0:00 दोस्तों, हमें लगता है कि हमारी जेब में पड़ा हुआ 500 का नोट या बैंक अकाउंट में दिखने वाला डिजिटल नंबर ही वेल्थ है। यही सबसे बड़ा झूठ है जिसमें 99% लोग फंसे हैं। मनी बेसिक्स का मतलब यह जानना नहीं है कि पैसा क्या है? इसका मतलब यह समझना है कि लोग काम क्यों करते हैं? महंगाई यानी इनफ्लेशन क्यों बढ़ती है? और क्यों कुछ लोग जिंदगी भर गरीब रह जाते हैं। भले ही उनकी सैलरी कितनी भी अच्छी क्यों ना हो। हजारों साल पहले लोग बार सिस्टम इस्तेमाल करते थे। मैं तुम्हें चावल दूंगा तुम मुझे दूध देना। पर इसमें बहुत प्रॉब्लम्स थी। सबसे बड़ी प्रॉब्लम थी डबल कोइंसिडेंस ऑफ वांट्स। मतलब मुझे जो चाहिए वो तुम्हारे पास होना चाहिए। और तुम्हें जो चाहिए वो मेरे पास और दोनों को एक ही वक्त पर उसकी जरूरत होनी चाहिए। फिर चावल चढ़ सकता है, जानवर बीमार पड़ सकते हैं। वैल्यू मेजर करना इंपॉसिबल था। एक बकरी के
0:46 बदले कितनी शर्ट मिलेंगी? आप एक बकरी को छोटे टुकड़ों में काटकर एक छोटी सब्जी तो नहीं खरीद सकते ना। इसलिए इंसानों ने अपना सबसे बड़ा टूल इन्वेंट किया। मनी। पैसा तीन काम करता है। मीडियम ऑफ़ एक्सचेंज, चावल और बकरी की जगह अब हम पैसा देते हैं। यूनिट ऑफ़ अकाउंट यह वैल्यू मेजर करता है। जैसे फोन ₹15,000 का होगा एंड कार 10 लाख की। स्टोर ऑफ वैल्यू। आप आज मेहनत करके उसे कल के लिए बचा सकते हैं। पैसा वेल्थ नहीं है। यह बस एक मीडियम ऑफ एक्सचेंज है। एक सिस्टम है जो इंसानों को अपनी वैल्यू ट्रेड करने में मदद करता है। उस 500 के नोट की खुद से कोई औकात नहीं है। उसकी ताकत उस पेपर में नहीं उस सोसाइटी के ट्रस्ट में है। एक करेंसी बेसिकली एक शेयरर्ड बिलीफ सिस्टम है जो लॉस और ट्रस्ट पर चलती है। जब आप दिन में 9 घंटे काम करते हैं तो आप एक्चुअली अपनी मेहनत, अपने पसीने और अपने टाइम को एक पेपर या डिजिटल नंबर में कन्वर्ट कर रहे होते हैं। मनी इज़
1:31 स्टर्ड एफर्ट एंड स्टर्ड चॉइस। जब आप काम करके कमाते हैं, आप अपने लेबर को पैसे में कन्वर्ट करते हैं। बाद में वो पैसा गुड्स, सर्विज और ओपोरर्चुनिटीज में कन्वर्ट होता है। जिसके पास पैसा है, वो दूसरों के लेबर और टाइम को कमांड कर सकता है। यही पैसे की असली ताकत है। इस कांसेप्ट को जेनुइनली समझने के लिए मैं आपको दो ऐसे लोगों से इंट्रोड्यूस कराना चाहता हूं जो इस आईडिया को प्रैक्टिकली रिप्रेजेंट करें। पहला है काजू। काजू एक फाइनेंशियली इलिटरेट इंसान है। वह काफी मेहनत करता है पर पैसों के रूल्स नहीं जानता। दूसरा है मोटा भाई। मोटा भाई एक फाइनेंसियली लिटरेट और स्मार्ट इंसान है। वह पैसों के मैट्रिक्स को समझता है। काजू हमेशा इन चीजों को मिक्स कर देता है। काजू सोचता है बैंक में बड़ा कैश वेल्थ है। पर मोटा भाई जानता है कि फैक्ट्री, जमीन, शेयर्स और बिजनेस वेल्थ है। इनकम वो फ्लो है जो हर महीने आ रहा है। पैसा आपको चॉइससेस दे सकता है। पर
2:17 असली फ्रीडम डिसिप्लिन और एसेट्स से आती है। मोटा भाई जैसा फाइनेंसियली स्मार्ट इंसान पैसों की पूजा नहीं करता। वह उसे एक टूल की तरह देखता है। मनी सिर्फ चीजें खरीदने के लिए नहीं होता। इट चेंजेस हाउ यू लिव। बिना पैसों के सर्वाइवल मुश्किल होता है। टाइम लिमिटेड होता है। चॉइससेस कम होती है और स्ट्रेस ज्यादा होता है। पैसों के साथ तुम टाइम सेव कर सकते हो। बेटर हेल्थ केयर ले सकते हो। ज्यादा सीख सकते हो और इन्वेस्ट कर सकते हो। सिंपली मनी एक टूल है जो एफर्ट को ऑप्शंस में कन्वर्ट करता है। काजू जैसे लोग सिर्फ इनकम के लिए काम करते हैं। पर मोटा भाई जैसे अमीर लोग एसेट्स बनाते हैं जो उन्हें रेगुलर इनकम देते हैं। व्हाइल दे स्लीप। इनकम क्या है? यह वो पैसा है जो रेगुलरली आता है जैसे सैलरी, रेंट, बिनेस रेवेन्यू। यह एक फ्लो है नदी के पानी की तरह। वेल्थ क्या है? यह वो है जो आप ओन करते हैं जिसकी वैल्यू होती है और जो और वैल्यू जनरेट कर सकती है जैसे लैंड, शेयर्स,
