August Ki Subah | Written By Tarang Sinha | YKIB Season 7 | Neelesh Misra

Brief Summary

This is the story of Abheer Malhotra, a Bollywood singer, and Naina, a painter and graphic designer. Their paths cross on a beach in Alibag, leading to a unique connection built on shared interests and unspoken feelings. Despite Abheer being married, their bond deepens through art, books, and quiet understanding. The story explores themes of unspoken love, the complexities of relationships, and the beauty of connections that defy conventional definitions.

  • A chance encounter leads to a deep connection.
  • Unspoken feelings and the complexities of love.
  • The beauty of unconventional relationships.

August Morning

Abheer, a Bollywood singer seeking solace from his hectic life, encounters a girl painting on a beach in Alibag. He is captivated by her artistic style and the serene atmosphere. An awkward exchange occurs when he accidentally startles her, causing her water bucket to spill. Despite the initial awkwardness, he compliments her painting, and she responds with a simple "Thank you," seemingly unaware of his celebrity status.

Unexpected Connection

A sudden rain shower forces Abheer and the girl to seek shelter together at a nearby tea stall. They begin to converse, and she reveals that she recognises him as Abheer Malhotra, a singer she admires. She clarifies that she is not the type of fan who would intrude on his privacy. Their conversation flows easily, and they find comfort in each other's company amidst the rain. Abheer's wife, Anamika, calls, disrupting the moment.

Reunion on the Beach

The following morning, Abheer returns to the beach and finds the girl reading. He learns her name is Naina and discovers a shared appreciation for books and art. Naina's genuine nature and lack of interest in social media fame intrigue Abheer. Their conversation is interrupted by a message from Anamika, reminding Abheer of his responsibilities and his impending departure.

Mumbai Encounters

Back in Mumbai, Abheer is performing at a music launch when he spots Naina in the crowd. He feels a jolt of surprise and searches for her after the performance, only to find her gone. Later, on the terrace, he finds Naina, who reveals she has moved to Mumbai for a job. It turns out that she is a graphic designer who has joined Riddhi's agency and will be working on Abheer's upcoming stage shows.

Studio Life

Naina's presence in the studio brings Abheer a sense of peace and comfort. They develop a silent understanding, communicating through glances and shared interests. Naina's thoughtful gestures, such as hand-painted bookmarks, deepen their connection. Abheer finds himself drawn to her quiet strength and artistic spirit.

Unspoken Feelings

During a casual conversation in the studio, Vishal expresses his admiration for Naina. Abheer impulsively declares that there is no chance for Vishal, surprising himself and the others. Later, he asks Naina hypothetically what she would do if someone proposed to her. Naina responds that she would decline, explaining that she wants to be with someone she loves, regardless of whether they reciprocate her feelings.

A Birthday Revelation

On Abheer's birthday, Naina gifts him a portrait she painted of him, which is admired by everyone. Anamika unexpectedly announces that Vishal is in love with Naina and wants to marry her, creating an awkward situation. Naina gently rejects Vishal's feelings, stating that love cannot be forced.

Unspoken Truths

After the birthday party, Abheer follows Naina outside, where Vishal apologises for the awkward situation. Naina dismisses his apology and begins to leave. Abheer offers her a ride, and she reluctantly accepts. The next day, Abheer finds Naina at a church. She admits that she cannot be angry with him and reveals that she cannot marry someone she does not truly love.

Unconventional Love

Naina expresses her fear of falling in love with the wrong person, someone who is either unable to love her back or is already married. The unspoken truth hangs in the air between them. Naina states that some relationships are beyond names and do not need closeness. The story concludes with Abheer reflecting on his first meeting with Naina, cherishing the memory of that August morning as one of the most beautiful moments in his life.

