RCM GURUKUL BY TC SIR (25 अगस्त 2026)

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संक्षिप्त सारांश

इस वीडियो में प्रेम की शक्ति और जीवन में इसके महत्व के बारे में चर्चा की गई है। वक्ता ने बताया है कि जीवन में प्रेम की कमी होने पर जीवन का कोई मूल्य नहीं होता। प्रेम से जीवन में मिठास और सकारात्मक्तता आती है, जबकि स्वार्थी सोच जीवन को बेकार बनाती है। वक्ता ने अपने विचारों को जीवन में प्रेम की आवश्यक भूमिका के रूप में प्रस्तुत किया है।

  • प्रेम एक आवश्यक क्षमता है जो इंसान को बड़ा बनाती है।
  • जीवन में प्रेम की कमी होने पर सफलता और ज्ञान का कोई मतलब नहीं।
  • प्रेम से इंसान सच्चे खुशियों और सहयोग को प्राप्त करता है।

प्रेम की शक्ति और जीवन

इस अध्याय में वक्ता ने जीवन में प्रेम की भूमिका के बारे में बताया है। उदाहरण के तौर पर फल की बातचीत की गई कि बाहरी खूबसूरती से ज्यादा आंतरिक मिठास महत्वपूर्ण होती है। वक्ता ने कहा कि यदि जीवन में प्रेम की कमी है, तो वह जीवन व्यर्थ है और उसकी कोई भी उपयोगिता नहीं है। प्रेम जीवन का एक अनिवार्य तत्व है।

प्रेम और ज्ञान

इस हिस्से में वक्ता ने व्यक्त किया कि ज्ञान बिना प्रेम के निरर्थक हो जाता है। स्वार्थी व्यक्ति जो अपने लिए ही सोचता है वह दूसरों को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे में व्यक्ति की क्षमताएं कमज़ोर पड़ जाती हैं। लेकिन जब प्रेम होता है, तो व्यक्ति दूसरों के लिए बहुत कुछ कर सकता है। प्रेम के प्रभाव से सब कुछ संभव है।

प्रेम की ताकत

वक्ता ने कहा है कि प्रेम एक बहुत बड़ी शक्ति है। प्रेम के बिना कोई व्यक्ति अपने संकल्पों को भी पूरा नहीं कर सकता। प्रेम इंसान को सच्ची खुशी और प्रेरणा देता है। वक्ता ने यह भी कहा कि स्वार्थी इंसान छोटे विचारों की परिधि में बंधा रहता है, जबकि प्रेम से भरा व्यक्ति बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ता है।

सत्संग और प्रेम

इस अध्याय में सत्संग के महत्व पर ज़ोर दिया गया है। वक्ता ने कहा कि अच्छी संगत से इंसान में प्रेम की भावना जगती है, जो उसे बेहतर इंसान बनाती है। सत्संग करने से मन और आत्मा को शांति मिलती है, और प्रेम की भावना विकसित होती है। अच्छे लोगों की संगत से इंसान अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।

जीवन में प्रेम का संचार

वक्ता ने आगे कहा कि जीवन में प्रेम का स्थान आवश्यक है। प्रेम से समुदाय और राष्ट्र का विकास होता है। वक्ता ने यह भी कहा कि कुछ लोग समाज में नकारात्मकता फैलाते हैं, जबकि प्रेम से भरे लोग समाज को उज्ज्वल बनाते हैं।

सकारात्मक परिवर्तन

इस भाग में वक्ता ने व्यक्तिगत परिवर्तन को बताने का प्रयास किया। वक्ता ने कहा कि जिन्हें प्रेम है वो खुद को बदलने के लिए तैयार रहते हैं। प्रेम से जीवन का मार्गदर्शन होता है। वक्ता ने दर्शकों से आह्वान किया कि प्रेम के जरिए वे अपने जीवन में बदलाव लाएं।

