Do this EVERYDAY - जो सोचोगे वो मिलेगा | 5 Steps to Achieve all your Goals | Sonu Sharma

SONU SHARMA www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में सोनू शर्मा ने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पांच महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर चर्चा की है। उन्होंने यह बताया कि अगर कोई व्यक्ति इन सिद्धांतों को अपनी जिंदगी में लागू करता है, तो वह अपने लक्ष्यों को आसानी से हासिल कर सकता है।

  • एक समय में एक ही लक्ष्य रखें।
  • अपने लक्ष्यों को 24 घंटे के लिए सीमित करें।
  • अपने लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से जानें।
  • अपने लक्ष्यों को लिखिए।
  • अपने लक्ष्यों को रोज़ याद रखें।

एक समय में एक ही लक्ष्य रखें

सोनू शर्मा ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति किसी एक ही लक्ष्य पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करता है, तो सफलता की संभावना अधिक होती है। उदाहरण के लिए, वे वारेन बफेट और बिल गेट्स के अनुभव को साझा करते हैं, जिन्होंने सफलता के लिए फोकस को महत्वपूर्ण बताया। एक कथा में, जैन साहित्यकार टोडरमल ने अपने ग्रंथ पर इस तरह फोकस किया कि उन्होंने खाना खाते समय अपनी मां की सब्जी में नमक की कमी को नोटिस नहीं किया। यह दिखाता है कि यदि कोई एक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करे, तो वह अपने अन्य कार्यों को भुला सकता है।

अपने लक्ष्यों को 24 घंटे के लिए सीमित करें

सोनू शर्मा ने सुझाव दिया कि हमें अपने लक्ष्यों को केवल 24 घंटों के लिए सीमित करना चाहिए, बजाय साल भर या महीने भर के लिए सोचने के। उन्होंने बताया कि रोज़ एक पन्ना लिखने से कैसे बड़े लेखक अपने लक्ष्यों को हासिल कर पाते हैं। दशरथ मांझी ने पहाड़ तोड़ने के लिए रोज़ एक पत्थर तोड़कर बड़ी उपलब्धि हासिल की। यह दर्शाता है कि छोटे छोटे लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने से बड़ी सफलताएँ संभव हैं।

अपने लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से जानें

उन्होंने स्पष्ट लक्ष्यों के महत्व पर चर्चा की और उदाहरण के लिए पृथ्वीराज चौहान की कहानी का उल्लेख किया, जो अपने लक्ष्य को स्पष्ट रूप से जानते थे। एक सेल्समैन की कहानी के माध्यम से यह बताया गया कि यदि आप अपने लक्ष्यों को स्पष्ट रूप से पहचानते हैं तो आप उन्हें हासिल कर सकते हैं। यह अवश्य सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि हम कहाँ जा रहे हैं और हमें क्या चाहिए।

अपने लक्ष्यों को लिखिए

लिखित लक्ष्यों के महत्व पर जोर देते हुए सोनू शर्मा ने कहा कि जो लोग अपने लक्ष्यों को लिखते हैं, वे बाकी लोगों की तुलना में 10 गुना अधिक सफल होते हैं। उन्होंने शोध और उदाहरणों का उल्लेख किया, जिससे साबित होता है कि लिखित लक्ष्यों के पास शक्ति होती है। जिम कैरी और ब्रूसली जैसे व्यक्तियों की कहानियों के माध्यम से यह दर्शाया गया कि जब आप अपने लक्ष्यों को लिखते हैं, तो वे साकार होते हैं।

अपने लक्ष्यों को रोज़ याद रखें

अंत में, सोनू शर्मा ने बताया कि अपने लक्ष्यों को रोज़ याद करना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने उद्धम सिंह की कहानी साझा की, जो 21 वर्षों से अपने लक्ष्य को याद करते रहे। यह दर्शाता है कि जब आपकी सोच लक्ष्यों पर केन्द्रित होती है, तो आप बाधाओं को नजरअंदाज कर सकते हैं और अवसरों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। यदि आप ध्यान केंद्रित रखते हैं, तो आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करते हैं।

