0:01 नमस्कार साथियों की फैक्ट में आप सभी का स्वागत है। उम्मीद करता हूं कि आप सभी लोग बेहतर होंगे। सभी सनातनी और राष्ट्रवादी भाई बहनों से अपील रहेगी कि चैनल को सब्सक्राइब करिएगा। वीडियो को लाइक और अधिक से अधिक लोगों तक शेयर कर दीजिएगा। वीडियो पूरा देखिएगा। संसद में केंद्र की सरकार मोदी सरकार एक बिल लेकर के आई है। एफसीआरए जब आप फॉरेन से पैसा लेते हो एनजीओ या किसी ट्रस्ट के माध्यम से तो आपको एक लाइसेंस लेना पड़ता है जिसका नाम है एफसीआरए। आप लोगों ने कई बार इसके बारे में सुन रखा होगा। एफसीआरए में जो पैसा आता है वह पैसा किस तरीके से संस्था खर्च करती है इसके बारे में सरकार को जानकारी देनी होती है। लेकिन
0:49 इस पूरे कानून में इतने लूप होल है। इतने लूप होल है कि इसकी वजह से भारत में नक्सलवाद, माओवाद, धर्म परिवर्तन, खालीस्तान तमाम तरीके की चीजें चलती रहती है। भारत के खिलाफ प्रोपोगेंडा जैसे आप देखते हैं ना कि वह भारत हंगर इंडेक्स में कितना ऊपर है, हैप्पीनेस इंडेक्स में कितना नीचे है। यह सब जितनी भी चीजें आती है, भारत में एनजीओ है। विदेश से फंड आता है। वो उल्टा सुल्टा भारत विरोधी चीजें करके भेज देते हैं। उसके बारे में बहुत बताने की जरूरत नहीं है। इसको संशोधित करने के लिए अमित शाह बेसिकली मैं अमित शाह का नाम क्यों लिख रहा हूं? उसके बारे में भी बताऊंगा। ने इस बिल की पहल की कि भैया एफसीआरए में संशोधन बहुत जरूरी है। एफसीआर में संशोधन
1:36 क्यों जरूरी है? आप लोगों को पता होगा कि गृह मंत्री अमित शाह ने एक डेडलाइन दी थी कि 31 मार्च 2026 तक देश से माओवाद खत्म कर देना है। और लगभग लगभग आप मान करके चलिए कि 99% माओवाद को इस देश से खत्म कर दिया। अमित शाह ने। संसद में इसके बारे में स्पीच भी हो गई। और बहुत स्पष्ट तौर से अमित शाह ने एक बात और कह दी कि जो हथियार उठाएगा उसको हथियार से जवाब दिया जाएगा। बातचीत से जवाब नहीं दिया जाएगा। कांग्रेसी कितना भी बिलबिलाते रहे लेकिन जो कहना था अमित शाह ने कह दिया। अब सरकार को एक बहुत डर है क्योंकि मावात से रिलेटेड जितनी भी चीजें थी देश के गृह मंत्री हैं तो सारा कुछ उन्हीं के हैंडल उन्हीं के निगरानी में हो रहा था और उनके पास सारी
2:21 रिपोर्ट्स आ रही थी। मावात को खत्म करने वाले और जो इसके विशेषज्ञ हैं उन लोगों ने कहा कि देखो भाई यह फिर से पनप सकता है। क्यों फिर से पनप सकता है? क्योंकि जो अर्बन नक्सल है विदेशी फंडिंग फिर से आएगी। सरकार अगर बदलेगी या कुछ इस तरीके की चीजें होंगी या वहां पर राज्य सरकारें बदलेंगी तो विदेश से फंडिंग आएगी, फंडिंग आएगी और फिर से तमाशा शुरू हो जाएगा। तो क्या करना है? तो जीएफसीआरए में संशोधन करना है और उसी संशोधन बिल को लेकर के चर्चा होनी थी सदन में। उसके बाद कांग्रेस आप अंदाजा लगाइए कांग्रेस अखिलेश यादव की पार्टी विपक्ष की सारी पार्टियां इस तरीके से बौखला गई जैसे लगता है कि एफसीआरए का सबसे अधिक पैसा
