0:27 नमस्कार प्रिय विद्यार्थियों उत्कर्ष क्लास क्लासेस के इस डिजिटल प्लेटफार्म पर आपका बहुत-बहुत स्वागत एवं अभिनंदन। मैं आपका हिंदी शिक्षक बी आर भाटी। लेकर आया हूं आप लोगों के लिए एक बहुत ही शानदार क्लास जिसमें हम बात करने वाले हैं हिंदी अनिवार्य में हमारे आरोह भाग टू के प्रथम पांच चैप्टर जिसमें हम पांचों ही चैप्टर में जिसमें हम कवि परिचय बहुविकल्पीय प्रश्न कविता का सारांश पीवाईक्यूज ये सभी बातें करने वाले होंगे आज की क्लास में तो जुड़ जाइए जल्दी से मेरे साथ मेरे साथ यहां पर जुड़ गए हैं भाेश हरीश कमलेश यश बबलू बंटू, माणक, लक्ष्मी, सरिता, विमला आप सभी का बहुत-बहुत स्वागत है। अभिनंदन
1:12 है क्लास में। करते हैं हमारी क्लास की शुरुआत हमेशा की भांति चंद पंक्तियों के साथ ही कि राहें जहां तक जाएगी, राहगीर वहां तक जाएगा। राहें जहां तक जाएगी, राहगीर वहां तक जाएगा। तुम दरिया से क्या पूछ रहे हो? नीर कहां तक जाएगा? तुम दरिया से क्या पूछ रहे हो? नीर कहां तक जाएगा? अरे खींच धनु की डोर निशाना साधो अपनी मंजिल का खींच धनु की डोर निशाना साधो अपनी मंजिल का बाकी बाद में देखेंगे यह तीर कहां तक जाएगा बाकी बाद में देखेंगे यह तीर कहां तक जाएगा तो हमें अपना लक्ष्य साधना है हमें परिणाम पर फोकस नहीं करना है हमें अपना कर्म करना है परिणाम स्वतः ही अच्छा आएगा स्वर्णिम अक्षरों में आएगा ट्रिपल डिजिट में आएगा तो आपको अपना कर्म
2:00 करना है हमेशा अभ्यास करना करते रहना है करत करत अभ्यास जड़ मति हो सुजान रसरी आवत जात है शील पर करे निशान तो हमेशा अभ्यास करने रहना है हमारी सीरीज का भी नाम क्या दिया गया है अभ्यास सीरीज क्लास 12th के विद्यार्थियों के लिए उत्कर्ष बोर्ड अभ्यास परीक्षा करवाया है जिसमें हम अभ्यास की बात करते हैं तो मैं हमेशा आपको यही कहता हूं कि आप जितना लगातार रूप से सतत रूप से अनवरत रूप से अभ्यास करते रहोगे उतने में ही आप अपने सब्जेक्ट में पारंगत होते रहोगे। तो मेरे साथ और साथी जुड़ गए हैं। आप सभी का स्वागत है, अभिनंदन है। करते हैं हमारी क्लास की शुरुआत। यहां पर हम बात करने वाले होंगे हरिवंश राय बच्चन जी के बारे में, आलोक
2:48 धनवा जी के बारे में, कुंवर नारायण जी के बारे में, रघुवीर सहाय के बारे में और शमशेर बहादुर सिंह जी के बारे में। इनकी जो पांच प्रथम पांच चैप्टर है हमारी आरोह भाग टू में जिनके पांचों ही चैप्टर में जितनी भी कविताएं हमारे पाठ्य पुस्तक में है उन सभी कविताओं को आज एक ही क्लास में हम यहां पर सूपड़ा साफ करने वाले होंगे तो जुड़े रहिए अंत तक मेरे साथ में हम बात करते हैं यहां पर एक-एक करके सभी चैप्टर के बारे में तो देखिए यहां पर हम आज की क्लास में क्या-क्या पढ़ने वाले हैं एक बार फिर से आपको मैं बता बता देता हूं कि हम इस क्लास में क्या-क्या पढ़ने वाले हैं। हमारी तीन से 4 घंटे की यह लगातार क्लास चलने वाली है। सुबह का समय है। आप
3:35 सभी को आराम से मैं उम्मीद करता हूं आपने आपने क्या भोजन कर लिया होगा, नाश्ता कर लिया होगा। स्नान वगैरह निवृत्त होकर अब आराम से बैठ गए होंगे क्लास देखने। तो हम यहां पर बात करने वाले हैं उत्कर्ष बोर्ड अभ्यास परीक्षा जिसमें हमारी जो यह पहली क्लास है और इस क्लास में हम क्या-क्या पढ़ने वाले हैं तो देखिए सबसे पहले हम बात करते हैं। हम बात करेंगे यहां पर कवि परिचय के बारे में। हम बात किसके बारे में करने वाले हैं? हम बात यहां पर कवि परिचय के बारे में करने वाले हैं और साथ ही हम बात करने वाले होंगे इन सभी कविताओं के बहुविकल्पीय प्रश्न हैं। उन बहुविकल्पीय प्रश्नों के बारे में भी हम बात करने वाले
4:20 होंगे। इसी के साथ ही जो विगत वर्षों में हमारे प्रश्न पत्र में प्रश्न आए थे जो हमारे बड़े भाई बहनों ने एग्जाम दिया है उन प्रश्नों के बारे में भी यहां पर हम चर्चा करने वाले होंगे कि किस प्रकार के प्रश्न इन चैप्टर में से हमारे एग्जाम में आने वाले हैं। तो पी वाई क्यू जो है इनके बारे में भी हम बात करने वाले होंगे। साथ ही हम बात करने वाले होंगे जो अति महत्वपूर्ण प्रश्न है जो आपकी पाठ्य पुस्तक में है अभ्यास प्रश्न के रूप में दिए हुए उनके बारे में तो बात करेंगे ही साथ ही जो पाठ्य पुस्तक के अंदर से चैप्टर के अंदर से जो प्रश्न बनने वाले हैं उनके बारे में भी हम यहां पर बात करने वाले हैं
5:06 जो कि अति महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर कहते हैं आप या अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर कहते हैं उनके बारे में हम बात करने वाले होंगे। और मोस्टेंट आ जाता है यहां पर जितनी भी हमारी कविताएं हैं उन सभी कविताओं का सारांश हम इस एक ही क्लास में पढ़ने वाले हैं। आराम से समझने वाले हैं। रेडी है आप सभी? तो एक बार आप सभी मेरे साथ जुड़ गए हैं। अपने मित्रों को भी इस क्लास को शेयर कर दीजिए ताकि आपके साथ में आपके मित्रों का भी हो सके फायदा और एक बार थम्स अप दिखा दीजिए कि हां सर हम रेडी हैं। क्या आप रेडी हैं? जल्दी से बता दीजिए क्या आप रेडी हैं? यदि आप रेडी हैं तो करते हैं हम हमारी क्लास की शुरुआत
5:52 यहां पर श्री गणेश कर देते हैं हमारी क्लास का। शुरुआत कर देते हैं हमारी क्लास की। तो यहां पर थम्स अप आ रहे हैं मेरे लाडलों के मेरे गोलगोल गोलूमोलू के मेरे रसगुल्लों के बिल्कुल तो यहां पर हम बात करने वाले हैं सबसे पहले बात करेंगे यहां पर हम आज का हमारा पाठ्यक्रम क्या-क्या रहेगा हम कौन-कौन सी कविताओं के बारे में बात करने वाले हैं तो जो रोड मैप की बात करते हैं ना हम वो पहले तैयार करेंगे ताकि अंत तक आपको पता रहे कि इस क्लास को हम देखें तो क्यों देखें देखने का कारण क्या है रीजन क्या रहेगा कि इस क्लास को क्यों देखें? तो इस क्लास में हम क्या-क्या पढ़ने वाले हैं? उन सभी के बारे में पहले हमें बात करना बहुत जरूरी हो जाता है। कई
6:37 बार विद्यार्थियों के मन में होता है कि हां ये वीडियो तो है देख तो रहा हूं लेकिन इसमें क्या होगा क्या नहीं होगा। आगे फटाफट फटाफट खुदा-कुदा के देख लेता है। अरे यार कुछ पता ही नहीं चला क्या था। लेकिन आज हम पहले ही समझ लेंगे यहां पर कि हां इस पूरी पूरी क्लास में हमारे कौन-कौन से चैप्टर रहने वाले कौन-कौन सी उसमें कविताएं रहने वाली है। उसमें क्या-क्या पढ़ने वाले हैं वो तो हमने बात कर ली है। तो बात करते हैं यहां पर देखिए पाठ्य पुस्तक है हमारी आरो भाग टू। आरो भाग टू के अंदर हम जो हमारा पहला चैप्टर है हरिवंश राय बच्चन जी आत्म परिचय और एक गीत दो रचनाएं हमारे पाठ्यक्रम में दी गई है तो उन दोनों ही कविताओं के बारे में यहां पर बात करेंगे आलोक धनवा आलोक धनवा द्वारा
7:25 रचित जो रचना है हमारे पाठ्य पुस्तक में पतंग उड़ीउड़ी जाए उड़ीउड़ी जाए दिल की पतंग यह उड़ीउड़ी जाए तो उस पतंग के बारे में यहां पर हम बात करने वाले होंगे। उसके बाद में कुंवर नारायण जी कुंवर नारायण जी ने जो दो रचनाएं हमारे पाठ्य पुस्तक में दी है। वो है कविता के बहाने और बात सीधी थी पर। बात सीधी थी पर। यह बेटा पर शब्द आता है ना। बड़ा खतरनाक शब्द होता है। तो बात सीधी थी पर। तो यहां पर इन दो रचनाओं के बारे में बात करने वाले हैं। फिर आते हैं हमारे रघुवीर सहाय जी। तो रघुवीर सहाय
8:13 जी की जो रचना है बड़ी इंटरेस्टिंग रचना है। जो रचना है उसका नाम आपके सामने है। उसका नाम आपके सामने है कैमरे में बंद अपाहिज। कैमरे में बंद अपाहिज इनके बारे में हम बात करने वाले होंगे। बिल्कुल मेरे लाडले यहां पर बता रहे हैं सभी के जन्म वर्ष वगैरह क्या बात है वेरी गुड बहुत अच्छे और अंत में हम बात करने वाले होंगे शमशेर बहादुर सिंह जी द्वारा रचित कविता उषा दिन का आरंभ उषा के काल से ही होता है। तो हम उस उषा के बारे में बात करने वाले होंगे। उषा नामक जो कविता है उस कविता के
9:00 बारे में बात करने वाले होंगे। तो तैयार हैं आप सभी शुरुआत करते हैं यहां पर पहली ही हमारी कविता जिसका नाम है हरिवंश राय बच्चन जी द्वारा रचित कविता आत्म परिचय और एक गीत ये आपके सामने जो नजर आ रहे हैं ये कौन हैं और जल्दी से बता दो एक बहुत बड़े सुपरस्टार के ये पिताजी है। किनके पिताजी हैं? कमेंट बॉक्स में जल्दी से बता दो। कितना ध्यान रखते हो। हां तो ये हरिवंश राय बच्चन जी हैं। अमिताभ
9:45 बच्चन जी के ये पिताजी हैं। बिल्कुल। तो देखिए यहां पर बात करेंगे जीवन परिचय के बारे में। कवि है हरिवंश राय बच्चन जी। तो इनका जो जीवन परिचय इस जीवन परिचय के बारे में हम बात करने वाले होंगे। तो हरिवंश राय बच्चन जी का जो जीवन परिच्छेद सबसे पहले हम बात करेंगे इनके जन्म के बारे में। हरिवंश राय बच्चन जी का जन्म है सन 1907 में होता है। कब होता है? सन 1907 में होता है और इलाहाबाद में होता है। मुझे कमेंट बॉक्स में आपको बताना है कि 1907 में और कौन से कवि या कवियत्री का जन्म होता है। जल्दी से बताना है। बार-बार मैं बताता हूं आपको। इलाहाबाद में इनका जन्म होता है हरिवंश
10:32 राय बच्चन जी का तो देखो ह से हरिवंश ह से हजारी और म को साइलेंट करके ह से महादेवी तो इन तीनों का ही जन्म है वो सन 1907 में होता है। आपको अच्छे से ध्यान रखना है। बिल्कुल सही बता रहे हैं यहां पर मेरे लाडले महादेवी वर्मा, हजारी प्रसाद द्विवेदी, हरिवंश राय बच्चन। इन तीनों का ही जन्म सन 1907 में होता है। और अगले ही दिन मतलब अगले वर्ष किनका जन्म होता है? दिनकर का जन्म होता है। तो, दिनकर जी का जन्म है, वह सन 1908 में होता है। कब होता है? सन 1908 में होता है। हां फिर देखो
