The Warren Buffett Way By Robert Hagstrom | Book Summary in Hindi | Audiobook

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो "द वॉरेन बफेट वे" नामक पुस्तक का सारांश है, जो वॉरेन बफेट के निवेश सिद्धांतों और सोचने के तरीकों पर प्रकाश डालती है। यह पुस्तक केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि स्मार्ट निवेश और समझदारी से सोचने के लिए एक रोडमैप है।

मुख्य बातें:

  • धैर्य, अनुशासन और गहरी सोच से सफलता प्राप्त की जा सकती है।
  • वॉरेन बफेट के निवेश सिद्धांत स्टॉक टिप्स की तरह नहीं, बल्कि जीवन भर का दर्शन हैं।
  • भावनात्मक नियंत्रण और स्वतंत्र सोच निवेश में सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

परिचय

यह वीडियो वॉरेन बफेट के बारे में बात करता है, जो दुनिया के सबसे अमीर आदमियों में से एक हैं, लेकिन फिर भी साधारण कपड़े पहनते हैं और एक पुराने घर में रहते हैं। वह धैर्य, अनुशासन और गहरी सोच के माध्यम से पैसा बनाने की क्षमता का प्रतीक हैं। यह वीडियो "द वॉरेन बफेट वे" नामक पुस्तक पर आधारित है, जो स्मार्ट निवेश और समझदारी से सोचने के लिए एक रोडमैप प्रदान करती है। बिल मिलर और पीटर लिंच जैसे दिग्गज निवेशकों ने बफेट की सफलता को दोहराने की कठिनाई पर प्रकाश डाला है, यह देखते हुए कि उनकी प्रतिभा एक विचार प्रक्रिया से उपजी है जो साधारण लोगों को असाधारण निर्णय लेने में मदद करती है। लेखक का उद्देश्य लोगों को बफेट के बारे में जानने के बजाय उनकी तरह सोचने के लिए प्रेरित करना है, क्योंकि उनके निवेश सिद्धांत एक आजीवन दर्शन हैं जो निर्णय लेने, धैर्य और तार्किक सोच को सिखाते हैं।

अध्याय 1: दुनिया का सबसे महान निवेशक

यह अध्याय वॉरेन बफेट के जीवन और निवेश के शुरुआती दिनों पर केंद्रित है। बफेट ने 11 साल की उम्र में अपना पहला निवेश किया था और छोटी उम्र से ही व्यवसाय में रुचि रखते थे। उन्होंने बेंजामिन ग्राहम की किताब "द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर" पढ़ी, जिसने उन्हें वैल्यू इन्वेस्टिंग का सिद्धांत सिखाया। बफेट ने ग्राहम के सिद्धांतों को अपनाया और अपनी निवेश रणनीति विकसित की: अच्छे व्यवसायों को उचित मूल्य पर खरीदें और उन्हें हमेशा के लिए रखें। बफेट की जीवनशैली सरल है, और उनका मानना है कि दिखावा धन का प्रमाण नहीं है। लेखक का मानना है कि बफेट की तरह सोचने के लिए अनुशासन, स्वतंत्र सोच, धैर्य, सीखने के प्रति प्रेम और नैतिकता जैसे गुणों को अपनाना होगा।

अध्याय 2: वॉरेन बफेट की शिक्षा

यह अध्याय वॉरेन बफेट के शुरुआती जीवन और शिक्षा पर केंद्रित है, जिसमें उनकी जिज्ञासा, अनुशासन और सीखने की भूख का वर्णन किया गया है। बफेट का जन्म 1930 में ओमाहा, नेब्रास्का में हुआ था, और उन्होंने छोटी उम्र से ही व्यवसाय में रुचि लेना शुरू कर दिया था। उन्होंने हार्वर्ड बिजनेस स्कूल में आवेदन किया, लेकिन उन्हें अस्वीकार कर दिया गया। बाद में उन्होंने कोलंबिया बिजनेस स्कूल में बेंजामिन ग्राहम के तहत अध्ययन किया, जहाँ उन्होंने वैल्यू इन्वेस्टिंग के बारे में सीखा। ग्राहम ने बफेट को सिखाया कि स्टॉक सिर्फ नंबर नहीं होते, बल्कि एक व्यवसाय होते हैं, और व्यवसाय की असली वैल्यू उसके अर्निंग्स, एसेट्स और फ्यूचर ग्रोथ पोटेंशियल से आती है। बफेट ने ग्राहम के साथ काम भी किया, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि ग्राहम की थिंकिंग एकदम नंबर्स बेस थी। उन्होंने फिलिप फिशर की किताब "कॉमन स्टॉक्स एंड अनकॉमन प्रॉफिट्स" पढ़ी, जिसने उन्हें कंपनी की क्वालिटी, मैनेजमेंट की इंटेग्रिटी और लॉन्ग टर्म विज़न पर भी ध्यान देने के लिए प्रेरित किया।

अध्याय 3: एक व्यवसाय खरीदना

यह अध्याय वॉरेन बफेट के निवेश दर्शन पर केंद्रित है, जिसमें वह शेयर को एक व्यवसाय का हिस्सा मानते हैं। बफेट किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके बिजनेस मॉडल, कमाई की ताकत, प्रबंधन की ईमानदारी और लंबी उम्र को परखते हैं। वह ऐसे व्यवसाय में निवेश नहीं करते जिसे वह समझ नहीं सकते। बफेट हर स्टॉक को ऐसे देखते हैं जैसे वो पूरी कंपनी का मालिक बनने जा रहे हो। वह स्टॉक्स को शॉर्ट टर्म में ट्रेड नहीं करते बल्कि डेकेड्स तक होल्ड करते हैं। उनका मंत्र है "हमारा पसंदीदा होल्डिंग पीरियड फॉरएवर है।"

अध्याय 4: निवेश का मनोविज्ञान

यह अध्याय निवेश के मनोविज्ञान पर केंद्रित है, जिसमें भावनात्मक नियंत्रण और मानसिकता के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। बफेट कहते हैं कि निवेश में जीत दिमाग की तेजी से नहीं बल्कि इमोशंस पर काबू से होती है। वह उन मनोवैज्ञानिक ट्रैप्स से दूर रहते हैं जो ज्यादातर इन्वेस्टर्स को फंसा देती है, जैसे कि लालच और डर, भीड़ के पीछे भागना और ओवर कॉन्फिडेंस। बफेट हमेशा हम्ल रहते हैं और खुद को मार्केट की नॉइस से अलग रखते हैं। वह दूसरों को इंप्रेस करने के लिए इन्वेस्ट नहीं करते, बल्कि खुद की क्लेरिटी से इन्वेस्ट करते हैं।

अध्याय 5: निवेश के बुनियादी उसूल

यह अध्याय वॉरेन बफेट के निवेश के 10 बुनियादी उसूलों पर केंद्रित है, जिन्हें वह अपने डिसीजन मेकिंग का आधार मानते हैं। इन उसूलों में शामिल हैं: व्यवसाय को समझो, लॉन्ग टर्म विज़न रखो, कंपिटिटिव एडवांटेज देखो, ऑनेस्ट और कैपेबल मैनेजमेंट होना चाहिए, अट्रैक्टिव प्राइस पर खरीदो। बफेट फोकस्ड इन्वेस्टिंग पर विश्वास करते हैं और डायवर्सिफिकेशन को इग्नोरेंस के खिलाफ प्रोटेक्शन मानते हैं। वह बिजनेस एनालिसिस, मैनेजमेंट इवैल्यूएशन और फाइनशियल स्ट्रेंथ को अपनी इन्वेस्टिंग फिलॉसफी के तीन पिलर्स मानते हैं।

अध्याय 6: सही वैल्यू कैसे पहचाने

यह अध्याय वॉरेन बफेट के वैल्यूएशन तरीके पर केंद्रित है, जिसमें वह किसी कंपनी की सही वैल्यू कैसे पहचानते हैं। बफेट का पूरा ध्यान वैल्यूएशन पर रहता है, और वह कहते हैं कि असली रिस्क तब आता है जब आप किसी कंपनी के लिए जरूरत से ज्यादा कीमत चुकाते हैं। बफेट इन्वेस्टिंग को दो हिस्सों में बांटते हैं: बिजनेस क्वालिटी एनालिसिस और इंट्रिंसिक वैल्यू एस्टिमेशन। इंट्रिंसिक वैल्यू वह डिस्काउंटेड वैल्यू है जो किसी कंपनी के आने वाले सालों में कमाएगी। बफेट स्टाइल वैल्यूएशन में चार स्टेप्स शामिल हैं: अंडरस्टैंड बिजनेस अर्निंग पावर, प्रेडिक्ट फ्यूचर कैश फ्लोस, डिस्काउंट दोज़ अर्निंग्स, कंपेयर इंट्रिंसिक वैल्यू वर्सेस मार्केट प्राइस।

अध्याय 7: प्रबंधन किरायेदार

यह अध्याय वॉरेन बफेट के प्रबंधन के बारे में दृष्टिकोण पर केंद्रित है, जिसमें वह किसी भी व्यवसाय की लीडरशिप को कैसे देखते हैं। बफेट किसी भी इन्वेस्टमेंट से पहले कंपनी की मैनेजमेंट को गहराई से परखते हैं। बफेट की नजर में मैनेजमेंट के तीन सबसे अहम गुण हैं: रैशनलिटी, ट्रांसपेरेंसी और पैशन फॉर द बिनेस। बफेट कहते हैं कि एक अच्छा लीडर वो होता है जो बिजनेस को सिर्फ जॉब नहीं मिशन की तरह समझता है।

अध्याय 8: व्यवसाय किरायेदार

यह अध्याय व्यवसाय के उन चार मूल सिद्धांतों पर केंद्रित है जिन पर बफेट भरोसा करते हैं। बफेट किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले खुद से कुछ सवाल पूछते हैं, जैसे: क्या यह बिजनेस आसान और समझने लायक है? क्या कंपनी का परफॉर्मेंस लगातार स्टेबल रहा है? क्या कंपनी का फ्यूचर ब्राइट और सस्टेनेबल है? क्या कंपनी का नेतृत्व ईमानदार और पारदर्शी है?

अध्याय 9: वित्तीय किरायेदार

यह अध्याय वॉरेन बफेट के निवेश के वित्तीय सिद्धांतों पर केंद्रित है। बफेट किसी भी कंपनी को एनालाइज करने के लिए चार की फाइनेंसियल मैट्रिक्स को ध्यान में रखते हैं: रिटर्न ऑन इक्विटी (रो), प्रॉफिट मार्जिनस, अर्निंग्स प्रेडिक्टेबिलिटी और डे मैनेजमेंट। बफेट कभी भी नंबर्स को सिर्फ फार्मूलाज़ के लिए यूज़ नहीं करते, वो उन्हें एक कहानी की तरह पढ़ते हैं।

अध्याय 10: मूल्य किरायेदार

यह अध्याय वॉरेन बफेट के वैल्यू टेननेट्स पर केंद्रित है, जिसमें वह किसी बिजनेस की असली वैल्यू कैसे कैलकुलेट करते हैं और उसे सही कीमत पर खरीदने का फैसला कैसे लेते हैं। बफेट इन्वेस्टिंग को कभी गैंबल की तरह नहीं देखते, बल्कि बिजनेस की तरह सोच कर करते हैं। बफेट के वैल्यू टेनेट्स में शामिल हैं: कैलकुलेट इंट्रिंसिक वैल्यू, लुक फॉर अ मार्जिन ऑफ़ सेफ्टी, इग्नोर मार्केट सेंटीमेंट, फोकस ऑन लॉन्ग टर्म वैल्यू नॉट शॉर्ट टर्म ट्रेंड्स, इमोशनल इंडिपेंडेंस।

अध्याय 11: सही व्यवसाय खरीदना

यह अध्याय वॉरेन बफेट के बेस्ट इन्वेस्टमेंट्स की केस स्टडीज पर केंद्रित है। इन केस स्टडीज में शामिल हैं: द वाशिंगटन पोस्ट कंपनी, सीज कैंडीज, अमेरिकन एक्सप्रेस, कोकाला और जेको। बफेट हर इन्वेस्टमेंट डिसिशन सालों तक सोच कर पूरी क्लेरिटी और कन्विक्शन के साथ करते हैं। और जब वो किसी कंपनी में इन्वेस्ट करते हैं तो वह सिर्फ पैसा नहीं लगाते, वह ओनरशिप माइंडसेट से सोचते हैं।

अध्याय 12: वॉरेन बफेट का तरीका

यह अध्याय "द वॉरेन बफेट वे" का आखिरी अध्याय है, जिसमें बफेट की पूरी सोच, पूरी स्ट्रेटजी और पूरी जिंदगी का सार दिया गया है। बफेट का तरीका सिर्फ इन्वेस्टिंग का नहीं है, वो एक सोच है, एक जिंदगी जीने का तरीका है। बफेट की फिलॉसफी का सार है: इंडिपेंडेंस ऑफ थॉट, लाइफ लॉन्ग लर्निंग, सिंपलीसिटी इज पावर, पेशेंस एंड टाइमिंग, इंटेग्रिटी ओवर एवरीथिंग।

