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संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में, ज्योतिषी सरिता कुलकर्णी मिथुन राशि में शुक्र के गोचर के बारे में बात कर रही हैं, जो कि बहुत खास है क्योंकि यह यक्ष लोक और कुबेर लोक से जुड़ा है। यह गोचर जन्मों-जन्मों के प्रेम, अधूरे कर्मों को पूरा करने और विभिन्न लग्न राशियों पर इसके प्रभावों पर प्रकाश डालता है।

मुख्य बातें:

  • मिथुन राशि में शुक्र का गोचर यक्ष और कुबेर लोकों से जुड़े कर्मों को सक्रिय करता है।
  • यह गोचर इटरनल प्रेम की प्राप्ति, नए उद्यमों की शुरुआत और संतान प्राप्ति के योग बनाता है।
  • विभिन्न ग्रहों (शनि, गुरु, राहु, सूर्य, बुध, मंगल, केतु) के साथ शुक्र की युति अलग-अलग प्रभाव डालती है।
  • प्रत्येक लग्न राशि के लिए गोचर के अलग-अलग फल होते हैं, जो प्रेम, धन, करियर और स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।
  • कुबेर साधना इस गोचर के दौरान लक्ष्मी प्राप्ति के लिए एक प्रभावी उपाय है।

मिथुन में शुक्र

ज्योतिषी सरिता कुलकर्णी मिथुन राशि में शुक्र के गोचर के बारे में बता रही हैं, जो नारद संहिता के अनुसार बहुत खास है। मिथुन राशि का शुक्र यक्ष लोक और कुबेर लोक से जुड़ा है, और यह गोचर इन लोकों से संबंधित कर्मों को सक्रिय करता है। पहले के वीडियो में यक्ष और यक्षिणी के कर्मों और उद्देश्यों पर चर्चा की गई है।

अनन्त प्रेम और यक्ष शाप

यह गोचर इसलिए खास है क्योंकि शुक्र गुरु के साथ युति बना रहा है। यह जन्मों-जन्मों के इटरनल प्रेम की प्राप्ति और ऐसे व्यक्ति से मिलन का समय है। इस दौरान अधूरे कर्म पूरे होंगे, और यह सब शुक्र यानी पवित्र प्रेम से संबंधित होगा। वासना से परे जाकर निस्वार्थ प्रेम करने वाले जातक इस गोचर में एक-दूसरे से मिलेंगे।

शनि के अनुसार शुक्र का प्रभाव

शनि से शुक्र चौथे स्थान पर है, लेकिन शुक्र के कर्म में शनि आते हैं। शुक्र का कर्म ही निर्धारित करेगा कि उसे न्याय मिलेगा, दंड मिलेगा या भुगतान करना होगा। शनि वक्री है और जलचर राशि (मीन) में है, इसलिए छुपी हुई खूबियां और गुप्त बुद्धि बाहर आने वाली हैं। व्यक्ति छुपते-छुपाते अपने प्रेम की प्राप्ति के लिए प्रयास करेगा। यह गोचर "छुपा रुस्तम" जैसा है, जहां व्यक्ति अपनी इच्छाएं सबके सामने जाहिर नहीं करता, लेकिन अकेले में उन्हें भोगने का प्रयास करता है। यदि शनि और शुक्र पत्रिका में नीच अवस्था में हैं, तो इसके नकारात्मक परिणाम मिलेंगे।

बृहस्पति के अनुसार शुक्र का प्रभाव

मिथुन राशि में दो गुरु एक साथ हैं, इसलिए यह गोचर खास है। यह यक्ष शापित पत्रिकाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है। गुरु की उपस्थिति के कारण प्रेम में शुद्धता है। गुरु और शुक्र का योग संतान प्राप्ति के योग बनाता है, और यह नए उद्यमों की शुरुआत के लिए भी शुभ है। यह गोचर अमर प्रेम की प्राप्ति का भी है, जहां ऐसे व्यक्तियों से मुलाकात होती है जो हर जन्म में साथ रहे हैं और अधूरे कर्मों को पूरा करते हैं।

राहु के अनुसार शुक्र का प्रभाव

राहु शुक्र से भाग्य में है, इसलिए यह शुभ है। राहु इच्छा है और शुक्र सुख की प्राप्ति है। मिथुन राशि मैथुन को दर्शाती है, इसलिए यह प्रेम को सफल बनाने का समय है। राहु उन लोगों के लिए सहायक होगा जिनकी पत्रिका में राहु और शुक्र शुभ हैं। यदि यह नीच अवस्था में है, तो यह वासना के रूप में आगे बढ़ेगा और बाद में नकारात्मक परिणाम मिलेंगे। राहु वृषभ राशि में उच्च का होता है और वृश्चिक राशि में नीच का होता है। नीच का राहु व्यक्ति को गुप्त और कुत्सित बुद्धि से सुख प्राप्त करने के लिए प्रेरित करता है। लंपट लोगों के लिए यह गोचर त्रासदायक होगा।

सूर्य और बुध के अनुसार शुक्र का प्रभाव

कर्क राशि में बुध और सूर्य की युति बनी हुई है, इसलिए बुद्धि काम नहीं करेगी। बुध जिस ग्रह के साथ बैठता है, उसके प्रभाव को बढ़ा देता है। यहां बुध सूर्य के साथ है, इसलिए व्यक्ति वासना में बह जाएगा। शुक्र से दूसरा भाव कुटुंब और धन से संबंधित घटनाओं में भी उपयोग होने वाला है।

मंगल के अनुसार शुक्र का प्रभाव

मंगल और शुक्र में 4-10 का संबंध है। मंगल से शुक्र दसवें स्थान पर है, इसलिए मंगल का कर्म अग्नि का होगा। शुक्र से कन्या राशि चौथी पड़ती है, इसलिए यहां शुक्र अग्नि के हिसाब से चीजें होंगी। मंगल शुक्र के योग पर पहले भी कई वीडियो बनाए गए हैं।

केतु के अनुसार शुक्र का प्रभाव

केतु एक कार्मिक ग्रह है, जिसे नकारात्मक और सकारात्मक दोनों कहा गया है। यह अध्यात्म के लिए सकारात्मक है और नकारात्मक इसलिए है क्योंकि यह नकारात्मक बनाता है। केतु कहता है कि एक चीज पर ध्यान केंद्रित करो, उसे पूरा करो और उसमें महारत हासिल करो। केतु से शुक्र और शुक्र से केतु तीसरे और ग्यारहवें स्थान पर हैं। यदि केतु और शुक्र शुभ अवस्था में हैं, तो इस पराक्रम से लाभ होगा। ऐसा व्यक्ति जो हर जन्म में मिलता है और अधूरे कर्म को पूरा करता है, वह अमर प्रेम की प्राप्ति कराता है। यदि व्यक्ति वासनिक है, तो केतु कहता है कि यह कर्म मत करो, क्योंकि इससे लाभ नहीं होगा और आगे चलकर समस्याएं आएंगी। केतु व्यभिचार न करने की सलाह देता है, क्योंकि इससे कुटुंब उजड़ जाता है। केतु बताता है कि किस तरह से अष्ट लक्ष्मी की प्राप्ति हो सकती है। मिथुन राशि का शुक्र यक्ष स्थापित है, इसलिए कुबेर तंत्र या साधना के माध्यम से लक्ष्मी की प्राप्ति हो सकती है।

मेष लग्न ♈

मेष लग्न के लिए मिथुन राशि का शुक्र तीसरे भाव में है, जो पराक्रम का भाव है। शनि शुक्र से दसवें भाव में है, जो व्यय भाव है। इसलिए, सोच समझकर पराक्रम करना चाहिए। इटरनल प्रेम केवल प्रियसी के अनुसार ही नहीं है, बल्कि मां का बच्चे के प्रति अनकंडीशनल लव भी है। तीसरे भाव में होने से सिबलिंग्स के प्रति प्रेम और लेनदेन का भी प्रभाव होगा।

वृषभ लग्न ♉

वृषभ लग्न के लिए शुक्र का गोचर दूसरे भाव में है। लग्नेश शुक्र है और गुरु के साथ युति बनाता है कुटुंब में। शुक्र लग्नेश और पेंडिंग कर्मा के स्वामी हैं। मिथुन राशि के शुक्र और गुरु की युति कुटुंब, धन और वाणी पर काम करने वाली है। पिछले जन्मों में वाणी और धन से संबंधित कर्मों का प्रभाव इस गोचर में दिखाई देगा। कुबेर साधना करने से लक्ष्मी की प्राप्ति हो सकती है, क्योंकि यह गोचर ही कुबेर साधना का है।

