0:00 जनवरी 1841 की एक बर्फीली रात अमेरिका के इलनॉइस शहर का एक छोटा सा अंधेरा [संगीत] कमरा। उस कमरे के अंदर एक 31 साल का लंबा सूखा हुआ आदमी फर्श पर घुटनों के बल बैठा कांप रहा था। उसके दोस्तों [संगीत] ने उस कमरे से हर एक चाकू, हर एक ब्लेड और यहां तक कि दाढ़ी बनाने वाला उस तरह भी छुपा दिया था। क्योंकि उन्हें पक्का यकीन था कि अगर आज रात इस आदमी को 5 मिनट के लिए भी अकेला छोड़ा गया तो यह अपने ही हाथों से अपनी गर्दन काट लेगा। उस रात [संगीत] उस आदमी ने अपने दोस्त की आंखों में देखते हुए और रोते हुए एक ऐसी बात कही जो आज भी इतिहास के पन्नों को सुन्न कर देती है। उसने कहा इस धरती पर आज की तारीख में मुझसे ज्यादा दुखी और अभागा इंसान कोई
0:47 दूसरा नहीं है। अगर मेरे सीने के अंदर जो दर्द अभी जल रहा है उसे पूरी इंसानियत में बराबर बांट दिया जाए तो इस पूरी पृथ्वी पर एक भी हंसता हुआ चेहरा नहीं बचेगा। जरा सोचिए। जिस आदमी के पास से उसके दोस्तों को चाकू और ब्लेड छुपाने पड़े थे। ठीक 20 साल बाद उसी आदमी ने दुनिया के सबसे ताकतवर देश की कमान संभाली। अपने देश के इतिहास की सबसे खूनी जंग लड़ी और 40 लाख इंसानों की गुलामी की बेड़ियां हमेशा के लिए तोड़ दी। मैं आपको अभी वार्निंग दे रहा हूं। आज का यह वीडियो आपके दिमाग की नसों को हिला कर रख देगा। अगर आपने अगले 10 से 15 मिनट मेरी एक-एक बात को ध्यान से सुन लिया तो आज के बाद आपकी जिंदगी में आने वाली कोई भी हार, कोई भी गरीबी, कोई
1:34 भी धोखा या कोई भी दर्द आपको डरा नहीं पाएगा। कहानी शुरू होती है केंटकी के जंगलों में बनी एक कमरे की कच्ची झोपड़ी से। जहां ना कोई खिड़की थी और ना जमीन पर पक्का फर्श। जब अब्राहम लिंकन सिर्फ 9 साल के थे तो एक जहरीली बीमारी ने उनकी मां नसी की जान ले ली। 9 साल के उस बच्चे ने अपने पिता के साथ मिलकर जंगल से लकड़ियां काटी। अपने हाथों से अपनी मां का ताबूत ठोका और उन्हें मिट्टी में दफनाया। लेकिन असली नर्क तो मां के जाने के बाद शुरू हुआ। लिंकन के पिता थॉमस लिंकन एक अनपढ़, बढ़ई और मजदूर थे। उन्हें किताबों से सख्त नफरत थी। जब भी नन्हा अब्राहम कोयले के टुकड़े से लकड़ी के तख्तों पर कुछ लिखने की कोशिश
2:20 करता या कोई किताब खोलता तो उसका पिता उसे कामचोर समझकर चमड़े की बेल्ट और लकड़ी के डंडों से तब तक पीटता था जब तक उसकी पीठ से खून ना निकल आए। पिटाई के बाद भी उस लड़के की भूख नहीं मरी। एक बार 19 साल की उम्र में लिंकन ने पास के एक कंजूस किसान से जॉर्ज वाशिंगटन की बायोग्राफी किताब पढ़ने के लिए उधार मांगी। रात भर लिंकन ने भट्टी की मध्यम रोशनी में वह किताब पढ़ी और सोने से पहले उसे झोपड़ी की लकड़ी की दीवारों के बीच फंसा दिया। उस रात भयंकर तूफान आया। दीवारों की दरारों से बारिश का पानी अंदर घुसा और किताब के पन्ने भीग कर खराब हो गए। अगली सुबह जब लिंकन वह भीगी हुई किताब लेकर उस किसान के पास गया तो किसान भड़क उठा और बोला। तुम्हारे पास
