0:00 नमस्कार दोस्तों हमारे चैनल बटर लाइफ में आपका स्वागत है आज हम आपके लिए लेकर आए हैं पुस्तक डी पावर ऑफ योर सबकॉन्शियस मन यानी आपके अवचेतन मां की शक्ति पुस्तक की पुरी समरी हिंदी में लिखी गई किताब डी पावर ऑफ योर सब कॉन्शियस मन ना केवल पुरी दुनिया के बकरी दर्ज में फेमस है बल्कि इसने हमारे मन के सब कॉन्शियस पावर्स को सामने लाने की कोशिश की है इस बुक में सब कॉन्शियस मन के इस्तेमाल से हुए चमत्कारों को बहुत सारे रियल लाइफ बेस्ड एग्जांपल्स के थ्रू समझाया गया है जो रीडर को इस पर यकीन करने
0:46 के लिए मजबूर करते हैं दोस्तों डी पावर ऑफ योर सब कॉन्शियस मन के लेखक जोसेफ मर्फी का जन्म आयरलैंड में हुआ था और बाद के दोनों में वे अमेरिका में बस गए थे साइकोलॉजी में एचडी करने के बाद उन्होंने दुनिया के अलग-अलग धर्म पर रिसर्च किया और इसी सिलसिले में फिर भारत भी आए थे निकॉन वर्ल्ड फेमस बुक्स लिखने के बाद जब लोगों ने उनसे उनकी बायोग्राफी लिखने की मांग की तो माफी ने कहा की उनका जीवन उनकी पुस्तकों में पाया जा सकता है इस तरह अपनी पुरी जीवन में उन्होंने 30 से ज्यादा पुस्तक नहीं लिखी दिन में डी मिरेकल्स ऑफ मन डायनामिक योर इंफिनिटी पावर तू बी रिच
1:32 डी अमेजिंग लॉस ऑफ कॉस्मिक मन इत्यादि है जिम सबसे फेमस है डी पावर ऑफ योर सब कॉन्शियस मन यानी आपके अवचेतन मां की शक्ति दोस्तों इस अमेजिंग बुक को जन से पहले आई जानते हैं की बुक हमारी लाइफ में भी चमत्कार कैसे कर शक्ति है इस पुस्तक की शुरुआत इसी सवाल से होती है दोस्तों लेखक करते हैं की चमत्कार जैसी चीज पर विश्वास नहीं करते होंगे पर यह सच में हो सकता है बशर्ते की आप अपने सब कॉन्शियस मन का इस्तेमाल पर भरोसा करने की बजे यह बुक हमें हमारी
2:19 किस्मत अपने सब कॉन्शियस मन के इस्तेमाल से खुद लिखने को प्रेरित करती है सब कॉन्शियस मन को हिंदी में कहते हैं अवचेतन मां इसका अर्थ है की हमारे दिमाग का वो हिस्सा जो चेतन में नहीं है मतलब वह कॉन्शियसली कम नहीं करता इसे आसन भाषा में समझिए देखिए हमारा दिमाग दो हसन में बंता है एक कॉन्शियस और दूसरा सब कॉन्शियस हमारा कॉन्शियस मन हमारे लॉजिकल केमोन को कंट्रोल करता है जैसे फैसला करना प्लानिंग करना किसी भी प्रकार की नई स्किल भाषा सीखना वगैरा वही सब कॉन्शियस मन का मुख्य
3:05 कम हमारे फिजिकल फंक्शंस को कंट्रोल करना होता है जैसे हमारा सांस लेना खाना पचना चीज याद रखना हमारी फीलींगस और इमोशंस को कंट्रोल करना आदि हमारी हार्टबीट और ब्लू सरकुलेशन भी सब कॉन्शियस मन ही प्रोसेस करते हैं इस तरह हमारी बॉडी का 95% कम सब कॉन्शियस मन के द्वारा ही किया जाता है चलिए दोस्तों अब हम अपनी बुक पर वापस आते हैं तो हम इस बुक को पढ़ने के बाद होने वाले मिरेकल्स को समझ रहे थे दोस्तों इसे सिलसिले में बुक की शुरुआत में राइटर हमसे कुछ और सवाल पूछते हैं जिनके जवाब शायद आप नहीं जानते होंगे जैसे ऐसा क्यों है की
3:53 कोई व्यक्ति दुखी है तो कोई सुखी एक अमीर है तो दूसरा गरीब एक व्यक्ति तनावग्रस्त है तो दूसरा आत्मविश्वासी और खुश एक व्यक्ति सफल है तो दूसरा असफल एक व्यक्ति जहां अपने कम में जीनियस है तो दूसरा जिंदगी भर मेहनत करके भी कुछ हासिल कर अपने में नाकाम एक व्यक्ति जो एक भयंकर जानलेवा बीमारी से ठीक हो जाता है तो दूसरा नहीं इतने सारे धार में दयालु और अच्छे लोग आखिर क्यों इतनी शारीरिक और मानसिक परेशानियां को झेलते हैं जहां एक व्यक्ति अपने वैवाहिक जीवन से खुश है तो वहीं दूसरा तनावग्रस्त और परेशान ऐसा क्यों है क्या आपके पास इन सवालों के कोई
4:39 जवाब है जी हां बिल्कुल है इनके जवाब छिपे हैं आपके सब कौन सी स्माइल में और आपको जरूर है उन्हें ढूंढने की दोस्तों इसी तरह इस बुक मर्फी ने उन जवाबों को ढूंढने का तरीका बताया है और उनके शब्दों में वो कहते हैं की मुझे पूरा विश्वास है की इस बुक की सीक्रेट जन के बाद आप उसे चमत्कारी शक्ति को जान पाएंगे जो आदमी ही मौजूद है आपके सब कॉन्शियस मन के पास और यही शक्ति आपको दुख निराशा और परेशानियां की दाल से बाहर निकलेगी ये शक्ति आपको अपनी मंजिल तक
5:29 पहचाने में गाइड करेगी आपकी परेशानियां सुलझाएगी आपके सब कॉन्शियस मन की यह चमत्कारी शक्ति आपको फिर से स्वस्थ और शक्तिशाली बनाएगी और अगर एक बार आपने इस व्यक्ति का इस्तेमाल करना सिख लिया तो आप लीडर आत्मविश्वासी आजाद और सफल हो जाएंगे दोस्तों पुस्तक में आगे लेखक कहते हैं की इस चमत्कारी शक्ति को कैसे पाया जा सकता है वह करती हैं की इसके लिए जरूरी है की आप इस पर विश्वास करें लेकिन बिना किसी प्रूफ के तो शायद आपके लिए विश्वास करना कठिन होगा इसीलिए लेखक कहते हैं की उन्होंने सार्कोमा नाम की ट्यूमर का इलाज
6:14 इसी अवचेतन मां की शक्ति से किया था जिसने हमारे शरीर की रचना की है और जो हमारे शरीर के सभी जरूरी केमोन को कंट्रोल करती है उन्होंने जी टेक्निक से उसे भयंकर ट्यूमर का इलाज किया उसकी चर्चा पुस्तक में आगे विस्तार से की गई है दोस्तों आगे लेखक प्रेयर्स यानी प्रार्थना के बड़े में बात करते हैं वह कहते हैं की आप जानते हैं हमारे सब कॉन्शियस मन की पावर्स को जागने में प्रार्थना कितनी अद्भुत टेक्निक के रूप में कम करती है साथ ही हमें यह भी बताया किस तरह से की जाति करती है दोस्तों
7:01 प्रार्थना हम सभी करते हैं पर अधिकतर समय जब हम किसी मुश्किल या मुसीबत या बीमारी की स्थिति में होते हैं तो अचानक हमारी मुंह से प्रार्थनाएं निकलते है बेशक हम मुसीबत में प्रार्थना करते हैं लेकिन प्रार्थना को हमारे जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बनाने के लिए हम मुसीबत का इंतजार ही क्यों करें दोस्तों प्रार्थना के विषय में लेखक जोसेफ मर्फी ने गहन रिसर्च किया और इसके साइंटिफिक प्रभावों को हमारे सामने लाने की कोशिश की बच्चों की छोटी-छोटी प्रार्थनाएं खाने से पहले ईश्वर का स्मरण और ईश्वर की आराधना में एक अद्भुत शक्ति होती है पुस्तक में इस पर भी
7:47 आगे विस्तार से बात की जाएगी लेखक बताते हैं की उनसे हजारों लोग यह सवाल पूछते हैं की बार-बार प्रार्थना करने के बावजूद हमें वह चीज क्यों नहीं मिलती जो हमने प्रार्थना में मांगी है इस पुस्तक में दोस्तों लेखक कहते हैं की हमारे अवचेतन मां की चमत्कारी शक्तियां उसे समय भी मौजूद थी जब हमारा जन्म भी नहीं हुआ था ये दुनिया भी नहीं थी जीवन की शुरुआत इसी शक्ति से होती है लेखक हमसे यह आग्रह करते हैं की हमें तो बस मेंटली और इमोशनली उसे अच्छी चीज के साथ जुड़ना है जिसे हम अपना हकीकत बनाना चाहते
8:56 के बड़े में समझते जैन दोस्तों है इसे सुनने के बाद आपको इस पुस्तक को खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी क्योंकि केवल इस एक वीडियो में आपको इस बुक की अमेजिंग समरी बताने का प्रयास हमने बहुत मेहनत से किया है इसीलिए हम आशा करते हैं की आपको इस पुस्तक की कंप्लीट समरी जानकर अच्छा लगेगा और आप इस पुस्तक के राज जान कर अपना जीवन बादल पानी में सक्षम होंगे आई शुरुआत करते हैं दोस्तों पहले अध्याय का नाम है आपकी भीतर बहुत बड़ा खजाना है दोस्तों यहां लेखक किस ख़ज़ाने की बात कर रहे हैं वह
9:41 कहते हैं की इस ख़ज़ाने को हासिल करने के लिए हमें केवल अपने मां की आंखें खोल कर उसे देखना भर है हमारी भीतर शक्तियों का एक ऐसा भंडार है जिसमें से सुख समृद्धि और आनंद का जीवन जिया जा सकता है और हमारे लिए हर वह जरूरी चीज निकाल जा शक्ति है जिसकी हमें आवश्यकता है कई लोग अपनी इस शक्ति को इसीलिए नहीं जान पाते क्योंकि उन्हें अपने अंदर मौजूद अपनी अनलिमिटेड नॉलेज और अनंत प्यार के भंडार का पता ही नहीं होता अब लेखक एक चुंबक का एग्जांपल देते हैं और कहते हैं की लोहे का एक चुंबकीय टुकड़ा अपनी भर से 12 गुना ज्यादा
10:28 वजन उठा सकता है वही अगर हम इसकी चुंबकीय शक्ति को हटा दें तो यह एक पंख तक नहीं हिल सकता जी तरह यह लोहा दो प्रकार का होता है लेखक कहते हैं की लोग भी दो प्रकार के होते हैं एक वह जिम ठीक चुंबकीय लोहे की तरह गन पे जाते हैं और दूसरे वह जो बिल्कुल साधारण लोहे की तरह है और यह आस्था से भरपूर होते हैं यह जानते हैं की इनका जन्म केवल जितने और सफल होने के लिए हुआ नहीं
11:14 रहते की अगर मैं फेल हो गया तो क्या करूंगा अगर मेरा पैसा डब गया तो नहीं बाबा मैं नहीं करूंगा लोग मेरी हंसी उड़ाएंगे ऐसे लोग बहुत बड़ी तादाद में होते हैं और अपनी जिंदगी में आगे तक नहीं जा पाते उनका जो डर होता है ना वह उन्हें इस जगह पर रॉक रखना है जहां वह अभी है लेखक कहते हैं की आप भी चुंबकीय व्यक्ति बन सकते की आप इतिहास के सबसे बड़े रहस्य को जान लेने और उसे पर अमल करने लगी
11:59 नजर में ये रहस्य न्यूक्लियर एनर्जी ग्रहण पर पहुंचे अंतरिक्ष यह और ब्लैक होल वगैरा हो सकते हैं लेकिन सही जवाब इनमें से कोई नहीं है दोस्तों यह रहस्य है आपके सब कॉन्शियस मन में पी जान वाली अमेजिंग चमत्कारी शक्ति यही वो आखिरी जगह है जी पर बहुत कम लोग रिसर्च करते हैं और इसी करण यह रहस्य बहुत कम लोगों को ही पता है आपके सब कॉन्शियस मन में छिपी इन अमेजिंग पावर्स का इस्तेमाल कर आप अपने जीवन में बहुत साड़ी सेहत दौलत और आनंद का सकते
