0:00 हेलो दोस्तों, कभी सोचा है एक ऐसा पक्षी जो तूफान से डरता नहीं बल्कि उसी में अपनी उड़ान को और ऊंचा ले जाता है। एक ऐसा परिंदा जो बादलों के पार जाकर सूरज की सीधी रोशनी में आंखें डालकर उड़ता है। जबकि बाकी सारे पक्षी कहीं पेड़ों के पीछे छुपे होते हैं। वो कौन है? वो है ईगल यानी बाज। लेकिन आज हम किसी पक्षी की कहानी नहीं सुनने आए हैं। आज हम बात करेंगे उस सोच की। उस माइंडसेट की जिसने इतिहास में लाखों लोगों को ऊंचाई तक पहुंचाया है। द ईगल माइंडसेट जिंदगी में कभी ऐसा समय आया है जब सब कुछ बिखरता हुआ लगा हो। जब लगा हो कि शायद अब कुछ नहीं हो सकता। अब आगे
0:45 रास्ता नहीं बचा। जब लोग अंडरएस्टीमेट करते हैं, हंसते हैं और आप खुद भी अपने आप पर डाउट करने लगते हो। अगर हां तो यह कहानी सिर्फ आपके लिए है। ईगल कोई आम पक्षी नहीं है। यह धरती पर पैदा जरूर होता है लेकिन इसकी सोच आसमान की होती है। यह छोटी-छोटी चीजों में उलझता नहीं है। यह ऊपर उठता है। खुद को अलग करता है और वहां तक पहुंचता है जहां पहुंचने की हिम्मत बहुत कम में होती है। लेकिन क्या सिर्फ एक परिंदा ऐसा कर सकता है? नहीं। आप भी कर सकते हैं। आपके अंदर भी वही क्वालिटीज हैं। वही फोकस, वही क्लेरिटी, वही स्ट्रेंथ, वही पेशेंस। फर्क सिर्फ इतना है कि वह बांझ जानता है कि उसे क्या
1:31 चाहिए। और हम, हम कई बार अपनी ही ताकत को भूल जाते हैं। ईगल की सबसे इंस्पायरिंग क्वालिटी है उसका विज़। उसकी नजरें मीलों दूर तक देख सकती हैं। इमेजिन करिए अगर आपकी सोच भी इतनी साफ हो जाए तो क्या आप अपने गोल्स को पहले से नहीं देख पाएंगे? क्या आप डिस्ट्रैक्शन से खुद को बचा नहीं पाएंगे? लेकिन बात सिर्फ विज़न की नहीं है। बात है उस मौन तैयारी की, उस अकेलेपन की जो बाज खुद चुनता है। वह झुंड में नहीं उड़ता, भीड़ में नहीं चलता। वह अपनी दिशा खुद तय करता है और यही माइंडसेट उसे दूसरों से अलग बनाता है। सोचिए जब पूरी दुनिया कह रही हो कि तू नहीं कर सकता उस
2:16 वक्त आप अपने अंदर की आवाज से कहो मैं बाज हूं। मुझे तूफानों से डर नहीं लगता। घूस बम्स आते हैं ना। द ईगल माइंडसेट हमें सिखाता है कि कब चुप रहना है, कब वार करना है और कब खुद को बदल देना है। हां, बाज भी एक समय आता है जब अपने पुराने पंख, अपनी चोंच सब कुछ छोड़कर खुद को रिन्यू करता है। वो प्रोसेस पेनफुल होता है। अकेला होता है। लेकिन उसके बाद वह फिर से तैयार होता है। और भी ज्यादा पावरफुल और भी ज्यादा फोकस्ड। क्या आपने कभी अपने आप से यह पूछा है? क्या मैं भी बदल सकता हूं? क्या मैं भी फिर से उड़ सकता हूं? इस माइंडसेट की सबसे खास बात यह है कि यह हमें सिखाता है कि लीड कैसे किया जाता है।
3:02 खुद को भी और दूसरों को भी। बाज अपने जीवन में ना सिर्फ सर्वाइव करता है, वह थ्राइव करता है, वह फियर से नहीं फेथ से उड़ता है। आज हम एक ऐसी दुनिया में हैं जहां सब कुछ तेज है, नॉइजी है, डिस्ट्रैक्टिंग है। लेकिन एक ईगल की तरह अगर आप अपनी नजर लक्ष्य पर रखो तो चाहे कितना भी शोर हो, आप अपने गोल को अचीव कर सकते हो। ईगल माइंडसेट कहता है स्टॉप थिंकिंग लाइक अ पिजन स्टॉप फ्लाइंग लो। यू आर बोर्न टू फ्लाई हाई। आपके अंदर वह पोटेंशियल है जो आज सोया हुआ है। बस उसे जगाना है। इस किताब में हम उस माइंडसेट को अनलॉक करेंगे। उस पावर को समझेंगे और उस उड़ान की तैयारी करेंगे जो आपको वहां तक ले
