0:00 मेरे समय में वीडियो गेम खेलने जाते थे। उनके वीडियो पार्लर्स होते थे तो टोकन देते थे आधे घंटे का 40 [संगीत] मिनट का कि इतनी देर तक खेलोगे और पांच ही मिनट हुए होते थे ऐसा लगता था और वो आके कहता था वो आके कहता भी नहीं था वो सामने आ जाता था टाइम अप गेम ओवर ज्ञान माने जिंदगी भी ऐसे ही बिता देना ज्ञान माने ऐसे जीना कि पता ही ना चले दिन महीने साल दशक और फिर जीवन पूरा कब बीत गया कभी हुआ होगा हल्की सी झलक मिली होगी जब कभी डूबेगे किसी दिली काम में हुआ है ऐसा कोई पूछे सिर्फ इस कहां [संगीत] जा रहे हो? लो मोहब्बत करने। जिंदगी है यार रोज सुबह डेट पे निकलते हैं। अभी सांस लेने की फुर्सत नहीं है कि तुम मेरी बाहों में हो। मैं जवान लोगों से पूछ रहा [संगीत] हूं। अच्छा
0:45 जीवन तो चलो फिर भी थोड़ा लंबा खींचता है। जवानी एक बार जो जाए कहीं तो तुमने जवाब दिया? नहीं पता है तुमसे जवाब कैसे निकलवाना है। कोई घटिया आइटम नंबर बता दो। खट से पूरा कर दोगे। एक बार जो जाए जवानी फिर ना आए। एक दिन यहां एक सफेद बाल दिखाई देगा और वो मौत की पहली आहट है। जवानी जिसको बचा रहे हो क्या वो बच सकती है? आचार्य जी हम आजकल बहुत व्यस्त रहने लगे हैं। मीटिंग्स, डेडलाइंस, सोशल मीडिया पर भीतर से अभी भी बहुत ही ज्यादा सुन्न
1:32 और थके हुए लगते हैं। कभी जिन चीजों से हमें प्यार था जैसे काम, रिश्ते, अपने सपने, वह सब अब बोझ और जिम्मेदारी जैसे लगने लगे हैं। कई लोग तो बस धक्के खाकर या किसी के कहने पर ही काम कर लेते हैं। उनकी अपने अंदर से कोई आग या लगन नहीं होती। बिना किसी इनाम या तारीफ की परवाह किए जिंदगी में फिर वही मोहब्बत और आग कैसे जगा सकते हैं? बोल दिया जाए सैलरी वलरी छोड़ो। काम बहुत प्यारा है। चलो करते हैं। बाकी क्या है? खाने को रोटी और सर छुपाने को छत मिल ही जाएंगे। कितने
2:20 लोग काम करेंगे? और जितने लोग हो जिनका इस संभावना को सुनने से ही दिल दहल गया हो आवाज आई थी यहां तक ऐसे रंबलिंग साउंड गड़ ग ये क्या बोल दिया? ये क्या बोल दिया? वह जान ले कि बहुत समस्या है। जन्म ही व्यर्थ जा रहा है। जन्म ही व्यर्थ जा रहा है। या तो अपना मान लीजिए कि जन्म व्यर्थ है या मान लीजिए कि कृष्ण की शिक्षा व्यर्थ है। क्योंकि उनकी शिक्षा बिल्कुल सपाट कह रही है। काम करो।
3:10 कर्म फल की कोई चिंता नहीं, कोई परवाह नहीं और जो ऐसा हो गया उसको चाहो तो खिलाड़ी बोल दो। उसको चाहो तो प्रेमी बोल दो। जांबाज बोल दो। स्टड बोल दो और चाहे सन्यासी बोल दो। इन दोनों को तो हमने कभी एक साथ नहीं सुना था। सस्ट सन्यासी ऐसे ही है।
3:57 होंगे शब्द अलग-अलग दिशाओं के बहुत अलग दिशाओं और बहुत अलग संदर्भों और बहुत अलग संस्कृतियों से ये दोनों शब्द आ रहे हैं। पर अगर वो एक ही तरफ को इशारा कर रहे हैं तो उनको अलग कैसे माने? कैसे माने? और वास्तव में नायक या हीरो कहलाने का भी अधिकारी वही है। उसको हीरो भी बोल सकते हो। हमने तो कभी ऐसा सोचा नहीं कि मुनि और हीरो बिल्कुल अगल-बगल रखे जा सकते हैं। पर्याय हैं एक ही सांस में कहे जा सकते हैं। बिल्कुल कहे जा सकते हैं। और अगर मुनि तुम्हारा हीरो नहीं है तो तुम्हारा हीरो कौन या फिर लुच्चा वही खनीबाज
