Modern Life Ka Sabse Bada Jhooth - Professor Shiv Darshan Malik | The Nisha Sharma Show

संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में, डॉक्टर शिवदर्शन मलिक जी, निशा शर्मा के साथ एक साक्षात्कार में, आधुनिक जीवनशैली के विपरीत, देसी जीवन जीने के महत्व पर जोर देते हैं। वे बताते हैं कि कैसे शिक्षा और बाजारीकरण ने हमें प्रकृति से दूर कर दिया है और एक अस्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर मजबूर कर दिया है। वे प्राकृतिक जीवनशैली को अपनाने, आत्मनिर्भर बनने और धरती को बचाने के लिए प्रेरित करते हैं।

मुख्य बातें:

  • आधुनिक शिक्षा और बाजारीकरण के प्रभाव
  • देसी जीवनशैली का महत्व और लाभ
  • प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके आत्मनिर्भर बनना
  • पर्यावरण संरक्षण और नेट जीरो कार्बन लाइफस्टाइल

परिचय

डॉक्टर शिवदर्शन मलिक जी का परिचय दिया जाता है, जो केमिस्ट्री में पीएचडी धारक हैं और प्रोफेसर रह चुके हैं। वे आधुनिक जीवनशैली के विपरीत, देसी जीवन जीने और देसी तौर-तरीकों को बढ़ावा देने के लिए जाने जाते हैं। निशा शर्मा उनके इस प्रयास की सराहना करती हैं और उनसे इस यात्रा के बारे में जानने की इच्छा व्यक्त करती हैं।

शिक्षा और डर का माहौल

डॉक्टर मलिक बताते हैं कि आज की शिक्षा प्रणाली बच्चों को बचपन से ही डराती है, उन्हें फेल होने का डर दिखाती है। वे अपना उदाहरण देते हैं कि कैसे उन्होंने 12वीं कक्षा में फिजिक्स के एक एक्सपेरिमेंट के दौरान प्रोफेसर के साथ बहस की, क्योंकि वे देसी भाषा और तरीके से सीखना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि नौकरी करना ही जीवन का लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि आत्मनिर्भर बनना चाहिए।

नौकरी और कंपनी का जाल

डॉक्टर मलिक बताते हैं कि नौकरी तो 1757 में कंपनियों के आने के बाद शुरू हुई, उससे पहले लोग आत्मनिर्भर थे। वे कहते हैं कि हम नौकर बनने के लिए पैदा नहीं हुए हैं। आज हम जो भी कमाते हैं, वह कंपनियों के लिए कमाते हैं। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, हम हर चीज किसी न किसी कंपनी की इस्तेमाल करते हैं। इसलिए हमें खुद के लिए कमाना चाहिए और आत्मनिर्भर बनना चाहिए।

खेती और प्रकृति से दूरी

डॉक्टर मलिक बताते हैं कि उन्होंने बीएससी और बीएड करने के बाद एमएससी और पीएचडी भी की, लेकिन इस दौरान वे अपने गांव और खेती से दूर हो गए। उन्होंने कभी खेत में काम नहीं किया, इसलिए वे खेती के लिए अनफिट हो गए। वे कहते हैं कि हमें अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहिए और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीना चाहिए।

वापसी की प्रेरणा

डॉक्टर मलिक बताते हैं कि एक समय था जब मिट्टी के घर और चूल्हे आम थे, लेकिन हम उस पैटर्न से भटक गए। अब हमें दोबारा ईंटें बनाना और घर बनाना सीखना पड़ रहा है। वे बताते हैं कि गुरुकुल में शिक्षा के दौरान उन्हें राष्ट्र, मिट्टी और गाय के महत्व का ज्ञान हुआ। विज्ञान की पढ़ाई के दौरान उन्होंने जाना कि डीजल, पेट्रोल और एलपीजी धरती के लिए अच्छे नहीं हैं।

प्रकृति को बचाने की शुरुआत

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि जब उन्हें समझ में आया कि प्रकृति खराब हो रही है, तो उन्होंने इसे बचाने की शुरुआत की। वे लोगों को समझाने लगे और जो समझ गए, वे उनके साथ चलने लगे। वे कहते हैं कि इस रास्ते पर चलने से प्रकृति भी बचेगी, शरीर भी बचेगा और संतोष भी मिलेगा, जो सबसे बड़ा धन है।

गलत मकान और उसका प्रभाव

डॉक्टर मलिक अपने एक अनुभव को बताते हैं कि कैसे एक बार रात में लाइट चली जाने पर उनके एसी बंद हो गया और उन्हें गर्मी लगने लगी। तब उन्हें एहसास हुआ कि उनका मकान गलत है। वे कहते हैं कि 40% हीट छत से आती है, इसलिए छत बदलनी चाहिए। हमारे पूर्वज लकड़ी की छत में रहते थे, जो खेत में ही मिल जाती थी।

बाजार और गुलामी

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि आज बाजार हमें अपनी तरफ खींच रहा है और हमें गुलाम बना रहा है। जब हमें यह पता चल जाएगा कि हम कमाई कंपनियों के लिए कर रहे हैं, तो हम खुद के लिए कमाना शुरू कर देंगे। वे बताते हैं कि उनका बिजली का बिल जीरो है, क्योंकि वे कंपनी के लिए नहीं कमाते। वे प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीते हैं और अपने मल-मूत्र को भी खेत में वापस देते हैं।

शहरों की समस्याएँ

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि शहरों में सबसे ज्यादा प्रदूषित हवा और मोल का पानी मिलता है। वहां धूप भी नहीं होती, इसलिए स्वस्थ रहना मुश्किल है। वे बताते हैं कि रोहतक में 250 गज जमीन खरीदने की बजाय उन्होंने उतने ही पैसे में 25 किले जमीन खरीद ली, जहां वे अपनी मर्जी से रह सकते हैं।

अपशिष्ट और प्रदूषण

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि हमारे देश में दो चीजें सबसे ज्यादा दूषित कर रही हैं: पैकेट्स और मल-मूत्र। पहले मल-मूत्र खेत में खाद का काम करता था, लेकिन अब यह गंदगी बन गया है। वे कहते हैं कि शहरों को गांव की तरह बनाना चाहिए, ताकि लोग प्राकृतिक तरीके से रह सकें।

मृत घर और श्मशान घाट

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि जिस घर में वे बैठे हैं, वह मृत घर है, श्मशान घाट है। वे बताते हैं कि एक ग्राम उपजाऊ मिट्टी में तीन से पांच करोड़ जीवाणु होते हैं, लेकिन ईंटों को जलाने में 100 अरब जीवाणुओं की हत्या हो जाती है। वे कहते हैं कि हम धरती को श्मशान बना रहे हैं।

स्वस्थ घर और जीवन

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि हमें पहले जैसे घर बनाने चाहिए, जैसे हमारी दादी और दादा के समय में थे। वे बताते हैं कि 90 के दशक के बच्चों को दोनों जिंदगियां देखने को मिली हैं, इसलिए वे पहले के जीवन को अच्छा मानते हैं। वे कहते हैं कि लोगों का माइंडसेट बदल रहा है और वे गांव में खेत लेकर सब्जी उगाना और छोटा सा घर बनाकर रहना चाहते हैं।

हवा, पानी और भोजन

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि आदमी के लिए सबसे ज्यादा जरूरी हवा है। अगर हवा शुद्ध नहीं है, तो हम स्वस्थ नहीं रह सकते। वे कहते हैं कि हमें ऐसे घर बनाने चाहिए जिनमें एसी और कूलर की जरूरत न हो। वे बताते हैं कि वे तीन साल तक रेगिस्तान में बिना एसी और पंखे के रहे और सरकंडे ने उनका साथ दिया।

प्रकृति का धन

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि प्रकृति हमें रोटी, कपड़ा और मकान तीनों दे रही है, लेकिन हम अप्राकृतिक तरीके से वो चीजें प्राप्त करते जा रहे हैं। वे बताते हैं कि पहले तालाबों का पानी साफ होता था, लेकिन अब वे खत्म हो गए हैं। वे कहते हैं कि विकास को एजुकेशन कहना बढ़िया है, लेकिन वे डीएजुकेट होना चाहते हैं।

एजुकेशन और गुलामी

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि इतना बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन एजुकेशन के कारण हुआ है। वे संस्कृत के एक श्लोक का उदाहरण देते हैं कि दुश्मन को काबू करने का तरीका है उसके बच्चों को खराब कर दो। वे कहते हैं कि भारत बहुत ही समृद्ध और स्किल्ड देश था, लेकिन उसे बर्बाद करने के लिए हमारे बच्चों को हमसे दूर ले जाया गया और उन्हें गुलाम बनाया गया।

जातियाँ और ज्ञान

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि भारत में जातियाँ ज्ञान का भंडार थीं। हर जाति के लोग अपनी स्किल के हिसाब से काम करते थे। वे बताते हैं कि पहले गांव में दुकानदार नहीं होते थे, बल्कि लोग अपनी जरूरत का सामान आपस में बदल लेते थे।

स्लो पोइजनिंग

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि गांव में रहने वालों को गवार कहा जाता है, जो एक स्लो पोइजनिंग है। जब कोई बार-बार गवार कहेगा, तो वह अपना सब कुछ बेचकर शहर में चला जाएगा और वहां बीमारी और दवाई खरीदेगा। वे कहते हैं कि कंपनियों को दवाई बेचने के लिए आपको बीमार भी किया जाता है।

हाई कार्बन डाइऑक्साइड जोन

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि आज हमारे घर हाई कार्बन डाइऑक्साइड और लो ऑक्सीजन जोन बन गए हैं। वे कहते हैं कि हमें ऐसी लाइफ जीनी चाहिए जो प्राकृतिक हो। वे बताते हैं कि भारत के लोगों के पास जमीन है, लेकिन वह खाली पड़ी है।

खेती बेचकर प्लाट

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि लोग खेत बेचकर प्लाट खरीद रहे हैं, जो मूर्खता है। हमारे पास हर जगह पानी और बिजली है, तो हमें शहर में क्यों जाना चाहिए? वे कहते हैं कि हमें अपने बच्चों को स्किल देनी चाहिए और आत्मनिर्भर बनाना चाहिए।

बाबू की सीख

डॉक्टर मलिक बताते हैं कि उनके बाबू ने उनसे कहा था कि वे उन्हें एक ईंट भी नहीं देंगे, लेकिन उन्होंने फिर भी अपना जीवन बना लिया। वे कहते हैं कि उन्होंने किसी से कुछ नहीं मांगा और वे अच्छी तरह से कमा रहे हैं और खा रहे हैं।

दिल्ली के मूर्ख

डॉक्टर मलिक बताते हैं कि सुभाष चंद्रा ने उन्हें अपने शो में बुलाया था और उन्होंने कहा था कि दिल्ली में रहने वाले मूर्ख हैं, क्योंकि वहां की हवा बहुत खराब है। वे बताते हैं कि वे ऐसी जगह पर रहते हैं जहां का एक्यूआई 50 से ऊपर नहीं जाता।

फार्म स्टे का कांसेप्ट

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि अगर आप गांव में जाकर नेचुरल कॉटेज बना लें, तो वीकेंड पर लोग वहां आना चाहेंगे। आप उन्हें चूल्हे की रोटी, खिचड़ी और दलिया दे सकते हैं। वे कहते हैं कि हमें अपनी मानसिकता बदलनी होगी और नौकर बनने की बजाय मालिक बनना होगा।

बुजुर्गों की सीख

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि हमारे बुजुर्गों ने ही हमें नौकर बनाया है। पहले ब्याह में एक आधा आदमी सरकारी नौकरी वाला होता था, जिसे बौद्धिक माना जाता था। वे कहते हैं कि पहले पैसे की जरूरत नहीं थी, क्योंकि लोगों के पास अनाज होता था।

दादी का धन

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि जो लोग कहते हैं कि हमारे बुजुर्गों के पास कुछ नहीं था, वे मूर्ख हैं। वे बताते हैं कि उनकी दादी के पास बहुत सोना और चांदी था। वे कहते हैं कि असली धन पशु धन, सोना चांदी और जमीन धन था।

बाजारवाद से बचाव

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि वे धरती का सबसे मुश्किल काम कर रहे हैं, क्योंकि एक तरफ बाजार है जो हमें अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रहा है और दूसरी तरफ वे लोगों को बाजारवाद से बचाकर आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। वे कहते हैं कि हमें बताया गया है कि हमारी चीजें खराब हैं और हमें विकास करना चाहिए।

