71st BPSC | Complete Bihar Economy 2025 | Budget, Survey, Agriculture, Industry, Minerals & Energy

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो 71वीं बीपीएससी परीक्षा के लिए बिहार की अर्थव्यवस्था पर केंद्रित है, जिसमें बिहार आर्थिक सर्वेक्षण, बजट, कृषि, उद्योग, खनिज, ऊर्जा और परिवहन जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। वीडियो में नवीनतम आंकड़ों और सरकारी योजनाओं पर जोर दिया गया है, जो परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।

मुख्य बातें:

  • बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 और बिहार बजट 2025-26 का विश्लेषण।
  • कृषि उत्पादन, उत्पादकता और संबंधित सरकारी योजनाएं।
  • बिहार में खनिज संसाधनों का वितरण और ऊर्जा क्षेत्र का विकास।
  • परिवहन और कनेक्टिविटी में सुधार के लिए सरकारी पहल।

परिचय

इस वीडियो में बिहार की अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी, जिसमें बिहार आर्थिक सर्वेक्षण, बिहार बजट, कृषि, उद्योग, खनिज, ऊर्जा और परिवहन शामिल हैं। यह जानकारी 71वीं बीपीएससी परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें हर साल अपडेट होते रहते हैं।

बिहार आर्थिक सर्वेक्षण

बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 को 28 फरवरी 2025 को बिहार के वित्त मंत्री श्री सम्राट चौधरी ने पेश किया। यह राज्य का 19वां आर्थिक सर्वेक्षण है, जिसकी शुरुआत 2006-07 में हुई थी। 2023-24 में बिहार की विकास दर 9.2% रही। प्राथमिक क्षेत्र का जीवीए में योगदान 19.9% है, जबकि भारत का 16.6% है। द्वितीयक क्षेत्र में बिहार का योगदान 21.5% और भारत का 28.7% है। तृतीयक क्षेत्र में बिहार का 58.6% और भारत का 54.6% योगदान है। रोजगार में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक है, इसलिए बिहार को कृषि प्रधान राज्य कहा जाता है।

राजस्व और व्यय

भारत का राजस्व प्राप्तियां 34 लाख करोड़ और राजस्व व्यय 39 लाख करोड़ है। पूंजीगत प्राप्तियां 16 लाख करोड़ और पूंजीगत व्यय 11 लाख करोड़ है, जिसमें 15 लाख करोड़ की उधारी शामिल है। बिहार में राजस्व प्राप्तियां 199347 करोड़ और राजस्व व्यय 199014 करोड़ है। पूंजीगत प्राप्तियां 60313 करोड़ और पूंजीगत व्यय 61568 करोड़ है। बिहार में राजस्व अधिशेष 2833 करोड़ है।

प्रति व्यक्ति आय और आर्थिक विकास

बिहार में सबसे अधिक प्रति व्यक्ति आय पटना में ₹121396 है, उसके बाद बेगूसराय और मुंगेर का स्थान है। सबसे कम प्रति व्यक्ति आय शिवहर में ₹19561 है। बिहार भारत का दूसरा सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य है। बिहार की वर्तमान मूल्य पर जीडीपी 854229 है और स्थिर मूल्य पर 464540 है। बिहार में प्रति व्यक्ति आय वर्तमान मूल्य पर ₹66828 और स्थिर मूल्य पर ₹36313 है, जो भारत से काफी कम है। चावल उत्पादन में 21% और गेहूं उत्पादन में 10.7% की वृद्धि हुई है।

कृषि और उद्योग

कृषि में निवेश को बढ़ावा देने के लिए एग्री इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी शुरू की गई है, जिसमें मखाना, फल, सब्जी, मक्का, औषधीय पौधे, शहद और चाय शामिल हैं। औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 75,293.76 करोड़ का निवेश हुआ है। सूक्ष्म उद्योगों में निवेश 135% और रोजगार 107% बढ़ा है। बड़े उद्योगों में निवेश 131% और रोजगार 187% बढ़ा है। खनन क्षेत्र की विकास दर 9% है।

तृतीयक क्षेत्र और बुनियादी ढांचा

जीवीए में तृतीयक क्षेत्र का योगदान सबसे अधिक 58.6% है, लेकिन रोजगार सबसे ज्यादा प्राथमिक क्षेत्र से आता है। ग्रामीण पक्की सड़कें 2005 में 835 किमी से बढ़कर 2025 में 1.17 लाख किमी हो गई हैं। परिवहन क्षेत्र में विकास दर 7.6% है, जो भारत में तीसरा सबसे अधिक है। सड़क घनत्व 3167 किमी है, जो भारत में तीसरा सबसे अधिक है।

डिजिटल गवर्नेंस और ऊर्जा

डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए सीसीटीएनएस, सीएमसीएफएमएस और ई-चालान सिस्टम लागू किए गए हैं। प्रति व्यक्ति ऊर्जा खपत 2012-13 में 134 किलोवाट आवर से बढ़कर 2023-24 में 363 किलोवाट आवर हो गई है। सबसे ज्यादा बिजली खपत वाले जिले पटना, गया, मुजफ्फरपुर, रोहतास और नालंदा हैं।

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक क्षेत्र

स्वयं सहायता समूहों (एसएसजी) को 46,900 करोड़ का ऋण दिया गया है, जिससे 21.98 लाख एसएसजी को लाभ हुआ है। ग्रामीण महिलाओं की श्रम बल भागीदारी 24.8% से बढ़कर 33.5% हो गई है, जबकि शहरी महिलाओं की 13% से बढ़कर 18% हो गई है। पिछले 18 वर्षों में शिक्षा पर खर्च 10 गुना और स्वास्थ्य पर 13 गुना बढ़ा है। बाल कल्याण बजट में 19.4% की वृद्धि हुई है।

बिहार बजट 2025-26

बिहार बजट 2025-26 को 3 मार्च 2024 को वित्त मंत्री सम्राट चौधरी ने पेश किया। कुल बजट 31644 करोड़ है, जो पिछले वर्ष से 13.69% अधिक है। कुल आय 31794 करोड़ अनुमानित है। राजकोषीय घाटा जीएसडीपी का 2.98% है, जो एफआरबीएम सीमा के भीतर है। राजस्व घाटा जीएसडीपी का 0.80% है।

व्यय और राजस्व स्रोत

कुल व्यय में से 36% योजना आइटम पर और 63% गैर-योजना आइटम पर खर्च किया जा रहा है। पूंजीगत व्यय 64894 करोड़ है, जिसमें से 40531.84 करोड़ सामान्य, सामाजिक और आर्थिक सेवाओं पर खर्च हो रहा है। राज्य सरकार का अपना कर राजस्व 18.77% है। केंद्र सरकार से करों में हिस्सा सबसे ज्यादा मिलता है। सबसे ज्यादा खर्च सामाजिक सेवाओं पर हो रहा है।

वित्तीय आयोग और बजट आवंटन

15वें वित्त आयोग ने राज्य आपदा राहत कोष और पंचायती राज के लिए राशि आवंटित की है। सबसे ज्यादा बजट शिक्षा विभाग को आवंटित किया गया है, जो कुल बजट का 19.24% है। योजनाओं में समग्र शिक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च किया जा रहा है।

बुनियादी ढांचा और सामाजिक पहल

बुनियादी ढांचे और ग्रामीण विकास के लिए 15586 करोड़ आवंटित किए गए हैं। महिला सशक्तिकरण के लिए पटना में महिला हाट और हर जिले में पिंक टॉयलेट बनाए जा रहे हैं। बेगूसराय में नया कैंसर अस्पताल और 100 से अधिक ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र खोले जाएंगे। ओबीसी और ईबीसी छात्रों की छात्रवृत्ति को दोगुना कर दिया जाएगा।

बिहार में कृषि

बिहार एक मैदानी राज्य है, जहाँ 96% क्षेत्र में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। कृषि और संबद्ध गतिविधियों का बिहार की अर्थव्यवस्था में 20.2% योगदान है। 2023-24 में चावल का उत्पादन सबसे ज्यादा हुआ है। चावल, गेहूं और मक्का के उत्पादन में वृद्धि हुई है।

उत्पादन और उत्पादकता

चावल का उत्पादन सबसे ज्यादा रोहतास में होता है। गेहूं का उत्पादन भी रोहतास में सबसे ज्यादा होता है। मक्का का उत्पादन पूर्णिया में और दालों का पटना में सबसे ज्यादा होता है। मखाना उत्पादन में बिहार पहले स्थान पर है, जो कुल उत्पादन का 85% है।

जैविक खेती और उर्वरक

गंगा के किनारे 13 जिलों में जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। सबसे ज्यादा उर्वरक की खपत पूर्णिया में है, जबकि रासायनिक उर्वरक की खपत रोहतास में सबसे ज्यादा है। किशनगंज में चाय विकास योजना शुरू की जा रही है।

फल उत्पादन और कृषि कर्मण पुरस्कार

केला का उत्पादन भागलपुर में, अमरूद का रोहतास में, लीची का मुजफ्फरपुर में और आम का दरभंगा में सबसे ज्यादा होता है। बिहार को कृषि में बेहतर प्रदर्शन के लिए पांच बार कृषि कर्मण पुरस्कार मिला है।

कृषि रोड मैप और जीआई टैग

बिहार में कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए तीन रोड मैप बनाए गए हैं। चौथा रोड मैप 2023 से 28 तक चल रहा है, जिसका फोकस जलवायु अनुकूल कृषि, आधुनिकीकरण, नवाचार और सतत प्रथाओं पर है। मधुबनी चित्रकला, सिक्की घास, सूजनी कढ़ाई, भागलपुरी सिल्क, सिलाव खाजा, जरदालू आम, कतरनी चावल, मगही पान, शाही लीची, मिथिला मखाना और मरचा धान को जीआई टैग मिला है।

सिंचाई और पशुपालन

बिहार में सिंचित क्षेत्र 56.97 लाख हेक्टेयर है। सबसे ज्यादा सिंचित जिला रोहतास है और सबसे कम शिवहर। नलकूप से सबसे ज्यादा सिंचाई समस्तीपुर में होती है, नहरों से रोहतास में और तालाबों से दरभंगा में। बिहार में कुल पशुधन की संख्या 365.4 लाख है। सबसे ज्यादा गाय पूर्णिया में पाई जाती हैं।

खनिज संसाधन

झारखंड विभाजन के बाद बिहार में खनिज संसाधनों का प्रतिशत कम हो गया है। मुख्य खनिज क्षेत्र दक्षिणी बिहार में स्थित हैं। लाइम स्टोन और पायराइट रोहतास में, क्वाडजाइट मुंगेर में, चीनी मिट्टी भागलपुर, बांका और मुंगेर में, अभ्रक नवादा, गया, जमुई और मुंगेर में, सोना जमुई में और शोरा सारण में पाया जाता है।

ऊर्जा क्षेत्र

बिहार में थर्मल पावर का हिस्सा 67.2% और नवीकरणीय ऊर्जा का 32.8% है। प्रति व्यक्ति बिजली उपभोग 363 किलोवाट आवर है। सबसे ज्यादा बिजली खपत पटना में है। बिहार में पांच ऊर्जा प्राधिकरण हैं। बाढ़, बरौनी, बक्सर, कांटी और नवीनगर में प्रमुख थर्मल पावर प्लांट स्थित हैं।

जल विद्युत परियोजनाएं और उद्योग

बिहार में 13 जल विद्युत परियोजनाएं हैं, जिनकी कुल क्षमता 54.3 मेगावाट है। कोसी जल विद्युत केंद्र सबसे ज्यादा उत्पादन करता है। बिहार में उद्योगों का योगदान जीडीपी में 21.5% है। कृषि आधारित उद्योग प्रमुख हैं।

उद्योग और सरकारी कंपनियां

पहला चीनी मिल 1904 में सारण में स्थापित किया गया था। वर्तमान में बिहार में 11 चीनी मिल हैं। जूट उद्योग के लिए पूर्णिया, कटिहार और दरभंगा महत्वपूर्ण जिले हैं। भागलपुर रेशमी वस्त्रों के लिए प्रसिद्ध है। केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित सरकारी कंपनियां बिहार में स्थित हैं।

परिवहन

बिहार में राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 6130 किमी है, जो सबसे ज्यादा पटना में है। राज्य राजमार्ग की लंबाई 3637 किमी है, जो सबसे ज्यादा गया में है। बिहार से चार मेगा एक्सप्रेसवे गुजरते हैं। रोड डेंसिटी 3167 किमी है।

रेलवे और जलमार्ग

बिहार में चार रेल मंडल हैं। हाजीपुर में पूर्व मध्य रेलवे का मुख्यालय है। पटना मेट्रो परियोजना का पहला चरण दानापुर से खिमनीचक तक है। बिहार से कई राष्ट्रीय जलमार्ग गुजरते हैं, जिनमें सबसे लंबा जलमार्ग गंगा नदी पर है।

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Transcript

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0:03 नमस्कार साथियों और एडटरिया में आप सभी का स्वागत है। आज हम 71 बीपीएससी के लिए एक बहुत ही इंपॉर्टेंट टॉपिक पर बात कर रहे हैं। यह टॉपिक इसलिए भी इंपॉर्टेंट है क्योंकि इसमें हर साल जो है वह कुछ अपडेट आपको देखने को मिलता है। बिना अपडेट का यह टॉपिक जो है वह बिल्कुल भी इररेिलेवेंट है और परीक्षा में आपसे अपडेटेड चीज पूछा जाएगा और जो भी आपको बुक्स मिलता है वह सामान्य तौर पर अपडेटेड नहीं रहता। था वह पिछले साल का ही रहता है। तो यहां पर जो है वह आपको कंप्लीट बिहार इकॉनमी मैं पढ़ाऊंगा जिसके तहत मैं आपको बिहार इकोनॉमिक सर्वे बिहार बजट फिर एग्रीकल्चर इंडस्ट्री मिनरल्स एनर्जी और ट्रांसपोर्ट यह सारा जो इकॉनमी का पोर्शन है बिहार का यह सारा कुछ