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Transcript

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0:00 नमस्कार दोस्तों मैं सोनू शर्मा अगर किसी भी गोल को अचीव करना आसान होता तो इस दुनिया का हर इंसान कितना सुखी और शानदार जीवन जी रहा होता क्योंकि जो वो सोचता उसे तुरंत हासिल कर लेता दुनिया भर की गोल सेटिंग हर नए साल में होती है कि इस बार ये करेंगे इस बार वो करेंगे ऐसा कर डालूंगा वैसा कर डालूंगा लेकिन कितने लोगों के गोल आज तक अचीव हुए बस बातें ही रह जाती हैं गोल सेटिंग पर राइटर्स ने हजारों किताबें लिख डाली जिसमें दुनिया भर की बातें आपको बताई पर हुआ कुछ भी नहीं आज के इस वीडियो में आपको बहुत ही आसान पांच प्रिंसिपल दे रहा हूं और उन पांच में से एक भी अगर आपने ठीक से अपनी जिंदगी में इंप्लीमेंट कर लिया तो मेरा दावा है पूरी जिंदगी बदल सकती है इन्हीं प्रिंसिपल्स को

0:46 खुद पर अप्लाई करके मैंने बहुत कुछ पाया है किसी भी लक्ष्य तक पहुंचने का पहला और सबसे इंपॉर्टेंट प्रिंसिपल एक समय में एक ही गोल रखें और उसमें डूब जाएं फिर से कहता हूं एक समय में एक ही गोल रखें दुनिया के सबसे अमीर इंसान रहे वारेन बफेट और बिल गेट्स किसी प्रोग्राम में बातचीत कर रहे थे तभी किसी एग्जीक्यूटिव ने उनसे पूछा कि आपके हिसाब से बिजनेस में सक्सेस के लिए सबसे इंपॉर्टेंट क्वालिटी क्या है दोनों ने एक साथ जवाब दिया फोकस इसको एक सच्ची घटना से आपको समझाता हूं एक बहुत बड़े जैन साहित्यकार हुए टोडरमल वो मोक्ष मार्ग नाम से एक ग्रंथ लिख रहे थे और उनके जीवन का वही एकमात्र ऑब्जेक्टिव था एक दिन

1:34 खाना खाते वक्त उन्होंने अपनी मां से कहा मां आज आपने सब्जी में नमक नहीं डाला है मां बोली लगता है तुम्हारा ग्रंथ पूरा हो चुका है टोडरमर्ग ने हैरानी से पूछा आपको कैसे पता चला मां ने कहा मैं पिछले 6 महीने से सब्जी में नमक नहीं डाल रही लेकिन तब तेरा पूरा ध्यान उस ग्रंथ को लिखने में था इसलिए सब्जी की तरफ तेरा ध्यान ही नहीं गया और आज तेरा ध्यान गया इसलिए मैंने सोचा कि जरूर तेरा काम पूरा हो गया है कितनी कमाल की बात है कि कोई इंसान अपने किसी एक गोल में इतना डूबा हुआ है कि उसे किसी और चीज की परवाह ही नहीं है और मेरा भी यही मानना है कि सफलता का सबसे बड़ा सूत्र है एक टाइम पर एक ही जगह फोकस करना दोस्तों तीरंदाज जब तीर चलाता