11:20 इनकी रचनाओं के बारे में बात करते हैं। तो हरिवंश राय बच्चन जी ने मधुकाव्य लिखा है। क्या लिखा है? मधु काव्य लिखा है जिसमें इनकी तीन रचनाएं हैं। मधुशाला, मधुबाला और मधुकलश। मधुशाला, मधुबाला और मधुकलश। इन तीनों को ही सीक्वेंस में याद रखने के लिए आपको क्या करना है? शाबाशी देनी है। शाबाश। क्या गाना है? शाबाश। तो देखो यहां पर हम क्या लिखेंगे? शाबाश। श से देखो मधुशाला। ब से मधुबाला श से मधु कलश और इन तीनों का ही सन देखिए।
12:05 मधुशाला है वो सन 1935 में प्रकाशित होती है। मधुबाला है वो सन 1938 में प्रकाशित होती है और मधु कलश है वो भी सन 1938 में प्रकाशित होती है। शाबाश बिल्कुल सही बता रहे हैं आप सभी यहां पर। वेरी गुड। क्या बात है। बहुत अच्छे मेरे लाडलों। फिर इनकी बात करते हैं आगे। निशा निमंत्रण जो कि निशा निमंत्रण नामक जो काव्य संग्रह है उनमें से ही हमारी ये रचनाएं ली गई है। एकांत संगीत आकुल अंतर मिलन यामिनी सतरंगिणी आरती और अंगारे नए पुराने झरोखे टूटी फूटी कड़ियां ये सभी क्या है तो आपको
12:52 बताना है ये सभी इनके काव्य संग्रह है क्या है तो क्या बताओगे आप ये सभी इनके काव्य संग्रह है काव्य संग्रहों की बात आए के गुरु जी हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित काव्य संग्रह कौन-कौन से हैं? तो यह आपको बताने हैं। फिर आगे बात आती है यहां पर क्या भूलूं क्या याद करूं? नीड का निर्माण फिर से क्या भूलूं क्या याद करूं? नीड का निर्माण फिर से बसेरे से दूर और 10 द्वार से सोपान तक। यह जो इनकी आत्मकथा है। यह जो क्या है? ये चारों ही रचनाएं चार खंडों में अलग-अलग है रचित। यह हरिवंश राय बच्चन
13:41 जी की आत्मकथा है और ध्यान रखना है आपको एक बात का कि आत्मकथा हमेशा गद्य भाग में लिखी जाती है। आत्मकथा हमेशा गद्य भाग में लिखी जाती है। लेकिन हरिवंश राय वचन जी की आत्मकथा है। यह एकमात्र ऐसी आत्मकथा है जो कि पद्य भाग में लिखी गई है। इस बात का आपको अच्छे से ध्यान रखना है। और आपको आगे बता देता हूं मैं। अब देखना अब जो यह है इनकी आत्मकथा है वो कितने खंडों में है? चार खंडों में है। तो चार खंड कौन-कौन से तो जल्दी से याद रखना है। क्या भूलूं क्या याद करूं? यानी जब हरिवंश राय बच्चन जी की पत्नी का निधन हो जाता है तो वह कहते हैं
14:28 कि अब मेरा इस संसार में कोई रहा ही नहीं। क्या भूलूं और क्या याद करूं। फिर दूसरा क्या भाग आता है? नीड का निर्माण फिर से तो लोगों ने कहा भाई कोई बात नहीं हरी इच्छा प्रबल भाई इस संसार में आना जाना तो तय है भाई कम उम्र में आपकी श्रीमती जी चले गए तो कोई बात नहीं आप दूसरी शादी कर लो तो नीड का निर्माण फिर से नीड का मतलब होता है घोंसला पक्षियों का घर होता है उसको क्या बोला जाता है घोंसला बोला जाता है तो नीड का निर्माण फिर से यानी इन्होंने अपना घर वापस बस बसा दिया। उस समय इन्होंने यह दूसरा भाग लिखा है। फिर तीसरा भाग आता है बसेरे से दूर।
15:14 जब यह मुंबई आ जाते हैं इलाहाबाद से तो वहां पर यह अपने घर से दूर रहते हैं। अपने घर से दूर रहते हैं। तो यह लिखते हैं बसेरे से दूर। बसेरे का मतलब भी क्या होता है? आवास होता है, घर होता है जहां पर हम रहते हैं। तो यह बात बसेरे से दूर अपने घर से दूर रहे तब लिखी इन्होंने। फिर बात आती है 10 द्वार से सोपान तक। यह 10 द्वार से सोपान क्या है? ये दो जगहों के नाम है। ये जहां पर रहते थे मुंबई में। यहां एक जगह का नाम है दसद द्वार। पहले वो वहां पर रहते थे और कुछ समय बाद में वो वहां सोपान
15:59 में शिफ्ट हो जाते हैं। उस जगह रहने लग जाते हैं। तो 10 10 द्वार से लेकर सोपान तक का जो समय था वहां जाने तक का उसका जो विवरण है इन्होंने अपने अंतिम भाग में लिखा है आत्मकथा के दस द्वार से सोपान तक। तो आज से आप अच्छे से याद करोगे। बिल्कुल याद रहने वाला होगा आपको। क्या बात है वॉइस? हां सभी विद्यार्थी बताएं भाई। हां। फिर आगे देखो बात करते हैं। आगे उन्होंने दो अनुवाद किए हैं। और अनुवाद में क्या-क्या? हेमलेट, जन गीता और मैकबेथ। अनुवाद किए हैं उन्होंने जिसका नाम है हेमलेट जन गीता
16:48 और मैकबेथ। फिर बात आती है आगे एक डायरी लिखी है उन्होंने और उस डायरी का नाम क्या है? प्रवासी की डायरी। क्या नाम है? प्रवासी की डायरी। फिर आगे बात आती है उनका पूरा वांगमय यानी पूरा जो साहित्य है उनका वो उन्होंने बच्चन ग्रंथावली के नाम से 10 खंडों में प्रकाशित है। बच्चन ग्रंथावली खुद के नाम से ही वचन ग्रंथावली के नाम से 10 खंडों में प्रकाशित है। फिर देखो आगे बात करते हैं उनके निधन की। तो हरिवंश राय बच्चन जी का जो निधन है यह कब होता है? तो आपको ध्यान रखना है सन 2003 में इनका निधन हो जाता है और होता कहां पर
17:34 है तो आपको ध्यान रखना है इनका निधन है वो हो जाता है मुंबई में कहां पर होता है मुंबई में इनका निधन हो जाता है इस बात का आपको अच्छे से ध्यान रखना है बिल्कुल रखोगे ना अब देखो आगे हम बात करेंगे हमारी कविता के बारे में कविता क्या है आत्म परिचय खुद को जानना खुद का परिचय तो वो हरिवंश राय बच्चन जी अपने आप का परिचय किस प्रकार से देते हैं उनके बारे में हम यहां पर बात करेंगे। एक-एक पंक्ति को अच्छे से समझने वाले होंगे।
18:21 देखिए क्या है हमारी कविता। मैं जग जीवन का भार लिए फिरता हूं। मैं जग जीवन का भार लिए फिरता हूं। फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूं। कर दिया किसी ने झं जिनको छूकर मैं सांसों के दो तार लिए फिरता हूं। मैं स्नेह सुरा का पान किया करता हूं। मैं कभी ना जग का ध्यान किया करता हूं। जग पूछ रहा उनको जो जग की गाते जग पूछ रहा उनको जो जग की गाते मैं अपने मन का गान किया करता हूं। मैं अपने मन का गान किया करता हूं। तो इसमें हरिवंश राय वचन जी क्या कहते हैं देखिए मैं जग जीवन का भार लिए फिरता हूं। मैं इस संसार में
19:08 जग जीवन यानी पूरे संसार का भार लिए फिरता हूं। फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूं। मैं इस संसार का भार लिए इस जीवन में फिर रहा हूं। फिर भी मेरे दिल में मेरे हृदय में क्या है? इस जीवन में प्यार लिए फिरता हूं। सबके प्रति मैं स्नेह रखता हूं। प्यार रखता हूं। कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर। और मेरा जो वीणा रूपी हृदय है, इस ह्रदय को किसी ने, इस हृदय के तारों को किसी ने झंकृत कर दिया है, किसी ने बजा दिया है, खनका दिया है तो कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर यानी स्पर्श करके, मैं सांसों के दो तार लिए फिरता
19:54 हूं। मैं तो इस जीवन में सांसों के दो तार लिए फिरता हूं। मैं सने सुरा का पान किया करता हूं। हां, मैं सूरा का पान करता हूं। मैं शराब का पान करता हूं। लेकिन मैं जिस शराब का पान करता हूं, वह शराब कैसी है? स्नेह रूपी शराब है। प्यार रूपी शराब है जो उसका मैं पान किया करता हूं। बाकी लोग तो जो शराब होती है, उसका पान करते हैं। लेकिन मैं प्रेम रूपी जो शराब है उसका पान करता हूं। मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूं। मैं इस जग का कभी ध्यान नहीं करता। लोग क्या करें, क्या नहीं करें, उससे मुझे कोई लेना देना नहीं है। मैं
20:40 हमेशा स्नेह रूपी सूरा का प्रेम रूपी जो शराब है उसका पान किया करता हूं। जग पूछ रहा उनको जो जग की गाते और यह जो संसार है यह संसार उनको ही पूछेगा। उनके ही बारे में बातें करेगा जो उनकी बातें करेगा। जो उनके बारे में आओ भगत करेगा। जग पूछ रहा उनको जो उनकी गाते मैं अपने मन का गान किया करता हूं। और मैं तो मेरे खुद के मन का गान किया करता हूं। मुझे किसी से कोई लेना देना नहीं है। लोग क्या कहेंगे, क्या नहीं कहेंगे उससे मुझसे कोई लेना देना नहीं है। तभी तो कहा गया है इस संसार
21:26 में सबसे बड़ा रोग क्या है? इस संसार में सबसे बड़ा रोग क्या है? तो इस संसार में सबसे बड़ा है रोग कि क्या कहेंगे लोग? क्या कहेंगे लोग? अब लोगों की परवाह नहीं करनी है हमें। तो हरिवंश राय बच्चन जी कहते हैं कि मैं अपने मन का गान किया करता हूं। मैं मेरे हृदय में जो आता है, मेरे दिल में जो आता है, उसका ही मैं गान करता हूं, बखान करता हूं। फिर आगे बात करते हैं। फिर आगे जल्दी से बता दीजिए आप कौन सी क्लास में पढ़ रहे हैं? जल्दी से जल्दी से बता दीजिए आप कौन सी क्लास में पढ़ रहे हैं? हां वहां ए या बी कौन सा विकल्प सही
22:11 उत्तर दे रहे हैं? जल्दी से जितने भी मेरे लाडले या मेरे साथ जुड़े हुए हैं अभी उन सभी को यहां पर अपने कमेंट बॉक्स में ए या बी लिखना है। ए या बी? तो उम्मीद करता हूं इसमें 100% बी विकल्प सही उत्तर होना चाहिए क्योंकि ये क्लास हमारी 12th क्लास की चल रही है तो आप सभी का कमेंट भी वही आना जरूरी है। देखो हां बिल्कुल बिल्कुल जब तक आप एक-एक विद्यार्थी कमेंट नहीं करते हो ना जो भी ऐसा प्रश्न आता है तब तब देखो भाई मजा नहीं आता है। तो यहां पर मैं भी कर देता हूं भाई बी विकल्प क्योंकि क्लास हम 12थ की ले रहे हैं। यहां पर देखो 94.44%ेज
22:59 लोगों ने सही उत्तर दिया है अपनी क्लास के बारे में। फिर आगे बात करते हैं हम। मैं निज उ के उद्गार लिए फिरता हूं। मैं निज उ के उद्गार लिए फिरता हूं। मैं निज उ के उपहार लिए फिरता हूं। है ये अपूर्ण संसार ना मुझको भाता मैं सपनों के दो संसार लिए फिरता हूं। मैं जला हृदय में अग्नि दहा करता हूं। खुद दुख सुख- दुख दोनों में मग्न रहा करता हूं। जल भवसा जन भवसागर को जन भवसागर को तर भवसागर तरने को नाव बनाए। मैं भव मौजों पर मस्त बहा करता हूं। मैं इन भव मौजों पर मस्त बहा करता हूं। अब देखो बच्चन जी क्या कहते हैं यहां
