0:00 एक छोटे से गांव में तीन दोस्त रहते थे रामू लखन और बसंत तीनों की दोस्ती गांव में मिसाल थी वे हमेशा एक दूसरे के साथ रहते मेहनत मजदूरी करते और अपनी गरीबी में भी खुश रहते हर सुबह वे अलग-अलग दिशाओं में काम की तलाश में निकल जाते और शाम को एक साथ बैठकर दिन भर की कमाई बांट लेते गांव वाले उनकी दोस्ती की मिसाल देते और कहते जैसे रामू लखन और बसंत की दोस्ती है वैसी ही दोस्ती हर किसी को नसीब हो एक दिन गांव में एक अजनबी व्यक्ति आया धनी दिखने वाला एक व्यापारी था उसने गांव वालों से पूछा क्या आप लोगों ने रामू लखन और बसंत के बारे में सुना है मैं उनसे मिलना चाहता हूं गांव वालों ने उसे तीनों दोस्तों का पता बताया व्यापारी उनके पास पहुंचा और बोला मेरा नाम राजा सिंह है मैं हीरो का
0:46 व्यापारी हूं मैं तुम तीनों की दोस्ती के बारे में सुनकर यहां आया हूं राजा सिंह की बातें सुनकर बसंत ने उत्सुकता से पूछा आप हमारे बारे में कैसे जानते हैं हमने आपको पहले कभी नहीं देखा राजा सिंह मुस्कुराए और बोले तुमने सही कहा मैं इस गांव में पहली बार आया हूं लेकिन जैसे ही मैंने तुम तीनों की दोस्ती के बारे में सुना मैं तुमसे मिलने आ गया तुम लोग मेहनती और ईमानदार हो अगर तुम्हारे पास दौलत हो तो तुम अपनी मेहनत से बहुत कुछ हासिल कर सकते हो इसलिए मैंने सोचा कि क्यों ना तुम्हें एक राज बताऊं जो मेरे सीने में दफन है इस राज की बदौलत मैंने कभी धन की कमी नहीं देखी राजा सिंह की बातें सुनकर तीनों दोस्तों का दिल तेजी से धड़कने लगा उनके मन में तरह-तरह के विचार आने लगे रामू ने पूछा यह कौन सा राज है क्या आप हमारी मदद
1:32 करना चाहते हैं राजा सिंह ने गंभीर होकर कहा यह बात 10 साल पहले की है मैं भी तुम्हारी तरह गरीब था मेरे पिता वैद्य थे लेकिन उनकी कमाई से मुश्किल से गुजारा होता था एक दिन मेरी मां को एक भयंकर बीमारी हो गई पिताजी ने कहा कि उनका इलाज सिर्फ एक दुर्लभ जड़ीबूटी से हो सकता है जो पहाड़ों और जंगलों में मिलती है मैंने वह बूटी ढूंढने का फैसला किया लेकिन वह नहीं मिली दो महीने बाद जब मैं घर लौटा तो पता च ला कि मेरे माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी है राजा सिंह की आंखों में आंसू आ गए उन्होंने आगे कहा उस दिन मैंने ठान लिया कि मैं उस बूटी को जरूर ढूंढू मैं फिर से जंगलों और पहाड़ों में निकल पड़ा जब मैं एक घाटी में पहुंचा तो मेरी आंखों के सामने एक अद्भुत नजारा था वहां जहां तक नजर जाती हीरे और मोती बिखरे पड़े
2:18 थे मैंने उस खजाने का एक बड़ा हिस्सा निकालकर सुरक्षित जगह पर छिपा दिया आज भी जब मुझे धन की जरूरत होती है तो मैं वहां जाकर हीरे निकाल लाता हूं अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हें उस जगह का पता बता सकता हूं लखन ने उत्सुकता से पूछा हुजूर क्या आप सच कह रहे हैं यह सब किसी सपने जैसा लगता है राजा सिह मुस्कुराए और बोले यकीन तो तुम्हें तब होगा जब तुम खुद वहां जाकर देखोगे लेकिन एक शर्त है तुम इस राज को किसी और को नहीं बताओगे अगर तुमने ऐसा किया तो इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी तीनों दोस्तों ने एक साथ कहा हमें आपकी शर्त मंजूर है राजा सिंह ने उन्हें उस जगह का पता बताया और कुछ रुपए देते हुए कहा यह पैसे सफर में काम आएंगे मुझे विश्वास है कि तुम मेरी बातों को गंभीरता से लोगे
