Insight: जनसंख्या नीति ज़रूरी | 03 November, 2025

Sansad TV www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो भारत में जनसांख्यिकीय असंतुलन के बारे में चर्चा करता है, जिसमें जनसंख्या नीति की आवश्यकता और जनसंख्या मिशन की घोषणा पर ध्यान केंद्रित किया गया है। विशेषज्ञ जनसंख्या परिवर्तन के विभिन्न पहलुओं, जैसे डेमोग्राफिक डिविडेंड, क्षेत्रीय असमानताएं, प्रवासन, और विकलांग व्यक्तियों पर बढ़ते बोझ पर प्रकाश डालते हैं। वोट बैंक की राजनीति और सीमावर्ती क्षेत्रों में घुसपैठ जैसे मुद्दों पर भी बात की जाती है, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करते हैं।

मुख्य बातें:

  • जनसंख्या नीति की आवश्यकता और जनसंख्या मिशन की घोषणा
  • डेमोग्राफिक डिविडेंड का प्रबंधन और क्षेत्रीय असमानताएं
  • अनियंत्रित प्रवासन और घुसपैठ के मुद्दे
  • वोट बैंक की राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा

परिचय

संसद टीवी में प्रतिबिंब शर्मा जनसांख्यिकीय असंतुलन पर चर्चा शुरू करते हैं, जो देश में चल रही चर्चाओं और जनसंख्या नीति की आवश्यकता पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनसांख्यिकी मिशन की घोषणा की थी, और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबेली ने जनसंख्या नीति बनाने की मांग की है। विशेषज्ञ, डॉ. एस के सिंह और मनु गौड़, इस मुद्दे पर अपने विचार साझा करते हैं।

जनसंख्या नीति की आवश्यकता

डॉ. एस के सिंह बताते हैं कि भारत में पहले भी तीन बार जनसंख्या नीति लागू की जा चुकी है, लेकिन जनसंख्या की स्थिति में काफी बदलाव हुए हैं। वे कहते हैं कि देश को नई जनसंख्या नीति की सख्त जरूरत है, जिसका फ्रेमवर्क पहले की नीतियों से अलग होना चाहिए। डॉ. सिंह जनसंख्या परिवर्तन के छह-सात प्रमुख चुनौतियों पर प्रकाश डालते हैं, जिनमें डेमोग्राफिक डिविडेंड मैनेजमेंट सबसे महत्वपूर्ण है।

जनसंख्या वृद्धि और क्षेत्रीय असमानताएं

मनु गौड़ जनसंख्या वृद्धि की असमानता पर प्रकाश डालते हैं, खासकर सीमावर्ती राज्यों में। वे बताते हैं कि उत्तराखंड में मुस्लिम जनसंख्या में वृद्धि हुई है, जिसका कारण रोजगार के अवसर और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों से प्रवासन है। गौड़ का मानना है कि जनसंख्या नीति में सभी पहलुओं को ध्यान में रखना चाहिए और डेमोग्राफिक डिविडेंड का लाभ उठाना चाहिए।

जनसांख्यिकीय परिवर्तन और चुनौतियां

डॉ. सिंह बताते हैं कि देश के लगभग 70 जिलों में जनसांख्यिकीय बदलाव हुआ है, खासकर असम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, बिहार और झारखंड में। वे अनियंत्रित प्रवासन को एक बड़ी समस्या बताते हैं, जिसके कारण कई लोगों ने भारतीय राजनेताओं की मदद से आधार कार्ड और वोटर आईडी भी बनवा लिए हैं। डॉ. सिंह एक अद्यतित और अनुकूलित नीति फ्रेमवर्क की आवश्यकता पर जोर देते हैं, जो मानव विकास और क्षेत्रीय दृष्टिकोणों पर आधारित हो।

जनसंख्या नीति और राजनीतिक हस्तक्षेप

मनु गौड़ और डॉ. सिंह दोनों इस बात पर सहमत हैं कि जनसंख्या नीति को वोट बैंक की राजनीति से दूर रखना चाहिए। गौड़ भूमिपुत्रों के अधिकारों पर जोर देते हैं और बताते हैं कि घुसपैठियों को राजनीतिक प्रश्रय दिया जा रहा है, जिससे देश की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। डॉ. सिंह कहते हैं कि कुछ राजनेता सत्ता में वापस आने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं, जिसके कारण रोहिंग्या और बांग्लादेशी अवैध प्रवासियों की संख्या बढ़ रही है।

समापन

कार्यक्रम के अंत में, यह निष्कर्ष निकाला गया कि जनसांख्यिकीय असंतुलन सामाजिक स्थिरता, आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। जनसंख्या नियंत्रण, शिक्षा, सीमा निगरानी, और नागरिकता पहचान तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने के प्रयासों की आवश्यकता है।

Summarize any YouTube video in seconds

Get summaries like this one for any video, in your language, with the free Summ app.

