0:01 [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत] नमस्कार स्वागत है आपका इनसाइट में। मैं हूं रामवीर श्रेष्ठ और इनसाइट में आज हम बात करेंगे आत्मनिर्भर भारत और उसके साथ-साथ सशक्त और विकसित दिशा में भारत की प्रगति को लेकर, गति को लेकर, दिशा और दशा को लेकर। और इसकी इसके साथ में कई ऐसे बिंदु होंगे जिनको हमें छूना पड़ेगा कि सरकार ने जो संकल्प 2014 में लिए थे वो किस तरह से स्टेप बाय स्टेप आगे बढ़ रहे हैं। आत्मनिर्भर भारत अपनी दिशा में किस गति से बढ़ रहा है। मोरक्को में आज देश के
0:49 रक्षा मंत्री का भाषण था और भारत की पहली रक्षा उत्पादन इकाई टाटा के साथ मिलकर के वहां इस्टैब्लिश की गई है। ये विदेश में अह डिफेंस के क्षेत्र में पहली यूनिट इस तरह की भारत ने स्थापित की है। भारत ने कुछ शब्द आगे बढ़ाए थे। सबसे पहले प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया का नारा दिया और मेक इन इंडिया के बाद अब वो कॉन्फिडेंस आत्मविश्वास इस तरह से बढ़ रहा है कि अब बात हो रही है मेक विद फ्रेंड। अब बात हो रही है मेक फॉर वर्ल्ड। तो यह एक दिशा है। यह एक दिशा है और इसी के साथ में कहानी शुरू होती है आत्मनिर्भर भारत की।
1:35 [संगीत] आत्मनिर्भर भारत की कहानियों को हमारे दर्शकों तक पहुंचाने के लिए बताने के लिए सुनाने के लिए हमारे साथ जो मेहमान जुड़े हैं उनका तारुफ मैं आपसे कराता हूं। हमारे साथ प्रोफेसर उन्नत पी पंडित हैं। आप कंट्रोलर जनरल ऑफ पेट प्लेनेट्स डिज़ एंड ट्रेडमार्क्स जो मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अंतर्गत आता है। आपका बहुत-बहुत स्वागत है संसद टीवी में। हमारे साथ सुशील अग्रवाल हैं। आप रीजनल डायरेक्टर ऑफ हरियाणा एंड चंडीगढ़ मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट से हैं।
2:21 आपका बहुत-बहुत स्वागत है। और हमारे साथ स्टूडियो में ही अंजलि टंडन हैं। आप एसोसिएट प्रोफेसर हैं इंस्टट्यूट फॉर स्टडीज इन इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट में। आपका बहुत-बहुत स्वागत है। और इस चर्चा को हम उन्नत जी सबसे पहले आपके साथ आगे बढ़ाएं। तो जो बदलते हुए भारत की जो कहानियां हैं उन कहानियों को आप कहां से शुरू करना चाहेंगे? बदलते हुए भारत ने एक कई ऐसे सीमा चिन्ह इस 10 11 साल के दौरान भारत के औद्योगिक क्षेत्र में एक तरह से क्रांति लाई हुई है। चाहे वो इन्वेस्टमेंट
3:07 हो, चाहे वो इनोवेशन को एनकरेजमेंट करना हो, चाहे वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्ड करना हो, चाहे भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में पोजीशन करना हो, चाहे भारत में नए मैन्युफैक्चरिंग की डिज़ाइन की स्वीकृति को देना हो या इनोवेशन को बढ़ावा देना हो, हर क्षेत्र में भारत ने कहते हैं संस्थागत रूप से अह काफी प्रगति की हुई है। मेक इन इंडिया के अंतर्गत मेनली 15 मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और 12 सर्विस सेक्टर के अंदर फोकस्ड रूप में भारत ने प्रगति की है। जिसमें बहुत बड़ी छलांग कह सकते हैं। हमने डिफेंस के