23:46 पर तो बच्चन जी यहां कहते हैं मैं निज उ के उद्गार लिए फिरता हूं मैं निज उ के यानी अपने ही हृदय के उद्गारों को उन भावों को लिए फिरता हूं मैं निज उ के उपहार लिए फिरता हूं मैं खुद के ही उ के हृदय के उपहारों को लिए फिरता हूं उनको भेंट को लिए फिरता हूं है यह अपूर्ण संसार है यह अपूर्ण संसार ना मुझको को भाता। यह संसार अपूर्ण है। यह संसार अपूर्ण है। यह मुझको नहीं भाता है। भाता का मतलब क्या होता है? अच्छा लगना। तो यह संसार मुझे अच्छा नहीं लगता है। मैं सपनों का संसार लिए फिरता हूं। और मैं तो मेरे ही सपनों
24:32 का संसार लिए फिरता हूं। जो मेरे मन में आता है उनका मैं बखान करता हूं। और मेरे खुद के सपनों का ही संसार लिए मैं फिरता हूं। मैं जला हृदय में अग्नि दहा करता हूं। मैं जला हृदय में अग्नि दहा करता हूं। मैं सुख-दुख दोनों में मग्न रहा करता हूं। मैं जला हृदय में अपने हृदय को जला के उसमें अग्नि को दहा करता हूं। लेकिन सुख- दुख दोनों में मग्न रहा करता हूं। भले ही सुख आए या दुख आए कैसी भी परिस्थिति क्यों ना आ जाए मैं हमेशा अपने आप में मग्न रहता हूं मज मस्त रहता हूं और मस्त हमेशा रहता हूं कैसी भी परिस्थिति क्यों ना हो कहते
25:19 हैं ना सुख होए दुख होए कुछ भी क्यों ना होए लेकिन हमें अपने हाल में मस्त रहना है हमें हमेशा उन सुख में भी और दुख में भी उन समस्याओं का दुख है तो समस्याओं का सामना करने के लिए हमेशा तैयार रहना है और सुख है तो उसको भी ज्यादा एक्साइटेड नहीं होना है बस है तो है बिल्कुल मैं सुख दुख दोनों में मग्न रहा करता हूं जन भवसागर तरने को नाव बनाए यह जो संसार है यह जो संसार के लोग हैं इस भवसागर को यानी इस संसार रूपी सागर को भवसागर यानी संसार रूपी सागर रूपक अलंकार कार आ जाएगा यहां पर। तो
26:05 जन यानी लोग भवसागर को तरने को नाव बनाए। इस संसार को तरने को यानी संसार को पार पाने के लिए क्या बनाते हैं? नाव बनाते हैं। लेकिन मैं तो क्या करता हूं? मैं भव मौजों पर मस्त बहा करता हूं। मैं इस संसार की इस भव की मौजों पर मस्त बहा करता हूं। इस संसार में मैं उस लहरों के ऊपर मस्त बहा करता हूं। मौजों का अर्थ होता है लहरें। क्या होता है? लहरें। तो मैं भव मौजों पर मस्त बहा करता हूं। इस संसार रूपी सागर की जो मस्त-मस्त लहरें होती हैं। उन लहरों के
26:50 ऊपर ही मैं तो मस्त बहा करता हूं। ये संसार तो ना सागर को इस भवसागर को पार करने के लिए क्या करते हैं? नाव बनाते हैं कि ताकि इससे हम पार पा जाएंगे। लेकिन मैं इस भवसागर की जो मस्त मौजे हैं, नाव हैं उनके ऊपर ही मस्त बहा करता हूं। फिर आगे देखते हैं। मैं यौवन का उन्माद लिए फिरता हूं। उन्मादों में अवसाद लिए फिरता हूं। जो मुझको बाहर हंसा रुलाती भीतर। जो मुझको बाहर हंसा रुलाती भीतर। हाय किसी की याद लिए फिरता हूं। मैं हाय किसी की याद लिए फिरता हूं। कर यत्न मिटे सब सत्य किसी ने
27:35 जाना। कर यत्न मिटे सब सत्य किसी ने जाना। नादान वही है हाय जहां पर दाना। नादान वही है हाय जहां पर दाना। फिर मूड ना क्या जग। फिर मूड ना क्या जग जो इस पर भी सीखे। फिर मूड ना क्या जग जो इस पर भी सीखे मैं सीख रहा हूं सीखा ज्ञान भुलाना मैं सीख रहा हूं सीखा ज्ञान भुलाना तो यहां पर क्या कहते हैं देखिए मैं यौवन का उन्माद लिए फिरता हूं। मैं मेरी युवा अवस्था का यौवन का मतलब युवा अवस्था का उस जवानी का जो उन्माद है नशा है वो लिए फिरता हूं। मैं यौवन का उन्माद
28:22 लिए फिरता हूं। उस उन्मादों में अवसाद लिए फिरता हूं। हां, मैं जवानी का नशा लिए फिरता हूं। लेकिन उस जवानी के नशे में भी जो अवसाद है, जो दुख है, उसको मैं हृदय में दबाए हुए लिया फिरता हूं। क्यों है दुख? क्योंकि उनकी श्रीमती जी सल बचे थी। इसीलिए दुख तो होगा ही भाई। किसको नहीं होता है? सबको होता है। भगवान ऐसी किसी के साथ ना करें। फिर आगे जो मुझको बाहर हंसा रुलाती भीतर जो मुझको बाहर हंसा रुलाती भीतर बाहर तो मैं हंसता हूं। क्या करूं? लोगों को दिखाने से तो कोई फायदा नहीं है ना कि मैं रो रहा हूं। अरे मेरे ऊपर दुख आ
29:08 गए। मेरी पत्नी चली गई। दुख हो गया, वो हो गया, कष्ट है, पीड़ा है, दुख है, दर्द है। लेकिन लोगों को बताने से क्या फायदा? लोग तो उल्टे दो-तीन ताने मारेंगे और हंसी उड़ाएंगे। इससे अच्छा है उनको कुछ बताओ ही मत। तो मैं जो मुझको बाहर हंसा रुलाती भीतर अंदर ही अंदर घुट जाओ लेकिन लोगों के सामने अपने कष्ट पीड़ाओं को बयां मत करो। मैं हाय किसी की याद लिए फिरता हूं। और खुद कहते हैं मैं हाय किसी की याद लिए फिरता हूं। मैं ऐसे इस संसार में क्यों घूम रहा हूं? मेरे हृदय में भी किसी की याद है और वो किसकी याद है? बताओ कमेंट बॉक्स में जल्दी से किसकी याद लिए वो
29:53 फिरते हैं? तो मैं हाय किसी की याद लिए फिरता हूं। कर यत्न मिटे सब सत्य किसी ने जाना। प्रश्नवश कर यत्न मिटे सब सत्य किसी ने जाना। इस संसार में कितने भी प्रयत्न कर लिए हैं, यत्न कर लिए हैं, परिश्रम कर लिया है। लेकिन सत्य किसी ने क्या जाना? नादान वही है हाय जहां पर दाना। और लोग तो नादान है, भोले हैं। जहां पर उनको दाना मतलब खाने पीने की सामग्री मिल जाए, रोटी टुकड़ा मिल जाए तो वहां वो तो वहीं उनका गुणगान करने लग जाते हैं। तो कवि कहता है नादान वही हाए जहां पर दाना फिर मूड ना
30:39 क्या ये जग जो इस पर भी सीखे यानी जहां पर आपको रोटी वाली मिल जाए कुछ खाने को अन्न मिल जाए उनका ही आप गुणगान करने लग जाओ तो इस संसार को मूर्ख बताया है कवि ने फिर मूढ़ ना क्या जग जो इस पर भी सीखे इस पर भी सीख रहा है कि वाह क्या बात है अच्छी बात है उनको तो रोटी पानी वहां मिल गया खाना पानी मिल गया है। मैं सीख रहा हूं सीखा ज्ञान भुलाना। और इस संसार में मैं क्या कर रहा हूं? मैं सीख रहा हूं। क्या सीख रहा हूं? जो सीखा हुआ ज्ञान है जो इस संसार में जो ज्ञान है, मैं इस संसार में जो बचपन से देखता आ रहा हूं, उसको मैं कैसे भुला दूं। यह कैसे भुलाऊं? इस बात को
31:28 मैं यहां पर सीख रहा हूं। तो कवि कहता है मैं सीख रहा हूं सीखा ज्ञान भुलाना ठीक है बिल्कुल फिर आगे बात करते हैं मैं और जग और कहां का नाता मैं बना बना कितने जग रोज मिटाता जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव मैं प्रति पग से उस पृथ्वी को ठुकराता मैं निज रोदन में राग लिए फिरता हूं शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूं। हो जिस पर भूपों के प्रासाद निछावर हो जिस पर भूपों के प्रासाद निशावर हो जिस पर भूपों के भूपों के प्रासाद निशावर मैं वह खंडहर का भाग लिए फिरता हूं। मैं वह
32:16 खंडहर का भाग लिए फिरता हूं। बिल्कुल। तो यहां पर देखना मैं और जग और यहां पर यह जो और शब्द आ रहा है और शब्द आ रहा है। इस और शब्द की क्या हुई है? आवृत्ति हुई है। क्या हुई है? बताओ क्या हुई है? आवृत्ति हुई है। तो मैंने अलंकार टॉपिक करवाया था जब आपको बताया था कि जहां पर शब्दों की आवृत्ति हो और हर बार प्रत्येक शब्द का अर्थ अलग-अलग लिख ले तो वहां पर क्या होता है? वहां पर यमक अलंकार होता है। शब्दों की आवृत्ति अर्थ
33:02 अलग-अलग इसको भी ध्यान में रखना है। अर्थ है वो अलग-अलग तो वहां पर कौन सा अलंकार हो जाएगा? तो वहां पर यमक अलंकार हो जाएगा। ध्यान रखना है आपको। शब्दों की आवृत्ति अर्थ अलग-अलग तो वहां पर यमक अलंकार और ध्यान रखना एक बार और बता देता हूं जहां शब्दों की आवृत्ति और अर्थ एक जैसे ही होते हैं। वहां पर पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार होता है। जहां अर्थ एक जैसे शब्दों की आवृत्ति पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार और जहां पर शब्द एक जैसे एक से अधिक बार और
33:51 अर्थ अलग-अलग वहां पर यमक अलंकार और बता दूं जहां पर वर्णों की आवृत्ति होती है। यहां पर हम शब्द की आवृत्ति की बात कर रहे हैं। यहां पर देखो मैं प्रति पग से उस पृथ्वी को ठुकराता हूं। इस पंक्ति को ही ले ले। तो यहां पर देखो मैं प्रति पग से उस पृथ्वी को ठुकराता हूं। यहां पर प वर्ण की आवृत्ति हो रही है। तो बताओ जहां पर वर्णों की आवृत्ति होती है वहां पर कौन सा अलंकार होता है? जल्दी से कमेंट बॉक्स में बताना है आपको। मेरे लाडले यहां पर जितने भी जुड़े हैं। अभी-अभी जो जुड़े हैं मेरे साथ उनको भी यहां जुड़े रहना है अंत तक। बताओ जल्दी से। हां
34:39 वेरी गुड क्या बात है ललित चौधरी बिल्कुल सही बता रहे हैं आप खुशबू राजपुरोहित वेरी गुड बहुत अच्छे हां बिल्कुल बताओ जल्दी से थोड़े कमेंट बड़े कर देते हैं हां अब ठीक तो देखिए बिल्कुल। तो यहां पर पप्पू चौधरी, मिताली, यशराज तरुण रुकमणी ऑफिशियल वेरी गुड। सभी सही बता रहे हैं। बहुत अच्छे। वाह क्या बात है लाडलों। जहां पर वर्णों की आवृत्ति होती है, वहां पर अनुप्रास अलंकार होता है।
35:27 कौन सा अलंकार होता है? अनुप्रास अलंकार होता है। हां तो एक तरफ हमने यमक के बारे में बात की। दूसरी तरफ हमने अनुप्रास के बारे में बात की। पुनरुक्ति प्रकाश को हमने समझ लिया है। कोई दिक्कत नहीं है। और एक ही शब्द में जब अनेक अर्थ निकलते हैं तो वहां पर कौन सा अलंकार होता है? बताओ। जहां पर चिपका हुआ अर्थ होता है। अब सब बता देंगे। जहां पर छुपा हुआ अर्थ होता है, वहां पर कौन सा अलंकार होता है? एक ही शब्द में एक से अधिक अर्थ हो, वहां
