Communication Updated Marathon | UGC NET Paper-1 Unit-4 | Concept + PYQs #ugcnet #ugcnetpaper1

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो यूजीसी नेट पेपर 1 के लिए कम्युनिकेशन यूनिट पर एक मैराथन है। इसमें कम्युनिकेशन का अर्थ, प्रकार, विशेषताएं, प्रभावी कम्युनिकेशन, बैरियर्स और मास मीडिया जैसे विषय शामिल हैं। रवीना द्वारा प्रस्तुत, यह वीडियो परीक्षा-आधारित दृष्टिकोण प्रदान करता है, जिसमें अवधारणाओं और पीवाईक्यू को शामिल किया गया है।

मुख्य बातें:

  • कम्युनिकेशन का अर्थ और प्रक्रिया
  • कम्युनिकेशन के प्रकार: वर्बल, नॉनवर्बल, फॉर्मल, इनफॉर्मल, इंटरपर्सनल, इंट्रापर्सनल, वर्टिकल, हॉरिजॉन्टल, डायगोनल, इंटरकल्चरल, सिंक्रोनस, एसिंक्रोनस
  • कम्युनिकेशन के मॉडल: एरिस्टोटल, हेलिकल, शरम, कैट्स, शैनन-वीवर, बलो, लेगिंस, एलेक्स फिश
  • प्रभावी कम्युनिकेशन के लिए 7 सी
  • क्लासरूम कम्युनिकेशन में प्रभावी कम्युनिकेशन
  • कम्युनिकेशन में बैरियर्स और उन्हें दूर करने के उपाय
  • मास मीडिया और सोसाइटी, मास कम्युनिकेशन की थ्योरी
  • भारतीय सिनेमा का इतिहास और महत्वपूर्ण फिल्में

परिचय

इस वीडियो में इंकलकेट लर्निंग चैनल पर यूजीसी नेट पेपर 1 की चौथी यूनिट, कम्युनिकेशन पर मैराथन की शुरुआत की गई है। रवीना इस यूनिट में कम्युनिकेशन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करेंगी, जो दिसंबर परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। मैराथन में अवधारणाओं के साथ-साथ प्रश्न भी शामिल होंगे, जो परीक्षा के लिए पर्याप्त होंगे। यदि सिलेबस में बदलाव नहीं होता है, तो आगे की परीक्षाओं के लिए भी यह उपयोगी होगा, जिसमें केवल पीवाईक्यू जोड़े जाएंगे।

कम्युनिकेशन: अर्थ और प्रक्रिया

कम्युनिकेशन शब्द की उत्पत्ति लेटिन शब्द 'कम्युनिस्ट' से हुई है, जिसका अर्थ है 'कॉमन' या 'शेयर्ड'। डिक्शनरी के अनुसार, कम्युनिकेशन विचारों का आदान-प्रदान है। कम्युनिकेशन प्रक्रिया में सेंडर, एनकोडर, मीडियम/चैनल, रिसीवर और फीडबैक शामिल होते हैं। प्रभावी कम्युनिकेशन के लिए फीडबैक महत्वपूर्ण है। टेलीग्राफ को सूचना का पहला हाईवे माना जाता है। भरत मुनि, प्राचीन भारतीय संगीतज्ञ और नाट्यशास्त्र के लेखक, पहले कम्युनिकेशन स्कॉलर माने जाते हैं।

कम्युनिकेशन के प्रकार

कम्युनिकेशन कई प्रकार के होते हैं, जिनमें वर्बल (शब्दों का उपयोग), नॉनवर्बल (शारीरिक भाषा, इशारे), फॉर्मल (आधिकारिक, संरचित), इनफॉर्मल (अनौपचारिक, कैजुअल), इंटरपर्सनल (दो या दो से अधिक लोगों के बीच), इंट्रापर्सनल (स्वयं से बात करना), वर्टिकल (उच्च स्तर से निम्न स्तर तक या इसके विपरीत), लेटरल (समान स्तर पर), डायगोनल (विभिन्न विभागों और स्तरों के बीच), इंटरकल्चरल (विभिन्न संस्कृतियों के बीच), सिंक्रोनस (वास्तविक समय में), और एसिंक्रोनस (वास्तविक समय में नहीं) शामिल हैं। इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन में तीन चरण होते हैं: फैटिक (शुरुआती बातचीत), पर्सनल (गहरी चर्चा), और इंटिमेट (घनिष्ठ संबंध)। एडवर्ड टी. हॉल ने इंटरकल्चरल कम्युनिकेशन शब्द दिया। काइनेसिक्स शारीरिक गतिविधियों के माध्यम से कम्युनिकेशन है, जबकि हेप्टिक्स स्पर्श के माध्यम से कम्युनिकेशन है। एथनोसेंट्रिज्म में व्यक्ति अपनी संस्कृति को सर्वश्रेष्ठ मानता है। कॉन्टीग्यूस कम्युनिकेशन डायरेक्ट होता है, जबकि नॉन-कॉन्टीग्यूस में डिस्कनेक्शन होता है। डैक्टिक कम्युनिकेशन में शिक्षक छात्रों को स्पष्ट निर्देश देते हैं। जॉन पॉवेल ने कम्युनिकेशन के पांच स्तर बताए हैं: पीक, गट, आइडिया और जजमेंट शेयर करना, दूसरों के बारे में फैक्ट रिपोर्ट करना और क्लीसी कम्युनिकेशन। सिमायोटिक कम्युनिकेशन संकेतों और प्रतीकों का अध्ययन है, जिसमें फर्नंदिन डी शोष और चार्ल्स सांडर स्पियर्स के सिद्धांत शामिल हैं। मेटा कम्युनिकेशन कम्युनिकेशन के बारे में कम्युनिकेशन है।

बौद्ध कम्युनिकेशन

बौद्ध कम्युनिकेशन में बुद्धिज्म के दर्शन का पालन किया जाता है, जो हायरार्की, जातिवाद और स्थायीता की बात नहीं करता है। यह सभी चीजों को क्षणिक मानता है और मानव पीड़ा के समाधान पर ध्यान केंद्रित करता है। बौद्ध धर्म गैर-स्व की थ्योरी का समर्थन करता है और सामाजिक दूरी का पालन नहीं करता है, क्योंकि यह सभी को समान मानता है।

कम्युनिकेशन के मॉडल

कम्युनिकेशन के कई मॉडल हैं, जिनमें एरिस्टोटल का मॉडल (स्पीकर-केंद्रित), शरम का मॉडल (अनुभव के क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित), कैट्स का मॉडल (मध्यस्थता), शैनन और वीवर का मॉडल (गणितीय), फ्रैंक डांस का हेलिकल मॉडल, बलो का एसएमसीआर मॉडल और लेसवेल का 5W मॉडल शामिल हैं। एलेक्स फिश ने ट्रांसमिशन, इंटरेक्टिव और ट्रांजैक्शनल मॉडल के बारे में बात की। एरिस्टोटल का मॉडल वक्ता, विषय और श्रोताओं पर केंद्रित है। हेलिकल मॉडल चक्रीय, प्रासंगिक और संचयी है। शरम के मॉडल में अनुभव का क्षेत्र महत्वपूर्ण है। कैट्स का मॉडल गेटकीपर्स की भूमिका पर जोर देता है। शैनन और वीवर के मॉडल में शोर और तीन स्तर की समस्याएं (तकनीकी, सिमेंटिक और प्रभावशाली) शामिल हैं। बलो का एसएमसीआर मॉडल स्रोत, संदेश, चैनल और रिसीवर पर केंद्रित है। लेगिंस मॉडल में कम्युनिकेटर, संदेश, चैनल, उपचार, श्रोता और प्रतिक्रिया शामिल हैं।

कम्युनिकेशन के प्रकार: लीनियर, इंटरेक्टिव और ट्रांजैक्शनल

एलेक्स फिश के अनुसार, कम्युनिकेशन तीन प्रकार के होते हैं: लीनियर (एकतरफा, फीडबैक नहीं), इंटरेक्टिव (दोतरफा, फीडबैक और अनुभव शामिल) और ट्रांजैक्शनल (जटिल, एक साथ, तत्काल फीडबैक)। लीनियर मॉडल में एरिस्टोटल, लेसवेल और शैनन-वीवर के मॉडल शामिल हैं। इंटरेक्टिव मॉडल में ऑस्गुड-शरम मॉडल शामिल है। ट्रांजैक्शनल मॉडल में बर्नल का मॉडल और डांस का हेलिकल मॉडल शामिल हैं। वैसले और मैकलन का मॉडल आसपास के वातावरण से प्रतिक्रिया पर केंद्रित है। गिलियन ब्राउन और जॉर्ज यूल ने ट्रांजैक्शनल और इंटरेक्शनल भाषा के बीच अंतर किया। क्रैग ने सात अलग-अलग परंपराओं का प्रस्ताव रखा: अलंकारिक, सिमायोटिक, फिनोमिनोलॉजिकल, साइबरनेटिक्स, सोशियोसाइकोलॉजिकल, सोशियोकल्चरल और क्रिटिकल।

प्रभावी कम्युनिकेशन

प्रभावी कम्युनिकेशन तब होता है जब संदेश स्पष्ट हो और सफलतापूर्वक प्राप्त हो जाए। इसमें 7 सी शामिल हैं: स्पष्टता, संक्षिप्तता, ठोसता, शुद्धता, सुसंगतता, पूर्णता और शिष्टाचार। क्लासरूम में प्रभावी कम्युनिकेशन के लिए शिक्षक, छात्र, संदेश, निर्देशात्मक विधि/मीडिया और सीखने का माहौल महत्वपूर्ण हैं। शिक्षकों को वास्तविक, कुशल और लचीला होना चाहिए। संदेश स्पष्ट, विशिष्ट और प्रासंगिक होना चाहिए। निर्देशात्मक विधियाँ और मीडिया प्रासंगिक और विविध होनी चाहिए। सीखने का माहौल अनुकूल होना चाहिए। कॉल और चैन के मॉडल में पांच चरण होते हैं: संदेश का निर्माण, एन्कोडिंग, ट्रांसमिशन, डिकोडिंग और फीडबैक/मूल्यांकन।

कम्युनिकेशन में बैरियर्स

कम्युनिकेशन में कई प्रकार के बैरियर्स होते हैं, जिनमें साइकोलॉजिकल (भूख, थकान), फिजिकल (शोर, खराब रोशनी), फिजियोलॉजिकल (शारीरिक स्थिति), सिमेंटिक (भाषा की समस्या), और इंटरफेरेंस (रेट्रोएक्टिव, प्रोएक्टिव) शामिल हैं। साइकोलॉजिकल बैरियर्स में मानसिक स्थिति, दृष्टिकोण और भावनाएं शामिल हैं। लिंग्विस्टिक बैरियर्स में भाषा और सांस्कृतिक अंतर शामिल हैं। सिमेंटिक बैरियर्स में शब्दों और प्रतीकों की गलत व्याख्या शामिल है। हाई-कॉन्टेक्स्ट कल्चर में निहित कम्युनिकेशन होता है, जबकि लो-कॉन्टेक्स्ट कल्चर में स्पष्ट कम्युनिकेशन होता है। मैकेनिकल बैरियर्स में उपकरण की खराबी शामिल है, जबकि फिजिकल बैरियर्स में पर्यावरण संबंधी समस्याएं शामिल हैं। संगठनात्मक बैरियर्स में जटिल हायरार्की और कठोर नियम शामिल हैं।

कम्युनिकेशन के प्रभाव

कम्युनिकेशन के कई प्रभाव होते हैं, जिनमें एस्थेटिक (कलात्मक), इंस्ट्रूमेंटल (कार्यात्मक), प्रेस्टीज (वक्ता की विश्वसनीयता), रिइंफोर्समेंट (मौजूदा दृष्टिकोण को मजबूत करना) और रिस्पाइट (राहत) शामिल हैं। सिंप्लेक्स कम्युनिकेशन एकतरफा होता है, हाफ-डुप्लेक्स दोतरफा होता है लेकिन एक समय में एक दिशा में, और फुल-डुप्लेक्स दोतरफा होता है और एक ही समय में दोनों दिशाओं में होता है। कम्युनिकेशन मीडिया में पारंपरिक (प्रिंट, ब्रॉडकास्ट), डिजिटल (सोशल मीडिया, ऑनलाइन) और इंटरेक्टिव (वेबिनार, गेमिंग) शामिल हैं। एनालॉग मीडिया निरंतर संकेतों का उपयोग करता है, जबकि डिजिटल मीडिया असतत संकेतों का उपयोग करता है। मार्शल मैकलुहान ने मीडिया को हॉट (उच्च परिभाषा) और कूल (कम परिभाषा) में विभाजित किया। फिल्मों को हाईब्रो (बौद्धिक), मिडिलब्रो (संतुलित) और लोब्रो (मनोरंजक) में विभाजित किया गया है।

मास कम्युनिकेशन और सोसाइटी

मास कम्युनिकेशन में सिलेक्टिव एक्सपोजर, कन्फर्मेशन बायस, कॉग्निटिव डिसोनेंस, सिलेक्टिव अटेंशन और कॉन्ग्रुएंट इनफार्मेशन शामिल हैं। मास मीडिया के प्राथमिक कार्य सूचित करना, मनोरंजन करना, शिक्षित करना और सामाजिक बनाना है। मास कम्युनिकेशन में स्रोत, संदेश, माध्यम, डिकोडिंग और फीडबैक शामिल हैं। सोशियोलॉजिकल थ्योरी में मैजिक बुलेट थ्योरी, उपयोग और संतुष्टि थ्योरी, एजेंडा सेटिंग थ्योरी, फ्रेमिंग थ्योरी, टू-स्टेप फ्लो थ्योरी, कल्टीवेशन थ्योरी, स्पाइरल ऑफ साइलेंस थ्योरी और नॉलेज गैप थ्योरी शामिल हैं। नॉर्मेटिव थ्योरी में सत्तावादी थ्योरी, स्वतंत्रतावादी थ्योरी, सोवियत मीडिया थ्योरी और सामाजिक जिम्मेदारी थ्योरी शामिल हैं।

भारतीय सिनेमा का इतिहास

भारतीय सिनेमा के इतिहास में राजा हरिश्चंद्र (1913, पहली फुल-लेंथ फीचर फिल्म), आलम आरा (1931, पहली टॉकी फिल्म), और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (1952) शामिल हैं। महत्वपूर्ण फिल्मों में दो बीघा जमीन, पाथेर पांचाली, मदर इंडिया, मुगल-ए-आजम और गरम हवा शामिल हैं। फिल्म शहरों में इनोवेटिव फिल्म सिटी (बेंगलुरु), रामोजी फिल्म सिटी (हैदराबाद), प्रयाग फिल्म सिटी (कोलकाता), एमजीआर फिल्म सिटी (चेन्नई) और दादासाहेब फाल्के चित्रनगरी (मुंबई) शामिल हैं। नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (नई दिल्ली) एक महत्वपूर्ण संस्थान है। भारत में ब्रॉडकास्टिंग की शुरुआत 1923 में हुई, ऑल इंडिया रेडियो 1936 में बना और फिल्म डिवीजन ऑफ इंडिया 1948 में बना। हॉलीवुड 1911 में स्थापित हुआ, बीबीसी 1922 में और हेस कोड 1930 में।

पीवाईक्यू और निष्कर्ष

वीडियो के अंत में, पिछले वर्षों के प्रश्नों (पीवाईक्यू) पर चर्चा की गई, जिसमें इंटरफेरेंस, फिल्मों का क्रम, कम्युनिकेशन में बैरियर्स, फुल डुप्लेक्स कम्युनिकेशन, मास मीडिया के कार्य, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल चैनल में दोष, सिनेमैटोग्राफी के 5 सी, फिल्म निर्देशकों और फिल्मों का मिलान, क्लासरूम कम्युनिकेशन, पहली फिल्म के निर्देशक, और बहुत कुछ शामिल हैं। यह निष्कर्ष निकाला गया कि कम्युनिकेशन यूनिट से सीधे और समझने योग्य प्रश्न आते हैं, लेकिन कुछ तथ्यात्मक प्रश्न कठिन हो सकते हैं।