इंग्लैंड का अनुभव

डॉक्टर मलिक बताते हैं कि वे इंग्लैंड गए और वहां उन्होंने देखा कि सबसे धनी आदमी गांव में रहते हैं। वे एक ऐसे आदमी के घर गए जिसने अपने घर के बाहर मोर बना रखे थे। वे बताते हैं कि इंग्लैंड में मोर का मतलब है कि वह आदमी भारत से इंस्पायर्ड है।

सुपर लोग

डॉक्टर मलिक बताते हैं कि सुपर लोग वे हैं जो मल्टीनेशनल कंपनियां चलाते हैं। वे कंट्री साइड में एकांत में रहते हैं। वे एक ऐसे आदमी के घर गए जिसका घर गोल झोपड़ी जैसा था और ऊपर सरकंडा था।

नेट जीरो कार्बन लाइफस्टाइल

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि हमें नेट जीरो कार्बन लाइफस्टाइल की तरफ बढ़ना है। इसका मतलब है कि जितना कार्बन हमने एमिशन कर लिया है, उसे खत्म करना है। वे कहते हैं कि सरकार कुछ भी नहीं है, वह सिर्फ टैक्स कलेक्ट करती है और मल्टीनेशनल कंपनियों को दे देती है।

एलपीजी और निर्भरता

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि एलपीजी उस कंपनी की है जो प्रयास करे आपके। वे कहते हैं कि शहरों में हमेशा श्रमिक और नौकर रहता है। अमीर वह है जिसके पास अपना ईंधन, अनाज और धरती है।

गांव की तरफ वापसी

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि जो समझदार हैं, वे गांव की तरफ भाग रहे हैं। वे बताते हैं कि पहले गांव में जो लड़का टॉप करता था, उसे कंपनी उठा ले जाती थी और वह गांव से भाग जाता था। लेकिन जब उसकी चेतना जागृत होती है, तो वह वापस गांव में आता है।

वानप्रस्थी और सन्यास

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि पहले जीवन के चार हिस्से होते थे: विद्या ग्रहण करना, वंश वृद्धि करना, वानप्रस्थी बनना और सन्यास लेना। वे बताते हैं कि वे 50 क्रॉस करते ही वानप्रस्थी बन गए थे और जंगल में चले गए थे।

धरती का दान

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि धरती हमें रोटी, कपड़ा और मकान तीनों देती है, लेकिन हमने तीनों चीजें बाजार में देनी शुरू कर दी हैं। वे कहते हैं कि आज रोटी भी शुद्ध नहीं है, कपड़े भी अशुद्ध हैं और मकान भी अप्राकृतिक हैं।

मकान और विनाश

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि मेरा मकान बने है और घर उजड़े है अनेक जीवो का। वे बताते हैं कि मकान बनाने के लिए धरती को खोदा जाता है और उससे कितने जीवों का घर बर्बाद हो जाता है। वे कहते हैं कि मकान बनाकर हवा खराब कर दी जाती है।

अस्पताल और लूट

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि आजकल जन्म भी अस्पताल में होता है और मरण भी अस्पताल में। इन दोनों अवसरों पर सबसे ज्यादा पैसे लूटे जाते हैं। वे कहते हैं कि पहले दाई होती थी, जो श्रद्धा से सामान लेती थी।

स्वतंत्र चिंतन

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि आज हमारा शरीर भी कंपनियों का है, हम कमाते भी कंपनियों के लिए हैं और हम सोचते भी कंपनियों के लिए हैं। हमारा स्वतंत्र चिंतन भी नहीं रहा। वे कहते हैं कि हमें आदमी बनना चाहिए।

सीखने की प्रक्रिया

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि वे लोगों को सिखा रहे हैं कि कैसे प्राकृतिक घर बनाया जाए। वे पांच दिन का कैंप लगाते हैं, जिसमें वे बेसिक्स बताते हैं। वे कहते हैं कि प्राकृतिक मकान बनाने से पैसे की बचत होती है और घर का शुद्धिकरण भी हो जाता है।

क्लासेस और संपर्क

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि जो लोग उनसे जुड़ना चाहते हैं और चीजें सीखना चाहते हैं, वे उनके व्हाट्सएप नंबर 9812056982 पर संपर्क कर सकते हैं। वे अपना नाम, पता और पर्पज लिखकर छोड़ दें। वे पहाड़ों में क्लासेस देते हैं।

निष्कर्ष

डॉक्टर मलिक कहते हैं कि हमें आगे बढ़ना है और अपनी गलतियों से सीख लेकर आगे बढ़ना है। निशा शर्मा उनका धन्यवाद करती हैं और कहती हैं कि जो लोग उनसे जुड़ना चाहते हैं, वे उनके नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।

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Transcript

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0:00 जहां लोग शहरों की तरफ, शीशे और सीमेंट के घरों की तरफ, फ्लोर पे फ्लोर, बिल्डिंग्स पे बिल्डिंग्स, व्हीकल्स, टेक्नोलॉजी और उन सभी मटेरियलिस्टिक चीजों की तरफ जान लाग रहे हैं। कोई एक इंसान ऐसा भी है जिन्होंने केमिस्ट्री से पीएचडी कर रखी है। एक टाइम पर प्रोफेसर रह चुके हैं। लेकिन इतनी सारी हर तरीके की आजादी होने के बावजूद देसी रहना, देसी खाना और लोगों ने भी देसी तौर तरीके से खान लागे हैं। पर सर आपने नहीं लगता कि ये टफ है क्योंकि आज का टाइम तो जिन्हें अब जैसे मैं बेशक पीएचडी या कुछ भी कर रही हूं लेकिन मैंने इंग्लिश ना आती हो तो किसी भी कंपनी में जॉब ना मनने तो नौकरी ना कीजिए घास खोद खाइए और जा आसपास आप दूर जाइए हम नौकर बन खातिर जब पैदा होंगे बेटी के घर में चूल्हे ये तो बिल्कुल कॉमन

0:45 थे सब घरों में थे मतलब सब चीजें खराब होती जा रही है हम इस तरफ डाइवर्ट हो रहे हैं हमने वापस उस जगह आना चाहिए इसमें काम आप कहां क्लिक होया अपन वापस आवांगे वापस कोई नहीं जागा आगे आगे बढ़ना है। विज्ञान के अंदर किताब के अंदर साफ लिख रखा है कि ये जो डीजल है, यह पेट्रोल है, यह जो एलपीजी है, ये जो कौशल फ्यूल है, यह धरती के लिए अच्छे नहीं है। अब जैसे मैं पढ़ लिख ली, मेरा सबसे पहले क्या सपना होगा? भाई, मैं अपना घर बनाऊं, मेरे पे गाड़ी वो लोग सपने ये देख रहे हैं। जब ये पता चल जाएगा कि तू कमाई कंपनी के ले रहा है। उठते तने ब्रश करा है किसी कंपनी का होगा। उठते ही पेस्ट करा किसी कंपनी का होगा। फिर तू स्कूटर लेके बाहर निकली भाभी किसी कंपनी के। फिर तने तेल लिया, डीजल लिया किसी कंपनी का। फिर बिजली लीवा कंपनी की तो क्या खाता कमा कंपनियां खाते कहीं ना कहीं 90 जितने भी मेरे आसपास लोग

1:31 हैं ना उनके दिमाग में यह चीज आ चुकी है भाई पहले का जीवन ही अच्छा था ऐसे घर और सब चीजें बनाना सब्जियां उगाना ये सिखा देखो ऐसे है ये जो धरती है ये हमें तीनों चीज देती थी देती है देती रहेगी रोटी कपड़ा और मकान हम न्यू क्योंकि आंकड़ा एक पृथ्वी गोल है क्योंकि जहां लोग शहरों की तरफ, शीशे और सीमेंट के घरों की तरफ, फ्लोर पे फ्लोर, बिल्डिंग्स पे बिल्डिंग्स, व्हीकल्स, टेक्नोलॉजी और उन सभी मटेरियलिस्टिक चीजों की तरफ जान लाग रहे हैं। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं कोई एक इंसान ऐसा भी है जिन्होंने केमिस्ट्री ते पीएचडी कर रखी है। एक टाइम पर प्रोफेसर रह चुके हैं। लेकिन इतनी सारी

2:18 हर तरीके की आजादी होने के बावजूद देसी रहना देसी खाना और लोगों ने भी देसी तौर तरीके सिखान लाग रहे हैं। राम राम जी आप सारा ने द निषा शर्मा शो देसी बोलबाला में आपका बहुत-बहुत स्वागत है। और आज के हमारे गेस्ट हैं डॉक्टर शिवदर्शन मलिक जी। राम राम सर कैसे हो आप? राम राम राम। बढ़िया। कैसा चल रहा है सर? आजकल हमने आपकी बहुत सारी वीडियोस देखी हैं और पता नहीं क्यों इतने मटेरियलिस्टिक समाज में रहते हुए भी आपकी वीडियोस देख के ऐसा हो जाए कि मतलब ककर मूव करें इस तरफ बहुत सिंपल आप वो लाइफ जी रहे हो हम तो ककर शुरू होया सब कुछ एक होती है इच्छाशक्ति हम आज की जो एजुकेशन है ना

3:03 हम या एजुकेशन हमने बचपन ते डराना सिखा हम तू फेल हो जाएगा हम तू फेल हो जाएगा तो फिर आप फेल होने से डर लग जा हम मैं क फेल होने से नहीं डरा हम 12वीं में था एक्सपेरिमेंट था फिजिक्स का हम गर्म पानी ठंडा कैसे होता है और उसका टाइम के साथ क्या संबंध है हम इ वो 60 डिग्री पे है ये 50° पे कदा होगा 40 पे कदा होगा 30 पे कदा तो मैंने पहला ताता पानी चाहिए तभी वो ठंडा होएगा। हां प्रोफेसर था उस दिन गैस नहीं थी। हम मैंने कहा प्रोफेसर साहब गैस नहीं है। ताता पानी तो को ना हम

3:49 उसने ये सुनते ही ताता पानी तो को मेरे सर पे चढ़ गया। भाई ताता पानी मेरा भी छो उठ गया। मैं प्रोफेसर किसने बना दिया? ताता पानी का नहीं मेरा। हां। डोंट यू नो व्हाट इज ताता पानी? हां। हो गई। उन्होंने ताता पे छूट गया उनका। ताते ऊपर छोड़ गया। अच्छा हम डॉक्टर साहब मनने आप फिजिक्स पढ़ाओ हम अंग्रेजी में ना पढ़ाओ हम ताता पानी में रोहतक के कॉलेज में अपने घर पे नहीं बोलूंगा अपनी बोली बोलूंगा कि जाके बोलूंगा बोला मैं तने फेल कर दूंगा मैं तूने पास करनी हो गुण हम पास मैं उसी दिन हो गया था जिस दिन मैंने मेरी मां का जन्म लिया था तू फेल करेगा मैंने हम होगी तो तू मैं तो जो फिजिक्स के 70 नंबर थे थ्योरी के उसमें

4:35 तो मेरे आए 69 हम और प्रैक्टिकल में 30वां दे गया तेरा दे दे के असर पड़ा मेरे सिर पे तो मैं तने फेल कर दूंगा मैं तेरा न्यू कर दूंगा तू सक्सेसफुल हो जा अच्छा मतलब मैंने मानव जीवन में जन्म ले लिया सक्सेसफुल नहीं है जब मैं कि जाके चपड़ासी लाऊंगा उस दिन मैं सक्सेस बनूंगा हम गुलाम बनना नौकर बनना हम ये हमें कौन पढ़ा रहा है एजुकेशन एजुकेशन तो बी एजुकेट हो जाओ हम मानव बन जाओ इस तरफ सिर्फ अपने आप आ जाओगे हम पर सर आपने नहीं लगता कि ये टफ है क्योंकि आज का टाइम तो जिन्हें अब जैसे मैं बेशक पीएचडी या कुछ भी कर रही हूं लेकिन मैंने इंग्लिश ना आती हो तो किसी भी कंपनी में जॉब ना जॉब तो ना करनी यही तो मैं कहूं हूं फिर सारे लोग क्यों कर देसी काम