समापन विचार

अंत में, वक्ता ने यह स्पष्ट किया कि प्रेम ही जीवन का सार है। जीवन में प्रेम की शक्ति से लोगों के दिलों में सकारात्मकता का संचार होता है। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वे प्रेम के विचारों को अपने पास रखें और इसे अपने समुदाय में फैलाएं।

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Transcript

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0:00 वक्ता की यहां पर है उससे ज्यादा भूमिका हम सभी साथियों की है। जितनी आपकी तैयारी होगी उतनी ही बातचीत का फल निकल पाएगा। हम बाजार से कोई वस्तु खरीदने जाते हैं, कोई फल खरीदने जाते हैं। मान लीजिए और वो फल बाहर से बहुत अच्छा दिख रहा है। बहुत सुंदर दिख रहा है। और हम उसको सुंदर देख के लेकर आ जाते हैं। जब उसका उपयोग करने के लिए उसको काटते हैं और अंदर से वह बिल्कुल फीका निकल जाए। तो फल कैसा लगेगा?

0:49 अच्छा नहीं लगेगा कि ये तो फल बहुत फीका है। टेस्टी नहीं है, स्वाद नहीं है, व्यर्थ है, बेकार है, निरर्थक है। कैसा लेके आ गए? और कोई फल बाहर से सुंदर नहीं दिख रहा है और उसको लेकर आए और वो अंदर से बहुत अच्छा निकल अच्छा निकल जाए तो हम क्या कहेंगे क्या बात है बहुत ही अच्छा है बहुत ही अच्छा है तो बाहर से ऐसे दिख रहा था भीतर से तो बहुत अच्छा है ऐसा ही हमारा जीवन है साथियों जिस जीवन में प्रेम नहीं है बाहर से कितना भी सुंदर दिख रहा जिस जीवन में प्रेम नहीं है

1:35 वह जीवन व्यर्थ है। उस जीवन का कोई मोल नहीं है। वो ना खुद के काम का है ना दुनिया के काम का है। जैसे फल की अनिवार्य शर्त है उसका मीठा होना। उसके बिना वो व्यर्थ है। फल की अनिवार्य शर्त है उसका मीठा होना उसमें स्वाद होना उसमें रस होना ऐसे जीवन

2:23 की अनिवार्य शर्त है उसमें प्रेम होना अगर प्रेम नहीं है तो दिख रहा है केवल काम का कुछ भी नहीं है। वह दुख पैदा करने वाला है। वह धरती को कष्टों से भरने वाला जीवन होता है। इसलिए प्रेम का होना जीवन में बहुत जरूरी है। प्रेम एक ऐसी शक्ति है इंसान की जो कुछ भी करवा देती है। बहुत बड़ी पावर है प्रेम। प्रेम जो जिसमें प्रेम नहीं होता है वो जो इंसान

3:12 अपने लिए भी ठीक से कुछ नहीं कर पाता है पर जिस इंसान में प्रेम होता है वो दुनिया के लिए भी बहुत कुछ कर देता है तो इंसान तो वही का वही है क्षमता कहां से आ गई वो कैपेसिटी कहां से आई वो सोच कहां से आई वो है प्रेम प्रेम प्रेम नहीं है तो ज्ञान कितना भी लेते रहो वो ज्ञान कुछ काम ही नहीं आएगा। प्रेम नहीं है तो आपका दिमाग कितना भी चलता है तेज है लेकिन वह कुछ निरर्थक ही करेगा। वह दुनिया में उत्पात ही मचाएगा। वह किसी का नुकसान ही करेगा। लेकिन जिसमें प्रेम है और उसमें थोड़ा सा

3:59 दिमाग मान लो कम भी चलता है थोड़ा यू कह सकते हैं कि इंटेलेक्चुअल कम भी है तब भी वह दुनिया के लिए बहुत कुछ अच्छा कर जाएगा। तो प्रेम एक बहुत बड़ी पावर है। बहुत बड़ी शक्ति है। इसलिए हम सबको इस शक्ति से परिपूर्ण होना है। इस शक्ति से भरपूर होना है। इसी से सारी शक्तियों का जन्म होता है। इसी से हमारी सारी अच्छाइयों का जन्म होता है। हम जब कोई भी संकल्प करते हैं