4:49 बात समझ में आ रही है जो सच का भी जगत है ना उसमें भीतर तमाम तरह की विविधताएं हो सकती हैं और सच माने तो मुक्ति तो वहां सब तरह की विविधताओं के लिए स्थान है। तुम मुक्त हो। वहां भी अलग-अलग तरह के रंग पहनने के लिए किरदार ओढ़ने के लिए बिल्कुल मुक्त हो। और वह सब रंग सब किरदार एक ही हैं क्योंकि सब के सब सच के हैं। पर जब आप यह बात नहीं समझते तो आप सच को किसी एक खास आवरण से रंग से आचरण से बोलचाल वेशभूषा
5:40 पंथ धारा भाषा आदि से जोड़ लेते हो। सच अगर किसी से अनिवार्यत जुड़ा हुआ है तो वह है अपने प्रति ज्ञान और कर्म के प्रति प्रेम से और किसी से नहीं सच जुड़ा हुआ। खुद से पहचान है। और काम से आशिकी है।
6:29 पूछे सिर्फ उस कहां जा रहे हो? लोग मोहब्बत करने। जिंदगी है यार। रोज सुबह डेट पे निकलते हैं। हम और जब दिन भर चली है तो रात में भी कौन चाहता है कि खत्म हो जाए। रातें तो होती है। इश्क जवान होता है रातों में। झुन्नू संसारी हैं। 10:00 बज गए सोने दो। 7:00 बज गए और कितना काम कराओगे?
7:20 ध्यान रखना दो चार लुढ़क ना जाए। मैं ऐसे देख रहा हूं सही। मैं जी रहा हूं और यूं ही नहीं जी रहा हूं। मेरी हर सांस में मोहब्बत है। मेरी हर धड़कन में आशिकी है। अनंत प्रेम ऐसा प्यार जो परिणाम मांगता ही नहीं सुध ही नहीं ले सकता परिणाम की बोले क्या होगा आगे पता नहीं क्या होगा आगे जो भी होगा यह बाहें हैं ये बाजू इनसे हम काम करते
8:05 हैं क्या करते हैं काम अब एक साधारण सा फिल्मी गीत है अब समझो उसके अर्थ कितने बदल जाते ठीक है? इन हाथों से काम करते हैं ना। हम यही तो बोलते हैं। हम काम करते हैं। हम श्रमिक हैं इनसे। अभी सांस लेने की फुर्सत नहीं है कि तुम मेरी बाहों में हो। मुझे आई बात इसके लिए बात ये सारी। जो कर रहे हैं उसके लिए सांस लेने की फुर्सत नहीं है और ऊपर ऊपर से भले दिखा दें कि अरे यार काम अच्छा काम ज्यादा है इतनी चिढ़ लग रही है तो मत करो ना जैसे प्रेमी रूठते हैं एक दूसरे के अच्छा हम इतने ही बुरे हैं तो मत आना हमारे पास तो ऊपर ऊपर से चिढ़ भी दिखा सकते हो
8:51 बीच-बीच में पूरी छूट है अरे यार झुंझला रहे हैं बहुत काम हो गया हमें नहीं करना हम पूरा दिन यही यही करते रहते हैं इतना बुरा लग रहा है तो मत करो। मैं इतनी ही बुरी हूं तो वहां रहना। अब इधर मत आना। तोड़ सकते हो तो छोड़ दो। और छोड़ सकते हो तो हम कह रहे हैं छोड़ ही दो। जो चीज छोड़ी जा सकती हो उसको जो पकड़ करके बैठा हो घटिया इंसान है। कुछ आ रही है बात समझ में
9:37 और कितना व्यापक है सच का क्षेत्र उसके लिए श्री कृष्ण आगे और विस्तार से और सफाई से दुगना जोर देकर बताए देते हैं कि अच्छा सुनो जो काम में डूबा हो उसी को मानना योगी सन्यासी ऋषि प्रेमी नायक सब कुछ नेता सब उसी को मानना अपना उनको मत मान लेना किनको ये जो लगे हुए हैं लगे हुए हैं कि जल्दी से वैल्यू्यूएशन 3x कर दें फिर एग्जिट ले लेंगे ये कितनी भी मेहनत कर रहे हो इनको सम्मान मत दे देना इनको सम्मान मत दे देना
