अच्छे कर्मों का बुरा फल क्यों मिलता है

Ravi Kumar www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो एक राजा द्वारा दिए गए दो अन्यायपूर्ण दंडों की कहानी है। पहले, एक निर्दोष साधु को डाकुओं का साथी समझकर सूली पर चढ़ाया जाता है, और दूसरे, धर्मराज को एक बच्चे के अपराध के लिए कठोर दंड देने के कारण श्राप दिया जाता है।

  • राजा को साधु की निर्दोषता का पता चलता है, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
  • धर्मराज को अपने अन्यायपूर्ण निर्णय के कारण पृथ्वी पर जन्म लेने का श्राप मिलता है।

व्यापारियों की प्रार्थना

कुछ व्यापारी एक साधु से डाकुओं से बचाने की प्रार्थना करते हैं। वे बताते हैं कि डाकू उनका पीछा कर रहे हैं और उनका धन छीनकर उन्हें मार डालेंगे। साधु उन्हें अपनी कुटिया में छिपने के लिए कहता है और भागने का रास्ता बताता है।

साधु की परीक्षा

राजा के सिपाही, जो डाकुओं को पकड़ने के लिए व्यापारियों के रूप में छिपे हुए हैं, साधु से पूछते हैं कि उसने डाकुओं को कहां भगा दिया और उनका माल कहां रखा है। साधु बताता है कि उसने उन्हें शरण दी और उनका धन अपनी कुटिया में छुपा दिया। सिपाही साधु को डाकुओं का साथी मानते हैं।

विधवा की हत्या

राजा को एक विधवा की हत्या के बारे में बताया जाता है। एक आदमी ने विधवा से उसके धन को छुपाने में मदद करने की पेशकश की, फिर उसकी हत्या कर दी और धन लेकर भाग गया। राजा उस आदमी को चौराहे पर सूली पर चढ़ाने का आदेश देता है।

साधु पर आरोप

राजा के सिपाही एक साधु को पकड़कर लाते हैं और बताते हैं कि वह डाकुओं का साथी है। वे बताते हैं कि उन्होंने साधु को डाकुओं से बात करते हुए देखा और उसे लूट का माल अपनी कुटिया में छिपाते हुए पाया। राजा साधु को सूली पर चढ़ाने का आदेश देता है।

महामुनि मांडव्य

लोगों को पता चलता है कि जिस साधु को सूली पर चढ़ाया गया है, वह महामुनि मांडव्य हैं। राजा को अपनी गलती का एहसास होता है और वह उनसे क्षमा मांगने जाता है।

राजा की क्षमा याचना

राजा महामुनि मांडव्य से क्षमा मांगता है और दंड देने की पेशकश करता है। महामुनि मांडव्य कहते हैं कि राजा का कोई दोष नहीं है, क्योंकि उसने उस परिस्थिति में सही न्याय किया था। वह कहते हैं कि यह धर्मराज की आज्ञा से हुआ है और वह उनसे इसका उत्तर मांगेंगे।

धर्मराज से प्रश्न

महामुनि मांडव्य धर्मराज से पूछते हैं कि उन्हें इतना भीषण दंड क्यों मिला। धर्मराज बताते हैं कि उन्होंने बचपन में पक्षियों को कांटों से छेदा था। महामुनि मांडव्य क्रोधित हो जाते हैं और कहते हैं कि 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे के कर्मों को अधर्म नहीं माना जाता है।

धर्मराज को श्राप

महामुनि मांडव्य धर्मराज को श्राप देते हैं कि वह मनुष्य योनि में जन्म लेंगे और न्याय और अन्याय की गुत्थियां सुलझाते-सुलझाते थक जाएंगे।