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Transcript

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0:00 कभी आपने सोचा है एक ऐसा इंसान जो दुनिया का सबसे अमीर आदमी है फिर भी साधारण कपड़े पहनता है। एक पुराना सा घर में रहता है और अपनी पसंदीदा कोक पीते हुए हर साल शांति से निवेश करता है। आखिर उसकी सोच क्या है? दुनिया उसे ओरेकल ऑफ ओमाहट कहती है। लेकिन असल में वह है एक ऐसा इंसान जिसने यह साबित कर दिया कि धैर्य, अनुशासन और गहराई से सोचने वाला दिमाग पैसा छाप सकता है। और यही इंसान है वारेन बफेट। अब जरा कल्पना कीजिए। अगर आपको उसके सोचने का तरीका, उसके फैसलों की वजह और उसके सक्सेस के पीछे के असली प्रिंसिपल्स समझ में आ जाए तो आपकी जिंदगी क्या वैसे ही ऑर्डिनरी रहेगी? बिल्कुल नहीं। यही वजह है कि यह

0:47 किताब द वारेन बफेट वे सिर्फ एक बायोग्राफी नहीं है। यह एक कंप्लीट रोड मैप है स्मार्ट इन्वेस्टिंग और इंटेलिजेंट थिंकिंग का। इस किताब की शुरुआत होती है बिल मिलर और पीटर लिंच जैसे दो दिग्गज इन्वेस्टर्स के फॉरवर्ड से। और जब ऐसे लोग बफेट के बारे में कुछ कहते हैं तो वह सिर्फ तारीफ नहीं करते। वह एक चेतावनी देते हैं। बिल मिलर कहते हैं बफेट की सक्सेस को देखना आसान है। लेकिन उसे दोहराना उतना ही मुश्किल। वह बताते हैं कि बफेट की जीनियस किसी मैजिक से नहीं आई बल्कि एक थिंकिंग प्रोसेस से आई है जो ऑर्डिनरी लोगों को एक्स्ट्राऑर्डिनरी डिसीजंस लेना सिखाती है। पीटर लिंच जो खुद दुनिया के सबसे सफल म्यूचुअल फंड मैनेजर्स में से हैं। वो बफेट को एक ऐसी मिसाल मानते हैं। जिसने वस्ट्रीट के शोर से दूर

1:34 रहकर भी हमेशा बाजार को हराया। वो कहते हैं बफेट सिंपल दिखते हैं। लेकिन उनकी सिंपलीसिटी में ही ब्रिलियंस छुपी है। अब सोचिए अगर दो दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर्स यह कह रहे हैं कि बफेट को समझना आसान नहीं तो हमें उसे कितनी गहराई से पढ़ना होगा और यही वजह है कि इस किताब को सिर्फ पढ़ा नहीं जाता। इसे महसूस किया जाता है। अब आते हैं प्रेफर्स पर। लेखक बताते हैं कि उन्होंने यह किताब सिर्फ इसलिए नहीं लिखी कि लोग बफेट के बारे में और जाने बल्कि इसलिए लिखी ताकि लोग बफेट जैसा सोच सकें। क्योंकि बफेट के इन्वेस्टिंग प्रिंसिपल्स किसी स्टॉक टिप की तरह नहीं है बल्कि वह है एक लाइफ लॉन्ग फिलॉसफी जो आपको डिसीजन मेकिंग, पेशेंस और लॉजिकल थिंकिंग सिखाती है। प्रेफर्स में

2:22 एक और जबरदस्त बात सामने आती है। लेखक बताते हैं कि बफेट की स्ट्रेटजी वक्त के साथ बदली नहीं है। जबकि दुनिया का हर इन्वेस्टर ट्रेंड के पीछे भाग रहा है। बफेट वही कर रहे हैं जो वो 1950 एस में करते थे। वैल्यू इन्वेस्टिंग मतलब अच्छे बिजनेस को ढूंढो, सस्ते में खरीदो और लंबे समय तक पकड़े रहो। अब बात करते हैं इंट्रोडक्शन की। यहां लेखक केनेथ एल फिशर एक बहुत सीधी लेकिन चुभने वाली बात कहते हैं। ज्यादातर लोग इन्वेस्टिंग को कॉम्प्लिकेटेड बना देते हैं। लेकिन बफेट ने इसे डेंजरसली सिंपल बना दिया। और यही सिंपलीसिटी लोगों को डराती है। क्यों? क्योंकि सिंपलीसिटी बोरिंग लगती है। लोग एक्साइटमेंट चाहते हैं। जल्दी पैसे कमाने

3:08 की उम्मीद, तेजी से रिटर्न पाने की चाह। लेकिन बफेट कहते हैं स्लो इज स्मूथ एंड स्मूथ इज फास्ट। मतलब धीरे चलो सोच समझ के चलो। लेकिन जब सही मौके पर चलोगे तो कोई तुम्हें पकड़ नहीं पाएगा। इस किताब की शुरुआत में ही एक सवाल उठता है। क्या आप सोचते हो बफेट की तरह? अगर नहीं तो अब वक्त आ गया है सोच बदलने का। क्योंकि यह किताब सिर्फ इन्वेस्टिंग की बात नहीं करती। यह सिखाती है डिसीजन कैसे लिया जाए, रिस्क को कैसे देखा जाए और इमोशन को कैसे कंट्रोल किया जाए। वारेन बफेट की सबसे बड़ी ताकत यह नहीं है कि वह सबसे ज्यादा पढ़ते हैं बल्कि यह है कि वह सबसे कम रिएक्शन करते हैं। जब लोग डर से बेच रहे होते हैं, वह खरीदते हैं। जब लोग लालच में

3:56 खरीद रहे होते हैं, वो बेचते हैं। वो कहते हैं बी फियरफुल व्हेन अदर्स आर ग्रीडी एंड बी ग्रीडी व्हेन अदर्स आर फियरफुल। इस किताब के इंट्रोडक्शन में ही आपको समझ आ जाएगा कि बफेट की ब्रिलियंस क्या है। वह अकेले सोचते हैं। वह नॉइस से दूर रहते हैं और वो हर चीज को नंबर्स, लॉजिक और वैल्यू की नजर से देखते हैं। तो अब आप तैयार हो जाइए क्योंकि अगले चैप्टर से हम गहराई में उतरेंगे बफेट के दिमाग में। हम जानेंगे बफेट कौन था? कहां से आया? किस सोच ने उसे दुनिया का सबसे भरोसेमंद निवेशक बनाया? और कैसे हम भी उसी रास्ते पर चलकर अपनी फाइनेंशियल जिंदगी बदल सकते हैं। चैप्टर एक द वर्ल्ड्स ग्रेटेस्ट इन्वेस्टर दुनिया

4:41 का सबसे महान निवेशक कल्पना कीजिए एक आदमी जो ना फ्लैशी है ना लाउड ना हाईफाई डिग्रीज के पीछे भागा और ना ही कभी करोड़ों का शोरूम या कॉर्पोरेट ऑफिस बनाया फिर भी वह बन गया दुनिया का सबसे अमीर और भरोसेमंद निवेशक। इस आदमी का नाम है वारेन बफेट। लेकिन बफेट की ग्रेटनेस सिर्फ उसके बैंक बैलेंस में नहीं है बल्कि उसकी सोच में है और यह अध्याय हमें उसी सोच से मिलवाता है। लेखक हमें सबसे पहले बताते हैं कि बफेट कोई ओवरनाइट सक्सेस नहीं थे। उन्होंने भी शुरुआत की थी छोटे से। लेकिन उनके सोचने का तरीका बचपन से ही अलग था। बफेट का पहला इन्वेस्टमेंट सिर्फ 11 साल की उम्र में हुआ था। जब बाकी बच्चे

5:27 क्रिकेट या कार्टूनस में लगे थे तब बफेट ने अपना पहला स्टॉक खरीदा। सिटी सर्विस नाम की कंपनी के तीन शेयर्स। पहले वो गिरा और बफेट डर गया। लेकिन जब स्टॉक थोड़ा बढ़ा तो उसने बेच दिया थोड़े से फायदे में। पर कुछ ही हफ्तों बाद वही स्टॉक स्काई रॉकेट हो गया। और बफेट ने उस वक्त महसूस किया कि जल्दबाजी में बेचना मूर्खता है। यह उनका पहला इन्वेस्टमेंट था। और पहली सिक पेशेंस इज मोर पावरफुल देन पैनिकिक। अब आगे बढ़ते हैं उनकी एडलेसेंस की तरफ। बफेट ने बहुत छोटी उम्र में ही डिसाइड कर लिया था कि वो बिजनेसमैन बनेंगे। उन्होंने न्यूज़पेपर्स बेचे, बबल गम बेची, पिनबॉल मशीनंस लगाई और हर चीज से प्रॉफिट कमाया। लेकिन एक बात कॉमन थी। हर

6:14 काम में उन्होंने सोचा इससे रिटर्न कितना मिलेगा? बफेट का यह लॉजिक था। अगर किसी चीज से पैसा नहीं बन रहा तो वह मेरी एनर्जी के लायक नहीं है। अब जब वह कॉलेज पहुंचे तो उन्होंने बेंजामिन ग्राहम की किताब द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर पढ़ी और वहीं से उन्हें मिला अपना इन्वेस्टिंग मेंटोर और जिंदगी भर का प्रिंसिपल वैल्यू इन्वेस्टिंग। बफेट कहते हैं आई एम 85% बेंजामिन ग्राहम एंड 15% फिलिपिशर। ग्राहम ने उन्हें सिखाया कि कोई भी स्टॉक एक बिजनेस होता है और किसी बिजनेस की वैल्यू उसके रील अर्निंग पावर से आती है ना कि मार्केट के मूड से। बफेट ने उस प्रिंसिपल को पकड़ लिया और अपनी स्ट्रेटजी बना ली बाय ग्रेट बिनेसेस एट फेयर प्राइसेस एंड

7:01 होल्ड देम फॉर एवर। अब एक बहुत दिलचस्प पॉइंट आता है इस चैप्टर में। जब दुनिया ट्रेडिंग में लगे थे। वो इन्वेस्टिंग में थे। जब लोग डेली न्यूज़, रूमर्स और टिप्स के पीछे भाग रहे थे। बफेट बैठकर बैलेंस शीट पढ़ते थे। जब लोग जल्दी पैसा कमाने की कोशिश करते थे। वो धीरे लेकिन स्मार्ट तरीके से कंपाउंडिंग पर ध्यान देते थे। बफेट की एक कोट है। द स्टॉक मार्केट इज अ डिवाइस फॉर ट्रांसफरिंग मनी फ्रॉम द इंपेशेंट टू द पेशेंट। यानी जो लोग जल्दी-जल्दी में बेचते हैं, वह अपना पैसा उन लोगों को दे रहे होते हैं जो धैर्य रखते हैं। अब सोचिए क्या आपने कभी पैनिक में आकर कोई इन्वेस्टमेंट डिसीजन लिया है? क्या आपने किसी स्टॉक को सिर्फ इसलिए खरीदा क्योंकि सब लोग खरीद रहे थे? अगर

7:46 हां, तो आपको बफेट से बहुत कुछ सीखना है। अब बात करते हैं बफेट की लाइफस्ट की। उनकी ग्रेटनेस का एक और कारण है उनकी सिंपलीसिटी। आज भी वह उसी पुराने घर में रहते हैं जो उन्होंने 1958 में खरीदा था। आज भी वह फास्ट फूड खाते हैं, कोक पीते हैं और हर रोज ऑफिस अपनी पुरानी कार से जाते हैं। उनके पास ना कोई ऑनराज होता है ना 24 सात सिक्योरिटी क्योंकि बफेट का बिलीफ है। शो ऑफ कभी वेल्थ का प्रमाण नहीं होता। वो पैसा कमाते हैं इन्वेस्ट करने के लिए ना कि दुनिया को इंप्रेस करने के लिए। अब आता है सबसे बड़ा सवाल। क्या हम बफेट जैसा बन सकते हैं? लेखक कहते हैं बिल्कुल बन सकते हैं। लेकिन हमें बफेट की तरह सोचने के लिए कुछ कोर क्वालिटीज अपनानी

8:34 होंगी। डिसिप्लिन जब दुनिया भाग रही हो तो ठहरना सीखो। इंडिपेंडेंट थिंकिंग भीड़ से अलग सोचो। पेशेंस इंस्टेंट रिटर्न के बजाय लॉन्ग टर्म वैल्यू देखो। लव फॉर लर्निंग। हर दिन पढ़ो, समझो और एनालाइज करो। एथिक्स इंटेग्रिटी पैसे से पहले उस काम की सच्चाई देखो। बफेट कभी भी उस कंपनी में पैसा नहीं लगाते जिसमें वह खुद सीईओ बनना पसंद नहीं करेंगे। वो सिर्फ उन्हीं बिजनेसेस को चुनते हैं जिनकी उन्हें समझ होती है। इन्वेस्ट इन व्हाट यू अंडरस्टैंड और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। तो दोस्तों, यह था पहला अध्याय जहां हमने जाना बफेट कौन है? कैसे बने और उन्होंने जिंदगी से क्या सीखा। अब आप सोचिए अगर आप आज से बफेट जैसा