2:20 है तो वो एक बार में एक ही गोल पर निशाना लगाता है गोली चलाने वाला भी एक समय पर एक ही को निशाना लगाता है मेरी बात याद रखें कि इंसानी दिमाग एक्चुअली में मल्टीटास्किंग के लिए बना ही नहीं है बेहद कामयाब राइटर हुए स्टीवन आर्कोवे जिन्होंने सेवन हैबिट्स ऑफ हाइली इफेक्टिव पीपल जैसी मास्टर किताब लिखी उन्होंने एक बार कहा था कि एक गोल होने पर कामयाब होने की पॉसिबिलिटीज बहुत बढ़ जाती हैं और जैसे-जैसे बहुत से गोल होते हैं किसी इंसान के वैसे-वैसे सक्सेस होने की पॉसिबिलिटीज कम हो जाती हैं डोमिनोज के फाउंडर टॉम मोनागन ने 1960 में जब डोमिनोज़ शुरू की तो उन्होंने शुरुआत में अपने यहां सैंडविच बर्गर कोल्ड ड्रिंक कुछ नहीं रखा उन्होंने सिर्फ एक चीज रखी

3:06 पिज़्ज़ा जानते हैं क्यों क्योंकि पिज़्ज़ा की फास्ट डिलीवरी उनका एकमात्र गोल था इसलिए जीवन में अगर आप कामयाब होना चाहते हैं तो एक बार में एक ही जगह दिल से फोकस करें मेरा एक्सपीरियंस कहता है कि बहुत कुछ एक साथ करने वाले कुछ भी नहीं कर पाते दोस्तों अपनी जिंदगी में हम कई बड़े गोल्स बनाते हैं पर एक छोटा सा लेकिन बेहद इंपॉर्टेंट गोल बनाना भूल जाते हैं और वह होता है आपकी हेल्थ और आपका हेल्थ इंश्योरेंस दोनों को ही इग्नोर करने की गलती भारी पड़ सकती है इसलिए अपनी हेल्थ का बहुत ध्यान रखें और अपना हेल्थ इंश्योरेंस जरूर करवाएं ताकि किसी तरह की अनहोनी में किसी के आगे हाथ ना फैलाना पड़े आप जानते ही हैं कि हॉस्पिटल के बिल ज्यादातर परिवार अफोर्ड नहीं कर सकते

3:51 इसलिए एक हेल्थ इंश्योरेंस आपके और आपके परिवार के लिए बहुत जरूरी है जो सिर्फ ₹300 से ₹400 पर मंथ में शुरू हो जाता है और आपको इन लाखों के मेडिकल बिल से बचाता है और इसमें 25% तक का डिस्काउंट आपको मिल जाएगा कुछ लोग कहते हैं कि उनके पास कंपनी का हेल्थ इंश्योरेंस है लेकिन उसमें कवरेज सिर्फ 3 से 4 लाख होता है और बहुत सारे रिस्ट्रिक्शन होते हैं और कंपनी स्विच करते ही वह इंश्योरेंस भी इनफेक्टिव हो जाता है इसलिए अपना और अपने परिवार का एक हेल्थ इंश्योरेंस प्लान जरूर लेना चाहिए लिंक आपको नीचे डिस्क्रिप्शन में जरूर दे दूंगा अब आपको गोल अचीव करने का दूसरा प्रिंसिपल बताता हूं ऑलवेज मेक योर गोल फॉर 24 आवर्स ओनली यह सोचना बंद कर दें कि इस पूरे साल मुझे क्या करना है यह भी

4:36 सोचना बंद कर दें कि इस पूरे महीने मुझे क्या करना है आप बस यह सोचें कि आज क्या हो सकता है अपना सारा ध्यान अपनी सारी एनर्जी सिर्फ आज के 24 घंटों पर फोकस कर दें इस मामले में आप टेस्ट क्रिकेट नहीं वन डे क्रिकेट नहीं सिर्फ T20 खेलें मेरी बात पर विश्वास करें कि अगर आप रोज सुबह उठकर एक कागज पर आज क्या करना है यह लिख लें और उसे पूरा करने में लग जाए तो सारा खेल बदल जाएगा एक बहुत बड़े राइटर हुए जॉन ग्रेशफ उन्होंने 45 से ज्यादा किताबें लिखी और जानते हैं उन्होंने ये काम सिर्फ 24 घंटे का गोल बनाकर किया कि हर दिन कम से कम एक पेज लिखना है चाहे जो हो जाए एक दिन एक पेज यानी लगभग 200 शब्द रोज यानी

