Bhagvati Sutra Vachana -206 I Shatak 8, Uddeshak 10 I पुड़गल परिणमन - उसके भेद प्रभेद l May 31 2026

संक्षिप्त सारांश

यह भगवती सूत्र आगम वाचना पर आधारित एक कक्षा का सारांश है, जिसमें पुद्गल के परिणमन और उसके भेदों पर चर्चा की गई है। इसमें पुद्गल द्रव्य की अवस्थाएं, जैसे स्कंध, देश, प्रदेश और परमाणु, और आत्मा, आकाश, धर्मास्तिकाय और अधर्मास्तिकाय के प्रदेशों की अविभाज्यता पर प्रकाश डाला गया है। इसके अतिरिक्त, कर्मों के बंधन और निर्जरा, और विभिन्न प्रकार की वर्गणाओं (औदारिक, तैजस, कार््मण आदि) पर भी चर्चा की गई है।

  • पुद्गल द्रव्य की चार अवस्थाएँ: स्कंध, देश, प्रदेश, और परमाणु।
  • आत्मा, आकाश, धर्मास्तिकाय और अधर्मास्तिकाय के प्रदेश अविभाज्य हैं।
  • कर्मों का बंधन और निर्जरा तपस्या के माध्यम से संभव है, अग्नि से नहीं।
  • विभिन्न प्रकार की वर्गणाएँ: औदारिक, तैजस, कार््मण, आदि।

प्रारंभिक प्रार्थना और कक्षा का परिचय

कक्षा की शुरुआत पंच नमस्कार मंत्र और मंगलाचरण से होती है। इसके बाद, पिछली कक्षा के सारांश पर चर्चा की जाती है, जिसमें मोक्ष मार्ग पर आराधना के महत्व को बताया गया था। सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र की आराधना पर जोर दिया गया, और यह बताया गया कि इन तीनों में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।

पुद्गल द्रव्य और उसकी अवस्थाएँ

पुद्गल द्रव्य की अवस्थाओं पर चर्चा की गई, जिसमें स्कंध, देश, प्रदेश और परमाणु शामिल हैं। यह बताया गया कि पुद्गल द्रव्य में परमाणु अलग होते हैं, जबकि आत्मा, धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय और आकाश में परमाणु नहीं होते। आत्मा के प्रदेश कभी भी विभाजित नहीं होते हैं, इसलिए उसके परमाणु नहीं बन सकते।

स्कंध, देश, प्रदेश और परमाणु की व्याख्या

स्कंध पुद्गल का पूर्ण और अखंड रूप है, जो व्यवहार में उपयोग में आता है। देश स्कंध का एक छोटा भाग है, और प्रदेश अंतिम सूक्ष्म कक्षा का भाग है। जब प्रदेश स्कंध से अलग होता है, तो उसे परमाणु कहा जाता है।

पांच द्रव्यों के भेद

अस्तिकाय रूप वाले पांच द्रव्यों के कुल 16 भेद होते हैं। आकाशस्तिकाय, धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय और जीवास्तिकाय में तीन-तीन भाग होते हैं, जबकि पुद्गल में चार भाग होते हैं। काल द्रव्य अस्तिकाय रूप नहीं है, इसलिए उसमें प्रदेश और परमाणु का प्रश्न नहीं उठता।

पुद्गल द्रव्य की प्रक्रिया

पुद्गल द्रव्य में स्कंध से परमाणु और परमाणु से वापस स्कंध बनने की प्रक्रिया अनंत बार चलती रहती है। परमाणु अविनाशी और शाश्वत होते हैं। शरीर के जलने पर राख परमाणुओं में बदल जाती है, जो फिर से स्कंध बन सकते हैं।

स्कंधों के प्रकार

स्कंध अनंत, असंख्य, संख्यात और गिनती के परमाणुओं से बन सकते हैं। हमारा शरीर अनंत परमाणुओं से बना है, और आत्मा पर लगे कर्म भी अनंत परमाणुओं से बने हैं।

पुद्गल के गुण

स्कंध और परमाणु दोनों में वर्ण, गंध, रस, स्पर्श और संस्थान जैसे गुण होते हैं। स्कंध में ये सभी गुण होते हैं, जबकि परमाणु में इनमें से कोई एक या दो गुण हो सकते हैं।

कर्म और औदारिक शरीर

कर्म कार्बन वर्गणा के पुद्गल परमाणुओं से बने होते हैं, जबकि औदारिक शरीर औदारिक वर्गणा के पुद्गल परमाणुओं से बना होता है। कार्बन वर्गणा के परमाणु खसखस के दाने के समान होते हैं, जबकि औदारिक वर्गणा के परमाणु मूंग के दाने के समान होते हैं।

कर्मों का बंधन और निर्जरा

कर्म अपना फल दिए बिना आत्मा से नहीं झड़ सकते। तपस्या, मेडिटेशन और कायोत्सर्ग के माध्यम से कर्मों को जलाकर निर्जरा की जा सकती है, लेकिन अग्नि से कर्मों को नहीं जलाया जा सकता।

पुद्गल का परिणमन

पुद्गल का परिणमन एक परिवर्तन प्रक्रिया है, जिसमें एक वस्तु दूसरी वस्तु में बदल जाती है। उदाहरण के लिए, भोजन खाने के बाद शरीर में उसका परिणमन होता है।

पुद्गल और आत्मा की शक्ति

पुद्गल से पुद्गल की शक्ति मिलती है, और आत्मा अपनी शक्ति से उसे सपोर्ट करती है। अंतराय कर्म के कारण आत्मा की शक्ति कमजोर हो जाती है, इसलिए हमें शारीरिक ऊर्जा के लिए भोजन और पानी की आवश्यकता होती है।

श्वासोच्छ्वास वर्गणा

महावीर स्वामी के अनुसार, हम श्वासोच्छ्वास वर्गणा के पुद्गल परमाणुओं को लेते और छोड़ते हैं। ये परमाणु आत्मा के प्रदेशों के साथ चिपकते नहीं हैं। आठ में से केवल दो वर्गणा के परमाणु (तैजस और कार््मण) आत्मा के साथ चिपकते हैं।

लोक और अलोक

यह लोक में ही अनंत जीव हैं, और सभी प्रकार की वर्गणाएँ भी इसी लोक में हैं। लोक की सीमा के बाहर कुछ भी नहीं है, केवल आकाश है।

मनोवर्गणा और भाषा वर्गणा

मनोवर्गणा के पुद्गल परमाणुओं से मन बनता है, और भाषा वर्गणा के पुद्गल परमाणुओं से भाषा बनती है। हम इन परमाणुओं को लेते और छोड़ते हैं।

शब्द और पुद्गल

शब्द भी पुद्गल परमाणु हैं, और वे नष्ट नहीं होते। भाषा वर्गणा के पुद्गल परमाणुओं को लेकर, ज्ञान के साथ जोड़कर शब्द बनाए जाते हैं।

वर्गणा और परमाणु

समान गुणधर्म वाले परमाणु जिस ग्रुप में जाकर इकट्ठे हो जाते हैं, वह वर्गणा बन जाती है। पुद्गल के परमाणु दो प्रकार के होते हैं: वर्गणा बनाने वाले और वर्गणा नहीं बनाने वाले।

पुद्गल परमाणु की शाश्वतता

पुद्गल परमाणु त्रिकाल नित्य शाश्वत हैं। उनका अस्तित्व हमेशा बना रहता है, लेकिन वे अलग-अलग पर्यायों में बदलते रहते हैं।

अंतिम प्रश्न और उत्तर

कक्षा के अंत में, कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं, जैसे वर्ण, गंध, रस और संस्कार क्या हैं, और क्या नॉन वर्गणा में रहने वाले परमाणु वर्गणा में आ सकते हैं। यह भी पूछा जाता है कि आत्मा पर लगे हुए कर्म क्यों नहीं जलते।

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Transcript

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0:00 इच्छी भगवान पी वना प्रसार करा जी नमो अरता नमो सिं नमो नमो नमो लोसा पंच नमकार मंगला चिं परम हव मंगलम जय जगजी भजन विनो जग गुरु जगंदम जगना जग बंधु जय जगिया महोदय

0:45 जय सुयाण भवतम पश्चिमो जय जय गुरु लोग जय ब सर्व प्रशा सर्वदा दायनी सर्व निधान श्री गौतम स्वामीने नम श्री सुधमा स्वामीने अज्ञानतेमजन नेत्रितम तस्म श्री गुरुवे

1:33 नर्मदा बहुत-बत आशीर्वाद मण वंदामी साहब जी प्रणाम सभी को आज 31 मई 2026 के दिन अभी हमारी तीसरी क्लास जो है वो भगवती सूत्र आगम वाचना की है। आज हमारी 206वीं क्लास है। हम अभी शतक आठ और उद्देशक दसवां पढ़ रहे हैं और मैं विभा बेंद जी से अह विनती करूंगी कि वो हमें लास्ट क्लास की समरी दें। विभा बहन जी खूब खूब आभार एलशाबेन वंदा में साहिब जी और प्रणाम सभी को साहिब जी ने लास्ट क्लास में भगवती सूत्र के 10वें उद्देश्य के दूसरे चैप्टर में मोक्ष मार्ग पर आराधना के बारे में बताया था। तो