10:27 आग होनी होनी चाहिए जो यज्ञ में खुद को ही अर्पित करे दे रहा हूं उस आग की मैंने आहुति बनकर देखा यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है जिसमें वो आग हो वो है योगी वो नहीं कि वहां बैठ गए हैं और पेट अंदर बाहर कर रहे हैं उससे योगी नहीं हो जाते पेट अंदर बाहर करने से तुम कुछ और बोल देंगे तुमको योगी थोड़ी हो जाओगे। कृष्ण है योगेश्वर। तो हमने तो नहीं देखा कि
11:14 समझ में आ रही है बात? घोर सक्रियता और जिसको पाओ कि हाथ पांव नहीं हिलते हैं। काम नहीं करा जा रहा। जिनको किसी भी हालत में मान मत लेना कि यह सही केंद्र से जिंदगी जी रहे हैं। जो सही केंद्र से जिंदगी जी रहा हो उसकी जिंदगी में आग ना हो और सक्रियता ना हो यह संभव नहीं है। जो आदमी सही जिंदगी जी रहा होगा वो तूफान की जिंदगी जी रहा होगा। मैंने एक बार कहा था उसकी जिंदगी ऐसे होगी जैसे कोई मोमबत्ती दोनों सिरों पर जल रही है। उसको प्रकाश से इतना प्यार है कि वो अपने मिटने की परवाह नहीं कर रही।
11:59 अरे इधर से भी जलूंगी, इधर से भी जलूंगी। कौन इंतजार करे कि धीरे-धीरे पिघलूंगी? यह होती है सक्रियता। आप किसी को कहें हम तो सब जान गए हैं। ब्रह्मज्ञ हैं। वहां कोने में पड़े हुए हैं। नहीं देखो हमें यह दुनिया की खुराफात से कोई मतलब नहीं। हमें आखिरी सत्य का पता चल चुका है और हम अपने आप कोने में पड़े रहते हैं। तू कुछ नहीं है। तू कुछ नहीं है। कैसा आदमी होगा वो जिसको सच दिखने लगा है। और वो अभी भी अपनी आदत, आलस और सुरक्षा के
12:47 घेरे में कैद है। कह रहा है नहीं देखो अपना भी तो देखना पड़ता है ना मतलब ठीक है थोड़ा सोच समझ के देखो रखना पड़ता है ऐसे नहीं होता कि हां सच वगैरह है हम स्वीकारते हैं मतलब देखेंगे जल्दबाजी शैतान का काम है भाई 100 200 साल कम से कम थोड़ा देखने लो परखने दो धीरज धरो वो इतना कबीर साहब की बात करते हैं तो उन्होंने ही तो बोला धीरेधीरे रे मना [हंसी]
13:32 धीरेधीरे बापू जी कितना धीरेधीरे हालत देखो अपनी 6 महीना नहीं 2 साल नहीं तो 4 साल इससे ज्यादा तुम चलने नहीं हो और जो जवान है वो 10 से गुणा कर लें वो 10 20 साल चल जाएंगे नहीं तो 40 कितना धीरे-धीरे और ये तुम्हारी सावधानी नहीं है। ये तुम्हारी कायरता है। कोई मात्र सावधानी के लिए धीरे-धीरे हो तो माफी है। तुम्हें सावधानी वाली कोई बात
14:19 नहीं है। तुम बुज़दिल हो। तुम सुरक्षा के दीवाने हो। तुम्हारी सब कुछ कांपने लग जाता है। दांत से लेकर आंत तक। जाड़े में दांतों को बचते सुना है? हां। सच जहां सामने आया और जहां अग्नि ने पुकारा जहां कर्म का न्योता आया तहां इनके आंत दांत सब बजने लग जाते हैं। इनके लिए ज्ञान का मतलब है ज्ञान की बातें।
15:07 तुम सोचते हो ज्ञान माने बात होता है। ज्ञान माने बात नहीं होता। ज्ञान माने आग होता है। यह प्रेम यज्ञ की ज्वाला है। काम और आग। ज्ञानी माने अंगार। बुझी उड़ती हुई राख नहीं फू फू ये राख लेके यहां लगा ली तो ज्ञानी हो गए। नहीं नहीं नहीं यहां ज्ञानी यहां राख नहीं मलता ज्ञानी यहां शोले मलता है।