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Transcript

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0:00 हेलो नमस्कार। वेलकम टू इंकलगेट लर्निंग। फोर्थ यूनिट जो है आज उसकी मैराथन है जी। यह कम्युनिकेशन हमारा टॉपिक है। यानी यह जो यूनिट है इसके अंदर कम्युनिकेशन की बातें हमें करनी है। यूजीसी नेट पेपर वन की मैराथनंस मैं आपको कवर करवा रही हूं। दीज़ मैराथनंस प्लस जो क्वेश्चंस इसमें हो रहे हैं मोर दैन इनफ रहेंगे आपके लिए। अभी स्पेसिफिकली दिसंबर के लिए। ठीक है? आगे के लिए भी जब सिलेबस चेंज नहीं होता है तो बस पीवाईक्यूस ऐड होते चले जाते हैं। कॉन्सेप्ट वही रहते हैं। ओके? दिस इज़ प्रेजेंटेड बाय मी रवीना। वीडियो इनफेटिव लगे तो इनकेट लर्निंग को लाइक, शेयर, सब्सक्राइब जहां आप कर सकते हैं। इट्स अब्सोलुटली फ्री। ऑलरेडी तीन यूनिट की मैराथन हो चुकी हैं। नहीं देखी हैं तो फॉर श्योर उनको देख लीजिएगा। ओके? कम्युनिकेशन का ये सिलेबस है एज़ पर हमारा जो सिलेबस है ऑफिशियल सिलेबस। सो कम्युनिकेशन में ये

0:47 बेसिक मीनिंग, टाइप्स, कैरेक्टरिस्टिक्स की बात करते हैं। इफेक्टिव कम्युनिकेशन की बात करते हैं। उसमें भी पर्टिकुलर दे दिया वर्ब, नॉनवर्बल, इंटरकल्चरल, ग्रुप और क्लासरूम कम्युनिकेशन। प्लस कम्युनिकेशन में क्या-क्या बैरियर्स आ सकते हैं और मास मीडिया और सोसाइटी क्या है? या मास मीडिया का सोसाइटी से क्या रिलेशन है? या बेसिकली मास मीडिया से रिलेटेड, उसकी थ्योरीज से रिलेटेड एक आधी बार क्वेश्चन आ जाते हैं। ओके? सो बिल्कुल पेपर ओरिएंटेड जो है हम इस यूनिट को कवर करेंगे। पहले मैं कांसेप्ट करवाऊंगी जो इन टॉपिक्स को कवर करेंगे और उसके बाद जो है पीवाईक्यूस रहेंगे। ये जो पीवाईक्यूस हैं जिस बच्चे को नहीं पता जो पहली बार देख रहा है ये जो जून 2025 में हुए थे प्लस जो आपके दिसंबर 2024 में हुए थे तो वो दोनों क्वेश्चंस जो है वो मिला के तब के और ये पीवाईक्यूस

1:33 आपको देखने को मिल रहे हैं। ठीक है जी। फिर भी कोई डाउट हो तो कंफ्यूजन हो तो आप जो है कमेंट करके पूछ सकते हो। समझ आ जाए तो कमेंट करके बता सकते हो ताकि एक फीडबैक जो है वो रहे हमारे पास। ओके? कि आपको समझ आया कि नहीं आया। सबसे पहले है कम्युनिकेशन। तो देखो वैसे तो इस इस यूनिट से बहुत ईजी से ही क्वेश्चन आते हैं कॉनसेप्चुअल या तो इजी आएंगे बहुत जो आपको समझ आ जाएंगे या फिर बहुत फ़क्चुअल आ जाएंगे जिसमें वो जो मूवीज के नाम पूछे जाते हैं ना वो इसी यूनिट के अंदर आ जाते हैं क्योंकि मास मीडिया की बात हो गई। ओके? तो वो भी मैंने जो पीवाईक्यूस में आए हुए हैं मूवीज वगैरह या जो भी नाम जो भी इंपॉर्टेंट चीजें जो फ़क्चुअल हैं वो आप इसमें जितना मैं करवाऊंगी उतना ध्यान रख लीजिएगा। कैसे तो करके आपका क्वेश्चन सॉल्व हो ही जाएगा। डायरेक्ट नहीं तो इनडायरेक्ट वे में सॉल्व हो जाएगा। एलिमिनेशन मेथड से। ओके? सो कम्युनिकेशन

2:19 तो जब वर्ड है कम्युनिकेशन ये क्वेश्चन भी एक बार आया हुआ है कि कम्युनिकेशन, कम्युनिटी और कम्युनियन ये जो वर्ड्स हैं इनका कॉमन एंटाइमोलॉजिकल रूट है। यानी ये एक ही वर्ड से निकल के आए हैं कहीं ना कहीं। सो ये कौन सा वर्ड है? तो ये लेटिन वर्ड कम्युनिस्ट जिसका मतलब कॉमन या शेयर्ड होता है उससे निकल के आए हैं। जी। ओके? सो ये चीज भी याद रखनी है कि हां ठीक है इन तीनों का एंटाइमोलॉजिकल रूट सेम है और ये भी याद रखनी है कि वो लेटिन वर्ड कॉमनस है। ओके डिक्शनरी में आप मतलब देखोगे तो कम्युनिकेशन का मतलब क्या है? एक्सचेंज ऑफ़ थॉट्स या कन्व करना कोई भी इनेशन या फीलिंग आपकी है तो या लिखना उस चीज के बारे में। ठीक है? सो जैसे अभी मैं आप लोगों से बात कर रही हूं। यह भी तो एक तरीके का कम्युनिकेशन ही हो गया। मैं कोशिश कर रही हूं एटलीस्ट। ठीक है? कि कोई

3:05 इनेशन कन्व की जा सके। सो कम्युनिकेशन का मतलब हमेशा एक्सचेंज ही रहा है। एक्सचेंज ऑफ थॉट्स, कन्व ऑफ इनफेशन उसको हम कम्युनिकेशन बोलते हैं। अगर इसके प्रोसेस को देखें तो इसमें सबसे पहले सेंडर रहेगा। यानी मान लो मैं आपको कोई मैसेज भेज रही हूं तो मैं सेंडर हो गई। एनकोडर हो गई क्योंकि मैंने उस मैसेज को एनकोड किया है, लिखा है या एक पर्टिकुलर फॉर्म में मैं लेके आई हूं उस मैसेज को। देन मैंने एक मीडियम या चैनल के थ्रू जैसे यहां पे YouTube या सोशल मीडिया एक मीडियम हो गया जिसके थ्रू मैं आपको इंफॉर्मेशनेशन या मैसेज या ये जो मैराथनस हैं ये भेज रही हूं। रिसीवर आप हो गए जो डिकोड करोगे यानी कि जो चीजें मैं बता रही हूं समझाने की कोशिश कर रही हूं उसको समझने की कोशिश करना इंटरप्रेट करने की कोशिश करना। ओके? जब आपको ये मैसेज मिल गया या आपने ये सारी

3:51 मैराथन देख ली उसके बाद जब आप फीडबैक दें ठीक है तो वो प्रॉपर जो है वो कंप्लीट कम्युनिकेशन माना जाता है। सो जब भी इफेक्टिव कम्युनिकेशन की बात आएगी तो फीडबैक उसमें हमेशा इंक्लूडेड रहेगा क्योंकि इफेक्टिव तभी बन पाएगा जब सामने से भी ये बात पता चले डिकोडर की तरफ से कि हां ठीक है समझ आ गया। ओके? सो वो चीज है। सो सेंडर रिसीवर एक मीडियम या चैनल के थ्रू हम मैसेज को भेजते हैं और लास्ट में फीडबैक होता है। ये बात आपको पता हो। फर्स्ट हाईवे ऑफ़ इनेशन टेलीग्राफ को माना जाता है क्योंकि सबसे पहले टेलीग्राफ शुरू हुआ जहां से इनेशन एक जगह से दूसरी जगह पहुंचनी शुरू हुई। और इनफैक्ट भारत मुनि जो हैं भरत मुनि एंशिएंट इंडियन थिएटोलॉजिस्ट जो हैं इनको बोला जाता है। म्यूजिकोलॉजिस्ट बोला जाता है। इन्होंने नाट्यशास्त्र लिखा है। ये आपको याद रखना

4:38 है। ठीक है? उसके साथ-साथ इनको फर्स्ट कम्युनिकेशन स्कॉलर जो है वो कंसीडर किया जाता है। इंडियन थिएटिकल आर्ट फॉर्म के फादर तो बोला ही जाता है बट फर्स्ट कम्युनिकेशन स्कॉलर भी इनको के नाम से भी इनको जाना जाता है। ओके देन है जी टाइप्स। टाइप्स में बहुत सारे वर्ड्स आ जाएंगे। ऐसा कुछ स्पेसिफिक नहीं है कि यही टाइप है। आपको वर्ड देख के समझ आना चाहिए कि किस तरीके का कम्युनिकेशन होगा। जैसे वर्बल जिसमें यूज ऑफ वर्ड्स है। अब चाहे वो आप बोल के बता रहे हो, लिख के बता रहे हो, कैसे भी बता रहे हो। सो वो वर्बल कम्युनिकेशन हो गया। नॉन वर्बल मतलब क्यू के थ्रू या होता है ना एक्शंस स्पीक लाउडर देन वर्ड्स। तो वर्ड्स की बजाय आप जो है एक्शंस के थ्रू चीजों को समझा रहे हो। अब वो आपकी बॉडी लैंग्वेज हो सकती है, अपीयरेंस हो सकती है, साउंड हो सकती है या इशारे हो सकते हैं, क्यूज़ हो सकते हैं तो

5:24 वो सारे नॉन वर्बल में आ जाएंगे। इजी है। ठीक है? फॉर्मल नॉन फॉर्मल। सो फॉर्मल क्या रहेगा? जो ऑफिशियली स्ट्रक्चरर्ड और सिस्टमैटिक तरीके से जब आप इनेशन जो है वो क्या कर रहे हो? एक पॉइंट से दूसरे पॉइंट पे भेज रहे हो या एनकोडर टू डिकोडर इनेशन पास ऑन हो रही है। सो वो फॉर्मल रहेगा। ठीक है? जैसे ऑफिशियल नोटिफिकेशंस रिलीज आउट होना वो स्ट्रक्चरर्ड वे में होती हैं सारी चीजें। उनमें ऑलरेडी डिफाइंड रूल्स चीजें सब जो है बहुत अच्छे से यूज़ किया होता है। जो आपकी लैंग्वेज है वो प्रोफेशनल और एटीिकेट्स के वे में बहुत अच्छे से मेंशन की होती हैं चीजें। ओके? तो एक्यूरेसी, प्रोफेशनलिज्म और अकाउंटेबिलिटी इसके अंदर ज्यादा रहेगी। नॉन फॉर्मल या इनफॉर्मल कम्युनिकेशन थोड़ा कैजुअल और अनऑफिशियल रहेगा। जब नॉन फॉर्मल की बात करते हैं तो नॉन फॉर्मल का ही एक

6:11 टाइप जो है ग्रेप माइन कम्युनिकेशन आ जाता है। ठीक है? तो ग्रुप और ग्रेप माइन हम देख ग्रुप मतलब ये इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन का टाइप हो गया। एक तरीके से इंटरपर्सनल अभी हम कवर करेंगे तो इंटरपर्सनल में यही चीज होती है कि दोद लोग जो है आपस में बात कर रहे हैं या दो से ज्यादा भी हो सकते हैं। तो जब दो से ज्यादा हो गए तो हम उसको ग्रुप मान लिया। ओके? सो ग्रेप वाइन कम्युनिकेशन भी इनफॉर्मल का ही टाइप माना जाता है। अनऑफिशियल फॉर्म है ये। ये आपको ध्यान रखना है। ठीक है? इसमें कोई डिफाइंड स्ट्रक्चर या एजेंडा होता नहीं। जैसे होती है ना गोसिप्स चलती हैं या फॉल्स स्टेटमेंट्स तो वो ग्रे वाइन कम्युनिकेशन से ही ज्यादातर निकलती हैं। क्योंकि वहीं से जब आपको कोई स्ट्रक्चर वे में चीजें नहीं है। बट वो बातें हो रही हैं। ठीक है? ठीक है? तो आधा ट्रुथ्स लगा लो या फॉल्स स्टेटमेंट्स लगा लो या गसिप्स या रूमर्स

6:56 लगा लो। तो वो किसी ऑर्गेनाइजेशन में जब फैलते हैं तो दैट इज़ ग्रेट फाइन कम्युनिकेशन। ओके? इंटरपर्सनल जब एक्सचेंज ऑफ़ इनेशन जो है दो या दो से ज्यादा लोगों के बीच में हो। ओके? तो ये ग्रुप वाला जो है वो इसी का ही पार्ट हो जाएगा एक तरीके से। क्योंकि ग्रुप में दो से ज्यादा लोग हैं। एक छोटी टीम या स्मॉल ग्रुप लगा लो। वो स्टडी के लिए इकट्ठे हुए या व्हाटएवर द रीज़ंस आर। बट जब कई लोग बैठ के मिलके बात कर रहे होते हैं तो वो ग्रुप कम्युनिकेशन हो गया। ओके? इंटरपर्सनल इंटर यानी एक अकेले कोई बात नहीं कर रहा है। दूसरा लोग चाहिए ना तो दो या दो से ज्यादा लोगों की बात हो रही है। तो जब जैसे चौपाल में लोग बैठते हैं उसको हम ग्रुप कम्युनिकेशन बोल देंगे। बट वो इंटरपर्सनल भी तो है। इंटरपर्सनल में यूजुअली ये तीन स्टेजेस देखने को मिलती हैं जो पहले पूछी भी गई हैं। फैटिक स्टेज फैटिक स्टेज फैटिक

7:43 कम्युनिकेशन भी होता है एक तरीके से टाइप्स में। सो फैटिक स्टेज रहेगी जो स्मॉल टॉक के लिए या इनिशिएट करने के लिए कैजुअल वे में चीजों को शुरू करने के लिए जो स्टेज रहेगी। ठीक है? जैसे मैं आपसे मिली मैं आपको बोल रही हूं हेलो कैसे हो? सो वो चीज जो ग्रीट करने वाली चीज है वो फैटिक स्टेज में आएगी। ओके? देन है पर्सनल जी। जैसे-जैसे रिलेशनशिप बढ़ेगा आप जानना शुरू करोगे। डिस्कशन डीपर होता जाएगा। ओके? और देन इंटिमेट है ये रिजर्व्ड फॉर वेरी क्लोज रिलेशनशिप्स जहां पे बहुत हाई लेवल ऑफ़ इंटिमेसी और वनरेबिलिटी प्रेजेंट होती है। ओके? तो ये तीन स्टेजेस जो है वो इंटरपर्सनल रिलेशनशिप में देखने को मिलती हैं। इंटर एक दूसरे के साथ बात करना था। इंट्रा खुद के साथ तो सेल्फ टॉक, थिंकिंग, रिफ्लेक्शन ये एक तरीके से इस तरीके से जब आप कोई चीज़ अपने आप को ही कम्युनिकेट करने

8:30 की कोशिश कर रहे होते हो तो वो इंट्रा पर्सनल हो जाएगा। सो इंट्रा और इंटर में आपको फर्क पता होना चाहिए। ओके? देन वर्टिकल कम्युनिकेशन वर्टिकल और डायगोनल हॉरिजॉन्टल ये चीजें होती है। वर्टिकल मतलब एक हायरार्की लेवल है। ठीक है? सो मान लो मैनेजर से एंप्लई तक इनेशन जा रही है या एंप्लई से मैनेजर तक जा रही है। सो वर्टिकल में अपवर्ड डाउनवर्ड दो चीजें हो सकती हैं। ओके? वर्टिकल अपवर्ड की बात करेंगे तो यानी नीचे से एंप्लई से मैनेजर तक या मैनेजमेंट तक इनेशन जा रही है। डाउनवर्ड में उल्टा होगा। ठीक है? मैनेजमेंट से एंप्लाइजज़ तक इनेशन आ रही है। तो वो एक हायरार्की सी बन गई। ओके? अपवर्ड कम्युनिकेशन बहुत जरूरी होता है क्रूशियल फीडबैक के लिए क्योंकि अपवर्ड में आप नीचे से ऊपर पहुंचा रहे हो इनेशन तो क्या-क्या चीजें ग्राउंड लेवल पे हो