36:13 कौन सा अलंकार होता है? कौन बताता है सबसे पहले? वेरी गुड। कौन है यह? खुशबू राजपुरोहित। वेरी गुड। बहुत अच्छे खुशबू। वेरी गुड। अमन सिंह बहुत अच्छे। श्लेष अलंकार वाह क्या बात है श्लेष की झड़ी लगा दी है आप सभी ने श्लेष अलंकार बिल्कुल हां कितने नंबर पे है यह बताओ 1 2 3 4 अच्छा तीन नंबर वाला बिल्कुल सही उत्तर दे रहा है वेरी गुड गुड सी विकल्प यहां
36:59 विकल्प की बात ही नहीं हो रही है। अरे भाई बिल्कुल श्लेष अलंकार आपका सही उत्तर है। हां फिर हम बात करते हैं आगे मैं और और जग और कहां का नाता? मैं और और यह जग है। यह और है कोई दूसरा ही अन्य है। तो मैं और जग और और कहां का नाता? और इसमें और हम में कहां का नाता कहां का रिश्ता? मैं बना बना कितने जग रोज मिटाता मैं तो मेरी कल्पनाओं का संसार हमेशा बनाता हूं और दिन भर कल्पनाओं का संसार बनाता हूं मुझे अच्छा नहीं लगता हूं और उसको मिटा देता हूं मैं बना कितने जग रोज मिटाता जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव ये संसार
37:48 ये संसार के लोग इस धरती पर क्या जोड़ा करते हैं वैभव जोड़ा करते हैं धन धन संपदा जोड़ा करते हैं। मैं प्रति पग उस पृथ्वी को ठुकराता। मैं पृथ्वी पग उस पृथ्वी को ठुकराता। तो यहां पर क्या बताया गया है कि कवि कहता है कि जो लोग इस धरती पर धन जोड़ते हैं, वैभव जोड़ते हैं, संपदा जोड़ते हैं तो मैं उस पृथ्वी को हर पल ठुकराता हूं। ऐसी धरती से, ऐसे संसार से मुझे कोई लेना देना नहीं है। क्या बात है? वॉइस प्रॉब्लम सबके लिए है क्या? बताओ जल्दी से भाई। हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो
38:37 हैं। आ तो रही है भाई। बताओ जल्दी से। फिर आगे बढ़ते हैं। अब कैसे है? अब कैसे है? सही आ रही है। थम्स अप दिखा दीजिए जल्दी से। फिर बढ़ते हैं आगे चैप्टर पांच करवाने।
39:25 रेडी है? ओके। बढ़ते हैं आगे। हां। तो जग जिस पृथ्वी पर जोड़ा करता वैभव मैं पृथ्वी पग उस पृथ्वी को ठुकराता हूं। मैं प्रति पग उस पृथ्वी को ठुकराता। मैं निज रोधन में राग लिया फिरता हूं। मैं अपने रोदन में मैं निज रोदन में राग लिए फिरता हूं। शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूं। मैं तो अपना रोना रो रहा हूं। दुखी हूं। अंदर ही अंदर टूटा हुआ हूं। लेकिन उसमें भी लोगों को क्या लग रहा है कि वाह कवि ने तो कितनी अच्छी कविता सुनाई है। कितना अच्छा गाना गाया है। तो निज रोधन में राग लिए फिरता हूं। शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूं। मेरी
40:11 वाणी बहुत शीतल है, बहुत कोमल है, नर्म है। विनम्र भाव से मैं बोलता हूं। लेकिन उस शीतल वाणी में भी मैं क्या लिए फिरता हूं? आग लिए फिरता हूं। और आग लिए फिरने का मतलब है कि मेरे शब्दों में वो जोश है, वो जुनून है, वो उत्साह है। बिल्कुल। तो मैं शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूं। हो जिस पर भूपों के प्रासाद न्योछावर और हो जिस पर भूपों के यानी बड़े-बड़े राजा महाराजाओं के प्रासाद यानी उनके भवन महल निछावर यानी न्योछावर मैं वह खंडहर का भाग लिए फिरता हूं। लेकिन
40:58 मैं तो मेरे उसी खंडहर का भाग लिए फिरता हूं। फिर आगे क्या कहते हैं? मैं रोया उसको तुम कहते हो गाना। मैं रोया उसको तुम कहते हो गाना मैं फूट पड़ा तुम कहते हो चंद बनाना क्यों कवि कहकर संसार मुझे अपनाए मैं दुनिया का हूं एक नया दीवाना मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूं मैं मादकता निशेष लिए फिरता हूं जिसको सुनकर जग झूम झुके लहर आए मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं तो क्या कहते हैं यहां पर कवि कहता है में रोया। मैं तो अंदर ही अंदर टूटा हुआ हूं। रो रहा हूं। लेकिन तुम इसको
41:44 कहते हो गाना। तुम इसको क्या कहते हो? गाना। मैं फूट पड़ा। तुम कहते हो चंद बनाना। मैं तो फूट-फूट कर रो रहा हूं। और आप इसको क्या कहते हो? वाह कवि ने क्या गजब का चंद बनाया है। यानी यहां पर विरोधाभास हो रहा है। क्यों कवि कहकर संसार मुझे अपनाए। यह संसार मुझे कवि कहकर क्यों अपना रहा है? मैं कोई कवि नहीं हूं। मुझे कवि कहकर यह संसार क्यों अपना रहा है? मैं दुनिया का हूं एक नया दीवाना। मैं तो इस दुनिया का हूं। इस संसार का हूं एक नया दीवाना। मैं तो इस संसार का एक नया दीवाना हूं। और दीवाने का मतलब क्या होता है? दीवाने का मतलब वो होता है जिसको किसी की परवाह
42:31 नहीं। कि वो कैसी भी परिस्थिति क्यों ना आए वो कभी डरता नहीं है, रुकता नहीं है, झुकता नहीं है, पीछे हटता नहीं है। वो दीवाना होता है। और आज के गानों में तो मैं दीवाना मैं दीवानी मैं दीवाना। कोई दीवाना दीवानी नहीं है। थोड़ी सी आपत्ति आ जाए दब दुम दबा के भागने की कोशिश करते हैं। वो क्या दीवाने होंगे? दीवाने वो हैं जिसके ऊपर जिसके सामने कैसी भी परिस्थिति क्यों ना आ जाए, कितनी भी विकट समस्या क्यों ना आ जाए, कितने भी कष्ट, पीड़ाएं, दुख दर्द क्यों ना आ जाए, लेकिन वो कभी पीछे नहीं हटते हैं। अपनी पीठ नहीं दिखाते हैं। उनको दीवाना कहा है कवि ने और कहा है मैं वही दीवाना हूं। बिल्कुल। और मैं
43:18 दुनिया का हूं एक नया दीवाना। मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूं। और मैं इस संसार में दीवानों का वेश लिए फिरता हूं। मैं मादकता निशेष लिए फिरता हूं। मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूं। और मैं मादकता जो नशा है मेरी जवानी का जोश है वो निशेष यानी संपूर्ण शक्ल में उस संसार की जो जोश जुनून ऊर्जा है मेरी उन सबको लिए फिरता हूं। जिसको सुनकर जग झूम झुके लहराए। जिसको सुनकर यह जग संसार है झूम उठे और लहराए। मैं मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं। मैं इस संसार में हमेशा मस्ती का संदेश लिए फिरता हूं। स्नेह का संसार संदेश लिए फिरता हूं।
44:05 प्रेम का संदेश लिए फिरता हूं। आपको भी हमेशा अपने जीवन में ऐसा बनना है कि लोग कहीं पर भी क्यों ना आप चले जाए। फिर भी आपके पीछे कहे कि वाह भाई वो कितना अच्छा आदमी है। आपके पीठ पीछे भी लोग बुराई ना करें। ऐसा इस संसार में बनना है। बुराई करनी है तो मुंह पर कीजिए। जो सामने बैठा है हाथों हाथ उसकी बुराई कर दीजिए। उसको बता दीजिए कि यह गलत है। यह सही है। आप ये कर रहे हो यह सही नहीं है। बताइए बेधड़क बताइए। लेकिन पीठ पीछे कभी भी किसी की बुराई नहीं करनी है और उस काबिल हमें बनना है। ऐसा बनना है कि पीठ पीछे कोई भी अपनी बुराई ना करें और ना ही हमें किसी की करनी है। ऐसा इस संसार में हमें बनना है।
44:50 बनेंगे ना? बिल्कुल। तो कहते हैं ना कि जब आंखों में अरमान लिया, मंजिल को अपना मान लिया। जब आंखों में अरमान लिया, मंजिल को अपना मान लिया। फिर मुश्किल क्या और आसान क्या? बस ठान लिया तो ठान लिया। बिल्कुल जब आंखों में अरमान ले लिए हैं तो उनको पूरे भी करने हैं। यह हमारा फर्ज है। क्योंकि हमारे वो माई बाबा उनके सपने हैं। उन सपनों को हमें साकार करना है। बिल्कुल करना है। फिर बढ़ते हैं आगे। अब देखो उत्कर्ष ऑनलाइन ट्यूशन न्यू चैनल एक ल्च हुआ है इंग्लिश मीडियम का क्लास नाइंथ टू 12th के लिए मेरे साथ जितने भी मेरे लाडले अंग्रेजी माध्यम के हैं वो हमेशा कहते हैं
45:35 गुरु जी हमें भी हिंदी मीडियम वाले चैनल पे ही पढ़ाते हो हमारी भी क्लासें वहीं लगती है। वैसे हमारी जो क्लास है हिंदी की वो तो दोनों चैनल पर एक ही रहेगी क्योंकि लैंग्वेज है तो वो हिंदी में लेकिन आपके जो डोमेन सब्जेक्ट है वो इसी चैनल पर इंग्लिश मीडियम वालों के लिए यह जो चैनल है सब्सक्राइब करके रख दीजिए उत्कर्ष ऑनलाइन ट्यूशन का ये न्यू चैनल है नाइन टू 12th का चैनल और इंग्लिश मीडियम स्टूडेंट के लिए उत्कर्ष क्लासेस नाइन टू 12th इंग्लिश मीडियम चैनल इसको आपको जल्दी से सब्सक्राइब कर देना है और यहां पर जो भी जानकारी आपकी आती है क्लाें आपकी आती मोटिवेशनल वीडियो आपको मिलने वाले होंगे। उन सभी का आनंद उठाना है और अपने जीवन में कैसे तरक्की करनी है उसके बारे में इसके माध्यम से आप आगे बढ़ जाते हैं। बिल्कुल
46:23 हां फिर आगे बात करते हैं। अब देखो दूसरी कविता एक कविता पूरी हो गई। अब दूसरी कविता क्या है? एक गीत है। हरिवंश राय बच्चन जी का एक गीत है। और गीत का नाम क्या है? दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। हमारा भी समय बहुत जल्दी-जल्दी निकल रहा है। अब एक घंटा होने को आया है। पता ही नहीं चला कब निकल गया। लेकिन अब देखो क्या बात है? चटरपटर की आवाज आ रही। चटरपटर की आवाज कहां से आ रही है भाई? चटरपटर यहां कुछ हो तो नहीं रहा है। अब बताओ जल्दी से बता दो। फिर आगे बढ़ते हैं।
47:09 हां देखिए दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। यह देखो कितने मस्तमस्त आपको यह चिड़िया के बच्चे आपको दिखाई दे रहे हैं। इनके बारे में ही यह लिखी गई है। और जीवन में हमें क्या बताया है उसके बारे में देखो। लो आवाज को नहीं आवे। मारवाड़ी कठी छना नहीं रेवे बेटा। हां बैकग्राउंड वॉइस आ रही है। बिल्कुल अभी करते हैं। सही देखिए दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। हो जाए ना पथ में रात कहीं मंजिल भी तो है दूर नहीं। ये सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी जल्दी चलता है। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। दिन
