15.09.2025 PROF PUNEET GANDHI

MM-TTC, RDVV, Jabalpur www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डालता है। इसमें व्यक्तिगत स्तर पर कार्बन फुटप्रिंट को कम करने, संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण को पोषित करने और अच्छे स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उपायों पर जोर दिया गया है। वीडियो में कृषि पद्धतियों में सुधार, जल संरक्षण, और वृक्षारोपण के महत्व पर भी चर्चा की गई है।

मुख्य बातें:

  • व्यक्तिगत प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलती है।
  • संसाधनों का संरक्षण और पुनर्चक्रण महत्वपूर्ण है।
  • स्वस्थ जीवनशैली के लिए पर्यावरण का ध्यान रखना आवश्यक है।
  • कृषि और जल प्रबंधन में सतत प्रथाओं को अपनाना चाहिए।

परिचय और विषय-वस्तु

डॉ. पुनीत गांधी का परिचय दिया गया, जो पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करेंगी। उन्होंने बताया कि कैसे वे अपने संस्थानों में पर्यावरण गतिविधियों की समन्वयक रही हैं और प्रकृति के प्रति उनका गहरा लगाव है। वे पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के साथ हो रही समस्याओं और व्यक्तिगत स्तर पर सुधार के उपायों पर बात करेंगी।

वैश्विक स्तर पर प्रयास

वैश्विक स्तर पर पर्यावरण को बचाने के प्रयासों पर चर्चा की गई, जिसमें 37 लोकतांत्रिक देशों के संगठन OECD का उल्लेख है। इस संगठन का लक्ष्य 2030 तक सभी के लिए पीने योग्य पानी उपलब्ध कराना और कार्बन फुटप्रिंट को कम करना है। भारत का लक्ष्य भी 2030 तक कार्बन फुटप्रिंट को लगभग शून्य करना है।

कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के उपाय

कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने और डीजल वाहनों को कम करने की बात की गई। घरों में ऊर्जा की बचत, फॉसिल फ्यूल का कम उपयोग, और कृषि में स्टबल जलाने से बचने जैसे उपायों पर भी जोर दिया गया। सरकार द्वारा सोलर पैनलों पर दी जा रही सब्सिडी और हवाई अड्डों द्वारा सोलर ऊर्जा का उपयोग करने जैसे कदमों का उल्लेख किया गया।

संसाधन संरक्षण

संसाधन संरक्षण में ऊर्जा, पानी और दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुओं की रीसाइक्लिंग शामिल है। इन संसाधनों को बचाना सतत विकास का एक महत्वपूर्ण पहलू है।

पर्यावरण का पोषण

पर्यावरण को बचाने की व्यक्तिगत जिम्मेदारी पर जोर दिया गया। बाजार जाते समय थैला ले जाने और प्लास्टिक का उपयोग कम करने जैसे सरल उपायों का उल्लेख किया गया।

सभी के लिए अच्छा स्वास्थ्य

पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच संबंध पर प्रकाश डाला गया। प्रदूषण और प्लास्टिक के संचय से स्वास्थ्य पर होने वाले नकारात्मक प्रभावों पर चर्चा की गई। प्लास्टिक का उपयोग कम करने और प्राकृतिक विकल्पों को अपनाने की सलाह दी गई।

सतत विकास के पांच सिद्धांत

सतत विकास के पांच सिद्धांतों (5P) पर चर्चा की गई: ग्रह (Planet) के प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, लोगों (People) के लिए भोजन और पोषण सुनिश्चित करना, समृद्धि (Prosperity) लाना, शांति (Peace) स्थापित करना, और ज्ञान और प्रौद्योगिकी का आदान-प्रदान करने के लिए भागीदारी (Partnership) करना।

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र के प्रयास

जलवायु परिवर्तन को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UNO) की सक्रियता और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को शून्य करने के लक्ष्य पर बात की गई। पुराने आर्किटेक्चरल तरीकों का उपयोग करके प्राकृतिक प्रकाश और ठंडक का उपयोग करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।

कृषि में बदलाव की आवश्यकता

कृषि में फसल चक्र (crop rotation) के महत्व और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से होने वाले नुकसान पर चर्चा की गई। जैविक खेती (organic farming) को बढ़ावा देने और प्राकृतिक खाद का उपयोग करने की सलाह दी गई। डेयरी उत्पादों में हार्मोन के उपयोग से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरों पर भी प्रकाश डाला गया।

सतत कृषि के लिए उपाय

मिट्टी के संरक्षण, कीट प्रबंधन और जल उपयोग के महत्व पर जोर दिया गया। ड्रिप इरिगेशन और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देने की बात की गई।

पंजाब में बाढ़ का उदाहरण

पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ का उदाहरण देते हुए बताया गया कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को बाधित करने से कितनी गंभीर समस्याएँ हो सकती हैं। मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और जलभराव के कारण बाढ़ की स्थिति और खराब हो गई।

वृक्षारोपण का महत्व

वृक्षारोपण गतिविधियों के महत्व पर चर्चा की गई, जिसमें सही जगह पर सही पेड़ लगाने के लिए भूवैज्ञानिक मूल्यांकन (geological assessment) की आवश्यकता पर जोर दिया गया। स्थानीय पेड़ों को लगाने और मिट्टी की विशेषताओं को ध्यान में रखने की सलाह दी गई।

सफल वृक्षारोपण रणनीति

सफल वृक्षारोपण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड को कम करने, जैव विविधता को संरक्षित करने और हरित क्षेत्र को बढ़ाने के उद्देश्यों पर ध्यान केंद्रित करने की बात की गई। वृक्षों की खरीद, स्थान का चयन, और फंडिंग के समर्थन के बारे में भी जानकारी दी गई।

जल संरक्षण

जल संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डाला गया, जिसमें पीने योग्य पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जल संसाधनों को संरक्षित करने की बात की गई। वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) और भूजल को रिचार्ज करने के उपायों पर जोर दिया गया।

भूजल पुनर्भरण

भूजल को रिचार्ज करने के तरीकों पर चर्चा की गई, जिसमें एक्वाफर का उपयोग करके वर्षा जल को जमीन में पहुंचाने की तकनीक शामिल है। यह तकनीक जल स्तर को बनाए रखने और जल संकट को कम करने में मदद कर सकती है।

विश्राम

10 मिनट का विश्राम।

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Transcript

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0:04 नेहा स्टार्ट करिए। सर एक मिनट नमस्कार सर। पांडे सर देखिएगा स्क्रीन शेयर हो रही है क्या? अभी नहीं हुई है। आप करेंगे तो हो जाएगा। अच्छा मैं कर आपको कोहस्ट बनाया है। अजय जी अजय हां सर आपको भी कोस्ट बना दे रहा हूं। ठीक है सर रोहित आए है क्या? हां रोहित जी भी है। ठीक है। एक लोग रहने को रोहित

1:04 मैडम हो रहा है आपका पुनीत मैडम पुनीत मैडम आवाज आ रही है सर आपने मेरे को नहीं बनाया होस्ट किसको बनाया है शायद किसी और को बना दिया सर अजय पाटिल को बना दिया हां मेरा अजय कुमार जाखड़ है सर जाखड़ जी को ही तो बनाया इस

1:49 पर इस मैडम स्टार्ट करें। जी सर नेहा मैडम जी सर अ वेरी गुड आफ्टरनून ऑल रिस्पेक्टेड मेंबर्स एंड अ वेरी वार्म वेलकम एंड ग्रीटिंग टू आवर टुडेेस एस्टीम स्पीकर डॉक्टर पुनीत गांधी मैम आवर कोस्ट डायरेक्टर डॉक्टर संजीव सर एंड रेस्पेक्टेड फेलो मेंबर्स ऑफ दिस को आई वुड लाइक टू हैव अ ब्रीफ इंट्रोडक्शन ऑफ आवर टुडे स्पीकर डॉक्टर गांधी शी

2:35 जेस्टिस्ट बाय क्वालिफिकेशन एंड बायोटेक्नोलॉजिस्ट बाय ट्रेनिंग प्रोफेसर पुनीत गांधी ड हर पीएचडी वि द प्रेस्टीजियस केस कृष्णा फेलोशिप फ्रॉम भाबा एटॉमिक रिसर्च सेंटर बॉम्बे शी इस द रेसिपिएंट ऑफ द इंडियन साइंस कांग्रेस एसोसिएशन यंग साइंटिस्ट अवॉडी इन द मेडिकल एंड वेटरी सेक्शन अबाउट अ डेकेड अर्लियर शी स्पेशलाइज्ड इन हॉस्पिटल एंड हेल्थ केयर मैनेजमेंट फ्रॉम सिमबायोसिस पुणे सिंस देन शी हैज़ बीन इंगेज्ड एट भोपाल मेमोरियल हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर डेडिकेटेड टू द केयर ऑफ गैस विक्टिम्स ऑफ भोपाल 1984 होलोस्ट शी करली वर्किंग इन द एरीना ऑफ ट्रांजिशनल रिसर्च स्पेशली ऑन नॉन इन्वेसिव बायोमारकर्स इन नॉन

