Think Like a Billionaire, Become a Billionaire Book Summary in Hindi | करोड़ों की सोच! | Audiobook📚

BookThink www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो स्कॉट एंडरसन की किताब "थिंक लाइक अ बिलियनेयर, बिकम अ बिलियनेयर" पर आधारित है, जो बताती है कि असली दौलत पैसों में नहीं, बल्कि सोच में होती है। यह वीडियो उन लोगों के लिए है जो अपनी काबिलियत को पहचानते हैं, लेकिन बाहरी दुनिया उन्हें सीमित कर देती है।

मुख्य बातें:

  • असली दौलत सोच है, पैसों की कमी नहीं।
  • जैसे इंसान सोचता है, वैसा ही वह बनता है।
  • अमीर लोग अलग तरीके से सोचते हैं और अवसरों को पहचानते हैं।
  • अरबपति विचारकों की दैनिक आदतें उन्हें सफलता की ओर ले जाती हैं।
  • सही माहौल और संगति सफलता के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  • विश्वास, उद्देश्य और विज़न किसी भी बड़े सपने को हकीकत में बदलने के लिए जरूरी हैं।
  • कर्म से परिणाम मिलते हैं, इसलिए एक्शन लेना जरूरी है।

माइंडसेट इज द रियल वेल्थ

यह खंड बताता है कि असली दौलत हमारी सोच है, न कि भौतिक संपत्ति। गरीब व्यक्ति की सोच अक्सर नकारात्मक और बचाव वाली होती है, जबकि मध्यम वर्ग की सोच सुरक्षित रहने और सीमाओं के भीतर जीने पर केंद्रित होती है। इसके विपरीत, एक अरबपति की सोच प्रभाव बनाने और दूसरों को वैल्यू देने पर केंद्रित होती है। गरीबी पैसों की कमी नहीं, बल्कि सही सोच की कमी है। हमारी सोच हमारी परवरिश और आसपास के लोगों से प्रभावित होती है, लेकिन हम अपनी सोच को बदलकर प्रचुरता में सोच सकते हैं और अपने दिमाग को रचनात्मक मोड में ला सकते हैं।

एज अ मैन थिंक इथ सो इज ही

यह खंड बाइबल की एक पंक्ति पर आधारित है जो कहती है कि जैसा इंसान सोचता है, वैसा ही वह बनता है। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि हमारी पहचान, भविष्य और व्यक्तित्व हमारी सोच से बनते हैं। हम दिन में लगभग 60,000 विचार सोचते हैं, जिनमें से ज्यादातर नकारात्मक होते हैं। रावी नाम के एक लड़के की कहानी बताई गई है, जिसने अपनी सोच बदलकर एक सफल आईटी कंपनी बनाई। हमारा सबकॉन्शियस माइंड कल्पना और वास्तविकता में फर्क नहीं कर पाता, इसलिए विजुअलाइजेशन और सकारात्मक अफर्मेशन महत्वपूर्ण हैं। दुनिया के सबसे बड़े आविष्कारों और व्यवसायों की शुरुआत एक विचार से हुई थी, इसलिए हमें अपनी सोच पर ध्यान देना चाहिए।

रिच पीपल थिंक डिफरेंटली

यह खंड बताता है कि अमीर लोग अलग तरीके से सोचते हैं और अवसरों को पहचानते हैं। गरीब लोग समस्याओं को देखते हैं, जबकि अमीर लोग अवसरों को ढूंढते हैं। संदीप नाम के एक लड़के की कहानी बताई गई है, जिसने अपनी सोच के कारण सफलता प्राप्त की। गरीब लोग शॉर्ट टर्म कंफर्ट में जीते हैं, जबकि अमीर लोग लॉन्ग टर्म विज़न रखते हैं। अमीर लोग वैल्यू क्रिएट करने में विश्वास करते हैं और जानते हैं कि पैसा एक नतीजा है। गरीब लोग सोचते हैं कि पैसा कैसे खर्च करें, जबकि अमीर लोग सोचते हैं कि पैसा कैसे बढ़ाएं। अमीर मानसिकता जीन से नहीं आती, बल्कि एक्सपोजर, लर्निंग और कॉन्शियस डिसीजन से आती है।

डेली हैबिट्स ऑफ बिलियर थिंकर्स

यह खंड अरबपति विचारकों की दैनिक आदतों पर केंद्रित है। वे हर विचार को फ़िल्टर करते हैं और प्रपोजफुली सोचते हैं। वे दिन की शुरुआत ग्रेटट्यूड और अफर्मेशन से करते हैं। वे टाइम इन्वेस्ट करते हैं और एनर्जी को क्रिएशन और कंट्रीब्यूशन में लगाते हैं। उनका दिन एक सॉलिड रूटीन से बना होता है। वे डिस्ट्रैक्शंस से लड़ते नहीं, बल्कि पहले से खुद को उस माहौल में डालते हैं जहां डिस्ट्रैक्शंस आ ही ना सके। उनकी आदतें फैंसी दिखने के लिए नहीं, बल्कि मिशन को पूरा करने के लिए चुनी गई हैं।

पावर ऑफ एनवायरमेंट एंड एसोसिएशन

यह खंड बताता है कि हम उन्हीं पांच लोगों का औसत होते हैं जिनके साथ हम सबसे ज्यादा समय बिताते हैं। अरबपति विचारक खुद को उन लोगों से घेरते हैं जिनकी सोच और ऊर्जा उन्हें ऊंचा उठाने वाली होती है। गरीब विचारक दूसरों की नाकामी को लेकर बात करते हैं, जबकि अमीर विचारक उन लोगों को देखते हैं जो सफल हुए हैं। सफलता और विफलता का सबसे बड़ा अंतर माइंडसेट है, और यह उस एनवायरमेंट पर निर्भर करता है जिसमें हम अपना समय बिताते हैं।

फेथ पर्पस एंड विज़

यह खंड बताता है कि विश्वास, उद्देश्य और विज़न किसी भी बड़े सपने को हकीकत में बदलने के लिए सबसे जरूरी हैं। पैसे को अंतिम लक्ष्य कभी नहीं बनाना चाहिए, उद्देश्य ही असल मंजिल होनी चाहिए। एक छोटे से जनरल स्टोर के मालिक की कहानी बताई गई है, जिसने अपनी फेथ और विज़न के कारण सफलता प्राप्त की। स्टीव जॉब्स का उदाहरण दिया गया है, जिन्होंने दुनिया को बदलने के उद्देश्य से एप्पल इंक की शुरुआत की थी।

एक्शन क्रिएट्स रिजल्ट्स

यह खंड बताता है कि कर्म से परिणाम मिलते हैं। सोचने से शुरुआत होती है, लेकिन असली बदलाव तब आता है जब आप एक्शन लेते हैं। गरीब विचारक परफेक्ट मोमेंट का इंतजार करते हैं, जबकि अरबपति विचारक इमपरफेक्ट कंडीशंस में भी काम करते हैं। खेत में सिर्फ प्रेयर करने से फसल नहीं उगती, बीज बोने पड़ते हैं। मार्क ज़करबर्ग का उदाहरण दिया गया है, जिन्होंने Facebook की शुरुआत सिर्फ एक कॉलेज के छोटे से प्रोजेक्ट के रूप में की थी।

प्रैक्टिकल एक्सरसाइज फ्रॉम बुक

यह खंड स्कॉट एंडरसन की किताब में दी गई कुछ प्रैक्टिकल टेक्निक्स पर केंद्रित है। इनमें डेली अफर्मेशन, सेल्फ टॉक ऑडिट और मॉर्निंग माइंडसेट जर्नलिंग शामिल हैं। इन एक्सरसाइजेस को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आपकी माइंडसेट बदलने लगेगी। स्मॉल डेली एक्शंस लीड टू बिग रिजल्ट्स।

Summarize any YouTube video in seconds

Get summaries like this one for any video, in your language, with the free Summ app.