47:54 जल्दी-जल्दी ढलता है। तो देखिए क्या कहते हैं हरिवंश राय बच्चन जी यहां पर और इस संसार में कहते हैं कि मेरा यह संसार में कोई नहीं है। तो मैं इस संसार में जल्दी-जल्दी क्यों चलूं? मेरे लक्ष्य तक जल्दी-जल्दी क्यों पहुंचूं? तो इन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया है। सबसे पहले इन्होंने एक पथिक के बारे में बताया है। एक राहगीर के बारे में बताया है। एक राहगीर है वो दिन भर अपनी मेहनत मजदूरी करता है। थका है। घर से दूर है। अब वो शाम के समय घर जा रहा है अपने। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। हो जाए ना पथ में रात कहीं। हो जाए ना इस रास्ते में ही रात कहीं। मंजिल भी तो है दूर नहीं। हमारा
48:42 लक्ष्य है, मंजिल है वो भी तो अभी दूर नहीं है। कुछ ही समय बाद वो आने वाली है। यह सोच थका दिन का पंती भी जल्दी-जल्दी चलता है। यह विचार जब उस राहगीर के मन में आता है कि अब मंजिल तो दूर है ही नहीं। अब कुछ ही दूरी पर है तो फिर वो ये मन में विचार आता है उनके तो वो जल्दी-जल्दी चलता है और दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। हां दिन का पंथी बिल्कुल चेतन वेरी गुड। फिर आगे बात करते हैं। दूसरा बच्चे प्रत्याशा में होंगे। नीडों
49:29 से झांक रहे होंगे। यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। अब देखो बच्चे प्रत्याशा में होंगे। यहां दूसरे पैरे में उन्होंने बताया है एक पक्षी के बारे में। एक चिड़िया के बारे में कि चिड़िया है। वह दिन भर दाना सूखने के लिए दूर चली जाती है अपने घोंसले से और उस घोंसले में उनके बच्चे बैठे हैं। अनिल जोया सर मोरो कमेंट पढ़ो कोनी को नाराज होगा नहीं भाई किसी से कोई नाराजगी नहीं है हम सभी के लिए सम्मान है कोई नाराजगी नहीं है आपको यहां ध्यान देना है कह देना कबीरा खड़ा बाजार में
50:16 सबकी मांगे खैर कबीरा खड़ा बाजार में सबकी मांगे खैर ना किसी से दोस्ती ना किसी से वैर बिल्कुल किसी से कोई नाराजगी नहीं है सब अपने प्यारे रसगुल्ले हैं लाडले हैं। बिल्कुल जोया जी बच्चे प्रत्याशा में होंगे नीडों से झांक रहे होंगे। अब मेरे बच्चे हैं चिड़िया के मन में यह विचार आता है कि मेरे बच्चे हैं वो मेरी प्रत्याशा में होंगे। इंतजार में होंगे, आशा कर रहे होंगे और उस नीडों से इन घोंसले से झांक रहे होंगे, बार देख रहे होंगे। मेरी आई राह देख रहे होंगे। ये ध्यान परों में चिड़िया के भरता कितनी चंचलता है। जैसे ही चिड़िया को यह ध्यान
51:01 आता है कि मेरे बच्चे हैं वो मेरा इंतजार कर रहे होंगे। जैसे ही यह ध्यान चिड़िया के मन में आता है तो उनके परों में यानी पंखों में चिड़िया के पंखों में यह कितनी चंचलता भर देता है। स्फूर्ति ला देता है। तेजी ला देता है। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। हां नीड का अर्थ होता है घोंसला। बिल्कुल सोहन बिश्नोई मुझसे मिलने को कौन? अब कवि कहता है खुद के बारे में। पहले एक पथिक की बात बताई, एक राहगीर की बात बताई। फिर उन्होंने चिड़िया का उदाहरण देकर बताया। अब खुद के बारे में बता रहा है। और खुद के बारे में क्या बता रहा है? देखिए। हां।
51:49 वाह क्या बात है। मुझसे मिलने को कौन विकल में होऊ? किसके हित संचल? मुझसे मिलने को कौन विकल में होऊ किसके हित संचल? यह प्रश्न शिथिल करता पद को भरता उ में विहिलता है। यह प्रश्न शिथिल करता मन को भरता उर में विहलता है। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। तो देखो यहां पर कवि अपने बारे में बता रहा है हरिवंश राय बच्चन जी कि मुझसे मिलने को कौन विकल्प? अब मैं क्यों इस संसार में तेज चलूं? मेरा कहां है लक्ष्य? मेरे घर में मेरा इंतजार करने वाला कौन है? मुझसे मिलने को कौन बेचैन है? विकल यानी बेचैन।
52:35 मुझसे मिलने को कौन बेचैन है? मैं होऊ किसके हित संचल? और मैं किसके हित? यानी किसके लिए चंचल हूं? जल्दी-जल्दी चलूं, तेज-तेज़ चलूं। मैं किसके लिए चलूं? मेरा इंतजार करने वाला कौन है? मेरे लिए मैं किसके लिए बेचैन हूं? यह प्रश्न शिथिल्ता पद को जैसे ही यह प्रश्न मेरे मन में आता है तो शिथिलकर्ता पद को मेरे पांव को कमजोर कर देता है। ढीला कर देता है। नरम कर देता है। शिथिल कर देता है। यह प्रश्न शिथिल करता पद को बरता उर में विहलता है और मेरे उ में मेरे हृदय में क्या भर देता है? में दुख भर देता है। मेरे हृदय में वो यादें आ जाती है। भरता और मैं विहिलता है।
53:23 दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। बिल्कुल। फिर बात करते हैं आगे। अब देखो जल्दी से उत्तर देने हैं इन प्रश्नों के। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। गीत वचन की किस रचना से लिया गया है? जल्दी से आपको उत्तर देना है। चार विकल्प आपके सामने हैं और समय का पहिया चल रहा है तब तक आपको उत्तर देना है। कहते हैं ना समय बड़ा बलवान है कर मत यूं बर्बाद। समय बड़ा बलवान है कर मत यूं बर्बाद। कुछ तो ऐसा काम कर लोग करें फिर याद। कुछ तो ऐसा काम कर लोग करें फिर याद। दीजिए जल्दी से उत्तर यहां पर। विकल्प आपके सामने हैं। मधुशाला, निशा
54:11 निमंत्रण, मधुबाला और मिलन यामिनी। तो दिन जल्दी-जल्दी ढलता है गीत। बच्चन जी की किस रचना से लिया गया है? तो यह लिया गया है भाई निशा निमंत्रण से। कहां से लिया गया है। निशा निमंत्रण से लिया गया है। विकल्प बी सही है। काव्य संग्रह है बच्चन जी का। निशा निमंत्रण। अब बी के साथ मेरे कितने लाडले गए हैं? वाह क्या बात है। ऐसी तैयारी हो जब मजा आता है। भाई पहला ही प्रश्न और सभी विद्यार्थियों का सही उत्तर विकल्प बी बिल्कुल सही उत्तर दिया है आपने। मेरे जितने भी लाडले थे सभी ने सही उत्तर दिया है। एक बार कमेंट बॉक्स में कमेंट बॉक्स को तालियों की गड़गड़ाहट सी
54:59 भर दीजिए। एक बार खुद के लिए ताली बजा दीजिए। भाई आपने सभी ने सही उत्तर दिया है। क्या बात है बहुत अच्छे लाडलों। तो तालियों की गड़गड़ाहट मेरे इस स्टूडियो तक आनी चाहिए। मेरे कानों में आपकी तालियों की आवाज गूंजाएमान होनी चाहिए। तो जल्दी से तालियों की गड़गड़ाहट सुना दीजिए। अब बताते हैं कि सबसे पहले सही उत्तर किसने दिया। क्या बात है। बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल भाई। वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह वाह। सबसे पहले सही उत्तर क्या किसने दिया है? तो सबसे पहले सही उत्तर दिया है यहां पर अर्चना मीणा जी। रोहित मीणा जी। वेरी गुड। बहुत अच्छे। और उसके बाद दूसरा नंबर है
55:45 परिधि का। तीसरा है स्टडी ओनली। वेरी गुड। मन्नू शर्मा और सोहनी बिश्नोई। वेरी गुड। बहुत अच्छे लाडलों। एक बार आपने इस प्रश्न को टॉप किया है। बार-बार टॉप करना है। बाकी विद्यार्थियों को भी देखो ये कौन है? नवल सिंह। नवल सिंह कहते हैं सर पोल कैसे करें? जैसे ही यह प्रश्न सामने आता है। मैं यहां पोल स्टार्ट करता हूं। समय का पहिया चल रहा होता है। उस दरमियान आपको कमेंट बॉक्स में ए, बी, सी या डी जो सही उत्तर है, वह क्लिक करना है। लिख के भेज देना है। या अपने आप कैच हो जाएगा। ठीक है? बिल्कुल। आगे से ध्यान रखना है। बिल्कुल। फिर बात करते हैं। वाह समय का पहिया चलता है। दिन
56:32 जल्दी-जल्दी ढलता है। क्या बात है। सभी कवि बैठे हैं मेरे साहित्यकारों। बिल्कुल। फिर आगे बात करते हैं। दूसरा प्रश्न आता है। यदि मंजिल दूर हो तो लोगों की वहां पहुंचने की मानसिकता कैसी हो जाती है? यदि मंजिल दूर है। आपको कह दिया जाए कि आपका यह बोर्ड एग्जाम है वह 2028 में होंगे। ऐसा आपको कह दिया जाए तो आपकी मानसिकता कैसी हो जाएगी? दिमाग में क्या ख्याल आएंगे? क्या विचार आएंगे? अपनेप हिसाब से सभी बताओ। यदि मैं कह देता हूं कि आपके बोर्ड एग्जाम 2028 में होंगे तो आपके मन में कैसे विचार आएंगे? जल्दी से अपने-अपने विचार लिखो भाई। देखते हैं कैसे-कैसे विचार आते हैं यहां पर। कैसे
57:19 विचार आते हैं देखो लेकिन यहां पर उत्तर होगा उसके बारे में बात करते हैं। मंजिल दूर होने पर लोगों में उदासीनता का भाव आता है। स्वाभाविक है। उदासीनता का भाव आ जाता है। कभी-कभी उनके मन में निराशा भी आ जाती है। मंजिल की दूरी के कारण कुछ लोग घबराकर प्रयास करना ही छोड़ देते हैं। क्या है यार? इतना दूर एग्जाम है। इतना दूर लक्ष्य है। क्या करेंगे पढ़कर? तो अपना लक्ष्य ही छोड़ देते हैं। कुछ व्यर्थ के तर्क वितर्क करते हैं और उन तर्क वितर्कों में उलझकर रह जाते हैं। ऐसे तो आजकल के संसार में बहुत मिल जाएंगे। कोई भी बात क्यों ना हो सही है या गलत है उनसे कोई लेना देना नहीं है लेकिन तर्क वितर्क करना जरूरी है। मनुष्य आशा व निराशा के बीच में झूलता रहता है और आशा और निराशा
58:08 के बीच में हमेशा अटका रहता है। झूलता रहता है। देखो पर सीधी हो जाते हैं। निराशा हो जाती है। निराशा बाद में पड़ेंगे। ऐसे भाव आ जाते हैं। दुनिया 26 में ऐसे कमेंट नहीं करते भाई जेपी। जब तक समय है टारगेट नहीं छोड़े बिल्कुल क्या बात है सबके अपने-अपने भाव है विचार है हां अभी बहुत टाइम पड़ा है पढ़ लेंगे हां ऐसे विचार तो आते ही है सबके मन में आते हैं भाई मूड खराब हो जाता है दीपक बिल्कुल हां यूपीएससी वाले लाइक वेरी गुड क्या बात है हां बिल्कुल देखो अपनेप विचार यह मंच खुला
58:55 है आपके लिए इस प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देने के लिए। अब अगला प्रश्न आत्म परिचय कविता में कवि की वाणी कैसी है? अब दीजिए इस बार भी शतक ठोकना है। लगातार शतक ठोकेंगे भाई। बिल्कुल बताओ जल्दी से। आत्म परिचय कविता में कवि की वाणी कैसी है? कवि क्या कहते हैं? मैं कैसी वाणी में आग लिए फिरता हूं? बताओ। हां बिल्कुल समय समाप्त हो जाता है आपका यहां पर बात करते हैं आत्म परिचय कविता में कवि
