0:00 [संगीत] स्टडी आईक्यू आईएस अब तैयारी हुई अफोर्डेबल वेलकम टू स्टडी आईक्यू मेरा नाम है आदेश सिंह हिस्ट्री ऑफ उत्तर प्रदेश दोस्तों आज हम जिस राज्य की बात करने जा रहे हैं वह कोई आम राज्य नहीं है वैसे आम तो कोई राज्य नहीं सभी राज्यों की अपनी-अपनी विशेषता है लेकिन यह राज्य भारत में होने वाली किसी भी बात या घटना पर सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहता है यह श्रीराम श्री कृष्ण और बुद्ध की जन्मभूमि है तो कबीर और महावीर का कर्म स्थल यहीं पर गंगा शिव में समाहित हुई है और यहीं की मिट्टी से लक्ष्मीबाई और मंगल पांडे जैसे सपूतों ने जन्म लिया है इस राज्य की धरती ने भारत को सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री दिए
0:47 हैं कहा जाता है कि दिल्ली की सत्ता की राह इसी राज्य से होकर गुजरती है यह राज्य देश की राजनीति की दिशा और दशा तय करता है तो वहीं आर्थिक मुद्दों में भी यह सबसे आगे है यह अपनी गंगा जमुनी तहजीब और अपनी नजाकत के लिए सारी दुनिया में फेमस है दोस्तों हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश की भारत के उत्तर मध्य में बसा उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला और चौथा सबसे बड़ा राज्य है यह राज्य जितना नएप से भरा है उतना ही ऐतिहासिक भी है उत्तर वैदिक काल में इसे ब्रह्म ऋषि देश या मध्य देश के नाम से जाना जाता था यह वैदिक काल के कई महान ऋषि मुनियों जैसे भारद्वाज गौतम याज्ञवल्क्य वशिष्ठ विश्वामित्र और वाल्मीकि आदि की तपोभूमि
1:34 रहा आर्यों की कई पवित्र पुस्तकें भी यहीं लिखी गई भारत के दो महान महाकाव्यों रामायण और महाभारत की कथा भी इसी क्षेत्र पर आधारित है उत्तर प्रदेश का इतिहास लगभग 4000 वर्ष पुराना है जब आर्यों ने सरजमी पर कदम रखा और वैदिक सभ्यता का आरंभ हुआ तभी से यहां का इतिहास मिलता है आर्य सिंधु और सतलज के मैदानी भागों से यमुना और गंगा के मैदान मैनी भाग की ओर बढ़े इन्होंने यमुना और गंगा के मैदानी भाग और घाघरा क्षेत्र को अपना घर बनाया इन्हीं आर्यों के नाम पर भारत देश का नाम आर्यवर्त अथवा भारतवर्ष पड़ा गंगा के मैदान के बीचोंबीच अपनी स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश समूचे उत्तरी भारत के इतिहास का केंद्र बिंदु रहा है उत्तर प्रदेश का
2:20 इतिहास बेहद प्राचीन और बेहद दिलचस्प है आज हम आपको उत्तर प्रदेश के उस इतिहास से रूबरू कराएंगे जिसके बारे में किताबों में बहुत कम जान है तो आइए चलते हैं उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक सफर पर एंट हिस्ट्री ऑफ उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक पन्नों को पलटे तो हम पाते हैं कि इसकी शुरुआत पुरातात्विक काल से होती है पुरातात्विक अन्वेषण ने अब के उत्तर प्रदेश की प्रागैतिहासिक सभ्यता पर नई रोशनी डाली है प्रतापगढ़ में पाई गई मानव खोपड़ के अवशेष लगभग 10000 ईसा पूर्व के हैं पुरा पाषाण कालीन सभ्यता के साक्ष्य इलाहाबाद के बेल घाटी सोनभद्र के सिंगरौली घाटी और चंदौली के चकिया नामक पुरा स्थलों से मिले हैं इसके साथ ही कबीर नगर जिले