3:21 कम्युनिकबल डिजीज डॉक्टर गांधी हैज़ मोर देन 30 इयर्स ऑफ एक्सपीरियंस इन कनिकल रिसर्च एंड हैज़ कंप्लीटेड मोर देन 12 एक्स्ट्रा मिनरल नेशनल लेवल प्रोजेक्ट्स एंड 90 पायलट प्रोजेक्ट्स इन द लास्ट 10 इयर्स शी इस आल्सो अ कोऑर्डिनेटर ऑफ स्किल अपग्रेड प्रोग्राम्स इन मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी फॉर द स्टेट बायोटेक्नोलॉजी काउंसिल एंड डीबीटी डॉक्टर पुनीत गांधी हैज़ बीन टीचिंग इन वेरियस कैपेसिटीज फॉर द पास्ट 18 इयर्स एंड हैज़ मोर देन 42 इंटरनेशनल पब्लिकेशन एंड 60 पेपर प्रेजेंटेशन टू हर क्रेडिट शी इज़ अ मेंटर फॉर पीएचडी इन मेडिकल बायोटेक्नोलॉजी फॉर वेरियस यूनिवर्सिटीज एंड हैस अ पीएचडी स्टूडेंट्स रजिस्टर्ड टू वेल वर्क ऑन आस्पेक्ट्स ऑफ मॉलिक्यूलर डिटेक्शन एंड डिजीज प्रोग्नोसिस ऑफ नॉन

4:08 कम्युनिकबल डिजीज अ रीसेंट एडिशन टू द अचीवमेंट लिस्ट इज अ पेटेंट ऑन नैनो फॉर्मुलेशन ऑफ नेचुरल बायो एक्टिव्स फॉर सेरीब्रल मलेरिया मैम वी आर हैप्पी एंड फॉर्चूनेट टू हैव यू इन आवर टुडेेस सेशन वी वेलकम यू वंस अगेन आपका बहुत-बहुत स्वागत आभार एवं अभिनंदन ओवर टू यू मैम थैंक यू डॉक्टर नेहा अ वेरी गुड आफ्टरनून टू वन एंड ऑल पांडे सर एंड ऑल द फैकल्टी मेंबर्स हु हैव जॉइ दिस सेशन यू मस्ट बी रियली वंडरिंग डॉक्टर नेहा जस्ट इंट्रोड्यूस्ड मी यू

4:57 मस्ट बी वंडरिंग व्हाट एम आई डूइंग इन एनवायरमेंटल साइंस यस माय टीचिंग माय क्वालिफिकेशन माय प्रैक्टिस इज मोर टुवर्ड्स द मेडिकल साइड बट व्हाट आई वुड लाइक टू शेयर इज दैट इन ऑल द इंस्टीटशंस दैट आई हैव सर्व्ड टिल डेट आई हैव ऑलवेज बीन द कोऑर्डिनेटर फॉर और एनवायरमेंटल एक्टिविटीज एंड सो दैट इज द रीज़न प्रोबेबबली पांडे सर हैंडेड मी ओवर दिस टॉपिक टू डिस्कस माय एक्सपीरियंसेस विद यू आई एम अ बिग एनवायरमेंटल कॉज चैंपियन वेरी नेचर इज वेरी क्लोज टू मी इवन इन इन

5:42 द हॉस्पिटल इफ यू एवर गेट अ चांस टू विजिट वी हैव मेड आवर ओन मेडिसिनल कॉर्नर्स देयर आर अबाउट 250 मेडिसिनल प्लांट्स इन माय कैंपस व्हिच वी आर ट्राइंग टू टैग एंड टीच स्टूडेंट्स प्लस देयर आर लॉट ऑफ कार्बन डाइऑक्साइड सिक्वेस्टिंग प्लांट्स इन द डिपार्टमेंट इट्स ऑल ग्रीन इंस्टेड ऑफ वाइट। सो द एक्चुअल ग्रीन कलर ऑफ द हॉस्पिटल रिफ्लेक्ट्स इन द डिपार्टमेंट आल्सो। सो इन द नेक्स्ट कपल ऑफ आवर्स आई विल शेयर विद यू माय एक्सपीरियंसेस एंड लर्निंग्स थ्रू दिस जर्नी ऑफ़ व्हाट हैज़ गॉन रोंग विद आवर एनवायरमेंट

6:31 आवर इकोसिस्टम। व्हाई आर वी इंटू सच अ लॉट ऑफ प्रॉब्लम टुडे एंड व्हाट इज इट दैट वी कैन डू एट एन इंडिविजुअल लेवल टू इंप्रूव आवर सराउंडिंग्स बिकॉज़ व्हाटएवर द गवर्नमेंट माइट बी डूइंग इट इज़ बेसिकली आर इंडिविजुअल एफर्ट्स दैट विल एक्चुअली अह मेक अ डिफरेंस टू ऑल द प्रोग्राम्स बिकॉज़ मोस्ट एंड वी विल सी व्हाई इज़ इट सो। सो लेट अस स्टार्ट टुडेेस डेलीबेशन विद ट्राइंग टू अंडरस्टैंड ऑफ हाउ थिंग्स वर्क एट द ग्लोबल लेवल एट द ग्लोबल लेवल अ ऑर्गेनाइजेशन

7:16 फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन देयर आर अ लॉट ऑफ चैट्स डू आई डू आई नीड टू बी बाइलिंगुअल अह यस मैडम यस हां जी सॉरी ठीक है मैं ये चीज फिर से शेयर करती हूं एंड व्हाट आई वास ट्राइंग टू शेयर इज कि बहुत सारी हमारी चीजें एनवायरमेंट को बचाने की जब हम एफर्ट्स की बात करते हैं सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात करते हैं तो दी हैव टू बी एट एन इंडिविजुअल लेवल सिर्फ गवर्नमेंट की स्कीम से यह समस्या का समाधान धान होना मुश्किल है। आइए चलिए देखते हैं ऐसा क्यों

8:03 है। तो सबसे पहले जाने कि ग्लोबल लेवल पे वर्ल्ड की लेवल पे इस समय क्या स्थिति है। सो देयर आर गवर्नमेंट्स ऑफ 37 डिफरेंट डेमोक्रेटिक कंपनी कंट्रीज सॉरी। एंड उन्होंने एक ऑर्गेनाइजेशन बनाया जो ओईसीडी के नाम से जाना जाता है। और उसका यह उद्देश्य है कि हमारी लाइफ की जो बेसिक रिक्वायरमेंट है पीने लायक पानी वो सबको अवेलेबल होना चाहिए 2030 तक और दुनिया भर में जो कार्बन फुटप्रिंट है हमारा जो कार्बन पोल्यूशन हो रही है वो लीस्ट पर होनी चाहिए और इस रेफरेंस में आपसे शेयर करना चाहूंगी कि

8:49 इंडिया का भी यह टारगेट है कि 2030 तक हमारा कार्बन फुटप्रिंट ऑलमोस्ट निल हो जाए। तो इसको कैसे करना है? आइए चलिए देखते हैं। हम क्या कर सकते हैं। अगर हमको सस्टेनेबिलिटी लानी है आने वाले समय में ग्रीन सस्टेनेबिलिटी तो हमें हम सबको यह पता है कि हमें अपना पोल्यूशन फुटप्रिंट कार्बन फुटप्रिंट को कम करना है। और इस स्तर पर हमारी कंट्री काफी कुछ कर रही है। फिर भी क्योंकि हम एक बहुत बड़ा देश हैं। बहुत पापुलेशन है हमारे यहां तो यह काफी नहीं है। सिर्फ कार्बन फुटप्रिंट कम करने से काम नहीं बनेगा। हम बहुत बड़े पैमाने

9:39 पर ईवी व्हीक्स की ओर बढ़ रहे हैं। जो एक बड़ा कदम है इस तरफ कार्बन फुटप्रिंट रिड्यूस करने में। गवर्नमेंट ने एक वाइट पेपर भी निकाला है गडकरी साहब ने मिनिस्टर सर ने कि डीजल व्हीकल्स को गवर्नमेंट प्रमोट नहीं करेगी और 2030 के बाद आई थिंक मैन्युफैक्चरिंग पे भी बहुत हद तक रोक लग जाएगा या तो सिर्फ इंपोर्ट्स रहेंगे सॉरी एक्सपोर्ट्स रहेंगे अपने देश में डीजल व्हीकल्स जो कि काफी ज्यादा कार्बन फुटप्रिंट जनरेट करते हैं वो नहीं होंगे। बट कुछ ऐसी जरूरत की चीजें हैं हमारे यहां जैसे लाइट का यूज होना,