3:08 पैसे तो है नहीं। अब इस किताब की कीमत तुम्हें अपनी चमड़ी घिसकर चुकानी होगी। पता है लिंकन ने क्या किया? तपती हुई धूप में लगातार तीन दिनों तक उस किसान के पूरे खेत से मक्के के सूखे डंठल उखाड़े। उसके हाथों में छाले पड़ गए। छाले फूट कर खून बहने लगा। लेकिन तीसरे दिन की शाम को जब उसने वह फटी हुई किताब अपने सीने से लगाई, तो उसके चेहरे पर एक राजा जैसी मुस्कान थी। इससे भी भयानक बात यह थी कि उस दौर के कानून के मुताबिक 21 साल की उम्र तक बेटे की कमाई पर पिता का हक होता था। थॉमस लिंकन [संगीत] अपने ही बेटे को आसपास के जमींदारों के यहां जानवरों की तरह किराए पर मजदूरी करने भेज देता था। अब्राहम दिन भर कुल्हाड़ी चलाता, जमीन जोतता और शाम को
3:55 सारा पैसा उसका बाप छीनकर अपनी जेब में रख लेता। तभी अब्राहम को पता चला कि नदी के उस पार के गांव में एक रिटायर्ड जज और वकील रहते हैं। जिनके घर में कानून और इतिहास की सैकड़ों किताबें रखी हैं। उन दिनों हड्डियां जमा देने वाली कड़ाके की ठंड पड़ रही थी और नदी के पानी पर बर्फ की मोटी चट्टाने तैर रही थी। लेकिन उस लड़के के सिर पर पड़ने का ऐसा जुनून सवार था कि उसने अपने हाथों से बनाई हुई लकड़ी की एक छोटी सी नाव उस बर्फीली नदी में उतार दी। आधी नदी पार करते ही उनकी नाव बर्फ के एक बड़े टुकड़े से टकराई और बीच नदी में टूट कर डूब गई। कोई दूसरा इंसान होता तो जान बचाकर वापस लौट जाता। लेकिन अब्राहम ने उस जमी हुई बर्फीली नदी में छलांग लगा दी।
4:40 ठंड से हाथ पैर सुन्न पड़ रहे थे और सीना फट रहा था। फिर भी वह तैरते हुए नदी के दूसरे किनारे पहुंचे। और भीगे हुए कपड़ों में कांपते हुए उस रिटायर्ड जज के दरवाजे पर जा खड़े हुए। जज ने दरवाजा खोला तो अब्राहम ने कहा साहब मुझे अपने घर में नौकरी दे दीजिए। जज ने पूछा क्या काम करोगे? तो अब्राहम बोले कि झाड़ू पोछा लगाऊंगा जंगल से लकड़ियां बिन कर लाऊंगा और आपके घर का सारा पानी भरूंगा। जज ने पूछा कि पगार क्या लोगे? तो उस गरीब लड़के ने जवाब दिया। मुझे एक पैसा नहीं चाहिए। बस आपके घर में जो किताबें रखी हैं, मुझे उन्हें पढ़ने की इजाजत दे दीजिए। उस समय जज के घर का नौकर छुट्टी पर था इसीलिए जज
5:26 मान गए। अमेरिका का होने वाला राष्ट्रपति उस वकील के घर में झाड़ू पोछा लगाता था। फर्श पर सोता था और रात भर जागकर उन्हीं किताबों से वकालत की पढ़ाई करता था। 21 साल की उम्र में जब लिंकन ने आखिरकार अपने पिता का घर छोड़ा तो उसकी जेब में एक फूटी कौड़ी नहीं थी। पहनने के लिए घुटनों से ऊंची फटी हुई पट थी और सिर पर सिर्फ एक जिद थी। आज हम में से ज्यादातर लोग अपनी नाकामी का ठीकरा अपने मां-बाप, अपने गरीब घर या अपने हालातों पर फोड़ देते हैं। मेरे पापा ने मुझे सपोर्ट नहीं किया। मेरे पास पैसे नहीं थे। मेरे पास महंगी कोचिंग नहीं थी। कान खोलकर सुन लीजिए। आपका दर्द जायज हो सकता है लेकिन आपकी लाचारी आपकी