3:54 क्षेत्र में लगाई है। जहां कि एक समय में ऐसा माना जाता था कि हमारा बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा डिफेंस इंपोर्ट पर जाता था। आज डिफेंस के अंतर्गत हमारी 151000 करोड़ हम की प्रोडक्शन भारत में हो रही है। जिसमें से 23600 करोड़ हम 80 डिफरेंट कंट्रीज में एक्सपोर्ट कर रहे हैं। तो ये एक बहुत बड़ा बदलाव है। जहां जैसे डिफेंस एक्सपोर्ट के क्षेत्र में 34% और 34 फोल्ड की प्रगति हमने देखी है। 686 करोड़ का एक्सपोर्ट 2013-14 में हो
4:40 रहा था। वहां 23600 करोड़ का एक्सपोर्ट हाल ही में खत्म हुए फाइनेंसियल ईयर में सबने देखा है। वैसे ही स्टार्टअप की दिशा में कहे या मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट की दिशा में कहे या प्रोडक्शन लिंक इंसेंटिव देकर विभिन्न क्षेत्रों में एक्सपोर्ट को बढ़ावा देना मैन्युफैक्चरिंग डोमेस्टिक हब बनाकर इसको विकसित भारत की नई दिशा की ओर ले जाना हर क्षेत्र में मेक इन इंडिया ने हमें विकसित भारत की दिशा में ले जाने के लिए काफी ऐसे महत्वपूर्ण कदम रखे हुए हैं। बिल्कुल विकसित भारत के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग, क्षमता का निर्माण, डिफेंस सेक्टर में रिसर्च और उसके बूते आगे
5:25 बढ़ना, भारत की ताकत को एस्टैब्लिश करना जहां एक तरफ यह बहुत जरूरी है। वहीं पर भारत में नवाचार, स्किल डेवलपमेंट इन सब चीजों की स्केलिंग बढ़ाना यह भी उतना ही जरूरी है। सुशील अग्रवाल हमारे साथ जुड़े हैं। ये जो स्किल है इसकी स्केलिंग को लेकर के जो काम हुआ है उस पर आपकी टिप्पणी सुशील जी बहुत जरूरी होगी। यस सर सर ये स्किलिंग जो है मोदी जी का विज़ है राइट फ्रॉम बिगिनिंग उन्होंने आते ही अगर अभिषेक शर्मा की तरह मारा है तो सर ये स्किल डेवलपमेंट के लिए मारा है सर ही नोस द पल्स ऑफ द सिस्टम स्किल स्किल डेवलपमेंट इज द बैकबोन फॉर ऑल द थिंग्स माय डियर फ्रेंड उन्नत साहब ने जो अभी
6:11 जितना जिक्र किया इतने करोड़ का एक्सपोर्ट इतने करोड़ की टेक्नोलॉजी इतना मोरक्को में सर सर इसके पीछे स्किल्स हैंड्स चाहिए हमें स्किल हैंड्स के हमारी मिनिस्ट्री का काम है टू प्रोवाइड द स्किल हैंड टू द इंडस्ट्री। अभी इंटरनेशनल मार्केट में हमारा माइग्रेशन इतना जबरदस्त है सर। ये सब हमारे जो स्किल इंडिया प्रोग्राम के तहत ही हुआ है। हमारे साथ स्टूडियो में अंजलि हैं। डॉक्टर साहब इस सारी चर्चा को हम आगे बढ़ाएं तो उसमें एनर्जी एक बहुत बड़ा फैक्टर है और यह माना जाता है डेवलप डेवलप्ड कंट्रीज को लेकर भी या कोई डेवलप्ड परिवार हो कोई भी आदमी हो जो आदमी जितना ज्यादा एनर्जी कंज्यूम करता है वह उतना ही बड़ा है। और इसके लिए साथ
6:58 में क्लीन एनर्जी का कंसेप्ट और जुड़ गया है। एस और उसमें भारत ने बहुत बड़ी लीड ली है। बात सोलर की करें, बात ग्रीन एनर्जी करें। इसको लेकर के आप क्या कहेंगे? एनर्जी और क्लीन एनर्जी दोनों ही आज की डेट में बहुत इंपॉर्टेंट इशूज़ हैं हमारी डेवलपमेंट के लिए। अगर हम देखें हम आज 10वीं 10 साल हो चुके हैं मेक इन इंडिया को। जो कार्यक्रम भारत की औद्योगिक प्रगति के प्रति समर्पित है। हमें यह चीज ध्यान में रखनी जरूरी है आज की डेट में कि जो भी हम अब डेवलपमेंट करेंगे वो ऐसी होनी चाहिए कि वो पर्यावरण के मापतल को देखते हुए चले। इसलिए हमें सिर्फ एनर्जी कंजमशन को बढ़ाना