10:26 घरों में एक्सेस लाइट तब यूज होती है जब नॉर्मल नेचुरल वेंटिलेशन ना हो। तो वह भी एक हमारे कार्बन फुटप्रिंट पर ऐड करता है। उसके अलावा अगर हम फॉसिल फ्यूल रिलेटेड यूजेज कर रहे हैं। फॉसिल फ्यूल मींस हमारा कोयला हो गया मेजरली। तो अगर वैसी वाली चीजें यूज कर रहे हैं उससे भी कार्बन फुटप्रिंट जनरेट होता है। हमारे रूरल एरियाज में गांव की तरफ आज भी बहुत जगह गैस कनेक्शंस हालांकि अब बहुत मेजर उसमें गए हैं। पर फिर भी जहां गैस कनेक्शंस नहीं

11:12 है वहां पर धुआ ज्यादा है। फिर एग्रीकल्चर की यह जो बची हुई स्टबल जलाते हैं हम जो कि आप सबको पता होगा नॉर्मली पंजाब हरियाणा दिल्ली ये सर्दी के टाइम में बहुत मेजर इशू फेस करता है क्योंकि वो जलाते हैं। बहुत पोल्यूशन होता है उससे और बहुत समय पे इस पे एग्रीकल्चर वालों का बहुत काम भी चल रहा है कि किस तरह से इस चीज को रिड्यूस किया जाए। तो यह सारी समस्याएं हमारे कार्बन फुटप्रट से जुड़ी हुई हैं। एंड हमें देखना है कि हम इंडिविजुअली इस पर किस तरह से कंट्रीब्यूट कर सकते हैं।

11:58 डीजल व्हीक्स को ना प्रमोट करके हम ईवी की तरफ जाएं तो वो क्लीन फुटप्रिंट क्रिएट करती हैं। और जहांजहां भी हो सके हम जितना अपना लाइट रिसोर्स भी बचा सकें। गवर्नमेंट बहुत सारी सब्सिडीज दे रही है। बहुत सारी गवर्नमेंट इंस्टिटशंस पर सोलर पैनल्स लगने कंपलसरी हो गए हैं। बहुत सारे हमारे एयरपोर्ट्स अब ऑलमोस्ट 50% इंडिपेंडेंट हो गए हैं। नॉर्मल इलेक्ट्रिसिटी से सोलर एनर्जी पर चल रहे हैं। तो इस टाइप के इनिशिएटिव्स जो हैं बहुत इंपॉर्टेंट है। आप सब लोगों में से जो लोग भी आज के समय में गेटेड सोसाइटीज

12:44 में रहते हैं उनसे भी आपकी म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने भी आपको टच किया हो शायद बट हम नॉर्मली इस चीज को एडवोकेट करते हैं कि आप अपनी स्ट्रीट लाइट्स और जो हीटिंग पैनल्स हैं बहुत सारी गेटेड सोसाइटीज में एक सेंट्रल पॉइंट से पानी का फ्लो होता है रनिंग वाटर का फॉर यूजेज इन द बाथरूम, इन द किचन। तो उसको हीट करने के लिए भी आप सोलर पैनल्स इंस्टॉल करवा लीजिए। वन टाइम इन्वेस्टमेंट है 1 लाख का पर सोसाइटी। बट वो इन्वेस्टमेंट बड़ा वर्थ वाइल है। आगे जाकर आपके सोसाइटी के कॉस्ट एस सच कम हो जाते हैं।

13:31 फॉर दोज़ ऑफ यू जो लकी है जिनके अपने इंडिविजुअल घर हैं। उसके ऊपर सोलर पैनल्स आप लगवा सकते हैं। उनको आप बैटरी से कनेक्ट करा सकते हैं अपने यूसेज के लिए और अगर आपके पास बड़ी स्पेस है तो आप उसको डायरेक्टली मेन ग्रिड से कनेक्ट करा सकते हैं। तो क्योंकि हमारी कंट्री में हमें हम बहुत लकी हैं कि हमें इतना धूप ऑल थ्रू द ईयर मिलता है। बारिश के दो महीने छोड़ के इतनी धूप है हमारे पास कि बहुत आराम से एक 10/10 की छत पे महीने में 5 मेगावाट एनर्जी ऐसा माना जाता है कि क्रिएट हो जाती है। व्हिच इज वेरी गुड। मतलब आपका

14:17 महीने भर का बिजली का बिल खत्म। तो वह इनिशियल चीजें जो है उस लेवल पर जो गवर्नमेंट में हो रहा है वह तो है ही है। पर हम अपनी लेवल पर क्या कर सकते हैं वह बहुत इंपॉर्टेंट है। और स्पेशली हमारी स्ट्रीट लाइट्स पार करने के लिए ना छोटे-छोटे पैनल्स आते हैं आजकल वो अगर आप कॉरपोरेशन को अपनी म्युनिसिपालिटी को आप अप्रोच करेंगे तो वो इंस्टॉल करा देते हैं। धीरे-धीरे के करके रिप्लेस हो सकती हैं। बहुत सारी सोसाइटीज में हमने देखा है कि इस टाइप का काम चल रहा है। तो ये सारे एफर्ट्स हमें अपना कार्बन फुटप्रिंट रिड्यूस करने के लिए करने चाहिए। दूसरा रिसोर्स कंजर्वेशन। रिसोर्स कंजर्वेशन में हमारे मेजर रिसोर्सेज हमारा एनर्जी है,

15:04 पानी है। प्लस जो भी हम अपनी डेली लाइफ में सामान यूज करते हैं, उसकी रिसाइक्लिंग है। उन सबको रिसाइकल करके रिसोर्स बचाना। यह भी एक इंपॉर्टेंट आस्पेक्ट है सस्टेनेबिलिटी का। एक एक रिसोर्स हम आने वाले कुछ मिनटों में अलग-अलग डिस्कस भी करेंगे। तीसरा एक अहम इशू है दैट इज नर्चरिंग आवर एनवायरमेंट। नॉर्मली क्या होता है? बहुत सारे विदेश विदेश में बहुत सारे ऐसे देशों में यह एक रूल है कि आप

15:49 गंदगी नहीं मचा सकते। अगर आप बाहर कचरा फेंक देंगे तो आपको फाइन लग जाएगा। उतना रेगुलेशन क्योंकि हम वो एक बहुत बड़ा देश है। वो हमारे यहां पॉसिबल नहीं होती। तो अपने एनवायरमेंट को खुद बचाना खुद संभालना यह हमारी जिम्मेदारी है। एस रिस्पांसिबल सिटीजंस वी शुड बी डूइंग दिस। जैसे फॉर एग्जांपल एक बहुत सिंपल सी चीज है। हम आलस के मारे इतना नहीं करते कि अगर हम मार्केट जा रहे हैं अपने व्हीकल में पैदल बहुत कम लोग आजकल ट्रैवल करते हैं तो अपनी गाड़ी में स्कूटर में आप एक थैला दो थैले हमेशा रखो। इनवेरेबली क्या होता है? वो ठेले वाला आप कुछ ले नहीं जाते हो तो वो ठेले

16:37 वाला आपको जो प्लास्टिक देता है वो प्लास्टिक से आप सामान तो घर ले आते हैं बट वो नॉर्मली जहां पेपर बैग्स अभी भी नहीं है बहुत सारे ऐसे स्ट्रीट फूड वाली जगह खाने की जो ठेले लगते हैं उधर और फल वाले छोटे वेंडर्स जो हैं वो आज भी प्लास्टिक यूज कर रहे हैं। एंड यही प्लास्टिक हम निकालते हैं अपना सामान और फिर फेंक देते हैं। तो वो बहुत जगह हमारी अलग-अलग लेवल्स पर पानी के लिए पोल्यूशन में ड्रेनेज सिस्टम में बहुत जगह दिक्कतें क्रिएट करते हैं। तो ये चीजों की बेसिक एफर्ट नेचर को बचाने की हमारी तरफ से होनी चाहिए। एंड