2:20 मोक्ष की दिशा में ले जाने वाला मोक्ष मार्ग है और इसके लिए सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र की आराधना आवश्यक है। इन तीनों आराधनाओं में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। सम्यक दर्शन चौथे गुणस्थानक पर, सम्यक ज्ञान पहले गुणस्थानक से आगे तक, सम्यक चारित्र पांचवे छठे गुणस्थानक से आगे तक होता है। देवलोक के देवता सिर्फ दर्शन और ज्ञान की आराधना कर सकते हैं क्योंकि उनके पास चारित्र्राचार नहीं होता। चारित्रचार का मतलब व्रत, नियम, पचकांड, तप, तपश्चर्या का आचार, धर्म। यदि कोई दर्शन आराधना नहीं करता लेकिन ज्ञान और चारित्र की आराधना करता है तो यह अधूरा है। कोई ज्ञान की आराधना नहीं

3:05 करता परंतु दर्शन और चारित्र की आराधना करता है तो यह सही नहीं है। तीनों में से किसी भी आराधना में रुचि ना रखने वाला जीव मिथ्यात्व होता है। सम्यक दर्शन के बिना सिर्फ ज्ञान में रुचि रखते हो तो मोक्ष मार्ग पर आगे बढ़ना मुश्किल है। बिना ज्ञान के धर्म अंधविश्वास बन जाता है और उद्देश्य मोक्ष की जगह सुखदख प्राप्त करना हो जाता है। सम्यक दर्शन के लिए दर्शनाचार का पालन और अतिचारों से बचना आवश्यक है। सम्यक ज्ञान के लिए ज्ञानाचार का पालन और ज्ञानाती का त्याग करना आवश्यक है। सम्यक चारित्र साधु साध्वी और श्रावक श्राविका दोनों के लिए है। जिसमें चारित्र अतिचार का त्याग और चारित्रचार का पालन होता है। तपाचार को भी चारित्र चार में समाविष्ट

3:52 किया गया है। आराधना में यह नहीं कह सकते कि यह हमें यह पसंद है और यह पसंद नहीं है। सामायिक परमात्मा की पूजा प्रतिक्रमण और भगवान के दर्शन सभी का समान महत्व है। सम्यक दर्शन आपकी श्रद्धा और निष्ठा है। सम्यक ज्ञान नौ तत्व और समस्त द्रव्य पर्यायों का सही ज्ञान है। अनंत अनंत भूतकाल में बिना सम्यक दर्शन सम्यक ज्ञान सम्यक चारित्र बिना केवल ज्ञान बिना क्षायिक सम्यक से कोई भी मोक्ष नहीं गया। अरिहंत भगवान ने भी सम्यक दर्शन केवल ज्ञान दीक्षा और तपश्चर्या के माध्यम से ही मोक्ष प्राप्त किया है। इसीलिए उमा स्वाति जी महाराज साहिब ने सूत्र बनाया है सम्यक दर्शन ज्ञान चारित्रण मोक्ष मार्ग सम ज्ञान दर्शन और चारित्र की उत्कृष्ट

4:39 रूप से आराधना करने वाले इसी भव में मोक्ष जाते हैं। मध्यम आराधना करने वालों को दो चार भाव के बाद मोक्ष में जाते हैं और जबकि जगन्य आराधना करने वालों को कई भव लग सकते हैं। भव घटाने के लिए जगन्य से मध्यम और मध्यम से उत्कृष्ट कक्षा में आना आवश्यक है। महाविद क्षेत्र में तीर्थंकर भगवान और केवली भगवंतों की उपस्थिति से उत्कृष्ट कक्षा में आने में मदद मिलती है। भव संख्या घटाना हमारे हाथ में है। हमें यह नहीं कहना चाहिए कि यह ऊपर वाले के हाथ में है। इस अध्याय का उद्देश्य यही है कि हम अपनी आराधना को सही दिशा में ले जाए। साहब जी आगे आप हमें समझाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद आपको। आज यहां पर भगवती सूत्र आगम शास्त्र के

5:26 आठव शतक में दवा उद्देश्य जो चल रहा है उसमें पुद्गल परिणमन और उसके भेद प्रभेद की बात आ रही है। देखिए पुद्गल अपने आप में जो द्रव्य अब पुद्गल के द्रव्य के अंदर तीसरी अवस्थाएं जो होती है वो यहां पर आप एक तो होता है इसका स्कंध ये है उसका देश यह है उसका प्रदेश और यह परमात्मा

6:18 आ रहा है ध्यान में देखिए पुद्गल द्रव्य की विशेष बात है ये बस एक ही विशेषता यहां पर उसकी है कि पुद्गल द्रव्य के अंदर ये परमाणु अलग से है लेकिन आत्मा के धर्मास्त काय के अधर्मास्त काय के आकाश के उद्गल परमाणु नहीं होते हैं। उनके अंदर स्कंध देश और प्रदेश तीन ही पर्याय कहती है। परमाणु अलग नहीं होते। बोलिए पारुल बहन कैन यू अंडरस्टैंड दिस? अ वंदामि सा जी से जी आपने बताया कि पुद्गल द्रव्य अपने आप में होता है और

7:06 उसके फोर पार्ट्स होते हैं स्कंध देश प्रदेश और परमाणु परमाणु उसका विभाजन नहीं होता दैट इज द लास्ट पार्ट ऑफ द पुद्गल इट्स अनडिविजिबल वेरी गुड बहुत अच्छा इधर देखिए ये हमने बताया यहां पर आत्मा है। अब आत्मा के जो ये हमने देखे कि इसके प्रदेश है सब अब ये सारे प्रदेश है तो ये आत्मा के प्रदेश के रूप में है। लेकिन इसके अंदर एक भी प्रदेश आत्मा का अनंत अनंत काल में भी विभाजित होकर डिवाइड होकर अलग होता ही

7:52 नहीं है। इसलिए आत्मा के परमाणु कड़ी होते बोलिए अर्चना बहन जी बोल सकेंगे आप आत्मा के जो प्रदेश है वो कभी भी डिवाइडेड नहीं होते हैं इसलिए उसके कभी परमाणु नहीं बन सकते हैं। आत्मा का प्रदेश अविभाज्य है। हां जी प्रवीण जी बोलिए। यह जो आत्मा के असंख्य प्रदेश है, इसमें से एक भी प्रदेश अनंत काल में डिवाइड होकर अलग नहीं होता। इसलिए आत्मा विनाशी नहीं अविनाशी द्रव्य है। आत्मा के एक भी प्रदेश अपने प्रदेशों से अलग नहीं होता। ये

8:39 अविनाशी द्रव्य है। ये कभी विनाश होता ही नहीं। पर सेम टू सेम ठीक ऐसे ही आकाश द्रव्य के धर्मास्त काय के अधर्मास्त काय के भी प्रदेश अनंत अनंत काल में भी कभी विभाजित होते ही नहीं है। इसलिए उनके भी परमाणु कभी बनते ही नहीं है। बोलिए बीज बहन जी बोल सकेंगे महाराज आकाश नहीं हां ठीक है ठीक है बोलिए सीमा बहन जी बोलिए सर हमारे साथ धर्मास्तिक धर्मास्तिक आकाशास्तिकाय के प्रदेश कभी भी अपने स्थिति से विभाजित होते ही नहीं है इसलिए

9:25 वो कभी भी उनके परमाणु नहीं बनते बस अब आई बात इसकी आई। अब हम बात कर रहे हैं किसकी? आकाश द्रव्य की बात भी आपने कर ली। अब ये देखिए यहां पर मैंने ये बनाया ये पुद्गल द्रव और पुद्गल के ये प्रदेश और पुद्गल के प्रदेश अभी आपने क्या देखा? इधर देखिए। यह जो पूर्ण रूप में आप देख रहे हो यह स्कंद है। जो भी पुद्गल का पूर्ण अखंड स्कंध हो वही वस्तु स्वरूप के अंदर व्यवहार में उपयोग में आता है। बोलिए वंदना माता जी ध्यान

10:11 में आ रही है ये बात पुद्गल का जो स्कंद रूप में होता है वो भी वस्तु के रूप में व्यवहार में आता है। हां ये देख लिया आपने ये देख लिया ये पुद्गल का पिंड है। अब इसके अंदर असंख्य प्रदेश है और एक अखंड पूर्ण रूप में है इसलिए हमने स्कंद इसका नाम रखा। अब ये व्यवहार में आता है, उपयोग में आता है। एक पूर्ण स्कंध के रूप में ही व्यवहार में चल रहा है। आ रही है बात ध्यान में? अब ये इसका छोटा पोर्शन आपने देख लिया। ये वाला। अब ये क्या है? उसका देश पूर्ण अखंड बड़े स्कंध का एक छोटा पोर्शन

10:58 जो है वो है देश और ये अंतिम सूक्ष्म कक्षा का जो भी है ये आप जो अंदर देख रहे हो ये है इसके प्रदेश जब तक वो प्रदेश पुद्गल के स्कंद के साथ है और वो अनडिवाइडेड है। अलग स्वतंत्र हुआ नहीं है। वही प्रदेश है। एंड व्हेन इट डिवाइड देन कमिट आउट एन इंडिविजुअल देन इट बिकम्स द एटम उसको हम परमाणु संज्ञा देंगे। बोलिए आंसर बोलो। ख्याल आ गया आपको? ऐसा है जी। जब तक वह प्रदेश स्कंध के साथ

11:46 जुड़ा हुआ है तब तक हम उसको प्रदेश कहेंगे। लेकिन जब वो डिवाइड होके अलग होता है तब उसको परमाणु की संज्ञा दी जाती है। वही परमाणु बराबर है। अब आप जरा काउंटिंग करिए, गिनती करिए। वीणा बहन जी टोटली पांचों द्रव्य के कितने भेद हो गए? अभी मैंने गिनाए सब बताए वो ध्यान में आ रहा है। चलो प्रवीण जी बोलिए आप अभी ऐसा नहीं करना है। क्यों ऐसा कर रहे हो? [गला साफ़ करने की आवाज़] अभी तो गिना है लेट। बोलिए पारुल भाई कैन यू काउंट दिस?