9:15 रही हैं या क्या चीजें जो है वो जो इंप्लीमेंटेशन होना चाहिए वो हो रहा है नहीं हो रहा है तो फीडबैक बहुत जरूरी है ना सो एक क्रूशियल फीडबैक जो है इस फॉर्म में ऊपर तक पहुंचाया जा सकता है जो एंप्लाइजज़ के सजेशंस हैं कंसर्न्स हैं या प्रोग्रेस रिपोर्ट है वो सारी चीजें जो है वो एक दूसरे तक पहुंचाई जा सकती है नीचे से ऊपर डाउनवर्ड जरूरी है इंस्ट्रक्शन कन्व करने के लिए, गोल्स को कन्व करने के लिए, पॉलिसीज या परफॉर्मेंस की फीडबैक देने के लिए कि कैसा काम आपने किया है। सो डाउनवर्ड कम्युनिकेशन यूजुअली इंस्ट्रक्शंस के लिए ताकि ऊपर से क्लियर इंस्ट्रक्शंस दी जाए और नीचे वाला बंदा वो काम कर दे। ओके? लेटरल रहेगा सेम लेवल पे। दो कलीग्स हैं। सेम लेवल पे जो कम्युनिकेशन रहेगा उनका ऑर्गेनाइजेशन में वो लेटरल हो जाएगा। डायगोनल कम्युनिकेशन मतलब दो अलग-अलग डिपार्टमेंट है। अलग-अलग

10:02 हायरार्कीज़ हैं। मान लो एक डिपार्टमेंट का क्लर्क दूसरे डिपार्टमेंट के मैनेजर से बात कर रहा है या कम्युनिकेट कर रहा है या वाइसवरसा। सो इस तरीके से यानी हायरार्की में भी आप अलग-अलग लेवल पर हो और डिपार्टमेंट में भी आप अलग-अलग लेवल पे हो। तो दैट इज़ डायगोनल कम्युनिकेशन। ओके? देन है इंटरकल्चरल कम्युनिकेशन। जो हमने इंट्रा और इंटरपर्सनल पढ़ा था। ये इंटरकल्चर की बात आ गई। अब इंटरवर्ड तो है ही यानी एक कल्चर की विदिन बात नहीं हो रही है। एक से ज्यादा के बीच बात हो रही है। ओके? सो एडवर्ड टी हॉल ने अपनी बुक द साइलेंट लैंग्वेज। वहां पे ये टर्म सबसे पहले दी थी। सो इसमें वही है कि आप ये प्रोसेस है जिसमें आप समझने की कोशिश कर रहे हो या जो मैसेजेस हैं इंटरप्रेट करने की कोशिश कर रहे हो बिटवीन डिफरेंट कल्चरल बैकग्राउंड्स। ठीक है? इसमें वर्बल नॉनवर्बल बाकी सारी चीजें आएंगी। बट

10:48 मेजरली दो अलग-अलग कल्चर के लोग जब कोई डिस्कशन में शामिल हैं। सो वो इंटरकल्चरल कम्युनिकेशन हो जाएगा। बिकॉज़ आप जब कोई चीज़ के ऊपर डिस्कशन भी करते हो तो भी आप अपने एक पॉइंट ऑफ व्यू के साथ आते हो ना। और वो पॉइंट ऑफ व्यू जो है वो कहीं ना कहीं इन्फ्लुएंस्ड रहता है आपके कल्चर की वजह से। ओके? सो इंटरकल्चरल मतलब दो अलग-अलग कल्चर की बात हो रही है यहां पे। ओके? ताकि मिसअंडरस्टैंडिंग्स कम हो। एम्पैेथी जो है वो फ़स्टर की जा सके। रिलेशनशिप सक्सेसफुली बिल्ड किया जा सके। सो आप कोशिश क्या कर रहे हो? आप एक क्लियर कम्युनिकेशन करने की कोशिश कर रहे हो। देन सिंक्रोनस असिंक्रोनस ये वर्ड्स आपको ध्यान रखने है। ये कम्युनिकेशन के आगे भी लगा देंगे। मीडिया के आगे भी लगा देंगे तो वो चीज आपको पता हो। सिंक्रोनस कम्युनिकेशन रियल टाइम इंटरेक्शन है। जैसे

11:35 आप किसी से फोन पे बात कर रहे हो या एक वीडियो कॉल कर रहे हो या आप जो है वीडियो कॉल में भी या वीडियो कॉन्फ्रेंस कर रहे हो जहां पे आप एक बार मान लो मैं ये क्लास लाइव ले रही होती तो वो सिंक्रोनस हो जाता। ओके? अब ये एसिंक्रोनस है क्योंकि यहां पे इमीडिएट रिस्पॉन्ससेस की जरूरत नहीं है। आप जब मैसेज करेंगे, कमेंट करेंगे उसका जवाब जब मेरे को टाइम लगेगा या मैं देखूंगी तब दे दूंगी या आप अपने हिसाब से ये क्लास देखोगे जब आपको टाइम लगेगा। राइट? सो दैट इज़ एसिंक्रोनस। तो इट्स सिंक्रोनस मेल, एसिंक्रोनस मेल, सिंक्रोनस कम्युनिकेशन, एसिंक्रोनस कम्युनिकेशन, सिंक्रोनस मीडिया, एसिंक्रोनस मीडिया। तो ये चीज़ आपको पता होनी चाहिए कि वर्ड सिंक सिंक का मतलब ही सिंक में रहना है। ठीक है? साइमलटेनियसली हो रही है चीज़। रियल टाइम इंटरेक्शन हो रहा है। एसिंक्रोनस में ऐसा कुछ भी नहीं

12:21 हो रहा है। ओके? देन है जी काइनेस ये काइनेसिक जो आपका कम्युनिकेशन है। ये बॉडी मूवमेंट के थ्रू जब आप कोई चीज जो है एक इंफॉर्मेशन दूसरे तक पहुंचाते हो। जेस्चर्स हो गए, फेशियल एक्सप्रेशंस हो गए। सो वो क्या है? जब बॉडी मूवमेंट की हेल्प लेके आप इंफॉर्मेशन दूसरे तक पहुंचा रहे हो। हेप्टिक कम्युनिकेशन जब टच कि मान लो आपने कोई चीज टच जो है वो मोस्ट सोफेस्टिकेटेड जो है और इंटिमेट है पांच सेंसेस में से कि आपने मान लो बच्चे ने अच्छा किया तो आपने कुछ नहीं बोला बस पीठ थपथपा दी तो वो पीठ थपथपाना इज़ हेप्टिक कम्युनिकेशन ओके एथेनोसेंट्रिज्म जिसमें ये वर्ड कई बार पूछ लिया जाता है जिसमें आप अपने कल्चर को ही हर वे में बेस्ट प्रूव करना चाह रहे हो। ठीक है? सो ये आईडिया है कि आप अपने कल्चर को मेन लेवल पे रख रहे हो और दूसरे वाले को नहीं समझ

13:08 रहे हो कुछ। सो वो एथनोसेंट्रिज्म रहेगा। कल्चरल रिलेटिवज़्म भी इस टर्म को कई बार बोल दिया जाता है। ओके? कॉन्टीग्यूस और नॉन कंटीनग्यूअस कम्युनिकेशन। सो कॉन्टग्यूअस में क्या हो रहा है? एक तरीके से डायरेक्ट यानी क्लोज फिजिकल प्रॉक्सिमिटी है। ठीक है? सो वो वो वहीं पे ही आपको तो डायरेक्ट कम्युनिकेशन है एक तरीके का कंटीन्यूअस कम्युनिकेशन हो सकता है। तो यूजुअली जो क्लासरूम कम्युनिकेशन है जब आप क्लास में बैठ के पढ़ रहे होते हो फेस टू फेस टीचर आपको उसी टाइम प्रेजेंट मिलता है। आप पढ़ रहे हो कोई दिक्कत आ रही है तो पूछ रहे हो। सो दैट इज़ कंटीन्यूअस कम्युनिकेशन। इनफैक्ट एक जगह ये क्वेश्चन भी आया हुआ है कि क्लासरूम कम्युनिकेशन इज़ नोन एज। सो कंटीन्यूअस होगा या फिर नॉन कंटीन्यूअस होगा? तो कंटीन्यूअस कम्युनिकेशन वो माना जाएगा। ठीक है? देन नॉन कंटीन्यूअस में क्या रहेगा जी? डिस्कनेक्शन रहेगा थोड़ा सा

13:54 चाहे वो टाइम की टर्म्स में हो चाहे वो स्पेस जो सेंडर और रिसीवर है उसकी टर्म्स में हो। ठीक है? तो देखो अगर टाइम की टर्म्स में है कि आप सेम टाइम पे सेम जगह नहीं हो और आप अलग-अलग टाइम पे चीजों को देख रहे हो तो वो एसिंक्रोनस हो गया एक तरीके से। ठीक है? ऐसे ही अगर टाइम स्पेस और मान लो मीडिएटेड है तो वो मीडिएटेड कम्युनिकेशन हो गया। वो भी एक तरीके से नॉन कॉर्ट ये कॉर्टियस रहेगा। क्योंकि इसके अंदर हम यूजुअली मीडिया को इस्तेमाल कर रहे हैं रादर देन डायरेक्ट या इमीडिएट इंटरेक्शन। राइट? सो वो चीज़ भी आपकी नॉन कंटीन्यूअस में आ जाएगी एक तरीके से। देन है नॉन जैसे यहां पे रेडियो, टीवी, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तो ये सारे नॉन कंटीन्यूअस में आ जाएंगे। ये ऑन द स्पॉट वाली चीज़ होगी। तो सिंक्रोनस कम्युनिकेशन एक तरीके से कंटीन्यूअस कम्युनिकेशन के अंडर ही आ जाएगा। देन यहां पे हमने बोला स्पेस

14:41 बिटवीन सेंडर एंड रिसीवर। तो मान लो डिस्पर्स्ड हैं पार्टिसिपेंट्स। सो वो चीज भी डिस्पर्ड्स पार्टिसिपेंट्स हैं तो वो भी नॉन कंटीन्यूअस का ही कैरेक्टरिस्टिक हो जाएगा। ओके देन डैक्टिक भी होता है जी वर्ड डैक्टिक यानी दो लोगों में एक तरीके से यूजुअली डैक्टिक कम्युनिकेशन टीचर और स्टूडेंट के बीच देखा जाता है जहां पे इंस्ट्रक्शंस देनी हो। ठीक है? सो क्लियर इंस्ट्रक्शंस देनी हो तो ये एक तरीके से इंस्ट्रूमेंटल फॉर्म ऑफ इंस्ट्रूमेंटल एजुकेशनल कम्युनिकेशन है। प्राइमरी जो फोकस करेगा ट्रांसमिट करने पे नॉलेज हो, स्किल हो, एटीट्यूड हो तो टीचर टू स्टूडेंट जो क्लियर चीजें जा रही हैं। सो ये जो रिलेशनशिप है इसको हम डैक्टिक रिलेशनशिप या डैक्टिक कम्युनिकेशन बोल देते हैं। एक और बहुत इंपॉर्टेंट इंसान है जी जॉन पॉवेल। एटलीस्ट जो इस वीडियो में

15:26 नाम आने वाले हैं उन नामों को थोड़ा सा ध्यान रखना क्योंकि इन नामों का कहीं ना कहीं इस्तेमाल हो के आपको आईडिया हो सकता है कि अच्छा ये कम्युनिकेशन से रिलेटेड है या ये नहीं है। ओके? सो ये अमेरिकन ऑथर रहे हैं। सो इनके इन्होंने पांच लेवल ऑफ कम्युनिकेशन की बात की है 1969 में इनकी एक बुक। व्हाई एम आई अफ्रेड टू टेल यू हु आई एम। तो इस किताब में इन्होंने पांच तरीके के लेवल्स की बात की है कि कम्युनिकेशन किस-किस लेवल पे होता है। ओके? पहला है पीक। पहला लेवल है पीक कम्युनिकेशन जिसमें डीपेस्ट या मोस्ट ऑनेस्ट लेवल आप इसको बोल सकते हो। ठीक है? सो काफी कंप्लीट इमोशनल इंटेलेक्चुअल इंटिमेसी आपको देखने को मिलेगी। दूसरा है गट लेवल जिसमें फर्स्ट लेवल ऑफ़ ना ऊपर वाले से थोड़ा सा बेटर है। ओके? सो ट्रू

16:12 इमोशनल इंटिमेसी आपको यहां पे देखने को मिलेगी। जहां पे इंडिविजुअल अपनी फीलिंग्स, इमोशंस ऑनेस्टली ओपनली शो कर रहा है। ठीक है? सो वो चीज़ है यहां पे। देन है शेयरिंग आइडियाज एंड जजमेंट। तो यहां पे आइडियाज शेयर करके बट वो होता है ना एक डिग्री ऑफ क्वेश्चन यहां रहेगा क्योंकि आपको जज किया जा रहा है। आपके ओपिनियन को जज किया जा रहा है। ठीक है? तो आप शेयर करने से पहले भी सोचो शायद। देन रिपोर्टिंग फैक्ट्स अबाउट अदर्स। तो यहां पे फैक्ट रिपोर्टिंग के बारे में है। और एक है क्लीसी कम्युनिकेशन। क्लसी कम्युनिकेशन वो होता है कि मोस्ट गार्डेड लेवल जो स्मॉल टॉक्स वाली बात की थी ना हमने जैसे फैटिक कम्युनिकेशन बताया था। तो क्लीसे कम्युनिकेशन को ही फैटिक कम्युनिकेशन भी कई बार बोल दिया जाता है या स्मॉल टॉक बोल दिया जाता है। ठीक है? जिसमें आप जो है होता है ना कि बिफोर मान लो मुझे आपको कोई मैसेज पास करना है और

16:59 मैं आपसे मिली बट मैंने पहले शुरुआत कैसे की? हेलो से शुरू कर लिया। ठीक है? सो ये जो वर्ड्स जो आइस ब्रेकर की तरह यूज़ किए जाते हैं या जो एंड में यूज़ किए जाते हैं। थैंक यू, गुड बाय, गुड डे। ये ये चीजें जो है वो फैटिक कम्युनिकेशन है। ठीक है? तो जब आप किसी को ग्रीट कर रहे हो तो वो फैटिक में आ जाएगा। ठीक है? ये ये जो कम्युनिकेशन है ये एक तरीके से रेपो बिल्ड करने में हेल्प करेगा। ओके? देन है जी सिंबायोटिक। सिमायोटिक कम्युनिकेशन। वर्ड जो है ये सिमायोटिक आपको ध्यान रखना है। सिमायोटिक का मतलब क्या है? साइन स्टडी ऑफ़ साइंस। साइन एंड सिंबल। ओके? तो जब आप क्योंकि आप जब भी कोई बात बोलते हो जैसे इन्होंने बोला थ्योरी ऑफ़ साइन बाय फर्नंदिन डी शोष। ओके? तो इनका कहना है कि साइन का मतलब होता है या तो से एक सिग्निफायर और एक सिग्निफाइड। कि मान लो

17:44 मैंने बोला कैट तो सी ए टी ये तो वर्ड हो गया ना तो ये जो वर्ड है ये सिग्निफायर हो गया जो सिग्निफाई कर रहा है। किस चीज को सिग्निफाई कर रहा है? जो हमारे दिमाग में एक इमेज बन गई कैट सुनते ही बिल्ली की। सो वो जो आईडिया या मेंटल थॉट आपके दिमाग में आया है वो। इन दोनों को मिला के जो है वो वर्ड जो आ गया अब वो साइन है। ओके? तो साइन का मतलब क्या हो गया? कि वो वर्ड सिग्निफायर भी और सिग्निफाइड भी। ओके? सो ये थ्योरी का नाम याद रखना है आपने। किसने दी है? दूसरा चार्ल्स सांडर स्पियर्स जो हैं इन्होंने भी साइन को क्लासिफाई किया है तीन कैटेगरी में। इंडाइससेस, आइकॉन्स और सिंबल्स। सो ये बेसिकली यही बोलते हैं कि आप कैसे कम्युनिकेट कर सकते हो या साइन के थ्रू कैसे कम्युनिकेट करोगे। ओके? तो उसमें इन्होंने ये तीन वर्ड्स यूज़ किए। उसके अलावा एक वर्ड यूज़ होता है