3:47 जाएगी। जहां आप बिलोंग करते हैं। स्काई बियों्ड लिमिट्स। तो चलिए अब वक्त है सोच बदलने का। नजरिए को ऊंचा करने का और खुद से वह वादा करने का कि अब मैं अपनी उड़ान को कोई रोक नहीं सकता। चैप्टर वन राइज अबव द स्टॉर्म तूफान से ऊपर उठो। क्या आपने कभी सोचा है? तूफान जब आता है तो बाकी सारे पक्षी क्या करते हैं? वो डर कर किसी कोने में छुप जाते हैं पेड़ों की ओठ में, किसी सुरक्षित जगह पर। लेकिन एक पक्षी ऐसा है जो उस तूफान से डरता नहीं है बल्कि उसी तूफान को अपॉर्चुनिटी की तरह देखता है। वह है ईगल। जब बादल गिरते हैं, हवाएं तेज होती हैं, बिजली कड़कती है, तब बाज एक अलग
4:34 ही खेल खेलता है। वह अपने पंख फैलाता है और उस तूफान के सहारे खुद को और ऊंचाई तक ले जाता है क्योंकि वह जानता है तूफान उसकी उड़ान को रोकने नहीं आया है। वो आया है उसकी उड़ान को तेज करने। अब जरा अपनी जिंदगी की तरफ देखो। क्या तूफान सिर्फ आसमान में आते हैं? नहीं। हमारे जीवन में भी तूफान आते हैं। फेलियर्स, हार्ट ब्रेक्स, बिट्रेयल, क्रिटिसिज्म और कभी-कभी तो खुद पर से विश्वास उठ जाना। उस वक्त लगता है जैसे सब कुछ खत्म हो गया हो। रास्ता दिखता ही नहीं। लेकिन एक सवाल पूछना खुद से क्या यह तूफान तुम्हें तोड़ने आए हैं? या यह तुम्हें उड़ना सिखाने आए हैं? बाज कभी कंप्लेन नहीं करता। वो ब्लेम नहीं करता। वो एक्सक्यूज
5:21 नहीं ढूंढता। क्योंकि उसे मालूम है अगर उड़ना है तो तूफानों को फेस करना ही पड़ेगा। हमारी सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह नहीं है कि तूफान आता है। हमारी सबसे बड़ी प्रॉब्लम यह है कि हम सोचते हैं बस मेरे साथ ही क्यों? लेकिन जिस दिन आप यह सोच बदल देंगे और कहेंगे मेरे साथ ही क्यों नहीं उसी दिन आपकी उड़ान शुरू हो जाएगी। ईगल माइंडसेट का पहला रूल यही है। फेस द स्टॉर्म। डोंट एस्केप इट। क्योंकि तूफान से भागने वाले जमीन से चिपके रह जाते हैं और तूफान से टकराने वाले आसमान को छूते हैं। हर तूफान के दो चेहरे होते हैं। एक जो डर दिखाता है और दूसरा जो उड़ान देता है। आपकी जीत इस बात पर निर्भर करती है कि
6:08 आप किस चेहरे को देखना चुनते हैं। बाज इसलिए ऊंचाई पर पहुंचता है क्योंकि वह टर्बुलेंस से घबराता नहीं। वो जानता है कि स्टेबिलिटी कभी हवा में नहीं मिलती। उसे तो खुद क्रिएट करना पड़ता है और वह भी केओस के बीच। अब सोचिए अगर ईगल जैसे एक परिंदे में इतनी हिम्मत हो सकती है तो फिर आप क्यों नहीं? आप में भी वही ताकत है। बस फर्क इतना है कि बाज को खुद पर यकीन होता है। जब तक आप अपने अंदर के डर को पकड़ कर बैठे रहेंगे तब तक आप अपने सपनों की ऊंचाई तक नहीं पहुंच सकते। कभी-कभी डर के बीच से ही करज निकलता है और उस करेज को जगाना ही इस माइंडसेट की शुरुआत है। राइज अबव द स्टर्म कोई पोएट्री नहीं है। यह एक एक्शन है। एक डिसीजन है। एक वादा है खुद से कि