12:35 जी साहब जी। अह सो साहिब जी फर्स्ट थ्री द्रव्य आकाशस्तिकाय धर्मास्तिकाय अधर्मास्तिकाय एंड जीवास्तिकाय ऑल ऑफ देम विल हैव ओनली थ्री पार्ट्स दैट इज स्क देश एंड प्रदेश सो थ्री टाइम्स 12 वि फोर पार्ट्स सो आकाशस्तिकाय धर्मास्तिक अधर्मास्तिक

13:21 जीवास्तिक थ्री थ्री थ्री थ्री कितने हो गए 12 12 एंड व्हाट अबाउट द पुद्गल फोर यस 12 एंड फोर 18 16 सॉरी 16 बस अब ये टोटली जो है अस्ति कायात्मक पांचो द्रव्य हो गए समझे कि नहीं अब आपको काल अस्ति कायात्मक नहीं है तो ना तो प्रदेश का प्रश्न है ना परमाणु का प्रश्न है इसलिए उसका प्रश्न बीच में नहीं है क्योंकि जो जो नियम क्या है पहले ध्यान रखिए प्रदेश समूहात्मक पिंड को ही द्रव्य कहते हैं। आ रहा है ध्यान में प्रदेश

14:07 समूहात्मक पिंड ही अस्ति कायात्मक द्रव्य है। जो प्रदेश समूहात्मक पिंड नहीं होता है वह अस्थि कायात्मक द्रव्य होता ही नहीं है। बिल्कुल क्लियर कट स्पष्ट बोलिए विभा जी ध्यान में आ गया। जी सर जी सभी प्रदेश समूहात्मक पिंड को ही अस्तिकायात्मक द्रव्य कहते हैं। जो प्रदेश समूहात्मक नहीं है वो अस्थ कायात्मक नहीं है। अब ये नियम लगाया तो आपने क्या बताएंगे? काल अस्थि कायात्मक द्रव्य नहीं है। बस अब बात पूरी हो गई। अब इतने के साथ में हमने

14:54 अगर यहां पर समझ लिया तो हमको अच्छी तरह से ख्याल आ गया। अब यह जो पुद्गल द्रव्य है इधर देखिए अब इसमें क्या हुआ नंबर एक यह स्कंध आ गया ऐसे होल अब वो छोटा है कि बड़ा है वो मत देखिए समझे एक पूरा स्वतंत्र ये देखिए और ये देखिए अब दो में आपको क्या लग रहा है ये इतना बड़ा पूर्ण स्कंध है ये छोटा सा स्कंध है अब हो सकता है बड़ा छोटा क्यों कह रहे जिसके के अंदर परमाणु की संख्या कम होगी जिसमें परमाणु की संख्या ज्यादा होगी। बस ख्याल आया। अब जब ये हम देखेंगे अलग हो जाते हैं तो परमाणु भी फिर

15:41 मिलेंगे। फिर मिलकर इकट्ठे होंगे। फिर मिलकर के वापस स्कंद बनेंगे। फिर स्कंद से परमाणु बनेंगे। सब ये प्रक्रिया अनंत बार चलती रहती है। आप ध्यान दीजिए यहां पर। अब कोई भी जो है हमने यह देख लिया यह स्कंद है पूरा। अब ये जो है पूरा एक स्कंध है। अब इसके जैसे जैसे परमाणु बिखरते जाएंगे तो ये जो है इसके परमाणु हो गए सब। अब और छूटे अलग-अलग होते जाए और अलग-अलग होते

16:29 जाए और अलग-अलग होते जाए तो ये बन गए सब परमाणु। अब ये क्या होंगे? फिर परमाणु जितने हो गए। अब इनको इकट्ठे करिए। फिर स्कंद बनेगा। फिर स्कंद से फिर परमाणु फिर वापस स्कंद बनेगा। फिर वापिस परमाणु बनेंगे। फिर वापस स्कंध बनेगा। फिर वापिस परमाणु होंगे। यह क्या है? यह साइकिल अनंत अनंत काल तक चलती ही रहती है। अकॉर्डिंग टू द लॉ ऑफ कॉजेशन जो है उसके कारण परमाणु भी अविनाशी शाश्वत है। परमाणु नाशवंत नहीं है। परमाणु

17:16 नष्ट कभी होते ही नहीं है। आ रही है बात ध्यान में? तो यह इसके साथ की प्रक्रिया जुड़ गई। अब आपको ख्याल आ गया दूसरे जीव अजीव जीव में धर्मस्त का धर्मस्त आकाश में तो है ही नहीं भाई साहब वो प्रश्न अब मैं यह कह रहा हूं एग्जांपल लो। दिस इज आवर फुल बॉडी। ख्याल आ गया। यह हमारा फुल बॉडी के समय क्या है? स्कंद है। एंड व्हेन वी विल डाई हमारा बॉडी अग्नि संस्कार करके जला देंगे तब क्या बनेगी? राख भस्मा वो राख क्या है? ये सब परमाणु है

18:05 अब वो राख वापस ले जाकर राख नष्ट नहीं हुई। लाख राख तो अंतिम स्वरूप तो है ही उसका। अब वो राख ले जाकर के लोग नदी में डाल देते। नदी का पानी फिर वापस खेतों में आएगा। अगेन द एग्रीकल्चर फॉर्म के अंदर वीट है जो भी है तैयार होंगे सब राइस वीट वग फिर वही आप लाकर खाओगे सेम यू विल गेट द अगेन दैट एटम्स इन योर बॉडी हमारे औदारिक शरीर के अंदर वो सेट होते जाए फिर वापस हमारे शरीर से विसर्जन होगा मल मूत्र वगरे बनेंगे वो वापस अपने शरीर से औतिक वर्गणा के पुद्गल परमाणुओं को बिखेर करके अलग कर देते हैं फिर एक दिन मृत्यु होगी। फिर हमारा शरीर जलाया जाएगा। फिर अग्नि संस्कार होकर शरीर

18:52 को जला दिया तो फिर वापस भस्म के रूप में परमाणु के रूप में सब बिखर गए। सब फिर वापस स्कंद बनेगा। अब महावीर क्या कह रहे हैं? अनंत अनंत अनंत काल में भी एक परमाणु कभी नष्ट हुआ ही नहीं है और एक परमाणु कभी नया पैदा बना ही नहीं हुआ ही नहीं है। ये अब लॉ ऑफ कंजर्वेशन की पूरी साइकिल चलती रहती है। बोलिए वंदा माता जी बोलेंगे आप। अनंत अनंत काल में कोई भी परमाणु नष्ट नहीं हुआ है और कोई भी परमाणु नया नहीं बना। अब यह क्या होता रहेगा? चलता रहेगा। यह परमाणु के सामने जो भी स्कंध है, अब आपको

19:39 यह देखना है कि जितने भी स्कंध बने हैं, सो महाराज सर एटम चेंजेस इट्स फॉर्म। राइट वेरी गुड। बट इट्स इटरर्नल। हां यस यस। अब यहां पर आप स्कंध देखिए। समझे कि नहीं? जो भी स्कंध बनेंगे समझा नंबर एक कोई अनंत परमाणु का बनेगा। ख्याल आया अनंत परमाणु से कोई स्कंध बनेगा। नंबर दो कोई जो है असंख्य परमाणु से बनेंगे। नंबर तीन कोई जो है संख्यात परमाणु से बनेगा

20:25 और कोई ऐसे गिनती के परमाणु से स्पष्ट बनेगा। तो ये जो है आप देख रहे हो कितने प्रकार के परमाणु जो है अब इसमें से कौन सा स्कंध कितने से बना है? कितने से बनेगा जो भी है जिस तरह से बनते जाएंगे कोई दा नहीं है भाई साहब अब हमारा शरीर जो बना है वो अनंत परमाणु से बना है आत्मा के ऊपर जो कर्म लगे हैं वो अनंत परमाणु से बने हैं। आ रही है बात समझ में? अब जो जो है वह कितने परमाणुओं से बन रहा है। अब हमारे पास यह जिस तरह से बनते जा

