0:00 जय जी गुरु प्रसाद भात पानी नो लाभ दे जी इच्छामि खमास समो बंदी जा निसय मण वंदामि इच्छा इच्छाम संम अब अभ्यंत रायम खामे इच्छम खामे रायम जम अपत्यम परपत्यम भत्ते पाण विनय वया हवे सलावे उचासने समास अंतर भाषाए उरी भाषाए जमकिंच मज विनय परिहण सुहबा त जान अहम न जानामि तसच्छामि दुम साह जी सुख साता छो जी
0:47 इच्छामिमा समो व जा वंदामि इच्छाम संसिऊ इच्छम इच्छा खमा वंद जा निस वंदाम इच्छा संग लेसु ले इच्छा इच्छामिमा समो व जा निय वंदाम इच्छाम संस प्र प्लीज प्रसार करा नमो अरता नमो सिं नमो नमो नमो लोए सबसा
1:33 पंच नमोकारो सब पाव पणासनो मंगलम चस परम भव मंगलम जय जगजी जग गुरु जगंदो जगना हो जग बंधु जय जगिया जय सुया तेथमो जय जय गुरुम जय महा सर्व प्रणाय
2:20 सर्वदायनी सर्व निधाना श्री गौतम स्वामिने नम श्री सुध स्वाम अज्ञान ज्ञानम जन नेत्रित ये तस्मै श्री गुरुवे नमः धर्म साहेब जी प्रणाम सभी को आज 11th जुलाई 2026 के दिन अभी हमारी तीसरी क्लास जो है वो भगवती सूत्र आगम वाचना की है। आज हमारी 200 14वीं क्लास है टू 14th क्लास साहिब
3:08 जी मैं एक कल के पाक्षिक पाठशाला जो है हमारी उसका एक कर दूं सबको बता दूं। जी सर जी सो कल हमें कल संडे है तो कल के दिन जो हमारी पाक्षिक पाठशाला चल रही है उसमें कल हमारा फिर से कल 15 एव्री 15 डेज जो हमारी पाक्ष पाठशाला चल रही है उसमें कल हमारा जो विद्वान के द्वारा दी जाती है उसमें कल जयेश भाई शाह जो बड़ौदा से है वो हमें कल हमारी क्लास लेंगे उनका विषय रहेगा जैन दर्शन में नयवाद, स्यादवाद और सप्तभंगी की प्ररूपणा और कल सुबह इंडिया टाइम 7 टू 9 am रहेगा। हमारा जो
3:55 zूम लिंक है यह सेम ही रहेगा और जो YouTube का चैनल है वो सब आपको लिंक में भेज दिया जाएगा आप सबको। सो प्लीज कृपया आप सभी जुड़े। हमारे वो जयेश भाई शाह जो है वो हमारे साथ बहुत सालों से जुड़े हुए हैं और प्लीज आप सभी क्लास में जुड़ना। अभी मैं विभा बन से विनती करूंगी कि वो हमें लास्ट क्लास की समरी दे विभा धन्यवाद एलसा और मन वंदामी साहिब जी और प्रणाम सभी को भगवती सूत्र के नौवें शतक के 32 वे उद्देश्य में गंगे मुनि पूछ रहे हैं कि हे
4:41 भगवन पहली नरक में ज्यादा जीव रहे कि नीचे की नरक में भगवान उत्तर दे रहे हैं। दीपा बहन आपकी आवाज नहीं आ रही है। साहिब जी शायद बीबा बहन का इंटरनेट कनेक्शन लॉस हो गया है। विभा बहन हेलो हां आवाज आ रही नहीं बहुत कट कट के आ रही है विभा बहन हां यहां पर नेटवर्क थोड़ा वीक है
5:27 हां जी अभी बोलिए अभी सुनाई दे रहा है कोशिश करती जी महावीर भगवान उत्तर दे रहे है हे गंगेश सबसे ज्यादा नारकी जीव पहली नरक में है। उससे कम दूसरी नरक में इससे घटते हुए सबसे कम जीव सातवीं नरक में है। साहिब जी में साहिब जी ने हमें बताया था स्त्रियां पाप और लेषा के कारण अधिकतम छठी नरक तक ही जा सकती है। जबकि पुरुष सातवीं नरक तक जा सकता है। जैसे-जैसे जीव नीचे की नरक में जाता है वैसे-वैसे उसका आयुष और दुख कई गुना बढ़ता जाता है। देवगति में जीवों के जाने के लिए प्रबल पुण्य उपार्जन की आवश्यकता होती है। केवल तिर्यज पंचेंद्रिय पशु पक्षी और मनुष्य ही देवगति में जा सकते हैं। एक्द चौद्रिय जीव देवलोक में नहीं जा सकते हैं। सबसे नीचे भवनपति
6:15 व्यंतर ज्योतिषी कल्पोपणम के 12 देवलोक और कल्पातीत के नौ ग्रहक और पांच अनुत्तर ऐसे नीचे से ऊपर की तरफ जाते हैं तो जीवों के शरीर की अवगाहना घटती जाती है। परंतु उनका आयुष रिद्धि सिद्धि बढ़ती जाती है। साथ ही ऊपर जाने पर लोभ घटता है और नीचे आने पर लोभ बढ़ता है। दीक्षा आदि के बाह्य तप से अभव्य जीव भी नौग्र तक चला जाता है क्योंकि देव गति पुण्य से मिलती है निर्जरा से नहीं मिथ्यात्व के कारण जीव नीचे के भवनपति आदि नीचे के देवलोक में उत्पन्न होते हैं जबकि पांचवे गुणस्थानक और छठे गुणस्थानक के धारकों को प्रबल पुण्य ऊपर ऊपर के उत्कृष्ट देवलोक मिलते हैं। हे भगवन नरक गति और देव गति दोनों में ही असंख्य जीव जाते हैं तो दोनों में
7:02 से किस गति में ज्यादा जीव जाते हैं? भगवान बता रहे हैं कि देव गति में जितने जीव जाते हैं उससे असंख्य गुने जीव नरक गति में जाते हैं। मनुष्य गति दो श्रेणियों में बटा हुआ है। एक समुछ मनुष्य और दो गर्भज मनुष्य। साहिब जी ने हमें बताया था समूछ मनुष्य 14 प्रकार के असूची स्थानों में उत्पन्न होते हैं। उसका आयुष अंतर्मूरत का ही होता है। इनकी संख्या असंख्यात है और इनका जन्म दुर्लभ नहीं है। परंतु माता के गर्भ से उत्पन्न होने वाले संग पंचेंद्रिय मनुष्य बहुत थोड़े होते हैं। इनका जन्म अत्यंत ही दुर्लभ है। तीज पंचेंद्र की संख्या सबसे कम है। उससे कई गुना चौरे, उससे ज्यादा तेइंद्रिय,
7:47 बेइंद्रिय और उससे अधिक संख्या एकेंद्रिय की जीवो की है जिसमें साधारण वनस्पति का जीव अनंत अनंत है। साहिब जी विनती करते हैं आगे आप हमें समझाएं। इसी संदर्भ के अंदर थोड़ा सा और आगे का विवेचन है। यहां शब्द प्रयोग किया है उत्पाद और उद्वर्तन। इन दो शब्दों का प्रयोग करके फिर गौतम स्वामी ने भगवान को पूछा है कि हे भगवन नरक में जाते ज्यादा है या नरक में से निकलते ज्यादा है। आ रही है बात ध्यान में अब इसका उत्तर
8:34 कैसे देना विजय भाई बोलो नरक सर जी प्रश्न नरक में आते ज्यादा है या जाते ज्यादा है राइट हां वही वही तो है ना अच्छा बोलिए आप ज्ञान है कि नहीं है क्या प्रश्न है तो जी बोलिए पता नहीं है। हां चलो पमी बहन जी बोलो प्रश्न क्या है? हे भग नरक में जाते ज्यादा है कि नरक में से निकलते ज्यादा है?
