0:00 हेलो एंड गुड मॉर्निंग एवरीवन। सुप्रभात नमस्ते। कैसे हैं आप सभी? मैं आशा करता हूं आप सभी अच्छे होंगे। अपना ध्यान रख रहे होंगे और मन लगाकर पढ़ाई तो कर ही रहे होंगे। दोस्तों आज तारीख है 19 सितंबर और हम सभी करेंगे द हिंदू न्यूज़ पेपर का एनालिसिस। दोस्तों आज के द हिंदू न्यूज़ पेपर के एनालिसिस से ज्यादा आप सभी जानते हैं आज सैटरडे का दिन है और सैटरडे के दिन हम क्या करते हैं? मेरे प्यारे दोस्त आप सभी जानते हैं कि सैटरडे को हम एस्स का भी एक डिस्कशन करते हैं कि एस्स को कैसे लिखा जा सकता है। उसकी एक ब्रेन स्टॉर्मिंग हम करते हैं। तो इसलिए यह सेशन सैटरडे वाला और भी ज्यादा खास हो जाता है। खासतौर पे आज के दो आर्टिकल्स एडिटोरियल के अंदर में
0:45 बहुत ही अच्छे इंपॉर्टेंट हैं। कुछ प्रीलिम्स के फैक्ट भी हैं। उन सभी को आज हम क्या करने वाले हैं? डिस्कस करने वाले हैं। लेकिन आगे बढ़ने से पहले आज के दिन की शुरुआत क्योंकि आज हम 19 सितंबर पर हैं। यानी कि ऑलमोस्ट हम सितंबर के महीने को खत्म करने की कगार पर हैं। अब जब मैं यह कहता हूं तो एक बच्चे का कमेंट आता है कि सर आप तो डरा देते हो यह कहकर कि भाई टाइम बहुत कम है। मैं डरा नहीं रहा हूं। मैं वास्तविकता आपको बताने की कोशिश कर रहा हूं कि प्लीज आप डेली जब सुबह उठे तो मैं एक रोल प्ले करना चाहता हूं कि एटलीस्ट आपको कोई बताए आगाह करें कि भाई ज्यादा समय आपके पास में नहीं है। तो दोस्तों आज के दिन के कोर्ट से हम शुरुआत करते हैं कि मोटिवेशन आपको शुरू तो करवा
1:33 देगा लेकिन रेगुलर नहीं बना पाएगा। रेगुलरिटी के लिए आपको क्या चाहिए? डिसिप्लिन चाहिए क्योंकि आपको अगर लगातार चलना है तो एक कदम चलकर रुकना तो है नहीं। ऐसा तो है नहीं कि एक कदम चले फिर रुक गए फिर एक कदम चले फिर रुक गए। आपको कंटीन्यूअसली चलना है। और उसके लिए क्या चाहिए? आपको डिसिप्लिन चाहिए। एंड इस सेशन की पीडीएफ आपको कहां मिलेगी? इस tlegram चैनल पर। इसकी पीडीएफ आपको मिल जाएगी दोस्तों। आप इसको जॉइ कर लीजिए। एंड दोस्तों यह है हमारा Instagram पेज जिसको आप फॉलो कर सकते हैं। आपको सारी चीजें यहां पर मिलती रहेंगी। तो सबसे पहला जो टॉपिक है वो पेज नंबर वन जीएस पेपर थ्री से आप कनेक्ट कर सकते हैं। इकोनॉमी से कनेक्ट कर सकते हैं। अगर इसको मैं कनेक्ट करना चाहूं तो जीएस पेपर टू आपके आईआर से
2:22 भी कनेक्ट कर सकता हूं। दरअसल यह एक एनालिसिस है। क्या एनालिसिस है कि यह एक डाटा पॉइंट के नाते आप अपने मेंस के पेपर के लिए तैयार रखिएगा। जहां पर आप इसको यूज कर सकते हैं। मेरे प्यारे दोस्त आप सभी जानते हैं कि हमारे मिनिस्ट्री ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स की तरफ से एक बयान आया है कि भारत हमेशा अपने नेशनल इंटरेस्ट के लेवल पर ही ऑयल को परचेस करेगा। है ना? यही बोला गया है। लेकिन अगर वास्तविकता में देखा जाए तो आप देखेंगे कि जबजब यूएसए का प्रेशर आया है तब-तब हमने क्या किया है? ऑयल के परचेस को कम कर दिया है। खासतौर पे यूएसए ने
3:08 जिन-जिन कंट्रीज के ऊपर प्रेशर क्रिएट किया है। जैसे फॉर एग्जांपल रशिया से ऑयल खरीदने पर प्रेशर क्रिएट किया, ईरान से ऑयल खरीदने पर प्रेशर क्रिएट किया और वेनेजुएला से ऑयल खरीदने पर प्रेशर क्रिएट किया। तो वो इस आर्टिकल में एक डाटा के बेसिस पर एक एनालिसिस कर रहे हैं कि आखिर कैसे यूएसए का जो प्रेशर है वो हमारे देश के अंदर में हमारी जो कहना है फॉरेन पॉलिसी है या हमारा जो इंपोर्ट है उसको वो कहीं ना कहीं क्या कर रहा है? इंपैक्ट कर रहा है। मैं फिर आपको कह रहा हूं भले ही हम यह हमेशा कहें हमेशा यह बात डिस्कस करते रहें कि भाई हम किसी के भी दबाव में कोई भी डिसीजन नहीं लेते हैं। लेकिन यह डाटा हमें शो कर रहा है कि जबजब यूएसए प्रेशर क्रिएट करता है तबतब
3:55 क्या? तब-तब हमने अपने ऑयल का जो इंपोर्ट है उसको क्या किया है? चेंज किया है। तो, यह टॉपिक काफी इंपॉर्टेंट आपके मेंस के अंदर में हो सकता है कि भाई, यूएसए कैसे प्रेशर टैक्टिक्स का यूज़ करके दूसरी कंट्रीज को क्या करता है? पुश करता है अपने इंटरेस्ट को क्या करने के लिए? सर्व करने के लिए। तो प्लीज याद रखिएगा ये एक थोड़ा सा अच्छा टॉपिक हो सकता है आपके एग्जाम में एक डेटा पॉइंट के रूप में जिसको आप यूज कर सकते हैं। तो अगर मैं आपको बताने की कोशिश करूं आप तीन कंट्रीज के डेटा को देखिए। एक है वेनेजुएला, एक है ईरान और एक है रशिया। तो अगर मैं ईरान की बात करूं तो आप सभी को ध्यान होगा कि
4:42 2018 में डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊपर में सेंशंस लगाए थे। एक समय था ईरान हमारा वन ऑफ द बिगेस्ट सप्लायर था क्रूड ऑयल का। एंड आप जानकर हैरान रहेंगे कि 2021 से लेकर अभी तक क्या? 2021 से लेकर अभी तक भारत ने जब से यूएसए ने हमारे ऊपर हमें प्रेशर क्रिएट किया है, हमने ईरान से ऑलमोस्ट 0% 0% हमने ऑइल को परचेस किया है। यानी कि आप यह चीज देख सकते हैं कि जो ऑयल है यानी कि एक कमोडिटी है उसको जिओपॉलिटिक्स में कैसे
5:27 यूज किया जा रहा है। सोचिए भारत ईरान से ऑयल को इंपोर्ट करता था। लेकिन जब से डोनल्ड ट्रंप ने यूएसए ने हमारे ऊपर में सेंशंस लगाने की धमकी दी। जैसे उन्होंने ईरान के ऊपर में सेंशंस लगाया। तब से आप देखेंगे तो इंडिया ने जीरो आप सोच रहे हैं जीरो। हमने 0% ऑयल को इंपोर्ट किया है आपके ईरान से। यह एक बहुत बड़ा कंसर्न है भाई बहुत बड़ा कंसर्न है इस टॉपिक कीेंस समझिए कि हम क्या-क्या डिस्कस करना चाह रहे हैं। साथ में यहां पर कह रहे हैं कि वैसे तो देखा जाए वेनेजुएला से हम ऑयल ज्यादा मंगाते ही नहीं थे। ऑलमोस्ट 1% के
6:14 आसपास में मंगाते थे। लेकिन जैसे ही यूएसए ने वेनेजुएला के ऊपर में भी सेंशन लगाए वहां से भी दोस्तों हमारा ऑयल इंपोर्ट ऑलमोस्ट जीरो के आसपास में आ गया। अब दूसरा यहां पर जो डायमेंशन है डिस्कस कर रहे हैं रशिया तो यह कह रहे हैं कि रशिया के डाटा को भी आप बहुत आराम से एनालाइज अगर आप करते हैं तो वहां पर भी आपको यूएसए की टैक्टिक्स देखने को मिलती है कि जब यूएसए अग्रेसिवली इंडिया के ऊपर में सेंशंस लगाने की बात करता है टेरिफ लगाता है तो भारत का जो रशिया से ऑयल इंपोर्ट है जो रशिया से ऑयल इंपोर्ट है वो ऑलमोस्ट 40 से 16% आ जाता
7:04 है। यानी कि यह बात समझिए हम यह बार-बार न्यूज़ में चलाते तो रहते हैं, कहते तो रहते हैं कि हम रशिया से ऑयल खरीद रहे हैं। बट यह कह रहे हैं डाटा शो करता है कि जब यूएसए बहुत एग्रेसिव हुआ है कि नहीं आप रशिया से भी ऑयल परचेस नहीं करेंगे तो वहां पर भी हमारा जो इंपोर्ट है वो डिक्लाइन ही हुआ है। एंड जब एंड जब यूएसए की जो सुप्रीम कोर्ट है उसने यूएसए के इस टेरिफ को क्या किया? अनकॉन्स्टिट्यूशनल कह दिया। इललीगल कह दिया। तो सेम टाइम तुरंत ही हमने रशिया से ऑयल के इंपोर्ट को बढ़ा लिया। अब यह डाटा आखिर कहता क्या है? यह डाटा यह शो करता है
7:49 कि भारत क्रूड ऑयल के ऊपर में काफी ज्यादा डिपेंड करता है। फर्स्ट वेरीेंट पॉइंट। दूसरा आप यहां से यह समझने की कोशिश करिए कि यूएसए अपनी जो पावर्स हैं उसका यूज़ करते हुए दूसरी कंट्रीज को क्या कर रहा है? डिक्टेट कर रहा है। एंड तीसरा बहुत इंपॉर्टेंट पॉइंट यह कंसर्न किससे रिलेटेड है? यह स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी से रिलेटेड कंसर्न है। एनर्जी सिक्योरिटी से रिलेटेड कंसर्न है। तो ये एक डेटा से मतलब कोई आर्टिकल नहीं है, कोई एडिटोरियल नहीं है। एक न्यूज़ में एक डाटा था फ्रंट पेज पर। तो मैंने सोचा इस डाटा के बेसिस पर मैं आपको ये एहसास कराने की कोशिश करूं कि भारत कितने बड़ी ऐसे सिचुएशन के अंदर में है जहां पर हम ऑलमोस्ट 80 90% ऑयल को
8:37 इंपोर्ट कर रहे हैं। इसका मतलब यह है कि अब आज के समय पर बहुत सख्त जरूरत है कि हमें यह डायवर्सिफिकेशन करना पड़ेगा। हमें अल्टरनेटिव फ्यूल्स की तरफ में जाना पड़ेगा। वरना ऐसे डिक्टेट ऐसे हमारी इकोनमी के ऊपर में इंपैक्ट लगातार पड़ता रहेगा। एंड ये भारत की ग्रोथ के ऊपर में सबसे बड़ा कंसर्न है। मैं एक और चीज बता रहा हूं। आप यह समझने की कोशिश करिए कि यह एक बहुत बड़ा फ्यूचर प्रॉस्पेक्ट में भी एक कंसर्न है जिसके बारे में हम लगातार एक वर्ड यूज़ करते हैं। वेपनाइजेशन, ट्रेड को वेपनाइज करना, डॉलर को वेपनाइज करना, कमर्शियल्स को वेपनाइज करना। इसलिए यह एक बहुत बड़ा क्राइसिस क्रिएट कर सकता है
9:23 भारत के लिए। एंड इसलिए हमें इसको बहुत जरूरी है इसको डायवर्सिफाई करना। इसको अल्टरनेटिव फ्यूल्स की तरफ में जाना एंड बहुत एग्रेसिवली जाना पड़ेगा। भले ही आपको लगे कि ये छोटा-मोटा टॉपिक है, लेकिन इस डेटा को पढ़ने के बाद में मुझे खुद रियलाइज होता है कि भाई हमें बहुत एग्रेसिवली हमारे देश के अंदर में अल्टरनेटिव फ्यूल्स चाहे आपको इमीडिएटली आपके इलेक्ट्रिक व्हीकल की तरफ में जाना पड़े। आपको एनर्जी के सोर्सेस को डवर्सिफाई करना पड़े। ये आपको करना पड़ेगा। तो ये डेटाज़ के थ्रू हमें पूरा का पूरा रियलाइजेशन होता है जिसको हमने देखा। एंड अगर आप जब कभी भी ये आर्टिकल से रिलेटेड अगर मेंस में आंसर लिख भी रहेगे तो वहां पर ये कोट कर सकते हो कि इंडिया का जो ऑयल इंपोर्ट है उसमें कैसे ट्रेंड
10:10 फॉलो हो रहे हैं एंड ये ट्रेंड क्या शो करते हैं कि इंडिया के अंदर में जो एनर्जी सिक्योरिटी का क्राइसिस है वो कितना कंसर्न है प्रज्ञा हम करेंगे अभी बात अभी पहले टॉपिक डिस्कस कर लें है ना ठीक है तो ये चीज याद रखिएगा बहुत इंपॉर्टेंट है आपके मेंस के अंदर डाटा के लेवल पर आप यूज़ कर सकते हो। जहां पर आप देखेंगे कि वेनेजुएला से तो हम ऑलमोस्ट ऑयल नहीं खरीदते थे। फिर भी 1% 2% के आसपास में कभी-कभी खरीद लेते थे। लेकिन जैसे यूएसए ने सेंक्शन लगाया हमने उसको जीरो कर दिया। अब ईरान की बात करें तो ईरान के ऊपर में जब से सेंक्शन लगाया है यूएसए ने 6 साल के अंदर में कोई भी ऑयल हमने इंपोर्ट नहीं किया। सोचो ईरान हमें लगातार कहता रहा कि भाई आप फ्री में ले लो। आप कम रेट पर ले लो। 2 साल बाद पेमेंट कर देना। आप सोचिए