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Transcript

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0:00 बात पे बात पे अपनी ही बात कहता है। मेरे अंदर मेरा छोटा सा शहर रहता है। दोस्तों मेरा नाम है नीलेश मिश्रा। कहानियां सुनाता हूं। दोस्तों मैं आपको सुनाने जा रहा हूं अपनी मंडली की सदस्या तरंग सिन्हा की लिखी कहानी अगस्त की सुबह। वो सुबह कुछ अजीब थी जिस दिन मैं उससे मिला था। एक नीम खामोशी थी वहां। जाने कितने दिनों बाद गया था समंदर के किनारे। मेरी जिंदगी में कभी-कभी बहुत शोर होता है और फिर मुझे खामोशी और सुकून की तलाश होती

0:47 है। मेरे दोस्त अक्सर कहते हैं यार अभीर तू किस टाइप का सेलिब्रिटी है? तू इतना बड़ा बॉलीवुड सिंगर है पर आधे टाइम लाइमलाइट से गायब रहता है। अगस्त की उस अलसाई सी सुबह नींद बहुत जल्दी खुल गई थी और मैं बस निकल पड़ा था पैदल। अलीबाग में जहां मैं ठहरा था वहां से किम बीच ज्यादा दूर नहीं है। मैं यूं ही टहल रहा था। सफेद रेत नारियल के पेड़ कहीं-कहीं आधे अधूरे मेस मन पे मरहम सी शांति। वो जहीन सा समंदर और किनारों को मुसलसल चूमती समंदर की लहरें। थोड़ा और चला तो एक लड़की पेंटिंग कर रही थी। ईज़ल पर रखे कैनवस पर उसकी हथेली बड़े ही कलात्मक ढंग से चल रही

1:32 थी। मैंने पहली बार किसी को अपनी उंगलियों से पेंटिंग करते देखा था और वो भी इतनी खूबसूरती से। मेरे सामने दो खूबसूरत समंदर थे। एक बीच पर दूसरा उसके कैनवस पर। मैं उसे बिल्कुल डिस्टर्ब नहीं करना चाहता था। चुपचाप वहां से निकल जाना चाहता था। पर जाने क्यों उसने पलट कर देखा और एक पल के लिए मैं उसकी आंखों में खो गया। उसकी काली गहरी आंखों ने जैसे एक कहानी समेट रखी थी अपने अंदर। पर शायद वह घबरा गई क्योंकि उसके हाथ से टकराकर उसका छोटा सा पानी का बकेट गिर गया और रंगीन पानी सफेद रेत में जजब हो गया। आई एम रियली सॉरी। आई डिडंट मीन टू स्टार्ट ली। मैंने कहा और इससे पहले कि मैं झुककर बकेट उठा पाता। उसने

2:20 मेरी बात को पूरी तरह नजरअंदाज करके उसे उठा लिया। वेल आई विल लीव यू टू इट। कहकर मैं आगे बढ़ने लगा। वैसे आपकी पेंटिंग बहुत खूबसूरत है और पेंटिंग करने का अंदाज तो बहुत ही अनोखा। उसने एक सरसरी सी निगाह मुझ पर डाली और फिर धीरे से बोली, थैंक यू। यह पहली बार था जब किसी ने मुझको इतने करीब से देखकर भी बिल्कुल नहीं पहचाना था। यह बात मुझे अच्छी लगी या नहीं। मैं इस सोच में उलझा था कि तभी अचानक हल्की बारिश होने लगी। ओह नो। हम दोनों बोल पड़े। मैंने पेंटिंग को झट से हाथ में लेकर पलट दिया ताकि बारिश की बूंदे उसे खराब ना कर दें। उसने भी अपने सामान को जल्दी-जल्दी एक बैग में भरकर ईज़ल को मोड़ लिया और फिर हम दोनों थोड़ी दूर पर लगी एक टपरी की तरफ