7:45 ही नहीं। उसके क्लीन कॉम्पोनेंट्स को भी बहुत अच्छे से अग्रेसिवली कैप्चर करके बढ़ाना है। और इस सिलसिले में भारत सरकार ने जो ठोस कदम उठाए हैं उनमें से एक जो बहुत जरूरी और बहुत मैग्नीिफिकेंटली दिख रहा है वो है सोलर एनर्जी। सोलर सेक्टर में सरकार ने और उसकी स्केलिंग पर भी बहुत जोर है। बहुत जोर है। लेकिन स्केलिंग्स के साथ-साथ जो कि जिसके लिए सरकार ने पीएलआई स्कीम को ल्च किया उसके साथ-साथ सरकार ने ये भी ध्यान रखा कि हम सिर्फ स्केलिंग ही ना करें। हम टेक्नोलॉजी में भी लीड बना के रखें। और इसके लिए जो हमारी एमएआर है मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी सोर्सेज
8:30 उन्होंने बहुत ही सोची समझी पॉलिसीज लाई हैं। जिसमें उन्होंने इस तरीके की पॉलिसीज इंट्रोड्यूस की है जिसे हम एएलएमएम अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉड्यूल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स ऑफ सोलर मॉड्यूल्स कहते हैं। उस स्कीम के अंतर्गत सरकार ने कुछ ऐसे मापदंड दिए हैं कि सिर्फ जो एक मिनिमम एफिशिएंसी लेवल को ही मेंटेन कर रहे हैं वो ही मॉड्यूल सरकार खरीदेगी अपने कार्यक्रम के अंतर्गत। इसलिए जब हम एक तरफ स्केलिंग पे एफसिस दे रहे हैं। हम टेक्नोलॉजी को भी लेके चल रहे हैं। हम यह नहीं कह रहे कि हमें सिर्फ उत्पन बढ़ाना है। हम यह भी कह रहे हैं जो उत्पादन बढ़ेगा वो अच्छी से अच्छी
9:15 टेक्नोलॉजी का ही बढ़ना चाहिए। क्वालिटी प्रोडक्ट भी होना चाहिए। क्वालिटी प्रोडक्ट एफिशिएंसी हो और उसमें ऐसे चेकक्स एंड बैरियर्स हैं ऐसे इंस्ट्रूमेंट्स डाले गए हैं उस पॉलिसी में कि उसमें उसकी इंस्पेक्शंस की जाती है तभी उन मॉड्यूल्स और मॉड्यूल्स को अप्रूव किया जाता है। अगर मैं सोलर की बात करूं तो उसमें भी कई बार बात आरएडी को लेकर होती है। कई बार बात प्रोजेक्ट्स की क्लीयरेंस को लेकर भी होती है। और अगर इन दो ऐसे कंपोनेंट हैं इन क्षेत्रों पर अगर और ज्यादा ध्यान दिया गया तब हम कितना ज्यादा परफॉर्म कर सकते हैं? यकीनन ये दोनों ऐसी रग है जिसको हमें अभी और अच्छे से आने वाले समय में और बहुत ही
10:02 जल्दी पकड़ लेना है। आपने बात की लैंड की। सो हमारे अभी भी जो जमीनी तौर पे जो इंडस्ट्रियलिस्ट हैं उनसे यही फीडबैक मिलता है कि अभी भी हालांकि इंप्रूवमेंट्स हैं लेकिन हमारे लैंड सेंशंस लैंड एलोकेशंस में दिक्कतें आती हैं। क्लीयरेंसेस में समय ज्यादा लगता है कंपेयर टू उन देशों के जिनके प्रति हम अपने आप को आगे बढ़ाना चाहते हैं। सो बिना नाम लिए अगर हम ये समझना चाहें कि अगर उन देशों में सिस्टम्स इतने स्मूथ, इतने एरर फ्री हैं, हमें भी उस तरफ और काम करने की जरूरत है और मुझे पूरा विश्वास है अगर हम पिछली चीजों को सुधार सकते हैं। तो ये भी चीजें हैं जिन्हें हम पकड़ सकेंगे।
