राजस्थान लोक नाट्य / रंगमंच for टेक्निकल हेल्पर BSTC Lab assistant CET exam #rssb #gk

GK Capsule by Ashok Sir www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो राजस्थान के लोकनाट्यों, विशेषकर 'ख्याल' पर केंद्रित है, जो राज्य की सबसे लोकप्रिय नाट्य विधा है। इसमें ख्याल का अर्थ, इसकी शुरुआत और विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित प्रमुख ख्यालों जैसे कुचामणी ख्याल, शेखावटी ख्याल, अलीबख्शी ख्याल, हेला ख्याल, जयपुरी ख्याल, किशनगढ़ी ख्याल, तुरा कलंगी ख्याल और कन्हैया ख्याल के बारे में बताया गया है। प्रत्येक ख्याल की विशेषताएँ, क्षेत्र, प्रवर्तक और महत्वपूर्ण कलाकारों पर प्रकाश डाला गया है।

  • ख्याल राजस्थान की सबसे लोकप्रिय नाट्य विधा है।
  • ख्याल का अर्थ है खेल, जिसकी शुरुआत 18वीं सदी में हुई।
  • विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार की ख्यालें प्रचलित हैं।

परिचय

इस वीडियो में राजस्थान की कला और संस्कृति के एक महत्वपूर्ण पहलू, लोकनाट्य पर चर्चा की गई है, जिसमें ख्याल को सबसे लोकप्रिय नाट्य विधा बताया गया है। ख्याल का अर्थ 'खेल' होता है और इसकी शुरुआत 18वीं सदी में हुई थी। यह खेल के साथ संगीत में कला का मिश्रण है। ख्याल के कलाकारों को खिलाड़ी और उनके दल को अखाड़ा कहा जाता है, जबकि सूत्रधार को हलकारा कहते हैं।

कुचामणी ख्याल

कुचामणी ख्याल कुचामण क्षेत्र से संबंधित है, जो वर्तमान में डीडवाना कुचामण जिले का भाग है। इसके प्रवर्तक लच्छीराम हैं और उगमराज इसके प्रमुख कलाकार हैं। यह ओपेरा शैली पर आधारित है।

शेखावटी ख्याल

शेखावटी ख्याल चिड़ावा (झुंझुनू) की प्रसिद्ध है, इसलिए इसे चिड़ावा की ख्याल भी कहा जाता है। इसके प्रवर्तक नानूराम हैं और दुलिया राणा इसके प्रमुख कलाकार हैं।

अलीबख्शी ख्याल

अलीबख्शी ख्याल मुंडावर (खेरतल तिजारा) की है। इसके प्रवर्तक अली बख्श हैं, जिन्हें अलवर का रसखान कहा जाता है। इस ख्याल में अहीरवाटी बोली का प्रयोग होता है।

हेला ख्याल

हेला ख्याल लालसोट (दौसा) और सवाई माधोपुर में प्रसिद्ध है। 'हेला' का अर्थ है लंबी आवाज देना। इसके प्रवर्तक हेला शायर हैं।

जयपुरी ख्याल

जयपुरी ख्याल जयपुर की प्रसिद्ध है। इसकी शुरुआत गुणीजन खाना से हुई, जो सवाई प्रताप सिंह के दरबार में स्थित था। इसकी विशेषता यह है कि इसमें महिला का किरदार स्वयं महिला द्वारा निभाया जाता है।

किशनगढ़ी ख्याल

किशनगढ़ी ख्याल किशनगढ़ की है और इसके प्रवर्तक बंसीधर शर्मा हैं।

तुरा कलंगी ख्याल

तुरा कलंगी ख्याल की शुरुआत लगभग 400 वर्ष पूर्व नीमच (मध्य प्रदेश) में हुई थी। राजस्थान में यह मेवाड़ क्षेत्र (चित्तौड़गढ़ के निम्बाहेड़ा और घसुंडा) में प्रसिद्ध है। इसमें 'तुरा' भगवान शिव और 'कलंगी' पार्वती का प्रतीक है। यह ख्याल सांप्रदायिक सद्भावना का प्रतीक है, क्योंकि इसे हिंदू (तुक्कनगीर) और मुस्लिम (शाह अली) दोनों कलाकार मिलकर करते हैं। जयदयाल, सोनी, हामिद बेग और चेतरा इसके प्रमुख कलाकार हैं।