Download on the Apple Store
Get it on Google Play

Transcript

YouTube Transcript Generator

0:00 [संगीत] नमस्कार संसद टीवी में आपका स्वागत है। मैं हूं प्रतिबिंब शर्मा और आप देख रहे हैं इनसाइट और इनसाइट में आज हम जनस सांख्यिक असंतुलन यानी कि डेमोग्राफिक इमंबैलेंस को लेकर देश में चल रही चर्चाओं को केंद्र में रखकर बात करेंगे। जनसंख्या नीति बनाए जाने की मांग और आवश्यकता की।

0:48 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गत 15 अगस्त को लाल किले की प्राचर से देश के कई क्षेत्रों में डेमोग्राफिक इमबैलेंस को राष्ट्र के लिए एक बड़ा खतरा बताते हुए जनस सांख्यिकी मिशन की घोषणा की थी। अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकारवा दत्तात्रेय होसबेली ने भारत की बदलती डेमोग्राफी को ठीक करने के लिए जल्द से जल्द एक जनसंख्या नीति बनाने की मांग की है। उनका मानना है कि जितनी जल्दी जनसंख्या नीति लागू होगी उतना ही देश को लाभ होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनस सांख्यिकी मिशन यानी कि डेमोग्राफी मिशन लाने की घोषणा और दूसरी तरफ जनसंख्या नीति लागू करने की मांग के कारण और इसके

1:33 पीछे की वजह को पहचानने की कोशिश करेंगे आंकड़ों के माध्यम से विशेषज्ञों के द्वारा। दो विशेषज्ञ हमारे साथ वर्चुअली जुड़े हुए हैं। डॉक्टर एस के सिंह हैं। सर्वेक्षण अनुसंधान एवं डाटा विश्लेषण विभाग के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान मुंबई आपका बहुत-बहुत स्वागत है। मनु गड है जनसंख्या विशेषज्ञ वो भी हमारे साथ वर्चुअली जुड़े हुए हैं। मनु जी आपका भी बहुत-बहुत स्वागत है। अगर बात करें डॉक्टर एस के सिंह अ क्या ये वाकई में ही कोई राजनीतिक मांग है या आपको लगता है कि ऐसा जो है देश के कुछ

2:19 क्षेत्रों में हो भी रहा है और इसीलिए प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचर से डेमोग्राफी मिशन यानी कि जनसंख्यिकी मिशन लाने की घोषणा भी की थी और अब मांग की जा रही है कि जनसंख्या नीति जल्द से जल्द लागू की जानी चाहिए। आप कैसे देखते हैं इस मांग को? थैंक यू पृथ्वी जी। ये बिल्कुल सही बात है कि आजाद भारत में तीन बार जनसंख्या नीति लागू की जा चुकी है। लेकिन अगर तीनों बार देखें 1952 से हमने शुरू किया। दूसरी 1976 एंड मोस्ट रीसेंट जो है वो 200 की है। तो तीनों जनसंख्या नीति के लागू होने के बाद

3:04 जनसंख्या की सिचुएशन में काफी चेंजेज हुए हैं। जो पपुलेशन चेंजेस हमारी कंट्री में हुए हैं। अभी उस चेंजेस को लोग अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। और उसके साथ साथ हमारे न्यूर चैलेंजेस इमर्ज हो रहे हैं। इसलिए मैं भी ये मानता हूं कि जितनी जल्दी हो सके भले ही नेक्स्ट सेंसेस 2027 में होने वाला है। लेकिन जो अवेलेबल एविडेंस है वो काफी है नई जनसंख्या नीति लाने के लिए। इसलिए नई जनसंख्या नीति को देश को सख्त जरूरत है। उसके वजह अलग-अलग हो सकते हैं। एकेडमिशियन उसको अलग नजरिए से देख सकते हैं। पॉलिटिकल पर्संस अपनी कंट्री के

3:50 प्रोग्राम मैनेजर्स अपनी कंट्री के अलग-अलग दृष्टिकोण सबका हो सकता है। लेकिन यह कहते हुए मैं एक बात को हाईलाइट करना चाहूंगा कि जनसंख्या नीति का फ्रेमवर्क जो 1952 में था, 1976 में था और 200 में था उससे अलग होना चाहिए। हमारे समझ से सिक्स टू सेवन मेजर चैलेंजेस जो कंट्री इस समय फेस कर रहा है पपुलेशन चेंज के चलते पपुलेशन डायनामिक्स के चलते वो है डेमोग्राफिक डिविडेंड मैनेजमेंट प्रधानमंत्री माननीय प्रधानमंत्री जी ने घोषणा किया है और उसी लक्ष्य को ले आगे चल रहे हैं कि 2047 तक भारत को एक विकसित