10:58 हमने पिछले 6 साल के अंदर में जीरो मतलब कोई भी ऑयल इंपोर्ट हमने ईरान से किया ही नहीं है। एंड ये अल्टीमेटली किससे रिलेटेड है भाई? हमारी इकोनमी से रिलेटेड है। हमारे बैलेंस ऑफ पेमेंट के क्राइसिस से रिलेटेड है। हमारे करंट अकाउंट डेफिसिट से रिलेटेड है। एंड इसीलिए ये टॉपिक को मैं बहुत छोटा टॉपिक नहीं मानता हूं। ये मेरे लिए बहुत इंपॉर्टेंट टॉपिक है जनरली जिसके ऊपर में इतना सीरियस ग्रेविटी के साथ में डिस्कशन नहीं है हमारे पॉलिटिकल स्फीयर के अंदर में अगर किसी दूसरे देश के अंदर में ये सिनेरियो क्रिएट हो रहा होता तो आप सोच भी नहीं सकते हैं कि वहां पर इतनी अर्जेंसी होती वहां पर इतना ज्यादा अर्जेंट मेजर्स लिए जाते कि इसको कैसे सॉल्व किया जाए। ठीक है? क्लियर है? तो ये चीज याद रहेगा एग्जाम के लिए थोड़ा सा ये मैंने आपके साथ में डेटा पॉइंट को डिस्कस
11:44 किया। ठीक है? नहीं दोस्त क्या नाम है जब सेंशंस लगते हैं तो आप अल्टर अल्टरनेटिव मेथड्स ढूंढने की कोशिश करते हैं। रशिया चाहे ईरान हो वो क्या है कई बार इन सेंशंस के अंदर में यूएसए ने इमीडिएट टर्मिनेशन किया है कि भाई अब आप सोचो इंडिया की कंपनी ने किसी के साथ में लॉन्ग टर्म कमिटमेंट किया है। एकदम से ट्रेड डील अगर सस्पेंड हो गई सेंशन के चांसेस हैं तो आप सोचिए दोनों का कितना ज्यादा लॉस होता है। ठीक है? तो कई बार ये चीज होती है। नेक्स्ट जो टॉपिक है ये थोड़ा सा अच्छा टॉपिक है आपके एग्जाम के लिए। जहां पर हम बात करते हैं चीता के बारे में। तो मेरे दोस्त मेरे चीते आप सभी के सभी क्या हो? चीते हो। है ना? और भारत के अंदर में जन्मी चीता से चीता के बच्चे पैदा हुए हैं। बात समझिए क्या कहना चाह
12:30 रहा हूं। भारत के अंदर में जन्मी क्या? भारत के अंदर में जन्मी चीता से बच्चे पैदा हुए हैं। चार बच्चे पैदा हुए हैं। एंड अब जो संख्या हो चुकी है वो कितनी हो चुकी है? 56 हो चुकी है हमारे देश के अंदर में। तो प्लीज याद रखिएगा चीता की जो रीइट्रोडक्शन प्रोग्राम है उसको भी फोर इयर्स हो चुके हैं। एंड इसलिए ये आपके प्रीलिम्स के एग्जाम के लिए बहुत ही ज्यादा इंपॉर्टेंट है। अभी कल मैं एक ना डॉक्यूमेंट्री टाइप की एक वीडियो है। वहां पे देख रहा था कि अभी एक नई कैट मिली है। वाइल्ड कैट। उस वाइल्ड कैट को अभी तक पूरे वर्ल्ड में कोई जानता ही नहीं था। मतलब एक
13:15 नई स्पीशीज मिली है। तो मुझे लगता है डाउन टू अर्थ मैगजीन में अगले हफ्ते तक वो आएगा आर्टिकल तो उसको हम देखेंगे। तो मेरे प्यारे दोस्त पहली बात ये समझने की कोशिश करिएगा चीता भारत के अंदर में नहीं थे। अब अगर आप देखें हिस्ट्री में 1947 तक हमारे देश में चीता पाए जाते थे। लेकिन 1947 के अंदर में हमारे देश के एक राजा साहब को लगता है कि भाई क्या किया जाए? क्या किया जाए? हमारे देश में जो चीता है उसका हंट किया जाए। तो लास्ट जो चीता हमें दिखा था वो यहीं पर ही दिखा था। उसके बाद में उसको मार दिया गया। एंड बाद में क्या हुआ? 1952 के अंदर में हमने हमारे देश में चीता को एक्सटिंक्ट घोषित कर दिया। एक्सटिंक्ट घोषित कर दिया। यानी कि हमारे देश में पाए ही नहीं जाते हैं। ठीक है? तो प्लीज याद रखिएगा। फिर क्या हुआ? हमने कहा कि 2022
14:03 में हम चीता को रीइट्रोड्यूस करेंगे हमारे देश के अंदर में। ठीक है? क्या करेंगे? रीइट्रोड्यूस करेंगे। तो रीइट्रोड्यूस करने का मतलब इसको चीता को लाया गया हमारे देश के अंदर में। तो अभी अगर आप वर्ल्ड के अंदर में देखते हैं तो दो टाइप के चीता आपको देखने को मिलते हैं। ठीक है? दो टाइप के चीता आपको देखने को मिलते हैं। एक चीता है आपका ईरान के अंदर में। एंड एक चीता है आपके अफ्रीका के अंदर में। तो ईरान के अंदर में जो चीता है जिनको हम एशियाटिक चीता के नाम से भी जानते हैं। इनके नंबर्स ऑलमोस्ट 30 टू 40 हैं। बस तो अगर आप देखें लॉजिकली हमें एशियाटिक
14:51 चीता ही क्या मिलना चाहिए था। ठीक है? हम एशियाटिक चीता को लेकर आते तो सबसे बढ़िया चीज थी। लेकिन भाई क्या हुआ कि ईरान के पास में ये नंबर्स ऑलरेडी बहुत कम है इसलिए हमें इसको नहीं वहां से मिल पाए। तो इसलिए हमने अफ्रीका से चीता को क्या किया? इंपोर्ट किया 2012 में। आपने देखा होगा कि अभी लेटेस्ट तो बोत्सवाना से भी, नैमीबिया से भी, साउथ अफ्रीका से भी यह चीता आए। एंड अभी वो हमारे देश में कहां गए? उनको हमने कोनो नेशनल पार्क में क्या किया? इंट्रोड्यूस किया। अब अभी आप देखेंगे कि हमने जो इनकी संख्या है उसको भी और ज्यादा क्या किया है? बढ़ाना शुरू कर दिया है। है ना? यह भी चीज आप देखेंगे। तो अब ये जो चीता आए हैं हमारे देश में इन चीता के भी बच्चे होने शुरू हो गए हैं। जैसे पहले
15:36 इनके चीता के बच्चे हुए थे। चार बच्चे हुए थे। लेकिन जो दूसरा चीता है उसने क्या किया? उसको खा लिया। ठीक है? चारों बच्चों को मार दिया। तो अब चार बच्चे हुए हैं जो हेल्दी हैं। एंड अभी कहा जा रहा है आने वाले समय में कि ये एक बहुत बड़ी ग्रोथ है जिसके कारण में रीइंट्रोडक्शन प्रोग्राम को हम क्या मान सकते हैं? एक तरीके से सक्सेसफुल मान सकते हैं। क्योंकि आप सोचिए कि अभी देखो बाहर से जो चीता आए थे वो फिर भी भले ही अलग इकोसिस्टम में रहकर आए हो लेकिन भारत के अंदर में जो पैदा हो रहे हैं चीता उनके ज्यादा सर्वाइवल के चांसेस हैं। तो ये आने वाले समय में चीता काफी ज्यादा ये इंपॉर्टेंट रहेगा। ठीक है? क्लियर है ये चीज? अरे प्रज्ञा मेरे पास में कूपन नहीं है भाई। मैं जेब में रखकर नहीं बैठा हूं कूपन। मैंने जब आपको बोला कि मैं बाद में आपको Instagram पर रिप्लाई कर दूंगा तो उसके लिए बैक एंड टीम से मुझे
16:23 कूपन बनवाना पड़ेगा। मेरे पास में नहीं है। तो प्लीज इतने पेशेंस रख लो यार। अभी तो जाकर आप क्लास नहीं अटेंड करोगे दोस्त। है ना? तो आप लगातार बता दो, बता दो, बता दो। कमेंट मत करो प्लीज बेटा। प्लीज इतनी तो समझ रखो। मैंने जब आपको कह दिया कि मैं जाकर टीम से बात करूंगा। टीम आपको कूपन दे देगी। फिर उसके बाद में हो जाएगा भाई। अभी प्लीज एटलीस्ट इस टॉपिक पे तो फोकस करने दो। औरंगटन अभी क्या मैं अपने जो हमारे फॉरेस्ट ऑफिसर्स हैं वो उसकी केयर कर रहे हैं। एंड शायद आने वाले समय में कहा जा रहा है कि इंडोनेशिया की तरफ से मांग की जा रही है कि उनको स्मगल किया गया है। उनको वापस भेज दिया जाए। लेकिन अभी वो क्या है? हमारे हेल्थ जो क्या नाम है? फॉरेस्ट जो ऑफिसर्स हैं उनके पास में है। ठीक है? क्लियर है? तो ये याद रखिएगा आपके
17:10 लिए चीता। तो एग्जाम में क्वेश्चन आ सकता है। तो ये देखेंगे चार बच्चे पैदा हुए हैं। तो अभी आपके पास में कितने चीता हो चुके हैं? इन चार को अगर ऐड करा जाए तो टोटल हो चुके हैं जिसमें 56 हो चुके हैं। ठीक है? क्लियर है? तो याद रखिएगा चार जो पहले बच्चे पैदा हुए थे वो लेपर्ड अटैक के अंदर में क्या हो गए थे? उनको खा लिया गया था। उनकी जान चली गई थी। एंड यहां पर एक और बहुत इंपॉर्टेंट चीज इन चीता प्रोग्राम के बारे में ये भी चीज याद रखिएगा ये चीता आए कहां-कहां से हैं? तो आप देखेंगे जो सबसे पहले आठ चीता आए थे वो नेमीबिया से आए थे। ये प्लीज मेरी एक और हम्ल रिक्वेस्ट है कि आप मैप पर भी इनको लोकेट कर लेना। ठीक है? फिर उसके बाद में देखा जाए 12 चीता कहां से आए? साउथ अफ्रीका से आए। फिर उसके बाद में चीता पता है कहां से आए थे? आपके
17:55 बोथ्स स्वाहाना से चीता आए थे। ठीक है? कहां से? बोत्सवाना से। एंड बोस्वाना की एक और खास बात बताऊं। इस समय पर जो अफ्रीकन चीता की हम बात करते हैं उसमें सबसे ज्यादा चीता पता है कहां पर है? यहीं बोत्सवाना के अंदर में है। बोत्सवाना में अप्रोक्सिममेटली 24% ग्लोबल चीता की पापुलेशन है। वहां पर अगर देखा जाए तो बोथस्वाना में आपके 7100 के आसपास में चीता है। आप सोचो कितना इंटरेस्टिंग फैक्ट आ सकता है। तो ये भी चीज याद रखिएगा कि चीता हमने नमीबिया से, आपके साउथ अफ्रीका से एंड बोथ स्वाना से इन तीनों जगह से क्या किए थे? चीता को इंपोर्ट किया है। अब प्लीज याद रख लेना जैसे हमने प्रोजेक्ट टाइगर शुरू किया था और टाइगर की पापुलेशन को इंक्रीस किया। इसी ऑब्जेक्टिव से हमने 2022 के अंदर में इस प्रोजेक्ट चीता को भी शुरू किया था। 1952 में हमारे देश के अंदर
18:42 में चीता एक्सटेंट हो गया है। वर्ल्ड के अंदर में प्लीज याद रखना दो ही टाइप के चीता पाए जाते हैं। इस चीता प्रोग्राम को इंप्लीमेंट कौन कर रहा है? नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी इसको इंप्लीमेंट कर रहा है। एंड इस समय पर चीता को हमने कहां-कहां पर रखा है? एक कोनो नेशनल पार्क पर पहले रखा था। याद करिए लास्ट जो ईयर था उसमें एक टॉपिक हम और डिस्कस कर रहे थे। गांधी सागर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के अंदर में जो कि मध्य प्रदेश के अंदर में फिर वहां पर रखा गया। एंड उसके बाद में देखा जाए अभी यह कहा जा रहा है कि इनको क्यों ना नौरादेही वाइल्ड लाइफ सेंचुरी मध्य प्रदेश के अंदर में भी रखा जा सकता है क्या? तो ये भी चीज याद रख लेना चीता से रिलेटेड। ठीक है? ठीक है? क्लियर है ये चीज़? बहुत इंपॉर्टेंट है। अब एक और चीज एशियाटिक जो चीता है उनका आईयूसीएन स्टेटस क्या है? क्रिटिकली इंडेंजर्ड है। और जो अफ्रीकन
19:28 चीता है उनका जो आईयूसीएन स्टेटस है वनरेबल है। ठीक है? क्लियर है? क्लियर है भाई? चल तो प्लीज ये प्रीलिम्स के लिए इन फैक्ट्स को नोट कर लेना। ठीक है? इतने सारे। हां। यह बढ़िया पॉइंट बोला भाई कि 1050 चीता तो अभी लाइव बैठे हैं। है ना? ठीक है? 1000 50 चीता तो अभी लाइव बैठे हैं। तो, यह भी एक इंपॉर्टेंट है। एग्ज़ाम के लिए इंपॉर्टेंट है। यह चीज़ आपसे पूछ सकते हैं। चीता से रिलेटेड सारी चीज़ें और टोटल 56 हो चुके हैं हमारे देश के अंदर में। क्योंकि 4 साल ऑलरेडी हो चुका है। तो, यूपीएससी क्वेश्चन पूछ सकता है। नेक्स्ट जो टॉपिक है, यह है आपका प्रोग्राम जिसके बारे में हम बात कर रहे
