NCERT | CBSE | Class - 11 | भारत का संविधान सिद्धांत और व्यवहार | भारतीय संविधान में अधिकार | भाग-3

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त तीन मौलिक अधिकारों पर केंद्रित है: शोषण के विरुद्ध अधिकार (अनुच्छेद 23 और 24), धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (अनुच्छेद 25-28), और शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार (अनुच्छेद 29 और 30)।

  • शोषण के विरुद्ध अधिकार मानव दुर्व्यापार और बाल श्रम को प्रतिबंधित करता है।
  • धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार व्यक्तियों को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने और धार्मिक संस्थानों की स्थापना करने की स्वतंत्रता देता है।
  • शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार नागरिकों को अपनी संस्कृति को बनाए रखने और अल्पसंख्यकों को अपनी शिक्षा संस्थाओं की स्थापना करने का अधिकार देता है।

शोषण के विरुद्ध अधिकार

अनुच्छेद 23 मानव दुर्व्यापार एवं बलात श्रम का निषेध करता है, जिसके तहत मनुष्यों को वस्तुओं के समान खरीदना-बेचना प्रतिबंधित है। किसी से भी बलपूर्वक या बिना पारिश्रमिक दिए श्रम नहीं करवाया जा सकता। बंधुआ मजदूरी को भी इसी अधिकार के तहत खत्म किया गया है। अनुच्छेद 24 बाल श्रम का निषेध करता है, जिसके अनुसार 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों या खतरनाक कार्यों में नियोजित नहीं किया जा सकता है।

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार

अनुच्छेद 25 से 28 तक धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार दिए गए हैं। अनुच्छेद 25 अंतःकरण की स्वतंत्रता प्रदान करता है, जिसके तहत प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म को मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता है। अनुच्छेद 26 धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता देता है, जिससे धार्मिक प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और प्रबंधन किया जा सकता है। अनुच्छेद 27 धर्म के नाम पर करों से मुक्ति प्रदान करता है, जिसके अनुसार राज्य किसी धर्म विशेष के पोषण के लिए कर नहीं ले सकता। अनुच्छेद 28 राजकीय संस्थाओं में धार्मिक शिक्षा के निषेध की बात करता है और धार्मिक उपासना में भाग लेने के लिए बाध्य नहीं करने की स्वतंत्रता देता है।

शिक्षा और संस्कृति का अधिकार

अनुच्छेद 29 और 30 शिक्षा और संस्कृति के अधिकार से संबंधित हैं। अनुच्छेद 29 प्रत्येक नागरिक को अपनी भाषा, लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार देता है। अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार प्रदान करता है, ताकि वे अपनी संस्कृति को बढ़ावा दे सकें। राज्य इन संस्थाओं को आर्थिक सहायता देने में भेदभाव नहीं करेगा।

प्रश्न

वीडियो के अंत में, धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के अंतर्गत भारतीय संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों (अनुच्छेद 25, 26, 27 और 28) और शिक्षा एवं संस्कृति के अधिकार (अनुच्छेद 29 और 30) को समझाने के लिए कहा गया है।

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Transcript

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0:00 पिछले वीडियो में अपन ने स्वतंत्रता के अधिकार के बारे में जाना था। आज अपन जानेंगे शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार और शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार। तो सबसे पहले अपन जानते हैं शोषण के विरुद्ध अधिकार जो कि हमें मिलता है अनुच्छेद 24 और अनुच्छेद सॉरी अनुच्छेद 23 और अनुच्छेद 24 के अंतर्गत। क्या है शोषण के विरुद्ध अधिकार? चलिए देखते हैं। शोषण के विरुद्ध अधिकार में जो पहला अनुच्छेद 23 हमें प्रदान करता है वो है मानव दुर्व्यापार एवं बलात श्रम का निषेध। यानी कि मानव का स्त्री या बच्चे हैं या फिर मनुष्य है उनका वस्तुओं के समान बिक्री और वस्तुओं के समान उनकी खरीदफरोख्त नहीं की जा सकती है। मनुष्यों को बेचा नहीं जा सकता है। खरीदा नहीं जा सकता है। बलात श्रम बलपूक उनको कहें कि