Download on the Apple Store
Get it on Google Play

Transcript

YouTube Transcript Generator

0:00 अगर तुम्हारे मन में गरीबी बसी है तो कोई दौलत तुम्हें बचा नहीं सकती। रुको जरा। इस लाइन को बस सुनकर आगे मत बढ़ जाना। इसे महसूस करो। इसका मतलब समझो। क्या तुम्हें कभी ऐसा लगा है कि सारी दुनिया जैसे आगे निकल गई है और तुम वहीं के वहीं रुके रह गए हो? क्या तुमने खुद से यह कहा है? मेरे पास पैसे नहीं है। मैं क्या कर सकता हूं? या फिर मेरे हालात ही ऐसे हैं। ज्यादा कुछ नहीं कर सकता। अगर हां तो यकीन मानो तुम अकेले नहीं हो। यही सोच हर उस इंसान के मन में आती है जो अपनी जिंदगी में किसी बड़ी मंजिल की ख्वाहिश रखता है। लेकिन उसे लगता है कि बैकग्राउंड उसका बैंक बैलेंस या उसका भाग्य उसके सपनों के सामने एक बड़ी

0:48 दीवार बन चुका है। थिंक लाइक अ बिलियर बिकम अ बिलियनेियर बुक बाय स्कॉट एंडरसन। इस किताब के लेखक ठीक उसी दीवार को तोड़ने की बात करते हैं। उनका कहना है कि असली गरीबी पैसों की नहीं सोच की होती है और जब तक हम अपनी सोच की जंजीरें नहीं तोड़ते तब तक चाहे हमारे हाथ में कितनी भी दौलत आ जाए हम अंदर से गरीब ही रहेंगे। स्कॉट एंडसन कोई आम लेखक नहीं है। वह एक बेस्ट सेलिंग लेखक हैं। एक प्रेरणादायक वक्ता हैं और साथ ही एक पास्टर यानी आध्यात्मिक मार्गदर्शक भी हैं। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी इंसानी सोच को समझने और बदलने में लगाई है। उन्होंने हजारों लोगों को यह सिखाया है कि कैसे एक औसत जिंदगी जीने की

1:33 मजबूरी को एक पर्पस ड्रिवन पावरफुल जिंदगी में बदला जा सकता है। सिर्फ माइंडसेट को बदलकर। उनकी किताब थिंक लाइक ए बिलियनेयर बिकम ए बिलियर। यह दावा नहीं करती कि वह तुम्हें नाइट ओवर अमीर बना देगी। यह किताब किसी जादू या तंत्र मंत्र की बात नहीं करती बल्कि यह बताती है कि बिलिनेियर बनने का पहला कदम बैंक अकाउंट से नहीं सोच से शुरू होता है। यह किताब हर उस इंसान को बुलाती है जो अंदर से जानता है कि उसकी काबिलियत बहुत बड़ी है। लेकिन बाहर की दुनिया ने उसे बार-बार यह कह दिया कि तू सिर्फ इतना ही कर सकता है। स्कॉट एंडरसन बताते हैं कि जो लोग बिलिनेियर बनते हैं, वह पहले बिलियर की तरह सोचते हैं। वह जब अपने करियर की शुरुआत करते हैं तब उनके

2:19 पास करोड़ों रुपए नहीं होते लेकिन उनके अंदर करोड़ों की सोच होती है। वह जब भी किसी मुश्किल को देखते हैं तो उससे भागते नहीं बल्कि उसे अपने लिए एक ओपोरर्चुनिटी में बदलने की ताकत रखते हैं। अब सोचिए एक आम इंसान किसी समस्या को देखकर कहता है मेरे बस की बात नहीं। और वहीं एक अरबपति सोचता है अगर यह मेरे सामने आया है तो इसका रास्ता भी मैं ही बनाऊंगा। यही फर्क है सोच का। यही माइंडसेट का खेल है। एक गरीब सोचता है कि पैसा सब बर्बाद कर देता है। एक मिडिल क्लास इंसान सोचता है कि पैसे के लिए बहुत त्याग करने पड़ते हैं। और एक बिलियर सोचता है कि पैसा जिम्मेदारी है। उसे कैसे कमाना है, कैसे बढ़ाना है और

3:06 कैसे उसे पर्पस के लिए इस्तेमाल करना है। स्कॉट एंडसन की यह किताब किसी बाहरी टेक्निक से नहीं तुम्हारे अंदर की दुनिया से शुरुआत करती है। और अगर तुम भी उस माइंडसेट को समझना और अपनाना चाहते हो जिसने दुनिया के सबसे अमीर और सफल लोगों की जिंदगी बदल दी तो इस वीडियो को अंत तक देखो क्योंकि यह सिर्फ किताब की बात नहीं है। यह तुम्हारी सोच की कहानी है। शायद यह वही कहानी है जिसे तुम बरसों से सुनना चाह रहे थे। पर किसी ने इतने प्यार, सच्चाई और हिम्मत से समझाया ही नहीं। चैप्टर एक माइंडसेट इज द रियल वेल्थ असली दौलत सोच है। अब जरा कुछ पल रुक कर सोचो। जब भी हम वेल्थ शब्द सुनते हैं तो सबसे पहले हमारे

3:54 दिमाग में क्या आता है? गाड़ियां, बंगले, बैंक अकाउंट में करोड़ों रुपए या फिर वह जिंदगी जहां काम से ज्यादा आराम होता है। लेकिन स्कॉट एंडरसन हमें एक बिल्कुल अलग सच से मिलवाते हैं। वो कहते हैं कि असली वेल्थ, असली दौलत, असली डिफरेंस मेकर अगर कुछ है तो वह है माइंडसेट यानी तुम्हारी सोच। क्योंकि अगर सोच सही नहीं है तो चाहे लॉटरी भी लग जाए वो पैसा टिकेगा नहीं। लेकिन अगर सोच बिलियनियर वाली हो जाए तो बिना किसी बड़ी विरासत या जादू के भी तुम सब कुछ बना सकते हो खुद अपने दम पर। अब चलो थोड़ा और गहराई से समझते हैं। गरीब आदमी की सोच आखिर होती कैसी है? वो अक्सर यही सोचता है कि मेरी किस्मत खराब है।

4:41 मेरे बस की बात नहीं है। ज्यादा पैसा बुरा होता है या पैसे वाले लोग घमंडी होते हैं। मैं तो सीधा साधा आदमी हूं। उसकी पूरी मानसिकता ही बचाव में जीने की होती है। कैसे किसी तरह दिन निकाल जाए, किसी तरह खर्च पूरे हो जाए, कोई नुकसान ना हो जाए। वो हमेशा डर में जीता है कि अगर कुछ गलत हो गया तो मैं क्या करूंगा? अब आइए बात करें मिडिल क्लास माइंडसेट की जो शायद हम में से ज्यादातर लोगों को विरासत में मिली है। यह माइंडसेट कहता है रिस्क मत लो। जॉब मत छोड़ो। ईएमआई टाइम से भरो। ज्यादा उड़ने की कोशिश मत करो। प्रैक्टिकल बनो। मतलब जीना है लेकिन सीमाओं के भीतर सपने देखो। लेकिन बहुत बड़े नहीं। सोचो लेकिन

5:28 ज्यादा मत सोचो। वरना ओवरथिंकिंग हो जाएगा। यह सोच बाहर से तो सेफ लगती है लेकिन अंदर ही अंदर इंसान को एवरेज बना देती है। अब सुनिए बिलिनेयर माइंडसेट क्या कहता है? वो माइंडसेट जो दुनिया के सबसे बड़े क्रिएटर्स, इन्वेंटर्स और बिजनेस लेजेंड्स ने अपनाया। यह सोच कहती है मनी इज नॉट इवल। इट्स अ ट्रू टू क्रिएट इंपैक्ट। यानी पैसा कोई बुरी चीज नहीं है। पैसा एक जरिया है, एक उपकरण है जिससे तुम अपनी दुनिया बदल सकते हो अपने लिए, अपने परिवार के लिए, समाज के लिए। बिलियर थिंकर्स कहते हैं, आई डोंट चज़ मनी, आई चज़ वैल्यू। यानी वह पैसा कमाने के पीछे नहीं भागते। वह वैल्यू देने के पीछे भागते हैं।

6:15 और जब आप दूसरों की जिंदगी में वैल्यू लाना शुरू करते हो, पैसा खुद ब खुद तुम्हारे पीछे भागने लगता है। स्कॉट एंडरसन साफ कहते हैं गरीबी पैसे की कमी नहीं है। यह सही सोचने की कमी है। यानी गरीबी पैसों की नहीं होती, सही सोच की कमी की होती है। सोचो। एक गरीब कहता है पैसा लोगों को बिगाड़ देता है। वहीं एक बिलियर सोचता है पैसा जिम्मेदारी है। एक आदमी सोचता है बस किसी तरह महीने का खर्च पूरा हो जाए। वहीं एक अरबपति सोचता है कैसे मैं इस दुनिया में ऐसा कुछ करूं जिससे हजारों लाखों लोगों का भला हो। अब सवाल उठता है यह सोच आती कहां से है? और इसका जवाब है हमारी कंडीशनिंग से, हमारी परवरिश से,

