सर, घर में इतने हादसे हो रहे हैं, क्या वास्तु दोष है? || आचार्य प्रशांत (2024)

संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में कई व्यक्तिगत और समाजिक मुद्दों पर चर्चा की गई है। वक्ता अपने परिवार में हुए दुखद हादसों का जिक्र करते हैं और कैसे समाज में वास्तु और पूजा-पाठ के माध्यम से समस्याओं का समाधान ढूँढने का दबाव होता है। इसके साथ ही, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, जीवन शैली के सही प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर दिया गया है।

  • अतीत के दर्दनाक अनुभवों का समझना आवश्यक है।
  • सही उपचार और निदान की महत्ता बताई गई है।

परिवार में हादसे और अतीत की चर्चा

वक्ता अपने घर में हुए हाल के हादसों का विवरण देते हैं, जैसे पिता का निधन और भाई द्वारा आत्महत्या। इसके बाद उनकी छोटी बहन का एक्सीडेंट हुआ, जिसके कारण लोग वास्तु दोष की बात करने लगे। एक पंडित ने अष्ट धातु का छल्ला और ताबीज देने की सलाह दी, जिससे वक्ता को समाज के दबाव का सामना करना पड़ा। इस स्थिति में वे अपने मन की स्थिति और उपायों के मध्य संघर्ष कर रहे हैं।

स्वास्थ्य और जीवनशैली के महत्व

वक्ता स्वास्थ्य के मुद्दों पर चर्चा करते हैं और बताते हैं कि भारत में कार्डिक डिजीज और सड़क दुर्घटनाओं के कारण मृत्यु दर उच्च है। वे सही खानपान और जीवनशैली का पालन करने की आवश्यकता को समझाते हैं। पिता की याद में वक्ता का मानना है कि स्वस्थ रहने से हम अपने प्रियजनों की याद में सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं।

गलत निदान और उपचार के खतरे

वक्ता ने चिकित्सा के गलत निदान और उसके खतरों पर जोर दिया। अगर किसी को डेंगू है तो उसे मलेरिया का इलाज दिया जाना बचाव के बजाय खतरे में डाल सकता है। गलत निदान और उपचार से होने वाले नतीजों के बारे में विस्तार से बताया गया है।

सड़क दुर्घटनाओं और सुरक्षा उपायों पर जोर

सड़क दुर्घटनाओं के कारण और सुरक्षा उपायों पर चर्चा की गई है। वक्ता ने बताया कि कैसे असावधानी और गलत सड़क प्रबंधन के कारण लोग अपनी जान गवा रहे हैं। सही सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य

व्यायाम और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर चर्चा करते हुए वक्ता ने बताया कि नियमित व्यायाम और अध्ययन से हम शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुधार सकते हैं। अच्छी जीवनशैली अपनाना और स्वास्थ्य की देखभाल करना बेहद आवश्यक है। वक्ता ने यह भी बताया कि जीवन को बेहतर बनाने के लिए ज्ञान और व्यायाम का महत्व अत्यधिक है।

आचार्य प्रशांत की ऐप और लाभ

वीडियो के अंत में वक्ता ने अपनी ऐप के बारे में जानकारी दी, जिसमें गीता और अन्य आध्यात्मिक सामग्री उपलब्ध है। यह ऐप उन लोगों के लिए है जो अपने जीवन में बदलाव लाना चाहते हैं और 2 लाख से अधिक प्रतिभागियों के साथ जुड़ने का आह्वान किया गया है।

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Transcript

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0:00 कुछ सालों पहले हमारे घर में कुछ हादसे हुए। अह पिताजी एक्सपायर हुए। फिर भाई ने फांसी लगा के आत्महत्या की और उसके बाद अभी मेरी छोटी बहन का एक्सीडेंट हुआ। तो आसपास के लोगों ने कहा कि मतलब आपका घर का वास्तु खराब है। कुछ पूजा पाठ करवाइए। तो कुछ लोगों के बताने पे मैं गया तो एक पंडित जी ने यह अष्ट धातु का छल्ला पहना [संगीत] दिया है। एक यह ताबीज बना के दिए हैं। कहे इसको आप अपने पास रखिए और रोज इसमें धूप दिखाइए तो आपका सब सही हो जाएगा। गलत उपचार [संगीत] कई बार अनपचारित रह जाने से भी अधिक घातक होता है। जो असली वजह है किसी भी दुर्घटना या आपदा के पीछे की उसका विश्लेषण बहुत आवश्यक होता है। अतीत में क्या हुआ [संगीत] उसको समझोगे