12:55 हो का इस्तेमाल कैसे करें इसीलिए इस बैंक में आपको जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों में इसे इस्तेमाल आप अपने आदर्श जीवन साथी को आकर्षित कर सकते हैं सही बिजनेस पार्टनर या हर वो लोग जिन्हें आप आकर्षित करना चाहते हैं कुकर सकते हैं यह शक्ति आपको बताएगी की आप धनी कैसे बन सकते हैं फाइनेंशली इंडिपेंडेंस कैसे बन सकते हैं ताकि जैसा आपका दिल चाहता है आप वैसे बने करें और रहे इतना ही नहीं यह शक्ति आपकी टूटी दिल का इलाज कर शक्ति है आपके परेशान
13:43 मां को शांत कर शक्ति है की आप किसी भी क्षेत्र में सक्सेस हासिल करना चाहते हैं तो आपको इसकी थिअरीज यानी सिद्धांतों को समझना होगा अब थिअरीज सिद्धांत से आप क्या समझते हैं देखिए साइंस में आपने थिअरीज बेस्ड अलग-अलग एक्सपेरिमेंट जरूर की होंगे इनमें क्या होता है एक प्रोसेस की कैसे करना है और एक रिजल्ट और यह थिअरीज हर कंडीशन में सच और शाश्वत होती है अब आप कहेंगे की इन थिअरीज का हमारे सक्सेस से क्या रिलेशन है आई देखते हैं की लेखक हमें किस प्रकार समझते हैं लेखक कहते हैं की जब हम इन शक्तियों
14:31 का इस्तेमाल करेंगे तभी हम जान पाएंगे की रिजल्ट क्या होंगे ठीक वैसे ही रिजल्ट्स जैसे हम एक्सपेरिमेंट में पाते हैं लेखक बताते हैं की उन्होंने कई सालों तक केमिस्ट का कम किया था अपनी शुरुआती ट्रेनिंग में उन्होंने यह शिखा की जब हम हाइड्रोजन की दो परमाणु और ऑक्सीजन का एक परमाणु मिलने हैं तो रिजल्ट हमेशा पानी होता है यह रिजल्ट कभी कब्र या अक्सर नहीं बल्कि हमेशा एक ही होता है इसी तरह जब हम एक परमाणु कार्बन का और एक ऑक्सीजन का मिलने हैं तो कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बंटी है जो सभी प्राणियों के लिए जहरीली है पर वही अगर हम इसमें ऑक्सीजन का एक और परमाणु
15:20 मिलने हैं तो यह कार्बन डाइऑक्साइड बन जाति है जो पौधों के लिए जीवनदायी है ये सभी एक ऐसी तथ्य है जो हर स्थिति में हर समय सच होगी इन्हें ही हमसे सिद्धांत या थ्योरी कहते हैं इसी तरह लेखक कहते हैं की कम करने की दृष्टि से या नजरिया में भी यही बात लागू होती है यहां अपने सब कॉन्शियस मन की पावर से सक्सेस हासिल करने के लिए आपको एक सिद्धांत या तेरी को सीखना होगा जी प्रकार साइंस की यह थिअरीज सच इस प्रकार यह थ्योरी भी सच है की आप अपने सब कॉन्शियस मन पर जो छाप छोड़ते हैं वह
16:07 स्थिति अनुभव और घटना के रूप में बाहर निकलते है आपका अवचेतन मां एक सिद्धांत है यह विश्वास के नियम पर अपना कम करता है मतलब आपको पहले अपने सबकॉन्शियस मन की पावर्स पर विश्वास करना पड़ेगा आपको जानना होगा की इस पर विश्वास कैसे करते हैं दोस्तों मर्फी बताते हैं की इस विश्वास करें इसके केमोन पर विश्वास करें और खुद पर विश्वास करें आपको सफलता उसे चीज के करण नहीं मिलती जिसमें आप विश्वास करते हैं बल्कि उसे
16:55 विश्वास के करण मिलती है जी पर आप विश्वास करते इसीलिए हमें ऐसे झूठ और अंधविश्वासों से सावधान रहने की जरूर है जो हमें डरते हैं जागते हैं उसे सच और सिद्धांतों पर विश्वास करना शुरू करें जो कभी नहीं बदलते अपने मां को स्वास्थ्य सुख शांति और अच्छी भावनाओं से भर दे आपके जीवन में चमत्कार होने लगेंगे इस पुस्तक का हर अध्याय सच्चे उदाहरण देकर बताता है की आप अवचेतन मां के नियमों को किस तरह प्रयोग कर सकते
17:53 सब कॉन्शियस मन पर विश्वास के एक सच्चे उदाहरण से बर्फी हमें बताते हैं की हम किस तरह अपने सब कॉन्शियस मन पर विश्वास कर जीत हासिल कर सकते हैं एक बार एक महान ओपेरा गायक एंड्रयू को केरोसू मंच पर गाने से घबरा रहे थे डर के मारे उनके गले में ऐंठन होने लगी उन्हें ऐसा ग रहा था जैसे अब वह कभी नहीं ग पाएंगे वो मंच के पीछे अपने कॉस्टयूम में तैयार खड़े थे उनका चेहरा पसीने से तार हो गया था कुछ ही समय में उन्हें हजारों की भीड़ में मंच पर गाना था अचानक कांपते हुए उन्होंने कहा मैं नहीं ग सकता सब लोग मुझमें पर हसेंगे
18:39 तो मेरा करियर खत्म हो गया मैं नहीं खाऊंगा लेकिन इस पाल वह दोबारा मंच की और मुड़े तभी अचानक से बोले मेरे अंदर जो छोटा मैं है जो डरपोक और भयभीत है वह मेरे अंदर से मेरे बड़े मैं यानी आत्मविश्वास और साहस का गला ढाबा रहा है वे दोबारा स्टेज की और मुड़े और टैंकर खड़े हो गए उन्होंने अपनी भीतर के छोटे मेको ऑर्डर दिया बाहर निकाल जो मेरे भीतर का बड़ा मैं गाना गाना चाहता है वे चिल्लाए निकाल जो बाहर निकाल जो बड़ा मैं गाने वाला है अब चमत्कार हुआ उनके ऐसा बोलते ही उनके सब
19:28 कॉन्शियस मन ने उनके अंदर की अनलिमिटेड पावर को आजाद कर दिया और जब भी मंच पर गए तो उन्होंने इतना शानदार गया की सभी लोग मंत्र मुग्ध हो गए और वे इतिहास के पन्नों में अमर हो गए ऐसा क्यों हुआ ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने अपने मन की सब कॉन्शियस पावर्स पर बिलीव किया दोस्तों आगे लेखक कहते हैं की कैप्टन एक जहाज का मलिक होता है मतलब एक बार समुद्र में जान के बाद जहाज का पूरा कंट्रोल केवल कैप्टन के पास होता है और बाकी लोग उसके ऑर्डर्स को मानते हैं इसी तरह हमारा कॉन्शियस मन हमारे जहाज मतलब हमारे शरीर
20:15 का कैप्टन होता है हमारा कॉन्शियस मन अपने विश्वास और एक्सपीरियंस के बेस पर हमारे सब कॉन्शियस मन को ऑर्डर्स देता है और हमारा सबकॉन्शियस मन उसे चुपचाप मां लेट है वो सवाल नहीं करता या यह नहीं पूछता की किस बेस पर कॉन्शियस मन ने उसे यह ऑर्डर दिया है दोस्तों अगर आप खुद से बार-बार ऐसा कहेंगे की मेरे पास इसे खरीदने के पैसे नहीं है तो आपका सब कॉन्शियस मन आपकी बात मां लेट है और वह इस बात को पक्का कर देता है की आपके पास जीवन चाहे चीज खरीदने के लिए कभी पैसे ना हो एक दिन नीना नाम की एक लड़की एक दुकान
21:00 के पास से गुजरे तो उसकी नजर डिस्प्ले विंडो में रखें एक सुंदर बैग पर पड़ी उसने बड़ी आशा से उसे देखा फिर कीमत देखते ही उसके मुंह से हा निकाल गई वो खुद से खाने ही वाली थी की मैं इतना महंगा बैक तो खरीद ही नहीं पाऊंगी लेकिन तभी उसे इस पुस्तक के लेखक जो सिर्फ मैराफी के एक लेक्चर की बात याद ए गई की कभी भी किसी नेगेटिव सेंटेंस को पूरा मत करना इसे इस समय पलट कर पॉजिटिव बना दो और चमत्कार होता देखो फिर नीना ने अपने वाक्य को सकारात्मक में बदलते हुए कहा की यह बैग मेरा है यह बेचे के लिए ही तो यहां है है मैं मानसिक रूप से इसे एक्सेप्ट करती
21:49 हूं और विश्वास करती हूं की मेरा सब कॉन्शियस मन इसे मुझे दिलाने में मेरी मदद करेगा अपने मंगेतर से मिले वो रैपर में लिपटा एक गिफ्ट लाया था नीना ने उसे खोल और उसमें से वही सुंदर बैग निकाला जिसे उसने दोपहर में शॉप पर देखा था ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उसने अपनी इस इच्छा को अपने सब कॉन्शियस मन में पहुंच दिया था जिसके पास कुछ भी हासिल करने की शक्ति है दोस्तों इस तरह इस बुक के पहले पाठ का अंत होता है इसमें हमने शिखा की जीवन का नियम विश्वास का
22:35 नियम है और यह विश्वास आपके दिमाग का विचार है उन चीजों में बिल्कुल विश्वास ना करें जो आपको नुकसान पहुंच या चोट पहुंचाई बल्कि अपने सब कॉन्शियस मन की शक्तियों पर विश्वास करें ये विश्वास रखें की ये आपका इलाज करेगी आपको इंस्पायर करेगी और आपको शक्तिशाली बनाएगी आप जैसा विश्वास करेगी ये आपको वैसा ही फल देगी बस अपने विचारों को बादल लेने किस्मत खुद बी खुद बादल जाएगी आई दोस्तों देखते हैं की पाठ दो जिसका नाम है आपका दिमाग कैसे कम करता है मैं लेखक हमारे सब कॉन्शियस मन के बड़े में हमें क्या बताना चाहते हैं दोस्तों अब
23:23 तक आपने यह तो जान लिया की हमारे दिमाग के दो भाग होते हैं चेतन और अब चेतन मां यानी कॉन्शियस और सबकॉन्शियस मन हमारा दिमाग ही हमारी सब्जी कीमती संपत्ति है और इसकी शक्तियां हमें तभी मिल पाएंगे जब हम इसका उपयोग करना सिख जाएंगे लेखक कहते हैं की जब हमारा सबकॉन्शियस मन किसी विचार को स्वीकार करता है तो वो इस पर कम करने लगता है और हैरानी की बात तो ये है की चाहे ये विचार अच्छे हो या बुरे ये दोनों पर समाज रूप से कम करता है जैसा की हमने पिछले अध्याय में भी देखा था की अगर नीना यह स्वीकार कर लेती की यह बैग
24:09 वह कभी नहीं खरीद शक्ति तो वह बैग उसे नहीं मिलता क्योंकि उसका सब कॉन्शियस मन उसके उसे नेगेटिव विचार पर कम करने लगता और ऐसी परिस्थितियों बनाता जिससे वह बैग उसका ना हो लेकिन उसने अपने सब कॉन्शियस मन से उसे बैग को स्वीकार और शाम तक उसे वह बैग मिल गया दोस्तों इसी तरह अगर हम नकारात्मक सोचेंगे तो हमारा सब कॉन्शियस मन असफलता तनाव और दुख की परिस्थितियों बनाएगी दूसरी तरफ अगर पॉजिटिव यानी सकारात्मक सोचेंगे सृजनात्मक सोचेंगे तो हमें सफलता स्वास्थ्य और समृद्धि मिलती है दोस्तों आगे लेखक ने हमें हमारे कॉन्शियस
24:59 और सबकॉन्शियस मन के प्रति और भी डिफरेंस बताएं हैं वो कहते हैं की हमें इन दोनों को पुरी तरह से अलग ही समझना चाहिए बल्कि यह तो एक ही मस्तिष्क में होने वाले दो अलग-अलग एक्टिविटीज के क्षेत्र हैं हमारा कॉन्शियस मन तार्किक होता है मतलब संदेह कर सकता है वह तारक कर सकता है प्रश्न कर सकता है और इसीलिए हम अपने जीवन के सभी फैसला जैसे पुस्तक चुना जीवनसाथी चुना या घर खरीदने जैसे फैसला कर पाते हैं वही इसी के साथ हमारे शरीर के अनिवार्य कम जैसे हार्टबीट रक्त संचार और पाचन क्रिया और
25:44 सांस लेने ऐसी प्रक्रियाएं हमारा सब कॉन्शियस मन करता है हम अपने सब गॉर्जियस मन पर जो छाप छोड़ते स्वीकार भी कर लेट है मतलब अगर आप मानते हैं की आप में कॉन्फिडेंस नहीं है तो आपका सब कॉन्शियस मन आपको कभी कॉन्फिडेंट नहीं बने देगा मतलब आप का सकते हैं की हमारा सब कॉन्शियस मन एक ऐसी मिट्टी है जिसमें हम सभी तरह के बी बी सकते हैं चाहे वो अच्छी किम के हो या बुरे इसमें होने वाली फसल आपकी बी पर निर्भर करती है यहां बी से मतलब आपकी सोच से है और फसल उसे सोच के परिणाम से दोस्तों आगे लेखक बताते हैं की