6:13 जिम्मेदारी है। लिंकन को उसके अपने सगे बाप ने [संगीत] 21 साल तक एक मजदूर बनाकर रखा और किताब छूने पर मारा। लेकिन जिस इंसान के अंदर आगे बढ़ने की असली भूख होती है, वह रिसोर्सेज का रोना नहीं रोता। हालात आपको तब तक नहीं हरा सकते जब तक आप खुद अपने हालातों को अपनी हार का बहाना ना बना लें। 21 साल की उम्र में घर छोड़ने के बाद लिंकन न्यूसलेम नाम के एक छोटे से गांव में पहुंचे। वहां उन्होंने अपनी जिंदगी बदलने के लिए एक छोटा सा जनरल स्टोर खोला। इसके लिए उन्होंने भारी कर्ज लिया। लेकिन किस्मत ने उनके मुंह पर पहला तमाचा मारा। 1833 में उनका बिजनेस पूरी तरह डूब गया। उनका पार्टनर विलियम बेरी शराब पी पी कर
6:59 मर गया और सारा का सारा कर्ज अकेले लिंकन के सिर पर आ गिरा। हालत इतनी बदतर हो गई कि कर्ज वसूलने वालों ने लिंकन पर केस कर दिया। पुलिस के शेफ ने आकर लिंकन का इकलौता घोड़ा और जमीन नापने के उनके औजार तक जब्त कर लिए जिनसे वह अपनी रोजी रोटी कमाते थे। उस वक्त कोई भी आम इंसान शहर छोड़कर भाग जाता या खुद को दिवालियां घोषित कर देता। लेकिन लिंकन ने कर्ज देने वालों की आंखों में देखकर कहा मैं भागूंगा नहीं। चाहे मुझे आधी जिंदगी भूखा रहना पड़े। मैं पाईपाई चुकाऊंगा। और अगले 15 सालों तक अपनी कमाई का हर हिस्सा काट काट कर उन्होंने वह कर्ज उतारा। लेकिन कुदरत को अभी उनका और इम्तिहान लेना था। उसी गांव में लिंकन की
7:47 जिंदगी में एक लड़की आई एनटलिज। नीली आंखें, सुनहरे बाल और बेहद शांत स्वभाव। गरीबी और कर्ज के नरक में जी रहे लिंकन के लिए एन्रुटलज जीने की इकलौती वजह बन गई थी। दोनों ने सगाई कर ली। पहली बार लिंकन को लगा कि शायद भगवान को उन पर तरस आ गया है। तभी अगस्त 1835 की गर्मियों में गांव में टाइफाइड की बीमारी फैली। सिर्फ 22 साल की एन रुटलेज बिस्तर पर पड़ गई। लिंकन काम धंधा छोड़कर पागलों की तरह उसके बिस्तर के पास बैठे रहते। लेकिन 25 अगस्त 1835 को एन ने लिंकन के हाथों में दम तोड़ दिया। एन की मौत और उसके बाद 1841 के संकट ने लिंकन को उस मोड़ पर ला खड़ा किया जहां
8:33 उनके दोस्तों को उनके कमरे से चाकू और उस तरह हटाने पड़े। लोग कहते थे कि लिंकन अब खत्म हो चुका है। उसका दिमाग खराब हो चुका है। वह अब कभी कुछ नहीं कर पाएगा। लेकिन उसी अंधेरे कमरे में मौत के मुंह से वापस लौटते वक्त लिंकन के अंदर एक ऐसी सोच पैदा हुई जिसने उन्हें आम इंसानों से कोसों ऊपर उठा दिया। उन्होंने अपने दोस्त जोशुआ स्पीड से कहा मैं अब भी मरने के लिए तैयार नहीं हूं। मैं इस धरती से तब तक नहीं जाऊंगा जब तक मैं अपने नाम को इतिहास की किसी ऐसी महान घटना से ना जोड़ दूं जो करोड़ों इंसानों के काम आए। हम सबको सिखाया जाता है कि हमेशा खुश रहो। पॉजिटिव सोचो। दुख और उदासी कमजोरी की निशानी है।