3:08 इन्हीं के खाते में आता है। मतलब आप अंदाजा नहीं लगा सकते। लेकिन एक चीज और मान करके चलिए व संशोधन बिल जो आया था यह उससे बड़ा बिल है। आप जितना भी अनरेट चाहे मणिपुर में आपने देखा चाहे लंबे समय तक देश में माववाद चलता रहा। लंबे समय तक देश में धर्म परिवर्तन का खेल चलता रहा। अभी चल रहा है। दो बोरी चावल यही सब कुछ कमेंट करके लोग इशरी कर लेते हैं। इसमें होता कुछ नहीं है। क्योंकि जब तक विदेशों से फंडिंग आती रहेगी और वो ट्रांसपेरेंस नहीं होगी तब तक यह खेल कोई बंद नहीं कर सकता। चाहे मीडिया में कितना चिल्ला ले, सोशल मीडिया में कितना चिल्ला ले और चाहे YouTube पे कितना चिल्ला ले। इस बात को आप समझ लीजिएगा। यह विदेशी फंडिंग पर अब तक का जितनी भी
3:57 जितने भी संशोधन हुए विदेशी फंडिंग से चाहे एनजीओ बंद करने की बात हो जाए जो भी चीज हो ये सबसे तगड़ी चोट है। क्यों है मैं उसके बारे में बताऊंगा। केसी वेणुगोपाल ने एक बात कही कुछ भी हो जाए इसको पास नहीं होने देंगे। केरल से ईसाई संगठनों ने कहा यह तो हमारे साथ बहुत बड़ा भेदभाव है। कुछ लोग कह रहे हैं तो अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव है। यानी कि इस देश का अल्पसंख्यक विदेश से पैसा फर्जी तरीके से लेता है और देश विरोधी कृत करता है। इस बात को स्पष्ट तौर पे क्यों नहीं विपक्ष के नेता बता देते कि भैया हां हम अल्पसंख्यकों के ठेकेदार हैं। वह अल्पसंख्यक विदेश से फर्जी पैसा लेते हैं और देश में देश विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहते हैं। लेकिन वह यह तो बता
4:42 नहीं सकते। तो क्या कर रहे हैं इसको देखते हैं। है ना? क्या है एफसीआरए बिल जिसने उड़ा दी एनजीओ की नीत? विपक्ष कर रहा है विरोध। ठीक। पूरा वीडियो देखिएगा। एफसीआरए से जुड़े नए बिल में ऐसा क्या है जो विपक्ष कर रहा है हंगामा। कांग्रेस ने दिल्ली में बुलाई सांसदों की मीटिंग। इमरजेंसी मीटिंग बुला ली है। जबकि यह बिल अभी पेश नहीं हो रहा है। अभी सिर्फ चर्चा के लिए था, सुझाव के लिए था। इन सब सारी चीजों के लिए था। अभी पेश नहीं कर रही है सरकार। ऐसा नहीं कि सरकार ने पेश कर दिया वापस ले। ना ना सरकार ने कहा बहुत आराम से इसको पेश करेंगे। लेकिन इसको पेश करेंगे। याद रखिएगा वक्त संशोधन बिल जब आ रहा था इस देश के विपक्ष ने इस देश में मुसलमानों
5:29 ने इस देश में एनजीओ ने बहुत नौटंकी किया फिर तो खुद भाजपा समर्थक कहने लगा लगता है बिल नहीं पास होगा जब स्टैंडिंग कमेटी को चला गया जेपीसी में चला गया जब भी तो लोगों ने कहा नहीं लटकाने भटकाने वाली बात है लेकिन नहीं जेपीसी हुई पूरे देश भर में हुई उसके बाद वापस जेपीसी की रिपोर्ट आई और रिपोर्ट आने के बाद इस पर कानून बना। कानून पास भी हुआ। उस समय कहा गया था कि चंद्रबाबू नायडू इस्तीफा दे देंगे। नीतीश कुमार हाथ खींच लेंगे। भाजपा की सरकार गिर जाएगी। तमाम बातें होने के बावजूद भी वो बिल पास हुआ और मैं आपको बता रहा हूं कि यह एफसीआरए संशोधन बिल जरूर पास होगा क्योंकि यह गृह मंत्री अमित शाह का अपना बिल है। इस बात को समझिएगा।