26:31 मनोवैज्ञानिक भी हमारे सब कॉन्शियस मन पर बहुत सारे एक्सपेरिमेंट करते हैं वह कहते हैं की आपने देखा होगा जब किसी व्यक्ति को हिप्नोटाइज किया जाता है तो वह व्यक्ति इन बटन को स्वीकार कर लेट है जो हिप्नोटिस्ट एक्सपर्ट उसे कहता है मतलब अगर वह कहे की तुम हिटलर हो तो वो मां लेट है या अगर वह हिप्नोटिस्ट यह कहे की तुम कुत्ता हो या बिल्ली हो तो वो वैसा ही व्यवहार करने लगता है जैसा की ये करते हैं कुछ समय के लिए वो व्यक्ति पुरी तरह से अपनी पर्सनालिटी बादल लेट है मतलब अगर वह हिप्नोटिस्ट एक्सपर्ट किसी व्यक्ति से कहे की तापमान जीरो डिग्री से भी नीचे है और
27:17 वह बर्फ की तरह जाम गया है या वो संगमरमर की मूर्ति है तो वो इसी अनुरूप व्यवहार करने लगेगा लेखक कहते हैं की हमारे कॉन्शियस मन को यथार्थवादी मां अर्थात ऑब्जेक्टिव मन भी कहा जाता है क्योंकि इसका संबंध आपकी भारी दुनिया से होता है और इसके साधन हमारी पांच इंद्रिय है हमारी आंख नाक कान मुंह
28:04 और त्वचा इसे जो भी ज्ञान प्राप्त किया जाता है हमारा कॉन्शियस मन मतलब चेतन मां उसके आधार पर तारक और विचार और अनुभव प्राप्त करता है जबकि हमारा अवचेतन मां कल्पना वादी मां या सब्जेक्टिव मन कहलाता है क्योंकि यह हमारी इंद्रियों के मध्य से नहीं बल्कि हमारे अंदर ज्ञान से महसूस करता है दोस्तों अब लेखक हमसे एक सवाल पूछते हैं की क्या आप डर चिंता और तनाव या ऐसी निकॉन नकारात्मक सोच से परेशान है है इसका इलाज है अपने सब कॉन्शियस मन की
28:49 शक्ति को पहचान कर उसे आजादी खुशी और संपूर्ण सेहत का आदेश देना ऑर्डर देना अब देखा सुझाव की जबरदस्ती शक्ति की बात करते हैं जैसा की आप जानते हैं हमारा अवचेतन मां तारक वितरक नहीं कर सकता ना ही कुछ सोच सकता है यह कम चेतन मां मतलब कॉन्शियस मन का है अवचेतन मां यानी सब कॉन्शियस मन तो बस आपके द्वारा छोड़ी गई झापड़ कम करता है यह सुझाव दे नहीं सकता बल्कि आपके और किसी और के द्वारा दी गई सुझाव को सच मानकर उसे पर भी कम करने लगता है दोस्तों लेखक कहते हैं
29:35 की डिक्शनरी हमें बताती है की सुझाव का अर्थ होता है किसी चीज को किसी के मस्तिष्क में डालना अब ये सुझाव जो हमें दिए जाते हैं यह निर्भर करता है हम पर की हम इसे स्वीकार करते हैं या नहीं अगर हमारे कॉन्शियस मन से हम सोचते हैं की हम कॉन्फिडेंट हैं तो वह व्यक्ति जो हमें ही सुझाव दे रहा है की आप में कॉन्फिडेंस नहीं है और हमें बादाम खाना चाहिए या यह नुस्खा अपनाना चाहिए तो कॉन्फिडेंस ए जाएगा तो इससे हमारे अवचेतन मां पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि हमारा चेतन मां यानी कॉन्शियस यह जानता है की हम कॉन्फिडेंट है दोस्तों अब लेखक हमें आत्म
30:21 सुझाव यानी सेल्फ सजेशन की शक्ति एक दिन उनका एक ऑडिशन था वो ऑडिशन के लिए एक्साइड थी लेकिन कहानी ना कहानी उन्हें खुद पर शक था की क्या वो अच्छा ग पाएंगे और वो खुद से कहती रही की जब गाने का वक्त आएगा तो मैं बहुत बड़ा गाउंगी वो मुझे पसंद नहीं करेंगे और फिर क्या हुआ इस आत्मा सुझाव यानी सेल्फ सजेशन की वजह से उनके सब कॉन्शियस मन ने इसे एक सच मां इस अनुरूप परिस्थितियों बनाने में जट गया उसे सिंगर का डर हकीकत बन गया और जैसा उसने
31:06 सोचा सब कुछ ठीक वैसा ही हुआ इस घटना के एक हफ्ते बाद उसने थान लिया की अब उसे खुद को सकारात्मक यानी पॉजिटिव सेल्फ सजेशन देना है वह हर दिन तीन बार खाली कमरे में शांत बैठ आंखें बैंड कर खुद को यह सुझाव देती की मैं बहुत अच्छा गति हूं मैं शांत और आत्मविश्वास ही हूं और एक सप्ताह बाद सचमुच जब उसका फिर से ऑडिशन हुआ तो उसमें बहुत अच्छा गया इस तरह उसके सब कॉन्शियस मन ने उसके सेल्फ सजेशन को सच बना दिया दोस्तों अब लेखक यहां आत्म सुझाव यानी
31:52 सेल्फ सजेशन का एक और उदाहरण देते हैं अक्सर हम अपने दैनिक जीवन में भी कहते हैं की ओ अब मुझे चीज याद नहीं रहती या मैं पढ़ा हुआ जल्दी भूल जाति हूं आप भूल जाते हैं की आपका अवचेतन मां आपकी बातें सुन रहा है और वह इसे हकीकत में बादल देगा एक महिला जो चीज याद रखना में एक्सपर्ट थी वह स्वयं को यह आत्मा सुझाव देती है की अब धीरे-धीरे उसकी याददाश्त कमजोर हो रही है तो वो सच में अपनी याद रखना की क्षमता में परिवर्तन पाती है हालांकि जल्द ही उसे एहसास हो जाता है की ऐसा उसकी नकारात्मक आत्म सुझाव से हो रहा है तो वो इसे उलट स्वयं को सकारात्मक सुझाव देने लगती है
32:39 दोस्तों अब लेखक बाहरी सुझाव पर बात करते हैं अक्सर हमें बाहरी लोग भी नकारात्मक सुझाव देते हैं जैसे तुम जिंदगी में कुछ नहीं कर सकते तुम्हें ऐसा नहीं करना चाहिए तुम फेल हो जाओगे तुम बिल्कुल गलत हो और ऐसा ही हजारों और हम इन्हें स्वीकार कर सच बना देते हैं हमें तुरंत उसका विरोध करना चाहिए और इसकी शक्ति आपको आपका सब कॉन्शियस मन देगा पर इसके लिए आपको यह समझना है की आपको उन्हें स्वा करता है देखिए यह बाहरी सुझाव आपको हर जगह मिलेंगे घर ऑफिस दफ्तर क्लब इत्यादि पर आपको यह
33:25 समझना होगा की उनका उद्देश्य यह होता है की आप वैसा ही सोच जैसा वो चाहते हैं और वैसा ही कम करें भले ही इससे आपको नुकसान और उन्हें फायदा पहुंचे दोस्तों क्योंकि आपको पहले भी बताया गया है की आपका अवचेतन मां बहस नहीं करता तो जब आप कहते हैं की आपको जिम्मेदारी निभाई नहीं आई या आप यह नहीं कर सकते या अब आपकी उम्र बहुत ज्यादा हो गई है या मैं गलत घर में पैदा हो गया हूं तो आपका मां इसके अनुरूप प्रतिक्रिया करता है दोस्तों यही पर दूसरे अध्याय का अंत होता है जिसमें हमने शिखा की आप अपने चेतन मां के कैप्टन है और अपनी किस्मत के
34:12 मलिक है इसीलिए याद रखें इस रात के पास चुन्नी की शक्ति है जिंदगी को चुने खुशियों को चुने सेहत को चुने प्यार को चुने आई दोस्तों देखते हैं की पार्टी जिसका नाम है आपके अवचेतन मां की चमत्कारी शक्ति में लेखक हमारे सब कॉन्शियस मन के किन चमत्कारों से पर्दा उठाते हैं दोस्तों अब तक हमने यह तो जान लिया की हमारा अवचेतन मां यादों को समझौता है दिल की धड़कन और रक्त संचार को कंट्रोल करता है हमारी पाचन क्रिया को अंजाम देता है और इसे सभी समस्याओं के जवाब भी पता है यहां लेखक बताते हैं की हमारा अवचेतन मां कभी नहीं सता और कभी आराम भी नहीं करता
34:59 यहां जो सिर्फ मैराफी इस घटना के मध्य से बताते हैं की किस प्रकार अवचेतन मां द्वारा एक भयंकर बीमारी का इलाज किया गया बल्कि एक सजन से मिले थे जिनका नाम डॉक्टर एक स्कॉटिश सजन थे और अब तक उन्होंने सभी तरह के कल मिलकर 450 से ज्यादा ऑपरेशन किया थे जिम आंख कान और गले के ऑपरेशन के अलावा अंग काटने और ट्यूमर तथा कैंसर की गांठ हटाने जैसे ऑपरेशन भी थे दोस्तों उसे समय आज की तरह बेहोश करने की तकनीक नहीं थी इसीलिए उसे समय केवल मानसिक
35:45 एनेस्थीसिया दिया जाता था मरीज का कहना था की उन्हें कोई दर्द नहीं हुआ और ऑपरेशन के दौरान भी उनमें से कोई भी नहीं मारा मानसिक एनेस्थीसिया में मैरिज को मानसिक रूप से यह विश्वास दिलाया जाता है की उन्हें बिल्कुल भी दर्द नहीं होगा और उनका ऑपरेशन सफल रहेगा इसमें हमारे चेतन मनी अपनी प्रतिक्रिया दिखाई और मैरिज में ऑपरेशन के दर्द को सहने की इतनी शक्ति दी की उसे महसूस भी नहीं हुआ की उसका ऑपरेशन किया जा रहा है इस तरह हमारा अवचेतन मां हमें हर दर्द से मुक्त कर सकता है सवाल चाहे जो भी हो हमारा अवचेतन मां सभी सवालों के जवाब जानता है और चमत्कार करता
36:31 है दोस्तों आगे लेखक हमें बताते हैं की हमारा अवचेतन मां यानी हमारा सब कॉन्शियस मन एक पुस्तक की तरह है इस पुस्तक में आप जो भी विचार विश्वास मत सिद्धांत या राय लिखने हैं या जैसी छाप छोड़ते हैं वैसे ही परिस्थितियों घटनाओं के रूप में व्यक्त होती है तो आप इसके भीतर जो लिखेंगे वही आपको दिखाई देगा आप इसमें जो भी लिखेंगे इस पर आपका अवचेतन मां अमल करेगा किसी प्रकार का बहस नहीं करेगा या सवाल नहीं पूछेगा आगे लेखक हमसे कहते हैं की जब भी हम अपनी नकारात्मक सोच से खुद को नुकसान पहुंचने
37:17 हैं तो यह हमारे अवचेतन मां में दाखिल हो जाते हैं अब लेखक स्वयं के उदाहरण से बताते हैं की किस प्रकार उन्होंने अपने अवचेतन मां की शक्ति से अपने चरण रोग यानी स्क्रीन डिजीज को ठीक किया इस पुस्तक को लिखने से 40 साल पहले लेखक को एक बार चरण रोग हुआ था चरण रोग अर्थात स्क्रीन डिजीज वह सबसे अच्छे डॉक्टर के पास गए और उन डॉक्टर ने सबसे लेटेस्ट टेक्नोलॉजी से उनका इलाज किया लेकिन इससे उन्हें कोई भी फायदा नहीं हुआ और लेखक की स्थिति बिगड़ी चली गई एक दिन वह एक बहुत बड़े साइकोलॉजिस्ट के पास गए साइकोलॉजिस्ट ने उन्हें समझाया की
38:02 हमारे शरीर का निर्माण हमारा अवचेतन मां करता है इसीलिए वही इसी दोबारा ठीक भी कर सकता है बस इसके लिए आवश्यकता है तो केवल उसे सकारात्मक और आदर्श सोच की जो लेखक को उसके अवचेतन मां तक पहुंचाना है अब लेखक को साइकोलॉजिस्ट की बात पुरी तरह से समझ ए गई थी और उन्होंने अपने अवचेतन मां के लिए एक सीधी प्रार्थना तैयार की उन्होंने स्वयं से कहा की मैं जानता हूं की इस समय मेरे भीतर अद्भुत शक्तियां हैं जो जानती हैं की मेरा इलाज कैसे करना है और इसी शक्ति ने मेरे शरीर के सभी अंग मांसपेशियां और हड्डियां बनाई है और मैं