18:30 इंटरप्रेटेंट। ठीक है? तो इंटरप्रेटेंट जो है वो मेंटल कॉनंसेप्ट को बोल रहे हैं। इंटरप्रेटर जो है वो जो इंसान इंटरप्रेट कर रहा है उसको बोल रहे हैं। ओके? तो चार्ल्स पियर्स का ट्रायडिक मॉडल ऑफ साइन है जिसमें एक ऑब्जेक्ट होगा सब्जेक्ट मैटर बेसिकली देन एक साइन होगा और एक इंटरप्रिटेंट होगा यानी मेंटल कांसेप्ट तो ये कहीं ना कहीं आपको ऐसा सा नजर आएगा ये जो इंटरप्रेटेंट मेंटल कांसेप्ट है ये सिग्निफाइड जैसा नजर आ रहा है और ये जो ऑब्जेक्ट है ये आपको सिग्निफायर जैसा नजर आ रहा है और साइन जो है वो रिप्रेजेंट मैन हो गया ठीक है जो रिप्रेजेंट कर रहा है किसी पर्टिकुलर चीज को ओके सो ये चीज आप ध्यान रख सकते हो कि अच्छा ये तीन वर्ड्स यहां पे ये तीनों इंडाइससेस आइकंस और सिंबल्स और यहां पे साइन का जो है सिग्निफायर और सिग्निफाइड ये बात किसने

19:16 बोली है? सिमायोटिक का मतलब साइन स्टडी ऑफ़ साइन। तो साइन के मान लो आपने रेड लाइट देखी तो वो जो रेड लाइट है वो क्या सिग्निफाई कर रही है कि रुकना है। राइट? सो वो एक तरीके से सिंबल हो गया ना? तो वो सिग्निफाई क्या कर रहा है? रुकना है। लेकिन और भी चीजें सिग्निफाई कर सकता है वो। राइट? सो वो चीजें आपको बताऊं कि वो साइन से आप क्या समझ रहे हो? तो स्टडी ऑफ साइन या सिंबल्स कि कैसे वो यूज किए जाते हैं चीजों को कम्युनिकेट करने के लिए। ओके? देन एक वर्ड आता है जी मेटा कम्युनिकेशन। क्योंकि देखो ये सारे वर्ड्स यूज़ हुए हुए हैं। ये ये सारे वर्ड्स आते हैं आपके पेपर में। अब आपको अगर इनका मतलब पता होगा तो आप ऑब्वियसली बाकी सारी चीजें सॉल्व कर लोगे अगर कुछ अलग क्वेश्चन भी मिला तो। ओके? सो मेटा कम्युनिकेशन जहां वर्ड मेटा आ जाए इट इज़ अबाउट यानी मेटा

20:02 कम्युनिकेशन है तो कम्युनिकेशन अबाउट कम्युनिकेशन। यानी कि जो चीज आप ऑलरेडी कन्व कर चुके हो उसके बारे में आप बात कर रहे हो। ठीक है? मान लो आप किसी को कोई बात बोल दी आपने जोक मार दिया और उसके बाद आप बोले अरे यार आई वास जस्ट किडिंग। यानी आप जो कम्युनिकेशन ऑलरेडी कर चुके हो नाउ यू आर डिस्कसिंग और यू आर कम्युनिकेटिंग अबाउट दैट कम्युनिकेशन। ओके? सो वो चीज आपको पता होनी चाहिए कि अगर आपने ये मान लो ये बोला कि देख सीरियसली ये बात है तो वो जो सीरियसली वर्ड आपने यूज़ किया है वो उस चीज की सीरियसनेस दिखा रहा है और वो कम्युनिकेशन जो होने वाला है या हो चुका है तो उसके बारे में कम्युनिकेट कर रहा है। ओके? सो ये दोनों ही मेटा कम्युनिकेशन में वर्बल नॉनवर्बल दोनों ही क्यूज़ आएंगे। उनके साथ-साथ यानी वर्बल के साथ-साथ आप नॉन वर्बल चीजें भी यहां पे रिप्रेजेंट

20:48 करोगे। ओके? ये देखो मेटा कम्युनिकेशन से रिलेटेड इस तरीके का क्वेश्चन आपको देखने को मिल जाता है। कम्युनिकेशन के टाइप्स से रिलेटेड मैं थोड़े से क्वेश्चंस बता देती हूं जो पहले आए हुए हैं। ये क्वेश्चन रिपीट नहीं होंगे। ये इस बार वाले नहीं है। उससे भी पहले के हैं। ओके? सो एव्री कम्युनिकेशन कंटेन्स एलिमेंट्स ऑफ़ बोथ कंटेंट एंड रिलेशनशिप। हर एक कम्युनिकेशन में कंटेंट और रिलेशनशिप आपको देखने को मिलेगा। देन आई बिहेवियर प्रोवाइड्स मेटा कम्युनिकेटिव क्यूज़। सो आई बिहेवियर क्या प्रोवाइड कर रहा है? यानी आपकी कोई नॉनवर्बल क्यू हो गया ना तो मेटा कम्युनिकेटिव क्यूज़ आपको वो शो कर सकता है। जैसे कई बार होता है ना दोस्तों में आपने कोई बात बोल दी और फिर आपने जो है वो ब्लिंक कर दिया या आंख मार दी तो वो चीज क्या है कि ठीक है ह्यूमरस वे में लेना है सीरियसली नहीं लेना है। सो आई बिहेवियर

21:34 प्रोवाइड कर रहा है आपको मेटा कम्युनिकेटिव क्यूज़ यानी जो कम्युनिकेशन हो चुका है या हो रहा है उसके बारे में भी वो आई बिहेवियर कम्युनिकेट कर रहा है कि वो वो जो कम्युनिकेशन हो रहा है वो किस वे में हो रहा है। ओके? तो ये दोनों स्टेटमेंट बिल्कुल ठीक है। ओके जी। देन है व्हिच ऑफ़ द फॉलोवंग आर ट्रू इन केस ऑफ़ मेटा कम्युनिकेशन? इंटेंशनल होता है। नॉट ऑलवेज इन हां हर बार इंटेंशनल हो ऐसा जरूरी नहीं है। राइट? इट ऑफन टेक्स स्पॉनटेनियसली स्पॉनटेनियस हो सकता है। इट कैन मॉडिफाई इटसेल्फ और इट डीकॉन्टेक्स्चुअलाइजेस इटसेल्फ। तो फॉर श्योर ऐसा तो नहीं आएगा कि हमेशा ही इंटेंशनल हो। सो ए स्टेटमेंट तो नहीं आएगी। बची क्या? बी सी डी और सी डी ही। तो सी और डी तो है ही। अब बी और ई में से देख लो। सो यानी सी और डी तो फॉर श्योर है कि

22:19 स्पॉनटेनियसली होता है और मॉडिफाई किया जा सकता है खुद को। बट इट इज़ नॉट ऑलवेज इंटेंशनल। तो बी स्टेटमेंट ज्यादा ठीक है। इट डीकॉन्टेक्स्चुअलाइजेस इटसेल्फ। नहीं कॉन्टेक्स्ट तो कहीं ना कहीं रहे ही ना। सो बी, सी और डी आ जाएगा जी। ओके? देन है नॉन वर्बल कम्युनिकेशन। मोस्टली डिस्क्रिप्टिव होता है। डिस्क्रिप्टिव कहां होगा? आप डिस्क्राइब तो कर ही नहीं रहे ना उसको। नॉनवर्बल तो एक तरीके से क्यूज़ प्रेजेंट कर रहा है। अग्रेसिव हो हर बार ऐसा जरूरी नहीं है। इनवोलंटरी होता है। हां हो सकता है कि कई बार आप जो है कुछ बोलते भी आपके कुछ वो होता है ना कम्युनिकेशन के कुछ नॉनवर्बल कज़ निकल जाए। सो इनवोलंटरी कॉन्टेक्स्चुअल रहेगा फॉर श्योर और सिंबॉलिक होता है क्योंकि एक सिंबल की फॉर्म में ही जाएंगी चीज़। सो सी डी ई आपका आंसर हो जाएगा। इस तरीके के

23:05 क्वेश्चंस देखने को मिलते हैं। ओके? गिवन बिलो आर टू स्टेटमेंट्स। तो नॉनवर्बल सिग्नल्स आर यूज्ड टू एम्फसाइज एंड सपोर्ट द वर्बल। ठीक है? नॉनवर्बल को यूज़ किया जाता है सपोर्ट करने के लिए। नॉन वर्बल सिग्नल्स आर नॉट अ सब्स्टट्यूट। ऐसा नहीं है। कई बार आप नॉनवर्बल सिग्नल्स के थ्रू भी कम्युनिकेट कर सकते हो। सिर्फ सो वो वर्बल का सब्स्टट्यूट नहीं है। ऐसा जरूरी नहीं है। ओके? तो फर्स्ट स्टेटमेंट ठीक है जी। दूसरे वाली गलत है। ओके? ये देखो। कम्युनिकेशन अबाउट कम्युनिकेशन। इसको क्या बोलेंगे? कम्युनिकेशन नैरेटिव। नैरेटिव देन आपका मेटा कॉग्निशन और मेटा कम्युनिकेशन। सो या ये होता है कॉग्निशन अबाउट कॉग्निशन एक तरीके से कि किसी चीज के बारे में आप सोच रहे हो। अब उसके बारे में भी रिफ्लेक्ट बैक कर रहे हो। ओके? बट ये मेटा कम्युनिकेशन हो जाएगा जी जो

23:50 कम्युनिकेशन अबाउट कम्युनिकेशन की बात कर रहा है। क्लासरूम कम्युनिकेशन को अक्सर रेफर किया जाता है। इनडायरेक्ट, नॉन कंटीन्यूअस, कंटीन्यूअस अमोर्फस। सो कंटीन्यूअस या नॉन कंटीन्यूअस? कंटीन्यूअस रेफर किया जाएगा। जी नॉन कंटीन्यूअस और इनडायरेक्ट तो एक ही बात हो गई ऑलमोस्ट ऑलमोस्ट। ओके? तो आंसर आपका कंटीन्यूअस हो जाएगा। देन व्हिच ऑफ़ द फॉलोविंग आर ट्रू ऑफ़ कम्युनिकेशन? तो कम्युनिकेशन इनएविटेबल है, नॉन सोशल है, इररिवर्सिबल है, कल्चरल है, कंप्लीटली कमर्शियल है। तो देखो जरूरी नहीं है हर बार कंप्लीटली कमर्शियल ही हो। सो ई फॉर श्योर नहीं आएगा। ओके? ए, सी, डी और ए, बी, सी बचा है। यानी ए और सी तो आ रहा है कि ये इनएविटेबल है और इररिवर्सिबल है। तो नॉन सोशल है या कल्चरल है। कल्चरल है ना? जी। नॉन सोशल कैसे होगा? जब आप कम्युनिकेट कर रहे हो तो सोशलाइज ही तो कर

24:37 रहे हो। सो ए, सी और डी आपका आंसर हो गया। ओके? देन ये फंक्शनंस हैं जी कम्युनिकेशन के इमोटिव फंक्शनंस जब इमोशंस या चीजें शो करने के लिए हो। डायरेक्टिव फंक्शनंस जो आपको डायरेक्ट कर रहा हो कि कम हियर डू दिस इस टाइप से। सो वो भी आप कम्युनिकेट कर रहे हो। लेकिन डायरेक्टिव फंक्शन है वो कम्युनिकेशन का। फैटिक फंक्शन जो है वो एक तरीके से स्टार्टिंग ग्रीट कर रहे हो जब आप जैसे हेलो इज़ इट ऋतु? या तो वो जो आप शुरुआत कर रहे हो बातचीत की या एंड कर रहे हो बातचीत का सो वो फैटिक फंक्शन हो गया। पोएटिक फंक्शन वो हो सकता है। रेफरेंशियल फंक्शन हो सकता है। सो ये फंक्शनंस हैं कि किस-किस वे में वो कम्युनिकेशन यूज़ हो सकता है। ओके? जो ये इस तरीके से भी क्वेश्चन आ जाता है। फैटीक, फीडबैक, मेटा मैसेज। तो मेटा मैसेज मतलब मैसेज अबाउट

25:24 मैसेज यानी कम्युनिकेशन अबाउट कम्युनिकेशन। ओके? फीडबैक अगर आप दे रहे हो तो आप क्या कर रहे हो? डिकोडर एनकोडर बन जाएगा। क्योंकि एनकोडर ने इनेशन भेजी मैसेज गया किसी चैनल के थ्रू फिर डिकोडर ने उसको डिकोड किया और फीडबैक भेजा तो डिकोडर ने जब फीडबैक भेजा तो उस टाइम पे वो क्या बन गया सेंडर या इनकोडर बन गया ना सो वो चीज जब आप किसी को ग्रीट कर रहे हो तो फैटी कम्युनिकेशन लेटरल मतलब इक्वल जो लोग हैं कलीग्स के बीच में जो कम्युनिकेशन होता है। सो आंसर फोर्थ आ गया। ठीक है जी। एक बुद्धिस्ट कम्युनिकेशन का भी टॉपिक है जो मैंने वीआईपी टॉपिक्स में करवाया था। आप में से जिस बच्चे को टाइम मिले वो वीआईपी टॉपिक करना। उससे क्ल कॉनंसेप्चुअल क्लेरिटी ज्यादा हो जाएगी। वहां पे और सारे क्वेश्चंस आपके प्रैक्टिस हो जाएंगे।

26:10 ठीक है? सो आप पिछले पेपरों की मतलब इट्स लाइक जो बच्चे पूछ रहे थे ना पहले वाली मैराथन करें या ये वाली मैराथन ये वाली कर लो। अपडेटेड हैं ऑब्वियसली। ज्यादा चीजें हैं इनके अंदर। क्वेश्चंस भी रीसेंट हैं ऑब्वियसली। बट वीआईपी टॉपिक्स जरूर कर लेना। वीआईपी टॉपिक्स कुछ कांसेप्ट्स में आपको क्लैरिटी प्रोवाइड करेंगे अच्छे से और बहुत सारे क्वेश्चंस आप वहां से प्रैक्टिस कर पाओगे। ओके? जैसे यहां अभी दो बार किए हैं तो वीआईपी टॉपिक मैंने आई थिंक अगस्त के पेपर के टाइम पे लिए थे 2024 में। सो उसमें दिसंबर से पहले के मोस्टली क्वेश्चंस इंक्लूडेड हैं। सो वो वीआईपी टॉपिक्स आपके और सारे क्वेश्चंस कवर कर देगा। ओके? सो बुद्धिस्ट यूज़ कम्युनिकेशन टू हाईलाइट द फिनोमिना ऑफ। तो जब भी बुद्धिस्ट कम्युनिकेशन से रिलेटेड कुछ हो, सो आप बुद्धिज्म वाले फिलॉसोफी के नज़रिए से चलेंगे। ओके? बुद्धिस्ट फिलॉसोफी

26:57 जो है वो हायरार्की की बात नहीं करती है। ठीक है? वो हमेशा वो सबको इक्वल मानते हैं। वो कास्टिज्म की भी बात नहीं करते हैं और वो सारी चीजों को इंपपरनेंस मानते हैं। यानी चीजें ट्रांजिस्टरी हैं। चेंज होती रहेंगी। कोई भी चीज परमानेंट नहीं है। ठीक है? ह्यूमन सफरिंग्स होती हैं लेकिन उनका सॉल्यूशन भी है। नॉन सेल्फ की थ्योरी है इनकी। ठीक है? तो वो खुद पे सेल्फ के मतलब अपने बारे में ज्यादा सोचना नहीं है। सेल्फिश वाला बिहेवियर नहीं करना है। सोशल डिस्टेंसिंग जैसा कोई बात यह करते नहीं है। क्योंकि सबको बराबर ही लेके चल रहे हैं। सोशल डिस्टेंस यूजुअली तब आ जाए जब आप जो है कि सोशल लेवल पे आप हायरार्की अगर होगी तो सोशल डिस्टेंस आपको देखने को मिलेगा कि अगर आप किसी लोअर कास्ट के इंसान से बात कर रहे हो तो आप उसको नीचे बिठा के बात कर रहे हो या थोड़ा दूर से बात कर रहे हो तो वो सोशल डिस्टेंस