9:19 दोनों भी होंगे महाराज साहब क्योंकि जिनका जितने जाते हैं उनका आयुष पूरा होके वो निकलते भी है। चलो ठीक है ठीक है। सोचा नहीं आपने चोरिया जी बहुत चिंतन मनन करके सोच के जवाब दे बोलिए चोरिया जी महाराज साहब मेरे ख्याल से जाते ज्यादा है। चलो ठीक है। अब कारण तो नहीं बोलेंगे आप विना बहन जी बोलना है आपको। अच्छा जैन साहब बोलिए महाराज साहब जितने जाते हैं शायद उतने ही निकलते भी है क्योंकि वो भी असंख्यात है वो भी असंख्यात है चलिए आप भी चार लोग का पार्ट है अब क्या करें कैसे करें जी अगर जाते ज्यादा ही है लेकिन निकलते कम
10:06 है क्योंकि आयुष बहुत लंबा है। हां वेरी गुड वेरी गुड आधा आधा प्राइस आएगा विजय भाई जरा पूरा बोलेंगे तो प्राइस पूरा आएगा चलो रेखा बहन जी बोल बोलिए नहीं है वंदना माता जी बोलो तभी जाते ज्यादा क्यों जाते पता नहीं अब कारण के साथ बोलना है ना नहीं तो फिर छोटे जी के जैसा ही होगा प्राइस कैसे देना अरे सब नर्क ज्यादा है और निकलते कम है क्योंकि आयुष इतना लंबा होता है फिर वो टाइम लग जाता है उनसे। अरे भगवान अधूरा बोला ना आपने ज्यादा ज्यादा जाते हैं क्योंकि
10:51 सब मनुष्य लोक से बहुत मांसाहारी हिंसा होती है और भी हां बोलिए नीलेश भाई बोलना है आपको तो जाते ज्यादा है निकलते कम है क्योंकि आयुष लंबा है कारण यहां पर आपको क्या देखना है जाने वाले जो मनुष्य क्षेत्र में ऐसे तिरियंच और मनुष्य जाते जिनका आयुष छोटा छोटा है तो वह जल्दी जल्दी वह मर के जाने वाले की संख्या ज्यादा हो जाएगी और निकलने वाले की उनकी तो आयुष मिनिमम
11:36 10,000 का है तो वह निकलने में तो कम रहेंगे। सही बात है। बहुत धन्यवाद। चलो हे भगवन कितने ज्यादा कितने कम सातवे नरक में यहां पर जो जीव गया है अब वो यहां पर 33 सागरोपम तक अपना आयुष पूरा करेगा। तो 33 सागरोपम कितना हुआ? एक सागरोपम बराबर असंख्य वर्ष अब असंख्य वर्षों को 33 के साथ मल्टीप्लाई करो कितना हुआ तो क्या इतने लंबे टाइम तक दूसरा कोई जीव नरक में जाएगा ही नहीं हे भगवन क्या कोई नरक में से निकले ही
12:22 नहीं वहां तक दूसरा कोई जीव जाएगा ही नहीं हे गौतम ऐसा नहीं हो सकता है गए हुए जीवों को तो अपने आयुष कर्मु वहां नरक की वेदना दुख पीड़ा सजा भुगतने ही है। नंबर दो नरक गति के अंदर किसी का भी आयुष सोपक्रम का नहीं होता है कि वो जल्दी से आयुष पूरा होने के पहले ही मर जाए। यह संभावना नहीं है। तो नरक के नारकी जीवों के आयुष इतने लंबे लंबे लंबे लंबे सागरों तक के है। इतनी देर कोई नरक में जाने वाला रुक ही नहीं सकता है। क्योंकि अब मनुष्य के आयुष आज हम पंचम
13:11 काल के अंदर ले ले तो भाई साहब 130 133 बरस मैक्सिमम है। अब ऐसा है नीलेश जी कि कहीं किसने क्या लिख दिया कहीं किसने क्या लिख दिया एक अप्रोक्समेटली दो पांच आंकड़े इधर उधर करके 130 133 100 इतना बता दिया आपको कहीं 120 का आंकड़ा मिल गया आपको कहीं 100 और अलग आंकड़ा मिल गया वो बात यहां नहीं आती है अब यहां पर मनुष्य इतने छोटे से आयुष में और इतनी पाप की प्रवृत्ति करे तो कितने जैसे अभी विजय भाई ने बताया कि इतना मानसा इतनी हिंसा इतनी पाप की प्रवृत्ति करने वाले इतने जाते रहे अब मनुष्य भी है
13:59 तिरियंच पशु पक्षी भी है दोनों ही है सब तिरियंच गति के जीव तो असंख्य है मनुष्य असंख्यात है लेकिन मनुष्य जाते रहेंगे और जरूरी नहीं है कि नरक में से निकल ले तब ही कोई मनुष्य में से जाए वो जो हमने सुना था कोई मोक्ष में जाए तब जाकर कोई निगोद में से बाहर निकले ऐसी व्यवस्था यहां नरक गति में नहीं है क्या नरक गति में जो जो है पाप करने वाले जाते रहेंगे अब किसी का आयुष 10 20 साल है किसी का आयुष 50 साल है किसी का आयुष कम ज्यादा है
14:44 लेकिन हिंसा की प्रवृत्ति इतनी ज्यादा हो तो क्या करेंगे आप एक सिंह है तो सिंह का आयुष 50 60 100 साल है। अब वो तो पूरी जिंदगी हिंसा ही करेगा। पंच जीव को ही मारेगा तो उसको तो नरक में जाना अनिवार्य हो गया। और वो भी कहां जाएगा? चौथे नरक में जाए। अब चौथे नरक में 10 साग का आयुष है। अब वो 10 सागम का वहां का पूरा ना करे। वहां तक कोई दूसरे जीव नरक में जाए नहीं। यह तो संभव नहीं है। तो नरक में तो जाते ही रहते। हे भगवान नरक में जाने का प्रतिदिन रहता है, प्रति घंटे रहता है, प्रति मिनट रहता है या बीच में समय का गैप कोई खाली जाता है? महावीर
15:32 स्वामी कह रहे हैं एक दिन भी खाली नहीं जाता। एक घंटे का समय भी खाली नहीं जाता है। एक मिनट का समय भी खाली नहीं जाता है। इतने जीव नरक में जाते रहते हैं। जाते अब थोड़ा सा विजय भाई हिसाब निकालो। सातवी नरक में जितने जीव है 33 33 सागो गुण वाले कोई 31 सागरो गुण वाले कोई 32 साग्रो गुण वाले अब 22 से लेकर 33 की रेंज के अंदर जो भी आयुष जिन जीवो का बंधा हुआ है वो सात नरक में है। अब उनके एक आयुष काल के अंदर यहां पर रोज नरक में जाने वाले प्रति मिनट जाए प्रति सेकंड जाए प्रति समय जाए तो कितने जाए