0:46 नहीं तो उससे मुक्त कैसे होगे? अतीत का जो नुकसान हुआ [संगीत] है उसको पलटा नहीं जा सकता। पर हम इतना कर सकते हैं कि मैंने भी अपने पिताजी को खोया है तो मैं आपकी व्यथा को थोड़ा बहुत समझ सकता हूं। [संगीत] नमस्ते आचार्य जी। दरअसल मैं आपको छ महीने से सुन रहा था सर। और अभी कुछ सालों पहले हमारे घर में कुछ हादसे हुए। पिताजी एक्सपायर हुए। फिर भाई ने फांसी लगा के आत्महत्या की और उसके बाद अभी 9 तारीख को मेरी छोटी बहन का एक्सीडेंट हुआ। तो आसपास के लोगों ने कहा

1:31 कि मतलब आपका घर का वास्तु खराब है और या तो आप यह घर बेच दीजिए या कुछ पूजा पाठ करवाइए। तो कुछ लोगों के बताने पर मैं गया तो एक पंडित जी ने यह अष्ट धातु का छल्ला पहना दिया है और रोज जो है एक यह ताबीज बना के दिए हैं। कहें इसको आप अपने पास रखिए और रोज इसमें धूप दिखाइए तो आपका सब सही हो जाएगा। तो अभी मैं आपको सुनकर बहुत बेचैन हूं। मतलब मुझे समझ में नहीं आ रहा मुझे करना क्या है। मैं समाज के हिसाब से चलूं या अपने हिसाब से चलूं या आपके हिसाब से चलूं। सबसे पहले तो सबकी संवेदना जो घर में दुखद

2:20 हादसे हुए हैं। अभी साल भर भी नहीं हुआ है। मैंने भी अपने पिताजी को खोया है तो मैं आपकी व्यथा को थोड़ा बहुत समझ सकता हूं। देखिए यह जो कुछ भी है अंगूठी ताबीज इसका आप जो भी करना चाहे करें। इसको आपको पहनना है पहने नहीं पहनना नहीं पहने। आप जानिए मैं उसमें क्यों कुछ मेरी इच्छा नहीं होती सर। मैं बचपन से ही मतलब यह पूजा पाठ इस तरह का मुझे अच्छा नहीं लगता है। मैं कभी नहीं पहना हूं। लेकिन यह केवल लोगों के प्रभाव की वजह से ऐसा करना पड़ रहा है। घटनाएं क्या हुई थी? एक तो थोड़ा दुर्घटना आपने बताई। जी। और

3:05 और एक भाई ने 2017 में फांसी लगाई थी डिप्रेशन की वजह से। और और 2015 में पिताजी हार्ट अटैक से 60 वर्ष की उम्र में। अच्छे स्वास्थ्य की जरूरत है हमको। भारत में यह जो दो कारण हैं, यह सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं मौतों के लिए। हम जानते हैं ना भारत में जितनी जाने सड़क पर जाती हैं विश्व में कहीं नहीं जाती और भारत में जितनी जाने हृदयाघात से जाती हैं वो भी कहीं और नहीं। तो उसका [गला साफ़ करने की आवाज़] समाधान अच्छी कार्डियक हेल्थ है। उसके

3:51 तरीके होते हैं और वह तरीके हमको आपको दोनों को ध्यान में रखने चाहिए और हमारे जो भी निकट के लोग हो उनको भी सबको बताने चाहिए। यह पिताजी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। आप भी अब कोई बच्चे नहीं हैं। आपकी भी उम्र बढ़ रही है। आपको भी अपने दिल का ख्याल रखना पड़ेगा। नहीं तो भारत में जैसा हमारा खानपान है हम हमारा जो पारंपरिक भोजन है ना वह हेल्दी नहीं है। यह जो भी हमारा पूरी पराठा यह सब कुछ है वो कोई बहुत अच्छा थोड़ी है और मांस का तो उतना ज्यादा नहीं लेकिन दूध का हम बहुत ज्यादा सेवन करते हैं। वो भी