3:08 दौड़ पड़े। थैंक यू। वहां पहुंचते ही उसने कहा, "मैंने पेंटिंग उसे वापस कर दी। वैसे मुझे खुशी थी कि मैंने उस पेंटिंग को खराब होने से बचा लिया था। नहीं सच में यह कमीशन पेंटिंग है। खराब हो जाती तो मेरी मेहनत बर्बाद हो जाती। यह कहते हुए उसने अपने बालों से उतरती बारिश की बूंदों को अपने मल्टी कलर स्टोल से पोछ लिया। मैंने अपने हाथों को अपने गीले बालों में फिराया तो उसने फौरन अपने बैग से कुछ टिश्यूज निकाल कर मुझे पकड़ा दी। चाय पिएंगे? टपरी वाले ने पूछा। हां बाबा। उस लड़की ने तुरंत जवाब दिया। कुछ ही देर में हवाओं में अदरक और इलायची की खुशबू घुलने लगी। टपरी वाले ने चाय का गिलास बढ़ाया तो मैंने अपने हाथों को अपने ट्रैक सूट की

3:54 जेब में डाल लिया। उस लड़की ने मुझे अजीब नजरों से देखा। फिर बोली, "आपने पहले कभी ऐसे टपरी पर चाय नहीं पी।" यह सवाल नहीं था। और यह आप कैसे कह सकती हैं? मैंने कहा, "आपके चेहरे पर लिखा है।" उसने कहा तो मुझे हंसी आ गई। पी लीजिए कुछ नहीं होगा। मैंने चाय का गिलास ले लिया। चाय का एक घूंट भरकर वह अचानक मुस्कुराने लगी और फिर बोली, आई कांट बिलीव कि मैं आपके साथ बातें कर रही हूं कि मैं अभीर मल्होत्रा के साथ चाय पी रही हूं। मैं मुस्कुरा दिया। मुझे तो लगा कि आपने मुझे पहचाना ही नहीं। आपको कौन नहीं पहचानता? उसने मेरी तरफ देखा। मैं तो फैन हूं आपकी। पर हां, मैं उस टाइप की फैन नहीं जो अपने फेवरेट सेलिब्रिटी को परेशान करे। तो किस टाइप की फैन हैं आप? मैंने कहा तो वह बस देखती रही

4:41 जैसे उसे कोई जवाब ना सूझ रहा हो। वैसे आपको मेरे सारे गाने पसंद हैं? मैंने बात बदलने के ख्याल से कहा। नहीं पर जितने गाने मुझे पसंद हैं वो सारे आपके हैं। फिर थोड़ा रुक कर बोली मैं एक बार आपके लाइव शो में भी गई थी। आप स्टेज पर बिल्कुल सामने थे और मैं मैं हजारों की भीड़ का एक हिस्सा। वह बोल रही थी और उसके चेहरे से लग रहा था जैसे उसने वह लम्हा फिर से जी लिया हो। मतलब एक तरह से हम पहले भी मिले हैं। मैंने कहा फिर हम चुपचाप चाय पीते रहे। बारिश की टिप टिपिर और हमारे दरमियान एक बेहद सहज खामोशी। दो अजनबी जो अब शायद इतने अजनबी नहीं थे। रात थकी सी मेरे सामने बैठी थी और मैं रिसोर्ट के पोटिकों

5:28 में बैठा एक किताब पढ़ रहा था। अभीर कल हम यहां से जा रहे हो क्या? अनामिका मेरे पास आकर बैठ गई। तुम भी क्या ऐसी बोरिंग सी जगहों पर आ जाया करते हो? उसने कहा, चले जाएंगे कल। मैंने कहा, "मैं जितना ज्यादा शोर से दूर भागता था, मेरी पत्नी को शोरशराबा उतना ही ज्यादा पसंद था। हां, वैसे भी कल रात मुझे एक बहुत बड़ी पार्टी में जाना है यार। वहां पहुंच के शॉपिंग भी करनी है। और पार्टी में तुम्हें भी आना होगा। कोई बहाना नहीं। ओके। तुम साथ होते हो तो मेरी शान बढ़ती है यार। उसकी शान। अनामिका ने यह कहा तो जाने क्यों मेरा मन थोड़ा निराश हो गया। उस निराशा की परछाई मेरे चेहरे पर आई होगी शायद। पर अनामिका उठकर चली गई। या तो मैं अपनी भावनाएं छुपाने में माहिर था या फिर 3 साल का वक्त