6:20 अमित शाह के बारे में एक चीज बहुत अच्छी लगती है या तो पट्ठा करता नहीं कोई काम या हाथ डाल दिया तो फिर पूरा ही करता है और पूरी तैयारी के साथ तो ये मान करके चलिए ये बिल पास होगा हां टाइम हो सकता है कि दो महीना बाद हो चार महीना बाद हो छ महीना बाद हो मैं उसके ऊपर नहीं जाता हूं या हो सकता है ठीक है जेपीसी में भेज देते हैं जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी बैठ जाए इस पे तमाम बातें हो जाए तब पास हो लेकिन होगा पास इस बात को जान लीजिएगा आप अच्छा यह देखिए अब इसमें आप देखेंगे ना एक भी हिंदू नहीं खड़ा है यहां फिर से इस वीडियो को इमेज को ढूंढ करके इंटरनेट से देखिएगा आप एक भी हिंदू नहीं
7:05 खड़ा है इसमें सांसद है ये नाम इनका हिंदुओं की तरह है बस समझ रहे हैं ना आप जैसे वो था ना एक साउथ का एक्टर है वो कहता है मैं नास्तिक हूं मैं नास्तिक हूं जब उसकी मां मरी तो पूरा सब कुछ उसका क्रिश्चियन के धर्म के तौर पर हुआ है। प्रकाश राज उसका नाम है। ये उसी तरीके से प्रकाश राज नाम है। हिंदू धर्म को गाली देना, हिंदू देवी देवताओं को गाली देना यही सब उन सबों का शगल है। अब बाद में पता चलता नहीं ये तो हिंदू थे ही नहीं। खैर ये उसी तरीके वाले हिंदू हैं। इसको भी समझिएगा। विपक्षी सांसदों ने बुधवार को संसद के मकर द्वार पर विदेशी अंशदान अधिनियम संशोधन 2026 के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेस महासचिव केशु वेणुगोपाल ने पार्टी सांसदों को तत्काल दिल्ली पहुंचने का निर्देश देते हुए बीजेपी पर चुनावी
7:50 सीजन में जबरम बिल थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और कई विपक्षी दल इस वक्त चुनाव की गामागामी में व्यस्त हैं। ऐसे में बीजेपी सांसद ने एफसीआरएस संशोधन विधेयक को जबरदस्ती पारित कराने की योजना बना रही है। अच्छा समझ रहे हैं आप? सॉरी। थोड़ा जुखाम हो रखा है। आगे और बताता हूं। [नाक से की जाने वाली आवाज़] कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यह असंवैधानिक है। जैसे सीए आएगा असंवैधानिक एनआरसी होने की बात होगी असंवैधानिक व संशोधन होगा असंवैधानिक जीएसटी आएगा असंवैधानिक 370 असंवैधानिक 35 ए असंवैधानिक जो कुछ भी संशोधन होगा इस देश के भलाई के लिए होगा कांग्रेस और विपक्ष उसको कहता है सब कुछ असंवैधानिक है लेकिन पास होगा