4:37 स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है। दूध दूध से बने पदार्थ थोड़ा सा भी घर में जैसे ही समृद्धि आती है तो समोसा दही जलेबी समृद्धि का मतलब ही यही समझते हैं खाओ पियो हमारे यहां तो हम जिसको देखते हैं कि मोटा हो रहा है उसको हम कहते हैं अच्छा फल फूल रहा है कोई एकदम ही मोटा दिखाई दे तो उसको हम कह देते हैं कि खाते पीते घर से है तो खाते पीते घर से अगर मोटे हो गए हो तो फिर अब रवानगी भी होगी। तो जो असली कारण है उनकी ओर जाइए। बाकी अंगूठी वगैरह का आपको जो करना हो करें। मैं क्या टिप्पणी करूं उसमें आप खुद समझदार हैं। आप देख लीजिएगा। तो यह ख्याल सबको रखना होगा। हम और

5:27 विशेषकर अभी हम सबको ही वायरल इंफेक्शन हुआ है कोरोना काल में। उसके बाद से हमारी जो भीतरी व्यवस्था है कई लोगों की वह बिगड़ी हुई है। कोविड कोई हफ्ते दो हफ्ते की बात नहीं होती है। उससे पूरी तरह छुटकारा पाने में कई महीने लग जाते हैं। कई बार कई साल लग जाते हैं। लॉन्ग कोविड कहते हैं उसको। उसका दिल पर भी असर पड़ता है। तो और जरूरी है जिस तरह का प्रदूषण है और जिस तरह की बीमारियों से हम होकर गुजरे हैं और जैसी हमारी जीवन शैली है ये सब लाइफस्टाइल डिसऑर्डर्स होते हैं। है ना? जो कार्डियक डिजीजसेस हैं, हाइपरटेंशन है, डायबिटीज है। ये सब हमें

6:13 पता है क्या है? ये जैसी हम जीवन शैली रखते हैं उससे आते हैं। तो उसको ठीक रखिए। आज आप और किसी चीज में अपने आप को निविष्ट करें ना करें। तन का स्वास्थ्य और मन का स्वास्थ्य है। इन दोनों की तो आप उपेक्षा कर ही नहीं सकते। बहुत गंदी जलवायु है। हवा गंदी हो गई है। आप जो सब्जी खा रहे हो उसमें आपको नहीं पता क्या-क्या डला हुआ है। आप जो दूध पी रहे हो आपको पता भी है उसमें क्या-क्या है। हवा बुरी तरह जहरीली है। हम तो अभ्यस्त हो गए हैं। 300 500 एक्यूआई तो हमको लगता है कुछ है ही नहीं। जो बाहर से लोग आते हैं वो खांसते खांसते मर जाते हैं। उनको कहते हैं क्या है? बुखार आ जाता है। फेफड़े जाम

7:00 हो जाते हैं उनके। कहते हैं दिल्ली में रहने वाले आम आदमी की उम्र 10 से 15 साल कम हो चुकी है। सिर्फ हवा के कारण दूषित तो जो असली वजह है किसी भी दुर्घटना या आपदा के पीछे की उसका विश्लेषण बहुत आवश्यक होता है। अतीत में क्या हुआ उसको समझोगे नहीं तो उससे मुक्त कैसे होगे? सुनने में थोड़ा यह भयावह लगेगा। लेकिन हार्ट अटैक ने यह नहीं बोल रखा कि दोबारा नहीं आऊंगा। रोड एक्सीडेंट ने भी यह नहीं बोल रखा कि दोबारा नहीं आऊंगा। इसी तरीके से मनो रोगों ने भी यह नहीं बोल

