प्रश्नोत्तरी! एक ही पिता के चार बच्चे फ़िर भी सब अलग अलग दिशा में क्यों चल रहे हैं? Jagadguru Kripalu

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो पिछले जन्मों के कर्मों और साधनाओं के आधार पर वर्तमान जीवन में भगवान और महापुरुषों के प्रति रुचि और भक्ति के स्तर में अंतर को स्पष्ट करता है। यह बताता है कि कैसे शुद्ध अंतःकरण वाले लोग जल्दी से भगवान की ओर आकर्षित होते हैं, जबकि पापों से भरे अंतःकरण वाले धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं।

मुख्य बातें:

  • पिछले जन्मों के कर्म वर्तमान जीवन में रुचि और भक्ति को निर्धारित करते हैं।
  • शुद्ध अंतःकरण वाले लोग भगवान और महापुरुषों की ओर जल्दी आकर्षित होते हैं।
  • पापों से भरे अंतःकरण वाले धीरे-धीरे आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हैं।

एक छोटा सा प्रश्न

एक प्रश्न पूछा गया है कि एक ही माता-पिता और समान परवरिश होने के बावजूद बच्चों में इतना अंतर क्यों होता है, जैसे कि कुछ भगवान की ओर जाते हैं, कुछ घर में ही बुराई करते हैं, और कुछ थोड़ी रुचि दिखाते हैं। इसका कारण यह है कि पिछले जन्मों में की गई साधना के अनुसार भगवान वर्तमान जन्म में चित्तवृत्ति बनाते हैं।

पिछले जन्मों के कर्म

पिछले अनंत जन्मों में जिसने जितनी साधना की है, भगवान उसके अनुसार उसकी चित्तवृत्ति वर्तमान जन्म में बना देते हैं। यही कारण है कि कभी-कभी भगवान या महापुरुष मिलने पर तुरंत भागवत प्राप्ति हो जाती है, जबकि कभी इसमें 2 मिनट, 2 घंटे, 2 महीने, 2 साल या कई जन्म लग जाते हैं।

अंतःकरण की शुद्धता

हमारा अंतःकरण जितना अधिक शुद्ध होता है, उतनी ही जल्दी हम भगवान और महापुरुषों की ओर आकर्षित होते हैं। भगवान और महापुरुष चुंबक की तरह हैं जो शुद्धता को खींचते हैं। यदि अंतःकरण में मिलावट है, तो भगवान की शक्ति भी विफल हो जाती है।

चुंबक और सुई का उदाहरण

एक चुंबक के चारों ओर अलग-अलग मिलावट वाली लोहे की सुइयां रखने पर, कम मिलावट वाली सुई जल्दी आकर्षित होती है, जबकि अधिक मिलावट वाली सुई अपनी जगह पर खड़ी रहती है। इसी तरह, चार बच्चों में से प्रत्येक के अंतःकरण के पाप-पुण्य की शुद्धता अलग-अलग होती है, जिसके कारण वे भगवान के प्रति अलग-अलग तरह से आकर्षित होते हैं।

मुंडे मुंडे मतिर्भिन्ना

रामायण में कहा गया है कि हर एक जीव ने तमाम जन्मों में अनेक अच्छे-बुरे कर्म किए हैं। इस जन्म में चार जीव एक ही घर में आते हैं, लेकिन उन्होंने पहले क्या-क्या साधनाएं की थीं, यह कोई नहीं जानता। केवल भगवान जानता है और उसी के अनुसार फल देता है।

आश्चर्य नहीं करना चाहिए

अगर हमने पिछले जन्म में नहीं कमाया तो अब कमाओ। किसी ने पहले से ही बैंक में एक लाख रुपये जमा कर रखे हैं। इसलिए आश्चर्य नहीं करना चाहिए कि कोई गुरु के पास जाकर तुरंत भागवत प्राप्ति कर लेता है, जबकि कोई धीरे-धीरे चलता है और इस जन्म में अपनी कमी को पूरा कर लेता है।

निष्कर्ष

अधिकांश लोग अधिक पाप युक्त अंतःकरण वाले होते हैं, इसलिए वे धीरे-धीरे चलते हैं। ठीक है, हजार जन्म में सही, पहुंचना तो है। नहीं तो 84 लाख योनियों में घूमना पड़ेगा।