6:16 शायद इतना नहीं होता कि आप अपने पार्टनर के चेहरे को पढ़ लें। फिर पता नहीं क्यों अचानक उस लड़की की बात याद आ गई। आपके चेहरे पर लिखा है। अगली सुबह मैं फिर से उसी बीच पर था। ऐसा नहीं था कि मुझे यकीन था कि वो वहीं मिलेगी। पर वो दिख गई तो अच्छा लगा। आज वो पत्थर पर बैठी कोई किताब पढ़ रही थी। जान सकता हूं कौन सी किताब है। मेरी आवाज सुनकर उसने चौंक कर मेरी तरफ देखा। जैसे एक बेयकीनी एक छोटी सी मुस्कान बनकर उसके होठों पर आ गई। उसके हिस्से की धूप मृदुला गर्ग उसने एक बेहद खूबसूरत बुकमार्क जो उसने शायद पेंट किया था किताब में रखकर उसे बंद कर दिया। व्हाट अ लवली टाइटल

7:02 मैंने कहा मैं यहां बैठ जाऊं। मैंने उसके सामने वाले पत्थर की ओर इशारा करके पूछा तो उसने बस हां में सर हिलाया और बोली है ना हां कैसी है? और वो बुकमार्क बहुत खूबसूरत है। मैंने कहा थैंक यू। और अच्छी किताब है। अलग है। वैसे अलग तो तुम भी हो। मैंने कहा किस लिहाज से? हर लिहाज से। तुम्हारे हाथों में फोन नहीं होता। तुमने मेरे साथ सेल्फी नहीं ली। उसे सोशल मीडिया पर नहीं डाला। वो मुस्कुराई। फिर बोली आपके साथ बातें करना, वक्त बिताना इतना स्पेशल है कि सोशल मीडिया क्या? मैं किसी से शेयर नहीं करना चाहूंगी। उसकी यह बात मेरे दिल में बंद हो गई। पर उसका चेहरा ऐसा हो गया जैसे उसने बेखयाली में अपना दिल खोल कर रख दिया हो। वो थोड़ा असहज

7:50 होने लगी तो मैंने बात की दिशा बदल दी। तुम कभी पेंटिंग ब्रश इस्तेमाल करती हो या तुम्हारी उंगलियां ही पेंटिंग ब्रश हैं। मैंने कहा तो वह हंस पड़ी और फिर बस यूं ही रंग और कैनवस की बातें शुरू हो गई। बातें तो वाकई बहुत सी थी उसके साथ करने को। किताबें, पेंटिंग्स, ऑफ बीट फिल्में, संगीत, आसमान के रंग, समंदर, नारंगी सूरज क्षितजित से ऊपर आ गया था और हर तरफ सुनहरी सी धूप बिखरने लगी थी। कहने और सुनने में काफी वक्त गुजर गया। अनामिका का मैसेज आया तो मुझे ख्याल आया कि बहुत देर हो गई थी। मैं उठकर खड़ा हो गया। मैं आज जा रहा हूं। उसे यह बताना शायद जरूरी नहीं था। पर फिर भी मैंने बताया। इस बात से अगर वह उदास हुई तो उसने

8:37 जाहिर नहीं किया। बस कुछ पल देखती रही। फिर बोली शायद अब हम फिर कभी ना मिले। पर मैं इस मुलाकात को कभी नहीं भूलूंगी। मैं भी मैंने कहा मैं जाने के लिए मुड़ा और फिर पलट कर धीरे से पूछा। नाम जान सकता हूं तुम्हारा? नैना। कुछ लोग होते हैं ना जो आपसे मिलते हैं, बिछड़ जाते हैं। मगर फिर भी उनके वजूद का थोड़ा सा हिस्सा आपके पास रह जाता है। मैं मुंबई वापस आ गया और नैना जैसे एक ख्याल बनकर मेरे साथ आ गई। और मैं अपने दिल का एक कतरा वहीं किम बीच पर छोड़ आया। यह इतना स्पेशल है कि सोशल मीडिया क्या? मैं किसी से शेयर नहीं करना चाहूंगी। उसकी यह बात मुझे कई दफा याद आई।