7:47 रखा कि हम किसी और की जिंदगी नष्ट नहीं करेंगे। मन किसी के जीवन को तबाह ना कर दे। इसके लिए ही तो विज़डम चाहिए ना। उसी के लिए बोध साहित्य चाहिए। उसी से मन शांत और शीतल रहता है। नहीं तो मन में बहुत सारे उल्टे-पुलटे आत्मघाती विचार आते हैं। आत्महत्या की दर दुनिया भर में तेजी से बढ़ी है और भारत में भी प्रचंड है। आप भारत में हम बात करते हैं इसने इसको मार दिया। इसने उसको मार दिया। सबसे ज्यादा तो इंसान खुद को मार रहा है। आप भारत में आत्महत्याओं से मरने वालों की जो दुखद संख्या है उस पे गौर करिए। जिंदगी हमारी ऐसी हो गई है कि हम में से बहुत हमारे भाई बहन जीना ही नहीं चाहते।

8:34 वो कहते हैं ऐसे जीने से अच्छा है समाप्त ही कर लो। हम तो आप आप सड़क पर कैसे चल रहे हो? सड़क है कैसी? हमने किन लोगों के हाथों में सड़क दे दी है? अब तो भारत में सड़कें फिर भी बहुत बेहतर हो गई हैं। आप और पीछे जाइए कुछ दशक पहले तो सड़क देखकर पता चल जाता था कि यहां कम से कम मोटरसाइकिल वाले तो जरूर मरेंगे। हो ही नहीं सकता कि इस जगह पर आप जगह देख के बता सकते थे कि यहीं पर मरेंगे। एक बड़ा सा गड्ढा है सड़क में और उस गड्ढे के दूसरी तरफ खाई जैसा है। बहुत गहरी खाई नहीं चाहिए। तो उधर से जो गाड़ी आएगी वह उस बड़े गड्ढे

9:20 से बचने के लिए क्या करेगी? इधर को काटेगी। और इधर अगर कोई बाइक वाला है तो कहां गिरेगा? वह खाई में जाकर गिरेगा। वो देख के पता चलता था कि ये कस्टम मेड जगह है। यहां दोपहिया वाहन चालक की मौत होनी ही होनी है। खासकर अगर उसने हेलमेट नहीं डाल रखा तो। तो उन कारणों को दूर करिए। उन्हीं कारणों को दूर करने से हम वर्तमान को भविष्य को ठीक कर सकते हैं। अतीत का जो नुकसान हुआ है उसको पलटा नहीं जा सकता। पर हम इतना कर सकते हैं कि हम उससे कुछ सीख लें। हम बीमारी का अगर आप निदान ही डायग्नोसिस ही गलत कर दोगे तो फिर उपचार कैसा होगा?

10:07 और गलत डायग्नोसिस से बीमारी बहुत बुरी तरह बिगड़ जाती है। आपको हुआ है डेंगू और आपका डॉक्टर बोल दे आपको मलेरिया हुआ है। वो आपको एंटी मलेरियल ट्रीटमेंट पर डाल दे। आपका क्या होगा? बचोगे नहीं आप। एक में प्लेटलेट्स का देखना होता है। एक में कुछ और देखना होता है। जो नहीं देखना होता वो देखा जा रहे हो। देखना जा रहा है। वह गिर जाएगा। आप कहीं के नहीं बचोगे। समझ में आ रही है बात ये तो गलत निदान और तदुपरांत गलत उपचार कई बार अनपचारित रह जाने से भी अधिक घातक होता

10:54 है। जिसका उपचार ना हुआ हो वह तो फिर भी हो सकता है कि प्राकृतिक तौर पर बच जाए शायद क्योंकि शरीर स्वयं भी रोग से लड़ना चाहता है। कई बीमारियों को शरीर खुद ही हरा देता है। जिसको उपचार ना मिला वह बच सकता है। पर जिसको गलत उपचार मिल गया उसके बचने की संभावना बहुत कम हो जाती है। आपके जीवन में जो भी बीमारियां है चाहे शरीर की हो चाहे मन की हो। मेरी प्रार्थना है उन्हें गलत उपचार मत दीजिए। अगर सड़क दुर्घटना में कोई आहत हो रहा है या हत हो रहा है तो उसकी वजह यह नहीं है भाई कि आपके घर का दरवाजा अमुक दिशा को है या आपको घर का दरवाजा बदलवाना है बदलवा लो