3:02 बिजनेस, रेंटल प्रॉपर्टी। यह कलेक्शन है। सिंपली वेल्थ का मतलब है जब तुम्हें काम करना जरूरी ना हो क्योंकि तुम्हारे एसेट्स तुम्हारे लिए पैसा कमा रहे होते हैं। इनकम वो पानी है जो नल से बह रहा है। वेल्थ वो पानी है जो बाल्टी में जमा हो चुका है। अगर काजू ₹1 लाख कमाता है और लाइफस्टाइल दिखाने में ₹1 लाख खर्च कर देता है तो काजू की बाल्टी में एक बड़ा होल है। इसलिए काजू एक्चुअली में गरीब है। इसे हाई इनकम लो रिटेंशन कहते हैं। आपको समझना होगा इनकम आपको जिंदा रखती है। पर वेल्थ आपको आजाद करती है। तो मोटा भाई जैसे लोग एसेट्स कैसे बनाते हैं। आपको जमीन खरीदने के लिए करोड़ों रुपए नहीं चाहिए। एसेट्स बनाने की शुरुआत छोटी होती है। इक्विटी या स्टॉक्स एसआईपी के थ्रू अच्छी कंपनीज़ के हिस्से खरीदना। अपस्किलिंग अपनी स्किल्स पर पैसा लगाना एक एसेट है क्योंकि वो आपकी फ्यूचर इनकम बढ़ाता है। डिजिटल एसेट्स कोई ब्लॉग YouTube चैनल या कोड बनाना जो रात
3:48 में भी आपके लिए काम करे। एसेट्स का सिंपल रूल जो चीज आपकी जेब में पैसा डाले वो एसेट है। जो निकाले वो लायबिलिटी। फाइनेंसियल लिटरेसी इस नॉट जस्ट अबाउट अर्निंग मोर। इट इज अबाउट कन्वर्टिंग इनकम इनू वेल्थ। अक्सर हमारे घरों में एक कहानी सुनने मिलती है। काश तुम्हारे दादा जी ने उस जमाने में वह जमीन खरीद ली होती या वह सोना रख लिया होता या एमआरएफ के शेयर खरीद लिए होते तो आज हम करोड़पति होते। पहले के लोगों के पास पेशेंस बहुत था पर वो फाइनेंसियली लिटरेट नहीं थे। आज के यंग लोगों के पास सारी फाइनेंसियल लिटरेसी और इंफॉर्मेशन फोन पर है। पर काजू जैसे लोगों के पास पेशेंस नहीं है। काजू को अगले हफ्ते रिटर्न चाहिए। उसे क्रिप्टो में रातोंरात अमीर बनना है और यहीं काजू बर्बाद होता है। यह समझने के लिए आपको दो कांसेप्ट्स दिमाग में छाप लेने हैं। टाइम वैल्यू ऑफ मनी और कंपाउंडिंग। सोचो तुम्हें आज ₹100 मिलते हैं और किसी को एक साल बाद ₹100 मिलते हैं। दोनों सेम नहीं
4:35 है। आज का पैसा ज्यादा कीमती है क्योंकि तुम उसे अभी खर्च कर सकते हो। इन्वेस्ट करके बढ़ा सकते हो और फ्यूचर के रिस्क से बच सकते हो। अगर तुम 10,000 आज इन्वेस्ट कर दो तो 5 साल में कंपाउंड होकर ज्यादा बन जाएगा। वही 10,000 5 साल बाद मिले तो वह ग्रोथ मिस हो गई। इसी को अपोरर्चुनिटी कॉस्ट कहते हैं। साथ ही इनफ्लेशन और रिस्क फ्यूचर पैसे की बाइंग पावर कम कर देते हैं। इसलिए सिंपली आज का पैसा कल के सेम पैसे से ज्यादा कीमती है। कंपाउंडिंग का मतलब है आपके पैसों ने जो रिटर्न कमाया अब वह रिटर्न भी आपके लिए और रिटर्न कमाएगा। इंटरेस्ट और इंटरेस्ट सिंपल एग्जांपल देखिए। ईयर वन ₹100 इन्वेस्ट किया। 10% रिटर्न मिला। अमाउंट हुआ ₹110। ईयर टू अब 10% ₹100 पर नहीं मिलेगा। अब 10% ₹110 पर मिलेगा। अमाउंट हुआ ₹121। ईयर 3 अब ₹121 पर रिटर्न मिलेगा। अमाउंट हुआ ₹133। शुरू
5:22 में यह ग्रोथ बहुत स्लो लगती है। पर 10 या 20 साल बाद यह एक्सप्लोसिव हो जाती है। अगर मोटा भाई 25 साल की उम्र में हर महीने ₹5,000 इन्वेस्ट करें और काजू 35 साल की ऐज में जाकर हर महीने ₹15,000 इन्वेस्ट करें तो 60 की उम्र में मोटा भाई के पास ऑलमोस्ट ₹3.2 करोड़ होंगे। और वही काजू तीन टाइम ज्यादा यानी ₹15,000 इन्वेस्ट करके भी सिर्फ ₹.8 करोड़ तक ही पहुंच पाएगा। क्यों? क्योंकि मोटा भाई के पास टाइम था। विदाउट टाइम कंपाउंडिंग इज वीक। विद टाइम कंपाउंडिंग मेक्स यू अनस्टोपेबल। इसलिए पेशेंस को वापस लाओ। जैसे वारेन बफेट ने कहा था एवरीवन वांट्स टू गेट रिच। बट नोबडी वांट्स टू डू इट स्लोली। अब आते हैं उस पॉइंट पर जहां मैक्सिमम लोग या तो जिंदगी भर काजू की तरह ब्रोक रह जाते हैं या धीरे-धीरे मोटा भाई की तरह फाइनेंशियली स्ट्रांग बनने लगते हैं। इनकम तुम्हारा फ्यूचर डिसाइड नहीं करती। कैश फ्लो करता है। कैश फ्लो का सिंपल मतलब है मनी कमिंग