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Transcript

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0:00 कर दो और फिर इसमें राज्य हमारी सहायता करो तुम्हारी सहायता करो को डाकू हमारा पीछा कर रहे हैं कि हमारा धन छीन कर तो मैं मार डालेंगे हैं कर दो इसलिए कृपा करके हमारा ध्यान बार अपनी कुटिया में छुपा कर रख लीजिए तो और हमें भागने का कोई पारीक बताइए तो को पूरा कूड़ा कूड़ा पीछा कर रहे हैं तो मेरी सहायता करो इसको हमारे अधीन करें तो हमें मार डालेंगे कोई बात नहीं है

0:47 कि हमारी कुटिया में सामान रख तो और तुम लोग इधर से नहीं उस रास्ते से निकल जाओ को बच्चों को [संगीत] हुआ है [संगीत] और तुम तो उड़ उड़ डूब का सारा माल प्राणों की खुशिया मेरा कहीं हैं और साथ उन्होंने रास्ता भी दिखाया है अवश्य अवश्य भूमिका आदमी है पैसा प्रखंडों चलल लगते

1:35 हैं है कि तुमने उनका खून को कहा भगा दिया है के पुत्र कमाल कहां रखा है कि वह डाकू है यह तुम डाकू हम ढूंढ है हम राजा के सिपाही है सिपाही उनका वह को पकड़ने के लिए हम व्यापारियों का पेस्ट बना कर आए हैं अजय देवगन की कर दो कि यह सब क्या है कि उन्होंने कहा कि तुम डाकू हो उन्हें लूटना चाहते हो वह मेरी शरण आए थे

2:22 तो मैंने उनका ढूंढ अपनी कुटिया में रखकर उन्हें भगा दिया है कि अब तुम कहती हो कि वह को थे सत्य क्या है इतने भोले मत बनो पाखंडी बाबा तुम ही रखो के साथी हो पंछी परंतु निभाती शुरू अब यह परंतु वरन तो सब राजा के सामने कहना जब ऐसे क्रॉस साइन इन कर दो अजय को और महाराज जी

3:12 कि इस अपराधी ने अपने पड़ोस में रहने वाली विधवा स्त्री की हत्या इसलिए की आप किस को इस बात का ज्ञान हो गया था कि उस स्त्री ने अपने घर में बहुत सारा धन छिपा कर रखा हुआ है [संगीत] कि यदि उसने अपना धन छुपा कर रखा हुआ था तो इसे इस बात का ज्ञान कैसे हो गया कोई स्त्री इसे बहुत अच्छा आप भी समझती थी अ मैं इसको अपने पति की मृत्यु के बाद उसने बड़े भोलेपन से इसलिए परामर्श या कि जो पैसा है उसका पति छोड़ गया है उसका पता कि चोर डाकुओं को मिल गया तो सारा धन लूटकर ले जाएंगे कि उसकी रक्षा कैसे की जाए तो

4:00 हाउ टो उस आदमी ने उस स्त्री को यह सुझाव दिया कि अपने घर के आंगन में एक बहुत बड़ा गड्ढा खोद तो उसमें रुझान को छुपा 2 ऊ है और गड्ढा खोदने में सहायता के बहाने एक रात यह आदमी उसके घर गया है कि जब दोनों ने मिलकर वह गड्ढा खोदा तो उस आदमी ने उस स्त्री की हत्या करके उसको गड्ढे में दबा दिया और स्वयं उसका धन लेकर भाग गया महाराज की हेलो हेलो कि इसे नगर के चौराहे पर ले जाकर सूली पर चढ़ अधरों से कर दो लुट पेज बजे श्रुति की जगह आज केवल तुमने

4:50 छोड़ी की होती तो हम तुम पर अवश्य तय करते परंतु तुमने तुमने तो एक अबला के साथ विश्वास स्थापित किया है फिर भी इसलिए तुम दया के पात्र नहीं रहे लेकिन वो इसे तो दो कर दो कि अ कर दो कि इस साधु को लेकर आए हो