27:43 रहेगा। बट वो सोशल डिस्टेंस बुद्धिस्ट तो नहीं फॉलो करते हैं। सो आंसर आपका बी, सी और डी रहेगा। इंपपरनेंस, ह्यूमन सफरिंग और नॉन सेल्फ। ओके? सो ये चीज आपको पता होनी चाहिए। हर चीज चेंज होती है। कोई भी चीज परमानेंट नहीं है। देन बात आती है जी मॉडल्स ऑफ कम्युनिकेशन की। बहुत सारे मॉडल्स हैं जिनके बारे में हम बात भी करेंगे। बट ये नाम एटलीस्ट ध्यान रख लेना। ओके? एरिस्टोटलल का मॉडल है। वैसे तो जनरल मॉडल है बट स्पीकर पे ज्यादा फोकस है। तो स्पीकर सेंटर्ड कम्युनिकेशन की ये बात करते हैं। सैक्रम का मॉडल है जो फील्ड ऑफ़ एक्सपीरियंस की बात करते हैं। कैट्स का मॉडल है जो इंटरमीडियरी मॉडल इंटरमीडिएशन इसमें जिस वो इंटरमीडिएट या एक गेटकीपर की बात करते हैं। शैनन और वियर का मॉडल है जो इनेशनल या मैथमेटिकल मॉडल के नाम से जाना

28:28 जाएगा। फ्रैंक डांस का हेलिकल मॉडल है कि इस तरीके से कम्युनिकेशन चलेगा। क्रैग का कॉन्सीट्यूटिव मेटा मॉडल है। बलो का एसएमसीआर मॉडल है। ब्राउन एंड यूल्य एग्जजेक्टली नहीं है कोई मॉडल स्पेसिफिकली बट इन्होंने दो टर्म्स हैं ट्रांजैक्शनल और इंटरेक्शनल ये वर्ड्स यूज़ किए हैं टेक्निकली। ओके? तो इसके बारे में भी बात करेंगे। हेरोल्ड लेसवेल का है फाइव डब्ल्यू मॉडल जो अक्सर पूछा जाता है और एलेक्स फिश एज सच नहीं है ये मॉडल भी बट एलेक्स फिश के नाम से मतलब थोड़ा सा नाम ध्यान हो क्योंकि कुछ एक जगह पे ये मेंशन है तो एलेक्स फिश ने ट्रांसमिशन या लीनियर मॉडल इंटरेक्टिव मॉडल और ट्रांजैक्शनल मॉडल तीन टाइप की बात की है। तो हम इन सारे मॉडल्स को एक-एक करके डिस्कस कर लेते हैं। जरूरी है। जनरल एक होता है जनरल मोर

29:14 कम्युनिकेशन जो हमने बात की थी कि एक सेंडर होगा वह सेंडर एनकोड करेगा मैसेज को उसके ट्रीटमेंट प्रोवाइड की जाएगी एंड देन चैनल के थ्रू एक रिसीवर तक पहुंच जाएगा रिसीवर जब सेंडर को वापस फीडबैक भेज रहा है सो अब जो है रिसीवर क्या बन गया है सेंडर बन गया क्योंकि वो भेज रहा है और सेंडर जो है वो रिसीवर बन गया है ओके देन है एरिस्टोटल का मॉडल एरिस्टोटलल का जो मॉडल है वो बहुत बेसिक पर पर्सुएसिव कम्युनिकेशन मॉडल माना माना जाता है। स्टार्टिंग में तीन चीजें हैं। इसमें एक स्पीकर होगा, एक सब्जेक्ट होगा और एक ऑडियंस होगी। स्पीकर जो बोल रहा है, सब्जेक्ट जिस विषय पे बोल रहा है, जिसके बारे में बात कर रहा है और ऑडियंस जिसको सुन रही है। ओके? एरिस्टोटल का ओपिनियन था कि तीन एलिमेंट बहुत जरूरी हैं एक मीनिंगफुल कम्युनिकेशन के लिए। पहला वो

30:02 पर्सन जो बात कर रहा है। दूसरा वो स्पीच जिस जो प्रोड्यूस की है उसने जिसके बारे में बात करेगा और तीसरा जो इंसान सुन रहे हैं। ओके? तो एंशिएंट टाइम के हिसाब से पांच प्रोसेससेस हैं जो स्टडी ऑफ़ कम्युनिकेशन में इन्वॉल्वड रहेंगे। पहला रहेगा इन्वेंशन यानी जिस टॉपिक पे आप बात कर रहे हो उसके बारे में कंटेंट निकालना। ऑर्गेनाइजेशन या अरेंजमेंट उसको लॉजिकल सीक्वेंस में अरेंज करना। लैंग्वेज और स्टाइल का ध्यान रखना कि जिस ऑडियंस तक आप पहुंचा रहे हो क्या उसको वो लैंग्वेज आती है। मेमोरी उसका ध्यान रखना कि उस चीज को याद रखना एंड देन डिलीवर कर देना। यानी जब आप एक्चुअली उसको प्रेजेंट कर रहे हो लिसनर के सामने। ओके? सो ये पांच वर्ड आपको ध्यान रखने हैं कि अच्छा ये ये पांच चीजें जरूरी हैं। किसके लिए? मैसेज को आप

30:48 जब डिलीवर करेंगे तो मैसेज के लिए ये कम्युनिकेशन को जब आप स्टडी करते हो तो ये पांच प्रोसेससेस उसके अंदर मानी जाएंगी। ओके? ये एरिस्टोटल का मॉडल है। जी। बस नाम पता हो कि हां ठीक है। आप देखो ना स्पीकर पे ही फोकस है कि वो कैसे बोलेगा? कैसे मटेरियल कलेक्ट करेगा। तो वो सारी चीजों पे फोकस है। हेलिकल मॉडल आपको नाम याद रखना है। फ्रैंक डांस का मॉडल है। ठीक है? इन्होंने हेलिक्स से इंस्पायर्ड होके हेलिक्स से ऐसे-ऐसे होता है ना हेलिक्स तो वो ब्रॉड वे में आगे-आगे बढ़ती जाएंगी चीजें थ्री डायमेंशनल स्प्रिंग की तरह। ओके? तो ये साइक्लिकल रहेगा, कॉन्टेक्स्चुअल रहेगा। कंटिन्यूटी में चलता रहेगा तो कंटीन्यूअस है। वापस नहीं आओगे इसमें आप तो नॉन रिपीिटेटिव और एक्यूमुलेटिव आपको देखने को मिलेगा। ओके? देन है सैर्रम का मॉडल। जी। ठीक है?

31:33 सैक्रम का जो कम्युनिकेशन मॉडल है उसमें भी एक सोर्स होगा जो एनकोड करेगा। ठीक है? हु एनकोड्स अ सिग्नल रिसीवर होगा जो रिसीव करेगा और वही डिकोड करेगा एक तरीके से। सेंडर और रिसीवर जो हैं मस्ट ट्यून टुगेदर एंड मैक्सिमम आउटपुट फ्रॉम कम्युनिकेशन। वो किस वजह से निकलेगा? अगर उनका फील्ड ऑफ एक्सपीरियंस सेम है तो अब सेक्रम के मॉडल में फील्ड ऑफ एक्सपीरियंस की बात हुई है तो जो दोनों हैं एनकोडर और डिकोडर जो वो होते हैं ना रिसीव और ट्रांसमिट करेंगे चीजों को। ठीक है? देन पर्सन विल एनकोड डिकोड अ मैसेज इंटरप्रेट बेस्ड ऑन पास्ट फाइल्ड एक्सपीरियंस। तो यानी कि पहले जो उसने एक्सपीरियंस किया उस बेसिस पे वो उस मैसेज को कि अच्छा आपको किसी ने कोई बात बोली तो आपको अभी ध्यान था कि आपसे ऐसे ही

32:19 इसी तरीके से इसी टोन में किसी ने बात की थी एंड दैट वाज़ रूड। सो आप अपनी एक्सपीरियंस के हिसाब से जो है उसको इंटरप्रेट करते हो। तो अगर फील्ड ऑफ़ एक्सपीरियंस कहीं ना कहीं सेम है तो आप बेटर तरीके से सेम तरीके से चीजों को समझ पाओगे। ओके? अब आप किस कॉन्टेक्स्ट में बोल रहे हो वो तो आपके ऊपर डिपेंड करेगा। लेकिन अगला किस कॉन्टेक्स्ट में समझ रहा है वो उसके ऊपर डिपेंड करेगा। राइट? सो बहुत बड़ा रोल आ जाता है फील्ड ऑफ़ एक्सपीरियंस का कि आपका एक्सपीरियंस क्या बोलता है और सामने वाले का एक्सपीरियंस क्या बोलता है। ओके? तो इसके अंदर वही है डिकोडर है। देन इंटरप्रेट करेगा मैसेज को। फिर एनकोड करके मैसेज को आगे पहुंचाएगा या फीडबैक देगा। ठीक है? फीडबैक देते टाइम वो एनकोडर बन गया ना। फिर वो अगले तक पहुंची है चीज। तो हर एक इंसान अपने आप में

33:04 एनकोडर, इंटरप्रेटर और आपका डिकोडर है। ओके? सो ये फीडबैक लूप में चलता रहेगा। देन कैट्स का है इंटरमीडिएट इंटरमीडियरी मॉडल जिसमें गेट कीपर्स की बात रहेगी। ठीक है? सो ये मॉडल बेसिकली टू स्टेप फ्लो मॉडल हो गया ये। तो मास कम्युनिकेशन या मीडिया या एडिटर एसोसिएट्स जो है वो डिसाइड कर रहे हैं कि व्हाट स्टोरी विल फिट इन अ न्यूज़पेपर और न्यूज़ ब्रॉडकास्ट। सो वो एक इंटरमीडियरी या फिर आपका जो है गेटकीपर का रोल दिखा रखा है यहां पे। ओके? कि कैसे चीजें स्पीकर से ऑडियंस तक पहुंचेंगी। ओके? सो अंडर द मोर नॉर्मल कंडीशन ऑफ़ मास मीडिया इन व्हिच पब्लिकेशंस चूज़ सम कंटेंट इन प्रेफरेंस टू अदर पोटेंशियल कंटेंट। सो अब आप वो गेट कीपर यानी जो बीच में एडिटर्स बिठा रखे

33:50 हैं वो डिसाइड करेंगे कि कौन सी इनेशन ऑडियंस तक जानी चाहिए और कौन सी नहीं जानी चाहिए। ठीक है? सो बस आपको नाम याद रखना है कि कैट्स का इंटरमीडियरी मॉडल है जो इंटरमीडिएट का या बीच में गेटकीपर का काम करते हैं। ओके देन है जी शैनन और वियर का मैथमेटिकल मॉडल ऑफ़ कम्युनिकेशन क्योंकि इन्होंने नॉइज़ पे फोकस किया है। अभी तक नॉइज़ किसी मॉडल में नहीं दिखाई गई थी। एक सोर्स होगा ट्रांसमीटर होगा जो मैसेज को ट्रांसमिट करेगा। बीच में बहुत सारे इशूज़ आ सकते हैं। नॉइस क्रिएट हो सकती है और फिर रिसीवर तक पहुंचा और फिर जो है उसने डिकोड किया उस चीज को। ओके? तो ये मॉडल में क्या हो रहा है? एक इनेशन सोर्स है, एक ट्रांसमीटर है, एक चैनल है, एक रिसीवर है और एक डेस्टिनेशन फाइनल कंज्यूमर जो है उस मैसेज का वो है। ओके? तीन लेवल्स की

34:36 प्रॉब्लम्स यहां बताई गई है। एक टेक्निकल प्रॉब्लम आ सकती है। सिमेंटिक प्रॉब्लम आ सकती है या इन्फ्लुएंशियल प्रॉब्लम आ सकती है। तो सिमेंटिक और सिमायोटिक वर्ड में कंफ्यूज नहीं होना है। ओके? सिमायोटिक स्टडी ऑफ़ साइन था। एस आई जी एन साइन। और सिमेंटिक जो है जब मीनिंग यानी होता है ना कि जिस तरीके से मैंने जिस बोली थी वो चीज वो अगले तक उस तरीके से या उसी लहजे में नहीं पहुंची यानी कुछ ना कुछ मिसअंडरस्टैंडिंग जब क्रिएट हो जाए। ओके? तो इट इज़ रिलेटेड टू द इंटरप्रिटेशन ऑफ़ मीनिंग बाय द रिसीवर। ओके? सो एज़ दैट ऑफ़ इंटेंडेड मीनिंग ऑफ़ सेंडर कि उसका ये मतलब था कहने का। ये समझ के जब आप इंटरप्रेट कर रहे हो और गलत मतलब समझ लो तो वो सिमेंटिक प्रॉब्लम आ रही है। ओके? टेक्निकल प्रॉब्लम हमें पता ही है कि जब आप इनेशन को ट्रांसफर करते हो तो कोई इशू आ जाए।

35:22 इन्फ्लुएंशियल प्रॉब्लम्स जो है वो कंसर्न रहती है कि जब एक बार कन्व कर दिया हमने सक्सेसफुली रिसीवर तक इनेशन तो उसके बाद उसका उसी पर्टिकुलर चीज से रिलेटेड क्या बिहेवियर है। ठीक है? सो उससे रिलेटेड जो जो इशूज़ हैं। क्योंकि ये इट इज़ कंसर्न विथ द सक्सेस विद व्हिच द मीनिंग्स आर कन्वेड। तो कितना सक्सेसफुली हमने वो मीनिंग कन्व किया है रिसीवर तक और उसके बाद उसका सब्सीकुएंट डिजायर्ड बिहेवियर क्या है? ओके ये कुछ एक कॉमनसेप्ट्स हैं इंपॉर्टेंट कांसेप्ट जो शैनन और व्ययर के मॉडल से रिलेटेड हैं। तो हो सकता है कभी पूछ लिया जाए कि ये कोई भी टॉपिक देके जैसे एंट्रॉपी रिडंडेंसी ये वर्ड्स डाल के कि ये कौन से मॉडल ऑफ़ कम्युनिकेशन से रिलेट करते हैं। ओके? तो ये एंट्रॉपी एंट्रॉपी जो है वो रैंडमनेस बेसिक एंट्रॉपी जब हम साइंसेस में बात करते हैं तो हम रैंडमनेस

36:08 की बात करते हैं। बट यहां पे क्या रहेगा कि इनेशन को आप कैसे कैन बी मेज़र्ड बाय एंट्रॉपी यानी इनेशन जो दी गई है वो किस तरीके से आपने सेलेक्ट की है। सो वंस डिग्री ऑफ़ फ्रीडम ऑफ़ चॉइस टू सेलेक्ट अ मैसेज। और रेश्यो जो रहेगा एक्चुअल टू द मैक्सिमम एंट्रॉपी कि ये एक्चुअल में एंट्रॉपी है और ये उसने सेलेक्ट किया है तो उस हिसाब से उसकी इंडिविजुअल एंट्रॉपी है तो डिवाइड बाय मैक्सिमम एंट्रॉपी कर दिया तो रिलेटिव एंट्रॉपी जो है वो आ जाएगा एक्चुअल डिवाइड बाय मैक्सिमम ओके रिडेंडेंसी रिडेंडेंसी मतलब कि कि कोई इनेशन अगर आप ऐड ऑन कर रहे हो या हटा रहे हो यूजुअली हम इसमें ऐड ऑन करते हैं एक्स्ट्रा इनेशन ताकि हम क होता है ना कि या तो हम अलग-अलग मल्टीपल चैनल्स का इस्तेमाल कर लेते हैं कि ये सेंडर है, ये