मिथुन लग्न ♊

मिथुन लग्न में शुक्र और गुरु लग्न में ही हैं। यदि मिथुन लग्न है और शुक्र भी वहीं है, तो यह यक्ष शापित पत्रिका है। गोचर में शुक्र लग्न में ही है, जो व्ययेश और पंचमेश है। मिथुन लग्न के जातकों के लिए संपूर्ण कर्म ऐहिक सुख को लेकर ही है। यह गोचर सेक्स और वासना से संबंधित अधिक प्रभावी रहेगा। जिस व्यक्ति से कितने ही जन्मों से प्रेम किया था, वह व्यक्ति सामने मिलेगा। यह व्यक्ति जीवन भर साथ रहेगा या नहीं, यह पत्रिका के अनुसार तय होगा।

कर्क लग्न ♋

कर्क लग्न के लिए मिथुन राशि का शुक्र व्यय भाव में है। यह गोचर शैया सुख को लेकर बहुत प्रभावी होगा, क्योंकि इससे संबंधित कार्मिक संबंध पूरे होने वाले हैं। यह अष्ट लक्ष्मी से संबंधित कर्मों को भी करेगा। शुक्र लाभ भाव और चतुर्थ भाव के स्वामी हैं, इसलिए लाभ और सुख की प्राप्ति होगी। व्यय भाव से संबंधित कर्मों को पूरा करने से लाभ और सुख मिलेगा। इस समय पर ऐसे सपने भी आएंगे जहां आप सेक्सुअली इनवॉल्वड हैं।

सिंह लग्न ♌

सिंह लग्न के लिए यह गोचर लाभ भाव में हो रहा है। लाभ भाव में मिथुन राशि का शुक्र यक्ष शापित गोचर दिखाता है। लाभ भाव कांटेक्ट सर्कल है और इनलॉस को दर्शाता है। यदि पिछले जन्म में ससुराल पक्ष में किसी के साथ छुपते-छुपाते संबंध बनाए हैं, तो ऐसा व्यक्ति वापस आएगा। इस तरह के प्रेम की प्राप्ति और लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए कुबेर की साधना करना चाहिए।

कन्या लग्न ♍

कन्या लग्न के लिए गोचर दशम भाव में हो रहा है, जो कर्म का भाव है। कर्म स्थान पर ऐसे व्यक्ति से मुलाकात होगी जो हर जन्म में मिला है और जिसका आपके ऊपर अनकंडीशनल प्रेम रहा है। यहां शारीरिक रूप से संलग्नता नहीं दिखाई देती है, लेकिन किसी व्यक्ति को आप बहुत पसंद करते हैं और उसका अच्छा चाहते हैं। वह व्यक्ति आपसे उम्र में छोटा या बड़ा हो सकता है। यह कर्म बंधन और प्रारब्ध को पूर्ण करने का गोचर है। यह गोचर लक्ष्मी प्राप्ति का भी है।

तुला लग्न ♎

तुला लग्न के लिए यह गोचर भाग्य में हो रहा है। जिस व्यक्ति ने आपको हर बार भाग्य दिया होगा, ऐसा व्यक्ति जिसने आपके ऊपर शुद्ध प्रेम किया है, वह वापस आएगा और भाग्य उन्नति देगा। यदि ग्रह ठीक नहीं हैं, तो ऐसा व्यक्ति आएगा जो आपका भाग्य खराब करेगा। यह गोचर तुला लग्न के जातकों के लिए भाग्य लक्ष्मी की प्राप्ति करा सकता है।

वृश्चिक लग्न ♏

वृश्चिक लग्न के लिए यह गोचर बहुत जबरदस्त है। मिथुन राशि का शुक्र अष्टम भाव में है और दो गुरु एक साथ हैं। अष्टम भाव के गुरु के लिए कहा जाता है कि व्यक्ति गत जन्म का तांत्रिक, वैदिक स्कॉलर और वेदाचार्य है। शुक्र के आने से शुक्राचार्य भी आ गए। यह समय तंत्र के माध्यम से बहुत पावरफुल है। गत जन्म में ऐसा कोई तांत्रिक पार्टनर रहा होगा जो मटेरियलिस्टिक गोल को पूर्ण करने के लिए साधना कर सकता है।

धनु लग्न ♐

धनु लग्न के लिए गोचर सप्तम भाव में है। शुक्र और गुरु लग्नेश के साथ बैठे हुए हैं, इसलिए यह गोचर बहुत शुभ है। विवाह बंधन में बंधने और प्रेम प्राप्ति के लिए यह अच्छा समय है। ऐसा व्यक्ति सामने आएगा जो हर जन्म में मिला होगा और जिससे आत्मिक प्रेम किया होगा। पार्टनर के रूप में यह गोचर बहुत शुभ है।

मकर लग्न ♑

मकर लग्न के लिए मिथुन राशि का शुक्र पेंडिंग कर्मा में है। पेंडिंग कर्मा में दो गुरु एकत्र बैठे हुए हैं, इसलिए गुरु से संबंधित या गुरु तुल्य व्यक्ति के साथ शुद्ध प्रेम रहा होगा। ऐसे प्रेम को मान्यता न मिलने पर व्यक्ति टूट जाता है। ऐसे समय पर उस कर्म का पूर्ण होना या उससे संबंधित घटनाक्रम होना दिखाई देता है। ऐसा व्यक्ति जिसने रोग से भी बाहर निकाला था, वह मिल सकता है।

कुंभ लग्न ♒

कुंभ लग्न के लिए गोचर पंचम भाव में हो रहा है। पंचम भाव में शुक्र और दो गुरु हैं, इसलिए संतान लक्ष्मी की प्राप्ति होगी। जो विवाहित नहीं हैं, उनके लिए इटरनल प्रेम और अनकंडीशनल लव की प्राप्ति होगी। यह गोचर नए उद्यमों को शुरू करने और नई विद्या को सीखने का है। ऑकल्ट विद्या और ज्योतिष विद्या में भी लगाव बढ़ेगा।

मीन लग्न ♓

मीन लग्न में शनि लग्न में है और शुक्र का गोचर चौथे भाव में हो रहा है। पिछले जन्मों में यदि आपने ऐसे व्यक्ति से प्रेम किया है जो आपके मदर साइड से है और बचपन में हुआ है, तो वह व्यक्ति वापस आएगा। वास्तु लक्ष्मी के अनुसार यह गोचर बहुत बढ़िया है। कुबेर साधना करने से वास्तु लक्ष्मी की प्राप्ति में मदद मिलती है।

उपाय

यह गोचर लक्ष्मी प्राप्ति के अनुसार भी बहुत महत्वपूर्ण है। अष्टलक्ष्मी की प्राप्ति के लिए यह समय अच्छा है। आप कौन सी लक्ष्मी को आकर्षित करना चाहते हैं? संतान लक्ष्मी, वैभव लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, गज लक्ष्मी? कुबेर तंत्र और साधना के माध्यम से लक्ष्मी की प्राप्ति कर सकते हैं। यदि आपके पास कोई गुरु नहीं है, तो कुबेर देवता नमो नमः मंत्र का उच्चारण करते हुए माला जप करें।

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Transcript

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0:01 नमस्कार आप सभी को। मैं सरिता कुलकर्णी एस्ट्रो लाइफ जंक्शन चैनल में आप सभी का स्वागत करती हूं। आज बात करने वाली हूं शुक्र के गोचर पर। शुक्र ऑलरेडी मिथुन राशि में गोचर कर गए हैं। और यह गोचर बहुत खास है। क्यों खास है? क्योंकि मिथुन राशि का जब शुक्र होता है तो अह नारद संहिता के अनुसार यह शुक्र खास है। इस शुक्र से ऐसी योनि के बारे में पता चलता है कि जातक अगर मिथुन राशि के शुक्र को लेकर जन्म लेकर आया हुआ है तो वह यक्ष लोक से है। कुबेर लोक से है। गोचर में जब मिथुन राशि में शुक्र जाते हैं, तो उस प्रारब्ध कर्म को एक्टिवेट करते हैं जो