5:23 वीक में हुए 1400 शब्द यही काम अगर आप 2 साल तक करें तो आप कमाल कर देंगे अमेरिकी राइटर जॉन अबडाइक हर रोज तीन पेज लिखते थे और ये फार्मूला उन्होंने जॉन बरनाड श से सीखा जो रोज पांच पेज लिखते थे और जब जॉन बरनाड श के पांच पेज पूरे हो जाते थे तो वो रुक जाते थे भले ही सेंटेंस अधूरा क्यों ना रह जाए साथियों दशरथ मांझी ने जब पहाड़ तोड़ना शुरू किया तो उनका एक ही गोल था रोज सिर्फ एक पत्थर तोड़ना देखो पहाड़ तोड़ना कितना मुश्किल लगता है लेकिन रोज एक पत्थर तोड़कर आप पहाड़ तक तोड़ सकते हैं और ऐसा करते-करते उन्होंने एक हथौड़ा और एक छेनी लेकर अकेले ही 360 फुट लंबी 30 फुट चौड़ी और 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काटकर

6:13 सड़क बना डाली जिसने अतरी और वजीरगंज ब्लॉक की दूरी को 55 कि.मी से 15 कि.मी कर दिया गोल्स बनाने के बाद सबसे मुश्किल दिन गोल बनाने का अगला दिन होता है दूसरा दिन सबसे मुश्किल होता है इसलिए लोग कोशिश करना ही छोड़ देते हैं इसलिए दूसरा दिन आने ही ना दें सिर्फ 24 घंटे के गोल बनाएं हमारा दिमाग किसी भी बड़ी चीज को देखकर घबरा जाता है अगर उसको छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर देखने लगे तो सब आसान ही लगता है माउंट एवरेस्ट को देखकर डर ही लगता है लेकिन अगर छोटे-छोटे पड़ाव लक्ष्य हो तो लोग एक दिन माउंट एवरेस्ट तक पहुंच ही जाते हैं छोटे गोल रखने का फायदा क्या है जानते हैं मैं बताता हूं आपके छोटे गोल के रास्ते में बाधाएं बहुत ही कम आती हैं और

7:00 आप जोश ठंडा होने से पहले ही उस गोल को अचीव कर लेते हैं सिंपल सी बात है मेरे दोस्त साइकिल की बजाय ट्रक को धकेलने में ज्यादा ताकत लगती है बस छोटी चीजें करते वक्त बड़ी चीजों के बारे में सोचना चाहिए ताकि सभी छोटी चीजें सही दिशा में हो अब आपको बताता हूं गोल्स को अचीव करने का तीसरा बेहद शानदार नियम बी क्लियर व्हाट यू वांट इन योर लाइफ आपके लक्ष्य बिल्कुल स्पष्ट होने चाहिए कोई इल्लुजन नहीं क्लियर गोल में कितनी ताकत होती है इसका सबसे बड़ा एग्जांपल है पृथ्वीराज चौहान जी हां जब मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को बंदी बना लिया था और उन्हें अपमानित करने के लिए उनकी परीक्षा ली कि वो अंधे होने के बावजूद शब्द भेदी बाण कैसे चला सकते हैं और जब चंद बरदाई ने पृथ्वीराज से

7:49 कहा चार बांस 24 गज अंगुल अष्ट प्रमाण ताऊ ऊपर सुल्तान है मत चूको चौहान चंद बरदाई ने पृथ्वीराज चौहान को उनका टारगेट बिल्कुल स्पष्ट बता दिया था कि मोहम्मद गौरी लगभग चार बांस की दूरी यानी 24 गज पर है और उसकी ऊंचाई लगभग आठ अंगुल है इसलिए निशाना मत चूकना और पृथ्वीराज ने तुरंत बाण चला दिया जो सीधा मोहम्मद गौरी के सर में लगा और जिससे उसकी मौत हो गई क्लियर गोल में इतनी बड़ी ताकत होती है इसको एक और तरीके से आपको समझाता हूं एक सेल्समैन एवरेज ₹50,000 महीना कमाता था लेकिन अगले महीने उसने ₹1 लाख कमाए जब उससे पूछा गया कि तुमने अपनी इनकम को डबल कैसे किया तो