9:22 सोचने लगे, हर डिसीजन लॉजिक से लें, हर इन्वेस्टमेंट को लॉन्ग टर्म समझें तो क्या आपकी फाइनेंशियल जिंदगी वैसी नहीं बदलेगी? बिल्कुल बदलेगी। और यही है इस किताब की असली ताकत। आपको बफेट के दिमाग से सोचने की एबिलिटी देना। अब हम बढ़ते हैं चैप्टर दो की ओर जो हमें वारेन बफेट की जिंदगी के उस हिस्से से मिलवाता है जहां उनकी सोच ने आकार लेना शुरू किया। इस अध्याय का नाम है चैप्टर दो द एजुकेशन ऑफ वारेन बफेट। वारेन बफेट की शिक्षा और सीखने की यात्रा। अब जरा सोचिए एक बच्चा जो 7 साल की उम्र में स्टॉक मार्केट की किताबें पढ़ता है। 11 साल की उम्र में अपना पहला स्टॉक खरीदता है और 13 साल की उम्र में इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करता है। क्या यह कोई आम

10:08 बच्चा हो सकता है? बिल्कुल नहीं। यह बच्चा था वारेन बफेट। चैप्टर दो हमें ले जाता है बफेट के फॉर्मेटिव इयर्स में जहां उनका क्यूरियोसिटी, डिसिप्लिन और हंगर फॉर लर्निंग धीरे-धीरे एक निवेशक की सोच में बदल रहा था। वारेन बफेट का जन्म 1930 में ओमाहा नेबस्का में हुआ। उनके पिता हावर्द बफेट एक स्टॉक ब्रोकर और बाद में कांग्रेसमैन भी बने। घर में शेयर बाजार की बातें आम थी। और बफेट ने बहुत छोटी उम्र से ही नंबर्स और बिजनेस में इंटरेस्ट लेना शुरू कर दिया। जब बच्चे कॉमिक्स पढ़ते थे, बफेट बिजनेस बुक्स पढ़ते थे, जब बच्चे टॉय कार से खेलते थे, बफेट वेंडिंग मशीन से प्रॉफिट कैलकुलेट करते थे। उनकी एक फेमस चाइल्डहुड स्टोरी है। बफेट ने अपनी पहली

10:55 बिजनेस इन्वेस्टमेंट एक पिनबॉल मशीन में की थी जिसे उन्होंने एक बाबर शॉप में लगाया। कुछ ही महीनों में उन्होंने इतनी इनकम कर ली कि उन्होंने और मशीनंस खरीद ली और उन्हें कई बार बाबर शॉप्स में इंस्टॉल कर दिया। यही था उनका पहला बिजनेस एंपायर बिना किसी फैंसी ऑफिस या कैपिटल के। इससे बफेट ने सीखा अगर सही सिस्टम बन जाए तो पैसा बिना मेहनत के भी आ सकता है। अब बात करते हैं उनके एकेडमिक लर्निंग की। बफेट ने यूनिवर्सिटी ऑफ नेबर्स का से ग्रेजुएशन की और फिर अप्लाई किया हार्व बिजनेस स्कूल में। लेकिन उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। अब जरा सोचिए दुनिया के सबसे कामयाब निवेशक को हार्व ने नो कह दिया था। पर उन्होंने हार नहीं मानी। बफेट ने फिर

11:43 अप्लाई किया कोलंबिया बिजनेस स्कूल में जहां उनके आदर्श बेंजामिन ग्राहम पढ़ाते थे। और यहीं से उनकी जिंदगी की असली शिक्षा शुरू हुई। बेंजामिन ग्राहम को इन्वेस्टिंग की दुनिया में फादर ऑफ वैल्यू इन्वेस्टिंग कहा जाता है। उनकी किताब द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर ने बफेट की सोच को बदल कर रख दिया। ग्राहम ने बफेट को सिखाया कि स्टॉक सिर्फ नंबर नहीं होता वह एक बिजनेस होता है और बिजनेस की असली वैल्यू होती है। उसके अर्निंग्स, एसेट्स और फ्यूचर ग्रोथ पोटेंशियल से। बफेट ने इस फिलॉसफी को इतनी गहराई से अपनाया कि उन्होंने ग्राहम के साथ काम भी किया। ग्राहम ह्यूमन कॉप में। लेकिन यह बात याद रखिए बफेट ने सिर्फ ग्राहम की बातें सुनी नहीं बल्कि उन पर अमल किया। ग्राहम के लिए

12:29 एक स्टॉक का मार्जिन और सेफ्टी सबसे जरूरी था। मतलब किसी भी निवेश में इतना गैप हो कि अगर कुछ गलत भी हो जाए तो नुकसान कम हो। बफेट ने इस कांसेप्ट को अपनी स्ट्रेटजी में डीपली एंबेड किया। लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया जब बफेट को लगा कि ग्राहम की थिंकिंग एकदम नंबर्स बेस थी। वो सिर्फ अंडरवैल्यूड स्टॉक्स में निवेश करते थे। भले ही कंपनी का बिजनेस कैसा भी हो। बफेट को यहां एक कमी महसूस हुई। वह कहते हैं कि अगर कंपनी अच्छी नहीं है तो वह कभी लॉन्ग टर्म में जीत नहीं सकती। चाहे वह कितनी भी सस्ती क्यों ना हो। यहीं से बफेट की सोच इवॉल्व हुई। उन्होंने फिलिप फिशर की किताब कॉमन स्टॉक्स एंड अनकॉमन प्रॉफिट्स पढ़ी। जिसने उन्हें सिखाया कि कंपनी की

13:15 क्वालिटी, मैनेजमेंट की इंटेग्रिटी और लॉन्ग टर्म विज़न पर भी ध्यान देना चाहिए। तो अब बफेट की इन्वेस्टिंग स्ट्रेटजी बन गई एक ब्लेंड। ग्राहम की वैल्यू फिलॉसफी और फिशर की क्वालिटी बिजनेस अप्रोच। यही बना वारेन बफेट का इन्वेस्टिंग डीएनए। अब जरा सोचिए एक आदमी जो दो महान गुरुओं से सीखकर अपने लॉजिक और अनुभव से एक ऐसी सोच बना रहा था। जो उसे बनाएगी दुनिया का सबसे महान इन्वेस्टर। बफेट की एजुकेशन क्लासरूम से ज्यादा रील वर्ल्ड में हुई। उन्होंने कंपनीज को पढ़ा, लोगों से सीखा और सबसे ज्यादा खुद से सवाल पूछे। उनका सबसे बड़ा मंत्रा था। इफ यू कांट एक्सप्लेन इट टू अ 10 ईयर ओल्ड, डोंट इन्वेस्ट इन इट। मतलब

14:01 अगर किसी बिजनेस को आप खुद ठीक से नहीं समझते तो उसमें निवेश करने का कोई फायदा नहीं। अब एक और बहुत पावरफुल लेसन जो बफेट की शिक्षा से मिलता है। लर्न कास्टेंटली। थिंक इंडिपेंडेंटली एंड नेवर स्टॉप क्वेश्चनिंग। वह आज भी दिन का ज्यादातर हिस्सा पढ़ने में बिताते हैं। क्योंकि बफेट मानते हैं कि पैसा कमाने से ज्यादा जरूरी है सोच को डेवलप करना। तो दोस्तों इस अध्याय से हमें क्या मिला? सक्सेस सिर्फ क्लासरूम की एजुकेशन से नहीं आती। वो आती है सीखने की भूख और अलग सोच से। बफेट ने रिजेक्शन को फेलियर नहीं बनने दिया। बल्कि उसे एक नए दरवाजे का रास्ता बनाया। उन्होंने दो सोचों को मिलाया। एक नंबर्स की ग्राहम और एक क्वालिटी की फिशर

14:47 और बनाए अपनी खुद की फिलॉसफी और सबसे जरूरी बफेट ने हमेशा खुद से यह पूछा क्या यह बिजनेस सच में वैल्यू क्रिएट कर रहा है ना कि इसका प्राइस आज ऊपर जाएगा या नीचे। अब हम अब पहुंचे हैं चैप्टर तीन में जहां वारेन बफेट की इन्वेस्टमेंट फिलॉसफी और भी साफ होती है। अब तक हमने देखा कि बफेट ने बचपन से ही बिजनेस और इन्वेस्टिंग में गहरी रुचि ली और बेंजामिन ग्राहम व फिलिप फिशर जैसे गुरुओं से सीखकर अपनी सोच बनाई। लेकिन इस अध्याय में हम जानेंगे कि उन्होंने अपने जीवन की सबसे बड़ी सीख किस तरह से अमल में लाई और किस तरह उनकी सोच ने उन्हें दूसरों से बिल्कुल अलग खड़ा कर दिया। चैप्टर तीन बाइंग अ बिजनेस एक शेयर नहीं एक पूरा बिजनेस खरीदना। अब सोचिए जब

15:35 आप किसी दुकान में कोई चीज खरीदते हैं तो आप क्या सोचते हैं? यह चीज कितनी की है? कितनी क्वालिटी है? कितना चलने वाली है? यही सवाल बफेड भी करते हैं। लेकिन वो करते हैं स्टॉक्स के लिए। वारेन बफेट के लिए शेयर कोई लॉटरी टिकट नहीं होता। वह उसे एक बिजनेस का हिस्सा मानते हैं। इस अध्याय की सबसे बड़ी सीख यही है। स्टॉक खरीदो ऐसे जैसे तुम पूरा बिजनेस खरीद रहे हो। बफेट बार-बार कहते हैं अगर आप किसी बिजनेस का एक टुकड़ा खरीदने के लिए तैयार नहीं है। तो फिर उसका एक शेयर भी मत खरीदिए। अब यह सोच बाकी इन्वेस्टर से अलग क्यों है? क्योंकि ज्यादातर लोग स्टॉक मार्केट में प्राइस देखते हैं, चार्ट देखते हैं, वॉल्यूम देखते हैं, ट्रेंड देखते हैं। पर बफेट सिर्फ बिजनेस की वैल्यू देखते हैं।

16:21 अब इस चैप्टर में एक शानदार बात सामने आती है कि बफेट किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके बिजनेस मॉडल, कमाई की ताकत, प्रबंधन की ईमानदारी और लंबी उम्र को परखते हैं। यानी बफेट पूछते हैं, क्या यह कंपनी आने वाले 10 20 सालों में भी रेलेवेंट रहेगी? क्या इसका प्रोडक्ट या सर्विस लोगों की जरूरत है? क्या इसका मैनेजमेंट ईमानदार और बुद्धिमान है? क्या यह कंपनी कंसिस्टेंटली प्रॉफिट कमा रही है? अगर इन सभी सवालों के जवाब हां, तो बफेट उसमें निवेश करने पर विचार करते हैं। अब आइए एक उदाहरण लें। बफेट ने कोका कोला में तब निवेश किया जब बाकी लोग उसे अवॉइड कर रहे थे। क्यों? क्योंकि उन्हें यकीन था कि आने वाले 20 सालों में भी लोग कोका

17:06 कोला पिएंगे। उसका ब्रांड इतना स्ट्रांग था, डिस्ट्रीब्यूशन इतना बड़ा था और मार्जिनस इतने अच्छे थे कि यह एक फॉरएवर बिजनेस बन सकता था और यही हुआ। कोका कोला आज भी बफेट के पोर्टफोलियो में एक शाइनिंग स्टार है। अब एक और बड़ी बात बफेट कभी ऐसे बिजनेस में निवेश नहीं करते जिसे वह समझ नहीं सकते। वो कहते हैं नेवर इन्वेस्ट इन अ बिजनेस यू कैन नॉट अंडरस्टैंड। इसीलिए उन्होंने टेक स्टॉक्स को बहुत देर तक अवॉइड किया। क्योंकि वह उन्हें ठीक से समझ नहीं पाते थे। उनके लिए इन्वेस्टिंग कोई गेम नहीं है। यह एक ओनरशिप का फैसला है। बफेट हर स्टॉक को ऐसे देखते हैं जैसे वो पूरी कंपनी का मालिक बनने जा रहे हो। अब इस सोच से एक बड़ा फायदा होता है। जब

17:53 मार्केट गिरता है, लोग घबरा जाते हैं और बेचने लगते हैं। लेकिन बफेट को फर्क नहीं पड़ता क्योंकि वह जानते हैं कि बिजनेस अभी भी उतना ही स्ट्रांग है। उन्हें प्राइस की नहीं वैल्यू की चिंता होती है। बफेट कहते हैं, प्राइस इज व्हाट यू पे। वैल्यू इज व्हाट यू गेट। अब जरा इस पर सोचिए। मान लीजिए आपको दो कंपनीज़ के स्टॉक मिल रहे हैं। एक ₹100 का है। दूसरा ₹500 का। ज्यादातर लोग ₹100 वाला स्टॉक खरीदेंगे क्योंकि वह सस्ता हाथ लगता है। लेकिन बफेट यह देखेंगे कि कौन सी कंपनी ज्यादा पैसे कमा रही है। किसका फ्यूचर ब्राइट है और किसका मैनेजमेंट जिम्मेदार है। अगर ₹500 वाला स्टॉक एक सॉलिड बिजनेस है। तो वही असल में सस्ता हो सकता है। यानी सच्चा