16:22 जबकि महावीर स्वामी कह रहे हैं भाई एक मिनट भी खाली खाली नहीं है सब रास्ता तो चल ही रहा है जा रहे हैं जा रहे हैं जाते जा रहे क्योंकि असंख्य दप समुद्रों में से जाना है ढाई दप समुद्र में से मनुष्य को जाना है और बाकी असंख्य द समुद्र में से तिर्यंच गति के पंच जीवो को जाना है तो कितना बढ़ता जाएगा एक सातव नरक के नारकी जीव का अकेले का आयुष पूरा ना होवे वहां तक दूसरे नरक में जाने वालों की संख्या अरबों खरबों के ऊपर चली जाए। अब एक प्रश्न और पूछ रहे हैं। हे भगवन क्या नरक के अंदर कोई जीव अकेला ही जाता
17:11 है या समूह में एक साथ में भी जाते हैं? ध्यान दीजिए प्रश्न बदलता है। तब महावीर स्वामी कह रहे हैं गौतम अकेला भी जाता है और समूह में अनेक इकट्ठे होकर भी जाते हैं। श्रेणिक महाराजा का जीव अकेला गया लेकिन कई जीव एक साथ में युद्ध करते हो। कई जीव एक साथ में कृष्ण लेष्या में मरते हो। कई जीव एक साथ में सामूहिक मृत्यु के अंदर आकर के मरते हो। उन समय उनके कृष्ण लेष्या हिंसक वृत्त और रद्र ध्यान की परिणति आदि हो तो ऐसे जीव समूह में
17:57 सामूहिक रूप से भी हजारों की संख्या में जा सकते। कोई ना कोई जरूरी नहीं है कि कोई भी जीव जाए तो एक अकेला ही जाए। ऐसा नहीं होता है। जाने वाले बहुत बड़ी संख्या में भी जा सकते हैं। कोई निश अधिकारी सिर्फ मनुष्य पंचेंद्रिय के पशु पक्षी है। यह बात सही है। अब मनुष्य के अंदर जो समुच्च में वो तो नहीं जा सकते नरक में क्योंकि उनकी संख्या बड़ी असंख्य की है। लेकिन संधि पंचेंद्रिय वाले जीव जो हिंसा आदि पाप प्रवृत्ति काफी तीव्रता के साथ करे काफी तीव्र प्रमाण में करे ऐसे जीवों
18:43 का नरक में जाना काफी ज्यादा होता है। इसी तरह से भवनपति में व्यंतर में ज्योतिष में वैमानिक में देव गति आदि में जो जो जीव जाते हैं जहां जहां जाते हैं जिस तरह से जाते हैं हो सकता है कहीं अकेले जाए कहीं संख्यात जाए कहीं कितने बड़ी संख्या में जाए हे भगवंतों फिर सबसे कम जो है कहां तो गौतम सबसे कम जीव मनुष्य गति में ही जा सकते हैं क्या भग भगवान मनुष्य गति में सिर्फ अकेला ही जाता है कि वहां भी समूह में जा सकते हैं? हां गौतम अधिकांश अकेले ही जाते हैं और कई बार सामूहिक कर्म के अनुसार समूह में भी जाते हैं। हालांकि नरक
19:32 में जाने वाले के जीवो की जितनी संख्या है उतनी तो नहीं है। फिर भी मनुष्यों की संख्या एक से बढ़कर अनेक हो सकती है। अब जिस प्रकार के जैसे पाप कर्म करे अभी आप देख रहे हो युद्ध के अंदर देख लो भाई युद्ध में संगि पंचेंद्रिय मनुष्यों का ही घात मुख्य है एक दूसरे को शस्त्र अस्त्र से मारना है तब एक साथ में कितने लोगों को करना होता है यह भी देख लीजिए आप तो वहां हिंसक वृत्त रद्र परिणाम अनंतानुंदी कसाय के साथ है इसलिए ऐसे युद्ध के प्रसंग के हिंसक प्रवृत्ति के अंदर कई बार जो है बड़ी संख्या में एक साथ में भी
20:20 जाते हैं नरक में कोई ना नहीं कह सकते हैं। अब भूतकाल में भी आपने देखा है चक्रवर्तियों के युद्ध हुए तब भी देखा है उस समय तो इतने आधुनिक शस्त्र नहीं थे। आज तो बहुत ही खतरनाक आधुनिक शस्त्र है कि जो शस्त्र बने ही उस प्रकार के हैं कि बड़ी तादाद में बड़ी संख्या में एक साथ में मार सके क्योंकि सिर्फ एक बंदूक या गन जो होती है वो एक दो को मारने के लिए होती है। बाकी तो सभी शस्त्र ही इस प्रकार के बने हैं। तो क्या करेंगे? और जितना ज्यादा शस्त्र अस्त्रों के अंदर ऑटोमिज्म जो सेट किया जाता है उस ऑटोमिज्म के अंदर एक साथ में
21:08 हजारों की तादाद में जब शस्त्रस्त्र चलेंगे तो मरने वालों की संख्या भी हजारों में आएगी। कई बार हम मनुष्य की ही संख्या गिनते हैं। पशु पक्षियों की संख्या तो कोई गिनने को तैयार नहीं है। लेकिन वे भी मरते तो है ना। काफी बड़ी संख्या के अंदर वे भी मर सकते हैं। हे भगवन इस तरह से केवल ज्ञानी जो है केवल दर्शनी वो कैसे देखते हैं? उनका देखना कैसे हो सकता है? उनका जानना कैसे हो सकता है? क्या वो केवल ज्ञानी दूसरे के ज्ञान योग से देखते हैं? किसी दूसरे के संसर्ग निमित्त से देखते
21:54 हैं। या उनका स्वयं का अपना अपने तरीके से अकेले देखते हैं। तो ये इस प्रकार का प्रश्न ऐसा आया है। अब इसके अंदर सीधा उत्तर है। अब ये लोक क्षेत्र है पूरा। इधर देखिए। अब लोक क्षेत्र के अंदर जिस तरह से आप यह समझिए कि कहां केवल ज्ञानी केवल दर्शन अब यहां है सिमंदर स्वामी आज मनुष्य
22:40 क्षेत्र के अंदर अब उनका केवल दर्शन जो फैल रहा है वो पूरे लोक और अलोक में सर्वत्र जा सकता है उसे कोई रोक नहीं सकता है। अब पूरे लोक के अंदर जाए और पूरे लोक के बाहर जाए तो अलोक क्षेत्र में भी जाता है। ये मैंने किया है केवल दर्शन जिस तरह से आप देख रहे हो तो इतना भाग लोक में गया। इतना भाग बाहर आलोक में गया और आलोक में भी उनको जो है देखने से क्या दिखाई दिया? कहां क्या है वो भी दिखाई दिया। कहां क्या