6:08 इन माइनस मनी गोइंग आउट। फार्मूला कैश फ्लो इक्वल्स इनकम माइनस एक्सपेंसेस। अगर यह पॉजिटिव है तो आपका फ्यूचर ब्राइट है। लेकिन अगर काजू की तरह यह नेगेटिव है तो आप और गरीब होते जाओगे। और अगर आप जितना कमा रहे हो उतना ही खर्च कर दे रहे हो तो आप गरीब ही रहोगे। काजू जैसे लोग सिर्फ इस चीज पर फोकस करते हैं। हाउ कैन आई अर्न मोर? जो कि ठीक है। लेकिन मोटा भाई जैसा फाइनेंसियली लिटरेट पर्सन फोकस करता है कि हाउ इज माय मनी फ्लोइंग? दोस्तों अगर काजू की हाई इनकम है लेकिन बैड कैश फ्लो है तो काजू ब्रोक ही रहेगा। लेकिन अगर मोटा भाई की एवरेज इनकम है और गुड कैश फ्लो है तो वह जरूर वेल्थ ही बनेगा। वेल्थ वहां से शुरू होती है जहां सरप्लस शुरू होता है और इस सरप्लस को बनाने का एक ही सिस्टम है बजटिंग। बजटिंग का नाम सुनते ही काजू को लगता है कि अब तो खर्चे कम करने पड़ेंगे मजा खत्म हो जाएगा। नो बजट इज नॉट रेस्ट्रिक्शन। बजट इज डायरेक्शन। यह आपके
6:53 पैसों को बताता है कि उसे कहां जाना है। बजाय इसके कि महीने के एंड में आप रोएं कि पैसा क्या कहां? नॉर्मली चार टाइप्स के एक्सपेंसेस होते हैं। फिक्स्ड एक्सपेंसेस हर महीने सेम जैसे रेंट, ईएमआई, फीस, वेरिएबल एक्सपेंसेस। महीने के हिसाब से चेंज जैसे फूड, पेट्रोल, डिस्क्रीशनरी एक्सपेंसेस जो कि ऑप्शनल खर्चे हैं जैसे मूवीज, शॉपिंग, इनविज़िबल एक्सपेंसेस लोग बड़े खर्चों की वजह से कंगाल नहीं होते। वो कंगाल होते हैं अननोटिस्ड स्मॉल लीक्स की वजह से। काजू की रोज की ₹100 की कॉफी, ऑनलाइन एप्स पर ₹150 के स्नैक्स, जरूरत ना होने पर Amazon से मंगाली गई सेल की टी-शर्ट। यह वो इनविज़िबल लीक्स हैं जो काजू की बाल्टी खाली कर देते हैं। इन सब चीजों से बचने के लिए या अपने पैसों को एक क्लियर डायरेक्शन देने के लिए वी हैव 50-30 20 रूल। मोटा भाई अपना बजट इस सिंपल फ्रेमवर्क से प्लान करता है। अपनी एनहांस सैलरी को तीन हिस्सों में बांटो। 50%
7:40 नीड्स इसमें आपका रेंट, राशन, बिजली का बिल, बेसिक्स आएंगे। यह वो है जिसके बिना आप जिंदा नहीं रह सकते। 30% वांट्स, Netflix, बाहर का खाना, दोस्तों के साथ घूमना, नए कपड़े। जरूरी है ताकि आप घुटन महसूस ना करें। 20% सेविंग। यह आपका शील्ड और आपका फ्यूचर है। फिलहाल स्टार्टिंग में 20% बट फ्यूचर में अपनी सैलरी बढ़ने के साथ यह परसेंटेज भी इनक्रीस करो। बजटिंग सिर्फ पैसे काटने के बारे में नहीं है। इट इज अबाउट कंट्रोलिंग मनी, क्रिएटिंग सरप्लस एंड एलोकेटिंग मनी इंटेलिजेंटली। कैश फ्लो इज द मूवमेंट ऑफ मनी एंड बजटिंग इज द सिस्टम दैट कंट्रोल्स दैट मूवमेंट टू क्रिएट सरप्लस एंड बिल्ड वेल्थ। काजू सोचता है मैं पहले अपना लाइफ जिऊंगा। सारे खर्चे करूंगा और मंथ एंड में जो बचेगा वो सेव कर लूंगा। रियलिटी मंथ एंड में काजू के पास सिर्फ थुल्लू बचता है। मोटा भाई का करेक्ट माइंडसेट मैं पहले सेव करूंगा और
8:26 जो बचेगा उसमें अपना लाइफस्टाइल मेंटेन करूंगा। सेविंग शुड बी योर फर्स्ट एक्सपेंस। काजू आस्क्स हाउ मच डिड आई अर्न? मोटा भाई आस्क्स वेयर डिड माय मनी गो? हाउ मच डिड आई कीप? आपको राज की बात बताऊं। मोटा भाई जैसा फाइनेंसियली लिटरेट मिलेयर Ferrari तब खरीदता है जब उसके पास पांच Ferrari खरीदने के पैसे हो। एंड दे बाय दिस Ferrari फ्रॉम देयर एसेट्स मनी। मीन्स देयर एसेट्स पे फॉर डेट Ferari दे डोंट गो वर्क डे एंड नाइट जस्ट टू बाईट। क्या आप नया iPhone लेने से पहले यह सोचते हो? योर फ्यूचर डिपेंड्स ऑन वेयर योर मनी फ्लोस। सेविंग का एक्चुअल मतलब क्या है? सेविंग मीन्स डिलेइंग कंस्प्शन टुडे टू क्रिएट फ्यूचर सिक्योरिटी एंड ओप्पॉर्चुनिटी। यह पैसों के बारे में कम और आपके बिहेवियर के बारे में ज्यादा है। क्योंकि कमाता हर कोई है पर बचा हर कोई नहीं पाता। सेविंग तीन चीजों के लिए जरूरी है। सर्वाइवल जब जॉब चली जाए स्टेबिलिटी ताकि दिमाग शांत रहे और ओपोरर्चुनिटी अगर कल कोई बिजनेस स्टार्ट करना हो या कोई