20:14 हैं विश्वकर्मा स्कीम के बारे में। अच्छा आप सभी ने देखा होगा कुछ लोग हाथ से कोई क्या मान के चलो फॉर एग्जांपल कोई बर्तन बनाते हैं। कई सारे लोग हाथ से कुछ कढ़ाई बुनाई करके कुछ एक आइटम बनाते हैं। यानी कि जिनको हम हैंडीक्राफ्ट्स के नाते जानते हैं जो हाथों से बुनकर कारीगर ये सब चीजें हम जानते हैं। अब दरअसल आप हमारे देश के अंदर में अगर देखें तो हमारे देश में ऐसे इनफॉर्मल इकोनमी को फॉलो करने वाले लोग बहुत सारे हैं। हमारे देश के आसपास में आप छोटे-छोटे शहरों में जाओगे तो कुछ छोटे-छोटे ऐसे प्रोडक्ट बनते हैं जिनको पिछले जनरेशन टू जनरेशन वो गुरु शिष्य परंपरा से क्या होते रहते हैं? पास ऑन होते रहते हैं कि एक पेरेंट फिर उनके गुरु फिर उनके गुरु वो जनरेशन टू जनरेशन सेवंथ
20:59 जनरेशन, फाइव जनरेशन, सिक्स जनरेशन तक वो चीजें पास होती रहती हैं। तो अब यह जो विश्वकर्मा जो हम स्कीम की बात करते हैं, यह बेसिकली स्कीम है। किसके लिए? जो हमारे हैंडीक्राफ्ट्स बनाते हैं, जो आर्टिशंस बनाते हैं, उनको कैसे प्रोटेक्ट किया जाए? उन लोगों को कैसे प्रोटेक्ट किया जाए? तो उनको प्रोटेक्ट कैसे कर सकते हो? सबसे पहली चीज तो उनको आप आइडेंटिफाई करिए। उनको आप सर्टिफिकेट दीजिए। पहली बात ये हो गई। फिर आप क्या करिए? उनको ट्रेनिंग प्रोवाइड करिए। उनको स्किल्स प्रोवाइड करिए। उनको आप टूल्स प्रोवाइड करिए। एंड थर्ड वेरी इंपॉर्टेंट चीज उनको आप क्या करिए? क्रेडिट प्रोवाइड करिए। क्योंकि वह इनफॉर्मल सेक्टर के अंदर में होते हैं। आप देखेंगे वह ज़्यादातर फॉर्मलाइज़ेशन के अंदर में नहीं आते हैं। तो, इसलिए उनको लोन नहीं मिलता। उनको क्रेडिट सपोर्ट नहीं मिलता। तो, यह जो गवर्नमेंट की स्कीम है
21:47 जिसका नाम है पीएम विश्वकर्मा स्कीम। यह एक सेंट्रल सेक्टर स्कीम है। यानी कि 100% इसमें सेंट्रल गवर्नमेंट फंडिंग देती है। 100%। उसके बाद में एक और चीज याद रख लेना कि यहां पर जो अर्बन एरिया रूरल एरिया में जो आपके ट्रेडिशनल आर्टिशंस हैं, क्राफ्ट्स पीपल हैं, उनको कैसे प्रोटेक्ट किया जाए, उसके लिए इस स्कीम को लाया गया है। क्या? उसके लिए इस स्कीम को लाया गया है। एंड ये है पीएम विश्वकर्मा स्कीम। प्लीज प्रीलिम्स के लिए इस चीज को नोट कर लीजिएगा। ठीक है? क्लियर है ये चीज? यानी कि ये क्या है? सेंट्रल सेक्टर की स्कीम है। प्लीज याद रहेगा? सेंट्रल सेक्टर स्कीम यानी कि 100% इसमें सेंट्रल गवर्नमेंट फंडिंग देती है। अब इस स्कीम की जो शुरुआत हुई थी 2023 में हुई थी। तो
22:34 यानी कि इसको कितने हो चुके हैं? 3 साल इस स्कीम को हो चुके हैं। एंड अभी अगर आप देखेंगे इस स्कीम के अंदर में ₹1,000 करोड़ की अनाउंसमेंट की गई थी। जो आपके 2023-24 से लेकर 27-28 तक रहेगा। यानी कि अगले साल तक यह न्यूज़ में रहने वाली है। एंड इस स्कीम का मेन ऑब्जेक्टिव क्या है? कि कैसे जो इनफॉर्मल सेल्फ एंप्लॉयड आर्टिशंस हैं उनको कैसे टूल्स प्रोवाइड किए जाए। कैसे उनको स्किल प्रोवाइड की जाए, कैसे स्किल में अपग्रेडेशन किया जाए? तो प्लीज याद रख लेना ये तीन पिलर्स के ऊपर में काम करती है स्कीम। ये तीन पिलर्स के ऊपर में यह काम करती है स्कीम। तो प्लीज सबसे पहली चीज तो सम्मान मींस रिस्पेक्ट। तो हर किसी जो आर्टिशियन है
23:22 उसको क्या दिया जाएगा? एक तरीके का आइडेंटिफिकेशन किया जाएगा। उसको एक डिजिटल आईडी कार्ड दिया जाएगा। अब डिजिटल आईडी कार्ड से आपने क्या किया? उनको रिकॉग्नाइज कर लिया। उसके बाद में सामर्थ्य यानी कि कैपेबिलिटी। अब कैपेबिलिटी के लिए क्या करिए? आपने जब आइडेंटिफाई कर लिया है तब आप उनको ट्रेनिंग प्रोवाइड करेंगे। आप उनको अपग्रेड करेंगे। ठीक है? तो ये चीज याद रख लेना। जिसको फॉर्मल एंटरप्राइजज़ के साथ में उनको क्या किया जाएगा? इंगेज किया जाएगा। एंड लास्ट समृद्धि यानी कि प्रोस्पेरिटी। आपने आइडेंटिफाई कर लिया। उनकी कैपेसिटी बिल्डिंग पर काम कर लिया। अब वो अर्निंग बेटर कर सके। सोचिए एक ऐसा हिस्सा हमारे देश में है जिसके पास में बहुत ज्यादा नॉलेज है। जनरेशनल नॉलेज है, कल्चरल नॉलेज है। लेकिन वो उतना ज्यादा
24:07 अर्न नहीं कर पा रहे। तो उनकी प्रोस्पेरिटी के लिए क्या करना कि उनको बैंक से यानी कि इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट मिल सके। वो अपने बिजनेस को एक्सपेंड कर सके। एंड साथ में जो हमारे पास में जो एक कहते हैं ना जनरेशन टू जनरेशन ट्रांसफर होने वाली धरोहर है जो एक हमारा जो क्या कह सकते हैं आप इसको कि हमारी नॉलेज सिस्टम है उसको कैसे प्रोटेक्ट किया जाए तो उसके लिए क्या करना उनको डू स्टेप टूलकिट के प्रोविजन प्रोवाइड करना मंथली डिजिटल ट्रांजैक्शन पर कैशबैक प्रोवाइड करना इवन गवर्नमेंट ने यह भी कहा कि अगर आप ऑनलाइन पेमेंट लेते हैं तो आपको कैशबैक भी दिया जाएगा साथ में उनको ग्लोबल मार्केट का भी एक्सेस प्रोवाइड किया जाएगा गवर्नमेंट के द्वारा जिससे वह अपने सामान को वहां पर बेच सके। तो अगर आप देखेंगे इस स्कीम की जो अपडेट है जो कार्ड है वहां पर
24:54 अगर आप देखेंगे तो सबसे पहली बात 30 लाख रजिस्टर्ड बेनिफिशरीज को रजिस्टर किया गया है। एक डेटाबेस तैयार कर लिया गया है। साथ में 24 लाख के आसपास में आर्टिशंस को क्या किया गया है? ट्रेनिंग प्रोवाइड की गई है। पांच से सात दिन की बेसिक ट्रेनिंग। और यह ट्रेनिंग किसके द्वारा प्रोवाइड की गई है? मिनिस्ट्री ऑफ़ स्किल डेवलपमेंट एंड एंटरप्रेन्योरशिप के द्वारा। जहां पर उनको डेली ₹500 का स्टाइपेंड भी दिया जाता था। साथ में उनको कस्टमाइज्ड टूलकिट भी प्रोवाइड की गई है जो ₹15,000 की ईच। ठीक है? अब यहां पर बड़ी इंपॉर्टेंट चीज कौन-कौन से सेक्टर्स को आइडेंटिफाई किया गया? तो 18 ऐसे सेक्टर्स को आइडेंटिफाई किया गया इसके अंदर में। 18 सेक्टर्स को आइडेंटिफाई किया गया है। जैसे कि फॉर एग्जांपल कारपेंटर हो गए, बोट मेकर हो गए,
25:39 आर्मर हो गए, ब्लैकथ हो गए, हैमर एंड टूलमेकर्स हो गए, लॉक स्मिथ ताले, गोल्ड स्मिथ पॉटर्स स्कल्प्चर्स कॉबलर मैशंस आप देखेंगे बास्केट जो बनाते हैं, डॉल जो बनाते हैं, टॉयज़ बनाते हैं, बार्बर, गार्डलैंड मेकर्स, वॉशरमैन, टेलर्स एंड फिशिंग नेट मेकर्स। तो इन सबको आइडेंटिफाई किया गया है इसके अंदर में। तो प्लीज याद रख लेना। मैं फिर रिपीट कर रहा हूं। एक आपने उनको आइडेंटिफाई किया। सेकंड उनको आपने ट्रेनिंग प्रोवाइड करी। थर्ड उनको इंस्टीट्यूशनल क्रेडिट प्रोवाइड किया। तो अभी आपने ऐसे 18 ट्रेडिशनल सेक्टर्स को आइडेंटिफाई किया है। 18 सेक्टर्स को। ठीक है? तो इसके अंदर में ट्रेनिंग प्रोवाइड करना। ट्रेनिंग के टाइम पर उनको ₹500 का स्टपेंड दिया जाता है। उनको मॉडर्न टूल्स परचेस करने के लिए ₹100 से लेकर ₹15,000
26:25 तक का सामान दिया जाता है। एंड टूलकिट के लिए इंसेंटिव भी प्रोवाइड किए जाते हैं। तो प्लीज याद रख लेना बहुत ही अच्छा ये स्कीम है जो प्रीलिम्स के अंदर में क्वेश्चन आ सकता है। एग्जांपल के लिए आप समझिए कि आपके घर के आसपास में कोई हो सकता है फूल वाले हो। आपके आसपास में हो सकता है कोई बारबर हो। आपके आसपास में हो सकता है कोई जो घड़े बनाते हैं वो हो। आपके आसपास में हो सकता है कोई कारपेंटर हो तो उनके पास में तो कोई जॉब सिक्योरिटी नहीं है। उनके पास में तो कोई इंश्योरेंस नहीं है। उनके पास में तो कोई पीएफ नहीं है। तो वहां पर उनको कैसे क्या किया जाए? अपलिफ्ट किया जाए। उनको कैसे नए जो डिमांड है उसके अकॉर्डिंग अपस्किल किया जाए। रीस्किल किया जाए। कैसे उनको लोन प्रोवाइड किया जाए? फॉर एग्जांपल मान के चलो कोई कोई जो कुम्हार है यानी कि कोई अगर जो
27:11 पॉट्स बनाते हैं उनकी इच्छा है कि मैं अपने बिजनेस को बड़ा करूं। तो उसके लिए उनको क्रेडिट चाहिए। तो वो क्रेडिट के लिए क्या उनको इनफॉर्मल सेक्टर्स में जो आपके आउट ऑफ द बैंकिंग सिस्टम है उसमें जाकर उनको क्या कर लेना पड़ता था? लोन लेना पड़ता था। तो उन सब चीजों को क्या किया जाता है? सॉल्व किया जाता है। ठीक है? तो उसके लिए क्या किया गया है? ये स्कीम को इंप्लीमेंट किया गया है। एंड कौन सी मिनिस्ट्री इसको इंप्लीमेंट कर रही है? मिनिस्ट्री ऑफ़ एमएसएमई नोडल मिनिस्ट्री है। स्किल के लिए इसके मिनिस्ट्री ऑफ़ स्किल एंड डेवलपमेंट एंटरप्रेन्योरशिप। एंड साथ में देखिए डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंसियल सर्विज जो मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस से रिलेटेड है। सेंट्रल सेक्टर स्कीम है 2027-28 तक इसको इंप्लीमेंट किया जाएगा। क्लियर है? कोई भी डाउट इससे रिलेटेड कोई भी डाउट इससे रिलेटेड इस टॉपिक से इस छोटे से टॉपिक से रिलेटेड नहीं सोशल
27:58 सिक्योरिटी के बेनिफिट नहीं मिलेंगे। ठीक है? ठीक है? क्लियर है ये चीज? चलें। देखो एक चीज मैं आप सभी की एक भावना मेरे ख्याल में मैं समझ पा रहा हूं जो मुझे ऐसा लगता है कि इस समय का एक डिस कंटेंट है भी जो उस दिन हम द हिंदू न्यूज़ पेपर में एक एनालिसिस में पढ़ भी रहे थे कि आजकल के जो यूथ है वो एक थोड़ा सा डिसटिस्फाइड है उसको सेटिस्फेक्टरी जवाब नहीं मिल रहे हैं। इस कारण से बहुत सारा यूथ जो है वह अह उस तरीके से क्या मैं ओरिएंटेड फील नहीं कर रहा है ना यह चीज़ बात कर रहे हैं। तो ये मैं थोड़ा सा क्योंकि मेरा तो सबसे डायरेक्ट रिलेशन है यूथ के साथ में जेंजीज़ के साथ में और मैंने एक चीज देखा जो ज़ीज़