7:02 हमारे आसपास के लोगों से। अगर तुम बचपन से सुनते आए हो कि पैसे के पीछे भागना पाप है। हम मिडिल क्लास लोग हैं। हमारे लिए इतना काफी है या पैसे वाले लोग गलत तरीकों से कमाते हैं। तो जाहिर है कि तुम अनकॉन्शियसली अपने आप को बड़ा बनने से रोकते रहोगे। लेकिन जो लोग बिलेनियर माइंडसेट अपनाते हैं, वह अपने अंदर यह बदलाव लाते हैं। वह स्केरसिटी की जगह अबंडेंस में सोचते हैं। स्केसिटी माइंडसेट कहता है, सब खत्म हो जाएगा। सब छीन जाएगा। दुनिया में सब कुछ लिमिटेड है। जबकि अबंडेंस माइंडसेट कहता है, इस दुनिया में मौके भरपूर हैं। पैसे की कोई कमी नहीं। बस मुझे खुद को उस लायक बनाना है और यह कोई

7:48 मोटिवेशनल डायलॉग नहीं है। यह साइकोलॉजिकल ट्रुथ है। न्यूरोसाइंस भी बताता है कि जब हम बार-बार डर, कमी और असफलता की बातें सोचते हैं तो हमारा ब्रेन सर्वाइवल मोड में चला जाता है। लेकिन जब हम पॉसिबिलिटीज, वैल्यू और ग्रोथ के बारे में सोचते हैं तो हमारा दिमाग क्रिएटिव मोड में शिफ्ट होता है। जहां से इनोवेशन, वेल्थ और इंपैक्ट की असली शुरुआत होती है। अब तुम खुद से एक सीधा ईमानदार सवाल पूछो। क्या मैं सच में एक रिच थिंकर हूं? क्या मेरी सोच पॉसिबिलिटी की तरफ जाती है? या मैं आज भी सिर्फ जीवित रहने की सोच में फंसा हुआ हूं? इस सवाल का जवाब अगर तुम्हें थोड़ा भी असहज कर रहा है तो समझो।

8:34 यही वह जगह है जहां से बदलाव की शुरुआत हो सकती है। याद रखो। माइंडसेट बदलना कोई एक रात का काम नहीं है। लेकिन एक बार यह शिफ्ट हो गया तो तुम्हारा पूरी जिंदगी का फ्लो बदल सकता है। चैप्टर दो एज अ मैन थिंक इथ सो इज ही। जैसे इंसान सोचता है वैसा ही वह बनता है। एज अ मैन थिंक इथ इन हिज हार्ट सो इज ही। बाइबल की यह लाइन जितनी सिंपल लगती है, उतनी ही जिंदगी बदलने वाली भी है। लेकिन यह कोई धार्मिक वाक्य नहीं है। यह न्यूरो साइंस से लेकर साइकोलॉजी तक की गहराई में सच साबित होता है। आज के मॉडर्न ब्रेन साइंस ने भी मान लिया है कि हमारी आइडेंटिटी, हमारा भविष्य, हमारी पर्सनालिटी, सब कुछ हमारी

9:20 सोच से बनती है। और बात सिर्फ कॉन्शियस सोच की नहीं है। हम जो बार-बार अपने दिल में दोहराते हैं, वह हमारे सबकॉन्शियस में बैठ जाता है। और फिर वही हमारे डिसीजंस, हैबिट्स, कॉन्फिडेंस और डेस्टिनी को शेप देता है। अब जरा सोच के देखो। हम दिन में लगभग 60,000 से ज्यादा विचार सोचते हैं। लेकिन इनमें से 90% से भी ज्यादा थॉट्स वही पुराने, रेपेटिव और अक्सर नेगेटिव होते हैं। मुझसे नहीं होगा। मेरे पास स्किल्स नहीं है। मेरी अंग्रेजी कमजोर है। लोग क्या सोचेंगे? मैं बोर्न टैलेंटेड नहीं हूं। और धीरे-धीरे यह थॉट्स हमारे अंदर एक इनविज़िबल जेल बना देते हैं। जहां हम खुद को एवरेज, लिमिटेड और पावरलेस

10:06 मानने लगते हैं। रावी एक छोटे शहर में पैदा हुआ था। ना कोई बड़ा सरनेम, ना पैसे, ना कोई बहुत शार्प दिमाग। स्कूल में हमेशा एवरेज नंबर आते थे और सोसाइटी ने भी उसे यही मैसेज दिया। तू कुछ बड़ा नहीं कर पाएगा। घर वाले प्यार करते थे लेकिन प्रैक्टिकल बातें करते थे। एक गवर्नमेंट जॉब देख ले बेटा। जिंदगी आराम से निकल जाएगी। दोस्तों ने भी कभी ज्यादा इनकरेजमेंट नहीं दिया। और रावी खुद भी धीरे-धीरे यही मानने लगा। शायद मैं वाकई में खास नहीं हूं। मेरी किस्मत में कुछ बड़ा नहीं लिखा है। लेकिन फिर एक दिन एक वीडियो देखकर और वह भी शायद ऐसे ही किसी YouTube वीडियो से रावी की आंखों में जैसे करंट दौड़ गया। उस वीडियो में एक लाइन थी

10:53 आप जो खुद के बारे में सोचते हैं वही आप बनते हैं। और उस दिन रावी ने पहली बार खुद से एक सवाल पूछा। क्या मैं हमेशा ऐसा ही सोचता रहूंगा? और फिर वैसा ही बन जाऊंगा। वो सवाल उसके दिल में उतर गया। उसी रात से उसने एक नया प्रॉमिस खुद से किया। मैं अपनी सोच बदललूूंगा। फिर चाहे सारी दुनिया मुझे वही पुराना रवि समझे। अगले दिन से उसने सबसे पहला काम किया। मिरर के सामने खड़ा होकर अफमेशन बोलना शुरू किया। कोई मैजिक नहीं हुआ। लेकिन रवि का टोन बदलने लगा। हर सुबह वो खुद से कहता मैं अरबपति सोच वाला इंसान हूं। मैं अपने भविष्य का मालिक हूं। मैं औसत पैदा हो सकता हूं लेकिन असाधारण सोच सकता हूं। धीरे-धीरे

11:39 रावी ने विजुअलाइजेशन शुरू किया। वो रोज इमेजिन करता कि उसकी खुद की कंपनी है। एंप्लाइज उसके ऑर्डर्स ले रहे हैं। क्लाइंट्स उसके सामने नेगोशिएशन कर रहे हैं। और सबसे बड़ी बात रावी उन विजुअल्स में खुद को कॉन्फिडेंट, पावरफुल और वर्दी देखता था। अब न्यूरो साइंस की एक पावरफुल बात समझो। हमारा सबकॉन्शियस माइंड इमेजिनेशन और रियलिटी में फर्क नहीं कर पाता। यानी अगर तुम बार-बार विजुअलाइज करते हो कि तुम सक्सेसफुल हो तो दिमाग उसी रियलिटी के लिए रास्ते बनाना शुरू कर देता है। आपकी बॉडी पोश्चर, आपकी डिसीजंस, आपकी एनर्जी सब बदलने लगती है। और यही हुआ रावी के साथ। उसने YouTube से कोडिंग सीखी।

12:25 फ्रीलांसिंग शुरू की। शुरू में कई बार फेल हुआ। लेकिन हर बार गिरने के बाद वह खुद से कहता मेरी सोच बिलियनियर की है। मैं हार मानने वालों में से नहीं हूं। आज रावी की खुद की आईटी कंपनी है। 25 कर्मचारी लाखों का टर्नओवर और सबसे खास बात उसकी सोच अब किसी अरबपति से कम नहीं। और शायद यही उसकी असली जीत है। अब तुम सोचो रावी कोई सुपर ह्यूमन नहीं था। उसने कोई जादू नहीं किया। बस उसने एक इनविज़िबल चीज बदली। अपनी सोच और वही सोच उसकी नई आइडेंटिटी बन गई। थिंक अबाउट दिस। दुनिया की सबसे बड़ी इन्वेंशंस, सबसे बड़े बिजनेसेस, सबसे हिस्टोरिकल स्पीचेस, सबकी शुरुआत एक थॉट से हुई थी। और यह थॉट तब पावरफुल बना जब

