215 | GURUVACHAN | Endometriosis and Adenomyosis 3 | VD.SAMEER JAMADAGNI SIR

संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में एंडोमेट्रोसिस और एडिनोमासिस के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई है, जिसमें इसके कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक उपचार पर ध्यान केंद्रित किया गया है। वीडियो में बताया गया है कि आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद दोनों दृष्टिकोणों को समझना महत्वपूर्ण है।

  • एंडोमेट्रोसिस के कारणों का अवलोकन
  • आयुर्वेदिक उपचार के उपाय

एंडोमेट्रोसिस और एडिनोमासिस के बारे में

वीडियो की शुरुआत में एंडोमेट्रोसिस और एडिनोमासिस के बारे में चर्चा की गई है। इसमें पैथोफिजियोलॉजी और इसके आयुर्वेदिक दृष्टिकोण पर भी प्रकाश डाला गया है। आधुनिक चिकित्सा के सिद्धांतों के साथ आयुर्वेद का दृष्टिकोण भी महत्वपूर्ण है।

कारण का विश्लेषण

इस भाग में एंडोमेट्रोसिस के कारणों का विश्लेषण किया गया है। कुछ सामान्य कारण जैसे शराब का सेवन और धूम्रपान शामिल हैं, जो महिलाओं में इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

मध्यपान और धूम्रपान के प्रभाव

डॉक्टर ने बताया कि आजकल महिलाओं के बीच शराब और धूम्रपान की आदतें बढ़ रही हैं। डॉक्टर ने कहा कि यह आदतें रक्त और पित्त के विकार पैदा कर सकती हैं जो एंडोमेट्रोसिस के लक्षणों को बढ़ा सकती हैं।

आहार और जीवनशैली का प्रभाव

आहार और जीवनशैली के प्रभाव पर चर्चा की गई है। नकारात्मक आहार, जैसे उच्च मात्रा में रेड मीट और सोया का सेवन, एंडोमेट्रीयल स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। तनाव और मानसिक स्वास्थ्य का भी प्रभाव पड़ता है।

अंडरस्टैंडिंग स्प्रिचुअल एंगेजमेंट

इस खंड में मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के महत्व पर चर्चा की गई है। यह बताया गया है कि कैसे मानसिक स्थिति शरीर की शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालती है और एंडोमेट्रोसिस को बढ़ा सकती है।

परंपरागत चिकित्सा के तरीके

डॉक्टर ने आयुर्वेदिक उपचार विधियों पर ध्यान केंद्रित किया। विशेष रूप से गर्भाशय स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की तकनीकों को बताया गया है।

स्मृति और मानसिक स्तर

यहाँ मानसिक स्मृति के गिरने के कारणों पर चर्चा की गई है और एंडोमेट्रोसिस के साथ संबंध को स्पष्ट किया गया है। यह दिखाया गया है कि कैसे मानसिक तनाव शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।

रक्त और वात संबंध

रक्त और वात के संबंध में अंतर्वास्ते की स्थिति का अध्ययन किया गया है। यह बताया गया है कि किस प्रकार विचलित रक्त का प्रभाव भी एंडोमेट्रोसिस में योगदान कर सकता है।

पेशेंट के केस स्टडीज

इस भाग में पेशेंट केस स्टडीज के माध्यम से治疗 के विभिन्न दृष्टिकोणों का विश्लेषण किया गया है, जिनमें औरतों के व्यक्तिगत अनुभव और उपचार विधियाँ शामिल हैं।

प्रश्न उत्तर सत्र

वीडियो के अंतिम हिस्से में दर्शकों के सवालों का उत्तर दिया गया है। इस खंड में चिकित्सीय दृष्टिकोण और प्रैक्टिकल ज्ञान साझा किया गया है।

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Transcript

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0:03 एंडोमेट्रोसिस और एडिनोमासिस के बारे में हमारी चर्चा चल रही थी और उसमें कारण का जो हिस्सा है वो थोड़ा बहुत हमने देख लिया था। पैथोफिजियोलॉजी क्या है? उसकी आयुर्वेदिक टेक क्या है? इसके बारे में हमने पहले देख लिया है। अभी बचे हुए जो कारण है इसका इंटरप्रिटेशन हम करेंगे। इन टर्म्स ऑफ ट्रीटमेंट भी देखेंगे वो और कारण का आयुर्वेदिक विचार जो है ना वो भी समझने की कोशिश करेंगे। बहुत सारी चीजें आधुनिक शास्त्र की का विषय जब रहता है ना तो उसमें आधुनिक शास्त्र की रहेगी लेकिन उसका आयुर्वेदिक जो टेक है वो भी समझना बहुत जरूरी है। कर

0:50 अमलकी तो मेरे ख्याल से कृषत और सूरत का हमने हिस्सा देख लिया था और मध्य का पान के बारे में हम अभी देखना चाहते थे उसके बारे में हम बोलेंगे अभी इंडिया में है औरतों की बीमारी है और आप मध्यपान का क्यों सोच रहे हैं ऐसा आपके मन में आ जाएगा लेकिन 20 25 बरस पहले केस चेकिंग वग अगर कोई औरत या लड़की सामने रहती थी तो हम उसको ये पूछते नहीं थे या हमें डर लगता लगता था कि मैं ये कैसे पूछ लूं उनको कि आप ड्रिंक कितनी लेती है या स्मोकिंग कितनी मर्तबा करती हो? लेकिन अभी ये पिक्चर कंप्लीटली 360 डिग्री में चेंज हो गया है। और हमने अगर गलती से भूल गए हम उसके बारे में सवाल पूछने तो वो औरत या लड़की बोलती है डॉक्टर

1:37 वन मिनट एक्सक्यूज मी ऐसा बोलती है कि मैं हफ्ते में तीन बार ड्रिंक्स लेती हूं और हर रोज एक या दो सिगार जो है उसका स्मोकिंग मेरा रहता है। यानी निर्लज्जता की परमावधि जो बोलते हैं ना वो अभी हो गई है। वैसे व्यसन तो पुरुषों ने भी नहीं करना चाहिए स्त्रियों ने भी नहीं करना चाहिए। तो मैंने एक हमारे स्टूडेंट को पूछ लिया था बहुत नजदीकी स्टूडेंट था मेरा कि आप सिगारेट स्मोकिंग करते हो तो उस वक्त क्या होता है? काहे के लिए आप स्मोकिंग करते हो तो पियो तो जाने ये उत्तर तो सब लोगों को पता है। है ना? ये तो होगा नहीं। तो स्मोकिंग करने के बाद उनको जब धुआ अंदर चला जाता है। या श्रृंगार को लग के ऊपर चला जाता है ना तो उनको लगता है कि हम टॉप

2:24 ऑफ द वर्ल्ड है। जो कुछ है हमारे पास है। मैं जो करूंगा सो कायदा ऐसा उनका जो स्वाभिमान है ना या अभिमान वो बढ़ जाता है। इसलिए हम पीते रहते हैं। ऐसा उन्होंने बताया है। तो ये चीजें सच होनी चाहिए ना। हवा में धुए में बातें करने से क्या फायदा है? तो बात ऐसी है कि तंबाकू के सब गुण अगर देखे जाए या दोष देखे जाए तो वह उपविषय है और उसका धुआ जब श्रृंगाटक को लगता है मुंह से धुआ ले लिया है मुंह से ही छोड़ना चाहिए नाक से धुआ लिया है मुंह से ही छोड़ना चाहिए लेकिन मुंह से धुआ लिया है और नाक से छोड़ते हैं ना तो श्रृंगाटक मर की दृष्टि हो जाती है रक्त और पित्त दोनों का प्रकोप हो जाता है और रक्त पित्त की संप्राप्ति ब्रेन तक चली जाती है। तारा वगा जमा हो जाता है। ये तो अलग बात है। सच्ची और अच्छी बात यह है कि

3:11 एक महीने में अगर स्मोकिंग बंद कर दिया तो उसका फेफड़ा जो है नॉर्मल आने के लिए तीन महीने काफी रहते हैं। तो निस्ग इतना दयालु रहता है फिर भी लोग छोड़ते नहीं और कॉलेज के जमाने में हम जब पढ़ते थे तो सुबह का आधा कप चाय और एक सिगरेट का थुक जिसको मराठी में थुक बोलते हैं ना वो होने से बहुत सारे बच्चे लोगों का पेट ही साफ नहीं होता था। ऐसी बातें रहती थी। तो इसकी लत लग जाती है। निकोटिन टैनिन की लेवल जो खून में है वो एक लिमिट तक जब रहती है तो किक उनको आ जाती है वो धुए से दो सेकंड में धुआ जो है ब्रेन के ऊपर और 9 सेकंड में लीवर के ऊपर गंदा असर डालता है। तो उसके इतना इमीडिएट एक्सचेंज जो रहता है वो वैवाही विकासी गुण से रहता है। ब्लड स्ट्रीम में जाता है वायाद हुआ तो आपको यह सोचना होगा कि इसका असर अगर प्राण व्लोसिस

3:59 के ऊपर अगर आता है सिर के ऊपर तो पक्का आने वाला है सेक्स ऑर्गन के ऊपर क्योंकि सिर हमारा मूल है और फल पुष्प क्या है बीज क्या है तो हमारे जेाइटल ऑर्गन्स है सेक्स ऑर्गन्स है तो उसके ऊपर उसका असर जो है वो पक्का आ ही जाता है इसलिए मध्यपान और स्मोकिंग दोनों का इकट्ठा सोचना चाहिए और दोनों चीजें जो है वो विष जैसा शरीर शरीर के ऊपर असर करती है। मध्य का अम्ल रस छोड़ के बाकी सब जो चीजें वो दोष जो है या गुण जो है वो विष जैसे है। तो मन के ऊपर असर शरीर के ऊपर असर इसलिए गर्भाशय रस धातु से संबंध रखने वाली चीज रहने की वजह से गर्भाशय के ऊपर असर आ जाता है। तीष्णता और उष्णता जब पित्त की बढ़ जाती है तो शरीर में धातु पाक तय रहता है। धातु पाक जब

4:46 होना शुरू हो जाता है तो स्मृति का नाश इमीडिएट होना शुरू हो जाता है। स्मृति खराब हो गई और वात के स्थान में अगर स्मृति की गड़बड़ी कुछ हो गई तो बीमार गमन के चांसेस बढ़ जाते हैं और इसकी वजह से मध्यपान और स्मोकिंग इसकी वजह से एंडोमेट्रोसिस की बीमारी लग जाती है या बढ़ जाती है। मायोमेट्र में तैयार होने वाला जो हिस्सा है एंडोमेट्रोसिस का एडिन जिसको बोलते हैं वो इससे ज्यादा उभर के आ जाता है क्योंकि कर्स जैसी चीजें हैं छाछे जैसी चीजें है या बासी चीजें है या सड़ी हुई चीजें है ये सब क्या करती है मस धातु को जल्द से जल्द खराब कर देती है। यही असर जो है वो हवा प्रदूषण से या पोलशन की वजह से हो जाता है। बार-बार आप इन्हेल

5:31 करते रहते हो हवा तो उसमें यह सब चीजें जो है नाइट्रोजन के साथ कार्बन डाइऑक्साइड जाता है उसके साथ ऑक्सीजन जाता है। ऑक्सीजन ज्यादा सोक नहीं करती हमारी बॉडी शैलो ब्रीथिंग रहता है लोगों का और बहुत सारा ऑक्सीजन फिर से वापस चला जाता है। लेकिन बाकी के जो घटक है उसमें अगर विषारी वायु कुछ रहे बेंजीन रिंग युक्त कोई एरोमेटिक कंपाउंड्स वगैरह रहे तो उसका असर कैंसर के हिसाब से भी आ जाता है और खून खराब होने के हिसाब से भी आ जाता है। तो आज से एक बात ये तय कर लो कि मुंह से जो कुछ लेंगे इससे ही हमें शरीर में खून की खराबी हो जाएगी। ऐसा नहीं है। हवा, पानी और अन्न। इसमें अन्न और पानी का तो आपको पता है लेकिन हवा जो इनेल करते हैं ना उसका असर