8:41 ये देश हित में बहुत जरूरी है। इसलिए देश हित में बहुत जरूरी है कि इस देश के अंदर एनजीओ गैंग मिलकर के जिस तरीके का प्रोपोगेंडा और जिस तरीके का षड्यंत्र रचते हैं उसके बारे में सबको पता है। आपको क्या पता है कि नेपाल में अचानक से ऐसी चीजें हो गई। यहां कहा जाता है ना कि भैया विदेशी ताकतें भारत में दंगा कराना चाहती है। भारत में मारकाट कराना चाहती हैं या प्रधानमंत्री को हटाना चाहती है। तमाम तरीके की बातें होती है ना। तो किसके माध्यम से होता है? इसी एफसीआरए कानून एफसीआरए के आड़ में होता है। मैं ये नहीं कह रहा हूं कि सारी संस्थाएं एसपीआर के आड़ में करती है। लेकिन बहुत सारी संस्थाएं करती है और पकड़ी भी जाती है। बैन भी होता है। है ना? अच्छा
9:27 [नाक से की जाने वाली आवाज़] पहुंचा दिया उन्होंने। खैर कांग्रेस सांसद हबी इडन ने इस विधेयक को ड्रैकोनियन लॉ यानी बेहद क्रूर कानून बताते हुए केवल अल्पसंख्यक बल्कि देश भर के एनजीओ के हितों को नुकसान पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि इसको वापस लेना होगा और यह ठीक नहीं है। यह अल्पसंख्यकों का अधिकार छीनने का एक भारत का सुनियोजित भाजपा का एक सुनियोजित एजेंडा है। चलो भाई ठीक है। धर्मवीर गांधी ने बिल का विरोध करते हुए कहा कि फैसला निष्पक्ष होना चाहिए जिसमें समाज के सभी वर्गों को लाभ हो ना कि चयनात्मक तरीके से किसी को निशाना बनाया जाना चाहिए। खैर अब है क्या इसमें? इसको समझ लीजिए इसमें विवाद हो रहा है। नया विधेयक जो है 2010 के संशोधन के
10:16 लिए लाया गया है। इस संशोधन में सबसे बड़ा बदलाव है डेजिग्नेटेड अथॉरिटी का गठन करना। अब डेजिग्नेटेड अथॉरिटी क्या है? इस बात को समझिएगा। सरकार का कहना है कि कोई भी एनजीओ एफसीआर के माध्यम से विदेश से पैसा लाता है। पैसा लाता है और उसके बाद खा जाता है। उसको कहां खर्च करता है इसके बारे में कोई बरा वो उपस्थित नहीं कर पाता। या जो एनजीओ में लोग रहते हैं, वह वहां से हट जाते हैं या एनजीओ को ही एक एंटिटी मान लिया जाता है। इसलिए जो लोग उसका लाभ उठाते हैं, जो लोग उसका दुरुपयोग करते हैं, उन लोगों के ऊपर कारवाई नहीं हो पाती है। तो भैया अगर एनजीओ खत्म हो जाए, एनजीओ को कोई चलाने वाला ना मिले तो उसके एसेट्स का क्या होगा? उसकी संपत्ति का क्या होगा? जैसे कोई एनजीओ मान लो पांच स्कूल चला रही है। वो एनजीओ खत्म हो गई।
11:01 किसी कारण से एफसीआर लाइसेंस उसका रद्द हो गया चाहे कुछ भी हो गया तो वो संपत्ति क्या होगी? उसके लिए एक डेजिग्नेट अथॉरिटी होगी। एक सरकारी अथॉरिटी होगी। जब सब कुछ खत्म हो जाएगा तो सरकार उसको ओवरटेक कर लेगी। ऊपर से विदेश से गलत पैसा आया उससे कोई प्रॉपर्टी बनाई गई। वो क्या करी? उसका क्या किया जाएगा? बन गई ना गलत पैसा आया बन गई उससे कोई प्रॉपर्टी या कोई भी चीज बन गया। ठीक है? कोई संगठन संस्था स्कूल कॉलेज कुछ भी बन गया तो भैया उस पर कैसे कारवाई होगी? सरकार उसको अपने अंडर मिलेगी। है ना? पहले क्या होता था? वही बोर्ड वाली कहानी। अच्छा वो हट गए। कोई बात नहीं। उसको दे देंगे, फिर तीसरे को दे देंगे, फिर चौथे