6:55 चाहे हालात जैसे भी हो मैं गिरूंगा नहीं। मैं उडूंगा। और याद रखना तूफान सिर्फ बहादुरों की परीक्षा नहीं लेता। वह उन्हें निखारता भी है और जो इस अग्नि परीक्षा से गुजर जाते हैं वही बनते हैं लेजेंड्स। तो अब फैसला आपका है। छुपकर जीना है या तूफानों से लड़कर आसमान को छूना है। द ईगल माइंडसेट की शुरुआत वहीं से होती है जहां डर खत्म होता है और उड़ान शुरू होती है। चैप्टर टू ईगल विज़ स्पष्टता और फोकस की शक्ति एक कहानी है। पहाड़ों के बीच बसे एक गांव में एक बुजुर्ग था। जो लोगों से अक्सर एक सवाल पूछा करता था। अगर मैं तुम्हारी आंखों के सामने एक बड़ा सा पत्थर रख दूं और उसके पीछे एक खजाना छुपा हो तो
7:43 क्या तुम उसे देख पाओगे? लोग सोचते मुस्कुराते और कहते नहीं। जब तक पत्थर हटेगा नहीं खजाना नहीं दिखेगा। वो बूढ़ा धीरे से कहता ठीक इसी तरह जब तक तुम्हारी सोच पर भ्रम डर और फालतू बातें हावी रहेंगी। तब तक तुम्हें अपनी असली मंजिल कभी नजर नहीं आएगी। ठीक इसी तरह ईगल की नजरें बाकी पक्षियों से अलग होती हैं। उसकी दृष्टि में एक क्लेरिटी होती है। एक फोकस होता है। वो मीलों दूर अपने शिकार को देखकर भी रास्ता नहीं बदलता। वो वहीं तक जाता है जहां उसका लक्ष्य है। अब सवाल यह है क्या हमारी जिंदगी में ऐसा फोकस है? हम रोजाना कितनी डायरेक्शंस में बढ़ते हैं? कभी किसी की बातों से हर्ट हो जाते हैं।
8:30 कभी सोशल मीडिया के शोर में खुद को खो देते हैं। कभी छोटे-छोटे डिस्ट्रैक्शंस हमें हमारे गोल से भटका देते हैं। और फिर हम सोचते हैं मैं कोशिश तो कर रहा हूं पर कुछ हो क्यों नहीं रहा? सच यह है। हमारी कोशिशें बिखरी हुई होती हैं और नजर धुंधली। ईगल की तरह अगर हमें भी क्लेरिटी चाहिए तो सबसे पहले जरूरी है खुद से यह पूछना कि हमारी नजर क्या देख रही है? मंजिल या बस रास्ते की धूल। एक ईगल अपने शिकार पर फोकस करता है ना कि बाकी उड़ते हुए कीड़ों पर। वो डिस्ट्रैक्शन से दूर रहता है। क्योंकि उसे पता है कि एनर्जी वहां लगानी है जहां रिजल्ट मिलेगा। कभी आपने खुद को गौर से देखा है? जब आप एक्साइटेड होते हैं,
9:18 इंस्पायर्ड होते हैं, तो आपकी आंखों में स्पार्क होता है। लेकिन जब आप कंफ्यूज्ड होते हैं, डायरेक्शनलेस होते हैं, तो वही आंखें थकी हुई लगती हैं। क्यों? क्योंकि विज़ सिर्फ देखना नहीं होता। विज़ होता है सपनों को आंखों में सजाकर जीना। हर दिन उन्हें हकीकत में बदलने की जिद रखना। ईगल माइंडसेट का दूसरा रूल कहता है सी बियों्ड द नॉइज़। फोकस ऑन द गोल। बाज को फर्क नहीं पड़ता आसमान में कितनी चिड़िया चहचहा रही हैं। वह अपने रास्ते पर टिके रहता है। वह जानता है कि क्लेरिटी तब आती है जब माइंड साइलेंट होता है और हार्ट लाउड। आज की दुनिया में सबसे बड़ी लग्जरी कोई कार, कोई घर या पैसा नहीं है। सबसे बड़ी लग्जरी है
10:03 क्लेरिटी। अगर आपके पास यह है तो आप सब कुछ हासिल कर सकते हैं। तो कैसे पाई यह ईगल विज़? शुरुआत होती है साइलेंस से। अपने आप को रोज थोड़ी देर के लिए नॉइस से डिस्कनेक्ट करो। बैठो सोचो और अपने अंदर की आवाज सुनो। वो आवाज जो कहती है तू इससे भी बड़ा सोच सकता है। दूसरा स्टेप है अपने गोल्स को क्रिस्टल क्लियर बनाना। वेग ड्रीम्स वेग रिजल्ट्स देते हैं। लेकिन एक शार्प गोल लेजर की तरह कट करता है हर डिस्ट्रैक्शन को। और तीसरा इलिमिनेट दी अननेसेसरी। हर वह चीज जो आपको आपके गोल से दूर कर रही है। चाहे वह टॉक्सिक लोग हो, बेमतलब की हैबिट्स हो या अंदर बैठी खुद की इनसिक्योरिटी उन्हें हटाओ। ईगल तब तक