9:23 वैसे बताया तो मैंने भी किसी को नहीं था। कुछ बातों को मन के किसी कोने में सहेज कर रखना अच्छा लगता है। वो जो बस आपका हो। उस दिन एक नई फिल्म का म्यूजिक ल्च था जिसके ज्यादातर गाने मैंने ही गाए थे। मेरे स्टेज पर पहुंचते ही पूरा हॉल तालियों की आवाज से गूंज गया। मैं गाने के अंतरे की पहली लाइन पर था कि मेरी नजर हॉल के बिल्कुल आखिरी छोर पर गई। नैना खड़ी थी। एक पल को ऐसा लगा जैसे मैं लिरिक्स भूल जाऊंगा। नैना [संगीत] यहां गाना खत्म करते ही जर्नलिस्ट्स और फैंस की भीड़ से गुजरता हुआ मैं हॉल की एग्जिट पर पहुंचा तो नैना वहां नहीं थी।

10:09 मुझे लगा जिसे अनजानों के बीच कोई पुराना दोस्त मिला और फिर से बिछड़ गया। अजीब था। बस दो बार मिला था उससे। वो भी 2 महीने पहले। मैंने नजरें इधर-उधर दौड़ाई पर वो नहीं दिखी। तो क्या वह मेरा वहम था? मन में एक अजीब सी बेचैनी घर कर गई। मैं उस बिल्डिंग की टेरेस पर आ गया। रात बड़ी रूमानी सी थी। समंदर की लहरों का शोर सुकून भरा था। झिलमिलाती रोशनी में नहाया नरिमन पॉइंट। ऐसा लग रहा था जैसे मुंबई कोई जश्न मना रहा हो। हाय। पीछे से आवाज आई तो मैं पलटा। बिल्कुल सामने खड़ी थी। सफेद कॉटन शर्ट, जींस और कंधे पर सैचल बैग। टेरेस पर लगी पीली रोशनी में उसका चेहरा अलग ही दिख रहा था। मुझे लगा कि तुम

10:57 बिना मिले चली गई। मैं यह कहना चाहता था पर कहा नहीं। मुझे लगा कि तुम अलीबाग में रहती हो। फिर यहां मैंने पूछा। पीछा नहीं कर रही हूं मैं आपका। मान ली तुम्हारी बात। मैंने मुस्कुरा कर कहा। पिछले हफ्ते ही मुंबई शिफ्ट हुई हूं। वो मेरे शहर आ गई थी। इस बात से मुझे एक अजीब सी खुशी हुई थी। नहीं जॉब इससे पहले कि वह कुछ कहती विशाल और रिद्धि वहां आ गए। मेरे सबसे पुराने और खास दोस्त। यार तू कहां गायब हो जाता है हमेशा? विशाल ने कहा और फिर नैना को देखकर ठिठक गया। रिद्धि ने पहले नैना को देखा। फिर मुझे। फिर आंखें सिकोड़ कर बोली। तुम दोनों एक दूसरे को जानते हो। थोड़ा-थोड़ा। यह नैना है एंड शी इज़ अ वंडरफुल पेंटर। वह तो मैं जानती हूं।

11:44 रिद्धि मुस्कुराई। पर तुम शायद यह नहीं जानते कि यह बहुत ही टैलेंटेड ग्राफिक डिजाइनर है। इसने कल ही मेरी एजेंसी ज्वाइन की है। अब हम तुम्हारे अपकमिंग स्टेज शोज़ पर काम करने वाले हैं। कभी-कभी किसी की मौजूदगी ऐसी होती है जैसे एक तल्ख सी दोपहर में ठंडी हवा का झोंका। नैना स्टूडियो आती तो मुझे ऐसा ही महसूस होता। मुझे देखकर वह धीमे से मुस्कुराती और मुट्ठी भर सुकून मेरी तरफ सरका कर विशाल और रिद्धि के साथ काम में जुट जाती। खाली वक्त में वह अपनी स्केच बुक में इलस्ट्रेशंस बनाती। कभी रिद्धि की किसी बात पर हंस पड़ती और मुझसे नजरें मिलते ही उसकी हंसी सकुचाकर एक हल्की सी मुस्कान में तब्दील हो जाती। मेरे स्टूडियो में बुकशेल्फ वाला कोना हम दोनों का फेवरेट