0:50 जो होगा वो इकोनमिक रेलेवेंट ही होगा। तो इकॉनमी रेलेवेंट ही चीजें पढ़ाई जाएगी और वह भी बिहार से संबंधित चीजें ही पढ़ाई जाएंगी। ठीक है? तो आप इस वीडियो को ध्यान से पढ़िएगा, ध्यान से सुनिएगा और जो भी आपको पीडीएफ की बात है तो वह सारा पीडीएफ जो है वो आपको एडिटोरिया के टेलीग्राम चैनल पर मिल जाएगा। तो अब हम लोग शुरू करेंगे बिहार के पूरी इकोनॉमिक की इस क्लास को। ठीक है? चलिए उसमें सबसे पहले हम बिहार इकोनॉमिक सर्वे पढ़ेंगे। करते हैं। चलिए तो देखिए सबसे पहला जो यहां पर आपको दिख रहा है कि बिहार इकोनॉमिक सर्वे जो है वह प्रेजेंट किया गया बिहार के फाइनेंस मिनिस्टर के द्वारा 28 फरवरी 2025 को। तो 28 फरवरी 2025 को बिहार का इकोनॉमिक सर्वे

1:38 बिहार के फाइनेंस मिनिस्टर श्री सम्राट चौधरी जी के द्वारा जो है वह टेबल किया गया। ठीक है? अगर यह देखा जाए तो यह राज्य का 19वां यानी 19वां जो है वह आर्थिक सर्वेक्षण है। पहला आर्थिक सर्वेक्षण जो है वह 20067 में स्टार्ट किया गया था। पहला वाला जो था वह 20067 में शुरू किया गया था। अगला हम थोड़ा सा देखें कि बिहार इकोनॉमिक सर्वे में कुछ हम लोग डाटा देखते हैं। तो एक तीनचार स्लाइड्स जो होगा वो डाटा का होगा। उसके बाद जो है फिर हम लोग नॉर्मल बातों को देखेंगे। तो यह डाटा आपको याद रखना है। जैसे अगर देखा जाए तो ग्रोथ रेट जो है 2023-24 में वह लगभग 9.2% का जो है वह ग्रोथ रेट रहा है। अगर हम शेयर देखें

2:25 ठीक है? जीवीए में जीवीए का मतलब होता है जीडीपी और जीवीए में बेसिक डिफरेंस यह है कि जीवीए में जब आप इनडायरेक्ट टैक्स और सब्सिडी को जोड़ेंगे और घटाएंगे मतलब जब टैक्स को जोड़ देंगे इनडायरेक्ट टैक्स को और सब्सिडी को अगर घटा देंगे तो उसके बाद जो बचेगा दैट विल बी जीडीपी। ठीक है? तो जीडीपी और जीवीए में अंतर जो है वह वही इनडायरेक्ट टैक्स वाला पोर्शन का होता है। तो जीवीए में जो कंट्रीब्यूशन देखते हैं सेक्टर वाइज तो 19.9% प्राइमरी सेक्टर में है। जबकि इंडिया का कंट्रीब्यूशन प्राइमरी सेक्टर में 16.6 है जिसके अंतर्गत एग्रीकल्चर फॉरेस्ट्री ये सब आता है। सेकेंडरी सेक्टर में जो कंट्रीब्यूशन है वह बिहार का 21.5 है और इंडिया का 28.7 है। टर्शरी सेक्टर में अगर हम कंट्रीब्यूशन देखते हैं तो बिहार का 58 6

3:12 है और इंडिया का 54.6 है। तो अगर देखें तो बिहार से ऊपर जो है वह इंडिया एक ही सेक्टर में है। दैट इज सेकेंडरी सेक्टर और हमारा सेकेंडरी सेक्टर इसलिए भी फल फूल नहीं पाता क्योंकि एक तो हमारे से मिनरल्स जो है वो झारखंड में चले गए। हमारे पास दो-3% का ही मिनरल्स बचा और दूसरा हमारा जो है वो लैंड लॉक्ड स्टेट है। हालांकि हम ड्राई पोर्ट वगैरह बेहटा में बना रहे हैं। इस प्रकार का कुछ कंट्रीब्यूशन हमारा जीवीए में है। अगर हम जीडी एंप्लॉयमेंट में कंट्रीब्यूशन देखें तो हालांकि जब आप जीडीपी या जीवीए में कंट्रीब्यूशन देखेंगे तो बिहार का प्राइमरी सेक्टर सबसे कम कंट्रीब्यूट करता है। लेकिन एंप्लॉयमेंट में बिहार का ही प्राइमरी सेक्टर जो है वह सबसे ज्यादा कंट्रीब्यूशन करता है। और इसीलिए हम कहते हैं कि बिहार इज अ एग्री स्टेट या फिर एग्रीकल्चर का स्टेट बिहार है। सेकेंडरी

4:00 सेक्टर में जो एंप्लॉयमेंट है वो 23.6 है और टर्शरी सेक्टर में 22.2 है। वहीं इंडिया का देखें तो प्राइमरी सेक्टर 46.3 है। सेकेंडरी सेक्टर 24 है और टर्शरी सेक्टर जो है वह 29.7 है। तो यहां पर इंडिया जो है वह सेकेंडरी और टर्शरी दोनों में बिहार से ज्यादा है। तो जीवीए के अगर हम कंपैरिजन करें तो इंडिया जो है वह केवल सेकेंडरी में ज्यादा है। लेकिन अगर एंप्लॉयमेंट में कंपैरिजन करें तो इंडिया सेकेंडरी और टर्शरी दोनों में ज्यादा है। क्योंकि बिहार जो है वह केवल और केवल अगर देखें तो एग्रीकल्चर पर ही जो है उसमें ज्यादा एंप्लॉयमेंट दिया हुआ है बिहार में। इसके अलावा अगर हम इंडिया का यह हम इंडिया का बजट देख रहे हैं। ध्यान रखेंगे यह वाला जो जो स्लाइड है दैट इज़ फॉर इंडिया। तो अगर हम इंडिया की बात करें तो इंडिया में

4:47 जो रेवेन्यू रिसीप्ट है वह 34 लाख करोड़ है। जो रेवेन्यू एक्सपेंडिचर है वह 39 लाख करोड़ है। जो कैपिटल रिसीप्ट है वह 16 लाख करोड़ है और जो कैपिटल एक्सपेंडिचर है वह 11 लाख करोड़ है। इसमें से अगर उधारी की बात करें तो यह लगभग 15 लाख करोड़ जो है वह उधारी है। यह इंडिया का बजट की बात है। ठीक है? अगर हम बिहार का यही वाला पोर्शन देखें यही वाला पोर्शन बिहार का तो बिहार में जो है वह क्या एस्टेटेड है इसको अगर हम कैलकुलेट करें तो देखिए बिहार में जो है वह 199347 करोड़ रेवेन्यू रिसीप्ट है। रेवेन्यू एक्सपेंडिचर जो है वह 199014 करोड़ है। फिर कैपिटल रिसीप्ट जो है वह 60313 करोड़ है और कैपिटल एक्सपेंडिचर जो

5:34 है वह 61568 करोड़ है। तो इस प्रकार से बिहार और इंडिया के बीच का जो कंपैरिजन है वह भी आपको ध्यान में रखना है और यह जो बात है यह 2023-24 की बात है। यह जो बात है वह 2023-24 की बात है। इसको जो है वो हम ध्यान में रखेंगे। यह 2023-24 की बात है और यह जो है वह इकोनॉमिक सर्वे ने बताया है। इकोनॉमिक सर्वे होता 24-25 का है लेकिन वह जो डाटा देता है मेनली वो 2324 का या उससे पहले का भी डाटा देता है। ठीक है? क्योंकि देखिए 24-25 का तो इकोनॉमिक सर्वे है। लेकिन जब पेश हो रहा है फरवरी के महीने में तो उस समय 24-25 कंप्लीट नहीं हुआ है। क्योंकि 24-25 कंप्लीट कब होगा? 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 तक।

6:19 और पेस कब हो गया? 28 फरवरी 2025 को। तो पहले ही एक पेस हो जाता है। इसलिए हम 2425 का एग्जैक्ट डाटा जो होता है वह हम नहीं दे पाते हैं। ठीक है? तो इस चीज को थोड़ा सा ध्यान में रखना है। और यह जो है बजट ये मैंने जो इंडिया के लिए बताया है ये 2025-26 का ये इंडिया से मैंने थोड़ा सा कंपेयर कर दिया। यहां पर आप देखेंगे तो रेवेन्यू रिसीप्ट जो है और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर जो है इसमें खर्चा कम है और जो रिसीट है वह ज्यादा है। मतलब इनकम ज्यादा है और खर्चा कम है। इसीलिए यहां पर रेवेन्यू सरप्लस आपको 2833 करोड़ का दिखता है और यह सारा जो आंकड़ा है यह इंडियन रूपीस में है। जैसे रुपीस ₹11568 करोड़ ₹313 करोड़ ऐसा। तो यह जो है यहां पर हमने टोटल

7:05 जो है वह उसके बारे में हमने देख लिया जिसके बारे में हमने बात किया। ठीक है? अगर हम आउटस्टैंडिंग डे टोटल डेप्ट यानी टोटल अगर हम सरकार की उधारी की बात करें तो लगभग 332741 करोड़ सरकार की कुल उधारी है। इसके बाद अगर हम हाईएस्ट पर कैपिटा जीएसडीपी यानी हम प्रति व्यक्ति आय की बात करें तो बिहार में सबसे ज्यादा आय जो है वह पटना में है। उसके बाद बेगूसराय में है और उसके बाद मुंगेर में है और पटना का वैल्यू भी आपको ध्यान रखना है। ₹121396 और यह ईयरली होता है। यानी एक साल में औसतन जो है वह पटना के लोग इतना कमाते हैं। सबसे कम शिवहर का है जहां पर ₹1561 जो है वह उनका इनकम है। ठीक है? तो ₹121396

7:52 पटना में और सबसे कम 19561 लेकिन आपसे जो है ना वो तीन-तीन का क्रम याद रखना है। वैल्यू जो है वो पहला वाला का याद रखना है। लेकिन क्रम जो है वो तीन-तीन का इसलिए याद रखना है क्योंकि यह जो क्रम होता है ना यह आपसे ऑर्डर में पूछ सकता है और परीक्षा में पूछा भी गया है। इसलिए अब यहां पर देखिए इकोनॉमिक सर्वे कहता है कि बिहार जो है वह सेकंड फास्टेस्ट ग्रोइंग स्टेट है इंडिया का। तो बिहार इज अ सेकंड फास्टेस्ट ग्रोइंग स्टेट। अगर बिहार की करंट प्राइस में जीडीपी देखें। करंट प्राइस का मतलब होता है जिसमें महंगाई शामिल होती है। और कांस्टेंट प्राइस का मतलब होता है जिसमें महंगाई को हटा दिया जाता है। यानी महंगाई को एडजस्ट कर दिया जाता है। तो 85429 है और कांस्टेंट में 464540

8:38 है। अब आप कहेंगे सर कांस्टेंट वाला कम क्यों है? करंट वाले से क्योंकि करंट वाले में हम इनफ्लेशन को शामिल करते हैं तो उसका वैल्यू भी जुड़ता है जिसके कारण वैल्यू थोड़ा सा ज्यादा दिखता है। ग्रोथ रेट अगर हम करंट प्राइस से तुलना करें तो ग्रोथ रेट मतलब पिछले साल का ग्रोथ रेट मतलब अगर बात कर रहे हैं अगर हम ये 23 24 का आंकड़ा है तो अगर हम 2324 को पिछले साल से कंपेयर कर रहे हैं 22 23 से तो करंट प्राइस से करंट प्राइस का कंपैरिजन है। मतलब इस वैल्यू से पिछले साल के इस वैल्यू का कंपैरिजन है। तो अगर देखें तो 14.5 है और यह जो है वह 9.2% है। अगर हम कॉन्स्टेंट प्राइस की बात करें तो और यह जो है ना यह आपके जो आपके पास जो बुकलेट बुक है उसमें भी जो है ना यह वैल्यू दिया हुआ है। जो आपने किताब पढ़ा है एडिटोरिया

9:24 वाला उसमें भी जो है ना यह वैल्यू दिया हुआ है। तो ये सारे वैल्यू जो है वो 2023-24 के दिए हुए हैं। यह ध्यान रखना है। ठीक है? पर कैपिटा इनकम जो है वह कितना है? पर कैपिटा इनकम तो ऑन एन एवरेज पूरे बिहार का करंट प्राइस पर 66828 है और कास्टेंट प्राइस पर 3633 है और यह दोनों अगर देखें तो इस दोनों मामले में यह बिहार जो है वह इंडिया से काफी पीछे है। काफी पीछे अगर हम इंडिया का देखें अगर करंट प्राइस तो यह लगभग कितना है? करंट प्राइस पर अगर हम पर कैपिटा इनकम देखें तो यह लगभग 184205 है और अगर हम कास्टेंट प्राइस पर अगर हम पर कैपिटा इनकम इंडिया में देखें तो यह

10:09 ₹16744 है तो काफी कम है और बाद बाकी आपको रिचेस्ट और पटना और पुरेस्ट सीवर जो है वह मैंने ऑलरेडी आपको बता दिया है। ठीक है? राइस प्रोडक्शन में 21% का इजाफा हुआ है। वीट प्रोडक्शन में 10.7% का लाइव स्टॉक एंड फिशरीज की ग्रोथ की अगर बात करें तो 9.5% का जो है वह इजाफा हुआ है। ठीक है? राइस की प्रोडक्टिविटी में और प्रोडक्शन में दोनों में रोहतास आगे है। वीट की वीट का जो प्रोडक्शन है उसमें जो आगे है वह है रोहतास। लेकिन प्रोडक्टिविटी में जो आगे है वह है बेगूसराय। ठीक है? तो राइस और वीट में यह बेसिकली अंतर है। पर प्रोडक्टिविटी का मतलब पर हेक्टेयर प्रोडक्शन यानी एक हेक्टेयर में कितना प्रोडक्शन हो रहा है। सरकार ने एग्रीकल्चर

10:55 में इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए एग्री इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी स्टार्ट की है जो सात प्रोडक्ट के लिए है। मखाना, फ्रूट्स, वेजिटेबल, मेज, मेडिसिनल प्लांट्स, हनी, टी एटसेट्रा। इंडस्ट्रियल सेक्टर की बात करें तो इन्वेस्टमेंट लगभग 75,293.76 करोड़ का है। माइक्रो इंटरप्राइज यानी जो सूक्ष्म उद्योग होते हैं उसमें इन्वेस्टमेंट 135% बढ़ा है और एंप्लॉयमेंट जो है वो 107% बढ़ा है। बड़े वाले में अगर देखें तो इन्वेस्टमेंट 131% बढ़ा है और जो एंप्लॉयमेंट है वह 187% बढ़ा है। माइनिंग सेक्टर का ग्रोथ जो है वह 9% है। अगर हम टर्शियरी सेक्टर की बात करें तो 58.6% टर्शरी सेक्टर का सबसे ज्यादा कंट्रीब्यूशन है जीवीए में। यह हम लोगों