3:05 इतना कहकर राजा सिंह चले गए सेठ राजा सिंह के जाने के बाद तीनों दोस्त आपस में बातचीत करने लगे रामू ने संदेह जताते हुए कहा क्या सच में ऐसी कोई जगह हो सकती है कहीं सेठ ने हमें बेवकूफ तो नहीं बनाया बसंत ने जवाब दिया मुझे तो सेठ की बातों में कोई छल कपट नहीं लगा हमें एक बार वहां जरूर जाना चाहिए तीनों दोस्त उस जगह पर जाने के लिए तैयार हो हो गए उन्होंने अपना कुछ सामान इकट्ठा किया और सफर पर निकल पड़े यात्रा लंबी थी इसलिए वे जहां भी उपयुक्त स्थान मिलता वहां आराम कर लेते चलते-चलते चार दिन बीत चुके थे एक दिन जब वे रास्ते से गुजर रहे थे लखन ने कराहते हुए कहा मुझे बहुत प्यास लगी है मेरा गला सूख रहा है जल्दी से पानी लाकर दो वरना
3:52 मेरी जान निकल जाएगी यह कहते हुए वह तड़पने लगा लखन की हालत देखकर रामू चिंतित हो गया और बोला बसंत जल्दी से कहीं से पानी खोज कर लाओ यह सुनकर बसंत एक बर्तन लेकर पानी की तलाश में निकल गया लेकिन जैसे ही बसंत वहां से गया लखन तुरंत फुर्ती से खड़ा हो गया यह देखकर रामू हैरान रह गया और बोला यह क्या तुम तो भले चंगे हो फिर यह प्यास का नाटक क्यों किया लखन मुस्कुराते हुए बोला अरे मूर्ख तुम इतना भी नहीं समझते मैंने यह नाटक सिर्फ बसंत को यहां से हटाने के लिए किया था ताकि मैं तुमसे अकेले में एक जरूरी बात कर सकूं रामू ने आश्चर्य से पूछा ऐसी कौन सी बात है जो बसंत के सामने नहीं की जा सकती लखन ने गुप्त स्वर में कहा बात यह है कि अगर
4:39 तुम चाहो तो उस खजाने के मालिक सिर्फ हम दोनों बन सकते हैं रामू चौक कर बोला क्या मतलब बसंत का उसमें कोई हक नहीं होगा लखन ने दृढ़ता से कहा बिल्कुल नहीं मैं नहीं चाहता कि वह उस जगह तक पहुंचे अगर तुम मेरा साथ दो तो यह काम बहुत आसानी से हो सकता है सोचने में समय बर्बाद मत करो क्योंकि बसंत कभी भी वापस आ सकता है हम रास्ते में किसी भी मौके पर उसे खत्म कर देंगे और फिर खजाने के अकेले मालिक सिर्फ हम दोनों होंगे रामू असमंजस में बोला लेकिन अगर कोई गड़बड़ हो गई तो इसकी जिम्मेदारी सिर्फ तुम्हारी होगी लखन तुरंत सहमत होते हुए बोला मुझे मंजूर है चुप रहो लगता है बसंत आ रहा है तभी बसंत वहां पहुंच गया और बोला ये लो दोस्त जल्दी से लखन को पानी पिला दो लखन ने पानी पीते ही
5:26 नाटक करते हुए ऐसा दिखाया जैसे उसकी जान में जान आ गई हो बेचारा बसंत उन दोनों की साजिश से पूरी तरह अनजान था बारी-बारी से तीनों ने पानी पिया और फिर आगे बढ़ने लगे लेकिन लखन को चैन नहीं आ रहा था वह रास्ते भर बसंत से छुटकारा पाने की योजनाएं बनाता रहा इसी उधेड़बुन में एक और दिन बीत गया चलते-चलते वे लोग एक झरने के पास पहुंचे झरना देखकर लखन का मन खुशी से उछल पड़ा वह सोचने लगा अगर बसंत को इस झरने के ऊपर से धक्का दे दिया जाए तो उसकी मौत निश्चित है हां यही सही मौका है उसने अपने दोनों दोस्तों से कहा तुम दोनों यहीं रुको मैं जरा इस पहाड़ी पर चढ़कर आगे का रास्ता देखता हूं यह कहकर लखन पहाड़ी पर चढ़ गया वहां पहुंचकर वह खुश होने का नाटक करने लगा और