10:49 बिल्कुल। हम स्किल डेवलपमेंट को लेकर के सुशील अग्रवाल जी के साथ बात कर रहे थे और हम बात कर रहे थे कि अगर स्किल डेवलपमेंट को लेकर के हम बात करें तो उसकी स्केलिंग इतनी बड़ी हुई है कि भारत जो है दुनिया में एक तरह से तीसरे नंबर पर शायद आ चुका है। सुशील जी अगर मैं ठीक हूं तो इसे जरा थोड़ा सा आप आगे बढ़ाएं। सर हमारे गवर्नमेंट के मंत्रा है स्पीड स्किल स्पीड स्केल स्किल स्लश इनोवेशन सर ये चारों ही मेन कोर पिलर है फॉर डेवलपमेंट ऑफ द कंट्री अगर हम अभी इतने ट्रिलियन की इकॉनमी की बात कर रहे हैं या टू47 में इतनी इकम सर उसके पीछे स्किल्स हैंड्स होने हैं डिजाइन
11:34 एंड इनोवेशंस का बहुत बड़ा रोल है उसमें सर अभी हम द हम अभी थर्ड लार्जेस्ट स्टार्टअप्स हैं वर्ल्ड सर वो इसीलिए है क्योंकि हमने लोगों को स्किल किया है। नाउ पीपल आर कमिंग इन अ बिग वे टू डिज़ इनोवेट एंड इंप्लीमेंट एंड टू अडॉप द न्यू टेक्नोलॉजी एआई एमएल इनू द एकिस्टिंग सिस्टम। हमारा हमारा सब सिस्टम मॉडर्नाइज होता जा रहा है। इंडस्ट्री 4.0 एंड बियों्ड। अब अभी इंडस्ट्री 5.0 भी आगे है। सो वी आर एबल टू डू अकॉर्डिंग टू द इंटरनेशनल बेंचमार्क्स। प्रोफेसर उन्नत हमारे साथ जुड़े हुए हैं और हम उनसे कुछ और सेक्टर्स को लेकर भी बात करेंगे। बात देश में शुरू हुई थी ई ऑफ डूइंग से और बात बढ़ती चली गई। बात फूड प्रोसेसिंग की
12:22 करें। बात पहले अगर इस पॉइंट को मैं पकड़ने की कोशिश करूं तो एक बहुत बड़ा अमाउंट था हमारे यहां पर फूड इंडस्ट्री में जो अनप्रोस्ड रह जाता था और उसकी वजह से वह कई बार वेस्टेज में जाता था। लेकिन उसे जो है इकोनमी में कन्वर्ट करने का एक एक बहुत बेहतरीन रास्ता आगे बढ़ा है। इस पर आपकी कोई टिप्पणी कई कई क्षेत्रों में जैसे फूड प्रोसेसिंग की ही हम बात करें तो नए ऐसे फूड प्रोसेसिंग हब एस्टैब्लिश करने के लिए कई ऐसे स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन में भी ऐसे प्रावधान किए गए। एक अलग से ही फ्रूट प्रोसेस इंडस्ट्री की मिनिस्ट्री को ही
13:07 एस्टैब्लिश किया गया है ताकि एक फोकस्ड होकर इस दिशा में भारत को एक अच्छा डेवलपमेंट और विकास की दिशा में धेय दिया जा सके। हम पहले जो आपने बात की थी सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की उसमें एक महत्वपूर्ण बिंदु मैं यहां जोड़ना चाहूंगा कि भारत ने पहली बार दो नैनो मीटर की चिप तैयार करने के लिए एक विशेष रूप से संस्थागत निवेश को भी बढ़ावा दिया है और मेजर एडवांसमेंट ये हुए हैं 7 नैन मीटर 5 नैन मीटर 3 नैनो मीटर की टेक्नोलॉजी जिससे कि हम आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा में अगर हमारा नाम
13:54 रोशन करना चाहते हैं या स्मार्टफोन की दिशा में हम अपना नाम रोशन करना चाहते हैं या हाई परफॉर्मेंस सिस्टम्स की दिशा में हम अपना नाम आगे ले जाना चाहते हैं तो ये एक बहुत बड़ा कदम होगा और नेशनल सिक्योरिटी या स्पेस एप्लीकेशन जहां की ऑलरेडी हमने विकसित भारत के माध्यम से स्पेस में भारत में भारत ने विश्व में डंका जमाया हुआ है और भी उसे और भी किफायती करना है। तो यह सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को जो बढ़ावा देने के लिए 32,000 करोड़ का जो निवेश और इवन इंडस्ट्री सपोर्ट की भी घोषणा की है भारत सरकार ने ये बहुत महत्वपूर्ण कदम है। मेक इन इंडिया की दिशा में यह अपने आप में ही
