तनाव कम करने के तीन तरीके || आचार्य प्रशांत

ललकार www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो तनाव से निपटने के तीन तरीकों पर केंद्रित है। पहला तरीका है झूठ को अपनाना, जिससे तात्कालिक सुख मिलता है लेकिन दीर्घकालिक नुकसान होता है। दूसरा तरीका है पाखंड, जिसमें आधा सच और आधा झूठ जीना शामिल है, जिससे व्यक्ति अपनी नज़रों में सम्मानजनक बना रहता है। तीसरा और सबसे सहज तरीका है पूरी तरह से सत्य के प्रति समर्पित हो जाना, जिससे तनाव पूरी तरह से समाप्त हो जाता है।

  • तनाव से निपटने के तीन तरीके: झूठ को अपनाना, पाखंड, और पूरी तरह से सत्य के प्रति समर्पित हो जाना।
  • झूठ को अपनाना आसान है क्योंकि यह तात्कालिक सुख देता है, लेकिन इसके दीर्घकालिक परिणाम नकारात्मक होते हैं।
  • पाखंड में आधा सच और आधा झूठ जीना शामिल है, जिससे व्यक्ति अपनी नज़रों में सम्मानजनक बना रहता है।
  • पूरी तरह से सत्य के प्रति समर्पित हो जाना सबसे सहज तरीका है, लेकिन भ्रष्ट बुद्धि वाले लोगों को यह सबसे कठिन लगता है।

तनाव और उसके कारण

तनावग्रस्त व्यक्ति के जीवन में तनाव, चिंता और मनोविकार लगातार बने रहते हैं। तनाव तब होता है जब आपके भीतर एक हिस्सा सत्य की ओर जाना चाहता है, जबकि दूसरा हिस्सा उसे जाने नहीं देता। यह स्थिति दिल के दो पहाड़ों की तरह है जो विपरीत दिशाओं में खिंच रहे हैं, जिससे तनाव उत्पन्न होता है। यदि गलत काम करने पर तत्काल दुख मिलता, तो कोई गलती नहीं करता, लेकिन अक्सर गलत काम करने पर सुख मिलता है, जिससे तनाव बढ़ता है।

तनाव का छिपना और उसका प्रभाव

यह कोई अच्छी खबर नहीं है कि आपका तनाव दिन में केवल कुछ घंटे ही प्रकट होता है और बाकी समय छिपा रहता है। यदि तनाव 24 घंटे बना रहता, तो आप तनाव से मुक्त हो जाते, क्योंकि आप बिना आज़ाद हुए जी नहीं पाते। हम गलत जीवन इसलिए जी पाते हैं क्योंकि गलत जीवन का दुष्परिणाम लगातार अनुभव नहीं होता। यदि गलत जीवन जीने वालों को तत्काल अपनी गलती का फल मिल जाता, तो गलतियाँ होनी ही बंद हो जातीं।

माया और समय का भ्रम

दुनिया का खेल इसलिए चल रहा है क्योंकि गलती करके भी हम सुख पाते हैं। यह दुनिया के मध्य में ठुकी हुई कील है जिसके चारों ओर दुनिया नाच रही है। गलत काम करके भी सुख मिलना दुनिया का समीकरण बिगाड़ देता है। सही काम करके भी दुख मिल सकता है। माया समय बनकर खड़ी है, और गलत काम का अंजाम घटिया ही होगा, भले ही उसमें समय लगे। जिस क्षण आप गलत काम करते हैं, उसी क्षण सजा तय हो जाती है, लेकिन सजा का अनुभव करने में समय लग सकता है। संवेदनशील व्यक्ति जल्दी समझ जाता है कि सजा मिल गई है, जबकि मोटी चमड़ी वाले व्यक्ति को सजा का अनुभव करने में अधिक समय लगता है।