17:24 एक आखरी पॉइंट है गुड हेल्थ फॉर ऑल। आप सोचेंगे एनवायरमेंट से ग्रीन सस्टेनेबल फ्यूचर से हेल्थ का क्या लेना देना है? तो क्योंकि वी आर अ पार्ट ऑफ नेचर। हम सब उसी नेचर का हिस्सा हैं। एंड जितनी भी ऐसे देखा जाए तो नेचर की प्रॉब्लम्स इंसान की खड़ी की हुई है। हम अपने स्वार्थ के लिए जो भी मैनपुलेशन करते हैं एनवायरमेंट में वो ही चीजें प्रॉब्लम करते हैं। नेचर हमसे बहुत पहले से था। इधर हम बाद में आए हैं। वी हैव इवॉल्व मच लेटर। और हमने अपने स्वार्थ के लिए जैसे अब हाउसिंग प्रोवाइड

18:11 करनी है तो क्या होता है? नॉर्मली या तो कोई खेत बेच देता है अपना। उसको पैसे चाहिए तो किसान ने अपना खेत खेत बेच दिया। या उसके पास किसानी करने के लिए कोई नहीं है। बच्चे शहर चले गए हैं। उसने खेत बेच दिया। अब वो खेत पे क्या होगा? बिल्डर सिर्फ कंक्रीट का जंगल बनाएगा। कहीं पार्क नहीं होगा। कहीं ग्रीन एरिया नहीं होगा। वाटर रिचार्ज करने का कोई सिस्टम नहीं होगा। तो आप यह सोचो कि एक छोटी सी इस एक्शन से कितने सारे रिपकशंस हैं जो आगे के आने वाले समय में हमारे लिए प्रॉब्लम क्रिएट करते हैं। एंड यहां हेल्थ से क्या रिलेटेड है? हम अपने स्वास्थ्य को बिगाड़ रहे हैं।

18:56 पोल्यूशन हम अपने लिए कर रहे हैं। एयर पोल्यूशन है तो हमारी हेल्थ पर असर आता है उस चीज का। अगर प्लास्टिक की एक्यूमुलेशन है हमारे सिस्टम में तो वो भी हमारे अंदर ही एक्यूमुलेट हो रहा है। वी कॉल दिस एस बायो एक्यूमुलेशन ऑफ टॉक्सिंस। जो सारा एनवायरमेंट से हम खराब चीजें ले रहे हैं, वह हमारी बॉडी में एक्यूमुलेट होती जाती हैं। ऐसा हम लोग आपने बहुतों को कहते सुना होगा पुराने जमाने के लोगों ने बहुत अच्छा खाया है। इसलिए वो इतने टाइम तक हेल्दी रहते थे। किसी के दांत खराब नहीं होते थे। किसी के आइज पे असर नहीं होता था। बट आज हम बहुत कुछ पोलशन में खा रहे हैं क्योंकि इसलिए खा रहे हैं क्योंकि हमने अपना ईस्ट

19:42 ढूंढा है। हम हम वेस्ट की तरह टोटली प्लास्टिक की तरफ चले गए हैं। बॉटल वाटर से लेकर पानी से लेकर हमारे यहां तो मटों में और स्टील के जग में पीने का चलन बहुत सदियों से था। अब वो फिर वो प्लास्टिक की बतल्स वो कैरी करनी इजी है। इसलिए बट उसमें कितना माइक्रोप्लास्टिक हमारी बॉडी में जाता है। हमारे हेल्थ को इफेक्ट करता है। उसकी सोच हमें नहीं आती। तो हम कहीं ना कहीं हमारी हेल्थ हमारी वेल बीइंग इस एनवायरमेंटल पोलशन से जुड़ी हुई है। इसलिए उसके लिए जो जो कदम आपको उठाने हैं आप अपनी हेल्थ के लिए खुद जिम्मेदार है। तो उसके लिए जो आप चीजें पॉसिबबली अवॉइड कर

20:28 सको। प्लास्टिक यूज जितना घर में अवॉइड कर सको। खासकर हीटिंग और फ्रीजिंग में तो वो मत कीजिए। उसके अल्टरनेटिव्स इतने अच्छे हैं। आप पुराने जमाने पर सब लोग केले के पत्ते पर पत्तल में खाते थे। अभी वह चीजें फिर वापस आ रही है। इसलिए क्योंकि वह सस्टेनेबिलिटी के लिए जरूरी है। हमारी हेल्थ के लिए जरूरी है। तो पॉसिबल हो सके जहां तक तो आप कोशिश कीजिए कि इन चीजों को इन चेंजेस को आप अपने लाइफ स्टाइल में ला सकें और उससे आपकी हेल्थ पे बहुत अच्छा पॉजिटिव असर पड़ेगा। जब हम सस्टेनेबिलिटी की बात करते हैं तो देयर इज अ रूल ऑफ फाइव पीस।

21:16 पांच पी से शुरू होने वाली चीजें हैं जो कि बहुत इंपॉर्टेंट है। सबसे पहला है कि हमें अपने प्लनेट को उसकी नेचुरल रिसोर्सेज को सेव करना, उनको उनका संरक्षण करना जरूरी है फॉर द टाइम्स टू कम। दूसरा हमको इस टाइप से एग्रीकल्चर करना है, फूड प्रोवाइड करना है अपने लोगों के लिए ताकि कोई भी भूखा ना रहे एंड सबको प्रॉपर नरिशमेंट मिल सके। सो दैट वी ऑल ऑफ अस कैन हैव अ गुड हेल्थ। अगर हेल्थ अच्छी होगी, काम अच्छा होगा तो नेचुरली दैट विल लीड टू प्रोस्पेरिटी। प्रोस्पेरिटी जिस भी देश में होगी, वहां पीस होगा, अमन शांति होगी। जब डिसटिसफाइड

22:05 होते हैं लोग तो प्रॉब्लम ज्यादा होती हैं। अब आप एक बहुत छोटा सा एग्जांपल लीजिए कि घर में ही जब किसी वजह से आप स्ट्रेस में हो, मूड खराब हो तो आपका फ्रिक्शन किसी ना किसी से हो जाता है क्योंकि आपका मूड अच्छा नहीं है। तो अगर आपका मन शांत होगा, अच्छा होगा, खुश होगा, आप हेल्दी होंगे तो अच्छा एनवायरमेंट होगा। दिस होल्ड्स ट्रू फॉर योर ओन हाउस एंड इट होल्ड्स ट्रू फॉर अ कंट्री एंड द वर्ल्ड इन जनरल। तो पीस इज अटेन ओनली व्हेन देयर इज प्रोस्पेरिटी एंड गुड हेल्थ। एंड इसके अलावा जब हम ग्लोबल लेवल पर बात करते हैं तो हम बहुत सारी पार्टनरशिप्स की

22:50 भी बात करते हैं। हमारे पास जो नॉलेज है, जो टेक्नोलॉजी है उसका एक्सचेंज एनेंट आस्पेक्ट ऑफ सस्टेनेबल डेवलपमेंट। अब हमारी कंट्री के अलावा यू एनओ भी इस क्लाइमेट एक्शन प्लान को ले बहुत सक्रिय है। और उन्होंने कहा है कि ग्रीन हाउस एमिशंस मतलब यह जो गाड़ियों से इंडस्ट्रीज से पोलटेंट्स निकलते हैं, धुआ निकलता है उसको एलिमिनेट करके जीरो पर लाना है। दैट इज मेजर टारगेट एट द ग्लोबल लेवल। फिर एक

23:39 बहुत इंपॉर्टेंट चीज जो हम सबको समझनी जरूरी है। हम गर्मी में बैठते हैं तो आजकल सब जगह एसी कूलर्स का एसी का इस्तेमाल होता है। हम अपनी पुरानी आर्किटेक्चर खुद भूल गए हैं। आप में से बहुत लोगों ने कोई ना कोई पुराना फोर्ट खासकर अगर आगरा के फोर्ट्स देखे हो या पुराने फोर्ट्स देखे हो कहीं विजिट किया हो तो आप देखो कि उस जमाने में एक डबल फ्लोर हुआ करता था। कोने में झिरिया बनी होती थी जिसमें से पानी फ्लो करता था। एंड ठंडा पानी नहीं नॉर्मल पानी व्हिच यूज्ड टू कीप दैट रूम कूल। उस रूम

24:24 को पूरे जो स्ट्रक्चर थी उसको कूल रखने में पानी पानी के झरने इन सबका बड़ा मेजर हाथ था। आजकल की मेजर बिल्डिंग्स में जो छोटे जब हम लोग फ्लैट्स में रह रहे हैं वहां तो इस चीज की पॉसिबिलिटी नहीं है। पर जो लोग अपने भी घर बनाते हैं वहां हमारे आर्किटेक्ट्स इस चीज को इस नॉलेज को एक्सप्लइट ही नहीं कर रहे। क्योंकि एक बिल्डिंग में भी एक बिल्डिंग से भी एक महीने में कम से कम पांच से 10 क्रेडिट्स का कार्बन फुटप्रिंट क्रिएट होता है। तो आप यह सोचो कि दोज़ ऑफ अस हु आर फ्रॉम द फिजिकल साइंसेस फ्रॉम