23:27 नहीं है वो भी दिखाई दिया। इसलिए श्रीमंदर स्वामी जैसे केवल ज्ञानी को विधेयात्मक वाक्य निषेधात्मक वाक्य दोनों प्रस्तुत करने ही पड़ते हैं। लोक में अस्त कायात्मक पांचो द्रव्य है। उसी में केवल दर्शन से जाते हुए देखेंगे। अलोक के अंदर वहां कोई जीव पुद्गल आदि पदार्थ नहीं है। तो ये भी केवल को केवल दर्शन से देख के ही बताना है। कि वहां नहीं है। क्या है? क्या नहीं है।
24:12 क्या है? अलोक के अंदर सिर्फ आकाश द्रव्य है और कोई दूसरा द्रव्य नहीं है। तो उभय वचन से केवल ज्ञानी बराबर बताएंगे। अब ये मैंने क्या कहा है? यह है केवल दर्शन है। केवल दर्शन से देखना होता है। यहां पर ये सिमंदर स्वामी आप देखिए। अब इनको क्या करना है? केवल ज्ञान से जानना होता है। अब जिस तरह से केवल ज्ञान आपका लोक आलोक में फैल रहा है। जिधर भी आप देखेंगे बराबर फैल
25:01 रहा है। तो वहां का स्वरूप इनको जानना भी इतना ही आवश्यक होता है। ये क्या है? ये आ गया केवल ज्ञान। बोलिए अब दोनों में आपको क्या फर्क दिख रहा है? हिना बहन जी बोलना है आपको नहीं चलो दूसरे सीमा बहन जी बोलिए नहीं चलो वीना बहन जी बोलिए नहीं है कोई बोलिए छोड़िया जी चलो वो भी नहीं है जी बोलिए ऐसे तो टाइम
25:48 जाएगा महाराज जी महाराज साहब के सिमंदर स्वामी को जो केवल दर्शन से दिखता है वही वो केवल ज्ञान से जान सकते हैं। अब यहां पर देखिए कैसे दिखता है कैसे जानते हैं? तो यहां दोनों ही समांतर रूप से चलने वाले ध्यान दर्शन दोनों ही समांतर पैरेलल जस्ट लाइक द पर्सन यू आर ड्राइविंग द कार आप साइमलटेनियसली गाड़ी को बाहर रास्ते पर देख रहे हो एंड साइमलटेनियसली आपके पैर जो है एक्सलरेटर पर हो हाथ में वापस स्टयरिंग चलता हो तो आप दोनों काम साथ में ही कर
26:35 रहे हो तीसरा क्या कर रहे हो? केवल दर्शन से देख रहे हो रोड पर और केवल ज्ञान से आप साथ साथ में जान रहे हो कौन सा विस्तार आया है, कौन सा स्टेशन आया, कौन सा गया है, कहां तक हम आए, कहां तक गए? ऐसे ही यहां पर है। केवल ज्ञान। अब इसका काम क्या है? इसका विषय है जानना। इसका विषय क्या है? देखना। इस तरह से दोनों ही गुण सक्रिय है। और यही कर्म आवरण से ढके हुए रहे तब हमारे अंदर
27:22 मति ज्ञान, श्रुत ज्ञान आदि का व्यवहार होता है। उसी व्यवहार के अंदर क्रिया तो यही होगी। जब दर्शन के रूप में आप उपयोग करोगे तब अवग्रह अपाय आदि से चक्षु इंद्रिय से व अन्य इंद्रियों का नाम लेकर आप कहेंगे कि इस इस इंद्रियों से वह चक्षु दर्शन से देखता है। ठीक मति ज्ञान श्रुत ज्ञान से वहां पर जो है जानना है। शुद्ध स्वरूप कैसा है पदार्थों का? यह पदार्थ विनाशी है कि अविनाशी है। यह सब जानने के लिए उसको मिलता है। तो यह ज्ञान अब हमारे ज्ञान में और केवल के ज्ञान में
28:09 फर्क क्या है? यहां देखिए तो यहां पर जस्ट लाइक हमने ऐसा मिरर रखा है। एक मिरर अगर हमने यू किया ऐसे पूरे लोक के अंदर क्या चल रहा है? एक सेकंड में आप देख सकते हो। केवल ज्ञान के यहां हमने मिरर रखा है। सामने दर्पण बड़ा पूरे केवल ज्ञान से पूरे लोक के अंदर क्या क्या जाना जा सकता है सब देख जानते हैं। तो उसको कहते हैं हस्ता मलकवत। हाथ में आंवला रहा है और आप कैसे देख रहे हो? कैसे जान रहे हो साथ में यह है प्रक्रिया। अब यहां पर केवल ज्ञानी भगवंत चले। किसी को पता चलेगा क्या? बोले कुछ नहीं
28:56 तीर्थंकर केवली चले तो देवता अतिशय आदि करते हुए चलते हैं इसलिए वहां प्रश्न अलग होता है यहां अलग होता है अब केवली भगवंत यहां थोड़ा सा विजय भाई ध्यान में देखिए चित्र में देखिए बताइए और कौन केवल ज्ञान केवल दर्शन से देखता है जानता है सिर्फ तीर्थंकर और केवली भगवंत चलो चार लोग का पाठ करना बोलिए छोड़िए नहीं है सिद्ध भगवंत हो हां वेरी गुड बहुत अच्छा चलो बहन जी ने बताया अब जैसे यहां पर केवल ज्ञानी भगवंत
29:42 हमारे मनुष्य क्षेत्र में है और जो यहां पर सिद्ध भगवान बने हुए हैं। अब उनका भी केवल ज्ञान केवल दर्शन से तो यहां पर पूछ रहे हैं भगवंत कि यहां पर साधु साध्वी हो तीर्थंकर हो आचार्य उपाध्याय जी हो श्रावक को भी जिसको केवल ज्ञान केवल दर्शन हो गया हो वे भी देख रहे वे भी जान रहे हैं तो क्या उनसे सिद्ध भगवंतों का केवल ज्ञान केवल दर्शन कितना गुना ज्यादा होगा कैसा होगा बोलिए वंदा माता जी ख्याल आ रहा है जी महाराज साहब केवल ज्ञान सबका सब एक ही
30:30 प्रमाण में होता है कम ज्यादा नहीं बोलना है आपको ज्ञान अनंत है केवल ज्ञान बानु केवल ज्ञान केवल दर्शन साहब जी मैंने क्या यहां सिद्ध भगवंतों के बारे में पूछा है विजय भाई बोलो ज्ञान अनंत छ के विजय भाई जी सभी का सेम है सिद्ध भगवान का भी सेम ही है हां वेरी गुड बोलिए मनीषा बहन जी क्या बोलना है नहीं है चलो बहन जी बोलिए नहीं गुरुदेव केवल ज्ञान केवल दर्शन सबका सेम रहेगा कम ज्यादा नहीं होता