5:21 सारे जबती जॉब ना थी जब वो सारे भूखे मार थे जॉब तो ही भाई है जॉब क्रिएशन किसने करा है कंपनी ने कंपनी कदा आई थी 1757 में प्लासी शुरू हुआ था हम 18 57 में तो हमने कम से कम लड़के बाहर का दिए हम उसके बाद तो जॉब क्रिएट हुई है हम उससे पहले कौन जॉब था नौकरी ना कीजिए घास खोद खाइए और जावे आसपास आप दूर जाइए हम हम नौकर बन खातिर पैदा हो गए शब्द ऐसे गढ़ दिए कि हम उसकी तरफ चल पाते और उसी टाइप से हमें ट्रेनिंग दे दी गई हम ट्रेनिंग भी हमें उसी टाइप से दी है मैं जिस दिन मैंने बीएससी ऑनर्स करी थी हम उसके बाद बीएड करी थी बीएड करते सबसे पहले दबाव आया था बाबू मास्टर लग जाए ना पढूंगा

6:08 एमएससी कर ली एमएससी करते ही फिर आ गया मैं तनख वो नहीं दूंगा फीस नहीं दूंगा हम ना दे फीस ट्यूशन कर लूंगा आगे पढूंगा फिर पीएचडी कर ली पीएचडी करने के बाद मैं बंद गया क्यों कदे बचपन में तो मैंने गांव भैंस चराई थी हम कदे बचपन में तो खेत में गया था कदे बचपन में तो मैंने काका के बाबू के हका मैंने काम करा था हम लेकिन बीच का जो 20 साल का समय था मेरा हम पीएचडी तक का उसमें तो मैंने डोला भी ना देखा मेरा मेरा खेत में गया ही नहीं तो मैं पहला जो काम है उत्तम काम खेती उसके लिए तो मैं अनफिट हो गया हम क्योंकि उसकी मेरी ट्रेनिंग ही नहीं हुई उसको मैंने पता ही नहीं खेती हो के है नाम तो मैं जाट हूं लेकिन मैं कभी खेत में गया ही नहीं तो किस नाम का किसान होया

6:55 तो सर जैसे अपने टाइम पे ये तो अपने नॉर्मल थे ये मिट्टी के घर में चूल्हे ये तो बिल्कुल कॉमन थे सब घरों में ही थे हम तो आपने इस चीज में काम करना देखो जैसे आपने भी कहा आप नौकरी करना मतलब घर का प्रेशर था कि इतनी पढ़ाई कर ली तो नौकरी अलग हम तो आपका पहले से ही पैशन था मतलब कि मतलब सब चीजें खराब होती जा रही है हम इस तरफ डाइवर्ट हो रहे हैं हमने वापस उस जगह आना चाहिए इसमें काम आप कहां क्लिक होया आपने वापस कोई नहीं जाता हम हम आगे बढ़ते हैं हम आप वापस आवांगे वापस कोई नहीं जाओगा आगे बढ़ना है हमने गलतियां की है ये हमें स्वीकार करना पड़ेगा हम मैंने जो है मैं जितने भी जीव है धरती पे जिसको भी मकान बनाने की जरूरत है वो सभी

7:40 घास फूस और मिट्टी में रहते हैं। मतलब वापस जाना मैं किस सेंस में बोल रही हूं कि एक टाइम तो हम नॉर्मली भाई ऐसे घरों में रह रहे हैं। हमारे लिए कुछ बड़ी बात नहीं है। मिट्टी के घर हमारे सबके मिट्टी के हैं। सबके घरों में चूल्हे हैं। गैस है ही नहीं। लेकिन हम एक उस पैटर्न पे भटक गए। हमारे पे गैस है, व्हीकल्स है, सिमिटेड घर हैं। हमने दोबारा जोकर आप सिखा रहे हो लोगों ने किस ककर ईंट बनाओ, ककर घर बनाओ। तो उस पैटर्न पे हमने जाना पड़ रहा है। सीखने की जरूरत पड़ रही है। हां सीखने की जरूरत पड़ेगी। तो आपके दिमाग में वो चीज कहां क्लिक हुई कि चीजें तो खराब हो रही है। मने शुरू करना पड़ेगा कहीं ना कहीं से। ये तो अंदर से आता है। हम ये चीज कोई बताता नहीं है। हम जब मैं गुरुकुल में था उस टाइम पे ये चीजें हम राष्ट्र क्या है? मिट्टी क्या है? गाय क्या है? हम हमारा संस्कार क्या है?

8:25 हम उस टाइम पे वो बीज पड़ा। हम बीज पढ़ने के बाद फिर विज्ञान लिया। विज्ञान के अंदर किताब के अंदर साफ लिख रखा है कि यह जो डीजल है, यह पेट्रोल है, यह जो एलपीजी है, यह जो फोसिल फ्यूल है, यह धरती के लिए अच्छे नहीं है। यह कार्बन एमिशन कर रहे हैं और कार्बन बहुत ज्यादा बढ़ता जा रहा है। कार्बन ज्यादा बढ़ेगा तो ग्लोबल वार्मिंग भी हो रही है और उसके साथ क्लाइमेट चेंज भी हो रहा है। क्लाइमेट चेंज होगा तो अनाज क्यों करेगा हम गेहूं के टाइम पे गेहूं खड़े हैं। इब ओले पड़ ला रहे हैं। इब मी बरस ला रहा है। यही तो क्लाइमेट चेंज हो है। हम सामान जो है सूखा निकल जाए। खराब हो रहा है सब है ना? तो सारी चीज़ खराब हो रही है। पूरी प्रकृति खराब होने लग रही है। तो कोई ना कोई तो शुरुआत करेगा ना प्रकृति ने बचाने की समझ समझा की। तो पहले तो मैं समझा मैं लोग ने समझाने ला रहा हूं। जिसके समझ में आने लाग रहा है वो इस रास्ते पे चलने लाग रहा है। हम

9:11 इस रास्ते पे आपकी प्रकृति भी बचा है। आपका शरीर भी बचा है। और आपका जो संतोष है हम सबसे बड़ा धन है ना यू कौन है कोठे बंगले सबसे बड़ा धन है संतोष। हम गाजे धन बाजे धन और रतन धन खान सुना होगा ना जब आया संतोष धन सब धन धोरी समान मेरे दो यो भाई आया था मैंने अपनी इसकी कोठी भी दिखाई आज की को हम ठीक है 84 की है मैंने सारी चीज दिखाई मैंने वो चीज देख ली ना हम देखने के बाद मुझे पता चला मैं गलत हूं हम इब रात ने चली गई लाइट एसी मेरा हो गया बंद 4 घंटे के बाद रात ने अगर 3:00 बजे मेरे शरीर के अंदर से पसीना निकल रहा है हम गर्मी के अंदर तो वो गलती किसकी है? मकान की। हम

9:56 गलती किसकी है? सिलेंटर की जो मैंने बनाया ऊपर तो लो ला लिया मैंने। बाहर टेंपरेचर 50 है। वो सारे दिन वो 50 से वो सूखेगा टेंपरेचर। रात ने जब बाहर टेंपरेचर 32 आ गया। जब वो 50 से 48 पागा, फिर 46 पागा, फिर 44 पागा, फिर 42 पागा, इतना तड़का हो जाएगा। हम है ना? तो मकान गलत हुआ कि नहीं हुआ? तो मकान गलत है। ठीक करना पड़ेगा। ठीक करना पड़ेगा तो के चाहिए 40% हीट छत में आवे है तो छत बदल लो हमारे बूढे लकड़ छत में नहीं रहा करते हां कड़ कड़ की छत में नहीं रहा करते ब्रम के करते कड़ी कित हो आवे है मेरे खेत में कितवे है मेरे खेत में हम मैं क्यों जो है किसी का माल लूं मैं क्यों कंपनी सौदा खरीदूं जब मेरा उधर खेत रहा

10:42 न्यूनते प्रकृति बचेगी न्यूनत मेरी आमदनी नहीं बढ़ेगी न्यूनते मेरा शरीर ठीक रहेगा पर आपने कहीं न लगे है सर क्योंकि ये चीज करनी अरे लानी इंप्लीमेंट करनी थोड़ी टफ हो रही है आपके लिए भी इजी है क्योंकि सब लोग डिग्री कर करके तो अब जैसे मैं पढ़ लिख ली मेरा सबसे पहले क्या सपना होगा भाई मैं अपना घर बनाऊं है ना ऐसा घर हो इतने फ्लोर्स हो या हमारे पास गाड़ी हो लोग तो सपने ये देख रहे हैं वो के वजह है क्यों लोगों ने उस तरफ डाइवर्ट होना चाहिए मतलब हम हम मैं जैसे मैं आपकी बातें समझ गई कि हमने क्यों उस तरफ जाना चाहिए लेकिन लोग मेहनत तो उस चीज के लिए नहीं कर रहे हैं ना तो ककर किया जाता है। हम आज जो है आपको मार्केट अपनी तरफ खींच रही है। हम ठीक है ना? इन्फ्लुएंस हो रही है। हां मार्केट अपनी तरफ खींच रही है। जब ये पता चल जाएगा कि तू कमाई कंपनी के लिए रहा

11:28 है। हम नौकर नौकर बनके पहली बात तो मालिक रहा ही नहीं। गुलाम बन गया और गुलाम तो किस खातिर कमा होगा? मालिक। मालिक के लिए और मालिक कौन है? मालिक है कंपनी। कंपनी तड़के उठी है तू। उठते ही तने ब्रश करा है। किसी कंपनी का होगा। उठते ही पेस्ट करा है। किसी कंपनी का होगा। फिर तू किसी पोर्ट पे बैठी है किसी कंपनी के होगे किसी टूटी तने चलाई है किसी कंपनी के हो गई हम पानी जो तेरे घर आया है उस खातिर तू पैसे देने लाग रही है उसके बाद फिर तू खड़ी हुई हां तने जूती पहरी चप्पल पहरा वो किसी कंपनी की है फिर तू स्कूटर लेके बाहर ले खड़ी वो भी किसी कंपनी का है फिर तूने तेल लिया डीजल लिया वो किसी कंपनी का है फिर तने बिजली ली वो भी किसी कंपनी की है हम तू क्या खातिर कमावे तू कंपनियां खातिर हम तो मैं कंपनियों के लिए क्यों कमाऊं मैं

12:13 खुद के लिए क्यों नहीं कमाऊं ये मेरा जो है ना जो बिल है वो जीरो है। हम मैं कंपनी के लिए कमाता ही नहीं। मैं तड़के उठो मेरा उड़े जो है राख धरी है। मेरा उड़े वो है दातन है। चारों ओर जंगल है। खूब सारी दातन अलग-अलग हैं। मैं कदे कह दातन करूं। कदे कह दातन कर लो। हम ठीक है। उसके बाद मैं किसी कंपनी के पोट पे ना भागता। हम क्योंकि मुझे पता है कि मेरा जो मल है उसके ऊपर धरती के जीवों का हक है। जीवाणुओं का हक है। हम मैं तो खाऊं ना जंगल बांध ले ना तो मेरा भी तो कुछ बनता होगा फर्ज जंगल को वापस देने का जंगल पानी जाना हम पहले जाया कर हां जंगल पानी जाना उसका अर्थ यही है कि

12:58 भाई इस खेत में तो तने लिया है तो इसका तू कर्ज तार हम और वो कर्ज कैसे तार सकूं दो ही चीज़ हैज़ मेरे धरे देने ने मेरा मल और मेरा मूत्र हम तो मेरा मल और मेरा मूत्र खेत में जाना चाहिए हम कंपनी कट गई बीच में से उसके बाद में मैंने मेरा मकान बनाने का नंबर आया तो मकान मैंने किस चीज का ले लिया मेरे के अंदर सरकंडे खड़े हैं। हम मेरे खेत में माटी भी है। मेरे द्वारा गांव बलद भी है। गोबर भी है। तो बिल्डिंग मटेरियल तो मेरे पास है। मैंने बड़ी बिल्डिंग बना ली। अब वो बिल्डिंग बन गई। जब मैं उस रास्ते पे चलता तो मैंने कि शहर के अंदर प्लॉट ले लो। पोस्ट कॉलोनी में क्यों ले लूं भाई? जी सबसे ज्यादा प्रदूषित हवा है। जी पानी भी मोल का मिले है। जी मैं बाहर लड़ नहीं सकता। धूप है ही नहीं। वहां पे स्वस्थ रह लूंगा। तो पहला सुख के