0:48 मिथुन राशि के शुक्र लेकर आते हैं। मतलब मिथुन राशि के शुक्र के ऊपर मैंने ऑलरेडी वीडियोस डाले हुए हैं। यक्षपत्रिकाएं जब आती हैं या फिर मिथुन राशि का शुक्र मतलब यक्ष और यक्षिणी अह उनका कर्म क्या है? किस प्रकार से उनका क्या उद्देश्य होता है? इसके बारे में मैंने पिछले वीडियोस में बहुत बार बात करी है। आप चैनल पर जाकर चेक आउट कर सकते हैं। अब जब गोचर में शुक्र मिथुन राशि में आए हैं तो यह गोचर खास क्यों है? यह गोचर खास इसलिए है क्योंकि गुरु के साथ में यह युति बना रहे हैं। दो गुरु जो हैं वह एकत्र है। हम सभी ग्रह स्थिति सबसे पहले देखेंगे। ठीक है? कि हर ग्रह की स्थिति इस शुक्र

1:36 के लिए किस प्रकार से है। मिथुन राशि के शुक्र के लिए प्रत्येक ग्रह किस प्रकार से इंटरेक्शन देने वाला है। तो इस पूरे गोचर की टैगलाइन क्या है? आप समझेंगे कि जन्मोंजन्म का जो इटरनल प्रेम है, इमोर्टल प्रेम है, उस प्रेम की प्राप्ति होना, ऐसे व्यक्ति से आपका मिलन होना, ऐसे व्यक्ति से आपका सरोकार होना। तो जो अधूरा बचा हुआ कर्म है वह इस समय पर पूरा होगा और वह किससे संबंधित होगा वह शुक्र मतलब इटरनल लव जो जो होता है प्योर पवित्र प्रेम जो होता है जो ऐहिक सुख के

2:23 परे जाकर है जहां पर लस्ट वासना खत्म हो जाती है और फिर भी आप किसी व्यक्ति के ऊपर उसके सभी प्रकार के गुणों अवगुणों के साथ में उस व्यक्ति व्यक्ति के ऊपर नितांत प्रेम करते हैं। अब ऐसे जातक जो हैं इस गोचर में एक दूसरे से मिलते हैं। परंतु उसमें अगर लस्ट है उसमें अगर वासना की भूख है तो आप देखेंगे शनि से शुक्र कितने हैं। अब देखिए कि शुक्र से शनि दशम चतुर्थ मतलब फ़ोर्ट 10 एक्सेस का एक योग बनता है। इसका अर्थ हुआ कि शुक्र से तो

3:10 शनि से तो शुक्र चौथे आ रहे हैं। परंतु शुक्र के कर्म में आते हैं शनि। इसका अर्थ है कि शुक्र का कर्म क्या है? जो शुक्र का कर्म रहेगा उसके अनुसार उसे आगे चलकर न्याय मिलेगा या फिर दंड मिलेगा या फिर उसका भुगतान होगा। ठीक है? अब देखिए शनि वक्री भी है तो शनि के जो ऑफिशियल फीचर्स हैं वो अभी नहीं अवेलेबल है। ठीक है? तो शनि जो है यहां पे जलचर राशि में है। हम सर्वप्रथम शनि की बात कर रहे हैं शुक्र के गोचर के लिए। तो शनि जो है जलचर राशि में है मतलब मीन राशि में है। मीन राशि में है मतलब पानी की राशि है मतलब पानी के अंदर। तो वो सारी खूबियां बाहर आने वाली है जो छुपी हुई है या वो

3:55 बुद्धि काम करने वाली है जो गुप्त बुद्धि है। पानी के अंदर जो चीजें होती है दिखाई देती है क्या हमें सतह पर नहीं दिखाई देती है। समुद्र के अंदर क्या है? कितना अथान है? समुद्र कितना डीप है? क्या उसकी गहराई समझ में आती है? नहीं समझ में आती है। इसका अर्थ है कि यह गोचर जो है ना शुक्र यहां पे या शुक्र की जो कारकत्व है वह कैसे काम करने वाले हैं? छुपकर। मतलब व्यक्ति छुपते-छुपाते हुए अपने प्रेम की प्राप्ति को करने जाएगा। ठीक है? अब इसे हम ये शब्द सुनते हैं ना छुपा रुस्तम। तो छुपा रुस्तम यह शब्द यहां पर यूज होगा कि भाई व्यक्ति जो है कि जिस प्रकार

4:43 उसकी इच्छाएं हैं आकांक्षाएं वह सबके सामने जाहिर नहीं करता है बट अकेले में वो चीज उपभोगने का प्रयत्न करता है। अब सैटर्न इज़ स्ट्रेंथ फ्रॉम वीनस एंड वीनस इज़ फोर्थ फ्रॉम सैटर्न। ठीक है? तो यह जो यह जो गोचर है यह शनि प्रधान या हम यह कहेंगे कि शनि के कर्म अनुसार किस प्रकार से फलीभूत होगा जो गलत है मतलब ये दोनों ग्रह अगर आपके पत्रिका में नीच अवस्था में है शुभ अवस्था में नहीं है तो उसके फटके आएंगे क्योंकि विचार तो आने वाले हैं आपको। अब दूसरे ग्रह की बात करते हैं। दूसरा ग्रह मतलब गुरु है ना? अब गुरु की बात करते हैं।

5:29 देखिए मिथुन राशि में दोनों गुरु एकत्र है। गोचर खास क्यों है? मिथुन राशि के शुक्र के लिए यक्ष मतलब यक्ष शापित जो पत्रिकाएं होती हैं उनका यह गोचर है। राइट? और जिनकी पत्रिकाओं में गुरु भी वहीं पे हैं। तो अब ये दो गुरु एकत्र आए हैं। यहां पे यह जो प्रेम है ना, इटरनल प्रेम कहा गया है। इटरनल क्यों कहा गया है? पवित्र क्यों कहा गया है? क्योंकि गुरु है इसलिए और गुरु होने के कारण उस प्रेम में शुद्धता है। तो मतलब गुरु और शुक्र का योग जो मिथुन राशि में बना हुआ है और मिथुन राशि में यह जो गोचर चलेगा यह क्या दर्शा रहा है कि भाई संतान प्राप्ति के योग है यहां पर जो

6:14 दांपत्य संतान प्राप्ति करना चाहते हैं, वंश को आगे बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए योग बहुत शुभ कारक है। न्यू वेंचर्स का शुरू होना, नए बिज़नेस का शुरू होना। क्योंकि अह आप जब जैसे कोई YouTube चैनल शुरू करता है, तो वह क्या है? उसका एक इट्स अ बेबी फॉर इट फॉर देम। राइट? तो जब आप उसके ऊपर काम करते हैं। आप उसकी रचना कर रहे हैं। उसको बढ़ा रहे हैं। फल वो फल रहा है, फूल रहा है। मतलब कोई भी वेंचर, कोई भी काम जब आप करते हैं तो वह आपका बेबी होता है। दैट्स द। इसलिए जब ऐसा गोचर आता है तो बहुत सारे नए वेंचर्स भी शुरू होते हैं। उसके भी योग दुख रहे हैं। क्योंकि यह मिथुन राशि है तो यह पराक्रम हुआ। तो इस प्रकार का पराक्रम है। दोनों प्रकार का पराक्रम दिखेगा।

7:01 संतान उत्पत्ति के लिए वंश आगे बढ़ने का पराक्रम हुआ। किसी नए अह वेंचर की शुरुआत होना। नए ज्ञान को प्राप्त करने के लिए जाना यह भी दिखाई देता है और इसी के साथ-साथ अमर अमृत्व या जो इटरनल प्रेम की प्राप्ति का गोचर है यह मतलब ऐसे व्यक्तियों से आपकी गांठ भेट होने वाली है। ऐसे किसी व्यक्ति से जो जन्मों जन्मों से आपके साथ में हर जन्म में आपको मिलते आ रहे हैं और जो चैप्टर बचा हुआ है उसे पूरा करते हैं। खत्म नहीं होने वाला प्रेम जो हर जन्म में कंटिन्यूटी में रहता है।