31:16 नहीं नहीं ये सिद्ध भगवान है ना यहां की बात करिए ना क्या हो गया विभा बहन जी बोलिए नहीं है मनीष बहन जी बोला आपने सीमा बहन जी बोलिए केवल ज्ञानी केवल ज्ञान के शब्द नहीं बोलना है आपको क्या बोलना है समझ करके बोलिए हर्षद भाई बोलिए केवल क्या हां
32:02 यहां बात क्या आती है कि केवल ज्ञान केवल दर्शन अरिहंत को हो आचार्य महाराज को उपाध्याय जी महाराज को साधु महाराज को साध्वी जी महाराज को या श्रावक को जिस किसी को भी होगा वो संपूर्ण ज्ञाना वर्णय दर्शना वर्णय कर्म के क्षय से ही होता है। चारों घाती कर्मों के क्षय से ही होता है। इसलिए वो किसी को भी हो। अब अरिहंत भगवान को हुआ और वह सशरीरी है। आचार्य उपाध्याय साधु गणधर उनको हुआ वो सशरीरी है। लेकिन सिद्ध भगवान अशरीरी है। तो यहां पर नियम क्या दिया गया है? केवल ज्ञान केवल दर्शन
32:48 के लिए शरीर हो या ना हो कोई फर्क नहीं पड़ता। दोनों शरीर के प्रमाण में रहेंगे। क्योंकि शरीर रहे तो भी केवल ज्ञान केवल दर्शन को कोई बाधा नहीं पहुंच रही है और शरीर ना हो तो भी कोई केवल ज्ञान केवल दर्शन को बाधा नहीं पहुंच रही है। सब इसलिए कि चारों घाती कर्मों का क्षय होने से आत्मा खुद ही अपने अंदर जो है यहां चारों प्रकार के गुणों को प्रकट कर चुकी है। इसलिए यहां पर ये भी प्रश्न नहीं है। अब हे भगवान केवल ज्ञानी केवल ज्ञान केवल दर्शन के लिए कोई महाप्रमा कोई होता है क्या? जी नहीं तो
33:34 यहां केवल ज्ञान केवल दर्शन जिस किसी को भी हो जाए अब वो उम्र से छोटा हो या बड़ा कई बार महा विद क्षेत्र के अंदर नौ द वर्ष के बच्चे को भी केवल ज्ञान केवल दर्शन हो सकता है। मतलब सर्वथा निषेध नहीं किया है। हो सकता है। ऐसा कहा है। अब बच्चा छोटा सा हो आठ नौ बरस का हो अपूर्व जन्म की स्मृति हो जाए और उसका दरवाजा खुल जाए तो उसको हो सकता है ऐसे स्थिति के अंदर कोई ना नहीं कहा जा सकता है। अब यहां बात आई कि केवल ज्ञानी भगवंत एक प्रूपणा करे वैसे ही केवल ज्ञान से
34:21 दूसरे प्रूपणा करे दो में फर्क पड़ेगा। बोलिए मम्मी बहन आई डिट अंडरस्टैंड द क्वेश्चन महाराज साहब आई एम सॉरी अच्छा अर्चना जी बोलिए बोलिए फर्क नहीं पड़ेगा केवल में कोई फर्क नहीं पड़ेगा अरे भाई कारण बताइए प्रभा के खाली ऐसे हां या ना बोलने से कोई प्राइस नहीं आता है केवल और केवल ज्ञान संपूर्ण ही होता है और भी आगे का प्रश्न आप क्यों नहीं ध्यान में रखते हो रेखा जी बोलिए
35:08 कोई फर्क नहीं पड़ेगा केवल ज्ञान केवल दर्शन सभी का समान ही रहता है जो देखते हैं सभी को अरे भगवान आपको ये बोलना चाहिए कि पहले मोहनीय कर्म का क्षय हुआ है वितरागता प्रकट हो गई है अब केवल ज्ञान केवल दर्शन प्रकट होने के बाद भी उनके बोलने में उनके प्रतिपादन करने में किसी में फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वापस ये भी तो है ना वितरागता भी साथ में आई हुई है और अंतराय कर्म भी गया है तो अंतिम अब जो सिद्ध भगवान है उनके पास शरीर नहीं है शरीर नहीं है तो मुंह नहीं है मुंह नहीं है तो बोल नहीं सकेंगे बोले ठीक है कोई हरकत नहीं लेकिन केवल ज्ञान केवल दर्शन
35:55 में अब कोई फर्क नहीं पड़ता है। अब यहां पर जो है जिस तरह से गांगे जी पार्श्वनाथ भगवान के पाठ परंपरा के शिष्य है। ये भगवान महावीर के पास आते हैं। प्रभु के चरणों में नतमस्तक होते हैं और अपनी तरह से भगवान को विनती करते हैं। भगवान हम पारश्वनाथ के पाठ परंपरा के शिष्य हैं और अब आपके अंदर विलीन हो जाते हैं। आप तीर्थंकर भगवान हो। हम आज से महावीर स्वामी के शिष्य कहलाएंगे। तो हमें क्या करना चाहिए? तब उन्होंने महावीर स्वामी ने कहा कि ठीक है आप पंच महाव्रत वाला प्रतिज्ञान सारंभ कर लो। एक ही बात है।
36:42 कोई लंबा फर्क तो दोनों में भी नहीं है। आपने चार महाव्रत दिए। अब यह पांच महाव्रत की मर्यादा में आप आ जाइए। तो उन्होंने गांगे मुनि ने तुल व्रत नियम ले लिए और वे पंच महाव्रत धारी बन गए। अब महावीर स्वामी को पूछा जाए कि के भगवान क्या चार महाव्रत वाले छोटे होते और पांच महाव्रत वाले बड़े होते हैं क्या? बोलिए विजय भाई क्या प्रश्न समझ में आया? जी साहब जी क्या चार महाव्रत वाले बड़े होते या पांच व्रत वाले छोटे होते तो आंसर तो नहीं छोटे नहीं होते बड़े नहीं होते वो समयसमय की टाइम पर उत्तर क्यों नहीं सही दिया बोलिए छोड़े जी
37:30 है नहीं है चलो हसा जी बोलिए चलो सही हां जल्दी करो नहीं पार्श्वनाथ के चार महाव्रत को पांच बना दिया था प्रीग को उसमें जो है वो मैथुन सेवन महाराज महावीर स्वामी ने अलग कर दिया था वो दोनों एक ही चीज है वो उसमें इंक्लूडेड उसमें अलग कर दिया हां तो आप ये बोले ना उसमें छोटे बड़े का कोई का कोई अंतर नहीं है। चार चार हो या महा पांच हो क्योंकि उसके