18:40 इन्वेस्टर प्राइस नहीं वैल्यू पर फोकस करता है। अब इस चैप्टर में एक और पावरफुल कांसेप्ट है। ओनर मेंटालिटी बफेट कभी ट्रेडर की तरह नहीं सोचते। वह खुद को ओनर मानते हैं। ओनर क्या करता है? वह सोचता है लॉन्ग टर्म। वो बिजनेस की रेपुटेशन बचाता है। वो धीरे-धीरे वेल्थ बिल्ड करता है। इसीलिए बफेट स्टॉक्स को शॉर्ट टर्म में ट्रेड नहीं करते बल्कि डेकेड्स तक होल्ड करते हैं। उनका मंत्र है आवर फेवरेट होल्डिंग पीरियड इज फॉर एवर। यानी अगर कंपनी बढ़िया है तो उसे बेचना ही क्यों? तो इस अध्याय से हमें क्या सीखने को मिला? शेयर को बिजनेस की तरह देखो। प्राइस की तरह नहीं। अच्छा बिजनेस खरीदो। अच्छा स्टॉक नहीं। ऐसी कंपनी में निवेश करो जिसे आप खुद ओन करना चाहो। पेशेंस रखो क्योंकि

19:28 असली वेल्थ टाइम से बनती है। अपने निवेश को ओनरशिप मेंटालिटी से देखो ना कि स्पेकुलेशन के नजरिए से। बफेट की सोच हमें सिखाती है कि स्मार्ट इन्वेस्टिंग सिंपल थिंकिंग प्लस लॉन्ग टर्म विज़न प्लस इमोशनल कंट्रोल। और यह सारी चीजें कोई रॉकेट साइंस नहीं है। बस जरूरत है क्लेरिटी, कंसिस्टेंसी और करज की। तो दोस्तों, इस चैप्टर ने हमें बफेट की सोच का असली आधार दिखाया कि शेयर बाजार एक गेम नहीं बल्कि ओनरशिप का खेल है। अब आप सोचिए अगर आप आज से हर इन्वेस्टमेंट को बिजनेस की तरह देखना शुरू कर दें तो क्या आपके फैसले वैसे ही इंपल्सिव रहेंगे? नहीं। आप ज्यादा सोच समझकर लॉजिक से और विज़ के साथ इन्वेस्ट करेंगे और यही माइंडसेट आपको भी

20:16 एक मजबूत निवेशक बना सकता है। अब हम बढ़ते हैं चैप्टर चार की ओर जहां हम जानेंगे बफेट की उस स्ट्रेटजी के बारे में जो उनकी इन्वेस्टिंग की नीव है। जिसने उन्हें बना दिया एक अलग लीग का इन्वेस्टर। इस अध्याय का नाम है चैप्टर चार द साइकोलॉजी ऑफ इन्वेस्टिंग। इन्वेस्टिंग की मनोविज्ञान, सोच, भावना और नियंत्रण की कला। अब जरा सोचिए एक ही मार्केट में कुछ लोग करोड़ों कमा रहे हैं और कुछ लोग लाखों गवा रहे हैं। जबकि डाटा, टूल्स और न्यूज़ सभी के पास एक जैसे हैं। तो फर्क कहां है? फर्क है सोचने के तरीके में। फर्क है माइंडसेट में। बफेट कहते हैं, इन्वेस्टिंग इज नॉट अ गेम वेयर दी गाय विद दी 160 आईक्यू बीट्स दी गाय विद दी 130 आईक्यू। वंस यू हैव

21:03 ऑर्डिनरी इंटेलिजेंस व्हाट यू नीड इज दी टेंपरामेंट टू कंट्रोल दी अर्ज दैट गेट अदर्स इनू ट्रबल। मतलब इन्वेस्टिंग में जीत दिमाग की तेजी से नहीं बल्कि इमोशंस पर काबू से होती है। और यही है इस चैप्टर का सार। अब बात करते हैं उन मनोवैज्ञानिक ट्रैप्स की जो ज्यादातर इन्वेस्टर्स को फंसा देती है और जिनसे बफेट खुद को दूर रखते हैं। एक ग्रीड एंड फियर, लालच और डर। मार्केट जब ऊपर जाता है, लोग जरूरत से ज्यादा खरीदते हैं और जब नीचे आता है, पैनिकिक में बेच देते हैं। बफेट कहते हैं, बी फियरफुल व्हेन अदर्स आर ग्रीडी एंड बी ग्रीडी व्हेन अदर्स आर फियरफुल। यही तो मास्टर स्ट्रोक है। जब सब लोग डरते हैं तब बफेट कामली सोचते हैं। कौन सी कंपनी सस्ती

21:51 मिल रही है? और जब सब लोग लालची होते हैं तब वो साइलेंटली पीछे हट जाते हैं। कंट्रोल, पेशेंस और ऑब्जरवेशन। यही उनकी ताकत है। दो हर्ड मेंटालिटी भीड़ के पीछे भागना। मार्केट में एक बहुत बड़ा साइकोलॉजिकल ट्रैप होता है। सब लॉग ले रहे हैं तो मैं भी लूंगा। लेकिन बफेट कभी भी भीड़ के साथ नहीं चलते। वो कहते हैं यू कांट डू वेल इन्वेस्टिंग अनलेस यू थिंक इंडिपेंडेंटली। मार्केट में अगर भीड़ 100 की तरफ भाग रही है तो बफेट पहले सोचते हैं। क्या 100 की डायरेक्शन सही भी है? यह सोच उन्हें अलग बनाती है। तीन ओवर कॉन्फिडेंस। बहुत से इन्वेस्टर्स इनिशियल सक्सेस से ओवर कॉन्फिडेंट हो जाते हैं। उन्हें लगता है कि अब वह मार्केट को समझ

22:37 गए हैं। लेकिन बफेट हमेशा हम्ल रहते हैं। वो कहते हैं दी मार्केट कैन रिमेन इरशनल लगर देन यू कैन रिमेन सॉल्वेंट। यानी मार्केट को अंडरएस्टिमेट मत करो। इसलिए बफेट हमेशा खुद को टेस्ट करते रहते हैं। हर इन्वेस्टमेंट से पहले यही सोचते हैं। क्या मैं सच में इसे समझता हूं? अब बात करते हैं। बफेट की सबसे बड़ी ताकत इमोशनल डिसिप्लिन। मार्केट जितना वोलेटाइल होता है, उतनी ही जरूरी होती है मेंटल स्टेबिलिटी। बफेट हर दिन फाइनेंशियल न्यूज़ नहीं देखते ना ही डेली स्टॉक प्राइस चेक करते हैं। क्यों? क्योंकि वह जानते हैं शॉर्ट टर्म नॉइस से डिस्ट्रैक्शन बढ़ता है। क्लेरिटी नहीं। उनके लिए इन्वेस्टिंग एक लॉन्ग टर्म कमिटमेंट है ना कि एक फास्ट मनी शॉर्टकट।

23:23 अब बफेट का एक पावरफुल तरीका जानिए। द इनर स्कोर कार्ड वर्सेस द आउटर स्कोर कार्ड। बहुत से लोग डिसीजंस लेते हैं दूसरों को इंप्रेस करने के लिए। वह सोचते हैं लोग क्या कहेंगे? यह दिखेगा अच्छा। सब यही कर रहे हैं तो मुझे भी करना चाहिए। लेकिन बफेट फॉलो करते हैं। द इनर स्कोर कार्ड। मतलब जो वह सोचते हैं, जो वह मानते हैं, बस उसी के हिसाब से चलते हैं। उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि दुनिया क्या कहती है। वह वही करते हैं जो उन्हें सही लगता है। और यही माइंडसेट उन्हें मार्केट के प्रेशर से दूर रखता है। तो इस अध्याय से हमें क्या सीख मिली? इन्वेस्टिंग सिर्फ नंबर्स का खेल नहीं। माइंड और इमोशन का खेल है। डर और लालच से ऊपर उठना सबसे बड़ी जीत है।

24:11 भीड़ से अलग सोचो क्योंकि भीड़ अक्सर गलत दिशा में भागती है। ओवर कॉन्फिडेंस और ईगो से दूर रहो। खुद को मार्केट की नॉइस से अलग रखो और लॉन्ग टर्म पर फोकस रखो। दूसरों को इंप्रेस करने के लिए इन्वेस्ट मत करो। खुद की क्लेरिटी से इन्वेस्ट करो। बफेट कहते हैं रिस्क कम्स फ्रॉम नॉट नोइंग व्हाट यू आर डूइंग। और यह लाइन इस पूरे अध्याय की आत्मा है। अब आप सोचिए क्या आप हर बार निवेश करते समय डर जाते हैं? क्या आप दूसरों को देखकर डिसीजंस लेते हैं? अगर हां, तो अब वक्त है सोच बदलने का। बफेट की तरह सोचिए। सिंपल, लॉजिकल और इमोशनली स्टेबल। अब हम आ पहुंचे हैं चैप्टर पांच में। जहां वारेन बफेट की इन्वेस्टिंग जर्नी का सबसे कोर हिस्सा सामने आता है।

24:57 अब तक हमने माइंडसेट और साइकोलॉजी की बातें की। लेकिन इस अध्याय में हम जानेंगे बफेट किन प्रिंसिपल्स पर भरोसा करते हैं। वह किसी स्टॉक को चुनते कैसे हैं? और उनके इन्वेस्टिंग के असली रूल्स क्या है? चैप्टर पांच दी ग्राउंड रूल्स ऑफ इन्वेस्टिंग। इन्वेस्टिंग के बुनियादी उसूल। बफेट एक बात बार-बार दोहराते हैं। इन्वेस्टिंग इज सिंपल बट नॉट इजी। मतलब अगर आप बफेट के प्रिंसिपल्स को देखें तो वो बहुत बेसिक लगते हैं। कोई बड़ी फार्मूलाज़, कोई फ्लैशी ट्रिक्स नहीं। लेकिन इन्हें कंसिस्टेंटली फॉलो करना ही सबसे बड़ी चैलेंज है। अब इस अध्याय में बफेट के इन्वेस्टिंग के 10 ग्राउंड रूल्स बताए गए हैं। जिन्हें वो अपने डिसीजन मेकिंग का आधार मानते हैं। तो चलिए एक-एक करके इन रूल्स को समझते हैं आसान भाषा में

25:45 रिलेटेबल एग्जांपल्स के साथ। रूल एक बिजनेस को समझो। बफेट कभी भी ऐसी कंपनी में निवेश नहीं करते जिसे वह पूरी तरह से समझ नहीं सकते। वह कहते हैं इफ यू कांट एक्सप्लेन व्हाट अ बिजनेस डस इन वन सेंटेंस डोंट इन्वेस्ट इन इट। उदाहरण के लिए कोई टेक कंपनी जिसका मॉडल बहुत कॉम्प्लेक्स है लेकिन लोग उसमें निवेश कर रहे हैं क्योंकि प्राइस ऊपर जा रहा है। बफेट ऐसी कंपनी से दूर रहते हैं। वो कहते हैं क्लेरिटी इज मोर प्रॉफिटेबल देन कॉम्प्लेक्सिटी। रूल दो लॉन्ग टर्म विज़ रखो। बफेट स्टॉक्स को शॉर्ट टर्म प्रॉफिट्स के लिए नहीं खरीदते। वह सोचते हैं क्या मैं इस बिजनेस को अगले 10 से 20 साल तक ओन करना चाहूंगा? यही रीजन है कि उन्होंने कोका कोला, अमेरिकन एक्सप्रेस और

26:32 जिलेट जैसे ब्रड्स में निवेश किया क्योंकि उन्हें यकीन था कि यह कंपनीज़ आने वाले दशकों तक स्ट्रांग रहेंगी। रूल तीन कंपिटिटिव एडवांटेज देखो। बफेट हमेशा ऐसी कंपनीज़ ढूंढते हैं जिनके पास एक स्ट्रांग मोड हो। मतलब एक ऐसा एडवांटेज जो उन्हें कंपटीशन से बचाए रखे। जैसे CocaC कोला का ग्लोबल ब्रांड, Apple का इकोसिस्टम या Amazon की लॉजिस्टिक्स नेटवर्क। यह सारी चीजें उन्हें ऑर्डिनरी कंपनीज से अलग बनाती है। बफेट कहते हैं इन्वेस्ट इन बिनेसेस विद वाइड सस्टेनेबल मोड्स। रूल चार ऑनेस्ट और कैपेबल मैनेजमेंट होना चाहिए। बफेट कंपनी की मैनेजमेंट को बहुतेंस देते हैं। वो देखते हैं क्या

27:17 लीडरशिप एथिकल है? क्या उन्होंने पास्ट में कंसिस्टेंट रिजल्ट्स दिए हैं? क्या वह शेयरहोल्डर के पैसे को जिम्मेदारी से यूज करते हैं? अगर मैनेजमेंट में भरोसा नहीं, तो बफेट उस बिजनेस से दूर रहते हैं। रूल पांच, अट्रैक्टिव प्राइस पर खरीदो। वैल्यू इन्वेस्टिंग की सबसे जरूरी बात। किसी भी शानदार बिजनेस को भी गलत प्राइस पर खरीदना एक बड़ी गलती हो सकती है। बफेट कहते हैं, इट्स फार बेटर टू बाय वंडरफुल कंपनी एट अ फेयर प्राइस देन अ फेयर कंपनी एट अ वंडरफुल प्राइस। यानी सस्ती चीज नहीं वैल्यू वाली चीज खरीदो लेकिन सही प्राइस पर। अब इन कोर रूल्स के बाद बफेट की इन्वेस्टिंग अप्रोच में एक और गहरा कांसेप्ट आता है। फोकस्ड इन्वेस्टिंग वर्सेस डवर्सिफिकेशन। दुनिया कहती है रिस्क कम