15:57 अब मुझे पसीना नहीं आ रहा तो तुम लोगों को क्यों आने लग गया? ठंडे बुझे हुए लोग लतखोरों के लिए ना गीता है ना ज्ञान है कि जिनको बात में धक्का दो तो कुछ करेंगे धक्का दो तो कुछ करेंगे ज्ञान माने बेपरवाह आशिकी पता ही नहीं चला जिंदगी कब बीत गई जब पता ही नहीं चला जिंदगी कब बीत गई तो बताओ मौत कैसे आएगी जिनको जिंदगी का होश होता है। साधारण अर्थों में होश जिनको जिंदगी का होश होता है उनको ही पता
16:44 चल सकता है ना कि अब मौत आ गई। जो जी ही ऐसे रहे थे कि उन्हें जिंदगी का ही नहीं पता था। वो फिर कभी मरते भी नहीं। वो अमर हो जाते हैं। ज्ञान माने ऐसे जीना कि पता ही ना चले दिन महीने साल दशक और फिर जीवन पूरा कब बीत गया। कभी हुआ होगा हल्की सी झलक मिली होगी। जब कभी डूबे होगे किसी दिली काम में। हुआ है ऐसा? अरे यह क्या हुआ? समय पूरा हो गया। छोटे बच्चों के साथ होता है। अब पता नहीं ऐसा होता नहीं। मेरे समय में वीडियो गेम खेलने जाते थे। उनके वीडियो पार्लर्स होते थे तो टोकन देते थे
17:32 आधे घंटे का 40 मिनट का कि इतनी देर तक खेलोगे और पांच ही मिनट हुए होते थे। ऐसा लगता था और वो आकर कहता था वो आकर कहता भी नहीं था। वह सामने आ जाता था टाइम अप गेम ओवर। ज्ञान माने जिंदगी भी ऐसे ही बिता देना। क्या करोगे बच्चा बताओ? हल्का आदमी बना रह के क्या करोगे? क्या लाभ होगा? ज्यादा झे सुरक्षा सुरक्षा जो करते हो यह करते-करते क्या कर लोगे? मौत से बच जाओगे। जब मर ही जाना है तो बेधड़क जी करके काहे नहीं मरते?
18:26 नहीं वो तो आप बोल लेते हो आपके लिए ठीक है। हम तो कम कुमारी लड़कियां हैं। हमें तो जमाना देख के चलना पड़ता है ना। ठीक है। तुम जमाना देख के चलो ना मेरा क्या जाता है तुम नीचे जमाना देख के चलो हम तो उड़ान लेंगे वहां ऊपर खूब वहीं से पॉटी करेंगे तुम रेंगो जमीन पे फिर ऐसे कहना ये क्या है [हंसी] आचार्य जी ने शैंपू भेजा है क्या
19:21 लुचूर पुचुर मैं तो गिर गया। क्या हुआ? उठे क्यों नहीं? काम क्यों नहीं कर रहे? मैं तो गिर गया। पुराना चुटकुला है। लग गई। नहीं बीतल पिघल गया। नींद लग गई। इसको आलसी मत बोलो। इसको अधर्मी बोलो।
20:08 युद्ध बुला रहा था। आपका यह है ना युद्ध यज्ञ को पीठ दिखाए वो योगी नहीं त्यागी नहीं परवाह नहीं अंजाम की फिक्र सच्चे काम की जो युद्ध को पीठ दिखा रहा हो जो यज्ञ की घड़ी में खर्राटे मार रहा हो इससे बड़ा विधर्मी कोई मैं जवान लोगों से पूछ रहा हूं। अच्छा जीवन तो चलो फिर भी थोड़ा लंबा खींचता है। जवानी एक बार जो जाए
20:54 कहीं तो तुमने जवाब दिया? तुम्हें पता है तुमसे जवाब कैसे निकलवाना है। कोई घटिया आइटम नंबर बता दो। खट से पूरा कर दोगे। तो एक बार जो जाए जवानी फिर ना आए। एक दिन ना ऐसे जैसे मेरा हुआ था। पहले एक बाल यहां सफेद होता है। फिर वो धीरे-धीरे ऊपर को बढ़ना शुरू होता है। और अब मैं देख रहा हूं इधर के बाल भी बचा लोगे जवानी? तो काहे के लिए यह ठंडा जीवन जी रहे हो? एक दिन यहां एक सफेद बाल दिखाई देगा और वह मौत की पहली आहट है।