4:39 राष्ट्र बनाना है। उस रास्ते में सबसे इंपॉर्टेंट चीज यह है कि इंडिया के पास दुनिया का सबसे बड़ा लेबर फोर्स है। लार्जेस्ट लेबर फोर्स इन द वर्ल्ड राइट नाउ और उसको हम लोग डेमोग्राफिक डिविडेंड के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन डेमोग्राफिक डिविडेंड के बेनिफिट तभी ऑप्टिमाइज कर सकते हैं जब उसको प्रोपर्ली मैनेज किया जाए। प्रॉपर्ली मैनेज से मेरा ताल्लुक ये है कि उनका एजुकेशन, स्किल डेवलपमेंट, जॉब क्रिएशन, न्यूट्रिशन एंड हेल्थ, लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन एंड इट्स क्वालिटी। अगर ये माइक्रो मैनेजमेंट नहीं किया जाएगा तो जो हमारी एकिस्टिंग डेमोग्राफिक डिविडेंड है वो एक डेमोग्राफिक बर्डन के

5:25 रूप में कन्वर्ट हो जाएगी। और आप जानते हैं कि हम लोग एक पॉलिटिकली हाईली सेंसिटिव कंट्री में रह रहे हैं। बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो कि हमारे डेमोग्राफिक यूथ पपुलेशन का अलग-अलग तरीके से यूज़ करना चाह रहे हैं। आपने देखा होगा रिसेंटली एक कांसेप्ट आया जेएन जी का जिस पर की अक्सर मीडिया के लोग चर्चा करते रहते हैं। तो उन सब चीजों से बचाने के लिए हमारे समझ से बहुत जरूरी है कि हम डेमोग्राफिक डिविडेंड मैनेजमेंट को स्ट्रेंथन करें। दूसरी जो बात प्राइम मिनिस्टर जी ने कहा था मैं एक बार मनु गॉड जी के पास जाता हूं। डॉक्टर सिंह उनसे पहला रिएक्शन ले लेता हूं। मनु गॉड जी

6:10 जनसंख्या वृद्धि तो हुई है और 1 अरब 40 करोड़ पहुंच गए हैं हम। उससे भी ज्यादा हो गए हैं और विश्व के सबसे ज्यादा जनसंख्या वाले देश बन गए हैं। लेकिन यह जो जनसंख्या वृद्धि है वो असमान है। कुछ क्षेत्रों में कम हुई है और कुछ क्षेत्रों में बहुत ज्यादा हुई है। और माना यह जा रहा है कि कुछ सीमावर्तीय राज्यों में जो कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अन्य देशों के बॉर्डर से जुड़े हुए हैं उन राज्यों में बहुत ज्यादा हुई है और वो जनसंख्या वृद्धि यहां पर प्रजनन में वृद्धि की वजह से नहीं हुई है। वो कहीं ना कहीं कृत्रिम रूप से जानबूझकर उन राज्यों में उन क्षेत्रों में जनसंख्या वृद्धि का प्रयास किया गया है

6:55 जिससे असंतुलन पैदा हो। क्या ऐसे कुछ आंकड़े हैं? देखिए प्रतिबिन जी सबसे पहले तो मैं यह कहना चाहूंगा कि जिस डेमोग्राफिक चेंज की हम बात कर रहे हैं वो डेमोग्राफिक चेंज कई कारणों से होता है। इसमें इललीगल इमीग्रेशन भी एक कारण है। इसमें जब हम हमारा देश आजाद हुआ था तो हमारा जो अर्बन रूलर डिवाइड था लगभग 85% जनसंख्या हमारी गांव में रहती थी जो आज लगभग बराबर-बराबर हो गया है। तो ऐसे फिर इंटरस्ट माइग्रेशन है अच्छी अपॉर्चुनिटीज के लिए। उसके अलावा कुछ सोची समझी भी चीजें हैं जो सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए जैसे आपने बात करी मैं उत्तराखंड राज्य से

7:41 आता हूं और 2000 में ये राज्य का गठन हुआ। उसके बाद 2001 में यहां पर पहला सेंसस हुआ। तो उस समय अगर हम देखें तो अ यहां पर 9% के करीब मुस्लिम पापुलेशन थी। बाकी अलग जैन, सिख, ईसाई, हिंदूस की। लेकिन अगर हम देखेंगे 10 वर्षों में 2011 के सेंसस में वो 5% बढ़ के 14% हो गई। तो उसका रीजन क्या हुआ? उसका रीजन था कि नया स्टेट बना था। अह रोजगार की अपॉर्चुनिटीज ज्यादा थी या जो बॉर्डर डिस्ट्रिक्ट थे उत्तर प्रदेश के वहां से माइग्रेट होकर लोग बाग इधर आए और आज अभी