13:45 है निरोगी काया निरोगी काया खोकर मैं के कर लूंगा तो मनने वो रास्ता छोड़ दिया आ जो है जब रोहतक में जमीन ल ना तो रोहतक में मेरे धरे जमीन आवे मुश्किल से 250 गज हम ₹ लाख में जी तो इब मैं रहूं उले आ गए उतने पैसे में उतने पैसे में हम 25 किले आ गए इ 25 किले मेरे हो गए जो मर्जी रहूं मैं हम जोकर मर्जी रहूं मन मेरी गाय है बलद है मेरा घर है मेरा आदमी भी आवे है आ अच्छा सेवा पानी हो उनकी अच्छा दूध हो अच्छा घी हो है आज लाल दूध तुमने देखने ना मिले वो लाल शीत तुमने देखने ना मिले तो तुमने तो खो लिया ना सब में

14:32 तुमने सब खो लिया सर आपने वेस्ट की भी बात करी मने न लगा है हमारे देश में दो चीजें ऐसी है जो सबसे ज्यादा दूषित कर रही है हर चीज ने एक तो ये पैकेट्स हो गए जो रोज कबाड़ एक जो हम फ्रेश हो सुबह मतलब जो मल मूत्र आपने जिसकी बात करी पहले करता भाई हां वो चीज थी वो गंदगी थी ही नहीं क्यों खेत में करे आया करते खाद पानी हो जाया करता पर मतलब मैं आपने क्विक कर बताऊं आपने तो पता ही है खैर कि इतने बड़े लेवल पे हम बिल्कुल चेंज हो चुके हैं मतलब आज जिस घर में टॉयलेट नहीं है उस पे तो केस भी होने लग गए जो पीछे से भाई हर घर में टॉयलेट होना चाहिए जो कंपनी ने अपने हिसाब से चला रही है वो हां तो इतना बड़ा डायवर्जन हम करेंगे ककर जैसे हम जैसे लोगों को अगर समझ आ भी रही है पर हम जा नहीं पा रहे हैं उस तरफ ऐसे ही करोड़ों लोग हैं जो शहरों में दिल्ली

15:18 गुड़गांव बॉम्बे मेट्रो सिटीज में रह रहे हैं वे ककर मूव करे या उन शहरों ने ककर गांव की तरह बनावे कि उस तरीके से रह रहा जा सके इच्छाशक्ति इच्छाशक्ति ये जो घर है जिसमें मैं बैठा हूं ये मृत घर है हम दूसरे शब्द में कड़वे शब्द में कहूं तो श्मशान घाट है हम श्मशान घाट हम शुक्र है। आज जैविक खेती की बात होने रही है। भाई केमिकल डाल डाल के हमने हमारे खेत खराब कर लिए। हमने हमारी धरती खराब करने के लाए। तो आज एक दूसरा पक्ष उभर के सामने आया है कि 1 ग्राम उपजाऊ मिट्टी में हम तीन से पांच करोड़ माइक्रोब्स होते हैं। जीवाणु होते हैं। और जिस मिट्टी में जितने ज्यादा जीवाणु होंगे वो उतनी ज्यादा हेल्दी मिट्टी होगी और उसके अंदर अच्छी फसल उतनी ज्यादा होगी। अब केमिकल डाल के

16:05 उन मार ला रहा। एक दूसरा रास्ता क्या है? उनकी संख्या बढ़ा लो। इसीलिए गोबर की खाद, जीवामृत, घनामृत इनकी चर्चा होने लाग रही है। ये जीवाणुओं को बढ़ाते हैं। मिट्टी की समृद्ध बनाते हैं। मिट्टी के अंदर जीवाणु बढ़ाते हैं। तो एक ग्राम मिट्टी के अंदर कितने जीवाणु है? तीन से पांच करोड़। जो एक लाल ईंट जिसने मैं कहूं जब वह कच्ची हो है जब उसके अंदर पकाई नहीं जाती तो वो 3500 ग्राम की हो है। 3 किलो की हो है। पके पा 3 किलो की हो जाए। हम तो सिर्फ एक ईंट 3500 ग्राम के अंदर कितने जीवाणु हो गए? अगर तीन करोड़ से मैं गुणा करूं 3.5 किलो 3500 ग्राम

16:51 तो ये लगभग जो है 100 अरब हो जाए आदमी कितने हैं धरती पे आठ अरब हम उस एक ईंट को जलाने जलाने में पकाने पकाने में 100 अरब जीवाणुओं का हत्या कर देते हैं। हम किसने अधिकार दिया? तो मकान कितनी ट बन रहा है? हम कितनी बन रहा किसी के लाख लाग रही किसी के दो लाख लाग रही किसी को 5 लाख लाग रही है ये हो के लाग रहा है या धरती जो बनी या जो मिट्टी बनी एक दिन में तो नहीं बनी हम हजारों साल लाखों साल इसमें लगे पल के अंदर इसको हम जला रहे हैं इधर से जला के ये बना दिया उधर से जिस मिट्टी के ऊपर ये बन गया कंक्रीट वाला मकान नीचे हवा भी नहीं जाओगी नीचे पानी भी नहीं जाओगा धरती नीचे की भी मर गई नीचे के जीवाणु भी मर गए

17:37 हम तो हम श्मशान घाट में रहने ला रहे हैं धरती ने श्मशान बनाने ला रहे हम आपने के एक अच्छा और स्वस्थ घर या इंसान ककर बना जा सके आज के टाइम जैसे पहले बनता था जैसे मेरी दादी मेरे दादा के टाइम पे था जोकर मैं रह रही हूं मैं शहर में रह रही हूं दाल मारी दुकानदार त अच्छा है ना मैंने तो नहीं अच्छा आजकल मॉडर्न घर है मतलब मैंने न कि जो 90ज किड्स है ना उनके समझ में आ गई है क्योंकि उन्होंने दोनों जिंदगी में उन्हें ट्रांसफॉर्मेशन देख लिया तो कहीं ना कहीं 90 जितने भी मेरे आसपास लोग हैं ना मतलब केशव हो गए या वहां हमारे दोस्त हो गए उनके दिमाग में यह चीज आ चुकी है भाई पहले का जीवन ही अच्छा था के मतलब सच्ची में लोग इन सोच रहे हैं कि गांव में खेत लेते हैं व सब्जी बोवेंगे व छोटा सा घर बनावेंगे और व रहेंगे तो वो माइंडसेट

18:23 लोगों का आने लग रहा है धीरे-धीरे एक बात बता हम सबसे ज्यादा जरूरी हम आदमी के लिए हम जो है वो क्या है पानी खाना सबसे ज्यादा जरूरी क्या है हवा अच्छी सबसे पहले हवा हम महे 3 मिनट चार मिनट है ना अगर वो हवा जो मैं रोज 21600 बार ले रहा हूं छोड़ रहा हूं ले रहा हूं छोड़ रहा हूं वो हवा अगर उसका एक क्यूआई 500 या 500 से ऊपर है और वो लगातार मैं ले रहा हूं और मैं रह रहा हूं तो मैं कैसे स्वस्थ रह सकता हूं हम आज हर जगह बिजली है मतलब सोलर की एक प्लेट हम वो तेरी है हम फ़ चार्ज करना है और लट्टू चाहिए और तुम्हें चाहिए नहीं हम ठीक है घर उस टाइप से बना ले जिसमें एसी

19:10 कूलर की जरूरत हां मैंने जो एसी कूलर की सबसे ज्यादा बिजली ना वो मैंने जैसे डिब्बे भरे गए देख हम चारों तरफ पूरी तरह से बियाबान जंगल टीब्बा रेगिस्तान का जो दिन में बाहर टेंपरेचर 50 है तो जमीन का और गर्म हो जावे जमीन रेत रात ने है ना दिन में ताता हो जाए पूरा हां रात में तो उस समय मैं तीन साल रहा ये देखने के लिए कैसे बिना एसी बिना पंखे गिरा जा सकता है तो सरकंडे ने मेरा साथ दिया हम आप भी करो कि सरकंडा आपके लिए असली धन है मतलब मतलब प्रकृति की जो भी चीज है प्रकृति हमें रोटी, कपड़ा और मकान तीनों दे रही है। प्राकृतिक तरीके से दे रही है। हम हम अप्राकृतिक तरीके से वो चीज प्राप्त करते जा रहे हैं। समस्या ये है हम मेरा जोड़ है। जोड़ में डले हैं।

19:56 हम जब हम डले काढ़ के अपने घर में अपने छाता बदते तो पानी तालाब का साफ रहा करता। हम क्योंकि ऊपर जो मिट्टी थी वो निकल गई। हम इधर से तो तालाब की सफाई हो गई। मिट्टी निकल गई। रेन वाटर हार्वेस्टिंग हो गई। पानी नीला 67 में जब हरियाणा बना था तो हमारा बा आधी यूनिवर्सिटी आई थी। लेकिन जितने भी गांव थे उनके सारे के जोड़ बिल्कुल साफ थे। हम भंडारे होया करते तो जोड़ के पानी से ही खीर और दाल रती कई कुआं का पानी हार्ड वाटर होता है। हम हार्ड वाटर के अंदर दाल जल्दी नहीं गलेगी। खीर जल्दी निकलेगी। तो तालाब से बरसात का पानी लेके तब खाना बनाया करते हैं। 1966 आज 2026 है 2026 यूनिवर्सिटी की जगह आधी यूनिवर्सिटी की

20:41 जगह तो यूनिवर्सिटी बन रही 29 जगहजगह कॉलेज है यो कॉलेज यो कॉलेज इंटरनेशनल स्कूल यो वर्ल्ड स्कूल यो कॉन्टिनेंटल स्कूल यो ऑक्सफोर्ड स्कूल और यो लंदन स्कूल और के के स्कूल है पानी की एक जोड़ में अगर एक बूंद भी हिसाब हो तो बता दो धरती का एक इतना सा हिस्सा हरियाणा का हिसाब हो मैंने बता दो सबके में तो खत्म कर लिया इसने तुम विकास को इस एजुकेशन कहो तो बढ़िया है मैं डी एजुकेट होना मैं तो डीएजुकेट हो गया तुम भी हो लो नहीं भर्ती नहीं बचेगी सारे प्लास्टिक कर दिया सारे पेस्टिसाइड कर दिया सारे यूरिया कर दिया जीव जो परमात्मा निर्मित है वो भी खत्म कर दिए थ गांव में सूर नहीं दिखेगा थ गांव में आज गधा भी नहीं दिखा थ गांव में आज जोड़ा भी नहीं दिखा थारे खेता में बल भी नहीं दिखेंगे थारे खेता में के आ है मानव

21:28 द्वारा निर्मित जीव हम थारे घर में मानव द्वारा निर्मित जीव है हम स्कूटर है मोटरसाइकिल है कार है मानव द्वारा निर्मित जीव है। ऑक्सीजन है कार्बन डाइऑक्साइड छोटे हैं। हम है ना? पेट्रोल डीजल इनका भोजन है। हम तो मानव प्रकृति द्वारा प्रदत जीव थे। वो हम लगातार सबको एलिमिनेट करते जा रहे हैं। हम सबको एलिमिनेट करते जा रहे हैं। हम तो हमारा नंबर नहीं होगा। प्रकृति का हिस्सा तो हम है। हम एक जी लेंगे क्या? आपने सबसे बड़ा कारण आप किसने मानो हो इतना बड़ा ट्रांसफॉर्मेशन का? एजुकेशन? सिंपल? सिर्फ एजुकेशन। सिर्फ एजुकेशन आज मैंने बालक दे दे हम संस्कृत का एक श्लोक था जो मेरे याद आवे है हम उसका भाव के था वो तेरा दुश्मन है और बहुत घना ठाड़ा है

22:15 तू उसको किसी भी तरीके से काबू नहीं कर पा रहा तो उसको काबू करने का एक ही तरीका उसके बालक खराब कर दो उनके बालका ने गलत खराब है ले जाओ वो अपना आप बर्बाद हो जाएगा अपना तबाह हो जाएगा अपना बाहर जाएगा तो भारत बहुत ही ज्यादा समृद्ध बहुत ही ज्यादा स्किल्ड देश था। अब उसको बर्बाद करना है। उसको अपने काबू में लेना है। तुम्हारे बच्चे हमने मार्क पे ले लिए। आओ तुम्हें पढ़ाएंगे। सभी पढ़ो। सभी पढ़ो। तू भी पीछे नहीं छोड़ना चाहिए। तू भी पीछे नहीं छोड़ना चाहिए। तू भी पीछे नहीं। और पढ़ा के दिया। न्यू बैठ जा। न्यू कर ले। इसने सर बोल। इसने मैडम बोल। इंग्लिश बोल। इंग्लिश। तू अगर अपनी मां के साथ रहती, अपनी दादी के साथ रहती। तो इस टाइम पे तेरे हाथ में