11:41 मैं क्यों रोकूं आपको आपकी आपकी इच्छा है आप कर लीजिए लेकिन अपने वाहन पर ज्यादा ध्यान दीजिए हेलमेट पर ध्यान दीजिए सड़क पर ध्यान दीजिए वह ज्यादा जरूरी है जान वहां से बचेगी अभी कोहरे में दिल्ली में वही एक्सप्रेसवे एक व्यक्ति को एक गाड़ी ने मार दिया। अभी दो चार रोज पहले की बात है। एक व्यक्ति को गाड़ी ने मार दिया वो गिर गया। कोहरे में कुछ दिखाई नहीं दे रहा। उसके ऊपर से 100 गाड़ियां गुजर गई। एक के बाद एक उसकी लाश को फावड़े से सड़क से खरोच के निकालना पड़ा। इतनी दूर तक उसकी

12:29 लाश पपड़ी बनकर सड़क में चिपक गई। 100 गाड़ियां निकली उसके ऊपर से। पहली बात तो जीवन वैसे ही अप्रत्याशित और उस पे भी हम असावधानी बरतें तो फिर दुख नहीं मिलेगा तो क्या मिलेगा? मृत्यु की बात नहीं है। पर अगर मरना ही है तो हम कहेंगे कि हमें अर्जुन वाली मृत्यु दो ना। कि श्री कृष्ण के आदेश पर लड़ रहे थे। वहां हो सकता था कि कर्ण या कोई अर्जुन को वीरगति दे देता। हो सकता था।

13:16 वैसी मृत्यु मिले तो फिर भी ठीक है। पर अपनी असावधानी से बिना किसी उद्देश्य की मौत पाना तो जीवन का अपव्यय हो गया ना। बात समझ रहे हैं? बहुत सारा समय दिन में आरक्षित कर लीजिए। कम से कम घंटा घंटा भर इन दो कामों के लिए। पहला अध्ययन और दूसरा व्यायाम। रीडिंग और एक्सरसाइज इनके बिना अगर आपकी दिनचर्या है तो आप किसी भी तरीके से स्वस्थ इंसान तो नहीं हो सकते। जो सही साहित्य पढ़ नहीं रहा है वह मनोरोग

14:02 का शिकार होगा। और जो खेलता कूदता नहीं है या जिम नहीं जाता या दौड़ नहीं लगाता उसको किस-किस तरीके के शारीरिक रोग होंगे कोई उसकी सीमा नहीं है। और इतने हम आमतौर पर मजबूत होते नहीं कि शरीर हमारा गिरने लगे और फिर भी मन हमारा स्वस्थ रहे अडिग रहे। ऐसा नहीं होता। आपका शरीर गिरेगा आप शरीर के साथ गिर जाओगे। हम देह भाव के प्राणी हैं। शरीर को बचाओ। तन मन दोनों की रक्षा करिए। हम

14:48 इतना ही कहना है मुझे। नमस्ते। आपको खुशी होगी इस नाते जो हमारी अपनी ऐप है जिसमें हमारे गीता और बाकी सब कार्यक्रम चलते हैं। यहां पर बुद्ध हैं, गीता है, उपनिषद है, अष्टावक्र हैं। यह मुझे मिले मेरी जिंदगी बदली। यह तुम्हें मिलेंगे तुम्हारी जिंदगी भी बदलेगी। सच पूछिए तो मतलब लाखों नहीं तो कम से कम हजारों जिंदगियां तो हैं जो बिल्कुल बदली हैं। 2 लाख से अधिक गीता प्रतिभागियों के साथ जुड़े [संगीत] आचार्य प्रशांत ऐप पर। पहला महीना बिल्कुल फ्री गीता मिशन का पूरा एक्सेस ऐप पर आपको मिलेंगे नियमित लाइव सत्र हर दिन आचार्य प्रशांत के विशेष संवाद गीता कम्युनिटी का एक्सेस गीता परीक्षा चयनित समाचार ऑडियो बुक्स कोर्ट्स

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