8:26 2021 का सर्वे सेंसस हुआ नहीं है जो होना है अभी 2027 तक होगा तब उसकी रिपोर्ट आएगी जो एक मोटा-मोटा आंकड़ा है तो यहां पर अगर हम देखें तो मुस्लिम पापुलेशन करीबन मोर देन 15% से ज्यादा ही हर कीमत पे होने वाली है। लोग बाग तो यहां पे 18 टू 20% कहते हैं। लेकिन ऐसा ही अगर हम देखेंगे तो पश्चिम बंगाल में है, बिहार के सीमांचल में है, असम में है। अ उधर अगर आप राजस्थान चले जाएंगे तो राजस्थान बॉर्डर पे जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर तो ये जो चीजें हो रही हैं, इससे उस रीजन के लोगों में बड़ा एक डर का माहौल हो गया है। समय-समय पे अलग-अलग आंदोलन होते हैं।

9:14 मांगे उठाई जाती हैं। अ मेरा मानना है इसी को ध्यान में रखते हुए अभी उत्तराखंड राज्य ने एक बहुत अच्छा काम किया क्योंकि यहां पे जब मुस्लिम पापुलेशन बढ़ी तो उन्होंने कहा कि भाई यहां के मदरसे जो हैं उनको हम फॉर्मल एजुकेशन में लेकर आएंगे और यहां के मदरसा बोर्ड को भंग कर दिया गया और जिससे कि जो पापुलेशन आई है माइग्रेट होके वो भी डॉक्टर इंजीनियर आईएएस आईपीएस बन सके वो भी एक राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा में आ सके तो मेरा यह मानना है वर्ष 2019 में भी लाल किले की प्राचर से प्रधानमंत्री जी ने जनसंख्या नियंत्रण के विषय में बोला था। अह उसके बाद आप देखें 3 वर्ष पहले बजट सत्र में संसद में फाइनेंस

10:00 मिनिस्टर ने घोषणा की थी एक हाई पावर डेमोग्राफिक पपुलेशन इश्यूज के लिए एक हाई पावर कमेटी गठित करने की जो अब तक नहीं हुई और उसके बाद देखें तो प्रधानमंत्री जी ने 2025 में भी बोला तो 6 वर्ष बीत चुके हैं 6 7 वर्ष अब कुछ करने का समय है। अ वास्तव में इस देश को एक उचित और एक वृद्ध स्तर पर डेमोग्राफिक चेंज को लेकर एक अच्छी पॉपुलेशन पॉलिसी आनी चाहिए जिसमें सारा पैराटर्स सबको एड्रेस करने की जरूरत है। डॉक्टर सिंह यहां पर उत्तराखंड की बात कर रहे हैं गॉड साहब और वहां पर हमने देखा और जब जो

10:46 जनसंख्या असंतुलन होता है तो बहुत सारी परेशानियां जो है खड़ी हो जाती हैं। उसमें से जो है सांप्रदायिक तनाव बढ़ना, स्थानीय बनाव, बाहरी का संघर्ष पैदा होना और अलगाववादी आंदोलनों को बल मिलता है। ये माना जाता है और ऐसा हम जो है कहीं ना कहीं उत्तराखंड में देख रहे हैं। अ बहुत सारे पर्वतीय क्षेत्रों में उन लोगों का जिनकी जनसंख्या वहां पर बेतहाशा बढ़ी है पिछले कुछ वर्षों में उनके खिलाफ एक अलगाव की जो है मानसिकता पैदा हो गई है। क्या ये बात सही है? अगर ऐसा होता है तो ये सारी परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। जी बिल्कुल सही बात आपने कहा। अगर एक उत्तराखंड के विषय में हम लोग

11:32 चर्चा कर रहे हैं। लेकिन अगर पूरे नेशन के 70 डिस्ट्रिक्ट को अगर देखा जाए तो फाइव ऐसे स्टेट्स है अपनी कंट्री में स्टार्टिंग वि आसाम, वेस्ट बंगाल, त्रिपुरा, सीमांचल एरिया ऑफ बिहार एंड वन एरिया वन कॉर्नर बॉर्डरिंग ऑफ वेस्ट बंगाल अबाउट फाइव डिस्ट्रिक्ट ऑफ झारखंड। ऑल टूगेदर हमने देखा है 21 डिस्ट्रिक्ट ऐसे हैं अपनी कंट्री में जहां में डेमोग्राफिक शिफ्ट हो गया है। वहां की डेमोग्राफी चेंज हो गई है। लेकिन उसके इंप्लिकेशंस बड़े अलग-अलग है। जो हमने फाइव पॉइंट्स की आपसे बात किया जिसमें पहली राउंड में हमने केवल डेमोग्राफिक डिविडेंड मैनेजमेंट की बात