38:15 जो भी व्रत नियम है वो उसी प्रकार से सर के हैं। अब यहां पर जो है ये उद्देशक समाप्त हुआ। अब आया है 33वा उद्देश्य आया। हां जी। 33 33वा उद्देश्य है और इसके अंदर जो है मुख्य रूप से विषय लिया है कुंडल ग्राम ये विषय यहां टाइटल जो दिया है अब यहां कुंडल ग्राम तो बात ऐसी हुई कि भगवान महावीर स्वामी उस काल में उस समय में विहार करते करते करते करते
39:03 आज विशेष रूप से उन्होंने ब्राह्मण कुंड ग्राम नगर में पधारे अब वो कहां तो वैशाली नगरी जो है वहां पर विस्तार अलग अलग है ऐसा सारी नगरी बहुत बड़ी है अब ये आप ये देखिए कि ऐसे ऐसे ऐसे अब यहां पर जो है उन्होंने देखा है कुंड ग्राम नगर ये क्षत्रिय कुंड ग्राम नगर है और यहां पर जो है ब्राह्मण कुंड ग्राम नगर है तो यहां भगवान विहार करते करते जिस समय यहां पधारे हैं और ब्राह्मण कुंड ग्राम नगर ये इनका पुराना
39:50 जो है तीर्थंकर महावीर की जन्मभूमि का क्षेत्र रहा हुआ है। भगवान महावीर पधारे। वहां देवताओं ने समवसर बाहर उद्यान में बनाया। वहां देवता भी आए और तीर्थंकर भगवान जो है समसर में बैठकर देशना दे। भगवान ने अपनी देशना देनी प्रारंभ करी तो ऊपर से जो है अनेक देवी देवता वगरे आए। वो भी समोस शरण में बैठे भगवान की देशना सुनी। और यहां दृश्य ये हो गया। सब आते गए आते गए जैसे भी आए सब यह दृश्य जिन्होंने भी देखा उनको बहुत ही अद्भुत आश्चर्य लगा कि वाह भाई वाह अब ऐसा जो है पूरा चित्र
40:37 भगवान का फिर वापस नगरी का महान कुंड ग्राम प्राकृत भाषा में महान कुंड होता है ये बात संस्कृत के अंदर उसका महान मतलब ब्राह्मण होता है एक्चुअली देखा जाए तो शब्द ही कैसा है? माण मत मारो भाई मत मारो किसी को मारो मतलब जो एक कसाई कतल खाने में हिंसा करते हैं उनमें प्राणियों को मारने की बात आती है तब उनको रोका जाता है ना कहा जाता है निषेध किया जाता है कि मत पानी अब यहां पर क्या हुआ कि भगवान पधारे बाहर उद्यान के अंदर समोसरण की रचना की गई देवता गण आते हैं और अभ्यंत आदि आदि सभी
41:25 होते हैं। सब मिलकर के भगवान के समावसर की रचना करते हैं। अब डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ वर्ग जो है दोनों अलग-अलग तरीके से बांधे हुए हैं। तो अन्य देवताओं को भी वहां पर विशेष रूप से रस लगी। तो यहां पर जो है समवसरण की रचना हुई। अब समय अनुसरण की रचना हो तो काफी लोग आते जाते।
42:15 थिंक वी हैव लॉस्ट महाराज साहब फॉर अ लिटिल बिट सो जस्ट हैंग इन देयर हां जी आवाज आ रही है जी सर जी आ रही है आवाज लेकिन वीडियो नहीं आ रहा है कोई बात नहीं सर समोस शरण की रचना तो हुई। अब समोसर में भगवान की रेशना भी गिरे होनी है तो भगवान भी पधार रहे हैं। उधर ब्राह्मण कुंड ग्राम नगर के अंदर यहां जो है एक ऋषभ दत्त नाम के ब्राह्मण और देवांदा जो है उनकी पत्नी यहां पर रहते थे। तो ये वहां के महान कुंडल ग्राम नगर में पहले रहते थे। अब
43:02 महावीर स्वामी भगवान आए पधारे तो ऋषभ दत्त ब्राह्मण ने भगवान को देखा और दो बात जो बड़ी वो सुनी उन्होंने कि हां जी महावीर स्वामी भगवान पधारे हैं क्योंकि देवता जो है भगवान के आगमन की सूचना घोषणा करते हुए दे रहे ऋषभ दत्त ब्राह्मण ने घर आकर के अपनी ब्राहणी पत्नी है उनको यह समाचार दिए देखो देखो जिस तरह से यहां पर भगवान पधारे हैं और भगवान का समवचरण है देशना होगी चलो हम भी सुनने के लिए चलते हैं
43:48 आपको विजय भाई क्या आ गया ये कौन है दोनों भगवान के पूर्व माता पूर्व माता-पिता गणधर नहीं ये बोलिए भगवान ने जब पहले पहले गर्भ में आए भगवान देवदत्ता ब्राहणी और ऋषभ दत्त के यहां पहले जहां जन्म लिया था जन्म नहीं लिया था गर्भ में आए थे बराबर गर्भ में आए
44:35 आई थिंक वी हैव लॉस्ट साहब जी अगेन ओके तो बात ऐसी हुई कि ऋषभ दत्त ब्राह्मण ने घर आकर अपनी पत्नी श्रीमती देवांदा को यह समाचार दिए। देखो देखो आज भगवान महावीर यहां महान कुंड ग्राम नगर में पधारे हैं। और आज यहां समवसरण है। मतलब भगवान की देशना है। चलो हम भी चलते हैं। देवंदा सुनकर बड़ी खुश हो
45:23 गई। बड़ी खुशी हो गई उसको। अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा अच्छा उसके दो मिनट के लिए उसकी आंखों के सामने पूरा इतिहास जो है भूतकाल का सब सामने प्रकट हो गया साधु उसने बड़ा आनंद व्यक्त किया और पतिदेव से कहा चलो अब साथ में चलते हैं आज परमात्मा महावीर प्रभु के देखना सुने आए दोनों ज समोसरण में आए आप समस में जानते हो 12 पर सदा बैठते 12 परसदा के अंदर पुरुष वर्ग जहां बैठता है स्त्री वर्ग वहां पर खड़े रहते अब वो जो खड़ी रहती है तो उसके अंदर देवांदा भी सबसे पहली लाइन में पंक्ति में आगे खड़ी