कन्हैया ख्याल

कन्हैया ख्याल पूर्वी राजस्थान में प्रसिद्ध है। इसे मीणा, माली और गुर्जर समाज के लोग मिलकर करते हैं। यह दिन में आयोजित होती है और इसमें रामायण और महाभारत पर आधारित कथाएँ होती हैं।

ढपाली ख्याल

वीडियो के अंत में ढपाली ख्याल के बारे में प्रश्न पूछा गया है कि यह राजस्थान में कहां की प्रसिद्ध है।

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Transcript

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0:01 हां जी नमस्कार स्वागत और अभिनंदन आप सभी का। आशा उम्मीद है आप सब मस्त हैं और अपनी तैयारी में व्यस्त हैं। आइए शुरू करते हैं आज का हमारा सेशन। आज का जो हमारा सेशन रहने वाला है वह है आपके राजस्थान कला एवं संस्कृति से संबंधित। और उस महत्वपूर्ण बिंदु के बारे में चर्चा करेंगे जो लगभग सभी एग्जामों के अंदर बहुत इंपॉर्टेंट होता है। यानी कि आज हम जिस बिंदु के बारे में चर्चा करेंगे वह है आपके सामने राजस्थान में लोकनाट्य और हम चर्चा कर रहे हैं उस लोकनाट्य को लेकर जो राजस्थान के अंदर लोक नाट्यों में सर्वाधिक लोकप्रिय एक नाट्य विद्या है। तो

0:48 पहला क्वेश्चन यहीं से बन गया कि राजस्थान का सबसे लोकप्रिय सबसे लोकप्रिय नाट्य विद्या कौन सी है? तो आप कहेंगे सर राजस्थान में सबसे लोकप्रिय नाट्य विद्या जो है वह है आपके सामने ख्याल। कौन सी है? ख्याल। तो आज हम राजस्थान के अंदर प्रमुख-प्रमुख जो ख्याल है उसके बारे में चर्चा करने वाले हैं क्योंकि वहां से क्वेश्चन बनता है। तो पहला क्वेश्चन तो आपके सामने यहीं से बन गया कि राजस्थान में सबसे लोकप्रिय नाट्य विद्या कौन सी है? तो वह है ख्याल। अच्छा ख्याल का अर्थ क्या होता है? तो आप कहेंगे सर ख्याल का

1:34 अर्थ होता है खेल। अच्छा इस ख्याल की जो शुरुआत है वह कब हुई है? तो आप याद रखिएगा ख्याल की जो शुरुआत है वह हुई है आपके 18वीं सदी में वेरी वेरीेंट कई बार क्वेश्चन इस प्रकार से भी मिल जाता है कि शुरुआत 18वीं सदी अच्छा ख्याल का अर्थ खेल से और क्या होती है ख्याल तो आप कहेंगे सर खेल के साथ संगीत में जो कला होती है संगीत में कला उसे आप क्या कहते हैं ख्याल और आप देखते हैं कि प्रत्येक क्षेत्र के अंतर्गत जो है वह अलग-अलग खेल खेले जाते हैं और अलग-अलग वहां की क्या है संगी संगीत कला। इसीलिए आप देखेंगे राजस्थान के लगभग सभी क्षेत्रों में अलग-अलग प्रकार के

2:19 ख्याल हैं। जैसे कुचामणी ख्याल, शेखावटी ख्याल, अलीबशी ख्याल, कन्हैया ख्याल, तुराक कलंगी ख्याल। तो अलग-अलग क्षेत्र के अंदर यानी कि खेल के साथ क्या है? संगीत में कला उसे आप क्या कहते हैं? याद रखिएगा ख्याल। ठीक है? ख्याल के जो कलाकार होते हैं उन्हें खिलाड़ी कहते हैं आप। कलाकार जो होते हैं उन्हें आप क्या कहते हैं? खिलाड़ी याद रखिएगा जो दल होता है उसे आप क्या बोलते हैं तो याद रखिएगा अखाड़ा क्या बोलते हैं अखाड़ा अच्छा इसमें जो सूत्रधार होता है उसे क्या बोलते हैं हलकारा कई बार क्या होता है कि यहां से भी क्वेश्चन आ जाता है कि खिलाड़ी अखाड़ा और हलकारा जो है यह निम्न में से किससे