36:53 रिसीवर है। सो हमने अलग-अलग मल्टीपल चैनल्स का इस्तेमाल कर लिया। ओके? और दूसरा हो सकता है कि हम मिसअंडरस्टैंडिंग ना हो या चीजों को अवॉइड करने के लिए कि बेटर तरीके से इनेशन पहुंच जाए कि चलो इस वाले मैसेज में नॉइज़ थी। दूसरे तरीके से पहुंच गया। ओके? तो अलग-अलग रास्ते आपको अपनाने हैं। दूसरी चीज जो आप कर सकते हो वो ये है कि आप जो है इसमें जो क्रिटिकल मैसेजेस हैं एक तो मल्टीपल चैनल्स के थ्रू और दूसरा जो है एक्स्ट्रा इनफेशन ऐड करके दिमाग में ही नहीं आ रहा था वर्ड एक्स्ट्रा इनेशन। ओके? सो एक्स्ट्रा बार-बार जो इनेशन यानी कई बार आप रिपीटेटिव इनेशन भी ऐड कर सकते हो। सो वो आप कोशिश करते हो इसलिए कि इनेशन एग्जैक्टली पहुंच जाए जो आप पहुंचाना चाह रहे हो। बट अगर ज्यादा रिडेंडेंसी हुई तो वो जो है इनसफिशिएंट तरीके से और बोर्डम

37:41 भी आ सकता है। कम्युनिकेशन भी हो सकता है इनफिशिएंट हो। इनसफिशिएंट बोला शायद मैंने इनफिशिएंट हो कम्युनिकेशन भी एंड इट लीड टू बोर्डम। ओके? सो रिडंडेंसी मतलब एक्स्ट्रा इनेशन जब आप ऐड करते हो तो वही यूजुअली तो वही है कि अमाउंट ऑफ़ इनेशन जो आप एलिमिनेट कर सकते हो या ऐड कर सकते हो किसी नॉइसलेस चैनल में। ताकि मैसेज का मतलब वही रहे और एक्चुअल मैसेज का मतलब जो है वो पहुंच जाए अगले इंसान तक। चैनल की कैपेसिटी कि कितनी अमाउंट ऑफ इनेशन जो है पर यूनिट ऑफ़ टाइम में पहुंचाई जा सकती है। विदाउट वो होता है ना अगर बिय्ड ऑप्टिमम लेवल अगर आप गए तो एरर्स आ जाएंगी। तो चैनल की जितनी कैपेसिटी है उतनी इनेशन पहुंचाई जाए। कोई भी अनवांटेड साउंड या डिस्टॉर्शन आ रहा है तो वो नॉइस हो जाएगा पर्टिकुलरली। ओके? नॉइस के भी हम बहुत

38:26 सारी चीजें देखेंगे और नॉइस की ही बात इन्होंने की है मेजरली कि बहुत सारे जो है बैरियर्स नॉइस वो चीजें आएंगी जिसकी वजह से जो अनवांटेड है ऑब्वियसली जो आपकी सही इनेशन अगले इंसान तक ना पहुंचने दे। ओके? कोडिंग प्रोसेस जब आप प्रोड्यूस करते हो कोई भी मैसेज या फिर रिसीवर रिसीव करता है तो उस टाइम पे कोडिंग का इस्तेमाल होता है। तो वो कोडिंग के थ्रू आप जो है बेस्ट पॉसिबल वे में एक इनेशन पहुंचा सकते हो। सो वो कोडिंग डिकोडिंग का पूरा प्रोसेस रहेगा। ओके देन एक बलो का मॉडल है जी एटलीस्ट इतना तो याद रखो कि Blo का एसएमसीआर मॉडल है। ओके कोई फीडबैक का कांसेप्ट यहां पे है नहीं ना नॉइस कांसेप्ट है। सोर्सेस मैसेज चैनल के थ्रू और रिसीवर ये दे रखा

39:11 है इन्होंने। ओके? तो सोर्स कम्युनिकेशन स्किल्स एटीट्यूड हो पर्टिकुलर उस चीज़ से रिलेटेड नॉलेज हो। सोशल सिस्टम कल्चर ये सोर्स में आ जाएंगे। मैसेज जो भी आप कंटेंट या कोड या जो चीज आप पहुंचाना चाह रहे हो मैसेज चैनल जिसके थ्रू आप सीख के देख के सुन के टच करके स्मेल करके टेस्ट करके कैसे कौन सा माध्यम है एंड देन रिसीवर रिसीवर के अंदर भी यही कम्युनिकेशन स्किल्स होनी चाहिए ओके सो ताकि वो रिसीव कर पाए चीजों को उसी तरीके से जिस तरीके से भेजा गया है। सो इन्होंने एसएमसीआर मॉडल की बात की है। ठीक है जी। पहले इन्होंने एसआर की ही की थी सेंडर और रिसीवर लेकिन बाद में एसएमसीआर मॉडल को एक्सटेंड कर दिया इन्होंने तो एसआर से एसएमसीआर मॉडल इसको बना दिया बेसिक कम्युनिकेशन के प्रोसेस की बात है लीनियर मॉडल है कोई टू वे कम्युनिकेशन है नहीं

39:58 सेंडर ने जो भेजा वो रिसीवर तक पहुंच जाए तो कोई फीडबैक का कांसेप्ट नहीं है ना नॉइस का ना ही बैरियर्स का कांसेप्ट है ओके देन है लेगिंस मॉडल सो ये जो मॉडल है इनके अकॉर्डिंग कम्युनिकेशन एक प्रोसेस है जिसमें दो या दो से ज्यादा लोग अपने आइडियाज को, फैक्ट को, फीलिंग को, इंप्रेशन को एक्सचेंज करते हैं ताकि क्लियरली समझ जाए। ओके? सो जो एलिमेंट्स हैं कम्युनिकेशन मॉडल में वो कौन-कौन से हैं? कम्युनिकेटर है। देखो हो सकता है इनका नाम नहीं कोई और नाम पूछ के बोल दे एलिमेंट्स कौन से हैं? तो अगर आपको कुछ भी आईडिया नहीं है उस इंसान के बारे में तो आप कॉमन लॉजिक के साथ जाएंगे। ओके? कि अच्छा कम्युनिकेशन है तो कम्युनिकेटर होगा। एक पर्टिकुलर मैसेज भी होगा, कम्युनिकेशन के चैनल भी होंगे। एक या एक से ज्यादा भी हो सकते हैं। ट्रीटमेंट ऑफ़ मैसेज होगा, ऑडियंस होगी और फिर ऑडियंस का

40:44 रिस्पांस यानी फीडबैक होगा। ओके? तो ये चीज़ आपको ध्यान रखनी है। ज्यादातर फोकस जो है इसके ऊपर ऑडियंस रिस्प ट्रीटमेंट ऑफ़ मैसेज और ऑडियंस रिस्पांस के ऊपर ज्यादा फोकस दिया जाता है कि फीडबैक जो आएगा उस बेसिस पे डिसाइड होगी चीजें। देन आते हैं जो एलेक्स फिश ने बोले थे लीनियर मॉडल जिसको ट्रांसमिशन मॉडल भी बोल दिया जाता है कि वन वे ट्रांसमिशन है। मैसेज जो है वह सेंडर टू रिसीवर जा रहा है। इसमें फीडबैक नहीं मिलेगा आपको। सो इसमें एरिस्टोटलल का मॉडल हम ऑलरेडी देख चुके हैं। 5W लेसवेल का भी मॉडल होता है जो मैंने आपको ऊपर नाम भी बताया था। 5W में पांच क्वेश्चंस हम पूछते हैं इसमें। ओके? पहला है हु सेज़? किसने बोला? यानी सेंडर। ठीक है? क्या बोला? यानी मैसेज क्या है? किस चैनल के थ्रू बोला? किसको बोला यानी कि आपका रिसीवर और किन सरकमस्ट्ससेस में

41:31 बोला देन विद व्हाट इफेक्ट क्या उसका इफेक्ट निकल के आ रहा है ओके सो ये पांच चीजें या ये पांच क्वेश्चंस जब आप पूछ रहे हो तो वो फाइव डब्लू में इंक्लूड हो जाएगा शैनन और व्यूअर का मॉडल जो फोकस करते हैं नॉइस के ऊपर ठीक है कि वो मैसेज ट्रांसमिशन को डिसरप्ट करते हैं तो ऐसे नॉइससेस रहेंगे देन बर्लो का एसएमसीआर मॉडल है जो ब्रेकडाउन करता है कम्युनिकेशन प्रोसेस को सोर्स मैसेज चैनल और रिसीवर में और ताकि बेटर तरीके से इफेक्टिव कम्युनिकेशन हो सके। यहां पे भी फीडबैक नहीं है। आप ध्यान रखिए। ओके? तो देखो हमने यहां फीडबैक की बात नहीं की है। यहां पे शैनन और व्यूअर के मॉडल में फीडबैक तो हम बात करते हैं। इनफैक्ट हम नॉइस नहीं नहीं नहीं नहीं हम वो अपना सैक्रम का मॉडल था जिसमें फील्ड ऑफ़ एक्सपीरियंस था। ठीक है? इसमें नॉइस पे फोकस था। ठीक है जी।

42:17 देन है इंटरेक्टिव मॉडल। टू वे प्रोसेस इसके अंदर रहेगा कम्युनिकेशन में सेंडर और रिसीवर का। देन इनकर्पोरेट्स फीडबैक और फील्ड ऑफ एक्सपीरियंस ये रहा सैक्रम। ठीक है? मैं सैम और शैनन में कंफ्यूज हो गई थी। ओके? तो शैनन में नॉइस की बात थी। वन वे में ही आएगा वो। देन ऑस्गड सैक्रम का मॉडल है जिसमें हम वही बैक एंड फोर्थ वाली इनेशन यानी फील्ड ऑफ़ एक्सपीरियंस के बेसिस पे चीजें घूम रही हैं। वैसले और मैकलन का भी एक मॉडल होता है। ये भी टू वे कम्युनिकेशन है जो मैं अभी बताऊंगी क्या होता है। ओके। देन ट्रांजैक्शनल मॉडल है। जी। सो कॉम्प्लेक्स साइमलटेनियस सर्कुलर प्रोसेस जहां पे इंडिविजुअल्स जो हैं वो सेंडर और रिसीवर की तरह एक्ट कर रहे हैं। मैसेजेस को एक्सचेंज कर रहे हैं। ठीक है? इमीडिएट फीडबैक यहां मिलेगा। इंटरप्रिटेशन को भी शेयर किया जा रहा है। कैसे

43:04 इंटरप्रेट किया और एम्फेसाइज किया जा रहा है ऑन इवॉल्विंग कॉम्प्लेक्सिटी ऑफ़ कम्युनिकेशन इवेंट। इसमें भी ये नाम आते हैं बर्नल का ट्रांजैक्शनल मॉडल जिसमें वही साइमलटेनियस एक्सचेंज के ऊपर फोकस है जो कि साइकोलॉजिकल और बिहेवियरल फैक्टर्स को इंक्लूड करेंगे डांस का ये हेलिकल मॉडल यानी फ्रैंक डांस का तो हेलिकल में वो स्पायरल की यहां से इनेशन शुरू हुई अब बढ़ती जाएगी ये ये चल रहा है ऊपर की तरफ चल रही है चीजें ओके तो पास्ट इंटरेक्शन के बेसिस पे आप कैसे आगे बढ़ रहे हो कैसे कम्युनिकेट कर रहे हो तो वो ट्रांजैक्शनल रहेगा ये अपना जो दूसरे वाले में हमने पढ़ा वैसले और मैकलन का मॉडल। ठीक है? तो इसमें एक पर्सन से बात शुरू नहीं हो रही है। बट वो जब कोई पर्सन रिस्पॉनड कर रहा है सिलेलेक्टिवली अपने फिजिकल सराउंडिंग्स

43:50 के प्रति वहां से चीजें शुरू हो रही हैं। ठीक है? सो फिजिकल सराउंडिंग बहुत सारा है। फिर आप किस चीज़ के प्रति रिस्पॉन्ड कर रहे हो? कैसे रिसोंड कर रहे हो? वो सारी चीजें वैसले और मैकलीन में आ जाएंगी। ओके? तो ये मॉडल स्ट्रांग रिलेशनशिप कंसीडर कर रहा है बिटवीन रिस्पांस फ्रॉम सराउंडिंग्स एंड प्रोसेस ऑफ कम्युनिकेशन। तो बहुत सारी इनेशन आपके पास आ रही है। अब आप किसके प्रति रिसोंड रिस्पांस दोगे वो चीज इसके अंदर मेंशन है। ओके? देन गिलियन ब्राउन और जॉर्ज यूल जो मैंने आपको बोला तो ऊपर उन्होंने मैंने बोला था ना ट्रांजैक्शनल और इंटरेक्शनल वर्ड यूज़ किया इन्होंने। तो इन्होंने इन्फ्लुएंशियल बुक लिखी डिस्कोर्स एनालिसिस जिसमें लैंग्वेज के बारे में बात करते हैं। बट की कांसेप्ट अगर आप देखोगे तो उसमें ट्रांजैक्शनल लैंग्वेज यानी फॉर द इनेशन और इंटरेक्शनल

44:38 लैंग्वेज जिसमें आप रिलेशनशिप्स पे फोकस करते हो उनके बीच में डिस्टिंशन बताया गया है। सो ये वर्ड इन्होंने यूज़ किए हैं। सो कहीं ना कहीं कम्युनिकेशन में भी इनका कंट्रीब्यूशन है ब्राउन और यूट का। ओके? देन है जी कॉन्स्टिट्यूटिव या कॉन्स्टिट्यूटिव मेटामॉल। ऑफ़ क्रैग ने दिया है। वो सात डिफरेंट ट्रेडिशंस जो है वो प्रपोज कर रहे हैं। कौन से? रिटोरिकल सिमायोटिक जिसमें साइन की बात करेंगे। फिनोमिनोलॉजिकल जिसमें एक्सपीरियंस की बात कर रहे हैं। साइबरनेटिक्स मेन फ्लो ऑफ़ इनेशन कैसे हो रहा है? सोशियोसाइकोलॉजिकल इंडिविजुअल्स का इंटरेक्शन कैसा है? सोशल लेवल पे। सोशियो कल्चरल। ठीक है? कल्चर के साथ सोशल ऑर्डर की बात हो रही है। क्रिटिकल एज अ प्रोसेस इन व्हिच ऑल अम्पशंस कैन बी चैलेंज्ड। तो इसमें आप चैलेंज कर सकते हो। क्रिटिकली सोच रही हो।

45:25 ओके? सो ये सात डिफरेंट ट्रेडिशंस जो है वो क्रैग ने दिए हैं। बस इतना याद रखना। ओके? इफेक्टिव कम्युनिकेशन इफेक्टिव कब होगा? जब चीजें क्लियर हो। सक्सेसफुली मैसेज पहुंच गया हो। इनेशन जो पहुंचानी थी वो पहुंच गई हो। राइट? तभी तो इफेक्टिव होगा ना। और वो भी फिर सामने वाले ने भी आपको बता दिया हो कि हां उसको समझ आ गया और ये समझ आया। राइट? तो उस वो जो आप मैसेज की बात कर रहे हो तो वो इफेक्टिव कम्युनिकेशन तभी कहलाएगा जब चीजें एक तो फीडबैक आ जाए और दूसरा सही तरीके से गई हो। ओके? सो सात जो है सीज़ की बात करते हैं हम यानी सेवन सीज़ हैं ये कम्युनिकेशन की। तो इनको साथ प्रिंसिपल की तरह भी आप देख सकते हो। एक तो जो मैसेज आप भेज रहे हो वो क्लियर हो। ठीक है? बिल्कुल स्पेसिफिक होना चाहिए। क्लियर होना चाहिए। कुछ राम कहानी नहीं भेजनी है। कंसाइज़ वे में शॉर्ट एंड क्रिस्प हो चीज़ें।