21:14 रहे हैं बनते जा रहे हैं डिफरेंट डिफरेंट टाइप्स ऑफ एटम ग्रुप्स इन नंबर्स ख्याल आया कि नहीं? अब जितने प्रमाण में बनते जाएंगे बनते जाएंगे तो ये जब बनते जा रहे हैं ख्याल आया। अब इसके अंदर आपने क्या देखना है? जो भी हो अगर वह स्कंध स्वरूप में भी है तो भी उसके अंदर और अगर वो परमाणु स्वरूप में भी है तो भी उसके अंदर इनके गुण जो है वो वर्ण गंध रस और स्पर्श ये तो रहने ही वाले हैं और संस्थान

22:03 और यही वापिस आकर के परमाणु के अंदर भी रहने ही वाले हैं। बोलिए छोटिया जी क्या ध्यान में आया देखो आप आपने फरमाया मार साहब स्कंद में वर्ण गंध रस स्पर्श प संस्थान ये पांचो रहने वाले ही है और परमाणु में भी यही पांचो रहने वाले हैं। क्यों रहने वाले हैं कि ये दोनों ही जो है वो अल्टीमेट है पुल द्रव्य है क्या आप म्यूट कर लो जल्दी आवाज आ रही है काका पर म्यूट करो कौन है जरा

22:51 झूम यूजर का अच्छा धन्यवाद चलो अब यहां पर आपने देख लिया दोनों ही पुद्गल द्रव्य अब ये पर्याय स्कंद की है यह पर्याय परमाणु की है। अब इनकी जो है लॉ कंजर्वेशन की साइकिल चलती रहेगी, चलती रहेगी, चलती रहेगी। आज जाकर आप श्रीमंदर स्वामी को पूछो हे भगवान कितने काल तक मैंने कितने परमाणुओं को लिया और उससे स्कंद बनाया और फिर विसर्जन किया छोड़ा तो श्रीमंदर स्वामी को यह फिगर देना पड़ेगा। अनंत अनंत अनंत अनंत काल तक अनता अनंत परमाणुओं को आप लेते रहे छोड़ते रहे लेते रहे

23:37 अब बड़ा छोटा क्यों गिना हमने हमारा भी शरीर बना है ना अनंत औदारिक वर्गणा के पुल परमाणु का माता के गर्भ में बच्चे का बालक का छोटा शरीर बना है वो भी अनंत परमाणु का है और आज चले जाओ महा विद के अंदर 500 धनुष का इतना इतना बड़ा शरीर बना है वो भी अनंत परमाणु का। अब आप देख लो अनंत के वेरिएशन कितने हो गए। आ रहा है ध्यान में। अब वहां उनके वहां महादे में 500 धनुष की काया हमारी काया यहां पर पांच सा छ फ गर्भ में आए हुए छोटे से बालक का शरीर कितना है? लेकिन परमाणु तो लिए सब अब औदारिक वर्गना

24:25 ही अनंत परमाणुओं की बनी हुई है और अनंत के बिना तो हमारा शरीर ही नहीं बनेगा। तो मार साहब पुद्गल द्रव्य आइदर इन द फॉर्म ऑफ स्कंद और इन परमाणु हां जी बराबर है दो पर्याय मेरे देश और प्रदेश तो स्कंध के साथ ही है साथ ही रहते हैं पोशन मेरा ये पूरा शरीर स्कंद है और ये अंगुली मेरा जो है देश है एक फिंगर जो है यह मेरा देश है अब एक फिंगर में से मैंने जो है इतना सा काट करके बाहर किया लास्ट वो परमाणु हो गया ऐसा तो जो कलर वर्ण गंध रस संस्थान पुद्गल द्रव्य के स्कंद में रहेंगे वो परमाणु में भी रहेंगे सब अब

25:11 क्या है कि वर्ण जो है उनका विचार करिए आप तो ये कितने है वर्ण पांच प्रकार के गंध दो प्रकार के रस पांच प्रकार के स्पर्श आठ प्रकार का है और ये रस संस्थान पांच प्रकार के है अब ये भी जो है स्कंद रहेगा तो ये इनको सबको रहना कंपलसरी है। अब किस में कौन सा ज्यादा है कौन सा कम है? कोई ये कपड़ा मेरा सफेद है। कोई आप उसको लाल कर दो, कोई ब्लू कर दो, कोई पीला कर दो, कलर तो बदलेंगे लेकिन सब रहेंगे। अब यहां पर ये आ गया परमाणु। तो पांच में से इसके अंदर कोई एक कलर गंध में से कोई एक गंध रस

25:59 में से कोई एक गंध स्पर्श में से कोई दो रहेगी और किसी ना किसी प्रकार का संस्थान रहेगा ही रहेगा कितने हो गए एक दो तीन चार और पांच अब यहां पर देखिए और ये परमाणु है सब अब इतने परमाणु हमारे इकट्ठे हुए पहले अब हम कैसे बोलेंगे भाई साहब शरीर के ऊपर स्किन बन गई तो आप कलर बोल दोगे आत्मा के ऊपर कर्म लगे अब उसका कलर कौन सा आ गई बात ध्यान में ये जो है ये हमने यहां पर आत्मा दिया है अब आत्मा के ऊपर जो कर्म

26:45 बन गए ये कर्म बना है ये कर्म बना है यह कर्म कर्म बने हैं। अब यह जो कर्म बने हैं ऐसा तो यह किसके बने हैं? कार्बन वर्गणा के पुद्गल परमाणुओं का पिंड इधर देखिए प्रवीण जी अब कार्बन वर्गणा के पुद्गल परमाणुओं में संख्या ज्यादा है कि औदारिक शरीर में संख्या परमाणुओं की ज्यादा है औदारिक वर्गनार की संख्या ज्यादा है सर परमाणु जो बना हुआ है शरीर बना हुआ है उसमें संख्या ज्यादा होगी कार्बन में ज्यादा है महाराज सब साहब अलग कह रहे हैं। चोडिया जी आप लास्ट में आपका नंबर आएगा। हां ध्यान रखना वीणा

27:31 जी आपको क्या कहना है? दोनों में अनंत है। अरे लेकिन मैंने क्या कहा अनंत है उसमें आप कम ज्यादा बोलना है कंपेरेटिव। बोलिए कर्म में कर्म में ज्यादा है। कम है। बदल गए बोलिए। साहब जी आई थिंक औदारिक और बोथ ऑफ देम आई थिंक यू हैव टू गिव द कंपेरेटिव फिगर अनंत अनंत अभिनय ऐसा मत करना चलो मनीषा तो अभी आएंगे इनको ध्यान देंगे

28:18 बोलो हसा गुरु जी पता है साहब जी मुझे औदारिक जो शरीर बना है उसमें ज्यादा लगता है क्योंकि ये दृष्टि गोचर होता है। दृष्टि गोचर होने से कोई संबंध नहीं है। ख्याल आया कि नहीं? अब पहले आपको क्या ध्यान रखना है कि औदारिक वर्गणा के पुद्गल परमाणु संस्थान की दृष्टि से ये संस्थान क्या कह रहा है? एनी टाइप ऑफ शेप एंड साइज जब आकार प्रकार इसके जो है तो वो ज्यादा बड़े हैं। मैं यह कहता हूं एक मूंग के दाने के जितने हैं और कार्बन वर्गना के पुद्गल परमाणु वो क्या बोलते हैं? खसखस के दाने के जितने

29:05 क्या बोलते हैं? खसखस हो खसखस हां जो आप दूसरा नाम जो भी जानते हो अब आप मूंग का दाना और खसखस का दाना कितना फर्क पड़ गया तो कर्म कार्बन वर्गणा खसखस के दाने के समान है और यह औदारिक वर्गणा मूंग के दाने जितनी है। अब आपने अगर 1 किलो का टोप लिया और उसमें मूंग भरे तो उसकी संख्या कितनी रहेगी और उसी 1 किलो वाले टोक में खसखस के दाने भरे तो कितनी हां सर जी तो कार्मण वर्गणा की में ज्यादा है बस बस ठीक है अब आपने मूंग के दाने लिए और एक किलो के अंदर आए 10 लाख और खसखस के

29:51 दाने डाले तो वो हो गए 10 करोड़ अब इतना बड़ा फिगर के अंदर फर्क पड़ गया समझ के लिए तो हमारा औदारिक शरीर आप देखिए अब मृत्यु के बाद जलाते हैं तो अग्नि संस्कार में शरीर तो जल जाएगा कर्म जलते हैं कभी कर्म क्यों नहीं जलते भाई साहब अब आत्मा तो शरीर छोड़कर चली जाती है। अब आत्मा कहीं पर भी अग्नि के बीच में से पसार हो जाए तो भी कर्म नहीं जलते हैं। ख्याल आया कि नहीं? वो आत्मा के साथ ही जाए। जबकि वो परमाणु है कार्बन वर्गना के आत्मा नहीं जलती है बराबर है ख्याल आया आपको ध्यान रखिए आत्मा नहीं जलेगी लेकिन कार्बन