13:12 उसे बार-बार दिल से दोहराया गया। अमेरिका के फेमस मोटिवेशनल स्पीकर अर्ल नाइट एंड गेल ने कहा था, यू बिकम व्हाट यू थिंक अबाउट मोस्ट ऑफ द टाइम। यानी तुम वही बनते हो जिसके बारे में तुम ज्यादातर समय सोचते हो। तो अब सवाल है तुम अपने बारे में क्या सोचते हो? जब कोई तुमसे पूछता है तो क्या बनना चाहता है? तो क्या तुम पूरे आत्मविश्वास से बोल पाते हो? या तुम्हारा दिमाग तुरंत सोचता है। यार मैं तो बस एक नॉर्मल इंसान हूं। स्कॉट एंडरसन बार-बार एक बात दोहराते हैं। पोर थिंकिंग क्रिएट्स पुअर लाइफ। रिच थिंकिंग क्रिएट्स रिच लाइफ। मतलब तुम्हारी इनकम तुम्हारे रिसोर्सेज नहीं तुम्हारी थिंकिंग ही तुम्हारा फ्यूचर तय करती है। अब मान लो

14:00 तुम्हारे पास अभी कुछ भी नहीं है। ना पैसा ना कांटेक्ट्स ना परफेक्ट एजुकेशन। लेकिन अगर तुम्हारे पास रिच, बोल्ड और लिमिटलेस सोच है तो मान लो। तुम ऑलरेडी मिलेनियर बनने की शुरुआत कर चुके हो। अब उठो एक नोटबुक लो और आज के बाद से हर दिन उसमें वो आइडेंटिटी लिखो जो तुम बनना चाहते हो। मैं एक विजनरी हूं। मैं लाखों लोगों की जिंदगी बदललूंगा। मैं खुद के लिए वह जिंदगी क्रिएट करूंगा जो मैं डिर्व करता हूं। अगर तुमने अपनी सोच पर मास्टर कर लिया तो कोई भी तुम्हारे भविष्य को लिमिट नहीं कर सकता। चैप्टर तीन रिच पीपल थिंक डिफरेंटली। अमीर लोग सोचते हैं अलग। एक सवाल तुमसे पूछना चाहता हूं। क्या तुम्हें

14:46 लगता है कि अमीर लोग सिर्फ किस्मत से अमीर बनते हैं? या फिर क्या तुम्हें लगता है कि जो भी सक्सेस करता है उसके पास कोई गुप्त शॉर्टकट होता है? अगर तुम्हारा जवाब हां है तो यही सोच तुम्हें सालों तक स्ट्रगल में डाले रखेगी। क्योंकि हकीकत यह है कि अमीरी की शुरुआत बैंकों में नहीं बल्कि दिमाग में होती है। स्कॉट एंडसन इस किताब में एक दमदार बात कहते हैं। मनी डजंट मेक यू रिच। योर माइंडसेट डस। अब जरा ठहर कर सोचो। गरीब और अमीर के बीच सबसे बड़ा फर्क क्या है? जवाब बहुत क्लियर है। सोचने का तरीका। अमीर लोग चीजों को देखने का नजरिया ही बदल देते हैं। जहां एक नॉर्मल इंसान

15:32 प्रॉब्लम देखता है, वहां अमीर इंसान ओपोरर्चुनिटी ढूंढता है। जहां एक आम आदमी कहता है, मैं यह नहीं कर सकता। अमीर सोच वाला इंसान पूछता है, मुझे क्या सीखना होगा ताकि मैं यह कर सकूं। अब सुनो एक सच्ची कहानी जो इस फर्क को बिल्कुल साफ कर देती है। संदीप नाम का लड़का था एक छोटे कस्बे से। घर की हालत ठीक नहीं थी। पिता की दुकान थी लेकिन बहुत स्ट्रगल चल रहा था। कॉलेज के दिनों में जब सब दोस्त ब्रांडेड कपड़े पहनते थे। संदीप को दूसरों के पुराने कपड़े पहनने पड़ते थे। लेकिन एक चीज उसमें अलग थी। वह हर चीज को देखने का नजरिया रखता था। जहां उसके दोस्त सैलरी की नौकरी की बात करते थे, संदीप पूछता था,

16:19 मैं ऐसी क्या स्किल सीखूं जिससे लोग मुझे पैसा देने को तैयार हो जाए। जहां दोस्त सोचते थे साल में 5 लाख की नौकरी मिल जाए। बहुत है। संदीप खुद से कहता था मुझे ऐसी चीज बनानी है जो दूसरों के लिए भी पैसा कमाए। यही सोच का फर्क है। आम इंसान सिर्फ सर्वाइवल के बारे में सोचता है, लेकिन अमीर सोच वाला इंसान क्रिएशन के बारे में सोचता है। स्कॉट एंडरसन बताते हैं कि गरीब लोग अक्सर शॉर्ट टर्म कंफर्ट में जीते हैं। वो ईएमआई भरना, वीकेंड एंजॉय करना, डिस्काउंट्स ढूंढना इसी में उलझे रहते हैं। जबकि अमीर सोच वाले लोग लॉन्ग टर्म विज़न रखते हैं। वह सोचते हैं। मैं आज थोड़ा कष्ट सह लूं। लेकिन कल अपने और अपने

17:05 परिवार के लिए लेगसी खड़ी करूं और यही फर्क न्यूरो साइंस भी बताता है। स्टडीज में देखा गया है कि अमीर माइंडसेट वाले लोग प्रीफ्रंटल कॉेक्स फोडीलास को ज्यादा एक्टिवेट करते हैं। वो दिमाग का वही हिस्सा है जो प्लानिंग, डिसिप्लिन और लॉन्ग टर्म डिसीजन मेकिंग में मदद करता है। अब जरा खुद से पूछो। क्या तुम शॉर्ट टर्म सोच में जी रहे हो या तुम सच में आगे का विज़न रखते हो? अमीर लोग कभी सिर्फ पैसों के पीछे नहीं भागते। वह वैल्यू क्रिएट करने में बिलीव करते हैं। वह जानते हैं पैसा एक नतीजा है जो आता है जब आप दुनिया की किसी बड़ी प्रॉब्लम का सशन देते हो। ईलॉन मस्क को देख लो। उसने टेस्ला इसलिए नहीं बनाया कि वो कार बेचकर अमीर बन

17:52 जाए। उसने बनाया क्योंकि वो फॉसिल फ्यूल्स की प्रॉब्लम सॉल्व करना चाहता था। और आज वो सिर्फ कार कंपनी का सीईओ नहीं। एक मूवमेंट का फेस है। स्कॉट एंडरसन कहते हैं, पुअर पीपल थिंक हाउ टू स्पेंड मनी। रिच पीपल थिंक हाउ टू मल्टीप्लाई इट। गरीब सोचता है, पैसा कैसे खर्च करूं? अमीर सोचता है, पैसा कैसे बढ़ाऊं? यह माइंडसेट सिर्फ पैसे को लेकर नहीं होता। यह हर चीज में झलकता है। जब गरीब सोच वाला इंसान कुछ नया सुनता है, वो कहता है, यह मेरे बस का नहीं। अमीर सोच वाला इंसान कहता है, चलो सीखते हैं मुझे यह कैसे करना है। पुअर माइंडसेट लोगों की वोकैबलरी में प्रॉब्लम, महंगाई, सिस्टम खराब है। मुझे मौका नहीं

18:40 मिला जैसी बातें भरी रहती हैं। रिच माइंडसेट वाले लोग एक्शन लेते हैं। वो कोई एक्सक्यूज नहीं देते, वो रिजल्ट्स दिखाते हैं। अब बात आती है कि क्या यह सोच बदली जा सकती है? क्या एक गरीब या मध्यम वर्ग का इंसान भी अमीर दृष्टिकोण विकसित कर सकता है? तो जवाब है बिल्कुल। रिच माइंडसेट कोई जीन से नहीं आता। यह आता है एक्सपोज़र से, लर्निंग से और सबसे ज्यादा कॉन्शियस डिसीजन से। जब तुम रोज ऐसे वीडियोस देखते हो, किताबें पढ़ते हो, अपने गोल्स को लिखते हो। जब तुम अपने आप को घेरते हो उन लोगों से जो ग्रोथ में बिलीव करते हैं तब तुम एक इनविज़िबल शिफ्ट करते हो तब तुम अपने दिमाग का सॉफ्टवेयर बदलते हो। स्कॉट एंडरसन इस किताब में एक और