9:13 इन्वेस्टमेंट करनी हो। लेकिन सेविंग सेफ एंड लो रिटर्न के लिए होती है और इन्वेस्टिंग रिस्की एंड हाई रिटर्न होती है। दोनों अलग है। सेविंग आपके पैसों को प्रोटेक्ट करती है। इन्वेस्टिंग उसे ग्रो करती है। सिर्फ सेव करते रहना सबसे बड़ा खतरा है क्योंकि इनफ्लेशन उसे खा जाएगी। पर बिना सेव किए डायरेक्ट इन्वेस्ट करना उससे भी बड़ा खतरनाक स्टेप है। इसलिए आपको द सेविंग पिरामिड समझना होगा। यह एक स्टेप बाय स्टेप सिस्टम है जो मोटा भाई फॉलो करता है। अगर आपने एक भी स्टेप स्किप किया तो आपका पूरा फाइनेंसियल सिस्टम गिर जाएगा। लेवल एक है इनकम जो कि बेस है। यह स्टार्टिंग पॉइंट है। बिना इनकम के ना सेविंग है ना इन्वेस्टिंग। लेवल दो है सेविंग। यहां आप एक्शन लेते हैं। अपनी इनकम का एक हिस्सा जैसे 20% या ज्यादा साइड में रखना। यह डिसिप्लिन का टेस्ट है। यहां लाइफस्टाइल इनफ्लेशन से बचना। यानी सैलरी बढ़ी तो खर्चे बढ़ा दिए। लेवल तीन है इमरजेंसी फंड। यह सेफ्टी लेयर है। अब आपने जो पैसा सेव किया है उसे सबसे पहले
10:00 इमरजेंसी फंड में डालो। यह अमाउंट आपके 3 से 6 महीने की नीड्स के बराबर होना चाहिए। अगर आपका खर्चा ₹00 महीना है तो कम से कम ₹60,000 से ₹1,20,000 एक अलग बैंक अकाउंट में लॉक होने चाहिए। क्यों? क्योंकि लाइफ अनप्रिडिक्टेबल है। मेडिकल इमरजेंसी, लेऑफ, गाड़ी का एक्सीडेंट कुछ भी हो सकता है। अगर काजू के पास यह फंड नहीं होता, तो वह मजबूरन क्रेडिट कार्ड यूज़ करता है या अपने शेयर्स लॉस में बेच देता है। लेवल चार है इन्वेस्टिंग। यह ग्रोथ लेयर है। इमरजेंसी फंड बनाने के बाद मोटा भाई अपने एडिशनल बचे हुए पैसों को इन्वेस्ट करता है। म्यूच्यूल फंड्स, स्टक्स या रियलस्टेट में ताकि वह महंगाई को बीट कर सके। लेवल पांच है वेल्थ जब आपके इन्वेस्टमेंट्स इतने बड़े हो जाए कि उनसे आने वाला कंपाउंड प्रॉफिट, डिविडेंड या रेंट आपके लिविंग एक्सपेंसेस को कवर कर ले। नाउ मनी वर्क्स फॉर यू। गलत तरीका है। इनकम आई, डायरेक्ट इन्वेस्ट कर दिया। फिर इमरजेंसी
10:46 आई एंड काजू ने सारा इन्वेस्टमेंट लॉस में बेच दिया। इससे सिर्फ आप बर्बाद हो गए। सही तरीका जो मोटा भाई यूज़ करता है। इनकम आई, सेव किया। इमरजेंसी फंड बनाया, इन्वेस्ट किया एंड मोटा भाई का पैसा सही तरीके से ग्रो हुआ। पहले बेस स्ट्रांग बनाओ, फिर बिल्डिंग खड़ी करो। सेविंग इज अ मेंटल गेम। इट इज अ हैबिट ऑफ़ कीपिंग मनी टू प्रोटेक्ट योर प्रेजेंट। प्रिपेयर फॉर फ्यूचर अनसर्टेनिटी एंड क्रिएट फ्यूचर अपोरर्चुनिटीज। हम सब सोचते हैं कि बैंक एक लॉकर है। मेरा पैसा बैंक में पड़ा है। एकदम सेफ है। गलत। बैंक एक सेफ लॉकर नहीं है। बैंक पैसों का एक मिडिल मैन यानी दलाल है। एक तरफ काजू जैसे लोग हैं जिनके पास एक्स्ट्रा पैसा है। दूसरी तरफ मोटा भाई जैसे लोग हैं जिन्हें बिजनेस बड़ा करने या एसेट्स लेने के लिए पैसा चाहिए। बैंक सिर्फ इंटरेस्ट डिफरेंस से पैसा कमाता है। काजू ने ₹100 बैंक में डाले। बैंक ने उससे कहा भैया मैं आपको साल का 4% इंटरेस्ट
11:32 दूंगा। काजू खुश। फिर बैंक उसी ₹100 को मोटा भाई के बिजनेस लोन के रूप में दे देता है और उससे 10% इंटरेस्ट चार्ज करता है। 4% काजू को देता है और जो बीच का 6% है वह बैंक का प्योर प्रॉफिट है। काजू का पैसा वहां आइडल बैठा नहीं है। वह बैंक के लिए काम कर रहा है। आपको लगता है बैंक आपके ₹100 लॉकर में रखता है? नहीं। कानून के मुताबिक बैंक को आपके ₹100 में से सिर्फ एक छोटा सा हिस्सा लेट्स से ₹10 रिजर्व में रखना होता है। बाकी ₹90 वह लोन पर घुमा देते हैं। जिसको लोन मिलता है, वह भी वापस किसी बैंक में डालता है। फिर उसका 90% लोन पर जाता है। इस तरह से बैंक देश में नया पैसा क्रिएट करते हैं। हियर मनी मल्टीप्लाई। पर अगर सारे लोग एक ही दिन बैंक पहुंच जाए और अपना सारा कैश मांग लें तो बैंक तुरंत कोलैप्स हो जाएगा जिसे बैंक रन कहते हैं। क्योंकि उनके पास उतना फिजिकल कैश होता ही नहीं है। इसलिए देश