23:01 कार्ड ना होवे पावे। इस टाइम पे दो और डॉक्टर साहब ये लो मैंने आपके लिए बना के दिया ठीक बात है इतना वो भी आवे सर वो भी बना आवे है आवे है लेकिन अब नॉर्मल कर दिया ये सब अगर मैं मेरे मां-बाप के साथ रहूंगा दादादी के पास रहूंगा मेरा बचपन वहां पे बीतेगा तो मैं उनसे एजुकेशन लूंगा स्किल लूंगा हम भारत के अंदर जितने ये जातियां है ये जात से निकला है ज्ञात से निकला है तो देखो क्या ज्ञात है हम सभी ज्ञानी थे आज मैं तने कह दियो चमड़ा है और इस ऐसी चीज बना दे इसमें पानी लगातार साफ रहे हम बना देगी

23:46 लेकिन हमारे यहां पे जो चमार जाती थी वो उससे चरस बनाया करती और चरस ते कुएं में पानी इतना ऊंटा गिला वो निकला करता तो चमड़े को इतना ज्यादा शुद्ध कर देना कि उसके अंदर कोई जीवाणु ना रहे और आगे भी पानी लगने के बाद भी जीवाणु ना हो कितना बड़ा विज्ञान होगा कितना बड़ा विज्ञान होगा टेक्नोलॉजी तो हमारे पास बिना बनाए भी थी मतलब टेक्न ज्ञाता थे वो लोग जिन्हें हम जात कहा है ना वह जात जो है ज्ञान का भंडार हां हां ठीक है जिसकी जिसकी जो स्किल थी उस हिसाब से मैं जाति में बैठ के हूं उस जाति के अंदर भी ये है अगर मुझे ये काम अच्छा नहीं है तो मैं दूसरा काम कर सकता हूं हम जरूरी नहीं है कि मैं ये इस परिवार से हूं तो मैं ये काम करूंगा इसलिए आज आप देखोगे ना हमारे जो गोत हम वो सभी जातियों में मिलेंगे। हां

24:34 गोती गोती भाई बाकी सब सुनाई गोती गोती भाई है बाकी रिश्तेदारियां है आज आप दुकान पे जांगे तो उ जो बैठा होगा उसने के कहेंगे दुकानदार ये उसका काम है वो दुकान कर रहा है जो दुकानदार है ऐसे ही हमारे समाज में था हम ठीक है कोई चमड़े का काम कर रहा चमार मिट्टी का काम कर रहा है वो कुंभकार है लोहे का काम कर रहा है लोहार है सोना का काम कर रहा है सुनार है और उससे आगे जो मणियों के ऊपर काम कर रहा है रतनों के ऊपर काम कर रहा है वो मणियार है सबसे धनी कौन मणियार आज जो सबसे चला तो सारा सब लूट मारे मारे जो मूल शब्द थे उनके अंदर ही जहर भर दिया गांव में कौन रहे है गवार गांव में कौन रहे है गवार

25:20 स्लो पोइजनिंग जब मैंने बार-बार कोई गवार कह गवार कहेगा तुम्हारा सबके बेच के और मैं अगले बार जाऊंगा हम उ प्लाट खरीदूंगा उसके बिजली खरीदूंगा उ डीजल खरीदूंगा उ मैं पैकेट वाला खाना खरीदूंगा, बीमारी भी खरीदूंगा, दवाई भी खरीदूंगा। बीमार होगा, बीमारूंगा तो दवाई लूंगा। दवाई भी कौन सी? कंपनी मेड। हम जे दवाई ना बिकेंगी तो कंपनी वाले भूखे मर जाएंगे। इसलिए आपको बीमार भी किया जाता है। हां। ठीक है ना? और बीमार उसको कौन कर रहा है? आपके घर। आके जने बैठे। पांच जने बैठे हैं। इधर से दरवाजा बंद है। उधर से दरवाजा बंद है। इधर से दरवाजा बंद है। है ना? हम हम पांचों के पांचों यहां पे क्या कर रहे हैं? ऑक्सीजन ले रहे हैं। कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ रहे हैं। ऑक्सीजन ले रहे

26:05 हैं। कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ रहे हैं। पांचों के पांचों है ना? तो यहां पे भी ये क्या बन गया? लो ऑक्सीजन जोन ये जो रोशन दान थे किस है ही नहीं। खिड़की कोई खुल नहीं छोड़ता। बंद कर रखा है सारा। न्यूनत एलपीजी गैस है वो भी कार्बन डाइऑक्साइड लेके ऑक्सीजन लेकर कार्बन डाइऑक्साइड में बदलने लग रही है। तुम्हारे जो घर है आज वह हाई कार्बन डाइऑक्साइड लो ऑक्सीजन ज़ोन है और लो ऑक्सीजन के अंदर आगे स्वस्थ कौन रहगा हम तभी मैंने पूछ रही हूं कि आज मैंने यहां ते निकल के एक ऐसी लाइफ जीनी है जैसे आप जो बता रहे हो ठीक है तो मैंने के करना चाहिए कहां तक कर शुरू करना चाहिए के मेरे पे चीज होनी चाहिए कहां तू कर तेरे पास सब के मैं है तने मेरे से कुछ नहीं चाहिए हम हम जो है बड़े लकी हैं हम

26:51 हम जो है ना भारत वाले बहुत लकी है कि हमारे बुजुर्गों ने एक ऐसा सिस्टम बनाया था कि यहां पे लगभग भग सभी के पास जमीन है। हम ठीक है ना? लगभग सभी के पास जमीन है लेकिन थारी जमीन खाली पड़ी है यो के नाम का केशव गांव में के किले इसके बता के किले 20 20 किले हैं और यो मूर्ख आ प है हम 20 किलिया का माल और यो 10/ 10 के कमरे में बंद प है मूर्ख ना कहूं तो इसे के कहूं के कहूं तू बता से प्लाट ले रहे हैं। खेत बेच के प्लाट तो खेत बेच के प्लाट लेगा। मतलब न्यूनत 2 करोड़ का वो बेचेगा और

27:38 न्यूनत दो करोड़ में गुड़गांव में जाके और बड़े घर ली लेगा। तो मूर्ख कौन होया? हर जगह पानी है। हर जगह बिजली है। सो लगा लिया। पानी हमारे पास है, बरसात होती है और इधर से मकान बनाने के लिए मिट्टी हमारे पास है। हम तो इस सड़क खातिर बिजली खातिर पानी खातिर एजुकेशन खातिर था शहर में आए थे। हां है तू एजुकेट होली डिग्री तेरे पास है तो अपने बालका ने पढ़ा ले हम अपने बालका कोई स्किल दे लेना तू हम मैंने किसी से कुछ नहीं मांगा मेरे बाबू ने कह दी थी तू बड़ा बादी है मैं तने एक ईंट नहीं दूं वो थी बालक में मैं कर रहा हूं बाद बाबू ने उठा के लठ भाजा घर जा मेरे मैं

28:24 तने एक ईंट भी नहीं दूं मैं बाबू मैंने तेरी एक ईंट चाहिए भी नहीं इ मैं 60 के आसपास हो लिया हम मैंने बाबूदास वाइटटी भी ना ली ना मैंने गांव में तो जमीन में तो कोई एक जाना लिया है फिर भी मैं कमा ला रहा हूं खान ला रहा हूं अच्छी डाल कमा ला रहा हूं अच्छी डाल खान ला रहे हम ठीक है ना बिल्कुल जहां पे प्यरेस्ट एयर है यो भाई साहब गा रहा है हम सुभाष चंद्रा जो है ना जी न्यूज़ वाला हम उसने बुलाया था मैं शो में उसने बुलाया था तो बात चल पड़ी मैं कहा दिल्ली में मूर्ख हो तुम तो सारे के सारे दिल्ली में पड़े इतनी भूंडी हवा में बोला भाई आप ऐसी किस जगह पे रहते हो मैं इस जगह पे रहता हूं जहां पे 50 से ऊपर क्यों जाए आता ही नहीं बोला अच्छा उसी टाइम भाग के मेरे पास आया देखने अरे यार तू तो बड़ा मैं तो पैसे वाला हूं लेकिन धनवान तू है नहीं मैं तो तू बड़ा लकी है लकी आदमी है

29:11 अरे तुम लकी बन जाओ भाई तुमने नाटेगा कोई तुमने नाटेगा कोई अपने खेत में जाओ अच्छे पेड़ पौधे लाओ अच्छे उ डांगर पालो अच्छा दूध पियो बिलोनी रखो कौनी रखो अच्छा खाओ अच्छा खाओ फार्म स्टे का कासेप्ट है जे तुम दोनों ही उ गांव में जाके एक नेचुरल कॉटेज बना ली तुमने चार पांच बना ली वीकेंड पे रोतक ना बसती पावे देना तने के है चूल्हे की रोटी देनी है खिचड़ी दलिया देना है उखल मुसफल थोड़ा चाहिए हाथ की चाकी थर्ना चाहिए और देसी सौदा थर्ड होना चाहिए अरे रोज तक लड़ लिकड़ के वीकेंड पे रिक्वेस्ट आंगी मेरी पहले कर देने को फला के तेरे थी अरे कैसे यार तू तो बड़ा बदल गया आजकल मेरे को दे दे थोड़ी देर के लिए नहीं यार

29:57 है ही नहीं मेरे पास तो चार महीने पहले क्यों उठेगा यार तू मेरा भाई नहीं है क्या करके तो देखो करते को क्योंकि हमारी मानसिकता ये है मैंने तो नौकर बनना है मैंने तेरे तो बड़ा नौकर बनना है मैंने तेरे तो बड़ा नौकर बनना है तो नौकर तो भाई नौकर रहेगा भी तो सर कहीं ना कहीं हमारे बुजुर्गों ने ही करा है क्योंकि पहले ब्याह भी होया करते ना हम कह कर रहे थे जि में एक आधा आदमी पाया करता था जो सरकारी नौकरी था दूसरा भाई खेती करे है तो सरकारी वाले शुरू तो पूछा गया है वह एक बौद्धिक हां हमारे को बनाया गया है। ओ हो ये क्या बन गया? ये तो नौकर बन गया। क्योंकि सर पहले फिर मनी सोर्स भी तो नहीं था ना घर वालों के पास। मनी की जरूरत कहां थी? हम पैसे की जरूरत कहां थी? मेरे पास अनाज है। मैंने झोली में लिया। दुकान पे बगैर सामान

30:42 लिया। पैसे की जरूरत की है? हम जो ये कहते हैं कि हमारे बुजुर्गों के पास कुछ नहीं था या मनी नहीं था। उससे बड़ा मूर्ख कोई है ही नहीं। हम क्यों? तू अपनी दादी की टोम गिन लिए। हम मैं मेरी दादी की टॉम गिन लूं। मेरी दादी का जो गोल वो थी ना सिंधुकड़ी तुम वाली वह मेरे बू ना करती उस लुगाई धोरे इतनी मोटी मोटी तो पड़ोले करते इसके चांदी के है ना इतना सोने की चांदी के झाल करते इतनी मोटी कंठी होया करती कंठी में लालाल मण हुआ करते है ना आड़े उसका इतना मोटा बाला आड़े इतना मोटा कोका आड़े उसका बोरला उसने हमको हम आके तेरा टोटल जो कपड़ा है ना जो आठ गज है 52 गज का तो घागरा घागरा उनको हम था के

31:29 मारे द्वारा असली धन था असली धन पशु धन था सोना चांदी धातु धन था और जमीन धन था हमारे द्वारा असली धन था कई बार नकली धन है सोना सोच भी नहीं सकते सोच भी नहीं सकते सोना खरीदने की वो जो है अपनी बुआ ने अपनी छोरिया थी लक्ष अमीर गरीब सब पाए इब तो गरीब तो खरीद ही नहीं सकता कुछ जिस टाइम जो चल रहा है रेट हां नहीं खरीद सकता ना तो कितनी अच्छी व्यवस्था से हम कहां पे आ गए हम आप सर क्योंकर कर रहे हो जैसे मैंने देखा आप जहां वीडियोस भी बनाओ वो आप हर तरीके के डांगर राख रखे हैं आपने घर आप बनाना सिखा रहे हो ईंटें बनाना सिखा रहे हो क्योंकर काम कर रहे हो आप ये कितने लोग आपके खेल जुड़ रहे हैं कितने लोग आपसे