10:50 शिकार नहीं करता जब तक वह 100% शोर ना हो जाए। उसका पेशेंस, उसका साइलेंस, उसका फोकस सब कुछ उसकी विज़ को सर्व करता है। और अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी जिंदगी में रिजल्ट्स साफ दिखे तो सबसे पहले अपनी विज़न को साफ करना पड़ेगा। कभी-कभी क्लेरिटी पाने के लिए जरूरी होता है खुद को भी सवालों के घेरे में लाना। क्या मैं सही डायरेक्शन में जा रहा हूं? क्या मैं उस चीज को पर्स्यू कर रहा हूं जिसे मैं वाकई चाहता हूं या मैं बस भीड़ के साथ बह रहा हूं? क्योंकि ध्यान रखना विजन के बिना उड़ान सिर्फ भटकाव है और विजन के साथ उड़ान इतिहास बनाती है। अब फैसला आपका है धुंध में उड़ना है या बाज की तरह साफ नजरों से अपनी मंजिल को देखना है। चैप्टर
11:38 टू यही कहता है देखो वही जहां जाना है। सोचो वही जो पाना है और बनो वही जो तुम बनने के लिए पैदा हुए हो। चैप्टर थ्री सो विद पर्पस अपने जीवन का असली मकसद पहचानो। कभी आपने सोचा है बाज इतना ऊंचा क्यों उड़ता है? क्या सिर्फ इसलिए कि उसके पंख बड़े हैं या इसीलिए कि वह बाकी पक्षियों से तेज है? नहीं। वो ऊंचा इसलिए उड़ता है क्योंकि वह जानता है कि उसे कहां जाना है। उसकी उड़ान में डायरेक्शन है। उसकी उड़ान में पर्पस है। अब एक पल के लिए खुद से पूछिए। क्या मेरी उड़ान में भी वह डायरेक्शन है? क्या मैं वाकई जानता हूं कि मैं क्यों जी रहा हूं? या फिर मैं बस सुबह
12:24 उठता हूं, दिन भर भागता हूं और रात को थक कर सो जाता हूं। बिना यह समझे कि आखिर इस सब का मकसद क्या है? यही तो फर्क है एक कॉमन लाइफ और एक पर्पसफुल लाइफ में। बाज जब उड़ता है तो हवा में सिर्फ उड़ने के लिए नहीं उड़ता। वो उड़ता है किसी मकसद के लिए। उसका हर फ्लैप, हर टर्न, हर उठाव एक मिशन के साथ होता है। और इंसानों के लिए भी असली शांति तभी मिलती है जब हमारी हर सुबह एक रीजन के साथ शुरू हो। लेकिन सच बताऊं आज की दुनिया में सबसे ज्यादा लोग सिर्फ सर्वाइव कर रहे हैं। ट्रूली लिव नहीं कर रहे। क्यों? क्योंकि उन्हें उनका पर्पज ही नहीं पता। स्कूल, कॉलेज, जॉब, ईएमआई, वीकेंड, सोशल मीडिया यही बन गया है
13:10 आज का सर्कल। और उस सर्कल में घूमते-घूमते हम अपने अंदर की वह आवाज खो चुके हैं जो कहती थी मैं कुछ बड़ा करूंगा। लेकिन एक सवाल क्या वो आवाज आज भी अंदर कहीं धीमी सी बची हुई है? शायद हां क्योंकि अगर वह आवाज पूरी तरह से मर चुकी होती तो आप यह सुन ही नहीं रहे होते। आप अब तक चैन से सो रहे होते लेकिन नहीं। आप जागे हुए हैं। अंदर कुछ खटक रहा है, कुछ पूछ रहा है। क्या यही मेरी जिंदगी है? क्या मेरा कोई असली मकसद नहीं है? और वहीं से शुरुआत होती है द ईगल माइंडसेट की तीसरी उड़ान की। पर्पस की उड़ान। बाज कभी भी भटकता नहीं है। वो जानता है कि वह किस शिकार की तलाश में है और वह सिर्फ उसी के पीछे जाता