4:46 तो वह संकल्प भी जिसमें प्रेम होता है उसका संकल्प दृढ़ रहता है। और जिसमें प्रेम नहीं होता वह अपने संकल्प को भी भूल जाता है। हम सोचते हैं कि हम कुछ ऐसा सीखेंगे, ऐसा कुछ प्लान करेंगे, कितनी भी तैयारियां कर लीजिए। लेकिन जब तक प्रेम नहीं है ना तब तक कोई तैयारी काम आने वाली नहीं है। स्वार्थी इंसान उसके पास कितना भी कुछ हो वह कुछ कर ही नहीं सकता।

5:32 स्वार्थ का मतलब अपने लिए सोचना। प्रेम का मतलब है सबके लिए सोचना। जो अपने लिए सोचेगा वो कितना सोच पाएगा? वो कितना कर पाएगा? उसकी चाहते कितनी होगी? उसकी योजनाएं कितनी होगी? सब कुछ बहुत छोटा छोटा थोड़ा थोड़ाा और प्रेम जिसमें है वह पूरी दुनिया के लिए सोचेगा इंसान वही है दिख वही फल रहा है परंतु ये प्रेम है जो मिठास है ना ये इंसान को बहुत बड़ा बना देती है बहुत मूल्यवान बना देती है वो दुनिया के लिए हो जाता है दुनिया के

6:17 इतिहास में जितनी भी कहानी कहानियां है वो चाहे झांसी की रानी हो चाहे भगत सिंह की कहानी हो या सुभाष चंद्र बोस की कहानी हो या और जो भी है छत्रपति शिवाजी की जितनी भी कहानियां है ना क्या था उनमें उनके अंदर क्या था उनके अंदर राष्ट्र के प्रति एक अद्भुत प्रेम था अद्भुत बिना किसी शर्त का बिना किसी इच्छा का वो अद्भुत प्रेम था कि उनको इतना बड़ा बना दिया। आप थोड़ा कल्पना कीजिए। उस बात को समझने की कोशिश कीजिए कि धरती पर सारे इंसान तो वही शरीर ले पैदा होते हैं। लेकिन जिसको

7:05 प्रेम होता है ना वह विराट बन जाता है। और हम बिना प्रेम के बहुत ऊंचाइयों पर जाने के सपने देखते रहते हैं जो कभी पूरे होने वाले नहीं है। स्वार्थी इंसान अपने लिए सोचता है मात्र अपने लिए। उसकी योजनाएं मात्र अपने लिए होती है। उसको कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वह दुनिया का कितना खराब कर सकता है। वो किसी को भी नुकसान पहुंचाए, किसी को दुखी करे, कैसे भी करे लेकिन वो अपने लिए कुछ सोचता रहता है। तो वो कितना छोटा हो जाता है इसलिए कितना मामूली हो जाता है।

7:51 कभी-कभी तो निंदा का बहुत बड़ा पात्र बन जाता है। तो उसका आखरी फल क्या निकलता है? वह वह बिल्कुल गिर जाता है अपनी नजरों में और दुनिया की नजर में। इसलिए साथियों इस विषय पर चर्चा भले कितनी ही करो उस चर्चा से भी कुछ नहीं होने वाला है। पर आज आप आरसीएम परिवार में आपके सामने ऐसे उदाहरण नजर आ जाएंगे जो ऐसे साथी जो प्रेम से भरे हुए हैं जिनके हृदय में प्रेम है वो यह भी नहीं देखते हैं जब आरसीएम का उनको कोई काम या