3:07 में लहरा देव इलाके में प्राचीन कृषि के साक्ष्य मिले हैं यहां से 8000 ईसा पूर्व से 9000 ईसा पूर्व के मध्य के चावल मिले हैं नवपाषाण काल के साक्ष्यों की बात करें तो मिर्जापुर सोनभद्र बुंदेलखंड और प्रतापगढ़ के सराय नाहर राय से उत्खनन में औजार और हथियार मिले हैं वहीं ताम्र पाषाण संस्कृति के साक्ष्य मेरठ और सहारनपुर से प्राप्त हुए हैं इसके बाद हड़प्पा काल के साक्ष्य भी उत्तर प्रदेश में पाए गए हैं बता दें कि उत्तर प्रदेश में सबसे पुराने हड़प्पा शहर पाए गए आलमगीरपुर गंगा यमुना में पहला स्थल था जहां से हड़प्पा कालीन अवशेष प्रकाश में आए थे इसके अलावा मेरठ सहारनपुर जौनपुर आगरा अलीगढ़ हरदोई मुजफ्फरनगर बदायूं मथुरा फैजाबाद एटा
3:53 बरेली वाराणसी सहारनपुर मथुरा कन्नौज बुलंद शहर बलिया और इलाहाबाद में भी हड़प्पा कालीन सभ्यता के साक्ष्य मिले हैं आगे वैदिक साहित्य और दो महाकाव्यों रामायण और महाभारत से इस क्षेत्र के सातवी शताब्दी ईसा पूर्व के पहले की जानकारी मिलती है वैदिक साहित्य गंगा के मैदान का वर्णन करते हैं वहीं महाभारत की पूरी गाथा हस्तिनापुर के आसपास घूमती है जबकि रामायण में भगवान राम का जन्मस्थान अयोध्या है देखा जाए तो उत्तर प्रदेश में एक व्यवस्थित इतिहास की शुरुआत छठी शताब्दी ईसा पूर्व के अंत में होती है जब उत्तर भारत में 16 महाजनपद वर्चस्व के लिए संघर्ष कर रहे थे उन 16 महाजनपदों में से आठ महाजनपद आधुनिक उत्तर प्रदेश में
4:40 मौजूद थे जिनके नाम है कुरु पांचाल काशी कौशल शूरसेन चेदी वत्स और मल इसी दौरान उत्तर प्रदेश ने भगवान बुद्ध के आगमन और बौद्ध धर्म के प्रसार को देखा यहीं पर गौतम बुद्ध ने अपना अधिकांश सन्यासी जीवन व्यतीत किया था भगवान बुद्ध ने उत्तर प्रदेश के सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था चौखंडी स्तूप यहां उस स्थान को चिन्हित करता है जहां भगवान बुद्ध अपने शिष्यों से मिले थे इसी कारण उत्तर प्रदेश को बौद्ध धर्म का पालना कहते हैं वहीं अगर हम शासकों की बात करें तो पहली शताब्दी से छठी शताब्दी ईसवी तक उत्तर प्रदेश मौर्य कुषाण गुप्त वर्धन वंश गुर्जर प्रतिहार के शासकों के नियंत्रण में रहा उत्तर प्रदेश
5:26 का विकास मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त प्रथम 330 से 380 ईसा पूर्व के काल में देखने को मिला इसके बाद 268 से 232 ईसा पूर्व तक सम्राट अशोक ने यहां पर अपने साम्राज्य का विस्तार किया अशोक काल के दौरान कला और वास्तु कला अपने चरम पर थे सम्राट अशोक के बौद्ध धर्म को अपनाने के बाद उन्होंने बड़े पैमाने पर बौद्ध स्तूप और मूर्तियों का निर्माण करवाया इस काल में कला का एक नया अध्याय शुरू हुआ पहली शताब्दी ईसवी में कुषाण ने एक ऐसे विस्तृत साम्राज्य की स्थापना की जिसमें उत्तरी भारत के अधिकांश भाग के अतिरिक्त मध्य एशिया के कुछ प्रदेश भी शामिल थे भारतीय संस्कृति के इतिहास में कुषाण काल का अत्यंत महत्त्वपूर्ण स्थान है कुषाण के संरक्षण में भारत ने धर्म कला साहित्य दर्शन आदि के क्षेत्र