6:17 भी रहता है। आपने हवा ले ली तो वो शिरो ब्रह्म की तरफ जाएगी एक हिस्सा बाकी के जो है वो पंच वायु शरीर में जो है उसकी तरफ जाएगी और पेट में भी चली जाएगी। तो प्राणवतस अन्नव्रतस इन दोनों के ऊपर उसका असर होता रहता है। अगर आपने आपान के ऊपर उसका काम पकड़ लिया तो वो गर्भाशय के ऊपर भी उसका काम होने वाला है। हवा का तो वो दूषित हवा रहे तो सिर्फ फेफड़ों को तकलीफ है। ऐसी कोई बात नहीं है। आपका अपान भी दुष्ट हो सकता है। प्राण भी हो सकता है। उदान भी हो सकता है। मुंबई में आप जब जाते ना तो शाम को 6:00 बजे दादर एरिया में हम जब प्रैक्टिस करते थे ना तो सांस ऐसी खींच कर लेनी पड़ती थी। ऐसा खींचना पड़ता था। इतनी थिक एयर रहती

7:03 है और वहां पोलशन कितना रहता है आपको पता है तो वहां के लोगों को अंदर पेट में एक तेल का ये लेयर जैसा जम जाता है जब गैस्ट्रोस्कोपी वगैरह हो जाती है या एंडोस्कोपी हो जाती है ना तो अलग तरीके का एक पिक्चर जो है ना बिकॉज़ ऑफ पोलशन दिखाई देता है और वो हवा का पोलशन की वजह से तो वो अगर होता है तो आपको अलग सी ट्रीटमेंट जो है ना वो पेट की बीमारियों के लिए मुंबई में देनी पड़ती है इसलिए इसलिए मुंबई में हर कहीं ना कहीं दिन कई कोने में मुंबई के ट्यूबरकुलसिस तो रहता ही है या टीिया रहता ही है। इनफेक्ट हिपेटिस वगैरह रहता ही है। लेप्टोस्पायरोसिस रहता ही है। अभी बारिश के सीजन में वो ज्यादा दिखाई देगा। तो यह सब चीजें जो है ना वो हवा से

7:51 जब संबंध रखती हैली अभी की पेट की जो मैंने संप्राप्ति बताई तो उसके लिए हम खाने की चीजें चेंज कर सकते हैं। पीने की चीजें सिद्ध जल दे सकते हैं। लेकिन ये हवा का क्या करें ये आपके मन में आना चाहिए। तो उसके लिए एक तो देश बदल होना चाहिए तो हवा बदल हो जाएगा। और दूसरा हवा का प्रदूषण नष्ट करने वाले अलग धुए भी बताए। सर्वगंध धूप है, दशांग धूप है। तो ऐसे जो चीजें है ना जिसका असर हमारे हवा शुद्धिकरण के लिए आ जाता है। ऐसी चीजें इस्तेमाल करनी चाहिए। निर्गुणी घर के पास लगाई जाए या सूअचला लगाई दी जाए या तुलसी या अजवाला लगा दी जाए तो घर का हवा का जो हिस्सा है वो शुद्ध होना शुरू हो जाता है। उसके ही धूप जो है ना वो आप

8:37 घर पर जलाने के लिए दे सकते हैं। तो ये सब चीजें आपको एंडोमेटोसिस के लिए देनी चाहिए। एंडोमेट्रोसिस बीमारी जब हम देखते हैं गर्भाशय की तरफ और कभी वैद्य अगर हवा का सोचता है ना तो नॉर्मल ह्यूमन बीइंग को पता नहीं चलता ये क्या डॉक्टर सोच रहा है ऐसा कभी रहता है क्या उनको ये लगता है ये अलग ही कर रहा है कुछ बहुत सारी बार ऐसा होता है कि बहुत सारे सवाल हम जब पूछते हैं ना किसी पेशेंट को तो काहे के लिए इतना पूछ रहे हैं आपको पता है ना मुझे तकलीफ हो रही है ऐसा बोलते हैं क्योंकि उनको अनुमान प्रमाण पता नहीं रहता और ध्यान लेने के अलग-अलग तरीके उनको पता नहीं रहते उनको पथरी रहती है बुध बुध मार्ग में अर्श रहते है। आरश की वजह से पथरी रहती है। ये बैल लोगों को समझने को नहीं आता। तो नॉर्मल लेमन को क्या समझ में आ जाएगा? है ना? तो ऐसी बातें जब रहती है ना तो पेशेंट को बनाना आप चुपचाप बैठो।

9:24 मैं जो पूछता है उतना करो और बाद में जो ट्रीटमेंट रहती है वो करो तो वो प्रिसाइजली लागू हो जाएगी। बहुत सारे लोग Google वगैरह देख के आ जाते हैं ना वह प्रिपेयर रहते हैं और अलग साला पूछना शुरू कर दिया आपने तो उनका दिमाग जो है सटक जाता है जब नया प्रैक्टिस आपका रहेगा ना तो उस वक्त ये सब चीजें बहुत ज्यादा होती रहती है जस्ट करते रहते हैं लोग बहुत सारे लोग आते हैं और सिर्फ हम पूछने के लिए आ गए ऐसा ही बोलते हैं और सब कंसल्टेशन वगैरह ले चले जाते हैं ऐसा भी होता है करते जाना ज्ञान बांटने से क्या प्रॉब्लम है लेकिन ये सब चीजें होने वाली है रेड मीट जो रहता है सोया सोयाबीन जो रहता है उसका सोया सॉस रहता है या अलग-अलग ये बोलते हैं ना उसको ये पनीर जैसा कुछ बनाते हैं उसका वो हिस्सा जो है ना वो तो

10:10 बहुत ज्यादा खराब करता है रक्त को और माउस धातु को दुष्ट करता है उसका अति सेवन अगर हो गया रेड मीट का और सोया का सोयाबीन का तो बहुत ज्यादा असर जो है आपके एंडोमेट्रियम के ऊपर आना शुरू हो जाता है। स्ट्रेस टेंशन और एंग्जायटी का तो मैंने पहले ही बता दिया है कि रस धातु को खराब जब करती है कोई चीज तो आगे जाकर सप्त धातुओं के ऊपर उसका इंपैक्ट आ ही जाता है और वो मैंने आपको बताया था कि आप खाना खा रहे हैं और एकदम गुस्सा हो गए तो आपका आमाशय एकदम सिकुड़ जाता है और तीन-तीन घंटे बाद वो खुलता नहीं तब तक अंदर का जो हिस्सा चल रहा है बॉडी फिजियोलॉजी का वो कभी भी फिजियोलॉजिकल हो ही नहीं जाता पैथोलॉजिकली रहता है तो आपके शरीर में रस धातु जो है वो खराब होना शुरू हो जाता है रक्त वगैरह सब खराब हो जाता है रज भी खराब हो जाता है। बार-बार ऐसा खाना खाने वाले

10:55 लोग बहुत ज्यादा रहते हैं। खाने के ऊपर गुस्सा करने वाले, बर्तन जो वो फेंकने वाले तो यह सब चीजें गलत है। धर्मशास्त्र के हिसाब से अन्नपूर्णा का वो अपमान हो जाता है। ये भी बात रहती और दूसरा रस धातु खराब करने के लिए आपका वो गुस्सा काफी है। इसलिए ये चीजें नहीं होनी चाहिए। आहार विधि विशेष आयतन जो बताया ना उसके हिसाब से आपका खाना होना चाहिए। ये चीज समझेंगे कैसे आप? तो कोई भी गुस्से वाला आदमी रहे या अच्छी तरह से खाने खाना खाने वाला आदमी रहे। घर पर वह खाता रहता है। बोलता रहता है मम्मी को कि भाई ये कितना मोनोटोनस खाना है। हर बार चपाती देती हो, रोटी देती हो, चावल ही देती हो, दूसरा कुछ तो बनाओ वगैरह। यह होता रहता है और आप कभी बाहर जाते जैसे यहां आ गए पुणे में और डेढ़ बरस

11:42 यहां रहते और यहां के डिब्बे खाते हैं ना और कभी मैंने आपको छोड़ दिया और आपके घर पर जाते हैं और मम्मी के हाथ का खाना खाते तो आपको पता चलता है कि घर का खाना क्या रहता है बाहर का रहता है ये तो सब लोगों को समझा लेकिन प्यार करने वाले लोगों ने दिया हुआ खाना क्या रहता है और बाहर वाले जिनके चेहरे के ऊपर इस्त्री लगाई है ऐसा चेहरा जिनका रहता है ना ऐसे वाने ये करने वाले वाले सर्व करने वाले लोग रहते हैं। उनके हाथ का खाना कैसा रहता है पता चल जाता है। इससे एक बात आप समझ ले कि आपके मन की भावना जो रहती है वो खाने के ऊपर असर करती है। किसने खाना पकाया है और कौन सर्व कर रहा है ये बहुत इंपॉर्टेंट रहता है आपका शरीर का भरण पोषण होने के लिए। है ना? इसके लिए मैं एक कथा बताता हूं। हमारे

12:27 एक सुचिता गव नाम के मैडम है यानी हमारी स्टूडेंट ये पहले वाली स्टूडेंट मैंने बता फिर भी नए लोग बहुत सारे आ गए इसलिए और जो ये व्याख्यान अभी सुन रहे उनके लिए फायदा हो जाएगा वो ऑस्ट्रिया में बाहर फॉरेन कंट्रीज में वो प्रैक्टिस करती थी हमारी स्टूडेंट तो एक बार क्या हो गया मुझे रात को फोन आ गया उसका कि ऐसी एक पेशेंट है मेरे पास अभी आ गई है तो उसकी ट्रीटमेंट मैं करना चाहती हूं लेकिन मुझे समझ में नहीं आ रहा है मैं कैसा ऐसा विचार करूं तो वहां ये लोग और लेसबियंस बहुत ज्यादा रहती है औरतें रहती है तो ऐसा एक कपल उसके पास आ गया था दो लड़कियां थी और रिलेशन में थी लेसबियन थी और एक डोमिनेटिंग नेचर की थी

13:13 और दूसरी जो थी वो सोई थी ज्यादा कुछ बोलती वगैरह नहीं थी और उन्होंने शादी कर दी थी तो उसको छुटकारा चाहिए था जो सीधी सी लड़की उसमें से थी ना वो तो हमने उसको पूछ लिया लिया डॉक्टर को गवड़े मैडम को कि इनमें से खाना कौन पकाता है जरा मुझे बताना तो जो डोमिनेटिंग लड़की थी वो खाना पकाती थी तो मैंने इनको सलाह दे दी कि कुछ भी होने दो तीन महीने तक आप क्या करें उसके हाथ का खाना ये दूसरी लड़की जो है ना वो नहीं खाया ऐसा कुछ तो करो तो वो पॉसिबल था उनको कुछ ये सोच ही नहीं तो क्या करें ना तो उन्होंने उसके हाथ का खाना बंद कर दिया और उसका नेचर जो है वो ज्यादा अच्छी तरह से स्त्री जैसा होना शुरू हो गया। भावनाएं कम हो गई। डोमिनेंस उसका कम हो गया। और वो जो

14:00 दूसरी डोमिनेटेड लड़की थी उसका भी उसके साथ रिलेशन जो था धीरेधीरे कम आना शुरू हो गया। अन्न वृत्त करा अन्न का मन के ऊपर होने वाला असर तो सप्त धातुओं के ऊपर जो असर आ रहा था वो धीरेधी कम हो गया। स्वभाव परवा से जो चीज बिगड़ गई थी वो स्वभाव परवास धीरेधी अच्छी होनी शुरू हो गई। तो उसने वहां बहद वमन बहद विरेचन वगरा किया उसका शिरोध और वो दोनों लड़कियां जो अभी खुश है और अपार्ट है और दोनों की शादी हो गई बच्चे वगैरह हो गए तो ये चीज सिर्फ खाना कौन पकाता है इससे अगर होती है तो कैरेट ऑफ फूड मटेरियल जो है ना दैट इज अनदर थिंग यानी आयुर्वेद का रसपदी गुण वगरा उसका भी सोशल है एट द सेम टाइम आपको ये भी करना चाहिए कि खाना कौन दे रहा है