28:44 हैं उनमें कुछ बच्चे मुझे नजर आ रहे हैं जो थोड़ा सा फ्रस्ट्रेटेड हैं। और थोड़ा सा क्या नाम है कहते हैं ना एलिनेशन नहीं है। उनको लगता है कि हर चीज क्या है? नेगेटिव पर्सपेक्टिव में है। मैं इस चीज को बिल्कुल क्लियरली समझ सकता हूं। जिस तरीके से अनइंप्लॉयमेंट बढ़ रहा है, जिस तरीके से जॉब क्रिएशन नहीं हो रही है, जिस तरीके से पेपर लीक हो रहे हैं, जिस तरीके से जॉब अपॉर्चुनिटीज नहीं हो रही हैं। तो जिस तरीके से ट्रस्ट डेफिसिट हो रहा है, वो चीजें बिल्कुल आपको नजर आती हैं। बट बट माय डियर फ्रेंड, जिस तरीके से हम इसको अपने बिहेवियर में ला रहे हैं, यह अल्टीमेटली इंपैक्ट हमें ही करेगा। दरअसल मैं ये आर्टिकल दरअसल क्योंकि मुझे लगा लिंक करके आप अच्छा समझ पाओगे। ठीक है? ठीक है। तो आपने नोट किया होगा कि हमने कई
29:31 बार बात करी है कि भाई यूथ को ज्यादा चीजें इस समय पर सिस्टम के ऊपर में क्या नाम थोड़ा सा ट्रस्ट नहीं है। सिस्टम के ऊपर में थोड़ी सी प्रॉब्लम है। पेपर लीक हो रहे हैं। पेपर टाइम से नहीं हो रहे। इवन खासतौर पे आप देखेंगे जो आपके कई सारे ऐसे स्कीम्स होती हैं जिनको आप देखते हैं कि वो इंप्लीमेंट होती नजर नहीं आती हैं। तो ये डिस्कंटेंट है, डिसफेक्शन है एंड ट्रस्ट डेफिसिट है, इंस्टीट्यूशनल क्राइसिस है। ये सब चीजें हम डिस्कस कर रहे हैं। बट ये चीज हो क्या रही है? ये हमारे बिहेवियर में आती जा रही है। तो ये चीज मुझे लगा कि आपके साथ में मुझे डिस्कस करना भी चाहिए। जैसे फॉर एग्जांपल मैं कुछ बच्चों का जैसे हम कोई भी स्कीम के डिस्कस करते हैं तो क्या होता है? जमीन पर कुछ नहीं है। सब करप्शन का तरीका है। लेकिन आप यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं। तो हमें इस तरीके से बात और बिहेव नहीं करना चाहिए कि जैसे हम चाय की टपरी पर बैठकर गुलछर्रे
30:18 उड़ा रहे हैं। ठीक है? देयर इज़ अ बिग डिफरेंस बिटवीन एस्पिरेंट एंड अ सोशल कंटेंट क्रिएटर और सोशल बिहेवियर। दोनों के बीच में फर्क होता है। तो वी शुड टॉक एंड बिहेव लाइक एन एस्पिरेंट जो कि एस्पायर कर रहा है एक ऐसी सर्विज में जाने के लिए जो सिविल सर्विज की तैयारी कर रहा है। देयर इज़ अ बिग डिफरेंस बिटवीन दीज़ टू। तो आप अगर ऐसी कोई स्कीम है तो उसके अंदर में आपको वे फॉरवर्ड डिस्कशन करना चाहिए। इसमें क्या कॉनंस्ट्रेंट्स हैं उनके ऊपर में डिस्कशन करना चाहिए। इसके अंदर में कौन से और रिफॉर्म्स किए जा सकते हैं उसके अंदर में डिस्कशन किया जा सकता है। ना कि आपको ऐसा डिस्कशन करना चाहिए। बकवास है। हट हट बेकार आ रहा है। हट पैसा खा लिया। हट काट लिया। तो ये आपके आंसर में नहीं होगा। है ना? न्यूट्रल भी नहीं है। अगर आप क्रिटिसिज्म भी कर रहे हैं देयर शुड बी अ
31:05 क्रिटिसिज्म विद अ सॉल्यूशन। तो ये चीज आपके पास में होना चाहिए। ठीक है? क्लियर है? तो ये बड़ा अच्छा एक टॉपिक है जिसके ऊपर में आप डिस्कस कर सकते हैं। ठीक है? नेक्स्ट टॉपिक है सेमीकॉन इंडिया। ये बड़ा अच्छा आप इसको मेंस के अंदर में लिख सकते हैं। तो ठीक है? तो इसको आप अच्छा एक मेंस के हिसाब से इसको भी आप नोट कर लीजिए एग्जांपल के लिए जहां पर आप इसको नोट कर सकते हैं। तो मेरे प्यारे दोस्त आप सभी जानते हैं हम चिप्स बनाने की बात करते हैं। हम सेमीकंडक्टर की बात कर रहे हैं। तो भारत के अंदर में काफी टाइम से हम चाइना प्लस स्ट्रेटजी के ऊपर में बात करने की कोशिश कर रहे हैं। ठीक है? चाइना प्लस वन मींस कि चाइना के अंदर से इन्वेस्टमेंट को अगर निकाला जाए तो वो कहां पर जा सकता है? तो वो
31:50 इंडिया की तरफ में हम उसको अट्रैक्ट करने की कोशिश कर रहे हैं। एंड भारत खुद से सेमीकंडक्टर बनाने के ऊपर में इवन आप देखेंगे माइक्रोपसर्स बनाने के ऊपर में काफी ज्यादा फोकस कर रहा है। तो उसी के लिए एक इवेंट हुआ। ठीक है? जिसकी हम बात करते हैं जिसको हम सेमीकॉन के नाम से जानते हैं। सेमीकॉन इंडिया। यानी ये काफी टाइम से हमारे देश में हो भी रहा है। तो थोड़ा सा इसके ऊपर में हम क्या करते हैं? बात करते हैं। तो प्लीज याद रखिएगा सेमीकॉन इंडिया एक इंडिया की फ्लैकशिप इंटरनेशनल सेमीकंडक्टर कॉन्फ्रेंस है। जहां पर वर्ल्ड के अंदर जो जो इंपॉर्टेंट माइंड्स हैं, बहुत इंपॉर्टेंट कंपनीज़ हैं, वो सभी की सभी इस कॉन्फ्रेंस में आती हैं। यहां पर एग्बिशन होता है। यहां पर सप्लाई चेन में कैसे डवर्सिफिकेशन किया जा सकता है। कैसे चिप्स को क्रिएट किया, कैसे
32:35 चिप्स को डिजाइन किया जा सकता है। जहां पर एकेडमिक इंस्टीट्यूशन पॉलिसी मेकर्स को कनेक्ट करने का काम करता है। मैं फिर रिपीट कर रहा हूं। सैमिकॉन एक ऐसा इंटरनेशनल इवेंट है जो इंडिया होस्ट करता है जिसमें इंटरनेशनल लेवल पर जितने भी स्टेक होल्डर्स हो सकते हैं उन सभी को यहां पर बुलाया जाता है। ठीक है क्लियर तो याद रखिएगा इसको यशोभूमि इंडिया के इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर पर होस्ट किया गया एंड इस बार की थीम थी सिलिकॉन टू सिस्टम बिल्डिंग द इकोसिस्टम ठीक है तो प्लीज यहां पर याद रखिएगा इसको जॉइंटली ऑर्गेनाइज कौन करता है इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन जो मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनेशन टेक्नोलॉजी के अंडर में आता है। बहुत अच्छा क्वेश्चन हो सकता है कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन किसके अंडर में है? प्लस में सेमी जो कि ग्लोबल इंडस्ट्री एसोसिएशन है जो इलेक्ट्रॉनिक्स
33:22 मैन्युफैक्चरर और सप्लाई चेन को जो डिजाइन करते हैं उनके अंदर में क्या करता है? कोलैबोरेशन का काम करता है। वो जॉइंटली इस क्या मीटिंग को होस्ट करते हैं। तो इसका मेन ऑब्जेक्टिव क्या है? इसका मेन ऑब्जेक्टिव ये है। ये इसका मेन ऑब्जेक्टिव यह है कि भाई इंटरनेशनल लेवल पर जो जो स्मार्ट जोज बेस्ट प्रैक्टिससेस हैं, बेस्ट कंपनीज़ हैं, उनको यहां पर इंडिया में लाया जाए। एंड एक तरीके से ऐसा इकोसिस्टम क्रिएट किया जाए कि भारत के अंदर में सेमीकंडक्टर का प्रोडक्शन किया जाए। तो सेमीकॉन इंडिया प्लीज याद रखिएगा जिसमें एक्सलरेट करना है कैपिटल इन्वेस्टमेंट को। आप सोचिए इतने बड़े-बड़े प्लेयर्स आएंगे तो हो सकता है इन्वेस्टमेंट भी इंक्रीस हो। ग्लोबल टेक्नोलॉजी जो पार्टनरशिप है उसको इंक्रीस किया जाए। कैसे इंडिया को एक ट्रस्टेड पोजीशन में लाया जाए जहां पर लोग इन्वेस्ट करें एंड कैसे भारत को ग्लोबल
34:08 मैन्युफैक्चरिंग के लेवल पर लेकर जाया जाए। यानी कि भारत सिर्फ और सिर्फ हमारे देश के अंदर में प्रोडक्शन नहीं करना चाहता। भारत प्रोडक्शन के साथ-साथ में वर्ल्ड का लीडर भी बनना चाहता है इसके अंदर में। ठीक है? तो ये चीज याद रखिएगा। एंड बहुत इंपॉर्टेंट चीज है। आप देखेंगे चाहे सिलिकॉन हो, केमिकल हो, चिप मैन्युफैक्चरिंग हो, पैकेजिंग हो, सिस्टम हो, स्किलिंग हो। इन सब चीजों का सॉल्यूशन निकालने की कोशिश की जाती है सेमीकॉन इंडिया एक तरीके से आपके किससे? आपके इस कॉन्फ्रेंस से। ठीक है? ठीक है? तो ये प्रीलिम्स का एक छोटा सा टॉपिक है जिसको आप देख सकते हैं जो क्वेश्चन आ सकता है जहां पर चिप डिजाइन के ऊपर में, चिप मैन्युफैक्चरिंग के ऊपर में, चिप पैकेजिंग सिस्टम इंटीग्रेशन सिलिकॉन सैंड इन सब चीजों के ऊपर बात की जाती है। क्योंकि सेमीकंडक्टर बनाना, चिप्स बनाना
34:53 इतना इजी नहीं है। तो आप वहां पर इंटरनेशनल मार्केट प्लेस को एक जगह पर ला रहे हैं। एक इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं जिससे इंडिया को एक बहुत बड़ा हब बनाया जा सके इन्वेस्टमेंट का। नेक्स्ट टॉपिक है बड़ा अच्छा एक टॉपिक है जिसके ऊपर में आप बहुत अच्छे से इसको प्रिपेयर कर सकते हैं कि भारत की जो ग्रोथ है वो किस में है? अच्छा आपसे अगर ये क्वेश्चन पूछा जाए कि भारत की ग्रोथ किस में है? ठीक है? भारत की ग्रोथ किस में है? तो आप देखेंगे भारत की ग्रोथ होम ग्रोन इनोवेशन के ऊपर में है। जब तक इनोवेशन हम हमारे देश में नहीं करेंगे तब तक भारत की ग्रोथ कभी भी नहीं हो पाएगी। अगर भारत को सही में आगे बढ़ना
35:40 है। भारत को सही में अगर तरक्की करनी है तो हमें हमारे देश के अंदर में इनोवेशन इकोसिस्टम को क्या करना पड़ेगा? डेवलप करना पड़ेगा। अब वो जो ट्रेडिशनल ऑब्जेक्टिव होता था जहां पर आप क्या करते थे कि भाई किसी चीज को इंपोर्ट कर लो किसी दूसरे देश से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करा लो। कह रहे उसकी बजाय हमें काम करना चाहिए कि भाई हमारे देश के अंदर में क्या करें? हम होम ग्रोन इकोसिस्टम ऐसा बनाएं कि हमारे देश के अंदर में टेक्नोलॉजी बने। हमारे देश के अंदर में नई-नई टेक्नोलॉजी को इनोवेट किया जाए। तो इट मींस अगर आप देखेंगे वास्तविकता में सही में अगर भारत की ग्रोथ अगर कहीं से हो सकती है तो वो
36:26 होगी आपके इसी इनोवेशन इकोसिस्टम से। अगर इनोवेशन इकोसिस्टम बेटर होगा तभी जाकर हम क्या कर पाएंगे? हम ग्रोथ हासिल कर सकते हैं। वरना हम हासिल नहीं कर पाएंगे। हम क्या करेंगे? टेक्नोलॉजी इंपोर्टर ही बनते रहेंगे। ठीक है? पहली बात ये क्लियर? तो इस आर्टिकल में ये एग्जांपल के थ्रू समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि भाई हमारे देश के अंदर में दो इतनी इंपॉर्टेंट चीज हुई हैं जो हमने कभी सोची भी नहीं थी। जैसे कि फॉर एग्जांपल जैसे कि फॉर एग्जांपल आप देखेंगे कि हम कॉर्पोरेट रिसर्च, पब्लिक रिसर्च, एंटरप्रेन्योरशिप, रिसर्च एंड डेवलपमेंट की बात कर रहे हैं। हम लगातार इनके ऊपर में फोकस कर रहे हैं कि भाई जो क्रिटिकल टेक्नोलॉजीस हैं उनको कैसे देश में बनाया