11:40 ने स्टार्टिंग के ही स्लाइड में देख लिया था कि टर्शरी सेक्टर का कंट्रीब्यूशन सबसे ज्यादा है। लेकिन रोजगार सबसे ज्यादा बिहार में प्राइमरी सेक्टर से आता है। 54% और सेकेंडरी का इतना है और टर्शियरी का इतना है। अगर हम सड़कों की बात करें सड़कों और कनेक्टिविटी की तो ग्रामीण पक्की सड़कें जो हैं वह 835 कि.मी. 2005 में ग्रामीण पक्की सड़कें थी जो बढ़कर के 1.17 लाख कि.मी. 2025 में हो गई। मतलब है कि रूरल रोड्स में भी जो है वह काफी आप में इसमें बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ठीक है? एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों का भी विस्तार जो है वह हो रहा है। जैसा अगर देखा जाए तो अगर हम ट्रांसपोर्टेशन की बात करें या फिर अगर हम एक्सप्रेसवे वगैरह को सोचते हैं तो हमारा जो ग्रोथ है उसमें वह 7.6% है जो लगभग

12:30 थर्ड हाईएस्ट है इंडिया में। उत्तर प्रदेश में जो है वह 10.1% बिहार में 7.6 और कर्नाटका में 7.7 तो ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन सेक्टर यानी जो नेशनल हाईवेज वगैरह का जो डेवलपमेंट हो रहा है वह कुछ इस प्रकार का है। रोड डेंसिटी यानी जो रोड घनत्व है कि 1000 स्क्वायर कि.मी. इलाके में कितना रोड है? कितना किलोमीटर? तो वह लगभग 3167 कि.मी. है। वह भी थर्ड हाईएस्ट है इंडिया में। अगर हम डिजिटल गवर्नेंस की बात करें ताकि लोगों को जो है वह सेवाएं भी डिजिटल मिल पाए। ऑनलाइन सेवाएं मिल पाए। गवर्नेंस अच्छा हो क्योंकि डिजिटल गवर्नेंस जो है वह अकाउंटेबिलिटी को मजबूत करता है। तो इसके लिए कुछ-कुछ टेक्नोलॉजी को जो है वह अपनाया गया है। जैसे क्राइम को कंट्रोल करने के लिए और ट्रैक करने के

13:16 लिए सीसीटीएनएस ठीक है? फाइनेंसियल मैनेजमेंट के लिए सीएम सीएफएमएस साइबर सेल और ईचलान सिस्टम मतलब ऑनलाइन चालान सिस्टम जो है वैसा सिस्टम लाया गया है ताकि प्रशासन को और अकाउंटेबल बनाया जाए। करप्शन को कम किया जाए। पहले जो होता था वह जो ट्रैफिक पुलिस वाला होता था वह अह ₹50 ₹100 में जो है वह लोग बिक जाते थे। ठीक है? कि भाई सिगरेट ला दो तो पान ला दो। लेकिन अब जो है वह ई चालान होगा। ऑनलाइन चालान सिस्टम जो है वह अब इसमें है। अगर हम एनर्जी सेक्टर की बात करें तो पर कैपिटा एनर्जी कंजमशन जो है वह 2012-13 में 134 किलोवाट आवर है और 2023-24 में 363 किलोवाट आवर है। टॉप इलेक्ट्रिसिटी की बात करें टॉप इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूमिंग डिस्ट्रिक्ट

14:01 सबसे ज्यादा जहां पर इलेक्ट्रिसिटी कंज्यूम होता है वह है पटना, गया, मुजफ्फरपुर, रोहतास और नालंदा। यह पांच जिलों हैं। पब्लिक यूटिलिटी सर्विस जैसे गैस का कनेक्शन, इलेक्ट्रिसिटी का कनेक्शन इसमें काफी इजाफा देखने को मिला है। और इसमें जो बढ़ोतरी देखने को मिली है, वह 14.5% की जो है वह बढ़ोतरी देखने को मिली है। ठीक है?

15:06 चलिए आगे देखते हैं। वुमेन एंपावरमेंट की बात करें अगर बिहार में तो सेल्फ हेल्प ग्रुप जिसको हम कहते हैं जिसमें एक जीविका भी सेल्फ हेल्प ग्रुप है जिसमें कुछ समूह होते हैं चाहे वो महिलाओं का हो पुरुषों का हो वो लोग आपस में एक ग्रुप बनाते हैं जिसमें वो लोग आपस में कुछ पैसों को जमा भी करते हैं अपने आप को रजिस्टर करते हैं और फिर उसमें से जिस भी सदस्य को जरूरत लगता है उनको कुछ पैसे दे भी देते हैं तो फॉर्म्ड हुआ कितना 10.63 लै क्रेडिट सपोर्ट यानी इनसे जो ऋण मिला है इनको जो एसएसजी को जो लोन प्राप्त हुआ है। वह लगभग 46,900 करोड़ 21.98 लाख एसएसजी को जो है वह सरकार ने ऋण सहायता इतने सारे एसएसजी को जो है वह दिया है। ठीक है? और इसके माध्यम से एक्चुअली क्या होता है? इसके माध्यम से जो है वह

15:53 वुमेन एंपावरमेंट होता है। ठीक है? तो लगभग 46,900 करोड़ 21.98 लाख जो एसएसजी है उनको दिया गया जिससे महिलाओं को जो है वह कहीं ना कहीं एंपावरमेंट मिला। ठीक है? डिपॉजिट लगभग इतना हुआ लोन इतना डिस्पर्स हुआ। क्रेडिट रेश्यो क्रेडिट डिपॉजिट रेश्यो का मतलब होता है कि अगर ₹100 मान लो जमा है तो उसमें कितना रुपया लोन में गया। ज्यादा भी चला जाएगा। ₹100 जमा हुआ पता चला ज्यादा लोन में दे दिया आप। सिर्फ ₹90 दे दिए तो फिर लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा फिर महंगाई कम भी जाएगा तब भी दिक्कत पता चला लोगों के हाथ में पैसे नहीं है तो बीच में होना चाहिए ये 80 85 के करीब तो ये 56.3 है थोड़ा सा कम है लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन अगर महिलाओं के लेबर फ़ में पार्टिसिपेशन को देखें तो रूरल वुमेन का

16:39 पार्टिसिपेशन 2022-23 से 2023-24 में बढ़ा है। पहले 24.8% था। अब 33.5 हो गया है। अर्बन वुमेन का पार्टिसिपेशन देखें तो वह 13 से 18 हो गया है। लगभग 14 से 18 यानी अगर देखा जाए तो अगर हम वुमेन को देखें या फिर मैन को देखें दोनों जो है ना वह इंडिया के एवरेज से दोनों का दोनों जो पार्टिसिपेशन है वह नीचे है। ठीक है? तो ये जो चीज है ये थोड़ा सा आपको ध्यान में रखना है। इसके अलावा अगर हम एजुकेशन सेक्टर की बात करें थोड़ा सा एजुकेशन सेक्टर को देख लेते हैं। तो लास्ट 18 इयर्स की अगर बात कर रहे हैं लास्ट 18 इयर्स की तो लास्ट अगर 18 इयर्स की बात कर रहे हैं और बात अगर एजुकेशन पे है

17:25 बात अगर एजुकेशन पे है तो 18 पिछले 18 सालों में जो एजुकेशन पर खर्च है वह 10 टाइम बढ़ गया है। 10 टाइम्स ठीक है? और अगर बात हम हेल्थ सेक्टर की कर रहे हैं। बात अगर हम हेल्थ सेक्टर की कर रहे हैं तो इसमें जो है वह लगभग 13 टाइम्स का इजाफा देखने को मिला है। 13 टाइम्स और अगर सोशल सर्विस की बात कर रहे हैं तो उसमें भी 13 टाइम्स। सोशल सर्विस का मतलब है जैसे मान लो महिलाओं के लिए कोई सेवा, दिव्यांगों के लिए कोई सेवा यह सब। इसमें 13 टाइम्स का इजाफा जो है वह देखने को मिला है। चिल्ड्रेंस के लिए जो बजट होता है चिल्ड्रंस के वेलफेयर के लिए जो बजट है वह 2013-14 में इसको शुरू किया गया

18:10 था और अगर देखा जाए तो 2016 से 23 में इसमें इसके बजट में 19.4% का ग्रोथ देखा गया है। तो चाइल्ड वेलफेयर बजट जिसको कहते हैं उसमें भी जो है वह 19.4% का का बढ़ोतरी हुआ है 16 से 23 में। यानी अगर 2016 में ₹100 खर्च होता था तो 2023 में 119.4 खर्च हो रहा है। इसको स्टार्ट किया गया था 2013 14 में। 2013-14 में जो है वह इसको स्टार्ट किया गया था। ठीक है? अब जो है वह हम लोग इतना ही आपको ध्यान रखना है। बहुत ज्यादा बिहार सर्वे में नहीं जाना है। नहीं तो इतना सारा डाटा है जो आप पागल हो जाएंगे। तो बिल्कुल काम की

18:57 जो चीज है उतना ही आपको ध्यान में रखनी है। अब आते हैं बिहार बजट 2025 26 में। ठीक है? अब देखा जाए तो बिहार बजट को प्रेजेंट किया गया था 3 मार्च 2024 को और इसको प्रेजेंट किया फाइनेंस मिनिस्टर सम्राट चौधरी ने जो है वह इसको प्रस्तुत किया। इसका जो टोटल बजट है वह 316895 यानी इतना जो है वह टोटल खर्च होगा। ठीक है? इनक्रीज यानी अगर हम पिछले साल से देखें तो पिछले साल से लगभग आपको कितना इनक्रीस देखने को मिल रहा है? तो 13.69% पिछले वर्ष से जो है वह बढ़ोतरी इसमें आपको दिख रही है। अगर हम ये देखें कि टोटल इनकम कितना है तो टोटल इनकम 31794 यह हमको प्राप्त होगा। यह जो है यह हमारा

19:45 वैसा इनकम है जो हमको प्राप्त होने वाला इनकम है। ठीक है? अब इसमें देखिए रेवेन्यू रिसीप्ट जो अभी मैंने तस्वीर आपको दिखाई थी तो वो 2600 831.44 करोड़ है। ठीक है? उसके बाद रेवेन्यू एक्सपेंडिचर जो है वह कितना है? रेवेन्यू एक्सपेंडिचर इतना है। तो देखिए दो पोर्शन होता है। दो खर्चा एक रेवेन्यू का खर्चा एक कैपिटल का मतलब रेवेन्यू खर्चा दो होता है। कैपिटल खर्चा भी दो होता है। तो रेवेन्यू खर्चा कैपिटल खर्चा रेवेन्यू इनकम कैपिटल इनकम चारों जो है वो दिया हुआ है। टोटल रेवेन्यू इनकम, कैपिटल इनकम, रेवेन्यू खर्चा, कैपिटल खर्चा। ये चारों इनकम और चारों खर्च जो है वो दिए हुए हैं। तो खर्चा जो है और रेवेन्यू अगर इन एक्सपेंडिचर देखें तो कितना है? 316895.02

20:32 करोड़। ठीक है? और इनकम जो है वो 31794.63 आपको जो है वह इसमें क्या दिखेगा देखिए इसमें जो फिजलल डेफिसिट है वह लगभग 32718.31 करोड़ है जो कि जीएसडीपी का 2.98% है। अब देखिए स्टेट की जीडीपी का 2.98% है। एफआरबीएम एक लॉ है। कानून है फिस्कल रिस्पांसिबिलिटी बजट मैनेजमेंट एक्ट। एफआरबीएम कहता है कि भैया बहुत ज्यादा सरकार जो है वो इतना भी ज्यादा खर्च ना कर ले कि सरकार का जो खर्चा है वह बहुत ज्यादा हो जाए और घाटा बहुत ज्यादा हो जाए। तो एफआरबीएम का लिमिट जो है वो 3% है। बिहार उससे जो है वह कम है। तो बिहार अभी लिमिट में ही है। रेवेन्यू डेफिसिट। रेवेन्यू डेफिसिट का मतलब होता है यह

21:19 रेवेन्यू इनकम और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर। इसमें जो डेफिसिट है आपको लग भी रहा होगा 2 52 है 260 है तो लगभग ये 8831.18 करोड़ का है जो कि जीएसडीपी का80 है। अगर प्राइमरी डेफिसिट की बात करें तो प्राइमरी डेफिसिट है 9704.37 करोड़। तो प्राइमरी डेफिसिट का फार्मूला क्या होता है? फीजल डेफिसिट माइनस इंटरेस्ट पेमेंट। अब देखेंगे तो थोड़ा सा इसका फार्मूला जो है वह मैं यहां से आपको दिखाने की जो है वह थोड़ा सा कोशिश करता हूं। यहां से जो है वह थोड़ा सा मैं आपको दिखाने की कोशिश करता हूं। यहां पर आपको फार्मूला जो है वह दिखेगा। यह देखिए।

22:14 यह देखिए प्राइमरी डेफिसिट का मतलब होता है फिजलल डेफिसिट यानी जो सरकार का टोटल अगर देखें तो उधार या टोटल जो घाटा है उसमें से इस वाले पोर्शन को घटा दिया जाता है इंटरेस्ट पेड तो फिजलल डेफिसिट माइनस इंटरेस्ट पेड इज़ द प्राइमरी डेफिसिट। अब आप कहोगे इंटरेस्ट पेड क्यों घटाया जाता है सर? तो अगर हमको वर्तमान सरकार की नीतियों को समझना है तो हमको तो ये घटाना पड़ेगा ना क्योंकि वर्तमान सरकार अगर इंटरेस्ट पे कर रही है तो पिछले वाले सरकारों का जो लोन है उसका भी तो पे कर रही है तो हम अपने घाटे में से पिछले वाले सरकार को जो के चलते जो हम इंटरेस्ट पे कर रहे हैं उसको हम घटा देते हैं। तो जो बचता है वह है प्राइमरी डेफिसिट। इससे वर्तमान सरकार की नीतियों का पता चलता है। ठीक है? और यह जो है मनमोहन सिंह के द्वारा इस कांसेप्ट को लाया गया था। तो यह जो है यह कितना है लगभग? यह अगर देखा जाए तो यह है