8:39 सेवा का मौका मिलता है, किसी का सपोर्ट करने का मौका होता है तो वह शुद्ध मन से पूरे आरसीएम के लिए सोचते हैं। किसी भी समूह का साथी हो कुछ भी हो उतनी सेवा उतना ही उसका सपोर्ट करना चाहते हैं। वो संपूर्ण आरसीएम को बड़ा करना चाहते हैं। क्योंकि उनको देश से मतलब उनको देश से प्रेम है। पूरा देश अच्छा होना चाहिए। उसी की बजाय कुछ ऐसे साथी नजर आएंगे जो किसी को भी कष्ट देते हुए, किसी का नुकसान करते हुए उनको संकोच ही नहीं होता है क्योंकि वो बिना रस का फल है। वो सुख है वो स्वाद रहित है। वो प्रेम रहित है। नहीं रखे नहीं तो आरसीएम को अगर हमें करना है नए भारत का

9:27 निर्माण करना है राष्ट्र निर्माण करना है तो आपकी योजनाएं आपका ये जो सब कुछ जरूरी है या प्रेम बहुत जरूरी है प्रेम है तो कुछ भी हो जाएगा प्रेम है तो सीख भी जाएगा इंसान क्योंकि प्रेम उसको प्रेरित करता है कि मुझे कुछ करना है मेरे होते हुए दुनिया में दुख दुख क्यों है? मैं दुखी नहीं देख सकता। मुझे सबको सुखी देखना अच्छा लगता है। वह प्रेम उसको आकर्षित करता है। प्रेम उसको शक्ति प्रदान करता है। तो वो फिर सीखने की इच्छा पैदा करता है कि नहीं मुझे इस दुनिया का भला करना तो मुझे कुछ सीखना चाहिए। मुझे कुछ खोज करनी चाहिए। मुझे मुझे जिम्मेदारी लेनी है। जिम्मेदारी पैदा करता है कि मेरी

10:14 जिम्मेदारी है। दुनिया कैसा भी करे लेकिन मुझे संभालना है। मैं अपने आप को बदलने के लिए तैयार करता प्रेम नहीं मुझे देखना है। दुनिया जैसी भी है लेकिन मुझे कुछ करना है। क्या कमी है मेरे अंदर? मैं और क्या बदल सकता हूं? बहुत जबरदस्त शक्ति है प्रेम। एक इंसान को करोड़ों के बराबर बना देता है। प्रेम में इतनी शक्ति अद्भुत शक्ति है। जितनी व्याख्या की जाए उतनी कम है प्रेम की। इस इतिहास को जितना भी पढ़ा जाए वो आपको समझ में आ जाएगा। प्रेम की शक्ति

11:00 की पूरे जितने भी प्राचीन ग्रंथ शास्त्र और ज्ञान है वो इसी शिक्षा से भरा पड़ा। तो प्रेम की शक्ति तो अद्भुत है। उस शक्ति को लाया कहां से जाए? यह बहुत जरूरी है। ज्ञान से चीजें काम नहीं करती। ज्ञान तो बोलने के लिए है। लेकिन ये तो भाव की यात्रा है। प्रेम तो होता है। प्रेम डायरी में नोट

11:46 करने से तो प्रेम नहीं हो जाएगा। प्रेम भाव है। जो स्वतः उस ओर आकर्षित करता है मन को। अच्छे के लिए, दुनिया के लिए, दुनिया के भले के लिए, सबको खुश देखने के लिए वो एक आकर्षण होता है। वो एक बेचैनी होती है। प्रेम में बेचैनी नहीं होती। जैसे मां और बेटे का प्रेम है तो मां को एक बेचैनी रहती है कि कैसे बच्चे को मैं सब कुछ दे सकूं। कैसे इसको अच्छा बना सकूं। निस्वार्थ भाव से। तो प्रेम में वो बेचैनी होती है। तो वो सब कुछ करवाती रहती है। लेकिन ये तो होनी चाहिए। इसको कैसे लाया जाए? कैसे