5:43 कि महाराज यह साधु नहीं अरे यह तो बहुत बार ढोंगी है कि खांडव-वन के जंगलों में आजकल कुछ डाकुओं की टोली ने बड़ा उत्पात मचा रखा है से जुड़े निर्मम लोग हैं महाराज हर आने-जाने वाले यात्रियों व्यापारियों को लूटते हैं और उनका वध कर देते हैं महाराज जी आज की समाचार मिले पर मैंने अपने कुछ सिपाहियों को उस जंगल में व्यापारियों के बेस पर भेजा जब उन डाकुओं ने हमारे सैनिकों पर हमला किया उन्हें लूटा और फिर उनका वध करना चाहा तो हमारे सैनिकों ने भी अपने शस्त्र निकाल लिए अच्छा जी को देखकर सारे डाकू भाग खड़े हुए परंतु उनका पीछा करते-करते जब हमारे सैनिक

6:31 इस साधु की कुटिया में पहुंचे तो यह देखकर हैरान रह गए कि लूट का सारा माल इसी कुटिया में छिपा कर रखा हुआ है कि इससे यह पता चलता है बाहर आज कि साधु उन्हीं के गिरोह का एक डाकू है कि झूठ-मूठ का साधु बनकर समस्या का ढोंग रच रहा है परंतु वास्तव में वास्तव में यह उनके मां की रक्षा करता है बाहर आज है शो मी अब इसका क्या प्रमाण है था कि लूट का सामान इनके इच्छा से उस कुटिया में रखा गया था भी हो सकता है ध्यान में बैठे हो कि किसी दूसरे ने पांच समान गलतियां हो

7:16 रही महाराज ऐसा नहीं है हमारे सैनिकों ने उन डाकुओं के साथ इस साधु को बात करते देखा था है और यह भी देखा था कि साधु में संकेत से यह बता रहा था कि यह सारा मजा छोड़कर यहां से भाग जाओ है तो क्या यह सत्य है कि तुमने उनका कौन है स्वयं कहा कि प्रमाण छोड़कर यहां से भाग जाओ कि हम है राज्य है परंतु जब तुमने मान लिया कि तुमने स्वयं उन लोगों को कहा कि लूट का माल अंदर रख कर भाग जाओ तो उसके पश्चात और क्या परंतु रह जाता है

8:03 तुम तोपों पाखंडी हो जिससे न केवल साबेस का मन किया है पर कि हम जैसे सांसारिक मनुष्यों की जो आज था जिस श्रद्धा व विश्वास साधु संतों के प्रति होता है तुमने हमारे हूं सत्या उस विश्वास की हत्या की है कि मानव के हत्या करने वाला महा पापी होता है परंतु जो श्रद्धा जो विश्वास कि हत्या करता है वह तो उससे भी वह पापी होता है अरे सफी इस धरती पर रहने योग्य नहीं है इसे आज ही नगर के चौराहे पर ले जाकर सूर्य बच्चा दोनों विधाओं से अ

9:02 कर दो [संगीत] कर दो [प्रशंसा] लुट

9:50 कर दो हुआ है है कि महामुनि मांडव्य हैं तुम्हें कैसे पता चला महाराज उनके इस चमत्कार की चर्चा सुनते ही वहां लोगों की भीड़ जमा होनी शुरू हो गई उस भीड़ में एक साधु भी था कि उसने उन्हें देखते ही पहचान लिया कि यह तो स्वयं रिमांड अवधि है और फिर उसे उन्हें शुरू से उतर जाने को कहा आ को पंच महा मुनि ने यह कहकर उतरना अस्वीकार कर दिया है कि मैं तो अपने राजा की आज्ञा का पालन कर रहा हूं कि जब तक मैं उनके राज्यों में हूं जो आदेश के बिना वसूली सदैव उत्तर सकता है

10:37 कि यह तुम मुझसे भाग बड़ा अनर्थ हो गया हमें तुरंत उनके पास चलकर क्षमा मांगनी चाहिए नई दिल्ली [संगीत] इस वॉल्यूम का एल्बम प्रभाव परिवार 200 ग्राम कटा हुआ था हुआ है बोनी बग्गा मुझे क्षमा कर दीजिए चमा चमा है दयानिधान श्यामा [संगीत] कर दो