30:38 वर्गना के परमाणु जो है जिसका कर्म बना हुआ है वो अग्नि में से पसार हुए तो वो क्यों नहीं जल रहे हां मास्टर साहब क्या कारण मार साहब बोलो ना फिर मैंने सोचा कि आप सोचने वाले देखो वो मनीष पहले ही बता आपसे ज्यादा एक्सपर्ट तो उनका है गुरुजी वो इतने माइन्यूट होते हैं कि वो ना जलते हैं ना उनका किसी भी तरह से खत्म नहीं होते। चलिए बोलिए महाराज अविनाशी है। अविनाशी है। नहीं नहीं नहीं ऐसा मत बोलिए। कर्म विनाशी कर्मनाशी कर्म कर्म अपना फल दिए बिना झड़ नहीं सकते आत्मा से। उधर मत जाइए। उधर मत जाइए। बोलिए अर्चना जी। जी आत्मा के साथ एकदम एकरस हो गए हैं। पहली बात किसकी है? कितने भी हो जाए

31:25 कार्मण वर्गना के पुद्गल परमाणु आत्म प्रदेशों के साथ जिस तरह से बंधे हुए हैं और उसकी जितनी लंबी टाइम लिमिट है समझे कि नहीं अब आत्मा भले ही यहां से जाए वहां से जाए आपने देखा है नरक के अंदर कितने जला देते हैं इंसान परमाधामी जब आग के अंदर उनको जीवित व्यक्ति को जीवित को जलाते हैं समझे तो भाई वहां तो क्या कि शरीर तो वैक्रिय है। नष्ट तो होता ही नहीं ऐसा। ख्याल आया और उसको जलते जलते जो पीड़ा वेदना होती है। अब उसके अंदर वो आत्मा तो एज इट इज ही रहती है। वेदना ही पीड़ा ही सहन करना है उसको तो कारण वर्गना के पुल परमाणु आत्मा

32:12 पर चिपते हुए वो अगर जल जाए सब तो तो नरक में से आत्मा दूसरे दिन मुक्त हो जाए। ख्याल आया पहले दिन जीव नरक में गया वहां जन्म लिया और दूसरे दिन आकर परमाधामी ने उसको जलाया आग के अंदर अब आग के अंदर जलाया तो उसके सब कर्म जल गए तो वो तो आत्मा तुरंत निकल कर के चली जाएगी साहब कहां जाएगी सीधे नरक में से मोक्ष में चली जाएगी अब कोई कर्म बचा ही नहीं ना कर्म तो सब जल गए सब चली गई आत्मा मोक्ष में लेकिन अब श्रीमंदर स्वामी उन्हें क्या कहते हैं? अनंत अनंत भूतकाल में भी ऐसा कभी हुआ नहीं है और होता नहीं।

32:59 तो जो कर्म है जिस प्रकार से जीव ने जैसे बांधे हैं वो तो उसको हर हालत में भुगतने ही भुगतने। हां। अब आई बात कहां पर? ऐसे चिकने कर्म जो आग में नहीं जलते हैं और आप एक उपवास करके जलाओ तो वह जल के ख बिखर जाते हैं। आपका उपवास इतना हो, आपका मेडिटेशन ऐसा हो, आपका कायोसर्ग ऐसा हो, आपका स्वाध्याय ऐसा हो। वो उस कर्म को जला जला करके ये देखिए ये इसको बाहर फेंक दिया। ये इसको बाहर निकाल दिया। ये निर्जरा है। इसको आप निर्जरा कहेंगे। समझे? लेकिन आग से तो कोई कर्म नहीं कर

33:45 सकते हैं। जबकि है कार्बन वर्गना के पुद्गल परमाणु जड़। बोलिए बार जल्दी बोलो हां से जीनी सब्सटेंसेस पुद्गल परमाणु जलते नहीं है लेकिन अगर तपश्चर्या करे तो उसकी निर्जरा जरूर बिखर जाते हैं और उसको निर्जरा कहते हैं। नहीं मैंने सोचा डू यू वांट टू आस्क सम क्वेश्चन और जी नहीं साहब जी आई वा यहां पर क्या है ये जो पुद्गल शब्द है और

34:31 पुद्गल के परमाणु है अब इनका क्या है परिणमन आपने ध्यान दिया समझे नहीं व्हाट इज द मीनिंग परिमन का जरा म्यूट करो तो डिस्टरबेंस नहीं प्रश्न पूछ खोल बोल तो यहां पर क्या है कि ये जो है अब पर परिणमन क्या है? परिणमन किसको बोलते हैं? हमने दूध पिया और पेशाब हुआ सब हमने पानी पिया यूरिन हुआ बराबर। हमने रोटी, सब्जी, दाल, चावल खाई वो शरीर से स्ट बन के निकला। ये क्या है? परिणमन। ख्याल आया कि नहीं? हमने जो जिस तरह से

35:17 लेकर के उसका यूज किया वह हमारी बॉडी के अंदर परिणमन हो गया। तो यह चेंजेस जो है जिस तरह से होता रहता है होता रहता है। अब हमारा शरीर तो फिजिकल ऑर्गन बॉडी है। आत्मा की शक्ति आत्मा के पास है। लेकिन पुद्गल से जो पुद्गल की स्ट्रेंथ है वो अब उसको आत्मा अपने अंदर से कितना सपोर्ट देती है और पुद्गल की एनर्जी से अब हम बोलते हैं भाई खाएंगे पिए तो ताकत आएगी। नहीं खाओगे पिएंगे तो शरीर के अंदर वीकनेस आ जाएगी तो वहां आत्मा की शक्ति कहां गई फिर तो आत्मा की शक्ति अनंत है लेकिन अंतराय कर्म के आवरण से डके अब अंतराय

36:06 कर्म हमारी शक्ति को कमजोर करता है इसलिए हमको फिजिकल एनर्जी आप उसमें जो है शुद्ध भूख लगती है प्यास लगती है आप खाते हो पीते हो फिर आपकी बॉडी में एनर्जी आती है। आप चलते दौड़ते घूमते फिरते सब कुछ कर सकते हो। अगर आत्मा की अंतराय कर्म का क्षयोप जैसे जैसे जैसे जैसे होता जाए तो शक्ति अपने आप आत्मा की बढ़ती है। महावीर स्वामी को छ महीने तक अप टू 1880 डेज बिल्कुल पानी भी नहीं पीना पड़ा। कुछ भी नहीं खाया। तो महावीर स्वामी कैसे विहार करते रहे चलते रहे। और आज भी जो है कर रहे हैं। अभी इन्होंने

36:51 बताया था विभा बहन जी के दिल्ली के अंदर आचार्य देव आए थे सागर जी महाराज ससुरी जी उन्होंने 180 उपवास किए सब लोगों ने आंखों के सामने देखे अब उनकी शक्ति कहां से इतनी बड़ी समझ तो ऐसा है कि जहां पुद्गल द्रव्य है ध्यान रखिए अब पुद्गल के परमाणु पे भी एनर्जी है वो जो इलेक्ट्रॉन्स जो होते हैं कि जो गति करते हैं ना तो वो शक्ति तो आपने देखी है उसके अंदर भी अब ये क्या है कि एक सिंगल एटम नहीं है ऐसा तो ये आपने देख लिया कि उसके अंदर किस तरह से जो है अब ये अंदर जो है न्यूक्लियस होता है ये इलेक्ट्र्स होते हैं पॉजिट होते हैं प्रोटोन होते हैं तो

37:39 ये रहेंगे लेकिन एनर्जी शक्ति जो है तो ये क्या करेंगे ये इलेक्ट्र जो है अपने ऑर्बिट पर घूमते रहेंगे इलेक्ट्रॉन का तो यही काम है। अब वह इसके अंदर जब ट्रेवलिंग गति आ जाती है, चलने की गति आ जाती है तो इसी बेस पर तो आज सब कुछ बना है। एक रॉकेट बनता है, एक प्लेन बनता है, एयरक्राफ्ट बनता है। तो उसके अंदर कितनी हीट अग्नि पैदा होती है वो उसको फोर्स करके एक घंटे के अंदर 1000 कि.मी. चल जाते हैं। 2000 कि.मी. चल जाते हैं। इतनी स्पीड कैसे आए भाई? सारा फिजिक्स के अंदर जो है परमाणुओं की शक्ति पर चल रहा है और वह मुख्य शक्ति कौन सी गति शक्ति

