EMRS | 06 Hours Marathon | Teaching Aptitude Complete One Shot Revision | Monika Ma'am

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो शिक्षण अभिरुचि (Teaching Aptitude) पर आधारित है, जिसमें शिक्षण प्रक्रिया, विधियाँ, और प्रभावी शिक्षण के सिद्धांतों पर विस्तृत चर्चा की गई है। मुख्य बातें:

  • शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की बुनियादी अवधारणाएँ और सिद्धांत।
  • प्रभावी शिक्षण विधियाँ और कक्षा प्रबंधन तकनीकें।
  • शिक्षार्थियों की आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षण में अनुकूलन।
  • मूल्यांकन के विभिन्न प्रकार और उनका महत्व।

परिचय

शिक्षिका बताती हैं कि यह क्लास टीचिंग एप्टीट्यूड का रिवीजन करने के लिए है। उन्होंने छात्रों की मेहनत और तैयारी की सराहना की और कहा कि यह क्लास उनकी तैयारी को और बेहतर बनाने में मदद करेगी। शिक्षिका ने छात्रों को प्रोत्साहित किया कि वे आत्मविश्वास बनाए रखें और विश्वास रखें कि उन्होंने जो पढ़ा है, प्रश्न उसी में से आएंगे।

शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया की बुनियादी अवधारणाएँ

शिक्षण एक द्विध्रुवी प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक और शिक्षार्थी दोनों शामिल होते हैं, जबकि अधिगम एक एकतरफ़ा प्रक्रिया हो सकती है। प्रभावी शिक्षण में ज्ञान का स्थानांतरण नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया को सुगम बनाना शामिल है। प्रभावी शिक्षण के लिए शिक्षार्थी का सक्रिय और संलग्न होना आवश्यक है। शिक्षार्थी ज्ञान अर्जित करता है, कौशल विकसित करता है, और मूल्यों को अपनाता है।

शिक्षण का मुख्य उद्देश्य

शिक्षण का मुख्य उद्देश्य शिक्षार्थियों में आलोचनात्मक सोच (Critical Thinking) को बढ़ावा देना है, ताकि वे समस्याओं का समाधान कर सकें और स्वतंत्र निर्णय ले सकें। शिक्षार्थियों को रचनावादी (Constructivist) होना चाहिए, जो स्वयं ज्ञान का निर्माण करते हैं। जीन पियाजे, लेव वाइगोत्स्की और ब्रूनर जैसे शिक्षाशास्त्रियों ने शिक्षार्थियों को सक्रिय और ज्ञान के निर्माता के रूप में महत्व दिया है।

शिक्षा के सिद्धांत

जॉन डीवी ने शिक्षा को त्रिध्रुवी (Tri-polar) बताया है, जिसमें शिक्षक, छात्र और पाठ्यक्रम शामिल हैं। क्लार्क के अनुसार, शिक्षण का उद्देश्य शिक्षार्थी के व्यवहार में स्थायी परिवर्तन लाना है। शिक्षण में समानता (Equality) के बजाय समता (Equity) पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, ताकि प्रत्येक शिक्षार्थी को उसकी आवश्यकतानुसार सहायता मिल सके। पाठ्यक्रम में लचीलापन (Flexibility) होना चाहिए।

एक शिक्षक के गुण

एक शिक्षक में शिक्षण कौशल, विषय ज्ञान, और संचार कौशल होना चाहिए। शिक्षक और छात्र के बीच अच्छे संबंध होने चाहिए, और कक्षा में लोकतांत्रिक वातावरण होना चाहिए। शिक्षक में धैर्य, सहिष्णुता और सहानुभूति होनी चाहिए, और कक्षा प्रबंधन कौशल भी आवश्यक हैं।

पाठ्यक्रम के प्रकार

पाठ्यक्रम सर्पिल (Spiral) होना चाहिए, जिसमें ज्ञान को धीरे-धीरे बढ़ाया जाए। ब्रूनर ने सर्पिल पाठ्यक्रम का सिद्धांत दिया, जिसमें पूर्व ज्ञान से जोड़कर नए ज्ञान का निर्माण किया जाता है। डेविड ऑसुबेल ने सार्थक अधिगम (Meaningful Learning) के सिद्धांत का समर्थन किया।

शिक्षण के उद्देश्य

बेंजामिन ब्लूम ने शिक्षण के उद्देश्यों को तीन क्षेत्रों में वर्गीकृत किया: संज्ञानात्मक (ज्ञान), भावात्मक (भावनाएँ), और मनोगत्यात्मक (कौशल)। गैगने ने समस्या-समाधान सिद्धांत दिया, जिसमें सीखने के आठ चरण बताए गए हैं।

ब्लूम की टैक्सोनॉमी

ब्लूम की टैक्सोनॉमी में तीन क्षेत्र शामिल हैं:

  1. संज्ञानात्मक (Cognitive): ज्ञान, समझ, अनुप्रयोग, विश्लेषण, संश्लेषण, और मूल्यांकन।
  2. भावात्मक (Affective): प्राप्त करना, प्रतिक्रिया देना, महत्व देना, व्यवस्थित करना, और चरित्र निर्माण।
  3. मनोगत्यात्मक (Psychomotor): धारणा, तत्परता, निर्देशित प्रतिक्रिया, तंत्र, जटिल प्रतिक्रिया, अनुकूलन, और उत्पत्ति।

गैगने का सीखने का पदानुक्रम

गैगने के सीखने के पदानुक्रम में आठ चरण हैं:

  1. संकेत अधिगम (Signal Learning)
  2. उद्दीपक-प्रतिक्रिया अधिगम (Stimulus-Response Learning)
  3. श्रृंखला अधिगम (Chaining)
  4. शाब्दिक साहचर्य (Verbal Association)
  5. विभेद अधिगम (Discrimination Learning)
  6. संप्रत्यय अधिगम (Concept Learning)
  7. नियम अधिगम (Rule Learning)
  8. समस्या समाधान (Problem Solving)

शिक्षण के सिद्धांत

शिक्षण के सिद्धांतों में गतिविधि, प्रेरणा, व्यक्तिगत भिन्नता, रचनात्मकता, विविधता, उत्तेजना, अभ्यास, प्रतिक्रिया और सहसंबंध शामिल हैं।

शिक्षण की सूक्तियाँ

शिक्षण की सूक्तियों में सरल से जटिल, ज्ञात से अज्ञात, मूर्त से अमूर्त, और विशिष्ट से सामान्य की ओर बढ़ना शामिल है।

शिक्षण के चरण

शिक्षण के तीन चरण होते हैं: पूर्व-सक्रिय (योजना), सक्रिय (निष्पादन), और उत्तर-सक्रिय (प्रतिक्रिया)।

शिक्षण के स्तर

शिक्षण के तीन स्तर होते हैं: स्मृति स्तर (ज्ञान), समझ स्तर (समझ), और चिंतन स्तर (आलोचनात्मक सोच)।

शिक्षण विधियाँ

शिक्षण विधियों में व्याख्यान विधि, प्रदर्शन विधि, कहानी कहने की विधि, पाठ्यपुस्तक विधि, आगमनात्मक विधि, निगमन विधि, परियोजना विधि, समस्या-समाधान विधि, मस्तिष्क उद्देलन विधि, चर्चा विधि, प्रश्नोत्तरी विधि, और खोज विधि शामिल हैं।

मूल्यांकन

मूल्यांकन के उपकरणों और तकनीकों में जाँच सूची, रेटिंग स्केल, प्रश्नावली, संचयी रिकॉर्ड, उपाख्यानात्मक रिकॉर्ड, पोर्टफोलियो और रूब्रिक शामिल हैं।

समावेशी शिक्षा

समावेशी शिक्षा में सभी छात्रों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा प्रदान करना शामिल है, जिसमें व्यक्तिगत भिन्नताओं का सम्मान करना और सभी के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना शामिल है।

टीएलएम (Teaching Learning Material)

टीएलएम (शिक्षण अधिगम सामग्री) शिक्षण को प्रभावी बनाने और छात्रों को समझने में मदद करते हैं। इनमें ऑडियो, विजुअल, और प्रक्षेपित सामग्री शामिल हैं।

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Transcript

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1:07 हेलो एवरीवन गुड इवनिंग सभी को नमस्ते नमस्कार राधे-राधे क्या हालचाल आप लोगों के फटाफट सुना दीजिए अगर ऑडियो वीडियो सब ओ ओके है तो एक बार थम्स अप करके मुझे कंफर्म करेंगे जी दोस्तों आज हमारी ये टीचिंग ऐपटीट्यूड की 6 घंटे की लगातार हम एक मैराथन क्लास के अंदर कंप्लीट टीचिंग ऐपटीट्यूड का रिवीजन करने के लिए आपके सामने मैं हाजिर हुई हूं। आई नो कि आप लोगों ने इतने दिन से बहुत ज्यादा मेहनत की है। बहुत ज्यादा तैयारी की है और आपकी जो तैयारी है उसी में चार चांद लगाने के लिए आज मैं आपके सामने हाजिर हुई हूं एक बार आपका रिवीजन में साथ देने के लिए। जैसा आपसे वादा किया था उस वादे के अकॉर्डिंग हम यहां तक पहुंचे हैं और क्यों ना पहुंचते? जब देखा है सपना तो उस सपने को पूरा किया जाए और मंजिल को उसे अपने ख्वाबों में संजोया जाए। अगर चाहा है मंजिल को तो उस रास्ते में आने वाले हर कांटे को अपनाया जाए। तो हमारे बीच में

1:54 जितनी भी अड़चनें आई जो कुछ भी आया हमने सब कुछ आया और हमने बहुत कोशिश की है बहुत मेहनत की है। अब ये जो आखिरी का वक्त है इस केस में हमें जरूरत है थोड़ा सा रिवाइज करने की कुछ भी नया नहीं पढ़ना है दोस्तों मैंने आपको लास्ट वीडियो में भी बोला था आज भी कहती हूं नया पढ़ोगे विचलित हो जाओगे आप कोशिश करना कि बार-बार उन्हीं चीजों को बार-बार रिवाइज करें जिससे आपकी कमांड अच्छे से बन जाए। आपने इतने दिन जो ईमानदारी से मेहनत की है वो डेफिनेटली रंग लाएगी। हमारी मेहनत में कोई कमी नहीं थी तो हमारी रिजल्ट में भी कमी किसी भी हाल में नहीं आ सकती। बस खुद के ऊपर विश्वास बनाए रखो कि हमने मेहनत की है। हमें विश्वास है जो हमने पढ़ा है सिर्फ क्वेश्चन उसी में से आएंगे। और आज के जो क्वेश्चंस होंगे आज का जो लेवल रहेगा जिस पैटर्न से मैं आपको पढ़ाऊंगी। मैं यह नहीं सोचूंगी आज कि आप लोगों को पहले थ्योरी

2:40 रिवाइज करनी है या नहीं करनी। आप लोग क्वेश्चन चाहते हो कि नहीं चाहते। मैं मेरे अंदाज से पढ़ा रही हूं। कुछ सोच समझ के ही पढ़ा रही हूं। बहुत कुछ उसके बारे में लॉजिक है पीछे आपको शायद ना समझ में आए तो बस शांति के साथ में क्लास के साथ में बने रहेंगे अपने दोस्तों के पास में सेशन को शेयर कर दो क्योंकि टीचिंग लर्निंग पूरी प्रोसेस के दौरान एक मोटिवेशन वर्ड होता है जो उसे हाईवे बना देता है हमारी लर्निंग का जो उसे बूस्ट करता है जो एनर्जी देता है आपको मोटिवेट करना आपको एनकरेज करना आपको गाइड करना एक टीचर की ड्यूटी है वैसे स्टूडेंट का भी फर्ज होता है एक टीचर को मोटिवेट करना और मेरी एनर्जी आप लोग हैं और कोई नहीं तो मैं आशा करती हूं हूं कि आप सब साथ देंगे। इतने दिन जो प्यार दिखाया बस उसी का बदला मैं आपके सामने आज हाजिर हो चुकी हूं। तो चलिए बिना तैयारी बिना टाइम वेस्ट किए अब

3:26 हम चलते हैं अपनी क्लास के ऊपर। सबसे पहले मैं आपको बताऊंगी कुछ बेसिक्स पॉइंट टीचिंग लर्निंग प्रोसेस के। देन हम कुछ क्वेश्चंस करेंगे। फिर कोई नेक्स्ट टॉपिक आएगा उससे रिलेटेड हम बात करेंगे। थोड़ा सा मैं स्टार्टिंग से लेकर के चलूंगी। ध्यान से स्टार्टिंग की चीजों को सुनना क्योंकि जिसको आता है उनका भी रिवाइज रिवीजन ही कर रहे हैं हम। आता है उसको भी पढ़ना है। यह मत सोचना कि मैम यह तो हमने पढ़ा है। मैम इस बेसिक को तो मत बताओ चाहे पहले। नहीं हर तरीके के बच्चे हैं। कुछ हमारे साथ नए जुड़े होंगे। वो स्टूडेंट भी हैं जो वर्किंग में थे जिन्हें इतने दिन तक कुछ भी टाइम नहीं मिल पाया था। तो वो कोशिश कर रहे हैं कि मैम बस एक दो क्लासेस के थ्रू हम कुछ अच्छा सा स्कोर कर जाएं। तो बस मेरे को हर एक स्टूडेंट को ध्यान में रख के चलना पड़ता है। बिकॉज़ एक क्लासरूम में अलग-अलग सोशियोइकोनॉमिक बैकग्राउंड, उनकी एज, उनके मैच्योरिटी, उनकी इंटेलिजेंस, उनकी लैंग्वेज हर चीज

4:12 मैटर करती है। तो आपको अगर लैंग्वेज में किसी भी तरीके का बैरियर नहीं आएगा। काफी स्टूडेंट्स का यह रहता है मैम इंग्लिश में लिखिए, हिंदी में लिखिए। फर्स्ट ऑफ ऑल अपने पल्ले गांठ लगा लो दोस्तों। हम बनने जा रहे हैं शिक्षक। और टीचिंग जो है वो एक जॉब नहीं। यह त्याग समर्पण का नाम है। इसमें बहुत कुछ आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उसमें आपको सिर्फ एक लैंग्वेज के बलबूते पे नहीं जाना। हमें थ्री लैंग्वेज फार्मूला यूं ही नहीं सिखाया जाता। उसका मकसद यही है कि कम से कम दो या तीन भाषा तो आप जानते हो। हो सकता है एक में आपकी प्रोफिशिएंसी बढ़िया हो लेकिन दूसरी लैंग्वेज में समझ तो होनी चाहिए। दूसरे को समझाने के लिए टूटी फूटी कुछ तो आनी चाहिए। तो इतना भी इंग्लिश में नहीं पढ़ाते में जितना तुम थोप देते हो मुझ पे। तो चलिए अब फालतू की बातें नहीं। आते हैं मुद्दे के ऊपर। जी आप सभी का नमस्कार। यस मैम लेट्स गो। तो चलिए चलते