6:13 जोर से बोला अरे दोस्तों यहां का नजारा तो बहुत ही अद्भुत है कुदरत का ऐसा नजारा मैंने अपनी पूरी जिंदगी में नहीं देखा तुम लोग भी जल्दी से ऊपर आ जाओ देखो कितनी खूबसूरत जगह है उसकी बातें सुनकर रामू और बसंत भी पहाड़ी पर चढ़ाए वे भी वहां से कुदरत के इस हसीन नजारे को देखने लगे जब तीनों दोस्त इस नजारे को देख रहे थे तभी लखन चुपचाप बसंत के पीछे गया और अचानक उसे जोर से झरने में धक्का दे दिया झरने में गिरते ही कुछ ही पलों में बसंत आंखों से ओझल हो गया अपनी योजना पूरी होते ही लखन जोर-जोर से हंसने लगा रामू जो चुपचाप खड़ा यह सब देख रहा था कुछ पल के लिए डर और सदमे में था लेकिन फिर उसने भी लखन के साथ
7:00 जोर-जोर से हंसना शुरू कर दिया इस तरह उन्होंने बसंत को अपने रास्ते से हटा दिया अब वे दोनों खुश थे कि मिलने वाले खजाने में सिर्फ वे ही हिस्सेदार होंगे दूसरी तरफ बसंत झरने से बहता हुआ एक नदी में गिरा वह पूरी तरह बेहोश हो चुका था उस जगह से थोड़ी ही दूर पर एक मछुआरा मछलियां पकड़ने के लिए जाल बिछाए बैठा था वह बार-बार जाल डालता लेकिन उसकी किस्मत में आज मछली पकड़ना नहीं लिखा था इस बार जब उसने ने जाल डाला तो उसे जाल कुछ भारी लगा वह सोचने लगा लगता है कोई बड़ी और भारी मछली फंस गई है लेकिन जब उसने जाल खींचा तो यह देखकर उसकी आंखें फटी रह गई मछली की जगह एक बेहोश इंसान फंसा हुआ था मछुआरा
7:46 हक्का बक्का रह गया और मन ही मन सोचने लगा अरे यह क्या मछली की जगह एक इंसान उसने तुरंत बसंत को बाहर निकाला और उसे होश में लाने की कोशिश करने लगा फिर बसंत की जान बचाने के लिए वह उसे अपनी झोपड़ी में ले गया वहां से वह गांव के वैद्य को बुलाकर बसंत का इलाज करवाने लगा इधर रामू और लखन तेजी से अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे थे लखन उत्साहित होकर बोला दोस्त थोड़ा जल्दी करो हम उस जगह पर पहुंचने ही वाले हैं सेठ ने जिस जंगल का जिक्र किया था यही वही जंगल है इस जंगल के खत्म होते ही वह घाटी हमारे सामने होगी जहां खजाना रखा हुआ है कुछ देर और चलने के बाद लखन ने कहा मुझे लगता है हमें यहां थोड़ी देर रुककर आराम कर लेना चाहिए ताकि हम थकावट दूर कर सके और खजाने
8:34 को समेटने के लिए पूरी तरह तैयार रहे इसके बाद लखन ने पेड़ से कुछ फल तोड़े और वे दोनों फल खाने लगे थकान के कारण रामू जल्दी ही गहरी नींद में सो गया जबकि लखन किसी गहरी सोच में डूबा हुआ था अचानक उसके दिमाग में एक और खतरनाक साजिश जन्म लेने लगी उसने सोचा क्यों ना रामू को भी अपने रास्ते से हटा दूं अगर मैं उसे भी मार दूं तो इस पूरे खजाने का एक ता मालिक सिर्फ मैं ही बन जाऊंगा लखन के दिमाग में लालच पूरी तरह घर कर चुका था उसने सोचा अगर मैं रामू को इस पेड़ से बांध दूं तो रात के समय जंगली जानवर उसे खा जाएंगे और मुझे कोई रोकने वाला नहीं रहेगा योजना बनाकर लखन ने गहरी नींद में सोए रामू को चुपचाप पेड़ से कस कर बांध दिया लेकिन जैसे ही वह
9:20 वहां से जाने लगा रामू की नींद खुल गई रामू घबरा कर बोला अरे लखन तुम मुझे यहां बांध कर कहां जा रहे हो रुको मुझे यहां अकेला मत छोड़ो लेकिन लखन पर उसकी बातों का कोई असर नहीं हुआ वह बिना कोई जवाब दिए वहां से चला गया रामू निराश होकर सोचने लगा यह धोखेबाज लखन मुझे फसाकर चला गया अब ना जाने मेरा क्या होगा कुछ ही देर बाद उसे दूर से एक आदमी जाता हुआ दिखाई दिया रामू ने जोर से आवाज लगाई भाई साहब मेरी सहायता करो मुझे इस पेड़ से खोल दो वह आदमी ठिठक कर रुका और बोला तुम कौन हो और इस घने जंगल में इस में क्या कर रहे हो रामू जल्दी से बोला वह सब मैं बाद में बताऊंगा पहले मेरी रस्सियां खोल दो वह