14:40 एक बड़ा सीमा चिन्ह रूप कदम हमारा है। बिल्कुल। वैसे ही फार्मासटिकल आप कह सकते हैं कि भारत की जो नींव रखी गई थी आजादी के बाद अब उस पर जो इमारत है वो वो तेजी से बुलंद होती हुई दिख रही है। एक डॉक्टर अंजलि एक ग्रामीण विकास और एमएसएमई ये ऐसा एक कंपोनेंट है ऐसा एक लिंक है कि अगर यह प्रॉपर लिंक अगर यह होता है तो ये जो गांव में जो सूक्ष्म और फिर मझोले ये जो इस तरह के उद्यम हैं उनके बढ़ने से एक तरह से कॉटेज इंडस्ट्री जो है वो अपने नए कलर और कलेवर में नए भारत के निर्माण में
15:25 बड़ा योगदान दे सकती है। इसमें आप क्या कहेंगे? लघु उद्योग एक बहुत ही बड़ा एरिया है हमारी इकॉनमी में। हां। और यहां पे हमें हमने ध्यान दिया है और हम अगर कुछ और चीजों पे पर्टिकुलरली ध्यान देंगे तो हम जरूर इन इन उद्योगों को भी बेहतर कर पाएंगे। जैसे उदाहरण के लिए एक सेक्टर है हमारी इकॉनमी का जेम्स एंड ज्वेलरी जिसमें हम ट्रेडिशनली बहुत ही स्ट्रांग होल्ड रखते हैं। ये सिर्फ उन गिनेचुने सेक्टर्स में से एक है जिसमें हम एक्सपोर्ट्स ज्यादा करते हैं जिस जो हमें फॉरेन एक्सचेंज भी ला के देता है। इतना ही नहीं हम ग्लोबली डिफरेंट कंट्रीज को भी एक्सपोर्ट करते हैं।
16:10 लेकिन अगर हम यहां पे और इंटीग्रेशन करना चाहें अपने स्मॉल और मीडियम ज्वेलर्स की या आइटम्स की तो हमें ऐसे ध्यान देना होगा वो क्या चीजें हैं जो हमारे लोग बना रहे हैं और दुनिया के दूसरे देशों में नहीं बन सकती हैं और वो है हमारी हैंडक्राफ्टेड ज्वेलरी जैसे कुंदन जड़ाऊ ज्वेलरी जो राजस्थान में जयपुर में इनफैक्ट हमारे कई छह सात क्लस्टर्स और भी हैं और सभी बहुत ही स्पेशलाइज ज्वेलरी बनाते हैं। तो अगर हम कुछ ऐसा सोचे, कुछ ऐसे कदम लाएं कि हम इन चीजों को एक ग्लोबल प्लेटफार्म पे प्रोपगेट कर सके। और ये हमारी सांस्कृतिक विरासत भी है जिसको हम ग्लोबल प्लेटफार्म दे सकें। तो हम बहुत ही आसानी से
16:57 इन छोटे लघु उद्योगों को एक इंटरनेशनल प्लेटफार्म से कनेक्ट कर पाएंगे। बिल्कुल बिल्कुल। प्रोफेसर उन्नत हमारे साथ में हैं। एक बात मैंने शुरू की थी। आयात करते थे। हम ज्यादातर मतलब डिफेंस के सेक्टर में अगर बात करें तो हम उसमें इंपोर्ट पर ही डिपेंड थे पूरी तरह से। लेकिन फोकस इस बात पर है कि केवल आत्मनिर्भर ही ना हुआ जाए बल्कि उससे भी आगे उड़ान जो है वो भरी जाए। जी। और इसी के साथ मैं आपसे एआई को लेकर भी ठीक है। उसका भी क्योंकि आगे चलकर के बहुत उस पर भी जो है बहुत फोकस है। उसको लेकर भी आपसे एक बार आपका टिप्पणी लेंगे।
17:45 अ निश्चित रूप से जिस तरह से डिफेंस एक्सपोर्ट की बात की है। तो हमारी ब्रह्मोस मिसाइल को एक्सपोर्ट की दिशा में फिलीपींस में देना हो। बिल्कुल। ये एक बहुत महत्वपूर्ण सीमा चिन्ह कदम है और वैसे ही अन्य डिफेंस उपकरणों को भी जिस तरह से हमने मतलब मैन्युफैक्चरिंग फॉर द इंडिया एंड एक्सपोर्टिंग फॉर द वर्ल्ड तो इस दिशा में 80 देशों में हमने 34 34 फोल्ड जंप किया है। इज द रिमारकेबल ग्रोथ 686 करोड़ से हम 23600 करोड़ तक पहुंचे