7:47 अब यह हुआ गुरु के बारे में। अब राहु की बात करते हैं। तो राहु देखिए शुक्र से कहां है? तो भाग्य में है। मतलब नव पंचम योग बन रहा है। तो यह क्या है? शुभ है। राहु क्या है? यहां पर डिजायर है। और शुक्र क्या है? यहां पर थ्री लेटर्स हुए। सुख की प्राप्ति है शुक्र से। क्यों? शुक्र यहां पर मेन इसी चीज को दर्शा रहे हैं। क्यों? क्योंकि मिथुन राशि है। मिथुन राशि मैथुन को दिखाती है। उसका वो की फीचर है। ठीक है? अब यहां पे यह प्रेम सक्सेसफुल करने के लिए जाएंगे। क्यों? क्योंकि राहु डिजायर है इसलिए और नव पंचम शुभ योग में है इसलिए। अब यह राहु क्या होगा? सहायक होगा। उन सभी के लिए सहायक होगा जिनके पत्रिका में राहु शुभ है।

8:32 जिनकी पत्रिका में शुक्र शुभ है। याद रखिएगा। परंतु अगर यही नीच अवस्था में होगा तो वह लस्ट के रूप में आगे बढ़ेगा और आगे चलके उसे फटका मिलेगा। क्योंकि छुपा हुआ गोचर है। शनि कर्म है। मतलब छुपा हुआ गोचर है। छुपते-छुपाते यह चीज होने वाली है। तो आपकी डिजायर किस प्रकार से काम करेगी? तो वह डिपेंड करता है कि राहु शुक्र जो है वह आपकी पत्रिका में नीच अवस्था में है, शुभ अवस्था में है। किस प्रकार से हैं। राइट? मतलब मिथुन राशि के राहु वृषभ राशि के राहु उच्च होते हैं। परंतु एग्जैक्टली उसके सामने जो राशि आती है मतलब धनु राशि हुई। राइट? और वृश्चिक राशि में यहां पे राहु क्या हो जाते हैं? नीच हो जाते हैं।

9:20 तो व्यक्ति अपनी गुप्त बुद्धि से कुत्सित बुद्धि से उस चीज को प्राप्त करने के लिए जाता है। स्त्री या स्त्री सुख को या फिर ऐहिक सुख को प्राप्त करने के लिए जाता है। राइट? और उसके लिए अपनी गुप्त बुद्धि को यूज़ करता है। मतलब तंत्र करता है। इसलिए अष्टम स्थान से ये दोनों चीजें देखी जाती है। तो अगर ऐसा है तो क्या होगा? यह गोचर मैं शब्द जो यूज़ करने जा रही हूं बहुत इंपॉर्टेंट है यहां पे। लंपट लोग जो होते हैं उनके लिए यह गोचर क्या होगा? त्रासदायक होगा। प्रॉब्लमेटिक होगा। उनके उनका भांडा फूटना या उनका उनके लिए प्रॉब्लमेटिक होना आगे चलके उनके लिए ये सब चीजें डिफिक डिफिकल्टीज़ पैदा करेंगी। तो आपके इंटेंशन बहुत इंपॉर्टेंट है यहां

10:05 पर। ठीक है? एक और चीज जो इंपॉर्टेंट यहां पर यह है कि जो लंबट लोग हैं ना मतलब जो वासना को लेकर जीते हैं या उनके लिए यह गोचर क्या है कि प्रेगनेंसीज ट्रिगर होना यहां पर और फिर होता क्या है? बुरे कर्म हो जाते हैं व्यक्ति से। मतलब आप इस तरह के व्यवहार इस तरह का व्यवहार करते हैं। प्रिकॉशंस नहीं लेते हैं और फिर वो फिर प्रेगनेंसी जैसी चीज जब सामने आती है तो आप उसको अबॉर्शन कराने जाते हैं। मतलब गुनाह होता है ऐसे ऐसे जगह पर और ऐसे व्यक्तियों को दंड देने के लिए इसी प्रकार का घटनाक्रम घटित होता है। ठीक है? तो यह गोचर सावधान करता है कि आप आप कौन

10:53 से इंटेंशन से आगे बढ़ रहे हैं। अगर हम बात करें सूर्य की राइट बुध और सूर्य युति बनी हुई है कर्क राशि में। है ना? अब यहां पे बुद्धि काम नहीं करेगी। क्यों? क्योंकि सूर्य के साथ में है। बुद्धि बुध जो है जिस भी ग्रह जिस भी ग्रह के साथ में बैठते हैं तो वह उस चीज़ उस ग्रह का जो अह एक प्रोजेक्शन है वह बढ़ा देते हैं। डबल ट्रिपल कर देते हैं। तो बुध यहां पे सूर्य के साथ में है। तो सूर्य के साथ होने के कारण बुद्धि यहां पे काम नहीं करेगी। मतलब शुक्र वासना में ही इंसान बहेगा। याद रखिएगा। ठीक है? अभी शुक्र से दूसरे पढ़ते हैं मतलब कुटुंब धन इस चीज की भी एक तरह से घटनाक्रम में

11:41 उपयोग होने वाली है। ठीक है? अब देखिए मंगल की बात करते हैं कि मिथुन राशि के शुक्र का गोचर जो है वह मंगल के हिसाब से या मंगल यहां पर क्या रोल निभाने वाले हैं। अगर आप देखेंगे तो मंगल और शुक्र में अगेन फोर 10 एक्सिस है। तो मंगल से शुक्र कहां क्या है? दशम दशम पड़ते हैं। मतलब मंगल का कर्म होगा शुक्र अग्नि का। और शुक्र से क्या है? चतुर्थ में है। मतलब मिथुन राशि से कन्या राशि चौथी पड़ती है। तो इस केस में क्या होगा? यहां पे शुक्र अग्नि के हिसाब से चीजें होंगी। मैंने शुक्र अग्नि के ऊपर पहले भी बहुत सारे वीडियोस डाले हैं। अगर आपने नहीं देखे हैं तो आप देखिएगा जरूर। और अगर आपके पत्रिका

12:28 में भी मंगल शुक्र का योग है तो आप डेफिनेटली या मंगल शुक्र जिस भी पद्धति से आपकी पत्रिका में है उसके ऊपर आप चीजें सुनना चाहते हैं तो मैंने स्पेसिफिकली एक वीडियो बनाया है अह मंगल शुक्र के युति पर। आप वह वीडियो जरूर देखिएगा ताकि आपको यह वीडियो या यह गोचर किस तरह काम करेगा यह समझ में आएगा। ठीक है? अब यहां पे मंगल का रोल हमें समझ में आएगा कि मंगल यहां पे इसी पद्धति का पराक्रम दिखाने वाले हैं। अब हम नेक्स्ट ग्रह की बात करते हैं। कौन सा ग्रह हुआ? तो अब आता है केतु है ना? तो केतु जब है अब केतु कार्मिक ग्रह है। केतु

13:14 कित नेगेटिव भी कहा गया है और पॉजिटिव कहा गया है। पॉजिटिव किस चीज के लिए है? तो अध्यात्म के लिए है। और नेगेटिव किस चीज के लिए? क्योंकि नकारा नकारा बना देते हैं। हर हर चीज में ना अनुकुर करना एक जो स्वभाव होता है वो केतु से दिखाई देता है। केतु कहते हैं कि एक चीज पर कंसंट्रेट करो। उसे कंप्लीट करो। उसमें महारत हासिल करो और आगे जाओ। अब यहां पे केतु जो है अगेन यह कैसी एक्सिस है? 3 11 एक्सिस है। मतलब केतु से शुक्र और शुक्र से केतु तीसरे और लाभ मतलब 11वें पड़ते हैं। मतलब क्या है? पराक्रम इस तरह का पराक्रम करना चाहिए क्या? क्योंकि इस तरह के पराक्रम के लिए पराक्रम के बाद में आप लाभ की अपेक्षा कर रहे हैं। तो जब यह शुभ

14:02 अवस्था में है पत्रिका में मतलब केतु शुभ है, शुक्र शुभ है तो क्या होगा? इस पराक्रम से लाभ होगा। क्योंकि ऐसा व्यक्ति जिस जो व्यक्ति आपको हर जन्म में मिलता है और आपके साथ में जो चैप्टर बचा हुआ है अधूरा कर्म है वह पूर्ण करता है तो वह अमर प्रेम की प्राप्ति होती है। व्यक्ति संतुष्ट हो जाता है। व्यक्ति शांत हो जाता है। अगर यह ग्रह शुभ है तो कुछ रिश्ते होते हैं ना कि जीवन में कुछ ही समय के लिए होते हैं बट जीवन भर याद रह जाते हैं। उस प्रकार से जहां पर कंडीशंस नहीं है। अनकंडीशनल लव जिसे कहा जाता है। परंतु वही अगर लंपट लोग या लंपटता है किसी के चरित्र