3:05 संबंधित है तो याद रखेंगे आप ख्याल से। ठीक है? आइए चर्चा करते हैं राजस्थान के अंदर उन प्रसिद्ध ख्याल को लेकर जो एग्जाम के लिए सबसे ज्यादा खास होते हैं। सबसे पहले चर्चा करते हैं यहां से और यहां पर जो ख्याल है आपके सामने वह है लीजिए कुचामणी ख्याल। कौन सी ख्याल है? कुचामणी ख्याल। कुचामणी ख्याल से रिलेटेड पहला क्वेश्चन आपके सामने कि कौन से क्षेत्र के है? तो आप कहेंगे सर कुचामण। कुचामन आप सब जानते हैं कि वर्तमान के अंदर डीडवाना कुचामन नाम से एक नया जिला है। जबकि यह पहले किस जिले का भाग था? तो आप कहेंगे सर नागौर का। ठीक है? बस इतना

3:52 ही इंपॉर्टेंट। अच्छा इसके बाद में कुचामणी जो ख्याल है इसके प्रवर्तक कौन है? तो आप कहेंगे सर कुचामणी ख्याल जो है इसके प्रवर्तक हैं आपके याद रखिएगा लच्छीराम तो क्वेश्चन आता है लच्छीराम का संबंध राजस्थान में कौन सी प्रमुख ख्याल से है तो याद रखिएगा कुचामणि ख्याल इंपॉर्टेंट ठीक है और इसके अलावा अन्य जो कलाकार है उसका नाम भी जरूर याद रखिएगा और वह है आपके उगमराज यह भी नाम दे देता है वन लाइनर उगमराज का संबंध निम्न में से कौन सी ख्याल से है तो याद रखिएगा कुचामणि ख्याल तो कुचामणी ख्याल कहां की है कुचामण की। कुचामण पहले नागौर का भाग था। अब डीडवाना कुचामण के

4:37 नाम से नया जिला है। प्रवर्तक कौन थे? लक्ष्मीराम। कलाकार कौन है? याद रखिएगा उगमराज। अच्छा एक बात याद रखिएगा। यह ओपेरा शैली पर आधारित है। ओपेरा शैली पर आधारित। यह एक अच्छा क्वेश्चन और बन जाता है। ठीक है? तो, यह बातें हुई कौन सी ख्याल को लेकर? याद रखिएगा। कुचामणी ख्याल। क्लियर है? चार बातें हैं कुचामणी ख्याल कुचामण की लच्छीराम प्रवर्तक कलाकार है उगमराज और ओपेरा शैली पर आधारित आइए आगे अगली जो चर्चा है वह करते हैं हम जिस ख्याल को लेकर वह है आपके याद रखिएगा शेखावाटी ख्याल कौन सी ख्याल है शेखावटी ख्याल यह जो शेखावाटी ख्याल है यह आपके कहां की है तो

5:24 याद रखिएगा यह है चिड़ावा की चिड़ावा कहां पर है? तो आप कहेंगे सर झुंझुनू में। इसीलिए याद रखिएगा कि यह जो शेखावाटी ख्याल है इसी का दूसरा नाम क्या होता है? चिड़ावा की ख्याल। मतलब कई बार ऐसे भी आ सकता है कि निम्न में से चिड़ावा की ख्याल ही शेखावटी की ख्याल है। इसके जो प्रवर्तक हैं वह कौन है? तो आप कहेंगे सर इसका जो प्रवर्तक है वह है आपके नानूराम और कलाकार जो है वह याद रखिएगा दुलिया राणा दुलिया राणा चार बातें शेखावटी ख्याल की है और चार