38:26 आत्मा की शक्ति अनंत अलग अलग हो गई समझे कि नहीं पुद्गल के परमाणु के अंदर अपनी शक्ति जो जिस प्रकार की कैसी है वो थी अब पुद्गल का परिणमन आत्मा उसको लेकर के अपने अपने अंदर परिणमन करे हमने अभी ऑक्सीजन ले कार्बन छोड़ दे। अब संसार में अनंत जीव है। ऑक्सीजन लेंगे, कार्बन छोड़ेंगे, ऑक्सीजन लेंगे, कार्बन छोड़ेंगे। अब पूरे लोक के अंदर रोज इतने अनंत जीव जो है यह लोक है और इसी लोक के अंदर आपने देखा कि यहां पर जो है

39:13 अब ये स्वासो स्वास वर्गना के पुद्गल परमाणु है। अब यह शसोस वर्ग के पुद्गल परमाणु है। आपने जो अभी मैंने कहा कि आप ऑक्सीजन लेते हो, कार्बन छोड़ते हो। यह हमारा साइंस का आज का बाहर का विषय है। महावीर ने क्या बताया है? आप जो है सीधे स्वासो स्वास वर्गणा के पुद्गल परमाणु को ही लेते हो और उसी को छोड़ते हो। छोड़ते

39:59 क्यों हो? यह स्वासो शस वर्गणा के पुद्गल परमाणु आत्म प्रदेशों के साथ चिपकते नहीं है। एक रस होते नहीं। आत्म प्रदेशों के साथ चिपकने वाले आठ में से दो ही वर्गना के परमाणु है तेजस और कार्बन वो दो आत्म प्रदेशों के साथ चिपकेंगे चिपक कर रहेंगे बाकी के छे कार्बन छे वर्गणा के पुद्गल परमाणु आत्मा लेती है उपयोग करती है विसर्जन करती है ये प्रोसेस चलती रहती है आत्मा प्रदेशों के साथ चिपकते नहीं आरती बहन कैन यू अंडरस्टैंड कैन यू स्पीक और नॉट नहीं तो जाने दो बोलिए मनीषा

40:45 जी गुरु जी आठ में से केवल दो वर्गना के पुद्गल परमाणु ही ऐसे तेजस और कार्बन जो आत्मा के साथ चिपकते हैं बाकी के चिपकते नहीं है। अब देखिए औदारिक वर्गणा के पुद्गल परमाणु लेकर हमने शरीर बनाया। यह हो गया परिणमन और जैसे ही बनाया है एक दिन मृत्यु होगी तो आत्मा एक सेकंड में शरीर छोड़ के निकल जाएगी। मृत्यु होते ही आत्मा एक सेकंड में शरीर क्यों छोड़ सकती है? लेकिन हजार बार मृत्यु हो जाए तो भी कर्म के कारण वर्गना का एक भी पुद्गल परमाणु छूटता नहीं है। तेजस वर्गणा के पुद्गल परमाणुओं का बना हुआ तेजस शरीर भी आत्मा के साथ ही चलता

41:33 है। कार्मन वर्गणा के पुद्गल परमाणु का बना हुआ कर्म पिंड जिसको हमने कार्मन शरीर नाम दिया वो भी आत्मा के साथ ही चलेगा। लेकिन आपने स्वासो स्वास ली और छोड़ दी सब तो यह वर्गना के अंदर वापस इनका समान गुणधर्म इकट्ठे होकर फिर स्वासो शवास वर्गणा में आ अब आप सोचिए लोक है ये अब इस लोक के अंदर आपने बताइए साहब कितने जीव है अंदर लोक में बोलिए आरती हाउ मेनी लिविंग बींग्स आर इन दिस सोल कॉस्मोस अनंत वेरी गुड अरे वाह बहुत अच्छा है एंड कैन

42:19 यू यूज़ द मल्टीपल वर्ड्स ऑफ द अनंत देन अनंत अनंत यू कैन मल्टीप्लाई द वर्ड इनफिनिट टू इनफिनिट तो अब वो अनंत अनंत जीव है। अब बताइए चौड़िया जी कि जीवो की संख्या ज्यादा है कि स्वासो स्वास वर्गना के पुद्गल परमाणुओं की संख्या ज्यादा स्वासो श्वास वर्गना के पुद्गल परमाणु की संख्या ज्यादा है अब कितनी ज्यादा है जितने जीव है उनका अनंत बार मल्टीप्लाई करो उतने स्वासो स्वास वर्गना के पुद्गल परमाणु पूरे लोक में अनंत अनंत अनंत काल से थे एट प्रेजेंट

43:10 है इन फ्यूचर भविष्य में बने रहेंगे। स्वासो स्वास वर्गना के पुद्गल परमाणु ना तो जीवों की संख्या से कम हुई है ना कोई घट गई है अनंत अनंत जीव ले रहे निगोद के जीव शस ले रहे अरे हां या ना भाई साहब निगोद के जीव स्वास ले रहे हैं वायु का वनस्पति का दो चौ पंचेंद्र सूक्ष्म जो भी कोई सम भी हो मनुष्य देवी देवता के अनता अनंत जीवो को शस लेना ही लेना आ रहा है बात ध्यान में दीजिए अब इस तरह से पूरे 14 राज लोक के अंदर सब प्रकार की

43:56 वर्गना इसी में लोक के बाहर आउट ऑफ द बाउंड्री ऑफ दिस लोक देयर इज नो सिंगल एटम देयर इज नो ग्रुप ऑफ एटम देयर इज नो क्वेश्चन एट ऑल बोलिए आरती ध्यान आया आउटसाइड लुक देयर इज नो सिंगल एटम यस आउट ऑफ दिस बाउंड्री ऑफ दिस होल कॉस्मोस बाहर क्या है अलोक है अलोक के अंदर देयर इज नो सिंगल एटम एंड देयर इज नो ग्रुप ऑफ एटम नॉट एट ऑल तो जो है वो कहां है सिर्फ लोक में और लोक में ही अनंत जीव है अब ये

44:41 सब जीव भी जो है वो पूरे लोक में ही है। तो सबको लेना भी इधर ही है सबको। सो महाराज साहब आप बदा प्लनेट्स छे ए लोक मावे के अलोक मा लोक मा यू मस्ट राइट डाउन द वन प्रिंसिपल आउट ऑफ द बाउंड्री ऑफ दिस श्लोक नथिंग इज एकिस्टिंग एक्सेप्ट ओनली द स्पेस बोलो रिपीट करो दर्शन आउटसाइड ऑफ द लोग नथिंग एक्सिस्ट अदर देन स्पेस बस स्पेस इज देयर नो डाउट बट ऑल अबाउट अदर थिंग्स नॉट एकिस्टिंग एट ऑल अब यहां पर कितने पुद्गल के परमाणु है अब हमने मन

45:27 बनाया इधर देखिए ये मनोवर्गना के पुद्गल परमाणु का ग्रुप है अब आपने यह जीव ने लेकर के हमने मन बनाया विचार किया विसर्जन किया छोड़ हमने पानी पिया पेशाब किया छोड़ दिया मन बनाया विचार किया छोड़ दिया भाषा वर्गणा के पुद्गल परमाणु है हमने लिया और हमने यूज़ करके भाषा बनाई और छोड़ दिया विसर्ज क्यों छोड़ रहे हो आप क्यों छोड़ रहे हो अंदर हमको इसमें रखने के लिए कोई जगह नहीं है आपके पास कोई अंदर जगह जगह नहीं है। स्वासो स्वास लेकर के अंदर आप रोक के नहीं

46:13 रख सकते हो। आपको छोड़ने ही पड़ेंगे। मनोवर्गना के पुद्गल परमाणु लिए छोड़ दो। वचन भाषा वर्गना के लिए आप छोड़ दो। क्यों भाई साहब? क्यों छोड़ेंगे? तो क्या संसार में कम हो जाएगा? जी नहीं। आपको अवेलेबल एवरीवेयर है तो आप तुरंत वापस दूसरे लो। फिर मन बनाओ, फिर छोड़ दो, फिर दूसरे लो, फिर मन बनाओ, फिर छोड़ दो। भाषा वर्गना के पुद्गल परमाणु हमने लिए और हमने जब उसको यूज किया हमारे ज्ञान के साथ जोड़ के शब्द बना के बोले और वो शब्द जो है आकाश में निकल गए। अब आज जाकर आप सिमंदर स्वामी को पूछिए हे भगवान बीते अनंत अनंत भूतकाल में मैंने कितनी बार भाषा वर्गना के पुल

47:00 परमाणु लेकर के उसको मेरी वॉइस में बना के छोड़े हैं। श्री मंगल स्वामी क्या जवाब देंगे? हो और फिर अनंत अनंत जीव है। दूसरी इंद्रिय आने के बाद दूसरा युग वचन युग आने के बाद तो सभी बोलते हैं। सभी छोड़ते हैं। आप देख लो एक फ्रॉग जो है वो ड्र ड्र ड्र ड्र करता है। वो भी भाषा वर्गना के पुद्गल परमाणु लेकर अपनी वॉइस में उसको छोड़ता है। एक भवरा है वो भी छोड़ता है। ऐसा एक बीज है वो भी छोड़ दिए। अब जिनको भी करना है वो आप लीजिए करिए छोड़ दीजिए। अब इतने शब्द हमने बोल के आकाश में छोड़ दिए। इतने शब्द