38:49 इस व्यक्ति का धन्यवाद देता हूं जो मुझे संपूर्ण बना रही हैं लेखक ने इस प्रार्थना प्रतिदिन 2 से 3 बार जोर-जोर से दोहराया और 3 महीने बाद उनका चरण रोग पुरी तरह से ठीक हो गया डॉक्टर चक्र गए लेकिन लेखक जानते थे की उनके साथ किस शक्ति का चमत्कार हुआ था दोस्तों चिंता डर और तनाव हमारी जीवन में अनेक प्रकार की बढ़ाएं दाल हमारे शरीर को अलग-अलग रोगन से ग्रस्त कर देते हैं इसीलिए डॉक्टर आजकल तनाव संबंधी बीमारियों पर बहुत ध्यान दे रहे हैं इसी प्रकार लेखक यहां एक और रियल लाइफ एग्जांपल से बताते हैं की किस प्रकार एक
39:35 महिला ने अपने अवचेतन मां की शक्ति से अपनी आंखों की रोशनी वापस पी डॉक्टर ने भी उनकी आंखों को जवाब दे दिया था लेकिन जब वह एक धर्म स्थल पर इस आस्था से गई की वह ठीक हो जाएगी तो उन्होंने वहां का पानी अपनी आंखों पर लगाया और स्वयं पर विश्वास नतीजतन उनके अवचेतन मां ने उनकी आंखों की मेरी हुई कोशिकाओं को फिर से जीवित कर दिया और वो देखने लगी इस चमत्कार ने डॉक्टर को भी हैरान कर दिया और डॉक्टर ने जब उनकी रिपोर्ट को देखा तो उन्होंने पाया की अब उनकी कोशिकाएं ठीक हो रही थी और ऐसा उनके अवचेतन मां की शक्ति के करण हुआ था
40:21 दोस्तों यही पर तीसरी पाठ का अंत होता है जिसमें हमने शिखा की किस प्रकार हम अपने अवचेतन मां का प्रयोग स्वयं को सेहतमंद बनाने के लिए कर सकते हैं इसके अतिरिक्त भयंकर जानलेवा बीमारियों के इलाज में भी इसकी शक्ति कारगर है बस जरूर है तो केवल अपनी अवचेतन मां को सकारात्मक आदेश देने की जी पर कम कर वह उसे सच्चाई और चमत्कार में बादल देगा आई दोस्तों देखते हैं की पाठ 4 जिसका नाम है प्राचीन कल में मानसिक उपचार में लेखक हमारे अवचेतन मां के किन आयाम के बड़े में बात करते हैं लेखक ने
41:06 विभिन्न संस्कृतियों और धर्म का गहन अध्ययन किया जिसमें उन्होंने पाया की पुराने समय में लोगों को एक ऐसी शक्ति पर विश्वास हुआ करता था जो यह मानती थी की वह भयंकर से भयंकर बीमारी को ठीक कर शक्ति है और सभी देश का इतिहास इस विश्वास की पुष्टि भी करता है और यह शक्ति पुजारी और धर्म गुरुओं के पास होती थी जींस वह बीमारियों का इलाज करते थे दुनिया भर में अंतर केवल इतना था की इनकी तरीके अलग-अलग थे लेकिन जो एक चीज समाज थी वह यह थी की इनमें ईश्वर की आराधना शामिल होती थी इसके अलावा लोग जंतर तावीजों अंगूठियां और
41:52 तस्वीरें तथा मेट्रो का भी प्रयोग करते थे लेखक अब हमसे एक सवाल पूछते हैं की दुनिया के सभी हसन में बिना किसी तकनीक के वो इलाज सफल कैसे हुए और इसका जवाब आसन है जी हां इलाज इसीलिए संभव हो पाया क्योंकि रोगी के उन धर्मगुरुओं और पुजारी पर अंधे विश्वास ने उनके अवचेतन मां की उपचारक शक्ति को आजाद कर दिया इसके बाद लेखक दुनिया भर के ऐसे निकॉन धर्म और स्थलों का जिक्र करते हैं जहां रोगियों का उपचार किया जाता है और ये उपचार अवचेतन मां की शक्तियों से ही होता है लेखक बताते हैं की जब एक रोगी आस्था से जुड़कर स्वयं की
42:39 अवचेतन मां को सकारात्मक संदेश देता है तो चमत्कार होता है अब लेखक अपने एक रिश्तेदार का उदाहरण देते हैं जो पार्थ ऑस्ट्रेलिया में रहते हैं उन्हें एक बार टीवी हो गया है उनके बेटे ने उनकी मदद करने का फैसला किया उसने अपने पिता को बताया की वह हाल ही में एक शक्तिशाली सन्यासी से मिला था यह सन्यासी यूरोप के प्रसिद्ध धर्म स्थल का उपचार था उसे सन्यासी के पास एक अंगूठी थी जिसे चुने भर से सदियों से अनगिनत रोगी ठीक हो रहे थे जब उसने उसे सन्यासी को अपने पिता की बीमारी के बड़े में बताया और उनसे अंगूठी उधर मांगी तो सन्यासी तैयार
43:27 हो गया जब बेटे ने अपने पिता को वह चमत्कारी अंगूठी दिखाई तो उन्होंने झट से वो अंगूठी उनके हाथ से ले ली और उसे अपनी साइन से लगाया और मां ही मां प्रार्थना कर सो गए सुबह तक वह पुरी तरह से ठीक हो चुके थे और रिपोर्ट्स बता रही थी की अब उन्हें टीवी नहीं है लेखक कहते हैं की इस तरह के चमत्कार होते रहते हैं और यह हमारे अवचेतन मां के लिए कोई बड़ी बात नहीं है है लेकिन इस चमत्कार के बड़े में सबसे आश्चर्य की बात यह थी की बेटे ने अपने पिता को जी अंगूठी के बड़े में बताया था और वह पुरी कहानी सुने थी वो सब कुछ पुरी
44:12 तरह से मनगढ़ंत थी और उसने वो अंगूठी फुटपाथ से एक सामान्य टुकड़ा समझकर उठा लिया था फिर उसने वो अंगूठी अपने पिता को दे दी थी दोस्तों अब तो आप ही समझ गए होगी की उनके पिता का उपचार किस शक्ति ने किया था वह कोई चमत्कारी अंगूठी नहीं थी बल्कि चमत्कार तो उनके विश्वास का था जी पर उनके अवचेतन मां ने कम कर दिया था दोस्तों अब लेखक हमारे अवचेतन मां की शाश्वत औपचारिक सिद्धांत के बड़े में बात करते हैं इसका मतलब क्या है मतलब यह की वह सिद्धांत जो पुरी दुनिया में समाज रूप से लागू होते हैं और हर स्थिति में सच होते हैं
44:57 इस बड़े में हमने थोड़ा सा पहले भी जाना की किस प्रकार एक व्यक्ति को हिप्नोटाइज करके हम उसमें किसी भी बीमारी के लक्षण पैदा कर सकते हैं यदि उसे कहा जाए की उसे लकवा मार गया है और वो चल नहीं सकता तो वो वैसा ही व्यवहार करने लगेगा इसी प्रकार यदि किसी व्यक्ति को घास से एलर्जी है और जब हम उसे हिप्नोटाइज करके किसी कागज के फूल को घास समझना को कहानी तो उसमें तुरंत एलर्जी के सभी लक्षण प्रकट हो जाएंगे आपको क्या लगता है ऐसा उसे कागज के करण हुआ या उसे सुझाव के करण जो उसे हिप्नोटिस्ट ने दिया दोस्तों इन उदाहरणों से हमें पता चला है की लक्षण हमारे अवचेतन मां के करण पैदा
45:45 हुए थे और इनका इलाज भी अवचेतन मां में ही होता है अवचेतन मां पर दुनिया भर के विभिन्न लोगों ने अपने विचार प्रकट किया हैं जिम एक विचार यह भी है है की यह आस्था से जुड़ी होती है और आस्था चमत्कार करती है यह सच्ची हो या झूठी हमेशा चमत्कार करेगी ऐसे ही आस्था के दो और उदाहरण लेखक हमारे सामने पेस करते हैं वह बताते हैं की बार नहीं नाम की एक व्यक्ति ने उन्हें एक आदमी की कहानी सुने जिसकी जब में लकवा मार गया था बार नहीं एक डॉक्टर था हर तरह के इलाज का उसे व्यक्ति पर कोई फायदा नहीं हो रहा था इसीलिए बार नहीं नाम के उसे डॉक्टर ने उसे व्यक्ति को बताया की उसे एक नई
46:33 तकनीक मिली है जिससे उसकी जीव पुरी तरह से ठीक हो जाएगी उन्होंने केवल एक साधारण थर्मोमीटर उनके जब पर लगा दिया और मैरिज को लगा की शायद यही वह तकनीक है जो उसे बिल्कुल ठीक कर देगी कुछ ही पल्लू में वह खुशी से चिल्लाने लगा क्योंकि अब वह सफलतापूर्वक अपनी जीव को घुमा सकता था दोस्तों आप ही समझ जाइए की यह चमत्कार उसे साधारण से थर्मोमीटर का था या उसे व्यक्ति के विश्वास का जिसका प्रभाव उसके अवचेतन मां के चमत्कार के रूप में व्यक्त हुआ इसी तरह डॉक्टर बने एक और उदाहरण लेखक को बताते हैं वह बताते हैं की एक बार उनके ऑफिस में एक युवती आई उसकी आवाज पुरी तरह
47:21 से चली गई थी जब उन्होंने जांच किया और उसे विश्वास दिलाया की बिजली के प्रयोग से उनकी आवाज वापस ए शक्ति है और ऐसा का उन्होंने अपने इंडक्शन अपेरटस से उसके गले को थोड़ा सा हिलाया और कहा की अब तुम बोल शक्ति हो इसके बाद उन्होंने ए बी सी और फिर अपना नाम बोलने को कहा और उसे युवती ने साफ-साफ बोला उसकी आवाज वापस लोट आई थी यहां भी हम समझ सकते हैं की चमत्कार किसका था उसे साधारण से बिजली के यंत्र का या फिर अपने विश्वास का की वो ठीक हो जाएगी दोस्तों यह आप पर छोड़ दी हूं दोस्तों यही पर चौथ पाठ का अंत होता है जिसमें हमने शिखा की इलाज की केवल एक
48:10 भीम है और वो है आस्था और इलाज की केवल एक ही शक्ति है जिसका नाम है आपका अवचेतन मां चाहे आपकी आस्था सच्ची हो या झूठी आपको इसके परिणाम मिलेंगे आपका अवचेतन मां उसे आस्था पर कम करेगा और अगर वह सकारात्मक है तो चमत्कार जरूर होगा आई दोस्तों अब हम चलते हैं अगले पाठ की तरफ जो है पाठ 5 आधुनिक युग में मानसिक उपचार दोस्तों पिछले पाठ में आपने जाना की प्राचीन समय में किस प्रकार मानसिक उपचार द्वारा चमत्कार किया जाता था लेकिन अब हम जानेंगे की आज के समय में वह कौन सी चीज हैं जींस
48:58 मानसिक उपचार किया जाता है मानसिक उपचार यानी आपको ठीक करने के लिए आपके मां का इस्तेमाल किया जाता है दोस्तों लेखक कहते हैं की उपचार की यह शक्ति आखिर कहां है तो इसका जवाब है ये शक्ति आपके सब कॉन्शियस मन यानी अवचेतन मां में रहती है लेखक कहते हैं की एक पुरानी कहावत है की डॉक्टर गाव पर पट्टी बंद देता है लेकिन ईश्वर उसे ठीक करता है दोस्तों लेखक का मानना है की जब तक रोगी के मां में जीने की आशा ना हो तब तक दुनिया का बड़े से बड़ा डॉक्टर उसका इलाज करके उसे ठीक नहीं कर सकता इसीलिए डॉक्टर कभी किसी मैरिज को ठीक नहीं करता
49:44 बल्कि वह स्वयं रोगी है जो खुद को ठीक करता है यहां डॉक्टर केवल उसे अवरुद्ध को हटाने की भूमिका निभाते हैं जो उसे ठीक होने से रॉक रही है जैसे एक मनोवैज्ञानिक उसके मानसिक अवरोध को हट्टा है ताकि उसकी अभिजीत और मां में ठीक होने की शक्ति एक्टिव हो सके और इसी तरह एक सजन उसकी शारीरिक अवरोध को हट्टा है ताकि उसके ठीक होने की शक्ति सामान्य ढंग से कम करने लगे दोस्तों यहां लेखक कहते हैं की उपचार की शक्ति केवल एक ही होती है हालांकि इसे अलग-अलग नाम से पुकार जाता है हम इसे प्रकृति जीवन ईश्वर आदि कहते हैं लेकिन इन