4:57 हैं। सब ओ ओके हैं? आइए। यह जो आंकड़ा है यह थोड़ा बढ़ने की देर कर रखी है आपने। बाकी करेंगे। यह क्लास यूं ही चलेगी। आज तो 9:00 बजे तक और अगर 9:00 बजे तक हमारा सारा रिवीजन नहीं हुआ तो लंबी भी चला देंगे। चिंता मत करो। कंप्लीट पढ़ के जाएंगे आज ही के दिन टीचिंग ऐपटीट्यूड को। नेक्स्ट जो आपकी क्लास होगी वो होगी डोमेन नॉलेज के रिगार्डिंग। और ये जो सेकंड मैराथन है वो आपकी 8 दिसंबर को होगी यानी कि मंडे के दिन और उसके बाद वेडनेसडे को होगी आपकी 10 दिसंबर को अगली मैराथन क्लास जिसमें एनईपी पढ़ेंगे जितने भी साइकोलॉजिस्ट जिन्होंने जो थ्योरी दी थी वो वन लाइनर जो फैक्ट हैं वो सारे आपको मिल जाएंगे। इस तीनों क्लासेस के बाद में एग्जाम से दो दिन पहले

5:42 ये तीनों क्लासेस जिस दिन कंप्लीट होंगे उस दिन आपको मिलेगी एक पतली सी बुकलेट जिसके अंदर सारे पॉइंट पॉइंट आपको मेंशन करने होंगे। तो बस आप उन पॉइंट्स को पढ़ना, आंख बंद करना, रिकॉल करना किसके बारे में मैडम ने क्या बताया था। बस इससे ज्यादा करने की कोई नीड नहीं है दोस्तों आपको। चलिए अब मैं चलती हूं फर्स्ट क्वेश्चन की तरफ। नहीं सबसे पहले हम क्या करेंगे? हम करेंगे कुछ थ्योरी के बारे में जानेंगे। हम पढ़ रहे हैं टीचिंग ऐपटीट्यूड। मैम क्यों पढ़ना पड़ता है? 30 मार्क्स का आता है इसलिए पढ़ना पड़ता है। यह पर्सपेक्टिव हो सकता है किसी स्टूडेंट का बट नहीं हमें लॉजिकली समझना है कि क्यों हमें टीचिंग ऐपटीट्यूड पढ़ने के लिए बोला जाता है। क्यों हमारे सिलेबस में ये दे रखा है? ऐपटीट्यूड का मतलब होता है क्षमता। टीचिंग का मतलब होता है शिक्षण। आपको शिक्षण के अंदर आपकी क्षमता कितनी है? आपकी कैपेसिटी क्या है? आपको कौन-कौन

6:30 सी स्किल्स आती हैं? एक टीचर का नॉलेज मैटर करता है। वो एक अच्छा टीचर होता है कि टीचर को अपने सब्जेक्ट की नॉलेज कंटेंट की समझ होनी चाहिए। बट उससे भी बढ़िया ये है कि आप को प्रेजेंट कितने अच्छे वे में करना आता है। आपकी टीचिंग स्किल्स कैसी हैं उनके ऊपर फोकस कितना है आपका वो कितनी बेटर आप कर पाते हो। तो टीचिंग ऐपटीट्यूड के अंदर आपको वही स्किल्स वो तरीके वो सारी चीजें बताई जाती हैं। इसलिए हम टीचिंग ऐपटीट्यूड पढ़ रहे हैं। इसके अंदर अगर आप टीचिंग की बात कर रहे हैं तो दोस्तों ये अकेली नहीं होती। मैं पढ़ा रही हूं तो ये वन वे प्रोसेस नहीं है। मुझे पढ़ाने के लिए डेफिनेटली एक लर्नर चाहिए जो मुझसे पढ़ रहा है। मैं अकेले ही यूं ही नहीं बड़बड़ाती रहूंगी। तो यानी कि टीचिंग के साथ एक और वर्ड ऐड हो जाता है और वो है लर्निंग। और यह जो टीचिंग और लर्निंग एक प्रोडक्ट नहीं है जो किसी शॉप के ऊपर आप जाओगे और आप मांगोगे तो मिल जाएगा।

7:16 बिल्कुल नहीं। टीचिंग और लर्निंग एक प्रोसेस होती है जो एक लंबी प्रोसेस है जिसके अंदर बहुत सारी अलग-अलग चीजें आ जाती हैं। एक प्लांड एक्टिविटी होती है। इसलिए हम यहां से क्या पढ़ने वाले हैं? टीचिंग लर्निंग प्रोसेस को पढ़ने वाले हैं। किसको पढ़ेंगे दोस्तों? हम पढ़ेंगे टीचिंग लर्निंग प्रोसेस को। सबसे पहले बात करती हूं टीचिंग की शिक्षण की। तो ये हमारी टू वे प्रोसेस होती है। कैसी प्रोसेस होती है? टू वे प्रोसेस होती है। यानी कि ये द्विध्रुवी होती है। इसका मतलब यह है कि अकेले मैं नहीं पढ़ा सकती। आप लोगों सामने होने चाहिए। आपके बिना मैं यहां पे खड़ी नहीं रह सकती। एंड लर्निंग की अगर मैं बात करूं तो लर्निंग होता है सीखना। वो होता है अधिगम। वो आप अकेले भी कर सकते हो। आप कुछ भी कर रहे थे। एक छोटा बच्चा जो चलते-चलते गिर गया उसे पता चला कि यहां पे एक पत्थर है। कल को जब इस रास्ते से निकलूूंगा तो थोड़ा धान से

8:03 निकलूूंगा। उस बच्चे ने अपने आप से एक्सपीरियंस किया है। तो लर्निंग अपने आप भी हो सकती है। इसलिए लर्निंग को हम क्या कहेंगे? वन वे प्रोसेस कहेंगे। यह हमारी वन वे हो सकती है। लेकिन टीचिंग हमेशा टू वे होती है। बिकॉज़ टीचिंग के लिए क्या जरूरी है? इंटरेक्शन जरूरी है। तो टीचिंग हमारी इंटरेक्टिव होती है। इसके अंदर क्या होनी चाहिए? परस्पर अंतः क्रिया होनी चाहिए। तो इसे हम क्या कहेंगे? इंटरेक्टिव प्रोसेस कहेंगे। ये जो हमारा शिक्षण है इसका मतलब ये नहीं कि मैम दो लोगों की जरूरत है। टू वे कम्युनिकेशन है तो एक हमारा टीचर होगा और एक हमारा स्टूडेंट होगा। क्या ऐसा है कि स्टूडेंट के ऊपर हम ज्ञान को थोप देंगे। तो यहां पर यह गलती मत कर देना। जो स्टूडेंट्स एक दो क्लासेस के भरोसे जा रहे हैं, वो यह सोचेंगे कि नॉलेज को ट्रांसफर करना, नॉलेज का

8:49 ट्रांसमिशन करना, उसका स्थानांतरण करना ही टीचिंग है। ऐसा बिल्कुल नहीं है। ज्ञान को एक बच्चे के अंदर देना यह टीचिंग नहीं। टीचिंग का मतलब है बच्चे की लर्निंग को क्या करना? फैसिलिटेट करना। फैसिलिटेट का मतलब होता है सुविधा प्रदान करना। उसे आसान बनाना। आपके पास कंटेंट है। हजारों बुक्स हैं मार्केट के अंदर। हजारों सोर्सेज हैं। कंप्यूटर का जमाना है। आपके पास कंटेंट था। आप खुद से पढ़ सकते थे। लेकिन बस मैंने क्या किया है? उस कंटेंट को थोड़ा सा इजी लैंग्वेज में बनाया। लैंग्वेज ट्रांसलेट करके आपको समझाया। डे टू डे लाइफ के जो एग्जांपल्स हैं उनसे कनेक्ट करके पढ़ाया। आपको उन चीजों को सिंपलीफाई करके दिया। आपको कभी भी डीमोटिवेट नहीं होने दिया। बस आपको इनकरेज किया। आपके अंदर वो मोटिवेशन वो एनर्जी बूस्ट की। इसकी वजह से आपकी जो लर्निंग है वो बेटर हो पाई। वो इफेक्टिव हो पाई। वो

9:36 आपकी मीनिंगफुल अधिगम हो पाया। तो ये जो हमारी टीचिंग है वो सिर्फ और सिर्फ एक बच्चे की लर्निंग को फैसिलिटेट करती है। उसे गाइड करती है। उसे सपोर्ट देती है। उसे इंकरेज करती है। यानी कि बच्चे को मोटिवेट करती है। तो कभी भी यह मत सोचना कि टीचिंग का मतलब ज्ञान थोपना होता है। नो नो ये लर्निंग को फैसिलिटेट करती है। लर्निंग को सिंपलीफाई करती है। इसलिए हम क्या कहते हैं कि टीचिंग जो है वो सिर्फ पढ़ाना नहीं टीचिंग कैसी होनी चाहिए? इफेक्टिव होनी चाहिए। कैसी होनी चाहिए? इफेक्टिव होनी चाहिए। यह हमारी कैसे शिक्षण होना चाहिए? प्रभावी शिक्षण होना चाहिए। कैसा होना चाहिए दोस्तों? प्रभावी। जब हम बच्चे को कुछ भी सिखा रहे हैं, अगर उसकी लर्निंग को फैसिलिटेट कर रहे हैं, तो आप सिर्फ और सिर्फ ऑथॉरिटी नहीं दिखा सकते। आप बच्चे के बिहाफ पे चलेंगे। तो जो

10:23 भी आप प्रोसेस अप्लाई करें, उसमें जो हमारा लर्नर होगा, कौन होगा? जो हमारा लर्नर होगा, वह कैसा होना चाहिए? एक्टिव होना चाहिए। वह हमारी लर्निंग के अंदर क्या होना चाहिए दोस्तों? वो इंगेज्ड होना चाहिए। लर्निंग में क्या होना चाहिए? इंगेज्ड होना चाहिए। हम पढ़ा रहे हैं। किस लिए पढ़ा रहे हैं? क्यों पढ़ा रहे हैं? जो कुछ भी हम पढ़ाएंगे उससे बच्चे की लर्निंग होगी। तो इस लर्निंग में क्या होगा? इस लर्निंग में बच्चा एक्वायर करता है। हमारा लर्नर क्या करता है? एक्वायर करता है। यानी कि अर्जित करता है। क्या अर्जित करता है यहां से? वो नॉलेज अर्जित करता है। उसे ज्ञान मिलता है। उसका मेंटल डेवलपमेंट हो पाता है। लेकिन हम सिर्फ ज्ञान नहीं हम बच्चे की स्किल्स भी डेवलप करते हैं। बच्चे में कौशल भी डेवलप करते हैं। तो यहां से क्या आ जाएगा? स्किल्स भी आ जाएंगे। स्किल के साथ हम बच्चे को कुछ

11:09 मोरल वैल्यू सिखाते हैं। कुछ सोशल वैल्यू सिखाते हैं। बड़े छोटों की इज्जत, मान सम्मान प्यार करना सिखाते हैं। तो यहां से हमारे कुछ एटीट्यूड एंड जो वैल्यूज़ हैं वो भी बच्चे की क्या हो पाती हैं दोस्तों? डेवलप हो पाती हैं। एटीट्यूड एंड वैल्यू्यूज क्या हो पाती हैं? बच्चे की डेवलप हो पाती हैं। इसको हम क्या कहते हैं? लर्निंग का एक हिस्सा कहते हैं। ये जो हमारी टीचिंग और लर्निंग जिसकी हमने बात की है इसी के अंदर अगर हम ये बात करने लग जाए कि मेन मकसद क्या होता है? एक मैंने वर्ड यहां पे यूज़ किया गाइड। तो मैम गाइड करना, टीचिंग, पढ़ाना इनमें क्या डिफरेंस है? तो चलिए एक बार के लिए वो भी बता देती हूं। एक तो होता है टीचिंग। टीचिंग तो होता है फैसिलिटेट करना, लर्निंग को। हम यहां पर बच्चा जो हमारा लर्नर होता है वो स्टार्टिंग में क्या होता है? डिपेंडेंट होता है। वो अनजान

11:55 होता है हर चीज से। वो हर बात के लिए हमारे ऊपर क्या है? डिपेंडेंट है। हम उसे क्या बनाना चाहते हैं? इंडिपेंडेंट बनाना चाहते हैं। हम बच्चे को क्या करना चाहते हैं? इंडिपेंडेंट यानी कि हम उसे आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। आत्मनिर्भर का मतलब यह है कि आज आप उसे जो प्रॉब्लम का समाधान करके बता रहे हो तो सिर्फ उसे उस प्रॉब्लम का समाधान ना पता हो। कल उसके सामने आने वाली हर प्रॉब्लम को वो खुद से टैकल कर पाए इसके लिए तैयार करना है। तो हमारी टीचिंग का मेन मकसद है बच्चे की क्या करना? थिंकिंग स्किल को बढ़ावा देना। हम बच्चे की क्या बढ़ावा देना चाहते हैं? बच्चे की जो थिंकिंग स्किल्स हैं उनको प्रमोट करना चाहते हैं। दोस्तों क्यों? क्योंकि थिंकिंग स्किल में क्या आती है? क्रिटिकल थिंकिंग आती है। इसमें क्या आती है? क्रिटिकल थिंकिंग आती है। क्रिटिकल थिंकिंग को कहा जाता है आलोचनात्मक चिंतन।