37:11 जाए। एंड उसका एग्जांपल आप देख सकते हैं कि क्योंकि जिस तरीके से एक्सपोर्ट कंट्रोल फील्ड है, जिस तरीके से टेक्नोलॉजी को वेपनाइज किया जा रहा है, जिस तरीके से टेक्नोलॉजी को कंट्रोल किया जा रहा है, अब यह नेसेसिटी भी है कि उनको हम हमारे देश में डोमेस्टिकली क्या करें? डेवलप करें। जैसे कि फॉर एग्जांपल हमारा रडार सिस्टम है, स्पेस सिस्टम है। नेक्स्ट जनरेशन का आप कम्युनिकेशन सिस्टम की बात कर रहे हैं। उनके लिए जो टेक्नोलॉजी चाहिए उसमें हमें बाहर से किसी दूसरे देश से वो सामान आएगा। दूसरे देश से टेक्नोलॉजी आएगी उसके ऊपर में हमें डिपेंडेंट नहीं रहना। उसे हमें हमारे देश के अंदर में बनाना चाहिए। तो प्लीज याद रख लेना। तो इसके लिए इन्होंने कहा कि पहली बार आप देखेंगे कि हमने जैसे गैलियम नाइट्राइड गैलियम नाइट्राइड जो कि एक सेमीकंडक्टर
38:00 टेक्नोलॉजीस के अंदर में आता है उसको हमने हमारे देश में डेवलप करना शुरू कर दिया है। अब ये एग्जांपल दे रहे हैं कि भारत ने किन-किन चीजों में प्रोग्रेस करनी शुरू करी है। तो यहां पर ये एग्जांपल दे रहे हैं गैलियम नाइट्राइड जो कि एक सेमीकंडक्टर टेक्नोलॉजी है। वो कहां-कहां पर यूज़ होती है? फॉर एग्जांपल आपके रडार में यूज़ होती है। स्पेस सिस्टम में यूज़ होता है। नेक्स्ट जनरेशन के कम्युनिकेशन सिस्टम में यूज़ होता है। उसको हम क्या कर रहे हैं? बना रहे हैं। सेम टाइम पर हम इम्यूनो थेरेपीस को भी डेवलप कर रहे हैं इंडिया के अंदर में। एंड यह जो इम्यूनोथरेपीस हैं, यह एक तरीके से कैंसर की केयर ट्रीटमेंट के अंदर में एक बहुत बड़ी लैंडमार्क डेवलपमेंट हो सकती है। तो इन्होंने दो एग्जांपल दिए कि भाई इन दो
38:47 चीजों को हम हमारे देश के अंदर में बना रहे हैं। एंड साथ में इन्होंने एक डाटा पेश किया। डाटा क्या कह रहे हैं कि भारत में इनोवेशन माइंडसेट जो है वो बढ़ भी रहा है। वो कहते सब के सब कहते हैं सर कैसे बढ़ रहा है? आप तो समझ ही नहीं रहे। आपको तो समझ में नहीं आ रहा। ठीक है कि यहां पर तो हमारे देश में तो कुछ तरक्की हो ही नहीं रही है। तो वह कहते हैं जरा आप देखो कि हमारे देश में पेटेंट फाइलिंग को हमेशा एक इंडिकेटर के रूप में माना जाता है कि इनोवेशन हो रही है। प्लीज बात समझिए कितनी बड़ी बात कह रहे हैं। ये कह रहे हैं कि जनरली हम हमेशा जब जितने पेटेंट नंबर्स होते हैं, पेटेंट फाइलिंग होती है, उसके बेसिस पर हम अंदाजा लगाते हैं कि भाई क्या कि कितनी हमारे देश में इनोवेशन हो रही है। तो हमारे यहां पर जो पेटेंट फाइलिंग
39:32 है उसके नंबर्स इनक्रीस हो रहे हैं। ये कहते हैं कि आप इस ग्रोथ को आप देखें तो अभी 1 लाख पेटेंट फाइलिंग हुई है 2024-25 में। एंड आप अगर देखेंगे 25 26 में वही इनक्रीस हो गया 1443000 यानी कि वो कह रहे हैं कि आप यह नंबर के थ्रू आप अंदाजा लगा सकते हैं कि भारत के अंदर में पेटेंट फाइलिंग कितनी ज्यादा रैपिडली इनक्रीस हो रही है। अब ये नंबर्स देखकर हम अपने लेवल पर तो खुश हो सकते हैं कि भाई हां भारत के अंदर में पेटेंट नंबर्स इनक्रीस हो रहे हैं। बट ये पेटेड नंबर अगर आप देखते हैं वर्ल्ड के अंदर में जापान को देखते हैं यूएसए को देखते हैं तो उनके रिस्पेक्ट में अभी भी हमारे देश में कम है। एग्जांपल के लिए क्या कह रहे हैं? जैसे आप देखेंगे अभी हमारे देश में कितने
40:17 पेटेंट हैं? आप देखेंगे 2400 पेटेंट है। वहीं पर ही आप चाइना में देखेंगे तो 5.7 मिलियन पेटेंट हैं। आप देखेंगे यूएस में 3.5 मिलियन पेटेंट हैं। जापान के अंदर में 2.1 मिलियन पेटेंट हैं। तो इस आर्टिकल में यह कह रहे हैं कि नो डाउट पहला स्टेप तो यह था कि हमारे अब आप बड़े अच्छा ये मतलब मेरे ख्याल में आप सब के सब इस चीज से कनेक्ट कर पाओगे और बड़ा अच्छा आपकी जो आपका इस समय माइंडसेट है उसके साथ में पहला तो यह था कि इंडिया क्या बना ही पाएगा डेवलप ही कर पाएगा। उस समय पर हमारा मेन ऑब्जेक्टिव क्या था कि भाई क्यों ना इसको सिर्फ इंपोर्ट कर लिया जाए। अब जब हम इसके इनोवेशन की बात कर रहे हैं।
41:03 जब हम इनोवेशन के ऊपर में बात कर रहे हैं कि भाई टेक्नोलॉजी को हमारे देश में बनाया जाए। फिर उसको पेटेंट कराया जाए। उस लेवल पर अगर देखते हैं तो हमें ग्रोथ तो देखने को मिलती है। बट वो ग्रोथ अगर आप वर्ल्ड के लेवल पर देखते हो तो वो बहुत कम है। छोटी सी है। मतलब वो आप सोचेंगे कि मतलब नंबर्स वो ना के बराबर है। ठीक है? ठीक है? तो बहुत कम है। अब यहां पर कहते हैं कि भारत को सही में अगर ग्रोथ हासिल करनी है। भारत को सही में अगर एक डेवलप्ड नेशन बनना है तो क्या-क्या चीजें उनको करनी चाहिए? जैसे कि सबसे पहली बात सबसे पहला इशू हमें रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर इन्वेस्टमेंट
41:48 करनी पड़ेगी। लेकिन प्रॉब्लम क्या है कि जैसे ही हम रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर इन्वेस्टमेंट करने की बात करते हैं, हमारे सामने और बहुत सारे इशूज़ आ जाते हैं। क्योंकि हमारी पॉकेट में पैसा बहुत लिमिटेड है। एंड जो गवर्नमेंट है, उनके लिए शायद ज्यादा इंपॉर्टेंट हो जाता है इलेक्शंस, फ्री बीज़ ये सब। एंड इस कारण से रिसर्च एंड डेवलपमेंट में अभी भी हम 1% भी हमारी जीडीपी का नहीं इन्वेस्ट कर पा रहे हैं। हम 0.83% क्या कर रहे हैं? इन्वेस्ट कर रहे हैं रिसर्च एंड डेवलपमेंट में जो कि पता है कितना है? आप वर्ल्ड में जिनसे कमट करना चाहते हैं वो 3% 4% 5% ऑफ़ देयर जीडीपी कर रहे हैं। तो ये सबसे बढ़िया इशू है कि हमें
42:35 क्या करना चाहिए? रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर क्या करना चाहिए? हमें इन्वेस्टमेंट इनक्रीस करना चाहिए। एंड रिसर्च एंड डेवलपमेंट पे जब हम इन्वेस्टमेंट इनक्रीस करेंगे तभी जाकर हम होम ग्रोन टेक्नोलॉजीस को डेवलप कर सकते हैं। फॉर एग्जांपल हम कह रहे हैं कि हमें 6G टेक्नोलॉजी बनानी है। जैसा कि आप देखेंगे जो ज्योति राज सिंधिया जी हैं वो बार-बार फोकस कर रहे हैं। कह रहे हैं कि भाई हम हमारे देश के अंदर में 6G टेक्नोलॉजी बनाएंगे। फिर इस आर्टिकल के अंदर में इन्होंने बहुत सारी प्राइवेट कंपनीज़ का जिक्र किया। हम प्राइवेट कंपनीज़ का जिक्र नहीं करेंगे कि भाई Jio कितना कर रहा है? टाटा कितना इन्वेस्ट कर रहा है। लेकिन इस समय पर जो सबसे बड़ा चैलेंज है वो यही है कि एक हमें पाथ दिख गया है कि भैया अगर ग्रोथ करनी है और वर्ल्ड ने भी दिखाया है कि अगर किसी भी देश ने तरक्की की है तो वो आपके रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर
43:22 इन्वेस्टमेंट कर कर ही की है। तो अगर भारत को तरक्की करनी है तो इनोवेशन टेक्नोलॉजी एंड होम ग्रोन इनोवेशन इकोसिस्टम पर काम करना पड़ेगा। होम ग्रोन टेक्नोलॉजी के ऊपर हमें काम करना पड़ेगा। वो दिन गए जब आप दूसरी कंट्री से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की बात करते थे। क्योंकि जिस तरीके से वर्ल्ड के अंदर में प्रोटेक्शनिज्म इनक्रीस हो रहा है। ज्यादा चांसेस ये हैं कि प्रोटेक्शनिज्म और ज्यादा बढ़ेगा और ज्यादा टेक्नोलॉजी बैरियर्स आएंगे। तो भारत को क्या करना चाहिए? रिसर्च एंड डेवलपमेंट पे फोकस करना चाहिए। ठीक है? ठीक है? क्लियर है? तो ये चीज याद रखिएगा। इसी के ऊपर में बात कर रहे हैं कि भाई हमें भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट इकोसिस्टम को बेटर करने की जरूरत है। प्लस में रिसर्च एंड डेवलपमेंट में जो
44:07 इन्वेस्टमेंट है चाहे पब्लिक लेवल पर हो यानी कि गवर्नमेंट के लेवल पर या फिर प्राइवेट लेवल पर दोनों में ही हमें इंक्रीस करना पड़ेगा। एंड यह रिसर्च एंड डेवलपमेंट में हम उन डीप टेक्नोलॉजीस पर अगर फोकस करें तो वह हमारी इकोनॉमी के लिए और ज्यादा बेनिफिशियल है। एग्जांपल के लिए आप देखेंगे कि हमारे देश के अंदर में सबसे ज्यादा इस समय पर मोबाइल फोंस हैं। लेकिन हमारे देश के अंदर में हम जो कम्युनिकेशन, टेलीकम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी उसको बना ही नहीं रहे। मैं मोबाइल की बात नहीं कर रहा हूं। मैं टेक्नोलॉजी की बात कर रहा हूं। तो जैसे हम 6G की बात कर रहे हैं। 5G की बात करें, 4G की बात करें तो क्यों ना वो टेक्नोलॉजी हमारे देश में बनाई जाए। तो इसके ऊपर में फोकस करा जा रहा है कि हमें हर सेक्टर के अंदर में कैसे उसको इंडजनाइज किया जाए, कैसे उसमें सेल्फ रंट हासिल किया जाए, उसके ऊपर में हमें काम करने की जरूरत है। तो यही वो चीज कह रहे हैं।
44:53 इसीलिए मैंने एक मेंस का क्वेश्चन भी यहां से बनाया है कि रिसर्च एंड डेवलपमेंट इज़ नॉट मेयरली एन इंस्ट्रूमेंट ऑफ टेक्नोलॉजिकल प्रोग्रेस बट अ क्रिटिकल डिटरमिनेंट ऑफ नेशंस इकोनॉमिक कॉम्पिटिटिवनेस एंड स्ट्रेटेजिक ऑटोनोमी। डिस्कस द कॉन्टेक्स्ट ऑफ इंडिया। खास तौर पर आप देखेंगे रिसर्च एंड डेवलपमेंट की जब हम बात करते हैं तो इवन आप इस लेवल पर जैसे अभी हमने क्रूड ऑयल की बात करी तो क्रूड ऑयल को भी तो आप रिसर्च एंड डेवलपमेंट से कनेक्ट कर सकते हैं। ठीक है? तो ये उसी चीज से रिलेटेड है। तो ये यहां पर इन्होंने बहुत अच्छा आर्टिकल लिखा और यही आर्टिकल से रिलेटेड मैं आप सब से भी उम्मीद करता हूं कि आप सबकी अप्रोच भी ऐसी होनी चाहिए कि पहले जो प्रस्तावना बांधो वो सामने वाले की तारीफ बांधो। फिर कहो कि भाई आपने देखो यह प्रोग्रेस करी है। लेकिन जो आपने प्रोग्रेस करी है वो
45:39 अच्छी प्रोग्रेस नहीं है। थोड़ा कंपेयर करो। जैसे फॉर एग्जांपल आपके अगर कभी आपके घर के अंदर में कभी फ्यूचर में कोई परिवार में कोई बच्चा हो उसके मार्क्स आए 60% तो जाते ही उसके कान के नीचे दो चार मत लगा देना। तो आपका तरीका कैसे होना चाहिए कि भाई बहुत बढ़िया आपने बहुत अच्छा किया। 60% लेकर आए हो। बहुत अच्छी बात है। हमारे घर में इतने भी परसेंटेज कोई लेकर नहीं आया। फिर जो नेक्स्ट स्टेप होगा लेकिन 60% आपको नहीं लगता कि आपके आसपास के दोस्तों के मुकाबले में थोड़े से कम है। फिर आप बताओ उन्हें कि भाई देखो आपके दोस्त के 90% आ रहे हैं। 95% आ रहे हैं, 99% आ रहे हैं। तो इतनी सारी प्रॉब्लम है। तो अब अगला स्टेप क्या होना चाहिए? आपको इस 60% से 90% जाने के लिए क्या करना है? किन चीजों पर फोकस करना चाहिए? वैसे चीजों से रिलेटेड ये बात कर रहे हैं। ठीक है?