19:26 क्रांतिकारी बात कहते हैं। इफ यू वांट टू बी रिच स्टार्ट थिंकिंग लाइक यू ऑलरेडी आर। यानी अगर अमीर बनना है तो पहले खुद को वैसे सोचो जैसे तुम ऑलरेडी अमीर हो। अब इसका मतलब यह नहीं कि तुम फेक बन जाओ। मतलब यह है कि तुम अपनी आइडेंटिटी बदलो। तुम खुद से कहना शुरू करो। मैं डिसिप्लिंड हूं। मैं अबंडेंस में बिलीव करता हूं। मैं शॉर्टकट्स नहीं स्मार्ट सिस्टम्स बनाता हूं। मैं प्रॉब्लम सॉल्व हूं। सिर्फ ड्रीमर नहीं। यह अफमेशंस, यह माइंडसेट शिफ्ट्स जब दिन-बदिन रिपीट होते हैं तो तुम्हारी बॉडी, तुम्हारी एनर्जी, तुम्हारे काम का तरीका बदलने लगता है। अब सोचो तुम्हें खुद को अमीर बनाने के लिए सबसे

20:12 पहले क्या बदलना है? तुम्हारी सैलरी, तुम्हारा बिजनेस, तुम्हारा लक। नहीं। सबसे पहले तुम्हारी सोच। तो अब पॉज करो और खुद से यह पूछो। क्या मेरी सोच मुझे छोटी जिंदगी के लिए तैयार कर रही है या बड़ी जिंदगी के लिए? क्योंकि अंत में फर्क सिर्फ इस बात से पड़ेगा कि तुम दुनिया को कैसे देखते हो और खुद को कहां देखना चाहते हो। चैप्टर चार डेली हैबिट्स ऑफ बिलियर थिंकर्स। सोचो एक बात। अगर तुम्हारा दिन वही चाल चलता है जो एक आम आदमी का होता है तो फिर तुम्हारा रिजल्ट भी वहीं पहुंचता है जहां आम लोग पहुंचते हैं। लेकिन अगर तुम्हारा हर दिन एक बिलियनियर की तरह सोचा समझा कॉन्शियसली डिजाइन किया हुआ हो तो

20:57 फिर तुम्हारी जिंदगी भी वैसी ही शेप लेगी जैसी सिर्फ टॉप 1% लोगों की होती है। सोचने का अंदाज ही उनकी पहली हैबिट है। वे हर थॉट को फ़िल्टर करते हैं। डायरेक्शन देते हैं और रैंडम नहीं बल्कि प्रपोजफुली सोचते हैं। उनका माइंड कभी खाली नहीं रहता। वह या तो सीख रहे होते हैं या कुछ क्रिएट कर रहे होते हैं। बिलिनेियर थिंकर्स के पास हर सुबह एक रिचुअल होता है। वे दिन की शुरुआत ग्रेटट्यूड से करते हैं। खुद को बोलते हैं, थैंक यू गॉड फॉर अनदर डे टू ग्रो। फिर अफमेशंस कहते हैं, मैं शक्तिशाली हूं। आई एम स्ट्रेटेजिक। आई एम अ बिलिनेियर इन द मेकिंग। यह बातें सुनने में छोटी लग सकती हैं। लेकिन बार-बार बोले गए शब्द सबकॉन्शियस को उसी

21:44 दिशा में ढाल देते हैं। एक आम इंसान मिरर में खुद को देखकर शिकायत करता है। मैं थक गया हूं। मेरी किस्मत खराब है। लेकिन बिलियनियर थिंकर कहता है आज भी मेरा दिन है। मैं बना हूं किसी बड़ी चीज के लिए। यही है डिफरेंस। वर्ड्स वर्ड्स से ही तो सोच बनती है और सोच से डेस्टिनी। स्कॉट एंडरसन एक पावरफुल बात कहते हैं। स्पीक लाइफ नॉट डेथ। यानी अपने शब्दों से जिंदगी बनाओ ना कि उसे काटो। जब तुम बोलते हो मेरे पास टाइम नहीं है। मेरे पास पैसा नहीं है। मेरे बस का नहीं है। तब तुम अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे होते हो। लेकिन जब तुम कहते हो मैं सीख रहा हूं। मैं कोशिश कर रहा हूं। मैं आगे बढ़ रहा

22:31 हूं। तब तुम खुद को परमिशन दे रहे होते हो ग्रेटनेस की तरफ बढ़ने की। बिलियनियर थिंकर्स को पता होता है कि उनका मुंह उनकी जिंदगी का रिमोट है और हर बात जो वह बोलते हैं वो या तो उन्हें ऊपर उठाती है या नीचे गिराती है। अब बात करें टाइम की। एवरेज लोग टाइम पास करते हैं। बिलियनियर थिंकर्स टाइम इन्वेस्ट करते हैं। जहां आम लोग Netflix पर बिंच करते हैं, वहां बिलिनेयर थिंकर किसी हाई वैल्यू स्किल पर काम कर रहा होता है। कोई किताब पढ़ रहा होता है। किसी मेंटोर का पॉडकास्ट सुन रहा होता है या बिजनेस मॉडल पर नोट्स बना रहा होता है। उन्हें पता है समय एकमात्र चीज है जो सबको बराबर मिली है। लेकिन फर्क इस बात से

23:18 पड़ता है कि कौन उसका क्या करता है। उन्हें यह भी समझ है कि एनर्जी भी लिमिटेड है और वह उसे गॉसिप कंप्लेंट या यूज़लेस टेंशन में वेस्ट नहीं करते। उनकी एनर्जी बस दो कामों में लगती है। क्रिएशन और कंट्रीब्यूशन। उनका दिन एक सॉलिड रूटीन से बना होता है। रात को जल्दी सोना, सुबह सूरज से पहले उठना, मेडिटेशन करना, बॉडी और माइंड दोनों की केयर करना। यह उनकी आदतें हैं। शौक नहीं। यह हैबिट्स फैंसी दिखने के लिए नहीं बल्कि मिशन को पूरा करने के लिए चुनी गई हैं। उनका हर काम एक विज़ से जुड़ा होता है। वह हर टास्क से पूछते हैं। क्या यह मुझे मेरे लक्ष्य के पास ले जा रहा है या नहीं? और अगर जवाब

24:05 नहीं है तो वह उसे काट देते हैं। यही डिसिप्लिन उन्हें लॉन्ग टर्म में दुनिया से अलग बनाता है। एक बिलियनियर थिंकर डिस्ट्रैक्शंस से लड़ता नहीं बल्कि पहले से खुद को उस माहौल में डालता है जहां डिस्ट्रैक्शंस आ ही ना सके। वो फोन साइलेंट मोड पर रखता है। वह लोगों को बाउंड्री से बाहर रखता है। वह अपने लिए क्लियर नहीं रखना सीख चुका होता है। क्योंकि उसे पता है हर हां जो तुम किसी डिस्ट्रैक्शन को देते हो वो एक नहीं होता है तुम्हारे सपने को। इस सबका निचोड़ क्या है? हैबिट्स बिलिनेयर को बनाती हैं और वही उसे बनाए रखती हैं। यह हैबिट्स मैजिक नहीं है। यह सिंपल हैं, लेकिन कंसिस्टेंट हैं।

24:51 हर दिन वह खुद से एक ही सवाल पूछते हैं। क्या मेरी आज की सोच, मेरे आज का काम मुझे उस जिंदगी की ओर ले जा रहा है जो मैं जीना चाहता हूं। और अगर जवाब हां है तो बस वे चलते रहते हैं। अनस्टोपेबल, अनशेकेबल लाइक अ बिलेनियर इन मोशन। चैप्टर फाइव पावर ऑफ एनवायरमेंट एंड एसोसिएशन। आप उन्हीं पांच लोगों का औसत होते हैं जिनके साथ आप सबसे ज्यादा समय बिताते हैं। यह लाइन एकदम सही है। सोचो अगर तुम हर दिन उन लोगों के साथ रहते हो जो सिर्फ डर, राजनीति और फेलर की बातें करते हैं तो क्या तुम्हारी सोच कभी बिलियनियर बनने वाली होगी? क्या तुम कभी अपने ड्रीम्स को बड़े पैमाने पर देख सकोगे? स्कॉट एंडरसन ने इस बारे में कहा