28:03 करना है तो डायवर्सिफाई करो। लेकिन बफेट कहते हैं डवर्सिफिकेशन इज प्रोटेक्शन अगेंस्ट इग्नोरेंस। मतलब अगर आपको पता है कि आप क्या कर रहे हैं तो आपको 30 40 स्टॉक्स में पैसा नहीं लगाना पड़ेगा। बफेट खुद सिर्फ कुछ चुनिंदा कंपनीज़ में निवेश करते हैं और उन्हें गहराई से समझते हैं। उनका बिलीव है पुट योर एग्स इन अ फ्यू बास्केट्स एंड वॉच देम वेरी क्लोजली। अब बात करते हैं बफेट की इन्वेस्टिंग फिलॉसफी के तीन पिलर्स की। बिजनेस एनालिसिस। क्या कंपनी समझ में आती है? मैनेजमेंट इवैल्यूएशन क्या लीडरशिप भरोसेमंद है? फाइनशियल स्ट्रेंथ क्या कंपनी स्ट्रांग प्रॉफिट्स और रिटर्न्स देती है? अगर यह तीनों बॉक्स टेक हो तो बफेट इन्वेस्टिंग

28:48 के लिए तैयार हो जाते हैं। अब आप सोचिए आप जब कोई स्टॉक खरीदते हैं तो क्या आप यह सारी चीजें चेक करते हैं या सिर्फ प्राइस, चार्ट या टिप देखकर इन्वेस्ट करते हैं? यही फर्क है बफेट और बाकी इन्वेस्टर्स के बीच। बफेट का हर डिसिशन डाटा प्रिंसिपल और लॉन्ग टर्म सोच पर आधारित होता है। और सबसे आखिरी जरूरी बात इस अध्याय से पेशेंस इज प्रॉफिट। बफेट ने कहा है दी स्टॉक मार्केट इज डिज़ टू ट्रांसफर मनी फ्रॉम दी एक्टिव टू दी पेशेंट। मतलब जो लोग जल्दी-जल्दी में बायल करते हैं। वह अपना पैसा उन लोगों को दे रहे होते हैं जो शांत बैठे हैं। जो सही मौके का इंतजार कर रहे हैं। तो इस चैप्टर से क्या सीखा? इन्वेस्टिंग को आसान बनाओ। कॉम्प्लेक्स नहीं। कंपनी को समझो। उसकी कीमत और वैल्यू

29:37 का फर्क जानो। सिर्फ साउंड बिजनेसेस में भरोसा रखो। लीडरशिप, एथिक्स और फाइनशियल्स को डीपली एनालाइज करो। डायवर्सिफिकेशन से ज्यादा जरूरी है फोकस और अंडरस्टैंडिंग और सबसे बढ़कर धैर्य रखो। शांति रखो। क्योंकि वक्त ही असली रिटर्न लाता है। अब आप सोचिए अगर आप भी आज से बफेट की तरह इन्वेस्टिंग के ग्राउंड रूल्स अपनाना शुरू करें तो क्या आपकी पोर्टफोलियो क्वालिटी इंप्रूव नहीं होगी? बिल्कुल होगी। और यही है बफेट का तरीका। सिंपल सोचना, डीपली समझना और बोल्डली इन्वेस्ट करना। अब हम शुरू कर रहे हैं चैप्टर छ जो वारेन बफेट की इन्वेस्टिंग की सबसे टेक्निकल लेकिन सबसे जरूरी स्किल पर केंद्रित है। चैप्टर छह

30:22 फाइंडिंग द राइट वैल्यू सही वैल्यू कैसे पहचाने? बफेट का वैल्यू्यूएशन तरीका। अब तक हमने जाना कि बफेट कैसे सोचते हैं? क्या प्रिंसिपल्स फॉलो करते हैं? और वह किस तरह कंपनीज को परखते हैं। लेकिन असली सवाल अब आता है अच्छी कंपनी को कैसे पहचाना जाए कि वह अभी सही कीमत पर मिल रही है या नहीं? क्योंकि इन्वेस्टिंग में सबसे ज्यादा फर्क यहीं पर होता है। आपने जो खरीदा वह महंगा था या सस्ता। बफेट कहते हैं रिस्क कम्स नॉट फ्रॉम वोलेटिलिटी बट फ्रॉम ओवरपेइंग फॉर अ बिज़नेस। यानी असली रिस्क तब आता है जब आप किसी कंपनी के लिए जरूरत से ज्यादा कीमत चुकाते हैं। और इसी वजह से बफेट का पूरा ध्यान रहता है। वैल्यू्यूएशन पर बफेट की वैल्यू्यूएशन फिलॉसफी बफेट इन्वेस्टिंग को दो हिस्सों

31:09 में बांटते हैं। बिजनेस क्वालिटी एनालिसिस यानी कंपनी का मॉडल मोड मैनेजमेंट मार्जिनस आदि। इंट्रिंसिक वैल्यू एस्टिमेशन यानी उस कंपनी की असली वैल्यू क्या है? जिसे वह इंट्रिंसिक वैल्यू कहते हैं। अब सवाल उठता है इंट्रिंसिक वैल्यू क्या होती है? बफेट कहते हैं, इंट्रिंसिक वैल्यू इज द डिस्काउंटेड वैल्यू ऑफ द कैश दैट कैन बी टेकन आउट ऑफ अ बिज़नेस ड्यूरिंग इट्स रिमेनिंग लाइफ। मतलब कोई कंपनी आने वाले सालों में कितना पैसा कमाएगी और उस पैसे का आज का मूल्य कितना है। यही है इंट्रिंसिक वैल्यू। यह थोड़ा टेक्निकल लग सकता है, लेकिन बफेट इसे बहुत आसान बनाते हैं। स्टेप बाय स्टेप बफेट स्टाइल वैल्यू्यूएशन। स्टेप एक अंडरस्टैंड बिजनेस

31:55 अर्निंग पावर। पहले यह देखो कि कंपनी हर साल कितनी कमाई कर रही है। यानी उसका नेट प्रॉफिट या ओनर अर्निंग्स। बफेट कहते हैं अर्निंग्स अदर इंजन ऑफ़ वैल्यू। अगर कंपनी कंसिस्टेंट अर्निंग दे रही है, तो यह पहली अच्छी निशानी है। स्टेप दो प्रेडिक्ट फ्यूचर कैश फ्लोस। अब देखो कि अगले 510 सालों में यह कंपनी कितना कमा सकती है। मतलब आप एक प्रोजेक्शन बनाते हैं रियलिस्टिक अंदाजे के साथ। यहां बफेट कॉशन देते हैं। डोंट बी ओवरली ऑप्टिमिस्टिक। बी कजर्वेटिव यानी ओवरली हाई एक्सपेक्टेशंस मत रखो। ग्राउंड रियलिटी के साथ सोचो। स्टेप तीन डिस्काउंट दोज़ अर्निंग्स। अब जो आपने फ्यूचर अर्निंग्स का अनुमान लगाया उसे आप आज के पैसे में बदलते हो। इसे कहते

32:42 हैं डिस्काउंटेड कैश फ्लो डीसीएफ। यानी जो पैसा आपको 5 साल बाद मिलेगा उसका आज का मूल्य क्या है? इस कैलकुलेशन में एक रेट लगता है जिसे कहते हैं डिस्काउंट रेट जो आमतौर पर 10% से 15% के बीच होता है। डिपेंडिंग ऑन रिस्क। स्टेप चार कंपेयर इंट्रिंसिक वैल्यू वर्सेस मार्केट प्राइस। अब जो फाइनल वैल्यू आपने निकाली उसे कंपेयर करो आज के मार्केट प्राइस से। अगर इंट्रेंसिक वैल्यू ज्यादा है और मार्केट प्राइस कम है तो बफेट कहते हैं। दैट्स योर चांस टू इन्वेस्ट। इसे कहते हैं बाइंग विद अ मार्जिन ऑफ़ सेफ्टी। मार्जिन ऑफ़ सेफ्टी बफेट का सबसे जरूरी प्रिंसिपल। बफेट का फेवरेट इन्वेस्टिंग रूल यही है। नेवर इन्वेस्ट विदाउट अ मार्जिन ऑफ़ सेफ्टी।

33:28 मतलब अगर आपने कैलकुलेट किया कि किसी कंपनी की इंट्रिंसिक वैल्यू ₹500 है तो बफेट उसे ₹300 या ₹350 पर ही खरीदेंगे ताकि अगर थोड़ी गलती भी हो तो भी नुकसान ना हो। बफेट इस प्रिंसिपल को अपने मेंटोर बेंजामिन ग्राहम से लेकर आए हैं। जिन्होंने हमेशा सिखाया कि सुरक्षा सबसे पहले। बफेट कहते हैं यू डोंट नीड टू स्विंग एट एव्री पिच। जस्ट वेट फॉर द वन यू अंडरस्टैंड एंड इज प्राइस राइट। यानी हर स्टॉक में पैसे लगाने की जरूरत नहीं। बस पेशेंस रखो और सही मौके पर खेलो। रियल एग्जांपल बफेट ने जिलेट में निवेश क्यों किया? बफेट ने जिलेट में तब निवेश किया जब लोग उस स्टॉक को लेकर ज्यादा एक्साइटेड नहीं थे। उन्होंने देखा कि हर आदमी रोज

34:17 शेविंग करता है। ब्रांड लॉयल्टी स्ट्रांग है। हाई रिपीट कस्टमर बेस है। प्रॉफिट मार्जिनस जबरदस्त है। और जब प्राइस उनकी इंट्रिंसिक वैल्यू से कम मिला तो बफेट ने हैवी निवेश किया और वो इन्वेस्टमेंट एक ब्लॉकबस्टर साबित हुआ। तो अब सवाल आपसे क्या आप किसी कंपनी की वैल्यू सिर्फ उसके स्टॉक प्राइस से तय करते हो या आप उस कंपनी की कमाई, सस्टेनेबिलिटी और मोड पर ध्यान देते हो? बफेट कहते हैं प्राइस इज व्हाट यू पे, वैल्यू इज व्हाट यू गेट। और यही इस चैप्टर की सोल है। इस अध्याय से पांच बिग टेक अवेज़। गुड बिजनेस को सही कीमत पर खरीदना सबसे जरूरी है। इंट्रिंसिक वैल्यू फ्यूचर अर्निंग्स का आज का मूल्य मार्जिन ऑफ सेफ्टी इन्वेस्टिंग को सेफ बनाता है। प्राइस और वैल्यू में फर्क

35:04 समझो। सस्ता दिखना हमेशा अच्छा नहीं होता। पेशेंस और डिसिप्लिन ही बफेट की असली ताकत है। अब जरा सोचिए अगर आप किसी कंपनी की ट्रू वैल्यू कैलकुलेट कर पाओ तो क्या आप दूसरों से बेहतर डिसीजंस नहीं ले पाओगे? बिल्कुल पाओगे। और यही बफेट का तरीका है। कैलकुलेट करो, वेट करो और तब इन्वेस्ट करो। चैप्टर सात जो कि बफेट की इन्वेस्टमेंट फिलॉसफी का एक बेहद अहम हिस्सा है। इस अध्याय में हम जानेंगे बफेट का नजरिया मैनेजमेंट के बारे में। यानी किसी भी बिजनेस की लीडरशिप को वह कैसे देखते हैं और क्यों एक अच्छा मैनेजर उतना ही जरूरी होता है जितना कि एक अच्छा बिजनेस। चैप्टर सात द मैनेजमेंट टेनेंट्स। वारेन बफेट के मुताबिक एक अच्छे निवेश के

35:50 लिए कैसी होनी चाहिए एक कंपनी की लीडरशिप। वारेन बफेट कहते हैं व्हेन यू बाय स्टॉक यू आर बाइंग अ पार्ट ऑफ अ बिज़नेस। एंड बिहाइंड एव्री बिनेस देयर आर पीपल। यानी अगर आप किसी बिजनेस को चुन रहे हैं तो आप सिर्फ उसके प्रोडक्ट या नंबर्स में नहीं बल्कि उसके लीडर्स में भी भरोसा जता रहे हो और यही कारण है कि बफेट किसी भी इन्वेस्टमेंट से पहले कंपनी की मैनेजमेंट को गहराई से परखते हैं। बफेट की नजर में मैनेजमेंट के तीन सबसे अहम गुण। एक रैशनलिटी। क्या मैनेजमेंट सोच समझ कर फैसले लेती है? बफेट उन मैनेजर्स को पसंद करते हैं जो सही समय पर कैपिटल एलोकेट करें। जरूरत हो तभी एक्सपेंशन करें और शेयरहोल्डर के पैसे को अपनी जिम्मेदारी