46:13 अब इतनी खुशी हो रही थी उसको इतनी इतनी ज्यादा खुशी हो रही थी इतनी हर्ष के आनंद में समा नहीं रही थी और भगवान को देख देख कर के इतनी बस वो अपने कैसे कैसे करो अपनी खुशी व्यक्त करें देशना समाप्त होती है अचानक जो है गौतम स्वामी ने भगवान को प्रश्न पूछा हे भगवन ये एक माताजी कोई आए हैं और आपको देखकर के इतने आनंदित हो रहे इतने खुशी हो रही है इनको ये फूले नहीं समा अच्छा भग मैं तो देख रहा हूं तो मुझे
46:59 देखते देखते यह लग रहा है उनके सीने पर वस्त्र जो है वो भी गए हैं। तो भगवन क्या बात क्या है? अब ये तो बड़ी उम्र की स्त्री है। और इतनी बड़ी उम्र की स्त्री में इनके शरीर के ऊपर के वस्त्र भीगे हो। ये कैसे संभव है? भगवान महावीर उत्तर दे रहे हैं। हे गौतम ये तो मेरी अम्मा ये शब्द प्रयोग किया महावीर ने ओ हो हो गौतम स्वामी ने सुनते ही भगवान को ये प्रश्न किया भगवान को आप ये क्या बोल रहे
47:45 हैं? ये क्या बोल रहे हैं? लोक प्रसिद्धि तो यह है आप सिद्धार्थ राजा के पुत्र हो महारानी त्रिशला देवी के पुत्र हो और आज आप ये क्या कह रहे हो तब महावीर ने कहा गौतम ये तो मेरी अम्मा ये पिता है ये ऋषभ दत्त और ये माता देवांदा सबसे पहले मुझे गर्भ में प्रवेश करने का मौका देवांदा माता के गर्भ में मिला है। हे गौतम आपको याद नहीं होगा मालूम नहीं होगा लेकिन मेरे भी तो कुछ कर्म है पिछले जन्मों के तो मैं अपनी तरफ से जैसे आया
48:34 हूं तो मेरा चवन कल्याणक देवांदा माता की कुक्षी में हुआ। मैं 82 दिन के लिए देवांदा माता के गर्भ में रहा। तत्पश्चात मेरा कर्म का काल पूरा होने पर इंद्र ने हरिने में श्री देव को आज्ञा देकर के मेरा गर्भ परिवर्तन कराया। तब मैं देवंदा की माता के गुक्षी में से तृष्णाला माता के गुक्षी में आया हूं। क्या भगवंत यह सारा स्वरूप कोई नहीं जानता है? हां गौतम इतना जल्दी कोई जानता नहीं है। किसी को मालूम नहीं है। गर्भ परिवर्तन का कार्य भी देवताओं ने किया है। और वो
49:20 दृश्य यहां कभी किसी ने दिखाया नहीं है। वो कैसे जानकारी में आएगा? 82 दिन मतलब ढाई महीने होते हैं। क्या इतने अंतर काल को तो कोई गर्भ के रूप में विकसित होते हुए भी नहीं देख सकते। कैसे देखे कौन जाने कैसे संभव है? इसलिए हे गौतम यह मेरी माता है। मुझे गर्भ में धारण करने का भले 82 दिन का और चवन कल्याणक इनके गर्भ में हुआ है। 14 स्वप्न भी इनके गर्भ में मुझे आए थे। तो आज आज मुझे देखकर के इनको इतना आनंद हो
50:08 रहा है। इतनी खुशी हो रही है। अपना पुत्र समझकर मेरे प्रति स्नेह प्रकट कर रही है। बस ये मेरे नाम के वीर वीर मेरा बेटा है। महावीर मेरा बेटा है। महावीर मेरा बेटा है। यह सबको यही बात सोचती रहती थी। बार-बार सोचती रहती आज उसको मौका मिल गया। आज वो फूले नहीं समा रही। आज उसे आनंद समा नहीं रहा है। उसके आनंद का आनंद की सीमा इतनी बढ़ गई। इतनी खुशी उसकी इतनी बढ़ गई कि उसके स्तन में से दूध चढ़ने लग गया। भावुकता आ गई ना।
50:56 इतनी भावुकता आ गई कि दोनों स्तन में से दूध चरने लग गया। इसके वस्त्र गीले हो गए। आपको जो ध्यान में आया लगा बिल्कुल सही लगा। लेकिन कारण यह आया कारण यह है मुझे जन्म देने वाली माता त्रिशला है और मुझे चवन कल्याणक के समय गर्भ में धारण करने वाली पहली माता देवानंदा है। ऐसा इस तरह से जब महावीर ने वर्णन किया ख्याल आया वर्णन किया और यह सुनकर के ऋषभ देव और देवांदा माता के होश उठ गए इतना आनंद हुआ उनको इतना आनंद हुआ कि ओ हो हो जिनको
51:42 मैंने गर्भ में धारण किया था यह वही वर्तमान है यह वही वर्तमान अच्छा अच्छा अच्छा मैंने गर्भ में धारण किया था तो किसी ने क्यों गर्भ परिवर्तन किया? क्या हुआ ऐसा? क्यों किया? तब देवानंदा माता को यही जवाब उस समय ऋषभ दत्त ने दिया। बोले कोई हरकत नहीं। आप चिंता मत करो। आज नहीं तो कल। आज नहीं तो कल। इन शब्दों के अंदर जो बात प्रस्तुत की समझे कि नहीं अब उस बात को लेकर के हे गौतम एक तो मातृत्व भाव उछल गया मातृत्व
52:29 के साथ में स्नेह और वात्सल्य उछल गया मेरा बेटा महावीर मेरा बेटा महावीर मेरा बेटा महावीर ये जो वात्सल्य का स्नेह जो उछल गया आज इसके भाव परिणाम ऊंचे इतनी देर में ये ऋषभ दत्त ब्राह्मण आए। उन्होंने परमात्मा महावीर स्वामी को वंदना की। भगवन मैं पिता हूं। चवन कल्याणक के 82 दिन का पिता है। आप हमारे पुत्र हो। अब हमारा कल्याण करवा दो। कल्याण तब महावीर स्वामी ने अपनी तरफ से ऋषभ दत्त
53:20 ब्राह्मण को पिता समझ के उनकी भावना के अनुसार संसार वास का त्याग कराया और वे शब्द ब्राह्मण ने दीक्षा ली साधु बन बिल्कुल थोड़ा काल निकल गया और यही वात्सल्य स्नेह जो है देवांदा माता के दिल में बैठ गई बात वो कहती है बस अब मैं भी दीक्षा लेना चाहती हूं और मैं भी अपना आत्म कल्याण करना चाहती परमात्मा महावीर प्रभु ने उस समय देवानंदा माता को भी दीक्षा दी आप भी दीक्षा ग्रहण करिए और फिर विशेष रूप से