12:42 यानी कि पॉजिटिव नेगेटिव हर आस्पेक्ट को आप देख पाओगे। वो आपका आलोचनात्मक चिंतन है। इस क्रिटिकल थिंकिंग से आप एनालाइज कर पाओगे। चीजों के बारे में विश्लेषण कर पाओगे कि कौन सी चीज सही है कौन सी गलत है। जब आप यह करते हो तो फिर आप रीजनिंग लगाते हो। अपनी तर्क शक्ति का यूज करते हो कि मुझे कौन सा रास्ता चूज़ करना चाहिए। क्या पर्सपेक्टिव मुझे लेकर के चलना चाहिए? मुझे किस डायरेक्शन में जाना चाहिए? वो रीजनिंग लगा के आप क्या लेते हैं? कोई भी डिसीजन लेते हैं। यहां से आप क्या बनाते हैं? कोई भी डिसीजन लेते हैं। जो कोई भी डिसीजन आपने लिया उसी के बिहाफ पर आपकी प्रॉब्लम का क्या होता है? सॉल्यूशन होता है। तो हम बच्चे को किसके लिए तैयार कर रहे हैं? हम बच्चे को तैयार कर रहे हैं डे टू डे लाइफ की प्रॉब्लम सॉल्व। हम बच्चे को यह मान के चलते हैं कि

13:29 जो हमारा ज्ञान है वो ज्ञान किस तरीके से होता है? रचनावादी होता है। हमारा लर्नर कैसा होता है? रचनावादी होता है। कंस्ट्रक्टिविस्ट होता है। यानी कि वह खुद से ज्ञान की रचना करता है। हमारा लर्नर क्या करता है? स्वयं ज्ञान की रचना करता है। स्वयं ज्ञान की रचना करता है। मैम ये बात किसने कही कि हमारा लर्नर खुद ज्ञान की रचना करता है। तो ये जो बात थी वो कही है जीन पियाजे ने। सबसे पहले हमारे सामने कौन आते हैं? जीन पियाजे भाई साहब आते हैं। और इन्होंने कहा कि हमारा जो लर्नर है वो कैसा होता है? रचनावादी होता है। कैसे करता है ज्ञान की रचना? जैसे-जैसे हिंदी में ही बता रही हूं। कुछ की वर्ड्स हैं दोस्तों। बाइलिंगुअल आप लेकर के चलेंगे। यह आपके लिए फायदा होगा। क्योंकि कई बार ट्रांसलेशन के अंदर अगर क्वेश्चन

14:16 मिस्टेक हो जाती है तो हमेशा इंग्लिश लैंग्वेज को प्रेफरेंस दिया जाता है। सो प्लीज यह कुछ भी टफ ऐसे वर्ड मैंने नहीं लिखे हैं जो ज्यादा टिपिकल हो। क्रिटिकल थिंकिंग बार-बार आता है। पूरे के दौरान आता है। आलोचनात्मक चिंतन कहते हैं। एनालाइज करना, विश्लेषण करना, रीजनिंग यानी कि तर्क शक्ति लगाना, डिसीजन लेना, निर्णय लेना, प्रॉब्लम का समाधान करना। सारे वर्ड मैंने हिंदी में बताए हैं। ठीक है? हां, सारे बता दूंगी। एक बार रुक जाओ पूरी बात सुनेंगे। यहां से जीन पियाजे कहते हैं कि जैसे-जैसे बच्चा बायोलॉजिकली मैच्योर होता है उसके अंदर हेरिडिटी यानी कि मैच्योरिटी आती है उसके साथ में बड़ा होता जाता है और उसके ज्ञान का डेवलपमेंट होता जाता है। वो चीजों को अपने बिहाफ पे समझता है। फिर दुनिया उसे करेक्ट करती है। तब उनके साथ एडजस्ट करता है। तो जीन पियाजे

15:02 ने कहा कि हम क्या करते हैं? हम एनवायरमेंट के साथ अकोमोडेट करते हैं। हम एनवायरमेंट के साथ में क्या करते हैं? अकोमोडेट करते हैं। यानी कि हिंदी में बोला जाएगा समायोजन करते हैं। समायोजन का मतलब ही होता है एडजस्ट करना। यानी कि बच्चा बस एनवायरमेंट के साथ चारों तरफ कुछ सीखता जाता है, एडजस्ट करता जाता है। उसके बलब होते उसका क्या होता है? मेंटल डेवलपमेंट होता है। उसका ज्ञान होता है। हां, उन्होंने लिटिल साइंटिस्ट का एक बच्चे को छोटा वैज्ञानिक कहा है। इसी स्वयं ज्ञान की रचना के बारे में एक नाम आता है लेव वाइगोत्सकी का। ले वाइगोत्सकी हमें क्या कहते हैं कि बच्चे जो ज्ञान का निर्माण है वो कहां से करते हैं? समाज से करते हैं। बच्चे कहां से करते हैं? समाज से करते हैं। इनका कहना है कि जो हमारी लर्निंग है वो कैसी प्रोसेस है? वो एक सोशल एक्टिविटी है। इनके अकॉर्डिंग

15:48 लर्निंग कैसी है? एक सामाजिक प्रक्रिया है। एक सोशल एक्टिविटी है। सामाजिक गतिविधि है। कि अगर एक स्टूडेंट एक लर्नर किस में रहता है? बंद कमरे में रहता है तो वो कुछ नहीं सीख पाएगा। लेकिन जब वो समाज के साथ इंटैक्ट करता है, जब वो वहां पे अपने कल्चर के साथ में जुड़ाव कल्चर के साथ में रहता है तो उन चीजों को सीखता है। वहां से उसकी भाषा का डेवलप होता है। वहां से उस बच्चे का विकास होता है और वो अपने नए-नए एक्सपीरियंसेस को क्या करता जाता है? गेन करता जाता है। ले वाइगोत्स्की ने बात की थी स्कैफोल्डिंग की कि बच्चे को बस थोड़ी सी मदद करने की जरूरत होती है। बाकी वह ज्ञान की रचना क्या कर लेते हैं? खुद से कर लेते हैं। फिर इसी तरीके से हमारे सामने एक और आते हैं। वह कौन थे? ब्रूनर। नेक्स्ट कौन थे यहां पर? स्वयं ज्ञान की रचना बताने वाले ब्रूनर साहब थे। ब्रूनर

16:33 ने कहा कि बच्चा जो है वह क्या करता है? ज्ञान की रचना प्रायर नॉलेज से करता है। जो उसका पूर्व ज्ञान होता है उस पूर्व ज्ञान से ही वो नए ज्ञान का निर्माण करता है। यह बात किसने कही थी? ब्रूनर साहब ने कही थी। इन्होंने भी बच्चे को एक्टिव माना। फिर इसी तरीके से हम ये कंक्लूजन निकाल सकते हैं कि हमारी टीचिंग का सबसे पहला जो प्रिंसिपल जो पहला सिद्धांत हमें बीइंग ए टीचर फॉलो करना है वो यह होगा कि आप बच्चे को क्लासरूम में क्या कीजिए? इंगेज कीजिए। आप अपने लर्नर को क्लास के साथ में एक्टिवली पार्टिसिपेट करवाएंगे। तब हमारा लर्नर कुछ सीख पाएगा। तो हमें क्या करना है? बच्चे को एक्टिव पार्टिसिपेशन पार्टिसिपेट करवाना है। तभी लर्नर सीख सकता है। डन है यह बात। यहां तक क्लियर हुआ? इसी बात को थोड़ा सा और

17:20 वेरीफाई किया। थोड़ा सा और आगे बढ़ाया और वो कौन थे? हमारे जॉन डीवी थे। जॉन डीवी ने कहा कि नो डाउट बच्चा खुद से सीखता है। खुद से ज्ञान का निर्माण करता है। लेकिन इन्होंने यह कहा कि खुद से भी कैसे करेगा? सिर्फ सुन के सिर्फ देख के सिर्फ रिलेट करके। नहीं बच्चा करके सीखता है। इनका कहना है कि बच्चा करके सीखता है। लर्निंग बाय डूइंग। कैसे सीखता है? लर्निंग बाय डूइंग करता है। हमारा लर्नर क्या करता है? लर्निंग बाय डूइंग करता है। क्योंकि वह जब तक किसी चीज को हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस नहीं लेगा तब तक उसके दिमाग में कुछ ना डलेगा। तो यानी कि हमें बच्चे को क्या देना है? हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस देना है। हैंड्स ऑन एक्सपीरियंस का मतलब यह है कि आप बच्चे को हर एक चीज के अंदर उसकी बात

18:06 सुनी जाएगी। उसके हिसाब से चलना है। तो इन्होंने हमारी एजुकेशन को कैसा बना दिया? चाइल्ड सेंटर्ड बना दिया। इन्होंने हमारी एजुकेशन को क्या बनाया? चाइल्ड सेंटर्ड एजुकेशन बनाया। क्यों? क्योंकि जॉन डेवी ने एजुकेशन के रिगार्डिंग एक बात कही थी कि जो शिक्षा है इसका मतलब यह नहीं कि आप बच्चे को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हो। नहीं, शिक्षा लेना अपने आप में एक जीवन है। यह किसी भविष्य के जीवन के लिए तैयार करना नहीं है। तो याद रखना इनकी ये डेफिनेशन। जॉन डीवी ने कहा था एजुकेशन इज एजुकेशन इज लाइफ इटसेल्फ। यह अपने आप में क्या है? जिंदगी है। शिक्षा लेना अपने आप में क्या है? मजा है। तो सीखने में मजा आ रहा होगा। वेरी गुड। इन्होंने किसकी बात

18:51 की थी? ट्राईपोलर की बात की थी। जॉन डीवी ने हमारी एजुकेशन को कैसा बताया दोस्तों? ट्राईपोलर बताया था। इस ट्राईपोलर का मतलब यह है। इन्होंने यह कहा सबसे पहले हमारे सामने आए थे एडमम। और एडमम ने बताया कि एजुकेशन कैसी है? टीचिंग लर्निंग कैसी है? बाईपोलर है। और उस बाइपोलर का मतलब ये था कि हमारी शिक्षा द्विध्रुवी होती है। इसमें सिर्फ और सिर्फ कितने ध्रुव होते हैं? दो ही होते हैं। और उस दो में एक तो था टीचर और एक कौन था? स्टूडेंट। लेकिन फिर आते हैं जॉन डीवी और इन्होंने कहा नो नो नो ट्राईपोलर होती है। कैसी होती है? ट्राईपोलर होती है। और इस ट्राईपोलर के अकॉर्डिंग इन्होंने यह कहा कि टीचर, स्टूडेंट और इन्हीं के साथ में एक और कौन आ जाते हैं हमारे? वो आ जाता है कैरिकुलम।

19:37 थर्ड हमारा क्या आ जाता है? कैरिकुलम आ जाता है। इस कैरिकुलम का मतलब क्या है मैम? थोड़ा सा एक्सप्लेन करोगे। जहां ऑप्शन कैरिकुलम का ना हो वहां पे लगा देना एनवायरमेंट। वहां पे क्या लगा देंगे? एनवायरमेंट। सीखने के बीच में मैं आपको पढ़ा रही हूं। आप सीख रहे हैं लेकिन हम क्या सीख रहे हैं जो ऑब्जेक्टिव हमने सेट किए हैं तो लर्निंग ये जो टीचिंग है वो हमारी कैसे होती है? टीचिंग हमारी गोल ओरिएंटेड होती है। टीचिंग हो चाहे आपकी लर्निंग हो यह कैसी होती है दोस्तों? गोल ओरिएंटेड होती है। यानी कि लक्ष्य उन्मुख होती है। इसे हम क्या बताएंगे? गोल ओरिएंटेड। यह लक्ष्य की तरफ केंद्रित होती है। तो यहां से हो जाएगा लक्ष्य केंद्रित होती है। हम कोई ना कोई लक्ष्य निर्धारित करके चलते हैं। यानी कि हम लर्निंग और

20:23 टीचिंग के कुछ ऑब्जेक्टिव सेट करते हैं। कुछ उद्देश्य मान करके चलते हैं और उन उद्देश्यों की प्राप्ति से ही हमारी क्या हो पाती है? लर्निंग हो पाती है। लेकिन कैसे पता चलेगा कि एक लर्नर की लर्निंग हुई है। उसमें अधिगम हुआ है वो डिपेंड करेगा उसके बिहेवियर पर। तो हमारे सामने आते हैं क्लार्क। कौन आते हैं? क्लार्क। और क्लार्क ने डेफिनेशन दी दोस्तों कि जो हमारा लर्नर है उस लर्नर में परमानेंट चेंज आ जाए बिहेवियर में। लर्नर के अंदर परमानेंट चेंज इन बिहेवियर परमानेंट चेंज इन बिहेवियर उसी को हम क्या कहते हैं? टीचिंग कहते हैं। अगर आपके स्टूडेंट के अंदर उसके व्यवहार में पढ़ने के बाद कोई परिवर्तन नहीं आया तो मतलब

21:09 उसने कुछ नहीं सीखा। व्यवहार में अगर परिवर्तन नहीं आया तो कुछ नहीं सीखा। इसलिए अगर कोई इंसान कोई फालतू की हरकतें करता हो, गलत काम करता हो तो हम क्या कहते हैं? पढ़ा लिखा हो के मूर्ख गवारों वाली हरकतें कर रहा है। इसका मतलब यही है कि जिस बच्चे ने शिक्षा ले ली वो कैसा होगा? उसके व्यवहार में पहले के कंपैरेटिवली क्या होगा? चेंजमेंट आएगा। तो उन्होंने कहा था कि परमानेंट चेंज होता है बिहेवियर में। वेरी गुड। ठीक है जी। यहां तक क्लियर हुआ मैम। लर्निंग एक्सपीरियंस को हां एकदम सही बात की। करिकुलम का मतलब ही होता है कुछ ऑब्जेक्टिव्स, कुछ एक्सपीरियंसेस। कैरिकुलम का मतलब क्या होता है? कैरिकुलम में हम वो जो ऑब्जेक्टिव सेट करते हैं हमारी टीचिंग के वो ऑब्जेक्टिव्स आ जाते हैं। करिकुलम में सबसे पहले कुछ