10:06 आदमी थोड़ा हिच किचा आया उस आदमी ने रामू की रस्सियां खोल दी लेकिन जैसे ही रामू आजाद हुआ वह उस आदमी को फटकार हुए बोला अरे मेरे ज्यादा नजदीक मत आओ मुझसे दूर रहो इसके बाद रामू तेजी से आगे बढ़ गया वह मन ही मन सोच रहा था मुझे किसी भी हाल में लखन से पहले उस खजाने तक पहुंचना होगा उधर लखन भी तेजी से खजाने तक पहुंचने के लिए बढ़ रहा था तभी अचानक उसे किसी के कराने की आवाज सुनाई दी उसने देखा य एक बहुत ही बूढ़ा आदमी एक पेड़ के नीचे बैठा था जैसे ही बूढ़े आदमी ने लखन को देखा वह दर्द भरी आवाज में बोला बेटा मैं पास के ही एक गांव में रहता हूं मैं यहां जंगल में लकड़िया लेने आया था लेकिन अचानक एक जंगली भैंसे
10:53 ने मुझे टक्कर मार दी अब मैं हिल भी नहीं पा रहा हूं क्या तुम मुझे मेरे घर तक पहुंचा दो तुम्हारा मुझ पर बड़ा एहसान होगा लखन ने उसे घूरते हुए कहा नहीं मेरे पास इन फालतू कामों के लिए बिल्कुल भी समय नहीं है बूढ़े आदमी ने फिर गिड़गिड़ा हुए कहा बेटा मुझ पर रहम करो इस जंगल में मैं अकेला जिंदा नहीं बचू लेकिन लखन बेरहमी से बोला मेरी बला से तुम जियो या मरो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता यह कहकर लखन वहां से आगे बढ़ गया जैसे ही वह जंगल पार कर घाटी में पहुंचा उसकी आंखें फटी की फटी रह गई चारों तरफ ढेर सारे हीरे मोती और सोने चांदी के सिक्के बिखरे पड़े थे खजाने को देखते ही
11:40 लखन खुशी से पागल हो उठा और जोर से चिल्लाया वाह अब यह खजाना सिर्फ और सिर्फ मेरा है इधर रामू भी तेजी से उसी घाटी की ओर बढ़ रहा था रास्ते में उसे वही बूढ़ा आदमी मिला जो दर्द से करा रहा था बूढ़े ने कहा बेटा मेरी मदद करो मेरा घर पास ही है मुझे वहां तक पहुंचा दो वरना मैं इस जंगल में मर जाऊंगा लेकिन रामू ने रूखे पन से कहा अभी तो मुझे सांस लेने की भी फुर्सत नहीं है और तुम कहते हो कि मैं तुम्हें घर छोड़ दूं चल बुड्ढे अपना रास्ता देख और मेरा रास्ता छोड़ यह कहकर रामू भी तेजी से घाटी की ओर बढ़ गया अब वह भी उस जगह पहुंच चुका था जहां खजाना रखा हुआ था उसने देखा
12:25 कि लखन बड़े-बड़े थैलों में हीरे और मोती भर रहा था यह देखकर रामू के मन में विचार आया उस सेठ ने गलत नहीं कहा था लेकिन पहले मुझे लखन को सबक सिखाना होगा वह जोर से चिल्लाया ठहरो लखन खजाने को तुम हाथ भी नहीं लगा सकते लखन यह देखकर चौक गया और बोला तुम अभी तक जिंदा हो रामू ने क्रोधित होकर जवाब दिया तूने तो मुझे मारने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी थी लेकिन अब मैं तुझे जिंदा नहीं छोडूंगा इसके बाद दोनों दोस्त एक दूसरे की जान के दुश्मन बन गए दोनों के बीच भयंकर लड़ाई शुरू हो गई तभी अचानक वहां कुछ नकाब पोश लोग आ गए इससे पहले की लखन और रामू कुछ समझ पाते उन नकाब पोश लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और