14:48 तो ये बहुत चीजें इंपॉर्टेंट रहती है। खाना खाने के पहले मंत्र पढ़ने इसलिए होते हैं। वहां का जो पैसा रहेगा वह पहले ही पे करना अच्छा रहता है। जो आदमी आपको सर्व कर रहा है उसके साथ आपका बर्ताव जो है वो अच्छा होना चाहिए। ये सब चीजें हो गई तो वो टू वे ट्रैफिक रहती है। अच्छी चीजें हो सकती है। है ना? तो जब हम पिकासन पिकासन यानी क्या होटल में खाना खाते हैं तो आपके मन में ये सब चीजें होनी चाहिए। इसलिए प्रेयर्स वगैरह करना जरूरी रहता है। जब खाना खाने बैठते हैं तो तो यह चिंता शोक तान यह जो है ना उसका रस धातु के ऊपर और गर्भाशय के ऊपर क्या असर आ जाएगा यह हमने यहां बता दिया लेकिन इसका असर आप सब जगह ले सकते हैं इसलिए हमारा केस पेपर का एक हिस्सा है ना उसमें मानस भाव परीक्षण बहुत

15:33 ज्यादा दे दिए तो घर का वातावरण कैसा है खाना खाने कौन-कौन बैठता है कब का खाना कब सर्व होता है कौन देता है कितना खाया जाता है कौन से माहौल में खाया जाता है ये सब चीजें हर बार हर जगह आपको इस्तेमाल करनी चाहिए। यहां उसका जो संबंध है वो मैंने स्पष्ट करके आपको बताया है। तो ये सब चीजें चेंज करना दैट इज नथिंग बट परिचर्या है ना। ये आप जब पेशेंट की ट्रीटमेंट करते हैं एंडोमेट्रोसिस की तो ये सब सोच लगवानी है। पेशेंट करे या ना करे ये बात अलग है। आपको ये जानना होगा और उस हिसाब से बताना होगा। जब आपको समझ में आ जाता है उसकी वैल्यू आपको पता रहती है तो आपके बोलने में जोर आ जाता है और पेशेंट को यह अलग ये पता चल जाता है और वो अगर बहुत ज्यादा जगह

16:18 फुटबॉल होके आपके पास आ गया है तो वो बर्ताव भी वैसा करता है और आपकी ट्रीटमेंट का अलग असर आ जाता है। तो ये सब युक्ति प्रमाण जैसा है। सब एक साथ मिलकर असर देने वाली चीजें रहती है। इसलिए युक्ति प्रमाण हम सीखते हैं। युक्ति यानी आइडियाट्री ऐसा उसका मतलब नहीं। चार चीजें इकट्ठा ऐसी लानी है जिससे हमारा एम या ऑब्जेक्ट जो बन गया है वो अच्छी तरह से हमें मिल जाए। है ना? पहले वाली जो ऑपरेशन हो गई है ना गर्भाशय के ऊपर समझो ड्रिलिंग हो गया है ओवरीज का सीस के लिए या डीएसी हो गई है और एंटीबायोटिक के श डॉक्टर ने अच्छी तरह से लगवाए नहीं है या अबॉर्शन मिसकैरज वगैरह हो गया है और उसकी वजह से कुछ तकलीफें हो

17:04 रही है ना तो उसमें एंडोमेट्रोसिस होने की संभावना ज्यादा रहती है क्योंकि क्या है वहां स्थान वैगुण्य रहता है स्थान वैगुण्य निकालने के लिए हमें क्या करना है प्री ऑपरेटिव पोस्ट ऑपरेटिव चीजें करनी चाहिए चाहिए और गर्भाशय को अच्छा करने वाली चीजें देनी चाहिए। यह वैद्य लोगों की सोच है। डॉक्टर काहे के लिए बताएंगे? वो डीएनसी करते वक्त क्या देखेंगे? खून चढ़ाना है तो ग्रुप कौन सा है देख लो। एनबीएम रखो, नील बाय माउथ रखो और बाद में एंटीबायोटिक के शॉट लगवाओ। उनका काम हो गया। लेकिन हम सोचते हैं कि आमाशय से रस धातु निकलता है। वो नीचे आके रज बनता है। तो हम आमाशय का अच्छा करेंगे। रस धातु का अच्छा करेंगे। ये सब हम करने वाले हैं ना। तो प्री ऑपरेटिव कुछ प्रीवियस ऑपरेशन में कुछ खराबी आ गई है और उसकी वजह से अगर स्थान वैगुण है ना तो उसका सब अच्छा कैसा करना है ये आयुर्वेद के

17:52 वैद्य ज्यादा अच्छी तरह से जानते हैं तो ये चीजें जो है वो ऑपरेशन के हिसाब से आप ध्यान में रख दे प्रीवियस ऑपरेशन अगर हो गई हो तो जन्मजात गर्भाशय की विकृति अगर रहे तो वो भी एंडोमेट्रोसिस के लिए एक स्थान दे देता है बायनेटेड यूट्रस जो रहता है ना द्व श्रंग यानी दो उसके हिस्से रहते हैं या सेप्टेड यूट्रस रहता है। एक बाजू छोटी रहती है। दूसरी बड़ी रहती है। ऐसे जो बीमारियां कजनाइटल रहती है ना जो वियोनी विकृता जयंत विकृत मलई इसके हिसाब से वाग जी ने बताया है उसकी ट्रीटमेंट जो है वो रिकंस्ट्रक्शन अगर पॉसिबल है तो वो ऑपरेशन करके कर लेना है गर्भाशय का हर बार में आयुर्वेदिक सोच लगाकर आप ये चीजें कर सकते हैं। कष्टार्थ पेट में बहुत ज्यादा दर्द

18:38 होता है एट द टाइम पीरियड तो शूलम ना बिना वात वात क्या करेगा बीमार भी करेगा और अनइवन विभजन जो है पेशी का सेल का वो भी करेगा तो कष्ट कभी भी नेगलेक्ट नहीं करना चाहिए हमारे एक गुरु जी थे जिनके पास हमने सीखा था वो बोलते थे कि औरतों को जैसा मल मूत्र से उसका ये हो जाता है, विसर्जन हो जाता है। उस थोड़ी सी भी तकलीफ नहीं होती। ऐसा पीरियड के वक्त थोड़ी भी तकलीफ नहीं होनी चाहिए। इतना सा भी श्वेत प्रद नहीं होना चाहिए। ऐसा उनका मानना था। तो अगर ऐसा है तो ये कष्टार्थ चीज जो है तो भयंकर हो गई। तो कष्टार अगर नष्ट करना है तो पीरियड के

19:24 पहले 10 दिन दशमूल या दशमल का काढ़ा देना चाहिए। शालमली और जीरक यह कूट कर समान मात्रा में लेनी है और खड़ी शक्कर के साथ उसका फाट पीरियड के चार दिन देना चाहिए और पूरा विश्राम लेके रजसला परिचर्या करनी चाहिए तो ये चीजें करना बहुत जरूरी है। कम्युनिटी के ऊपर डालो ऐसा हम जब बोलते हैं तो हमारा जो चैनल है उसके ऊपर भी वो आ जाता है और सब चीजें आप डालते हैं ना क्योंकि कुछ कुछ उनको मिलता नहीं ऐसा लगता है। जो पहले डाली चीजें रहती है वो बार-बार बच्चे लोग नहीं डालते तो पूरे जो कम्युनिटी है हमारी या हमारे लेक्चर है ना उसका आप थोड़ा सा ये मुयना करते जाए तो आपको वो सब चीजें मिल जाएगी तो रजस्वला परिचर्या आज उसका जो हिंदी में वो आप डाल

20:11 दो तो लोगों को उसका फायदा हो जाएगा ये कष्टार्थ के बारे में हमने बताया अभी आर कष्टार्थ जो होता है वो उसका एक टांग मैंने जैसे बताई वैसे आमाशय में आमाशय में जो खाना आपके जा रहा है और हजम हो रहा है वो कोई भी गर्भाशय की या कोई भी बीमारी रहे तो आपका ल्यूनर साइकिल जो औरतों की रहती है ना वो चांद और सूरज से आपको अटैच करनी है शिवम की चांद को अटैच करनी चाहिए तो सुबह का खाना 10 से 1:00 बजे तक शाम का 5 से 7:00 बजे तक इतना सिर्फ खाना शुरू कर दिया और बीच में कुछ खाया नहीं ना तो भी आपकी बीमारी मिटने वाली है औरतों की उसके साथ अगर बाकी चीजें देते तो फायदा हो जाएगा लेकिन ऐसा होता है क्या नहीं होता है। सुबह उठने के बाद आप पानी पीते हैं।

20:57 बाद में चाय पी लेते हैं। बाद में सेब खा लेते या कुछ ब्रेकफास्ट करते हैं। बाद में खाना खाते हैं। दोपहर को सो जाते हैं। उठने के बाद थोड़ा कुछ खा लेते हैं। फिर शाम को किसी के साथ बाहर गए तो उसके साथ खाना होता है। फिर रात को होता है। तो पांच छह बार जब आपका खाना हो जाता है ना तो ये एक सर्टन उम्र तक चलता है। 25 तक चलता है। उसके बाद आपके धातु परिपुष्ट हो गए ना तो ये मुमकिन नहीं रहता कि उससे आपका आरोग्य अच्छा हो जाए। आपका आहार जो तैयार हो हो गया है। उसका पीलू पाकवाद और पीठर पाकवाद आपने सीखा होगा। है ना? यानी कुमार ने मटका बना लिया है। है ना? बना लिया है मिट्टी काचड़ का और वो अगर सिर्फ धूप में रख दिया तो उसमें पानी डाला तो वो खराब हो जाएगा। लेकिन उसको जब आ में डालते

21:42 भट्टी में और सेकते हैं तो वो अच्छा तैयार हो जाता है। तो आपका कच्चा आहार रस है। उसमें दूसरा आहार आके पड़ गया और तीसरा पड़ गया। तो ये जो आहार रस तैयार करना है ये क्या है? मिट्टी का बर्तन तैयार कर दिया और धूप में सुखाने जैसा है। उसको जब अग्नि लग जाएगा जाठ अग्नि तो उससे जो पाक हो जाएगा वो पांच भतिक धात अग्नि के हो जाएंगे। पांच भतिक अग्नि के हो जाएगा और जो धातु तैयार हो जाएगा वो पक्का मड़का तैयार हो जाएगा। तो खाना दो बार और एक बार पेट साफ होना ये यंग एज में होना चाहिए। 40 प्लस उम्र हो गई तो एक बार खाना और एक बार भुना हुआ खाना या फास्टिंग करना है। यह आपका शरीर के धातु अच्छा करने का एक तरीका रहता है। तो कष्टार्थ के बारे में इतनी चीज काफी

22:29 है। आमाशय से लेकर आप गर्भाशय तक काम करें। रजोदृष्टि के जो लक्षण बताए और कारण बता वहां की दवा आप इस्तेमाल करें और कष्टार को अच्छा कर दे। नहीं तो उसका परिणाम जो है आगे क्या हो जाएगा? एंडोमेट्रोसिस की तरफ को बढ़ सकता है। अनियमित रज प्रवृत्ति रहे तो भी आपको यही सोच रखनी चाहिए। अनियमितता या विषमत्व किसका गुण है? वात का ही है। तो जो कुछ कष्टार्थ के लिए वगैरह कर दिया है वही आपको दोहराना होगा अनियमित रज प्रवृत्ति के लिए। अनियमित रज प्रवृत्ति की यहां एक हमने दवा बनाकर रखी है। आपको पता है कि सुबह शाम शतावरी शतावरी कल्प लेना है। खाना खाने के बाद आप शंख और पूत ले सकते हैं। पुष्प धन रस खाना खाने के पहले और रात को सोते वक्त आप पूर्ण चंद्रोदय मेज