0:48 अपन बाध्य करके उनसे श्रम नहीं करवाया जा सकता है। बिना उनको पारिश्रमिक दिए उनसे श्रम नहीं करवाया जा सकता है। बंधुआ मजदूरी का खात्मा इस मूल अधिकार के तहत किया गया है। चलिए देखते हैं। पुरुष महिला एवं बच्चों की वस्तु के समान खरीद पर बिक्री पर प्रतिबंध यानी कि वस्तु के समान पुरुष महिला और बच्चे उनकी बिक्री नहीं की जा सकती है। बिना पारिश्रमिक के कार्य करवाने पर प्रतिबंध बंधुआ मजदूरी पर रोक। यह है अनुच्छेद 23 के अंतर्गत। अनुच्छेद 24 है वह करता है बाल श्रम का निषेध। यानी कि 14 वर्ष के जो बच्चे हैं उनको किसी भी कारखानों में कार्य नहीं करवाया जा सकता है। उनको अपन कहेंगे खतरनाक कार्य नहीं करवाए जा सकते हैं। बाद में इसमें संशोधन

1:34 कर दिया गया और 14 वर्ष से छोटे किसी भी बालक को किसी भी प्रकार का कार्य नहीं करवाया जा सकता है। उसमें घरेलू कार्य की बात नहीं आती। कोई भी व्यवसायिक कार्य या फिर अपन कहें कि उससे मजदूरी या फिर उसको पैसे के लालच में उससे श्रम करवाना। तो ये सारी चीजों का निषेध किया गया है अनुच्छेद 24 के अंतर्गत। 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी कारखाने, खदान या अन्य किसी खतरनाक कार्य में नियोजित नहीं किया जाएगा। यह अधिकार हमें प्रदान करता है अनुच्छेद 24। अब अपन जानते हैं धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के बारे में कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार क्या है? धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार हमारे संविधान में हमें अनुच्छेद 25 से अनुच्छेद

2:19 28 तक प्राप्त होता है। अनुच्छेद 25 हमें देता है अंतःकरण की स्वतंत्रता। इसका क्या तात्पर्य है? इसका मतलब है कि हम हमारी मर्जी का कोई भी धर्म मानने के लिए स्वतंत्र हैं। हमारी जो इच्छा हो हम उस धर्म को मान सकते हैं। हम उस धर्म के रीति-रिवाजों का पालन कर सकते हैं। उसी धर्म के अनुरूप अपनी पूजा अर्चना उपासना जो भी कार्य हैं वो कर सकते हैं। और इसमें हमारी यह भी मर्जी है कि अगर हम चाहे तो हम किसी भी धर्म को ना माने तो यह है अंतःकरण की स्वतंत्रता। हम चाहे तो हमारा हम धर्म भी बदल सकते हैं। धर्म का परिवर्तन कर सकते हैं। तो ये स्वतंत्रता हमें प्रदान करता है अनुच्छेद 25 देखते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने का अधिकार अपने धार्मिक

3:07 विश्वास और आस्था की सार्वजनिक और बिना भय के घोषणा करने का अधिकार कि उसका कौन से धर्म में विश्वास है? उसकी किस धर्म के प्रति आस्था है। वह किस तरह से पूजा पाठ करना चाहते हैं। इस बात की सार्वजनिक रूप से घोषणा करने का उनको अधिकार है कि वह भय मुक्त होकर कोई भी व्यक्ति इस बात की घोषणा कर सकता है कि उसे कौन सा अधिकार अच्छा लगता है और वह किस अधिकार का पालन करना चाहता है। धार्मिक परंपरा पूजा और समारोह करने और अपनी आस्था और विचारों के प्रदर्शन की स्वतंत्रता। अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार पूजा करना, अर्चना करना और अपनी धार्मिक आस्था का प्रदर्शन करना। इस बात का अधिकार भी हमें अनुच्छेद 25 देता है। अपनी धार्मिक आस्थाओं का प्रचार

3:52 प्रसार करने का अधिकार कि हमारी जो भी धार्मिक आस्थाएं हैं, हमारे धर्म के जो भी विचार हैं, हमारे धर्म के जो भी सिद्धांत हैं, उनका प्रचार प्रसार करने का अधिकार भी हमें अनुच्छेद 25 प्रदान करता है। अनुच्छेद 26 है धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता। यानी कि किसी भी धर्म को हम माने उसके जो धार्मिक प्रयोजन हैं हम उनका आयोजन कर सकते हैं। हम उनका प्रबंध कर सकते हैं। इस बात की स्वतंत्रता हमें अनुच्छेद 26 द्वारा प्रदान की जाती है। धार्मिक प्रयोजनों के लिए संस्थाओं की स्थापना और पोषण। धार्मिक प्रयोजनों के लिए हम संस्था की स्थापना कर सकते हैं। हमारे भारतीय अपन देखते हैं परिवेश में बहुत सारी धार्मिक संस्थाएं हैं। तो यह अधिकार हमें मूल अधिकार के रूप में हमारा