46:12 कॉनंक्रीट हो। ठीक है? स्पेसिफिक होना चाहिए। सपोर्टेड बाय फैक्ट्स एंड फिगर्स देन करेक्ट हो वो मैसेज सही हो ग्रामेटिकली भी सही हो कोहेरेंट हो तो मैसेज शुड बी लॉजिकल एक फ्लो होना चाहिए उसके अंदर तो स्मूथ फ्लो ऑफ़ आइडियाज आपको अगर नजर आ रहा है दैट मींस कोरेंस है कंप्लीट या कंप्लीटनेस हो मैसेज अपने आप में ही एक कंप्लीट इनेशन होनी चाहिए और कर्टियस ही हो यानी कर वो होता है ना करियस वे में उस मैसेज को भेजा गया हो पोलाइट प्रोफेशनल रिस्पेक्टफुल तरीके से वर्ड्स का इस्तेमाल करके एम्पैथेटिक तरीके से रिसीवर की फीलिंग को चीजों को भी ध्यान में रखते हुए वो मैसेज भेजा गया है। ओके? सो ये सीज़ याद रखने है जी। क्लियर, कंसाइज़ कंक्रीट करेक्ट कोहेरेंट कंप्लीट और आपका कर्टियस। ओके? देन अगर आप इफेक्टिव कम्युनिकेशन की

46:59 क्लासरूम में बात करोगे तो इफेक्टिवनेस अगर हम क्लासरूम में बात करेंगे तो पांच मेजर फैक्टर्स हैं जिसमें टीचर आ गया, स्टूडेंट आ गया, जो मैसेज भेजना है वो आ गया, जो इंस्ट्रक्शनल मेथड या मीडिया आप यूज़ कर रहे हो और लर्निंग एनवायरमेंट कैसा है? सो अगर इन सारी ये सारी चीजें बेटर हैं तो वो इफेक्टिवनेस बढ़ जाएगी क्लासरूम कम्युनिकेशन की। ठीक है? पहला है प्रिंसिपल्स फॉर टीचर्स। तो टीचर में भी तो अच्छी क्वालिटीज़ होनी चाहिए ना। राइट? तो वो एक रियलिस्टिक सेल्फ कांसेप्ट हो, परसेप्शन हो। ठीक है? सराउंडिंग के बारे में, प्रोफिशिएंसी हो उसके अपने सब्जेक्ट मैटर के बारे में, लर्नर को वो बेटर तरीके से समझ पाए। इफेक्टिव कम्युनिकेटिव स्किल्स उसके अंदर हो। उसको पेडागोजी की, एंड्रोगॉजी की नॉलेज हो। फ्लैक्सिबल अप्रोच जो है वो टीचर इस्तेमाल करता हो।

47:44 ऑब्जेक्टिव और अनबायस्ड हो टीचर। ठीक है? सो अगर ये सारी चीजें हैं उस टीचर में तो पॉसिबिलिटी है कि टीचर की तरफ से इफेक्टिवनेस रहेगी। ओके देन मैसेज का डिज़ाइन कैसा है? जैसे हमने बोला कि क्लियर कॉनंक्रीट वो सारी चीजें जो ऊपर बात की वही चीजें यहां रहेंग कि क्लियर हो स्पेसिफिक हो चीजें ऑब्जेक्टिव्स रेलेवेंट हो ऑब्जेक्टिव्स प्रॉपर्ली सीक्वेंस में लॉजिकली सीक्वेंस में लगाए गए हो। लैंग्वेज जो है वो बेटर यूज़ की गई हो। सिंबल्स एप्रोप्रियट यूज़ किए गए हो। रेलेवेंट एक्सरसाइजेस हो। ठीक है? तो ये सारी चीजें जो भी एग्जांपल्स नॉन एग्जांपल्स यूज़ करने थे उनका जेरस तरीके से यूज़ किया गया हो। तो ये सारी चीजें मैसेज के डिजाइन से रिलेटेड रहेंगी। ओके? मैसेज में तो हमने ऊपर भी जो सात सीज की बात की थी वो भी इसके अंदर आ जाएंगे। ओके? देन है इंस्ट्रक्शनल मेथड या मीडिया कैसे

48:32 सेलेक्ट कर रहे हो आप। ओके? सो रेलेवेंट हो जो मैसेज आप पहुंचाना चाह रहे हो उसके लिए रेलेवेंट मीडिया आपको इस्तेमाल करना है। रेलेवेंट मेथड्स आपको इस्तेमाल करने हैं। वैरायटी ऑफ़ मेथड्स और मीडिया आपको इस्तेमाल करने हैं। अच्छी क्वालिटी उनकी होनी चाहिए। ओके? सो ये इंस्ट्रक्शनल मेथड और मीडिया से रिलेटेड रहेगा। अब प्रिंसिपल्स रहेंगे फॉर क्रिएटिव कंड्यूसिव लर्निंग एनवायरमेंट। यानी एनवायरमेंट भी अच्छा हो। ओवर क्राउडेड नहीं होना चाहिए। सिंग अरेंजमेंट प्रॉपर होना चाहिए। स्टूडेंट्स के साथ एक अच्छी रेपो होनी चाहिए। सारी चीजों की रिसोर्सेज होने चाहिए। ठीक है? एनकरेज करना है हमें एक्सपेरिमेंटेशन। तो ये सारी चीजें अगर रहेंगी तो हम बोल सकते हैं कि अच्छा एक कंड्यूसिव लर्निंग एनवायरमेंट है। जैसे अभी बार-बार जैसे मेरा फिलहाल के लिए कंड्यूसिव लर्निंग एनवायरमेंट नहीं है तो इफेक्टिवनेस शायद कम हो जाए क्योंकि

49:18 बार-बार ये फैन जो है एग्जॉस्ट फैन ये बोल रहा है क्योंकि बाहर शायद आंधी आ गई है। सो वो चीज है कि वो डिस्टर्ब करेगा। वो नॉइस क्रिएट करेगा। राइट? हो सकता है आपका ध्यान भी उसके ऊपर जा रहा हो। सो वो चीज क्या है कि उस वो नहीं होता तो एक बेटर लर्निंग एनवायरमेंट कंपैरेटिवली और भी ज्यादा बेटर होता। राइट? अगर बाहर कोई कंस्ट्रक्शन चल रही है, उसकी आवाज अगर आ रही है, सो वो चीज भी एक बेटर एनवायरमेंट में थोड़ी सी हर्डल क्रिएट करेगी। ओके? तो ये सारी की सारी चीजें अगर होंगी तो क्लासरूम का जो कम्युनिकेशन है वो ऑटोमेटिकली इफेक्टिव हो जाएगा। ओके? क्लासरूम कम्युनिकेशन प्रोसेस में टू वे प्रोसेस है। कॉल और चैन का मॉडल है। इन्होंने क्या बोला? इन्होंने पांच डिस्टिंक्ट स्टेजेस बताई है। पहला है फॉर्मुलेशन ऑफ़ मैसेज। आप मैसेज को फॉर्मुलेट करोगे। ये रहा। ठीक है? फिर आप

50:05 उसको एनकोड करोगे, फिर ट्रांसमिट करोगे। फिर मैसेज को डिकोड किया जाएगा। फीडबैक और इवैल्यूएशन दिया जाएगा। जब आप फीडबैक दे रहे हो वो ऑटोमेटिकली टू वे प्रोसेस हो गया। क्योंकि अब आपका जो जो रिसीवर था यहां पे अब वो सेंडर बन गया है और वो अपनी तरफ से जो फीडबैक फॉर्मुलेट कर रहा है उसको हम एक तरीके से मैसेज ही बोलेंगे। तो वो मैसेज उसने फॉर्मुलेट किया। एनकोड किया। ठीक है? जो भी फीडबैक है उसको ट्रांसमिट किया। ठीक है? तो ट्रांसमिट जब आप कर रहे हो अगला इंसान डिकोड करेगा और ये चीजें होंगी। नॉइस कहीं ना कहीं बीच-बीच में रहेगी। तो ये स्टेप्स आपको पता हो। ये पांच स्टेप्स जो कंटिन्यूटी में लगाए गए हैं ये पूछे गए हैं। ओके? अब नॉइस यानी कोई भी इंटरप इंटरप्शन आ रही है। कोई इंटरफेरेंस हो रही है, दिक्कत आ रही है। अब वो दिक्कत किसी भी लेवल की हो

50:50 सकती है जो इफेक्टिवनेस में हैंपर कर रही है। ठीक है? तो साइकोलॉजिकल हो सकती है कि डिस्ट्रैक्शन है कि आप पढ़ रहे हो या मैं पढ़ा रही हूं। मेरे को भी भूख लगी हुई है। आप थके हुए हो। सो वो दोनों ही चीजें जो है वो नॉइज़ क्रिएट करेंगे। अगर मुझे भूख लगी हुई है और बार-बार मेरा ध्यान भूख पे गया या मैं थकी हुई हूं। मेरे हेडेक हो रहा है तो जितनी चीजें बतानी थी उससे शायद एक दो कम ही बता पाऊंगी मैं। ओके? तो वो साइकोलॉजिकल बैरियर हो गया। या जितनी चीजें आपको समझनी है, आपको थकान हो रही है तो आप शायद कम गैब कर पाओ। ओके? फिजिकल नॉइज़ जो डायरेक्ट फिजिकल एनवायरमेंट की इंटरप्शन है। ठीक है? ट्रैफिक होन बोल दिया। जैसे यहां पे ये पंखे की आवाज हो गई या पुअर लाइटिंग हो गई। वो चीजें फिजिकल नॉइज़ क्रिएट करेंगी। देन है साइकोलॉजिकल नॉइज़ तो ये साइकोलॉजिकल अच्छा ये फिजियोलॉजिकल था भाई सॉरी ठीक है ये

51:36 फिजियोलॉजिकल था तो दो बार कैसे आ गया साइकोलॉजिकल तो साइकोलॉजिकल मतलब साइकोलॉजी से रिलेटेड वाली चीजें ओके देन सिमेंटिक नॉइज़ साइकोलॉजिकल में भी आ जाती है कई बार ये चलो फटीग या मेडिकेशन ये भी हम बोल सकते हैं कि फिजियोलॉजिकल में है आपके शरीर से रिलेटेड है एक तरीके से बट साइकोलॉजिकल में आप क्या सोच रहे हो उस पर्टिकुलर चीज से रिलेटेड या आप स्ट्रेस में हो या आप कोई और ही चीज सोच सोच रहे हो आप साइकोलॉजिकली प्रेजेंट ही नहीं हो तो वो भी नॉइस बन जाएगी। सिमेंटिक नॉइज़ इसमें ये है कि मतलब होता है कि क कुछ ऐसे वर्ड्स यूज़ हो गए हैं जिससे म्यू जो म्यूचुअली अंडरस्टैंडेबल नहीं है। ठीक है? सो कई बार सिमेंटिक नॉइज़ जो है वो ऑथर की वजह से आ जाती है कि ऑथर ने कुछ एक ऐसी टेक्निकल लैंग्वेज यूज़ कर दी है जो शायद अवॉइड की जा सकती थी। अब अगले इंसान को

52:22 उसका मतलब नहीं समझ आया और उसने कुछ और ही समझ लिया। तो, यह जो मिसअंडरस्टैंडिंग हुई है, वो सिमेंटिक नॉइज़ हो गई बिकॉज़ ऑफ़ द लैंग्वेज। ओके देन इंटरफेरेंस या नॉइज़ इस तरीके की भी हो सकती है। रेट्रोएक्टिव प्रोएक्टिव ये वर्ड पूछे जाते हैं। अब इसको आप मेमोरी से रिलेट करके देख लो या नॉइज़ से रिलेट करके देख लो। कहीं ना कहीं हर्डल तो आ रही है, इंटरफेरेंस हो रही है। कैसे? रेट्रोएक्टिव इंटरफेरेंस क्या होगी? तो देखो रेट्रो मतलब जैसे पुराने सॉन्ग्स को हम बोल देते हैं रेट्रोसों्स। तो रेट्रो यानी पुरानी चीज को एक्टिव होने में इंटरफेरेंस आ रही है। किस वजह से आएगी? नई चीज की वजह से आएगी। सो यानी आप पुरानी इंफॉर्मेशन याद नहीं कर पा रहे हो बिकॉज़ ऑफ़ द ये रहा मेमोरी फिनोमिना वेयर न्यूली लर्नड इनफेशन जो आपने नई इनेशन सीखी है वो हिंडरेंस क्रिएट कर रही है

53:08 पुरानी चीजों को याद करने में यानी रेट्रो चीजों को एक्टिव करने में इंटरफेरेंस क्रिएट हो रही है। ओके? सो ये जो बैकवर्ड इफेक्ट है ये ज्यादा डिफिकल्ट बना देगा जिससे आपको ओल्ड मेमोरीज याद ही नहीं आएंगी। ओके? बिकॉज़ ऑफ़ न्यू मेमोरीज़। सो प्रोएक्टिव क्या होगा? प्रो मतलब आगे के लिए एक्टिव। यानी जो अभी नई चीज सीखी थी वो याद होने में इंटरफेरेंस हो रही है क्योंकि पहले वाली याद है। फोन नंबर अभी नया फोन नंबर नया घर का एड्रेस है लेकिन बार-बार एकदम से पहले वाला ही नंबर जो था वो याद रहता है या वही घर का एड्रेस निकलता है मुंह से एक बारी में। ओके? सो वो चीज क्या हो गई? प्रोएक्टिव इंटरफेरेंस। कि नई चीज जो है वो याद नहीं हो रही है बिकॉज़ ऑफ़ पुरानी चीज़। ओके? सो जो नई चीज है प्रो है आप अभी नई जो चीज है वो एक्टिव होने में इंटरफेरेंस क्रिएट हो

53:54 रही है। ऐसे याद रख सकते हो। ठीक है? कंफ्यूजन क्रिएट ना हो। रेट्रो एक्टिव रेट्रो यानी पुरानी याद करने का तरीका बता रही हूं। रेट्रो यानी पुरानी पुरानी मेमोरीज को पुरानी चीजों को एक्टिव होने में इंटरफेरेंस क्रिएट हो रही है। और प्रोएक्टिव इसका उल्टा हो गया। ओके? अब इन जैसे नॉइस है वैसे ही बैरियर्स बहुत सारे हो सकते हैं। ठीक है? साइकोलॉजिकल बैरियर्स हो सकते हैं। साइकोलॉजिकल बैरियर कौन से होंगे? जो आपके इंटरनल मेंटल लेवल पे होंगी चीजें। ठीक है? जैसे जो वो ऑब्वियसली रिसीव या सेंड करने में इफेक्टिवली अफेक्ट करेंगी चीजों को। सो ये बैरियर मेंटल स्टेट हो गई। आपका एटीट्यूड हो गया। आपके इमोशंस हो गए, परसेप्शन हो गया किसी चीज़ को लेके। ठीक है? या कॉग्निटिव डिसोनेंस हो गई। थिंकिंग में ही कॉन्फ्लिक्ट आ रहा है। प्रीमेच्योर इवैल्यूएशन हो गया। डिस्ट्रस्ट एंजाइटटी ये सारी जो भी कॉग्निशंस है, दिमाग से

54:40 रिलेटेड चीज़ हैं। कोई भी हर्डल क्रिएट हो रही है वो साइकोलॉजिकल बैरियर में आ जाएगा। लैंग्वेज से रिलेटेड लिंग्विस्टिक या कल्चरल बैरियर में आ जाएगा। ठीक है? मैं बोल रही हूं हिंदी में हो सकता है सामने वाले बच्चे को हिंदी ना आती हो या मैंने दिखा रखा है इंग्लिश में हो सकता है सामने वाले को अपनी लोकल लैंग्वेज आती हो। राइट? सो वो चीज क्या है? लिंग्विस्टिक बैरियर का काम करेगी। कम्युनिकेशन इफेक्टिवली नहीं हो पाएगा। सिमेंटिक बैरियर जो मैंने आपको बताया था कि आप कैसे इंटरप्रेट कर रहे हो उन वर्ड्स और सिंबल्स को। ठीक है? तो मान लो जार्गन यूज़ कर लिया या रिसीवर को समझ नहीं आ रही है चीजें। बिकॉज़ ऑफ़ दैट लैंग्वेज। तो जो पुअरली एक्सप्रेस्ड मैसेज है या एंबगुस वर्ड्स यूज़ किए गए हैं या अनक्लेरिफाइड एजम्पशनंस यूज़ कर लें कि हो सकता है मान ही लिया उसने कि ये इनफार्मेशन तो पता ही होगी