46:26 ठीक है? चलें? तो ये चीज याद रखिएगा। अब ये आर्टिकल पढ़कर मुझे बड़ा अच्छा भी लगा क्योंकि देखो इन्होंने अपने पर्सपेक्टिव से आर्टिकल लिखा है। लेकिन एक बड़ा ही प्यारा आर्टिकल इन्होंने लिखा है। और प्यारे आर्टिकल को लिखते-लिखते ये कब कि मैं नाराज हो गए उस चीज से रिलेटेड ये बात आर्टिकल से रिलेटेड है। ठीक है? तो यहां पर आपको प्रीलिम्स ओरिएंटेड कुछ फैक्ट भी मिलेंगे। मेंस ओरिएंटेड भी आपको चीजें मिलेंगी। एंड एक हंसीज़ाक के लिए भी एक टॉपिक मिल जाएगा। यानी कि तीनों टॉपिक आपको मिल जाएंगे। ठीक है? तो यहां पर क्या बात कर रहे हैं हम? वो ये कह रहे हैं डीप सीड डिस्कवरी। इस समय पूरी दुनिया इस समय पूरी दुनिया लगी पड़ी है टेक्नोलॉजी इनोवेशन क्रिटिकल मिनरल्स के लिए। यहां पर
47:14 डॉनल्ड ट्रंप चाचा कह रहे हैं कि भैया मून के ऊपर में कब्जा कर लिया जाए कि जिससे वहां पर मिनरल्स मिल जाएंगे। ठीक है? क्लियर? क्या किया जाए? जहां पर जहां पर इंसान नहीं जा सकता उन सब चीजों को कब्जा कर लिया जिससे हमें क्रिटिकल मिनरल्स मिल जाए। ऐसी ही एक छोटी सी कोशिश भारत ने भी कर ली है। भारत ने कोशिश करी डीप ओशन मिशन के अंदर में क्या करने की? स्ट्रेटेजिक इन्वेस्टमेंट करने की कि भाई हम क्या करेंगे? ओशियन के अंदर में जाएंगे। वहां पर हम माइनिंग करेंगे। वहां पर हम रिसर्च करेंगे। एंड भारत तो यह भी कहता है कि हम सिर्फ माइनिंग नहीं करेंगे भाई। हम तो ओशियन के अंदर में जब जाएंगे तो वहां से माइनिंग के साथ-साथ में हम इकोसिस्टम को भी समझ लेंगे। हम पॉलीमेटलिक नोड्यूल्स को
48:00 भी समझ लेंगे जो कि हमारे लिए एनर्जी का सोर्स तो है ही प्लस में एनवायरमेंट के लिए भी बहुत बढ़िया एक इशू हो जाएगा। अब यहां तक इन्होंने आर्टिकल के बारे में कहा कि भाई भारत यह कर रहा है। भारत ने तीन प्रोजेक्ट्स के लिए इन्वेस्टमेंट मांग रखी है। भारत ने लगातार इन्वेस्टमेंट की अनाउंसमेंट कर दी है कि सबसे पहला तो भाई इंडियन ओशियन रीजन के अंदर में जब आप जाओगे ये रहा हमारा प्यारा भारत। उसके साइड में जब आप जाओगे तो यहां पर देखिए सेंट्रल इंडियन रि जिसको बोलते हैं ये है। वहां पर एक कार्ल्सबर्ग ये रि आता है। इतना सा हिस्सा आता है ये वाला जिसको आप देखोगे कार्ल्सबर्ग रि तो आप इंडियन ओसियन में इसको नोट कर लेना। तो इसको दरअसल भारत ने इंटरनेशनल सीबेड अथॉरिटी से अप्रूवल मांगा कि यहां पर हम माइनिंग कर सकते हैं
48:45 क्या? डीप ओशन मिशन यहां पर हम चला सकते हैं क्या? जिससे हमें क्या मिल जाएंगे? मिनरल्स मिल जाएंगे। एंड इंटरनेशनल सी बेड अथॉरिटी ने हमें इसका अप्रूवल भी दे दिया है कि हां भाई आप यह चीज कर लो। ठीक है? साथ में अगर देखा जाए तो भारत ने एक और अप्रूवल मांगा जिसको हम बोलते हैं यह देखिए हमारा प्यारा भारत है। यह रहा श्रीलंका। उससे जब नीचे जाओगे तो आपको नजर आता है निकिन सीमा माउंट। यहां पर भी हमने कहा कि भाई हमें क्या मिल जाना चाहिए? यहां पर भी अप्रूवल मिल जाना चाहिए। वो तो शुक्र है कि श्रीलंका भाई आप सोचो चाइना ने कहा कि यार यहां पर बहुत सारे मिनरल्स हैं। और श्रीलंका को कहता है कि वो भाई सुन एक बात काम कर कि थोड़ा सा तू यहां पर मांग ले हिस्सा कि भाई मुझे यहां पर इन्वेस्टमेंट करने दे। देख तेरे को मालामाल कर दूंगा। वो तो इंडिया ने इंटरनेशनल सीबेट अथॉरिटी में अप्रूवल पहले ले लिया। वरना यहां पर चाइना आ जाता। वो
49:31 इसकी माइनिंग करता। ठीक है? क्या बात समझ रहे हैं आप? यानी कि यहां पर हो क्या रहा है कि भारत मिनरल्स के लिए इन सी बेड के अंदर में माइनिंग करने की बात कर रहा है। एंड उसके ऊपर में वो टेक्नोलॉजिकल क्या कर रहे हैं? एनहांसमेंट की बात कर रहे हैं। ठीक है? इसीलिए आप देखेंगे हमने क्या किया? हमने डीप ओशन मिशन को भी लांच किया। याद है? प्रीलिम्स का क्वेश्चन मत्स्य जिसमें हमने एक सबमर्सिबल व्हीकल भी बनाया जिसका नाम मत्स्य। मत्स्य मींस जिसको हम फिश के नाम से भी जानते हैं। तो वो जो 6000 मीटर नीचे तक जाएगा यानी कि 6 कि.मी. नीचे तक जाएगा जो हमारा सबमर्सिबल व्हीकल है। कितनी अच्छी चीज है ना सारी चीजें? अब दरअसल ये कह रहे हैं अब ये यहां पर ये कह रहे हैं कि चलो तुमने ये सब कुछ कर लिया। अब देखो मैंने आपको बताया आपके इंपॉर्टेंट
50:17 टॉपिक आपके लिए मिल गए। अब थोड़ा सा आपको सोशल मीडिया वाला टॉपिक भी मिलेगा। तो वो ये कह रहे हैं कि भाई हमने ये जो किया है इंटरनेशनल सीबेट अथॉरिटी से हमें अप्रूवल मिल गया। इसका मतलब यह नहीं है कि तुम जाकर ओशन को नुकसान पहुंचा दो। क्या कह रहे हैं कि भारत को अप्रूवल मिल गया है इंटरनेशनल सीवेट अथॉरिटी से। तो इंटरनेशनल सीबेट अथॉरिटी से अप्रूवल मिलने का मतलब यह नहीं होता है कि जाकर सीवेट पर माइनिंग करना शुरू कर दो। उसके कारण में कितना ज्यादा नुकसान हो सकता है। किसको? आपके एनवायरमेंट को, इकोसिस्टम को। आपके एक्वेटिक इकोसिस्टम को कितना नुकसान हो सकता है। तो यानी कि अब यह क्वेश्चन कर रहे हैं। एथिकल क्वेश्चन क्रिएट कर रहे हैं कि भाई इंडिया जो इस समय पर डीप ओशन के अंदर माइनिंग करने जाना चाहता है निकल के लिए, कोबाल्ट के लिए, मिनरल्स के लिए
51:05 वो कहीं नुकसान ना करे इस एक्वेटिक इकोसिस्टम को। एंड इसलिए बार-बार ये वर्ड यूज़ कर रहे हैं कि आपको अप्रूवल मिल जाने का मतलब यह नहीं है कि आप यहां पर माइनिंग करें। तो, यह कह रहे हैं कि अब इंडिया को क्या करना चाहिए? इंडिया यहां पर दो बढ़िया काम कर सकता है। इंडिया कह रहा है यहां पर ये कह रहा है कि इंडिया को माइनिंग से ज्यादा जो इकोसिस्टम है उसके गवर्नेंस के ऊपर में काम करना चाहिए। क्या करना चाहिए? गवर्नेंस के ऊपर में काम करना चाहिए। एंड इसीलिए आप देखिए कि उन्होंने लास्ट में लिखा भी इस आर्टिकल के अंदर में कि इंडिया के पास में अपॉर्चुनिटी है कि वो ग्लोबल लीडर माइनिंग का ना बने। माइनिंग का बने चाहे ना बने। साथ में उसको जो डीप सी है उसके इकोलॉजिकल जो इशू हैं
51:51 उनको लेकर क्या करा जाए? इंटरनेशनल पर गवर्नेंस की तरफ में काम किया जाए। क्योंकि वो ये कह रहे हैं कि दरअसल जब हम माइनिंग करते हैं माइनिंग करने के साथ में हमारे एक्वेटिक इकोसिस्टम को नुकसान होता है। तो भारत को भले ही इंटरनेशनल सीबेड अथॉरिटी से अप्रूवल मिल गया हो। भारत को भले ही मिनरल्स चाहिए हो लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि एनवायरमेंट को नुकसान ना हो। जो आपके जो आपका एक्वेटिक इकोसिस्टम है उसको नुकसान ना हो। तो भारत को सिर्फ और सिर्फ डीप सी मिशन के अंदर में पावरफुल नहीं बनना है। बल्कि भारत को ग्लोबल लीडर बनने की कोशिश करनी चाहिए। किसके लिए? आपके इंटरनेशनल लेवल पर जो गवर्नेंस की बात करते हैं। खासतौर पे कौन सा? इंटरनेशनल सीबेट की जब हम बात करते हैं उससे रिलेटेड। तो ये अब आपको समझ में
52:38 आ रहा है? तो ये जो आइडियलिस्ट अप्रोच की हम जो बात करते हैं जो हम बार-बार बात करते हैं कि एक्सप्लोरेशन जैसे फॉर एग्जांपल कमेंट सेक्शन में दो तरीके के हिस्से चल रहे हैं कि एक्सप्लोरेशन जरूरी है। हमें एक्सप्लोर करना चाहिए। दूसरी तरफ में कुछ बच्चे ये भी कह रहे हैं कि भाई एक्सप्लोर के साथ में हमें ये भी ध्यान रखना चाहिए कि एनवायरमेंट को नुकसान ना हो। एंड तीसरी तरफ में बच्चे क्या है कि भाई आइडियलिज्म की काफी ज्यादा बात की जा रही है। थर्ड जो टॉपिक है वो क्या है? थर्ड जो टॉपिक है वो क्या है? सस्टेनेबल डेवलपमेंट जो इससे रिलेटेड निकल कर आता है। तो मैंने आपको बताया था इस आर्टिकल में आपको तीन चीजें मिलेंगी। एक आपके प्रीलिम्स के लिए इफेक्ट, एक ओपिनियन और एक सोशल मीडिया का कंटेंट। ठीक है? तो प्लीज याद रखिएगा जहां पर ये कह रहा है कि इंडिया कोई नया नहीं है जो सीबेट मिनरल्स के एक्सप्लोरेशन की कोशिश कर रहा है। और हमें अप्रूवल ऑलरेडी मिल चुका है इंटरनेशनल सीबेड अथॉरिटी से। जहां पर आप
53:23 देखेंगे हम हमें कॉन्ट्रैक्ट के अंदर में आप देखेंगे 95,000 स्क्वायर कि.मी. का एरिया मिला है। जहां पर हम क्या कर रहे हैं? हमें माइनिंग करनी है। एंड उस माइनिंग से हमें क्या-क्या मिल सकता है? आप देखेंगे हमें 366 मिलियन टन ऑफ़ पॉलीमेटलिक नोड्यूल्स मिल सकते हैं। साथ में आप देखेंगे निक मिल सकता है, कॉपर मिल सकता है, कोबाल्ट मिल सकता है, मैंगनीज़ मिल सकता है। लेकिन साथ में अगर भारत के पर्सपेक्टिव से देखें तो भारत सिर्फ़ माइनिंग ही नहीं करेगा। भारत यहां पर एनवायरमेंटल स्टडी करेगा, बायोडायवर्सिटी स्टडी भी करेगा। इसीलिए आप देखेंगे डीप ओशन मिशन के तहत में भारत डीप सी माइनिंग टेक्नोलॉजी को डेवलप कर रहा है। अंडर वाटर रोबोटिक्स को डेवलप कर रहा है। मत्स्य 6000 जो ह्यूमन सबमर्सिबल व्हीकल है उसको डेवलप कर चुका है। ठीक है? यहां पर सेम