23:15 रसायन के साथ या सारस्वत के साथ ले ले। खाना खाने के बाद भदिष्ट यानी देवदारिष् और पुनस लेना है। ये अगर ऐसा करते हैं और नाक में आप अदरक सिद्ध तेल डालते हैं ना तो आपका पीरियड नॉर्मल आना शुरू हो जाएगा। यह एक ट्रीटमेंट मैंने आपके फायदे के लिए बताई। इसके इर्दगिर्द आप आपकी ट्रीटमेंट और सोच जो है वो लगा सकते हैं और ट्रीटमेंट कर सकते हैं। तो ये अति अनियमित रज प्रवृत्ति के बारे में हमने बता दिया। अत्याव अगर होता है रक्त प्रदर जैसी या पित्त दुष्ट या रक्त दुष्ट जब आतव रहता है तो उसकी ट्रीटमेंट रक्त पित्त जैसी करनी है आप वमन दे दे उस पेशेंट को और वमन देने के बाद आप बस्ती लगवा दे जो सुश्रु संहिता में रक्त पित्त

24:02 अध्याय में प्रियंगवादी बस्ती जो आ गए ना वो जो दो तरह के बस्ती उसमें रहते है शरीर के ऊपर पानी ठंडा पानी छिड़कना वगैरह होता है ये ट्रीटमेंट आप करें तो अत्या कम आना शुरू हो जाएगा। एंडोमेटोसिस की संप्राप्ति जो बन रही है वो भी कम आ जाएगी। इसका मतलब यह है कि अत्यंत यह एक कारण होगा एंडोमेट्रोसिस का और एंड्रोमेटोसिस में अगर ज्यादा ब्लीडिंग होता है तो भी आपको यही ट्रीटमेंट करनी है। संक्षिप्त क्रिया निदान परिवर्जन अगर हम बोल रहे हैं तो अत्थ की ट्रीटमेंट इटसेल्फ ट्रीटमेंट ऑफ एंडोमेटोसिस। इसलिए मैंने ये सब चीजें पते के साथ आपको बताई तो रक्त अध्याय निकाल कर आज आप देख लेना। वहां का बस्ती आपका फायदा करेगा। बस्ती ये अधो भाग की शुद्धि है। कभी भी अधोभाग के मार्ग में बीमारी आए और

24:49 उसकी शुद्धि करनी है तो उर्ध शुद्धि होना बहुत जरूरी है। तो आपने वमन दे दिया तो अपने आप ही एंडोमेट्रसिस के लक्षण कम आ जाते हैं। इतनी चीज जो है ना वो ज्यादा अच्छी तरह से काम करती है। तो आयुर्वेदिक फंडामेंटल्स खूब अलग रहते हैं। कमर में दर्द हो रहा है। तो बस्ती लगवाने के पहले आप लघु हवन दे दो। तो लघु अमन से ही पेशेंट लोगों की कटिशूल जो है वो नष्ट हो जाता है। ऐसा क्यों होता है? तो त्रिक दो जगह बता कंधों में बताया दूसरा कमर में बताया और वहां का कफ अगर आपको अच्छा करना है तो वमन ही देना होगा। तो वमन से वो अच्छा हो जाता है और कमर का दर्द भी मिल जाता है। कमर का दर्द नाउ स्टैंड्स फॉर एनीथिंग रिलेटेड विद कटी। तो उसमें एंडोमेटोसिस आ गया तो उसके लिए आपको ट्रीटमेंट करनी है लघुमन। तो लघुमन का फायदा आमाशय के ऊपर हो जाएगा। अधो भाग की

25:36 शुद्धि करने के लिए उर्ध भाग की शुद्धि इस हिसाब से भी हो जाएगा। तो ये चीजें बहुत इंपॉर्टेंट होती है। आयुर्वेदिक प्रैक्टिस अगर देखा जाए तो बहुत आसान भी है और देखा जाए तो बहुत डिफिकल्ट भी है। तो आसान अगर कोई चीज है तो डिफिकल्ट अपने आप सॉल्व होने वाली है। शुरुआत तो करो। चार पैर अगर आप कदम अगर चलते हैं ना तो आयुर्वेद आपको कंधे के ऊपर उठा लेगा और बाकी चीजें आपको आसान हो जाएगी। कहीं तो शुरुआत करनी चाहिए। पहले से रोने से क्या फायदा है? मुझे होता नहीं, जमता नहीं। ऐसा नहीं होना चाहिए। है ना? तो यह अत्यार्थ के बारे में हमने बताया। वंध्यत्व किसी औरत को वंध्यत्व यानी बच्चे नहीं हो रहे बहुत दिन से तो ऐसी औरत के शरीर में हर जगह और गर्भाशय में वंध्यत्व की

26:23 संप्राप्ति है तो उसका संबंध वात दोष से है शरीर में अगर पांडु है और उसकी वजह से उसको वंध्यत्व है तो पांडु का असर गर्भाशय के ऊपर स्थल के हिसाब से आ गया है तो आपको पांडु उसका करेक्ट करना चाहिए वंध्यत्व करेक्ट करना चाहिए अगर ऐसा नहीं होता है तो आगे जाकर क्या हो जाता खून की कमी, रस धातु की कमी, यापन कम इसलिए वो ऑर्गन जो है ना उसकी जैसी मेमोरी रहती है, बुद्धि रहती है वैसा उसका गुस्सा भी रहता है। उसकी चिंता भी रहती है, उसका तान वगैरह भी रहता है खुद का तो वो जब इरप्ट हो जाता है तो उसका गुस्सा यानी एंडोमेट्रोसिस है। है ना? तो उसकी वजह से आपको वंध्यत्व ये सोचना चाहिए। एक कारण है जो एंडोमेट्रोसिस में हमें पाया जाता है, दिखाई देता है।

27:09 एंडोमेट्रोसिस की वजह से वंध्यत्व आ गया। ये उसका लक्षण हो गया। लेकिन उसके पहले उसका हिस्सा जो है ना वो कहां रहेगा? कारण में रहेगा। है ना? ये वंदित के बारे में हमने बताया। पेल्विक इनफ्लेमरी डिसीज जो रहता है ना पीआईडी वो सब का आपको सोचना है। बाहर की स्किन वहां अगर औरतों को स्किन का प्रॉब्लम रहे फंगल इनफेक्शन रहे वो ट्रीट होने चाहिए। गर्भाशय के अंदर का हिस्सा तो आप देख सकते हैं। कोई दिक्कत की बात नहीं सोनोग्राफी वगरा से लेकिन पेरिट लाइनिंग में कई एडिजेंस है। अपेंडिस जो है उसको सूजन है या डवर्टिकुल वहां प्रेजेंट है और उसको सूजन बार-बार आती है। लिंफ नोड वहां के अगर बढ़ जाते हैं। पेट में आमान ऑटोप आंत्र कुज ऐसी

27:58 सिम्टम्स अगर आते हैं तो वो देखनी चाहिए। ब्लैडर से संबंध रखने वाली कुछ चीजें रहे तो वो देखनी चाहिए। और कटी में जहांजहां कहीं इनफ्लेमेशन या इनफेक्शन होता है उसको आपको करेक्ट करना होगा। अदर वाइज ये सब चीजें आगे जाकर क्या होता है? एडजेसेंट ऑर्गन में और गर्भाशय में एंडोमेट्रोसिस की संप्राप्ति बना देते हैं। तो ये एक कारण पीआईडी का जो है इस हिसाब से देखना चाहिए। तो कोई भी पेशेंट आ गई आपके पास तो यह सब कारण जो है ना वो देखकर हमें हमारा निर्णय करना चाहिए कि इस औरत को एंडोमेट्रोसिस किस वजह से हो गया होगा और उसके ऊपर आपका ध्यान ज्यादा रहना जरूरी रहता है ट्रीटमेंट में अभी देखो पीआईडी अगर है और उसको आप एंडोमेट्रोसिस की ट्रीटमेंट कर रहे हैं तो आप पीने के लिए गर्म पानी दे दो सिद्ध जल

28:46 दे दो पेट साफ करने की दवा दे दो यूरिन अच्छी करने की दवा दवा दे दो। पेट के ऊपर शचियों की घड़ी रख दो। पेट के ऊपर लेप करो। पेट के ऊपर पोटिस करो। कमर को लेप लगाओ। वहां तेल लगाओ। कितनी चीज आप कर सकते हैं? ये होता है। नहीं होता है। आप भीम में चले जाते हैं और ट्रीटमेंट जो कुछ बची हुई रहती है ना वो दे देते हैं। कैंसर का पेशेंट आ गया तो हिरक दे दिया, मकर दे दिया, कांचना गोकुल दे दिया, वरुणाद काढ़ा दिया। ये ट्रीटमेंट रहती है कैंसर की। उसकी सोच कितनी अलग रहती है हमने देख लिया है वैसा ही एंडोमेट्रोसिस का है। एंडोमेट्रोसिस हमारा निदान है ही नहीं। हम जो देख रहे यह बाकी चीजें देख रहे हैं उससे उभर के जो विकार आ जाएगा चाहे वो स्थानिक रहे या सार्वजनिक रहे या मानस रहे

29:31 वो हम ट्रीट करेंगे तो अपने आप डॉक्टर का एंडोमेटोसिस ठीक हो जाएगा। समझ गए ना? तो ये हमारे यहां आयुर्वेद की सोचने का तरीका अलग है। अलग एंगल आप पा ले और उससे ट्रीटमेंट कर ले। सब कर रहे हो वही आप कर रहे हैं तो सब लोगों के यहां घूम कर पेशेंट जाने बाउंस हो जाता है वैसा हो जाएगा आपके यहां भी तो आपकी सोच कैसी होनी चाहिए और कैसी हो सकती है ये सिर्फ दिखाने का एक तरीका जो है ना वो इस लेक्चर से आप प्राप्त कर ले तो भला हो जाएगा पेशेंट का भी और आपका भी और ये चीजें ऐसी होती गई तो आयुर्वेद का काम अपने आप होने वाला है। है ना? वो लोग क्या सोचेंगे? इतने जगह हम घूम के आ गया अलग-अलग पैथी की दवा और इस वैद ने जो कुछ दवा दे दी उससे मेरा प्रॉब्लम सॉल्व हो

30:17 गया और बच्चे हो गए। तो उसके लिए वो वैद्य जितना इंपॉर्टेंट है उतना आयुर्वेद के बारे में लोग दब के बातें करेंगे। मैं ऐसा सोचता था लेकिन नहीं ये चीज इतनी प्यारी है, अच्छी है और उस हिसाब से वो आपके पास या बगल वाले वैद्य के पास जाएंगे। जाने दो ना किसी के पास भी। है ना? तो ये पीआईडी के बारे में हमने एक चीज बताई। पीआईडी के बारे में एक चीज कहना भूल गया मैं। इनफ्लेमेशन हो गया है या इनफेक्शन हो गया है तो सूक्ष्म त्रिफला गंधक रसायन और पस फॉरेशन नहीं करने वाला खाना उस औरत को हमें देना होगा। तो पीआईडी इमीडिएट कम होना शुरू हो जाता है। ये भी बात है। दूसरी जगह ये कई विषय हमने बोला होगा लेकिन यहां ये बोलना इंपॉर्टेंट था। इसलिए

31:02 मैंने फिर से दोहराया। ऑटोइ्यून डिसऑर्डर जो रहते है ना आज जो एसएल की औरत आ गई थी रोमेट अर्थराइटिस की औरतें रहती है या ल्यूपस के पेशेंट्स रहते हैं बहुत सारे तो ये ऑटोम्यून बीमारियां जो है ना वो 80% औरतों की हो जाती है और ये किससे हो जाती है तो वैक्सीनेशन ये उसका एक प्रधान कारण है बहुत सारी ये जो तैयार हो जाती है ना एंटीबॉडीज तैयार हो जाती है शरीर में अलग-अलग वैक्सीनेशन से उससे वो हमारे शरीर को खाना शुरू कर देती है। इसकी संप्राप्ति कैसे होती है? मैं आपको थोड़ा सा अलग तरीके से बताऊंगा। तो शायद आपके मन में यह स्पार्क पड़ जाए और आपकी जो सोचने की गति है वो वहां से बढ़ जाएगी। यहां समझो ये खुली है और यहां हमने