11:47 को दे देंगे। ऐसे चलता रहेगा खेला। इसी तरीके से संस्थान बने हुए हैं इस देश में। वो भी इसी तरीके के खेल में इन्वॉल्व है। इसलिए डेजिग्नेटेड अथॉरिटी बनाने के बाद चलेगी। यह अथॉरिटी एनजीओ के विदेशी फंडिंग और संपत्तियों पर अस्थाई और अस्थाई नियंत्रण तब ले लेगी जब एफसीआर रजिस्ट्रेशन रद्द होगा। या स्वेच्छा से उसको सरेंडर कर दिया जाएगा। इसका मतलब है स्कूल, अस्पताल, हॉस्पिटल, कल्याण केंद्र जो आंशिक रूप से विदेशी दान से बने हैं उन्हें सरकार अपने नियंत्रण में ले सकती है, हस्तानांतरित कर सकती है या भारत की संचित निधि में जमा कर दी जाएगी। ये डर है कि भैया एफसीआरए तो कैंसिल होगा, संपत्ति भी ले लेगी सरकार। तो सरकार ले लेगी तो सरकार लेगी ना। इस देश की सरकार लेगी ना।
12:34 भाजपा थोड़ी लड़ रही है उसको काहे के लिए डर रहे हो भाई या तुम लोग मान करके अच्छा कांग्रेसी और विपक्षी मान करके चल रहे हैं कि भाजपा कहीं नहीं जाने वाली भाजपा ही रहेगी इस देश में इससे तो इस विरोध से तो यही लग रहा है अच्छा केंद्र सरकार का तर्क है कि मौजूदा कानून में यह स्पष्ट नहीं है कि किसी एनजीओ का लाइसेंस रद्द होने पर विदेशी फंडिंग से बनी संपत्ति का क्या होगा? सरकार की दलील है कि यह संशोधन कानूनी कमियों को दूर करने, विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए है। गृह मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में एफसीआरए के तहत 16,000 संगठन रजिस्टर्ड हैं और उन्हें हर साल बड़ी मात्रा में फंडिंग मिलती है। समझ रहे हैं आप?
13:20 अब देखिए केरल के ईसाइयों को ईसाइयों को एफसीआरए बिल से खतरा क्यों? केरल के चर्च के नेताओं ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कहा 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने हैं। ईसाई संगठनों को डर है कि अगर एफसीआर लाइसेंस रद्द होगा तो अल्पसंख्यक संगठनों द्वारा चलाए जा रहे संस्थान खतरे में पड़ जाएंगे। चर्च के नेताओं का कहना है दूर दराज के इलाकों में स्कूल, अस्पताल, अनाथालय, कल्याणकारी योजना चलाने के लिए लंबे समय से विदेशी चंदे का इस्तेमाल किया जाए। यही तो यही तो मेन उद्देश्य है कि भैया ये जो धर्म परिवर्तन वाला खेला चल रहा है ना उसी पर रोक लगाने का और धर्म परिवर्तन सिर्फ यही नहीं होता है। शांतिप्रिय लोग भी यही काम करते हैं। तो सिर्फ यही नहीं है। अच्छा खास्तान का भी माल बड़ा आता है कनाडा से।
14:07 खैर तो अब इन लोगों को तो बुरी लगनी है। अच्छा और बताता हूं क्या क्या हुआ। किरण इजू ने साफ कह दिया कि यह संशोधन का मकसद विदेशी चंद्र को नियंत्रित करना। राष्ट्र हित और राष्ट्रीय सुरक्षा में उसका सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना। फंड के गलत इस्तेमाल को रोकना यह किसी धर्म या संगठन के खिलाफ नहीं है। कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी चुनाव को देखते हुए केरल के लोगों को गुमराह कर रही है। उन्हें चुनाव के खातिर सदन या केरल के लोगों को गुमराह नहीं करना चाहिए। अब रिजू साहब ने तो कह दिया तो रिजू साहब की माने कौन? खैर अब मैं आपको बताता हूं [नाक से की जाने वाली आवाज़] कि ये क्यों जरूरी है? देख लीजिए। मैंने कहा ना कि यह व संशोधन बिल संशोधन