21:55 ऑब्जेक्टिव सेट किए जाते हैं। जो हमने उद्देश्य निर्धारित किए कि हमारा मेन उद्देश्य बच्चे को यह सिखाना है। वो उद्देश्य निर्धारित करते हैं। तो उसमें हम कुछ एक्सपीरियंस एक्सपेक्ट करते हैं बच्चे से कि हमारे लर्नर के अंदर यह जो अनुभव हैं वो विकसित होंगे। तो वो कुछ एक्सपीरियंसेस पहले से तय किए जाते हैं। उन्हीं को हम करिकुलम कहते हैं। ये जो आपने बात की ना ट्राईपोलर की तो याद रखना इस ट्राईपोलर में हमारे टीचिंग के कितने वेरिएबल होते हैं? टीचिंग के तीन चर होते हैं। वेरिएबल्स का मतलब होता है चर। और कितने चर होते हैं दोस्तों? एक टीचर होता है। एक स्टूडेंट होता है। एक आपका करिकुलम होता है। टीचर हमेशा इंडिपेंडेंट होता है। ये कैसा होता है? इंडिपेंडेंट होता है। यानी कि ये हमारा समतंत्र चर होता है।

22:41 लेकिन जिस स्टूडेंट की आप बात कर रहे हो वो डिपेंडेंट होता है। आश्रित चर होता है। कैसा होता है? डिपेंडेंट यानी कि आश्रित चर होता है। और कैरिकुलम ये बीच में आने वाली वो प्रोसेस है जो मीडिएटर का काम कर रहा है। यह मध्यस्था करता है। यह क्या करता है? हमारी लर्निंग के बीच में मध्यस्था करने का काम करता है। दोस्तों वो क्या होता है? करिकुलम होता है। जो लर्नर है उस लर्नर को समझना सबसे ज्यादा जरूरी है। क्योंकि स्टूडेंट जो है उनके अंदर क्या होते हैं? इंडिविजुअल डिफरेंस होते हैं। लर्नर के अंदर क्या होता है दोस्तों? इंडिविजुअल डिफरेंसेस होते हैं और वो इंडिविजुअल डिफरेंसेस जिसके अंदर हर एक बच्चे की हर एक लर्नर की ऐज जो है वो अलग होती है। एज के हिसाब से उनकी मैच्योरिटी

23:26 उनकी परिपक्वता अलग होती है। उनकी जरूरतें अलग टाइप की होती हैं। उनका जो इंटरेस्ट है वो अलग लेवल का होता है। उनके सीखने की जो कैपेसिटी है, उनकी जो एफिशिएंसी है, वह अलग होती है और बच्चे का जो बैकग्राउंड होता है, वह अलग होता है। उसका प्रायर नॉलेज यानी कि उसका पूर्व ज्ञान। प्रायर नॉलेज का मतलब क्या है? पूर्व ज्ञान। तो प्रायर नॉलेज सबका अलग-अलग होता है। इसलिए हम जब भी पढ़ा रहे हैं तो अपने क्लासरूम के अंदर उस हर एक इंडिविजुअल लर्नर के नीड, उसकी ऐज, उसके इंडिविजुअल डिफरेंस को ध्यान में रखते हुए फिर हमें पढ़ाना पड़ेगा। अगर आप यह सोचते हो कि हम क्लासरूम के अंदर क्या फॉलो करेंगे? हम क्लासरूम में इक्वलिटी फॉलो करेंगे। और आप

24:12 यह सोचते हो कि भाई मैं तो समानता का पालन कर रहा हूं। मैं तो किसी में कोई भी भेदभाव नहीं कर रहा। मैं तो एकदम सही इंसान हूं। एकदम बढ़िया हर बच्चे को इक्वल वे में पढ़ाता हूं। तो यह बिल्कुल गलत होगा दोस्तों। आज के कंपैरेटिवली आपको इक्वलिटी फॉलो नहीं करनी। क्यों नहीं करनी इक्वलिटी को फॉलो? क्योंकि किसी लर्नर का लेवल ये है। किसी का लेवल ये है तो किसी का लेवल ये है और किसी का लेवल ये है। सपोज दैट आपने सभी को लिटिल लिटिल इतनाइतना दे दिया और वो यहां तक सबको बराबर दोगे तो वो जो डिफरेंस था वो आज भी मेंटेन रह गया। वो जो डिफरेंस था वो अभी भी क्या हो पाया? मेंटेन हो पाया। लेकिन हमें उस इंडिविजुअल डिफरेंस को ध्यान में रखते हुए सबको जरूरत के मुताबिक देना है।

24:58 तो जो भी आप करिकुलम डिजाइन करेंगे, जो भी आप पाठ्यक्रम डिजाइन करेंगे या आप पहले से जो लेसन प्लानिंग कर रहे हो वो लेसन प्लानिंग आपकी किसके अकॉर्डिंग होनी चाहिए दोस्तों? वो लेसन प्लानिंग वो आपकी पाठ योजना होनी चाहिए। लेसन प्लानिंग या जो आपकी पाठ योजना है वो किसके अकॉर्डिंग हो? वो इंडिविजुअल डिफरेंस को ध्यान में रखते हुए हो। इंडिविजुअल डिफरेंस को ध्यान में रखते हुए होनी चाहिए। हमें हर एक बच्चे की नीड के अकॉर्डिंग उन्हें देना है। हमें हर बच्चे को किस तरीके से देना है? नीड के अकॉर्डिंग उसकी सहायता करना है। नीड के अकॉर्डिंग करोगे तो उसे इक्वलिटी नहीं फिर उसे इक्विटी कहा जाता है। क्या कहा जाता है दोस्तों?

25:44 इक्विटी कहा जाता है और इक्विटी का मतलब होता है समता। तो आज हमारे जो एनईपी है उन्होंने भी क्या कहा कि इक्विलिटी की बजाय हम इक्विटी पर आ चुके हैं। ठीक है? तो यह हमारा इक्विटी जो है वो एक पॉजिटिव वर्ड है और हमारे एक स्टूडेंट ने बताया मैम फ्लैक्सिबिलिटी रखेंगे। जी हां, एकदम सही कहा कि अगर आप यह सोचते हो कि क्लासरूम में मैंने एक बढ़िया सी स्टाइल ढूंढ ली है और मैं जाकर के इस स्टाइल में पढ़ाऊंगा तो दोस्त आप गलत हैं। क्यों? क्योंकि जब हम वहां जाएंगे तो अलग-अलग तरीके के लर्नर होंगे। किसी को तो मेथड पसंद आ जाएगा मगर हर किसी को नहीं आएगा और सबको पढ़ाना सबको सिखाना हमारा फर्ज है। बीइंग ए टीचर हमें इक्विटी फॉलो करना है तो हमें करिकुलम के अंदर क्या रखनी पड़ेगी? फ्लैक्सिबिलिटी रखनी पड़ेगी। क्या रखनी पड़ेगी? फ्लैक्सिबिलिटी यानी कि

26:29 लचीलापन रखना पड़ेगा। कहीं पर भी वर्ड आ जाए रिग्डिटी। कहीं पे वर्ड आ जाए फिक्स्ड तो यह वर्ड नेगेटिव माने जाते हैं। हमें फ्लैक्सिबिलिटी को फॉलो करना है। एकदम सही बताया आपने। ये जो टीचर है इस टीचर के अंदर क्या-क्या क्वालिटी होनी चाहिए? तो टीचर में क्वालिटी होनी चाहिए किसकी? सबसे पहले उसकी जो टीचिंग स्किल्स हैं कौन-कौन से? टीचिंग जो स्किल्स हैं एक टीचर की पढ़ाने की जो कौशल होते हैं शिक्षण कौशल वो बढ़िया होने चाहिए। देखो अगर मैं मेरे को कोई पॉइंट आज नहीं आता है और मैं आपको यह कह दूं कि दोस्त मुझे आज नहीं आता। इसके ऊपर वेरीफाई करेंगे। कल मैं आपको जवाब देती हूं तो इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन अगर मैं यह सोचूं नहीं ये तो मेरे ईगो के ऊपर बात आ रहे हैं। मैं बच्चे को गलत बता के बात को वहीं पे पलट के चले

27:15 जाऊं तो वो फिर मेरी बहुत बड़ी गलती होगी। क्यों? क्योंकि अगर हम कोई भी ऐसा इंसान ही जिससे गलतियां ना होती। टीचर से भी हो सकते हैं, स्टूडेंट से भी हो सकती हैं। जानबूझ के भी हो सकते हैं, अनजाने में भी हो सकती हैं। तो एक टीचर अगर सब्जेक्ट की मोस्ट्री हासिल करें तो ही टीचर बने ये जरूरी नहीं। सब्जेक्ट की अगर आपको नॉलेज है जो बेसिक नॉलेज है लेकिन आपकी टीचिंग स्किल्स बढ़िया है तो आप बच्चे के माइंड में बिठा सकते हो। एक टीचर जिसमें कोई टीचिंग स्किल नहीं है और उसके पास में पूरी पीएचडी कर रखी है उसने। सब कुछ जानता है अपने सब्जेक्ट के बारे में लेकिन एक बच्चे के माइंड में नहीं डाल पा रहा। तो वो बच्चा तो यही कहेगा नहीं उस टीचर का मेरे को समझ में नहीं आता। वो ये नहीं देखेगा कि आपने कितनी डिग्रियां हासिल कर रखी हैं। आपके पास में कितना नॉलेज है। वो सिर्फ ये जानता है कि मेरे को समझ आता है या नहीं आता। तो एक टीचर के सबसे पहले इफेक्टिव करने के लिए क्या होता है? उसके

28:03 लिए होता है टीचिंग स्किल्स। क्या होता है? टीचिंग स्किल्स होता है। उसके बाद में आता है टीचर का कंटेंट नॉलेज। फिर टीचर का क्या होना चाहिए? कंटेंट नॉलेज बढ़िया होना चाहिए। देन एक होता है कि टीचर की बच्चों के साथ में कम्युनिकेशन स्किल। क्या बढ़िया होनी चाहिए दोस्तों? कम्युनिकेशन स्किल है। वो भी बेटर होनी चाहिए। इस कम्युनिकेशन स्किल का मतलब यह है कि मैं बोल के आपके साथ कौन से लहजे में किस भाषा में बात कर रही हूं वो भी कम्युनिकेशन स्किल है। और जो मैं जेस्चर्स का यूज कर रही हूं क्लासरूम में पढ़ाने के दौरान मैं सिर्फ एक बच्चे को टारगेट करके पढ़ाऊं। सिर्फ एक से आई कांटेक्ट रखूं तो वो भी गलत है। मुझे पूरी क्लासरूम के अंदर अपने आई कांटेक्ट को रोटेट करते रहना है। सबके साथ में जुड़ाव महसूस करना है। किसी भी बच्चे के साथ पार्शियलिटी नहीं करनी।

28:48 तो हमारी वर्बल और नॉनवर्बल दोनों तरीके की कम्युनिकेशन इसमें शामिल होंगी। वर्बल में आ जाता है जो मैं मौखिक रूप से कर रही हूं। नॉन वर्बल में आ जाता है। पढ़ाने के दौरान मेरे हैंड्स मूवमेंट किधर जा रहे हैं? मेरे फेशियल जो एक्सप्रेशन है वो कैसे हैं? मैं किस वे में बच्चे को पढ़ा रही हूं? एक स्माइल के साथ उनके साथ पेश आ रही हूं। गुस्से में आ रही हूं। माथे में चार तोरियां ऐसे चढ़ी हुई हैं। और बच्चा बस यही सोचता है। आज वो टीचर छुट्टी पे हो जाए तो कुछ बढ़िया हो जाए यार। होमवर्क पूरा नहीं कर रहा था। उसे ऐसा सोचने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए। तो हमारे कम्युनिकेशन स्किल के साथ-साथ में स्टूडेंट और टीचर के जो रिलेशन है वो बढ़िया होना चाहिए। याद रखना स्टूडेंट और टीचर के बीच में जितना ज्यादा इंटरेक्शन होगा उतनी ज्यादा बच्चा सीख पाएगा। इन दोनों के बीच में इंटरेक्शन जरूरी है। इनके बीच में अंडरस्टैंडिंग जरूरी है। समझ

29:35 जरूरी है। आपको थोड़ा सा दोस्ताना व्यवहार बच्चों के साथ में मिलाकर के चलना होगा। एकदम फॉर्मल भी नहीं रहना है। डेमोक्रेटिक एनवायरमेंट रखना है। अथॉरिटी नहीं दिखानी भाई। बस मैं ही टीचर हूं। कहीं इस पोजीशन में खड़े रहो ना ना दोस्त थोड़ा सा उनके साथ में क्योंकि देखिए ये जो टाइम होता है एक बच्चे के लिए वो अपने पेरेंट्स से कुछ नहीं कह सकते दोस्तों के साथ में हर तरीके की उलझनें होती हैं। वो अगर आपके साथ में शेयर कर पाते हैं। आप सिर्फ और सिर्फ उन्हें ज्ञान नहीं दे रहे। आप उनके साथ स्किल्स भी डेवलप कर रहे हैं। उनमें एटीट्यूड एटीट्यूड भी डेवलप कर रहे हैं। आप एक सोशल रिफॉर्मर हैं। आप उस बच्चे के व्यवहार में चेंज लाने वाले हैं। और आपको वो रोल मॉडल समझता है। तो आप उन्हें जो कुछ भी बताएं हर तरीके से हमें गाइड करना पड़ेगा। यह स्टूडेंट और टीचर के बीच किसकी

30:22 बात हो गई है? रिलेशन की बात हो गई। उनका संबंध बढ़िया होना चाहिए। एक टीचर में पैशेंस होना चाहिए। टोलरेंस होनी चाहिए। पैशेंस एंड टोलरेंस होना जरूरी है। अगर आप किसी बात को टोलरेट ही नहीं कर पा रहे तो फिर क्या होगा भाई? पेशेंस यानी कि धैर्य, टोलेंस सहिष्णुता होनी चाहिए। इट मींस मैम इसका मतलब दोस्तों यह है कि जैसे कोई स्लो लर्नर है उसको एक बार में समझ में नहीं आया। बच्चा कह दे मैम दोबारा से बताना। आपने दोबारा पूरा जोर लगा के बताया कि इस बार तो इस बच्चे को इंप्रेस करूंगा। लेकिन फिर भी बच्चा कह दे थोड़ा-थोड़ा समझ में आया सर। पूरा तो नहीं आया। तो इस केस में क्या करोगे? उस वक्त भी एक स्माइल के साथ कोई बात नहीं। दूसरा मेथड देखते हैं। इससे सीखने की कोशिश करते हैं तो आपके अंदर पेशेंस होना चाहिए क्योंकि स्लो लर्नर दो बार भी पूछ सकता है, चार बार भी पूछ सकता है। कुछ बच्चे होते हैं जिनको बोलने में