23:01 97.704.37 करोड़। ठीक है? अगर हम बिहार के जीएसडीपी को देखें यानी ग्रॉस स्टेट डोमेस्टिक प्रोडक्ट तो लगभग कितना था? तो अगर देखा जाए तो यह 1097264 करोड़ था। 2024-25 में 976517 करोड़ था। ठीक है? तो यह बिहार की जीएसडीपी है। मतलब यह 204-25 का और 2526 का। हालांकि 24-25 उस समय पूरे तरीके से एग्जैक्ट वैल्यू तो नहीं है। टोटल अगर हम एक्सपेंस देखें तो 316895 है। ये भी आपने देखा कि ये जो टोटल एक्सपेंस है अगर हम रेवेन्यू और कैपिटल दोनों को मिला दें तो 316895 है। अब इस वाले एक्सपेंस में से

23:46 कितना एक्सपेंस हो रहा है? यह भी मेन है। तो इस वाले एक्सपेंस में से प्लान आइटम पर 116759 है। यानी टोटल जो व्यय है 316 का टोटल व्यय का 36% यानी लगभग 37% जो है वह हम प्लान आइटम में खर्च कर रहे हैं। ठीक है? यानी पिछले वर्ष से देखा जाए तो 16759 करोड़ ज्यादा प्लान आइटम में और नॉन प्लान आइटम में जो हम खर्च कर रहे हैं वह है 2 लाख 135 मतलब 213542 करोड़ ठीक है तो 2135 एंड 42 करोड़ यानी यह बात स्पष्ट है कि 316 में आप ऐसे याद रखो 116 और दो ठीक है तो 36 में 116 और दो

24:32 16 प्लंड ती दो जो है वो नॉन प्लंड यानी 36% इधर है और 63% के करीब इधर है। यानी नॉन प्लान खर्चा जो है वह हम ज्यादा कर रहे हैं। अब सवाल उठता है प्लान और नॉन प्लान का मतलब क्या होता है? प्लान एक्सपेंडिचर का मतलब होता है जो कि वैसा खर्चा जो फाइव ईयर प्लांस पर बेस्ड होता था। नॉन प्लान का मतलब होता है जो फाइव ईयर प्लान से इतर है। अलग है। ठीक है? इस खर्चे का जो प्रयोग है इसका किस में करते हैं? डेवलपमेंट में, इन्वेस्टमेंट में। इसका जो खर्च होता है वो डे टू डे गवर्नमेंट का जो खर्चा होता है वैसा ठीक है इसमें पहले से ही प्लंड होता है और ये जो है वो पहले से ही इसमें प्लंड होता है इसमें से ऐसा कोई भी प्लान नहीं होता अचानक से कोई खर्च आ जाए वैसा खर्च है ठीक है यह जो है इसका पैसा कहां से आता है कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया से इसका पैसा

25:18 जो है वो कंटिंजेंसी फंड ऑफ इंडिया से यानी आकास्मिक निधि से आता है। इसका उदाहरण याद रखेंगे। बहुत इंपॉर्टेंट है। एनर्जी, वाटर, ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर ये सब प्लंड एक्सपेंडिचर में आते हैं। और डिफेंस, इंटरेस्ट, पेमेंट, पेंशन और एडमिनिस्ट्रेशन यह नॉन प्लान में आते हैं। रट्टा मारो जिंदाबाद। ये एग्जांपल को याद रख लेना है। यह हालांकि जो प्लंड और नॉन प्लैंड वाला जो बफरर्केशन है ना यह पहले था लेकिन इसको जो है वह अब खत्म कर दिया गया। सी रंगराजजन के सिफारिश के बाद इसको जो है वह 2016 में खत्म कर दिया गया है। तो यही प्लंड और नॉन प्लैंड है। तो यह खर्च है। तो ये हम लोगों ने सेंट्रल लेवल पर जो है वो खत्म कर दिया। बिहार अभी भी देता है इसका। पूंजीगत व्यय अगर हम देखें मतलब अगर हम कैपिटल एक्सपेंडिचर देखें तो कैपिटल एक्सपेंडिचर क्या है? जैसे आपने

26:05 यहां पर हमने देखा कि देखिए जैसे हमने टोटल खर्चा जो देखा 316895 तो ये 316895 है वह इसको और इसको मिला करके है। ठीक है? इसको और इसको जो है वह मिलाकर के है। उसमें से अगर हम देखें तो सामान्य सेवाओं पर कितना खर्च हो रहा है। यानी अगर हम यह वाला खर्च देख रहे हैं यह वाला कैपिटल एक्सपेंडिचर यह वाला और इसमें से हम अलग-अलग बफरर्केशन देख रहे हैं क्योंकि इसको और इसको मिलाकर के तो 316895 है। इसमें तो कोई डाउट नहीं है। अभी जो हमारा फोकस है वह केवल और केवल जो है वह इस पे है। ठीक है? इसमें कोई डाउट है किसी को? एक मिनट।

27:23 ठीक है। तो चलिए कैपिटल आउटले की बात कर रहे हैं तो 316895 टोटल खर्चा है यह वाला खर्चा और यह वाला खर्चा दोनों खर्च को मिला दिया गया है 317000 यह वाला खर्चा और यह वाला खर्चा अब बात है कैपिटल आउटले तो कितना-कितना खर्च हो रहा है तो अगर देखा जाए तो 40531.84 जो है वह इन तीन सेवाओं में आपको खर्च जो है वह देखने को मिलेगा। ठीक है? जैसे कॉमन सर्विज पर 5899, सोशल सर्विज पर 9369 और इकोनॉमिक सर्विज पर इतना यानी सबसे ज्यादा जो खर्च हो रहा है वह इकोनॉमिक सर्विज पर खर्च हो रहा है। अब समझते हैं ये तीनों का मतलब क्या है? जैसे ये 5000 है, ये 9,000 है, ये 25,000 है। टोटल 4ज़ जो इन सेवाओं पर खर्च हो रहा है और यह खर्चा कैपिटल

28:10 खर्च में शामिल है। ठीक है? कैपिटल खर्च में और भी शामिल है। यह खर्च भी कैपिटल में ही शामिल है। और भी खर्च कैपिटल में ही शामिल है। जैसे अगर हम कॉमन सर्विज की बात करें तो जो एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम में जो खर्च होता है जैसे पुलिस में, न्यायपालिका में अगर सोशल सर्विस की बात करें तो जनता की सामाजिक जरूरत जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य इन सब पर। अगर हम इकोनॉमिक सर्विज में बात करें जैसे कृषि, सिंचाई, ग्रामीण विकास, उद्योग इन सब पर। तो इसमें देखा जाए तो सबसे ज्यादा जो खर्च है वह इकोनॉमिक सर्विज पर ही है। ठीक है? तो देखिए सबसे मेन चीज याद रखना है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर के अंदर ही ये कैपिटल आउटले है। कैपिटल एक्सपेंडिचर टोटल कितना है? तो टोटल है 64894 करोड़। उसमें से 400 जो करोड़ है करीब वह जो खर्च होगा वह इन तीनों सर्विज में होगा। और भी खर्च है कैपिटल एक्सपेंडिचर

28:57 में। यह भी है। ठीक है? तो ये चीज थोड़ा सा ध्यान में रखना है। तो इन दोनों का जो बफरर्केशन है वह थोड़ा सा हमको ध्यान में रखना है। क्योंकि अगर हम रिसीव की बात करें तो जो हमको प्राप्ति हुई है तो प्राप्ति किससे होता है? एक इससे और एक इससे इन दोनों से जो प्राप्ति है वह 37 है और जो खर्चा है वह एक इससे है और एक इससे है। यह है 36 और उसमें भी लगभग 64 जो है वह यही है। जो बच गया वह यह होगा। अब देखिए कि जो पैसा है वह कहां से आता है और पैसा जो है वह कहां से जाता है। ठीक है? तो रुपीस कहां-कहां से आ रहा है और कहां-कहां जा रहा है। तो अगर हम स्टेट गवर्नमेंट का अपना टैक्स रेवेन्यू देखें

29:42 तो वह 18.77% है। नॉन टैक्स रेवेन्यू यानी देखिए यह कर है जो स्टेट गवर्नमेंट का जो अपना टैक्सेस होता है वो इसके अंतर्गत है। जैसे मान लो शराब पर मान लो लगाया। हालांकि बिहार में तो अब उससे नहीं है। तो स्टेट गवर्नमेंट का जो अपना टैक्स है वो इसके अंतर्गत आ गया। नॉन टैक्स यानी वैसा चीज जो टैक्स में नहीं है। जैसे अगर हम नॉन टैक्स रेवेन्यू की बात करें तो जैसे मान लेते हैं कि सेंटर जैसे मान लो पासपोर्ट शुल्क लेता है। इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी लेता है। ऐसा जो आप पे फाइन पेनाल्टी लगती है बहुत बार रोड पे चलते समय वो सब। ठीक है? तो सेंटर का वो सब नॉन टैक्स होता है। तो उस तरह से राज्य का भी नॉन टैक्स होता है। केंद्र सरकार से जो ग्रांट मिलता है जिसको वापस नहीं करना पड़ता है। स्टेट शेयर सेंट्रल टैक्सेस में जैसे मान लो डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्सेस में जो शेयर होता है स्टेट का जो फाइनेंस कमीशन डिसाइड करता

30:27 है और यह शेयर में सेस और सरचार्ज का पैसा शामिल नहीं होता। वह केवल और केवल केंद्र सरकार के पास ही रहता है। ठीक है? रिकवरी ऑफ लोंस और पब्लिक डेट जो जनता से उधारी है। तो सबसे ज्यादा जो है वह सेंट सेंटर का टैक्सेस से जो पैसा मिलता है वो बिहार को सबसे ज्यादा मिलता है। उसके बाद सरकार का अपना टैक्स रेवेन्यू है और फिर अगर देखा जाए तो सरकार जो जनता से बॉन्ड वगैरह के माध्यम से उधार लेती है वो है। ठीक है? इसके बाद अगर देखें तो पैसा सबसे ज्यादा खर्च कहां होता है? तो सबसे ज्यादा जो खर्च है वह कहां हो रहा है? यह देखिए। तो सबसे जो खर्च है वो सोशल सर्विज में हो रहा है। ₹100 में ₹39 यहीं हो रहा है। फिर जनरल सर्विज में और फिर इकोनॉमिक सर्विज में। तो अलग-अलग सर्विज में ही सबसे ज्यादा जो पैसा है वह बिहार सरकार का खर्च

31:12 होता है। तो इसको भी जो है वह हमको थोड़ा सा ध्यान में रखना पड़ेगा। ठीक है? इसको भी जो होगा वह थोड़ा सा ध्यान में रखेंगे। क्लियर है? यह जो डेटाज़ हैं ये थोड़ा सा आपको ध्यान में रखना चाहिए। ठीक है? और ये जो होगा ये रेवेन्यू रिसीप्ट और रेवेन्यू एक्सपेंडिचर है। तो यहां ध्यान देंगे ये रेवेन्यू जो होगा ना ये सरप्लस होगा। यह जो होगा वह रेवेन्यू सरप्लस है। सरप्लस होगा। क्यों? क्योंकि यह जो है ये दो 260 है। ये दो 52 है। तो ये प्लस होगा

32:00 तो रेवेन्यू सरप्लस होगा। इसको थोड़ा सा ध्यान रखना है। 8831.1831.18 तो ये जो है रेवेन्यू सरप्लस है। राजस्व घाटा नहीं राजस्व अधिशेष है क्योंकि रेवेन्यू खर्चा माइनस रेवेन्यू एक्सपेंडिचर जब आप निकालेंगे तो आपको निकल जाएगा। अब यहां देखा जाए तो 15th फाइनेंस कमीशन ने कितना राशि दिया है? स्टेट डिजास्टर रिलीफ फंड को कितना राशि आया है? पंचायती राज फॉर लोकल बॉडीज इतना आया है। मुनिसिपल बॉन्ड से इतना आया है। हेल्थ प्रोजेक्ट से इतना आया है। सेंट्रली स्पों्सर्ड स्कीम से इतना आया है। और सेंट्रल सेक्टर स्कीम से इतना आया है। तो यह सब जो राशि है यह सब राशि भी जो है वह इतना राशि जो है वह

32:47 बिहार को प्राप्त हुई है। 2025 26 में मतलब इतना राशि जो है वह प्राप्त होगी बिहार को एज अ ग्रांट एड। यह जो है ग्रांट का हिस्सा है। यह सारा जो है वह ग्रांट का हिस्सा है। इतनी राशि जो है वह 2025-26 में वह ग्रांट से बिहार को प्राप्त होगी। इतनी राशि इतना राशि जो रहेगा वह ग्रांट से मिलेगा बिहार को। यह चीज थोड़ा सा समझ के रखना है। अब अगर देखा जाए तो सबसे ज्यादा जो बजट है वह किसमें है? तो एजुकेशन विभाग में सबसे ज्यादा बजट है 6964 19.24% ऑफ़ द बजट जो है वह एजुकेशन डिपार्टमेंट में ही है। ठीक है? उसके बाद हेल्थ है, होम है, रूरल डेवलपमेंट है और

33:32 एनर्जी है। इसके बाद योजनाओं में अगर देखें तो सबसे जो खर्चा है वह समग्र शिक्षा में है 8939.21 करोड़। तो शिक्षा को बढ़ावा देने में समग्र शिक्षा। फिर मनरेगा में है 5392 करोड़ और फिर जो है वो सात निश्चय में है 5972 करोड़। तो ये चीज थोड़ा सा ध्यान में आपको रखना है। तो पहला तो समग्र शिक्षा है। दूसरा सात निश्चय है और तीसरा जो है वह है मनरेगा। तो क्रम में तीसरे नंबर पर जो है वह मनरेगा है। तो इसको भी ध्यान में थोड़ा सा रखने की आवश्यकता है। ठीक है? अब अगर देखें तो ओबीसी, ईबीसी, एससी, एसटी माइनॉरिटीज के लिए लगभग 13368 करोड़ खर्च किए जाएंगे। एससी एसटी जो 20%

34:18 है भारत बिहार में पॉपुलेशन उनके लिए 19648 करोड़ खर्च किए जाएंगे। स्टूडेंट स्कॉलरशिप जो है वह लगभग 3303 करोड़ का दिया जाएगा। तो यह सारा जो डाटा है ना इन सारे डेटों को याद रखने की आवश्यकता जो है वह नहीं है। देखिए इंफ्रास्ट्रक्चर और रूरल डेवलपमेंट में 15586 करोड़ एलोकेटेड है जिसका प्रयोग सड़क बिजली इन सब में किया जाएगा। महिला सशक्तिकरण के लिए पटना में महिला हट या महिला बाजार जो है वह बनाया जा रहा है। पिंक बसेस महिलाओं के लिए हर जिले में पिंक टॉयलेट की बात है। कन्या विवाह मंडप जो है हर पंचायत में बनाया जाएगा ताकि