तनाव की अनिवार्यता और उसके घटक

तनाव के लिए दो विपरीत ताकतों का होना जरूरी है जो एक दूसरे का विरोध कर रही हों। हम सबके भीतर ये दोनों ताकतें मौजूद हैं, इसलिए हम सब तनाव के ही पुतले हैं। मनुष्य के भीतर दो परस्पर विरोधी चीजें अपनी-अपनी दिशा में खींच रही हैं, जिससे तनाव होता है। यह स्थिति एक रस्सी की तरह है जिसे दो सिरों पर दो तरफ खींचा जा रहा हो, या दिल के दो टुकड़े हो गए हों जो विपरीत दिशाओं में जा रहे हों।

तनाव कम करने का पहला तरीका: झूठ को अपनाना

तनाव कम करने का एक आसान तरीका है उस ताकत को जीतने देना जो आपको झूठ से बांध रही है। सच दूर का है और झूठ करीब का। सच कमाना पड़ता है, जबकि झूठ हम लेकर पैदा होते हैं। झूठ सामने का है और प्रकट है, जबकि सच अप्रमेय है। झूठ को जिताना ज्यादा सरल है, और ज्यादातर लोग यही तरीका अपनाते हैं। वे सुख विभोर दिखते हैं, भले ही वे सड़ी गली जिंदगी जीते हों। इस तरीके में आप अपनी जिंदगी से सच को बिल्कुल प्रतिबंधित कर देते हैं, जिससे तनाव मिट जाता है।

तनाव कम करने का दूसरा तरीका: पाखंड

तनाव कम करने का दूसरा तरीका है पाखंड। इसमें आप अपने आप को आधा-आधा बांट देते हैं, आधा सच को और आधा झूठ को। आप सुबह ध्यान लगाते हैं और फिर बाजार में कांड करते हैं। आप नौ दुर्गा के दिनों में चिकन मटन नहीं खाते और फिर बाद में खाते हैं। यह पाखंड का तरीका है जिसमें आप धार्मिक भी कहलाते हैं और पाप भी करते जाते हैं। इस तरीके से आप अपनी नजरों में राक्षस होने से बच जाते हैं और अपने आप को सम्माननीय बोल सकते हैं।

तनाव कम करने का तीसरा तरीका: सत्य के प्रति समर्पण

तनाव कम करने का तीसरा और सबसे सहज तरीका है जिसके हो उसके हो जाओ। यह सबसे आसान तरीका है, लेकिन भ्रष्ट बुद्धि वाले लोगों को यह सबसे कठिन लगता है। बाकी दोनों तरीके आपको खूब सुहाएंगे, लेकिन यह तरीका आपको पूरी तरह से तनाव मुक्त कर देगा। चुनाव आपका है कि आप कौन सा तरीका चुनना चाहते हैं।

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Transcript

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0:00 जो तनावग्रस्त है, एशियस है, स्ट्रेस्ड है, उसकी जिंदगी में तनाव और चिंता और मनोविकार लगातार है। एक ही तनाव होता है केंद्रित। कुछ है तुम्हारे भीतर जो जाना जाता है सच की ओर। और कुछ है तुम्हारे भीतर जो उसे जाने नहीं देता। इसी का नाम तनाव है। सोचो तुम्हारे दिल के ही दो पहाड़ हो गए हैं। एक हिस्सा इधर को जा रहा है, एक हिस्सा उधर को जा रहा है। तनाव तो होगा ना। अगर ऐसा हो पाता कि गलत काम करोगे तत्काल दुख मिलेगा तो गलती करता कौन है? चोरी की लेकिन देखो कितने पैसे आ गए। घटिया काम किया, सुख मिला। आदमी इसी तनाव का ही नाम। यह तनाव दो-तीन तरीकों से दूर किया जा सकता है। लोग करते हैं। बताऊं तरीके।

0:46 [संगीत] जो तनाव ग्रस्त है, एशियस है, स्ट्रेस्ड है, उसकी जिंदगी में तनाव और चिंता और मनोविकार लगातार है। बस वह कुछ मौकों पर उघड़ जाता है, प्रदर्शित हो जाता है। और सुनिए बात यह आपके लिए कोई खुशखबरी नहीं है कि आपका तनाव दिन में बस दो ही चार घंटे प्रकट होता है। बाकी समय अप्रकट रहता है। यह कोई खुशखबरी नहीं है। ऐसे समझ लीजिए कि अगर आपका तनाव 24 घंटे बना रह गया होता तो आप तनाव से मुक्त हो गए होते।