13:11 रस्सियों से जकड़ दिया इसके बाद वे दोनों को अपने साथ ले गए दूसरी तरफ बसंत मछुआरे के घर में बेहोश पड़ा था वैद्य के उपचार के कारण दो दिन बाद उसे होश आ गया बसंत ने मछुआरे का धन्यवाद करते हुए कहा दोस्त तुमने मेरी जान बचाई इसके लिए मैं सारी जिंदगी तुम्हारा एहसान मंद रहूंगा लेकिन अब मुझे अपने आगे के सफर पर निकलना होगा मछुआरे से विदा लेकर बसंत भी घाटी की ओर चल दिया जब बसंत जंगल में पहुंचा तो अचानक उसे एक दर्द भरी आवाज सुनाई दी वह रुककर सोचने लगा यह आवाज किसकी हो सकती है लगता है कोई मुसीबत में है उसकी नजर एक आदमी पर पड़ी जो कुष्ठ रोग से पीड़ित था बसंत ने
13:57 उससे पूछा अरे भा तुम्हें क्या तकलीफ है वह आदमी दर्द भरी आवाज में बोला भाई मुझसे दूर रहो मुझे छूना मत वरना यह भयानक रोग तुम्हें भी लग सकता है लेकिन बसंत ने सहानुभूति दिखाते हुए कहा भाई इंसानियत के नाते मैं ऐसा नहीं कर सकता ठहरो मैं तुम्हारे घावों को साफ करके पट्टी बांध देता हूं ताकि तुम्हें थोड़ी राहत मिले कुष्ठ रोगी भावुक होकर बोला आज तक मुझसे किसी ने इतनी अच्छी तरह से बात नहीं की तुम बहुत दयालु हो बेटा भगवान तुम्हारा कर बसंत ने उसके घावों पर पट्टी बांधी और फिर कहा बाबा मुझे कुछ जरूरी काम से आगे जाना है लेकिन आपकी यह हालत देखकर मेरा मन नहीं मान रहा अब आप ही बताइए मैं क्या
14:43 करूं बूढ़े ने मुस्कुराते हुए कहा बेटा मैं बिल्कुल ठीक हूं तुम जिस भी काम के लिए जा रहे हो पहले वह काम पूरा करो बसंत ने बूढ़े का आशीर्वाद लिया और अपने सफर पर आगे बढ़ गया अभी बसंत कुछ ही दूर पहुंचा था क् उसने देखा कि एक पेड़ के नीचे एक और बूढ़ा आदमी बैठा हुआ था बसंत ने पूछा बाबा आप यहां अकेले क्या कर रहे हैं बूढ़े ने दर्द भरी आवाज में कहा बेटा मैं पास के ही गांव में रहता हूं लेकिन एक जंगली भैंसे ने मुझे टक्कर मार दी अब मैं चल नहीं पा रहा हूं क्या तुम मुझे मेरे गांव तक पहुंचा सकते हो बसंत ने सहानुभूति दिखाते हुए कहा हां बाबा बिल्कुल मैं आपकी सहायता करूंगा बताइए आपका गांव किस दिशा में है
15:29 यह कहकर बसंत ने बूढ़े का हाथ पकड़ा और उसके साथ चल दिया वे दोनों जंगल से बाहर निकले और उस घाटी में पहुंच गए जहां ढेर सारा खजाना बिखरा पड़ा था बिखरे हुए हीरे मोती देखकर बसंत हैरान रह गया और बोला बाबा क्या आप इस खजाने के बारे में पहले से जानते थे बूढ़े ने हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया हां नौजवान मैं इस खजाने के बारे में पहले से ही जानता था क्योंकि यह खजाना मैंने ही यहां छुपा कर रखा था बसंत चौक गया और बोला क्या बाबा आपने यह खजाना यहां छुपाया था मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूं आखिर आप क्या कहना चाहते हैं तब बूढ़े बाबा ने गंभीर स्वर में कहा बेटा मैं असल में कोई साधारण बूढ़ा नहीं हूं
16:16 मैं पालनपुर राज्य का राजा वीर सिंह हूं यह कहते हुए बूढ़े ने अपनी नकली दाढ़ी और वृद्ध वेश को त्याग दिया अब बसंत के सामने कोई और नहीं बल्कि स्वयं राजा वीर सिंह खड़ा था था राजा वीर सिंह को अपने असली रूप में देखकर बसंत चौक गया और बोला आप राजा वीर सिंह लेकिन यह सब क्या माजरा है राजा ने मुस्कुराते हुए कहा बसंत यह सब मेरा ही रचा हुआ नाटक था दरअसल मेरा कोई पुत्र नहीं है अतः मैं एक उत्तराधिकारी की तलाश में निकला हूं जो मेरे बाद इस राज्य की देखभाल कर सके मैं उसे तलाश कर रहा था जो पूरी ईमानदारी और मेहनत से राज्य का ध्यान रख सके लेकिन आज तक मुझ मुझ ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला था मैं हमेशा से ऐसे