14:50 में। मतलब अगर व्यक्ति वासनिक है तो क्या होगा? ऐसा गोचर बता रहा है। यहां पे केतु दर्शाते हैं। बोलते हैं कि भाई यह कर्म या यह पराक्रम करने मत जाओ क्योंकि यहां पे तुम्हें वह लाभ नहीं मिलेगा। आगे चलके क्या होगा? तुम्हें प्रॉब्लम्स आएंगी। ठीक है? मतलब क्या है कि यह गोचर केतु यहां पर बताते हैं कि व्यभिचार मत करो। व्यभिचार का पराक्रम मत करो। क्योंकि व्यभिचार का पराक्रम करोगे तो फसोगे आगे चलके। यह तुम्हारे लिए हितकारक नहीं है। यहां पे कुटुंब उद्वस्त हो जाता है। केतु यहां पे बताते हैं कि किस तरह से हर प्रकार के अष्ट लक्ष्मी की

15:35 प्राप्ति हो सकती है। यह भी केतु बता रहे हैं। क्यों? क्योंकि लाभ है ना। मतलब मिथुन राशि का शुक्र है मतलब यक्ष स्थापित हुआ। जिसके भी पत्रिका में मिथुन राशि है इसलिए और जब यह गोचर में आ रहे हैं तो दिखा रहे हैं कि यह पूरा गोचर अच्छा तब हो सकता है या इस गोचर में आपको ऐसी लक्ष्मी की प्राप्ति हो सकती है। किस माध्यम से? जब आप कुबेर तंत्र करते हैं या कुबेर साधना करते हैं या कुबेर के माध्यम से आपको लक्ष्मी की प्राप्ति हो सकती है। ठीक है? अब हम समझेंगे कि प्रत्येक लग्न राशि के लिए गोचर कैसा रहेगा। राइट। मेष लग्न के लिए देखिए मिथुन राशि का गोचर शुक्र का गोचर जो है वह उनके तीसरे भाव में हो रहा है। पराक्रम में हो रहा है।

16:21 पराक्रम में दोनों गुरु हैं और शनि इनके लिए एग्जैक्टली दशम में आते हैं। सॉरी शुक्र से दशम मतलब व्यय भाव में आ रहे हैं। इसका अर्थ यह है कि अब जो आप पराक्रम करने जा रहे हैं, जो आप प्राप्त करने जा रहे हैं, सोच समझ के यह पराक्रम करना है। ठीक है? आपके लिए अ इटरनल लव जो होता है या अमर प्रेम जो है ना वह हमेशा एक प्रियसी के अनुसार ही नहीं है। एक मां का एक बच्चे के प्रति अनकंडीशनल लव होता है। अभी तीसरे भाव में है तो सिबलिंग्स के प्रति मतलब किसी जन्म में आपके सिबलिंग ने आपके ऊपर बहुत नितांत प्रेम किया होगा या आपने अपने सिबलिंग पर नितांत प्रेम किया होगा और अगर लेनदेन बाकी है तो इस इस गोचर

17:09 में वह व्यक्ति आपको सहायक होगा और आपको सुख की प्राप्ति होगी। बिल्कुल वाइस वैसा उल्टा भी है कि अगर आपने गलत किया है तो उस गलत का भी भुगतान होगा इस गोचर में। शुभ लग्न के लिए देखिए कि यह शुक्र का गोचर कहां है? उनके लिए तीसरे भाव दूसरे भाव में है। खुद लग्नेश शुक्र है यहां पर और गुरु के साथ में युति बनाते हैं कुटुंब में। तो लग्नेश और पेंडिंग कर्मा के स्वामी हैं शुक्र यहां पर। इसका अर्थ हुआ कि मिथुन राशि के शुक्र और गुरु की युति जो आपके पत्रिका में दूसरे भाव में बन रही है, वह कुटुंब, धन और वाणी पे काम करने वाली है। राइट? अब

17:54 इसके इसके पहले यह जो जन्म है आपका इसके पहले जितने भी आपने जन्म लिए होंगे उस जन्म में आपने अगर कोई वाणी का कर्म किया है धन का कोई कर्म किया है लेनदेन घर पे या आपके कुटुंब में आपने किसी व्यक्ति पर नितांत प्रेम किया है तो उन सब चीजों का ट्रिगर इस पूरे गोचर में होने वाला है। यह शुक्र आपको लक्ष्मी की प्राप्ति करके दे सकते हैं। मिथुन राशि के शुक्र अगर आप कुबेर साधना करते हैं तो। क्यों? क्योंकि यह गोचर ही कुबेर साधना का है। राइट? क्योंकि मिथुन राशि का शुक्र जो है वह यक्ष लोक से होता है जातक और वो यक्ष शापित होता है। ऐसे समय पे वह अपना शुद्धिकरण करके अपनी पत्रिका को शुद्धिकरण करके क्या करता है? लक्ष्मी की प्राप्ति कर सकता है। ठीक है?

18:42 अब मिथुन राशि के मतलब मिथुन लग्न की बात करते हैं। ठीक है? मिथुन लग्न और लग्न में ही शुक्र है और लग्न में ही गुरु है। अगर जिनका मिथुन लग्न है और वहीं पर अगर शुक्र भी है मतलब आप क्या है? यक्ष शापित आपकी पत्रिका है। आप यक्ष लोक से आए हुए हैं। इसके बारे में अगर डिटेल समझना चाहते हैं तो आप कम आपको पत्रिका दिखवानी होंगी। मैं तभी आपको इस गत जन्म के चक्र को समझा सकती हूं कि क्यों यक्ष शापित है। गोचर में यह शुक्र आपको क्या बता रहे हैं? लग्न में ही शुक्र है। मतलब यह शुक्र कौन है? व्येश है और पंचमेश है। मिथुन लग्न के जातकों के लिए संपूर्ण कर्म क्या है? ऐहिक सुख को लेकर ही है। मतलब अह सेक्स को लेकर, वासना

19:31 को लेकर या इसी से संबंधित यह गोचर ज्यादा प्रभावी रहेगा आपके ऊपर। अब आपके लिए भी यह चीज कही जाती है कि कितने ही जन्मों से आपने जिस व्यक्ति के ऊपर प्रेम किया था या जिस व्यक्ति ने आपके ऊपर प्रेम किया था, शुद्ध प्रेम किया था क्योंकि गुरु है देखिए इसलिए शुद्ध प्रेम की बात कर रही हूं। वो व्यक्ति आपको सामने मिलेंगे। लाइफ लॉन्ग मिलने वाले हैं। नहीं कहा जा सकता। आपके पत्रिका के अनुसार यह सब चीजें तय होंगी। परंतु यह ऐसा व्यक्ति आपके जीवन में इस समय आएगा और जो बचा हुआ अधूरा लेनदेन कर्म है वह पूर्ण होगा। किस रूप में आता है, किस प्रकार से आता है? यह सारी चीजें ना प्रत्येक पत्रिका के अनुसार तय होती है। इंडिविजुअल कर्म के अनुसार, प्रारब्ध के

20:18 अनुसार तय होती है। बट यह आपके लिए सहायक होगा। कुछ मिलेगा कुछ खो कुछ खोएगा इंसान क्योंकि व्यय भाव के स्वामी है शुक्र यहां पर याद रखिएगा ठीक है कर्क राशि की बात करते हैं कर्क लग्न की बात करते हैं मतलब राइट तो कर्क लग्न के लिए ये गोचर कहां हो रहा है मिथुन राशि के शुक्र जो है वो उनके व्यय भाव में है व्यय भाव में मिथुन राशि के शुक्र अर्थात कर्क लग्न के जातकों के लिए गोचर क्या है शैया सुख को लेकर बहुत प्रभावी होगा एक क्यों क्यों? क्योंकि इसी से संबंधित कुछ ना कुछ कार्मिक संबंध जो है, कार्मिक पैटर्न जो है वो फुलफिल होने वाले हैं। यह एक प्रमाण हुआ यहां पर। दूसरा क्या होगा फैक्टर कि इसी से संबंधित अष्ट लक्ष्मी से संबंधित