47:50 देवलोक के देवता बने तब भी हमने शब्द बोले छोड़े। नरक के नारकी जी तो हमेशा ही बोलो। वो चिल्लाते ही रहते हैं ना। तो उनके तो शब्द निकलते ही रहते हैं। ध्वनि साउंड पशु पक्षी के जन्म में कुत्ते बनकर भगभ करके हमने शब्द बोले हैं और छोड़े हैं। मनुष्य बनकर छोड़े 14 राज लोक के मेरे अकेले के छोड़े हुए शब्द कितने हैं? ऐसा सिमंद स्वामी को पूछ के देख महाराज साहब ये शब्द तो नष्ट तो नहीं होते हैं। शब्द नष्ट क्यों होंगे भाई साहब? बने हैं। अब आप ले लो वापस उसको सुनो भाई। आप जाओ वहां पर महाविद में श्रीमंद स्वामी को बोलिए कि मेरे पिछले जन्म के शब्द मुझे

48:37 वापस सुनने जाओ सुन लो और यहां बैठे आप चेन्नई में बैठे जो है सिमंदर स्वामी की जो देशना के शब्द जो फैले हुए हैं अब वो आपको रिसेप्टर बन जाओ ले लो और सुन लो भाई साहब क्या सिमंदर स्वामी देशना दे रहे लोग तो देवोक में सुन सकते आपकी कैपेसिटी हो तो करके देख लो साह जी आपने तो एक बार कहा था कि फिर यह दूसरे वर्गना में मिक्स हो जाते हैं। दूसरी दूसरी वर्गनाओं के जिसके जाएंगे वो तो होंगे। मनोवर्गना के आपने छोड़ दिया तो कल जाके स्वासोस वर्गना में बदल जाएंगे। स्वासोस वर्गना के छोड़ दिए तो कल वो जा के मनोवर्गना में चेंज हो सकते हैं। औदारिक

49:22 वर्गना छोड़े वो कल जाए उस ग्रुप में जाएगा तो मिलेंगे कि नहीं तो फिर ये भाषा वर्गना कैसे हमें माल फिर कैसे अब वो वर्गना नहीं रही ना आपने शब्द बनाकर छोड़े अच्छा हां आपने भाषा वर्गणा के पुद्गल परमाणु लेकर के परिणमन करके मैंने उसमें मेरी आत्मा से जो ज्ञान डाल के अ ब क ड ए बी सी डी बना के वॉइस है। अब वो उस फॉर्म के अंदर अगर रहेंगे तो फिर क्या करेंगे आप? ये भी परमाणु के ये भी पुद्गल के रूप में ही रहेंगे। ये शब्द भी पुद्गल ही तो है। साउंड क्या है? साउंड भी तो पुद्गल परमाणु ही है ना।

50:11 अब वो क्या जी कभी भी भाषा वर्गणा के पुद्गल थे। अब आपने शब्द बनाकर छोड़े वो वर्गणा नहीं है। अब वो पुद्गल के परमाणु शब्द है। अब वो परमाणु नष्ट नहीं होंगे। हां कहां तक रहेंगे? कितने काल तक रहेंगे? अब वो आप वहां पर कोई आचार्य श्री को पूछ के बताना। भाई साहब क्या उस काल की शाश्वतता है या नहीं है? पता नहीं चल रहा है अभी तक। मुझे नहीं मिला ऐसा आंसर अभी तक से। तो मार साहब परमाणु कोई स्कंद से अलग हो और फिर वासी वापस एक ग्रुप में जाएंगे तो उसी टाइप की क्वालिटी उसमें आ जाएगी। बिल्कुल आएगी सर। ये वर्गणा बनती कैसे है?

50:57 ऐसे ही तो बनती है ना समान गुणधर्म वाले। आप क्या है कि पिछला आपको ज्यादा याद नहीं रहता ना थोड़ा सा। नहीं याद है क्वालिटी कहां से गुणधर्म वाले समान गुणधर्म वाले परमाणु जिस ग्रुप में जाकर इकट्ठे हो जाएंगे वो वापस वर्गणा बन जाएंगे अभी मैंने सफेद कलर जो है लाल में डाला क्या हुआ कलर को मैंने रेड कलर के अंदर डाल दिया समझा वो लाल बन जाएगा कि नहीं समझेगी ऐसा ही यहां पर खुद परिणमन ये होता ही रहता है चलता ही रहता है। अब यह अपने आप में भी पुद्गल के अंदर होवे और जीव लेकर के ग्रहण करके बनाए उसमें भी होते।

51:45 आ रहा है ध्यान में आपको? अब बताइए इला जी अगर मैं यह क्लास एक साल भर की सीरीज चलाऊं तो पुद्गल के बारे में आपने तो बोला 10 जने तैयार हो गए हैं तो ठीक है भाई पुद्गल के विषय में अभ्यास करते करते फिर वापस उनको क्या है कि मेमोरी थोड़ी पावरफुल चाहिए सर ये क्या है चौड़िया जी खाली बादाम की बर्फी खाते हैं लेकिन मेमोरी नहीं बढ़ रही है तो फिर वो फिर पुराना ध्यान में रहना चाहिए नहीं तो मैं वापस ये पूछेंगे मुझे फिर पुरानी बात याद करके फिर पिछली क्लास का ही पेपर आना पड़ेगा। ऐसा नहीं। अब पुद्गल के परमाणु है। ध्यान रखिए दो बात आ गई आप में ध्यान में। अब यहां पर क्या है कि पुद्गल के

52:31 परमाणु दोनों प्रकार के है। ध्यान रखिए। यह जो परमाणु आपने देखे अब ये वर्गणा में मिलने वाले परमार्थ ख्याल आया आपको ये वर्गणा बनने वाले और ये जो है नॉन वर्गणा वाले जिसको हम कहते हैं कि ये वर्गणा बनते ही नहीं है। ऐसे भी परमाणु है। बोलो क्या समझ में आया? इधर देखिए दो हो गए कि नहीं? एक ऐसे ग्रुप है। ये

53:19 परमाणु ग्रुप ऐसे कि जिसकी वर्गना बनती है। और ये परमाणु ग्रुप ऐसे जिसकी वर्गना कभी बनती नहीं है। तो वो कौन है? अब इसके अंदर आपने देखा प्रभा जो है छाया जो है आतप जो है उद्योत जो है शब्द जो है अंधकार जो है ये सब कौन से हैं जो वर्तना नहीं बनते हैं वैसे पर ग्रुप में आएंगे ये भी ग्रुप में अनंत इकट्ठे हो सकते हैं अब हमने जो बोला वो शब्द अंदर देख लो भाई साहब ये आकर

54:06 ख्याल आया तो ये सब पुद्गल के परमाणु है और इनके अंदर जो वर्गणा बनेगी वो आपको आठ प्रकार की मिलेगी सब औदारिक है ये वैय है ये आहारक है ये स्वासोस के है ये भाषा के है ये मन के है और यह तेजस है और यह कार अब वो इस प्रकार के हैं साथ ख्याल आया तो यह वर्गना अति सूक्ष्म परमाणुओं का ग्रुप है और इसमें थोड़े स्थूल रहेंगे अलग-अलग प्रकार के मेरा बोला हुआ शब्द आप सुन रहे हो आपका बोला हुआ शब्द मैं सुन रहा हूं वो वर्गना नहीं है आपने शब्द बनाने के पहले भाषा

54:51 वर्गना के पुद्गल परमाणु लिए जिससे हमने शब्द बनाए वह शब्द नहीं लिए हमने डायरेक्ट आकाश में से शब्द नहीं लिए आपने उसका रॉ मटेरियल जो है शब्द के लिए वो भाषा वर्गना के पुद्गल परमाणु लिए हमने अपनी आत्मा के प्रदेशों के साथ उसको जोड़ के आत्मा का ज्ञान उसमें जोड़ा और फिर वो ज्ञान जोड़कर परा पश्यती मध्यमा वैरी से बोला तब वो शब्द बनकर बाहर निकले वो शब्द यहां पर पुल परमार्थ ये आप जिसको साउंड कहते हो ये साउंड ख्याल आया आपको

55:37 अब ये अलग ही प्रकार के हो गए समझे कि नहीं आप लोगों ने नाम दिया मशीन को अल्ट्रासाउंड सोनोग्राफी आपने अल्ट्रासाउंड नाम देकर के और और ऊपर जो साउंड के बेस पर इन परमाणुओं को लेकर के मशीनों को बना के जो जो काम कर रहे हैं वो क्या ख्याल जिनको एमआरआई या आपने सिटी स्कैन वग कराया हो तो वो उस समय की जो आवाज आप सुनते हो आपको ख्याल आ जाएगा अब ये साइंस का विषय है कि उसने कैसे ये बनाए बनाते हैं यंत्र बनाते हैं इसी प्रकार के अब ये सब प्रकार के