35:05 गरीब बच्चियों का विवाह हो सके। बेगूसराय में नया कैंसर अस्पताल 100 प्लस ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र खोले जाएंगे और जो ओबीसी और ईबीसी स्टूडेंट्स का जो स्कॉलरशिप है उसको डबल कर दिया जाएगा। ₹1000 से ₹2000 प्रति मंथ जो है वह कर दिया जाएगा। तो यह जो था यह टोटल हमारा बजट और इकोनॉमिक सर्वे था। यहां पर एक चीज हमेशा ध्यान में रखिएगा कि आपको जो है वह स्टार्टिंग वाला जो स्टेट फाइनेंससेस का पोर्शन होता है स्टार्टिंग वाला बस उतना ही ध्यान में रखना है। इससे ज्यादा जो है वह आपको ध्यान में रखने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है। तो उससे ज्यादा आपको बिल्कुल ध्यान में रखना है। स्टार्टिंग वाला जो डाटा है जो मैंने यह वाला डाटा बताया है। बस इतना ही ध्यान में रखना है। यह वाला बहुत हुआ।

35:50 मतलब इधर वाला जो डाटा है वही सब ध्यान में रखने हैं। यह सब डाटा जो है वह थोड़ा सा ध्यान में रखना है। ठीक है? तो इस चीज को आपको ध्यान में दीजिएगा। अब बजट ऑफ बिहार के बाद हम लोग एग्रीकल्चर इन बिहार देखते हैं। बिहार में कृषि तो देखिए बिहार की जहां तक बात करें तो बिहार जो है वह एक मैदानी राज्य है। क्योंकि देखिए बिहार का अगर हम यह मैप देखते हैं तो उस मैप में आपको यह वाला जो पोर्शन है यह नॉर्थ वेस्ट का जहां पर सोमेश्वर वगैरह श्रेणी है। यह सदर्न प्लेटू का इलाका है। तो बीच वाला जो इलाका है वह मैदानी यानी प्लेन भाग है जो कि बिहार का लगभग 96% इलाका यही है। ठीक है? और यहां पर जो है वो एलुवियल सोइल मिलती है जिसके कारण यहां पर जो है वो फर्टिलिटी भी ज्यादा है, उर्वरता भी ज्यादा है। और इस कारण से अगर

36:37 आप देखते हैं तो आपको यह दिखेगा कि बिहार जो है वह एक एग्रीकल्चरल स्टेट है। तो बिहार जो है वह एक एग्रीकल्चरल स्टेट जो है वह आपको दिखाई पड़ेगा। ठीक है? क्लियर है? तो अब देखें तो यहां पर जैसे हम एग्रीकल्चरल कैपेसिटी को देख रहे हैं बिहार में तो टोटल क्रॉप नेट सोन। तो सबसे पहले नेट सोन समझते हैं। जैसे मान लीजिए कि एक 100 हेक्टेयर का लैंड है और इसमें जो है वह आप जो है वो कम से कम इस 100 हेक्टेयर के लैंड में एक बार खेती करते हैं। तो दैट 100 हेक्टेयर विल बी व्हाट? नेट सून। यानी वैसा इलाका जिसमें कम से कम एक बार खेती होती है। ठीक है? अब मान लीजिए कि अगर हम टोटल क्रॉप्ड या ग्रॉस क्रॉप्ड की बात करें तो ग्रॉस क्रॉप्ड का मतलब हो गया कि एक बार से ज्यादा खेती। तो

37:23 मान लेते हैं कि 100 हेक्टेयर में 75 हेक्टेयर में जो है 100 हेक्टेयर का यह खरीफ में खेती होती है और 50 हेक्टेयर में मान लेते हैं रबी फसल की खेती होती है। ठीक है? यानी 100 हेक्टेयर में एक सीजन में 75 हेक्टेयर, एक सीजन में 50 हेक्टेयर। तो टोटल कितना हो गया? तो 125 हेक्टेयर। दिस 125 हेक्टेयर इज़ नोन एज ग्रॉस क्रॉप। ग्रॉस क्रॉप का मतलब है कि उस भूमि में कितनी बार जो है वह खेती हो रही है। तो एक बार रबी में हुई, एक बार खरीफ में हुई। अब पूछ रहा है नेट इरीगेटेड एरिया वैसा एरिया जहां पर जो है वह सिंचाई उपलब्ध है तो वह 56.97 नेट सोन 51.12 और ग्रॉस क्रॉप्ड में जो है वो 72.68 ग्रॉस क्रॉप ज्यादा इसलिए भी होता है क्योंकि ग्रॉस क्रॉप्ड में एक बार से ज्यादा वाले को काउंट करते हैं। एक बार

38:08 वाले को नेट सोन में काउंट करते हैं। क्रॉपिंग इंटेंसिटी का मतलब हुआ कि जैसे क्रॉपिंग इंटेंसिटी का मतलब हुआ ग्रॉस क्रॉप्ड एरिया बाय नेट शोन एरिया। तो यह जो है ना उस फील्ड की पोटेंशियल को दर्शाता है। जैसे नेट शोन एरिया 100 हेक्टेयर है। इसमें ग्रॉस क्रॉप्ड कितना हो गया? 125 तो यह बता रहा है इसकी कि भैया इसकी जो पोटेंशियल है इस खेत की वह 125% है। ठीक है? 125% यानी 100 हेक्टेयर भूमि में 125 जो है वह 125 यूनिट जो है वह इसमें खेती की क्षमता है। ठीक? हेलो। आगे जब हम देखते हैं कि कुछ एग्रीकल्चर से संबंधित कुछ हाईलाइट्स देखते हैं तो एग्रीकल्चर और एलाइड एक्टिविटीज जैसे अगर हम बात करें एग्रोफॉरेस्ट्री

38:55 एग्रोफॉरेस्ट्री का मतलब होता है कृषि वानिकी यानी कृषि के साथ जो है वह पेड़ों को लगाना या जंगलों को लगाना और साथ ही साथ अगर हम फिशरीज की बात करें यानी मत्स्यकी की बात करें तो इसका जो कंट्रीब्यूशन है वह लगभग 20.2% है बिहार की इकॉनमी में 20.2% जो है वह बिहार की इकॉनमी में इसका योगदान है। चावल का जो उत्पादन है 2023-24 में वह सबसे ज्यादा हुआ है। चावल का उत्पादन कितना है? 95.22 लाख टन या फिर अगर कहूं तो 9522 हजार टन ऐसा जो है वो हम इसको कह सकते हैं। 73.06 वीट है। 58.64 लाख टन जो है वह इसमें मेज है। ठीक है? अगर हम देखें तो फूड ग्रेन प्रोडक्शन भी बढ़ा है। 231.1 से टू अगर देखें तो 179.5

39:44 से 231.1 लाख टन जो है वह फूड ग्रेन प्रोडक्शन हो गया है। अगर हम सोचें तो पिछले वर्षों से अगर हम पिछले वर्षों से कंपेयर कर रहे हैं तो राइस का प्रोडक्शन 2023-24 में उसके पिछले वर्ष से 21% बढ़ा है। और वीट का प्रोडक्शन जो है वह अगर देखें तो उसके पिछले वर्षों से 10.7% जो है वह बढ़ा है। अब यहां पर जो है वह हम प्रोडक्टिविटी वाले जिलों को और प्रोडक्शन वाले जिलों को देख लेते हैं जो सबसे प्रमुख फसल है बिहार में। तो जैसे अगर देखें तो राइस में प्रोडक्शन प्रोडक्शन सबसे ज्यादा कहां होता है? रोहतास में। वीट में रोहतास में। मेज में पूर्णिया में और पल्ससेस में पटना में। ठीक है? तो पल्ससेस पटना। मेज पूर्णिया और बाद बाकी

40:30 दोनों रोहतास यह प्रोडक्शन है। जैसे मान लो आपके पास 100 हेक्टेयर भूमि है या फिर इसको ऐसे समझ सकते हैं प्रोडक्शन को। जैसे मान लेते हैं किसी के पास 100 हेक्टेयर भूमि है और उसमें जो उत्पादन होता है मान लेते हैं वह 1000 केजी होता है। यानी 1 हेक्टेयर में कितना हुआ? 1 हेक्टेयर में हुआ 10 केजी। ठीक है? 10 केजी। 100 में 1000 तो एक में यूनिटरी मेथड से 10 केजी और मान लेते हैं किसी के पास 10 हेक्टेयर या फिर 5 हेक्टेयर भूमि है और उससे जो उससे जो उसकी खेती होती है वो 100 के किलो की होती है तो 1 हेक्टेयर में कितना हो गया भाई 20 किलो तो देखिए प्रोडक्शन में तो यही ज्यादा है क्योंकि प्रोडक्शन तो यहां ज्यादा है लेकिन प्रोडक्टिविटी में हम प्रति हेक्टेयर देखते हैं तो प्रोडक्टिविटी में यह वाला खेत का ज्यादा है क्योंकि यहां पर 1 हेक्टेयर में 20

41:16 किलो उगाया जाता है। यहां पर 1 हेक्टेयर में 10 किलो है। तो प्रोडक्शन यहां ज्यादा है क्योंकि यहां 1000 है और यहां 100 है। लेकिन प्रोडक्टिविटी यहां ज्यादा है। यहां कम है। यहां ज्यादा है क्योंकि यहां 1 हेक्टेयर में 10 kg है। यहां 1 हेक्टेयर में 20 kg है। तो प्रोडक्टिविटी के मामले में अगर बात करें तो यह है और प्रोडक्शन के मामले में यह है। तो रोहतास में जो प्रोडक्टिविटी है वह ज्यादा है। गेहूं का बेगूसराय में है। किशनगंज का मेज का मक्का मेज का जो है वो किशनगंज में है और पल्ससेस का जो है वो ईस्ट चंपारण में है। सबसे कम प्रोडक्टिविटी राइस का गोपालगंज में है और औरंगाबाद का जो है वह गेहूं में है। अगला जो हम देखते हैं क्रॉपिंग एरिया देखते हैं तो सबसे ज्यादा क्षेत्र में जो है वह जो ये आपको ब्लू वाला क्षेत्र दिख रहा है जो लगभग 88% है। इसमें जो है वह

42:04 अनाज उगाया जाता है। उसके बाद अगर हम पल्ससेस वाले इलाके को देखें तो पल्ससेस में कितना है? लगभग 6.5% यानी यह जो है यह लगभग 6.5% है। यानी अगर हम देखें तो इतने हिस्से में जो है वह अनाज इतने हिस्से में जो है वह दाल यह वाला जो है वह 2.8 है। इतने हिस्से में जो है वह शुगरकेन उगाया जाता है। इतने हिस्से में जो है वह ऑयल सीड्स उगाया जाता है। 1.8 और थोड़ा बहुत हिस्सा में जो है वह फाइबर क्रॉप्स जो है वह उगाया जाता है। इसके बाद अगर हम मेजर वेजिटेबल एंड स्पाइसेस प्रोडक्शन डिस्ट्रिक्ट देखें कि कहां पर जो है वह सबसे ज्यादा जो है वह स्पाइसेस प्रोडक्शन होता है। कहां पर जो है वह सबसे ज्यादा वेजिटेबल प्रोडक्शन

42:49 होता है। तो उसमें अगर देखें तो आलू जो है वह कहां पर है? आलू जो है वह पटना में है। आलू। ठीक है? प्याज जो है वह नालंदा में है। यह याद रख लेना है। बैंगन जो है वह भी नालंदा में है। और कॉलीफ्लावर यानी फूलगोभी जो है वह पटना में है। ठीक है? तो यह हमने जो है वह सब्जियों के बारे में देख लिया। ठीक है? सब्जियों के बारे में जो है यह हमने देखने की कोशिश जो है वह करी है। अगर नेट सोन एरिया की बात करें जो मैं अभी कह रहा था कि कम से कम एक बार वहां खेती होती है। तो नेट सोन एरिया में कौन है? तो भोजपुर और बक्सर सबसे ज्यादा है यहां पर नेटसोन एरिया। अगर हम क्रॉपिंग इंटेंसिटी देखें जहां पर भूमि के हाईएस्ट पोटेंशियल का इस्तेमाल किया जाता है तो वह है सुपौल और जहानाबाद। सुपौल और जहानाबाद।

43:35 ठीक है? और अगर हम लोएस्ट क्रॉपिंग इंटेंसिटी की बात करें तो वह है पूर्णिया यानी फसल क्षमता। यहां की जो क्रॉपिंग कैपेसिटी है वह सबसे कम है यहां की भूमि की वह है पूर्णिया। अगर मखाना प्रोडक्शन की बात करें तो बिहार पहला स्टेट है जहां पर सबसे ज्यादा मतलब बिहार फर्स्ट स्टेट है। पहला राज्य है जहां पर सबसे ज्यादा मखाना उत्पादन किया जाता है। यानी रैंक में बिहार फर्स्ट है और इसीलिए मखाना बोर्ड की स्थापना की भी बात हो रही है कि मखाना बोर्ड जो है वह दरभंगा में बनाया जा सकता है। 2023-24 में मखाना का जो टोटल प्रोडक्शन था वह 56.4000 टन था और बिहार में जो है वह सबसे ज्यादा

44:23 सॉरी भारत में सबसे ज्यादा बिहार ही है। बिहार जो है वह टोटल मखाना प्रोडक्शन का 85% जो है वह कवर करता है। यानी देश में 100 किलो अगर मखाना होगा तो 85 किलो जो है वह तो बिहार में ही होगा। इसके अलावा अगर हम ऑर्गेनिक फार्मिंग की बात करें तो बिहार के इकोनॉमिक सर्वे के हिसाब से अगर हम सोचें तो ऑर्गेनिक फार्मिंग को 13 डिस्ट्रिक्ट में प्रमोट किया जा रहा है। 13 डिस्ट्रिक्ट में और यह वही डिस्ट्रिक्ट है गंगा जिधर से क्रॉस करती है वो 12 है। यह 13 है। मतलब वो वाला 12 इसमें शामिल है। प्लस एक और है। प्लस एक जो है वह और है जो कौन है? नालंदा। ठीक है? तो पटना, नालंदा, बक्सर, भोजपुर, सारण, वैशाली, समस्तीपुर, बेगूसराय, भागलपुर, मुंगेर, लखीसराय, कटिहार और खगरिया तो 12 और प्लस एक 13 13