8:34 उसने कहा मेरी वाइफ अभी हॉस्पिटल में है और मैं अच्छे से जानता हूं कि उसके इलाज के लिए मुझे हॉस्पिटल में इस महीने ₹1 लाख जमा करने ही होंगे मुझे बिल्कुल क्लियर था कि मुझे कैसे भी करके इस महीने ₹1 लाख चाहिए ही चाहिए बस यही राज है मेरे ₹1 लाख इस महीने कमाने का साथियों बात बड़ी सिंपल है अगर आपको क्लियर होता है कि आपको क्या चाहिए तो आप उसे हासिल कर ही लेते हैं एक बहुत पुरानी कहानी यह भी है कि एक तैराक तैर कर इंग्लिश चैनल पार करना चाहता था तैरते तैरते उसे आगे घना कोहरा दिखाई दिया और वो फंस गया और उसने कोशिश छोड़ दी बाद में उसे पता चला कि वो अपने गोल से सिर्फ 300 मीटर दूर था और उसने कहा अगर मुझे जमीन दिख रही होती तो मैं कोशिश करना नहीं

9:20 छोड़ता यानी अगर आपको आपका लक्ष्य साफ नजर आ रहा हो तो आप कोशिश करना कभी नहीं छोड़ते आप तो कोशिश तब छोड़ते हैं जब गोल्स क्लियर नजर नहीं आ रहा होता क्योंकि उस वक्त सिर्फ चैलेंजेस नजर आ रहे होते हैं यह ठीक ऐसा ही है कि अगर आप रेस्टोरेंट में जाकर यह कहते हैं कि मैं भूखा हूं मुझे कुछ चाहिए तो आप तब तक भूखे ही रहेंगे जब तक आप क्लियर नहीं बताते कि आपको चाहिए क्या इसलिए जिंदगी में आपको जो भी चाहिए वो आपके दिमाग में बिल्कुल क्लियर होना चाहिए सचिन बिल्कुल क्लियर थे कि क्रिकेटर बनना है के आसिफ बिल्कुल क्लियर थे कि डायरेक्टर बनना है मुगल आजम बनानी है नवाजुद्दीन सिद्दीकी बिल्कुल क्लियर थे कि एक्टर बनना है चाहे जो हो जाए और जितना भी टाइम लगे अब अपने गोल्स को पूरा करने का चौथा प्रिंसिपल आपको

10:06 बताता हूं लिख लें जी हां लिख लें अगर आप अलादीन के चिराग से फायदा उठाना चाहते हैं तो आपको चिराग को घिसना होगा उसी तरह अगर आप अपने गोल्स को पूरा करना चाहते हैं तो उसे आपको लिखना ही होगा जो भी आप पाना चाहते हैं उसे कागज पर लिख लें आपके गोल्स आपके दिमाग में नहीं कागज पर लिखे होने चाहिए आप लिखने की ताकत को बिल्कुल कम मत समझिए ब्रायन ट्रेसी कहते हैं कि सिर्फ 3% लोगों के पास रिटन गोल्स होते हैं और बाकी सारी दुनिया उन्हीं 3% लोगों के लिए काम करती है कुछ साल पहले हॉवर्ड बिजनेस स्कूल में एमबीए ग्रेजुएट्स पर रिसर्च हुई पता चला कि सिर्फ 3% बच्चों के पास अपने रिटन गोल्स थे 13% बच्चों के पास गोल तो थे पर लिखित रूप में नहीं थे और 84% के पास तो