9:19 यह दुनिया की सबसे बड़ी गलतफहमी है। लिंकन का गहरा दुख और उदासी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी। क्योंकि जिस इंसान ने खुद अपनी आंखों के सामने अपना सब कुछ लुटते देखा हो। जिसने रातों को रोकर अपना सिर दीवारों पर पटका हो, वही इंसान दूसरों के दर्द को सबसे गहराई से समझ सकता है। अब जरा इस घटना को सुनिए क्योंकि यह घटना आपके अहंकार और आपके गुस्से को हमेशा के लिए काबू करना सिखा देगी। 1855 का साल था। अमेरिका के सिंसिनाइटी शहर में एक बहुत बड़ा कानूनी मुकदमा चल रहा था। मैकोरम्मिक रीपर केस। इस केस में देश के सबसे महंगे और पढ़े लिखे वकीलों की टीम में शामिल था एडविन
10:04 स्टटन और उसी टीम में एक छोटे से शहर के वकील के तौर पर अब्राहम लिंकन को भी बुलाया गया था। लिंकन ने इस केस के लिए महीनों तक रात दिन जागकर सैकड़ों पन्नों की तैयारी की थी। वह अपना सबसे अच्छा कोट पहनकर अदालत पहुंचे। लेकिन उनका वह सबसे अच्छा कोट भी पसीने के दागों से भरा था। उनकी पैंट टखनों से ऊपर थी और उनके हाथ में एक पुराना सा छाता था। [संगीत] जब बड़े शहर के रईस वकील एडविन स्टटन ने लिंकन को देखा तो उसने भरी अदालत में सबके सामने लिंकन की तरफ उंगली उठाकर नफरत से कहा, इस लंबे हाथों वाले लंगूर को यहां किसने बुलाया? इसका पहनावा देखो। अगर यह आदमी मेरे साथ इस मेज पर बैठेगा तो मैं अभी यह
10:51 केस छोड़ दूंगा। स्टटन ने लिंकन की महीनों की मेहनत से तैयार की गई फाइल को छूने तक से इनकार कर दिया। लिंकन को भरी अदालत में बोलने तक नहीं दिया गया। लिंकन चुपचाप कोने में खड़े होकर अपनी बेइज्जती सुनते रहे। इतना ही नहीं आगे चलकर जब लिंकन राजनीति में आए तो एक बार सीनेट में एक रईस खानदानी आदमी ने खड़े होकर लिंकन का मजाक उड़ाते हुए कहा, "मिस्टर लिंकन, अपनी औकात मत भूलिए। आपके पिता मेरे परिवार के लिए काम किया करते थे। हमारे जूते और लकड़ी का सामान ठीक किया करते थे। पूरी सभा हंस पड़ी। सबको लगा कि आज लिंकन शर्म से जमीन में गढ़ जाएंगे। लेकिन लिंकन ने अपनी जगह से खड़े होकर उस आदमी की आंखों में आंखें डाली और बिल्कुल शांत आवाज में
11:39 कहा। महोदय मैं जानता हूं कि मेरे पिता आपके परिवार के लिए और यहां बैठे कई और रईसों के लिए काम करते थे। क्योंकि मेरे पिता जो काम अपने हाथों से करते थे, वह पूरे इलाके में कोई दूसरा नहीं कर सकता था। वह अपने काम में अपनी पूरी आत्मा डाल देते थे। आज तक किसी ने उनके काम में एक भी कमी नहीं निकाली। मुझे अपने उस मजदूर पिता पर गर्व है। और अगर आपके जूते या सामान में आज भी कोई दिक्कत हो तो बताइए। मैं खुद अपने हाथों से उसे ठीक कर सकता हूं। क्योंकि वह हुनर मैंने भी अपने पिता से सीखा है। पूरे हॉल में सन्नाटा छा गया। उनकी ईमानदारी के किस्से पूरे इलाके में फैल गए थे। वहां के गरीब लोगों की तकलीफें देखकर उन्होंने राजनीति में उतरने का