31:49 एक 8 10 बरस के जो बच्चे रहते हैं ना सात से लेकर 10 बजे बरस तक के उनको लाके बिठा दिया। लड़कियां भी है, लड़के भी है छोटे और उनको बता दिया कि एक 15 मिनट 20 मिनट के बाद आपको मैं खाना देने वाला है, चॉकलेट वगैरह देने वाला है और गुब्बारे वगैरह देने वाला है। ऐसा बोल दिया तो वो चुप बैठेंगे और हम यहां से निकल गए 15 मिनट हो गए, 20 मिनट हो गए, आधा घंटा हो गया तो वो चुप बैठेंगे नहीं। उठेगा एक दूसरे से कुछ शरारत करना शुरू कर देगा और बाद में वो इतना बढ़ेगा कि यहां का जो दंगा है बाहर तक आप सुन सकते हैं दो तीन बोतले फूट जाएगी या हमारे सर वगैरह नीचे आ जाएंगे है ना फैन शुरू कर देंगे मोबाइल वगैरह गिरना शुरू हो जाएगा हो जाएगा ना होना ही होने वाला है तो ऐसा हमारे शरीर

32:34 में जब हम वैक्सीनेशन देते हैं तो जो एंटीबॉडी तैयार होती है उनको शरीर क्या बोलता है तुम्हारे जो जंतु है वो आने वाले हैं और उसको खाने के लिए तुम तैयार रहो जंतु आते ही नहीं वैक्सीनेशन कर दिया इनफेक्शन होता ही नहीं तो दूसरा एंटीबॉडी आ जाती है तीसरी आ जाती है 101 वैक्सीनेशन दे देते हैं लोग सब एंटीबॉडीज बच्चे जैसा बर्ताव करना शुरू कर देते हैं और खुद के शरीर को खाते उसे बोलते हैं ऑफ इम्यून डिसऑर्डर समझ गए ना तो ये एक इंपॉर्टेंट कारण है और ऐसी शरीर में परिस्थिति हो जाती है तो औरतों को अगर ये 80% होता है तो देयर इज डेफिनेट कनेक्शन बिटवीन अर्थ रज रक्त एंड ऑटोइन डिसीज तो हमारा नूर जो ट्रीटमेंट का होना चाहिए वो पित्त की

33:20 ट्रीटमेंट रक्त प्रदोष बीमारियां इस हिसाब से आपको ऑटोइन डिजीज की ट्रीटमेंट करनी होगी। ये एक अलग बात मैंने आपको ऑटोइम डिसीज के बारे में बताई। ये अगर होता है तो एंडोमेट्रोसिस होने की संभावना बहुत ज्यादा रहती है। बीमार गम यहां स्मृति का भी नाश है। ये एंटीबॉडीज यानी क्या है? वो ऐसे पिंड है प्रोटीन के जिनको खुद की मेमोरी रहती है और उनको पता रहता है मुझे किसको मारना है कौन सा जंतु आ गया यानी समझो चिकन पॉक्स कहां आ गया या मीजल्स कहां आ गया तो उसको कैसा नष्ट करना है उसको पता रहता है ये उसकी श्रृति जो है वो कभी दो महीने के लिए रहती है कभी छ महीने के लिए रहती है कभी सदियों तक वो रहती है फॉर एवर रहती है ऐसे अलग-अलग तरीके के वो एंटीबॉडीज रहते है है ना वैसी सोच लगाकर आप ल्यूकोडमा की ट्रीटमेंट कर सकते हैं और

34:07 ऑटोइन कोई भी बीम बीमारी है उसकी ट्रीटमेंट कर सकते हैं। ये थोड़ा सा विषयंतर हो गया लेकिन विषय का की गरिमा समझने के लिए और विषय स्पष्ट होने के लिए कहना जरूरी था इसलिए मैंने बता दिया। तो ये ऑटोमन डिसऑर्डर के बारे में आप सोच कर उस औरत की ट्रीटमेंट देनी है। तो उस वक्त क्या हो जाएगा? केस टेकिंग में आपका एक सवाल ऐसा होना चाहिए। अभी तक आपने वैक्सीनेशन कितने किए हैं? तो दो तीन बोलते कोई दिक्कत की बात नहीं है। 10 है 12 है फॉरेन को जाके आ गई है काला येलो फीवर वगरा का भी वैक्सीनेशन उसने ले लिया है तो आपको सोचना होगा और आपका फोकस जो है वो रक्त पित्त वात रक्त रक्त प्रदोष बीमारियां और पित्त की ट्रीटमेंट इस हिसाब से होना जरूरी है। कितनी

34:55 हां और एक 101 कारण है जो मैंने निकाले उसका भी हम इंफॉर्मेशन उसकी भी हम इकट्ठा बताने वाले आपको लेकिन वह कल बताएंगे। अभी आप सवाल जवाब पूछ ले। फर्स्ट क्वेश्चन दंत रोग तथा क्रम क्रम दंतक की चिकित्सा में कैसे विचार करें? कई पेशेंट को रूट कैनल करने के बाद भी ठीक नहीं होते? कि अगर आपको दूरदर्शन चैनल के ऊपर हमारा परसों ही एक लेक्चर हमने डिलीवर किया था दांतों के बारे में ऑपरेशन

35:42 टालने आयुर्वेद ऐसा वो सब्जेक्ट है श्रंखला है एक सीरीज है बहुत बड़ी उसमें कोई भी बीमारी में ऑपरेशन की जब जरूरत लगती है तो क्या कर सकते हैं हम तो वो लेक्चर आप निकाले उसका हिंदी भी आपको ट्रांसलेशन वहां मिल जाएगा उसमें ये सब चीजें हमने बताई है ना फिर भी थोड़ी थोड़के में मैं बताता है दांत का संबंध आप अस्थि धातु से पकड़ते हैं वो मत पकड़ो उससे काम नहीं हो जाएगा चरक विमाना अध्याय आठ में सारता परीक्षण में दांत किसके अच्छे बोले तो जिसका शुक्र धातु अच्छा है जिसका ब्रह्मचर्य अच्छा है जो तीखी नमकीन बासी चीजें खाता नहीं जो क्षार का सेवन नहीं करता जो स्ट्रेशन एंजाइटटी को प्राप्त नहीं होता शरीर को तेल वगैरह लगाता है उसके दांत अच्छे रहते हैं तो शुक्र का आपको सूचना दिया इसका

36:28 क्लासिकल एग्जांपल मैं देता कराल दंत जो रहता है ना मुंह से दांत बाहर आ जाते हैं तो उसको क्लिप वग लगा के प्लेट लगा के खींच लेते हैं डॉक्टर लोग और ट्रीटमेंट कर देते हैं और बाद में प्लेट्स निकालते तो दांत फिर से थोड़े-थोड़े बाहर आना शुरू हो जाता है क्यों शुक्र से ताल्लुक है 80 से रहे तो फ्रैक्चर ऐसा नॉर्मल कर देते है तो पहली बात ऐसी है कि राग के ट्रीटमेंट का प्री ऑपरेटिव क्या हो जाएगा तीक्षर बस्ती हो जाएगी सोनापन गण हो जाएगा श्रुति सागर रस आ जाएगा पिक्चर में शुक्रवर्धन करने वाला जीवनीय गण आ जाएगा और बाद में दांत अंदर खींच लो वंग भस्म या स्वर्णेश्वर दे दो तो दांत अंदर के अंदर रह जाएंगे नहीं तो फिर से फर्नीचर घर के बाहर आ जाएगा है ना नेक्स्ट क्वेश्चन हाइपरथायरॉइडिज्म के

37:14 फीमेल पेशेंट है अकॉर्डिंग टू आयुर्वेद क्या सोच लगा सकते हैं अभी थायराइड का लेक्चर होने वाला है इसके बाद का टॉपिक थायराइड ही है थायराइड का ही पूछ रहे हैं ना वो तो उसके बारे में उस वक्त हम बोलेंगे क्योंकि कितना बोलेंगे ना हर एक का सवाल आ गया तो वो जो टॉपिक हो पहले ही एक्सपोज होता जाएगा। है ना? और इसका टीजर या ट्रेलर तो देते नहीं हम। है ना? तो बोलेंगे नहीं हम। नेक्स्ट क्वेश्चन है 55 ईयर ओल्ड मेल पेशेंट दक्षिण गुलफ संधि के जगह पर नाक दंश की हिस्ट्री है। तब ट्रीटमेंट ली सब ठीक हो गया था। लेकिन अब दो साल बाद दो साल पहले उसी जगह पर काठी छुबी थी। तो वह जख्म ठीक करने के लिए काठी लाठी काठी छुबी

38:03 थी। ठीक है। तो वह जख्म ठीक करने के लिए ज्यादा प्रयास लगा था। अब जख्मत नहीं है लेकिन उस जगह पर दाह और सूचीवत वेदना है तो इस पर क्या विचार करें और फिलहाल में डीएम नहीं है उन्हें। हम ऐसा है गुलफ संधि है तो छोटे अस्थियों का संधि है वात रक्त जैसी उसकी ट्रीटमेंट रहती है लोड बेरिंग जॉइंट के ऊपर है तो वैसे ही वहां सिराज ग्रंथि वात रक्त की ट्रीटमेंट करनी होती है नाग ने काटा है तो उसके दशावेश की दवा इस्तेमाल करें जल का लगाए और वण की जो चिकित्सा है उसमें पित्त की और रक्त ज्वण की ट्रीटमेंट करें है ना बस्ती भी लगवा सकते हैं इनको पिक बस्तियां मुस्ता अपन धारा रख सकते हैं परिषक या अवगा कर सकते

38:50 हैं पद्मगादी गण के सारीवादी गण पद्मगादी गण दे सकते लास्ट क्वेश्चन 40 साल का मेल पेशेंट है वेट 90 केg पास्ट हिस्ट्री में आठ साल पहले कार एक्सीडेंट में ब्रेन हेमरेज हुआ था 40 दिन आईसीयू में एडमिट था अनकॉन्शियस था स्पाइनल कॉर्ड की नर्व डैमेज थी तब से मेडिसिन ले रहा था 2022 में इलिप्स का अटैक आया आया था और 24 में बीपी की मेडिसिन नहीं खाने से हाइपरटेंशन के कारण हेमप्लेजिया हो गया था और बोल नहीं पाता था चल फिर नहीं सकता था मलमूत्र की संवेदना नहीं है डॉक्टर ने फिजियोथरेपी एडवाइस की है बट कोई इंप्रूवमेंट नहीं है

39:35 तो इस केस में आयुर्वेद में क्या सोच सकते हैं शोधन और शमन चिकित्सा के बारे में भी मार्गदर्शन करें एक्सीडेंट हो गया तो संप्राप्ति वात रक्त हेड इंजरी होके कोमा में हो हो गया था तो मस्तिष्क से संबंध रखने वाला व्यापद है ये तो ऐसा होता है तो ब्रेन की सिर्फ मत ट्रीटमेंट करें हृदय रोग की भी करें और वृ रोग की भी करें वहां की जो पित्त शगन करने वाली दवा आनी चाहिए गुगुल दे सकते है शता गुरु दे सकते हैं हृदय को आवरण करना चाहिए इसलिए सुवर्ण भस्म या योगेंद्र इस्तेमाल कर सकते हैं चेस्ट के ऊपर बला की घड़ी रख सकते हैं और स्नेहम संयुक्त पक्षात विरेचन तो विरेचन करना जरूरी है स्नेहन करके उसके बाद तिलक सिद्ध गुरु सातला सिद्ध गुरुत

40:21 अगर दे तो पेट भी साफ होता जाएगा गणी अच्छी हो जाएगी और उसकी वजह से मज्जा धातु और आंखें भी अच्छा होना शुरू हो जाएगा जीवा स्तंभ कषाय देना चाहिए जबान को लगाने के लिए कल्याणक देना चाहिए स्नायु के मसल के ऊपर का अगर काम करना है तो स्नायु चूर्ण जो है स्वर्ण सिंदूर रोग के साथ देना चाहिए बिलवादी अमृता मंडुर जो मसी रोग की दवा है वो देनी चाहिए इनमें जो दोष धातु और मल विकृत है उसके हिसाब से अभी जो दवा दी है वो इस्तेमाल करनी चाहिए। तो इससे उनका हाथ पैर जो हिलता नहीं वो हिलना शुरू हो गया हो जाएगा। मेरे पास एक सपरे नाम के पेशेंट आते थे और उनके जो डैडी थे वो