12:17 में गवर्नमेंट डिपॉजिट्स पर इंश्योरेंस देती है ताकि लोगों का ट्रस्ट बना रहे जो कि हमने लास्ट वीडियो में बताया था। इंटरेस्ट मतलब पैसा यूज़ करने का कॉस्ट। अगर आप कर्जा लेते हैं तो आप इंटरेस्ट भरते हैं। एंड अगर आप पैसे सेव करते हैं तो आप इंटरेस्ट अर्न करते हैं। इस पूरे पैसों के गेम को कंट्रोल कौन करता है? हमारा सेंट्रल बैंक इंडिया में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पैसा भी बिकता है और पैसों की जो कीमत होती है उसे इंटरेस्ट रेट कहते हैं। अगर इंटरेस्ट रेट हाई है मतलब पैसा महंगा है। अगर लो है मतलब पैसा सस्ता है। आरबीआई एक टूल यूज़ करती है जिसे कहते हैं रेपो रेट। यह वो इंटरेस्ट रेट है जिस पर आरबीआई बाकी कमर्शियल बैंक्स जैसे HDFC, SBI एसेट्रा को लोन देती है। सिनेरियो वन आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ा दिया। अब बैंक्स को आरबीआई से महंगे इंटरेस्ट पर लोन मिल रहा है। लेट्स से 10% तो बैंक्स आम जनता के लिए भी होम लोन, कार लोन का इंटरेस्ट बढ़ा देंगे। लोन महंगा हो गया, ईएमआई बढ़
13:04 गई, लोग उधार कम लेंगे। मार्केट [गला साफ़ करने की आवाज़] में डिमांड गिरेगी, इकॉनमी स्लो हो जाएगी। यह इनफ्लेशन को कम करने के लिए होता है। सिनेरियो टू, आरबीआई ने रेपो रेट घटा दिया। बैंक को सस्ता पैसा मिला लेट्स से 6%। बैंक ने आपके लिए लोन सस्ता कर दिया। लोग दबाकर खरीदारी करेंगे। इकॉनमी फास्ट ग्रो करने लगेगी। इसे रियल लाइफ एग्जांपल से समझते हैं। कोविड के टाइम इकॉनमी को बचाने के लिए आरबीआई ने 27 मार्च 2020 को रेपो रेट 5.15% से घटाकर 4.4% कर दिया और मई 2020 तक इसे 4% के हिस्टोरिक लो पर ले आए। इससे मार्केट में कैश का फ्लड आ गया। बैंक्स ने बिजनेस और होम लोन सस्ते कर दिए और लोगों ने सस्ते बोरोइंग का फायदा उठाकर स्टॉक मार्केट में दबा के पैसा लगाया। पर 2022 आते-आते इस सस्ते पैसे, ग्लोबल सप्लाई चेन इशज़ और रशिया यूक्रेन वॉर की वजह से इनफ्लेशन आसमान छूने लगी। इस ओवर हीटिंग को रोकने के लिए आरबीआई ने 4 मई
13:51 2022 को इमरजेंसी ब्रेक लगाया और रेपो रेट बढ़ाकर वापस 4.40% किया जो लगातार हक्स के बाद फेब 2023 में 6.50% तक पहुंच गया। नतीजा यह हुआ कि पैसा महंगा हो गया। ताजू की होम लोन ईएमआई जो पहले 6.5% पर थी वो बढ़कर 9% के आसपास पहुंच गई। लोगों ने फालतू खर्चे कम किए। मार्केट में डिमांड गिरी और आखिरकार इनफ्लेशन वापस लाइन पर आ गई। सेंट्रल बैंक डायरेक्टली आपको कंट्रोल नहीं करता। वह सिस्टम को कंट्रोल करता है और सिस्टम आपको अफेक्ट करता है। इंटरेस्ट रेट इकॉनमी का एक्सलरेटर और ब्रेक है। इसलिए याद रखिए बैंक सेफ्टी, ट्रांजैक्शंस और इमरजेंसी फंड रखने के लिए बेस्ट है। पर बैंक आपको अमीर नहीं बना सकता क्योंकि वहां मिलने वाला रिटर्न हमेशा असली इनफ्लेशन से कम होता है। उधार एक ऐसा टूल है जो या तो मोटा भाई की तरह आपको अमीर बना सकता है या काजू की तरह आपकी जिंदगी बर्बाद कर सकता है। डेप्ट का सिंपल मतलब
14:37 है आप अपने आने वाले कल की इनकम को आज ही खर्च कर रहे हैं और इसके लिए आपको चेक किया जाता है आपके क्रेडिट स्कोर से। यह आपका फाइनेंसियल कैरेक्टर सर्टिफिकेट है। अगर आप उधार लेकर टाइम पर वापस देते हैं तो आपका स्कोर हाई होता है और बैंक आपको सस्ते में बड़ा लोन देते हैं। अब यहां आता है सबसे बड़ा डिफरेंस गुड डे वर्सेस बैड डे। गुड डेप्ट जो मोटा भाई यूज़ करते हैं यह वो उधार है जो आपकी जेब में पैसा डालता है। यह आपकी इनकम बढ़ाता है। एग्जांपल एजुकेशन लोन जो स्किल बढ़ाए, बिजनेस लोन या एक ऐसी प्रॉपर्टी के लिए लोन जो रेंट जनरेट करे। बैड डे जिसमें काजू फंसा है, यह वह उधार है जो आपकी जेब से पैसा निकालता है। एग्जांपल, क्रेडिट कार्ड पर लेटेस्ट फोन खरीदना, शौक के लिए महंगी गाड़ी का लोन जिसका ईएमआई काजू भर नहीं सकता। ईएमआई एक बहुत मीठा जहर है। काजू को ₹50,000 के फोन के पैसे एक साथ देना दुख देता है। पर महीने का ₹2,500 देना बहुत छोटा और इजी लगता है। रियलिटी में 2 साल