21:05 व्यक्ति जो है कर्म को करेगा। यह शुक्र कौन है? लाभ भाव के स्वामी और आपके चतुर्थ के स्वामी हैं। इसके लिए मतलब लाभ और सुख। लाभ और सुख की प्राप्ति होगी। अब लाभ और सुख की प्राप्ति होगी। कैसे होगी? अगर आप इस शुक्र का जो व्यय भाव का कर्म है उसे पूरा करते हैं तो व्यय भाव का कर्म कैसा होगा? अब व्यय भाव फॉरेन ट्रैवल हो सकता है। व्यय भाव से संबंधित क्या होगा कि आप शैया सुख को संबंधित हो सकता है। ऐसे व्यक्ति को इस समय पे ना बहुत सारे आपको ऐसे ड्रीम्स भी आएंगे जहां पर आप सेक्सुअली इनवॉल्वड हैं और

21:51 आइदर व्यक्ति किसी को मार रहा है। आइदर व्यक्ति किसी के साथ में संलग्न है। अलग-अलग पद्धति की क्रिया करते हुए आप अपने आप को देखेंगे। पर हो सकता है कि चेहरा आपका खुद का ना हो। कहीं कोई व्यंजस का रूप दिखाई देगा। कहीं किसी के साथ में लस्ट का रूप दिखाई देगा। किसी के साथ में आपका यह आप अपने आप को देख रहे हैं। आप व्यक्ति के व्यक्तियों के साथ में ऐसा कर रहे हैं। यह नहीं कह रही हूं मैं आपको। राइट? इस प्रकार के ड्रीम्स आएंगे। इस प्रकार के स्वप्न सूचक होंगे। वो स्वप्न सूचना क्या दे रहे हैं ना समझना बहुत आवश्यक है आपको इस गोचर में। क्योंकि वह तय करते हैं क्योंकि स्वप्नों के माध्यम से आपको इस गोचर का अर्थ भी समझ में आएगा। अब वह

22:37 लक्ष्मी से संबंधित भी हो सकता है। अष्ट लक्ष्मी से संबंधित भी हो सकता है। तो ध्यानपूक ऑब्जर्व करिए और अगर लक्ष्मी की प्राप्ति आप करना चाहते हैं तो कुबेर साधना कीजिए। इससे आपको क्योंकि यह बहुत बढ़िया टाइम पीरियड है इस चीज के लिए। सिंह लग्न की बात करें तो यह गोचर उनके लाभ में हो रहा है। लाभ भाव में मिथुन राशि का शुक्र मतलब यक्ष शापित यह गोचर जो है लाभ भाव में दिखता है। इसका अर्थ है कि लाभ भाव कांटेक्ट सर्कल है आपका। आपके इनलॉस को देखा जाता है यहां से। मतलब गत जन्म के चक्र के अनुसार अगर आपने किसी अगर व्यक्ति से ऐसा कर्म हुआ है कि अपने ही ससुराल पक्ष में किसी के साथ में

23:25 छुपते-छुपाते रिलेशन बनाए हैं। किसी के साथ में किसी के ऊपर प्रेम किया है। भले ही वह प्रेम आपने शारीरिक रूप से नहीं किया है परंतु मानसिक रूप से आत्मिक रूप से किया है। ऐसा व्यक्ति आपके सामने आएगा वापस से। वह पूर्ण होने के लिए या वह जो भी बचा हुआ लेनदेन है एक प्रभाव यह है इस चीज इस तरह इस चीज की या इस तरह के प्रेम की प्राप्ति होना लक्ष्मी की प्राप्ति होना लक्ष्मी की प्राप्ति के लिए आपको क्या होगा क्या करना चाहिए कुबेर की साधना करना चाहिए कुबेर यंत्र कुबेर मंत्र कुबेर साधना आप अपने गुरु से इस संबंध में बात कर सकते हैं और इसको कर सकते हैं कि किस प्रकार से इस चीज को करा जाए राइट

24:10 यह गोचर ना प्रारब्ध के उस कर्म को एक्टिवेट कर रहा है जिस जिस कर्म को आप हर जीवन में करते आए हैं। याद रखिएगा अब यह कैसे दिखता है यह इंडिविजुअल पत्रिका के अनुसार बताऊंगी। क्यों? क्योंकि व्यय भाव में बुद्धि कौन से नक्षत्र में बैठी हुई है। उस मतलब बुध कौन से नक्षत्र में है? पुनर्वसु नक्षत्र में अगर बुध हैं इसकी पुनरावृति हो रही है। हर जन्म में हो रही है। अब आपके जन्म पत्रिका के अनुसार वह चीज और ज्यादा उसका खुलासा होगा। राइट? कन्या लग्न की बात करते हैं। कन्या लग्न के लिए देखिए गोचर कहां हो रहा है? उनके दशम भाव में। कर्म है। कर्म में ही मिथुन राशि के

24:55 शुक्र आ रहे हैं। मतलब कर्म किस प्रकार का है? मिथुन राशि के शुक्र का है। राइट? तो करियर में आपके ऑफिस के प्लेस में आपके कर्म स्थान पर ऐसे व्यक्ति से गाठभट हो जाना जो हर जन्म में आपको मिलते आया है और उस व्यक्ति के साथ में या उस व्यक्ति का आपके ऊपर अनकंडीशनल प्रेम रहा है। यहां पे शारीरिक रूप से संलग्नता नहीं दिखाई देती है। याद रखिएगा। बट किसी व्यक्ति किसी व्यक्ति को आप बहुत पसंद करते हैं और सिर्फ पसंद करते हैं कि उसका अच्छा चाहते हैं। आप नितांत प्रेम करते हैं। तो जो हर जन्म में आपको मिला होगा वह व्यक्ति आपको यहां पे मिलने वाला है। अब वह जरूरी नहीं कि आपकी ऐज का हो। वह

25:44 आपसे बड़ा भी हो सकता है उम्र में क्योंकि सप्तम में आपके शनि आता है। शुक्र से सप्तम शुक्र से दशम में शनि है और वह कहां है? सप्तम भाव में है। मतलब आइदर व्यक्ति आपसे बहुत छोटा होगा उम्र में या फिर आपसे बहुत बड़ा होगा। और यह कर्म बंधन या इस तरह के प्रारब्ध को पूर्ण करने का यह गोचर है। यह गोचर लक्ष्मी प्राप्ति का भी है। अष्ट लक्ष्मी की प्राप्ति जो करना चाहते हैं अपने घर में लक्ष्मी की प्राप्ति लक्ष्मी को स्थापित करना चाहते हैं तो यह गोचर उनको सहायक होगा। इस चीज को कैसे कर सकते हैं? कुबेर साधना करिए। कुबेर यंत्र स्थापित करिए। इस इसके लिए आपको अपने गुरु से पूर्णतः बात करके सब चीजें समझकर वह चीज

26:29 करनी चाहिए। नहीं किसी के पास गुरु है तो केवल कुबेर मंत्र कुबेर देवता नमो नमः इसकी भी ही मंत्र इस मंत्र की भी माला जपी जा सकती है। आवर्तन कितने करने हैं आपके ऊपर है। पता लगने के लिए देखिए ये गोचर कहां हो रहा है? तो यह गोचर हो रहा है उनके भाग्य में। जिस व्यक्ति ने आपको हर बार भाग्य दिया होगा। ऐसा व्यक्ति जिसने आपके ऊपर शुद्ध प्रेम किया है। शारीरिक प्रेम की बात नहीं कर रही हूं मैं यहां पर। ऐसे ऐसा व्यक्ति या ऐसा कर्म या ऐसा रिलेशन आपका वापस से सामने आएगा जो आपको वापस से भाग्य कारक या भाग्य उन्नति देकर जाएगा। भाग्य लक्ष्मी देकर जाएगा। या फिर एग्जैक्टली ऑोजिट भी

27:15 हो सकता है कि अगर आपके यह ग्रह ठीक नहीं है पत्रिका में तो क्या होगा? या शुभ अवस्था में नहीं है। अशुभ अवस्था में है तो ऐसा ऐसा व्यक्ति आएगा जो आपका भाग्य खराब करेगा। आपका भाग्य कुंठित करेगा। डिपेंड करता है कि आपका आपकी पत्रिका क्या बता रही है। आपके कर्म क्या बता रहे हैं। और इसे समझने के लिए पूरी पत्रिका में हर ग्रह का इंटरेक्शन आपस में किस प्रकार से है। किसी एक ग्रह को लेकर कोई भी चीज बोली नहीं जा सकती है क्योंकि वह ग्रह कंट्रीब्यूट कर रहा है वहां पर। तो यह गोचर तुला लग्न के जातकों के लिए क्या देता है? यह भाग्य कारक मतलब भाग्य लक्ष्मी की प्राप्ति हो सकती है आपको। अगर आप किस-किस माध्यम से कर सकते हैं? कुबेर