32:14 सीखना मैं धरती का सबसे मुश्किल काम कर रहा हूं क्योंकि एक तरफ तो बाजार है ना वो पूरी तरह से अपनी शक्ति लाकर हमारा को अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर कोशिश कर रहा है है और मैं उनको बाजारवाद से बचा के आत्मनिर्भर आना कर रहा हूं। तो ये धरती का सबसे मुश्किल काम है। हमारे को यहां पे सुई डाल डाल के दिमाग के अंदर और हमारे को ये बताएगा तुम्हारी चीज खराब है। तुम्हारी चीज खराब है। तुम विकास कर लो। तुम विकसित हो जाओ। तुम उन्नत हो जाओ। हम मिट्टी का मकान था। वो तोड़ के मेरे को सीमेंट और शरीर का मकान दिया गया। हम है ना? उन्नत करने के लिए मेरा खुद का मकान छीन लिया। बढ़िया बैलागी जोड़ी थी। हम बहुत सुंदर आज तू उ जा एक मेरा आज पूरे रोहतक के अंदर पांच या सात जोड़ी बल

33:01 की बच रही है बर्दाना बच रहे वो मेरा खुद का धन था जिसके लिए मुझे कोई किस्त नहीं देनी पड़ती थी जो मुझे बाजार से खरीदना नहीं पड़ता था हम बद ले लिए घर का बीज और घर का खाद था वो भी निकाल दिया अरे अरे इससे खेती मत करो हम तुम्हें खेती करना सिखाएंगे साइड हम तुम्हें खेती कैसे सिखाएगी एक तो पहला तो मेरा ट्रैक्टर ले फिर मेरी यूरिया ले फिर मेरा पेस्टिसाइड ले फिर बीमार और मेरी दवाई ले हम क्यों लूं तो मुझे पता है मेरा दादा बिल्कुल सही था हम और पता आ ना लग गया पता लग गया इंग्लैंड में जाके पता लग गया अमेरिका में जाके हम मैं इंग्लैंड में इन्हने हमारे ऊपर राज क्यों कर रहा है इतने दिन ये राज कर गए आज ये क्यों कर रहे हैं आड़े की धरती के सबसे धनी आदमी वो क्यों कर रहे हैं

33:48 तो लंदन चला गया लंदन के आसपास चले आएगा बोला भाई आड़ ना पाने ये तो शहर में तो नौकरी पेशा लोग आ रहे हैं। श्रमिक लोग रहते हैं। मजदूर लोग रहते हैं। अच्छा मालिक किधर आ रहे? बोले मालिक तो गांव में पावेंगे। मैं निकल गया गांव में। हम गांव में गया तो आगे एक बहुत ही बढ़िया छप्पर हम सरकंडे का हम नीचे बढ़िया मकान और ऊपर दो तोते हम घास फूस से उन्होंने तोते नहीं मोर हम दो मोर बना रखे एक काम एक मोर देख के देख के हो गया खड़े मारे वाले बनाया करते हैं हां या आ यो के नाम है मोर इंग्लैंड में तो मोर का मतलब है को वो भाई था छोटा भाई इसका मकान का माल इससे देख

34:34 तू पागल है हरियाणा थोड़ा है वो बढ़ जा सिस्टम ना है अपॉइंटमेंट लेनी पड़ती है मैं लेके देखा अपॉइंटमेंट हम बोला ले देगा मंगाई में ले हम थ बार बना है उसका ये है रोड से आ मेरे जूते थोड़ी ग रही थी उसके बने जूते न्यू मार दिए मैंने न्यू मार दिए गेट खोल गया और क्या हुआ गुड मॉर्निंग सर क्या था मैं कोई ना जूते साफ करूंगा हम फिर मैं कहा सर आपकी इच्छा तो बहुत बढ़िया हो थैंक यू थैंक यू मैं थैंक यू छोड़ बता तने मोर क्यों कर गदर लिए साथ पे मोर तो थ आई एम इंस्पायर्ड फ्रॉम इंडिया मैं ओ आई एम फ्रॉम इंडिया आई एम फ्रॉम इंडिया देख ले लिया

35:19 चलाएंगे हम मेरा पाट गया लोग श में हम फिर आगे गया सुपर लोग कौन है हम जो मल्टीनेशन कंपनी चलाते हैं वो कौन है बोला वो तो बिल्कुल ही कंट्री साइड में मिलेंगे बिलकुल साफ सुथरा जहां पे है ना जंगल में वहां पे मिलेंगे एकांत में हां चल उनका घर देखेंगे बोला वो ना बनने दे भाई अ तो तने अपनी चला ली उ के करेगा कर मैं अपना लूंगा तूने घर बता दे कौन सा बोला जब न्यू ना दे फील ऑफेंडेड तो दे कैन शूट यू हम जो न्यू त नुकसान पहुंचावे है तो तेरे गोली मार देंगे छाती को न्यू गोली को मारेगा तो मारे लेगा मैं कोई गलत काम तो करने नहीं जा रहा मैं तो न्यू देखने जा हां कार उन्हें मोड़ी कार का हुड़ भी नहीं बजाना

36:05 ये नहीं करना है उनके पास गन के लिए परमिशन होती है पता नहीं होता न्यू कर देंगे वो कर दे वहां तू भड़कते करे मने न्यू बता दे है तो 5 6 किलोमीटर दूर मैंने वहां पे एक तीन चार बड़े-बड़े कूप दिखाई दिए कूप हम जिसमें आप तड़ी भर के रखा ना हां पानीपत साइड में तो भी बड़े अपने कम हो गए तो बिल्कुल ऐसे ही गोलगोल चोटी वाले कूप वो दिखाई दिए वहां उन धनी आदमी के मारे गोली तू पहले कुलेंगे कुलेगा के करा वहां कोई अपने हरियाणा पंजाब का होगा कि मैं शीत पानी पीवाएंगे मैं दही पराठा के मिला देसी खाना हम बोला वो हरियाणा पंजाब वाले को ना वो जो मैं कह रहा था ना धरती के सबसे धनी आदमी घर है वो उनके घर उनके घर चला गया आगे आगे जाके देखा तो यो

36:54 रोड है रोड के आड़े ये तब अपन इतनी बड़ी-बड़ी बाउंड्री फिर सीमेंट वो ना फुल की क्यारी फुल की क्या उसके बाद आगे गोल झोपड़ी और ऊपर सरंडा मेरी तकदीर बढ़िया थी और ऊपर से उसका जो प्लास्टर है वो हट रहा था और त मैंने माटी दी थी इसके त के है प्लास्टर के पास हमने के मेरा सोना है चांदी है माटी है ईंट है पत्थर है हमने के तो मेरी तकदीर बढ़िया थी मैंने वो माटी भी दी थी फिर मैंने देखा कि वो पूरी की पूरी थेच रूफ बोलते हुए वहां पे थच रूफ के अंदर वो रह रहे थे इसने की बोला था थच रूफ उस टाइम बोला भाई ई मैंने देख मेरा पाट गया के मेरा पा दादा तो धनवान था सुप्रीत को है ना इन ना तो प्रॉपर हवा ना प्रॉपर टेंपरेचर

37:41 सारे मेल की सब्जी साग अन ये उगा नहीं सकते हम है ना तो मेरा दादा सारी चीज थी इन इतना सोना चांदी को जो मेरी दादी धरा था तो सुप्रीच कौन था मेरा दादा मेरी दादी जो थे रूप के अंदर रहते थे जो अर्दन हाउसेस में इको फ्रेंडली हाउसेस में रहते आगे तने आना उ है तने सारे ने आना उ है क्योंकि जो अगला है हमारा लक्ष्य वो है नेट जीरो कार्बन लाइफ स्टाइल सुना नहीं सुना ना अपना पढ़े लिखे कह और हमने न्यू नहीं भरा कि मेलेनियम गोल के है हम मेलेनियम गोल है जितना कार्बन हमने एमिशन कर लिया उसको हमने खत्म करना है और नेट जीरो पे आना है ये जो मेरे इतनी बुड्ढ लंबी कार है इतने

38:26 ये है ये है तो कार्बन एमिशन के ऊपर धीरे धीरे धीरे प्रतिबंध लगता जा रहा है। कार्बन क्रेडिट का और कार्बन ट्रेडिंग का जमाना आने लग रहा है। जो इस कार्बन जो आज तक हमने फैला लिया इसको वापस कैच करना है ताकि ये हवा शुद्ध रहे। हवा जीने लायक रहे। वरना हमने तो ऑक्सीजन खत्म करके कार्बन डाइऑक्साइड बना दी सारी। तो अब हमें वो दौर से आगे चलना है। इसको बोलते हैं नेट जीरो कार्बन लाइफस्टाइल। आपको लग रहा है इतना खराब करने में सरकार का हाथ था कहीं ना कहीं। सरकार कुछ भी नहीं है। क्यों? तंत्र है जो तंत्र है जो अंग्रेज बना के गए थे उसको हम सरकार कह इनका काम सिर्फ और सिर्फ टैक्स कलेक्ट करना है और कोई भी काम नहीं है और वो टैक्स कलेक्ट करके ये उन्हें मल्टीीनेशनल कंपनियां दे रहे हैं 47 से पहले वो पैसा वह आड़े थे आड़े ले

39:14 लिया करते इ वो उ बैठे-बैठे लेने ला रहे हैं आपको एलपीजी दी क्यों दी किसने दी एलपीजी किसकी है उस कंपनी के जो प्रयास करे आपके आज उड़ एलपीजी नहीं आ रही सारे कल के हाय मर गए हाय मर गए हां मेरा मेरा अगला सवाल यही आता है कि जोकर इब हम इतने डिपेंडेंट हो चुके हैं इन चीजों पे जैसे गैस हो गई पेट्रोल डीजल कहीं भी आने जाने खातिर हो गया हम इ भी सिचुएशन में लोग के करेंगे जैसे हाहाकार मच गई एलपीजी गैस वो होते ही है ना हमने न भी बेरा समोसे वाले दुकान वाला भी न बोला भाई समोसे नहीं बना रहे हम बोला गैस को नहीं म सिलेंडर ही नहीं मिल रहे हम तो ये बड़े लेवल पर होगी ये चीजें फिर हम जो शहरों में रह रहे हैं मेट्रो सिटीज

40:00 में अमीर लोग रह रहे हैं हम के करेंगे फिर शहर में हमेशा श्रमिक और नौकर रहता है इन दिन अमीर कोई अमीर है ही नहीं हम जिनके पास अपना ईंधन नहीं है जिनके पास अपना अनाज नहीं है जिनके पास अपनी धरती नहीं है हां वो दूसरे के ऊपर डिपेंडेंट है उसने तुम अमीर कैसे कह सकते हो वो तो गरीब है उसकी तो किससे जाके हां उसका तो किसी टाइम भी टवा दाब जा सके है हम और मूज के ऊपर ईरान ने कोई टवा दाब दिया और ये जो तथाकथित अमीर है सारे फ्लिट भरते देख भाई कोई सिलेंडर वाला आ गया तो क वो ना ले जा भाग के तू पहले ले आपने लगा ही लिया है वो सिचुएशन आ गई तो लोग भागेंगे फिर गांव की तरफ भाग रहे हैं जो समझदार है वो दाए रहे हैं

40:45 हम जो ये वही है मैं गांव में लड़ा हम एजुकेट जो का होया हम दसवीं करी बोर्ड में नाम आया बेटे यो तो भाई गांव का नाम रोशन करेगा मतलब गांव में को रोड टॉप कर गया टॉप करेगा गांव में ना रहे उसने कंपनी उठा ली जाएगी हम कोई उसने नाम दे देगी यो इंजीनियर बन गया यो डॉक्टर बन गया यो पायलट बन गया यो ये बन गया और ये वो बन गया नए-नए नाम दे देगी लेकिन वो गांव ते भाग जाएगा गांव में लड़ जाएगा जब उ जाएगा उसकी चेतना जागृत हो गई अब मैं गलत फस गया मैं तो नौकर बन गया तो फिर वो वापस इस गांव में मास्क है वरना वो गांव में आ ही नहीं सकता। आप पहले रोहतक रहा करो थे। इब हूं अभी आप काम जो कर रहे हो वो