13:57 है। उसकी क्लेरिटी उसके पर्पस से आती है और इंसान का भी मकसद सिर्फ जीना नहीं होता। इंसान का असली मकसद होता है खुद को जानना और फिर खुद को गढ़ना। जब आप पर्पस के साथ उड़ते हो तो हवा आपको नहीं उड़ाती। आप हवा को मोड़ देते हो। सोचिए जब कोई इंसान अपने क्यों को पहचान लेता है। व्हाई एम आई डूइंग दिस? तब उसके अंदर एक अग्नि जलती है जो हर हार को हिम्मत में बदल देती है। पर्पस वह फ्यूल है जो बिना थके बिना रुके आपकी उड़ान को चालू रखता है। अब सवाल यह है मेरा पर्पस क्या है? और इसका जवाब बाहर नहीं आपके अंदर है। वह चीज जो आपको एक्साइटमेंट देती है। वह काम जिसे करते वक्त आप समय भूल जाते हो। वो दर्द जो आपको
14:45 सताता है और जिसे आप ठीक करना चाहते हो। वह सपना जो बचपन से आपकी आंखों में पल रहा है वही तो है आपका पर्पस। बाज अपनी उड़ान के लिए अप्रूवल नहीं मांगता। वो उड़ता है क्योंकि उड़ना उसका स्वभाव है। और अगर आपके अंदर भी कोई ड्रीम, कोई विज़न, कोई आवाज बार-बार दस्तक दे रही है तो यकीन मानिए वह यूं ही नहीं है। पपस कोई प्लान नहीं होता। पपस एक कॉलिंग होती है जिसे सुना जाता है और फिर जिया जाता है और जब आपकी उड़ान पपस से जुड़ जाती है तो फिर थकान भी इंस्पायरिंग लगती है और फेलियर्स भी लर्निंग। द ईगल माइंडसेट हमें यही सिखाता है कि हमारी उड़ान रैंडम नहीं होनी चाहिए। हमें पता होना चाहिए कि हम कहां जा
15:31 रहे हैं और क्यों जा रहे हैं। क्योंकि एक मंजिल के बिना उड़ान सिर्फ भटकाव है। लेकिन जब उड़ान में मकसद जुड़ जाता है तो फिर आसमान भी छोटा लगने लगता है। तो आज से तय कीजिए मैं बस उड़ने के लिए नहीं उड़ूंगा। मैं उस ऊंचाई तक जाऊंगा जहां मेरा मकसद मुझे ले जाना चाहता है। क्योंकि जब आप पर्पस के साथ सोर करते हो तो आप सिर्फ उड़ते नहीं। आप इतिहास बनाते हो। चैप्टर छोड़ हंट विद प्रसीजन सटीकता से शिकार अनुशासन और रणनीति की कला अक्सर लोग सोचते हैं बाज ऊंचाई पर उड़ता है इसलिए ताकतवर है लेकिन वह असली ताकत उसकी ऊंचाई में नहीं उसकी स्ट्रेटजी में है क्योंकि ऊंचाई तो कई पक्षी पा लेते हैं लेकिन शिकार केवल बाज करता है और वह भी सटीक
16:19 बिना चूके बिना फिजूल ताकत लगाए अब जरा सोचिए क्या आपकी जिंदगी की मेहनत भी उतनी ही सटीक ठीक है या आप बस भाग रहे हैं बिना दिशा बिना रणनीति बिना किसी डिसिप्लिन के बाज जब शिकार करता है तो वह पहले ऑब्जर्व करता है वो घंटों तक हवा में मंडराता है अपनी एनर्जी बचाता है वो हर एक मूवमेंट को डिटेक्ट करता है और जब सही वक्त आता है तब वह एक ही झपट्टे में सब कुछ खत्म कर देता है सिर्फ एक बार लेकिन वह वॉर होता है परफेक्ट अब सोचिए हमारी जिंदगी में भी ऐसे ही कितने मौके आते हैं जब हमें धैर्य करियर रखना चाहिए था। प्लानिंग करनी चाहिए थी। लेकिन हमने जल्दबाजी में फैसला लिया और सब हाथ से निकल गया। ईगल माइंडसेट का
17:04 चौथा मूल मंत्र है डोंट चस एवरीथिंग। चस व्हाट मैटर्स एंड चस इट लाइक फायर। दिक्कत यह है कि आज हम सब कुछ करना चाहते हैं। हर ओपोरर्चुनिटी, हर शाइनी डिस्ट्रैक्शन, हर ट्रेंड को पकड़ना चाहते हैं। लेकिन बाज की तरह सोचिए क्या वह हर उड़ते हुए कीड़े को पकड़ने की कोशिश करता है? नहीं। वो बस उस शिकार को पकड़ता है जिसकी कीमत है। और यही फर्क लाता है। चुनिंदा फोकस, शुद्ध डिसिप्लिन और शार्प एग्जीक्यूशन। आप हर दिन 12 14 घंटे काम कर सकते हैं। लेकिन अगर उस काम में स्ट्रेटजी नहीं है तो वह केवल भागदौड़ है। प्रोग्रेस नहीं। ईगल हमें सिखाता है। कम उड़ो लेकिन सही उड़ो