14:52 विधेयक जो था उससे भी बड़ा बिल है क्योंकि चलिए उधर उधर धीरे धीरे धीरे धीरे तो सुधार हो रहा है भारत में चीजें ये पैसा आता है और ये पैसा कहां जाता है और कैसे घूम करके आता है इसके बारे में कुछ भी स्पष्टीकरण नहीं है। चलो पैसा आ गया। लोगों ने बता दिया कि जी पैसा आ गया। खर्च ये अपने हिसाब से कहां कर रहे हैं? इसके बारे में कैसे डिटेल निकालोगे आप? किसी ने कह दिया कि मैंने इसको इस व्यक्ति को पढ़ाने के लिए 20,000 सैलरी दे दी। अब पढ़ाने के लिए 20,000 सैलरी दे दी कि धर्म परिवर्तन के लिए कि राष्ट्र विरोध के लिए 20,000 सैलरी दे दी। ये कैसे आइडेंटिफाई होगा? अच्छा मान लीजिए कि आइडेंटिफाई भी हो गया। एफसीआरए कैंसिल हो गया। तो चलिए विदेश से फंड आना बंद हो गया। लेकिन जो फंड पहले से
15:39 आया हुआ है उसका तो दुरुपयोग भरपूर हो रहा है। फिर नए नाम से एनजीओ बन जाएगा। फिर उसके बाद वो नए नाम से एफसीआरए में चला जाएगा। और फिर क्या होगा कि उसी संस्था को उसी एसेट्स को फिर से उपयोग कर लिया जाएगा। जैसे मान लीजिए कोई स्कूल बना एग्जांपल के लिए बन गया कोई स्कूल एससीआरए के पैसे से। पता चला कि एक गलत पैसा था। एससीआरए या लाइसेंस रद्द हो गया। अब वो स्कूल का क्या होगा? तो होता क्या था कि फिर से दूसरा एनजीओ बन जाएगा। वह एनसीआरए के तहत रजिस्टर्ड होगा और फिर से खेल चालू हो जाएगा। इसी खेल को बंद करने के लिए केंद्र सरकार इस तरीके के कानून लेकर के आ रही है और यह देश हित में है। यह कानून आना चाहिए और मुझे लगता है कि यह कानून आएगा भी। माओवाद जो इतने देश तक हमारे देश में पनपा है। उस माओवाद की
16:24 जड़ में यही सब कुछ है। तो आप सभी लोगों से आग्रह रहेगा कि वीडियो को लाइक कर दीजिएगा। अधिक से अधिक लोगों तक शेयर करिएगा। अगर आपको एनालिसिस, कंटेंट और फैक्ट्स पसंद आता है तो इस चैनल को डोनेट और कंट्रीब्यूट भी करते रहिएगा। उसके लिए फोन पे और Paytm का नंबर स्क्रीन पर दिया हुआ है। आप सभी जुड़े। बहुत-बहुत धन्यवाद। आपका कोई प्रश्न हो तो आप पूछ सकते हैं। बिल्कुल। टेररिज्म एक्टिविटीज को भी करेगा। बिल्कुल ठीक बात है। निश्चित तौर ठीक बात है। जय श्री राम। हर हर महादेव। भारत की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। बहुत जरूरी है। जय श्री राम भैया। जय हो।
17:12 जय हो। जय हो। सभी को नमस्कार। प्रणाम भैया। सुधारना ही पड़ेगा। उसके अलावा जय हो। नमस्कार जी सुधागा जी जय श्री राम जी भैया दोस्तों शुभ रात्रि