36:36 समझे। वो ऐसे सीईओएस से बचते हैं जो सिर्फ मीडिया में छाने या ईगो सेटिस्फेक्शन के लिए गलत डिसीजंस लेते हैं। एग्जांपल बफेट ने देखा है कि कुछ सीओएस एक्विजिशंस पर इतना पैसा फूंक देते हैं जो कंपनी को बर्बादी की कगार पर ले आता है। सिर्फ इसलिए कि वो बड़ा दिखना चाहते हैं। जबकि बफेट खुद ऐसी कंपनीज़ में इन्वेस्ट करते हैं जहां कैपिटल एलोकेशन पूरी समझदारी और डिसिप्लिन से किया जाता है। दो ट्रांसपेरेंसी क्या मैनेजमेंट सच्चाई से शेयरहोल्डर्स से बात करती है? बफेट के लिए सबसे जरूरी बात है कैंडिडेट कम्युनिकेशन। मतलब कंपनी की लीडरशिप अपनी कमियां भी उतनी ही साफ-साफ बताएं। जितनी ताकतें वो कहते हैं आई लुक फॉर मैनेजमेंट्स दैट टेल

37:23 मी द बैड न्यूज़ क्विकली एंड दी गुड न्यूज़ स्लोली। यानी बफेट को ऐसे लीडर्स चाहिए जो मुश्किल वक्त में भागे नहीं बल्कि सच्चाई से शेयरहोल्डर्स को स्थिति बताएं। एग्जांपल बफेट खुद अपनी शेयरहोल्डर लेटर्स में हर साल अपनी गलतियां ओपनली एक्सेप्ट करते हैं क्योंकि उनके लिए ऑनेस्टी सबसे बड़ी वैल्यू है। तीन पैशन फॉर द बिनेस। क्या मैनेजमेंट को कंपनी से प्यार है या सिर्फ पैसा चाहिए? बफेट मानते हैं कि एक अच्छा लीडर वो होता है जो बिजनेस को सिर्फ जॉब नहीं मिशन की तरह समझता है। ऐसे लोग डिसिशनंस में ज्यादा सिंसियर होते हैं। इनोवेशन लाते हैं और लॉन्ग टर्म सोचते हैं। बफेट कहते हैं आई वांट टू इन्वेस्ट इन पीपल हु वुड बी डूइंग व्हाट दे आर डूइंग इवन इफ दे वर गेटिंग

38:10 पेड। यानी वो सीईओएस जो अपने काम में इतने कमिटेड हो कि उन्हें पैसा कमाने से ज्यादा बिजनेस ग्रो करने में मजा आता हो। बफेट की मैनेजमेंट टेनेट्स को एक लाइन में समझें। ग्रेट बिजनेसेस फेल विद पुअर मैनेजमेंट बट इवन एवरेज बिजनेसेस कैन थ्राइव अंडर एक्सीलेंट लीडरशिप। मतलब आपका प्रोडक्ट कितना भी अच्छा हो। अगर उसे चलाने वाला इंसान लालची, ईगोइस्टिक या गैर जिम्मेदार है तो कंपनी को डूबने से कोई नहीं बचा सकता। इसलिए बफेट कहते हैं। लुक एट द जॉकी नॉट जस्ट द हॉर्स। इस अध्याय से क्या सीखें? कैपिटल एलोकेशन की समझदार लीडरशिप जरूरी है। ट्रांसपेरेंसी और ईमानदारी बफेट की सबसे बड़ी डिमांड है। बिजनेस से पैशन

38:57 रखने वाला सीईओ ही लॉन्ग टर्म वैल्यू क्रिएट करता है। शानदार प्रोडक्ट से ज्यादा जरूरी है जिम्मेदार इंसान। इन्वेस्टिंग सिर्फ नंबर्स का नहीं इंसानों की पहचान का खेल भी है। अब आप सोचिए जब आप अगली बार किसी कंपनी में पैसा लगाओ तो क्या आप सिर्फ उसका प्रॉफिट देखोगे या उसके पीछे बैठी टीम और उनके इरादे भी समझने की कोशिश करोगे। बफेट जैसे इन्वेस्टर्स वही फर्क समझते हैं। और वही फर्क उन्हें मार्केट से ऊपर उठाकर लेजेंड बना देता है। अब हम पहुंच चुके हैं चैप्टर आठ पर। जहां वारेन बफेट की इन्वेस्टमेंट जर्नी का एक ऐसा पहलू सामने आता है जो शायद सबसे ज्यादा अनदेखा किया जाता है। लेकिन वही पहलू उन्हें हर इन्वेस्टर से अलग बनाता है। चैप्टर आठ द बिजनेस

39:44 टेनेंट्स। बिजनेस के वो चार मूल सिद्धांत जिन पर बफेट भरोसा करते हैं। अब तक हमने जाना कि बफेट इन्वेस्टिंग डिसिशन से पहले क्या सोचते हैं। वैल्यू, मैनेजमेंट, इंट्रिंसिक प्राइस, मोट वगैरह। लेकिन इस अध्याय में वह हमें बताते हैं कि किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले वह कौन-कौन से सवाल खुद से पूछते हैं। बफेट की एक लाइन है। आई एम अ बेटर इन्वेस्टर बिकॉज़ आई एम अ बिजनेसमैन एंड अ बेटर बिजनेसमैन बिकॉज़ आई एम एन इन्वेस्टर। यानी बफेट सिर्फ नंबर्स नहीं देखते। वह कंपनी को एक जिंदा ब्रीदिंग बिजनेस की तरह देखते हैं और इसी वजह से वह चार बिजनेस टेनेट्स फॉलो करते हैं। जिन्हें समझना किसी भी इन्वेस्टर के लिए गेम चेंजर हो सकता है। तो चलिए एक-एक करके उन्हें समझते हैं।

40:31 बफेट की सोच और हमारी जिंदगी से जुड़े रिलेटेबल एग्जांपल्स के साथ। टेनेटक इज द बिनेस सिंपल एंड अंडरस्टैंडेबल? क्या यह बिजनेस आसान और समझने लायक है? बफेट कभी भी ऐसी कंपनी में निवेश नहीं करते। जिसका बिजनेस मॉडल उन्हें कंफ्यूज करता है। उनका मानना है अगर आप किसी कंपनी के काम को 5 मिनट में नहीं समझा सकते तो उसे समझा ही नहीं है। यही वजह है कि बफेट ऐसे बिजनेसेस में निवेश करते हैं। जैसे कोकाला, सी कैंडीज, अमेरिकन एक्सप्रेस आदि जिनकी प्रोडक्ट, प्रोसेस और कस्टमर बेस क्रिस्टल क्लियर है। एग्जांपल कोकाला लोग रोज पीते हैं। डेकेड से कंसिस्टेंट है। ब्रांड स्ट्रांग है और डिस्ट्रीब्यूशन हर जगह है।

41:17 सिंपल बिजनेस स्ट्रांग वैल्यू बफेट टेक कंपनी से भी सालों तक इसलिए दूर रहे क्योंकि उन्हें उनका मॉडल पूरी तरह समझ नहीं आता था। लेसन फॉर अस ऐसे बिजनेस को चुनो जिसे आप आपके माता-पिता या कोई 10वीं क्लास का बच्चा भी समझ सके। 10 दो डस द बिजनेस हैव अ कंसिस्टेंट ऑपरेटिंग हिस्ट्री? क्या कंपनी का परफॉर्मेंस लगातार स्टेबल रहा है? बफेट उन कंपनियों को अवॉइड करते हैं जो अचानक ग्रो करती है और फिर क्रैश कर जाती है। उन्हें कंसिस्टेंसी पसंद है। वह देखते हैं पिछले 5 10 सालों से कंपनी स्टेडी ग्रो कर रही है या नहीं? क्या हर साल उसकी अर्निंग्स इंप्रूव हो रही है? क्या कस्टमर्स लगातार उसके साथ बने हुए हैं। बफेट के मुताबिक अ गुड बिनेस प्रोड्यूसेस प्रेडिक्टेबल एंड

42:04 प्रूवन रिजल्ट्स ओवर टाइम। इसलिए वह ऐसे सेक्टर्स में रेयरली इन्वेस्ट करते हैं। जहां रेगुलेशन, पॉलिटिक्स या फैशन ट्रेंड से परफॉर्मेंस हिलता है। जैसे एयरलाइन, टेलीकॉम या फैशन बेस्ड कंपनीज़। 10 तीन डस द बिनेस हैव फेवरेबल लॉन्ग टर्म प्रोस्पेक्ट्स? क्या कंपनी का फ्यूचर ब्राइट और सस्टेनेबल है? अब बात आती है कंपनी के फ्यूचर की। बफेट यहां देखते हैं कि क्या आने वाले 10 20 सालों में इस कंपनी की जरूरत बनी रहेगी? क्या इसका प्रोडक्ट ऐसा है जिसे लोग बार-बार यूज करेंगे? क्या कॉम्पिटिटर्स इसे आसानी से कॉपी कर सकते हैं? एग्जांपल जिलेट। हर आदमी रोज शेविंग करता है। कंपनी के पास ब्रांड लॉयल्टी है। रिपीट कस्टमर बेस है

42:49 और प्राइसिंग पावर है। बफेट इसे कहते हैं। ड्यूरेबल कंपिटिटिव एडवांटेज। मतलब वो मोड जो कंपनी को लॉन्ग टर्म में भी सेफ रखे। टेनेट चार इज द मैनेजमेंट रैशन एंड कैंडिडेट विद शेयर होल्डर्स? क्या कंपनी का नेतृत्व ईमानदार और पारदर्शी है? बफेट किसी कंपनी के नंबर से ज्यादा उसके मैनेजमेंट को परखते हैं। वह पूछते हैं क्या सीईओ शेयरहोल्डर्स के हित में फैसले ले रहा है? क्या वो अपनी सैलरी और पर्ग्स जस्टिफाई करता है? क्या कंपनी अपनी गलतियां स्वीकार करती है? बफेट को पसंद नहीं ऐसे सीईओएस जो सिर्फ मीडिया में दिखने के लिए काम करते हैं या जो अपने लॉसेस छुपाते हैं उनके लिए मैनेजमेंट की ऑनेस्टी ही सबसे बड़ी मोट है। वो कहते हैं आई रादर इन्वेस्ट इन अ मिडकर बिनेस वि

43:34 ग्रेट पीपल देन अ ग्रेट बिजनेस वि डिसओनेस्ट लीडरशिप। तो इस अध्याय से हमें क्या सीखने को मिला? बफेट की नजर में एक अच्छे बिजनेस की पहचान यह है। सिंपल हो समझने में आसान। कंसिस्टेंट हो साल दर साल स्टेडी ग्रो करता हो फ्यूचर प्रूफ हो आने वाले सालों में जरूरत बनी रहे ईमानदार लोग चलाते हो जो शेयर होल्डर की इज्जत करें और यही वो चार पिलर्स हैं जिन पर बफेट किसी भी निवेश का डिसीजन लेते हैं। यह प्रिंसिपल्स ना सिर्फ इन्वेस्टिंग में काम आते हैं बल्कि अगर आप खुद कोई बिजनेस चलाते हैं तो यह आपकी कंपनी को भी बफेट लेवल की क्रेडिबिलिटी दे सकते हैं। अब आप सोचिए क्या आपने कभी किसी स्टॉक को खरीदने से पहले खुद से यह चार सवाल पूछे हैं? अगर

44:21 नहीं तो आज से पूछिए। क्योंकि बफेट जैसा बनना है तो सोचना भी बफेट जैसा होगा। अब हम बढ़ते हैं चैप्टर नौ की ओर। जहां बात होगी वारेन बफेट के निवेश की फाइनेंशियल टेनेंट्स की। अब तक हमने जाना कि बफेट किसी बिजनेस को कैसे समझते हैं। कैसे उसका मॉडल, मैनेजमेंट और भविष्य देखते हैं। लेकिन अब सवाल है किसी भी कंपनी की फाइनेंशियल स्ट्रेंथ को कैसे परखा जाए? तो चलिए शुरू करते हैं चैप्टर नौ दी फाइनेंसियल टेनेंट्स। बफेट के निवेश के पीछे के नंबरों की कहानी। बफेट कहते हैं, आई डोंट लुक एट दी स्टॉक मार्केट एज अ कसीनो। आई लुक एट इट एज अ प्लेस टू बाय पोशनंस ऑफ़ रील बिनेसेस। और जब आप कोई बिजनेस खरीदते हो तो उसका हेल्थ चेकअप

45:07 जरूरी होता है। है ना? यानी वह कितना कमा रही है, उसकी ग्रोथ कैसी है? उसका खर्चा, डे, रिटर्न्स कैसे हैं। इस अध्याय में बफेट हमें सिखाते हैं कि फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को कैसे देखा जाए? और किस तरीके से वह नंबर्स को जादू की तरह यूज करते हैं। लेकिन बहुत ही सिंपल लॉजिक के साथ बफेट किसी भी कंपनी को एनालाइज करने के लिए चार की फाइनेंसियल मैट्रिक्स को ध्यान में रखते हैं। एक रिटर्न ऑन इक्विटी रो मालिक के पैसे पर कंपनी कितना रिटर्न देती है। रो नेट इनकम शेयरहोल्डर्स इक्विटी। बफेट कहते हैं रो ही बताता है कि कंपनी अपने मालिकों के पैसों को कितना इफेक्टिवली यूज कर रही है। एग्जांपल दो कंपनीज है। कंपनी ₹10 क्रोर कमाती है।