12:31 था। वो मेरी किताबों से खेलती तो मुझे एक अजीब सा अपनापन महसूस होता। अच्छी किताबें ले जाओ। एक दिन मैंने कहा तो उसकी आंखें चमक उठी। अगले हफ्ते जब वह बुक वापस लेकर आई तो उसमें खूबसूरत हैंड पेंटेड बुकमार्क्स थे। कभी मैं परेशान होता तो फौरन समझ जाती और अपनी भवें उठाकर ऐसे देखती जैसे पूछ रही हो। क्या हुआ? और बस मेरा परेशान मन हल्का हो जाता। वक्त के साथ हमारे दरमियान एक खामोश सा रिश्ता बनता जा रहा था जिसे शब्दों में बयान करना बहुत मुश्किल था। हम आर्टिस्ट्स के लिए वीकेंड और हफ्ते के बाकी दिनों में यूं तो कोई फर्क नहीं होता। पर उस वीकेंड हम लोगों ने ऑफ लिया था तो स्टूडियो में कम

13:16 काम था। रिद्धि, विशाल और मैं कारपेट पर एक साथ बैठे थे। अनामिका स्टूडियो में वैसे तो कम ही आती थी पर उस दिन काउच पर बैठी कोई फिल्म देख रही थी। आज नैना नहीं आई। अनामिका ने पूछा। हां, उसको कुछ काम था। रिद्धि ने अपने मोबाइल फोन से नजर हटाए बगैर जवाब दिया। हम पेंटिंग कर रही होगी। उसे एक बड़ा आर्डर मिला है। मैंने अपने गिटार के तारों के साथ खेलते हुए कहा। मुझे बहुत अच्छी लगती है वो। विशाल अचानक बोल पड़ा। बहुत कौन? रिद्धि ने पूछा। नैना आई वांट अ मैरी आया। डोंट इवन ट्राई। कोई चांस नहीं है। मैंने तपाक से कहा। मैंने पता नहीं यह क्यों कहा? यह जवाब देना ना देना नैना का काम था। मेरा नहीं। अरे क्यों? अनामिका बोली वो सिंगल

14:03 है समझदार है और विशाल इतना अच्छा है तुम्हें क्या प्रॉब्लम है मुझे क्या प्रॉब्लम होगी मैंने कह तो दिया था पर मुझे थी प्रॉब्लम लेकिन क्यों यह क्या हो रहा था मुझे अगली बार जब मैं नैना से मिला तो यूं ही पूछ लिया सपोज तुम्हें कोई प्रपोज करे तो तुम क्या करोगी मैं कहूंगी थैंक यू बट नो थैंक यू उसने सपाट से स्वर में कहा क्यों आई मीन अगर वो अच्छा हो और प्यार करता हो तुमसे तब उसने कैसे संशय भरी आंखों से देखा था मेरी तरफ। अरे वैसे ही पूछ रहा हूं। मैंने कहा तो वो आश्वस्त हो गई। वह हमेशा मान लेती थी मेरी बात। उसके इस भरोसे से कभी-कभी घबराहट होती थी मुझे। कायदे से हमें ऐसे प्रपोजल पर ध्यान देना चाहिए। नैना ने कहा, पर हम उसके साथ

14:49 नहीं रहना चाहते जो हमें प्यार करता है। हम उसके पास रहना चाहते हैं जिसे हम चाहते हैं। चाहे वह हमें प्यार करे या ना करे। चाहे उसकी जिंदगी में हमारे लिए जगह हो या ना हो। 21 फरवरी की रात थी मेरा बर्थडे। नैना ने जो गिफ्ट मुझे दिया था वह बहुत खास था। उसने मेरा पोट्रेट पेंट किया था। मेरी अब तक की सबसे अच्छी तस्वीर। वाओ नैना दिस इज ब्यूटीफुल। रिद्धि ने कहा, इतना अच्छा तो नहीं दिखता यह? कहकर उसने मेरे कंधे पर एक चपेट लगाई। मेरी पहली पोट्रेट पेंटिंग है। नैना ने कहा, हमारी नजरें मिली तो वह धीमे से मुस्कुरा दी। मैंने कभी कहा नहीं उससे पर जब वो मुस्कुराती थी तो बच्चों सी