12:26 फैसला किया और साल 1832 में इलनॉइस राज्य विधानसभा का अपना पहला चुनाव लड़ा। चुनाव लड़ने के चक्कर में पोस्ट मास्टर की नौकरी भी छूट गई। जेब के सारे पैसे खत्म हो गए। और जब चुनाव का नतीजा आया तो वह बुरी तरह हार गए। एक बार लिंकन का एक दोस्त अपनी जिंदगी की एक हार से निराश होकर उनके पास बैठा रो रहा था। लिंकन ने बिना कुछ बोले बोर्ड पर चौक से अपनी जिंदगी का हिसाब लिखना शुरू किया। उन्होंने लिखा कि कैसे वह 21 साल की उम्र में पिता से अलग हुए। 1832 में चुनाव हारे और नौकरी गई। 1833 में व्यापार ठप हो गया। 1835 में प्रेमिका की मौत हो गई। 1836 में डिप्रेशन हुआ।
13:14 1838 में विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव हारे। 1843 में पार्टी से टिकट नहीं मिला। 1848 में दोबारा टिकट कटा। 1855 में सीनेट का चुनाव हारे। 1856 में उपराष्ट्रपति का नॉमिनेशन हारे। और 1858 में स्टीफन डगलस के खिलाफ सीनेट का चुनाव फिर हार गए। बोर्ड पर लिखी यह लंबी लिस्ट देखकर उनके दोस्त के चेहरे पर चमक आ गई क्योंकि उसने समझ लिया कि जो इंसान 30 साल तक हर बार गिर कर उठ सकता है [संगीत] उसे दुनिया की कोई ताकत नहीं हरा सकती और आखिरकार 6 नवंबर 1860 को वही इंसान अमेरिका का 16वां राष्ट्रपति बन गया।
14:00 देश में गृह युद्ध छिड़ चुका था। लिंकन को अपने देश की सेना संभालने के लिए एक युद्ध मंत्री की जरूरत थी। [संगीत] और जानते हैं लिंकन ने उस सबसे ताकतवर कुर्सी के लिए किसे चुना? उसी एडविन स्टटन को। वही स्टटन जिसने भरी अदालत में लिंकन को गोरिल्ला और लंगूर कहकर बाहर निकाल दिया था। जब लिंकन के दोस्तों ने सुना तो वे चीख पड़े। अब्राहम क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है? उस आदमी ने पूरी दुनिया के सामने तुम्हारी बेइज्जती की थी। आज तुम्हारे हाथ में राष्ट्रपति की ताकत है। उसे कुचल दो। उसे अपने कैबिनेट में क्यों रख रहे हो? तब लिंकन ने जो जवाब दिया उसे इतिहासकार डोरिस गुडविन ने अपनी किताब टीम ऑफ
14:45 राइवल्स में दर्ज किया है। लिंकन ने कहा हां उस आदमी ने मेरी बेइज्जती की थी। उसने मेरे स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई थी। लेकिन आज मेरे देश को बचाने के लिए पूरे अमेरिका में उससे बेहतर कोई दूसरा दिमाग नहीं है। मैं अपने छोटे से अहंकार को अपने बड़े मकसद के आड़े नहीं आने दे सकता। और पता है इसका अंजाम क्या हुआ? वही एडविन स्टटन जो लिंकन से नफरत करता था। लिंकन के साथ काम करते-करते उनका सबसे बड़ा भक्त बन गया। छोटे दिमाग वाले लोग अपनी बेइज्जती का बदला चिल्लाकर या लड़ कर लेते हैं। जबकि बड़े दिमाग वाले लोग अपनी बेइज्जती को अपनी सीढ़ी बना लेते हैं। जब कोई आपकी औकात पर सवाल उठाए, आपके कपड़ों पर हंसे या आपके खानदान का मजाक उड़ाए तो वहां
15:31 चीखने चिल्लाने में अपनी ताकत मत गवाइए। पानी की वजह से जहाज कभी नहीं डूबता। जहाज तब डूबता है जब पानी जहाज के अंदर घुस जाता है। लिंकन ने यह साबित कर दिया कि लगभग हर इंसान गरीबी और दुख तो झेल लेता है लेकिन अगर किसी इंसान के असली चरित्र की परीक्षा लेनी हो तो उसके हाथ में पावर देकर देखो। जब लिंकन के हाथ में ताकत आई तो उन्होंने अपने सबसे बड़े अपमान करने वाले को भी अपने मकसद के लिए इस्तेमाल कर लिया। जब लिंकन वाइट हाउस में थे तो बाहर पूरा देश खून की नदियों में नहा रहा था और घर के अंदर उनकी अपनी दुनिया उजड़ रही थी। लिंकन के चार बेटे हुए थे। पहले बेटे एड़ी की मौत सिर्फ 3 साल की उम्र में हो गई और फरवरी 1862 में जब युद्ध सबसे भयानक मोड़