59:43 की वाणी कैसी है? शीतल है, उग्र है, कठोर है या मृदुल है? कवि की वाणी है वह शीतल है। कैसी वाणी है? शीतल वाणी है। तभी तो कवि कहता है ना कि मैं शीतल वाणी में आग लिए फिरता हूं। मेरी वाणी तो शीतल है लेकिन उसमें क्या है? आग है। ओज है। वो उत्साह है। कुछ कर गुजरने के सपने हैं उसमें। तो ए विकल्प सही उत्तर हो जाएगा। अब ए विकल्प के साथ कितने लाडले? 97.98 वाह क्या बात है वेरी गुड बहुत अच्छे सबसे पहले सही उत्तर किसने दिया है नमन एडिट्स वेरी गुड नमन परिधि विकास बोस चेतन सिंह
1:00:32 सूरज प्रजापत बहुत अच्छे सभी के सभी कह रहे हैं सर हमारे नाम क्यों नहीं है हमारा उत्तर आप तक पहुंचा कि नहीं पहुंचा यह रहे देख लो सभी के नाम है ठीक है लेकिन जो कम समय में सही उत्तर देता है उसका नाम यहां टॉप फाइव में आ जाता है। बिल्कुल। ठीक है। फिर आगे बात करते हैं। कवि को संसार अपूर्ण क्यों लगता है? कवि को यह संसार है वो अपूर्ण क्यों लगता है? हमने पढ़ा है ना कि यह संसार मुझे अपूर्ण लगता है। क्यों लगता है? हां। लोटन चाचा के ढोल जैसी आवाज आ रही है सर। चिट धा ढीड़ धा धिन धा क्या बात है बूंदी
1:01:17 वाले भैया कैसी आवाज आ रही है भैया ऐसे कैसे आ रही है हां ये क्वेश्चन कर देते हैं। फिर अगला जो आएगा ना एमसीक्यू उसमें अपन टेक्निकल टीम को बुला के सही करवाएंगे। यह इतना तो सुनाई दे ही रहा है। मुझे ऐसा लग रहा है। कवि को संसार क्यों अपूर्ण लगता है? कवि भावनाओं को प्रमुखता देते हैं। वह सांसारिक बंधनों को नहीं मानता है। वह इस सांसारिक बंधनों को नहीं मानता है। वह वर्तमान संसार को उसकी शुष्कता एवं नीरसता के कारण ना पसंद करता है। वह बार-बार अपनी कल्पना का संसार बनाता है। वह बार-बार अपनी कल्पना का संसार बनाता है तथा प्रेम में बाधक बनने पर उन्हें मिटा देता है। वह
1:02:04 प्रेम को सम्मान देने वाले संसार की रचना करता है। बिल्कुल फिर आगे बात करते हैं। आगे बात करते हैं। देखो आप लोगों के लिए है यह खास आप लोगों के लिए। उत्कर्ष ऑनलाइन ट्यूशन के इतिहास में यह पहली बार ऐसा होने जा रहा है और देखिए क्या होने जा रहा है। ध्यान से देखिए यहां पर अपनी नजरें गड़ा दीजिए। पहली बार ऑफलाइन बोर्ड में उत्कर्ष बोर्ड अभ्यास परीक्षा हो रही है। और यह परीक्षा कहां-कहां पर होगी? जयपुर में होगी और जोधपुर में होगी। हमारे जो इधर के इलाके के लोग हैं वो जोधपुर में परीक्षा देंगे और जो हमारे उधर के इलाके
1:02:49 के हैं पूर्व की साइड के वो आप जयपुर में आराम से एग्जाम दे सकते हैं। और ये एग्जाम कब होंगे? 19 से 24 जनवरी 2026 तक क्लास 10थ और 12थ आप 12थ वाले हैं सभी लेकिन आपकी जिम्मेदारी है यह कि आपने जो छोटे भाई बहन हैं 10थ क्लास वाले उनको भी यह बताना है। उनको भी तैयार करना है। उनको भी यह एग्जाम दिलवाना है। हां बिल्कुल। फिर आगे बात करें हम। कवि उन्माद में क्या लिए फिरता है? मैं उन माधवों में रिक्त स्थान लिए फिरता हूं। बताओ भैया क्या लिए फिरता है? जल्दी से उत्तर आपको देना है। तब तक आपके वॉइस प्रॉब्लम सही करवा देते हैं।
1:08:56 हां बिल्कुल अब आपकी आवाज बिल्कुल सही आएगी। बताइए कमेंट बॉक्स में जल्दी से वॉइस प्रॉब्लम रेडी है वेरी गुड करें शुरुआत बढ़ते हैं आगे यहां पर हम बात कर रहे थे कवि उन्माद में क्या लिए फिरता है तो देखो विकल्प है अवसाद एहसास एहसान या अवसर तो कवि कहता है मैं अवसाद उन्मादों में अवसाद लिए फिरता हूं मैं उन्मादों में अवसाद लिए फिरता हूं तो विकल्प ए हमारी हमारा सही उत्तर हो जाएगा और ए विकल्प के साथ मेरे मेरे कितने लाडले हैं? तो ए विकल्प के साथ 98.89%ेज। वाह क्या बात है। वेरी गुड। बहुत अच्छे।
1:09:43 और यहां पर टॉप कौन कर रहा है इस प्रश्न को? तो सूरज प्रजापत परिधि और जय मदेना दीक्षित और स्टडी ओनली। वेरी गुड। बहुत अच्छे लाडलों। वेरी गुड। फिर बात करते हैं आगे अगले प्रश्न के लिए। अगला प्रश्न है हमारा यहां पर दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए। यह जो दिन जल्दी-जल्दी ढलता है कविता है। इस कविता में क्या बताया गया है? किस उद्देश्य को ध्यान में रखकर बताया गया है? हां, तो उसके बारे में हम बात करते हैं। दिन जल्दी-जल्दी ढलता है। कविता प्रेम की महत्ता पर प्रकाश डालती है। प्रेम का क्या
1:10:30 महत्व है? उस पर यह प्रकाश डालती है। प्रेम की तरंग ही मानव के जीवन में उमंग और भावना की हिलोर पैदा करती है। प्रेम के कारण ही मनुष्य को लगता है कि दिन जल्दी-जल्दी बीता जा रहा है। इससे अपने प्रियजनों से मिलने की उमंग में उमंग से कदमों में तेजी आती है तथा पक्षियों के पंखों में तेजी और गति आ जाती है। यदि जीवन में प्रेम हो, तो शिथिलता आ जाती है। यदि जीवन में प्रेम ना हो, तो शिथिलता आ जाती है। फिर आगे बात करते हैं। आगे बात करते हैं अगला प्रश्न। एक गीत कविता में कवि ने समय को कैसा बताया है। जो एक गीत कविता है जिसके बारे
1:11:17 में हमने बात की है। उसमें कवि ने समय को कैसा बताया है? बताओ जल्दी से। समय बड़ा बलवान है। कर मत यूं बर्बाद। कुछ तो ऐसा काम कर लोग करें फिर याद। बताओ जल्दी से। बहुत अच्छे। स्थिर है। समय परिवर्तनशील है, तीव्र है या उग्र है। तो समय परिवर्तनशील है। समय कभी रुकता नहीं है,
1:12:05 कभी झुकता नहीं है। यह हमेशा आगे ही आगे बढ़ता रहता है। हमेशा परिवर्तित होता रहता है। परिवर्तनशील है। विकल्प बी आपका सही उत्तर है। 90%ेज विद्यार्थियों ने बिल्कुल सही उत्तर दिया है। सबसे पहले नमन एडिट्स ने कृष्णा, सुनीता, केके और शांति वेरी गुड। बहुत अच्छे शांतिनाथ बात करते हैं आगे यहां पर बी विकल्प सही उत्तर होगा। आगे बात करते हैं यहां पर जहां पर दाना रहते हैं वहीं नादान भी होते हैं। कवि ने ऐसा क्यों कहा है? कवि ऐसा क्यों कहता है? तो उसके बारे में बात करते हैं। देखिए नादान यानी मूर्ख। व्यक्ति सांसारिक
1:12:52 मायाजाल में उलझ जाता है। मनुष्य इस मायाजाल को निरर्थक मानते हुए भी इसी के चक्कर में फंसा रहता है। संसार असत्य है। मनुष्य इसे सत्य मानने की नादानी कर बैठता है। और मोक्ष के लक्ष्य को भूलकर संग्रह वृत्ति धन संशय में पड़ जाता है। इसके विपरीत कुछ ज्ञानी लोग भी समाज में रहते हैं। जो मोक्ष के लक्ष्य को नहीं भूलते। अर्थात संसार में हर तरह के लोग मिलेंगे। इस संसार में भांति के लोग आपको देखने को मिलेंगे। संसार में भांति के लोग हैं।
1:13:39 अब देखिए आपको किस टाइप की लाइव क्लासेस चाहिए। बता दो जल्दी से जो अपनी जितनी भी लाइव क्लासेस होने वाली है वो किस तरीके की आपको चाहिए। जल्दी से कमेंट बॉक्स में आपको बताना है कि किस तरीके की आपको लाइव क्लास चाहिए। ए, बी, सी या डी? जल्दी से एक विकल्प आपको चूज़ करना है। किस टाइप की क्लासें आपको चाहिए। हां। वेरी गुड। सभी को एक जैसी क्लासें चाहिए। वेरी गुड। क्या बात है। बहुत अच्छे। हां सबको उत्तर देना है भाई यहां पर। बहुत अच्छे।
1:14:26 हां। तो भाई मैं भी आपके साथ ही हूं। मुझे भी इस टाइप की ही क्लाें चाहिए ताकि पढ़ाने में आनंद आए। आपका अच्छा हो तो हमारा पहले अच्छा। अब देखो 94%ेज विद्यार्थियों ने विकल्प सी को चूज किया है और इसमें बताया गया है कि ऑल चैप्टर थ्योरी प्लस पीवाईक्यूस प्लस एमसीक्यूस। वाह क्या बात है। हां। इसी प्रकार की सोच के साथ में हमें जीवन में आगे बढ़ना है। सब कुछ पढ़ना है। कुछ भी नहीं छोड़ना है। फिर एग्जाम में प्रश्न आएंगे तो आएंगे कहां से? हम तो सब पढ़ रहे हैं। बिल्कुल। फिर आगे बढ़ रहे हैं। संसार के लोग किस पृथ्वी पर क्या संसार के
1:15:14 लोग पृथ्वी पर क्या जोड़ते हैं? क्या जोड़ते हैं भाई? संसार के लोग हैं। यह पृथ्वी पर क्या जोड़ते हैं? वह आपको बताना है। धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष क्या जोड़ते हैं? हां।
1:16:29 दे दिया सभी ने उत्तर कोई है ऐसा जिसने उत्तर नहीं दिया है अभी तक बिल्कुल मैं कोई ऐसा ब्रह्म ज्ञानी जो अपना भेद पूछे। संसार के लोग पृथ्वी पर क्या जोड़ते हैं? देखो संसार के लोग इस धरती पर क्या जोड़ते हैं? अर्थ। अर्थ का मतलब है धन। क्या जोड़ते हैं? धन। विकल्प बी आपका सही उत्तर हो जाएगा। कवि कहता है मुझे इनसे कोई लेना देना नहीं है। बस बी विकल्प सही उत्तर है। 71.79%ेज विद्यार्थियों ने सही उत्तर दिया है। बहुत अच्छे। हां
1:17:17 बिल्कुल। टाइम टेबल कहां मिलेगा भाई? इसी चैनल पर कल लाइव सेशन ले आए थे ना सर। देख लो अच्छे से वहां पर बिल्कुल। बिल्कुल हां अब तैयार हुए भाई निशा निमंत्रण के गीत में कवि ने किस काव्यात्मक चित्रण की कोशिश की है? यह देखो आरबीएस 2023 में आया हुआ प्रश्न है। यह पीवाईक्यूस जिनके बारे में हम कहते हैं। निशा निमंत्रण गीत में कवि ने एक रोमांटिक और सुंदर रात के चित्रण की कोशिश की है। निशा निमंत्रण। बिल्कुल। फिर आगे बात करते हैं। आगे बात करते हैं अब दूसरा चैप्टर।
1:18:06 एक चैप्टर हमारा क्लियर हो गया है। इस चैप्टर में किसी को कोई दिक्कत है या नहीं? जल्दी से बता दीजिए। फिर बाद में आगे बात करते हैं दूसरे चैप्टर की आलोक धनवा यानी पतंग कविता इनके द्वारा रचित है। तो करते हैं हमारी इस क्लास की शुरुआत इस नए चैप्टर की शुरुआत चंद पंक्तियों के साथ ही कि हो चुका है आगाज रण का। का अब युग बदलने की बारी है। हो चुका है आगाज रण का। अब युग बदलने की बारी है। जीत उसी की होगी जिसका संघर्ष जारी है। जीत उन्हीं विद्यार्थियों की होने वाली है। जिन विद्यार्थियों का संघर्ष लगातार रूप से सतत रूप से अनवृत्त रूप से