25:37 है। बिलियनियर थिंकर्स खुद को उन लोगों से घेरते हैं जिनकी सोच और ऊर्जा उन्हें ऊंचा उठाने वाली होती है। मतलब यह एक कॉन्शियस चॉइस है कि हम किससे और किस चीज से खुद को सराउंड करते हैं। अगर तुम गरीब सोच वाले लोगों के साथ समय बिताते हो तो तुम भी वही बनोगे। और तुम हमेशा सोचते रहोगे। मेरे पास तो कुछ नहीं है। मैं क्या कर सकता हूं? मेरे हालात ऐसे हैं और यह पूरी सोच तुम्हारी जिंदगी को गहरे अंधेरे में धकेल देती है। पर क्या बिलेनियर्स का यह तरीका अलग है? हां बिल्कुल। बिलेनियर थिंकर्स हमेशा उस एनवायरमेंट में रहते हैं जो उन्हें इंस्पायर करता है। जो उन्हें पुश करता है। वे बुक्स पढ़ते हैं, मेंटर्स के

26:25 पास जाते हैं और उन कॉन्वर्सेशंस में शामिल होते हैं जो उन्हें आगे बढ़ने की दिशा दिखाती हैं। वे वो लोग हैं जो हर सिचुएशन को लर्निंग ओपोरर्चुनिटी के रूप में देखते हैं। उन लोगों से सीखते हैं जिन्होंने कुछ बड़ा किया है और उन लोगों से खुद को घेरते हैं जिनका माइंडसेट सफलता को लेकर हाई लेवल का होता है। यहां पर तुम्हें एक बहुत जरूरी फर्क समझने की जरूरत है। पोर थिंकर्स क्या करते हैं? वे हमेशा दूसरों की नाकामी को लेकर बात करते हैं। वे हमेशा किसी की गिरावट की कहानियां सुनते हैं और फिर अपने आप को समझाते हैं। देखो यह तो बहुत कोशिश करने के बाद भी फेल हो गए। यह काम नहीं किया, वह काम नहीं किया, सब कुछ बेकार है। यह सब नेगेटिव

27:12 एनर्जी है। और जब तुम ऐसी कन्वर्सेशंस में घिरते हो, तो तुम्हारी सोच भी नेगेटिव हो जाती है। तुम्हारा माइंड हर बार वही पैटर्न फॉलो करता है जो तुम्हारे आसपास के लोग करते हैं। लेकिन रिच थिंकर्स और बिलियनियर थिंकर्स का तरीका अलग होता है। वे उन लोगों को देखते हैं जो सफल हुए हैं। जो कुछ नया कर रहे हैं जो लगातार आगे बढ़ रहे हैं। वे कहते हैं देखो किसने क्या बना लिया क्या नया किया स्ट्रेटजी अपनाई क्या सोच बदलने से फर्क पड़ा वे दूसरों की जीत से सीखते हैं अपनी परेशानियों के बारे में नहीं वे दूसरों के पॉजिटिव एक्शन से खुद को इंस्पायर करते हैं। इन्हीं कन्वर्सेशन से एक बिलिनेयर को ताकत मिलती है। जब आप

27:58 अपने दोस्तों या परिवार में किसी को बार-बार कहते सुनते हो। देखो किसने क्या बना लिया। तो यह एक सकारात्मक कल्चर बनता है। एक कल्चर ऑफ ग्रोथ यही वह लोग हैं जिनके साथ तुम मिलकर अपनी सोच को और ताकतवर बना सकते हो। अब समझो जब तुम हर दिन ऐसे लोगों के साथ वक्त बिताते हो जो सिर्फ फियर, नेगेटिविटी और फेलियर की बातें करते हैं तो तुम खुद को उतना ही कमजोर बनाते हो। तुम सोचने लगते हो कि दुनिया में बदलाव नहीं आ सकता। तुम क्या कर सकते हो? लेकिन अगर तुम खुद को उन लोगों के बीच पाओ जो विजन रखते हैं जो बड़े सपने देखते हैं जो सफलता की बात करते हैं तो तुम्हारा माइंड ऑटोमेटिकली उस डायरेक्शन में काम करना शुरू कर देता है।

28:44 स्कॉट एंडरसन ने एक और बहुत बढ़िया बात कही है। सक्सेस और फेलियर का सबसे बड़ा डिफरेंस यह है कि एक माइंडसेट है और दूसरा हैबिट। और इस माइंडसेट को हम कहीं से भी उठा सकते हैं। लेकिन यह उस एनवायरमेंट पर निर्भर करता है जिसमें हम अपना समय बिताते हैं। चाहे वह तुम खुद हो या तुम्हारे दोस्त तुम्हारे साथ समय बिताने वाले लोग वो तुम्हारी जिंदगी के सबसे बड़े इन्फ्लुएंस होते हैं। अपनी दिनचर्या को, अपने रिश्तों को और अपनी सोच को उन लोगों के साथ जोड़ो जो तुम्हें सफल होते देखना चाहते हैं। जिनका माइंडसेट भी वही हो जो तुम्हारा होना चाहिए। और सबसे महत्वपूर्ण बात तुम कभी भी अपनी सोच को बदल सकते हो क्योंकि

29:30 यह पूरी तरह तुम्हारे हाथ में है। अगर तुम उन लोगों के साथ समय बिताना शुरू करोगे जो हमेशा तुम्हारे साथ पॉजिटिविटी और इंस्पिरेशन बांटते हैं तो तुम्हारी सोच ऑटोमेटिकली बिलियर बनने की दिशा में खुद ब खुद बढ़ने लगेगी। तो अब सोचो तुम्हारे चारों ओर जो लोग हैं क्या वह तुम्हारे सपनों को और ऊंचा करने के लिए बने हैं या फिर वह तुम्हें वही पुरानी सोच में ही घसीटते रहेंगे। क्या तुम उन लोगों से घिरे हो जो सफलता की बात करते हैं? या जो सिर्फ दूसरों के बारे में बुरी बातें करते हैं। क्या तुम्हारे पास वह एनवायरमेंट है जो तुम्हें सफलता की ओर ले जाए या फिर तुम एक ऐसे माहौल में हो जो तुम्हारी ग्रोथ को रोकता है? चैप्टर छ फेथ पर्पस एंड विज़ फेथ

30:21 पर्पस एंड विज़ यह तीनों किसी भी बड़े सपने को हकीकत में बदलने के लिए सबसे जरूरी हैं। बिना फेथ के तुम सिर्फ एक आईडिया तक ही सीमित रहोगे। बिना पर्पस के तुम कभी भी डायरेक्शन नहीं पाओगे। और बिना विज़न के तुम अपने रास्ते पर नहीं चल पाओगे। स्कॉट एंडरसन कहते हैं मनी शुड नेवर बी द एंड गोल पपस शुड बी यानी पैसे के पीछे नहीं अपने उद्देश्य पपस के पीछे दौड़ो जब तुम्हारी फेथ मजबूत होगी तुम्हारा पर्पस साफ होगा और तुम्हारी विज़न स्पष्ट होगी तो कोई भी मुश्किल तुम्हें रोक नहीं सकती। तुम जैसा सोचोगे वैसा बनोगे। स्कॉट एंडरसन का कहना है मनी शुड नेवर बी द एंड गोल

31:07 पर्पस शुड बी यानी पैसे को अंतिम लक्ष्य कभी नहीं बनाओ। उद्देश्य पपस ही असल मंजिल होनी चाहिए। पैसे से कहीं बड़ा और मजबूत कुछ होता है और वह है तुम्हारा उद्देश्य, तुम्हारी सोच, तुम्हारी विज़। अब इसे थोड़ा गहराई से समझते हैं। दुनिया में कितने लोग हैं जो पूरे जीवन पैसे के पीछे भागते रहते हैं। हर दिन सुबह से लेकर रात तक सिर्फ पैसा कमाने के लिए मेहनत करते रहते हैं और फिर जब वह पैसा मिल जाता है तो एक खालीपन महसूस होता है। कभी सोचा है ऐसा क्यों होता है? क्योंकि जब हम सिर्फ पैसे को अपना अल्टीमेट गोल बना लेते हैं तो हम अपनी पर्पस को खो देते हैं। पैसे की कोई कीमत नहीं होती अगर उसका उद्देश्य सही ना