54:09 टाइम पर आप देखेंगे बायोडायवर्सिटी सर्वे भी किया गया है 19 सी माउंट का जिनके ऊपर में भी क्या है? अप्रूवल लेने की कोशिश कर रहे हैं। ठीक है? ये चीज आपको समझ में आ रहा है? तो यहां पर ये कह रहे हैं कि डीप सी मिनरल्स मे हैव लेजिटमेट स्ट्रेटेजिकेंस कि भारत के लिए भले ही हो सकता है स्ट्रेटेजिकेंस है कि भाई ये मिनरल्स हमें चाहिए बट बट आप समझिए किसके रिन्यूएबल एनर्जी के लिए चाहिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के लिए चाहिए एडवांस मैन्युफैक्चरिंग एंबिशंस के लिए चाहिए बट स्ट्रेटेजिकेंस कैन नॉट ऑटोमेटिकली बिकम इकोलॉजिकल परमिशन ये लाइन आपको मैं समझाने की कोशिश कर रहा हूं इन्होंने इस आर्टिकल को बड़े तरीके से लिखा जहां पर इन्होंने कहा कि नो डाउट इंडिया ये चीजें कर रहा है। इंडिया ये चीजों को प्रोग्रेस कर रहा है। लेकिन स्ट्रेटेजिकेंस कैन नॉट ऑटोमेटिकली बिकम इकोलॉजिकल
54:56 परमिशन। एंड यही चीज मैं आपको बताना चाहता हूं कि इस समय पर सोशल मीडिया पर या एक डिबेट चलती है आइडियलिज्म एंड रियलिज्म के अंदर में। ठीक है? जहां पर हम एक तरफ में बात करते हैं। एक होती है आइडियलिस्ट अप्रोच कि हमें क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए। जैसा कि ये अभी बात कर रहे हैं कि भाई अगर आप स्ट्रेटेजिकेंस की बात कर रहे हो तो वहां पर आपको साथ में ये भी ध्यान रखना है वाइल्ड लाइफ को नुकसान ना हो। एंड दूसरी तरफ में दूसरी तरफ में अगर आप बात करते हो किसके बारे में जैसे यूएसए हो गया जो रियलिज्म की बात करते हैं जो ये कहते हैं कि हमारे नेशनल इंटरेस्ट इंपॉर्टेंट है। हमें फर्क नहीं पड़ता और कहां पर कैसे किससे क्या चीज मिल रही है। हम तो क्या करेंगे? नीदरलैंड्स पे भी अटैक कर देंगे। वेनेजुएला पे भी अटैक कर देंगे। और हम क्या करेंगे? आपके मून के ऊपर में भी अटैक करेंगे जरूरत पड़ने पर। ठीक है? तो, यह चीज आप समझ रहे
55:42 हैं। दो चीज मैं आपको समझाने की कोशिश करता कि आइडियलिज्म और मिनरलिज्म उन दोनों के बीच में काफी बड़ा एक डिफरेंस की जो हम बात कर रहे थे। ठीक है? ठीक है? क्लियर है? ये चीज आप समझ रहे हैं? तो यहां पर ये कह रहे हैं कि साइंस मस्ट नॉट ये एक अच्छा एक लाइन है जिसको आप नोट कर सकते हैं कि साइंस मस्ट आल्सो टीच अस टू से नो। रादर देन एक्सप्लोरिंग रादर देन माइनिंग हमें ध्यान देना चाहिए कि हम सर्कुलर इकॉनमी पर कैसे काम कर सकते हैं। सब्सीट्यूशन पर कैसे काम कर सकते हैं। हम रिसाइक्लिंग पर कैसे काम कर सकते हैं। यानी कि पूरी दुनिया का जो ठेका है या पूरे दुनिया का जो रिसाइकल करना पूरी दुनिया के अंदर में जो मिनरल्स को बचाने की जो जिम्मेदारी है वो किसके पास में? भारत के पास में ही होनी चाहिए।
56:29 तो ये कह रहे हैं कि भाई हमें डिमांड करने से ज्यादा पहले हमें ये देखना चाहिए कि क्या डिमांड को रिड्यूस किया जा सकता है? क्या रिसाइक्लिंग करी जा सकती है? क्या एफिशिएंसी बढ़ाई जा सकती है? क्या सब्स्टट्यूशन किया जा सकता है? क्या सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ाया जा सकता है? एंड यहां पर बड़ी इंपॉर्टेंट लाइन ये प्रीलिम्स के अंदर है। बहुत अच्छा क्वेश्चन देख सकते हैं आप। प्रीलिम्स नहीं मेंस के अंदर नेसेसिटी मस्ट बी डेमोंस्ट्रेटेड नॉट प्रज्यूम्ड। यह कितनी अच्छी लाइन है जो आप एग्ज़ाम में नोट कर सकते हैं। एग्ज़ाम में नोट कर सकते हैं कि भाई नेसेसिटी है ज़रूरी है। यह डेमोंस्ट्रेट होना चाहिए ना कि नॉट प्रिज्यूम्ड कि भाई हमें चाहिए ही चाहिए। ठीक है? क्लियर है? तो यह चीज के बारे में बात करें। इंडिया हैज़ एन अपॉर्चुनिटी टू बिकम ग्लोबल लीडर इन डीप सी इकोलॉजिकल गवर्नेंस के बारे में बात कर रहे हैं। कह रहे हैं कि भाई भारत के पास में माइनिंग
57:16 से ज्यादा एक अच्छी अपॉर्चुनिटी है। जहां पर आप यह कह सकते हैं कि भाई भारत इकोलॉजिकल गवर्नेंस के ऊपर में काम कर रहा है। ठीक है? ठीक है भाई? तो समझ में आ रहा है ये टॉपिक? मतलब बहुत अच्छा टॉपिक है आपके मेंस के लिए और एस्स के लिए भर-भर के लिए कोर्ट्स हैं। बट जो हम मैंने आपको बताया कि सोशल मीडिया जो डिबेट चलती है अगर उस लेवल पर हम देखें तो एक ये डिबेट खड़ी कर रहा है ना कि आइडियलिस्ट अप्रोच एक रियलिस्ट अप्रोच जहां पर रियलिस्ट अप्रोच में देखेंगे कि यूएसए चाइना वो इस समय पर फिशिंग से लेकर हर एक मिनरल्स के लिए फाइट कर रहे हैं। वहां पर हम हमारे इंडियन ओसियन के अंदर में जो मिनरल्स हैं उनके जब एक्सप्लोरेशन की बात करते हैं तो ये कहा जाता है कि क्या जरूरत है? क्या उनको एक्सप्लोर करना चाहिए? क्या उनको एक्सप्लोर नहीं करना चाहिए? उससे रिलेटेड यह बात कर रहे हैं। तो मतलब यह अच्छा टॉपिक है। इसीलिए मैंने कहा कि आपको तीनों
58:01 टॉपिक आपको मिल जाएंगे। इकोलॉजिक गवर्नेंस का मतलब मेरे दोस्त कि चाइना मनमर्जी से पूरे के पूरे वर्ल्ड के अंदर में माइनिंग कर रहा है। पूरे मर्जी से क्या कर रहा है? वो इकोलॉजिकल जो ऑर्डर है उसको खत्म कर रहा है। ऐसे ही यूएसए कर रहा है अपनी मनमर्जी से। तो वो ये कह रहे हैं कि भारत वर्ल्ड का एक लीडर बन सकता है इकोलॉजिकल गवर्नेंस के अंदर में एक्वेटिक जो इकोसिस्टम है उसके लिए। ठीक है? तो इंडिया की तरफ से आप जवाब यहां पर आंसर लिखना ये कर सकते हैं कि भारत के लिए स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी भी उतनी ही इंपॉर्टेंट है जितना एक्वेटिक इकोसिस्टम। तो इसलिए आप यहां पर बाद में लिखेंगे सस्टेनेबल डेवलपमेंट। क्या लिखेंगे आप? लास्ट में आर्टिकल लिखेंगे सस्टेनेबल डेवलपमेंट। कि भाई इसका सॉल्यूशन क्या है? सस्टेनेबल
58:46 डेवलपमेंट है। आप किसी एक पर कंप्लीटली फोकस नहीं कर सकते। आप अपनी माइनिंग के थ्रू आप इंटरनेशनल जो एक्वेटिक इकोसिस्टम है उसको डिस्ट्रॉय भी नहीं कर सकते। साथ में आप एक्वेटिक इकोसिस्टम को प्रोटेक्ट करने के लिए दूसरी तरफ में अपने जो अपॉर्चुनिटीज हैं उनको मिस भी नहीं कर सकते। तो यहां पर लास्ट जो सॉल्यूशन है वो क्या है? आपका सस्टेनेबल डेवलपमेंट। ठीक है? ठीक है? क्लियर है? तो लास्ट में आप देखेंगे सस्टेनेबल डेवलप। एंड इवन जो मैंने आपको बताया कि जो हमारे सोशल मीडिया पर चलता है कि हमें क्या आइडियलिस्ट होना चाहिए या फिर हमें सोश रियलिस्ट होना चाहिए। उसके ऊपर में बात कर रहे हैं। ठीक है? ठीक? क्लियर? तो याद रखिएगा इंटरनेशनल सीबेट अथॉरिटी एक ऑटोनॉमस इंटरनेशनल ऑ्गेनाइजेशन है जो कि आपके जो अंग क्लॉज़ है कौन सा? आपका
59:31 यूनाइटेड नेशन कन्वेंशन ऑन लॉ ऑफ़ सी उसके अंडर में इस्टैब्लिश हुआ है। ठीक है? एंड इसका जो हेड क्वार्टर है कहां पर है? किंगस्टन जमाइका के अंदर में है। 168 मेंबर स्टेट्स हैं। इंडिया भी इसका है। यूरोपियन यूनियन भी है। एंड यही अप्रूवल देते हैं इंटरनेशनल सीबेड अथॉरिटी के अंदर में कि भाई सी बेड में माइनिंग होनी चाहिए या नहीं होनी चाहिए। कैसे चीजों से रिलेटेड है? मतलब टॉपिक समझ में आ रहा है ये चीज? समझ में आ रही है ये चीज आपको? बहुत अच्छा टॉपिक है ये। क्लियर है भाई? क्लियर है? कोई डाउट है इससे रिलेटेड? कोई भी डाउट इस टॉपिक से रिलेटेड मेरे दोस्त
1:00:19 चल तो मेरे प्यारे दोस्त अब आपके सामने आ गए हैं कुछ एस्स के टॉपिक जिनको हमें डिस्कस करना चाहिए। ठीक है? इसकी एक थ्योरी है। थोड़ी सी कास्परेसी थ्योरी है कि डेवलप्ड कंट्रीज नहीं चाहती हैं या फिर इवन चाइना भी नहीं चाहता कि इंडिया ग्रोथ करे। ये एक मैं थ्योरी बता रहा हूं जो सोशल मीडिया पर चलती है कि भाई जैसे ही इंडिया किसी चीज में अप्रोच करने की कोशिश करता है उसको तुरंत कहा जाता है कि भाई इससे एनवायरमेंट को नुकसान हो जाएगा। इससे ये प्रॉब्लम हो जाएगी। सारी की सारी चीजें से रिलेटेड। तो टॉपिक अच्छा है। इंपॉर्टेंट है। आप सभी के सभी देख सकते हैं। ठीक है? निखिल पूछ रहे हैं कि कितने वो हो मैं
1:01:04 भेड़े के जमाने से हूं भाई मैं भेड़े के जमाने से हूं। भेड़े के भेड़े जिस समय पर डायनासोर हुआ करते थे उस जमाने का है वो है ना एड्स आ रहे हैं। आप क्यों भूल जाते हो कि मैं मालिक नहीं यहां पर नौकरी करता हूं। आप ऐसेसे इश्यूज मेरे साथ रेज करते हो जो जिस पर मेरा कोई कंट्रोल नहीं है। है ना? ठीक है? चलो अब नेक्स्ट देखते हैं। द केज इज नॉट ऑलवेज मेड ऑफ आयरन। क्या है भाई? पहला पहला। ठीक है। क्लियर बताइए।
1:01:55 बताओ भाई। पहले अब आप थोड़ा सा अपने हाथों को विराम दो हंस इमोजी हटाकर। अब इस आंसर को देखिए क्या लिख सकते हो? इस एस्स के ऊपर में क्या लिख सकते हो? क्या लिख सकते हो? क्या है? द केज इज नॉट ऑलवेज मेड ऑफ आयरन। क्या बेहतरीन लाइन है यार। मतलब कितने अलग-अलग लेवल पर आप लिख सकते हो इसको। आप सोच भी नहीं सकते। यह आंसर इतना प्यारा लिख सकते हो। लेकिन आप सब के सब आंसर लिखते नहीं हो। आप सिर्फ सिर्फ मतलब यह मेरे कड़वे शब्द हो सकते हैं। सिर्फ आप सब के सब हवाई जहाज हो, बातों के फॉर्म भरते हो, कागजी शेर हो, थर्मामीटर हो, आप में से 1 लाख बच्चे डेली सेशन देखते हैं। अगर