6:13 में अत्यधिक उन्नति की कुषाण शासकों के प्रयासों से ही भारतीय सभ्यता और संस्कृति के प्रसार के लिए मध्य और पूर्वी एशिया के द्वार खुले कुषाण ने उन परिस्थितियों में लगातार दो सदियों तक उत्तर प्रदेश सहित उत्तर भारत पर शासन किया कुषाण काल में मथुरा कला का विस्तार हुआ मथुरा कुषाण नरेशोंस ही वह उत्तर भारत का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र भी रहा है कुषाण शासक कनिष्क हुविष्का शासनकाल मथुरा कला का स्वर्णम काल रहा है इसके बाद गुप्त साम्राज्य का शासन रहा गुप्त वंश के शासक समुद्रगुप्त ने लगभग 330 से लेकर 380 ईसवी तक इस सरजमीन पर शासन किया उनके बाद चंद्रगुप्त द्वितीय ने लगभग 380 से लेकर चा
7:00 ईसवी तक यहां पर राज किया गुप्त काल के दौरान ही हिंदू कला का भी काफी विकास हुआ गुप्त साम्राज्य को तोड़ने वाले नों के आक्रमण के बाद गंगा यमुना दवाब ने कन्नौज का उदय देखा एक अन्य प्रसिद्ध शासक हर्षवर्धन ने 606 से लेकर 647 ईसवी तक उत्तर प्रदेश पर शासन किया इन्होंने कन्नौज के पास स्थित अपनी राजधानी से समूचे उत्तर प्रदेश बिहार मध्य प्रदेश पंजाब और राजस्थान के कुछ हिस्सों पर शासन किया हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान कन्नौज साम्राज्य अपने चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया था हर्षवर्धन की मृत्यु के तुरंत बाद उनका साम्राज्य कई राज्यों में बिखर गया जिसके बाद इस क्षेत्र पर नियंत्रण करने के लिए त्रिकोणीय संघर्ष विकसित हुआ जिसमें पश्चिम और उत्तर
7:46 क्षेत्र से गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य पूर्व से बंगाल के पाल साम्राज्य और दक्षिण में दक्कन में आधारभूत राष्ट्रकूट साम्राज्य शामिल थे गुर्जर प्रतिहार शासक वत्सराज ने कन्नौज के नियंत्रण के लिए पाल शासक धर्मपाल और राष्ट्रकूट राजा दंती दुर्ग को सफलता पूर्वक चुनौती दी और पराजित कर दो राज क्त्रों पर कब्जा कर लिया कन्नौज गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य का केंद्र बन गया अपनी शक्ति के चरमोत्कर्ष के दौरान अधिकतर उत्तरी भारत पर इनका अधिकार रहा मध्यकाल में उत्तर प्रदेश मुस्लिम शासकों के अधीन हो गया था जिससे हिंदू और इस्लाम धर्म के पास आने से एक नई मिलीजुली संस्कृति का विकास हुआ आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश के मध्यकाल को मिडिवल
8:32 हिस्ट्री ऑफ उत्तर प्रदेश भारत में 1000 से 1030 ईसवी तक मुसलमानों का आगमन हो चुका था लेकिन उत्तरी भारत में 12वीं शताब्दी के अंतिम दशक के बाद ही मुस्लिम शासक स्थापित हुए जब मोहम्मद गौरी ने गहवा राजवंश और दूसरे शासकों को हराया बता दें कि गड़वाल राजवंश ने 11वीं शताब्दी से लेकर 12वीं शताब्दी तक उत्तर प्रदेश पर शासन किया था मोहम्मद गौरी ने 1100 94 ईसवी में गड़वाल वंश के राजा जयचंद पर आक्रमण किया था भारत में मोहम्मद गौरी के साथ ही मुस्लिम शासक का आरंभ हुआ था हालांकि उसका कोई पुत्र नहीं था इसलिए उसने अपने दास कुतुबुद्दीन ऐबक को अपना उत्तराधिकारी बना दिया जिसने भारत में दास वंश की स्थापना की और अधिकारों पर