18:31 जो कि ये एक स्ट्रेटेजिक कह सकते हैं इंडिया ने ग्लोबल पार्टनरशिप की दिशा में आगे बढ़ते हुए ये सफलता हासिल की हुई है। तो ये एक बहुत महत्वपूर्ण बात है। कुछ अपना कमेंट ऐसे प्रयास जी आप कुछ कह रहे थे मैं आपकी इस सोच से बहुत प्रभावित हूं जब आप कहते हैं कि हम आत्मनिर्भरता से आगे सोच रहे हैं तो जिसको मैं नाम देना चाहूंगी आत्मनिर्भरता प्लस और इसी तरीके से मैं कनेक्ट करना चाहूंगी मेक इन ब्रॉडर मेक इन इंडिया प्रोग्राम को अब जो सरकार एफसिस दे रही है वो मेक क्लीन इन इंडिया की बात कर रही है और हम जैसे मैंने आपसे अभी बात की कि हम रिन्यूएबल्स में सोलर पे बहुत ध्यान दे रहे हैं।
19:17 और इसी तरीके से हम हाइड्रोजन सेक्टर पे ग्रीन हाइड्रोजन पे बहुत ध्यान दे रहे हैं। और यहां पे सरकार की अप्रोच केवल फाइनेंशियल सपोर्ट देने के अलावा बहुत सारे संस्थानिक रिफॉर्म्स पर भी है। व्हिच इज़ जिसको हम इंस्टीट्यूशनल रिफॉर्म्स कहेंगे। जैसे हमने ग्रीन टैक्सोनॉमी अनाउंस की है। हमने ग्रीन स्टील के नॉर्म्स अनाउंस कर दिए हैं। जहां पे हम एक बहुत लीड लेते हुए चल रहे हैं। जब आप इन रेगुलेशंस को सेट करेंगे तो हमारे औद्योग को ये सिग्नल्स जाते हैं कि आने वाले समय में ये चीजें एक स्थिर टर्मिनोलॉजी है। वो अपने आप को इस चीज से अलाइन करना शुरू कर देते हैं। तो इस तरीके से अ सरकार अब अपने डिफाइंड पैराटर्स को
20:04 एक्सपेंड करती चली जा रही है। हम हम बिल्कुल सुशील अग्रवाल जी उनके साथ हम एक बार फिर से जुड़ने की कोशिश करते हैं। अ सुशील जी जो स्किल डेवलपमेंट है उसको एनईपी में भी अकोमोडेट किया गया है बाय पॉलिसी उसके जो इंपैक्ट है पूरे भारत पर उसको थोड़ा सा आप समझाने की कोशिश करिए। सर इसमें थोड़ा सा मैं बैकग्राउंड बताना चाहूंगा। सर ये हमारा नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क इंप्लीमेंट हो गया है। व्हिच इज ए मेजर माइलस्टोन फॉर द कंट्री लाइक इंडिया। सो नाउ एजुकेशन एंड स्किल्स आर इंटीग्रल पार्ट वी हैव हॉरिजॉन्टल वर्टिकल मूवमेंट अमंग दिस सेक्टर इन अदर वर्ड्स ये इसको ब्रच कर दिया है
20:49 नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क में एक बच्चा नॉर्मल नहीं पढ़ना चाहता है ही जैसे हमारे जितने आइकंस है स्पोर्ट्स के वो शायद काफी कोई लोग 10थ क्लास पास है अगर वो स्पोर्ट्स में कोई स्किल्स उनके पास स्पोर्ट्स में उनका नेशनल डिस्ट्रिक्ट या कुछ खेला है सर वो नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क में उनको उसके क्रेडिट्स मिलेंगे सो एवरीथिंग इज क्रेडिट नाउ अज क्या बात है तो इसका जो मन है वो कर पाएगा नाउ इट इज अ नाउ नॉट ए फोर्स एजुकेशन रेदर एजुकेशन बाय चॉइस मैं 12th तक ये पढ़ना चाहता हूं 12थ के बाद एमबीबीएस करना चाहता हूं सर नॉट ए मैंडेटरी कि मेरे मेरे क्रेडिट स्कोर इतना होना चाहिए बट सब्जेक्ट टू असेसमेंट उसका हर स्टेप पे असेसमेंट होगा सर सो