56:25 अब जो भी है वो वो है। इसी प्रकार के पुद्गल परमाणु आत्मा भी त्रिकाल नित्य शाश्वत है। आकाश भी त्रिकाल नित्य शाश्वत है। धर्मास्त काय भी त्रिकाल नित्य शाश अधर्मास्त काय भी त्रिकाल नित्य शाश्वत है। परमाणु भी द एकिस्टेंस ऑफ एटम इज आल्सो परमाण। तो परमाणु स्वरूप में पुद्गल द्रव्य का अस्तित्व शासन। बोलिए आरती बहन जी मैंने क्या कहा है? कैन यू अंडरस्टैंड दिस? एकिस्टेंस ऑफ एटम इज परमानेंट। ख्याल आया आपको? अब वो बराबर परमानेंट रहने ही वाले है। एंड व्हाट द पर्याय इन द

57:12 चेंजिंग फॉर्म ड्यू टू दैट लॉ ऑफ़ कंजर्वेशन इट विल बी चेंज इन डिफरेंट डिफरेंट पर्याय के अंदर बदलते जाएंगे। बदलते चलते रहेंगे। लेकिन द सिंगल एटम विल नेवर डिस्ट्रॉय एक परमाणु अनंत अनंत काल में भी कभी सर्वथा सदा के लिए नष्ट होता ही नहीं चलता ही रहेगा एकिस्टेंस विल बी पर फिर वापस उसको लीजिए फिर बनाइए फिर लीजिए फिर बनाइए अब संसार के अंदर तो कोई भी जीव बिना पुद्गल परमाणु लिए रह ही नहीं सकता कंपलसरी हो गया उसके लिए। अब यहां पर थोड़ा सा विषय जो है वह आपको समझ में नहीं

57:58 आएगा। एक देश है, दो देश है, तीन देश है। फिर कैसे होते हैं, फिर कैसे बनते हैं? ये अलग-अलग विवेचन किया है। फिर नेक्स्ट क्लास में और समझेंगे हम कोशिश करेंगे। अब फिर इसके अंदर कर्मों की बात आएगी। जाना वर्णी में दर्शनावर वर्णी में मोहनीय में कितने में किस में ज्यादा कम ज्यादा फिर वो बात अगली नेक्स्ट क्लास में समझो महाराज आपने जो बताया वर्ण गंध रस और संस्कार तो पांच संस्कार कौन से है महाराज शेप एंड साइज ऑल द डिफरेंट टाइप ऑफ शेप एंड साइज जो होते है ना वो उसके आधार प्रकार कोई भी प्रकार का जी महाराज

58:44 जो परमाणु अभी नॉन वर्गना में है कल वो मतलब वर्गना में आ सकते हैं। वर्गना में यूज़ हो सकता है। इतने इतने सूक्ष्म होंगे तब आएंगे। अच्छा और वो उनके गुणधर्मों के साथ मिक्स होंगे तब आएंगे। अब जो शब्द बन गए वो वापस भाषा वर्गना के पुद्गल परमाणु फिर कन्वर्ट होंगे कि नहीं होंगे? अब ये प्रवीण जी आपको किसी को पूछ के बताएंगे। नहीं तो ईलाबे जी जो है आचार्य श्री को पूछ के बताएंगे। गुरु जी उसका क्या आंसर होगा जो आपने बताया कि आत्मा पर लगे हुए कर्म जलते नहीं है। हां जी नहीं बिल्कुल नहीं जलेंगे कैसे गुरुजी वही लीला पूछने वाले हैं फिर

59:32 वो बताएंगे क्यों नहीं जलते आपने बता लेकिन समझ नहीं आया कि क्यों नहीं कर्म जलते वेट फॉर उसके लिए आप 11 जी पूछेंगे आचार्य श्री को बताएंगे समझ थोड़ा थोड़ा समय इंतजार भी तो करिए ना जी साहब जी परवीन भाई को जवाब क्वेश्चन प्रवीण भाई को पूछना था नेक्स्ट आफ्टर दैट विल बी अंजना बन जी प्रभा का क्या अर्थ हुआ है रोशनी अरे बाहर धूप है तो अपने घर के अंदर अंदर जो है वो प्रभा है। ठीक।

1:00:17 बाहर जो है ना सनलाइट है उसकी जो घर के अंदर जो प्रभा रहती है वो जी मंदामी साहिब जी साहिब जी जैसे उत्पत्ति स्थान पर तो अपन औदारिक वर्गणा को ग्रहण करके शरीर बनाता है जीव तो साहिब जी अभी जो अब हम जी रहे हैं तो हम भी औदारिक वर्गणा ले रहे हैं जो हम खाना खा रहे हैं उसमें हां जी बिल्कुल रोज लेना है मृत्यु तक लेना है है ना चया पच जो मेटाबॉलिक सिस्टम है आपको लेना है डाइजेस्ट करना है शरीर में फिर वापस सेटिंग करना है नहीं तो फिर एक उपवास कर लो दूसरे दिन क्या होता है हां जी तो शरीर का जो मोटा पतला वजन घटता बढ़ता है वो भी किसी का औदारिक वर्गना

1:01:03 जी साहब जी साहब जी हमने जैसे नॉन वर्गना में शब्द को लिया जो भाषा से बना है तो ऐसे विचार जो हमारे मनोवर्गना से बने बने हैं तो विचार को क्यों नहीं लिया आई सर वो परमाणु बिखर जाते हैं ख्याल आया कि नहीं और फिर बिखरते भी है और कुछ नहीं भी बिखरते हो तो वो बाहर रहेंगे तो फिर वो मनो मन के रूप में नहीं कहलाएंगे कहलाएगी नहीं अब देखो इला पूछेंगे बड़े आचार्य श्री मेरे पास भी क्लियर क्लेरिटी उत्तर की नहीं है इसलिए बात आपका प्रश्न बहुत अच्छा जी एक और प्रश्न जी अभी जैसे इन्होंने मनोवर्गना पुरल के प्रमाण तो क्या मनो पर

1:01:51 ज्ञानी जो पहले के विचार भी जान सकते हैं क्या या वर्तमान के ही जानेंगे वर्तमान के ख्याल है और कुछ ऐसे भी है मनोपर ज्ञानी कि आप ये पूछो मैंने कल क्या सोचा था परसों क्या सोचा था अगर वो अगर बता सकते हैं तो बहुत अलग बात हो जाएगी दोनों की बात मैं जरा कोई रेफरेंस मिल जाए तो बताऊंगा। बहन साहब जी शब्द भी पुद्गल परमाणु का ही है तो फिर वो एक बार तो वो बिखरेंगे तो सही ना उसका जो काल जब वो होगा तो वो वही प्रश्न है ना कब बिखरेंगे कितने काल के बाद बिखरेंगे कितने? क्योंकि

1:02:38 एटमॉस्फियर के अंदर आज हजार साल के शब्द तो मिल रहे हैं। जी क्या एटमॉस्फियर के अंदर आकाश के अंदर ये इतने बरसों पहले की अब ये साइंस का कहना मेरा कहना लेकिन ये है कि भाई हां आपको ये मिल रहे हैं। किसकी आवाज सुनाई दे रही है? सुना वो डिफाइन नहीं कर पा रहे लैंग्वेज वॉइस फिर वापिस उसमें से क्या मीनिंग ये बड़ा मुश्किल तो है समझे लेकिन सम ऑफ द साइंटिस्ट वी आर गेटिंग दिस टाइप ऑफ द इन द वर्ल्ड तो साहब जी अभी यहां पर तो दो तीन लोग हैं जो अभी इसकी रिसर्च कर रहे हैं तो वो पूछ रहे थे ये पुद्गल हम ले सकते हैं मैंने

1:03:25 मतलब उनको बोला कि वो तो फिर बिखर जाते हैं दूसरे में कन्वर्ट हो जाते हैं। लोगे तो भाषा वर्गना के पुद्गल लोगे। जी लेने में लेने में हर किसी को भाषा वर्गना के रॉ मटेरियल लेना है। चला है कि नहीं? बाहर नहीं आपके घर में रोटी बनी है। बाहर तो आटा मिलता है ना। आटा तो कोई भी लेगा खरीद लेगा। भाई साहब आटा अब लाके अपने घर में जैसी रोटी पराठे चपाती जैसा बनाना है आप बनाओ। जी सर जी। नमो अरहता नमो सिंह नमो नमो सब सांसो पंच नमोकार

1:04:11 पावसम मंगलम च परम हवय मंगलम मंगलम भगवान वीर मंगलम गौतम प्रभु मंगलम जय धर्मस्तु मंगलम चारी मंगलम हरिता मंगलम सिंगलम साह केवली प मंगलम चारी लोगत्तमा अरिहता लोगत्तमा सिद्ध लोगत्तमा साहत्तमा पत्तमा शरण पव्याम अरिहंत शरणम प्रवजम

1:04:58 सिद्धे शरणम प्रवजमि साहहु शरणम प्रवजम केवली पत्तम शरणम प्रवजम सर्व मंगल मंगल्यम सर्व कल्याणकार प्रधानम सर्व धर्म चैनम जयतिम धर्म लाभ जीता महाराज खूब खब वंदना जी सुता में साहि जी खूब खूब

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