17:49 कम करो लेकिन इंपैक्टफुली करो। कम वॉर करो लेकिन सफल वॉर करो। डिसिप्लिन उसका वेपन है। जब बाकी पक्षी चिल्ला रहे होते हैं। वह चुपचाप इंतजार कर रहा होता है। जब सब डर रहे होते हैं, वह कैलकुलेटेड उड़ान भर रहा होता है। और जब सही वक्त आता है, तब बाज लाइटनिंग की तरह वार करता है। आपकी जिंदगी में भी यही प्रसीजन चाहिए। हर दिन सुबह उठो और खुद से एक सवाल पूछो। क्या मैं आज कुछ ऐसा कर रहा हूं जो मुझे मेरे लक्ष्य के करीब ले जा रहा है? या बस रूटीन में उलझकर टाइम पास कर रहा हूं। स्ट्रेटजी का मतलब सिर्फ प्लान बनाना नहीं है। स्ट्रेटजी का मतलब है हर एक्शन का रीजन जानना। हर मोमेंट का हिसाब रखना। हर
18:36 एनर्जी को सही दिशा में लगाना। और डिसिप्लिन का मतलब है वह काम करना। जब करने का मन ना हो क्योंकि आपको पता है यही करना जरूरी है। ईगल की तरह आपको भी अपनी इंस्टिंक्ट शार्पन करनी होगी। जब रेस्ट ऑफ द वर्ल्ड सेलिब्रेट कर रहा हो। हो सकता है आपको प्लानिंग करनी पड़े। जब बाकी लोग पार्टी कर रहे हो, आपको प्रैक्टिस करनी पड़े क्योंकि जब वही लोग गिरेंगे, आप उड़ रहे होंगे क्योंकि आपने सटीक तैयारी की थी। याद रखिए जिंदगी एक जंगल है और इसमें जीत उसी की होती है जो शिकार की टाइमिंग, टेक्निक और टारगेट में मास्टर होता है। बाज की तरह सोचो। हर दिन तैयारी करो। हर डिस्ट्रैक्शन से खुद को दूर रखो। हर
19:22 ओपोरर्चुनिटी को इवैल्यूएट करो और फिर जब वकत आए तो एक ही बार में सब जीत लो क्योंकि बाज कभी मल्टीपल अटेम्प्ट्स नहीं करता वो सिर्फ एक वार करता है लेकिन वो वॉर लेजेंडरी होता है। चैप्टर फाइव फ्लाई सोलो अकेले उड़ना। आत्मनिर्भरता और अंदरूनी ताकत की असली पहचान क्या आपने कभी किसी बाज को झुंड में उड़ते देखा है? नहीं ना? क्योंकि बाज कभी झुंड में नहीं उड़ता। वह अकेला उड़ता है। सन्नाटा उसका कंफर्ट है। आकाश उसका रास्ता है और अकेलापन उसकी शक्ति। लेकिन आज हम इंसान अकेले होने से डरते हैं। हमें हर वक्त किसी का साथ चाहिए, अप्रूवल चाहिए, वैलिडेशन चाहिए। चाहे सोशल मीडिया से हो, सोसाइटी से हो या
20:09 किसी रिश्ते से? पर क्या कभी आपने सोचा है? सबसे बड़ी ग्रोथ कब होती है? जब शोर बंद होता है, जब भीड़ छूटती है और जब आप पहली बार अपनी असली आवाज सुनते हैं, बाज जब अकेला उड़ता है, तो उसे कोई गाइड नहीं करता, कोई अप्लॉज़ नहीं देता, कोई वेल डन नहीं कहता लेकिन वह फिर भी उड़ता है। क्योंकि उसे खुद पर यकीन होता है। इनर स्ट्रेंथ वही होती है जो अप्लॉज़ के बिना भी काम करना जानती है। और यही वो माइंडसेट है जो बाज को बाकी पक्षियों से अलग बनाता है। आज हमारी सबसे बड़ी कमजोरी यह नहीं कि हम हारते हैं बल्कि यह है कि हम खुद के साथ बैठ नहीं सकते। हम अकेले रहते हुए बेचैन हो जाते हैं क्योंकि हमने कभी खुद
20:55 को समझा ही नहीं। लेकिन बाज जब तूफान आता है तो वह नीचे छिपता नहीं। वो और ऊपर उड़ता है। क्यों? क्योंकि उसे मालूम है अकेलेपन में डर नहीं होता। डायरेक्शन होती है। हर वह इंसान जिसने जिंदगी में कुछ बड़ा किया है। उसने किसी ना किसी मोड़ पर अकेले चलना सीखा है। कोई साथ नहीं था। कोई समझने वाला नहीं था। कोई चीयर करने वाला नहीं था। लेकिन फिर भी वह चला क्योंकि उसने खुद को चुना, खुद को समझा, खुद पर भरोसा किया। ईगल माइंडसेट का यह अध्याय हमें बताता है कि इंडिपेंडेंस सिर्फ अकेले डिसीजन लेना नहीं है। इंडिपेंडेंस है इमोशनल रिलायंस। जब आप यह कह सको कि मुझे किसी की जरूरत नहीं कि वह मुझे बताएं मैं