45:55 ₹100 क्रॉ इक्विटी पर रो 10% कंपनी भी ₹10 क्रोर कमाती है। ₹50 क्रॉ के इक्विटी पर रो 20% बफेट को कंपनी भी ज्यादा पसंद आएगी क्योंकि वो अपने रिसोर्सेज को ज्यादा एफिशिएंटली यूज कर रही है। हाय रो बेटर बिजनेस मॉडल प्लस एफिशिएंट मैनेजमेंट। दो प्रॉफिट मार्जिनस। कमाई में से कितना हिस्सा एक्चुअल प्रॉफिट है? प्रॉफिट मार्जिन नेट प्रॉफिट रेवेन्यू। बफेट उन कंपनियों में निवेश करते हैं जिनके स्टेबल और प्रेफरेबबली इनक्रीजिंग प्रॉफिट मार्जिनस हो। वो कहते हैं कंसिस्टेंट हाई मार्जिनस बताती है कि कंपनी के पास प्राइसिंग पावर है। जैसे कोकाला या जिलेट। इनके पास इतनी ब्रांड वैल्यू है कि वह अपना प्राइस बढ़ा सकते हैं। फिर भी लोग खरीदते हैं। लोमार्जिन कंपनीज जो सिर्फ

46:42 प्राइस कट करके सर्वाइव करती है। बफेट उनसे दूर रहते हैं। तीन अर्निंग्स प्रेडिक्टेबिलिटी। क्या कंपनी की कमाई अनुमानित और स्थिर है? बफेट स्टेबल और प्रेडिक्टेबल अर्निंग्स को पसंद करते हैं। वह उन कंपनियों से बचते हैं जिनकी इनकम बहुत वोलेटाइल होती है। जैसे कमोडिटी बेस्ड या साइक्लिकल इंडस्ट्रीज, ऑयल, मेटल्स, एयरलाइंस आदि। इफ यू कांट प्रेडिक्ट अ बिनेसेस अर्निंग्स, यू कांट वैल्यू इट। इसलिए बफेट ऐसी कंपनीज को चुनते हैं जिनका बिजनेस मॉडल क्लियर है। जिनकी अर्निंग्स हर साल स्टेडली ग्रो करती है। जिनमें इकोनॉमिक सरप्राइज कम आते हैं। चार डे मैनेजमेंट। कंपनी कितना उधार लेकर चल रही है। बफेट कभी भी हैवली लेवरेज्ड कंपनीज़ में पैसा नहीं लगाते। उनका मानना

47:30 है कि डेप्ट इज लाइक ऑक्सीजन। यू डोंट नोटिस इट अंटिल इट्स गॉन। अगर कंपनी पर ज्यादा डेप्ट है तो मार्केट डाउन टर्न में वह कंपनी टिक नहीं पाएगी। वह प्रेफर करते हैं लोडेड कंपनीज जिनकी कैश फ्लो इतनी स्ट्रांग हो कि वो खुद अपने एक्सपेंशन और ऑपरेशंस को फंड कर सके। डे हैवी कंपनीज़ को बफेट रिस्की मानते हैं। भले ही उनकी अर्निंग्स टेंपरेरीली अच्छी दिख रही हो। बर्ड की फाइनशियल चेक लिस्ट। अब अगर आपको बफेट की तरह कोई कंपनी इवैलुएट करनी हो तो पूछो। क्या रो कंसिस्टेंटली 15% या उससे ऊपर है? क्या प्रॉफिट मार्जिन स्टेबल और स्ट्रांग है? क्या अर्निंग्स हर साल स्टेडी ग्रो कर रही है? क्या डे कम है या मैनेजेबल है? अगर जवाब हां है, तो यह

48:16 कंपनी बफेट की फिल्टर से निकल सकती है? बफेट की सोच। नंबर्स कहानियां सुनाते हैं। बफेट कभी भी नंबर्स को सिर्फ फार्मूलाज़ के लिए यूज़ नहीं करते। वो उन्हें एक कहानी की तरह पढ़ते हैं। प्रॉफिट बढ़ रहा है। क्यों? मार्जिन घटा है, प्राइसिंग इशू है या कंपटीशन ज्यादा हो गया? डे बढ़ा है? क्या कंपनी रिस्की टेरिटरी में जा रही है? वह हर रेश्यो को एक सिग्नल की तरह देखते हैं जो उन्हें बताता है कि यह बिजनेस साउंड है या नहीं। इस अध्याय से पांच बड़ी सीख। हाई रो स्मार्ट कंपनी, स्ट्रांग प्रॉफिट मार्जिनस, कंपिटिटिटिव एडवांटेज, स्टेडी अर्निंग्स, प्रेडिक्टबल वैल्यू्यूएशन, लो डेप्ट लॉन्ग टर्म सर्वाइवल, फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, बिजनेस की सच्चाई। अब आप सोचिए जब आप अगली बार कोई स्टॉक खरीदने

49:03 जाएं तो क्या आप सिर्फ प्राइस और ट्रेंड देखकर डिसीजन लेंगे या बफेट की तरह फाइनेंशियल हेल्थ देखेंगे यही फर्क बनाता है एक इन्वेस्टर को एवरेज से एक्स्ट्राऑर्डिनरी। अब हम आ चुके हैं चैप्टर 10 पर जो वारेन बफेट की पूरी इन्वेस्टिंग स्ट्रेटजी का वो हिस्सा है जहां एनालिसिस से एक्शन लिया जाता है। अब तक हमने जाना कि बफेट किसी बिजनेस को कैसे चुनते हैं। कैसे उसके नंबर्स को समझते हैं। और कैसे उसका भविष्य आकते हैं। लेकिन असली फैसला तो तब होता है जब सवाल आता है। अब खरीदना है या नहीं? तो चलिए शुरू करते हैं। चैप्टर 10 द वैल्यू टेननेट्स वारेन बफ का असली बाय और नॉट टू बाय फार्मूला। बफेट इन्वेस्टिंग को कभी गैंबल की तरह नहीं देखते। वो कहते हैं इन्वेस्टमेंट इज

49:50 मोस्ट इंटेलिजेंट व्हेन इट इज मोस्ट बिजनेस लाइक। इसका मतलब है हर निवेश। चाहे वह एक रुपया का हो या एक रुपया करोड़ का उसे बिजनेस की तरह सोच कर करना चाहिए और यही सोच उन्हें भीड़ से अलग करती है। इस अध्याय में बफेट हमें बताते हैं कि किसी बिजनेस की असली वैल्यू कैसे कैलकुलेट की जाए और उसे सही कीमत पर खरीदने का फैसला कैसे लिया जाए। बफेट के वैल्यू टेनेट्स यह टेनेट्स हैं वो प्रैक्टिकल फिल्टर्स जिनके जरिए बफेट तय करते हैं कि इज इट वर्थ बाइंग और शुड आई वेट? आइए इन्हें एक-ए करके सिंपल लैंग्वेज में समझते हैं। टेनेटेक कैलकुलेट इंट्रिंसिक वैल्यू। इंट्रिंसिक वैल्यू यानी किसी कंपनी की असली कीमत। उसकी भविष्य की अर्निंग्स के

50:37 आधार पर। बफेट कहते हैं द इंट्रिंसिक वैल्यू ऑफ एनी बिजनेस इज द कैश इट कैन जनरेट ओवर इट्स लाइफ टाइम। डिस्काउंटेड टू टुडेेस वैल्यू। यानी अगर कोई कंपनी आने वाले 10 20 साल में ₹1000 करोड़ कमाने वाली है तो उसकी आज की वैल्यू क्या है? यह कैलकुलेट करने के लिए बफेट इस्तेमाल करते हैं। डिस्काउंटेड कैश फ्लो डीसीएफ मॉडल रीज़नेबल डिस्काउंट रेट 1015% कंजर्वेटिव प्रोजेक्शंस। उन्हें एजमशंस नहीं चाहिए। उन्हें लॉजिक और रील अर्निंग्स चाहिए। 10 दो लुक फॉर अ मार्जिन ऑफ़ सेफ्टी। अब मान लीजिए आपने कैलकुलेट किया कि किसी कंपनी की इंट्रिंसिक वैल्यू ₹500 है तो क्या आप ₹500 पर उसे खरीद लोगे? बफेट कहते हैं

51:24 नहीं। वो कहते हैं ऑलवेज बाय एट अ प्राइस लोअर देन वैल्यू। गिव योरसेल्फ अ मार्जिन सेफ्टी। मतलब आप उसे 30350 पर ही खरीदने की कोशिश करो। ताकि अगर आपकी कैलकुलेशन थोड़ी गलत भी हो गई तो नुकसान नहीं होगा। यही बफेट की इन्वेस्टिंग का सबसे फेमस प्रिंसिपल है। मार्जिन ऑफ सेफ्टी इन्वेस्टिंग विद प्रोटेक्शन। 10 तीन इग्नोर मार्केट सेंटीमेंट। मार्केट रोज चढ़ता गिरता है। न्यूज़ आती है नॉइज़ बनती है। लेकिन बफेट उस पर भरोसा नहीं करते। वो कहते हैं मिस्टर मार्केट इज देयर टू सर्व यू नॉट टू गाइड यू। यानी मार्केट अगर कोई कंपनी ₹700 में बेच रहा है लेकिन उसकी असली वैल्यू ₹1000 है तो यह आपका मौका है। लेकिन अगर

52:12 वह ₹1300 में बेच रहा है तो आप पोलाइटली मना कर दीजिए। बफेट मार्केट से डरते नहीं। वो मार्केट का फायदा उठाते हैं। टेनेट चार फोकस ऑन लॉन्ग टर्म वैल्यू नॉट शॉर्ट टर्म ट्रेंड्स। बफेट कभी भी प्राइस मूवमेंट्स या क्वार्टली न्यूज़ पर डिसीजंस नहीं लेते। वह पूछते हैं क्या यह बिजनेस 10 20 साल तक टिकेगा? क्या यह कंपनी सस्टेनेबल प्रॉफिट दे सकती है? क्या मैं इस कंपनी को हमेशा के लिए ओन करना चाहूंगा? उनका मंत्रा बाय अ बिजनेस सो गुड दैट एन इडियट कैन रन इट बिकॉज़ सम डे वन विल। यानी सिस्टम इतना स्ट्रांग हो कि लीडरशिप बदलने से भी फर्क ना पड़े। टेनेट पांच इमोशनल इंडिपेंडेंस बफेट की इन्वेस्टिंग फिलॉसफी की असली ताकत उनके भावनात्मक नियंत्रण में

53:00 है। वो कहते हैं द बेस्ट इन्वेस्टर्स आर नॉट दोज़ विद हाई आईक्यूस बट दोज़ विद स्ट्रांग इमोशनल डिसिप्लिन। जब सब डरते हैं बफेट शांति से सोचते हैं। जब सब खरीदते हैं, वो वैल्यू्यूएशन चेक करते हैं। लॉजिक इमोशन यही है उनकी असली ताकत। बफेट का पूरा डिसीजन मेकिंग प्रोसेस एक लाइन में ग्रेट बिजनेस प्लस ऑनेस्ट मैनेजमेंट प्लस राइट प्राइस प्लस मार्जिन और सेफ्टी इन्वेस्ट बस कोई जादू नहीं कोई तामझाम नहीं सिर्फ डिसिप्लिन क्लेरिटी और पेशेंस इस अध्याय की पांच पावरफुल सीखें वैल्यूएशन कोई अनुमान नहीं एक कैलकुलेशन है मार्जिन ऑफ सेफ्टी से इन्वेस्टमेंट सेफ बनती है मार्केट प्राइस सिर्फ ऑफर है ना कि गाइडेंस शॉर्ट टर्म ट्रेंड्स के पीछे

53:47 मत भागो। लॉन्ग टर्म सोचो। इन्वेस्टिंग का सबसे बड़ा हथियार है सेल्फ कंट्रोल। अब आप सोचिए क्या आपने कभी स्टॉक वैल्यू्यूएशन इस तरह से किया है? अगर नहीं तो आज से एक नई सोच अपनाइए। बफेट की सोच। क्योंकि इन्वेस्टिंग कोई गेसिंग गेम नहीं है। यह एक बिजनेस डिसिशन है। और जब आप बफेट की तरह सोचेंगे तभी आप बफेट जैसे रिजल्ट भी देख पाएंगे। जब कहो चैप्टर 11 शुरू करो तो मैं आपको लेकर चलूंगा बफेट की इन्वेस्टिंग की केस स्टडीज की तरफ जहां हम देखेंगे उन्होंने किन-किन कंपनियों में निवेश किया, क्यों किया और उनसे क्या सीखा। तैयार हो? बहुत बढ़िया। अब हम आ पहुंचे हैं

54:35 चैप्टर 11 पर। यहां से शुरू होता है वह हिस्सा जहां वारेन बफेट की थ्योरी नहीं बल्कि असल जिंदगी के उदाहरण सामने आते हैं। अब तक हमने जाना कि बफेट कैसे सोचते हैं, कैसे कंपनीज़ को एनालाइज करते हैं और क्या-क्या प्रिंसिपल्स फॉलो करते हैं। लेकिन अब हम देखेंगे उन्होंने प्रैक्टिकली किन कंपनियों में पैसा लगाया, क्यों लगाया और उनसे क्या सीखा? यह अध्याय है चैप्टर 11 बाइंग द राइट बिजनेस केस स्टडीज ऑफ बफेट्स बेस्ट इन्वेस्टमेंट्स। बफेट की असली दुनिया की इन्वेस्टमेंट्स केस स्टडीज। अब बफेट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वो हर इन्वेस्टमेंट डिसिशन सालों तक सोच कर पूरी क्लेरिटी और कन्विक्शन के साथ करते हैं। और जब वो किसी कंपनी में