1:33 आपका तनाव बना और बचा ही इसलिए रह जाता है क्योंकि वह 18 20 घंटे छुपा रहता है। अगर वह 24 घंटे अपनी उपस्थिति दर्ज कराने लगे तो आप उससे आजाद हो जाएंगे। क्योंकि जी नहीं पाएंगे आजाद हुए बिना। बात समझ में आ रही है? हम गलत जीवन जी ही इसीलिए पाते हैं क्योंकि गलत जीवन का दुष्परिणाम लगातार नहीं अपना अनुभव कराता। अगर कोई ऐसी व्यवस्था हो पाती कि जो गलत जीवन जी रहे हैं उनको उसी समय तत्काल अपनी गलती का फल मिल जाता तो गलतियां होनी ही बंद हो जाती।

2:21 यह दुनिया का खेल यह सब मायावी कार्यक्रम चल ही इसलिए रहा है क्योंकि गलती करके भी हम सुख पाते हैं। यही तो दुनिया के मध्य में ठुकी हुई कील है। इसी के इर्द-गिर्द तो दुनिया नाच रही है। इसी चीज ने तो दुनिया का समीकरण पूरा बिगाड़ रखा है कि तुम एकदम गलत काम करके एकदम निकृष्ट काम करके भी सुख पाते हो। अगर ऐसा हो पाता कि गलत काम करोगे तत्काल दुख मिलेगा तो गलती करता कौन?

3:10 लेकिन ऐसा नहीं होता। और हमें और ज्यादा भ्रमित करने के लिए एक चीज और होती है। आप बिल्कुल सही काम करके भी दुख पा सकते हो। अगर ऐसी व्यवस्था होती कि सही काम करोगे तो अनिवार्यतः सुख ही मिलेगा। तो सब सही ही काम करते। तो हमें यह लगता है कि हमने जो करा अंजाम उससे बिल्कुल भी संबंधित नहीं था। घटिया काम करा और अंजाम क्या मिला? बहुत बढ़िया।

3:55 चोरी की लेकिन देखो कितने पैसे आ गए। घटिया काम किया। सुख मिला। माया समय बनकर खड़ी है। माया काल बनकर खड़ी है। निश्चित रूप से जो तुमने करा है वह काम घटिया है तो उसका अंजाम भी घटिया होगा। पर समय लग सकता है उस के अनुभव में। सजा मिलेगी। सजा तय हो गई। जिस क्षण तुमने गलत काम किया उसी क्षण सजा तय हो गई। लेकिन तुम सजा का अनुभव करोगे उसमें अभी समय लगेगा। यह समय ही हमें धोखा दे जाता है। हमें लगता है कि अरे सजा तो मिली ही नहीं। सजा मिलेगी। समय लगाकर मिलेगी। और अगर तुम थोड़े संवेदनशील आदमी हो तो समय कम लगेगा। तुम जल्दी समझ जाओगे कि सजा मिल गई है। तुम जितने ज्यादा मोटी चमड़ी

4:43 के आदमी हो तुम्हें उस सजा का अनुभव करने में उतना ज्यादा समय लगेगा। लेकिन फिर मोटी चमड़ी का होना अपने आप में एक सजा है। तो बताओ सजा देर से मिली कि जल्दी मिल गई? बात समझ में आ रही है? एक ही तनाव होता है केंद्रीय कुछ है तुम्हारे भीतर जो जाना जाता है सच की ओर। और कुछ है तुम्हारे भीतर

5:31 जो उसे जाने नहीं देता। इसी का नाम तनाव है। यह तो अच्छी तरह जानते हो ना कि तनाव के लिए टेंशन के लिए दो विपरीती ताकतों का होना जरूरी है जो एक दूसरे का विरोध कर रही हो। उसके बिना तनाव हो ही नहीं सकता। हम सबके भीतर वह दोनों ताकतें मौजूद हैं। इसीलिए हम सब तनाव के ही पुतले हैं। तनाव मनुष्य की अनिवार्यता है। क्योंकि मनुष्य को दो परस्पर विरोधी चीजें अपनी-अपनी दिशा में खींच रही हैं। तनाव तो होगा ही। हम जैसे कोई रस्सी हो जो दो सिरों पर दो तरफ को खींची जा रही हो। रस्सी तक तो ठीक। सोचो कि एक हाथ तुम्हारा एक दिशा को खींच