6:09 बातें ही किसकी है? कुचामणी ख्याल की। और यह दोनों बहुत इंपॉर्टेंट है एग्जाम के लिए। अगली बात। अगली बात जो हम करते हैं वह करते हैं आपके यहां से यानी कि अब वर्तमान के अंदर तो हो गया है आपके क्या खेरतल तिजारा यानी कि चर्चा कर रहे हैं हम वह है आपके अली बक्शी ख्याल कौन सी है अली बक्शी ख्याल और यह जो अली बक्खशी ख्याल है यहां पर तो आपके सामने नाम था धुलिया राणा। अगली जो ख्याल है वह है आपके कौन सी? अली

6:55 बख्शी ख्याल। और यह जो अली बक्खशी ख्याल है याद रखिएगा यह है आपके मुंडावर की। कहां की है? मुंडावर। अच्छा आप सब जानते हैं कि यह जो मुंडावर है यह पहले आपके कौन से जिले का भाग था? तो आप कहेंगे सर अलवर का। लेकिन वर्तमान के अंदर मुंडावर जो है वह आता है आपके खेरतल तिजारा में। ठीक है? पहले अलवर वर्तमान है आपके खेरतल तिजारा। तो यह जो अलीब बखशी ख्याल है याद रखिएगा इसके जो प्रवर्तक हैं इसके जो प्रवर्तक हैं वह आपके कौन हैं? तो आप कहेंगे सर अली बख्श। और यह जो अलीबख्श है इनको कहा जाता है अलवर का रसखान। याद रखिएगा। अलवर का क्या कहते हैं आप इसे? रसखान। याद

7:40 रखिएगा। और इसकी एक और खास बात आती कि अली बक्शी ख्याल के अंदर कौन सी बोली है? तो याद रखिएगा अहीरवाटी। कौन सी बोली है? अहवाटी बोली। वेरी वेरी इंपॉर्टेंट याद रखिएगा। तो अली बख्शी ख्याल मुंडावर की मुंडावर पहले अलवर का भाग था। वर्तमान में खेरतल तिजारा का भाग है। इसके प्रवर्तक कौन है? तो आप कहेंगे सर अली बख्श जिसे अलवर का क्या कहते हैं? रसखान। कौन सी बोली प्रयुक्त होती है? अहवाटी। ठीक। अगली बात अगली बात हम करते हैं वह करते हैं यहां से यहां से और वह है आपके हेला ख्याल

8:25 देखिए यह जो हेला ख्याल है हेला का मतलब होता है ज आप मारवाड़ी में क्या हेलो पाडनो है लंबी आवाज दे हेलो पाडनो है हेला का अर्थ होता है लंबी आवाज हेला ख्याल जो है याद रखिएगा यह हमारे राजस्थान राजस्थान में कहां की प्रसिद्ध है? तो याद रखिएगा लालस दौसा लालस दौसा और साथ में याद रखिएगा सवाई माधोपुर हेला ख्याल जो है वह आपके कहां-कहां की प्रसिद्ध है? तो लालसोड़ दौसा और याद रखिएगा सवाई माधोपुर यहां की प्रसिद्ध है। हेला ख्याल जो है इसके जो प्रवर्तक हैं वह है आपके कौन? याद रखिएगा हेला शायर। हेला शायर

9:12 लंबी आवाज देना। हेला से तात्पर्य क्या है? लंबी आवाज। तो यह भी अच्छा खासा क्वेश्चन है कि हेला ख्याल निम्न में से कहां की प्रसिद्ध है? तो याद रखिएगा लालसर दोसा सवाई माधोपुर और हेला ख्याल के प्रवर्तक कौन है? तो याद रखिएगा हेला साहिर। ठीक है? आगे आगे है आपके राजधानी की यदि हम बात करते हैं तो यहां की एक ख्याल है जिसका नाम है आपके जयपुर ख्याल कौन सी है जयपुरी ख्याल अब यह जो जयपुरी ख्याल है यह कहां की प्रसिद्ध है तो आप कहेंगे सर जयपुर की ये लो जयपुर जो ख्याल है वह कहां की प्रसिद्ध है जयपुर की जयपुरी ख्याल की जो शुरुआत है वह