15:23 बाद काजू उस फोन के ₹60,000 पे कर चुका होता है। ईएमआई रियल कॉस्ट को छुपा देती है। काजू एक डे चुकाने के लिए दूसरा डे लेता है और इसे डे स्पायरल यानी उधार का जाल कहते हैं। आज के टाइम पर काजू जैसे लोग और ज्यादा बैड डेप्ट में क्यों जा रहे हैं? क्योंकि एक नया साइकोलॉजिकल ट्रैप आ गया है। कैशलेस सोसाइटी पहले के वक्त में जब हमारे वॉलेट में ₹500 के नोट होते थे और हम ₹2000 का खर्चा करते थे तो फिजिकल नोट्स को हाथ से जाते हुए देखकर दर्द होता था। दिमाग खर्च करने से पहले 10 बार सोचता था। आज यूपीआई और Apple Pay की वजह से पैसा हाथ में फील ही नहीं होता। एक क्यूआर कोड स्कैन किया, फोन का पासवर्ड डाला और ₹5,000 उल्टे क्योंकि पेन ऑफ पेइन खत्म हो गया है। काजू को महसूस ही नहीं होता कि वह गरीब हो रहा है। इसलिए क्रेडिट कार्ड्स और ऑनलाइन शॉपिंग सबसे डेंजरस टूल्स है अगर आपके पास डिसिप्लिन नहीं है। क्रेडिट कार्ड रिमूव्स द पेन ऑफ पेइंग कंप्लीटली। इससे ज्यादा प्रॉफिट कंपनीज एंड गवर्नमेंट
16:09 का ही होता है। कभी भी अपने लाइफस्टाइल या शॉक के लिए उधार मत लो। डे सिर्फ तब लो जब वो इनकम क्रिएट करें। टोटल कॉस्ट को समझो। सिर्फ ईएमआई को नहीं। एक पुअर या फाइनेंसियली इलिटरेट इंसान सोचता है। मेरे पास पैसा नहीं है। मैं कुछ नहीं कर सकता। एक रिच और लिटरेट इंसान सोचता है मुझे एसेट कंट्रोल करना है। चाहे मेरा अपना पैसा कितना भी कम क्यों ना हो। इसे कहते हैं लिवरेज। लिवरेज का मतलब है किसी छोटी चीज को यूज करके किसी बड़ी चीज को कंट्रोल करना। फाइनेंस में लिवरेज मतलब ओपीएम यानी बैंक के उधार का यूज़ करके अपने रिटर्न्स को मल्टीप्लाई करना बिना अपना पूरा पैसा लगाए। मान लीजिए मोटा भाई को एक ₹50 लाख की प्रॉपर्टी लेनी है। ओवर थिंकिंग ₹50 लाख सेव करो और पूरा कैश देकर प्रॉपर्टी खरीदो। तुम्हें ओनरशिप मिल गई। पर सारा पैसा एक ही जगह ब्लॉक हो गया। रिच थिंकिंग मोटा भाई ने सिर्फ ₹1 लाख यानी 20% डाउन पेमेंट दी। बैंक से ₹40 लाख मींस 80% का
16:57 लोन लिया। अब मोटा भाई ने सिर्फ ₹1 लाख लगाकर ₹50 लाख के एसेट को कंट्रोल कर लिया। अब वह बचे हुए ₹40 लाख से चार और ऐसे ही एसेट्स कंट्रोल कर सकता है। चलिए इसे एक एग्जांपल से समझते हैं। 2001 में एसआरके ने मन्नत खरीदा ₹13 करोड़ में। उन्होंने अपनी पॉकेट से दिए सिर्फ ₹2.6 करोड़। बैंक से लोन लिया ₹1.4 करोड़। अब लोन की मंथली ईएमआई आएगी 20 साल तक। तो मान लीजिए इंटरेस्ट बन रहा है ₹8 लाख महीना। अगर एसआरके उस प्रॉपर्टी को रेंट पर दे देता और रेंट आया ₹1 लाख पर मंथ तो क्या होगा? रेंट ने ईएमआई को कवर कर लिया और ₹ लाख का पॉजिटिव कैश फ्लो भी आया यानी प्रॉफिट। प्रॉपर्टी खुद अपना लोन चुका रही है और 2022 तक लोन खत्म और मन्नत की वैल्यू ₹13 करोड़ से बढ़कर आज ₹200 करोड़ हो चुकी है। एसआरके ने सिर्फ 2.6 करोड़ लगाए थे और उनके पास आज ₹200 करोड़ का एसेट है। ऐसे रिटर्न्स के लिए एसआरके जैसा
17:44 दिमाग और विज़ भी चाहिए। जैसे एसआरके ने 2008 में कोलकाता नाइट राइडर्स के मेजॉरिटी स्टेक्स ₹300 करोड़ में लिए थे और आज केकेआर की वैल्यू्यूएशन ₹9000 करोड़ से ज्यादा है। यह लिवरेज का मैजिक है। लिवरेज तब काम करता है जब एसेट का रिटर्न लोन के इंटरेस्ट से बड़ा हो। लेकिन इसका एक डार्क साइड भी है यानी लिवरेज ट्रैक। अगर रेंट नहीं आया या प्रॉपर्टी की वैल्यू ₹50 लाख से गिरकर ₹40 लाख हो गई तो आपका अपना ₹1 लाख पूरी तरह डूब जाएगा। हर महीने ईएमआई जेब से भरनी पड़ेगी। लॉस मल्टीप्लाई हो जाएगा। इसलिए मोटा भाई जैसे लोग ब्लाइंडली लोन नहीं लेते। वो तीन रूल्स फॉलो करते हैं। पॉजिटिव कैश फ्लो रेंट ईएमआई से ज्यादा होना चाहिए। मार्जिन ऑफ सेफ्टी अगर वैल्यू थोड़ी गिरे तब भी सर्वाइव कर ले। बैकअप मनी यानी इमरजेंसी फंड। काजू ने ₹1 लाख के स्टॉक्स दिए वो बढ़कर ₹20 लाख के हो गए। काजू प्रॉफिट देखकर खुश होगा। स्टॉक्स बेच देगा और सरकार को हैवी कैपिटल गेंस टैक्स भर देगा।