50:32 सब का इशारा एक ही और होता है और वो है हमारा अवचेतन मां दोस्तों आज के समय में मानसिक इलाज इस सच्चाई पर निर्भर करता है की जैसी आपकी आस्था होगी और आपको शक्ति देगा विश्वास के नियम की बात की गई है जिसमें लेखक कहते हैं की जैसा आप विश्वास करेंगे वैसा ही आपको मिलेगा लेकिन ऐसी चीज में विश्वास करना पागलपन है जो आपको चोट या नुकसान पहुंच क्योंकि आपका अवचेतन मां उसे सच में बादल देगा आज के समय में प्रार्थना
51:19 चिकित्सा यानी प्रेयर थेरेपी से भी मानसिक उपचार किया जाता है इसीलिए लेखक अब हमें इसके पीछे का विज्ञान समझते हैं इसके अंतर्गत आपको अपने मां में एक ऐसी तस्वीर या विचार या योजना की कल्पना करनी होती है जिसे आप अनुभव करना चाहते हैं और जब पुरी आस्था से आप इस पर विश्वास रखते हैं तो आपको अपनी प्रार्थना का जवाब मिल जाता है इसे ही प्रार्थना चिकित्सा अर्थात प्रेयर थेरेपी कहा जाता है अब मां लीजिए
52:04 आप प्रेयर थेरेपी से किसी बीमारी का इलाज करना चाहते हैं अगर आप जानते हैं की आपकी बीमारी जो भी हो वह केवल आपके भयानक नेगेटिव थॉट्स यानी नकारात्मक विचारों के करण हुई है और आपको विश्वास है की यदि आप अपनी नेगेटिव थॉट्स को बाहर निकाल देंगे तो यकीन मानिए आप ठीक हो जाएंगे और यह चमत्कार आपके साथ भी होगा इस थेरेपी में आप खुद को याद दिलाते हैं की आपके पास हर बीमारी के इलाज की शक्ति है और आप इस सच्चाई पर विश्वास करते हैं और आपका डर धीरे-धीरे कम होने लगता है और अंततः आप पुरी तरह से ठीक होकर अपने भीतर के
52:49 नकारात्मक विश्वासो को हर देते हैं दोस्तों यहां लेखक हमें आस्था उपचार यानी फेथ हीलिंग के बड़े में भी बताते हैं और समझते हैं की हमारा अवचेतन मां किस प्रकार आंधी आस्था से शक्ति प्राप्त करता है आस्था उपचार का मतलब इलाज करने का ऐसा तरीका है जिसमें आपकी आस्था का इस्तेमाल किया जाता है और यह इलाज वह व्यक्ति करता है जिसे लोग समझते हैं की उसके पास ऐसी शक्ति है जिससे वो उन्हें ठीक कर देगा इस तरह उनकी आंधी आस्था यानी उनका ब्लाइंड फिट उन्हें ठीक कर देता है ऐसे व्यक्ति जो इस प्रकार की आस्था का प्रयोग इलाज के लिए
53:35 करते हैं उन्हें आस्था उपचार कहते हैं दुनिया के अलग-अलग हसन में यह अपने रोगियों का इलाज नृत्य मंत्र और आत्माओं को बुलाकर ऐसे निकॉन त्रिकोण से करते हैं इसके अलावा रोगी व्यक्ति को किसी खास चिन्ह को छूकर अगरबत्ती या धूप दीप जलाकर या फिर बटिया के कार्य को पिलाकर ठीक करने का प्रोसेस किया जाता है मतलब जो भी चीज रोगी को उसे तरीके में सच्चा विश्वास दिलाने में कामयाब हो जाति है वही विश्वास उसके इलाज को संभव बनती है लेखक कहते की जो भी चीज आपको डर और चिंता से दूर हटाकर आस्था और विश्वास की और ले जाएगी वहीं आपका इलाज
54:23 करेगी दोस्तों लेखक कहते हैं की यह तो हमने जान लिया की प्रार्थना जब हम स्वयं के लिए करते हैं तो यह 100% कम करती है बशती की वह प्रार्थना वैज्ञानिक हो लेकिन क्या यह प्रार्थना दूसरों के लिए कम करती है आई एक उदाहरण के मध्य से लेखक हमें क्या समझने का प्रयास करते हैं जानते हैं वह कहते हैं की मां लीजिए आप लॉस एंजेल्स में रहते हैं और आपको यह सूचना मिलती है की आपकी मां न्यू यॉर्क में रहती है जो बहुत बीमा है तो सबसे पहले तो आप यही सोचेंगे की आपको तुरंत अपनी मां के पास जाना होगा लेकिन अगर यह संभव नहीं हुआ तो यानी आप अपने घर परिवार और नौकरी छोड़कर
55:11 जान में सक्षम ना हो पे तो तो क्या आपकी आस्था की शक्ति आप अपनी मां के लिए प्रयोग कर सकते हैं लेखक कहते हैं की हां अब बिल्कुल ऐसा कर सकते हैं वो बताते हैं की भले ही आप उनके पास शारीरिक रूप से मौजूद ना हो लेकिन आपकी प्रार्थनाएं उन तक जरूर पहुंचेंगे क्योंकि परमपिता हम सबके अंदर रहते हैं रचनात्मक मस्तिष्क एक है हमें तो बस अपने मां में स्वास्थ्य और सामंजस्य की आस्था भरनी है और इसकी प्रतिक्रिया अपने आप होती है मस्तिष्क के इस सिद्धांत में समय यह स्थान से कोई फर्क नहीं पड़ता वही मस्तिष्क आपकी मां में और आप में समाज रूप
55:59 से कम करता है चाहे आप कहानी भी रहे अब लेखक हमें अनुपस्थित उपचार यानी अब्सेंट ट्रीटमेंट का एक उदाहरण देते हैं जो लॉस एंजेल्स में घटित हुआ था एक महिला को जब यह पता चला की न्यूयॉर्क में रहने वाले उनकी मां एक भयंकर हृदय रोग से पीड़ित हो गई है और वो अपनी मां के पास नहीं जा शक्ति तो उन्होंने उनके लिए प्रार्थना की आई बताते हैं की उन्होंने अपनी मां के लिए क्या प्रार्थना की जो सफल हुई उन्होंने प्रार्थना की की उपचार करने की शक्ति मेरी मां के पास है मैं अपने मस्तिष्क में अपनी मां के लिए संपूर्ण स्वास्थ्य की कामना करती हूं और जी शक्ति ने मेरी मां के शरीर
56:47 और उनके सभी अंग बनाए हैं मैं उसे शक्ति को उनके अस्तित्व के हर परमाणु में भर रही हूं और उनकी कोशिका की शांति की कामना करती हूं जो डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं उनका मार्गदर्शन ईश्वर कर रहे हैं और जो भी मेरी मां को ऊ रहे हैं उन्हें सही कम करने का आदेश मिल रहा है मैं जानती हूं की रोग सच नहीं है क्योंकि अगर ऐसा होता तो किसी का इलाज नहीं हो पता मैं प्यार और जीवन की समर्थक हूं मैं यह आदेश देती हूं की मेरी मां के शरीर में सेहत और शांति व्यक्त हो उसे महिला ने इस प्रार्थना को कई बार दोहराया और कुछ दिन बाद उसकी मां
57:36 की हालात में सुधार हुआ डॉक्टर से हैरान थे और उन्होंने महिला को उसकी आस्था के लिए बधाई दी दोस्तों इसके बाद लेखक एक और उदाहरण देते हैं जिसमें एक रोगी ने आस्था की शक्ति से स्वयं के कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का इलाज किया और जब रिपोर्ट अच्छी गई तो पता चला की सचमुच अब उसके शरीर में कैंसर की एक भी कोशिकाएं नहीं थी लेखक कहते हैं की जी प्रकार यह शक्ति प्रार्थना के लिए कम करती है ठीक इस प्रकार यह उन नकारात्मक बटन पर भी कम करती है जिसकी रात जब आप बीमा होते हैं या दर्द में होते हैं तो लगाते रहते हैं अपने दर्द और लक्षणों
58:21 की रात लगाने से अवचेतन मां इनकी शक्तियों को बड़ा देता है और आपको अपने दैनिक जीवन में कम करने से रोकना है इसीलिए लेखक एक बार फिर से हमें कुछ भी नकारात्मक सोने से सावधान करते हैं और यही पर उनके पांचवें पाठ का अंत होता है इसमें हमें लेखक उन चीजों का पता लगाने के लिए कहते हैं जो हमारा इलाज करती हैं और उन पर विश्वास करने का आग्रह करते हैं जो हमारे अवचेतन मां को हमारा इलाज करने की शक्ति देती है आई दोस्तों अब हम चलते हैं पाठ 6 की तरफ जिसका नाम है मानसिक उपचार की व्यवहारिक तकनीकी इस पाठ में लेखक उन तकनीक और सही
59:08 वीडियो के बड़े में बताएंगे जिनका इस्तेमाल आप ऐसी प्रार्थना करने में लगा सकते हैं जींस चमत्कार होता है लेखक कहते हैं की इस दुनिया में कुछ भी संयुक्त से नहीं होता यह दुनिया नियम कायदे की है अगर आप गलत तकनीक से प्रार्थना करते हैं तो आपकी प्रार्थना हवा में गुब्बारे की तरह लटकती रहेगी इसीलिए लेखक चाहते हैं की हम वैज्ञानिक प्रार्थना करें जो सही जगह पर पहुंचे और उनका चमत्कार हमें हमारी जीवन में दिखाई दे प्रार्थना अलग-अलग त्रिकोण से की जाति है लेकिन लेखक ने पुस्तक में अलग-अलग धर्म की वीडियो पर प्रकाश डालने की बजाएं उनके प्रभावित त्रिकोण और उन्हें अपनी रोज की
59:56 जिंदगी में शामिल करने की आदत पर ध्यान केंद्रित किया है वो कहते हैं की प्रार्थना हमारी आत्मा की सच्ची मनोकामना होती है और यह सबसे गहरी जरूर से निकलते है और जीवन में आप जो पन चाहते हैं उन चीजों को सरकार करती है दोस्तों एक वैज्ञानिक प्रार्थना हमारे सकारात्मक विचार को हमारी अवचेतन मां तक पहचाने की तकनीक है जिसमें हम अपने अवचेतन मां को प्रेरित करते हैं पुस्तक में आगे लेखक हमारे अवचेतन मां के लिए एक ब्लूप्रिंट तैयार करने को कहते समय उसके ब्लूप्रिंट में हम रुचि लेते
1:00:55 महान चिंता और नकारात्मकता ही प्रकट होगी इसीलिए हमें अपने अवचेतन मां के लिए एक ऐसा ब्लूप्रिंट बनाना चाहिए जो शांति खुशी और सद्भाव का एहसास कारण और फिर हमारा अवचेतन मां उसे स्वीकार कर लगा और उन चीजों को संभव बनाएगी जो भी आपने उसे ब्लूप्रिंट में लिए हैं दोस्तों अब लेखक हम इस सच्ची प्रार्थना और इसी करने की वैज्ञानिक कल के बड़े में बताते हैं वह एक पंक्ति कहते हैं की मैंगो और वो तुम्हें मिल जाएगा खोजो और तुम का लोग खटखटाओ और दरवाजा खुला जाएगा इसका अर्थ है की हम जो
1:01:42 भी चीज मांगेंगे वह हमें मिल जाएगी जब खटखटाएंगे तो हमारे लिए दरवाजे खुला जाएंगे और जिसे हम खोज रहे हैं उसे का लेंगे लेकिन आपको उन्हें पूरे विश्वास से मांगना होगा तभी आपको मिलेगा हमें मां में उसकी तस्वीर बनानी होगी तभी हमारे अवचेतन मां की शक्ति इस पर कम कर शक्ति है और इसे सच कर शक्ति है इस तस्वीर को हमें पुरी निष्ठा से बनाना होगा हमें इसे अपनी कल्पना में गणना होगा ठीक वैसे ही जैसे आर्किटेक्ट इमारत बनाने से पहले उसकी एक तस्वीर बनती है फिर वो उसे उसे भाव से देखते हैं जैसे वे उसे बांदा देखना चाहते
1:02:29 हैं और कुछ दोनों बाद इमारत बनकर तैयार हो जाति है लेखक कहते हैं की वह भी इस तकनीक का प्रयोग करते हैं जब कभी उन्हें मंच पर जाना होता है भाषण देने से पहले वह पूरे सभागार की एक काल्पनिक तस्वीर अपने अवचेतन मां तक पहुंच देते हैं और ऐसी कामना करते हैं की जितने भी लोग उन्हें सुनने आए हैं उन्हें लेखक को सुनकर बहुत अच्छा ग रहा है और वह ठीक और सुंदरता से भारत है और इसके बाद वह पुरी तस्वीर को मुक्त कर देते हैं और मंच पर पहुंच जाते हैं दोस्तों अब लेखक प्रार्थना की एक और विधि का जिक्र करते हैं जिसका नाम है मानसिक फिल्म विधि