31:07 प्रॉब्लम है, अफेजिया है, किसी तरीके से डिफिकल्टी एक्सप्रेस नहीं कर पा रहा। हकला के बोलता है। आप में अगर पेशेंस नहीं है, आप उसकी बात ही नहीं सुनेंगे तो आपके अंदर पेशेंस के साथ एंपैथी होना जरूरी है। एंपैथी का मतलब है कि आपके अंदर वो करुणा भाव हो कि आप बच्चे की बात को समझ पाएं। थोड़ा धैर्य के साथ उसकी बात को सुनने को, उसको रेस्पोंड करने का मौका दिया जाए। टॉलरेंस क्या होता है? टॉलरेंस होती है सहिष्णुता। एक बच्चा बार-बार क्लास रूम के बीच में डिस्ट्रक्ट कर रहा है। क्या आप उसे क्लास के बाहर कर देंगे? नो। कभी भी एक बच्चे के ऊपर आप लेबलिंग नहीं लगा सकते। कभी भी एक बच्चे को आप टारगेट नहीं कर सकते। ना कभी स्टूडेंट को आप रैंकिंग या ग्रेडिंग दे सकते। ना आप एक स्टूडेंट को क्लास के बाहर कर सकते ना उसे सेग्रगेट कर सकते। हमें उन चीजों को टोलरेट करना पड़ता है। कई बार इग्नोर करना पड़ता है।

31:53 ऑप्शन में आएगा प्रिंसिपल को शिकायत लगाएंगे। क्यों भाई? क्लासरूम को हैंडल आप कर रहे थे। बीइंग ए टीचर हमारे अंदर क्या होनी चाहिए? क्लासरूम मैनेजमेंट स्किल होनी चाहिए। क्लासरूम मैनेजमेंट स्किल होनी चाहिए। मैम क्लासरूम मैनेजमेंट का मतलब समझाओगे एक बार। क्या डिसिप्लिन होता है? हां हां डिसिप्लिन ही होता है। लेकिन डिसिप्लिन कैसे मेंटेन करोगे? मैम फर्स्ट डे क्लास में जाएंगे उस दिन रूल समझा देंगे। मेरी क्लास में मुंह पर ताला लगा के बैठ जाना। हो जाएगा डिसिप्लिन। नो। डिसिप्लिन का मतलब है कि जब तक बच्चा सीखने में इनवॉल्व है, सीखने में उसे मजा आ रहा है, इंटरेस्ट आ रहा है, तो कभी वह फालतू बकवास करेगा ही नहीं। तो हमें हमारा कौन सा प्रिंसिपल फॉलो करना है? हमें प्रिंसिपल ऑफ मोटिवेशन को फॉलो करना है। हमें प्रिंसिपल ऑफ मोटिवेशन फॉलो करना है।

32:40 बच्चों को हमेशा पढ़ाने के प्रति, पढ़ने के प्रति मोटिवेट रखेंगे। पढ़ने के प्रति उस बच्चे को हमेशा उस काम के अंदर एक्टिव इनवॉल्व रखेंगे। जब वो काम में इनवॉल्व रहेगा तो उसे जरूरत ही नहीं पड़ेगी फालतू बातें करने की। हम बच्चे के इंटरेस्ट के साथ में पढ़ाएंगे तो हम जो कुछ भी पढ़ा रहे हैं वो कैसा होना चाहिए? हमारा इंटरेस्टेड होना चाहिए। बच्चा उसमें इंटरेस्टेड है तो करेगा ही नहीं। तो आपको डिसिप्लिन के रूल नहीं बनाने। आपको सिर्फ और सिर्फ बच्चे को क्लासरूम में जो आप पढ़ा रहे हो उसके साथ में कनेक्ट करके रखना है। अगर वो उसके साथ जुड़ा रहेगा तो इधर-उधर ध्यान जाएगा नहीं, भटकेगा ही नहीं। फिर वो डिस्क किसी भी तरीके का जो है बैड बिहेवियर वहां पर फॉलो नहीं होगा। तो हम बच्चे को कैसे जोड़ सकते हैं? तो पहला तरीका यह है कि बच्चे को फ्रीडम

33:27 दीजिए। बच्चे को क्या देना होगा दोस्तों? हमें फ्रीडम देना होगा। लेकिन फ्रीडम का मतलब यह नहीं कि एकदम आजादी दे दी। एकदम सर पर बैठे हैं आपके। नो। फ्रीडम के साथ में एक वर्ड ऐड कर देती हूं। यहां से रिस्पांसिबिलिटी। फ्रीडम के साथ में एक वर्ड क्या आता है? रिस्पांसिबिलिटी आता है। यानी कि आप बच्चे को आजादी तो दे रहे हो मगर साथ में एक रिस्पांसिबिलिटी दे रहे हो। उसे हमेशा यह पता रहेगा यार मेरी रिस्पांसिबिलिटी है यार मेरा कर्तव्य है। मैं इसके अंदर अगर गलत हो गया तो मेरे ऊपर बात आएगी। तो जिस जो इंसान रिस्पांसिबल होता है तो उसके अंदर क्या होती है? अपने आप डिसिप्लिन आ जाता है। इसकी वजह से बच्चे में सेल्फ कॉन्फिडेंस बूस्ट होता है। क्या होता है दोस्तों? सेल्फ कॉन्फिडेंस बूस्ट हो पाता है। यहां से बच्चे के अंदर क्या आ जाता है? सेल्फ

34:12 डिसिप्लिन आ जाता है। सेल्फ डिसिप्लिन आ जाता है। यहां से फिर वो खुद का खुद ही एग्जामिन कर पाएगा। उसमें सेल्फ इवैल्यूएशन होगा। उसके अंदर क्या होगा दोस्तों? सेल्फ इवैल्यूएशन होगा। ये सारी चीजें हमारी किस में आती हैं? फ्रीडम रिस्पांसिबिलिटी के साथ अगर हम बच्चे को क्लासरूम के साथ में जोड़ के पढ़ाएंगे तो वाक्य में मैम सारे स्किल का हम बताएंगे बताएंगे आप प्रायोरिटी है ना वो ऑप्शन के बिहाफ पे दी जाती है याद रखना कुछ पॉजिटिव वर्ड्स होते हैं कुछ नेगेटिव होते हैं सारे के सारे ऑप्शन पे डिपेंड करते हैं बिल्कुल भी ये नहीं कह सकते एक तो देखो टीचर और स्टूडेंट के बीच में इंटरेक्शन जरूरी उनका रिलेशन बढ़िया हो टीचर की कम्युनिकेशन स्किल और एक उसके अंदर टीचिंग स्किल्स हैं ये मैटर करते हैं ये हमारे सबसे ज्यादा ज्यादा फ्रेश प्रायोरिटी पे

34:57 रखे जाते हैं। हां, टीचिंग ऐपटीट्यूड का आज पूरा सोफड़ा साफ हो जाएगा। तो, यहां तक का क्लियर होता है। हम पढ़ रहे थे इन वेरिएबल्स के बारे में कि टीचिंग के तीन चर होते हैं। एक स्टूडेंट कौन होता है? उसमें हर किसी में इंडिविजुअल डिफरेंस होते हैं। हमें फॉलो करने पड़ते हैं। यहां से अगर बात करें तो इंडिपेंडेंट होता है हमारा टीचर। और उस टीचर के कुछ कर्तव्य हैं। वो स्किल्स मैंने आपको बताई। करिकुलम हमेशा फ्लैक्सिबल रखिए। बच्चे के हिसाब से रखिए। उसकी मेंटल उसके अकॉर्डिंग रखिए। और जो करिकुलम है वो कैसा होना चाहिए? सर्पिल होना चाहिए। यानी कि स्पायरल करिकुलम होना चाहिए। स्पायरल कैरिकुलम का मतलब मैम क्या होता है? इसका मतलब होता है दोस्तों सर्पिल पाठ्यक्रम। नेक्स्ट स्लाइड के ऊपर बताती हूं कि क्या होता है सर्पिल पाठ्यक्रम जो बहुत-बहुत ज्यादा जरूरी है। सर्पिल सर्पिल पाठ्यक्रम जो है वो हमें

35:43 दिया था किसने? यह दिया था ब्रूनर साहब ने। किसने दिया था दोस्तों? ब्रूनर ने दिया था। और ब्रूनर ने हमें क्या समझाया था? था तो ब्रूनर ने यह बताया था कि आप बच्चे को कुछ इस अंदाज में पढ़ाते हुए चलेंगे। उनका जो करिकुलम डिजाइन करेंगे वो इस तरीके से स्पायरल मोशन में होगा। यानी कि वो हर एक स्टार्टिंग में छोटा बच्चा होता है। जीन पियाजे ने कहा कि जैसे-जैसे बायोलॉजिकली मैच्योरिटी आती है वो एनवायरमेंट के साथ में कुछ एक्सपीरियंसेस लेते जाता है। और इसी के बिहाफ पर उस बच्चे का क्या होता है? डेवलपमेंट होता है। यह बात किसने बताई? जीन पियाजे ने हमें बताई। इस मैचुरेशन इस परिपक्वता का मतलब क्या है? तो इस मैचुरेशन का मतलब है कि बच्चे के अंदर हेरिडिटी मैच्योरिटी हमेशा किससे बिलोंग करती है? हेरिडिटी से। एक्सपीरियंस हम कहां से लेते हैं?

36:28 एनवायरमेंट से लेते हैं। तो बच्चे का जो डेवलपमेंट होता है, जो विकास होता है, उसमें हेरिडिटी और एनवायरमेंट दोनों का क्या होता है? मल्टीप्लिकेशन होता है। दोनों का अहम रोल होता है। इसी को हम नेचर और नर्चर डिबेट कहते हैं। नेचर होती है प्रकृति। प्रकृति वो जो आपके अंदर क्या पोटेंशियल है आपका पोटेंशियल क्या है? और इसके साथ में जुड़ जाता है नर्चर। नर्चर का मतलब है पालन पोषण यानी कि एनवायरमेंट ने आपको क्या अपॉर्चुनिटीज दी हैं वो आ जाती हैं नर्चर में। तो हमारी हेरिडिटी हमें पोटेंशियल देती है। हमारे अंदर एक क्षमता देती है कि इस बच्चे में ये पोटेंशियल है। अगर उस पोटेंशियल में उसे अपॉर्चुनिटी और मिल जाए तो वो बहुत आगे जा सकता है। तो नेचर और नर्चर हेरिडिटी एनवायरमेंट मैच्योरिटी एक्सपीरियंस सबका क्या होता है? बहुत बड़ा अहम रोल होता है।

37:16 एक बच्चे के विकास में, एक बच्चे के अधिगम में, उसके लर्निंग के अंदर। डन है यहां तक का क्लियर होता है? तो ब्रूनर ने यही बताया कि जैसे-जैसे बच्चे की एज बढ़ती जाती है, उसके अंदर मैच्योरिटी आती है, हमें हर बार लेवल को क्या करना है? अपग्रेड करना है। हमें उम्र के साथ में हर साल अपग्रेड करते जाना है। जैसे जो स्कूल का हमारा एनसीएफ जो है नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क एनसीएफ 2005 वो किस पर बेस्ड है? वो ब्रूनर के सरपिल पाठ्यक्रम पर ही आधारित है। उन्होंने हमें यह कहा था कि हर क्लासरूम के अंदर अपग्रेड कीजिए सिलेबस को। अपग्रेड कीजिए उन उस कंटेंट के लेवल को एंड थोड़ा-थोड़ा एक्सपेंड करते जाइए। यहां पे इतना है। नेक्स्ट क्लास में इतना हो जाएगा। उससे नेक्स्ट में इतना हो जाएगा। तो यानी कि हमें हर एक क्लास के

38:02 साथ में बच्चे को क्या करना है? उसके कंटेंट को एक्सपेंड करना है। थोड़ा सा और ज्यादा उसे को-रिलेटिव बनाना है। इसी के साथ उन्होंने जो बात की थी वो अहम नॉलेज वो अहम बात यह थी कि जैसे आप इस क्लास से आगे वाली में जाएंगे तो थोड़ा सा बैक गियर डाल लेना दोस्तों। आगे जाओ तो फिर से एक बार पीछे आकर के देख लेना। फिर आगे जाओ तो पीछे घूम जाना। यानी कि ब्रूनर ने बात की थी प्रायर नॉलेज की। इन्होंने बात की थी पूर्व ज्ञान की। इन्होंने कहा कि पूर्व ज्ञान से रिलेट करके जब आप कोई भी नया ज्ञान बच्चे को देते हो तो वहां से उस बच्चे की क्या होती है? मीनिंगफुल लर्निंग होती है। और यही मीनिंगफुल लर्निंग थ्योरी किसने दी थी? यह डेविड ओसबेल ने दी थी। यह मीनिंगफुल लर्निंग थ्योरी किसने दी दोस्तों? मीनिंगफुल लर्निंग थ्योरी डेविड ओसबेल के

38:51 द्वारा दी गई थी। किन के द्वारा दी गई? डेविड ओसबेल के द्वारा दी गई थी। डन है और ब्रूनर ने भी प्रायर नॉलेज कोेंस दी थी। वेरी गुड। आप जो साथ-साथ लिख रहे हैं वाकई में बहुत अच्छी मेहनत है आपकी। साथ-साथ में आपका रिकॉल हो रहा है। लिखने से चीजें याद रहती हैं। वो की पॉइंट्स आप साथ-साथ जरूर लिखते हुए चलेंगे। हां, बालक का वजन कम करना। ये बात भी सही है। एनसीएफ 2000 बात करता है इसकी। तो हमने करिकुलम के रिगार्डिंग टीचर और एक स्टूडेंट के बारे में जान लिया है। अब हम ये देख लेते हैं कि जो हमारी क्लासरूम होगी उस क्लासरूम का एनवायरमेंट हमें कैसा मेंटेन करके चलना है। तो याद रखना दो तरीके के होते हैं। एक तो होता है डेमोक्रेटिक और एक क्या होता है हमारा ऑथॉरिटीिक जो हम ऑथॉरिटी जताते हैं वो वाला। तो हमें कभी भी टीचर सेंटर्ड नहीं चाइल्ड सेंटर्ड को फॉलो करना है।