17:02 व्यक्ति की खोज में था जिसमें ना केवल ईमानदारी और मेहनत हो बल्कि दया की भावना भी हो राजा ने आगे बताया एक दिन मेरा काफिला तुम्हारे गांव के पास से गुजरा जहां मैंने सुना कि वहां तीन दोस्त रहते हैं जो बहुत ही ईमानदार और सच्चे माने जाते हैं मुझे लगा कि शायद मेरी खोज वहीं पूरी हो सकती है इसलिए मैंने एक व्यापारी का भेष धारण किया और तुम तीनों से मिलने तुम्हारे गांव आ गया व्यापारी के रूप में मैंने ही तुम तीनों को इस जगह के बारे में बताया और तुम्हें खजाने की जानकारी दी यह खजाना भी मैंने ही यहां रखवाया था और इसकी सुरक्षा के लिए मैंने अपने सैनिकों को जंगल में छिपाकर तैनात कर दिया था मेरा आदेश था कि तुम तीनों के अलावा कोई भी इस खजाने को हाथ ना लगा सके राजा ने आगे कहा लेकिन जब तुम्हारे दोनों दोस्त यहां
17:48 पहुंचे तो लालच ने उनकी आंखों पर पर्दा डाल दिया वे दोनों एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए और एक दूसरे को मारने पर उतारू हो गए इससे पहले कि वे एक दूसरे की जान ले लेते मेरे सैनिकों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया वे दोनों अब मेरी कैद में है राजा ने आगे बताया मैं और मेरे कुछ खास आदमी अलग-अलग रूपों में तुम्हारे सामने आते रहे कभी एक व्यापारी के रूप में कभी एक बूढ़े बाबा के रूप में तो कभी एक लाचार कुष्ठ रोगी के रूप में मैं यह देखना चाहता था कि तुम तीनों में से कौन सबसे दयालु और ईमानदार है आखिरकार केवल तुम ही मेरी इस परीक्षा में खरे उतरे तुमने ना किसी को धोखा दिया और ना ही लालच में पड़े बल्कि जहां भी जरूरत पड़ी तुमने दूसरों की
18:34 सहायता की इसलिए बसंत आज से मैं तुम्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करता हूं अब से मेरे राज्य की पूरी जिम्मेदारी तुम्हारी होगी यह सुनकर बसंत हैरान भी था और खुश भी उसने राजा से कहा महाराज मुझे आपका यह प्रस्ताव स्वीकार है लेकिन मेरे वे दोनों दोस्त कहां हैं मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप उन्हें माफ कर दें और रिहा कर दें राजा ने बसंत की विनम्रता और दोस्ती की भावना को देखकर कहा ठीक है बसंत जैसा तुम चाहते हो वैसा ही होगा इसके बाद राजा ने रामू और लखन को रिहा कर दिया वे दोनों शर्मिंदा थे कि उन्होंने बसंत जैसे सच्चे दोस्त को धोखा दिया था दूसरी तरफ बसंत राजा के साथ महल में चला गया और अब वह
19:21 राजा का उत्तराधिकारी बन चुका था उसकी ईमानदारी मेहनत और दयालुता ने उसे एक नई पहचान दिलाई अब वह आराम आरामदायक और सम्मानजनक जीवन जी रहा था जबकि उसके दोनों दोस्त अपने के पर पछता रहे थे कहानी से सीख जो इंसान लालच से बचकर सच्चाई ईमानदारी और दयालुता के मार्ग पर चलता है वह अंततः जीवन में सफलता और सम्मान पाता है अगर आपको यह कहानी अच्छी लगी तो वीडियो को लाइक कर दीजिए कमेंट करना आपका फर्ज है चैनल को सब्सक्राइब करके हमें सपोर्ट कर दीजिए फिर मिलते हैं एक नई कहानी के साथ [संगीत]