55:20 इन्वेस्ट करते हैं तो वह सिर्फ पैसा नहीं लगाते। वह ओनरशिप माइंडसेट से सोचते हैं। इस चैप्टर में हम पांच ऐसी आइकॉनिक इन्वेस्टमेंट्स के बारे में जानेंगे जो बफेट की फिलॉसफी को पूरी तरह साबित करती है। केस स्टडी एक द वाशिंगटन पोस्ट कंपनी। 1973 में बफेट ने वाशिंगटन पोस्ट में निवेश किया। जब पूरा मीडिया सेक्टर अंडर प्रेशर था। कंपनी की इंट्रिंसिक वैल्यू लगभग $400 मिलियन थी। लेकिन मार्केट कैपिटलाइजेशन सिर्फ $80 मिलियन के आसपास थी। बफेट ने देखा स्ट्रांग ब्रांड लॉयल रीडरशिप मोनोपोली लाइक इनफ्लुएंस ऑनेस्ट और कैपेबल मैनेजमेंट कैथिन ग्राहम उन्होंने कहा यह सौदा इतना सस्ता था कि

56:05 जैसे किसी ने $1 की चीज को ₹10 में रख दिया हो। रिजल्ट बफेट ने अपनी इन्वेस्टमेंट को लगभग 10 एग्स ग्रो होते देखा। वो भी बिना ज्यादा रिस्क लिए। लेसन जब ब्रांड मजबूत हो और प्राइस सस्ता तो डरिए मत। बस खरीदिए। केस स्टडी दो सीज कैंडीज। अब यह बफेट की सबसे प्यारी डील्स में से एक थी। सीज कैंडीज एक वेस्ट कोस्ट चॉकलेट ब्रांड था जिसे बफेट ने 1972 में $25 मिलियन में खरीदा। कंपनी हर साल सिर्फ $4 मिलियन कमा रही थी। कई लोगों ने बफेट को रोका। कहा यह डील महंगी है। लेकिन बफेट ने सोचा अलग तरीके से। उन्होंने देखा ब्रांड लॉयल्टी जबरदस्त। लोगों के लिए

56:50 इमोशनल कनेक्शन, हाई प्राइसिंग पावर, लोग टेस्ट के लिए प्रीमियम देने को तैयार थे। कम कंपटीशन और सबसे बड़ी बात कंपनी ने हर साल कमाया हुआ पैसा डिविडेंड के रूप में बगयर को दिया। जिसे बफेट ने और इन्वेस्टमेंट्स में लगाया। रिजल्ट बफेट ने सी से अब तक अरबों डॉलर निकाले हैं। लेकिन बिजनेस आज भी बफेट के पोर्टफोलियो में है। लेसन स्मॉल दिखने वाले बिजनेसेस अगर ब्रांड और प्राइसिंग पावर रखते हो। तो वह लाइफ टाइम मशीनंस बन सकते हैं। केस स्टडी तीन अमेरिकन एक्सप्रेस एक 960 एस में अमेरिकन एक्सप्रेस एक स्कैंडल में फंस गई थी। मार्केट पैनिक में आ गया और स्टॉक प्राइस 50% गिर गया। लेकिन बफेट ने देखा

57:36 कंपनी का कोर बिजनेस अनफेक्टेड था। लॉल कस्टमर्स अब भी कार्ड यूज कर रहे थे। ब्रांड इंटैक्ट था। उन्होंने डीप एनालिसिस के बाद लाखों डॉलर इन्वेस्ट कर दिए। जब सब बेच रहे थे। रिजल्ट अमेरिकन एक्सप्रेस आज भी बफेट के टॉप होल्डिंग्स में से एक है। लेसन मार्केट के डर से नहीं लॉजिक और ब्रांड पावर से फैसला लो। केस स्टडी चार कोकाला 1988 में जब पेप्सी और कोला वॉर चल रही थी। बफेट ने $1 बिलियन काला स्टॉक खरीदा। लोग हैरान थे। इतनी बड़ी इन्वेस्टमेंट लेकिन बफेट का कैलकुलेशन साफ था। वर्ल्ड क्लास ब्रांड हर कोने में कोका कोला की पहुंच कम कीमत में हाई रिपीट

58:22 प्रोडक्ट स्ट्रांग मोड टेस्ट ट्रेडिशन ब्रांडिंग आज बशाय के पास कोक का इतना बड़ा स्टेक है कि उन्हें हर साल डिविडेंड्स में करोड़ों डॉलर मिलते हैं। लेसन बफेट को हमेशा से फॉरएवर बिनेसेस पसंद है और कोक एक परफेक्ट एग्जांपल है केस स्टडी पांच जेको। जेको एक कार इंश्योरेंस कंपनी थी जिसे बफेट ने पहली बार तब नोटिस किया जब वह सिर्फ 20 साल के थे। बफेट ने खुद उसके ऑफिस जाकर देखा कस्टमर से बात की और समझा कि जिको का डायरेक्ट कंज्यूमर मॉडल गेम चेंजिंग है। वो तब से उसके फैन हो गए। बशाए ने बाद में जिको को पूरी तरह एक्वायर कर लिया और वह अब बशाए की सबसे वैलएबल कंपनीज में से एक

59:08 है। लेसन ग्रेट इन्वेस्टमेंट्स अक्सर तभी मिलते हैं जब आप क्यूरियोसिटी से सीखते हो। बफेट खुद जाके कंपनीज़ को देखने निकलते थे। इस अध्याय से क्या सीखें? ग्रेट कंपनीज अक्सर पैनिकिक में सस्ती मिलती है। ब्रांड पावर, प्राइसिंग पावर और कस्टमर लॉयल्टी बफेट के लिए प्राइसलेस है। सिंपल बिजनेस प्लस स्ट्रांग मैनेजमेंट बफेट फेवरेट। बफेट कभी भी भीड़ के साथ नहीं चलते। वो रीजन और वैल्यू पर चलते हैं। पेशेंस और कन्विक्शन से बनी इन्वेस्टमेंट्स ही असली वेल्थ बनाती है। अब आप सोचिए क्या आपने कभी किसी इन्वेस्टमेंट को इतनी गहराई से सोचा है? बफेट कहते हैं, आई नेवर बाय स्टॉक अनलेस आई एम विलिंग टू ओन द एंटायर बिजनेस। और यही उन्हें बनाता है दुनिया का सबसे

59:54 भरोसेमंद निवेशक। अब हम पहुंच चुके हैं चैप्टर 12 पर। यह है द वारेन बफेट वे का आखिरी अध्याय। और जैसे हर महान कहानी का अंत एक सीख के साथ होता है। वैसे ही इस अध्याय में हमें मिलेगा बफेट की पूरी सोच, पूरी स्ट्रेटजी और पूरी जिंदगी का सार। एक फाइनल कंक्लूजन जो आपको ना सिर्फ एक बेहतर इन्वेस्टर बल्कि एक बेहतर सोच वाला इंसान भी बना सकता है। चैप्टर 12 द वे ऑफ वारेन बफेट। वारेन बफेट का असली रास्ता एक निवेशक से बढ़कर एक सोच। अब तक आप बफेट के बारे में बहुत कुछ जान चुके हो। उनकी डिसिप्लिन, उनका पेशेंस, उनकी बिजनेस अंडरस्टैंडिंग उनकी इमोशनलस्ट और उनका एक ही मकसद, वैल्यू पर

1:00:41 ध्यान देना। प्राइस पर नहीं। लेकिन इस आखिरी अध्याय में लेखक हमें याद दिलाते हैं कि बफेट का तरीका सिर्फ इन्वेस्टिंग का नहीं है। वो एक सोच है। एक जिंदगी जीने का तरीका है। बफेट की फिलॉसफी का सार। एक इंडिपेंडेंस ऑफ थॉट। बफेट की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह भीड़ की परवाह नहीं करते। जब मार्केट चढ़ रहा हो तब भी वह सोचते हैं। क्या यह सच में लॉजिकल है? जब सब पैनिक में बेच रहे हो तब वह सोचते हैं क्या यह मौका है? वो कहते हैं यू हैव टू बी एबल टू थिंक इंडिपेंडेंटली इवन व्हेन एवरीवन डिसएग्रीस विद यू। मतलब सोचना सीखो नकल नहीं करना। दो लाइफ लॉन्ग लर्निंग बफेट हर दिन घंटों किताबें पढ़ते हैं।

1:01:28 न्यूज़ लेटर्स, बैलेंस शीट्स, बायोग्राफीस। वो कहते हैं द मोर यू लर्न, द मोर यू अर्न। उनके मुताबिक सबसे वैलुएबल एसेट है आपका दिमाग और उसे रोज शार्पन करना जरूरी है। अगर आप हर दिन थोड़ा बेहतर बनते जाओ तो एक साल में आप 365 गुना नहीं एक्सप्पोनेंशियली ग्रो करते हो। तीन सिंपलीसिटी इज पावर। बफेट कभी कॉम्प्लिकेटेड स्ट्रेटजीस फॉलो नहीं करते। उनका मानना है सिंपल वर्क्स। कॉम्प्लेक्स फेल्स। वो सिंपल बिजनेसेस में निवेश करते हैं। सिंपल लैंग्वेज बोलते हैं। सिंपल लाइफ जीते हैं और फिर भी दुनिया के सबसे अमीर और रिस्पेक्टेड इंसान बन गए। क्यों? क्योंकि क्लेरिटी सबसे बड़ी ताकत है। चार

1:02:15 पेशेंस एंड टाइमिंग बफेट इन्वेस्टिंग को एक क्रिकेट मैच की तरह मानते हैं। जहां आपको हर बॉल पर शॉट नहीं मारना। वो कहते हैं द स्टॉक मार्केट इज अ नो कॉल स्ट्राइक गेम। यू डोंट हैव टू स्विंग। यू कैन वेट फॉर योर पिच। मतलब हर मौके पर एक्शन लेने की जरूरत नहीं। सिर्फ तब खरीदो जब आपके पास कन्विक्शन हो। पांच इंटेग्रिटी ओवर एवरीथिंग। बफेट के लिए कैरेक्टर सबसे ऊपर है। वो कहते हैं इट टेक्स 20 इयर्स टू बिल्ड अ रेपुटेशन एंड 5 मिनट्स टू रूइन इट। इसलिए बफेट सिर्फ उन्हीं लोगों और कंपनियों से जुड़ते हैं जिन पर वो पूरी तरह भरोसा कर सकें। उनके बिजनेस डिसिशनंस सिर्फ लॉजिक से नहीं वैल्यू से भी चलते हैं। बफेट्स फाइनल चेक लिस्ट बुक के हिसाब

1:03:02 से। अगर आप बफेट जैसा इन्वेस्टर बनना चाहते हो तो यह रहे आपके गाइडिंग रूल्स। अंडरस्टैंड द बिजनेस। लुक फॉर कंसिस्टेंट अर्निंग्स। सीक स्ट्रांग रिटर्न ऑन इक्विटी। अवॉयड एक्सेसिव डेप्ट। बाय एट अ डिस्काउंट टू इंट्रिंसिक वैल्यू। इन्वेस्ट फॉर द लॉन्ग टर्म। ट्रस्ट मैनेजमेंट विद इंटेग्रिटी। इग्नोर द मार्केट्स मूड स्विंग्स। बी फियरफुल व्हेन अदर्स आर ग्रीडी। एंड ग्रीडी व्हेन अदर्स आर फियरफुल। इन 10 लाइंस में ही छुपा है बफेट का पूरा रास्ता। आखिर में एक आखिरी सवाल। क्या बफेट जैसा बनना आसान है? शायद नहीं। लेकिन क्या बफेट जैसी सोच अपनाना मुमकिन है? बिल्कुल हां। आपको वॉल स्ट्रीट में बैठने की जरूरत नहीं। आपको करोड़ों का फंड

1:03:47 मैनेज करने की जरूरत नहीं। आपको बस चाहिए सही सोच, धैर्य और सीखने की भूख। वारेन बफेट वे कोई शॉर्टकट नहीं है। यह एक माइंडसेट है। तो दोस्तों, आपने अभी पूरी किताब सुनी। द वारेन बफेट वे एक इंसान की साधारण सोच से बनी असाधारण कामयाबी की कहानी। अब फैसला आपका है। क्या आप आज भीड़ के पीछे चलना चाहते हैं? या आज से बफेट की तरह सोचना, समझना और आगे बढ़ना चाहते हैं? अगर यह समरी आपके दिल को छू गई हो, तो इस वीडियो को शेयर कीजिए। कमेंट करके बताइए कि आपको सबसे ज्यादा क्या सीख मिला और हां अगर आप नए हो तो चैनल सुनो समझो सीखो को सब्सक्राइब करना मत भूलिए क्योंकि यहां हम

1:04:33 किताबों से जिंदगी बनाना सीखते हैं। इन्वेस्ट वाइजली थिंक डीपली और सबसे जरूरी वक्त के साथ अपने आप को ग्रो करते रहिए। मिलते हैं एक नए किताब के साथ। टैब टक के लिए खुद पर भरोसा रखिए और बफेट की तरह सोचिए।

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