39:37 चाइल्ड सेंटर्ड को फॉलो तो करेंगे बट मैम उससे पहले हमें कुछ ये तो पता हो कि हमारी लर्निंग का मकसद क्या है? टीचिंग का मकसद क्या है? तो हमारे सामने ऑब्जेक्टिव्स ऑफ टीचिंग एक टॉपिक आता है जो काफी ज्यादा जरूरी है जिसमें मैं आपको दो थ्योरी करवाऊंगी और दोनों आपको याद रखनी है। इस थ्योरी के अंदर हम क्या पढ़ेंगे? ऑब्जेक्टिव्स ऑफ टीचिंग पढ़ेंगे। क्या पढ़ेंगे? ऑब्जेक्टिव्स ऑफ टीचिंग के बारे में जानेंगे। क्या होता है ऑब्जेक्टिव्स ऑफ टीचिंग? इसका मतलब है शिक्षण के उद्देश्य। क्या हैं शिक्षण के उद्देश्य? इसमें सबसे बड़ा जो नाम है वो आता है ब्लूम का। किनका नाम आता है? बेंजामिन ब्लूम का नाम आता है। और ब्लूम ने क्या दिया था? एक टैक्सोनॉमी दिया था। बेंजामिन ब्लूम ने हमें क्या दिया? एक टैक्सोनॉमी

40:23 दिया। टैक्सोनॉमी को अगर मैं दो शब्दों में ब्रेकडाउन करके देखूं तो वो बनता है टैक्सो एंड नोमी। टैक्सो का मतलब होता है वर्गीकरण नोमी का मतलब होता है साइंस। तो अलग-अलग क्लासिफिकेशन का जो साइंस है उसी को क्या कहा जाता है? टैक्सोनॉमी। यानी कि ये हमने एक सिस्टमेटिक वे में कुछ ऑब्जेक्टिव है वो सेट कर रखे हैं। उसे टैक्सोनॉमी कहते हैं। और बेंजामिन ब्लूम ने दिया तो इसका नाम क्या बन गया? ब्लूम टैक्सोनॉमी बन गया। और मेरे आगे कुछ बताने से पहले ही काफी स्टूडेंट्स ने बहुत बढ़िया लिख दिया है कि ब्लूम टैक्सोनॉमी का मतलब है कि हम बात कर रहे हैं 3H की। ये जो ब्लूम टैक्सोनोमी है वो 1956 में दी जाती है। किन के द्वारा? बेंजामिन ब्लूम के द्वारा। किन के द्वारा दी जाती है? बेंजामिन ब्लूम के द्वारा दी जाती है। ओके

41:11 मैम। बट 3H का मतलब क्या है? हम बच्चे का क्या विकसित करना चाहते हैं दोस्तों? हम बच्चे का कैप विकसित करना चाहते हैं। और इस सी का मतलब है कॉग्निटिव। कॉग्निटिव होता है बच्चे का मेंटल डेवलपमेंट यानी कि संज्ञा बच्चे का क्या संज्ञान संज्ञानात्मक। कॉग्निटिव का मतलब क्या हो जाएगा? बच्चे का संज्ञानात्मक विकास। क्या आता है मैम? कॉग्निटिव में। तो कॉग्निटिव के अंदर आ जाता है हमारा ब्रेन डेवलपमेंट। हमारा मेंटल डेवलपमेंट। तो इसी ब्रेन डेवलपमेंट को हम एच फॉर क्या कहते हैं? हेड कहते हैं। एच फॉर इसी को क्या कहा जाता है? हेड इसमें आ जाता है कि जो कुछ भी मैं आपको पढ़ा रही हूं उसे आप किस तरीके से पर्सव कर रहे हैं। आप उसे ग्रहण कैसे कर रहे हैं? जो भी मैं आपको पढ़ा रही हूं आप उसे किस वे में पर्सव कर रहे हो?

41:57 अपने माइंड में कैसे डाल रहे हो? आप कैसे ध्यान लगाते हो वो आपका अटेंशन है। आपने ध्यान लगाया चीजों को सुना। आपकी मेमोरी कितनी है? आप उन चीजों के बारे में रिकॉल करते हो। क्या थिंकिंग लगाते हो? आपकी चिंतन। आपका थिंकिंग यानी कि चिंतन। चिंतन के साथ में आ जाती है आपकी रीजनिंग। रीजनिंग का मतलब है आपकी तर्क शक्ति। तो ये क्या हो जाएगी दोस्तों? रीजनिंग हो जाएगी। फिर आप कोई भी डिसीजन कैसे लेते हैं? आप किसी प्रॉब्लम को कैसे समाधान करते हैं? वो डिसीजन मेकिंग वो प्रॉब्लम सॉल्विंग ये सारे के सारे गुण किस में आते हैं? ब्रेन डेवलपमेंट का हिस्सा होते हैं। ये हमारे कॉग्निटिव आस्पेक्ट का काम है। किसका काम है? कॉग्निटिव आस्पेक्ट का। तो ब्लूम टैक्सोनॉमी हमें ये कहती है कि 3 अच में एक अक्ष हमारा क्या होता है? बच्चे का

42:43 मेंटल डेवलपमेंट करना होता है। इस मेंटल डेवलपमेंट का मतलब यह है कि हम बच्चे में क्या ट्रांसमिट करना चाहते हैं? बच्चे को क्या सिखाना चाहते हैं? क्या देना चाहते हैं? वो है नॉलेज। हम बच्चे में ज्ञान का निर्माण करना चाहते हैं। तो एक एच फॉर क्या हो गया? हेड। एक अच और होता है मैम। उस अच का मतलब क्या है? उस अच का मतलब है हार्ट। दिल दिल से जुड़े जो आपके जज्बात हैं वह आपके भावनात्मक क्षेत्र में आ जाते हैं। तो इसे हम क्या कहेंगे? अफेक्टिव डोमेन कहेंगे। इसे हम क्या कहेंगे दोस्तों? अफेक्टिव डोमेन कहेंगे। अफेक्टिव डोमेन को हिंदी में कहा जाता है भावनात्मक भावनात्मक क्षेत्र। इस भावनात्मक डोमेन के अंदर क्या होता है? आपकी फीलिंग्स को

43:29 प्रायोरिटी दी जाती है। इसके अंदर क्या देखी जाती हैं? आपकी फीलिंग्स देखी जाती हैं। तो बच्चे की जो फीलिंग्स हैं, उसके जो मोरल वैल्यू्यूज हैं, उसके जो इमोशंस हैं, फीलिंग हो गई, उसके इमोशंस, उसके अंदर क्या वैल्यू्यूज हैं, वो मोरल वैल्यूज़ हो सकते हैं। कल्चरल वैल्यूज़ हो सकते हैं। सोशल वैल्यूज़ हो सकते हैं। वो सारी इसमें आएंगी। बच्चे में जो डर है, जो कॉन्फिडेंस है, यह सारी चीजें किस में आती हैं? अफेक्टिव डोमेन में आते हैं। तो इसे अच फॉर हम क्या बोलेंगे? हार्ट। बताइए। अभी देनी है। यह तो 9:00 बजे खत्म हो गई। मैम लंबे भी जा सकते हैं।

44:16 और जो पहले स्टार्टिंग में केस स्टडी नहीं डालते थे वो वाले केस स्टडी डाल दो। एक्सपीरियंशियल लर्निंग के अंदर डेविड को वगैरह की जो थ्योरी है मेरा पेनड्राइव ले जाओ। एक्सपीरियंशियल लर्निंग के नाम से वो मिलेगी फाइल और उसके नीचे कुछ क्वेश्चंस भी हैं 100 के समथिंग उनमें से सेलेक्ट कर लेना जज। चलिए दोस्तों, अगले की बात करते हैं। नेक्स्ट हमारा एच क्या आता है? तो नेक्स्ट एच आता है हमारा हार्ट हो गया, हैड हो गया। उसके बाद हैंड बचता है। क्या आ गया? हैंड। हैंड का मतलब हाथ। यानी कि यहां पर हम किसकी बात कर रहे हैं? स्किल्स की बात कर रहे हैं। हम बच्चे में कौशल भी विकसित

45:02 करना चाहते हैं। और अगर आप कौशल विकसित करना चाहते हो तो क्या कहीं पे इसका जिक्र किया गया है? जी हां, इसका जिक्र किया गया है एनईपी 2020 के अंदर। जब एनईपी 2020 आप कर लो तुम अपनी बातें। जब हम बात करते हैं किसकी? स्किल्स की तो आपने एनईपी 2020 में बात की होगी। कक्षा छह से बच्चे को हम क्या देंगे? कक्षा छह से बच्चे को वोकेशनल एजुकेशन देना स्टार्ट कर देंगे। उस वोकेशनल एजुकेशन में वो सारी एडल्ट की वो स्किल्स आ जाती हैं तो वो हमारा क्या हो जाएगा? स्किल्स हो जाएगा। और इसे कहा जाता है साइकोमोटर डोमेन। क्या कहा जाता है? साइको मोटर डोमेन कहा जाता है। साइकोमोटर डोमेन की अगर बात करूं तो इसे हिंदी में क्या कहेंगे? गत्यात्मक हिंदी में क्या हो

45:49 जाएगा? ये हमारा कौशल वाला हो जाएगा। गत्यात्मक पक्ष हो जाएगा। डन है यहां तक का क्लियर होता है। थ्री एच के ऊपर बात की गई है। इन तीनों अच के माध्यम से उन्होंने क्या दिए हैं? लर्निंग के ऑब्जेक्टिव हमें सेट करके दिए हैं। तो जब हमारी टीचिंग का लर्निंग का ऑब्जेक्टिव पूछा जाए तो एक नाम ब्लूम का और एक नाम गैगने का जरूर याद रखना। हम सबसे पहले ब्लूम की टैक्सोनॉमी के बारे में पढ़ रहे हैं। तो ये आपका ब्लूम टैक्सोनॉमी में 3H की बात की गई है। सबसे पहले जो ओरिजिनल टैक्सोनॉमी है उस ओरिजिनल में बेंजामिन ब्लूम और उसकी टीम ने कौन सा दिया था? सबसे पहले दिया था कॉग्निटिव आस्पेक्ट। तो कॉग्निटिव डोमेन के अंदर भी उन्होंने कुछ सबस्टेजेस के बारे में बताया। तो चलिए उन सब स्टेजेस को देख लेते हैं। कॉग्निटिव डोमेन के अंदर क्या आती हैं? कुछ सबस्टेप्स आते हैं। तो

46:36 चलिए उनको देखते हैं। सबसे पहले इन्होंने यह कहा था कि 1956 में दी थी। कब दी थी इन्होंने? 1956 में दी थी। और यह किसने दी थी? बेंजामिन ब्लूम ने दी थी। किसने दी दोस्तों? बेंजामिन ब्लूम के द्वारा दी जाती है। फिर इसी को रिवाइज किया जाता है। बाद में इसको क्या किया जाता है? रिवाइज किया जाता है। रिवाइज किया जाता है इन 2001 यानी कि 2001 में किसके द्वारा? एंड्रेसन एंड क्रेथहोल के द्वारा। एंड्रसन एंड क्रेथ होल के द्वारा। इनके द्वारा क्या किया जाता है? इस ब्लूम टैक्सोनॉमी को बाद में रिवाइज किया जाता है। मैम अलग-अलग क्यों बता रहे हो? देखिए इन्होंने जो स्टेप दी उसमें सबसे पहले इन्होंने बात की थी किसकी? नॉलेज की। सबसे

47:23 पहले किसकी बात की दोस्तों? नॉलेज की। नॉलेज का मतलब है ज्ञान। नॉलेज का मतलब क्या है? ज्ञान। कि सबसे पहले बच्चे में क्या होता है? ज्ञान होता है। ज्ञान का मतलब होता है सिर्फ फैक्ट्स को क्या करना? रिकॉल करना। जिसमें आप डेफिनेशंस याद करते हो। आप चीजों को सेलेक्ट करते हो। आप उनकी लिस्ट बनाते हो। सेलेक्ट करना। उनकी लिस्ट बनाना। उनको डिफाइन करना। ये सारा का सारा किस में आ जाता है? नॉलेज के अंदर आ जाता है। डिफाइन करना, परिभाषित करना, रिकॉल करना, डेफिनेशन देना, सेलेक्ट देना, लिस्ट बनाना, लेबलिंग लगाना। यानी कि मेमोरी बेस जो होता है ना रटी रटाई चीजें वो सारा किस में आ जाता है? नॉलेज में। आपने जब कोई चीज सीख ली है तो उसके बाद आप क्या करते हैं? उनको समझते हैं। समझते हैं तो फिर क्या आ जाता है? कॉम्प्रिहेंशन। उसके बाद

48:10 में क्या आता है? कॉम्प्रिहेंशन आता है। इस कॉम्प्रिहेंशन का मतलब है समझ। कॉम्प्रिहेंशन का मतलब क्या है? समझ। फिर यहां पर आकर के आप उन चीजों को समझते हो। समझते हो तो आप अलग-अलग तरीके के टीचर आप टीचर के साथ इंटैक्ट करते हैं। टीचर आपको एग्जांपल और नॉन एग्जांपल के थ्रू रियल लाइफ प्रॉब्लम्स के साथ में रिलेट करते हुए आपको समझाता है। जब आपको समझ में आ जाता है तो फिर आप उन्हें क्या करते हैं? जीवन में अप्लाई करते हैं। तो उसके बाद में आपका क्या आता है दोस्तों? एप्लीकेशन आता है। एप्लीकेशन का मतलब क्या हो जाएगा? प्रयोग। एप्लीकेशन का मतलब क्या होगा? प्रयोग होगा। जब आप अप्लाई करते हो तो अप्लाई करने के बाद आप उन्हें अलग-अलग टुकड़ों में तोड़ के उसका विश्लेषण करते हो। उनमें डिफरेंशिएट करते हो कि कितना

48:55 सही कितना नहीं तो वो आपका एनालिसिस एनालाइज करना आ जाएगा। विश्लेषण करना। वो क्या हो जाएगा? एनालिसिस हो जाएगा यानी कि विश्लेषण करना। फिर जब विश्लेषण हो जाता है तो फिर आप उन चीजों को जोड़ करके देखते हो सारे एक्सपीरियंसेस को। वो हो जाएगा सिंथेसिस यानी कि संश्लेषण करना। और लास्ट में आप क्या करते हैं? लास्ट में चलकर के आप इवैल्यूएशन करते हैं, मूल्यांकन करते हैं। एट द एंड आप क्या करते हैं? इवैल्यूएशन करते हैं। यानी कि मूल्यांकन करते हैं। एक निष्कर्ष निकालते हैं। जजमेंट पास करते हैं। कितना सही, कितना गलत, क्या हमने सीखा? वो सही था या नहीं था? वो जस्टिफाई करना किस में आएगा? इवैल्यूएशन में आएगा। अब देखो यहां से काफी बच्चों को एनालिसिस और सिंथेसिस में प्रॉब्लम आती है। तो ध्यान से सुनेंगे। एक