1:02:41 1 लाख बच्चे डेली एक आंसर लिखने लग जाए, आप सोच भी नहीं सकते कि आप सबके अंदर में कितनी मैच्योरिटी आ जाएगी। अब आप सब के सब कहेंगे सर आपको कैसे पता? जो बच्चा आंसर लिख रहा होता है या फिर वो सोच रहा होता है। उसके थॉट प्रोसेस में बहुत चेंज आ जाता है। जो मुझे आपको दे मतलब देखो भाई हो सकता है आप सबके साथ कल को मेरे अपना सिलेक्शन करके मेरे सामने आओगे। अरे तुम तो कह रहे थे कि नहीं निकल रहा। देख निकाल दिया ना मेरे से ज्यादा खुशी किसी को नहीं होगी। मैं हो सकता है आपको मिठाई भी खिलाऊंगा। लेकिन मैं जो दिख रहा है मुझे मैं वो बता रहा हूं कि आप सब में से बहुत सारे बच्चे ऐसे हैं जिनमें वो मैच्योरिटी ऑफ़ थॉट मुझे नजर नहीं आती है। क्यों? मैच्योरिटी ऑफ़ थॉट नजर नहीं आ रही। क्योंकि जो बच्चा लिख रहा होता है वो सोचता है, समझता है और जो सोचता है और
1:03:26 समझता है वो बोलने से पहले दो बार जरूर सोचता है। तो इसको आप देखेंगे मैं क्या बात कर रहा हूं? मैंने सबके बारे में नहीं कहा। मैंने अब यहां पर एक और बात हो गई। अब सबके सब सर मैं तो लिखता हूं। मैं तो लिखता हूं। है ना? चलिए अब इसको किस-किस लेवल पर आप कनेक्ट कर सकते हो? सभी एक ही टॉपिक को पकड़ कर बैठे हैं वुमेन। क्योंकि जनरली हमारे आसपास में हम वुमेन से रिलेटेड, वुमेन एंपावरमेंट से रिलेटेड इसके ऊपर में बात करते हैं। ठीक है? बिल्कुल सही बात है। वुमेन एक इशू हो गया। लेकिन 1200 वर्ड क्या इसी के ऊपर में लिख पाओगे? नहीं। आपको और भी डायमेंशन लिखने होंगे। तो इंडिविजुअल पर भी लिख सकते हो। इंडिविजुअल पर भी लिख सकते हो कि ज्यादातर जो हमारी रेस्ट्रिक्शन है वो हमारा माइंडसेट है। हमारा माइंड है। उसके ऊपर
1:04:13 में लिख सकते हो। साथ में अगर देखा जाए तो हमारे अगर अप्रोच के हिसाब से देखा जाए तो फॉर एग्जांपल जो हम इनोवेशन की बात करते हैं, ग्रोथ की बात करते हैं, जो हमारे रिस्ट्रिक्शन की बात करते हैं, उससे भी आप इसको कनेक्ट कर सकते हो। सोशल मेंटल बैरियर्स, इकोनॉमिक बैरियर्स। ठीक है? तो आप देख रहे हैं इसको इवन आप जो इंडिविजुअल लेवल पर कह रहा हूं कि इसको आप कंफर्ट से भी तो लिख सकते हो कि कंफर्ट भी तो एक तरीके का आपका केज ही है एंड इवन इसको आप बहुत अच्छे डायमेंशन में कनेक्ट कर सकते हो आपके गांधी जी से रिलेटेड अंबेडकर जी से रिलेटेड आप इसको कनेक्ट कर सकते हो हमारे फ्रीडम फाइटर से रिलेटेड रिसर्च से रिलेटेड रिस्क ऑफ फेलियर से रिलेटेड उन सब चीजों से इसको आप लिख सकते
1:04:58 हो जिससे आप 1200 वर्ड में इसको कंप्लीट कर दोगे नेक्स्ट अगर आप देखें रिस्ट्रेंट इज आल्सो अ फॉर्म ऑफ करज। क्योंकि आजकल यूपीएससी वॉर के ऊपर में भी थोड़े से क्वेश्चन पूछने लग गया है। हमेशा जाकर किसी की गुद्दी सेक देना वही हमेशा पावरफुल होने की निशानी नहीं है। इसको बहुत अच्छा एग्जांपल अभी आपको ध्यान होगा कि इंडिया एंड पाकिस्तान के बीच में एक शिप का कोलीजन हुआ। तो वहां पर एक वर्ड यूज किया गया हमारे यार मैं चीफ के द्वारा कि रिस्ट्रेंट अपने आप में करज का क्या है? एक बहुत बड़ा एग्जांपल है। एग्जांपल के रूप में आप देखेंगे कि जब हम फॉरेन पॉलिसी की बात करते हैं। फॉरेन
1:05:44 पॉलिसी के अलावा फॉर एग्जांपल आप जैसे हम बात करते हैं किसके बारे में ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बात करते हैं। तो ये भी एक चीज आप देखेंगे कि रिस्ट्रेंट हमेशा सरेंडर नहीं है। हमेशा वीकनेस नहीं है। रिस्ट्रेंट कई बार अपने आप में करज को शो करता है। जैसे कि हम गांधी जी से रिलेटेड हम बात कर रहे हैं। क्या हम गांधी जी के आइडियल्स की हम बात कर सकते फ्रीडम स्ट्रगल के अंदर में जहां पर हम सत्याग्रह, नॉन वायलेंस इन सब चीजों के ऊपर भी बात कर सकते हैं। इवन अभी जस्ट आप पढ़कर आए हो जैसे कि एनवायरमेंट से रिलेटेड कि एनवायरमेंट में किस चीज को ओवर यूज करना है। वो भी तो
1:06:31 अपने आप में क्या है? एक अपने आप में करेजी है। जब वहां पर अपने आप को रिस्ट्रेन कर रहे हो। क्या कर रहे हो? अपने आप को रोक रहे हो। इवन जैसे फॉर एग्जांपल आज के टाइम पर आपके इंडिविजुअल लेवल पर अगर मैं देखूं तो क्या कहा जाता है कि भैया यह भी ले लें वो भी ले लें। जैसे आजकल एक बहुत ज्यादा फेमस हो गया क्या? बरगेंडी कलर का iPhone एग्जांपल देता हूं। आप बढ़िया-बढ़िया एग्जांपल दे रहे हैं। मैं तो आपको समझाने के लिए एग्जांपल दे रहा हूं। वैसे तो एग्जांपल आप गांधी जी का दीजिएगा, बुद्ध जी का दीजिएगा। आपके नाम में महावीर जी का दीजिएगा। ठीक है? सत्याग्रह का एग्जांपल दीजिएगा। लेकिन मैं आपको एक एग्जांपल देता हूं। आजकल सोशल मीडिया पर क्या है? बरगेंडी कलर बहुत चल रहा है। iPhone 18 Pro तो आपको उसकी जरूरत है या नहीं? उसके अंदर में अगर आप
1:07:17 रीस्टेंड कर लेते हैं खुद को। यह भी आपका करेज ही है। एग्जांपल दे रहा था मैं समझाने के लिए। ठीक है? तो रिस्ट्रेंट इज़ आल्सो अ फॉर्म ऑफ़ करेज। इसका आप बहुत अच्छा एग्जांपल दे सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में अपने को रिस्ट्रेन किया। छोटे-छोटे इश्यूज के अंदर में भारत उस तरीके से रिएक्ट नहीं करता। तो फॉरेन पॉलिसी से भी आप इसको लिंक कर सकते हैं। ठीक है? नेक्स्ट अ सोसाइटी दैट फियर्स अनसर्टेनिटी मे फेयर चेंज इटसेल्फ। जब भी आपको चेंज चाहिए तो अनसर्टेनिटी तो होगी ही होगी। जैसे ही आपको चाहिए किस चीज के ऊपर में? आपको चाहिए कि भैया हमें टेक्नोलॉजिकल ग्रोथ चाहिए तो भैया वहां पर अनसर्टेनिटी के चांसेस हैं। आप हो सकता है सेमीकंडक्टर बना भी लोगे नहीं भी बनाओगे। लेकिन जो कंट्री अनसर्टेनिटी से ही डरेगी
1:08:04 वो कभी भी आगे नहीं बढ़ पाएगी। एंड कंट्री की ही बात नहीं कर रहे। हम सोसाइटी की बात कर रहे हैं। एक सोसाइटी एक सोसाइटी के अंदर में भी जब अनसर्टेनिटी से डर लगने लग जाएगा तो सोसाइटी कभी भी ग्रोथ नहीं कर पाएगी। आपको स्टेबिलिटी से प्यार होने लग जाएगा। भले ही वो ₹ लाख की हो, ₹2000 की हो, ₹10,000 की हो। आपको लगेगा भैया इसी में खुश है। सब कुछ बढ़िया है। जीवन में सब कुछ यही चल रहा है। तो इवन आप सोसाइटी के लेवल पर, रिलजन के लेवल पर आप देखोगे। इवन आप अपने इंडिविजुअल के लेवल पर भी देखोगे कि आप में से मैक्सिमम लोग कुछ नया ट्राई करने से पहले क्यों डरते हो कि भाई लाइफ बहुत अनसर्टेन हो जाएगा। बहुत कुछ बेकार हो जाएगा। फेलियर हो सकता है। हम बर्बाद हो सकते हैं। तबाह हो सकते हैं। भैया अभी कौन से राजा हो? अभी कौन से? जब तुम चलते हो तो तूतड़ी बस्ती है तुम्हारी।
1:08:50 बिल्कुल। अरे राजा अधिराज चल रहे हैं। इससे ज्यादा क्या होगा? लेकिन हम रिस्क नहीं लेते हैं। हम हम ग्रोथ की तरफ में नहीं जाते हैं। हम इनोवेशन इवन साइंटिफिक एक्सपेडिशन से रिलेटेड आप बात कर रहे हो। इसको आप फ्रीडम स्ट्रगल से भी आप कनेक्ट कर ही सकते हो। इवन अगर आप इसको इंडिविजुअल ग्रोथ से भी आप कनेक्ट कर सकते हो। इवन आप स्पिरिचुअल ग्रोथ से भी इसको आप कनेक्ट कर सकते हो। इवन आप इसको नेशनल लेवल पर जो हम बार-बार बात करते हैं किसके बारे में कि भाई हमें नेशनल ग्रोथ की तरफ में फोकस करना है। उन सब चीजों से रिलेटेड आप क्या कर सकते हो? कनेक्ट कर सकते हो। इकोनॉमिक रिफॉर्म हर चीज से आप इसको कनेक्ट कर सकते हो। तो ये तीन एस्स मैंने आपके साथ दिए। पिछले डेढ़ साल से मैं एस्स क्वेश्चंस आपको दे रहा हूं। मेरी तरफ से आपके लिए मैं जो कर सकता
1:09:38 हूं मैं करने की कोशिश कर रहा हूं। अब यह आपके ऊपर में अब यह आपके ऊपर में डिपेंड करता है कि आप कितना ज्यादा एफर्ट करके उससे आउटकम निकाल सकते हैं। बहुत से बच्चे हैं आप में से जो मैं मतलब आप सभी ने इंटरव्यूज देखे होंगे लोगों के। आपने पर्सनल लेवल पर लोगों के मैसेजेस देखे होंगे जो इसी सीरीज से आपका मेंस इंटरव्यू एग्जाम निकाल कर गए हैं। स्टेट सर्विज में है। तो अब ये आपके ऊपर में है कि आप इससे क्या बेस्ट आउटकम निकाल सकते हो या फिर यह आपको लगेगा कि मैं बार-बार बार-बार ये चीज मैं क्यों कहता हूं क्योंकि मुझे डर है कि यह जो आपकी एनर्जी है यह आपका जो बेस्ट जो आउटकम है कहीं यह इस चकाचौंध में खराब ना
1:10:24 हो जाए। जैसे कि फॉर एग्जांपल आप देखोगे कि एक जो बहुत ही बेहतरीन क्या ना प्लेयर होता है उसके साथ में एक कोच को हमेशा टेंशन रहती है। जैसे सचिन तेंदुलकर जी साहब थे तो उनके कोच साहब को हमेशा टेंशन थी कि यार ये कहीं चकाचौंध में घो ना जाए। जो इसका पोटेंशियल है वो अचीव करने से रह ना जाए। तो जैसे कि मैं आप सभी की बात करता हूं तो मैं आप सभी को
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