1:03:17 दोस्तों आपने भी यह कहावत सनी होगी की एक तस्वीर 1000 शब्दों के बराबर होती है इस विधि में हम अपनी दुनिया में अपने लिए जैसी स्थिति चाहते हैं उसे एक फिल्म की तरह बना कर अपने अवचेतन मां तक पहुंचने हैं अब लेखक इस विधि का एक चमत्कारी उदाहरण देते हैं जो स्वयं उन्हें के साथ घटित हुआ वह बताते हैं की कुछ साल पहले उन्हें एक लेक्चर टूर पर जाना था और इस सिलसिले में उन्हें बहुत सारे राज्यों में जाना पड़ा वो किसी इलाके में एक परमानेंट जगह चाहते थे ताकि वहां से वह आसानी से जरूरतमंद लोगों की मदद कर सकें उन्होंने दूर-दूर तक सफर किया लेकिन उन्हें परमानेंट जगह नहीं मिली एक रात जब वो तक
1:04:05 गए तो उन्होंने अपने होटल के कमरे में पलंग पर सोते समय यह कल्पना की की वो बहुत सारे लोगों के सामने भाषण दे रहे हैं और वो लोगों से का रहे हैं की मुझे यहां आकर बहुत खुशी हुई और मैंने इतने अच्छे अवसर के लिए प्रार्थना की थी लेखक कहते हैं की जब उनकी आंख खली तो उन्होंने देखा की उनके सामने कोई भीड़ नहीं थी पर वो इस बात से संतुष्ट थे की उनकी यह फिल्म उनके अवचेतन मां तक पहुंच चुकी थी और अब वह अपने तरीके से इसे सच में बादल देगा अगली सुबह जब वह जागे तो उन्हें एक संस्थान से फोन आया जो का रहे थे की वह लेखक को अपना डायरेक्टर बनाना चाहते हैं लेखक ने उनका प्रपोज
1:04:51 एक्सेप्ट किया और कई साल तक वहां बहुत ही आरामदा कम किया वो कहते हैं की अगर आपकी मानसिक तस्वीर और फिल्म में आपकी आस्था है तो वो 100% हकीकत बन जाएगा दोस्तों अब लेखक प्रार्थना की एक और विधि का जिक्र करते हैं जिसका नाम है बोडोएं तकनीक इस तकनीक इसीलिए है क्योंकि नैंसी स्कूल ऑफ हीलिंग के एक साइको थैरेपिस्ट जिनका नाम था ने यह पाया की अब चेतन मां तक अपनी बात पहचाने का सबसे अच्छा तरीका नींद की अवस्था में पहुंचने पर अपनी बात पहुंचाना है क्योंकि इस समय हमारे शरीर के बहुत
1:05:36 सारे प्रयास कम हो जाते हैं और चिंतन द्वारा हम शांति से अपनी बात अपने अवचेतन मां तक पहुंच सकते [संगीत] घर में रहने वाली इस युवा विधवा के अपने परिवार के साथ संबंध बिगड़ गए थे और उनके स्वर्गीय पति ने पुरी जायदाद उनके नाम कर दी थी उनके बच्चों ने वसीयत को गैरकानूनी ठहरने के लिए कोर्ट में मुकदमा डायर किया जब इस विधवा ने लेखक से मदद मांगी तो उन्होंने उन्हें बॉडॉइन तकनीक बताई विधवा ने ऐसा ही किया उन्हें दी अवस्था में अपने
1:06:21 अवचेतन मां तक यह बात पहुंचाई की जो हुआ ईश्वर की इच्छा के अनुरूप हुआ और लगातार 10 दोनों तक उन्होंने पूरे विश्वास से इसे दोहराया 11वीं दिन उन्हें अपने वकील का फोन आया जिन्होंने कहा की उनके बच्चों ने मुकदमा वापस ले लिया है और समझौता करने के लिए तैयार हो गए हैं यह सचमुच चमत्कार था क्योंकि उन्हें अवस्था में हमारा चेतन मां निष्क्रिय हो जाता है इसीलिए सोनी से ठीक पहले और जैन की तुरंत बाद हमें अवचेतन मां तक हर वह बात पहुंच देनी चाहिए जींस हमें लाभ हो क्योंकि ये बिल्कुल सही समय है दोस्तों इसके बाद लेखक हमें प्रार्थना के
1:07:10 लिए सकारात्मक घोषणा यानी पॉजिटिव अनाउंसमेंट के तरीके बताते हैं जिसमें वो कहते हैं की हमें प्रार्थना में निरर्थक दोहराव नहीं करना चाहिए सकारात्मक घोषणा इतनी शक्तिशाली है की यह आपके अवचेतन मां पर बिल्कुल स्पष्ट छाप छोड़ती है लेखक ने यह सकारात्मक घोषणा तब की थी जब उनकी बहन का ऑपरेशन होने वाला था उन्होंने पुरी शांति और सद्भाव से अपनी बहन के लिए प्रार्थना की उन्होंने कहा की यह प्रार्थना मैं अपनी बहन के लिए कर रहा हूं वो बिल्कुल ठीक [संगीत] और मांसपेशियां बादल रही हैं और यह बदलाव
1:08:00 उसके अवचेतन मां के ब्लूप्रिंट के अनुसार हो रहा है उसके अंदर नदी की तरह जीवन बा रहा है वह पुरी तरह से स्वस्थ हो रही है और शांति तथा प्रेम का समुद्र उसके भीतर की बीमारियों को दो रहा है दो सप्ताह के भीतर उनकी बहन पुरी तरह से ठीक हो गई और आश्चर्यजनक बात यह थी की अब उसकी रिपोर्ट्स में कोई गड़बड़ नहीं थी डॉक्टर ने उसे कहा की उसकी हालात में आश्चर्य जनक सुधार हुआ है और अब उन्हें ऑपरेशन की कोई जरूर नहीं है यह चमत्कार लेखक की प्रार्थना का था जिन्होंने इस सकारात्मक प्रार्थना को उनके अवचेतन मां तक पहुंचा था लेखक कहते हैं की हमें तब तक सकारात्मक
1:08:48 घोषणा करते रहना चाहिए जब तक की हमें संतुष्टि ना मिल जाए इसके बाद लेखक प्रार्थना की एक और विधि बताते हैं जिसका नाम है तर्कपूर्ण विधि वह बताते हैं की इसमें हम मैरिज और खुद को ये विश्वास दिलाते हैं की उनकी बीमारी उनके अवचेतन मां की झूठ विश्वास और डर के करण है इसमें हम अपनी मस्तिष्क से तारक करते हैं और रोगी को यह विश्वास दिलाते हैं की उसकी बीमारी उसके नकारात्मक विचारों के करण है और यदि वह इन विचारों को बादल दे तो उसका इलाज किया जा सकता है इसमें हम रोगी को यह विश्वास दिलाते
1:09:34 है की उसके विचारों का बदलाव ही उसके उपचार का आधार है आगे लेखक हमें बताते हैं की जब हम इस प्रार्थना को ईश्वर से जोड़ने हैं तो यह और भी शक्तिशाली हो जाति है और हमारे अवचेतन मां पर एक गहरी छाप छोड़ दी है प्रार्थना करते समय जब हम ईश्वर का स्मरण करते हैं तो उसमें सद्भाव शांति और सेहत की भावना आई है दोस्तों छठी पाठ का यही पर अंत होता है जिसमें हमने शिखा की प्राचीन समय से लेकर आधुनिक समय तक किस प्रकार अलग-अलग त्रिकोण से प्रार्थना करके हम अपनी भावनाओं को अवचेतन मां तक पहुंचने
1:10:19 हैं और जीवन में चमत्कार पाते हैं दोस्तों अब हम शुरू करते हैं पाठ 7 जिसका नाम है अवचेतन मां का झुकाव जीवन की तरफ होता है हमारे जीवन घर में 90% से भी ज्यादा भूमिका हमारी अवचेतन मां की होती है अगर हम इसकी अद्भुत शक्तियों का प्रयोग नहीं करते हैं तो हमारा जीवन सीमाओं में बांध राहत है हमारा अवचेतन मां हमारे शरीर का निर्माता है और इसके लिए सबसे जरूरी केमोन को अंजाम देता है यह हमारी मदद करता है और हमें नुकसान से बचाने की कोशिश करता है हमारा अवचेतन मां हमसे अनुभूतियां प्रार्थना और मनोकामनाओं के जारी बात करता
1:11:07 है यह हमेशा हमें प्रेरित करता है यदि एक बार हमने अपने अवचेतन मां की शक्तियों को जान लिया और उसके साथ सामंजस्य बना लिया तो हमारे जीवन में चमत्कार होना निश्चित है इसके बाद लेखक हमें बताते हैं की किस प्रकार हमारा अवचेतन मां वैज्ञानिक त्रिकोण से अपनी कार्य विधि को अंजाम देता है यानी कम करता है हमारा चेतन मां यानी कॉन्शियस मन सोचा गया और सच माना गया हर विचार हमारी कोरटेक्स द्वारा दिमाग की हर भाग तक भेजता है यह हमारी अवचेतन मां का साथ देते हैं और अब चेतन मां इस पर कम करने लगता है और हमारे संसार में इन चीजों
1:11:55 को वास्तविकता में बादल देता है हमारी बुद्धि हमारी शरीर की देखभाल करती है लेखक कहते हैं की जब हम कोशिकाओं के बड़े में अध्ययन करते हैं तो हमें पता चला है की हमारी कोशिकाओं का समूह एक सामूहिक बुद्धि का निर्माण करती है ताकि हमारी कॉन्शियस मन द्वारा भेजो गया हर आदेश सामंजस्य के साथ पूरा हो कई लोग कहते हैं की बुद्धि हमारे शरीर की रक्षा करती है बशर्ते की हम इसे अपना कम करने दे लेकिन हमारा चेतन मां यानी कॉन्शियस मन इसमें हस्तक्षेप करता है क्योंकि हमारा कॉन्शियस मन बाहर की दुनिया से संपर्क रखना है और डर झूठ विश्वास
1:12:41 इत्यादि द्वारा नकारात्मक विचार उत्पन्न करने लगता है इस वजह से हमारे अवचेतन मां के पास इस पर कम करने के अलावा और कोई चार नहीं बचत हम चाहे या ना चाहे हमारा अवचेतन मां दिन रात कम करता है इसका झुकाव हमेशा जीवन की दिशा में होता है वैज्ञानिकों का कहना है की 11 मीना में हमारा शरीर नया बन जाता है इसका अर्थ है की आप शारीरिक रूप से केवल 11 महीने बूढ़े हैं अगर आप डर गुस्सा जलन और दुर्भावना के विचारों से अपने शरीर में दोष और रोग लेट हैं तो इसके लिए केवल आप ही दोषी और
1:13:26 जिम्मेदार है की जी प्रकार अंधेरे से छुटकारा अपने का तरीका रोशनी करना है ठंड से बचाने का तरीका गर्मी है इसी प्रकार नेगेटिव सोच से बचाने का तरीका पॉजिटिव सोचना है अपनी अवचेतन मां में अच्छाई की घोषणा करें बुराई अपने आप खत्म हो जाएगी हमारी जीवन में सेहतमंद और स्वस्थ होना तो स्वाभाविक है और यह हमारे शरीर की सामान्य भीम का सूचक है लेकिन हमारा बीमा होना असामान्य है और इसका यह भी मतलब है की आप जीवन की दिशा में उल्टी तरफ जा रहे हैं और नेगेटिव सोच रहे हैं हमारे जीवन का नियम विकास का
1:14:15 नियम है यदि आपकी सोच और आपके विचार आपके अवचेतन मां में सामंजस्य नहीं बना का रहे तो यह विचार आपसे चिपक जाएंगे और आपको सताने लगेंगे इससे आपको परेशानी होगी और अंत में यह बीमारी पैदा करेंगे इसलिए जल्द से वर्ल्ड अगर इन विचारों को नहीं छोड़ गया तो शायद यह मृत्यु का करण भी बन सकते हैं अब पुस्तक में एक उदाहरण दिया गया है जिसमें बताया गया है की किस प्रकार एक व्यक्ति ने अपनी रीड की टीवी को अपनी अवचेतन मां की शक्ति से ठीक किया इंडियाना में रहने वाले एंड्रयूज को यह बीमारी हो गई थी वो अपाहिज हो गया था और अपने हाथों और घुटनों के बाल चला था डॉक्टर ने भी