18:30 एसेट भी हाथ से चला गया और टैक्स भी दिया। मोटा भाई जैसा असली अमीर इंसान अपना एसेट कभी नहीं बेचता। वो बस थोड़ा दिमाग लगाता है और लीगल सिस्टम को अपने फायदे के लिए यूज़ करके अपना टैक्स बचा लेता है। अगर आपको सच में वेल्थ बनानी है तो आपको यह सिस्टम समझना ही होगा। इसके बिना आप लाइफ की सबसे बड़ी फाइनेंसियल सीक्रेट मिस कर रहे हो। अल्ट्रा रिच लोग आखिर यह जादू करते कैसे हैं? यह सब हम देखेंगे इस चैनल की फोर्थ वीडियो में। मान लीजिए काजू ने फाइनली थोड़ा डिसिप्लिन दिखाया, बजटिंग की, सेविंग की और ₹20 लाख का पोर्टफोलियो बना लिया। एक दिन काजू बाइक से जा रहा है और एक मेजर एक्सीडेंट हो जाता है। हॉस्पिटल का बिल आता है ₹15 लाख। काजू के पास हेल्थ इंश्योरेंस नहीं है। उसकी सारी सेविंग्स, सारे स्टॉक्स, सारी वेल्थ एक सिंगल दिन में जीरो हो जाती है। इसे कहते हैं फाइनेंसियल डिजास्टर और इसे रोकने के लिए बनी है इंश्योरेंस। इंश्योरेंस आपको अमीर नहीं बनाता। यह आपको गरीब होने से बचाता है। काजू की सबसे बड़ी बेवकूफी
19:17 देखिए। वो ₹1 लाख का फोन खरीदेगा और उस पर ₹3000 का स्क्रीन गार्ड और इंश्योरेंस जरूर लगाएगा। पर उसकी खुद की लाइफ और हेल्थ जो करोड़ों की है उस पर ₹1000 महीना इंश्योरेंस का देने में उसे मौत आती है। वहीं दूसरी तरफ मोटा भाई समझता है कि इंश्योरेंस रिस्क कूलिंग के कांसेप्ट पर काम करता है। लाखों लोग थोड़ा-थोड़ा प्रीमियम देते हैं। कंपनी को पता है सबका एक्सीडेंट नहीं होगा। जिसका एक्सीडेंट होता है, कंपनी उन लाखों लोगों के पूल में से उसे बड़ा अमाउंट दे देती है। आप अपना बड़ा रिस्क थोड़े से पैसे देकर कंपनी पर ट्रांसफर कर देते हैं। आपको जिंदगी में दो इंश्योरेंस स्ट्रिक्टली चाहिए। एक तो हेल्थ इंश्योरेंस ताकि हॉस्पिटल का खर्चा आपकी जेब से ना जाए। दूसरा टर्म लाइफ इंश्योरेंस। अगर आप पर आपके पेरेंट्स या बच्चे डिपेंडेंट हैं तो आपके ना रहने पर उन्हें एक बड़ा लमसम अमाउंट जैसे एक या दो करोड़ मिल जाए। ध्यान रहे टर्म इंश्योरेंस लीजिए जो सस्ता और सिंपल होता है। लाइफ
20:03 इंश्योरेंस और इन्वेस्टमेंट को कभी मिक्स मत करना। जैसे पॉलिसीज जो कहती हैं 20 साल बाद पैसा वापस मिलेगा। उनमें रिटर्न इनफ्लेशन को भी बीट नहीं करता। रूल इज सिंपल पहले प्रोटेक्शन यानी इंश्योरेंस फिर ग्रोथ यानी इन्वेस्टमेंट। पैसों को बैंक में रखने से वह सेव जरूर रहता है। पर अमीर बनने के लिए आपको इन्वेस्टिंग करनी ही पड़ेगी। इन्वेस्टिंग का सिंपल मतलब है अपने पैसों को ऐसे एसेट्स में डालना जो आगे चलकर या तो और ग्रो होंगे या आपको रेगुलर इनकम यानी डिविडेंड देंगे। हमें इन्वेस्ट क्यों करना है? तीन रीजंस की वजह से। इनफ्लेशन आपका पैसा बैंक में पड़ा पड़ा सड़ रहा है। इनफ्लेशन उसकी परचेसिंग पावर खा रहा है। वेल्थ क्रिएशन। कोई भी इंसान सिर्फ अपनी सैलरी बचाकर बिलिनेियर नहीं बना। फाइनेंसियल फ्रीडम ताकि एक दिन आपको पैसों के लिए काम ना करना पड़े। रिस्क वर्सेस रिटर्न फाइनेंस का एक सीधा प्रिंसिपल है। जितना ज्यादा रिस्क उठाओगे
20:48 रिवॉर्ड मिलने के चांसेस उतने हाई होंगे। एफडी सेफ है बट वेरी लो रिटर्न। स्टॉक्स रिस्की हैं पर इसमें हाई रिटर्न्स हैं। अगर कोई Telegram पर काजू को कहे कि भाई 100% सेफ है और महीने का 20% रिटर्न देगा तो वह एक पोंजी स्कीम और स्कैम है। हाई रिटर्न प्लस जीरो रिस्क एकिस्ट नहीं करता। मोटा भाई ऐसी ही बेवकूफियों में नहीं पड़ता। डवर्सिफिकेशन अपने पूरे पैसे किसी एक कंपनी या एक एसेट में मत डालो। डोंट पुट ऑल योर एग्स इन वन बास्केट। मोटा भाई अपना कुछ पैसा स्टॉक्स में, कुछ गोल्ड में, कुछ एफडी में और कुछ रियलस्टेट में डालता है। अगर मार्केट क्रैश हुआ तो गोल्ड उसे बचा लेगा। स्टॉक मार्केट पर डेडिकेटेड वीडियो आने वाली है। पर अभी के लिए बस इतना समझिए कि स्टॉक मार्केट कोई जुआ नहीं है। जब आप स्टॉक खरीदते हैं, आप बेसिकली उस कंपनी के बिजनेस का एक छोटा सा हिस्सा एक ओनरशिप खरीद रहे होते हैं। सबसे बड़ा दुश्मन इन्वेस्टिंग में मार्केट नहीं होता। आपके इमोशंस होते हैं। डर काजू को