55:26 उसको बाय डिफ़ॉल्ट है। ये वाली इनेशन डाल दी मैसेज में। लेकिन उसके लिए एक बेस भी तो चाहिए था वो नहीं है। तो सिमेंटिक बैरियर मतलब बेसिकली जो किस तरीके से दो अलग-अलग लोग उस चीज़ को इंटरप्रेट कर रहे हैं जो उन वर्ड्स को या सिंबल्स को। देन दो वर्ड और भी पता होने चाहिए। जी एक हाई कॉन्टेक्स्ट कल्चर होता है। एक लो कॉन्टेक्स्ट कल्चर होता है। ठीक है? हाई लोन आप ये लगा लो कि मान लो ऐसा होता नहीं है। वैसे मैं सिर्फ याद करने के हिसाब से बता रही हूं। लोअर लेवल मान लो एजुकेशन में कोई लोअर लेवल पे है। मैं अगेन वही बोल रही हूं कि जरूरी नहीं है ऐसा हो। बट मैं याद करने के पर्सपेक्टिव से बता रही हूं। लो कॉन्टेक्स्ट कल्चर। सो जो इंसान थोड़े से लोअर लेवल पे रहेगा। मान लो पढ़ाई कम की है उसने तो वो एक्सप्लसिट डायरेक्ट और डिटेल्ड वर्बल कम्युनिकेशन

56:12 करेगा। पॉसिबिलिटी है। ओके? कि लाउड लाउड बोल के जो जो चीजें मन में थी बस बोल दी। जो हाई कॉन्टेक्स्ट कल्चर होगा जो इंटेलेक्चुअल लेवल पे चीजें आ गई हैं। वो अब क्या करेंगे? नॉनवर्बल क्यूज का भी इस्तेमाल करेंगे और थोड़ा सा कॉन्टेक्चुअल वे में इनफार्मेशन को कन्व करेंगे। तो अगर इंटेलेक्चुअल और इंप्लसिट कम्युनिकेशन होगा। ये ध्यान रखिए। ठीक है? तो जब इंप्लसिट हो वो हाई कॉन्टेक्स्ट इंटेलेक्चुअल लेवल पे स्लो आराम से चीजें और जो बिल्कुल एक्सप्लसिट हो वर्ड्स में डिटेल बिल्कुल मूफर्ट लोग वाली सिचुएशन वो लो कॉन्टेक्स्ट कल्चर ऐसे याद रख लो इसको ओके तो जो मूफर्ट लोग हैं वो लो कॉन्टेक्स्ट कल्चर में आ गए हाई कॉन्टेक्स्ट कल्चर हाईफाई लोग जो कि इंप्लसिट कम्युनिकेशन कर रहे हैं और एक वो नॉन वर्बल कज़ का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।

56:57 ओके देन है जी मैकेनिकल बैरियर्स मैकेनिकल वही जो आपके हिंडरेंस फिजिकल लेवल पे हिंडरेंस क्रिएट कर रहे हैं तो फौल्टी इक्विपमेंट हो सकता है डिवाइस हो सकती है इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से कोई दिक्कत आ सकती है ट्रांसमिट करने में ही दिक्कत आ रही है बिकॉज़ ऑफ़ सम टेक्निकल इशूज़ ओके तो वो मैकेनिकल में आ जाएंगे फिजिकल बैरियर्स जो है वो जो एनवायरमेंट की वजह से या फिजिकल डिस्टेंस की वजह से या लाइटिंग नॉइस उन चीजों की वजह से जो आ रहे हैं वो फिजिकल बैरियर होंगे। मैकेनिकल में कहीं ना कहीं टेक्निकल प्रॉब्लम आ गई और फिजिकल में जो एक्चुअल लेवल पे फिजिकल लेवल पे जो दिक्कतें हैं उनकी वजह से कहीं ना कहीं हो सकता है कि आपको थोड़ी-थोड़ी चीजें सेम नजर आए बट बहुत ज्यादा डिफरेंस है भी नहीं इनमें क्योंकि मैकेनिकल में जैसे फौ्टी इक्विपमेंट आ गया। अब एक इक्विपमेंट काम नहीं कर रहा है। वो फिजिकल बैरियर भी तो हो गया एक तरीके से। ठीक है? है? सो वो

57:44 चीजें यहां पे दो रोल प्ले कर सकते हैं। ऑर्गेनाइजेशनल बैरियर जब आप किसी ऑर्गेनाइजेशन में हैं, वहां पे काम कर रहे हैं। वहां पे एक कॉम्प्लेक्स हायरार्की है, रिजिड रूल्स हैं। ठीक है? इनसफिशिएंट कम्युनिकेशन फैसिलिटीज़ हैं। सो उस टाइम पे जो बैरियर्स वहां पे आ रहे हैं। ठीक है? सो बेटर प्रोडक्टिविटी नहीं हो पाएगी। इंपैक्ट करेगा ओवरऑल प्रोडक्टिविटी को भी, एंप्लई इंगेजमेंट को भी। तो साइज ऑफ ऑर्गेनाइजेशन अगर बहुत बड़ा साइज है तो बैरियर बन सकता है स्मॉल लेवल पे फिर भी चीजें सॉर्ट जल्दी हो जाएंगी। फिजिकल डिस्टेंस अगर एंप्लाइजज़ में ज्यादा है। ठीक है? या वो स्पेशलाइजेशन जो है जो भी एक्टिविटीज़ की। सो ये चीजें वो चीजें हैं जो कहीं ना कहीं हिंडरेंस क्रिएट कर सकती हैं। ये वो पॉइंट्स हैं। ओके? सो ऑर्गेनाइजेशन के दौरान ऑर्गेनाइजेशन में आप जब कम्युनिकेट करने में कोई ना कोई

58:31 दिक्कत आ रही है। फ्री फ्लो ऑफ़ इनफेशन नहीं हो पा रहा है। वो ऑर्गेनाइजेशनल बैरियर हो गया। अब कम्युनिकेट जब आप करते हो तो कुछ ना कुछ इफेक्ट भी होता है। ठीक है? सो कम्युनिकेशन इफ़ेक्ट्स मतलब इट रेफर्स टू द इंपैक्ट दैट अ मैसेज हैज़ ऑन द ऑडियंस। कि उस मैसेज की वजह से अगले इंसान में क्या बदलाव देखने को मिला? क्या इंपैक्ट हुआ? एस्थेटिक इफ़ेक्ट हुआ। ठीक है? या इंस्ट्रूमेंटल इफेक्ट हुआ या प्रेस्टीज का इफेक्ट आ गया। देन रिइंफोर्समेंट इफेक्ट हो गया या रिस्पाइट इफेक्ट हुआ। ओके? तो रिस्पाइट मींस अ शॉर्ट पीरियड ऑफ़ रेस्ट फ्रॉम समथिंग दैट इज़ डिफिकल्ट और अनप्लेज़ेंट। सो प्लेज़ेंट डिस्ट्रैक्शन यानी कुछ टाइम के लिए आपने उस चीज से मन हटा के दूसरी तरफ लगा दिया। ओके? तो वो शॉर्ट पीरियड जो आपने डिफिकल्टी और अनप्लेज़ेंट से दूर बिताया।

59:16 सो वो रिस्पाइट इफ़ेक्ट हो सकता है। देन रिइंफोर्समेंट इफ़ेक्ट हो सकता है कि ऑडियंस के ऊपर जो इफ़ेक्ट आ रहा है इन टर्म्स ऑफ रिइंफोर्सिंग देयर एकिस्टिंग एटीट्यूड कि मान लो आप एनिमल मूवी देख के आए। आप वैसे ही वायलेंट इंसान हो। थोड़ा और बढ़ गई वो चीजें। सो वो रिइंफोर्स कर दिया उस मूवी ने। ठीक है? अब आप कोई एक हंसीज़ाक वाली मस्त मूवी देख के आए। टेंशन से दूर जाके वो दो घंटे आपने बिताए तो वो रिस्पाइट इफ़ेक्ट हो गया। प्रेस्टीज इफ़ेक्ट स्पीकर की क्रेडिबिलिटी और रेपुटेशन की वजह से। ठीक है? कि मान लो कोई ऐड किसी पर्टिकुलर इंसान ने की। विराट कोहली ने कोई ऐड कर दी। सो वो प्रेस्टीज इफेक्ट आ गया कि स्पीकर की क्रेडिबिलिटी है। वो जो बोल रहा है तो शायद सही बोल रहा होगा ऑडियंस की नजर में। ओके? या अथॉरिटी या स्टेटस की तो वहां स्टेटस की वजह से हो गया या मान लो कोई फ़ूड का आइटम था और फूड

1:00:03 कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने कोई चीज बोल दी तो वो अथॉरिटी वाली चीज आ गई। सो उन्होंने जो चीज़ कम्युनिकेट की वहां प्रेस्टीज इफ़ेक्ट भी रहेगा। इंस्ट्रूमेंटल इफ़ेक्ट प्रैक्टिकली या फंक्शनल पर्पस। जैसे कोई चीज़ इनफॉर्म की पर्सुएडिंग और मोटिवेटिंग देम टू टेक एक्शन। ठीक है? कि आप लक्ष्य मूवी देख के आए हो और अब आपका मन कर रहा है कि आप आज ही पढ़ दो। सारी चीजें आज ही जॉब लग जाओ। ठीक है? या आज ही देश के प्रति सर्व कर दो वो चीज। एस्थेटिक इफेक्ट आर्टिस्टिक या क्रिएटिव एलिमेंट। ठीक है? चाहे वो एज अ स्टाइल हो, टोन हो, इमेजिनरी तरीके से आप उसको यूज़ कर रहे हो, तो वो अगर आपकी कोई चीज़ देख के करके जो है या किसी मैसेज की वजह से एस्थेटिक चीज़ें जाग रही हैं, तो वो एस्थेटिक इफ़ेक्ट हो जाएगा। ओके? इस तरीके से क्वेश्चन आपको क्लासरूम कम्युनिकेशन वगैरह से देखने को मिल सकता है कि कौन-कौन सी चीजें हैं, कौन-कौन से

1:00:49 एलिमेंट्स हैं जिनकी जरूरत पड़ेगी फॉर कंप्लीशन ऑफ क्लासरूम कम्युनिकेशन। तो सोर्स की जरूरत पड़ेगी, नॉइस की, कंटेंट की, रिसीवर की या फीडबैक की। सो देखो नॉइस की जरूरत तो हमें नहीं होती ना। नॉइस ना हो तो बेहतर ही है ना। बाकी सोर्स, कंटेंट, रिसीवर और फीडबैक रहे तो अच्छी बात है। राइट? तो ये सी डी ही आंसर हो जाएगा। फिर कम्युनिकेशन में ये वर्ड्स भी यूज़ होते हैं। जी सिंप्लेक्स कम्युनिकेशन, डुप्लेक्स कम्युनिकेशन में भी हाफ डुप्लेक्स, फुल डुप्लेक्स। तो सिंप्लेक्स मतलब सिंपल वे में वन वे कम्युनिकेशन है। जैसे रेडियो ब्रॉडकास्टिंग हो गया। हाफ डुप्लेक्स में क्या हो गया कि कम्युनिकेशन तो डुप्लेक्स है यानी टू वे है बट सेम टाइम पे नहीं है। जैसे वॉकी टॉकी है। वॉकी टॉकी पे बात करते हुए सुना होगा ना आपने वेब सीरीज में या आप किसी मूवी में देखोगे। एक तरफ से बोला कि जनाब हम पे हमला हो गया है। ओवर एंड आउट। फिर वो

1:01:36 दूसरी तरफ से बोलेगा। ठीक है? तो वो चीज क्या है? वो वॉकी टटोकी पे एक तरफ से इंफॉर्मेशन पास ऑन कर दी। फिर दूसरा इंसान बोलेगा हम हां नॉट एट द सेम टाइम। हां। ठीक है। फिर है फुल डुप्लेक्स जी सेम टाइम पे बोल सकते हो जैसे टेलीफोन की कन्वर्सेशन। अब दोनों इंसान साथ में भी बोल सकते हैं। चाहे समझ आए ना आए बट कम्युनिकेट कर सकते हैं। ओके? देन है कम्युनिकेशन मीडिया की आप बात करोगे तो ट्रेडिशनल कम्युनिकेशन मीडिया में हम प्रिंटिंग या ब्रॉडकास्ट मीडिया लेके चलते हैं। ब्रॉडकास्ट में हम रेडियो या टीवी का ज्यादातर लेके चलते हैं। डिजिटल कम्युनिकेशन मीडिया जैसे सोशल मीडिया या ऑनलाइन मीडिया हो गया। एक इंटरेक्टिव कम्युनिकेशन मीडिया जिसमें वेबिनार्स या गेमिंग हो गया। ओके? तो ये कम्युनिकेशन मीडिया के अलग-अलग टाइप्स आप देख सकते हो। एनालॉग और डिजिटल मीडिया में

1:02:22 भी पार्ट किया जाता है कई बार। जैसे डिजिटल कम्युनिकेशन मीडिया तो पढ़ लिया। एनालॉग मीडिया जो है वो यूजुअली डिराइव किया गया है ऑडियो रिकॉर्डिंग से। ठीक है? सो एनी फॉर्म ऑफ़ मीडिया जो यूज़ कर रहा है कंटीन्यूअस और वेरिंग फिजिकल सिग्नल्स टू रिप्रेजेंट द इनेशन एज़ अपोज्ड टू डिजिटल मीडिया जो डिस्क्रीज़्ड और क्वांटाइज्ड वैल्यूज़ यूज़ करेगा। ओके? तो ये चीज़ भी आपको पता हो कि एनालॉग कंटीन्यूअस इनेशन यूज़ कर रहा है। फिजिकल सिग्नल्स यूज़ कर रहा है। और डिजिटल जो है वो डिस्क्रीट और क्वांटाइज्ड कंटीन्यूअस की जगह डिस्क्रीट यूज़ कर रहा है। ओके? यूज़ जो होगा एनालॉग मीडिया का प्रीडेट्स डिजिटल मीडिया एंड इंक्लूड्स वेरियस फॉर्म जैसे विनाइल रिकॉर्ड्स या ऑडियो कैसेट्स बीएचएस टेप्स हो गई फिल्म रील्स हो गई तो ये सारी चीजें एनालॉग में रहती हैं ऑडियंसेस फॉर एनालॉग

1:03:08 मीडिया बहुत लार्ज हेटेरोजीनस और एनोनमस ऑडियंस आपको देखने को मिलेगी ओके देन एक थ्योरी है जी मार्शल मैकलोहान की तो ये वर्ड आपको पता होना चाहिए मार्शल मैकलोहन ये आदमी का नाम ये इन्होंने एक बुक लिखी है अंडरस्टैंडिंग मीडिया द एक्सटेंशन ऑफ मैन ठीक है? इन्होंने दो चीजों में डिवाइड किया। इन्होंने दो चीजों में डिस्टिंग्विश किया। एक हॉट मीडिया, एक कूल मीडिया। ये आपको पता हो। तो ये किसने किया है वो पता हो? हॉट मीडिया, कूल मीडिया में क्या-क्या आते हैं? हॉट मीडिया में प्रिंटिंग, फोटोग्राफ, रेडियो, मूवीज ये आ जाएंगी। कूल मीडिया में आपकी स्पीच, कार्टून, टेलीफोन, टेलीविज़ ये आ जाएंगे। ओके? हॉट मीडिया थोड़े हाई डेफिनेशन नज़र आएंगे बिकॉज़ दे आर रिच इन सेंसरी डाटा। और कूल मीडिया जो है वो लो डेफिनेशन नज़र आएंगे। लेस सेंसरी डाटा आपको यहां दिखेगा। और कॉन्सिक्वेंटली डिमांड फॉर मोर

1:03:54 पार्टिसिपेशन एंड कंप्लीशन बाय द ऑडियंस। ठीक है? सो अ यूज़फुल निमोनिक इज़ टू इमेजिन दैट हॉट मीडिया आर टू हॉट टू टच। ओके? तो ये चीज़ आप ध्यान रख सकते हो। सो हॉट और कूल। तो ये दोनों मीडिया आपको याद रखने हैं। इनके एग्जांपल जरूर याद रखने हैं। हॉट में आपके ये प्रिंट फोटोग्राफ रेडियो और मूवीज़ आ गई और कूल में आपके आज वाली चीजें आ गई। टेलीफ़ोन, टेलीविज़, कार्टून स्पीच वगैरह। ओके? देन फिल्म्स की जब बात

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