6:17 रहा है और एक हाथ तुम्हारा एक दिशा को खींच रहा है। हाथ तक तो ठीक। सोचो तुम्हारे दिल के ही दो फाड़ हो गए हैं। एक हिस्सा इधर को जा रहा है। एक हिस्सा उधर को जा रहा है। तनाव तो होगा ना। आदमी इसी तनाव का ही नाम है। यह तनाव दो-तीन तरीकों से दूर किया जा सकता है। लोग करते हैं। बताऊं तरीके? एक तरीका है आसान सुविधाजनक वो जो तुम्हें सच की ओर खींच रहा है वो तुम्हें कहीं बहुत दूर ले आना चाहता है

7:02 हम तो तुम कहो कि उतनी दूर कौन जाएगा तुम अपने जीवन में उसी ताकत को जीत जाने दो जो तुम्हें तुम्हारे बहुत करीब के झूठ से बांध रही है। लो तनाव दूर हो गया। सच और झूठ की लड़ाई हो रही थी। तुमने झूठ को जिता दिया। अब कोई तनाव नहीं। तनाव के लिए दो का होना जरूरी है। एक को तुमने मिटा दिया। अब कोई तनाव नहीं। और झूठ को जिताना ज्यादा सरल है। क्यों? सच दूर का है। झूठ करीब का है। सच कमाना पड़ता है। झूठ हम लेकर पैदा होते हैं। सच

7:48 अविश्वसनीय है। सच अकल्पनीय है। सच अप्रत्याशित है। सच अदृश्य है। झूठ झूठ सामने का है। झूठ प्रकट है। झूठ सप्रमाण है। सच अप्रमेय है। झूठ को जिताने के लिए हमारे पास कई तरीके के तर्क हैं और सच सब तर्कों से परे हैं। तो झूठ को जिताना ज्यादा आसान है। तुम अपनी जिंदगी में झूठ को जिता दो तनाव कम हो जाएगा। ज्यादातर लोग यही तरीका निकालते हैं। तुम देखते नहीं हो। कितने ही घूम रहे होते हैं। वह ठट्ठे मार रहे हैं। हाहा कर रहे हैं और बिल्कुल सुख विभोर लग रहे हैं।

8:33 देखे हैं ना लोग? और तुम्हें पता है कि यह आदमी एकदम सड़ी गली जिंदगी जीता है। तुम्हें पता है कि एकदम दुष्ट दुरात्मा है। तुम जानते हो कि इस आदमी के अंतर जगत में सड़ा भरी हुई है। एकदम घटिया जिंदगी जीता है ये। लेकिन फिर भी उसके गाल लाल हैं। उसकी खाल चमक रही है। वो अपनी तोंद पर बार-बार हाथ मारकर ठट्ठा मारता है। वो हंसता है जोर-जोर से। उसके पास सब तरह की सुख सुविधाएं हैं। वो आत्मविश्वास से भरपूर है। वो दूसरों को भी ज्ञान बांटता फिरता है। हम एक यह तरीका है सुख अर्जित करने का। तुम अपनी जिंदगी से सच को बिल्कुल ही

9:21 प्रतिबंधित कर दो। तनाव मिट जाएगा। तुम अपनी जिंदगी से सच को एकदम साफ कर दो। 1% सच नहीं चाहिए जीवन में। पूरा मैं झूठ की तरफ ही जिऊंगा। तनाव मिट जाएगा। तनाव कम करने का दूसरा तरीका पाखंड। क्या पाखंड? तनाव बहुत था। दो चीजें थी तुम्हें जो दो दिशाओं में खींच रही थी। तुमने अपने आप को आधा-आधा बांट दिया। तुमने आधा इसको दे दिया। आधा उसको दे दिया। तनाव नहीं रहेगा ना। किसी रस्सी के दोनों सिरों को खींचा जा रहा है। उस रस्सी को ही