25:11 जियोलॉजिकल साइंसेस जो लोग भी उस एरिया को बिलोंग करते हैं। तो यू ऑल नीड टू हेल्प अस टू गिव इट अ थॉट कि जो पुराने आर्किटेक्चरल मेथड्स हैं वो नेचुरल लाइटिंग जिसको आजकल हम ग्रीन हाउस कहते हैं नॉर्मल नेचुरल लाइट्स कहते हैं। उन चीजों को लाने में आप सोसाइटी में आप किस तरह से हेल्प कर सकते हो? जिनके अपने घर हैं, प्लीज डू लुक इनू दिस जो अपने घर बनवा रहे हैं या जिनके अपने इंडिविजुअल हाउसेस हैं हु आर लकी टू हैव दैट यह छोटी-छोटी चीजें जहां आप सोलर

25:56 एनर्जी यूज कर सकते हो लेस कंजमशन ऑफ द पावर दैट यू कैन हैव नेचुरल लाइटिंग से और इस तरह से अगर हमारे घरों में पानी को यूज करके के ठंडक हो सकती है। तो हम बहुत सारा एक तो सिंथेटिक एनवायरमेंट कम कर सकते हैं। एसी कम कर सकते हैं। फैंस कम कर सकते हैं। दैट विल ब्रिंग अस क्लोज टू नेचर नेचुरली प्लस बहुत सारा कार्बन फुटप्रिंट डिक्रीज हो सकता है। क्योंकि यह सब चीजें इसलिए जरूरी है क्योंकि यह एक नोन फैक्ट है आज कि हर साल हमारा जो अर्थ का टेंपरेचर है वह एक से 1ढ़ डिग्री बढ़ रहा है। ऑलरेडी हम 1 + cos क्रॉस कर चुके हैं। 1° 1° ऐसे

26:44 लगता है तो शायद कोई बहुत बड़ा नंबर ना लग रहा हो आपको। बट द चेंज ऑफ वन टू 1.5 डिग्री कैन मेल्ट आर आइस कैप्स ऑन द पोलर रीजंस। और उसकी वजह से बहुत प्रॉब्लम्स हो सकती हैं रिलेटेड टू अ लॉट ऑफ नेचुरल थिंग्स दैट आर वर्किंग इन आवर सिस्टम। तो इस चीज पर हम सबको ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि हम एक एग्रीकल्चरल बेस्ड इकॉनमी है। हमारे देश में खेतीबाड़ी पे बहुत सारे लोग अपनी जीविका के लिए निर्भर हैं और हमारी इकॉनमी भी उसी पर डिपेंडेंट

27:31 है। तो उसमें चेंजेस लाना सबसे ज्यादा जरूरी है। चेंजेस इन द सेंस एक टाइम पर हर जगह की एक एग्रीकल्चरल प्रैक्टिस होती थी कि एक टाइप की क्रॉप आपको अगर अपनी ज्योग्राफी के छोटी क्लासेस के लेसंस याद हो मिडिल स्कूल के तो क्रॉप रोटेशन हम पढ़ा करते थे एंड वो इसी वजह से था क्योंकि क्रॉप रोटेशन को प्रैक्टिस किया जाना चाहिए। आज एग्रीकल्चर में क्या हो गया है कि जो क्रॉप आपको कैश क्रॉप की तरह काम करें आपको फाइनेंस दे उस पे फोकस ज्यादा हो गया है। फॉर एग्जांपल पंजाब एक

28:19 टाइम पे बहुत इट वास द मेन वीट ग्रोइंग स्टेट इन आवर कंट्री। वीट एक टाइम के बाद सरप्लस हो गया। अभी-अभी आर नॉट शॉर्ट ऑफ वीट। राइस एक्सपोर्ट भी होता है हमारा अच्छी क्वालिटी का एंड यूज भी होने लगा है बहुत सारा कंट्री में। तो हर बेल्ट को चेंज करके दे आर ट्राइंग टू मेक इट इनू अ राइस बेल्ट या वो चीजें ग्रो करने की कोशिश करते हैं। जैसे मध्य प्रदेश कभी भी वीट ग्रोइंग एरिया नहीं था। पर धीरे धीरे धीरे धीरे उन्होंने वो हमारे पास में जो किसी और का बेल्ट है उसको टोटली वीट ग्रोइंग एरिया बना दिया है। तो ये जो चेंजेस ला रहे हैं इस टाइप की फोर्स्ड चेंजेस विदाउट एनी

29:07 क्रॉप रोटेशन। नॉर्मली एक आपकी खरीफ की क्रॉप निकलती है। उसके पीछे आपको ऐसे कुछ दाल या ऐसी कोई प्लांट्स लगाने जरूरी होते हैं जो नाइट्रोजन फिक्स करें। फ्रॉम द एटमॉस्फियर सो दैट योर सोइल इज एनर। वो दोबारा से अच्छी नरिशमेंट उसमें आ जाए नेचुरली। फिर नेचुरल खाद यूज करने के लिए इतना फर्टिलाइजर यूज कर कर के हमारी सोइल्स खराब हो गई हैं। पंजाब इज जस्ट वन एग्जांपल और भी बहुत जगहों पे। बट आप कहीं कहीं-कहीं यह चेंजेस बहुत मेजर भी आ रही है। हमारे नॉर्थ ईस्ट वाले जो साथी हैं उन्होंने बहुत सारी अपनी स्टेट्स में बहुत ब्यूटीफुली ऑर्गेनिक फार्मिंग का सिस्टम

29:54 शुरू कर लिया है। सो ऐसा नहीं है कि ऑर्गेनिक फार्मिंग में यील्ड नहीं हो सकती। इट्स जस्ट कि हमें वह थोड़ा सा एफर्ट डाल के वो चीजें सीखने के लिए अपने लिए वापस लाने की जरूरत है। और आप खुद ही देखो कि आप कोई आज चीज ऑर्गेनिक खरीदनी है, कोल्ड प्रेस्ड ऑयल्स खरीदने हैं तो हम उसके लिए कितना ज्यादा पैसा देते हैं वो चीजें वो फैसिलिटीज लेने के लिए। एक टाइम पे आज से दो जनरेशंस पहले तक शायद हमारे ग्रैंड मदर्स के टाइम पे ये चीजें तो नॉर्मल मिलती थी ना। तेल को तो वो वैसे वो मूसली में ही वैसे सीड्स पीस के वैसे ही तेल निकलता था सब जगह जो आज कमर्शियलाइज होते होते हमने हर चीज को सिंथेटिक कर लिया मैकेनिक्स बेस्ड कर

30:42 लिया और अब हम ऑर्गेनिक चीजों के लिए मेरे ख्याल से मार्केट जाते हैं तो डबल पे करते हैं। तो वह चीजें जो हैं वह प्रैक्टिससेस जो पहले के टाइम पर थी वह ज्यादा सस्टेनेबल थी उनको वापस लाना बहुत जरूरी हो गया है। कोई भी इंसान जैसे फॉर हमने अभी एग्रीकल्चर की बात की। इसी तरह से जो लोग लाइव स्टॉक प्रोडक्शन में है, डेरी प्रोडक्ट्स के प्रोडक्शन में है। आप देखो हमारा दूध आजकल बहुत यंग बच्चों को भी हॉर्मोनल डिस्टरबेंसेस होने लगे हैं। एटली अर्ली स्टेजेस एज क्लीनिकल पीपल वी सी अ लॉट ऑफ हार्मोनल कॉम्प्लिकेशंस इन वुमेन।

31:31 एक मेजर कॉज है कि हम सब दूध तो पीते हैं बट वह जो दूध देने वाला बंदा है मतलब जो है जो प्रोड्यूस कर रहे हैं वो अपनी गाय को एक्स्ट्रा दूध प्रोड्यूस करने के लिए ऑक्सीटोसिन नाम के एक हार्मोन का इंजेक्शन देते हैं ताकि वो ज्यादा दूध रिलीज करें विदाउट हैविंग अ चाइल्ड विदाउट हैविंग टू गो थ्रू द नॉर्मल साइकिल उसको सिंथेटिकली करते हैं। फाइनली तो वो घूम के हमारे ही इको सिस्टम में हमारे ही फूड चैन में आ रहा है ना और हमारी बॉडीज उसको एक्यूमुलेट कर रही हैं और इसलिए हमें प्रॉब्लम्स हो रही है। तो यह जो चीजें हैं इन पे इन प्रैक्टिससेस पे ध्यान देना बहुत