21:36 इट्स ए मेजर थिंग तो अभी स्कूल्स में ये हमारे स्किल डेवलपमेंट के कोर्सेस बहुत अच्छे चल रहे हैं। और सर जैसे हम जापान कोरिया की बात बोलते हैं कि बच्चों को बचपन से ही कुछ स्किल्स सिखा दी जाती है। द सेम वे इंडिया इज फ्लरिशिंग इन अ बिग वे। हमारी छठी सातवीं क्लास से बच्चे जो इनोवेशन लैब और ये सभी का फायदा उठा रहे हैं। अटल टिंकिंग लैब लेकिन एनएपी के तहत जो इंफ्रास्ट्रक्चर चाहिए कॉलेजेस में स्कूल्स में स्किल डेवलपमेंट को सिखाने के पपस से क्या उस पर जोर दिया गया है? क्या वो वो बना है? सर बिल्कुल सर ये इसमें अटल इनोवेशन लैब एक वन ऑफ द स्कीम है। इसके अलावा अपनी स्टेट गवर्नमेंट की बहुत सारी स्कीम्स है जो नेसेसरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइड कर रही है। और बाय अदर कोलबोरेशन वि द लीडिंग
22:23 इंस्टीट्यूशन इन द नियर बाय जैसे मैं कुरुक्षेत्रा की बात करूं। यहां पर एनआईडी कुरुक्षेत्र नया बना है आफ्टर इवन फॉरेशन ऑफ़ गवर्नमेंट और एनआईडी का बहुत ज्यादा महत्व है सर। तो उसमें कुछ ऑफ इंफ्रास्ट्रक्चर की बात चल रही है कि वहां के बच्चे जो देखना चाहे उनको एक्सपोज़र हो और वहां पे कुछ प्रैक्टिकल भी कर पाए। ऐसा प्रावधान चल रहा है। जी उन्नत जी एक बात और है जिस पर आत्मनिर्भर भारत बनाने में एक बात और कही गई कि जैसे पुलिस एक्ट में सुधार किया गया। तीन नए कानून उसमें मतलब उसमें नए पुलिस कानून में सुधार किया गया। तो जो शासन और प्रशासन है उसकी भी रिफ्रेम करने का उसे और नए भारत की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं के अनुरूप उसको ढालने का वो उस दिशा में भी
23:11 कुछ काम जो हुआ है उससे आप कितने संतुष्ट हैं? बहुत ही महत्वपूर्ण काम अगर हम कह सकते हैं कि तो कई ऐसे प्रावधान से जिसको एज ऑफ डूइंग बिजनेस कहे या एज ऑफ लाइवलीहुड इन द कंट्री कहें। तो डी क्रिमिनलाइजेशन करना पीआईआईटी ने पहले भी ऐसे 350 से ज्यादा प्रावधान को डी्रिमिनलाइज किया। आज भी 1000 से ज्यादा प्रावधान को डी्रिमलाइज करने के लिए ऑलरेडी दूसरा बिल संसद में पेश किया गया है। और आगे भी ऐसे 1500 प्रावधान के अलग-अलग प्रावधान के लिए भी काम कर रहे हैं।
23:56 तो ये इस तरह से एक स्ट्रेटेजिक मोड में इन फ वाइज मैनर ये सारी चीजों को सरकार सिंपलीफाई कर रही है। लोगों को कम से कम दुविधा का सामना करना पड़े और निश्चिंत होकर ये एक बेहतर व्यापार वाणिज्य की दिशा में आगे बढ़ सके। ये एक बहुत महत्वपूर्ण कदम है। इस तरह से माहौल तैयार करना सबसे महत्वपूर्ण बात है। बिल्कुल। अभी भी जैसे जीएसटी रिफॉर्म की ही बात करें तो एक बड़ा बूस्ट मेक इन इंडिया को मिलने वाला है इस जीएसटी बचत को के माध्यम से क्योंकि प्रधानमंत्री जी हमेशा से कहते हैं कि भ स्वदेशी चीजें अपनाइए तो स्वदेशी चीजों में आत्मनिर्भर भारत के
24:46 पांचों पिलर में विकास की दिशा में आगे बढ़ने का एक बहुत बड़ी ऊर्जा मिलने वाली है इस जीएसटी के सिंपलीफिकेशन की उसके रेट को भी जो नीचे किया गया है लोगों को भी जो एक्सेस मनी जो उनके हाथ में आएंगे उससे और भी दो दिवाली की जो बात प्रधानमंत्री जी ने कही थी सही मायने में यह दो दिवाली अभी दिख रही है मार्केट के अंदर। बिल्कुल यहां पर एक बार हम और सुशील अग्रवाल जी से जुड़ने की कोशिश करेंगे और आखिर में उनसे समझने की कोशिश करेंगे कि जो सशक्त और विकसित भारत की दिशा में जो स्किल डेवलपमेंट का जो कंट्रीब्यूशन है, एनईपी का जो कंट्रीब्यूशन है, जो आधार अलाइड सेक्टर्स हैं उनका जो कंट्रीब्यूशन है, उसको आप किस तरह से देख रहे हैं?