41:31 रोहतक में मेरा मकान है। हम गांव से हम फादर के टाइम पे आ गए थे क्योंकि हमें भी वो गांव के इधर तो गवार रहते हैं। हम गवार थोड़े हम तो देखो पढ़े लिखे हैं। हां पढ़े लिखे हैं। तो जगह से कट गए। जब मैं बीएससी कर रहा था उस टाइम पे हम हमारे पास जो बच्चों के पास हमने हथियार दे रखा है जिसका हमारे पास कोई भी काट नहीं है वो ये है तेरा बालक तेरा छोरा तेरी छोरी तने क्यों तने कोई काम कह दिया और जब उसका मुंह में तो एक बार न्यू निकल गया ना मां मैं तो पढूं या बाबू मैं तो पढूं पूछो हां हमने न्यू नहीं मेरा पढ़ने के लाग रहा है हम मेरी मां तो मान लो तीसरी फेल है मैं तो पीएचडी हूं मैंने तो मेरा मेरी बेटी या मेरा बेटा के पढ़ने ला रहा था तो उनको कैसे पढ़ाया जाए पहले तो तुमने ये देखना है हम ठीक है। उसके बाद जब गलती हो गई मैंने पता

42:17 चल गई रोहतक में रहना गलत है। तो फिर मैं रोहतक में छोड़ के दोबारा मू चला गया। कहां हुआ भैया? अभी मैं पंजाब में हूं। रोपड़ जिले के अंदर नवा शहर जिला है पंजाब के अंदर। शिफालिक की पहाड़ियां है। हरीभरी पहाड़ियां है। जल जो है स्त्रोत का पहाड़ों के नीचे है वो फिल्टर हो आ रहा है और पानी का भी बिल्कुल ही शुद्ध है। चारों तरफ जंगल है। वहां पे मेहर मेरी गाय मेरे बल जो है मेरे बछड़े बाछड़े वो व परिवार आपका है। मेरा परिवार बड़ा परिवार ही है। छोटा परिवार यहां पे है। अच्छा आपने जहां भी आप रह रहे हो जहां भी आप ऑपरेट कर रहे हो। आपने मिट्टी के घर मिट्टी के सब कुछ नेचुरल बना रखा है। ऐसे है हम जो पहले जो बताया जाता था वो जीवन के बारे में बताया जाता था। हम और जीवन के भी बारे में इस प्रकार से

43:03 बताया जाता था भाई तेरे जीवन के चार हिस्से हैं। हम पहला हिस्सा है तेरा 25 साल में जाके पूरा हो जाएगा। उस टाइम तक तने अपनी विद्या ग्रहण करनी है। ज्ञान ग्रहण करना है। स्किल ग्रहण करनी है। हम 25 से 50 का एक दूसरा दौरा होगा। हम उस दौर के अंदर तने अपनी वंश वृद्धि कर लेगा। उसके बाद 50 के बाद तेरी वो ऊर्जा नहीं रहगी। तेरे अंदर ज्ञान तो हो जाएगा क्योंकि तूने 50 साल देख लिए। एनर्जी एनर्जी थोड़ी सी डाउन हो जाएगी। तो तेरे को फिर वानप्रस्थी बनना है। वन में चले जाना है। क्योंकि घरा दूगा तेरा छोरा तेरी छोरी 202 साल की होली वो अपने जीवन अपने हिसाब से चलाएंगे। तू उनके मन के कहेगा अच्छा नहीं लगा घर में कला होगा तो तेरे को वानप्रस्थी बन जाना। हम मैं 50 क्रॉस करते ही मैं वानप्रस्थी बन गया था। जंगल में चला गया था।

43:49 उसके बाद 75 के बाद सन्यास। अब मैं 60 का हूं। 15 साल के अंदर मेरी एनर्जी और डाउन हो जाओगी। इतना ज्यादा नहीं बोला जाओ इतना ज्यादा। तो फिर मैं एक जगह स्थित हो जाऊंगा। सन्यास ले लूंगा जो कि मिल गया। ठीक है ना? तो प्रभु की इच्छा। तो हमें जीवन किस हिसाब से जीना है वो पहले ही बता दिया गया। पहले बता दिया तो मुझे पता चल गया। अब हम देखो एनर्जी बिल्कुल नहीं रहती। उस टाइम पे गवर्नमेंट रिटायर करा और लोगों के सपने के हैं रिटायरमेंट होने दे एक बार एक बार रिटायरमेंट होने दे फिर मैं धरती मार दूंगा अरे तेरे में क्या बच्चा है तो गवर्नमेंट रिटायर क्यों करा तेरे पास तो एक्सपीरियंस हो गया 30 साल का हम 30 साल के एक्सपीरियंस आदमी को नौकरी का रिटायर करा रहे तेरे अंदर कुछ बच्चा है ही नहीं छोड़ लिया तू नींबू की डाल जा तने रिटायर कर ला अरे हम राजी हो जाए हम राजी हो जा

44:35 तो करीब हमने बहुत सारी वीडियोस में देखा आप ऐसे घर और सब चीजें बनाना सब्जियां उगाना सिखा देखो ऐसे है ये जो धरती है ये हमें तीनों चीज देती थी देती है और देती रहेगी रोटी कपड़ा और मकान हम ये वो आप बनाना सिखा रहे हो लोगों को रोटी भी धरती दे है हम कपड़ा भी सूत ये जो है ये धरती दे है ऊन वगैरह ये धरती दे है और मकान भी धरती देह है ये हम ये तीनों चीज बाजार में देनी शुरू कर दी हम तीनों चीज जब तक बाजार ने देनी शुरू करी हमारा बेटा बैठ गया हम आज रोटी भी शुद्ध नहीं है हम आज कपड़े अशुद्ध हैं। तू जो यह पहन रही है, बड़ी राजी होके पहन रही है। लेकिन इसके अंदर माइक्रोप्लास्टिक है जो तेरे शरीर के अंदर जाने जा रहा है चमड़े के द्वारा। हम तो हमारे सारे के शरीर में माइक्रो

45:20 पप्लास्टिक पहुंच गया कपड़े के द्वारा। हम्म और उधर से मकान। मकान सारे हमारे सारे अप्राकृतिक हैं। हम्म मकान तो मेरा बने है और घर उजड़े है अनेक जीवो का। मेरा मकान बने ना तो कितने जीवों घर उजड़े मेरा? हम जैसे मैंने पहले बताया सारे पहले तो जो मिट्टी के अंदर जीवाणु है वह खत्म हो गए उनका घर जुड़ गया उसके बाद जब मैं सीमेंट बनाऊंगा तो मैंने जिप्सम चाहिए मैंने लाइम चाहिए मैंने जो नेचुरल वो धरती ने पाडूंगा मैं उरा कितने जनरा का घर था वो बर्बाद कर दिया लोहे के लिए आयरन और चाहिए और वो लोहे का आयरन और हरियाणा में नहीं है। पंजाब में नहीं है। राजस्थान में नहीं है। यूपी में नहीं है। मध्य प्रदेश में नहीं है। झारखंड में जाकर तमिलनाडु में है। हम तमिलनाडु में मेरे घर खातिर तमिलनाडु में

46:08 धरती खोदी जाने जा रही है और फिर वो जो कार्बन एमिशन होता है कार्बन डाइऑक्साइड जो बनती है वो फिर पूरी धरती का सत्यानाश करने लग रही है वो फिर उसको कौन सो रहा है उसको शो कर रहे है समंदर तो समंदर का पानी मेरे घर बनने के कारण एसिडिक होता जा रहा है एसिडिक वो एसिडिक पानी में कोई रह लेगा क्या तो वो जंगली जो है जीव वह हमने खत्म कर दिए धरती के जीव है वो हमने खत्म कर दिए और समुंदर के जीव वो हमने खत्म कर दिए किस लिए मकान बनाने के लिए मकान बना के हवा खराब कर दी हवा खराब कर दी तो इससे जा विकास कहा तो विनाश के हो गया आजकल पहले भी नेचुरल डेथ्स होया करती मतलब 100 साल जी गया तो जन्म हो मरा करते जन्म भी हमारा अस्पताल में हो और मरा भी अस्पताल में इन दोनों अवसरा पे सबसे ज्यादा पैसे हमारे से

46:53 लूटे जाते हैं सबसे ज्यादा दाई होया करती श्रद्धा सामान उसने कोई दे दिया तेरे किलो दाना है तो तने दाना दे दिया तेरे घर चांदी है तो तने चांदी दे दी तू गरीब है तो तने अपने बालचारे के दे दिए हम ना बेटे मैं तो तेरा 25000 में ही ऑपरेशन करूंगी अगर 2499 में ऑपरेशन नहीं करूंगी हम है ना वैक्सीन वैक्सीनेशन अच्छा वैक्सीन वही हो जाए वही तो तो आज हमारा शरीर भी कंपनियों का है आज हम कमाते भी कंपनियों के लिए है और आज हम सोचते भी कंपनियों के लिए हमारा स्वतंत्र चिंतन भी नहीं बना तो स्वतंत्र तंत्र चिंतन के मालिक हमारे गुरुकुल के अंदर में जब मैं पढ़ा होता तो एक हमारे को तर्क शास्त्र पढ़ाया

47:38 करता आज वो कहीं नहीं है तर्कशास्त्र यही था बताया करता कि तू मेरे देखने ला रही तो क्यों देखने ला रही तेरा मतलब के है तने न्यू बात कही तने मेथी क्यों कही इसका मतलब के है बोली बोले भीतर की और मैं जानू तेरे भीतर की है ना तो वो आदमी को पहले ही सचेत कर दिया किसी बात में राज वो सचेतपना हमारा खत्म कर दिया अब अब हम सचेत नहीं है। टीचर ने बोला है तुमने ये नहीं किया। अरे भाई 100 शब्दों में लिखना था तूने तो 101 लिख दिए। फेल कर दो। फेल कर दो। 101 में लिख दिए। मतलब हमारे को मानव ही नहीं रहने दिया गया। आज हम मानव नहीं है। वो मास्टर है, वो वकील है, वो पुलिसिया है, कोई जज है।

48:26 डेज़िग्नेशन आदमी को लिखते आदमी ढूंढेगी ना को कलिंगा की लड़ाई के बारे में मेरी बुआ जो है मैंने कहानी बता बचपन में लाइट लूट तो थी नहीं कहानी सुनाया करती बोला भाई उ अशोक के उ लड़ाई हो गई और कई लाख आदमी मर गए अशोक रोने लगा उ अशोक का मंत्री बोला बोला महाराज सही बात रो क्यों बोला अरे देख कई लाख आदमी मार दिए लड़ाई मर गए बोला महाराज इसमें आदमी को था ही नहीं आदमी नहीं था हम तू कैसे कह सकता है? पहले हमारा जो गिद्ध है ना उसका पंख लेके आओ और उससे देखो उसने देखा कोई काग है कोई बत्तख है कोई चिड़िया है कोई मोर है कोई कोई गधा है कोई हाथी आदमी ने दिख ही नहीं तुझे कैसे कह ले जी आदमी तो अपनी मर्जी से चलता है ना ये तो

49:11 आपके कहने से लड़ने लग रहे हैं जो तेरे कहने से जान दे आदमी हो तो हम तो दूसरे कहने से जान देने ला रहे हैं हम हां आदमी की था आदमी बन जाओ आदमी बनोगे सारी चीज ठीक हो जाएगी तो जुकर आप आपके आपके कितने लोग कनेक्टेड है ये भी जो आप आवे हैं रोज होते रहते हैं सीखे हैं डेली होते रहते हैं आप सिखा रहे हो ये चीज़ आप बिल्कुल सिखा रहा हूं के कुछ प्रोसेस है उसका प्रोसेस मेरे पास तो मात्र पांच दिन आना होता है हम सिर्फ पांच दिन हम क्यों लोगों के पास टाइम को है हम उस समय मैं सैटरडे संडे जरूर रखूंगा हम महीने में एक कैंप ले आया हूं पांच दिन का हम उस पांच दिन के अंदर बेसिक्स बता देते हैं कि तू सबसे ज्यादा जो पैसा कमा रहा है और सबसे ज्यादा जो धरती को खराब कर रहा है वो तू अपने मकान के लिए कर रहा है। हम तू मकान जो है प्राकृतिक बना