31:53 हो। स्कॉट एंडरसन हमें यही सिखाते हैं कि पैसा कभी भी अंतिम लक्ष्य नहीं हो सकता। जब तुम अपने जीवन का उद्देश्य समझ पाते हो और उस उद्देश्य को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देते हो तब पैसा अपने आप तुम्हारे पास आ जाता है। यह सही माइंडसेट है। यह वही माइंडसेट है जो बिलिनेियर्स को बाकी लोगों से अलग करता है। अब यह समझने के लिए एक बहुत ही छोटी सी मगर प्रेरणादायक कहानी है। कहानी एक छोटे से जनरल स्टोर के मालिक की है। वह आदमी रोज अपने छोटे से दुकान पर बैठता और सामान बेचता। मगर उसकी सोच सामान्य नहीं थी। वह खुद को और अपनी दुकान को कभी छोटे रूप में नहीं देखता था। हर बार जब वह सामान बेचता

32:39 उसकी सोच यही होती। मैं सिर्फ सामान नहीं बेच रहा। मैं एक बड़ा एंपायर बना रहा हूं। एक दिन मेरी 50 ब्रांचेस होंगी और मेरे पास एक बड़ा बिजनेस होगा। लोग उसकी बातों को सुनकर हंसते थे। उसे पागल समझते थे। कहते थे यह कैसा आदमी है? छोटे से दुकान से एंपायर बनने की सोच रहा है। लेकिन उस आदमी ने अपनी फेथ को कभी खोने नहीं दिया। उसने वही किया जो उसके मन में था। चाहे लोग कुछ भी कहें। समय बीतता गया और उसकी मेहनत उसकी विज़न ने रंग दिखाया। आज उस आदमी के पास 18 स्टोर्स हैं और वह अब भी कहता है यह तो सिर्फ शुरुआत है। अभी तो और बड़ा एंपायर बनाना है। यह कहानी सिर्फ एक छोटे से आदमी की नहीं है बल्कि यह हमें सिखाती है कि जब तुम्हारे पास फेथ होती है

33:26 तो कोई भी छोटी शुरुआत तुम्हें एक बड़ी मंजिल तक ले जा सकती है। फेथ वह ताकत है जो तुम्हारे हर कदम को सही दिशा में ले जाती है। जब तुम्हारा उद्देश्य स्पष्ट होता है और तुम उस उद्देश्य को पाने के लिए पूरी तरह से विश्वास रखते हो तो तुम्हारे पास वह जज्बा और रास्ते भी मिल जाते हैं जो तुम्हारी सफलता को सुनिश्चित करते हैं। यहां पर महत्वपूर्ण बात यह है कि इस आदमी की फेथ ने उसे सिर्फ छोटे-छोटे दुकानों से नहीं बल्कि एक विशाल एंपायर की ओर भी बढ़ाया। लोग उसके विश्वास को तुच्छ समझते थे, लेकिन उसका उद्देश्य, उसका विज़ उसे आगे ले गया। अब हम इस पूरी प्रक्रिया को समझते हैं। जब तुम अपनी फेथ को सच्चे दिल से अपनाते हो तो उस फेथ के कारण तुम

34:12 सिर्फ एक सामान्य इंसान नहीं रह जाते। तुम एक विजनरी बन जाते हो जो हर दिन अपनी मंजिल की ओर बढ़ता है और रास्ते में आने वाली मुश्किलों को चैलेंज की तरह लेता है और यह फेथ ही है जो तुमसे कहती है। अगर तुमने अपनी पर्पस को पहचान लिया है तो तुम्हारे लिए किसी भी मुश्किल का सामना करना आसान हो जाएगा। उदाहरण के लिए स्टीव जॉब्स जिन्होंने एप्पल इंक की शुरुआत की थी। क्या तुम जानते हो कि जब उन्होंने एप्पल की शुरुआत की थी तो उन्हें भी कई बार हंसी का सामना करना पड़ा था। लेकिन उनका विज़न और फेथ इतने मजबूत थे कि उन्होंने हर किसी की नकारात्मकता को नकारते हुए अपनी मंजिल पर कदम बढ़ाए। उन्होंने कभी नहीं सोचा कि पैसे कमाने के

34:57 लिए यह काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य था दुनिया को बदलना। टेक्नोलॉजी को लोगों तक पहुंचाना और यह उद्देश्य ही था जो उन्हें सफल बना पाया। इसलिए जब तुम अपने उद्देश्य और विज़न को पाना चाहते हो तो सबसे पहले तुम्हें फेथ की जरूरत है। बिना फेथ के कोई बड़ा काम नहीं हो सकता। और सबसे महत्वपूर्ण बात फेथ कभी भी यह नहीं कहता। तुमने एक बार कोशिश की और तुमने हार मान ली। फेथ कहती है तुमने एक बार कोशिश की तो अब दूसरा रास्ता ढूंढो। अगर एक रास्ता बंद हो गया है तो दूसरा जरूर मिलेगा। जब तुम यह समझ जाते हो तो फिर तुम अपने जीवन को किसी और दृष्टिकोण से देख पाते हो। तुम अपनी प्रॉब्लम्स को ओपोरर्चुनिटीज के रूप

35:44 में देख पाते हो और हर चैलेंज को अपनी ग्रोथ का हिस्सा मानने लगते हो। यही वही माइंडसेट है जो सफलता की ओर ले जाता है। तो अब सोचो क्या तुम भी उस छोटे से आदमी की तरह अपने लक्ष्य में फेथ रखोगे? क्या तुम भी अपने उद्देश्य के लिए संघर्ष करने को तैयार हो? क्या तुम भी अपनी डेस्टिनी को खुद लिखने के लिए तैयार हो? तो चलिए बढ़ते हैं अगले चैप्टर की ओर। चैप्टर सेवन। एक्शन क्रिएट्स रिजल्ट्स कर्म से परिणाम मिलते हैं। सोचने से शुरुआत होती है। लेकिन असली बदलाव तब आता है जब आप अनकड़ते हैं। सोचने से सिर्फ आइडियाज बनते हैं। लेकिन उन आइडियाज को रियलिटी में बदलने के लिए एक्शन लेना बेहद जरूरी है। सोच से हर कोई शुरुआत कर सकता

36:32 है। लेकिन असली फर्क तब पड़ता है जब आप उस सोच को ठोस कदमों में बदलते हैं। पूर थिंकर्स हमेशा किसी परफेक्ट मोमेंट का इंतजार करते हैं। वे सोचते हैं अभी तो सही समय नहीं है। अभी तक पूरा प्लान तैयार नहीं हुआ है और अगर मुझे सही आईडिया मिल जाए तो फिर मैं शुरू करूंगा। वे उस परफेक्ट आईडिया का इंतजार करते रहते हैं जो कभी नहीं आता। पर यही माइंडसेट उन्हें वहीं रुकने पर मजबूर कर देता है। और इसी वजह से उनकी जिंदगी में कभी बदलाव नहीं आता। बिलियर थिंकर्स का तरीका बिल्कुल अलग होता है। वे परफेक्शन का इंतजार नहीं करते। वे जानते हैं कि इमपरफेक्ट कंडीशंस में भी काम करना चाहिए। वे रिस्क लेते हैं, गलतियां करते हैं और फिर उस गलती से

37:18 सीखते हैं। उनका मानना है जो तुम सोच सकते हो, वह तुम कर सकते हो। बस उस पर काम शुरू करना होगा। एक बहुत पावरफुल मेटाफोर है जो इसे बखूबी समझाता है। खेत में सिर्फ प्रेयर करने से फसल नहीं उगती बीज बोने पड़ते हैं। अब जरा इसे समझो। प्रेयर करने से सिर्फ उम्मीदें जगती हैं। लेकिन नोबीज बोने मन से ही फसल उगती है। इसका मतलब यह है कि सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होगा। आपको एक्शन लेना होगा। अपने विचारों को रियलिटी में बदलने के लिए जरूरी है कि आप पहले कदम उठाएं। अगर आप किसी भी काम को करने के लिए परफेक्ट मोमेंट का इंतजार करते रहेंगे तो कभी शुरू नहीं कर पाएंगे। आप सोच सकते हो आज मैं यह करूंगा। लेकिन जब तक आप उस सोच

38:06 को एक्शन में नहीं बदलेंगे तब तक कोई परिणाम नहीं आएगा। और यही फर्क है जो सक्सेसफुल पीपल और अनसक्सेसफुल पीपल के बीच होता है। लोग जो सोचते हैं वे अक्सर सिर्फ सोचते रहते हैं और जो लोग करते हैं वे उन विचारों को अपनी मेहनत से सच कर दिखाते हैं। एक उदाहरण से इसे और समझते हैं। मार्क ज़करबर्ग ने Facebook की शुरुआत सिर्फ एक कॉलेज के छोटे से प्रोजेक्ट के रूप में की थी। वह परफेक्ट कंडीशंस का इंतजार नहीं कर रहे थे। उनके पास बड़ी टीम अच्छा प्लान और सारी सुविधाएं नहीं थी लेकिन उन्होंने एक्शन लिया। आज Facebook दुनिया के सबसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में से एक है। क्या अगर उन्होंने परफेक्ट टाइम का इंतजार किया होता तो क्या वह आज भी Facebook चला