21:34 पैनिकिक में सस्ते में बेचने पर मजबूर करता है और लालच काजू को हाइप में एक्सपेंसिव चीजें खरीदवाता है। दोस्तों, हम यह सब झमेला कर क्यों रहे हैं? क्या जिंदगी भर एक्सेल शीट में नंबर्स देखते हैं? क्या मरते दम तक पैसों के पीछे भागना है? नहीं। इस पूरे गेम का द एंड गेम है रिटायरमेंट या फाइनेंसियल इंडिपेंडेंसी। रिटायरमेंट का मतलब यह नहीं होता कि आप 60 साल के बूढ़े हो गए हैं और अब आपसे उठा नहीं जा रहा। मोटा भाई जैसे फाइनशियली लिटरेट इंसान के लिए रिटायरमेंट का मतलब है वह पॉइंट जहां आपको पैसों के लिए काम नहीं करना पड़ता। आपका पैसा आपके लिए काम करता है। काम बंद पर इनकम बंद नहीं। रिटायरमेंट का फार्मूला है पैसिव इनकम इज मोर दन और इक्वल टू एक्सपेंसेस। जिस दिन आपके एसेट से आने वाला पैसा आपके हर महीने के खर्चे से ज्यादा हो जाए, उस दिन आप मेंटली आजाद हैं। आप 35 की उम्र में भी रिटायर हो सकते हैं। काजू जैसे लोग रिटायरमेंट प्लानिंग में दो सबसे बड़ी गलतियां करते हैं। पहला है आई विल सेव
22:19 लेटर वो लेट स्टार्ट करते हैं। काजू को लगता है 40 की उम्र में सोचेंगे। पर कंपाउंडिंग का मैजिक टाइम मांगता है। मोटा भाई जानता है कि 25 साल की उम्र में ₹3000 महीना इन्वेस्ट करना 40 की उम्र में ₹00 महीना इन्वेस्ट करने से ज्यादा आसान और पावरफुल है। दूसरी गलती बच्चे संभाल लेंगे। यह सबसे खतरनाक इल्लुजन है। आजकल की फास्ट लाइफ और इकॉनमी में आपके बच्चों के पास अपने ही इतने फाइनेंसियल प्रेशर्स होंगे। आप उन पर बोझ नहीं बनना चाहेंगे। इग्नोरिंग इनफ्लेशन काजू सोचता है ₹00 महीना बहुत है। पर इनफ्लेशन के हिसाब से 20 साल बाद वही लाइफस्टाइल मेंटेन करने के लिए उसे शायद ₹ लाख महीना चाहिए होगा। आपको आज लगता है 1 करोड़ बहुत है। फ्यूचर में 1 करोड़ की वैल्यू आज के 30 लाख बराबर होगी। तो स्ट्रेटजी सिंपल है। सेव रेगुलरली, इन्वेस्ट लॉन्ग टर्म, बिल्ड मल्टीपल इनकम सोर्सेस, कंट्रोल एक्सपेंसेस। रियल गोल बैंक अकाउंट में
23:06 जीरोज़ बढ़ाना नहीं है। रियल गोल है फ्रीडम, फ्रीडम फ्रॉम स्ट्रेस, फ्रीडम फ्रॉम बैड बॉसेस, फ्रीडम टू मेक योर ओन चॉइससेस। यह पूरा गेम माइंडसेट का है। और जब आप इस वीडियो की हर चीज को प्रैक्टिकली करेंगे, तो आपको समझ आएगा। यह पूरा गेम माइंडसेट का है। अगर आप इस टॉपिक को और डिटेल में समझना चाहते हो, तो मेरे हैंड रिटन नोट्स जरूर पढ़ो। इतने सिंपल है कि फाइनेंस के बेसिक्स के लिए आपको कोई और बुक की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। लिंक डिस्क्रिप्शन में है। दोस्तों आज इस वीडियो में आपने क्या देखा? आपने समझा कि पैसा सिर्फ एक स्टर्ड एनर्जी है। एक टूल है। आपने देखा कि जमीन आसमान का फर्क होता है इनकम में और वेल्थ में। आपने काजू और मोटा भाई के थ्रू देखा कि बजटिंग एक रिस्ट्रिक्शन नहीं बल्कि एक डायरेक्शन है। आपने सेविंग पिरामिड के पांच लेवल्स को समझा और यह देखा कि इमरजेंसी फंड आपकी फाइनेंसियल बिल्डिंग का बेस है। हमने सेंट्रल बैंक्स और उनके रेपो रेट के मैजिक को समझा जो पैसों को सस्ता
23:52 या महंगा बनाता है। हमने देखा कि यूपीआई कैसे काजू जैसे लोगों को बिना दर्द के खर्च करवाता है और कैसे मोटा भाई जैसे अमीर लोग लिवरेज और डेप्ट का यूज़ करके खुद को और अमीर बनाते हैं बिना अपना पैसा लगाए। और इनमें हमने इन्वेस्टिंग और रिटायरमेंट का अल्टीमेट गोल सेट किया। फ्रीडम। फाइनेंसली इलेक्ट्रिक काजू जैसे लोग सोचते हैं कि उनकी प्रॉब्लम कम पैसा है। पर रियलिटी में उनकी प्रॉब्लम उनका फाइनेंसियल इग्नोरेंस है। बजटिंग इज द मैप, सेविंग इज द व्हीकल, इन्वेस्टिंग इज द फ्यूल एंड फ्रीडम इज द डेस्टिनेशन। यह एंटायर सिस्टम आम आदमी को गरीब रखने के लिए डिजाइन है, तो अपने पैसों की रिस्पांसिबिलिटी आज और अभी लीजिए। अगर आपको लगता है कि हमारे देश की सबसे बड़ी प्रॉब्लम फाइनेंसियल इलिट्रेसी को दूर करने में यह वीडियो एक छोटा सा स्टेप है तो इस वीडियो को अपने दोस्तों, अपनी फैमिली और उन लोगों के साथ शेयर जरूर करें जिन्हें आजादी की जरूरत है। क्योंकि फाइनेंस और नेचर का रूल बिल्कुल सेम है एडप्ट और डाई। मिलते हैं अगले वीडियो में।
24:39 जय हिंद।