10:53 कोई गोल ही नहीं था और जानते हैं बाद में क्या हुआ जिन 3% के पास रिटन गोल थे वो बाकी के 97% बच्चों से 10 गुना ज्यादा पैसा कमा रहे थे दोस्तों रिटन गोल्स कितने पावरफुल हो सकते हैं इसका एक बहुत बड़ा और शानदार उदाहरण आपको देता हूं ओलंपिक में डी कैथलॉन गोल्ड प्राइज विनर ब्रूस जेनर नए खिलाड़ियों से मिलने एक हॉल में गए जो आगे चलकर ओलंपिक में खेलना चाहते थे जेनर ने उन प्लेयर से पूछा कि आप में से कितने लोगों के पास आपके रिटर्न गोल्स हैं उस समय सिर्फ एक खिलाड़ी ने जी हां सिर्फ एक खिलाड़ी ने अपना हाथ उठाया उसका नाम डेन ऑफ ब्राइन था आप हैरान होंगे यह जानकर कि आगे चलकर डेन ऑफ ब्राइन ने 1996 में ओलंपिक में डी कैथलॉन में गोल्ड प्राइज

11:40 जीता लिखने से यह होता है जिम कैरी से बड़ा एग्जांपल नहीं मिलेगा 1990 में जब उन्होंने अपने ही नाम से $ मिलियन का चेक काटा और उसे अपने जेब में रख लिया और 95 में जब उन्हें डम एंड डंबर मिली तो ठीक $10 मिलियन उनको पे किए गए ब्रूसली ने अपने आप को लेटर लिखा कि एक दिन मैं दुनिया का सबसे बड़ा सुपरस्टार बन जाऊंगा और एक दिन ब्रूसली दुनिया के सबसे बड़े सुपरस्टार बन गए दोस्तों आप भी अपने लिए जिम कैरी के जैसा चेक काट सकते हैं आप भी अपने लिए ब्रूसली जैसा अचीवमेंट कर सकते हैं बस शर्त इतनी सी है कि आपको उसे अपने हाथों से लिखना ही होगा मोबाइल या लैपटॉप में टाइप करने की गलती बिल्कुल मत करना नोटबुक या डायरी में अपने क्लियर गोल अपने

12:25 खुद के हाथों से लिखना क्योंकि लिखना साइकोन्यूरो एक्टिविटी है लिखते समय आप सोचने और फोकस करने के लिए मजबूर हो जाते हैं और आपका कॉन्शियस माइंड पूरी तरह से एक्टिव हो जाता है और जैसा कि मैंने पिछले पॉइंट में बताया कि आपके गोल क्लियर होने चाहिए कि जैसा कि अगर आप कहें कि आज मैं बहुत माल बेचने वाला हूं तो यह गोल गलत है आपको कहना होगा कि आज मैं 20 प्रोडक्ट बेचूंगा और अगर आप कहें कि आज से मैं अपनी हेल्थ पर पूरा ध्यान दूंगा यह भी गलत गोल है सही यह होता कि जब आप कहते कि आज मैं 5 कि.मी पैदल चलूंगा मैं अपना वजन कम करूंगा फिर गलत मैं अपना वजन 5 किलो कम करूंगा ये सही है मैं बेस्ट सेलिंग राइटर बनूंगा गलत आज मैं हजार वर्ड्स लिखूंगा सही और याद

13:11 रखें सबसे इंपॉर्टेंट गोल हमेशा सबसे ऊपर लिखें क्योंकि उनके अचीव होने की पॉसिबिलिटीज सबसे ज्यादा होती है दोस्तों गोल्स को अचीव करने का पांचवा और आखिरी प्रिंसिपल आपको बता देता हूं आपको अपने गोल को हमेशा 24 घंटे याद रखना होगा अगर आप अपने गोल को 10 दिन में एक बार सोचते हैं तो क्या इतना काफी है बिल्कुल भी नहीं आपको तो उसके बारे में 1 दिन में 10 बार सोचना होगा यही प्रिंसिपल है कि अपने गोल को हमेशा याद रखें शहीद उद्धम सिंह का एक ही गोल था जनरल डायर की हत्या जब अप्रैल 13 1919 को जलियांवाला बांध नरसंहार हुआ उद्धम सिंह इसके चश्मदीद गवाह थे और उनकी उम्र कोई 19 साल रही होगी यहीं पर उन्होंने जलियांवाला बांध की मिट्टी हाथ