10:08 बीच से काट दो। अब तनाव बचेगा। यह तरीका भी बहुत लोग आजमाते हैं। यह तरीका पाखंड का है। कैसे? वो आधे सच के हो जाते हैं और आधे झूठ के हो जाते हैं। वो सुबह-सुबह बैठकर के ध्यान लगाते हैं। क्रिया करते हैं। ना जाने किस-किस तरह के पाखंड करते हैं। और उसके बाद जाकर के दुकान में बाजार में तमाम तरह के कांड करते हैं। वो नौ दुर्गा के दिनों में कहते हैं इन दिनों हम चिकन मटन नहीं खाएंगे और उसके बाद वह यह पाखंड का तरीका है। आधेआधे बट जाओ। आधे-आधे बट जाओ। दफ्तर अगर घूस लेने भी जा रहे हो तो दही शक्कर खा के जाओ।

10:53 ये क्या कर रहे? अरे पतिदेव दफ्तर के लिए निकल रहे हैं। इन्हें दही शक्कर चटाना है। और ये दफ्तर में आके करेंगे क्या? घूस खाएंगे। यह पाखंड कि एक तरफ धर् धार्मिक भी कहला रहे हैं और दूसरी तरफ सारे पाप भी करे जा रहे हैं। यह तरीका भी बहुत लोग आजमाते हैं। इस तरीके के फायदे यह हैं कि तुम बच जाते हो अपनी नजरों में राक्षस होने से। यह जो दूसरा तरीका है, यह इस मामले में ज्यादा उपयोगी है। तुम अब अपने आप को सम्माननीय बोल सकते हो। तुम साल में एक दो बार मंदिर हो आते हो। तुम एक आध बार तीर्थ तीर्थ भी कराते हो।

11:39 तुम जाकर किसी मंदिर में चंदा दे आते हो। तो तुमने अपने जीवन का कुछ हिस्सा सत्य को धर्म को दे रखा है। और अपने जीवन का बाकी हिस्सा तुमने दे रखा है। भूख अब तनाव नहीं रहेगा। अब तुम खुश हो। तुम कहते हो मैं करता आऊंगा। बहुत काली करतूतें। मैं ध्यान भी तो लगाता हूं। मैं पूरे हफ्ते नारकीय जीवन जीता आऊंगा। मैं हर शनिवार मंदिर भी तो जाता हूं। मेरे मन में तमाम तरह की विकृतियां होंगी। मलिनताएं होंगी। लेकिन मैं सब धार्मिक रस्मों और रिवाजों का पालन तो करता हूं। ऐसे बहुत लोग मिलेंगे तुम्हें। और यह लोग अपनी ही नजरों में खूब बढ़े चढ़े होते

12:26 हैं। यह मानेंगे ही नहीं। कि इन्होंने भीतर एक पाखंड रच रखा है। तुम्हें दो तरीके बताए तनाव कम करने के। अब तीसरा तरीका तनाव कम करने का। अब ये कोई तरीका है ही नहीं। ये तो इतनी सीधी सहज बात है कि इसको मैं तरीका क्या बोलूं? कुछ समझे? क्या? जिसके हो उसके हो जाओ। भाई कोई तनाव ही नहीं बचेगा। हम मन मस्त हुआ।

13:13 अब क्यों बोले? तीसरा तरीका यह तनाव कम करने का। यह सबसे सहज तरीका है। पर बुद्धि तुम्हारी भ्रष्ट हो तो तुमको यह सबसे कठिन तरीका लगता है। सबसे महंगा जबकि है यह सबसे आसान। बाकी दोनों तरीके तुमको खूब सुहाएंगे। तो तुमने कहा है कि तनाव रहता है। मैंने तुम्हें तनाव कम करने के तीनों तरीके बता दिए। अब चुनाव तुम्हारा है। तुम्हें जो तरीका चुनना हो चुन लो। समझ में आ रही है बात कुछ?

13:58 [संगीत]

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