28:02 तंत्र करिए, कुबेर साधना करिए, कुबेर मंत्र करिए। इस माध्यम से आप भाग्य लक्ष्मी प्राप्त कर सकते हैं। राइट? वृश्चिक लग्न की बात करते हैं। वृश्चिक लग्न के लिए गोचर बहुत ही जबरदस्त है। क्यों? गुरु कभी वृश्चिक लग्न के लिए देखिए यह मिथुन राशि का शुक्र जो है ना वो उनके अष्टम भाव में है और दो गुरु एक साथ है अष्टम भाव में अष्टम भाव के गुरु के लिए कहा जाता है कि भाई व्यक्ति तो गत जन्म का तांत्रिक है वैदिक स्कॉलर है वेदाचार्य है और वहां पे अब शुक्र भी है मतलब क्या है कि शुक्राचार्य भी आ गए तो मतलब जातक इस समय पे वृश्चिक लग्न के लोग वृश्चिक चंद्र अगर कुंडली से आप देख रहे हैं तो वृश्चिक राशि से जो लोग हैं।

28:48 यह समय ना बहुत पावरफुल है तंत्र के माध्यम से। तंत्र के पॉइंट ऑफ व्यू से। तंत्र मतलब साधना। तंत्र मतलब तन से किया की हुई साधना सा और उसे साध्य करना। तो जो तन से किया जाए वो तंत्र है। मन से किया जाए वो मंत्र है और यंत्र मतलब आप किसी ना किसी पद्धति से एक ज्योग्राफिकल ज्योमेट्रिकल फिगर बनाकर उसे बंधित करके उस माध्यम से व्यक्ति की रूपरेखा मानकर व्यक्ति नहीं देव की रूपरेखा मानकर उसकी साधना करते हैं। अष्टम भाव में जब है मतलब यह आपके तांत्रिक पद्धति से जो प्रेम प्राप्ति करी है उसकी बारे उसके बारे में बातचीत हो रही है। तो गत जन्म में ऐसा कोई तांत्रिक

29:35 पार्टनर आपका रहा है कि आप मटेरियलिस्टिकली ऐसे मटेरियलिस्टिकली सारे गोल को पूर्ण करने के लिए आपको पार्टनर ऐसा चाहिए कि आप जिसके साथ में साधना कर सकते हैं और साधना के माध्यम से सारी चीजें हासिल कर सकते हैं। ऐसी इच्छा रख के आपने जो चीजें करी होंगी ऐसे व्यक्ति को अगर प्राप्त किया होगा वो व्यक्ति ऐसे समय पे आपको सामने मिल सकता है या फिर ऐसे समय पे व्यक्ति कुबेर साधना करता है कुबेर साधना करनी चाहिए इस गोचर में कुबेर साधना कुबेर तंत्र करना चाहिए जिसके माध्यम से आप लक्ष्मी की प्राप्ति कर सकते हैं अष्ट लक्ष्मी की प्राप्ति कर सकते हैं धनु लग्न की बात करें धनु लग्न के लिए देखिए गोचर कैसा है सप्तम भाव में है यह शुक्र और गुरु मतलब लग्नेश भी वहां पे

30:21 बैठे हुए हैं। इसका अर्थ है कि यह गोचर बहुत शुभ है। सबसे पहले तो क्यों शुभ है? क्योंकि बहुत सारे ऐसे जातक जो विवाह बंधन में बंधना चाहते हैं या प्रेम प्राप्ति करना चाहते हैं। ऐसा अगर राहु में शुक्र या शुक्र में राहु की दशा आपकी चल रही है तो ऐसा व्यक्ति आपके सामने आएगा जो हर जन्म में आपको मिला होगा और आपने उससे प्रेम किया होगा और उसने आपसे आपसे प्रेम किया होगा और वह शारीरिक ना होकर आत्मिक लेवल पर होगा। ऐसा व्यक्ति आ सकता है। हां परंतु ऐसे संबंध के क्या फ्यूचर होते हैं? हैं। यह पत्रिका के अनुसार देखा जाता है। क्या यह सिर्फ कुछ लेनदेन बचा हुआ है। अधूरा बचा हुआ कर्म है। उसे पूरा करने के लिए व्यक्ति सामने आ रहा है। क्या है? यह सारी चीजें इंडिविजुअल पत्रिका के

31:07 इंडिविजुअल प्रारब्ध के अनुसार तय होती है। परंतु पार्टनर के रूप में यह गोचर बहुत शुभ है आपके लिए। तो जो जो व्यक्ति अष्टलक्ष्मी में ऐसी स्त्री या ऐसे पुरुष की प्राप्ति करना चाहता है जो जिसके साथ में साधना के माध्यम से सारे मटेरियलिस्टिक ऐिक सुखों को प्राप्त किया जा सके। ऐसी विचारधारा रख के जो व्यक्ति जाता है उनके लिए यह गोचर बहुत शुभ है। ऐसे बहुत सारे लोग होंगे कि जो चाहते होंगे कि मुझे ऐसी पार्टनर चाहिए, मुझे ऐसा पार्टनर चाहिए जो मेरी स्पिरिचुअल जर्नी में मुझे साथ दे। दिस इज द गोचर। मकर लग्न की बात करते हैं। मकर लग्न के लिए पेंडिंग कर्मा में है यह मिथुन राशि के शुक्र। जिनका मिथुन राशि का शुक्र है

31:53 उनके लिए क्या हुआ कि पें अब पेंडिंग कर्म पूर्ण होने का समय आ गया है क्योंकि शुक्र का शुक्र के ऊपर गोचर हुआ। वहां पे दूसरा गुरु भी है। मतलब दो गुरु एकत्र बैठे हुए हैं पेंडिंग कर्मा में। पेंडिंग कर्मा में दो गुरु एकत्र आ रहे हैं। इसका अर्थ है कि गुरु से संबंधित या गुरु तुल्य व्यक्ति के साथ में या गुरु शिष्य के रूप में जो संबंध रहा था उसमें जो एक शुद्ध प्रेम रहा होगा। राइट? परंतु ऐसे प्रेम को अगर सही तरीके से मान्यता ना मिले या उसके ऊपर लांछन लगाया जाए तो व्यक्ति क्या हो जाएगा? अंदर से टूट जाते हैं। ऐसे समय पर उस कर्म का पूर्ण होना या उससे

32:40 संबंधित कुछ ना कुछ घटनाक्रम होना यह चीज दिखाई देती है। एक दूसरा अब यह गोचर क्या दिखाता है कि ऐसी लक्ष्मी या ऐसा व्यक्ति जिस व्यक्ति ने आपको रोग से भी बाहर निकाला था। रोग रिपु ऋण है। राइट? यह भाव मतलब हर जन्म में ऐसा व्यक्ति आपको मिला होगा आपके पुण्य से जिसने आपके ऊपर शुद्ध प्रेम किया और आपको ऐसे समय पे वह मिलता है या जैसे अभी मिल रहा है तो वह आपको आपके रोग रिपु ऋण के कंडीशन में से निकालने वाला आपको मदद करने वाला मिल सकता है। अब वो मदद लेना है सामने वाले को उसी प्रकार से वह मदद वापस देना है। यह सारी चीजें जो है ना यह प्रारब्ध का खेल जो है

33:26 यह कर्म जो है ना यह पत्रिका देखे बिना बताया नहीं जा सकता है। परंतु यह योग बनते हैं। यहां पे अच्छी नौकरी मिलने के योग बनते हैं। अच्छा डेेजिग्नेशन मिलने का योग भी बनता है। कुंभ लग्न के लिए देखिए गोचर कहां हो रहा है? पंचम भाव में हो रहा है। पंचम भाव में शुक्र मिथुन राशि के शुक्र हैं। और यहां पे आप देखेंगे कि दो गुरु हैं। मतलब संतान के लिए सबसे पहले यह गोचर बहुत अच्छा हुआ। मतलब संतान लक्ष्मी की प्राप्ति होगी। एक जो व्यक्ति विवाहित ही नहीं है उनके लिए उनका इटरर्नल प्रेम शुद्ध प्रेम जो है आत्मिक प्रेम जो है अनकंडीशनल लव जो है हर जन्म में जिस व्यक्ति के ऊपर आप प्रेम करते आ रहे हैं उस व्यक्ति का आना उस व्यक्ति के साथ में संबंध जुड़ना इसकी संभावना दिखती है यह