16:19 पर था। उनके सबसे प्यारे 11 साल के बेटे विली की वाइट हाउस के अंदर ही बुखार से मौत हो गई। आगे चलकर उनके तीसरे बेटे टैड की भी 18 साल की उम्र में मौत हो गई। चार में से सिर्फ एक बेटा जीवित बचा। एक तरफ लिंकन के 11 साल के बेटे की लाश दूसरे कमरे में रखी थी। उनकी पत्नी मैरी लिंकन सदमे में पागलों की तरह चीख रही थी और दूसरी तरफ अगले ही दिन लिंकन को अपनी आंखों के आंसू पोंछकर सेना के जनरलों के साथ युद्ध की रणनीति बनानी पड़ रही थी। जुलाई 1863 में गेटिसबर्ग की लड़ाई के बाद एक ऐसा मौका आया जब लिंकन की सेना के जनरल जॉर्ज मीड के पास दुश्मन सेना को हमेशा के लिए खत्म करने का मौका था। दुश्मन की सेना
17:06 उफनती हुई पोटोमैक नदी के किनारे फंस गई थी। लिंकन ने जनरल मीड को तुरंत हमला करने का आदेश भेजा। अगर उस दिन मीड ने हमला कर दिया होता तो युद्ध उसी दिन खत्म हो जाता और लाखों सैनिकों की जान बच जाती। लेकिन जनरल मीट डर गया। उसने हमला नहीं किया और दुश्मन की सेना नदी पार करके भाग निकली। जब यह खबर लिंकन को मिली तो उनके सब्र का बांध टूट गया। वह गुस्से से कांपने लगे। उन्होंने तुरंत कागज और कलम उठाई और जनरल मीट को एक बेहद तीखा, कठोर और आग उगलता हुआ खत लिखा। उस खत में लिंकन ने अपने सीने की सारी भड़ास निकाल दी। कि कैसे तुम्हारी एक गलती ने देश को तबाह कर दिया। खत पूरा लिखने के बाद लिंकन रुके।
17:51 उन्होंने एक गहरी सांस ली। उन्होंने सोचा मैं यहां वाइट हाउस की आरामदायक कुर्सी पर बैठा हूं और वह जनरल वहां मैदान में खून और लाशों के बीच खड़ा है। अगर मैंने यह खत आज उसे भेज दिया तो मेरा गुस्सा तो शांत हो जाएगा। लेकिन मेरा जनरल अंदर से टूट जाएगा और शायद इस्तीफा दे देगा। लिंकन ने उस खत को मोड़ा। एक लिफाफे में डाला और अपनी मेज की दराज में बंद कर दिया। आज के द्वार में जब किसी को गुस्सा आता है तो वह 2 सेकंड में फोन उठाता है। मुंह से जहर उगलता है या मैसेज भेजकर सालों के रिश्ते और अपना करियर मिट्टी में मिला देता है। लिंकन की यह आदत हमें सिखाती है। गुस्सा आना इंसान होने की निशानी है। लेकिन उस गुस्से के गुलाम बनकर फैसला लेना मूर्खता है। जब भी कोई आपको हद से ज्यादा
18:39 गुस्सा दिलाए तो अपनी भड़ास कागज पर पूरी ताकत से निकाल दीजिए। लेकिन उसे तुरंत मत भेजिए। उसे 24 घंटे के लिए रोक दीजिए। जो इंसान अपने गुस्से के उबाल को 24 घंटे तक थाम सकता है, दुनिया का कोई भी इंसान उसे अपनी उंगलियों पर नचा नहीं सकता। 9 अप्रैल 1865 को आखिरकार 4 साल का खूनी गृह युद्ध खत्म हो गया। लिंकन जीत गए। अमेरिका टूटने से बच गया और गुलामी का नामोनिशान मिट गया। ठीक 5 दिन बाद 14 अप्रैल 1865 की शाम वर्षों बाद पहली बार लिंकन के चेहरे पर सुकून था। उस शाम उन्होंने अपनी पत्नी मैरी का हाथ थामा और मुस्कुराते हुए कहा मैरी हमने पिछले कई सालों में बहुत दुख देखे हैं। लेकिन अब जंग खत्म हो चुकी है।