41:10 70 बरस के थे और वो सब अच्छी तरह से घर पर ट्रीटमेंट सब पूरा घर खानदान उनका ट्रीटमेंट लेता था। अच्छा असर आता था इसलिए वो आते थे। पुरानी बात कर रहा हूं। 25 बरस तो कम से कम हो गए होंगे। एक दिन क्या हो गया? वो घबरा कर आ गई दवाखाने में 8:00 बजे थे रात के और बोली डॉक्टर डॉक्टर मेरे डैडी कुछ तो अलग बोल रहे हो मैंने बोला क्या हो गया है तो उसका राइट लेग जो है ना वो जलन हो रही है आंख कर रही है मैंने बोला इसमें क्या है प्रॉब्लम ना तो बोली उनको राइट लेग है ही नहीं और फिर भी वो बोल रहे मैंने बोला ये क्या बात हो गई तो रेलवे के नीचे उसका पांव ये हो गया था हो गया था एक्सीडेंट की वजह से तो उनका लेफ्ट लेग था और राइट लेग

41:56 जो है ना वो था ही नहीं और वो बोल रहे थे कि उसका तलवार जो है ना वहां जलन हो रही है। देखो कर्मेंद्रिय गया है अधिष्ठान लेकिन उसका जो मूल इंद्रिय है वो ब्रेन में वैसा का वैसा है ना तो मैं हैरान हो गया इसकी कैसे मैं ट्रीटमेंट करूंगा ना जो पाव है ही नहीं जिसका अभाव है उसकी ट्रीटमेंट कैसा करें और उस तो मैं बहुत ही छोटा बच्चा था 15 वर्ष मेरा बहुत ही कम प्रैक्टिस था ना उस वक्त 15 वर्ष कुछ भी नहीं थे अभी 40 वर्ष के हिसाब से देखा जाए तो तो मैं हैरान हो गया अभी क्या करूं उस वक्त नाड़ी परीक्षा भी हमारे साथ नहीं तो मैंने सोच लिया कि इसको कुछ तो अलग करना चाहिए यार। तो मैंने बोला कि उनको लेकर आ सकते हैं क्या? वो बोले वो चल नहीं सकते।

42:43 बूढ़े हैं वो। तो मुझे एक बात समझ में आ गई कि मिरर इमेज जो रहती है ना वो उसका हम फायदा करेंगे। अभी तो एक बड़ा आरसा जो है ना वो बीच में लगा दिया। उसमें लेफ्ट पाव जो है ना उसका इमेज हमने ले ली। और राइट पाव उनका था ही नहीं। उनको बोला कि ये राइट जो आपके आईने में जो प्रतिबिंब आ गया उसकी तरफ आप देख लो और उसके बेटी को बताया कि लेफ्ट लेग जो है उसके नीचे क्या करो दवा लगा दो पद्मगादी शुरू वगैरह ठंडी दवा है और क्या होता है देख लेंगे आप बिलीव नहीं करेंगे 15 मिनट में पेन गायब उसका जो मिरेबल फील होता था तो पूरा निकल गया तो ब्रेन को क्या लगा वो देख रहे थे ना पांव उनको लगा कि मेरे राइट साइड के पाव को वो

43:29 लगा रहे और काम बन गया मेरा। उसके बाद इतने पेशेंट उन्होंने मेरे पास रहे कि ये डॉक्टर कुछ भी करता है आरटी में करता है। तो ऐसी बातें हो जाती है। ऐसा उनको कर लो। उसका पांव है टूटा नहीं है। तो रेलवे के नीचे उसको लेके जाना है। ऐसा नहीं करना है। लेकिन आप आए ना तो इस्तेमाल कर सकते हैं ना। अलग आने द हो सकता है। हो गया। प्रणाम गुरु प्रणाम गुरुजी एवी लेप और बम शूट लेप कब कौन सा देना है और उसका निक कौन सा देना चाहिए अस्थि विद का लेप जो है वो ब्रेन में ट्यूमर्स रहे गाठे रहे ए्रोपी रहे या वात की कोई बीमारी रहे तो

44:15 अस्थि विद का लेप करना है वो आप वर्टिकल कॉलम को कर सकते हैं एक्समिटीज को कर सकते हैं गांठों के ऊपर कर सकते हैं प्लस सिर के ऊपर कर सकते सिर के ऊपर लगाने के लिए वो ज्यादा फायदा ऑस्ट्रोसाइटोमा वगैरह जो रहता है ग्लमा के तरीके उसके ऊपर वो फायदा करता है। वैस्कुलर कोई प्रॉब्लम रहे रक्त वाहिनी के तो आपको बांबू शूट का लेप इस्तेमाल करना है और उसमें ब्रेन एट्रोपी हाइपरट्रोपी खून की नसे फट जाना हेमेटोमा हो जाना मिड लाइन शिफ्ट रही तो पों्स मेडुला में ब्लीड रही तो सब जगह इस्तेमाल करते हैं। वो हमारे सिर को लगाना है। पीठ की हड्डी को कभी-कभी लगाना है। उसमें वजह वगैरह रहता है। इसलिए सन्यासपन गण के हिसाब से हम इस्तेमाल करते हैं।

45:02 ब्रेन में अंदर गाठे रहेगी तो आप बांबू शूट का भी तेल डाल सकते हैं। लेकिन अस का तेल ज्यादा फायदा करेगा। वो दोनों कभी भी आप इस्तेमाल कर सकते हैं। कासेस भस्म लोह भस्म और मंडूर कब कौन सा देना चाहिए? कासिस लोह और मंडूर भस्म। खून की कमी है और उसको इमीडिएट बढ़ाना है तो आपको कासिस भस्म फायदा करेगा। शरीर में पांडु या रक्ताल्पता है। शुक्र की दृष्टि है। काम वासना कम हो गई है। मोटापा बढ़ गया है। स्वर्ण माक्षक आप दे सकते हैं। मक्खन के साथ और शक्कर के साथ मंडूर हर जगह इस्तेमाल कर सकते हैं। जो लोग मोटे बड़े हैं, स्थल है, अर्श है या

45:47 मेदो रोग है और रक्ताल्पता है वहां मंडूर इस्तेमाल कर सकते हैं। मंडूर हजम होने के लिए आपको तक्रम मंडूर वग़ैरह इस्तेमाल करना ज्यादा अच्छा है। या विडंग के चूर्ण के साथ वह ज्यादा अच्छी तरह से हजम हो जाता है। या आपको ये पंचतिक जो है उसके घी के साथ वो देना चाहिए। इजीली डाइजेस्टेड ऐसा भस्म कौन सा है? लोहे का तो कांत लोह है। कांत लोह आप सब जगह इस्तेमाल कर सकते हैं। लोह भस्म जो है ना वो 100 बार मारा हुआ जो रहता है वो बहुत फायदा करता है। लेकिन मेरा ऐसा मानना है और तजुर्बा भी है। मैंने इस्तेमाल नहीं किया है। हॉस्पिटल में जब थे हम एक्सपेरिमेंट करते थे तो आधुनिक शास्त्री जो फेरस के डेरिवेटिव जो है ना वो बहुत ज्यादा इमीडिएट असिलाइज हो जाते हैं।

46:33 तरीका वही है लोह वो भी लोहे इस्तेमाल करते हैं। हम भी करते हैं। लेकिन हमारे लोहे से जितना खून बढ़ता नहीं उतना उनसे क्यों बढ़ता है? तो उसके वो क्षार दे देते हैं। उसके साथ अल्कलाइट अलग-अलग दे देते हैं। तो उसका फायदा इमीडिएट हो जाता है। है ना? लेकिन हमारा भस्म अगर करना है तो वो 100 बार अगर मारा हुआ रहे तो इमीडिएट असर करता है। कम मारा हुआ भस्म 25 बार वगैरह मारा हुआ जो लो भस्म है ना वो ज्यादा अच्छा असर करता नहीं। तो कासिस इस्तेमाल करो या वनस्पति के पत्ते के रस जो है ना वो दे दो। मैग्नीशियम रिप्लेस हो जाता है एफसी से और खून बढ़ना शुरू हो जाता है।

47:18 सर नौ साल की बच्ची है फीमेल पेशेंट है। उसको बारंबार प्रतिशय के वेग आते हैं। हर 15 दिन में आते थे और जब प्रतिशय के वेग आते थे तो ओ2 सैचुरेशन उसका डाउन हो के 20% तक जाता था। चेस्ट का एक्सरे किया तो एचआरएडी डिटेक्ट हुआ था। लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक इनफेक्शन भी था। फिजिकल अपीयरेंस में सर बॉडी उसकी लीन एंड थिन थी और बैरल शेप चेस्ट है उसकी तो उसको सर श्वास कास का वगैरह फार्मूला दिया है। तो अभी डेढ़ महीने में तो उसको प्रतिष्ठा एक बार भी नहीं आए। लेकिन सर उसकी अनुवंशिकता है कि उसको मां को भी अस्थ अस्थमा की प्रॉब्लम थी और नाना जी को भी थी। तो सर अनुवंशिकता के हिसाब से हम क्या दुष्ट स्तन्य जन्य विकार की भी मेडिसिन उसमें ऐड कर सकते हैं। दुष्ट स्तन्य जन्य के विकार की

48:04 ट्रीटमेंट करें और जो पंछी रहते हैं ना पंछी उनका फेफड़ा अच्छा रहता है और हड्डियों में आकाश मामू ज्यादा रहता है। तो उससे सबसे अच्छा मयूर पिच्छा का आयुर्वेद ने इस्तेमाल किया है। लेकिन आप कोमड़ी जो रहती है ना हेन कोमड़ा रहे तो तो वो भी चलेगा। उसके ये पर का जो भस्म रहता है ना या मशी वो इस्तेमाल करें और शाग जो है ना शाकोटक टी जो जिससे बनता है वो उसके पत्ते जो है ना उसको एरंडे का तेल लगाना है और उसको जलाना है पड़े हुए पत्ते जो सूखे रहते हैं वो भी चलता है तो आप बिलीव नहीं करेंगे इतना वो दमे के ऊपर असर करता है तो वो आप कर दे उससे क्या हो जाएगा बैरल शेप वगैरह या पिजन शेप जो ये होती जाती है ना चेस वो दब जाती है उसके के साथ उसको ये देना है

48:53 महापशाचिक गुरु देना है शाम को सुबह को चव पास देना है तो उसका चेस्ट का हिस्सा जो है रिफॉर्म होना शुरू हो जाएगा और जब तक उसकी पीरियड शुरू नहीं होती तब तक दवा जानी चाहिए ये करने से फायदा हो जाता है हमारे जो फेफड़े है वो आधे कहां लटक रहे वनस्पति के लटक रहे हम ऑक्सीजन लेते हैं कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते वो कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं तो हमारे फेफड़े आधे हमारे यहां आधे बाहर वृक्ष के ऊपर लटक रहे। ऐसा पत्ता सा का लेना है। साक क्या करता है? पत्ता क्या करता है? शसोश्वास करता है। तो उसका फेफड़ा है वो। वो जब लेते हैं शाक का पत्ता और हाथ के ऊपर घिसते तो लाल हो जाता है। हमारे फेफड़ों की उत्पत्ति से रक्त के फेन से तो उसका फेफड़ा है। वो

49:41 ऑक्सीजन छोड़ रहा है। वो लाल रंग का है। उसको जला रहे हैं। उसकी क्षार बनाएंगे और वो हम पेट में धकेलेंगे। तो कफ का निस्तरण करने ही वाला है। वो रक्षा ले ली तो जाएगा कहां? दौड़ते दौड़ते मैं अभी लीवर की तरफ जाता है। नहीं वो फेफड़ों की तरफ भी जाता है। पहले लीवर की तरफ भी जाता है और बाद में मल मूत्र के ऊपर जाता है। तो कौन सी दवा चूस कर रहे हैं ना उसमें एनालॉजी बहुत इंपॉर्टेंट होती है। पुरुषोम लोक संहिता सिद्धांत जो है वो इंपॉर्टेंट है। अभी टच मी नॉट किसको बोलते हैं? लज्जालु को। जरा सा उसके पास गए तो शर्माती है वो। तो जिसको शर्म नहीं आती है ऐसी औरतों को हम दे सकते हैं ना उसका भी घी बनाकर देख के देख लो समंगा या लज्जालु मानस रोग के लिए दवा आ गई और संगण के लिए भी आ गई तो मनस

