कुछ पूछे मान लीजिए कोई बच्चा ही छोटा कोई सवाल पूछे और आप अचकचा जाए व कुछ पूछे और आपके पास बस यही उत्तर हो पर ये तो यस है आपके पास कोई

12:27 उत्तर नहीं है बस आपने कह दिया पर ये तो ओबवियस है ना या फिर पर पर ऐसा तो होता ही है ना अगर आप पाए कि ऐसा कुछ हो रहा है तो इसका मतलब बहुत गड़बड़ चल रही है इसका मतलब आप किसी चीज में बहुत गहराई से विश्वास करने लगे हैं बिना उस चीज को जाने और जब किसी ने पूछ लिया किसी बच्चे ने पूछ लिया तो आपको एकदम ताज्जुब हो गया है बगले झांकने लग गए और आपके पास बस एक ही जवाब बचा है क्या नहीं पर यह तो यस है नास ओबवियस क्या होता है ओबवियस क्या होता है समझा दो कैसे ओबवियस जो आज ओबवियस लगता

13:14 है व कल ओबवियस जो भारत में ओबवियस है अफ्रीका में ओबवियस भारत में ही एक राज्य में जो ओबवियस है दूसरे राज्य में ओबवियस तोय ओबवियस क्या होता है सत्य को को पूजना है ना या अपनी मान्यताओं को पूजना है बोल दो ये अच्छे से चुनाव कर लीजिए सच्चाई सर्वोपरि है या आपके विश्वास और विश्वास 999 प्र मामलों में आपको सच्चाई से विमुख ही करते हैं सच्चाई विश्वास की विषय वस्तु नहीं होती सत्य कभी विश्वास से नहीं पाया गया

14:02 विवेक से पाया गया है तो यह एक तरह का इसमें वरीयता क्रम है विश्वास विचार विवेक सबसे नीचे आता है विश्वास बस में तो विश्वास है साब विश्वास है उससे ऊपर आता है विचार और विचार से भी ऊपर आता है सहज विवेक क्योंकि विचार भी जबरदस्त तरीके से कंडीशन हो सकता है संस्कारित हो सकता है आपको जिस तरह की घुट्टी पिला दी गई है

14:47 आपको वैसे ही विचार आने भी शुरू हो जाते हैं तो विचार विश्वास से बेहतर तो है पर बहुत बेहतर नहीं है सबसे ऊपर कौन है विवेक डिस्क्रीशन जहां पर आप जानना ही चाहते हो हम

15:45 अच्छा बिन सत्संग विवेक ना होई राम कृपा बिन सुलभ ना सो कोई होई विवेक मोह ब्रह्म भागा तब रघुनाथ चरण अनुरागा कवित विवेक एक नहीं मोरे सत्य कऊ लिखी कागज [संगीत]

16:32 कोरे कवित विवेक एक नहीं मोरे सत्य कह लिखी कागद कोरे h [संगीत]

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