21:41 अच्छा हूं या नहीं। मुझे किसी की वैलिडेशन नहीं चाहिए कि मैं काबिल हूं या नहीं। मैं जानता हूं मैं क्या हूं और मैं जानता हूं मैं कहां जा रहा हूं। तब आप वाकई आजाद होते हो। बाज को फर्क नहीं पड़ता कि बाकी पक्षी क्या सोचते हैं। वह हर उड़ान अपने अंदाज में भरता है और अगर रास्ता तूफानी हो तो और ऊंचा उड़ता है। उसकी ताकत उसके अकेलेपन में है। उसका साइलेंस उसकी शक्ति है और आपको भी समझना होगा भीड़ आपको अपलोड कर सकती है लेकिन भीड़ आपको ऊपर नहीं ले जा सकती क्योंकि यह रास्ता यह इनर जर्नी अकेले ही तय करनी होती है। बाज जब उड़ता है तो वह खुद अपने डायरेक्शन का मास्टर होता है। उसे किसी जीपीएस की जरूरत नहीं
22:28 होती। किसी फॉलोअ की जरूरत नहीं होती और ना ही किसी लाइक या कमेंट की। उसकी उड़ान, उसकी कहानी होती है और यही सबसे प्यूरेस्ट फॉर्म होती है स्ट्रेंथ की। आज अगर आप खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं तो यह मत सोचिए कि आप कमजोर हो। यह सोचिए कि शायद यही वह वक्त है जब आप खुद से जुड़ सकते हैं। क्योंकि जो इंसान खुद के साथ बैठना सीख जाता है, वह दुनिया की किसी भी भीड़ को संभाल सकता है। द ईगल माइंडसेट यही कहता है जो अकेले उड़ना सीख लेता है, वह कभी किसी के नीचे नहीं झुकता। वह अपने पैरों पर चलता है, अपने पंखों से उड़ता है और अपनी किस्मत खुद बनाता है। तो आज से यह तय
23:13 करिए अगर रास्ता अकेला भी हो तो डरना नहीं है क्योंकि शायद वही रास्ता आपको सबसे ऊंचाई तक ले जाए। चैप्टर सिक्स राइज अगेन गिर कर फिर उठना। असफलताओं को अपनी ताकत बनाना। क्या आप कभी गिरे हैं? ऐसे गिरे हो कि लगा हो अब कुछ नहीं बचा। जैसे जिंदगी ने हर चीज छीन ली हो। जैसे अब दोबारा उठ पाना नामुमकिन सा हो। अगर हां तो यकीन मानिए आप अकेले नहीं हैं। हर उस इंसान ने जो आज आसमान की ऊंचाइयों पर है। कभी ना कभी जमीन पर औंधे मुंह गिरा था। और बाज वह भी कोई अपवाद नहीं है। बहुत कम लोग जानते हैं। लेकिन बाज की जिंदगी में एक ऐसा मोड़
23:59 आता है जहां उसे दो चॉइससेस मिलती हैं। या तो वह धीरे-धीरे मर जाए या फिर एक दर्दनाक ट्रांसफॉर्मेशन से गुजर कर खुद को दोबारा पैदा करे। बांस जब लगभग 40 साल का होता है तो उसकी चोंच मुड़ जाती है। पंजे कमजोर हो जाते हैं और पंख इतने भारी हो जाते हैं कि वह ठीक से उड़ भी नहीं पाता। अब उसके सामने सिर्फ एक रास्ता होता है। पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर जाकर खुद को तोड़ना। वह अपनी ही चोंच से चट्टान पर तब तक मारता है जब तक वो टूट नहीं जाती। फिर वह टूटी हुई चोंच से अपने पंजे निकालता है और जब नई चोंच नए पंजे उगाते हैं तो वह अपने भारी पंखों को भी नोच कर गिरा देता है। पूरा प्रोसेस दर्दनाक होता है लेकिन उसी दर्द