50:28 मानस रोग की दवा भी वो उसका सिकुड़ना जो है ना अदर देख सकते हैं हम है ना ये सोच आप डेवलप करो और उसके साथ द्रवण कर्म लगाओ तो आयुर्वेद में जो मजा है ना वो अमृत में भी नहीं है ना मैंने नहीं पिया है लेकिन मुझे ऐसा लगता है आयुर्वेद नाम बताया ना तो अमृत है आयुर्वेद सर 60 ईयर की फीमेल पेशेंट है सर उनको एमआरआई में क्रॉनिक माइक्रोवस्कुलर डिसीज डिटेक्ट हुआ था और इसे चेंजेस थे वाइट मैटर में तो उनके लक्षणों में सर चलने में असमर्थता थी खाली जगह रहती थी तो वो नहीं चल पाते थे तो मस्तिष्क गत रोग की दवाइयां जो है बिलवादी अमृता मंडूर वगैरह वो दे दी

51:16 थी। स्नायु शूलर दे दिया था। तो सर पहले महीने में बहुत अच्छा रिजल्ट आया उनको। अभी चलने में भी दिक्कत नहीं आती थी। लेकिन अभी भी वो थोड़ा सा वॉकर लेके चलती है। पहले उनकी सिक्स ईयर और बीपी हाइपर हाइपरटेंशन भी और डायबिटीज भी है उनको। उसकी दवाइयां चल रही है। जो लेकिन सर पहले महीने में रिजल्ट आया था। अभी दो महीने हुए हैं मेडिसिन देते हुए लेकिन वो रिजल्ट अभी स्टगेंट है उसके आगे नहीं बढ़ रहा है। ब्रेन आर्टिक एट्रोपिक ऑफ फॉर्मुलेशन सुबह को दे दो उसको और महामारी ग्रुत के साथ दे दो। ब्राह्मी ग्रुत और महा कल्याणक ग्रुत दोनों नहीं महामारी ग्रुत दे दो। अभी तुमने जो इस्तेमाल किया वनस्पति द्रव्य है। मैं प्राणी द्रव्य बता रहा है। मोर है उड़ने वाला है। उसकी हड्डियां और यह जो है

52:01 वह अलग है। मैंने अभी बताया तो उसका आंसर आ जाएगा और सिर जो है ना उसके बाल कटवा कर दवा करने के लिए कर देना। लेप की अस्थि विद का लेप करो। मुस्तादीपन बस्ती करो नाभि पूर्ण करो बादाम तेल से और उसको साइकिल अगर चलानी वगैरह आती है तो जहां पाव आप रेस कर सकते हैं ऐसी साइकिल लेनी है और चलानी है काइनेटिक साइकिल स्टैटिक नहीं उल्टा चलना है गिरकी लगानी है एक पाव के ऊपर खड़े रहना है और वकर से बेहतर है का लाठी लेने के लिए कह दो दीवार के ऊपर एक हाथ दूसरा लाठी के ऊपर और चलना है और उसको बोलो कि दो तीन बार आप गिर जाओ गिरने से क्या हो जाएगा बैलेंसिंग छोटा बिंदु जल्दी करता है और उसकी वजह से क्या होता है वो उसमें जल्दी सुधार आना शुरू हो जाता है।

52:48 है ना नमस्ते सर वो पारद के बारे में मुझे पूछना था जो हिंक्त पारद होता है पारद अभी मिलता नहीं यानी हिंुली मिलता नहीं तो पारद काहे का जहां उसकी म है वहां मिल जाएगा थोड़ा सा इटली में वगैरह लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद आपको मिलेगा अदरवाइज आपको रस सिंदूरी मिलेगा जो सॉफ्ट सिनेबार होता वो मिल गया मुझे एक किलो। अच्छा तो उसमें से कम से कम वेस्टेज हो। ऐसा कौन सा तरीका है भारत में? अदपातन ये करना है। मतलब अभी के इसमें कैसे करें? अद्रक सरस में घोट के उसको अंदर से लगाना है। इसके

53:34 अतन नियंत्रण में और अग्नि लगाकर नीचे के पात्र में उसको लेना है। उड़ाना नहीं उसको। नीचे गिरना चाहिए। उड़ाने से क्या होता है? वेपराइज हो जाता है। वेस्ट हो जाता है। मतलब ग्रंथों में उर्ध्वपन उर्ध्वपातन अ पातन और तिर्यक पातन रहते उसमें से अध पातन करो और उस बाकी अष्ट संस्कार करने का जरूरत नहीं है। ऐसे बोला है हां वो बोलते हैं और नहीं किया तो चलता है लेकिन अष्ट संस्कार ये धातुवाद के लिए भी फायदा करने वाला है। सोना वगैरह तैयार करने के लिए इस्तेमाल करते थे पुराने जमाने आप सिर्फ रसों से शुद्ध करके भी ले सकते हैं या आद पातीत सीने से तैयार किया हुआ पार भी चलता है

54:21 रसराज रस में अभ्रक सत्व ऐसा एक कंटेंट है तो वो अभ्रक सत्व कैसे अभ्रक का सतपातन बताया ना एलुमिनियम जैसा जो सत्व उसका निकलता है ना वो उसका जारण करना होता है या ढालन करना होता है इसमें पार लेकिन मेरा ऐसा मानना है कि आप पारद का कल्प इस्तेमाल करो और उसके साथ सहस्त्र अभ्रक दे दो वो ज्यादा अच्छा रहेगा जब जागरण वारा करते ये चीजें जो है ना पुराने ग्रंथ में जो बताया है ग्रास निर्माण करना है गुषित करना है ग्रास देना है वग ये चीजें बहुत तगड़ी और बहुत मेहनत की मेहनत के काम है और उसका रिजल्ट आते वक्त कैंसर अच्छा हो गया या किडनी फेलियर अच्छी हो गई इतना उसका असर एकदम आता नहीं अष्ट

55:08 संस्कारित पारा लेने के बाद वो चीजें हो सकती है या शगुण बल रस ग्रंथोत्तर तरीके से तैयार किया तो ये हो सकता है आप अगर प्रैक्टिस में इस्तेमाल करने आने वाले हैं ना तो पारद का जो बंद रहेगा उसके साथ आप अच्छी तरीके से बनाया हुआ पकाया हुआ भस्म इस्तेमाल करें जिसका अमृतीकरण हो गया है और जो सेंद्रिय हो गए हो 100 माइक्रो मिली मीटर इक्वल टू वन नैनो पार्ट जो बोलते हैं ना लोग तो उससे कई गुना ज्यादा हमारा भस्म सूक्ष्म रहता है। अच्छी कृत किया हो तो वो उसके पीछे आप लगे सर मुरवा नाम से जो वनस्पति है वहां पर क्या स्थान मुरवा मुरवा अगर आपको देखनी है अभी भी मिलेगी यहां का जो बोबदेव घाट है

55:55 ना माऊली की जो ये जाती है यात्रा जाती है सासवड़ को तो बीच का जो घाट है ना वो बोबदेव घाट है वहां अभी उसके तीन पत्ते ऐसे रहते उसके और सफेद फूल रहता है सुगंधी वो मुरवा है और इतनी मुरवा है कि पूरे भारतवर्ष को हम सप्लाई कर थे। इतनी मुरवा मुरवा के प्रत्यंचा बनाते थे। धनुष बाण की जो दोरी रहती है ना वो मुरवा से बना बनाते थे। पुराने जमाने में रक्त शोधन करने वाली एकदम अच्छी दवा है वो। सर हपुषा के लिए क्या इस्तेमाल? अपुष मिलती है ना यानी दुकानदार के पास मिलती है वो सप्तंगी देते दे देते हैं बराबर है अपुष के लिए मरीज दही में डाला हुआ मरीज

56:40 जो रहता है शुद्ध किया हुआ या छाछ में वो निकाल कर वो इस्तेमाल करो आप आज एक एसएल एसएल के पेशेंट ने शक्कर का चवनप्राश के साथ उपयोग किया था एसएल के लोगों के लिए और मल्टी क्लेरोसिस के जो औरतें रहते हैं लोग रहते हैं उनके लिए जो पौष्टिक चीजें देनी है ना उसके लिए बड़े महाराज जी ने हमें कुछ योग बताए थे उसमें लाल रंग का विदारी कंद और ये शकरकंद ये दो चीजें आ गई थी चवनप्राश के साथ इसलिए मैंने वो ले लिया लाल रंग का विदारी तो मिलता नहीं वो भीमा शंकर के जंगल में मिलता है लेकिन कम मिलता है बहुत इसलिए वो

57:26 मैंने थोड़ा सा चेंज करके फॉर्मुलेशन दे दिए। नमस्ते सर। हां। सज क्षार और क्षार वर के साथ जो दिया जाता है ये किस अवस्था में दिया जाता है? कौन देता है? हमने दिया है किसको? हां सर। परसों के दिन एक लेडी पेशेंट आई थी। वो कर्ण रोग या मुख रोग की औरत थी। कंठ रोग या मुख रोग की औरत थी। तो मुख रोग का जो वर्णन आ गया है ना उसमें ये रहे जबान की बीमारी रहे छीन की रहे चीक की रहे अंदर से कुछ जख्म है मल्टीपल ये आ गए फाइब फाइब्रोसिस तैयार मुंह में हो गई है ऐसी

58:12 जो औरतें रहती है या पुरुष रहते हैं या कैंसर के पेशेंट रहते हैं उनको तण धान्य इस्तेमाल करना है य इस्तेमाल करना है और यव क्षार सजी क्षार में डालकर मूंग की दाल या की दाल पकानी है और बाकी का कपकना अन्न खाना है। ऐसा वागभ जी ने परेज दे दिया है। तो आप बिलीव नहीं करेंगे दो तीन पंक्तियों में बताई हुई जो चीजें है ना वो वे डिफरेंस कर देती है ट्रीटमेंट में। तो कैंसर के हमारे पेशेंट हमारे यहां जो आता है बकल कैविटी का कैंसर वाला उनमें हम ये सोच एक्सबिट करते हैं तो और ज्यादा फायदा उन लोगों को होता है मैगेंसी ज्यादा बढ़ती नहीं इसलिए वो दे दिए। आमतौर पर वो देने की चीज नहीं। जैसा दही खाने के बाद मूंग की दाल या तवरर की दाल खानी है या उसके साथ शक्कर खानी है या आमल की खानी है। ऐसा

59:00 बताया ना वैसे वो एंटीडोट रहते हैं छोटे से लेकिन बहुत ज्यादा फर्क करते हैं। आम बहुत सारे लोग खाते हैं और पेट बिगड़ जाता है। तो आम का एंटीडोट दूध रहता है। एक चम्मच दूध उनको पी पीने के लिए देना है। चावल बहुत सारे लोगों को पसंद होते है। छोड़ते ही नहीं। तो उनको चावल तैयार करने का तरीका जो है बदलना है। मसल के चावल लेने, पानी निकालना है। बाहर पकाना है। दो बार उसकी गंजी निकालनी है और उसके साथ नारियल खाने के लिए देना है। तो कितना भी चावल खाए कुछ तकलीफ नहीं होती। तो ये आयुर्वेद की जो सोच है ना एकदम हटके है। इसलिए अजी मंजरी नाम की किताब आप पढ़े। वो बहुत बड़ी किताब है। उसमें दो पन्ने हैं। हां बोल रहे।

59:45 सर 23 ईयर की फीमेल पेशेंट थी। पीसीओडी का नॉन केस था आज का। खाली थी और तारुणी पिटिका की कंप्लेंट थी और माइग्रेन की कंप्लेंट थी। तो ऐसा बोला पेशेंट ने कि चेहरे पर और बालों में स्निग्धता रहती है और पूरे बॉडी में रुक्षता रहती है। ऐसा बोला और उसको मेंस्टुशन वगैरह सब उसका रेगुलर था। लेकिन फिर भी पीसीओडी की नोन केस थी सर। तो हां पीसीओडी है और पीरियड नॉर्मल है ऐसा ज्यादा होता नहीं। अभी क्या होता है थोड़ा सा भी फुंसी जैसा भी ये बढ़ गया ना ओवरी का आकार थोड़ा सा भी बढ़ गया तो पीसीओडी लेवल कर देते हैं डॉक्टर लोग चेहरा किसका है? शुक्र का है। वहां