12:17 किया। हमारा जो दूसरा प्रमुख मुद्दा है रीजनल इमंबैलेंसेस एंड इंटरस्ट डेमोग्राफिक डिस्पेरिटीज जो हमारा तीसरा मुद्दा है जिस पर अभी गौर साहब बात कर रहे थे ऑर्गेनाइजेशन एंड माइग्रेशन प्रोसेस जब हम माइग्रेशन प्रोसेस की बात कर रहे हैं तो इंटरस्ट माइग्रेशन तो अपनी कंट्री में हो रहा है बिकॉज़ ऑफ़ अनकल डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ अपोरर्चुनिटीज लेकिन जो क्रॉस बॉर्डर माइग्रेशन है अनडॉक्यूमेंटेड माइग्रेशन है वो एक बड़ी समस्या है। हम में से किसी के पास उसका प्रेसाइज एस्टीमेट्स नहीं है। लेकिन समवेयर अराउंड 250 मिलियन से लेकर के अराउंड 340 मिलियन

13:03 के बीच जो क्रॉस बॉर्डर माइग्रेशन अपनी कंट्री में अनडॉक्यूमेंटेड हुआ। अब उसमें से बहुत सारे लोगों ने अपने इंडियन पॉलिटिशियन पॉलिटिकल पार्टीज के सपोर्ट से आधार कार्ड राशन कार्ड बनवा लिया। इवन वोटर आईडी भी बनवा लिया। वो एक दूसरे चैलेंज है। आप देख रहे हैं नेशनल लेवल पे अभी अभी अपने इलेक्शन कमीशन ने 12 स्टेट में एसआईआर की बात किया। इवन बिहार जहां इलेक्शन इस समय प्रोसेस चल रहा है वहां पर एसआईआर को लेकर के काफी लेकिन ये सब चीजें डायरेक्टली पपुलेशन पॉलिसी से एड्रेस करना थोड़ा कठिन होगा इसलिए पॉलिसी का फ्रेमवर्क जो हमने आपसे कहा कि 1952 1976

13:49 एंड 200 के फ्रेमवर्क अलग-अलग थे जो करंट इंडिया की सिचुएशन है और यहां से 2047 में इंडिया को डेवलप कंट्री बनाने के लिए हमारा जो पॉलिसी का फ्रेमवर्क होना चाहिए वो डिमांड अपडेटेड एडप्टिव पॉलिसी फ्रेमवर्क होना चाहिए। व्हिच शुड बी बेस्ड ऑन होलिस्टिक ह्यूमन डेवलपमेंट फ्रेमवर्क और डिफरशिएटेड रीजनल अप्रोचेस एंड प्रमोटिंग सस्टेनेबल लाइफ स्टाइल। ये तीन चीजें हमारी पिलर होनी चाहिए जिससे कि हम जेंडर एंड हेल्थ डायमेंशन को भी एड्रेस कर सके। पापुलेशन एजिंग को एड्रिंक कर सके। इनक्रीजिंग बर्डन ऑफ पर्सन वि डिसेबिलिटीज। ये किसी का ध्यान नहीं जा

14:36 रहा है। ओरेबल प्राइम मिनिस्टर ने 2016 में ही इसको हाईलाइट किया। लेकिन अभी अपनी कंट्री इस पर ज्यादा काम नहीं कर पाया है। इसीलिए जो अगली पपुलेशन पॉलिसी होनी चाहिए उसमें इनक्रीजिंग बर्डन ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटी जो करीब करीब 60 से लेकर के 100 मिलियन तक हो गए हैं। हालांकि पपुलेशन एजिंग से भी जुड़ा हुआ है। और अगला मुद्दा है क्लाइमेट रेिलियंस। ओके। अनडॉक्यूमेंटेड माइग्रेशन घुसपैठिए वो तो एक बड़ा मुद्दा है लेकिन पपुलेशन पॉलिसी हमें डाउट है कि इस फ्रेमवर्क में जिस फ्रेम की हम बात कर रहे हैं उसमें उसको एड्रेस करने की ज्यादा गुंजाइश होगी। जी गॉड साहब मैं गॉड साहब से पूछ लूं। गॉड