10:00 हुई है आपके याद रखिएगा गुणीजन खाना से आप कहेंगे सर यह कौन सा है? देखिए गुजजन खाना आपके जयपुर के एक शासक हैं जिनका नाम है सवाई प्रताप सिंह उनके दरबार में 22 कवि 22 ज्योतिषी 22 विशेषज्ञ 22 कलाकार रहा करते थे। उन सभी के ठहरने की जो जगह थी वो थी गुणीजन खाना और वहीं से एक ख्याल निकली जिसका नाम क्या है? जयपुरी ख्याल। इस जयपुर ख्याल की एक खास बात याद रखिएगा कि इसके अंदर महिला का जो किरदार है वह स्वयं महिला द्वारा निभाया जाता है। महिला का किरदार

10:48 स्वयं महिला द्वारा ही निभाया जाता है। तो जयपुरी ख्याल जो है उसकी शुरुआत जो है वह गुणजन खाना नामक स्थान से हुई क्योंकि यहां पर 22 कलाकार 22 कवि 22 ज्योतिषी 22 संगीतक ये सब रहा करते थे। ठीक है तो जयपुर ख्याल आपके कहां की जयपुर की विशेष बात महिला का किरदार महिला द्वारा बाकी सब जगह महिला का किरदार आप देखेंगे चाहे आपके शेखावटी ख्याल हो यह जो ख्याल है इनमें पुरुषों द्वारा निभाया जाता है यहां पर महिला का किरदार कौन निभा रही है महिला कौन सी ख्याल है जयपुरी ख्याल आगे अगली जिस ख्याल की बात करते हैं वह है आपके यहां यह हो गई आपके कौन वह है किशनगढ़ी ख्याल।

11:38 किशनगढ़ी ख्याल। यह जो किशनगढ़ी ख्याल है यह याद रखिएगा कहां की है? तो आप कहेंगे सर किशनगढ़ की। किशनगढ़ी ख्याल जो है वह है आपके किशनगढ़ की और इसके जो प्रवर्तक हैं वह है आपके याद रखिएगा बंसीधर शर्मा। इंपॉर्टेंट। किशनगढ़ ख्याल किशनगढ़ की है और इसके प्रवर्तक हैं आपके कौन? याद रखिएगा बंसीधर शर्मा। ठीक? आगे अगली ख्याल और अगली ख्याल जो है वह है आपके यहां निम्बाहेड़ा, गोसुंडा, चित्तौड़गढ़ यानी कि मेवाड़ क्षेत्र में और यहां पर जो ख्याल है उसका

12:24 नाम है याद रखिएगा तुरा कलंगी ख्याल कौन सी है? तुरा कलंगी ख्याल। याद रखिएगा यह जो तुराक कलंगी ख्याल है इसकी जो शुरुआत है वह आज से 400 वर्ष पूर्व नीमच क्षेत्र में हुई थी। नीमच जो कि आपके कहां पर है? याद रखिएगा एमपी के अंदर। तुरा कलंगी ख्याल जो है इसकी जो शुरुआत है वह याद रखिएगा आज से 400 वर्ष पूर्व लेकिन राजस्थान के अंदर यदि हम बात करेंगे तो याद रखिएगा मेवाड़ मेवाड़ में चित्तौड़गढ़ चित्तौड़गढ़ के याद रखिएगा एक तो आपके घसुंडा स्थान आ जाता है एक आ जाता है आपके

13:09 नींबाहेड़ा यहां पर यह जो ख्याल है वह कौन सी है तुरा कलंगी ख्याल इसमें आपको याद रखना है कि तुरा जो है यह तो दर्शाता है भगवान शिव को और कलंगी जो है वह है आपके याद रखिएगा पार्वती और जितने भी ख्याल हम पढ़ रहे हैं इनमें से तुराक कलंगी ख्याल एकमात्र ऐसे ख्याल है जो सांप्रदायिक सद्भावना का प्रतीक है क्या है सांप्रदायिक सांप्रदायिक सद्भावना का प्रतीक जो ख्याल है वह कौन सी है तुराकल ंगी ख्याल क्योंकि तुराकलंगी ख्याल के जो प्रवर्तक थे इनके