1:00:31 स्निग्धता रहेगी। हमारा भेजा कैसा तैयार हो गया है? खोपड़ी में पहले मेद धातु आ गया और उसका कन्वर्जन बाद में मज्जा में हो गया। तो मज्जा रहे या मेद रहे उसकी योनि क्या है? स्निग्ध योनि चेहरा शुक्र का स्निग्ध योनि तो हमारे शरीर में जो हीट सेंटर है उसको कंपनसेट करने के लिए वहां हीट के साथ साथ ये आ गया है तेज से क्या हो जाएगा वो पिघलेगा और उसकी वजह से चेहरा वगरा सब स्लि हो गया है अभी जो मूल में वो सब शरीर में होना चाहिए वहां तो नहीं है तो बाकी जगह वात प्रकोप जैसी लक्षण है तो ऐसे लोगों को जो सानिपातिक अवस्था रहती है उसकी ट्रीटमेंट करनी है ऐसा साथ कब करना है जब आपको समझ में नहीं आ जाता और संप्राप्ति अगर निड रहे तो उसको आप संधिप

1:01:18 जैसा ही ट्रीट करें क्षण दहा क्षणित अस संधिजा सा निर्ग चाप सरजो करणो ऐसी जो लक्षण उन्होंने बताया वो दिखता है पेशेंट के सामने बुखार नहीं रहता मन नाराज रहता है मन संताप लक्षण ज्वर का लक्षण बताया तो ज्वर की ट्रीटमेंट सपातिका अगर दी जाए तो ये सब सिम्टम कम आ जाते हैं। सिर का जो स्नेह है वो इवनली सब जगह डिस्प्स हो जाता है और पूरा शरीर अच्छा हो जाता है। कल एक फीमेल पेशेंट आई थी कैंसर की आपने उसको सुरन की सब्जी चंस के कोल के साथ लेने के लिए बोला था। हां सुरण में ऑलिक क्रिस्टल रहते हैं इसलिए इमली इस्तेमाल की

1:02:05 है। बाकी जो है वो यकृत उत्तेजना गु मार्ग के अश कम होने के लिए और एलिमेंट्री कैनाल में जहां कहीं ऑस्ट्रेशन आता है वो सुरण या मानकंद निकाल देता है। विसन डिसीज नाम का जो डिसीज है ना जिसमें ये हो जाता है लीवर में कॉपर जम जाता है। उसमें तो सुरण की सब्जी और जो बड़ा नींबू होता है ई नींबू जो होता है ना या डंपर जिसको बोलते हैं उसका रस पीने से ही वो अच्छे हो जाते हैं लोग हां पेशेंट को कमल का गट्टा भी बोला था किसको कैंसर की पेशेंट थी सर वो दांत था इसलिए मैंने बताया कमल का गट्टा और कमल ककड़ी जहां तैयार होती है जो ये रहता है ना

1:02:51 थैलेमस फूल का रहता है ना फूल के हिस्से रहते हैं ना कैलस करोला एंडो ियम गसियम एंडोसियम गसियम जहां ये होता है अंदर वो थैलेमस का हिस्सा रहता है तो वो खाने के लिए दे दिया है ठंडाई लाने के लिए क्योंकि कीचड़ में तैयार होने वाली और दलदल से तैयार होने वाली चीजें उसमें शीतता बहुत ज्यादा रहती है इसलिए सर एकिला रीजन और ग्रोइंग रीजन में मल्टीपल बॉइल्स रहे और उसमें बॉइल्स हां यािस नाम का पेशेंट जो है आ गई उन्होंने ट्रीटमेंट नहीं ले ली क्योंकि दवा हमने ट्रीटमेंट बताई थी उसमें ट्रीटमेंट का विचार कैसे करें उसमें पहले तो शतपक नाम का जो भगंदर का प्रकार है ना

1:03:38 वो रहता है उनका और भगंदर यानी एन चैनल के पास ही होना चाहिए ऐसी कोई बात नहीं नाड़ीवरण बोल सकते हैं शतपक नाड़ीवरण थे वो और स्किन खराब रहती है आरपीट के यहां वगैरह जहां पसीना ज्यादा आता है वहां के रोम रद्र जो है या स्वध स्रोत जो है ना उसकी खराबी रहती है और बहुत गंदी बीमारी है। उस पेशेंट के पीछे डेढ़ डेढ़ बरस लगना होता है। कभी कबभार सर्जन से वो ट्रैक्स जो है वो कट करके हमें ट्रीटमेंट करनी पड़ती है तो ही वो अच्छे हो जाते हैं। 100 में से 30 लोग अच्छे हो सकते हैं उनसे। 70 लोग ट्रीटमेंट लेने लेते वक्त बोर हो जाते हैं क्योंकि बहुत लंबी ट्रीटमेंट होती है और थोड़ा सा खाना इधर-उधर हो गया तो ये तकलीफ पे बड़ जाती है। और इंद्र को यह बीमारी हो गई थी। उसके पूरे शरीर के ऊपर

1:04:26 फुंसियां ऐसी आ गई थी विस्फोट जैसी और पानी वगरा बहता था तो वसी यह बीमारी है और उसके बहुत पीछे लगना होता है स्वतस जो है वो श्वद को बाहर निकालता है श्वेद क्या है पित्तम तो श्वद रखते हो तो पित्त उसमें रहता ही है और पहले से ही ट्यूब रहती है वो खराब हो गई तो श्वद स्रोत किटने है हर एक खराब होना शुरू हो जाता है उसमें कुछ जो ग्लैंड्स रहते हैं वो यूरिया सीक्रेट करते हैं तो उसकी जो खराबी भी हो जाती है ना वो ज्यादा दिक्कत देती है और हर 100 रोम रंद्र के पीछे एक यूरिया सीक्रेट करने वाली ग्लैंड रहती है तो उसकी डेंसिटी बहुत ज्यादा रहती है इसलिए तकलीफ देने वाली चीज है लेकिन ट्रीटमेंट हो सकती है

1:05:11 अपन जेवन झंत शत पावली करला सांगतो डाव्या कुशीवर सहा श्वास नहीं पहले ना वज्रासन वज्रासन शत पावली नंत डाव्या कुशीवर साह श्वास 24 तो इसका इसके यहां मैं एक चीज बताता हूं कि ग्रंथ पढ़ते वक्त कैसी सोच हमारी रहती है और क्या हो सकता है सुश्रुत संहिता में ऐसा बताया है कि आप खाना खाने के बाद राजा जैसा बैठता है वैसा बैठो उन्होंने वज्रासन नहीं बताया तो राजा जो हम बोलते हैं ना तो हमने राजे कहां देखे यार हमने जो देखे वो रामायण और महाभारत में और मैं जैसा बैठा

1:05:57 है वैसा आसन के ऊपर वो बैठ जाते हैं। एक पांव ऐसा रहेगा ऐसा करके बैठेंगे वो वो राजा जैसी आपके मन में भाव आ गया ना नहीं गलत है आप लोग वज्रासन में बैठना है पाव जो है नीचे करके उसके ऊपर बैठना है घुटने सामने आने चाहिए ऐसा आप जमीन के ऊपर बैठना है उसको बोलते हैं राजा जैसा तो वज्रासन है और वज्रासन के यहां उन्होंने बताया कि खाना खाने वाली आसन करने से पेट की बीमारी होती नहीं राजा ऐसा क्यों बैठता है तो उठने में उसको दिक्कत नहीं होती इमीडिएट उठ सकता है पीछे से कोई गया यहां से कोई आ गया तो राजा जैसा बैठना चाहिए यानी वज्रासन तो वो होने के बाद क्या होता है पाव जब फोल्ड हो जाते हैं अग्नि अग्नि का पाव है ना तो उसकी लू जो आती है वो ऊपर अपान के क्षेत्र से ऊपर चढ़ जाती है और

1:06:43 आपका खाना हजम होना शुरू हो जाता है बुध मार्ग मूत्र मार्ग वगैरह जो ओपन रहते हैं लूज रहते हैं तो गैसेस वगैरह पास हो पेसिस अच्छी तरह से मेंटेन हो जाते हैं उसके साथ बाद में क्या करना करना है थोड़ा टहलना है ऐसा थोड़ा बैठना है कब तक बैठना है तो मैंने उसकी लिए एक तकरीब निकाली है कि 11 12 अहम वैवा प्राण नाम देता 15 अध्याय का जो श्लोक है ना वैर का वो आप पढ़े जप करें उसका तब तक आप बैठे और बाद में उठना है और तहल के आना है शत पाव यानी 100 पाव जो है वो चलने है और बाद में लेटना है तो ये करते वक्त आपके पहले दो तीन डकार नीचे ऊपर से आ जाती है बाद में लेटना है लेफ्ट साइड साइड के ऊपर आप सोते तो आपका पूरा आंत मुख

1:07:31 से लेकर उध मार्ग तक लीनियर हो जाता है। अच्छी तरह से लीवर में से जो पित्त है वो उसमें आना शुरू हो जाता है डजनम में। फिर 12 श्वास आपको राइट करोड के ऊपर सोना है तो पनक्रियाज के जूस अच्छी तरह से आने शुरू हो जाते हैं और आमाशय में जो कुछ काम चल रहा है हिलने का उसको भी मोशन दो बार उल्टी सीधी हो जाती है और खाना हजम होना शुरू हो जाता है दो अाई घंटे में खाना छोटे अंत में आ सकता है उतना धोपड़ का है जैसा इड़ा का सोच लिया पिघला का सोच लिया वैसा सुषमना का सोचना है तो 24 होने के बाद आपको अगर नींद लेनी है बूढ़े हो आप या बीमार हो तो सो सकते हैं नहीं तो काम को लगना है आपको। ये उसके पीछे का राज है। लेकिन राजा जैसा नहीं क्या वो मैंने आपको

1:08:16 अभी बताया। हो गया अजुन एक हां विचार स्किन सिंड्रोम उसके साथ इनफेक्शन रहे तो अलग विचार है। सिर्फ स्किन निकलती है तो कैल्शियम डेफिशिएंसी की वजह से हो सकता है। त्वचा किससे उत्पन्न होती है? एक्टोडर्म से होती है। उससे हमारा आंत का ऊपर वाला मुंह से डेढ़ इंच का भाग तैयार हो जाता है। इंच का नहीं विथ का और गुम मार्ग का हिस्सा जो है उससे ही बनता है। तो एक्टोडर्म यानी स्किन के ऊपर कुछ हो गया तो पेट की ट्रीटमेंट करनी है। पेट में कुछ हो गया तो स्किन की ट्रीटमेंट करनी है। तो आप उसको गणी की पहले ट्रीटमेंट ले दे। बाद में जैसा कुष् का बताया ना धातुगत कुष् वैसा रस धातुगत

1:09:02 कुष् है वो। इसके साथ साथ रस के यहां पैर होने वाली बीमारी कौन सी? ज्वर। तो ग्रहणी और ज्वर की ट्रीटमेंट कैसी करनी है? कुष्ठ ज्वर। कुष्ठ गणी के कम आना शुरू हो जाता है। इसमें कहरा पिष्टि शंख जी और बाल चंद्रद ये दवाई इस्तेमाल करनी होती है और खाना खाने के बाद वीर चंडेश्वर रस वो आप इस्तेमाल करके देख ले। हो गया। आता विश्व के देवे ये वावे तोवे पक सांडो तया परस्परे पड़ो

1:09:48 विश्व सुर पाो जो लाो प्राण जात वर्ष ईश्वर माारी अनवर भू मंडली भूताला से आरव चेतना चिंतामणि ते गाव बोल ते अरव से चंद्र में मार्तंड दे तापहीन ते सर्वा सदा सज्जन सो किना सर्व सुखी पूर्ण हो जो आदि पुरुष अंडित ग्र विशेष लोवे जी श्री विश्वेश्वरा हो दान पसाव

1:10:36 ज्ञान देव सुखने ज्ञान देव

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