9:18 कब्जा किया उसने 1210 ईसवी तक शासन किया मोहम्मद जलालुद्दीन खिलजी ने दास वंश के अंतिम सुल्तान को उखाड़ फेंका और दिल्ली के सुल्तानों का खिलजी वंश स्थापित किया जिसने 1290 से 1320 ईसवी तक शासन किया खिलजी वंश के बाद गयासुद्दीन तुगलक ने तुगलक वंश की स्थापना की खिलजी और तुगलक साम्राज्य में उत्तर प्रदेश भी शामिल था तुगलक वंश के पतन के बाद शर्की वंश की स्थापना हुई शरक हों ने जौनपुर को अपनी राजधानी बनाया जो एक शताब्दी से कम समय तक रही इस वंश को 1479 ईसवी में सुल्तान बहलो लोदी ने पराजित किया 1414 से 1526 ईसवी तक दिल्ली की बागडोर सैयद और लोदी राजाओं के
10:03 हाथों में रही सिकंदर लोदी के शासनकाल के दौरान 154 ईसवी में आगरा को उपराजधानी का दर्जा दिया गया सिकंदर लोदी के बाद इब्राहिम लोदी आगरा की गद्दी पर बैठा लगभग 600 सालों तक अधिकांश भारत की तरह उत्तर प्रदेश पर भी किसी ना किसी मुस्लिम वंश का शासन रहा जिनका केंद्र दिल्ली या उसके आसपास था तैमूर और चंगेज खान के वंशज बाबर ने 1526 ई में दिल्ली के सुल्तान इब्राहिम लोधी को हराया और सर्वाधिक सफल मुस्लिम वंश मुगल वंश की नीव रखी इस साम्राज्य ने 200 सालों से भी अधिक समय तक उपमहाद्वीप पर शासन किया जो अफगानिस्तान से बांग्लादेश तक फैला हुआ था जिसकी शक्ति उत्तर प्रदेश में केंद्रीकृत थी चौसा के युद्ध में मुगल राजा हुमायूं को सूरी वंश
10:51 के राजा शेरशाह सूरी ने हराया और उत्तर प्रदेश पर सूरी वंश का राज शुरू हो गया शेरशाह सूरी और इस्लाम शाह सू सूरी ने अपनी राजधानी के रूप में ग्वालियर से शासन किया इस्लाम शाह सूरी की मृत्यु ने हेमू के लिए दिल्ली पर शासन करने का रास्ता खोल दिया पानीपत की दूसरी लड़ाई में मुगल वंश के सबसे प्रमुख राजा अकबर ने हेमू से सत्ता छीन ली और एक बार फिर दिल्ली पर मुगलों का शासन शुरू हुआ इस साम्राज्य का महानतम काल अकबर से लेकर औरंगजेब और आलमगीर का काल था इनमें सबसे प्रमुख शासक अकबर था जिसका शासनकाल 1556 से 1605 ई तक था जिन्होंने आगरा के पास नई शाही राजधानी फतेहपुर सीकरी का निर्माण किया उनके पोते शाहजहां जिनका शासनकाल 1628 से 1658 ईसवी
11:39 तक था उन्होंने आगरा में अपनी बेगम की याद में ताजमहल बनवाया जो अपनी आर्किटेक्चरल डिजाइन के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है शाहजहां ने आगरा और दिल्ली में भी आर्किटेक्चर की दृष्टि से कई इमारतें बनवाई थी बात चाहे सल्तनत काल की हो या फिर मुगल काल की हर समय में उत्तर प्रदेश प्रासंगिक रहा अकबर ने तो उत्तर प्रदेश की माटी को अपना सब कुछ मान लिया था अकबर ने फतेहपुर सीकरी और इलाहाबाद में जो किले बनवाए थे उसी की नीव पर मुगल वंश सैकड़ों साल तक बना रहा इसके अलावा सल्तनत काल में संभल हो या आगरा जौनपुर सभी में उत्तर प्रदेश ने अपना वर्चस्व बनाए रखा एकता व्यवस्था का प्रशासन रहा हो या फिर सल्तनत काल की आर्थिक शक्ति सभी जगह उत्तर प्रदेश की चर्चा मिल जाती है मुगल साम्राज्य ने