4:38 संविधान अनुच्छेद 26 के द्वारा देता है कि हम अपने धर्म के अनुसार हमारी धार्मिक संस्थाएं हैं उनकी स्थापना कर सकते हैं। उनका पोषण कर सकते हैं। उनका प्रबंध कर सकते हैं। जंगम और स्थावर संपत्ति का स्वामित्व और अधिकार उस धार्मिक संस्था के नाम पर संपत्ति भी ली जा सकती है और उस संपत्ति का प्रबंधन किया जा सकता है। ऐसी संपत्ति का विधि के अनुसार प्रशासन हो जो संपत्ति है उसका प्रबंधन या उसका प्रशासन है वो विधि के अनुसार होना चाहिए बाकी वह धार्मिक संस्था के लिए धर्म के नाम पर ली जा सकती है। बात करते हैं अनुच्छेद 27 की तो अनुच्छेद 27 है वह हमें देता है करो से मुक्ति धर्म के नाम पर। यानी कि राज्य है वो धर्म के नाम पर या किसी धर्म विशेष के पोषण के लिए किसी धर्म विशेष की प्रचार

5:25 प्रसार के लिए हमसे कर नहीं ले सकता। यानी कि राज्य है वह नागरिकों से इस प्रकार का कोई कर नहीं लेगा कि यह इस धर्म की रक्षा हेतु आपको कर देना है। आपको इतने पैसे टैक्स के रूप में इस विशेष धर्म की रक्षा हेतु देने हैं। इसका सीधा-सीधा अर्थ अपन यह भी ले सकते हैं कि राज्य को सरकार को जो भी संपत्ति इकट्ठी होती है कर के माध्यम से उस संपत्ति का इस्तेमाल वह किसी धर्म विशेष के पोषण के लिए नहीं करेगा। यानी कि किसी धर्म विशेष के पोषण के लिए राज्य के द्वारा नागरिकों के करों से प्राप्त संपत्ति है, करो से प्राप्त आय है, उसका उपयोग नहीं किया जाएगा। देखते हैं किसी भी व्यक्ति को किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि या पोषण में व्यय करने के लिए करों के संदाय हेतु बाध्य नहीं किया

6:13 जाएगा। अर्थात राज्य कर के रूप में एकत्रित धन को किसी विशिष्ट धार्मिक उत्थान एवं रखरखाव के लिए व्यय नहीं कर सकता है। यानी कि किसी विशिष्ट धर्म के रखरखाव के लिए किसी विशिष्ट धर्म के उत्थान के लिए राज्य उसको व्यय नहीं करेगा। अनुच्छेद 28 अपन लेते हैं। वो हमें कौन सी स्वतंत्रता प्रदान करते हैं? अनुच्छेद 28 के तहत अगर कोई भी राजकीय संस्था है तो उसके अंदर किसी भी प्रकार के धर्म की शिक्षा नहीं दी जाएगी। अनुच्छेद 28 इस बात का प्रावधान करता है कि जो पूर्ण पोषित सरकार द्वारा जो कोई पूर्ण पोषित संस्थान है उसमें किसी भी धर्म विशेष की कोई शिक्षा नहीं दी जाएगी। अगर

6:58 सरकार द्वारा कोई अर्धपोषित संस्था है या फिर कोई निजी संस्थान है जिसमें किसी धर्म विशेष की मान लीजिए कि शिक्षा दी जा रही है तो उस धर्म उस संस्थान के अंतर्गत जो भी पूजा अर्चना है जो भी धार्मिक कार्यक्रम हैं उनमें उपस्थित होने के लिए उन धार्मिक कार्यक्रमों को मानने के लिए किसी व्यक्ति को बाध्य नहीं किया जाएगा। देखते हैं अपन राज्य निधि से पूर्णतः पोषित किसी शिक्षा संस्था में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी। राज्य निधि से सहायता प्राप्त संस्थान में दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा या उपासना में भाग लेने के लिए उपस्थित किसी व्यक्ति को बाध्य नहीं किया जाएगा। यानी कि किसी व्यक्ति को बाध्य नहीं किया जाएगा कि वह उस धार्मिक शिक्षा को ग्रहण करें या फिर जो उपासना हो