1:18:51 जारी रहेगा। उन्हीं विद्यार्थियों की जीत सुनिश्चित है। करते हैं शुरुआत हमारी इस पतंग नामक कविता की जिसके रचनाकार है आलोक धनवा। आलोक का अर्थ होता है प्रकाश और धनवा का अर्थ होता है धनुष। आलोक धनवा। यह रहे आपके सामने हमारे दूसरे चैप्टर के रचनाकार आलोक धनवा जो कि आजाद भारत में पैदा हुए हैं। ध्यान से देखो सन 1948 में मुंगेर बिहार में इनका जन्म होता है। अ से आलोक अ से 48 याद रखना दूसरा कोई नहीं है 48 में हमारी पाठ्य पुस्तक में। ठीक है? बिल्कुल हां
1:19:39 ढोली दैया बहुत अच्छे प्रमुख रचना कौन सी है इनकी रचनाएं देखिए पहली कविता जनता का आदमी इनकी जो पहली कविता है उसका क्या नाम है जनता का आदमी यह सन 1972 में प्रकाशित होती है। उसके बाद भागी हुई लड़कियां भागी हुई लड़कियां ब्रूनो की बेटियां ब्रूनो की बेटियां जिनसे इनको प्रसिद्धि मिलती है। ब्रूनो की पेटियां दुनिया रोज बनती है। एकमात्र इनका काव्य संग्रह है। आलोक धनवा जी का एकमात्र काव्य संग्रह है जिसका नाम है दुनिया रोज बनती है। ध्यान
1:20:26 आपको अच्छे से रखना है। बिल्कुल बिटो जाट। हां बिल्कुल प्रमुख सम्मान की बात करें तो राहुल सम्मान बिहार राष्ट्रभाषा परिषद का साहित्य सम्मान बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान और पहल सम्मान ये सभी सम्मान आपको मिले हुए हैं। आलोक धनबाजी को मिले हुए हैं। बिल्कुल हां बिल्कुल ग्रामर की क्लास आ जाएगी। बिल्कुल हां सर पर रखी हुई है। बहुत जल्द बोला हुआ है आईटी टीम को। कह भाई जेपी सैनी सर 2x पर बढ़ा दीजिए भाई 2x पर अभी करते हैं आराम से पढ़ोगे मुके नहीं मारवाड़ी में मारवाड़ी लोग कितने हैं
1:21:12 यहां पर कि अपन ठाठ खानी नेच खानी और इधर ध्यान गया आपका कक्षा 12वीं कला वाणिज्य और विज्ञान वर्ग आप 2x की बात की और हाथों हाथ उसी प्रकार का कोर्स आपकी आंखों के सामने है। जल्दी से यह जो क्रैश कोर्स है जिसमें आप लोगों की जो बैच प्राइस है वह सिर्फ और सिर्फ ₹800 है। जिसका यह बैच 1 दिसंबर से शुरू हो चुके हैं। जल्दी से परचेस कर दो। अपनी परीक्षा की तैयारी को धार देने के लिए आपको इस क्रैश कोर्स में मिलने वाला क्या-क्या है? तो देखिए तीन मॉडल पेपर ब्लूप्रिंट पर आधारित। अभी जो ब्लूप्रिंट आ गया है उस ब्लूप्रिंट पर
1:21:58 आधारित तीन मॉडल पेपर आपको मिलने वाले हैं। सब्जेक्ट वाइज 100 एमसीक्यूस मिलने वाले हैं। जो कि पहला ही प्रश्न आता है आपका 12 नंबर का तो उसमें जो 100 एमसीक्यूस है उनमें से एक भी बार आपके नहीं जाने वाला है। अभ्यास प्रश्न आपको अच्छे से मिलने वाले हैं और पिछले तीन सालों के पीवाईक्यूस आपको मिलने वाले हैं। पिछले 3 सालों के जो विगत वर्षों के प्रश्न पत्रों के जो प्रश्न है, वह आपको अच्छे से मिलने वाले हैं। तो, यह सभी आपको सिर्फ और सिर्फ ₹800 में मिलने वाला है और 2x की अभी जो लाडले बात कर रहे थे, यह क्रैश कोर्स जल्दी से परचेस कर दीजिए और
1:22:45 अपनी तैयारी को धार दे दीजिए। बिल्कुल बढ़ते हैं आगे। पतंग कविता। अब पतंग के बारे में बात करते हैं। देखिए क्या कहते हैं आलोक जी देखो नन्हेन लाडले रसगुल्ले जहां पतंगे उड़ा रहे हैं और मन में गा भी रहे होंगे उड़ीउड़ी जाए उड़ीउड़ी जाए मेरी पतंग जरा उड़ीउ जाए अब देखो क्या कहते हैं यहां पर सबसे तेज बोचारे गई भादो गया सवेरा हुआ सबसे तेज बोचारे गई भादो गया सवेरा हुआ अपनी नई चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए घंटी बजाते हुए जोर-जोर से
1:23:31 चमकीले इशारों को से बुलाते हुए पतंग उड़ाने वाले बच्चों के झुंड को चमकीले इशारों से बुलाते हुए और आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए कि खरगोश की आंखों जैसा लाल सवेरा खरगोश की आंखों जैसा लाल सवेरा शरद आया फूलों को पार करते हुए कि पतंग ऊपर उठ सके। दुनिया की सबसे हल्की और रंगीन चीज उड़ सके। दुनिया का सबसे पतला कागज उड़ सके। बांस की सबसे पतली कमानी उड़ सके कि शुरू हो सके शीतियों और
1:24:16 ये दुनिया ये शुरू हो सके। फिर बात करते हैं बिल्कुल तो यहां पर फिर आगे जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास पृथ्वी घूमती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास जब वे दौड़ते हैं बेशुद्धों की बेशुद्ध सतों को नरम बनाते हुए को मृदंग की तरह बजाते हुए जब वे पग भरते हुए चले आते डाल की तरह लचीले वेग सो अक्षर छतों के खतरनाक किनारों तक उस समय गिरने से बचाता है उन्हें सिर्फ उनके ही रोमांचित शरीर का
1:25:03 संगीत पतंगों की धड़कती दुनिया उन्हें थाम लेती है महज एक धागे के सहारे महज एक धागे के सहारे पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं अपने रंधरों के सहारे अगर वे कभी गिरते हैं कि और मच जाते हैं तब तो और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं। पृथ्वी और भी तेज गूंजती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास। उनके बेचैन पैरों के पास। ठीक है? अब देखो अब बात करते हैं इस कविता के बारे में। यहां पर आलोक धनवाजी क्या करते हैं?
1:26:05 हां तेज सबसे तेज बौछारे गई भादो गया सवेरा हुआ यहां पर कवि बात कर रहा है सबसे तेज बौछारे गई यानी सावन के महीने में तेज बौछारे होती है बारिश आती है बहुत तेज घनघोर घटाएं बरसती है वह महीना चला गया है बादों चला गया यानी भाद्रपद का जो महीना होता है वह भी चला गया है। सवेरा हुआ यानी आगे का महीना आ गया है। यानी बारिश का मौसम है वह अब चला गया है। आसमान में जो बादल घनघोर घटाएं छाई हुई रहती हैं वो अभी चली गई है। अपनी नई साइकिल चमकीली साइकिल तेज चलाते
1:26:50 हुए कौन? शरद रूपी एक बालक है। यहां पर शरद का मानवीकरण किया गया है। तो शरद रूपी एक बालक है। वो कैसे आ रहा है? अपनी नई चमकीली साइकिल तेज चलाते हुए घंटी बजाते हुए जोर-जोर से चमकीले इशारों से बुलाते हुए पतंग उड़ाने वाले बच्चों के झुंड को चमकीले इशारों से बुलाते हुए शरद है। वह अपनी नई नवेली साइकिल है। उसको लेकर आता है और घंटी बजा रहा है जोरजोर से और उन पतंग उड़ाने वाले बच्चों के झुंड को इशारे कर रहा है चमकीले इशारों से बुलाते हुए और आकाश को इतना मुलायम बनाते हुए आकाश को
1:27:37 आसमान को इतना मुलायम यानी अब जो बादलों का समय था घनघोर घटाएं थी वो सब चली गई है अब आसमान बिल्कुल साफ है स्वच्छ है मुलायम है तो आकाश को मुलायम बनाते हुए खरगोश की आंखों जैसा लाल सवेरा। अब सुबह का समय है। लाल सवेरा है। किसके समान है? खरगोश की जो आंखें होती है लाल-लाल देखी है कभी किसी ने खरगोश की आंखें तो उनके समान सवेरे को बताया है। सुबह को बताया है। शरद आया पुलों को पार करते हुए। शरद रूपी जो बालक है वो इन पुलों को इन सभी पुलों को पार करते हुए आ गया है। यानी शरद का महीना अब आ गया है कि पतंग ऊपर उठ सके।
1:28:24 यानी अब हल्कीहल्की ठंडी-ठंडी शीतल शीतल मंदमंद हवाएं चल रही है। उसमें आसमान बिल्कुल स्वच्छ है। साफ है तो हमारी पतंग है वो ऊंची ही ऊंची उड़ती चली जाएगी। दुनिया की सबसे हल्की रंगीन चीज उड़ सके। अब पतंग की विशेषता बताई गई है। पतंग कैसी है? तो इस दुनिया की सबसे हल्की चीज है। हल्की वस्तु है। रंगीन वस्तु है और दुनिया के सबसे पतला कागज है। दुनिया का सबसे पतला कागज है। वो उड़ सके। शरद ऋतु की बात कर रहे हैं। बांस की पतली कमानी उड़ सके और पतंग कैसे बनता है? कागज का टुकड़ा और उसमें बांस की
1:29:10 कमानी सीधी लगाते हैं और यो घुमावदार लगाते हैं आड़ी। तो बांस की जो कमानी है वो उड़ सके। कि शुरू हो सके चींटियों और किलकारियों और तितलियों की इतनी नाजुक दुनिया। जैसे ही पतंग उड़ाएंगे। यह छोटे-छोटे नन्हे मुन्ने बालक रचगुल्ले तो वो छींटियां मारेंगे और किलकारियां करेंगे पूरे यहां आसमान को गुंजायमान बना देंगे और इस समय इस मौसम में सरद के मौसम में तितलियां इतनी नाजुक दुनिया अपनी बना देंगी जो तितलियां हैं वो इस हरियाली के ऊपर मंडराती हुई नजर हमें आएगी। अब देखो आगे जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं
1:29:55 कपास। अब बच्चों के बारे में बताया गया है। उनकी विशेषताएं यहां पर बताई गई है। बच्चे हैं वो जन्म से ही अपने साथ क्या लाते हैं? कपास। कपास का मतलब यहां पर कोमलता से है। बच्चे हैं वो कपास के समान। कोमल भी कपास के समान है। गोरे गोरे सफेद सफेद भी कपास के समान है। और मुलायम भी किसके समान है? कपास के समान है। तो यहां पर कपास यानी कोमलता का प्रतीक है। पृथ्वी घूमती हुई आती है उनके बेचैन पैरों के पास और पृथ्वी ये धरती है। यह भी घूमती हुई आती है। इन छोटे-छोटे नन्हे मुन्ने बच्चों के जो बेचैन पैर हैं उनके पैरों में
1:30:42 पृथ्वी खुद घूमती हुई आती है। जब वे दौड़ते हैं बेशुद और जब यह लाडले बच्चे दौड़ते हैं बेशुद्ध यानी बिना कोई होश रहे उन्हें कोई होश ठिकाना नहीं होता है और ऐसे हालात में जब वे दौड़ते हैं जब वे दौड़ते हैं बेशुद छतों को भी नरम बनाते हुए छत जो कितनी कठोर होती है उसको भी जब वे दौड़ते हैं तो उनको वो सत नरम लगती है। दिशाओं को मृदंग की तरह बजाते हुए और चारों तरफ की जो दिशाएं हैं उनको किस तरह बजाते हैं? मृदंग की तरह बजाते हैं। जब वे पेंग भरते चले आते हैं और जब वे पेंग भरते
1:31:29 हुए चले आते हैं एक दूसरे के जो कंधों पे हाथ रख के पेंग मारते हुए चले हुए आते हैं। जब वे पेंग भरते हुए चले आते हैं डाल की तरह लचीले वेग सो अक्षर और जिस प्रकार के पेड़ों की डालियां लचीली होती है जो ऊपर से आसमान से जमीन तक झुकती है उसी प्रकार का लचीलापल उन बच्चों में है जो जो पेड़ जीवित है सजीव है उनकी तो डालियां हमेशा क्या होती है लचीली होती है और जो सूख गया है पेड़ जिस व्यक्ति के अंदर अखड़ता है उसको सूखे पेड़ के समान बताया गया है। तभी कहते हैं ना कि झुके ओंबा ओंबली और झुके सकल संसार झुके ओंबा ओमली