45:11 डिस्ट्रिक्ट में जो है वह ऑर्गेनिक फार्मिंग की पट्टी बनाई जा रही है ताकि ऑर्गेनिक फार्मिंग को प्रमोट किया जा सके। ऑर्गेनिक फार्मिंग का मतलब है फार्मिंग विदाउट केमिकल्स यानी बिना रसायनों के फार्मिंग या फिर जिसको हम कहते हैं नेचुरल फार्मिंग। ठीक है? नेचुरल फार्मिंग। अगर हम फर्टिलाइजर कंजमशन की बात करें तो सबसे ज्यादा फर्टिलाइजर कंजमशन जो है वह कहां पर है? सबसे ज्यादा तो वह जो है वह पूर्णिया में है। सबसे ज्यादा जो फर्टिलाइजर कंजमशन है वह पूर्णिया में है। लेकिन लेकिन ये टोटल फर्ट फर्टिलाइज़र्स की बात है। चाहे वो चाहे वो ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर हो चाहे रासायनिक फर्टिलाइजर हो। अगर रासायनिक की बात करें तो उसमें सबसे ज्यादा जो है वह रोहतास है। रासायनिक

45:58 में सबसे ज्यादा जो है वह रोहतास है। अब अगर हम कुछ एग्रीकल्चर सेक्टर में नए प्रयास को देखें तो एक प्रयास यह है कि किशनगंज में जो है वह चाय विकास योजना शुरू की जा रही है। इसके बाद अगर देखें तो वैशाली में बिदुपुर जो जगह है वहां पर जो है वह पान की स्थापना आदर्श बाग और पान की स्थापना जो है वह की जा रही है। हनी प्रोडक्शन की बात अगर करें तो हनी प्रोडक्शन के लिए प्रोत्साहन शुरू किया गया है। बिहार सरकार के द्वारा इंसेंटिव जो प्रोग्राम है वह भी शुरू किया गया है। ठीक है? तो हनी प्रोडक्शन को भी बढ़ावा देने के लिए कृषि प्रोत्साहन जिसको पराग कहते हैं उस योजना को शुरू किया जा रहा

46:45 है। इसके अलावा अगर हम देखें तो देखिए क्या है अगर हम फ्रूट्स और उसके लीडिंग प्रोड्यूसिंग डिस्ट्रिक्ट को देखें कि कहां पर सबसे अच्छे सबसे ज्यादा फलों का उत्पादन होता है तो केला का सबसे ज्यादा जो उत्पादन है वह है भागलपुर में अमरूद का ठीक है जिसको हम ग्वावा कहते हैं अमरूद का सबसे ज्यादा रोहतास में अगर लीची की बात करें तो वह तो मुजफ्फरपुर में है और मैंगो की बात करें तो वह दरभंगा में है। ठीक है? बिहार को कृषि में अपने बेहतर प्रदर्शन के लिए कृषि कर्मन पुरस्कार जो है उससे सम्मानित किया गया है और यह सम्मान बिहार को पांच बार जो है वह मिला

47:30 है और ध्यान रख लेना है कि राइस के लिए मिला है पहली बार। फिर वीट, फिर मेज, फिर मेज, फिर वीट। तो, पांच बार राइस, वीट और मेज के लिए मिला है। और इसीलिए राइस, वीट और मेज आपको सबसे ज्यादा याद रखना चाहिए। अभी हमने पढ़ा कि राइस का प्रोडक्शन सबसे ज्यादा कहां पर? रोहतास में। प्रोडक्टिविटी सबसे ज्यादा कहां पर? रोहतास में। गेहूं का रोहतास में प्रोडक्शन। और अगर हम प्रोडक्टिविटी की बात करें गेहूं में तो वो बेगूसराय में। मक्का का पूर्णिया में। और अगर प्रोडक्टिविटी की बात करें तो किशनगंज में। तो यह याद रखना है। फिर साथ ही साथ हम लोगों ने पल्ससेस का भी रखा था। वह था पटना में। ठीक है? पटना में और पूर्वी चंपारण में। तो, यह तो हम लोगों ने देख लिया था। ठीक है? यहां पर ये जो स्लाइड्स था इसी में हम लोगों ने देखा था

48:18 यहां पे चलिए अब जो है वो पांच बार मिला है ईयर वाइज हमको याद रखना है 11 12 13 15 16 17 और 17 18 ठीक है तो यहां पर जो है बस एक साल यहां पर गैप है बाद बाकी जो है वह कंटिन्यू है 13 14 का गैप है बाद बाकी कंटिन्यू है अगर हम एग्रीकल्चरल रोड मैप देखें तो वही तो मैं जैसा बताया आपको एग्रीकल्चरल रोड मैप जो है वह कृषि के उत्पादन को बढ़ावा देने के कारण कृषि उत्पाद के उत्पादन को बढ़ावा देने के कारण एग्रीकल्चरल रोड मैप में एग्रीकल्चरल रोड मैप जो है वह बनाया गया था। एग्रीकल्चरल रोड मैप कहने का मतलब है कि कृषि का क्या रहेगा हमारा विज़न बिहार में। ठीक है? तो कृषि कर्बन अवार्ड तो हमको मिल गया लेकिन एग्रीकल्चर का हमारा विज़न क्या है? हम किस प्रकार से

49:03 खेती को प्रमोट करना चाहते हैं? क्योंकि बिहार जो है वह एग्रीकल्चरल स्टेट है। तो इसके लिए अगर देखें तो तीन रोड मैप जो है वो सबसे पहले पढ़ लेते हैं। टोटल तो चार है। अभी जो है वो चौथा चल रहा है। तो पहला जो रोड मैप है वो 2008 से 12 रहा। दूसरा 12 से 17 रहा। तीसरा 17 से 22 रहा लेकिन इसको बढ़ाया गया 23 तक। कोविड भी था इस कारण से। ठीक है? और चौथा जो है जो अभी चल रहा है 23 से 28 तक। अब चौथे रोड मैप में किस चीज पर फोकस किया गया है? तो चौथा रोड मैप जो है वो 23 से 28 तक चल रहा है और इसमें इसको जो लांच किया गया था वह 18 अक्टूबर 2023 को प्रेसिडेंट जो द्रोपदी मुर्मू जी है उनके द्वारा इसको लांच किया गया था और इसमें जो फोकस एरिया है वह क्या है इसमें फोकस एरिया है क्लाइमेट रेिलिएंट एग्रीकल्चर यानी वैसा एग्रीकल्चर जिसका

49:50 जिसका जो क्लाइमेट चेंज है जिस पर असर ना पड़े ठीक है दूसरा है मॉडर्नाइजेशन मतलब नई तकनीकों का प्रयोग करें इनोवेशन ठीक है और सस्टेनेबल प्रैक्टिससेस ये चारों चीज जो है वह इसमें शामिल है। अगला जो है बिहार में कौन-कौन से उत्पाद को जो है वह जीआई टैग मिला है इसको देख लेते हैं। तो यहां पर जैसे मधुबनी चित्रकला सिक्की घास सिक्की घास जो है मधुबनी चित्रकला जो है वह कहां का है? तो मधुबनी का मिथिला का जिसको बोलते हैं। सिक्की घास जो है वह कहां का है? तो नॉर्थ बिहार का है। सिक्की घास जो है वह नॉर्थ बिहार का। सूजनी कराई जो है वह कहां का है? तो सूजनी कराई जो है वह मुजफ्फरपुर का है।

50:36 अगर सिल्क की बात करें तो वह भागलपुर का है। तो सारी चीजें जो है ना वो आपको ध्यान में यहां रखनी है। तो सिल्क की बात की है तो भागलपुर का है। मंजूसा आर्ट की बात करेंगे तो वह भी भागलपुर का है। पिपली वर्क की बात करेंगे तो वह भी भागलपुर का है। सिलाओ खाजा यह नालंदा का है। यह जो है वह नालंदा का है। जरदालू मैंगो भागलपुर का है। कतरनी राइस यह भी भागलपुर का है। मगही पान औरंगाबाद, नवादा, पटना का है। तो यह जो है वह औरंगाबाद, नवादा और पटना का है।

51:22 यह मगही पान है। साही लीची आप जानते हैं मुजफ्फरपुर का है। यह दरभंगा और मधुबनी का है। मिथिला मखाना मिथिला मखाना जो है दरभंगा और मधुबनी का है और मरचा धान यह पश्चिमी चंपारण का है। वेस्ट चंपारण इसको 2023 में एग्रीकल्चरल कैटेगरी में मिला है। तो ऊपर वाला क्राफ्ट है मतलब हस्तशिसल्प। दूसरा वाला जो है वह मिष्ठान है या मिठाई है और तीसरा जो है वह एग्रीकल्चरल कैटेगरी में मिला है। ठीक? तो इतना सारा चीज जो है वो आपको ध्यान में रखना चाहिए। ठीक है? अब अगर देखा जाए तो

52:07 यह तो आपको पता है 13 जिलों में जैविक खेती खेती का विकास किया जा रहा है। पट्टी बनाया जा रहा है। इरीगेटेड एरिया बिहार में इकोनॉमिक सर्वे के हिसाब से अगर देखें तो बिहार का जो इरीगेटेड एरिया है जहां पर सिंचाई व्यवस्था है वह कितना है? 56.97 लाख हेक्टेयर। सबसे ज्यादा जो इरीगेटेड डिस्ट्रिक्ट है, वह कौन है? रोहतास। सबसे ज्यादा जो इरीगेटेड डिस्ट्रिक्ट है, वह है रोहतास। यह ध्यान रखना है। और सबसे कम जो है वह है शिवहर। यह ओवरऑल है क्योंकि देखिए इरीगेशन जो है वह ट्यूबवेल से भी होता है, कैनाल से भी होता है, पोंड से भी होता है। लेकिन ओवरऑल में सबसे ऊपर रोहतास और सबसे कम शिवहर है। अब हम लोग इंडिविजुअली देख लेते हैं कि भाई ट्यूबवेल में सबसे ज्यादा कहां है। ठीक है? ट्यूबवेल में जो है वह सबसे ज्यादा कहां

52:54 है? यह वाला हम लोग देख लेते हैं। तो सबसे पहले ट्यूबवेल्स की बात करें नलकूप तो वह जो है वह 63.1% पर जो है वह नलकूप से खेती की जाती है। फिर कैनाल से 31% पर पोंड से 2.2% पर और अदर से 3.7% पर। तो यह जो है वो परसेंटेज का इलाका है। ठीक है? अब कहां पर सबसे ज्यादा होता है यह हम लोग देखेंगे। तो ये जो है वो परसेंटेज है। ठीक है? तो इसको थोड़ा सा उसी तरह से देखना है। अब कहां पर होता है? जैसे नलकूप से सबसे ज्यादा जो है वह समस्तीपुर में होता है। कनाल से सबसे ज्यादा जो है वह रोहतास में होता है नहरों से और पोंड से सबसे ज्यादा जो है वह दरभंगा में होता है। तो इन तीनों क्षेत्रों को भी ध्यान में रखना है कि समस्तीपुर, रोहतास और दरभंगा। समस्तीपुर,

53:40 ट्यूबवेल्स, रोहतास, कनाल और दरभंगा पोंड्स यानी पोंड्स का मतलब है तालाब। अब अगर हम बिहार में एग्रीक एनिमल हस्बेंडरी देखें या पशुपालन को देखें तो पशुपालन जो है वह कृषि क्योंकि कृषि फोकस्ड बिहार स्टेट है एग्रीकल्चरल स्टेट है तो इसीलिए पशुपालन भी जो है वह रोजगार का एक साधन है। देखिए टोटल लाइव स्टॉक यानी कुल पशुधन की जो संख्या है वह 365.4 लाख है। मतलब थीम अगर हम इकोनॉमिक सर्वे के हिसाब से सोचे तो अब अगर हम मिल्क प्रोडक्शन देखें तो बिहार में जो मिल्क प्रोडक्शन है वह वर्ष 2022-23 में यह

54:25 22-23 का जो है वह डाटा है। वर्ष 2022-23 का डाटा है। तो मिल्क प्रोडक्शन अगर हम देखें तो वर्ष 2022-23 में 125 था। अब यह बढ़कर के 123 23-24 में यह कितना हो गया है? 128 लाख टन यह है 128 और एग्जैक्ट वैल्यू की बात करें तो 128.5 लाख टन है। अगर हम एग प्रोडक्शन देखें तो 327 था ये 327.43 अब यह 344 करोड़ हो गया है। एग की बात कर रहे हैं। अगर हम फिश प्रोडक्शन देखें तो 2022-23 में 8.91 लाख टन है जो घटा है और हुआ है 8.73 लाख टन। 8 73 लाख टन

55:15 और ये जो है वो सेम है 3.96 लाख तो ये जो है वो थोड़ा सा ध्यान में आपको रखना है। यह जो है वो थोड़ा सा ध्यान में रखना है। इसके बाद अगर हम देखें तो पशुओं की बात करें तो काऊ, बुफेलो, गोट और पोल्ट्री इसमें अगर हम देखते हैं तो इनकी संख्या कितनी है और यह कितने प्रतिशत में है? तो यह जो है यह संख्या की बात कर रहा है। और यह जो है वो परसेंटेज की बात कर रहा है। तो सबसे ज्यादा जो पॉपुलेशन है वह किसका है? सबसे ज्यादा काऊ एंड बुल का है। सबसे ज्यादा। उसके बाद जो है वह बफेलो, गोट, पोल्ट्री इन सब का है। अब बात उठ सकता है कि सबसे ज्यादा गाय कहां है? तो भैया सबसे

56:01 ज्यादा गाय जो है वो पूर्णिया में है। सबसे ज्यादा गाय और बफेलो जो है वो सबसे ज्यादा पूर्णिया सबसे ज्यादा है। इसके बाद अगर बात की जाए कि भैंस तो मधुबनी। इसके बाद बात करें गोट तो वो है अररिया। अररिया में सबसे ज्यादा जो है वह गोट है और सबसे ज्यादा जो मुर्गा है वह कहां है? कटिहार में। तो यह जो है स्टेट का नाम भी ध्यान रखेंगे। इसके बाद अगर हम बिहार में मिनरल्स की बात करें, बिहार में खनिज की बात करें तो बिहार में अब खनिज का जो प्रतिशत है वह कम हो गया है क्योंकि झारखंड विभाजन के बाद