1:15:02 उसकी बीमारी को जवाब दे दिया था लेकिन एंड्रयूज ने हिम्मत नहीं हरि वह प्रार्थना करने लगा और उसने अपने अवचेतन मां में सकारात्मक घोषणा की और इसे दिन में कई बार दोहराया और दूसरों के लिए भी प्रार्थना की वह कहता था की मैं पूर्ण शक्तिशाली और सशक्त हूं स्वयं के लिए और दूसरों के लिए नई प्रार्थना का फल कई गुना होकर उसके पास लोटा जब भी उसके मां में नकारात्मक भावनाएं आई वह तुरंत सकारात्मक सोने लगता और इसी का परिणाम यह हुआ की उसकी अवचेतन मां ने चमत्कार कर दिया और वह पुरी तरह से स्वस्थ और सशक्त बन गया दोस्तों यही पर
1:15:51 सातवें पाठ का अंत होता है जिसमें हमने शिखा की हमारा अवचेतन मां जीवन की और झुका हुआ होता है और प्रतिदिन 24 घंटे कम करता है इसीलिए अपनी नकारात्मक सोच से हमें इसके कार्य में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए आई दोस्तों अब हम चलते हैं अगले अध्याय की तरफ यानी अध्याय आठ जिसका नाम है मनचाही परिणाम कैसे पाएं पाठ की शुरुआत में लेखक कहते हैं की हर व्यक्ति यह बात जानता है की सभी प्रार्थनाएं सफल नहीं होती और जिन लोगों की प्रार्थनाएं सफल नहीं प्रार्थनाएं कामिनी नहीं करती लेखक कहते
1:16:37 हैं की एक सफल प्रार्थना करने के लिए हमें उसके वैज्ञानिक आधार की स्पष्ट समझ हनी चाहिए यदि हमें अपनी प्रार्थनाओं के अपेक्षित परिणाम नहीं मिल रहे हैं तो हमें क्या करना चाहिए लेखक बताते हैं की ऐसे में हमें उन कर्म का पता लगाना चाहिए जिससे हमारी प्रार्थना असफल हुई यह करण या तो विश्वास की कमी हो सकते हैं या फिर बहुत ज्यादा कोशिश कई लोग अवचेतन मां के कम करने के तरीके को पुरी तरह से नहीं समझ पाते और अपनी प्रार्थना को खुद असफल कर देते हैं आपको यह याद रखना चाहिए की आपका अवचेतन मां किसी भी बात को स्वीकार करता है और उसे पर तुरंत कम करने लगता है और
1:17:24 उसके लक्ष्य को पानी में एडी छोटी का जोर लगा देता है अगर आप नकारात्मक बातें ही सोचते हैं तो आपका अवचेतन मां आपके लिए मुश्किल असफलता और दुविधा पैदा करता है अगर आपके विचार सकारात्मक और सद्भावपूर्ण है तो आपको सही जवाब जरूर मिलेगा याद रखें अपने अवचेतन मां पर किसी भी कम को करने का जबरदस्ती दबाव ना डालें ऐसे में आप असफल हो जाएंगे और जो परिणाम आप चाहते हैं वह आपसे दूर हो जाएंगे अब चेतन मां आस्था पर कम करता है आपके दबाव डालने पर नहीं यदि आप प्रार्थना कर रहे हैं साथ ही मां में यह भी का रहे हैं की मुझे उम्मीद नहीं है
1:18:10 की यह कम करेगा या नहीं या मैं उलझन में हूं और मुझे नहीं लगता की मेरी इच्छा कभी पुरी होगी तो आपके अवचेतन मां की और से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी ऐसे में आप कहानी नहीं पहुंच पाएंगे ऐसे में आपका अवचेतन मां ठीक इस तरह बौखला जाएगा जी तरह आप टैक्सी में बैठे किसी ड्राइवर को एक दर्जन अलग-अलग जगह बता दें और कहानी की भी आपको सभी जगह पर एक साथ ले जाए तो वो दुविधा में पद जाएगा अवचेतन मां की असीमित शक्तियों के साथ कम करते समय आपके मां में केवल एक स्पष्ट विचार और उसे पर आपका विश्वास होना चाहिए लेखक कहते हैं की अपने अवचेतन मां को कम करने का भरपूर समय दें
1:18:58 ये आराम से कम करता है अवचेतन मां सबसे समझदार है और हमारे शरीर का मास्टर यह किसी भी अंग को ठीक करने के लिए बहुत सारे तरीके जानता है इसीलिए आप केवल आदेश दें जो सकारात्मक हो और वह अपना कम अच्छी तरह से करेगा है और स्वतंत्र है नकारात्मक विचारों के आने पर इनका प्रतिरोध करें एक छोटे बच्चे की तरह सरल आस्था रखें और आप पाएंगे की
1:19:45 आपके अवचेतन मां ने इस पर कम करना शुरू कर दिया है लेकिन यह कल्पना अनुशासित हनी चाहिए यहां लेखक बाइबल ग्रंथ का उदाहरण देते हुए कहते हैं की उसमें भी साक्षात लिखा है की आप प्रार्थना में जो भी मांगे वह आपको विश्वास करने पर जरूर मिलेगा यहां अनुशासित कल्पना से मतलब है ऐसी कल्पना करना जो वैज्ञानिक हो और हमारे अवचेतन मां तक पहुंच रही हो प्रार्थना में सफलता अपने के लिए एक व्यक्ति इन तीन बटन पर अमल करता है तो उसकी प्रार्थना अवश्य सफल होगी किसी भी समस्या को स्वीकार करना चाहिए अब इस समस्या को हमें अपने
1:20:34 वहीं इसे सुलझाने का सबसे अच्छा समाधान जानता है अब हमें अपने अवचेतन मां पर विश्वास रखना है और आस्था रखती है की यह कम ठीक हो जाएगा इन तीन बटन को माने के बाद चमत्कार होगा सेहतमंद होने के लिए अपने इस विचार को केवल अपने अवचेतन मां तक पुरी आस्था के साथ पहुंच दें इसके बाद आप आराम से बैठ जैन और खुद को इसकी शक्ति की हवाले कर दें हर स्थिति में कहें की सब ठीक हो जाएगा और यह समय भी गुर्जर जाएगा दोस्तों पुस्तक में अब आगे लेखक हमें सावधान करते हैं और कहते हैं की हमें हमारी प्रार्थना की
1:21:19 विपरीत परिणाम भी मिल सकते हैं जब आपकी प्रार्थना में आस्था की कमी होगी और यह आपकी अवचेतन मां को मजबूर करने की कोशिश करेगी तो परिणाम अच्छे नहीं होंगे इस तरह वह प्रार्थना हर कामयाब हो जाएगी यहां लेखक हमें एक उदाहरण द्वारा इसे समझने का प्रयास भी करते हैं वह कहते हैं की शायद आपके साथ भी यह घटना हुई होगी आप परीक्षा में बैठे हैं और जैसे ही आपको आंसर सीट मिलती है तो आपका दिमाग अचानक पुरी तरह से खाली हो जाता है आपको ऐसा लगता है की आपने जितना पढ़ा है वो सब आपका साथ छोड़ रहे हैं आपको कुछ भी याद नहीं आता आप डरते हैं और दिमाग पर जोर डालते हैं लेकिन जितना ज्यादा आप
1:22:06 जोर डालते हैं आपका ज्ञान आपसे उतना ही दूर चला जाता है दुखी होकर आप कुछ पाल के लिए एग्जाम हाल से बाहर निकलते हैं जब आप थोड़ा ठीक महसूस करते हैं क्योंकि बाहर आपका मानसिक दबाव थोड़ा कम हो गया है तो अब जब आप ठीक महसूस करते हैं तो आप पाते हैं की जिन जवानों को थोड़ी डर पहले आप सोने की कोशिश कर रही थी वह अचानक आपके दिमाग में आने लगता हैं अब आपको एहसास होता है की जब आपने अपने दिमाग पर उन्हें याद रखना के लिए जोर दिया तो आप सब भूल गए इसे विपरीत प्रयास का नियम कहते हैं क्योंकि जब आपने खुद को उन्हें याद रखना के लिए मजबूर किया तो आप सब भूल गए यही बात आपकी प्रार्थना और हर
1:22:54 उसे भावना पर लागू होती है जिसे आप अपने अवचेतन मां पर जबरदस्ती ठोकने की कोशिश करते हैं इसीलिए लेखक कहते हैं की हमें अपनी इच्छाओं और कल्पनाओं को संघर्ष से बचाने के लिए उन्हें भी अवस्था में अपने अवचेतन मां तक अपने विचार पहचाने चाहिए क्योंकि इस समय हमारे शरीर के अधिकतर प्रयास बहुत कम हो जाते हैं सोनी से ठीक पहले और जैन के ठीक बाद आपका अवचेतन मां सबसे सशक्त होता है इस समय जब आप कल्पना करते हैं की आपने किसी बड़ी उपलब्धि को हासिल कर लिया है और आप बहुत रोमांस महसूस करते हैं तो आपका अवचेतन मां आपकी इस कल्पना और मनोकामना को वास्तविकता यानी
1:23:41 चमत्कार में बादल देता है अब लेखक एक महिला का उदाहरण देते हैं और हमें बताते हैं की किस प्रकार उसने उन्हें दी अवस्था में अपने अवचेतन मां तक अपनी कल्पना को पहुंचकर उसे वास्तविकता में बादल दिया दोस्तों आठवी अध्याय का यही पर अंत होता है जिसमें हमने शिखा की हमें अपने अवचेतन मां पर किसी प्रकार की जोर जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए और ना ही इसके कम पर किसी भी प्रकार का शक करना चाहिए क्योंकि जहां हमारी आस्था कमजोर पड़ती है वही हमारा अवचेतन मां उसे पर कम करना बैंड कर देता है दोस्तों बढ़ते हैं आगे
1:24:27 क्या सीखने की कोशिश करता है जिसका नाम है व्यक्ति का प्रयोग कैसे करें शायद यही वो अध्याय है जिसका आप बेसब्री से इंतजार कर रहे होंगे दोस्तों इसमें शायद लेखक हमें यह बताने वाले हैं की अब हम अपनी अवचेतन मां का प्रयोग अमीर बने के लिए कैसे कर सकते हैं आज के समय में जहां महंगाई आसमान ऊ रही है वहां हम सबकी इच्छा होती है की हम भी दौलतमंद बने और अपनी जरूर और शौक दोनों पूरे कर पे दोस्तों पाठ की शुरुआत में लेखक हमसे कहते हैं की हम अपने जीवन में ऐसे लोगों को जानते होंगे जो हफ्ते
1:25:13 में केवल कुछ घंटे कम करते हैं और बहुत सारे पैसे काम लेते हैं जो लोग ज्यादा मेहनत नहीं करते हैं वह सोचते हैं की हम खून पसीना बहाकर ही और कड़ी मेहनत करके ही अमीर बन सकते हैं जींस प्रेम है और जो हम करना चाहते हैं और जींस हमें खुशी मिलती है उनका मानना है की दौलत हमारी मस्तिष्क में रहती है और यह व्यक्ति के अवचेतन पर विश्वास से ज्यादा और कुछ नहीं है आप यह कहकर लखपति नहीं बन सकते की मैं लखपति हूं बहुत सारे लोगों के साथ ही दिक्कत होती है की जब उनका बिजनेस कमजोर हो जाता है और स्टॉक मार्केट गिरने लगता
1:26:00 है तो वो बेब्स नजर आते हैं इतनी असुरक्षित महसूस करने लगता हैं की वह अपने अवचेतन मां को नकारात्मक संदेश भेजते हैं और उनका अवचेतन मां उन्हें हकीकत में बादल देता है वह यह जान ही नहीं पाते की यदि वे उसे समय सकारात्मक रहते तो यह जान पाते की उनकी भीतर कभी ना खत्म होने वाला संपत्ति का बहुत बड़ा भंडार पड़ा है जी व्यक्ति ने गरीबी की मानसिकता ही बना ली है वह व्यक्ति खुद को हमेशा गरीब स्थिति नहीं पता है लेकिन इसके ठीक विपरीत जिनका मस्तिष्क दौलत के विचारों से भारत राहत है वो तमाम सुख सुविधाओं में जीवन बिताता है