25:34 सर देखिए स्किल डेवलपमेंट में बहुत सारी स्कीम्स चल रही है डिपेंडिंग अपॉन द रिक्वायरमेंट ऑफ इंडस्ट्री एंड द सोसाइटी बट अभी थोड़ा सा जहां हम लैग कर रहे हैं व्हिच आई वांट टू हिट सर हमारे विज़ की कमी है एक्चुअली हमारा विज़ नैरो है अभी जैसे मैं पानीपत की बात करता हूं सर प्रधानमंत्री ने दो बार मन चार बार मन की बात में बोला है कि इट शुड बी रिसाइक्लिंग कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड और अभी यहां पर कई इंडस्ट्री है जो इसमें जर्मनी और यूएसए वेस्ट आ रहा है दे आर ट्रांसफॉर्मिंग इनू मीनिंगफुल प्रोडक्ट। तो सर हमने उनको बोला है कि सर ये व्हाई नॉट दी मशीन वी कैन मेड इन इंडिया एंड वी कैन एक्सपोर्ट टू द अदर इनफीरियर कंट्रीज। हमारा इनोवेशन बढ़ेगा। हमारे स्किल्ड मैन अभी बोल रहे हैं हम वी आर ओवरपॉपुलस। सर ओवर पॉपुलस को हमने यूज़ करना है। सर हमारे
26:19 व्हाई वी कांट डिजाइन हमारे जुगाड़ सिस्टम इतना सही है सर। हमें खाली उसको एस्पिरेशन बनाना है। नो सर सर हमारे झारखंड के माइंड तजापुर के माइंड बिहार के माइंड हर माइंड तो हर जगह है सर भगवान ने शुरू में कुछ ऐसा नहीं बनाया ओनली वी हैव टू रीवायर द ब्रेन सर जो मशीन यहां पे जर्मनी से इंपोर्ट हो के सर में कुछ लीडिंग ब्रांड्स है लुधियाना में वी हैव विजिटेड ऑल वन सर मैं नाम नहीं ले पाऊंगा इनका यहां पर सर उनके यहां पे हजारों डिज़र्स काम कर रहे है उनको खुद स्किल होके उनको खुद बना रहे है वो मशीन कभी रिसर्च करने का सोच ही नहीं रहे है वो बोलते हैं सर इतना पर काम होना और भी ज्यादा जरूरी है। और यहां पर एक आखिरी सवाल डॉक्टर साहब आपके साथ ऊर्जा क्षेत्र पर आपका भी फोकस बहुत ज्यादा है।
27:06 2070 तक नेट जीरो की बात कही गई थी और पीछे एक स्टेटमेंट यह भी आया कि इस लक्ष्य को हम समय से पूरा कर लेंगे। यह दुनिया को बताया गया। कितनी बड़ी बात मानते हैं आप? यह लक्ष्य बहुत बड़ा है। लेकिन हमारे पास बीच-बीच चेकक्स एंड बैरियर्स हैं। 2070 से पहले 2047 आएगा जिसमें हमारा विकसित भारत होगा। बिल्कुल। उससे पहले 2030 आ रहा है जहां पे हमने अपने एनडीसी के टारगेट्स दिए होंगे। तो अगर हम अपनी प्रोग्रेस को चालू रखते हुए हम हम बहुत ही फ्रीक्वेंटली इस प्रोसेस को रिव्यू करते रहें। अपनी गलतियों से सीखते रहें, दूसरे देशों से भी सीखते रहें।
27:52 तो हम जरूर इसको कर सकेंगे। दिक्कतें हैं लेकिन हमें रुकना नहीं है। हमें आगे ही बढ़ना है। उदाहरण के लिए आज की डेट में हमारे रिन्यूएबल सेक्टर इस तरीके से पॉलिसीज फ्रेम कर रहे हैं कि हम यूएस जैसे कंट्रीज को लाइसेंस देने की स्थिति में हैं। जैसे जैसे हमारा जो पीएलआई फ्रेमवर्क है उसमें जिस तरीके से उस स्कीम को डिज़ किया गया है वो एनश्योर करती है कि जितना आप सप्लाई चेन में दूर तक जाके बनाएंगे उतना आपको बेनिफिट ज्यादा मिलेगा। इसको कंपेयर करें किसी और डेवलप नेशन से तो उन्होंने खुली छूट दी है कि आप इतना बनाएं और इतना आपको सब्सिडी हो। लेकिन वहां पे ये ध्यान नहीं दिया जा रहा है कि आप पूरी
28:38 सप्लाई चेन को पकड़ पाएंगे। बिल्कुल वो यहां पर पकड़ने की कोशिश की गई है। बहुत-बहुत शुक्रिया आपका। आपका उन जी बहुत-बहुत शुक्रिया। सुशील जी आपका बहुत-बहुत शुक्रिया आधा घंटे तक इनसाइट में सशक्त से विकसित होते हुए भारत की दिशा को समझाने की कोशिश करने के लिए और इसके लिए मुझे भी इजाजत दीजिए। फिर मिलेंगे। नमस्कार। [संगीत] [प्रशंसा] [संगीत]
29:28 टू वॉच मोर प्रोग्राम्स ऑफ संसद टीवी सब्सक्राइब टू आवर YouTube चैनल एंड डोंट फॉरगेट टू लाइक एंड शेयर देम।