0:00 देखिए आप उज्जैन से आते हैं महाकाल की नगरी से वहां लोग कहते हैं कि महाकाल के दरबार में कोई राजा रात को नहीं रुकता शाम होते ही चले जाते हैं। यह महाकाल की नगरी है। आप मुख्यमंत्री बने आपको समझाया भी गया। आप उल्टे रास्ते पर गए उज्जैन में रात को रुके। देखिए कभी-कभी कई सारी बिना बात के मिथक चला देते हैं। झूठ बात चला देते हैं। अब आप बताइए 1947 के बाद देश में कौन राजा है एक भी बता दिए कोई राजा बचा है क्या आज तक राजा तो राजतंत्र के समाप्ति के साथ ही खत्म हो गए अब तो हम चुने हुए नेताग हैं तो पहले तो राजा नहीं है दूसरी बात यह कि राजा एक मिथक चल गया नगर निगम की सीमा के
0:47 अंदर राजा रात नहीं रहेगा तो बाबा महाकाल नगर निगम तक ही हो गए ये कितनी झूठ बात है अरे बाबा महाकाल की टेढ़ी दृष्टि होगी तो ब्रह्मांड में कोई बचेगा दुनिया में कहीं बचेगा और आखिरी बात हमारे भगवान तो हमारे माता-पिता तुल्य है। वो तो हमको आजीवन आनंद सुख और लंबी आयु का आशीर्वाद देते हैं। वो कब हमारे प्राण लेंगे? ये तो हमारी आयु परमात्मा के आधार पर अगर पूरी हो जाएगी तो दुनिया की कोई ताकत बचा नहीं सकती है। और अगर भगवान का आशीर्वाद है तो कोई मार नहीं सकती है। हमें इस बात का गर्व है। यही तो सनातन संस्कृति है। आप सुबह-सुबह जब उठते हैं, बाकी लोग तो
1:33 WhatsApp मैसेज देखते हैं। कोई आदमी देखता है सोशल मीडिया पर क्या आया है। कोई Facebook देखता है, कोई Twitter देखता है। आप भस्म आरती देखते हैं। देखिए बाबा महाकाल की नगरी के भक्त हैं। और भस्म आरती से एक जीवन दृष्टि मिलती है। कभी आप भस्म आरती देखने जाएंगे तो भस्म आरती में लगभग 2 घंटे में भगवान के उस दरबार में भगवान की भस्म आरती की शुरुआत आप देखें तो जल से शुरू करके जल से ही आपके सामने समापन होता है। अर्थात जन्म से मृत्यु तक की पूरी यात्रा भस्म आरती के माध्यम से दिखाई जाती है। तो हर एक व्यक्ति का जिसका जन्म हुआ उसको मरना है। लेकिन मरने और
2:20 जीने के बीच जो परमात्मा ने समय अच्छे से सच्चा दिया है, उस समय का सदुपयोग कर ले। यही भस्मार्थी है और मैं परमात्मा की दया से वो काम करता हूं कि आज का दिन खूब आनंद से बीते। कल का कल देखेंगे इसलिए इस भाव पे। और आप ये भी कहते हैं आज के जमाने में लोगों से कि अगर समय देखना है तो उज्जैन की घड़ी का समय देखो। विक्रमादित्य की घड़ी में समय देखो। ये जीएमटी वगैरह कुछ नहीं है। >> देखिए यह काल की नगरी अर्थात महाकाल की नगरी और महाकाल की नगरी अर्थात समय की नगरी। मैं इसको थोड़ा साइंटिफिक भी बताना चाहूंगा कि हमारे यहां यह 300 साल पहले तक दुनिया में स्टैंडर्ड टाइम भारत से माना जाता है। उज्जैन मतलब केवल उज्जैन नहीं
3:06 उज्जैन पूरे भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए आया। तो हमारा स्टैंडर्ड टाइम उज्जैन से होता था और इसको 300 साल पहले 50 साल तक फ्रांस की राजधानी पेरिस जब वो फ्रांसीसी लोगों का समय आया तो वो पेरिस से समय स्टैंडर्ड टाइम बताते थे। आज 250 साल पहले जब अंग्रेज हावी हुए तो वो ग्रीनविच से स्टैंडर्ड टाइम बताते हैं। तो ये जो ग्रीनविच के माध्यम से रात को 12:00 बजे दिन बदलना है ये कोई साइंटिफिक नहीं है। ये वो पैमाना जिस आधार पर उन्होंने अपने जब उनकी पूरे दुनिया में सत्ता थी अंग्रेजों की तो उन्होंने वो स्टैंडर्ड टाइम तय कर दिया। यह सही बात है कि आजादी के साथ ही ऐसे कई सारे विषयों पे बहस होना चाहिए। विचार बनना चाहिए। सबकी बात आना चाहिए। तो इस मामले में मुझे इस बात का भी
3:52 गर्व है कि इस पे हमारी आईआईटी इंदौर और विक्रम यूनिवर्सिटी उज्जैन फिजिक्स के सारी स्टेट के अलग-अलग विद्यार्थी और केवल हमारे प्रदेश के नहीं हमारे देश के नहीं आसपास के भी कई सारे देशों की मान्यता है कि ग्रीनविच का टाइम के बजाय इंडियन टाइम स्टैंडर्ड टाइम होगा और उस पे वो सारे लोग लगे हैं। आज नहीं तो कल जरूर यह होगा। ये पक्की बात है। >> मोहन जी आजकल तो हर एक के हाथ में मोबाइल फोन रहता है। >> दुनिया के किसी भी कोने का टाइम कोई कभी भी देख सकता है। >> लेकिन सूर्य तो चाहे जब नहीं वो निकलेगा ना >> उसमें ये भी पता होता है कि इस समय सूर्य निकला है। इस समय वहां चंद्रमा चमक रहा है। सब कुछ तो सामने है। >> इसमें फर्क है। रात को 12:00 बजे कोई दिनचर्या चालू करता है क्या? आप बता दो
4:39 अपने में से रात को 12:00 बजे दिन अभी हम में से >> से ज्यादातर लोग 12:00 बजे ही शुरू करते हैं। >> नहीं वो मजबूरी है। मैं इस मैं भी मना नहीं कर रहा हूं। मैं इनको ना भी नहीं कर रहा हूं। लेकिन मैं अपनी बात तो रख दूंगा ना। मेरे जैसे और भी बहुत सारे लोग हैं जो इस बात को मानते हैं कि सूर्योदय के समय का जो दिन बदलने का अपना पद्धति है। आज नहीं तो कल मनाएंगे आनंद। उसमें क्या दिक्कत है? हमारे यहां तो सर्वे भवंतु सुखिन सब सुखी रहो। कोई दिक्कत नहीं। लेकिन यह बात सही है कि वह दृष्टि भी देना पड़ेगी जिसके आधार पर भारतीय मान बिंदुओं की पुन स्थापना होना चाहिए। [संगीत]