32:16 इंपॉर्टेंट है। सोइल की कंजर्वेशन इंपॉर्टेंट है। पेस्ट मैनेजमेंट इंपॉर्टेंट है। इतना सारा पेस्टिसाइड डाल डाल के कीड़ा तो नहीं लगता है। पर वो पेस्टिसाइड हमारे अंदर भी तो जाती है। हमारी बॉडी को भी तो नुकसान पहुंचाती है। इसी तरह लाइफस्टॉक प्रोडक्शन का फिर वाटर की यूजेज फॉर एग्रीकल्चर आज से बहुत सालों पहले आई रिमेंबर वन ऑफ माय जूनियर्स हैड गॉन टू इजराइल फॉर अ फेलोशिप। तो उसने एंड आई एम टॉकिंग अबाउट लेट 90ज। तो उसने आके बताया था कि उस जमाने में वहां पे क्योंकि अ वो हमेशा से काफी ज्यादा वॉर जोोन रहा है। वहां पे

33:02 लड़ाईयां चलती रहती है उस ट्रिप में। तो उनके इशूज़ हैं इस चीज को लेकर। वहां पर ड्रिप इरीगेशन उस टाइम में वो लोग यूज़ करके बहुत सारा कुछ बना रहे थे। एग्रीकल्चर कर रहे थे। सो एफिशिएंट वाटर यूटिलाइजेशन इज़ आल्सो अ पार्ट ऑफ सस्टेनेबल डेवलपमेंट एंड सो इज़ यूज़ ऑफ़ रिन्यूएबल सोर्सेस ऑफ एनर्जी। हमने सोलर की बात की बट हाइड्रो एनर्जी भी बहुत जगह डैम्स हमारे पास बहुत सारे हैं। वहां पे भी ये चीजें चल रही है। सोलर एनर्जी की बात इसलिए की क्योंकि वो हमारे तक चीज आती है। मतलब एट

33:48 इंडिविजुअल लेवल भी हम बहुत टाइप की सोलर बेस्ड चीजें यूज कर सकते हैं। अदरवाइज हमारी कंट्री में हाइड्रो एनर्जी वाटर बेस्ड विंड एनर्जी कहीं-कहीं जहां पर पहाड़ हैं एंड बहुत ज्यादा बर्ड्स की पापुलेशन नहीं है। क्योंकि विंड एनर्जी के साथ एक दिक्कत होती है कि बर्ड्स टकरा के उन विंग्स में मरते हैं। तो वो वाला इशू वहां की बर्ड पापुलेशन को डिस्टर्ब करता है। तो वो थोड़ा सा ध्यान से देख के लगाने पड़ते हैं। बट वी हैव अ लॉट ऑफ हाइड्रो एनर्जी विद अस अपार्ट फ्रॉम सोलर एनर्जी। और कहीं-कहीं थर्मल पावर स्टेशन भी हैं।

34:34 वह थर्मल एनर्जी भी जनरेट करते हैं। कोल बेस ऑलदो दे आर नॉट इनकरेज्ड मच क्योंकि उनका अपना कार्बन फुटप्रिंट होता है। तो ये सारी चीजें हमें ध्यान में रखनी है। तो अह दिस इज जस्ट अ स्लाइड टू गिव यू एन आईडिया कि सस्टेनेबल एग्रीकल्चर में जो लोग हैं वो कौन-कौन से बिंदुओं पे अपना ध्यान फोकस कर सकते हैं कि जो चीजें डिक्रीज करके हमारी सस्टेनेबल एग्रीकल्चर ज्यादा अच्छी हो सकती है। जैसे कि अभी मैं बात कर ही रही थी। एक बहुत अच्छा एग्जाम एग्जांपल है हमारे पास।

35:21 हमने पंजाब में खेती के स्टाइल की बात की। तो फॉर द फर्स्ट टाइम वी हैव सीन सच अ लॉट ऑफ फ्लड्स बीइंग फेस्ड इन दैट एरिया। वहां पांच रिवर्स हैं। पंजाब है तो पांच रिवर्स हैं उनके पास। बट ऐसी सिचुएशन फ्लड्स की इतने सालों में कभी किसी ने नहीं देखी थी। एंड द रीजन इज कि यही हमने उन्होंने वहां पर वीट ग्रोइंग के टाइम पर जो भी मेजर्स यूज किए उससे यील्ड तो बहुत अच्छी हो गई पर सोइल बहुत खराब हो गई तो वहां सोइल में सेले सॉल्ट की मात्रा बहुत ज्यादा है। न्यूट्रिएंट डिप्लीटेड है। क्योंकि इतना चावल ग्रो कर रहे हैं तो

36:08 सोइल इरोजन भी है। बिकॉज़ क्या होता है ना कि जब आप पेड़ लगाते हो या दूसरे टाइप की खेती करते हो तो आपके पास सोइल को होल्ड करने के लिए होते हैं प्लांट्स। फिर यह राइस की खेती से वाटर लॉगिंग बहुत हो गई है। तो इस बार तो उस स्टेट ने बहुत ज्यादा नेचुरल क्लमिटी फेस की है बिकॉज़ ऑफ फ्लड्स। तो यह एक एग्जांपल है कि जब हम नेचुरल इको सिस्टम को, नेचुरल एनवायरमेंट को डिस्टर्ब करते हैं तो बहुत सारी प्रॉब्लम्स आती हैं इन चीजों को लेके। इसलिए हमें ध्यान रखना चाहिए कि हम जो भी एक्टिविटीज कर रहे हैं एंड स्पेशली फॉर दोज़ ऑफ यू हु

36:53 आर फ्रॉम द बॉटनी बैकग्राउंड, एग्रीकल्चरल बैकग्राउंड। आपको यह थॉट प्रोपोगेट करने की बहुत जरूरत है। लोगों को अवेयर कराने की बहुत जरूरत है कि मे बी एक साल उतना मुनाफा शायद ना हो। बट इन सस्टेनेबल प्रैक्टिससेस से आगे आने वाले समय में हम अपना एनवायरमेंट, अपनी सोसाइटी, अपने हेल्थ तीनों के लिए पॉजिटिव चीज करेंगे। अगर हम ये स्टेप्स आज लेते हैं। ओके। एक और बहुत कॉमन चीज जहां पर हम प्रॉब्लम में आ जाते हैं

37:41 और वो है कि हम सब किसी ना किसी कैपेसिटी में प्लांटेशन जरूर करते हैं। चाहे हम स्कूल में हो तो प्लांटेशन डे मनाते हैं। किसी इंस्टट्यूट में है तो एनवायरमेंट डे मना रहे होते हैं जून में या कोई प्लांटेशन ड्राइव किसी वजह से चल रही है सिटी में या स्टेट में तो वह भी करते हैं। उससे एक ही प्रॉब्लम है एंड दैट इज कि यह प्लांटेशन एक्टिविटीज होती तो है पर जो भी हम एफर्ट डाल रहे हैं जो भी हम इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं प्लांट में वह एफर्ट दिखती नहीं है। सोसाइटी के काम नहीं

38:27 आती। तो चलिए लेट्स सी व्हाई दिस प्रॉब्लम ऑफ प्लांटेशन। इतना प्लांटेशन होने के बाद भी हमारा कंटीन्यूसली हर स्टेट का ग्रीन कवर क्यों कम होता जा रहा है? आइए देखते हैं इसकी इससे जुड़ी क्या समस्याएं हैं। सो प्लांटेशन व्हेन वी टॉक ऑफ प्लांटेशन हमें याद रखना चाहिए। हमें प्लांटेशन करने से पहले ऐसा नहीं है कि आज नर्सरी गए यह पौधा मिल गया या यह प्लांट मिल गया। उसको हमने उठा के लगा दिया। जो भी हमको कन्वीनिएंट साइट लगी वहां पर जो खाली जगह समझ में आई वह प्लांट को लगाना प्लांटेशन करना खासकर

39:13 ट्री प्लांटेशन करना अपने आप में एक आर्ट ऑफ साइंस है और उसमें इन सारे सब्जेक्ट्स की एक बहुत मेजर कंट्रीब्यूशन है सो लेट अस सी किस तरह से इन डिफरेंट एरियाज का इनवॉल्वमेंट होता है। सबसे पहले तो आपका जियोलॉजिकल असेसमेंट बहुत जरूरी है। वहां के जो अगर आपके कलीग्स हैं आपके यहां डिपार्टमेंट है तो उनसे मदद ले सकते हैं। नहीं तो जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया का एक कोई ना कोई ऑफिस जरूर होता है हर सिटी में। उनके पास जा सकते हैं। तो वह आपको बताएंगे कि हर जगह का अपना एक