15:23 साहब यह एक तरफ मांग की जा रही है नई जनसंख्या नीति जल्द से जल्द लागू किए जाने की। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री ने जनसंख्यकी मिशन की बात की थी। ये अपने आप में समान अर्थ वाले जो मिशन हैं या फिर जो है दोनों के अलग-अलग जो है टारगेट्स हैं। दोनों के अलग-अलग लक्ष्य और उद्देश्य हैं। देखिए मेरा मानना है कि ये दोनों एक दूसरे के ही पूरक हैं और जो भी जनसंख्या नीति बनाई जाए उसमें सारी चीजों को ध्यान में रखते हुए अह बनानी चाहिए। सबसे पहले अगर हम देखें अभी बात करी डेमोग्राफिक डिविडेंड की अगर हम इतिहास उठा के देखें कि विश्व में जितने भी विकसित राष्ट्र हैं अ उन्होंने विकास की गति तब पकड़ी जब उनके

16:10 यहां युवा जनसंख्या ज्यादा रही जब उनके यहां डेमोग्राफिक डिविडेंड वो तभी ले पाए। अगर हम डेमोग्राफिक डिविडेंड क्या है? डेमोग्राफिक डिविडेंड यह है कि अह अगर हम एक कंपनी के तौर पे इसे देखें अह कि कोई भी कंपनी डिविडेंड कब देती है जब वह मुनाफा करेगी। जब वो कारोबार करेगी, अच्छा कारोबार करेगी, अच्छी मेहनत करेगी, आमदनी होगी तो उसके शेयर होल्डर्स को डिविडेंड मिलेगा। अब हम आज हमारी यूथ पॉपुलेशन ज्यादा है और उस पे हम डेमोग्राफिक डिविडेंड की भारत की प्रगति की बात कर रहे हैं। लेकिन आज अपने देश में कितने करोड़ लोगों को अनाज मुफ्त में देना पड़ रहा है। आज हमें लोगों मैं इससे बात करता हूं। गौर साहब इससे बेहतर बात करता हूं जिसका जिक्र आपने उत्तराखंड का उदाहरण देकर समझाने का प्रयास भी किया था कि सवाल तो यह उठ रहा

16:59 है कि भूमि पुत्रों को जो हक मिलना चाहिए जो अधिकार मिलना चाहिए वो बाहर से आने वाले घुसपैठी उन अधिकारों पर कब्जा जमाने की कोशिश कर रहे हैं। उसका प्रयास कर रहे हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि उनको राजनीतिक प्रशय दिया जा रहा है। इससे जो है ना केवल भूमिपुत्रों के अधिकार जो है वो खतरे में पड़ रहे हैं। साथ ही साथ देश की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। यह सवाल उठ रहा है। देखिए इसमें सबसे बड़ी बात है वोट बैंक की राजनीति। वोटों के लिए अभी एसआईआर हुआ बिहार में हम मैं अगर उत्तराखंड की बात करूं तो उत्तराखंड में जितनी पॉ माइग्रेशन माइग्रेटेड पॉपुलेशन है जो 2000 के बाद आई है उनके वोट्स यहां पर भी बने हुए हैं और

17:44 उनके वोट सबके एडज्जॉइनिंग डिस्ट्रिक्ट में उत्तर प्रदेश में भी बने हुए हैं। वो दोनों जगह चुनाव में जाके वोट करते हैं। अब क्या यह हमारा भारतीय संविधान इस चीज़ को अलाऊ करता है? लेकिन राजनीतिक लोगों के लिए जिनके लिए एक विशेष वर्ग जो है वह वोट बैंक की राजनीति के लिए एक उनका वोट बैंक है तो उन्हें ये चीज पसंद आती है। वो खुलेआम बोलते हैं। तो मेन चीज देहरादून शहर अगर हम देहरादून शहर की बात करें तो अह राज्य निर्माण से पहले देहरादून शहर कितना अ खूबसूरत शहरों में देश की गिनती होती थी। आज आप देखेंगे जितने नाले खाले हैं वहां पर सब माइग्रेटेड पॉपुलेशन आकर बस चुकी है। अंग्रेजों के बसाए हुए किसी भी शहर में आज तक पहाड़ में आपदाएं नहीं

18:30 आई हैं। कहीं पे भी बड़े सोच विचार के बसाए गए और अब जो अनप्लैंड वसीयत हो रही है उसके कारण से आप देखिए धलाली जैसी और कैसे-कैसे आपदाएं वो हमें झेलनी पड़ रही हैं। तो इस चीज की का इंपैक्ट डेमोग्राफिक चेंज का हर परिस्थिति में हर व्यक्ति को पड़ता है। जीवित रहने के लिए तीन चीजों की आवश्यकता है। व्यक्ति को सांस लेने के लिए शुद्ध हवा, खाने के लिए शुद्ध भोजन, पीने के लिए शुद्ध जल और इस देश में अब ये तीनों ही नहीं मिलती। हमारा आर्टिकल 21 राइट टू लाइफ उसका रोज हनन होता है और उस पर भारत के न्यायालयों की सर्वोच्च न्यायालयों की किसी की कोई नजर नहीं है। तो इन सारी चीजों को देखते हुए हम