21:41 जवानी जिसको बचा रहे हो क्या वो बच सकती है? उसे रुई के फाहे में रखो। लगातार बिस्तर पर भी पड़े रहो तो क्या वो बच जाएगी? जब बच सकती ही नहीं तो उसकी आहुति दे दो। यूथ इज अ पेरिशेबल गुड। और जो पेरिशेबल चीजें होती हैं उनको अलमारी में नहीं रखा जाता। उनका इस्तेमाल किया जाता है। वह भी जल्दी से जल्दी। पेरिशेबल समझते हो क्या? नष्ट प्राय जो चीज खत्म हो सकती है।
22:29 जो भी तुम समझते हो जिंदगी में कि तुम्हारी उपलब्धि है, तुम्हारा ज्ञान है। कईयों को अपने ऊपर बड़ा भरोसा होता है। फलानी चीज तो हम जानते ही हैं। इतना ही पूछ लेना जो कुछ भी तुम जानते हो उसने तुम्हें आग दी है क्या? जो कुछ भी तुम जानते हो उसने तुम्हें मोहब्बत दी है क्या? अगर नहीं दी है ना आग है ना मोहब्बत है तो तुम कुछ नहीं जानते हो। फालतू मत फूलो। और आम आदमी की जिंदगी में और कुछ हो भले ही यह दो चीजें होती हैं जो बिल्कुल नहीं होती। एक आग एक आशिकी
23:16 और इन्हीं दोनों की कमी सबसे बड़ा प्रमाण है ज्ञान की कमी का। जिसके पास ज्ञान नहीं है उसके पास प्रेम कैसे होगा? प्रेम तो करा जाता है ना अपने से ऊंचे वाले से और अपने से ऊंचे वाले से प्रेम तभी कर सकते हो जब ऊंचा उठने की ख्वाहिश हो। और ऊंचा उठने की इच्छा तभी हो सकती है जब पहले अपने निचलेपन का एहसास हो और अपने निचलेपन के एहसास को ही आत्मज्ञान कहते हैं। प्रेम कहां से आएगा बिना ज्ञान के?
24:03 जिसे अपने ओछेपन का पता नहीं उसे ऊंचाई से प्रेम कैसे होगा? ज्ञान के बिना प्रेम कहां से लाओगे? और ज्ञान जितना गहरा होता है प्रेम की आग उतनी सघन होती है। तीव्र होती है। अब मैं पूछूं आपसे दुनिया का सबसे गरीब आदमी कौन है? जिसके पास जिसके पास जीने के लिए कोई माकूल आग नहीं है।
24:52 जिसकी जिंदगी जल नहीं रही। वह दुनिया का सबसे गरीब आदमी है। हम बुझी हुई मोमबत्ती है। प्रकाश ही तो धन है ना। और प्रकाश तो मोमबत्ती से तभी आएगा जब वह जलेगी जब आग होगी। पर आग का मतलब होता है कि मोमबत्ती मिटेगी। तो मोमबत्ती खुद को बचाने के लिए बुझना पसंद कर लेती है। ये जो बुझी हुई मोमबत्तियां होती हैं सबसे गरीब होती हैं।
25:40 आपको खुशी होगी इस नाते जो हमारी अपनी ऐप है जिसमें हमारे गीता और बाकी सब कार्यक्रम [संगीत] चलते हैं। यहां पर बुद्ध हैं, गीता है, उपनिषद है, अष्टावक्र हैं। यह मुझे मिले, मेरी जिंदगी बदली। यह तुम्हें मिलेंगे तुम्हारी जिंदगी भी बदलेगी। सच पूछिए तो मतलब लाखों नहीं तो कम से कम हजारों जिंदगियां तो हैं जो बिल्कुल बदली हैं। 2 लाख से अधिक गीता प्रतिभागियों के साथ जुड़े [संगीत] आचार्य प्रशांत ऐप पर। पहला महीना बिल्कुल फ्री गीता मिशन का पूरा एक्सेस। [संगीत] ऐप पर आपको मिलेंगे नियमित लाइव सत्र। हर दिन आचार्य प्रशांत के विशेष संवाद। गीता कम्युनिटी का एक्सेस, गीता परीक्षा, [संगीत] चयनित समाचार, ऑडियो बुक्स, कोर्ट्स और भी बहुत कुछ। Google Play स्टोर या Apple ऐप स्टोर
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