12:34 इसकी ओर बढ़ा जाए? कैसे इसको हासिल किया जाए? ये मैं आपसे भी जानना चाहूंगा। लेकिन मुझे अभी तक जो समझ में आया है वो है सत्संग। सबसे बड़ा मार्ग। दुनिया माहौल से अपने आप को विकसित करती है। जिस बस्ती में सारे चोर रहते हैं तो उसमें रहने वाला हर शख्स चोरी सीख जाता है। बाहर से ले लेती है। जिस बस्ती में सारे प्रेम वाले लोग

13:22 रहते हैं। वहां जो भी पैदा होगा वह प्रेम से भरा होगा। इस धरती पर ऐसे भी गांव है जहां पर कोई ताला वाला नहीं होता। कोई दरवाजा नहीं होता। ऐसे भी गांव है जहां पर दुकानों में कोई बेचने वाला नहीं होता है। सामान पड़े होते हैं और रेट लिखी हुई है। आप पैसे डालो और सामान लेकर। तो वहां जो पैदा हुए वहां जो रहते हैं उस माहौल से उस सत्संग से वैसे ही बन जाते हैं। तो जीवन को सही रास्ता देने वाला एकमात्र जो है मुझे रास्ता दिखता है वो सत्संग है। वो सत्संग साथ रहने का साथ बातचीत करने का सत्संग

14:09 अच्छी किताबों का सत्संग अच्छी श्रवण का और सत्संग अपनी आत्मा का। सबसे ज्यादा गारंटेड जो सत्संग है जिसकी कोई रिस्क नहीं है वो है अपने आत्म बोध में जाना अपने आप से बातें करना कि मैं इस धरती पर क्यों आया हूं मेरी क्या भूमिका मैं क्या कर लूंगा क्या हासिल कर लूंगा उसको समझे उसको जाने अपने आप से बात करें तो ये दुनिया का पागलपन आपको नजर आएगा जब आप अपने आप से बातें करेंगे तो फिर आप पागल होने से बचे रहेंगे।

14:58 तो सत्संग ही एक मात्र रास्ता है और सत्संग का चुनाव हमें ठीक से आना चाहिए। आप देखेंगे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे धीरे हमारे अंदर एक प्रेम प्रविष्ट होता जा रहा है प्रेम बढ़ता जा रहा है क्योंकि जो चीजें जैसे हो चुकी जिन भावों में हम जा चुके हैं ये क्या हुआ बिगड़ा क्यों मामला क्योंकि हम दुनिया को देख रहे हैं हर कोई स्वार्थ में जी रहा है तो हम स्वार्थ पकड़ लिया उससे स्वार्थ सीख गए हर कोई धोखा देने में संकोच नहीं करता है। हर कोई किसी को भी कष्ट दे रहा आराम से। उसको कोई विचार भी नहीं आ रहा है कि मैं कष्ट

15:46 क्यों दे रहा हूं। मेरा काम ये क्या कष्ट क्योंकि वो सबको देखता है। तो सबको देखकर जब खराब हुआ जा सकता है तो सबको देखकर अच्छा भी हो। तो यह एक मार्ग है साथियों। इस मार्ग को पकड़े पहचाने पहले और उसमें आलस्य नहीं करें। सत्संग का परिणाम सीधा सीधा दिखेगा नहीं। आपको कोई ऐसा नहीं दिखेगा कि आपके कोई दुख बाल काले हो जाएंगे कि कुछ शरीर में कोई चेंज आ जाएगा। क्योंकि वो भाव जगत है। भावों को पहचानना तो जिस दिन आ जाएगा

16:33 उस दिन तो बात समझ में आ जाएगी। पर वो भी तो प्रैक्टिस की बात है। आप यहां पर भी देखेंगे तो कई साथियों में अपने आप में बदलाव को देख रहे होंगे। मैं अपने आप में बदलाव देख पा रहा हूं। आप में से बहुत सारे साथी अपने आप में बदलाव देख पा रहे होंगे। वह कहां से आया? वो सत्संग से तो आया है। इसलिए सत्संग का जीवन में बड़ा महत्व है। पर सत्संग का मतलब है सत्य की संगत। कुछ भी कर रहे हैं वो सत्संग नहीं है। जहां दिखावा है जहां कोई उद्देश्य स्पष्ट नहीं है।