11:28 कि के गुलिवर मुझे क्षमा कर दीजिए हां बेबी ढूंढते कल इस तरफ अनर्थ हो गया [संगीत] आज मैं आपको पहचान नहीं सका मुझे इस चमार कर दीजिए है और यदि आपकी इच्छा हो तो आप मुझे दंड भी दे सकते हैं कि मैं उसे प्रायश्चित के तौर पर सहर्ष स्वीकार कर लूंगा काया [संगीत] हुआ है क्यों नहीं राजन कि मैं तुम्हें कोई दंड नहीं देना चाहता है [संगीत]

12:13 है क्योंकि इसमें तुम्हारा कोई दोष नहीं है लुट जिस परिस्थिति में तुम्हारे सैनिकों ने मुझे देखा तो उस परिस्थिति के अनुसार तुमने जो न्याय किया वह चिट्ठी था जेठ है इसलिए इसमें तुम्हारा कोई पोस्ट नहीं 126 वृद्ध हेलो दोस्तों धर्मराज कर दो कि जिस की आज्ञा से काल ने उस क्षण ऐसी परिस्थिति पैदा करती हैं कि ऐसा क्यों हुआ कि इसका उत्तर मुझे स्वर्ग में धर्मराज से मांगना पड़ेगा ऐ [संगीत] कि Bigg Boss ग्रहण मुझे इस दंड का भागी होना पड़ा [संगीत]

13:00 कि हे राजन और मैंने आपकी आज्ञा का पालन करके आप का दिया हुआ दंड भोग ही है आपकी चोली इससे अधिक मेरे शरीर का चयन नहीं कर सकेगी है इसलिए आप यदि आप मुझे आज्ञा दें कि तुम इसी क्षण सीधा धर्मराज के पास जाना चाहता था कि यह मुझे बिल पे जो मुझे 1like चित्र करे [संगीत] कि यदि हो सके तो मुझे अपनी सेवा का कुछ तो अवसर प्रदान करें कि इससे मेरा कुछ तो प्रायश्चित हो सका या

13:46 वह फिर कभी सही राजन तुम्हारा कल्याण हो कर दो [संगीत] और सुनाओ कर दो [संगीत] कि मैंने जानते हुए अपने आयु में कोई बात नहीं किया परंतु अंजाने में मुझे ऐसा कौन-सा पाप हुआ जिसका इतना भीषण पर मजबूर होना पड़ा था ए ट्रिप मूर्ति माल्यार्पण व आपत्तियों के

14:35 कुछ भाग में शिक्षण दिया करते थे उसी क्रम का यह पल आपको प्राप्त हुआ था कर दो हुआ है कर दो हुआ है कर दो कि थ्रू शास्त्र के अनुसार यहां से लेकर 12 वर्ष की आयु तक वाले क्यों कुछ करें उसे अधर्म नहीं माना जाता है क्योंकि उस समय तक बालक को धर्म शास्त्र का ज्ञान

15:22 नहीं हो सकता आज तो तुमने बाल झड़ने की हुई मेरी मूर्खता को पाप की संज्ञा देकर न्याय किया है दूसरी बात यह है कि तुम यह भूल गए कि न्याय के आसन पर बैठने वाला अपराध की मात्रा के अनुसार ही दंड देता है में उच्च मात्रा से अधिक ठंड देने से अन्याय करने का पाप लगता है है और जो स्वयं न्यायमूर्ति होकर किसी पर न्याय करें तो वह बीच नवरात कहा जाता है है अतः धर्म इस पाप का दंड भोगने के लिए तो मनुष्य योनि धारण करके एक सूत्र माता के गर्भ से मृत्यु लोक में जन्म लोगे जहां तुम न्याय और अन्याय की गुत्थियां सुलझाते

16:07 सुलझाते थक जाओगे तेरी तुम्हारा धंधा है अ कर दो

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