40:02 इको सिस्टम है और वहां किस टाइप का पौधा किस टाइप की प्लांटेशन लगाना ठीक रहेगा। ठीक इन द सेंस के क्या चीज वहां पनप सकती है, रह सकती है। अगर वह कम पानी वाली एरिया है, जहां वाटर लेवल्स बहुत ड्रॉप कर गए हैं तो वहां क्या सस्टेन हो सकता है? अगर ज्यादा पानी है पर सॉफ्ट सोइल है तो कौन से पौधे लगाने चाहिए? यह सब आईडिया हमें उस चीज से मिल सकता है। इस चीज को समझने के बाद नेक्स्ट हमें एक यह भी लेना चाहिए कि जो भी आपने साइट प्लांटेशन के लिए सेलेक्ट की है उसमें क्या चीज एडवाइज्ड है टू ग्रो।

40:49 अगर आपके यहां बहुत सारे ऐसे एरियाज है ना फॉरेस्ट एरियाज डिफाइंड होते हैं। सागवान का जंगल है या सैंडलवुड का जंगल है तो वो अगर करे गए हैं बनाए गए हैं तो उसके पीछे एक रीजन है। हेलो हां जी बिल्कुल बिल्कुल थैंक यू सॉरी हां जी तो एक साइट सेलेक्ट करने से पहले अगर आप

41:42 कार्बन मिटिगेट वहां किस तरह से करना है कौन सा वहां सिलेक्शन एरिया का सही रहेगा। तो बहुत सारे ऑनलाइन भी साइट्स अवेलेबल है जो इस टाइप की चीजों की इंफॉर्मेशन देते हैं। नहीं तो जैसे मैंने कहा कि आपके जो जियोलॉजिकल कलीग्स हैं जो जियोलॉजी पढ़ाते हैं या वहां का आपका सिटी का ऑफिस है उनसे आप पूछ सकते हैं। यह इंफॉर्मेशन ले सकते हैं। उसके बाद एक बहुत इंपॉर्टेंट चीज आती है कि वहां की सोइल की प्रॉपर्टी क्या है? कुछ पौधे एसिडिक सोइल पसंद करते हैं। कईयों को अल्कलाइन सोइल सूट करती है। कुछ पौधों को

42:29 कुछ स्पेशल न्यूट्रिएंट्स चाहिए होते हैं अपनी ग्रोथ के लिए, इंटरेक्शन के लिए। तो वहां किस टाइप की सोइल है? वो नॉर्मली जो उस एरिया में खेती वगैरह करते हैं उनको आईडिया होता है कि उस सोइल में क्या चीज बनपेगी। तो उसको पढ़ के समझ के फिर ही हमें कोई प्लांटेशन ड्राइव्स करनी चाहिए। बहुत सारी ऐसी जगहों पे अगर पास में कहीं इंडस्ट्री है कोई भी बड़ी इंडस्ट्री तो उसके बहुत सारे वेस्ट भी उस एरिया की सोइल को उसकी ग्रोथ को इफेक्ट करते हैं। तो इन चीजों को सबको ध्यान में रखना चाहिए। आप साल भर में

43:14 सिर्फ दो ही पौधे लगाएं। दो ही पेड़ लगाएं। पौधे तो छोटे आप अपने घर में घर के आसपास लगा सकते हैं। अपने वर्क प्लेस पर लगा सकते हैं। बट पेड़ लगाना एक लेगसी है क्योंकि आने वाली बहुत कई जनरेशंस उससे वो पाएंगी। तो अगर आप एक खासकर एक फ्रूट बेयरिंग ट्री लगा रहे हैं। तो इन सब चीजों को ध्यान में रखते हुए वहां की जियोलॉजी कैसी है? वहां कौन सा लोकल टाइप का पेड़ पनप सकता है? केमिस्ट्री क्या है? इन सबको ध्यान में रखते हुए अपने को सेलेक्ट करना चाहिए। साइट भी और ट्री भी जो आप लगाना चाहते हैं। इन सब चीजों का एक फाइनल नीड क्या है? एक हम अपना आने वाले

44:03 एनवायरमेंट को सस्टेनेबल करना चाहते हैं, ग्रीन करना चाहते हैं। वो एक मेजर चीज है। फिर दूसरा जितना हमारा आजकल सब सिटीज में आप देखो इस साल इंडिया में इतना ऑफ द टाइम मतलब सीजन से हटके बारिश फ्लड्स वगैरह आने शुरू हो गए हैं। वो इसीलिए क्योंकि उसकी वजह से सोइल इरोजन भी होता है। इस वजह से क्योंकि हमारे यहां बहुत मैसिव अमाउंट में डेवलपमेंट की वजह से पेड़ों को काटा गया है। यह नहीं कहते कि यह कहना तो सही नहीं होगा कि डेवलपमेंट नहीं होनी चाहिए। पर डेवलपमेंट के साथ क्योंकि आप जब एक पेड़ काटते हो वह किसी

44:49 की 15 साल की ग्रोथ 10 साल 15 साल पुराना पेड़ आप खत्म कर देते हो। बट उतने ही पेड़ लगा के आसपास सस्टेन करने उनको दोबारा से लगाना उनको नर्चर करना ताकि वो बड़े हो जाए और वो ग्रीन कवर कायम रहे। यह बैलेंस समहऊ मैनेज नहीं हो पा रहा है और उसकी वजह से बहुत सरफेस वाटर डिस्चार्ज होता है जिसकी वजह से सब जगह फ्लड्स हो रहे हैं। बॉम्बे हैड अ वेरी बैड टाइम विद अ लॉट ऑफ फ्लड्स। बहुत जगह डूबा हुआ था। इलाहाबाद में गंगा किनारे बहुत सारे मंदिर बहुत सारी जगहें डूब गई हैं बिकॉज़ ऑफ दी फ्लड्स। ऐसा फ्लैश फ्लड्स जम्मू में कभी भी फ्लड्स के बारे में इस

45:36 तरह से सुना ही नहीं था कि पूरा का पूरा मंदिर रह गया। वैष्णो देवी इतने सालों से देखते आ रहे हैं, सुनते आ रहे हैं। नॉर्मली उत्तराखंड में लैंडस्लाइड्स होती थी। इस बार इधर भी हुई है। तो द पर्पस टू शेयर इज बेसिकली के इन सारी चीजों के साथ बहुत सारे रिपकशंस बहुत सारे कॉन्सिक्वेंसेस जुड़े हुए हैं और इनको छेड़ने की वजह से हमको बहुत सारी प्रॉब्लम्स का सामना करना पड़ रहा है। तो प्लांटेशन करते समय इन चीजों का ध्यान रख ध्यान रखना चाहिए क्योंकि इससे ग्रीन बेल्ट ग्रीन कवर तो हो ही रहा है। टेंपरेचर जो ग्लोबल वार्मिंग होती है वो कम होती

46:22 है। नॉइज़ पोल्यूशन कम होता है। एयर पोल्यूशन कम होता है। फिर छाया तो इसको नहीं चाहिए। आपको अपनी गाड़ी भी पार्क करनी है तो पेड़ की छाया चाहिए। सो इन सारी चीजों का मॉडरेशन हम प्रॉपर प्लंड प्लांटेशन करके कर सकते हैं। सो इसके पीछे की साइंस क्या है? बेसिकली क्यों हमने ये सब चीजों की बात की? क्योंकि हम कार्बन डाइऑक्साइड तो कम करना ही चाहते हैं। कार्बन फुटप्रिंट कम करना ही चाहते हैं। उसके अलावा अपनी एरिया की बायोडायवर्सिटी जो है हमारी उसको भी कंजर्व करना चाहते हैं। वि इज वन स्टेप टुवर्ड्स सस्टेनेबल डेवलपमेंट। इसीलिए यह

47:10 चीजें बहुत इंपॉर्टेंट है। तो दी आर अ फ्यू पॉइंट्स जो आप कभी भी जब आप ट्री प्लांटिंग स्ट्रेटजी बना रहे हो अपनी उनको ध्यान में रख सकते हैं। कैसे प्रोक्योर करना है, कहां लगाना है, किसको एंगेज करना है, किस तरह से आपको फंडिंग की सपोर्ट मिल सकती है। अगर आपकी ड्राइव बड़ी है, एक-ए दो-दो पौधे नहीं ज्यादा एरिया को कवर करना चाह रहे हैं। सो दिस इज मॉडल फॉर अ सक्सेसफुल ट्री प्लांटिंग स्ट्रेटजी। आप में से जो भी करना चाहे वो कर सकते हैं। दूसरा प्लांटेशन का एक पैटर्न भी होता है।