49:41 तो होता है हमारा एनालिटिकल मेथड। ये हमारे टीचिंग के भी मेथड होते हैं। ये मैक्सिमम्स भी होते हैं। एक तो होता है एनालिटिकल मेथड और एक होता है दोस्तों हमारा सिंथेटिक मेथड। एक हमारा क्या होता है? सिंथेटिक मेथड होता है। दोनों के बीच में डिफरेंशिएट करके बता रही हूं। ध्यान से सुनना। एनालाइज करना। आपने मॉक टेस्ट दिया और आप उसके बाद एनालाइज करते हैं कि मेरे मैथ में कितने मार्क्स आए, कितने गलत हुए, कौन से टॉपिक से ज्यादा गलत हुए। इंग्लिश का क्या स्कोर रहा? टीचिंग ऐपटीट्यूड में कितने आए? मैम 30 में से 28 आए। दो क्वेश्चन गलत हुए। फिर आप देखते हैं कि किसकी वजह से गलती हुई। सिली मिस्टेक थी या कांसेप्ट नहीं आता था। फिर आपने देखा कि ओ ये तो प्रिंसिपल्स ऑफ टीचिंग में गलती हो रही है। हर बार इसी में हो रही है। आपके सामने पूरा एक 100

50:28 नंबर का पेपर था। उसको आपने अलग-अलग सेक्शन में बांटा। उसको भी अलग-अलग सेक्शन में बांटा। यानी कि एनालाइज करना होता है। किसी भी होल को आप ब्रेकडाउन करके पढ़ते हो। जब एक कंप्लीट को आप छोटे-छोटे टुकड़ों में क्या कर देते हो? ब्रेकडाउन कर देते हो। तो याद रखना होल टू पार्ट्स जाना क्या कहलाता है? एनालिटिकल कहलाता है। होल से हम किसकी तरफ जाते हैं? पार्ट्स की तरफ जाते हैं। टुकड़ों की तरफ जाकर के ब्रेकडाउन करके पढ़ते हैं। तो वो हमारा एनालिटिकल मेथड होता है। यहां पे क्या किया जाता है दोस्तों? ब्रेकडाउन किया जाता है। एंड सिंथेटिक मेथड में क्या होता है? प्रकाश संश्लेषण सुना होगा आपने फोटोसिंथेसिस वो क्या करते हैं? वो अलग-अलग सोर्सेज कोई पत्ती है, कोई जड़ों से पानी लिया जा रहा है, कोई खनिज लिए जा रहे हैं। सूरज से प्रकाश की

51:15 किरण ली जा रहे हैं। उन सब से मिलाकर के वो क्या बनाते हैं? एक भोजन बनाते हैं। यानी कि अलग-अलग चीजें जुड़कर के जब कुछ नया क्रिएट करते हैं तो वो आपका सिंथेसिस होता है। तो अलग-अलग जुड़ के फिर बाद में क्या बना देते हैं? कुछ कंप्लीट का निर्माण करते हैं तो यही आपका क्या कहलाता है? सिंथेसिस कहलाता है। सिंथेसिस का मतलब हो जाएगा क्रिएशन। इसके अंदर क्या आ जाता है? सृजन करना। इसमें क्या आता है? कुछ नया बनाना, निर्माण करना, सृजन करना। ठीक है? यहां पे क्या आएगा? सृजन या निर्माण करना शामिल होता है। इसके अंदर हम बात करें तो यह पार्ट्स से होल की तरफ जाता है। किस तरफ जाता है? ये हमारा पार्ट्स टू होल चलता है। दोनों पॉइंट दोस्तों आपको याद रखने हैं। आई होप ये क्लियर हो गया

52:01 होगा। वापस चलते हैं टू द पॉइंट। हम कॉग्निटिव डोमेन की छह स्टेजेस देख रहे थे। सबसे पहले आता है नॉलेज ज्ञान। ज्ञान को फिर हम समझते हैं। समझ में आ जाता है तो अप्लाई करते हैं। अप्लाई करने के बाद उनके बीच हम एनालिसिस करते हैं कि कितना सही, कितना गलत। वो विश्लेषण आपने किया। फिर आप अलग-अलग एक्सपीरियंसेस को जोड़कर के कुछ नई अवधारणा कांसेप्ट बनाते हो और देन आप निष्कर्ष निकालते हो कि जो मैंने सीखा वो कितना सही कितना गलत तो ये किस में जाएगा इवैल्यूएशन में। ये छह हमारी सबस्टेजेस जिसका सीक्वेंस आपसे पूछ लिया जाए तो आप इसी क्रम में इनको याद रखेंगे। बट ये थी हमारी ओरिजिनल टैक्सोनॉमी। क्वेश्चन आ जाता है बताइए ओरिजिनल टैक्सोनॉमी का सबसे हाईएस्ट लेवल क्या है? तो वो होगा दोस्तों इवैल्यूएशन। अब पूछ

52:47 लिया जाए कि इसकी रिवाइज्ड टैक्सोनॉमी का क्या है? तो हमें वो भी पढ़नी है। मैम रिवाइज क्यों किया गया था? दोस्तों दो रीजन थे रिवाइज करने के। पहला रीजन यह था कि नॉलेज, कॉम्प्रिहेंशन, एप्लीकेशन सारे के सारे कौन से फॉर्म में थे? यह हमारे नाउन फॉर्म में थे। नाउन का मतलब हो गया संज्ञा कि हमने सिर्फ और सिर्फ क्या दिया? एक नाम दिया। इसी को बदल के हमने बाद में क्या कर दिया? एक्शन वर्ब बना दी। हमने किसके अंदर चेंज कर दिया इसको? एक्शन वर्ब में। क्योंकि हम जानते हैं कि सिर्फ बोल देना कुछ नहीं करना मैटर करता है। तो यहां पर वर्ब को प्रायोरिटी दी गई थी। तो जैसे ही आप इसे पढ़ते हैं रिवाइज्ड में तो नॉलेज। नॉलेज मतलब क्या था? रिकॉल करना। याद करना, चीजों को, फैक्ट को याद रखना। तो उसको इसने क्या बना दिया? रिमेंबर।

53:32 रिमेंबर का मतलब हो जाएगा याद करना। यह बन गई हमारी एक वर्ब। जब आप चीजों को याद करते हो तो फिर उनको समझते हो, समझते हो तो उसे क्या लिख देंगे? कॉम्प्रिहेंड। क्या लिख देंगे? कॉम्प्रिहेंड करना। कॉम्प्रिहेंड वर्ब फॉर्म बन गई। जब आपने ये किया तो फिर आप उन्हें क्या करेंगे? अप्लाई करेंगे। वहां था एप्लीकेशन। यहां क्या हो जाएगा? अप्लाई करना। अप्लाई करने के बाद आप एनालाइसिस नहीं आप एनालाइज करते हैं। क्या करते हैं? एनालाइज। और एनालाइज करने के जस्ट बाद आप इवैलुएट करते हैं और इवैलुएट करने के बाद कुछ नया क्रिएट करते हैं। यानी कि ब्लूम टैक्सोनॉमी का जो रिवाइज रिवाइज्ड वर्जन है उसमें दो परिवर्तन है। एक तो यह कि नाउन को हमने वर्ब फॉर्म में बदल दिया। और दूसरा यह कि ऊपर की जो दो स्टेजेस थी उनको हमने क्या

54:20 कर दिया? एक्सचेंज कर दी। उनकी पोजीशन इंटरचेंज कर दी। सिंथेसिस का मतलब भी क्या था? क्रिएट करना था। और उस क्रिएट को हमने कहां पे भेज दिया? ऊपर। ये जो इवैल्यूएशन था उसको हम कहां ले आए? नीचे। क्योंकि इनका मानना यह था अनरेशन का कि जब आपने मूल्यांकन कर दिया, जब आपने जजमेंट दे दिया कि यह बात सही है और यह गलत है तो फिर उसके ऊपर सुधार भी कर दो, कलम भी चला लो, हाथ पैर भी चला लो। तो फिर उसके बाद में कुछ नया क्रिएट करना। तो सबसे हाईएस्ट हमारा क्या होगा? क्रिएट करना होगा। डन है यहां तक। आई होप कॉग्निटिव डोमेन जो है वो ब्लूम टैक्सोनॉमी का आपका यहां पर समझ में आ गया होगा। अब हम चलते हैं नेक्स्ट की तरफ। और नेक्स्ट हमारा दूसरा एच आता है और उसके अंदर हम क्या पढ़ रहे थे? अफेक्टिव डोमेन। यहां से दोस्तों हम किसके बारे में

55:06 पढ़ेंगे? अफेक्टिव डोमेन के बारे में पढ़ेंगे। अफेक्टिव डोमेन हमारे अंदर कुछ मूल्यों को विकसित करने के लिए, कुछ फीलिंग इमोशंस को विकसित करने के लिए है। तो, हम सबसे पहले क्या करते हैं? रिसीव करते हैं। इस केस में हम सबसे पहले क्या करते हैं? रिसीव करते हैं। रिसीव का मतलब है कि हम प्राप्त करते हैं। क्या प्राप्त करते हो? आप दूसरों को देखते हो। आप दूसरों को क्या करते हो? देखते हो। वहां से कुछ सीखते हो। टीचर आपको पढ़ा रहे हैं और आप उन चीजों को सुन रहे हो। ध्यान से एक बच्चा सुन रहा है। वो रिसीव करना हो गया। रिसीव करने के बाद में वो क्या करता है? रिसोंड करता है। खुद उस बात को दोहराता है। यानी कि वो प्रतिक्रिया देता है। यहां पे क्या हो जाएगा? प्रतिक्रिया देना। यहां पे बच्चा क्या करेगा? प्रतिक्रिया देगा। यानी कि

55:52 रेस्पोंड करना। जब रेसोंड किया तो उसके बाद उसे महत्व समझ में आया कि देखो जब टीचर ने कुछ भी समझाया उन्हें मान लो स्वच्छता के बारे में बता रहे थे टीचर तो बच्चा ध्यानपूक सुनता जा रहा था और अपने माइंड में बातों को रिसीव कर रहा था कि यार स्वच्छता की प्रॉब्लम बहुत है। मोदी जी की अगर एक फोटो खिंवाने से झाड़ू से कुछ नहीं होगा। हम लोगों को हर एक नागरिक को अपना कर्तव्य है। हम सब अपने आसपास सफाई रखेंगे तो डेफिनेटली फिर तो हर जगह सफाई हो जाएगी। हमें कोई पोस्टर लगाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। हमें नारे देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हमें बड़े-बड़े ये जो अधिकारी हैं उनके हाथों में झाड़ू थमाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अगर हम अपनी-अपनी जगह को साफ कर लें। यह बच्चे ने रिसीव किया। रिसीव करने के बाद दूसरे दिन वो सुबह-सुबह झाड़ू उठाता है और कहता है कि मम्मा आज अपने चारों तरफ के घर की साफ

56:37 सफाई हम गली में साफ नहीं करेंगे। कूड़ा अपने घर का दूसरे के आगे कर दिया। दूसरे ने तीसरे आगे कर दिया। वो नहीं करेंगे। कि चलो इसकी जगह पर हम अपनी-अपनी सफाई करते हैं। तो बच्चा रेस्पोंड करता है। रेस्पोंड किया तो उसे महत्व समझ में आया कि वाह यार आज एक तो मोटिवेशन आ रखा है। एक तो अंदर से अच्छा फील हो रहा है। एक चारों तरफ बढ़िया लग रहा है। उस साफ सफाई से एक पॉजिटिव एनर्जी आ रही है। बीमारियों से छुटकारा मिल रहा है। तो यानी कि बच्चे को यहां पर उसका मूल्य समझ में आता है। तो ये हो जाएगा महत्व देना। जब मूल्य समझ में आता है तो वो ऐसीऐसी बहुत सारी अच्छाइयां हैं वो अपनी जिंदगी में उतारता जाता है और वो क्या करता है? यहां पर ऑर्गेनाइज करता है। सारी चीजों को क्या करता है? ऑर्गेनाइज करता है। यानी कि उनका संगठन बनाता जाता है। बाकी सबको भी उसके लिए मोटिवेट करता है। और उसके बाद में क्या हो

57:22 जाता है? धीरे-धीरे वो सारी चीजें उसके चरित्र में झलकने शुरू हो जाते हैं। उसके कररेक्टर में दिखने शुरू हो जाते हैं। तो यह हो जाएगा दोस्तों कररेक्टराइजेशन। यह क्या हो जाएगा? कररेक्टराइजेशन यानी कि चरित्र निर्माण। क्या होगा? यह हो जाएगा कररेक्टराइजेशन यानी कि चरित्र का निर्माण। डन है? तो जब आपसे पूछ लिया जाए कि इसका सीक्वेंस क्या है? वो आपसे पूछेगा कि बताइए रिसीव करना किस में आता है? रिसीव करना आता है मैम अफेक्टिव डोमेन में। पूछ लिया जाए कैरेक्टराइजेशन किसका हाईएस्ट लेवल है? तो आंसर क्या होगा? अफेक्टिव डोमेन होगा। आई होप पॉइंट क्लियर हो गया होगा। वेरी गुड। कुछ हमारे स्टूडेंट्स बना रहे हैं इनके ट्रिक कि आर आर वी ओ सी बनेगा। वेरी गुड। जैसे भी आप याद रख पाओ रिसीव करना। फिर हम रिसोंड करते हैं। हमें वैल्यू समझ में आती है। हम

58:09 ऐसीऐसी और अच्छाइयां जीवन में उतारते हैं। और फिर हम जाने उसके नाम से जाने जाते हैं। अब जहां-जहां अहिंसा का नाम आता है। क्यों महात्मा गांधी को याद किया जाता है? क्योंकि उन्होंने यह जो मूल्य था वो कहीं से सीखा होगा अपने गुरुओं से। उन्होंने रेस्पोंड किया होगा। उनको वैल्यू समझ में आई। लोगों ने उसको इनकरेज किया, मोटिवेट किया और वो अपने पथ पर बस इसी के सहारे बढ़ते गए और लास्ट दम तक उन्होंने उस अहिंसा को फॉलो किया। हर हाल में किया। तो आज इसलिए हम अहिंसा के नाम के साथ में गांधी जी को याद करते हैं। तो धीरे-धीरे उस बच्चे के चरित्र के अंदर क्या आ जाता है? कररेक्टराइजेशन हो जाता है। उन मूल्यों का कररेक्टराइजेशन किसकी वजह से होगा? बाय वैल्यूज। जब बच्चा उनके महत्व समझेगा, लोग उनको महत्व देंगे, तब हमारा चरित्र निर्माण होता है बाय वैल्यूज। वेरी गुड। यहां तक आपका क्लियर हो चुका है। अब

58:56 हम बढ़ते हैं किसकी तरफ? नेक्स्ट की तरफ। नेक्स्ट आता है हमारा कौन सा? साइको मोटर डोमेन। नेक्स्ट क्या आएगा दोस्तों? साइकोमोटर डोमेन आता है। बताइए साइको मोटर डोमेन में हम क्या कर रहे हैं? हम बच्चे के स्किल्स को डेवलप कर रहे हैं। दोस्तों क्या डेवलप कर रहे हैं यहां पे? बच्चे की स्किल्स को डेवलप कर रहे हैं। स्किल जैसे चलो मैं एक एग्जांपल लेती हूं। कोई भी स्किल हो सकती है। जैसे आप बच्चे को लिखना सिखाते हो। छोटा बच्चा जो लिखना नहीं जानता वो लिखना कैसे सीखता है। कभी सोचा आपने? यस मैम। सबसे पहले वो दूसरों को देखता है कि दूसरे कैसे पकड़ते हैं। एक बच्चा बैठा-बठा देख रहा है कि टीचर ने ऐसे कुछ हाथ में पकड़ रखा है। पेन या पेंसिल जो कुछ भी है। तो बच्चे ने क्या किया? सबसे पहले परसेप्शन। सबसे पहले क्या हुआ?