19:16 बेरोजगारी की बात करते हैं। अ क्यों? क्योंकि सबको सरकारी नौकरियां चाहिए। आबादी को कंट्रोल करने की बात कोई नहीं करता। हम अच्छी शिक्षा की बात करते हैं। आप देखिए आज मैं एक बयान सुन रहा था। अ एक मौलाना बोल रहे थे कि सब लोग शिक्षित हो जाएंगे तो जनसंख्या अपने आप नियंत्रित हो जाएगी। अगर हम 1901 को देखें तो 1901 में सेक्स रेश्यो हमारा 19 972 था। 1000 पुरुषों पे 972 महिलाएं थी और 2011 के सेंसस में जब हम पढ़ लिख लिए साक्षर हो गए। 943 हो गए घट के। तो इन चीजों को भी एड्रेस करने की जरूरत है। शिक्षित होना जरूरी है। सिर्फ साक्षर

20:02 होने से काम नहीं चलता। शिक्षित होने से भी ज्यादा जो है जो वोट बैंक की राजनीति है डॉक्टर सिंह वो घातक सिद्ध हो रही है। हो सकता है आप सत्ता में आ जाए। लेकिन जब देश बचेगा, राष्ट्र बचेगा तभी तो आप सत्ता पर काबिज होंगे या फिर शासन कर पाएंगे। सबसे बड़ी दिक्कत तो यही है कि अ एक खुफिया रिपोर्ट भी है। केवल जो है सत्ता पक्ष और विपक्ष की बात नहीं है। अपनी-अपनी डिमांड्स नहीं कर रहे हैं। लेकिन जो है इंटेलिजेंस रिपोर्ट भी यह है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई जो हमारे सीमावर्ती राज्य हैं वहां पर एक ग्रीन बेल्ट तैयार कर रहा है। जो हम देख रहे हैं कुछ तोड़क कारवाई उत्तर प्रदेश में चल रही है। वह ग्रीन बेल्ट जो अह कृत्रिम रूप से तैयार की गई है एक

20:48 षड्यंत्र के तहत वहां पर वह तोड़क कारवाई शुरू भी हुई है। वह एक खतरा है पूरे देश के लिए। क्या यह बात जो है सत्ता पक्ष और विपक्ष को छोड़कर देश को जो है अपने मध्य में रखकर अगर सोची जाए तो कितनी महत्वपूर्ण है ये बात? जी आपने बिल्कुल जेन्युइन बात कहा है। अनफॉर्चूनेटली हमारी कंट्री में कुछ ऐसे पॉलिटिशियन का उदय हो गया है जो ये नहीं सोच पा रहे हैं। जनता पूरी बात समझती है। इवन कम पढ़ा लिखा आदमी भी ये बात समझता है कि इसके डेंजर्स क्या क्या है। लेकिन इसके बावजूद भी अपने को सत्ता में वापस पाने के लिए वो किसी भी हद तक डिस्कशन के लिए जा सकते हैं। और यही कारण है कि जो हमने रोहंगिया और बांग्लादेश इललीगल

21:34 माइग्रेंट्स जो ओरिजिनली कंसंट्रेटेड थे फाइव स्टेट्स में आज बढ़ के करीब 11 स्टेट्स में हो गए हैं और जो 21 डिस्ट्रिक्ट की हमने बात किया मैं नाम लेना पसंद नहीं करूंगा एथिकली वो करेक्ट नहीं होगा वो इस समय करीब करीब 50 के आसपास डिस्ट्रिक्ट ऐसे हो गए हैं जहां पर वो पिटिकल वोलिटी क्रिएट करने की स्थिति में हैं। पॉलिटिकल अनरेस्ट क्रिएट करने की स्थिति में है। चाहे वो सीए और एनआरसी का मामला हो या पिछले साल वक्त कानून के पास होने के बाद की सिचुएशन हो वो चीजें हैं। लेकिन आप जिस टॉपिक पे हम लोग मूल रूप से डिस्कशन कर रहे हैं। न्यू पपुलेशन पॉलिसी