56:47 अब 2 से 3% ही बचा है। उससे पहले 25% खनिज जो है वह भारत का बिहार में ही था। ठीक है? अगर देखा जाए तो हम मिनरल्स कह किस कहते किसको हैं? पृथ्वी की जो क्रस्ट पर यानी जो भूपर्पटी पर जो पाए जाने वाले तत्व होते हैं उनको हम मिनरल्स कहते हैं। ठीक है? और ये मेटल्स और नॉन मेटल्स दोनों किस्म के हो सकते हैं। अब यहां पर जैसे देखें तो मेनली जो रीजन है मिनरल्स का वो है सदर्न बिहार। सदर्न बिहार जो है वह मुख्य तौर पर बिहार में जो है वह मिनरल्स का रीजन है। यहां पर एक लिस्ट दिया हुआ है। लेकिन मैं चाहूंगा कि आपको जो है वह मैं यहां पर मैपिंग के माध्यम से चीजों को बता पाऊं। ठीक है? तो सबसे पहले अगर मैं बात करूं लाइम स्टोन की तो लाइम स्टोन जो है वह

57:34 रोहतास में है। लाइम स्टोन रोहतास में सबसे पहले अगर मैं पायराइट की बात करूं तो पायराइट भी जो है वह भी रोहतास में है। रोहतास के आमझौर और बंजारी में तो यह जो है वह पायराइट है। तो पायराइट और लाइम स्टोन दोनों जो है वह रोहतास में है। क्वाडजाइट की बात करूं तो वह मुंगेर में है और मुंगेर में ही खरकपुर की पहाड़ी भी है। मुंगेर में क्वाडजाइट जो है वो यहीं है और यहीं पर जो है वो खड़कपुर की पहाड़ी भी जो है वह मुंगेर में है। ठीक है? तो क्वाडजाइट मेनली मुंगेर में है। वैसे अगर देखा जाए तो जमुई में भी है और वैसे अगर देखा जाए तो गया में भी है। लेकिन मेनली जो है वो यहां पर मुंगेर में आपको दिखाई पड़ेगा। इसके अलावा अगर मैं बात करूं

58:20 दूसरे मिनरल्स की तो चीनी मिट्टी यह भागलपुर, बांका, मुंगेर तो चीनी मिट्टी की अगर बात करते हैं तो भागलपुर, बांका और मुंगेर यहां पर आपको चीनी मिट्टी मिलेगा। यह जो इलाका है, यह चीनी मिट्टी का है। भागलपुर, बांका, मुंगेर। इसके अलावा अगर हम देखें अब्रख जिसको माइका कहते हैं। तो माइका जो है वह मेनली कहां-कहां पर है? तो माइका एक देखिए यहां पर नवादा में आपको माइका मिलेगा। गया में जमुई में मुंगेर में। तो नवादा यह जो लाइन से आपको दिख रहा है नवादा, गया, जमुई और मुंगेर। ये चारों जो है वह किसके हैं? तो यह भैया जो है वह माइका के हैं और

59:09 अलग से लिखा भी हुआ है तो आप उसको देख भी सकते हैं। सोना जो है वह मेनली जो गोल्ड है वह मेनली कहां है? जमुई में। तो गोल्ड जो है वह जमुई में है। गोल्ड और इसके अलावा मुंगेर में भी है। वैसे अगर देखा जाए तो गोल्ड जो है वह मुंगेर में भी है और गोल्ड जो है वह पश्चिमी चंपारण में भी है। ठीक है? तो यहां पर भी आपको गोल्ड देखने को मिलेगा। गोल्ड। ठीक है? इसके बाद अगर हम सोरा की बात करें तो सोरा का आंदोलन भी आपको याद होगा नोनिया समुदाय का तो सोरा जो है वह सबसे ज्यादा सारण में जो है वह सोरा है। वैसे अगर देखा जाए तो सारण मुजफ्फरपुर फिर साथ ही साथ बेगूसराय बेगूसराय में भी जो है वह आपको देखने को मिलेगा। तो यह बेगूसराय में भी जो है वह देखने को मिलेगा शोरा। तो

59:55 सारन, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय इन सब जगहों पर मिलेगा। ठीक है? क्वाट भी जो है वो जमुई में आपको देखने को मिलेगा और यूरेनियम जो है वह गया नवादा में देखने को मिलेगा। ये सारे डिटेल्स जो है वो मैंने यहां पर भी आपको लिख करके दे दिए हैं। ठीक है? तो यहां पर दिए हैं। इसके अलावा अगर स्लेट की बात करें तो स्लेट जो है वह मुंगेर में आपको मिलेगा। जो खरकपुर की पहाड़ियां हैं वहीं पर जो है वह आपको स्लेट मिलेगा। ठीक है? तो एक बार मैं फिर से आपको एक इसके मैप से दिखा दूं ताकि वह आसान रहे। तो अगर स्लेट की बात करें तो कहां है स्लेट? तो स्लेट जो है वह मुंगेर में है। खरकपुर की पहाड़ी में। तो मुंगेर में जो

1:00:42 है वह स्लेट है। मुंगेर में जो है वह स्लेट है। मैंगनीज की बात करें तो गया मुंगेर। तो यहां यह वाला और यह वाला यह जो है वो मैंगनीज है। ठीक है? ठीक है? मैंगनीज जो है वो यहीं पर है। गैलेना जो है वो बांका में है। गैलेना का इस्तेमाल जो है वह न्यूक्लियर पावर प्लांट्स इन सब में होता है। तो वह बांका में है। ठीक है? तो गैलेना जो है वह बांका गैलेना बांका। अगर मैं एसबेस्टस की बात करूं तो वो भी कहां पर है? मुंगेर में। तो स्लेट कॉमा एसबेस्टस ये दोनों जो है वह मुंगेर में है। ठीक है? पेट्रोलियम आपको पता है पश्चिमी चंपारण पेट्रोलियम

1:01:29 पेट्रोलियम इज इन वेस्ट चंपारण और नेचुरल गैस पूर्णिया किशनगंज कटिहार तो नेचुरल गैस जो है वो यहां है पूर्णिया किशनगंज कटिहार यहां पर है। इसको वैसे ही ध्यान में रखेंगे तो पूरा जो है वह आपका पूरा जो है वो यह कंप्लीट हो जाएगा। ठीक है? अब अगर हम एनर्जी स्टेटस देखें बिहार में ऊर्जा की बात करें बिहार में तो क्या दिख रहा है? बिहार में अगर ऊर्जा देखें तो इकोनॉमिक सर्वे 2024-25 के हिसाब से 23-24 में कितना ऊर्जा है? तो अगर देखते हैं तो टोटल आगे तो मैं थोड़ा सा टोटल की बात करूं तो बिहार का जो थर्मल पावर शेयर है वह 67.2% है। यानी बिहार को जो कोयला वगैरह से

1:02:14 ऊर्जा मिलता है वो 67.2 है। और बिहार का जो रिन्यूएबल एनर्जी है। ठीक है? जो नवीकरणीय ऊर्जा है वह है 32.8 32.8% वैसा है। ठीक है? इसके बाद अगर देखें तो ऐसा बोला जा रहा है कि ये जो है वो 2021 22 का है। 2021-22 का डाटा है ये। यहां पर 21-22 की बात है। 2025-26 में ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि हिस्सा जो है वह ताप वाले का घटेगा और जो रिन्यूएबल वाला है उसका बढ़ेगा। यानी 2122 में जो 67.2 और 32.8 था। अब यह 66.6 आ जाएगा और यह 33.4%

1:02:59 हो जाएगा। ऐसा है। ठीक है? ऐसा है। अगर हम प्रति व्यक्ति बिजली उपभोग देखें तो 363 किलोवाट आवर है जो हमने सर्वे में भी देखा था। और सबसे जो बिजली कंजमशन वाला स्टेट है जो जिला है वह है पटना। पटना जो जिला है वहां पर सबसे ज्यादा बिजली कंजमशन है। 647 करोड़ यूनिट बिजली का वहां पर कंजमशन है। ठीक है? लोएस्ट इलेक्ट्रिसिटी कंजमशन जो है वह शेखपुरा में है मात्र 8 करोड़ यूनिट। ठीक है? क्लियर है? 8 करोड़ यूनिट। तो ये चीज जो है वह थोड़ा सा आपको ध्यान में रखना है। इसके अलावा बिहार में जो एनर्जी की जो डिमांड है तो एनर्जी की जो एक्सट्रीम

1:03:45 डिमांड है वह कितना है? एक्सट्रीम मांग 41271 और जो सप्लाई है वह कितना है? 41,917 यानी बिहार जो है वह इलेक्ट्रिसिटी के मामले में सरप्लस पर है। डिमांड हमारा कम है और सप्लाई हमारे पास जो है वह ज्यादा है। बिहार में एनर्जी अथॉरिटी की अगर बात करें तो कौन-कौन से एनर्जी अथॉरिटी है? आपको दिख रहा है। जैसे देखो जैसे तीन है। ठीक है? बिहार में जो एनर्जी अथॉरिटी है वह यहां पर आपको दिख रहा है कि बिहार में एनर्जी अथॉरिटी सॉरी तीन बोल रहा हूं। बिहार में एनर्जी अथॉरिटीज जो है वह पांच है। कौन-कौन सा है? सबसे पहले बिहार स्टेट पावर कंपनी लिमिटेड, बिहार स्टेट पावर एनर्जी कॉरपोरेशन पावर जनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड, बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन

1:04:30 कंपनी, नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड। तो बिहार में जो है यह कुल पांच है। ठीक है? लेकिन इसका विभाजन 2012 में हुआ था। इसका जो विभाजन है वह 2012 में हुआ था। तो बिहार स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड को 2012 में पांच भाग में विभाजित कर दिया गया है। तो यह 2012 में इसको पांच भाग में इसका विभाजन हो गया है। ठीक है? अगर हम मेजर पावर प्लांट्स देखें बिहार में थर्मल पावर प्लांट्स तो कौन सा कौन सा है? अगर हम मेजर थर्मल पावर प्लांट्स को देखते हैं तो एक जो है वह कौन है? तो यहां पर बरौनी लिखा हुआ है। बाढ़ है यह बाढ़। तो बाढ़ थर्मल पावर प्लांट पटना में है।

1:05:18 बरौनी थर्मल पावर प्लांट जो है वह बेगूसराय में है। बक्सर वाला जो है वह बक्सर में ही है। कांत बिजली तो कांत जो विद्युत उत्पादन केंद्र है वह कहां है? मुजफ्फरपुर में। कवारा बांका में और नवीन नगर वाला जो है वह औरंगाबाद में है। ठीक है? तो इसको जो है वह ध्यान में आपको रखने की आवश्यकता है। ठीक है? तो इसको जो है वो ध्यान में रखने की आवश्यकता है। आइए इधर टोटल जो अगर देखा जाए तो हाई तो बिहार में एक हो गया ताप केंद्र। अब एक जल विद्युत केंद्र देख लेते हैं। तो 13 जो है वह यहां पर जल विद्युत परियोजनाएं हैं जिसका कुल क्षमता 54.3 है। कुल क्षमता। ठीक है? 11 और भी जो है वह प्रोसेस में है जिनकी

1:06:04 क्षमता 9.3 है। अगर सब चालू हो जाएगा तो 13 और 11 24 हो जाएगा और इधर जो है वो 63 के करीब हो जाएगा। ठीक है? क्योंकि देखिए बिहार का जो स्कोप है वो सोलर एनर्जी और थोड़ा बहुत हाइड्रोइिक में ही है। बिहारकि कोस्टल इलाका है नहीं तो वहां पर जो है वह पवन ऊर्जा या विंड एनर्जी का स्कोप है नहीं। न्यूक्लियर पावर प्लांट का स्कोप है नहीं। तो यहां पर सोलर और थोड़ा बहुत जो है वो हाइड्रोइिक का ही सोर्स है। तो सबसे ज्यादा जो अगर हम देखें हाइड्रोइिक प्रोजेक्ट्स में तो सबसे ज्यादा जो प्रोडक्शन है वह 19.2 जो मेगावाट है वह कोशीय हाइड्रोइिक सेंटर से ही है। इसके अलावा ईस्टर्न गंडक वेस्ट चंपारण में सोन वेस्टर्न अब इसको अगर आप मैप से देखते हैं

1:06:50 तो देखिए इस प्रकार से कुछ ऐसे देख सकते हैं। यहां पर जैसे मैं अगर बात करूं तो कोसी वाला कहां हो जाएगा? सुपौल में। तो कोसी वाला जो है वह सुपौल में हो जाएगा। यहां पे कहां गया? सुपौल में और इसका सबसे ज्यादा जो है ना वह इसी का उत्पादन है। 19.2 मेगावाट। तो यही याद रखेंगे। बाद बाकी का उत्पादन ध्यान नहीं रखना है। लोकेशन भले आप ध्यान में रख सकते हैं। पूर्वी गंडक पश्चिमी चंपारण तो यहां पर ईस्ट गंडक है। फिर जहां तक बात है सोन तो सोन में दो है पश्चिमी और पूर्वी तो पश्चिमी वाला जो है वह रोहतास में है तो वेस्टर्न सोन और पूर्वी वाला जो है ईस्टर्न सोन जो है वह

1:07:37 औरंगाबाद में है ईस्टर्न सोन औरंगाबाद में है त्रिवेणी पश्चिमी चंपारण यही है त्रिवेणी त्रिवेणी जो है वह पश्चिमी चंपारण यहां पर ढेल भाग ढेल भाग भी जो है वह रोहतास में है ढेलबाग ढेलबाग भी जो है वह रोहतास में है। नासरीगंज वह भी रोहतास में तो ढेर सारा रोहतास में है। नासरीगंज जय नारा नासरीगंज फिर जय नारा ये सब जो है वह कहां है? रोहतास में। सेवारी सेवारी भी जो है वह रोहतास में है। सेवारी फिर अरवल वाले का जहां तक बात करेंगे तो अरवल वाला जो है वह अरवल में ही है। तो

1:08:22 उसके लिए तो परेशान होने की आवश्यकता ही नहीं है। तो अरबल वाला अरवल में ही है। और इसका नाम भी क्या है? अरवल वाला ही। अरवल मतलब अरवल जो है वह हाइड्रोइिक प्लांट है। ठीक है? बेलसार भी जो है वह अरवल में ही है। बेलसार इसके बाद बचता है सिरखंडी। वह रोहतास में है। सिरखंडी। ठीक है? तो सिरखंडी भी जो है वह रोहतास में है। क्लियर है? और एक अगनूर है। अगनूर भी अरवल में है। अगनूर तो टोटल जो है वह 13 है जो यहां पर आपको नाम से क्रमशः दिख रहा है। और टोटल 54.2