15:34 मासूम लगती थी। नैना अनामिका ने अचानक कहा विशाल को तुमसे कुछ कहना है। हम पहले विशाल को फिर एक दूसरे को देखने लगे। विशाल ने अपनी आंखें बड़ी करके अनामिका को देखा तो वो बोली अरे मुझे क्या देख रहे हो? बोलो जो बोलना चाहते हो? एक घबराहट सी उभर आई थी विशाल की शक्ल पर। अच्छा छोड़ो मैं ही बताती हूं। अनामिका बोल पड़ी। नैना विशाल तुमसे प्यार करने लगा है। शादी करना चाहता है। कमरे में सन्नाटा पसर गया। मैंने अनामिका को हैरान होकर देखा तो उसने मुस्कुराते हुए अपने कंधों को उचका दिया। फिर एक पल के लिए मेरी आंखें नैना पर ठहरी। वो मुझे ही देख रही थी। मैं उससे नजरें नहीं मिला पाया और उसी पल वह समझ गई

16:22 कि विशाल का उससे बात करना मेरे लिए नई खबर नहीं थी। विशाल की नजरें नैना पर टिकी थी और उसके चेहरे की घबराहट मुस्कुराहट में तब्दील हो गई थी। यह मजाक है। राइट? नैना ने विशाल की तरफ मुड़कर कहा। रॉन्ग विशाल बोला मैं कह नहीं पाया तुमसे पर यह मजाक नहीं है। लेकिन आप मुझे ठीक से जानते भी नहीं और ना ही मैं आपको। नैना बोली अरे तो एक दूसरे को जानने की कोशिश करो ना। स्टार्ट डेटिंग गाइस। अनामिका ने कहा हां हम एक दूसरे के साथ ज्यादा वक्त बिता सकते हैं। वी कैन ट्राई। विशाल ने कहा तो नैना मुस्कुरा उठी। प्यार कोशिश करने से नहीं होता विशाल। नैना ने अपना बैग उठा लिया। सी यू गाइस कहकर वह बाहर जाने लगी। मैं मैं छोड़ देता हूं। मैंने कहा मैं खुद चली

17:09 जाऊंगी। कहकर वह बाहर निकल आई। मैं उसके पीछे आया और विशाल भी रात गहरी थी। हवा में थोड़ी सी ठंडक और आसमान जैसे एक स्याह चादर लुक आई एम सॉरी नैना तुम नाराज मत हो। विशाल ने कहा अनामिका ने पता नहीं ऐसे एकदम से क्यों कह दिया मतलब तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो पर आई अंडरस्टैंड इट वास इट वास रियली ऑक्वर्ड। इट्स ओके। नैना ने मुस्कुराने की नाकाम कोशिश की। तुम नाराज तो नहीं हो मुझसे? विशाल बोला नहीं। नैना ने कहा तो विशाल अंदर चला गया। मैं वहीं था पर नैना ने मेरी तरफ देखना भी गवारा नहीं किया और गेट से बाहर जाने लगी। मैंने कहा ना मैं छोड़ दूंगा। मैंने पुकारा। मैंने भी कहा ना कि मैं खुद चली जाऊंगी। इतने दिनों में पहली बार उसकी आवाज सख्त