13:55 यदि हम प्रवर्तक की बात करते हैं तो वह है आपके तुक्कनगीर वे शाह अली तो शाह अली हो गया आपके कौन सा मुस्लिम कलाकार और तुक्कनगीर हो गया आपके कौन सा हिंदू कलाकार तो हिंदू व मुस्लिम दोनों कलाकार मिलकर जिस ख्याल को करते हैं वो है आपके कौन सी तुराकलंगी ख्याल अच्छा किसी एग्जाम में पूछा भी गया था तुराकलंगी ख्याल जो है इसके कलाकार कौन है? तो देखिए जयदयाल सोनी हामिद बेग और चेतरा यह जो है यह आपके कौन सी ख्याल से संबंधित है? याद रखिएगा एग्जाम के अंदर काफी सारा

14:42 और अच्छा क्वेश्चन बनता है। आपके तुराकलंगी ख्याल कौन सी है? वेरी वेरी इंपॉर्टेंट याद रखिएगा तुराक कलंगी ख्याल तो तुराक कलंगी ख्याल में याद रखिएगा तुरा का मतलब तो है शिव कलंगी का मतलब क्या है पार्वती सांप्रदायिक सद्भावना का प्रतीक है क्यों है सांप्रदायिक सद्भावना का प्रतीक वो इसीलिए है क्योंकि इसे हिंदू और मुस्लिम दोनों कलाकार जो है वह क्या है मिलकर करते हैं याद रखिएगा वेरी वेरी इंपॉर्टेंट ठीक है आगे इसके अलावा अगली जिस ख्याल की हम बात करते हैं। वह देखिए एक ख्याल है जिसका नाम है कन्हैया ख्याल। कौन सी है? कन्हैया ख्याल। यह जो कन्हैया ख्याल है यह आपके पूर्वी

15:29 राजस्थान। कहां की है? याद रखिएगा पूर्वी राजस्थान की है जिसका नाम क्या है? कन्हैया ख्याल। इस ख्याल को याद रखिएगा। मीणा, माली और गुर्जर समाज के लोग मिलकर करते हैं। याद रखिएगा मीणा, माली और गुर्जर पूर्वी राजस्थान के अंदर है। और यह दिन में आयोजित होती है। और खास बात क्या है इसकी? इसके अंदर रामायण और महाभारत पर आधारित ख्याल है। कौन सी? राजस्थान के अंदर कन्हैया ख्याल। कौन सी? कन्हैया ख्याल। अब एक क्वेश्चन आपके लिए है। आप बताइएगा कमेंट करके कि हमारे राजस्थान में ढपाली जो ख्याल है वह कहां की है? राजस्थान में ढपपाली ख्याल जो है वह कहां

16:16 की है? ठीक है? तो यह आज का जो हमारा बिंदु था, यह था आपके राजस्थान के अंदर लोक नाट्य में सबसे लोकप्रिय नाट्य विद्या कौन सी? ख्याल के बारे में। ख्याल में देखिए नंबर वन कुचामणी ख्याल। नंबर दो हमने पढ़ी शेखावटी ख्याल तीन आपके अली बख्श नंबर फोर हेला ख्याल नंबर फाइव आपके जयपुरी ख्याल नंबर छह किशनगढ़ी ख्याल नंबर सात तुराक कलंगी ख्याल नंबर आठ कन्हैया ख्याल और फिर नंबर नौ ढपाली ख्याल आपके लिए आपको कमेंट करके बताना है कि राजस्थान में ढपाली ख्याल जो है वह कहां की प्रसिद्ध है तो आज आपके सामने यह जो बिंदु था यह था आपके राजस्थान के लोकनाट्य में ख्याल नामक जो लोकनाट्य है उससे संबंधित संबंधित स्टार लगा दीजिए क्योंकि एग्जाम

17:03 के अंदर क्वेश्चन देखने को मिल जाएगा आपको। ठीक है? तो आज के इस छोटे से सेशन में जो ख्याल बिंदु होता है जो एक राजस्थान में सबसे लोकप्रिय ख्याल है यह कंप्लीट हो गया। मिलते हैं इसी प्रकार एक और सेशन के साथ। तब तक के लिए धन्यवाद।

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