1:09:08 मेगावाट जो है 3 मेगावाट जो है वो इसमें है 54.3 बिहार रिननेबल एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए ब्रेडा जिसका हेड क्वार्टर पटना है। तो पटना में जो है वह इसकी उसका जो है वह स्थापना किया गया ब्रेडा का तो यह बिहार रिन्यूएबल एनर्जी अथॉरिटी डेवलपमेंट अथॉरिटी है ब्रीडा तो रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस जो है वह यही है। अब अगर हम बिहार में उद्योग की बात करें तो उद्योग देखते हैं यहां पर तो उद्योग का कंट्रीब्यूशन जो है वह बिहार के जीडीपी में 21.5% रहा है। ठीक है? लेकिन लिमिटेड रिसोर्स होने के कारण लिमिटेड यहां पर मिनरल्स पाए जाने के कारण बिहार में मुख्य जो उद्योग है वह कैसा है? तो एग्री या फिर

1:09:54 एग्रीकल्चरल बेस्ड इंडस्ट्रीज यहां पर है। यानी वैसा इंडस्ट्रीज जिसमें रॉ मटेरियल एग्रीकल्चर का प्रोडक्ट होता है। जैसे मान लो फूड प्रोसेसिंग। उसमें रॉ मटेरियल क्या हुआ? टमाटर। तो वैसा ही इंडस्ट्री जो है वो यहां पर ज्यादा देखने को आपको मिलेगा। इसके अलावा अगर अब हम इंडस्ट्री में देखते हैं जैसे शुगर इंडस्ट्री, डेयरी, जूट, सिल्क, सीमेंट और एग्रो बेस्ड इन सों को देखते हैं। तो यहां पर अगर शुगर इंडस्ट्री की बात करें तो शुगर इंडस्ट्री पहला जो शुगर मिल है वह 1904 में मरौरा जो है महरौरा जो सी सारण में है वहां पर स्थापित किया गया था। 2024-25 में बिहार में 11 शुगर मिल है। जिसमें से नौ जो है वह ऑपरेशनल है। और रिसेंटली जो स्टार्ट किया गया है वह रीगा शुगर मिल सीतामढ़ी में

1:10:41 स्टार्ट किया गया है। शुगर प्रोडक्शन बिहार में 24-25 के के अनुसार अगर देखें तो 68.72 लाख टन है। ठीक है? 2024-25 में और बिहार में शुगर के इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए बिहार स्टेट शुगर इंडस्ट्री प्रमोशन प्रोग्राम को स्टार्ट किया गया है। तो यह जो है वह आपका क्या है? यह जो है वह था शुगर इंडस्ट्री। अब जो है वह हम लोग देख लेते हैं थोड़ा सा मिल्क इंडस्ट्री या दूध इंडस्ट्री। डेयरी इंडस्ट्री। तो बिहार जो है वह लाइव स्टॉक भी देखा आपने। िकाव वगैरह बहुत ज्यादा है जिसके कारण यहां पर दुग्ध इंडस्ट्री जो है वह काफी फलाफूला हुआ है। 2023-24 में जो मिल्क प्रोडक्शन है वह 128.53 लाख टन है। और इसके अलावा राष्ट्रीय गोपालन राष्ट्रीय गोपालन मिशन गोपालक मिशन

1:11:28 का भी जो है गोपालक मिशन का भी जो है वह शुरुआत किया जा रहा है 7 निश्चय टू के तहत। ठीक है? डेयरी कोपरेटिव्स। डेरी कॉपरेटिव्स का मतलब है सब लोग मिलकर के एक साथ दूध का उत्पादन करेंगे। उसको बेचेंगे। जैसा अमूल टाइप का होता है। तो डेरी कॉरपोरेशन जो है वह 7000 डेरी कॉरपोरेशन की स्थापना की गई है। कोपरेटिव्स की यह भी 7 निश्चय टू योजना के तहत ही की गई है। इसके बाद अगर हम तीसरा इंडस्ट्री हमारा क्या था? जूट इंडस्ट्री। तो तीसरा है जूट। तो जीट इंडस्ट्री की बात करें तो पूर्णिया, कटिहार और दरभंगा यह तीनों जो जिले हैं वह जूट के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। पूर्णिया के पूर्णिया में अगर देखा जाए तो पूर्णिया में जूट पार्क भी डेवलप किया गया है। जूट पार्क तो यह जो है वह पूर्णिया में जो

1:12:16 है वह इसको बनाया गया है। और पूर्णिया में जो जूट पार्क बनाया गया है वह जगह है मरांगा। तो पूर्णिया का मरांगा में इसको इस्टैब्लिश जो है वह किया गया है। पश्चिम बंगाल के बाद बिहार जो है वह दूसरा जूट उत्पादन जो है वह करता है। अब सिल्क और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को देखेंगे तो भागलपुर, गया, मुंगेर और मुजफ्फरपुर यह प्रमुख जो है वह सिल्क वाले जिले हैं। ठीक है? भागलपुर तो रेशमी वस्त्रों के लिए काफी जो है वह प्रसिद्ध है। ठीक है? तो भागलपुर सबसे ज्यादा जो है वह रेशमी वस्त्रों के लिए प्रसिद्ध है। तिल्क जो बिहार में मिलते हैं वह मलबरी, तसर और एरी है। इसको कहते हैं मलबरी, तसर और अंडी

1:13:01 हिंदी में। मलबरी जो है वह सहरसा, सुपौल, अररिया, मधुबनी, पूर्णिया में सबसे ज्यादा। तसर जो है वह बांका, मुंगेर, नवादा, कैमूर, जमुई में सबसे ज्यादा और मुजफ्फरपुर, वैशाली में एरी या अंडी जो है वह सबसे ज्यादा। अब इन तीनों में सबसे ज्यादा जो होता है वह होता है तसर। यह भी ध्यान रखना है इन तीनों में क्योंकि परीक्षा में बहुत बार इस प्रकार से भी जो सवाल है वह पूछ लिया जाता है कि इन तीनों में सबसे ज्यादा जो है वह क्या है? तो इन तीनों में सबसे ज्यादा जो है वो क्या है? तो हम लोगों ने जो है वो यहां तक शुगर, डेयरी, जूट और सिल्क एंड टेक्सटाइल देख लिया। अब हम सीमेंट इंडस्ट्री को देखते हैं। तो सीमेंट इंडस्ट्री की लाइम स्टोनकि उपलब्ध है और सीमेंट में उसका इस्तेमाल होता है। तो लाइम स्टोन अवेलेबिलिटी होने के कारण सीमेंट उद्योग बिहार में आपको फेमस दिखेगा और स्पेशली रोहतास मेंकि वहीं

1:13:49 पर लाइमस्टोन मिलता है तो डालया नगर रोहतास और बंजारी रोहतास में यह आपको देखने को मिलेगा। एग्री बेस्ड इंडस्ट्री तो बिहार में काफी होगा ही क्योंकि एग्रीकल्चर जो है वह यहां पर एक तरह से एग्रीकल्चरल स्टेट ही है। एग्रीकल्चर प्रोडक्शन ठीक-ठाक होता है। तो इस कारण से यहां पर शुगर, फ्रूट्स, इथेनॉल, राइस, फूड प्रोसेसिंग, हनी इन सब का पोटेंशियल बिहार में आपको ठीक-ठाक दिखता है। अगर हम बात करें मेगा फूड पार्क की। ठीक है? यानी फूड प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए। जहां पर उत्पादक भी रहता है। जहां पर फ़ूड का वैल्यू एडिशन भी किया जाता है। जहां पर उसको बेचने वाले भी लोग बेचने वाले मतलब जो ट्रेडर्स होते हैं वो भी होते हैं। तो एक ही छत के नीचे सब कोई होते हैं। जो उत्पादक है वैल्यू एडिशन करने वाले और साथ ही साथ जो उसको बेचने जो खरीदने वाले होते हैं वो सारे लोग एक ही जगह पे होते हैं।

1:14:35 उसको हम बोलते हैं फूड पार्क। तो भागलपुर, बक्सर और कटिहार में जो है वह फूड पार्क इस्टैब्लिश किया जा रहा है। खाद्यान्न उत्पादन में जो बिहार है वह सातवें नंबर पर है और वेजिटेबल उत्पादन में अगर देखें सब्जी के उत्पादन में बिहार जो है वह तीसरे नंबर पर है और फल उत्पादन में छठे नंबर पर है। फल उत्पादन में जो है वह बिहार छठे नंबर पर है। मखाना में तो आपको पता है टॉप पे है। लीची प्रोडक्शन हम सबसे ज्यादा करते हैं। ठीक है? और पैकिंग हाउस जो है वह एक बेहटा में यानी चीजों को पैक करने वाला पैकिंग हाउस। ठीक है? ताकि वह चीजें जो है वो सुरक्षित रहे। यह बनाया जा रहा है और मुजफ्फरपुर के मोतीपुर में मेगा फूड पार्क जो है उसको एस्टैब्लिश किया जा रहा है। याद रखेंगे बहुत बार आपसे सब सवाल

1:15:21 परीक्षा में पूछा जा सकता है। यहां पर ढेर सारे लिस्ट हैं। जैसे अगर मैं बात करूं तो केंद्र सरकार द्वारा नियंत्रित ये सरकारी कंपनियां है जो बिहार में है। जैसे फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया यह बरौनी में है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड जो है यह बरौनी में है। भारत वेगन एंड इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड यह मुकामा में है। रेलवे विद्युत इंजन कारखाना यह मधेपुरा में है। रेल पहिया कारखाना यह बेला में है जो सारण में है। डीजल एवं इलेक्ट्रिक इंजन कारखाना मढोरा सारण में है और कैरज रिपेयर रेल वर्कशॉप यह हरनौत नालंदा में है और यह आपको ध्यान रखना ही पड़ेगा। इसमें कोई और विशेष उपाय नहीं है। ठीक है? तो यह सेंट्रल गवर्नमेंट के अंदर बिहार में जो उद्योग हैं वह सब हैं। सरकारी उद्योग। अब बिहार के अपने उद्योगों

1:16:08 की बात करें तो बिहार स्टेट स्कूटर्स लिमिटेड फतूहा में बिहार स्टेट शुगर कॉरपोरेशन लिमिटेड फतूहा में पटना में बिहार स्टेट एग्रो इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट कॉरपोरेशन पटना बिहार स्टेट डेयरी कॉरपोरेशन लिमिटेड पटना बिहार स्टेट स्पन सिल्क यह तो भागलपुर है बाद बाकी स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड पटना है स्टेट फॉरेस्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन पटना है स्टेट फाइनेंस कॉरपोरेशन पटना है और स्टेट टेक्स्ट बुक पब्लिशिंग कॉरपोरेशन पटना है तो सब कुछ पटना में ही है दो ही चीज अलग याद रखना है। वह भी हालांकि पटना में ही है। एक उसमें से फतूहा में है और दूसरा जो है वह जो स्किल वाला सिल्क वाला है वह आपको भागलपुर ध्यान में रखना है। इसके बाद जो उद्योग हैं जैसे चमड़ा जो है वह पटना मुजफ्फरपुर चीनी पश्चिमी चंपारण पूर्वी

1:16:53 चंपारण सारन कागज समस्तीपुर रोहतास दरभंगा रेशम भागलपुर सूती वस्त्र गया पटना सिवान और भागलपुर औषधी मुजफ्फरपुर पटना सीमेंट रोहतास उर्वरक बरौनी प्लाईवुड हाजीपुर पूर्णिया और पटना तो प्लाईवुड जो है वह हाजीपुर हाजीपुर पूर्णिया और पटना है कालीन जो है वह औरंगाबाद ओबरा और ऑयल रिफाइनरी बरौनी बेगूसराय। तो यह सारा चीज जो है वह आपको ध्यान में थोड़ा बहुत इसको रखना पड़ेगा और बिहार में औद्योगिक क्षेत्रों के विकास के लिए ही जो है वह बियडा की जो है वह स्थापना की गई है 1974 में और इसके कार्यालय जो है वह पटना, भागलपुर, मुजफ्फरपुर और दरभंगा में है। बिहार में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए जो

1:17:40 नीति बनाई गई है वह 2016 में बनाई गई और इसके अलावा यह उद्योगों के विकास के लिए है। फिर उद्योगों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए 2022 में भी जो है नीति बनाई गई। चमड़ा और वस्त्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भी 2022 में नीति बनाई गई। ठीक है? बिहार में अगर हम ट्रांसपोर्ट की बात करें तो सड़क है, रेल है, वायु है और जल है। अब हम देखते हैं राष्ट्रीय राजमार्ग। तो बिहार में जो राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई है वह 6130 कि.मी. है और सबसे ज़्यादा पटना में है और सबसे कम जो है वह शिवहर में है। स्टेट हाईवे 3637 कि.मी. है। सबसे ज्यादा गया में है। गया में बहुत बार पूछा जाता है परीक्षा में और फिर सबसे कम जो है वह शिवहर में है। मुख्य जिला यानी मेन डिस्ट्रिक्ट रूट की बात

1:18:26 करें तो 16,296 कि.मी. है। पटना में सबसे ज्यादा है और शिवहर में सबसे कम है। राष्ट्रीय राजमार्ग के जैसा ही है यह और ग्रामीण पत्र 1ज़ 116880 है। मधुबनी में सबसे ज़्यादा है और अरवल में सबसे कम है। इसमें जो मेन है वह ध्यान रखेंगे राज्य वाला और नेशनल हाईवे नेशनल हाईवे और राज्य वाला जो है वह इसको आप ध्यान में रखेंगे। ठीक है? चलिए चार मेगा एक्सप्रेसवे की अगर बात करें तो गोरखपुर में सिलीगुड़ी है। गोरखपुर मतलब गोरखपुर सिलीगुड़ी जो एक्सप्रेस है वह बिहार से गुजरता है। रशौर हदिया भी बिहार से गुजरता है। बक्सर भागलपुर भी बिहार से गुजरता है और पटना पूर्णिया भी जो है वह बिहार से गुजरता है। ये चारों जो मेगा

1:19:12 एक्सप्रेसवे है। मेगा एक्सप्रेसवे का मतलब होता है उसमें लेन जो है वह ज्यादा होते हैं। छह आठ लेन होता है। स्पीड चलती है गाड़ियां। एग्जिट पॉइंट कम होता है। जैसे अब जैसे एग्जिट पॉइंट होगा तभी ना गाड़ी को बीच-बीच में स्टॉप करना पड़ेगा क्योंकि अचानक से कोई गाड़ी बाहर निकलेगा तो एग्जिट पॉइंट जो है वो इसमें कम होता है। अगर हम रोड डेंसिटी की बात करें तो जैसा हमने सर्वे में भी पढ़ा था 3167

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