1:32:15 और झुके सकल संसार अरंड बापड़ो कई झुके जिनरो अखड़ स्वभाव अरंड बापड़ो कई झुके जिनरो अखड़ स्वभाव यानी हमारा स्वभाव है हमें इस पेड़ों की तरह रखना है हमेशा झुकना झुक कर चलना है विनम्रता के साथ रहना है नम्रता के साथ हमेशा हमें रहना है अकड़ नहीं रखनी है घमंडाई हमें अपने अंदर नहीं रखनी है। किसी प्रकार का कोई घंडव द्वेष भावना नहीं रखनी है। जैसे अरंड बापड़ों के झुमे जो इंडे का पेड़ होता है वो ठूंट के समान ही तो होता है। तो वो कभी झुक नहीं सकता। तो देखो आगे बात करते हैं। चतों के खतरनाक किनारों तक डाल की तरह लचीले वेग सो अक्षर चतों के खतरनाक उन किनारों तक
1:33:03 पहुंच जाते हैं। और फिर उस समय गिरने से बचाता है उन्हें। जब वह बच्चे किनारे तक पहुंच जाते हैं तो उनको कौन बचाता है उस समय? तो उन किनारों से उनको खतरनाक किनारों से बचाता है उन्हें सिर्फ उनके ही रोमांचित शरीर का संगीत। उनका ही जो रोमांचित शरीर है जो उनका शरीर है लचीला शरीर है वो लचीलापन है वही उन्हें बचाता है सिर्फ उनके ही रोमांचित शरीर का संगीत पतंगों की धड़कती ऊंचाइयां उन्हें थाम लेती है और उनकी जो पतंगे आसमान में उड़ती हैं उन आसमान में उड़ती हुई पतंगों की जो ऊंचाइयां हैं वो ही
1:33:49 धड़कती हुई ऊंचाइयां उन्हें थाम लेती है महज एक धागे के सहारे और पतंग भले ही कितनी भी ऊंचाई पर क्यों ना हो आसमान में लेकिन वो महज एक धागे के सहारे टिकी रहती है। हमारे सामने क्या होता है? हाथ में क्या होता है? एक धागा ही तो होता है। बिल्कुल। फिर बात करते हैं आगे। पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं। अपने रंधरों के सहारे। पतंगों के साथ-साथ कौन उड़ रहे हैं? जो नन्हे मुन्ने रसगुल्ले हैं, लाडले हैं, बच्चे हैं, वो भी उन पतंगों के साथ-साथ
1:34:35 उड़ रहे हैं। और साथ क्या उनसे भी पार पाने को है और अपने रंधरों के सहारे अगर वे कभी गिरते हैं चतों के खतरनाक किनारों से और बच जाते हैं तब। भाई बच्चे हैं खेलेंगे, कूदेंगे, नाचेंगे, गाएंगे तब तो गिरेंगे तो जरूर। तो जब वो गिर जाते हैं और गिरने के बाद यदि उन्हें ज्यादा चोट नहीं लगती है। खतरनाक किनारों से गिरने के बाद जब वो बच जाते हैं तो और भी निडर होकर सुनहले सूरज के सामने आते हैं। क्या हुआ? कुछ नहीं यह तो कुछ नहीं हुआ। इतनी सी लगी है। नहीं अब अगली बार और हिम्मत के साथ आऊंगा। निडर होकर आऊंगा। तो वो निडर हो जाते हैं और अगले ही दिन फिर अपने बच्चों
1:35:21 के झुंड के साथ में आकर खेलने कूदने लग जाते हैं। उनके पृथ्वी और भी तेज घूमती हुई आती है। उनके बेचैन पैरों के पास और धरती खुद घूमती हुई उनके बेचैन पैर है। जिनको चैन नहीं है। उन पैरों के साथ पास में वो पृथ्वी खुद दौड़ती हुई घूमती हुई चली आती है। फिर बात करते हैं आगे। अब देखो अब बात करते हैं यहां पर पतंग कविता में शैली कैसी है? विकल्प आपके सामने है। जल्दी से उत्तर देना है तब तक।
1:36:18 बताओ जल्दी से समय चल रहा है। पतंग कविता की शैली कैसी है? वर्णनात्मक, विवेचनात्मक, प्रतीकात्मक या आलोचनात्मक? तो पतंग कविता है हमारी। इसकी कैसे लिखने का तरीका कैसा है? तो लिखने का तरीका है वह प्रतीकात्मक है। कैसा है? प्रतीकात्मक है। विकल्प सी आपका सही उत्तर है। और सी विकल्प के साथ कितने लाडले हैं? 92.31 वेरी गुड। क्या बात है? हां बिल्कुल। बिल्कुल। और अब बात करते हैं आगे। कौन इसको टॉप कर रहा है? अमन एडिट्स
1:37:05 यस्टरडे ओनली विकास बोस परिधि मिस्टर लवक कुछ मेड़ा वाह क्या बात है। इन लोगों ने टॉप फाइव में अपनी जगह बनाई है। बाकी वाले यह रहे आप सभी बात करते हैं आगे अगले प्रश्न के लिए। सोच कर बताइए कि पतंग के लिए सबसे हल्की और रंगीन चीज, सबसे पतला कागज, सबसे पतली कमानी जैसे विशेषणों का प्रयोग क्यों किया है? क्यों क्या है ऐसा? तो बात करते हैं इसके बारे में। बिल्कुल। हां। कवि ने पतंग के लिए अनेक विशेषणों का
1:37:51 प्रयोग किया। यानी पतंग की विशेषताएं बताइए कि पतंग कैसी है। तो अलग-अलग विशेषणों को यहां पर लिया है। पतंग का निर्माण रंगीन कागज से होता है। इंद्रधनुष के समान यह अनेक रंगों की होती है। इंद्रधनुष के समान पतंग भी अनेक रंगों की होती है। इसका कागज इतना पतला होता है कि बूंद लगते ही फट जाता है। और पतंग का कागज है वह बहुत महीन होता है, पतला होता है। पानी की एक बूंद लग जाए वह फट जाएगा। तभी तो अब शरद ऋतु आई है तब पतंगे उड़ाने लगे हैं बच्चे। हां। यह बांस की पतली कमानी से बनती है। कवि
1:38:37 इसके माध्यम से बाल सुलभ चेष्टाओं का अंकन करता है और पतंग की बाल मन की तरह कल्पनाशील कोमल व हल्की होती है। बिल्कुल सबकी आएगी भूगोल की राजनीति विज्ञान की इतिहास की सबकी क्लासें आएगी भाई। हां फिर आगे बात करते हैं। अब देखो WhatsApp चैनल उत्कर्ष ऑनलाइन ट्यूशन जल्दी से इस क्यूआर कोड को स्कैन कर लीजिए और ज्वाइन कर दीजिए जिसमें आपको लेटेस्ट अपडेट मिलेगा और आपकी जो क्लाें हैं उनकी जानकारी भी आपको मिलेगी। तो यह जो क्यूआर कोड आपको दिख रहा है, इसका स्क्रीनशॉट ले
1:39:23 लीजिए और जल्दी से अपने मोबाइल में स्कैन कीजिए ताकि इस चैनल से आप जुड़ जाओ जिसमें आपको जो नवीनतम अपडेट है वह मिलते रहेंगे और क्लास की जानकारी है इंफॉर्मेशन है वह भी आपको मिलती रहेगी समय-समय पर। जल्दी से यह काम आपको अच्छे से करना है। हां बिल्कुल हो गया। ओके फिर बढ़ते हैं आगे। शरद आया पुलों को पार करते हुए में अलंकार कौन सा है? शरद आया पुलों को पार करते हुए। इसमें कौन सा अलंकार है? बताओ भाई जल्दी से। हां
1:40:12 बिल्कुल। मानवीकरण, उपमा, उत्प्रेक्षा या रूपक कौन सा अलंकार होगा? जल्दी से आपको उत्तर देना है। क्या बात है। बिल्कुल दीजिए उत्तर।
1:43:23 हां बात करते हैं आगे। तो प्रश्न था आप लोगों के लिए शरद आया पुलों को पार करते हुए में अलंकार कौन सा है? तो हमने अभी-अभी बात की थी शरद रूपी एक बालक है वो पुलों को पार करते हुए आ रहा है। तो अलंकार की बात करें तो जब प्रकृति को मानव सुलभ कार्य करते हुए दिखाया जाता है। जब प्रकृति को मानव सुलभ कार्य करते हुए दिखाया जाता है तो वह मानवीकरण अलंकार होता है। कौन सा अलंकार होता है? मानवीकरण अलंकार होता है। तो यहां पर मानवीकरण अलंकार हो जाएगा आपका क्योंकि शरद रूपी बालक है वह पुलों को पार करते हुए आ रहा है। यहां पर ए विकल्प सही
1:44:10 उत्तर हो जाएगा और ए विकल्प के साथ मेरे लाडले हैं 98. हां वेरी गुड। बहुत अच्छे। शाबाश। विनीता प्रजापत स्टडी ओनली परिधि के इंदा और अंशु बहुत अच्छे टॉप फाइव में आपने जगह बनाई है यहां पर दीपक राधे-राधे बिल्कुल फिर बात करते हैं आगे जन्म से ही वे अपने साथ लाते हैं कपास कपास के बारे में सोचे कि कपास से बच्चों का क्या संबंध बन सकता है। कपास से बच्चों का क्या संबंध
1:44:57 बन सकता है? उनके बारे में हमें बात करनी है। हां देखिए कपास से बच्चों को गहरा संबंध है। कपास से बच्चों का गहरा संबंध है। दोनों में काफी समानताएं हैं। कपास जैसे सफेद होती है, वैसे ही बच्चे भी सफेद यानी गोरे-गोरे गुलगुले होते हैं। कपास की तरह ही बच्चे भी कोमल और मुलायम होते हैं। कपास के रेशे को कपास के रेशे की तरह ही उनकी भावनाएं होती हैं। वास्तव में बच्चों की कोमल भावनाओं का और उनकी मासूमियत का प्रतीक है। ठीक है? फिर बात करते हैं आगे।
1:45:46 पतंग कविता में कपास किसका प्रतीक है? पतंग कविता में कपास है वो किसका प्रतीक है? बताओ। यह किसी का भी गलत नहीं होना चाहिए। सबका उत्तर सही। हां। बहुत अच्छे। कपास किसका प्रतीक है? प्रकाश का, कोमलता का, सफेदी का या शांति का? हां
1:46:32 समय समाप्त प्रकाश है ये कोमलता का प्रतीक है। किसका प्रतीक है? कोमलता का प्रतीक है। विकल्प बी सहयोग हो जाएगा। और यह पतंग नामक जो कविता है, इसके लिखने का तरीका भी कैसा है? लिखने की शैली कैसी है? तो प्रतीकात्मक है। इसके बारे में भी हमने बात की है। तो कोमलता का प्रतीक हो जाएगा कपास। 95.59% विद्यार्थियों ने सही उत्तर दिया है। वेरी गुड। बहुत अच्छे। हां। क्या बात है भाई। वॉइस प्रॉब्लम।
1:47:17 अभी ठीक करवाते हैं भाई।
1:49:21 अब बताइए भाई कैसी है आवाज? हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो हेलो जल्दी से कमेंट बॉक्स में बताइए। रेडी है तो थम्स अप दिखा दीजिए। फिर अपनी क्लास को जल्दी से शुरू कर दे हैं। ओके बिल्कुल बहुत-बहुत धन्यवाद टेक्निकल टीम का। बिल्कुल। तो बात कर रहे थे हम यहां पर पतंग कविता में कपास किसका प्रतीक है? तो
1:50:07 कपास कोमलता का प्रतीक है। यहां पर 95.59%ेज विद्यार्थियों ने सही उत्तर दिया है। क्या बात है। सभी के थम्स अप आ रहे हैं। भाई सहर्ष स्वीकार हैं आपके। विनीता प्रजापत, नमन, राहुल गोयल, नहीं राणूलाल गोयल, जय मदेना और शांतिनाथ टॉप कर रहे हैं इस प्रश्न को। बहुत अच्छे। फिर बढ़ते हैं आगे अगले प्रश्न के लिए। पतंगों के साथ-साथ वे भी उड़ रहे हैं। बच्चों का उड़ान से कैसा संबंध बनता है? उसके बारे में हमें बात करनी है। तो बात करते हैं यहां पर। बिल्कुल। जिस तरह पतंग ऊपर और ऊपर उड़ती जाती है, ठीक उसी तरह बच्चों की आशाएं भी उड़ती
1:50:53 जाती है। पतंगों के साथ-साथ उनकी भावनाएं भी उड़ती है। अर्थात उनके मन में नई-नई इच्छाएं और उमंगे आती रहती है। वे भी आसमान की अनंत ऊंचाइयों तक पहुंच जाना चाहते हैं। ताकि अपनी हर इच्छा पूरी कर सके। आपके घर में छोटे भाई बहन हैं, भतीजा भतीजी है, भांजा, भांजी है। उनको देखना।
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