49:56 जो तेरा ₹ करोड़ में बनेगा वो तेरा 20 लाख में बन जाएगा तो ₹1800 करोड़800 बच गए हम इससे बड़ी बचत की होगी हम जब तने मकान प्राकृतिक बना लिया तो उसके अंदर चीज़ अपने आप प्राकृतिक आ जाएंगे हम इब मकान किससे बनेगा गोबर माटी ते हम गोबर चाहिए वो फैक्ट्री में नहीं मिले हम गोबर खातिर गांव बड़ से लेनी पड़ेगी तो गांव बड़ अपने आप आ गया गांव बड़ आ गए जैविक खेती आ गई दूध आ गया हम दूध आ गए स्वास्थ्य आ गया सेहत आ गई हम जब हम कौरक्षा के लिए क छोटे-छोटे जब ला रहे थे गौ हमारी माता है फलाने देखे है गौ हमारे ग्राम रही है को रोड पे गौ रोड पे चली गई तो गौ को घर पे कैसे लाया जाए प्राकृतिक मकान के द्वारा ताकि तुम्हें अच्छा तो मकान मिल जाए जिसमें तुम

50:43 भी स्वस्थ रहो तुम्हारे बच्चे भी स्वस्थ रह बिजली का बिल भी ना आवे मेरा जो रोहतक वाला मकान जिसकी बात कर रहा हूं उसका गर्मी में बिजली का बिल आवे 35000 37000 400 एक महीने में ₹00 तो बिजली खातिर कमाने ला रहा हूं। क्यों कमाऊं भाई? क्यों ना अपना घर ऐसा बना जिसमें बिजली की जरूरत ना रहे। ₹100 में लैंप लिया था सोलर वाला बस वो ₹100 हमने काम देने ला रहा। एक प्लेट छोटी सी फोन चार्जिंग खातिर लाने ला रहा। ये तो मेरा बिजली का खर्चा है। बाकी मेरे वहां तुमने सारी मशीन काट दी। मैं वो आदमी हूं जो इस तक पहुंच गया था। वैक्यूम क्लीनर तक पहुंच गया था। घर के अंदर यह लगा दे यह लगा दे सारे कमरे में एसी होना चाहिए सारे न्यू होना चाहिए फलान होना चाहिए होना चाहिए और आज बिजली

51:29 गई वो सबके में खत्म और मारे यू के बना और मैं सिचुएशन तो कदे भी आ सके है यह सिचुएशन तो क भी आ सके है यह बात जो आज मैं कहने ला रहा हूं ना देश की जगह अपने जो है ना थ है घर में थोड़े गोसे थोड़ी डांसरे थोड़े से ये और एक माटी का चूल्हा अपने घर में धर लो आज मैं बहुत साला खेल कोई नहीं देने उन चीजों के उधर गैस सिलेंडर के आए महीने देने लग रहे कोई नहीं जो तुमने यह जो व्यापारी है जहां पे जितना बड़ा व्यापार होगा वहीं पे उतना बड़ा डर और झूठ मिलेगी आपने कहीं ना कहीं न भी लगा लगे है कि लोग लोगों के शरीर मेहनत करना छोड़ गए जहां जैसे नौ ते पांच की जॉब है बैठे ऑफिस में कर रहे हैं जे लोग पहले तो सर भी समझ गया तेरी बात जे

52:17 लोग मेहनत कर छोड़ते हुए ना तो गलीगली में जिम नहीं होता ये तो एक समझ में आई है हां हां घटना में इसलिए कि आदमी का शरीर काम मांगता ही मांगता है खाली बैठे ना जा हम शरीर काम मांगेगा काम कर खातिर बन रहा क्योंकि पहले तो पूरे दिन में एक्सरसाइज हो जाती है चाहे लाइफ स्टाइल बुजुर्गों ने लाइफ स्टाइल इस हिसाब से बना था कि आप बीमार ना हो आज मॉडर्न साइंस क्या कहती है बैठ के एक्सरसाइज करे पहले घर में बैठे रहो काम करा ऑफिस में फिर मॉडर्न मेडिकल साइंस क्या कहती है ये कौन आदमी स्वस्थ है वो आदमी स्वस्थ है जो डेली 7 से 10,000 कदम पैदल चलता है या इसके बराबर एक्सरसाइज करता है, काम करता है। तो हमारा सिस्टम इसे था कि कोई भी आदमी ऐसा नहीं है जो इतना पैदल ना चाले। यो मेरा घर है। हम 1 कि.मी. दूर कुआं है।

53:02 हम पानी लेना आना थोड़े का जाना ही पड़ेगा। घर में पानी नहीं है। ठीक है? उसके बाद जंगल पानी जाना हम सब ने जाना ही पड़ेगा। उसके बहाने फिर उसके बाद खेत में लेना और में लाना हम वेट उठाना वो लगाना। तो एक्सरसाइज तो चलना फिरना सबका होता ही रहता था। फिर हमने शहर के अंदर ला दिया नौकर बना दिया बड़े 9 से पांच वाले बन गए आज हम क्या है बैठे-बैठे मैं तो मैं तो वर्किंग वूमेन हूं वर्किंग वूमेन क्या काम करती है कुछ नहीं जहाज के अंदर घूमती हूं जहाज में क्या करती है वो जो खाना खा लेती है उनके झूठियों का कसम खाती हूं उनको दारू भी पिला देती हूं दारू भी पिला देती है हां तेरा वैसे बोलती क्या है तुझे मुझे है ना एयर होस्टेस बोलते हैं एयर होस्टेस अरे अपने घर अपने बालका ने क्यों ना आशीर्वाद कर कर ले अपना परिवार

53:48 के साथ अच्छी क्यों ना रहे वो तो पिछड़ी होगी पर वो तो खैर घना ठीक है जो भी है चीजों को समझना पड़े है और समझ के फिर आगे बढ़ना पड़ेगा नहीं बात वही है हम ऐसा भी नहीं कि कुछ गलत बोल रहे हैं कि हम उसी जगह आए थे वहीं तो हम काम कर रहे थे सारी चीजें ऑपरेट हो रही थी पर हम इन्फ्लुएंस वो होके ऐसे हो गए हैं कि हम कर भी चीज हम मांग भी चीजें रहे हैं अच्छा खाना अच्छा रहना शुद्ध लोग लड़ रहे रोज आप देखोगे सोशल मीडिया पे ये दूध में ये केमिकल्स मिले हैं। ये सब्जियां टमाटर में इंजेक्शन लग रहे हैं। केला में वो लग रहे हैं। तो मांग तो हम शुद्ध चीज ही रहे हैं ना। अशुद्ध हम छोड़ आए। वो अच्छी चीज हम छोड़ अगर हम उस दौर को देखें हम वो दौर कई हजार साल तक

54:36 हम लगातार चला। हम वो दौर कई हजार साल तक लगातार वैसे ही चला। ये जो आर्टिफिशियल दौर आया है ये छोटा सा है बुलबुला। हम यह बुलबुला तो फूटेगा ही फूटेगा आवेगा टाइम आना ही है जो प्राकृतिक स्वरूप है उसी की तरफ आदमी बढ़ सके कितने दिन चलेगा ये तेल ये जो पिछले 15 दिन के अंदर कितना डीजल और कितने तेल में आग लगी है तेल तो लिमिटेड है ना धरती में ठक दो सारे ने फिर आओ तो उड़ेंगे ना ये बाबा ने कह मैं कहूंगा अरे यार ये तो क्या बातें कर रहा है कि गोबर घरा ले आओ वैसे ले आओ तेड़ी ले आओ पिछले दो साल पहले यूक्रेन और रशिया का वार होया था यूरोप उसमें आ गया मरोड़ में ओ इसप तेल ना लाया हम इस गैस ना लिया

55:21 जर्मनी ने गैस बंद कर दी सारी जर्मनी के घर के अंदर दोबारा लकड़ी आई हुई है तो लकड़ी से कर रहे हैं हम दूसरे के रह के आगे हम दूसरे के रह गए हम भी रह गया तो हमारा खुद का सौदा के है ये पहचानो हमारा खुद का ईंधन के है हमारा खुद का बिल्डिंग मटेरियल के है हमारा खुद का खाना के है हमारा खुद का रहना के है हमारा खुद का जीवन के है वो समझना है कुछ भी ना चाहिए जीने के लिए सास अपना आने ला रही है ला रही है पानी शुद्ध जोड़ा में तालाब में था काम करना जी करे तो एक कमंडल ले लो माई की बेटी का दिन बड़ा है माई की बेटी का दिन बड़ा है कोई इतना ले कोई इतना ही मेरा काम चल गया जिसने कमाना है वो कमाई जाओ जिसने इक्ठा करना है कठे जाओ जिन बाबा बनके भक्ति करनी है भक्ति भी करी जाओ आज कोई भी सिस्टम तो

56:08 ना रहा कोई भी सिस्टम ना रहा किसी भी टाइप का और सारे भूखे बन रहे कर जो भोजन जो मूल रूप था वो हमने खो लिया। खाने का मूल रूप वो हमने खो लिया। बाणीने का मूल रूप वो हमने खो लिया। वाणी का मूल रूप वो हमने खो लिया। हम आप लोगों ने जुड़ना हो कुछ चीजें सीखनी हो और वापस लोग उस जमाने में जाना चाह रहे हो। उस तरीके से जीना चाह रहे हो तो क्यों कर जुड़े आप? 98120 56982 98120 54982 ये मेरा WhatsApp नंबर है हम जो करीब में आ बैठा था फ़ बजा था मैं फ़ नहीं उठा पाऊंगा ऐसे ही मैं क्लास में होगा तो भी फ़ नहीं उठा पाऊंगा और मैं भी किन जाऊंगा WhatsApp में जरूर देखूंगा हम तो इस नंबर पे जो भी इसने अपने ये बदलाव

56:56 चाह रहे हैं नेचुरल बिल्डिंग बनाना सीखना चाहवे नेचुरल लाइफ स्टाइल में आना चाहवे हैं तो ये मेरा WhatsApp नंबर है इसका अपना नाम पता और पपज लिख के छोड़ दो। ठीक है? नाम लिख दिया, बता लिख दिया, ट्रेनिंग लिख दिया, नेचुरल बिल्डिंग और आप ये क्लासेस कहां दे रहे हो? वही पहाड़ों के अंदर। ठीक है? जहां पे है। तो जैसे ही अब मेरे पास मैसेज आएगा उसी टाइप के इनेशन का नोट आएगा काफी लंबा चौड़ा। वो नोट जो है लेके हम पढ़ के और फिर अपनी सीट बुक करा लो। सीट बुक कराने के बाद मेरे पास आ जाओ। पांच दिन के अंदर मोटा-मोटी। फिर घर पे तुम्हें प्रतिदिन एक घंटा देना पड़ेगा। हम आने के बाद मेरे पास आने से एक घंटे के अंदर मिट्टी को कैसे लेना है? मिट्टी को कैसे प्रोसेस करना है? गोबर क्या है? गोबर को कैसे प्रोसेस करना है? पहले एक छोटा सा टेबल टॉप मॉडल बनाना पड़ेगा। हम तुम उससे ये भी बना सकते हो।

57:42 हम सोफे बेड ये कुछ भी बना सकते हो। हम तो सबसे ज्यादा पैसा हम घर बनाने में घरेलू सामान खरीदने में ले रहे हैं। वो पैसा आपका मिट्टी और गोबर की तरफ जाएगा। तो आपके घर का शुद्धिकरण भी हो जाएगा। आपका भी शुद्धिकरण हो जाएगा। नाम पता लेके इसके ऊपर WhatsApp पे छोड़ना आए महीने क्लास हो वो क्लास की हम इन ले उसके बाद फिर अगले महीने इस टाइप से जो हो इस टाइप से हमारे पास आना ठीक है सर बहुत-बहुत धन्यवाद सर हमारे टाइम देने खातिर ऐसी बातें बताने खातिर लोगों तक ऐसी इन पहुंचान खातिर घूम फिर हमने आना है तो भाई जिन्होंने भी इन जुड़ना हो ये चीजें सीखनी हो नेचुरल चीजों की तरफ जाना हो जहां तब कड़काए थे व वापस हमने अपने घर बसा साने हो वापस मत बोल तेरा मेरा रोला होगा

58:30 सर क्योंकि मन तो लगा है कहीं ना कहीं वापस कोई नहीं जाता गलत हो हम थे सही हो आगे हम और आगे बढ़ना हो तो इन जो हमने गलतियां की है उनसे शिक्षा लेके हमें आगे बढ़ना है इसको आगे बढ़ना ही बोलते हैं इसको पीछे हटना नहीं बोलते ठीक है अगर आपने आगे बढ़ना हो तो इस नंबर पे कांटेक्ट करो और बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका सर ठीक है भाई देखने राम राम कौन सा कैमरा राम राम भाई राम राम ओ

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