17:23 उनको सत्संग नहीं मानना। किसी को परेशान करके और भी बहुत सारे लोग सत्संग का नाम लेते हैं कि हम सत्संग कर रहे हैं। दुनिया को परेशान कर अब वो मैं कुछ डिटेल में अभी नहीं जाऊंगा। लेकिन सत्य की संगत है। सत्संग तो सत्य को पहचानना है और उसकी संगत करनी है। यहां चूक तो बहुत बड़ी गड़बड़। ये भी एक चल रहा है दुनिया में। सत्संग के नाम पे असत्य की संगत हो रही है। ये बड़ी गड़बड़ चल रही है। इतना पहचान तो हमें ही करना पड़ेगा। दुनिया

18:08 तो इशारे ही दे सकती है। तो साथियों सत्संग करेंगे। जब भी मौका मिले अच्छे वीडियो सुने। जब भी मौका मिले अच्छी पुस्तकें पढ़े। करोड़पति बनने की पुस्तिका नहीं पढ़े। अच्छा इंसान बनने की पुस्तिका पढ़े। करोड़पति अपने आप बन जाएगी। जब जब प्रेम आ जाएगा तो सब कुछ होगा। जो भी अच्छा हो अच्छी सत्संग करें। जब भी मौका मिले। मैंने देखा है मतलब ये जनरली आप भी महसूस करेंगे।

18:53 हम उस तरह की चीजों में ज्यादा रुचि नहीं लेते। जैसे मैं कई बार आपको बता चुका हूं कि गुरुकुल की प्लेलिस्ट में जाएंगे। आप मतलब आरसीएम वर्ल्ड YouTube चैनल की प्लेलिस्ट में जाएंगे। गुरुकुल सेक्शन है। गुरुकुल में बहुत सारे ऐसे वीडियो बना रखे हैं जिनको आप रोज सुनोगे। देखिए अपने पास जो अपने ध्यान में वही चीज मैं बता सकता हूं। रोज कुछ न कुछ वीडियो सुनोगे स्नान करते समय एक आदत बना लोगे तो आपके जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन आएगा उसमें से कुछ चुनिंदा वीडियो है ना ईश्वर से साक्षात्कार दिव्य जीवन की प्राप्ति धन्यवाद का भाव सबसे अच्छा दोस्त वगैरह ऐसे बहुत सारे वीडियो है वो भी एक सत्संग

19:39 का रास्ता है हमारे एक बहुत अच्छी पुस्तक है जीवन एक खोज तो बहुत ही गुड तरीके तरीके से आपको प्रेम के मार्ग पर तो ये करते रहेंगे ना और गुरुकुल में हम इस विषय को जितना मौका मिलता है उतना बातचीत करते हैं कभी आरसीएम के अन्य विषयों पे भी बात करते रहते हैं फिर भी डायरेक्टली इनडायरेक्टली हमारा वो सब अच्छा भाव चलता रहता है तो ऐसे बहुत सारे हमारे पास तो बहुत सारी चीजें है ही मैं ऐसा नहीं कहता हूं कि बाहर की दुनिया में उपलब्ध नहीं है। बाहर की दुनिया में भी बहुत सारी चीजें उपलब्ध है। वह पहचानिए और नियम बनाइए सर कि हमें यह सत्संग में रहना है। आप देखेंगे आप बहुत कुछ प्राप्त

20:26 कर पाएंगे। तो चलिए इससे संबंधित या तो प्रश्न या आपका जो भी फीडबैक हो हम सभी साथियों को आमंत्रित करते हैं। जी नमस्ते सर जी आइए जी धन्यवाद सर म्यूट का ऑप्शन आया था सर जी सर तो बिल्कुल आज का सेशन सर सुन के भाव में भी हो रहा था और बार-बार मैं जब बात