22:20 उसका क्रक्स होना चाहिए मेरे एस अ एकेडमशियन नेशनल पपुलेशन ह्यूमन ह्यूमन कैपेसिटी कमीशन ह्यूमन कैपेसिटी कमीशन जब तक हम इसको एक कमीशन बना करके और इंटरमिनिस्ट्रियलियल लिंकेजेस नहीं डेवलप करते चाहे वो हेल्थ हो एजुकेशन हो अर्बन डेवलपमेंट हो या लेबर मिनिस्ट्री हो या सोशल जस्टिस एंड एमावरमेंट मिनिस्ट्री हो। ये सिक्स सेवन जो की मिनिस्ट्रीज है जो पपुलेशन से डील करती है या जो इवन वास मिनिस्ट्री जो क्लाइमेट रेिलियंस के लिए ध्यान रखते हैं तब तक हमारे पास 2047 तक डेवलप्ड कंट्री

23:07 बनने में बहुत सारे ऑब्सकल दिख रहे हैं। जी एक मैं एक एक क्योंकि समय समाप्त हो रहा है। एक टिप्पणी आप दोनों से चाहूंगा। वैसे तो हम देख रहे हैं कि घुसपैठियों के भी आधार बनाए जा रहे हैं। उनके कागजात तैयार किए जा रहे हैं। अगर आधार को क्योंकि बहुत सारे देश ऐसे हैं जहां पर आपकी जो है नागरिकता का प्रमाण के लिए एक जो है विशेष आइडेंटिटी कार्ड बनाया जाता है। क्या आधार पर सख्ती बरत कर थोड़ा सा उसको एक जो है नेशनलिटी का एक कार्ड एक सिंबल बना दिया जाए तो क्या कुछ बदलाव आ सकता है या कुछ ऐसी दूसरी पहल की जाए? सर अगर उसके विरोध करने वाले लोग आपके और हमारे पहल के विरोध करने वाले लोग अगर इस

23:53 चीज की परवाह नहीं करते कि लोग क्या कहेंगे कंट्री मैन क्या कहेंगे तो उनको समझाना बड़ा मुश्किल है। वन वन नेशन वन कार्ड की बात फाइव इयर्स पहले ऑनरेबल अमित शाह जी ने किया था। वन नेशन वन कार्ड की बात ओके लेकिन प्रॉब्लम यह है कि आधार डाटा हमारा इतना प्रॉब्लमेटिक हो गया है इस समय ओके अब मैंने मैं खुद एक रिसर्च किया था क्रॉस बॉर्डर माइग्रेशन एंड एचआईवी जिसके लिए हमें नेपाल बांग्लादेश भूटान श्रीलंका हर एक कंट्री को विजिट करना पड़ा था और बांग्लादेश से आते समय हमने सारे बॉर्डरिंग एरिया बेनापोल पेड्रापोल जहां क्रॉस बॉर्डर मोबिलिटी होती है उस पूरे पूरे प्रोसेस को भी स्टडी

24:39 किया और रिसर्च के तौर पर उसको पब्लिश भी किया।क में कम से कम दो ऐसे हॉट स्पॉट्स है जहां पर सारे के सारे बांग्लादेशी है और उनके पास मेरे और आपसे ज्यादा डॉक्यूमेंट है। वेस्ट बंगाल के फाइव डिस्ट्रिक्ट ऐसे हैं। चाहे मुर्शिदाबाद हो, मालदा हो, नॉर्थ दिनाजपुर हो, साउथ परगना 24, नॉर्थ 24 परगना। लेकिन ऐसे लोगों की जो राजनीतिक रूप से सहयोग करते हैं या फिर उनका बचाव करते हैं। वह कहीं ना कहीं देश की और हम सब की सुरक्षा को वो ताक पर रख रहे हैं। वो खतरे में डाल रहे हैं। ये बात साफ हो जाती है और निष्कर्ष यही निकलता है। जन सांख्यिकी असंतुलन केवल जनसंख्या का प्रश्न नहीं है। यह सामाजिक स्थिरता,

25:24 आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा तीनों के लिए खतरा बन सकता है। इसलिए आवश्यक है कि भारत में जनसंख्या नियंत्रण और शिक्षा पर जोर दिया जाए। सीमाओं की निगरानी और नागरिकता पहचान तंत्र को मजबूत किया जाए और राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सौहार्द को बढ़ाने का प्रयास किया जाए। आप दोनों हमारे कार्यक्रम से जुड़े इसे विशेष बनाया। बहुत-बहुत धन्यवाद। इनसाइट में आज के लिए इतना ही। इनसाइट में आपसे फिर भेंट होगी एक नए विषय के साथ। फिलहाल मुझे आज्ञा दीजिए। बने रहिए संसद टीवी के साथ। नमस्कार। [संगीत]

26:28 संसद टीवी के और भी प्रोग्राम्स देखने के लिए सब्सक्राइब करें हमारा YouTube चैनल और हां इन्हें लाइक और शेयर करना ना भूलें। भूलें।

Share

YouTube Video Summaries