12:25 उत्तर प्रदेश में हिंदू और मुस्लिम संस्कृति से मिली जुली एक नई संस्कृति का विकास किया इस संस्कृति के जन्मदाता अकबर ही थे जिन्होंने बिना किसी भेदभाव के अपने दरबार में आर्किटेक्चरल लिटरेचर पेंटिंग और म्यूजिक एक्सपर्ट्स को नियुक्त किया था लेकिन धीरे-धीरे हिंदुत्व और इस्लाम के टकराव ने कई नए विचारों को जन्म दिया था और उनका विकास किया था 18वीं शताब्दी में मुगलों के पतन के साथ ही इस मिश्रित संस्कृति का केंद्र दिल्ली से लखनऊ चला गया जो अवध के नवाब के अंतर्गत था और जहां सांप्रदायिक सद्भाव के माहौल में कला साहित्य संगीत और काव्य का विकास हुआ जब उत्तर प्रदेश आधुनिक भारत के पड़ाव पर पहुंचा तो उत्तर प्रदेश का अलग ही रूप देखने को मिला यहीं से उत्तर प्रदेश ने अपने लिए अलग कहानी लिखनी शुरू कर दी चलिए
13:12 जानते हैं उत्तर प्रदेश का आधुनिक इतिहास मॉडर्न हिस्ट्री ऑफ उत्तर प्रदेश 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात अगले 50 सालों तक दिल्ली की गद्दी पर कुल आठ मुगल शासकों ने शासन किया 1757 तक वर्तमान उत्तर प्रदेश में पांच स्वतंत्र राज्य स्थापित हो चुके थे इस दौरान अवध और रुहेल दो ऐसे क्षेत्र बन गए जो शक्ति के संघर्ष को और अवध और रुहेला ने मुगलों के खिलाफ विद्रोह कर दिया इन दोनों के विद्रोह को देखते हुए बाकी राज्यों ने भी वर्चस्व के लिए दिल्ली में मुगलों के साथ संघर्ष शुरू कर दिया इधर 17वीं शताब्दी के मध्य तक ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के दक्षिणी भाग में एंट्री कर ली थी और अब वह उत्तर भारत की ओर बढ़ रहे थे 18वीं शताब्दी में आते आते मुगल
13:59 सत्ता का पतन हो गया इधर ईस्ट इंडिया कंपनी उत्तर भारत में अपनी जड़ें जमाने लगी उसने शुरुआत में विभिन्न साम्राज्य से शक्तियां छीनकर उन्हें बंगाल प्रेसिडेंसी के तहत एकजुट कर दिया इसमें नवाबों के प्रांत अवध ग्वालियर के सिंधिया और नेपाल के गोरखा शामिल थे 1834 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने उत्तर पश्चिमी प्रांतों को बंगाल प्रेसिडेंसी से अलग कर दिया और एक नई प्रेसिडेंसी का निर्माण किया जिसे आगरा प्रेसिडेंसी कहा गया सन 1857 की क्रांति की शुरुआत भी उत्तर प्रदेश के मेरठ शहर से ही हुई थी यह क्रांति लगभग 1 साल तक चली और धीरे-धीरे पूरे उत्तर भारत में फैल गई इस क्रांति को भारत का पहला स्वतंत्रता संग्राम नाम दिया गया इस संग्राम में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई अवध की बेगम हजरत महल बख्त खान नाना साहेब
14:50 तातिनिके दमन के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत का शासन ब्रिटिश ताज को सौंपना पड़ा 1880 ईसवी के बाद भारतीय राष्ट्रवाद के उदय के साथ उत्तर प्रदेश का प्रांत स्वतंत्रता आंदोलन में भी सबसे आगे रहा इस प्रदेश ने भारत को मोतीलाल नेहरू मदन मोहन मालवीय जवाहरलाल नेहरू और पुरुषोत्तम दास टंडन जैसे महत्त्वपूर्ण राष्ट्रवादी राजनैतिक नेता दिए सन 1902 में नॉर्थ वेस्ट प्रोविंस का नाम बदलकर यूनाइटेड प्रोविंस ऑफ आगरा एंड अवध कर दिया गया आम बोलचाल में इसे यूपी कहा जाने लगा सन 1920 में प्रदेश की राजधानी को इलाहाबाद के स्थान पर लखनऊ बना दिया गया और प्रदेश का उच्च न्यायालय इलाहाबाद में ही बना रहा और लखनऊ में उच्च न्यायालय की एक हाईकोर्ट