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Transcript

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0:00 एक छोटा सा प्रश्न है एक सड़क पिता के कर बच्चे हैं कोई भगवान की और चला है कोई घर में ही बुराई करता राहत है भगवान की कोई थोड़ी रुचि से चला है यानी ये कर बच्चों में कर प्रकार की बातें क्यों होती है मां-बाप तो वही है वही खानपान है सब ने इस मां का दूध पिया है

0:46 फिर इतना बड़ा अंतर कैसे होता है ऐसा प्रश्न है तो ऐसा है तो पिछले अनंत जनों में जिसने जितनी साधना की है भगवान इस के अनुसार उसकी चित वृत्ति वर्तमान जन्म में बना देते हैं

1:32 ना यही तो करते हैं वो इसलिए कभी ऐसा होता है की भगवान या महापुरुष मिले और तुरंत भागवत प्रताप हो गई और कभी 2 मिनट में कभी 2 घंटे में कभी 2 महीने में कभी 2 साल में कभी दो जन्म में कभी आजाद जन्म में सब लोग हमारा

2:18 अंतरण जितना अधिक शुद्ध है उतनी जल्दी खींच जाएगा भगवान और महापुरुष से यह दोनों चुंबक शुद्ध हैं तो यह शुद्ध को खींच सकते हैं भगवान की पावर फेल बड़े-बड़े जगत गुरुओं के पावर फेल वहां हर जाते हैं [संगीत]

3:05 आप लोग उसके चारों और सुइयां खड़ी कर दीजिए लोहे की और उन सैयां में एक सी तो हो केवल लोहे की परसेंट मिलावट हो एक मिनट 20% मिलावट हो एक में आदि मिलावट हो एक में 3 4 मिलावट हो ऐसे अंतर हो अब आप चुंबक को बीच में रख दीजिए और जिसमें थोड़ी मिलावट है अब धीरे-धीरे

3:54 आएगी और जिसमें अधिक मिलावट है वह अपनी जगह खड़ी रहेगी हिलेगी भी नहीं ऐसे ही एक आप के कर बच्चे हैं तो सबके अंतरण के पाप पुण्य उसकी शुद्ध की लिमिट अलग-अलग है तू जिसका कंप्लीट सुरेंद्र कर देगा और जिसमें जितनी गड़बड़ी है पाप है

4:49 भगवान से और महापुरुष से इसलिए इसमें रामायण में कहा है ना तो मुंडे मुंडे मटर बिना हर एक जीव तमाम जनों में अनेक अच्छे बुरे कर्म किया हैं इस जन्म में एक आप के यहां ए गए कर जीव लेकिन वो जहां से आए पहले तो और आप था और माटी उन्होंने क्या-क्या साधनाएं की थी यह तो

5:38 आम आदमी नहीं जानता वो भी नहीं जानता उसको भी याद नहीं है तो केवल भगवान जानता है इसलिए भगवान फल देता है की जिसके अधिक साधना पहले की है उसको इस क्लास में खड़ा कर देगा वैसे रुचि अपने आप होने ग जाएगी यहां तक की अगर आप के खिलाफ पियो भगवान की और चलेगा उसे कोई रॉक नहीं सकता इसलिए आश्चर्य नहीं करना चाहिए

6:24 अगर हमने नहीं कमाया तो अब कमाई किसी ने बैंक में जमा कर रखा है पहले से ₹1 लाख [संगीत] शुरू करो कमाओ इसलिए अंतर होता है और इसीलिए

7:11 इतिहास में कोई ऐसे महापुरुष हुए की गुरु के पास गए और चिपक गए भागवत प्रताप कर लिया और कोई ऐसे भी हुए की तेजी से चलने लगे जो कमी थी वह पुरी कर ली इस जन्म में और अधिकांश अधिक पाप युक्त होते हैं अंतरण वाले तो धीरे-धीरे चलते हैं ठीक हैं हजार जन्म में सही पहुंचाना है वहां नहीं तो 84 लाख में घूमने पड़ेगा ए से

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