38:53 रहे होते? शायद नहीं। उन्होंने पहले कदम उठाए। खुद रिस्क लिया और आज सफलता का प्रतीक बन गए। इसलिए एक्शन इज एवरीथिंग। तुम्हारी सोच बहुत महत्वपूर्ण है। लेकिन जब तक तुम उसे एक्शन में नहीं बदलोगे तब तक कोई बदलाव नहीं आएगा। सफलता उन्हीं को मिलती है जो रिस्क लेते हैं जो कदम उठाते हैं, जो गलतियां करते हैं और फिर उन गलतियों से सीख कर आगे बढ़ते हैं। तो अब सवाल यह है क्या तुम भी सिर्फ सोचने वाले बनोगे? या फिर तुम उस व्यक्ति की तरह एक्शन लोगे जो अपने सपनों को सच करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है। एक्शन लो रिस्क लो। ट्राई करो। चैप्टर एट प्रैक्टिकल एक्सरसाइज फ्रॉम बुक। प्रैक्टिकल

39:39 एक्सरसाइजेज। स्कॉट एंडरसन की किताब में कई ऐसी प्रैक्टिकल टेक्निक्स दी गई हैं जिन्हें तुम आज से ही अपनी जिंदगी में लागू कर सकते हो। यह वो तरीके हैं जो तुम्हारी सोच और दिशा को बदलने में मदद करेंगे। तो चलो इन पावरफुल एक्सरसाइजेस को जानते हैं। वन डेली अफमेशंस। हर दिन खुद से यह अफमेशंस कहो। मैं अरबपति की तरह सोचता हूं। आई एक्ट लाइक वन। यानी मैं बिलियनियर की तरह सोचता हूं और उसी तरह काम करता हूं। यह छोटे-छोटे वचन तुम्हारी सोच को बदलते हैं और तुम्हारे आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं। जब तुम खुद से कहते हो कि तुम एक बिलियर की तरह सोचते हो तो धीरे-धीरे तुम्हारी एक्शंस भी उसी दिशा में बदलने लगती हैं। यह तुम्हारे अंदर के

40:26 डाउट को खत्म करता है और तुम्हें विश्वास दिलाता है कि तुम भी वह सब कर सकते हो जो एक बिलिनेियर करता है। दूसरा सेल्फ टॉक ऑडिट। अपने अंदर की आवाज को सुनो। दिन में तीन बार खुद से यह सवाल पूछो। मैं खुद को कैसे एड्रेस कर रहा हूं? मैं क्या कह रहा हूं? क्या मेरी बातें सकारात्मक हैं? या फिर मैं अपने बारे में नेगेटिव बातें कर रहा हूं? यह एक्सरसाइज तुम्हारे अंदर की आवाज को पहचानने में मदद करेगी। अक्सर हम खुद से ऐसी बातें करते हैं जो हमारी सफलता में रुकावट डालती हैं। जैसे मैं नहीं कर सकता। मुझे यह नहीं मिलेगा। मेरे पास पैसा नहीं है। लेकिन जब तुम यह ऑडिट समीक्षा करते हो तो तुम पहचान सकते हो कि तुम्हारी

41:12 थिंकिंग कैसी है और उसे पॉजिटिव कैसे बदला जा सकता है। तीसरा मॉर्निंग माइंडसेट जर्नलिंग। हर सुबह अपने जोरनल में यह तीन सवाल लिखो। एक मैं आज क्या नया सीख सकता हूं? यह सवाल तुम्हारी सोच को ओपन माइंडेड रखता है और तुम्हें हर दिन कुछ नया सीखने की प्रेरणा देता है। डो मैं कैसे वैल्यू क्रिएट कर सकता हूं? यह सवाल तुम्हें अपने काम और एक्शंस को अधिक मूल्यवान और मीनिंगफुल बनाने के लिए प्रेरित करता है। यह तुम्हें रोजाना यह सोचने पर मजबूर करता है कि तुम दुनिया में किस तरह का योगदान दे सकते हो। थ्री मेरी सबसे बड़ी सोच क्या है? यह सवाल तुम्हें अपनी सबसे बड़ी सपने

41:58 और लक्ष्यों को याद दिलाता है और यह तय करता है कि तुम किस दिशा में आगे बढ़ रहे हो। एक अरबपति की तरह सोचने के लिए यह जरूरी है कि तुम अपनी सबसे बड़ी सोच को बार-बार याद करो ताकि वह तुम्हारे सबकॉन्शियस माइंड में बैठ जाए और तुम्हारी दिशा तय करें। यह तीन एक्सरसाइजेस तुम्हारी थिंकिंग को बदलने के लिए बहुत पावरफुल हैं। उन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करने से तुम्हारी माइंडसेट बदलने लगेगी। तुम जो सोचते हो वही तुम बनते हो। और अगर तुम अपनी सोच को इस तरह से बदल सकते हो तो तुम जो भी चाहोगे उसे हासिल कर सकते हो। याद रखो स्मॉल डेली एक्शंस लीड टू बिग रिजल्ट्स। और यह छोटे-छोटे कदम तुम्हें उन बड़े सपनों तक पहुंचाएंगे

42:44 जिनका तुमने कभी सोचा भी नहीं होगा। इस किताब ने हमें एक बहुत गहरी सीख दी है। गरीबी सिर्फ पैसों से नहीं होती। गरीब होना एक माइंडसेट की बात है। अगर तुम्हारी सोच में गरीबन है तो किसी भी महल में रहने से तुम्हें खुशी नहीं मिल सकती। लेकिन अगर तुम अपनी सोच को बिलिनेयर की तरह बदलते हो तो तुम्हारा पूरा जीवन बदल जाएगा। याद रखो सोच से बड़ी कोई ताकत नहीं होती। जब तुम सोच बदलते हो तो तुम अपनी पूरी दुनिया बदल सकते हो। आज तुम जहां भी हो चाहे वह छोटा सा शहर हो या बड़ा शहर। अगर तुम अपने अंदर उस बिलिनेियर माइंडसेट को जिंदा कर सकते हो तो एक दिन तुम्हारे पास वही सब होगा जो तुम आज सिर्फ सपनों में देख रहे हो। अगर

43:29 तुम बिलिनेियर की तरह सोचना सीख गए तो दुनिया तुम्हें रोक नहीं सकती। तो अब अगर तुम्हें इस वीडियो से कुछ सीखने को मिला, अगर तुम्हारे अंदर उस सोच की आग जगी है जो तुमने कभी महसूस नहीं की तो सबसे पहला कदम उठाओ। इस किताब को जरूर पढ़ो। यह किताब तुम्हें ना सिर्फ इंस्पिरेशन देगी बल्कि तुम्हें कॉनंक्रीट स्टेप्स भी बताएगी कि कैसे तुम अपनी सोच को प्रैक्टिकल एक्शंस में बदल सकते हो। अगर इस वीडियो ने तुम्हारी सोच में कोई बदलाव लाया है तो इसे उन लोगों के साथ जरूर शेयर करो जो अभी छोटी शुरुआत कर रहे हैं। लेकिन उनकी सोच किसी बड़े मुकाम तक पहुंचने की है। और हां, अगर तुम चाहते हो कि तुम्हारी सोच और भी विशाल हो, तो इस चैनल को सब्सक्राइब करो ताकि हम एक साथ और बड़ी सोच के साथ

44:15 आगे बढ़ सकें। अपने सपनों को सच करने के रास्ते में मैं हमेशा तुम्हारा साथी बनूंगा। अब वक्त आ गया है कि तुम अपने सपनों को सच करो और कभी भी यह मत भूलो। सोचो जैसे बिलिनेयर सोचते हैं। दोस्तों, उम्मीद करता हूं वीडियो आपको हेल्पफुल लगा होगा। प्लीज वीडियो को लाइक और चैनल को सब्सक्राइब करना मत भूलना क्योंकि आपका सपोर्ट हमारे लिए बहुत मायने रखता है। अपना ख्याल रखो और आगे बढ़ते रहो। हम सब एक साथ एक सफर पर हैं।

Share

YouTube Video Summaries