19:27 आज से हम दोनों खुश रहने की कोशिश करेंगे। उसी रात फोर्ड थिएटर में नाटक देखते वक्त जब लिंकन एक चुटकुले पर खुलकर हंस रहे थे। ठीक उसी पल जॉन विल्स बूथ ने पीछे से आकर उनके सिर में गोली मार दी। उनके बिस्तर के पास खड़े होकर फूट-फूट कर रोने वाला सबसे पहला इंसान वही एडविन स्टन था। स्टटन ने रोते हुए लिंकन की बंद आंखों को देखा और इतिहास का सबसे अमर वाक्य कहा। नाउ ही बिलोंग्स टू द एजेस। अब यह इंसान युगों युगों के लिए अमर हो गया है। अगली सुबह जब लिंकन ने दुनिया छोड़ी तो डॉक्टरों ने उनकी जेबें खाली की। दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति की जेब से क्या निकला? दो चश्मे, एक छोटा सा जेब चाकू। घड़ी की
20:14 एक टूटी हुई चैन, एक रुमाल जिस पर ए लिंकन खड़ा हुआ था और अखबार की कुछ कतरने जिनमें उनके काम की तारीफ छपी थी। लिंकन हमेशा एक बात कहते थे [संगीत] अगर मुझे एक पेड़ काटने के लिए 6 घंटे दिए जाए तो मैं पहले 4 घंटे अपनी कुल्हाड़ी की धार तेज करने में लगाऊंगा। याद रखिए जिंदगी में हारना कोई जुर्म नहीं है। जुर्म है पहली या दूसरी चोट लगने के बाद मैदान छोड़कर भाग जाना। लिंकन खुद कहते थे मैं बहुत धीरे चलता हूं। लेकिन मैं कभी पीछे की तरफ कदम नहीं रखता। दोस्तों, इतिहास गवाह है कि साइकोलॉजी ही वह सबसे धारदार कुल्हाड़ी है जिससे आप अपनी जिंदगी की हर समस्या, हर डर और हर नाकामी के पेड़ को एक वार में काट
21:00 सकते हैं। लिंकन ने कहा था कि पेड़ काटने से पहले 4 घंटे कुल्हाड़ी की धार तेज करो। लेकिन आज 99% लोग बिना साइकोलॉजी को समझे अंधों की तरह मेहनत कर रहे हैं और अपनी पूरी उम्र बर्बाद कर रहे हैं। सोचिए अगर आज भी आपने अपने गुस्से, अपनी सोशल ए्जायटी और अपनी अंदरूनी कमजोरियों पर काबू नहीं पाया तो आज से 5 साल बाद जब आप आईने में देखेंगे तो आपको वहां सिर्फ रिग्रेट और एक हारा हुआ इंसान नजर आएगा। समय रेत की तरह फिसल रहा है और आपकी हर एक गलती का नुकसान ब्याज की तरह हर रोज बढ़ता जा रहा है। अपनी दिमागी कुल्हाड़ी की धार को दुनिया में सबसे तेज करने के लिए अभी मेरे 70 वीडियोस वाले रियल लाइफ साइकोलॉजी
21:47 कोर्स से जुड़िए। इसमें मैंने आपकी जिंदगी की हर एक प्रॉब्लम का पक्का साइकोलॉजिकल इलाज निचोड़ कर रख दिया है। चाहे वह गहरा फोकस और पीक एनर्जी हासिल करना हो। कम मेहनत में स्मार्ट लोगों की तरह ज्यादा जीतना हो, फीमेल साइकोलॉजी और रिश्तों के सच को समझना हो या अपने टेस्टोस्टेरोन और दिमागी ताकत को टॉप पर पहुंचाना हो। यह मौका दोबारा नहीं मिलेगा। सीटें हर सेकंड भर रही हैं। इसलिए बहाने बनाना छोड़िए और अभी डिस्क्रिप्शन के पहले लिंक पर क्लिक करके इस कोर्स को डाउनलोड कीजिए। बहुत-बहुत धन्यवाद।