34:14 गोचर नए वेंचर्स को शुरू करने का है। नए प्र नई विद्या को शुरू करने का है। नए स्किल सेट्स को एक्वायर करने का है। यह गोचर दिखाता है कि बुद्धि में दो गुरु शुक्र और गुरु हैं। इसका अर्थ है कि ऑकल्ट विद्या, ज्योतिष विद्या इन सभी विद्याओं में भी आपका जो लगाव है या जो झुकाव है यह बढ़ेगा और ऐसे ग्रंथ आपके हाथ लगेंगे जो या ऐसा उस ग्रंथ का पन्ना आप खोलेंगे जिससे आपके जीवन में बदलाव आएगा। ऐसी व्यक्ति जब आती है तो वह व्यक्ति आपको बहुत कुछ देकर जाती है। अब यह डिपेंड करता है कि यह ग्रह आपके पत्रिका में शुभ अवस्था में है क्या? पंचम भाव शुभ अवस्था

35:00 में है क्या? तभी अन्यथा विपरीत भी प्रभाव हो सकते हैं। मतलब ब्रेकअप हो जाना। कार्मिक कार्मिकली टूट जाना चीजें। राइट? विपरीत भी प्रभाव हो सकता है। लग्न की बात करते हैं। मीन लग्न की बात करते हैं। मीन लग्न में ही लग्न में शनि है और यह गोचर जो है शुक्र का यह चौथे भाव में हो रहा है। मिथुन राशि के शुक्र जो है चौथे भाव में है। गत जन्म में यह आपका पहला जन्म नहीं है। इसके पहले भी आपने काफी बार जन्म लिया है। राइट? तो पिछले जन्मों में अगर आपने ऐसे व्यक्ति के ऊपर प्रेम किया है जो आपके मदर साइड से है। आपके माता के साइड से है और वह बचपन में बचपन में आपसे हुआ है। परंतु उसका कोई फ्यूचर नहीं रहा। ऐसा व्यक्ति जिसकी इच्छा

35:46 शेष बची हुई है। ऐसा व्यक्ति वापस से वही व्यक्ति आपके सामने आता है। जो आपका कंफ़र्ट ज़ोन होता है, उस व्यक्ति के साथ में आपका आपको एक अनकंडीशनल प्रेम फील होता है। उसकी प्राप्ति होना। दूसरा वास्तु लक्ष्मी के अनुसार यह गोचर कैसा है? बहुत बढ़िया है वास्तु लक्ष्मी को प्राप्त करने के लिए। मतलब अगर आप कुबेर संसाधना करते हैं, कुबेर तंत्र करते हैं, तो आपको वास्तु लक्ष्मी की प्राप्ति में मदद होती है। क्योंकि यह गोचर उस चीज के लिए सहायक है। राइट? कैसे करना है, क्या करना है? यह आप अपने गुरु से बात कर सकते हैं। अगर नहीं है तो क्या कर सकते हैं इस केस में? कि कुबेर देवता नमो नमः इस प्रकार के मंत्र

36:33 की जाप माला का आवर्तन आप तय करें कि पांच करना है, सात करना है, 11 माला करनी है, 51 माला करनी है, कितनी करनी है? जब तक यह शुक्र का गोचर रहेगा तब तक अगर आप यह चीज करते हैं रोज इसका आवर्तन करते हैं, तो आपको इसका बहुत अच्छा प्रभाव मिलेगा। इस प्रकार से हमने सभी 12 लग्न देख लिए हैं। राइट? अब हर लग्न के समय पे मैंने रेमेडीज तो बताई है। परंतु अब मैं और ज्यादा इस चीज को डिटेल में आपको बता रही हूं कि ये पूरा गोचर जो है ना मिथुन राशि में जब तक जब तक शुक्र रहने वाले हैं क्योंकि गुरु वहां पे है ही दो गुरु का योग बना हुआ है। राइट? इसका अर्थ है कि यह गोचर बहुत इंपॉर्टेंट है। लक्ष्मी प्राप्ति के अनुसार भी बहुत अब लक्ष्मी

37:19 प्राप्ति अष्टलक्ष्मी की प्राप्ति है ना? आठ प्रकार की लक्ष्मी होती है। उसके सब सब आठ प्रकार होते हैं। मतलब 8 * 8 64 सो 64 टाइप्स 64 योगिनी बोली जा बोला बोली जाती है। तो जब आप अब आपके जीवन में आप कौन सी लक्ष्मी को अट्रैक्ट करना चाह रहे हैं या कौन सी लक्ष्मी की प्राप्ति चाह रहे हैं? संतान लक्ष्मी है, वैभव लक्ष्मी है, विजय लक्ष्मी है, गज लक्ष्मी है। राइट? ऐसे पार्टनर को आप चाह रहे हैं कि जिस पार्टनर के साथ में आप साधना के माध्यम से हर चीज़ को प्राप्त कर सकते हैं। विज्ञान भैरव तंत्र जो आता है या यहां पे 112 सूत्र कामाख्या साधना आती है। कुबेर साधना आती है। इन सभी के जो जातक इन सब चीजों में रहा होगा ना उसके लिए ये गोचर बहुत खास है। यहां पे वो

38:05 सारी चीजें ट्रिगर होने वाली है। इस गोचर में आप कुबेर तंत्र कर सकते हैं। कुबेर साधना के माध्यम से लक्ष्मी की प्राप्ति कर सकते हैं। जो लक्ष्मी आप प्राप्त करना चाह रहे हैं। चाहे वह संतान लक्ष्मी हो या वैभव लक्ष्मी हो जो भी लक्ष्मी आप प्राप्त करना चाह रहे हैं। अगर आपके पास में कोई गुरु नहीं है जो आपको गाइड कर सकते हैं तो आप क्या कर सकते हैं? साधारण रूप से मार्केट से आप खैर मुझे अधिकार नहीं है आपको इस चीज को बताने का। तो मैं आपको यहां पे क्या बताऊंगी? केवल इतना ही बताऊंगी कि आप कुबेर मंत्र करिए। कोई कुबेर मंत्र अगर आपको नहीं पता है तो केवल इतना करिए कि कुबेर देवता नमो नमः इस मंत्र का उच्चारण करते हुए मंत्र जप करते हुए एक माला पांच माला सात माला 10 11 माला 21 माला 51 माला

38:51 मतलब जब तक शुक्र का गोचर मिथुन राशि में है तब तक रोज अगर आप इतने मंत्र की जाप मतलब मंत्र की मालाएं करते हैं मान लीजिए किसी ने संकल्प ले लिया कि मुझे 21 माला रोज करनी है या 51 माला रोज करनी है और मुझे इस लक्ष्मी की प्राप्ति करनी है और कुबेर देवता को पूजना है। आप यकीन नहीं मानेंगे यह तंत्र काम करता है और इसके रिजल्ट्स बहुत मिरेकुलस होते हैं। बहुत सुंदर होते हैं। तो जो लोग लक्ष्मी के लिए फंसे हुए हैं उनको बहुत इस चीज का लाभ हो सकता है। तो इस तरह से इसकी शुरुआत करें और अपने लिए अपना भाग्य का रास्ता ओपन करिए। ठीक है? अपनी पत्रिका समझना चाहते हैं तो आप

39:36 डेफिनेटली कंसल्टेशन लेने के लिए आ सकते हैं। पत्रिका प्रारब्ध कर्म समझना चाहते हैं, गत जन्म का चक्र समझना चाहते हैं तो आप जरूर आ सकते हैं पत्रिका दिखाने के लिए। डिटेल्स यहां पे मैंने नीचे मेंशन करी हुई है। यहीं पे विराम देती हूं इस वीडियो को। मुझे अंत तक सुनने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। जल्दी मिलती हूं नेक्स्ट वीडियो में। मंगल का वीडियो लेकर आऊंगी आप सभी के लिए क्योंकि मंगल अब मंगल केतु की युति टूट रही है तो वह वह वीडियो भी बहुत इंपॉर्टेंट होने वाला है। मुझे अंत तक सुनने के लिए अगेन धन्यवाद जय मां कामाख्या हर हर महादेव ओम कुंभ कुबेराय नमः ओम शुक्राय नमः महादेव

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