1:26:46 ईश्वर यह कभी नहीं चाहता की हम गरीबी में जिएं बसे की हम कभी नकारात्मक ना सोच और अपने दिमाग से हर गलत विचार को साफ करके सही विचार भर दें दोस्तों इस अध्याय को सुनते समय शायद आप यह सोच रहे होंगे की मुझे भी दौलत और सफलता चाहिए तो लेखक कहते हैं की प्रतिदिन तीन से कर बार कर से पांच मिनट यह शब्द दोहरा सफलता और दौलत इन शब्दों में अद्भुत शक्ति है यह हमारे अवचेतन मां को प्रेरित करती है और ऐसी परिस्थितियों प्रकट करती हैं जींस यह चीज सच्चाई में बादल जाए की मैं बहुत पैसे वाला हूं बल्कि आप अपने
1:27:34 अंदर शक्तियों पर भरोसा कर रहे हैं धन की भावना से ही धन उत्पन्न होता है और इस बात को हमेशा याद रखें हमारा अवचेतन मां एक बैंक की तरह है जिसका पैसा कभी खत्म नहीं हो सकता इसमें आप जो जमा करते हैं जी भी चीज की छाप छोड़ते हैं चाहे वो दौलत का विचार हो या गरीबी का आपको वही मिलता है लेखक के पास ऐसी बहुत सिकायतें आई हैं जिम लोग अक्सर उनसे कहते हैं की मैं हफ्तों और मीना से का रहा हूं की मैं दौलतमंद हूं मैं अमीर हूं लेकिन कुछ नहीं हो रहा है लेकिन धीरे-धीरे लेखक को यह एहसास हुआ की जब वो खुद से यह का रही थी की मैं दौलतमंद
1:28:20 हूं और अमीर हूं तो उन्हें कहानी ना कहानी अपने मां में ही लगता था की वह खुद से झूठ बोल रहे हैं इसी तरह लेखक को एक और व्यक्ति ने बताया की वह इस सकारात्मक घोषणा से तक गया है की वह अमीर और अब उसकी स्थितियां पहले से ज्यादा खराब है क्योंकि अपने अवचेतन मां को ऐसा कहते समय वह जानता था की यह सच नहीं है इसीलिए इस तरह के वाक्य को आपका अवचेतन मां जानकारी देता है और आपको कुछ नहीं मिलता जब तक हम इन्हें सचमुच स्वीकार नहीं करते तब तक हमारा अवचेतन मां इस पर विश्वास नहीं करता और इस पर कम नहीं करता इसीलिए इस मानसिक संघर्ष से बचाने के लिए लेखक
1:29:06 हमें एक उपाय बताते हैं वह एक कथन रात को ठीक सोनी से पहले बोलने की सलाह देते हैं वो कथन है की दिन रात में अपनी रुचि में समृद्ध हो रहा हूं इस पॉजिटिव अनाउंसमेंट से कोई बहस नहीं होगी क्योंकि यह आपके कॉन्शियस मन से बहस नहीं करेगी लेखक एक उदाहरण के मध्य से ऐसे ही एक कथन का चमत्कार हमें बताते हैं एक दिन उनके पास एक बहुत ही चिंतित बिजनेसमैन आया उसकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी इसीलिए लेखक ने उसे अपने ऑफिस में शांत बैठकर एक कथन दोहराने को कहा वो कथन था मेरी बिक्री हर दिन बाढ़ रही है और इसी
1:29:51 तरह बढ़नी रहेगी इस कथन के करण उनका कॉन्शियस और सब कॉन्शियस मन मिलकर यह कम करने लगे और फिर उन्हें अच्छे परिणाम मिले लेखक हमें सुझाव देते हैं की जी तरह पूरे चक पर कभी साइन नहीं करना चाहिए ठीक इस तरह हमें इस तरह की बातें भी कभी नहीं सोचनी चाहिए की कम चलने के लिए मेरे पास पैसे नहीं है मैं गरीब हूं तुम मेरे पास पैसे की तंगी है मेरे पास कर्ज की किस्त नहीं चुका अपने के करण अपना घर तक गिरवी रखना की स्थिति है याद रखिए जब आप इस तरह की नकारात्मक कथन अपने मां में सोचते हैं तो आपका अवचेतन मां इसे आग्रह के रूप में स्वीकार करता है और अपने
1:30:38 तरीके से इन पर कम करना शुरू कर देता है नतीजतन आपके जीवन में बढ़ाएं मुश्किलें और तनावपूर्ण स्थितियां पैदा हो जाति हैं दोस्तों हमारा अवचेतन मां हमें हर चीज का बास देता है जिसमें दौलत की भावना है उसमें हमारा अवचेतन मां उसे बास लगाकर अर्थात बहुत साड़ी दौलत देगा लेकिन जिसमें कमी की भावना है वह उसमें भी प्यास लगाएगी और कमी को बढ़ाएगी खुद के सब कॉन्शियस मन को ऐसे पॉजिटिव अनाउंसमेंट यानी सकारात्मक घोषणाएं करने के बाद शायद का सकते हैं की मैंने ऐसा किया था लेकिन कुछ नहीं हुआ और आपको रिजल्ट ना
1:31:25 मिले लेखक कहते हैं की आपका करण यह था की शायद आप 10 मिनट बाद ही डर गए थे और आपने स्वयं उसे सकारात्मक विचार को जानकारी दिया था जिसकी आपने घोषणा की थी ये बात बिल्कुल ऐसी ही हुई जैसे की आपने दिन में कोई बी जमीन में बॉय और इस दिन आपने उसे खुद कर वापस निकाल लिया आप उसे बी की जड़ी निकालने और बढ़ाने का मौका ही नहीं देते लेखक कहते हैं की जैसे ही आप ये खाने वाले हो की मैं उसे चीज के पैसे नहीं दे पाऊंगा इससे पहले की आप इस नकारात्मक वाक्य को पूरा करें आप इसे बदलकर यह का दें की मैं सभी त्रिकोण से अमीर बनेगा और सकारात्मक कर दें हमारे अवचेतन मां में विचारों की
1:32:13 कभी कमी नहीं होती इसके अंदर अनगिनत विचार है जो हमारे कॉन्शियस मन यानी चेतन मां में अनगिनत त्रिकोण से पैसे भरने के लिए तैयार हैं बशर्ते की आप सकारात्मक विचार पर विश्वास रखें इस दौरान लेखक केवल इस बात पर जोर देना चाहते हम अपने अवचेतन मां को यह विश्वास दिल दें की दौलत हमारी है और हमारे जीवन में शामिल हो रही है तो अंततः आपको यह मिल जाएगी चाहे किसी भी रूप में मिले दोस्तों दुनिया में काफी सारे लोग तंगी का जीवन गुजरते हैं अब लेखक इस तंगी के असली कर्म पर रोशनी डालते हैं और कहते हैं की आपने कई लोगों को उनका जीवन
1:32:59 तंगी में गुजरते देखा होगा जो अपने महीने का खर्च चलने के लिए भी संघर्ष करते हैं क्या आपने कभी उनकी बातें सनी है वे हमेशा उन लोगों की निंदा करते हैं जो अपने जीवन में सफल हुए हैं और कहते हैं की ओ आदमी तो बदमाश है बेकार है उनकी टांगे का यही एक करण है क्योंकि वह इस चीज की निंदा करते हैं जिसे वह चाहते हैं वे अपने अमीर साथियों की आलोचना करते हैं क्योंकि वह उनकी सक्सेस से जलते हैं दौलत को दूर भागने का सबसे तेज तरीका अमीर लोगों की निंदा करना ही है इसके अलावा लेखक एक और भावना की बात करते हैं जो दौलत के बीच सबसे बड़ी बड़ा बंता है और वो
1:33:45 भावना है ईर्ष्या यानी जलन की भावना मां लीजिए आप अपने किसी प्रतिस्पर्धी को बैंक में बहुत सारे पैसे जमा करते हुए देखते हैं लेकिन इस पंक्ति में आप भी हैं जिसके पास बहुत थोड़े रुपए हैं तो आप अपने प्रतिस्पर्धी को देखकर जलन की भावना महसूस करेंगे इस भावना से उभरते का एक तरीका है की आप इस समय अपने मां में कहें की कितनी बढ़िया बात है मुझे उसे व्यक्ति की संपत्ति पर खुशी होती है इसीलिए मैं चाहता हूं है की वह और भी ज्यादा पैसे कमाई जलन की भावना विनाशकारी होती है क्योंकि यह आपको नेगेटिव सिचुएशन में रखती है इसीलिए पैसे पास आने की बजे आपसे दूर भाग जाते
1:34:31 हैं क्योंकि आप किसी और के पैसे या धन संपत्ति से चिढ़ महसूस करते हैं इसीलिए लेखक कहते हैं की आप तत्काल दवा करें की आप उन्हें इससे भी ज्यादा दौलतमंद देखना चाहते हैं यह आपके नेगेटिव थॉट्स को हटा देगा और आपके अवचेतन मां को दौलत प्रधान करने का आदेश देगा यदि आप इस बात की चिंता कर रहे हैं की कोई बेईमानी से पैसे काम रहा है तो इस तरह की चिंता करना छोड़ दीजिए अगर आपका शक सही है और आप जानते हैं की इस तरह के व्यक्ति अपने मस्तिष्क के नियम का गलत प्रयोग कर रहे हैं तो समय के साथ यह नियम उन्हें परिणाम भी देगा और आप सावधान रहे उनकी आलोचना ना करें और इसके
1:35:18 करण आपको पहले ही बताए गए हैं दोस्तों अब लेखक हमें अमीर बने की एक ट्रिक बताते हैं जिसे हम अपने अवचेतन मां के साथ प्रयोग कर सकते हैं वो कहते हैं की रात को सोते समय दौलत शब्द को शांति और सरलता से दोहराएं और बार-बार ऐसा करें किसी लोरी की तरह परिणाम देखकर आप हैरान हो जाएंगे क्योंकि दौलत एक पहाड़ की तरह आपकी तरफ आएगी और आपकी अभी चेतन मां की जादू शक्ति इसकी सबसे बड़ी मिसल है दोस्तों अध्याय यही पर समाप्त होता है जिसमें हमने शिखा की किस तरह हम अपने अवचेतन मां की शक्तियों का प्रयोग धनवान बने के लिए कर
1:36:05 सकते हैं आपको तो केवल धन का विचार सफलता पूर्वक पूरे विश्वास और आस्था के साथ अपने मां तक पहुंचाना होगा यहां मां से अर्थ आपकी अवचेतन मां से है आई दोस्तों देखते हैं की पाठ 10 जिसका नाम है आपको अमीर बने का हक है मैं लेखक हमें क्या बताना चाहते हैं लेखक कहते हैं की अमीर बन्ना हमारा बुनियादी अधिकार है क्योंकि आप इस दुनिया में एक अच्छा जीवन जीने स्वस्थ खुश और आजाद रहने के लिए आए हैं इसीलिए आपको इतने पैसों का हक होना चाहिए जितने की आपको जरूर है और जो आपको एक सुखी और समृद्ध जीवन जीने के लिए
1:36:51 आवश्यक होगी जब आप अपनी चेतन मां की शक्ति से दौलतमंद होने का आनंद ले सकते हैं तो तंगी में क्यों रहा जाए इस अध्याय में हम सीखेंगे की हम पैसों से दोस्ती कैसे कर सकते हैं और अगर एक बार आपने पैसों से दोस्ती कर ली तो आपके पास एन केवल अपनी जरूर पुरी करने का पैसा होगा बल्कि उससे भी ज्यादा पैसों कमरे में सोने में कभी शर्मिंदगी महसूस एन करें क्योंकि इस ब्रह्मांड के सभी लोग इसकी इच्छा रखते हैं पैसों की सोच रखना ना सिर्फ अच्छा है बल्कि बहुत ही अच्छा है लेखक कहते हैं की जी प्रकार हमारे शरीर को स्वस्थ रखना के
1:37:37 लिए रक्त की आवश्यकता होती है इस प्रकार हमें आर्थिक रूप से स्वस्थ रखना के लिए धन की आवश्यकता पड़ती है धन ही किसी राष्ट्र की आर्थिक सेहत का मापन होता है और किसी व्यक्ति के जीवन में सुंदरता स्वतंत्रता और प्रचुरता का प्रतीक भी होता है इतिहास गवाह है प्रत्येक युग में किसी एन किसी रूप में धन का प्रयोग होता रहा है चाहे वह सोना हो चांदी हो मां के हो या कोई और चीज पुराने समय में लोगों की दौलत उनके भिड़े गायों और बैलों से की जाति थी लेकिन अब हम पैसों प्रयोग करते हैं क्योंकि इसका करण स्पष्ट है अब हम बेल चुकाने के लिए अपने
1:38:25 साथ भिड़े को लेकर नहीं जा सकते बल्कि पैसे या चेक के रूप में भुगतान करते हैं इसीलिए यह जानना आपके लिए जरूरी हो जाता है की हम अमीर बने की र पर कैसे चलें ताकि
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