59:41 परसेप्शन। परसेप्शन का मतलब होता है धारण करना। परसेप्शन का मतलब क्या होता है? धारण करना। यानी कि वो देखता है। देखने के बाद उसके समझ में आ गई उन्होंने ऐसा कर रखा है। फिर उसके अंदर खुद में भी तो करने की वो होनी चाहिए ना कि मैं करूं। तो फिर उसके बाद वो क्या करता है? सेट। सेट का मतलब हो जाएगा तैयार करना। तैयार करने का मतलब है कि बच्चा फिजिकली और मेंटली खुद तैयार होता है वो करने के लिए। वो हाथ में पेंसिल उठा के खड़ा होता है। तैयार होता है। और तैयार होने के बाद में वह क्या करेगा? जब उसने देख लिया दूसरों को ऑब्जर्व कर लिया अच्छे से। फिर वो क्या कर रहा है? अपने हिसाब से उसने उस चीजों को सेट कर लिया। अब वो गाइडेड रिस्पांस करेगा। टीचर उसको बताएगा कि बेटा ऐसे लिखो फिर एक डंडी ऐसे लगाओ फिर बीच में ऐसे

1:00:27 लगाओ। वाओ बन गया ए। तो इससे क्या कर रहा है बच्चा? गाइडेड रिस्पांस कर रहा है। निर्देशित व्यवहार कर रहा है। तीसरे नंबर पे वो क्या कर रहा है? गाइडेड रिस्पांस कर रहा है। यानी कि दूसरा बता रहा है और उनको देख के कॉपी कर रहा है, इमिटेट कर रहा है। गाइडेड रिस्पांस का मतलब हो जाएगा निर्देशित व्यवहार कर रहा है। यहां से क्या किया जा रहा है? निर्देशित व्यवहार किया जा रहा है। डन है दोस्तों। उसके बाद में बच्चा अपने आप करने की कोशिश करता है। जब वो अपने आप करता है तो कुछ गलतियां होती हैं। उसी को हम कहते हैं मैकेनिज्म। क्या कहते हैं? मैकेनिज्म कहते हैं। यानी कि यहां पर बच्चा कुछ एरर के साथ में विद सम एरर्स। कुछ एरर के साथ में क्या करता है? गलतियां करता है। छोटी-छोटी गलतियां

1:01:12 होती हैं। उठता पढ़ता गिरता संभलता चलने की कोशिश करता है। साइकिल चलाने की कोशिश करता है। एक बार हैंडल को मिट्टी में धुलाया। एक बार दो बार अपने घुटनों पे चोट खाई। लेकिन उसने क्या किया? मैकेनिज्म। यानी कि वहां पर वो टूटी-फूटी चीजों के साथ में गलतियों के साथ में उस काम को दोहरा रहा है। जब ऐसी गलतियों के साथ में करेगा तो एक दिन परफेक्शन भी आएगा। यस मैम आएगा। मैकेनिज्म के बाद में परफेक्शन भी आएगा। खुद से भी कर पाएगा। तो उसके बाद उसमें कॉम्प्लेक्स ओवर्ट रिस्पांस जारी हो जाते हैं। फिर क्या हो जाता है? कॉम्प्लेक्स ओवर्ट। कॉम्प्लेक्स ओवर्ट रिस्पांस। यहां पर वो बड़े-बड़े जो रिस्पांस हैं, जो कठिन रिस्पांस होते हैं, वह करना स्टार्ट कर देता है। कॉम्प्लेक्स ओवरवर्ड का मतलब हो

1:01:58 गया कि अब वो बिना किसी एरर के यह कह सकते हो विदाउट एनी एरर। ठीक है? विदाउट एनी एरर। बिना किसी गलती के, बिना किसी त्रुटि के उस काम को दोहराता है। फिर वह अडप्टेशन आता है उसमें। उसके बाद में क्या आता है? अप्टेशन आता है। अप्टेशन का मतलब हो जाएगा अनुकूलन। अब तो अगर उसने एक दोनों हाथों से साइकिल चलाना सीखा था। अब वो क्या कर रहा है? एक हाथ से चलाने की कोशिश कर रहा है। अब वो नई-नई स्टाइल आजमाने की कोशिश कर रहा है। तो यहां पे क्या होता है? कुछ न्यू स्टाइल अपने बिहाफ पे करने की कोशिश करता है। और जिस दिन यह हो जाता है, उसके बाद बच्चे में क्या आ जाता है? उन सारी चीजों का ओरिजिनल एक संगठन बन जाता है। तो ऑर्गेनाइजेशन यहां पे क्या हो जाएगा? ओरिजिनेशन हो

1:02:44 जाएगा। डन है? क्लियर हो गया? तो ये होता है हमारा साइको मोटर डोमेन यानी कि स्किल्स का डेवलपमेंट कैसे होगा? सबसे पहले हम दूसरों को देखते हैं। ऑब्जर्व करते हैं। आपने ऑब्जर्व किया। फिर बच्चा मेंटली क्या होता है? हां हां मिलेगा आपको। ब्रेक भी मिलेगा। ठीक है रुक जाओ। अब 3 घंटे होने दो पहले। पता ही नहीं चला मेरे को तो कब निकल गया। यहां से अगर हम बात करें सबसे पहले बच्चा देखता है, ऑब्जर्व करता है। मेंटली फिजिकली अपने आप को प्रिपेयर करता है करने के लिए। फिर दूसरों ने जो गाइडेंस दी उसके बिहाफ पे क्या करता है? कोशिश करता है। करने की गाइडेड रिस्पांस करेगा। देन वो अपने हिसाब से अपने हिसाब से करेगा। टूटी फूटी गलतियों के साथ में कुछ एरर गलतियों के साथ में काम को दोहराता है। देन वो बिना गलतियों के काम करता है और फिर नई-नई

1:03:29 स्टाइल उसमें आजमाने की कोशिश करता है और धीरे-धीरे उसमें ऐसा लगता है कि बनाए इस काम के लिए हो। उसमें वो ओरिजिनलिटी आ जाती है। तो ये हमारा ऑर्गेनाइजेशन लास्ट हो जाएगा। आई होप कि सातों पॉइंट आपके क्लियर हो गए होंगे। पी एस जी एम सी ए ओ वाह मेरे शेरों हम डन है यहां तक का क्लियर हो गया। तो आई होप ब्लूम टैक्सोनॉमी आपको समझ में आ गया होगा। क्या मकसद था ब्लूम की टैक्सोनोमी का? बस इन्होंने हमें क्या दिए हैं? कुछ ऑब्जेक्टिव दिए हैं लर्निंग के कि हमारी जो बच्चे की लर्निंग है उसमें सिर्फ ज्ञान देना नहीं। ज्ञान के साथ स्किल का डेवलपमेंट भी करवाना है। उस स्किल के साथ में हम बच्चे को क्या देंगे? स्किल के साथ में बच्चे के अंदर एटीट्यूड एंड वैल्यूस को भी डेवलप करना है। आई होप क्लियर है। अब पढ़ते हैं इन्हीं लर्निंग ऑब्जेक्टिव

1:04:16 के बारे में बताने वाले और कौन थे मैम? और थे दोस्तों हमारे गैगने। गैगने ने भी क्या दी थी? लर्निंग थ्योरी दी थी। इन्होंने भी क्या दी थी? प्रॉब्लम सॉल्विंग थ्योरी दी थी। इनकी थ्योरी का नाम क्या था? प्रॉब्लम सॉल्विंग थ्योरी। इनकी थ्योरी का नाम क्या था? प्रॉब्लम सॉल्विंग थ्योरी। इस प्रॉब्लम सॉल्विंग थ्योरी की अगर दोस्तों मैं बात करूं तो प्रॉब्लम सॉल्विंग थ्योरी के अंदर हम बात करते हैं लर्निंग की हरार्कल थ्योरी। दूसरा नाम इसे किस नाम से जाना जाता है? लर्निंग की हरार्कल थ्योरी यानी कि हम एक हरार्की की बात कर रहे हैं। इन्होंने स्टेप बाय स्टेप हम में बताया था। तो यह हो जाएगा हेरार्किकल थ्योरी। और इस हेरार्किकल थ्योरी में उसने कितने

1:05:01 स्टेप बताए? आठ स्टेप बताए जिनमें जो हमारे आठ स्टेप हैं दो-द में डिवाइड करेंगे। चार और चार स्टार्टिंग के चार हैं वह बच्चे का बिहेवरल आस्पेक्ट होता है। व्यवहारिक पक्ष होता है। वो क्या होता है बच्चे का? बिहेवरल आस्पेक्ट होता है। यानी कि यह हमारा कौन सा हो जाएगा? व्यवहारिक पक्ष होगा। यह क्या होगा दोस्तों? हमारा व्यवहारिक पक्ष होगा। एंड बाद के जो चार हैं उसके अंदर क्या आता है? बच्चे के कॉग्निटिव पक्ष आते हैं। बाद के चार किस में आते हैं? कॉग्निटिव आस्पेक्ट में आते हैं। यानी कि वो हमारे संज्ञानात्मक पक्ष का हिस्सा है। कैसे मैम कुछ समझ में नहीं आया तो कोई बात नहीं दोस्तों समझा देंगे। इन्होंने कितने स्टेप बताई? आठ स्टेप। इन्होंने कहा कि बच्चे को तैयार करना होता है प्रॉब्लम सॉल्विंग तक। लर्निंग जो है

1:05:48 उसका मेन मकसद यह कि बच्चे ने जिस दिन कुछ सीख लिया। सीख लिया तो क्या होगा? सीखने के बाद में यह होगा कि उस बच्चे के अंदर अपनी अपने हिसाब से अपनी प्रॉब्लम को टैकल करने की जो क्षमता है वो प्रॉब्लम सॉल्विंग क्षमता डेवलप हो जाती है। ये हमारी लर्निंग होती है। तो ये कहते हैं कि लर्निंग एक प्रोडक्ट नहीं है। यह सीधा उत्पाद नहीं है। परिणाम नहीं है। ये एक प्रोसेस है। एक प्रक्रिया है। और उसी प्रोसेस तक जाने के लिए हमें एक-एक आगे से आगे क्या करना पड़ता है? बढ़ते जाना पड़ता है। आगे से आगे हमें क्या करना पड़ता है? बढ़ना पड़ता है। उसे हम क्या कहते हैं? लर्निंग की हरार्की थ्योरी कहते हैं। बिकॉज़ इन्होंने कुछ स्टेप हमें बताई थी। तो गैगने के अकॉर्डिंग अगर बात करें तो आठ स्टेप क्या थी? सबसे पहले इन्होंने कहा था सिग्नल लर्निंग। सबसे पहली हमारी क्या थी

1:06:35 दोस्तों? सिग्नल लर्निंग थी। सिग्नल लर्निंग का मतलब क्या है? कि हम यहां पर सिर्फ और सिर्फ संकेतक अधिगम कर रहे हैं। यहां पर क्या कर रहे हैं? हम संकेतक अधिगम कर रहे हैं। हमारे सामने कोई संकेत होता है, कोई सिग्नल मिलता है और उसके अकॉर्डिंग हम लर्निंग करते हैं। आपने नोटिस किया एक छोटा बच्चा खेल रहा था और खेलने के दौरान जैसे ही बाहर से बाइक की आवाज आती है वो तुरंत दौड़ता है। उसे यह लगता है यार आवाज आई हॉर्न की। पापा आ गए चॉकलेट लेके आए होंगे। वही होती है सिग्नल लर्निंग। स्कूल की घंटी बजते ही आप बैग उठा के दौड़ पड़ते थे कि वाओ छुट्टी हो गई। यह क्या था? आपकी सिग्नल लर्निंग थी। मॉर्निंग के बैल बजते आपको पता चल जाता था कि मॉर्निंग असेंबली के लिए बुलाया जा रहा है। तो आप लाइन बना करके खड़े हो जाते थे। वह क्या थी? सिग्नल

1:07:20 लर्निंग। मम्मी ने तीन बार काम बता दिया। आपने तीनों बार अनसुना कर दिया। चौथी बार मम्मी इतना ही बोलती है कि सुन रहा है। इतने में आप काम भी कर देते हो। ये क्या है? सिग्नल लर्निंग है। कि हमारे सामने एक सिग्नल होता है। हम उसके प्रति काम करते

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