24:46 से वह दोबारा पैदा होता है और फिर वह नए पंखों के साथ नई ताकत के साथ फिर से उड़ता है। अब सोचिए अगर एक पक्षी यह कर सकता है तो आप क्यों नहीं आपकी हारें आपकी तकलीफें वह असफलताएं वह आपकी कहानी का अंत नहीं है। वह तो बस पॉज हैं ताकि आप ब्रीथ कर सकें। खुद को देखें और तय करें। क्या मैं टूट कर बिखर जाऊंगा या टूट कर फिर से बनूंगा? जिंदगी में हार होना बुरी बात नहीं है। बुरी बात यह है कि हार के बाद हम खुद को कमजोर मान लेते हैं। पर द ईगल माइंडसेट हमें सिखाता है कि हर गिरावट एक आने वाली उड़ान की शुरुआत होती है। गिरना कोई पाप नहीं है। पर वहीं पड़े रहना वह
25:33 आपकी चॉइस है। हम सबकी जिंदगी में ऐसे पल आते हैं जब दोस्त छोड़ देते हैं, रिश्ते टूट जाते हैं, सपने बिखर जाते हैं। लेकिन यहीं पर कुछ लोग रुक जाते हैं और कुछ लोग राइज अगेन करते हैं। राइज अगेन का मतलब सिर्फ फिर से कोशिश करना नहीं है। इसका मतलब है अपने घावों से ताकत निकालना। अपने आंसुओं से अग्नि जलाना और अपनी असफलता को अपनी सबसे बड़ी जीत में बदल देना। जो इंसान सिर्फ तभी चलता है जब सब कुछ ठीक हो वह दूर नहीं जा पाता। लेकिन जो इंसान तब भी चलता है जब सब टूट चुका हो। वही इतिहास रचता है। बाज अगर पुरानी चोंच के साथ रहना चुन लेता तो वह धीरे-धीरे मर जाता। लेकिन
26:18 उसने दर्द को चुना ताकि वह दोबारा जी सके। आप भी अगर गिर गए हैं तो मत घबराइए क्योंकि शायद यही वक्त है खुद को नया रूप देने का। पुराने डर, पुराने दर्द, पुराने बहाने सबको उतार फेंकने का। क्योंकि जब एक इंसान टूट कर खुद को फिर से जोड़ता है तो वह पहले से कहीं ज्यादा ताकतवर बनता है। आपका कमबैक आपके सेटबैक से कहीं बड़ा हो सकता है। अगर आप ईगल की तरह सोें। द ईगल माइंडसेट यही सिखाता है। तू गिरा है तो क्या हुआ? उठ और बता इस दुनिया को कि तू टूटा नहीं है। तू दोबारा बना है और इस बार तू उड़ने नहीं आसमान को बदलने आया है। तो दोस्तों अब जब हमने द ईगल माइंडसेट की यह
27:05 पूरी उड़ान पूरी कर ली है तो एक सवाल खुद से जरूर पूछिए। क्या मैं भी एक बाज की तरह सोचता हूं या अब तक भीड़ का हिस्सा बनकर ही उड़ रहा हूं? क्योंकि बाज बनना सिर्फ ऊंचाई पाने का नाम नहीं है। यह एक सोच है। एक अलग दृष्टिकोण है। एक ऐसी शक्ति है जो आपको इस दुनिया की भीड़ से अलग खड़ा करती है। बाज डर से नहीं भागता। वह उसका सामना करता है। वह हर तूफान का इस्तेमाल उड़ने के लिए करता है। वह फालतू शोर में नहीं अपनी खामोशी में तैयारी करता है। और जब वॉर करता है तो दुनिया देखती रह जाती है। अब यह आपकी बारी है। आप भी उस माइंडसेट को अपनाइए जो आपकी कमजोरियों को ताकत में बदल दे जो असफलता में भी संभावनाएं देख सके और
27:52 जो इस दुनिया को बता सके कि आई डोंट जस्ट सर्वाइव आई सो। और अगर आपको इस वीडियो ने थोड़ी सी भी हिम्मत दी हो, अगर आपकी सोच में थोड़ी सी भी आग लगाई हो, तो दिल से एक बात कहूंगा। इस चैनल को सब्सक्राइब जरूर कीजिए। यहां हम किताबों की सिर्फ समरीज नहीं करते। यहां हम सोच बदलते हैं। माइंडसेट बनाते हैं और आपको हर बार एक नए विज़ के साथ जोड़ते हैं। बुक पीडिया सिर्फ एक चैनल नहीं यह एक मिशन है जहां नॉलेज सिर्फ इंफॉर्मेशन नहीं देती बल्कि ट्रांसफॉर्मेशन लाती है। तो मिलते हैं अगले वीडियो में एक नई किताब, एक नई सोच और एक नई उड़ान के साथ। धन्यवाद।