17:54 थी। बैठ जाओ कार में। मैंने भी थोड़ी तेज आवाज में कहा तो उसने एक तल्ख निगाह मुझ पर डाली और चुपचाप गाड़ी में बैठ गई। पूरे रास्ते हमने कोई बात नहीं की। बस जाते वक्त उसने कहा आपको मुझे बताना चाहिए था नैना अगले दिन स्टूडियो नहीं आई मैं जानता था वह नहीं आएगी दिल में एक अजीब सी कैफियत थी मैं समझ नहीं पा रहा था कि नैना से क्या कहूं मगर मुझे मिलना था उससे मैं उस पुराने चर्च में पहली दफा गया था सुंदर बेहद शांत सी जगह थी नैना एक बेंच पर बैठी थी नाराज हो मैंने बगल में बैठते हुए पूछा नहीं रुपैली सी धूप उसके चेहरे पर पड़ी तो उसका चेहरा जैसे खिल गया। मैं चाहूं भी तो आपसे नाराज नहीं रह सकती और आपकी तो कोई

18:40 गलती नहीं थी। वो बोली विशाल ने कहा था कि वो पसंद करता है तुम्हें। मैंने पता नहीं क्यों छुपाया तुमसे। उसने कोई जवाब नहीं दिया। उसकी उंगलियां बेंच की बगल में लगे सफेद फूलों से खेलने लगी। फिर एक गहरी सांस भर कर बोली। मैं ऐसे ही किसी से शादी नहीं कर सकती। अभी यह कोई सुपरहिट मूवी तो नहीं ना कि सबने देख के तारीफ कर दी तो मुझे भी देख ही लेनी चाहिए। मुझे हंसी आ गई। हां, मैं जानता हूं तुम शादी तब करोगी जब तुमको किसी से इतना प्यार हो जाएगा कि यू कांट हेल्प इट। है ना? क्या पता शायद तब भी ना करूं। क्या पता मुझे किसी गलत इंसान से प्यार हो जाए। नैना ने कहा तुम कभी किसी गलत इंसान को नहीं चुनोगी। मैंने

19:26 कहा तो उसके होठों पर एक मुस्कुराहट थिरक कर फौरन गायब हो गई। मैं उस तरह के गलत इंसान की बात नहीं कर रही हूं। तो फिर वो खामोश रही और उस खामोशी ने मेरे सवाल का जवाब दे दिया। यू मीन ऐसा इंसान जो मैं बोलते बोलते रुक गया। हां आई मीन ऐसा इंसान जो मुझसे प्यार ना कर पाए। फिर मेरी आंखों में झांक कर कहा या शादीशुदा हो। कुछ पल हम बस एक दूसरे को देखते रहे और फिर हमारे अनकहे जज्बातों को जैसे जुबा मिल गई। महज लफ्जों की बात होती तो कोई मसला नहीं था। पर उन नजरों का क्या करता जो जाने कितना कुछ कह रही थी। अपने एहसास को छुपा लेना फिर भी आसान होता है। मगर किसी की भावनाओं को समझकर नजरअंदाज कर

20:11 देना बहुत मुश्किल। हमारे दरमियान जितना था उससे ज्यादा की मेरी जिंदगी ने मुझे इजाजत नहीं दी थी और उससे कम में मैं राजी नहीं हो सकता था। सबकी किस्मत ऐसी नहीं होती कि जिसे पसंद किया उसका प्यार मिल गया और और वही जिंदगी का उम्र भर के लिए सबसे अहम हिस्सा बन गया। उसने कहा अगर किसी वैसे इंसान से प्यार हो जाए तुम्हें तो क्या करोगी? मैंने धीरे से पूछा। कुछ नहीं। कुछ नहीं। उसे बताओगी नहीं? कभी नहीं। उसने मेरी आंखों में देखकर कहा कुछ रिश्ते बेनाम होते हैं। हर रिश्ते से मुख्तलिफ और वह नजदीकियों के मोहताज नहीं होते। हल्की सी हवा चली तो पीपल के कुछ सूखे पत्ते डाली से उतर कर हवा में तैरने

20:59 लगे। मुझे वह दिन याद आ गया जब मैं नैना से पहली बार मिला था। अगस्त की वह सुबह मेरे जहन में मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत सुबह के तौर पर दर्ज रहेगी। [संगीत] हमेशा बस इतनी सी थी यह कहानी।

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