15:37 बेंच स्थापित की गई इसी दौरान भारत में ब्रिटिश साम्राज्य की नीव हिलाने के लिए महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन शुरू किया जो धीरे-धीरे पूरे संयुक्त प्रांत में फैल गया लेकिन चौरी चौरा गांव में हुई हिंसा के कारण महात्मा गांधी को असहयोग आंदोलन रोकना पड़ा इसके साथ ही संयुक्त प्रांत मुस्लिम लीग की राजनीति का भी केंद्र रहा ब्रिटिश काल के दौरान इन्हीं प्रांतों में सबसे अधिक रेलवे नहर और संचार के साधनों का व्यापक विकास हुआ अंग्रेजों ने यहां आधुनिक शिक्षा और वेस्टर्न कल्चर को भी बढ़ावा दिया इसी के तहत यहां पर 1921 में लखनऊ विश्वविद्यालय की स्थापना हुई बाद में 1935 में इसका संक्षिप्त नाम यूनाइटेड प्रोविंसेस प्रचलित हो गया 1947 में भारत को अंग्रेजों से आजादी मिली और यूनाइटेड
16:23 प्रोविंसेस एक नए लोकतांत्रिक भारत का महत्त्वपूर्ण एडमिनिस्ट्रेटिव यूनिट ब बन गया 2 साल बाद इसकी सीमा के पास स्थित टिहरी गढ़वाल और रामपुर स्वतंत्र राज्यों को यूनाइटेड प्रोविंसेस में शामिल कर लिया गया 24 जनवरी 1950 को गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 के तहत यूनाइटेड प्रोविंसेस का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश कर दिया गया था लेकिन सन 2000 में उत्तर प्रदेश का विभाजन कर एक नए राज्य उत्तराखंड की स्थापना की गई दरअसल उत्तर प्रदेश के गठन के तुरंत बाद राज्य के हिमालय क्षेत्रों में अशांति विकसित हो गई थी इस क्षेत्र के लोगों को लगा कि इतनी ज्यादा जनसंख्या और इतने बड़े एरिया के कारण लखनऊ में बैठी सरकार उन पर ध्यान नहीं देगी और उनकी देखरेख नहीं कर
17:09 सकेगी व्यापक बेरोजगारी गरीबी और अपर्याप्त बुनियादी ढांचे ने उनके असंतोष में योगदान दिया 1990 के दशक में एक अलग राज्य की उनकी मांग में तेजी आई 2 अक्टूबर 1994 को मुजफ्फरनगर में एक हिंसक घटना से आंदोलन बढ़ गया जब पुलिस ने राज्य समर्थक प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की जहां बहुत से लोग मारे गए अंत में नवंबर 2000 में उत्तरांचल को उत्तर प्रदेश के उत्तर पश्चिमी हिस्से से अलग कर एक नए राज्य का गठन किया गया 2007 में इसका नाम बदलकर उत्तराखंड रख दिया गया कंक्लूजन तो दोस्तों यह थी उत्तर प्रदेश की गौरव गाथा यह मुगलों के परचम पतन और अंग्रेजों के आगमन का गवाह बना यहां की मिट्टी ने
17:55 अंग्रेजों की गुलामी देखी है तो इसी मिट्टी से क्रांति की चिंगारी भी उठी है उत्तर प्रदेश की धरती हमेशा से सोना उगलने वाली रही तभी तो अंग्रेजों ने बंगाल हाथ में आने के बाद भी उत्तर प्रदेश पर कब्जा करने के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया स्वतंत्रता के बाद से राज्य ने भारत के भीतर एक प्रमुख भूमिका बनाए रखी है इस राज्य ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए हैं जिनमें जवाहरलाल नेहरू से लेकर लाल बहादुर शास्त्री आयन लेडी इंदिरा गांधी चौधरी चरण सिंह राजीव गांधी वीपी सिंह च चंद्रशेखर और अटल बिहारी वाजपेई तक शामिल हैं उत्तर प्रदेश के इतिहास से अगर कुछ अनकहे किस्से आपको भी मालूम हैं तो कमेंट सेक्शन में हमारे साथ जरूर शेयर करें दोस्तों अंत में यूपीएससी मेंस के रेलीवेंस को देखते हुए
18:42 हम आपके लिए क्वेश्चन छोड़े जा रहे हैं जिसे आप इस वीडियो के कमेंट सेक्शन में आंसर कर सकते हैं स्टडी आईक्यू आईएस अब तैयारी हुई अफोर्डेबल