13:56 में लेकर जनरल डायर को मारने की प्रतिज्ञा ली और गोल सेट किया और वह रोज दिन में कम से कम 50 बार यही सोचते थे कि वो दिन कब आएगा और 13 मार्च 1940 को लंदन के कैस्टन हॉल में ईस्ट इंडिया एसोसिएशन और रॉयल सेंट्रल एशियन सोसाइटी की एक मीटिंग चल रही थी जहां उद्धम सिंह पहुंचे और उनके साथ एक किताब भी थी इस किताब में पन्नों को काटकर एक बंदूक रखी हुई थी इस मीटिंग के खत्म होने पर उधम सिंह ने किताब से बंदूक निकाली और कहा मेरा नाम उद्धम सिंह है और मैं तुम्हें आज से 19 साल पहले के जलियांवाला बाग नरसंहार के लिए दोषी मानते हुए सजा देने आया हूं और फिर उद्धम सिंह ने जनरल डायर पर फायर कर दिया डायर को दो गोलियां लगी और उनकी मौके पर मौत हो गई

14:42 1919 जलियांवाला बाग नरसंहार से लेकर 1940 में लंदन के कैप्टन हॉल तक के 21 सालों में उधम सिंह रोज अपने गोल को लेकर सोचते रहे और उसे अचीव करने के रास्ते निकालते रहे याद रहे कि गोल को हर दिन याद रखने से आपको दो फायदे होते हैं पहला आपका ध्यान ऑब्सकल पर कभी नहीं जाता और दूसरा आपका ध्यान सिर्फ ओपोरर्चुनिटी पर रहता है क्योंकि हम एक बार में सिर्फ एक चीज पर ही ध्यान लगा सकते हैं या तो प्रॉब्लम पर या फिर ओपोरर्चुनिटी पर इसको आप ऐसा भी समझ सकते हैं कि दो ऊंची बिल्डिंग के बीच में अगर एक लकड़ी का बड़ा फट्टा रख दिया जाए और चलने वाला सिर्फ सीधा ही देखता रहे तो आराम से वो एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग तक पहुंच जाएगा पर जैसे ही उसका ध्यान अपने गोल से हटकर नीचे की तरफ गया वो 100%

15:30 घबरा कर गिर पड़ेगा हेनरी फोर्ड कहते थे कि बाधाएं वो डरावनी चीज होती हैं जो आपको तब दिखती हैं जब आपका ध्यान आपके गोल पर से हट जाता है दोस्तों इंसान की रचना कुछ रचने के लिए ईश्वर ने करी है जीवन एक ही है इसका पूरा फायदा उठाएं अपने लाइफ गोल्स की दिशा में रोज कुछ ना कुछ जरूर करें सिर्फ वीडियो देखकर और किताब पढ़कर कुछ नहीं होगा यू शुड टेक एक्शन राइट नाउ उम्मीद करता हूं आज के ये पांच प्रिंसिपल आपको आपकी जिंदगी के सभी गोल्स को अचीव करने में आपकी मदद जरूर करेंगे अगले किसी और वीडियो के साथ जल्द आपसे मुलाकात करता हूं तब तक लग जाएं अपने सभी गोल्स को अचीव करने में और अगर वीडियो पसंद आया हो तो इसे कम से कम अपने पांच दोस्तों को जरूर

16:17 शेयर कर दें अपना हेल्थ इंश्योरेंस जरूर कराएं जय हिंद

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