54:10 उस समय चंदन बाला जी आदि उनकी साध्वी जी थी। उनको सौंप दी कि आप इनको आराधना कराइए। बड़ी उम्र के अंदर है आप क्योंकि महावीर को ही 42 साल तो बीत गए। अब 30 बरस की उम्र में तो दीक्षा ली थी। सास छमस्त अवस्था के बीत गए। तो जब महावीर खुद ही अपनी तरफ से 42 वर्ष की उम्र के हैं तब आप सोचिए उनके माता पिता की उम्र कितनी होगी सोचिए निश्चित रूप से 60 के ऊपर ही होगी ऐसी स्थिति के अंदर अब पिता ऋषभ देव और देवानंदा माता दोनों दीक्षा लेकर साधु
54:58 साध्वी बन गए जो भी हो जितना आयुष इनका बीता उसके पश्चात एक दिन ऋषभ दत्त ने कहा मेरा आयुष अब कम लग रहा है तो मैं सल्लेखना कर लेता हूं और संथारा कर लेता हूं सब तब उन्होंने अपनी तरफ से ऋषभ तमीज में संथारा कर लिया सल्लेखना कर ली और इस सल्लेखना करते करते इन्होंने भी अपने चारों घाती कर्मों का क्षय किया और वे चारों घाती कर्म क्षय करके अपना आयुष पूर्ण करते हैं और आयुष पूर्ण करके ऋषभ
55:44 दत्त केवल ज्ञान प्राप्त करके मोक्ष में जाते अब जिस तरह से उनका मोक्ष गमन हुआ तो देवंदा माता ने भी आए और देवंदा माता ने भी अपनी तरह से अब भगवान के पास में दीक्षा लेना ही उचित है और पुत्र स्नेह है। इस तरीके से गर्भाधान मेरा देवानंदा माता की कोशिश में हुआ। अब जिस तरह से देवंदा माता ने भी भगवान महावीर के पास आकर के निशा ग्रहण की। फिर उसके पश्चात चंदन बालाजी वगरे सा थी उन्होंने उनको
56:32 संभाली और देवंदा सा जी भी अपनी तरह से उत्कृष्ट तप तपश्चर्या आराधना करती है और जितने हो सके अपने कर्मों का क्षय कर अंत में सल्लेखना की इनको भी केवल ज्ञान केवल दर्शन प्राप्त हो गया ये भी निर्वाण पाकर के मोक्ष में गई। देखिए आपको आश्चर्य लगेगा। जन्म देने वाली त्रिशला माता मोक्ष में नहीं गई। लेकिन गर्भ धारण करने वाली चवन कल्याणक वाली माता देवांदा ब्राह्मणी होते हुए मोक्ष में गई और ऋषभ दत्त पिता होते हुए मोक्ष में गए। कितनी बड़ी बात
57:19 सोचिए और इसका सारा वर्णन यहां विशेष रूप से किया गया है। अंत में गांगे मुनि जो थे कि जिन्होंने परमात्मा महावीर के पास आए थे। यह सारा वर्णन उन्होंने भी श्रवण किया और करते करते उन्होंने भगवान के पास में वापस चौ जामो धम्मो मतलब चार महाव्रत के बदले पांच महाव्रत द्वारा धर्म स्वीकार किया। ऐसा यहां का ये 35वा अध्ययन पूर्ण होता है। अब इसके बाद कल हम आगे जमाले का चरित्र शुरू करेंगे। उनका भी वर्णन यहां पर विशेष रूप से
58:06 तो साहिब जी देवंद माता ना कुक्षी माम चवन करण देव उजव तो पछ ज त्रिशला माताना गर्भ मा आव तारे 14 सपना आ जीवन कल्याणजी बार प्रश्न पूछो पहला चार पांच वाक्य करू द महावीर स्वामी फरी जन्म कल्याण देवांदा माता ना गर्भ 82 दिवस पछ तला माता ना गर्भ आया तारे फ स्वप्न आया
58:54 नमो अरता नमो सिं नमो नमोया नमो लोए सब साहुमो पंच नमोकार सब पापणा मंगलम चस परम हवय मंगलम मंगलम भगवान मंगलम गौतम प्रभु मंगलम सूद्रा जैन धर्मोस्तु मंगलम चारी मंगलम हरि हरता मंगलम सिद्धा मंगलम सा मंगलम केवो मंगलम लोग अरिहता लोग सिमा
59:41 साहू लोग केवली परत लोग चारी शरणम पवजमि अरिहंते शरणम पवजम सिद्ध शरणम पवजमि साहहु शरणम केवले पत्तम दम शरणम सर्व कल्याण कारणम प्रधानम सर्वधम जय शासनम
1:00:27 जी रविवार है और रविवार सुबह की क्लास में सभी जुड़ना हमारा तो बिहार रहेगा इसलिए हम बिहार में रहेंगे नहीं जुड़ पाएंगे आप लोग सभी जो है सुबह 7:00 बजे की क्लास में जुड़ना जयश भाई कल आपको नएवाद अनेवा समझाने वाले हैं जैसा कि ऐसा भाई ने अनाउंसमेंट किया वैश्विक पाक्षिक ज्ञानशाला की क्लास रविवार को सुबह 7:00 बजे रहेगी मंदामी साहिब जीम दुम वंदामी साहिब जी थैंक यू विजय भाई हां जी बोल मारो
1:01:13 खबर हो तो केज मारो क्वेश्चन हतो कि भले देवंद कुक्ष तो चव पछ गर्भ स्थंतर कर ने त्रिशला माता मा तारे चवन पूछ आई थिंक साहिब जी आंसर् के बेत मैं हुआ था उनका भी हुआ था दो बार हुआ था ऐसी बात हुई हां दो बार हुआ वो दूसरी बार का पता नहीं चला के बाद में जब साहब ने जवाब घर दिया हर्ष हर्षद भाई आप कुछ कहना चाहते हैं? हां बहन पूछे
1:02:02 बे आया सपना एक बार आया सपना तो बे अतारे त्रिशला माता ना प बतावे देवांदा तो आवेला पर देवो कल्याण कुज बे केसु ए पूछो हाले साहिब जी फ्रॉम व्हाट आई अंडरस्टुड आई थिंक कपल अदर पीपल सेड इस ही सेड बे वत उजवाणु कल्याणक बे वखत सपना प आई दैट इज व्हाट आई हर्ड आई एम नॉट सोड एनीबडी एल्स हियर दैट आई एम नॉट दिस स्टडी ओके सपना तो खाली त्रिशला माता ने आवे
1:02:48 दोनों मातों का आया था और दोनों का चवन कल्याणक भी हुआ था वही खाली देवों ने उज्जवल दूसरा त्रिशला माता बस आई थिंक साहब जी वे तो सुनीता चव इटले सुथ निकल देवोक माव के चव के अंदर आ गर्भ के अंदर दूसरी बार उनकी माता के गर्भ में आए ना हां राइट तो हंसा समझ चले आप भ गया पवेई
1:03:37 के देवंद ने सपना अप खबर देव सेलिब्रेट कर पवे जभन