7:45 रही है, जो पूजा अर्चना उस संस्था के अंदर हो रही है, उसके अंदर वह व्यक्ति उपस्थित हो। अगला जो अधिकार आता है अपना वो आता है शिक्षा और संस्कृति का अधिकार। यह अधिकार हमें प्राप्त होता है अनुच्छेद 29 और अनुच्छेद 30 के अंतर्गत। तो अनुच्छेद 29 के अंतर्गत अपन देखते हैं कि हमें कौन सा अधिकार प्राप्त होता है। अनुच्छेद 29 के अंतर्गत प्रत्येक भारतीय नागरिक को यह अधिकार है कि वो अपनी शिक्षा और अपनी संस्कृति को बनाए रख सकता है। अपनी संस्कृति के अनुसार आचरण कर सकता है। अपनी संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए कार्यक्रम आयोजित कर सकता है। अपनी संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए प्रयास कर सकता है। देखते हैं अनुच्छेद 29 यह उपबंध करता है कि भारत के किसी भी भाग में

8:32 रहने वाले नागरिकों को किसी भी अनुभाग को किसी कोई भी नागरिक है जो भारत के किसी भी भाग में रह रहा है या फिर कोई भी अनुभाग है उसको अपनी बोली भाषा लिपि और संस्कृति को सुरक्षित रखने का अधिकार है। अनुच्छेद 30 है वो अल्पसंख्यकों के लिए है। यह अल्पसंख्यकों को अपनी रुचि की शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन का अधिकार देता है कि जो भी अल्पसंख्यक वर्ग हैं वह अपनी संस्कृति को बचाए रखने के लिए अपनी संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए उसकी बढ़ोतरी के लिए शिक्षा संस्थाओं की स्थापना कर सकते हैं और उनका प्रशासन कर सकते हैं। राज्य आर्थिक सहायता में अल्पसंख्यकों द्वारा प्रतिबंध अह जो प्रबंधित संस्थाएं हैं उनमें विभेद नहीं करेगा। राज्य किन्ही भी संस्थाओं को जब

9:18 आर्थिक सहायता देगा तो जो अल्पसंख्यकों द्वारा प्रबंधित संस्थाएं हैं उसमें राज्य भेदभाव नहीं करेगा। उनको भी वो आर्थिक सहायता दी जाएगी। तो इस वीडियो में हमारे भारतीय संविधान द्वारा प्रदत तीन मौलिक अधिकारों का अपन ने अध्ययन किया। जो पहला था वो था शोषण के विरुद्ध अधिकार जो कि अनुच्छेद 23 और अनुच्छेद 24 के तहत अपन को प्राप्त होता है। दूसरा धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार जो कि हमारा संविधान हमें प्रदान करता है अनुच्छेद 25, अनुच्छेद 26, अनुच्छेद 27 और अनुच्छेद 28 के अंतर्गत। तीसरा जो मूल अधिकार अपन ने पढ़ा वो पढ़ा अपन ने शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार अनुच्छेद 29 वो प्रत्येक भारतीय नागरिक को प्राप्त होता है अपनी भाषा अपनी लिपि अपनी संस्कृति को सुरक्षित रखने के

10:05 लिए और अनुच्छेद 30 है वो है अल्पसंख्यकों के लिए। अगले वीडियो में अपन जानेंगे अपना अंतिम जो मूल अधिकार है सबसे महत्वपूर्ण मूल अधिकार है वो है संवैधानिक उपचारों का अधिकार। इससे पहले जो आज अपन ने पढ़ा इस पर लेते हैं क्वेश्चंस। पहला क्वेश्चन है धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार के अंतर्गत भारतीय संविधान द्वारा कौन-कौन से अधिकार दिए जाते हैं? इसमें आपको 25, 26, 27 और 28 चारों अनुच्छेदों के प्रावधानों के बारे में लिखना है। शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार क्या है? समझाइए। बहुत आसान सा है। शिक्षा और संस्कृति का अधिकार। यह आपको बताना है। अनुच्छेद 29 और अनुच्छेद 30 के प्रावधान। धन्यवाद।

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