47:55 रोड के किनारे कौन से पौधे लगने चाहिए? छोटे उसके बाद और बड़ी हाइट के पीछे उसके बाद ट्रीज। इस तरह का एक ग्रेडेशन भी है वि नॉट ओनली हेल्प्स द लैंडस्केपिंग बट इट सर्व्स द पर्पस टू कट डाउन एयर पोल्यूशन आल्सो तो इस प्लांटेशन पैटर्न को जो हमने डिस्कस भी किया है इसको आप ध्यान में रखते हुए अपना एक्टिविटी प्लान कर सकते हैं। नेक्स्ट वी कम टू अनदर इंपॉर्टेंट रिसोर्स इन एनवायरमेंट एंड दैट इज वाटर। हमने बात

48:43 की कि यू एनओ और हमारे देश में भी हमारी सरकार दे आर ट्राइंग टू ब्रिंग वाटर ड्रिंकेबल वाटर टू एव्री हाउसहोल्ड। और यह एक बहुत पुरानी जो सेलर्स जाते थे पहले उनकी एक बहुत पुरानी यह कहावत है कि वाटर वाटर एवरीवेयर बट नॉट अ ड्रॉप टू ड्रिंक जब वो समुद्र में निकलते थे पानी सब जगह होता था पीने लायक पानी नहीं है क्योंकि वो खा रहा है। तो यही चीज बहुत इंपॉर्टेंट है। हमें समझनी है कि आने वाली हमारा हमारा टाइम हमारा नेचर हमारी लाइफ तभी सस्टेनेबल होगी जब हम ना सिर्फ अपनी पोल्यूशन कंट्रोल करें बट अपनी रिसोर्सेज को जैसे हमने बात की थी रिसोर्सेज को भी कंजर्व करें।

49:28 रिसोर्स कंजर्वेशन इज एन इंपॉर्टेंट पार्ट ऑफ वाटर कंजर्वेशन आल्सो। चलिए अगर हम देखा देखें तो एट वन टाइम द ओनली रिसोर्स दैट वी हैड फॉर वाटर वास रेन। बारिश होती थी। पानी लोग कलेक्ट करते थे। छोटे-छोटे तालाब थे इसलिए तालाब और बावड़ियां बनी हुई थी। रिवर्स यूज्ड टू बी फॉर एग्रीकल्चर। वहां से कैनाल खोद के अंदर तक पानी लाया जाता था।

50:14 तो यह प्रैक्टिससेस क्योंकि लिमिट में यूज होती थी इसलिए सस्टेनेबल थी। आज के टाइम में जैसे-जैसे एग्रीकल्चरल प्रोड्यूस की मांग बढ़ी है टू फीड द ग्रोइंग पापुलेशन। हमारी टेक्नोलॉजी बढ़ी वी बिकम मोर मैकेनाइज्ड। बट उस उस पूरे प्रोसेस में हमने बहुत ज्यादा एक्सेस यूज करना शुरू कर दिया हर चीज का। पानी आज भी हमारे घरों में बाहर बहुत जगह वेस्ट होता है। एंड वेस्ट होने के अलावा जो हमको बारिश मिलती है वी आर

51:00 यू नो वेरी लकी दैट वे कि हम एक ऐसी कंट्री में रहते हैं जहां चारों मौसम देखने को मिलते हैं। तो देयर आर गुड रेंस आल्सो बट यह जो फ्लैश प्लग्स आ रहे हैं वह ना आए अगर अगर हम अपने वाटर को जो सरफेस वाटर है बारिश में जो होता है आप देखिए किसी भी शहर में अनफॉर्चूनेटली चंडीगढ़ इज सपोज टू बी वन ऑफ आवर मोस्ट यू नो वेल डिज़ वेल प्लंड सिटी बट वहां भी स्टम ड्रेंस नहीं है वो जो सड़क के किनारे पुराने जमाने में बनते थे छोटी-छोटी नालियां जिनके ऊपर जंगल जालियां लगी हुई थी। वहां से पानी जाता था नीचे। एक्स्ट्रा पानी सड़क पर नहीं खड़ा होता था। वहां से

51:46 नीचे जाता था और वो उनको लीड किया जाता था टुवर्ड्स डीपर वाटर ताकि वो ग्राउंड वाटर जो में जाके मिल जाए उसको रिचार्ज कर सके। तो वो चीज आज के कंस्ट्रक्शन में आज के हमारे अर्बनाइजेशन में तो खत्म ही हो गई है। गायब ही हो गई है। वह चीजों के ना होने की वजह से बहुत सारी हमारी दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। वी आर इनू अ लॉट ऑफ प्रॉब्लम। सो लेट अस सी इनू वाटर वी हैव टू मेजर रिसोर्सेज। सरफेस वाटर एंड ग्राउंड वाटर। तो हमने ग्राउंड वाटर की बात की। तो वाटर रिसोर्स डेवलपमेंट में क्या होना चाहिए? ग्राउंड वाटर कहां है?

52:32 एक्वाफर कहां है आपका? यह आपके जियोलॉजी के एक्सपर्ट्स कलीग आपको बता सकते हैं, हेल्प कर सकते हैं। उससे रिलेटेड हम अलग-अलग टाइप के एक्वाफर्स हैं। कुएं हैं हमारे बावड़ियां हैं। ग्राउंड वाटर का फ्लो रेगुलेट कर सकते हैं। तो सिर्फ ट्री प्लांटेशन से नहीं हमको वाटर जो है उसको रिचार्ज करना जो भी प्रेसिपिटेट हो रहा है वाटर वो बहुत इंपॉर्टेंट है। क्योंकि अभी बहुत जगहों पे है। इनफैक्ट बहुत सारी ऐसी जगहों पे ये हो गया है जहां फॉरेस्ट काट दिए गए हैं। सुंदरब यूज टू बी सच अ ब्यूटीफुल प्लेस जहां वो सबमर्ज मैनग्रोव्स होते थे तो वहां भी केरला में

53:19 भी उन्होंने काट दिया है तो समुंदर अंदर आ गया है। नेचुरली अगर हम नेचर के साथ खिलवाड़ करेंगे वी आर गोइंग टू फेस दो प्रॉब्लम्स। तो जो जैसे नेचुरल कंडीशन में है अगर उसको सस्टेनेबल रखना है अगर आने वाले टाइम में प्रॉब्लम नहीं करनी है तो उसको उसी तरह से सस्टेन करना भी जरूरी है। एंड वन ऑफ देंट फैक्टर्स इज कि आप अपने ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करें। अब इस पर एक नजर मारिए इसको ध्यान से कैसे रिचार्ज करना है जो बोरिंग करते हैं नॉर्मली बोरिंग से आप हर घर में हर सोसाइटी में एक बोर होता है वहां से आप पानी निकालते रहते हो निकालते रहते हो उस

54:06 अंदर कोई अनलिमिटेड सोर्स तो है नहीं सो इफ यू डोंट रिचार्ज दैट तो वो सूख जाता है बोर फिर क्या करो फिर और डीप खोदो फिर वो भी खत्म हो जाएगा तो उसकी सस्टेनेबिलिटी के लिए हमको यह देखना है कि जो भी हमारे एरिया का वाटर टेबल है वह एक तरह से मेंटेन रहे उसमें दिक्कत ना आए और उसके लिए हम क्या कर सकते हैं जो हमारा एक्वाफर है उसको देखें हम एक्वाफर यह जो है इसको हम एक्वाफर कहते हैं। दिस इज व्हाट एंड इट इज एक ऊपर की लेयर होती है। एक कनफाइंड एक्वाफर होता है। नीचे का लेयर होता है। सो वी हैव टू इंश्योर कि जो हमारा बारिश का सरफेस वाटर है हम उसको

54:54 थोड़ा ग्राउंड में एक होल करके एक स्पेसिफिक साइज का उसमें पेबल्स और वो सारा कुछ भर के वो कोई भी आपको वाटर वाले एक्सपर्ट इस चीज में हेल्प कर सकते हैं। एंड यह बहुत छोटी सी जगह में भी हो सकता है। अगर आपकी एरिया एक एक्वाफर के आसपास है तो आप छोटा सा वो डाल के अपने पूरे एरिया का आसपास का वाटर रिचार्ज कर सकते हो विदाउट एनी मेजर कॉज सो दिस इज एन इंपॉर्टेंट सस्टेनेबल एक्टिविटी ओ इज इट लॉन्ग टाइम शल वी टेक अ ब्रेक

55:40 ओ ओके मैम एवरीबडी ड्राइविंग ओके मैम ओके मैम ओके ओके मैम सो 10 मिनट्स में 10 मिनट्स में 4 ओ क्लॉक मिले दोबारा ओके मैम मैम जी मैम ठीक है यस मैम ओके थैंक यू थैंक यू मैम हम्म। आ गया।

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