21:13 आरसीएम की आती है अपने जीवन की आती है तो एक बुक है जीवन एक खोज ये मेरी जिंदगी में बहुत परिवर्तन लाई और उस बुक को आधार बनाते हुए लगातार आपके काफी बुकों को नजदीक आता गया सिस्टम के नजदीक आता गया और खासकर ये लगभग दो साल के आसपास होने वाले डेढ़ साल के आसपास जब से मैं गुरुकुल में आया एक-एक चीजें रिलेट होती गई चीजें बनती गई कारवा बनता गया और ईमानदारी की बात करूं सर तो पूरे भारत में बहुत सारी आरसीएम की टीम है। बहुत सारे लोग हैं। लेकिन सबके साथ चलने की इतनी उमंग रहती है। बहुत सारे साथी यहां बैठे हैं। मिलते भी हैं। बस एक ही बात होती है कि चलो हम मिलके बड़ा करेंगे। टीम है ये है वो है। कभी नहीं और बहुत अच्छा लग रहा है और पैसे भी मिल रहे

22:00 हैं। सम्मान भी मिल रहे हैं। आपका सानिध्य मिल रहा है। बस भाव यही है कि ये जीवन इसी तरह चलते रहे। बहुत कुछ नहीं चाहिए। सीखते रहें और सबका विकास होते रहे। सर बहुत ही अच्छा लगता है जब आपके हम कुछ YouTube से सुनते हैं, आपकी बुक पढ़ते हैं। मैं यह नहीं कहना चाहता हूं कि आप ही अच्छे हैं। ऐसा भी नहीं। लेकिन जब रिलेट करते हैं अपने आप से जब निजी जीवन में आता है तो ऐसा लगता है कि ऐसे सत्संग में भी लोग आ जाए ना सर तो सब कुछ मिल जाएगा। जहां पे सम्मान भी है, पैसा भी है, जीवन भी है तो इससे बढ़िया और कुछ हो ही नहीं सकता। सर धन्यवाद। सर वेलकम सर बिल्कुल रवा सर सर बहुत अच्छी बात कही जब

22:47 से मैं गुरुकुल में आया हूं अपने आप को बदला हूं और सत्संग का मतलब यही है कि हम अपने अंदर की जो भी कमियां है उसको दूर करें और जितना ज्यादा ज्यादा अपने आप को हम बदलते जाएंगे जितने अपनी कमियों को दूर करते जाएंगे उतने हम उस परम शक्ति के करीब होते जाएंगे और ये इसका मेन आधार हमारा गुरुकुल है और गुरुकुल वाकई मतलब मैं क्या कहूं गुरुकुल के बारे में हम अगर जो पूर्णतया मन से मनोवेग से अगर जो गुरुकुल से जुड़े और अपनी टीम को जोड़ने का प्रयास करें तो सब कुछ यही संभव है सबसे बड़ा सत्संग हमारा गुरुकुल है बहुत-ब धन्यवाद सदानंद सर वेलकम आज तो सर जोड़ दिया सर जब से मैंने प्रेम

23:35 की बात किया तो सर का तो यह बुक हमने जरूर पढ़ा सर और जिस दिन से हमने पढ़े हैं सर उस दिन से शरीर को झजझोड़ दिया है और प्रेम ही जीवन है और प्रेम और सर का एक और एक अच्छा बुक है सर हमें जागना होगा और सभी साथी को कहते हैं कि इस बुक को पढ़ने के बाद प्रेम इसमें है सर ने आज जो बताया तो पूरा एकदम पूरा ज्ञान आ गया सर पूरा क्या बताएं सर व्यक्त नहीं कर सकते हैं सर हमने सर का आपका बुक पढ़े और सर आज जो प्रेम की बात किया पूरा सर एकदम पूरा दिमाग खुल गया सर क्या बात करें और आपका बहुत बहुत धन्यवाद सर एकदम धन्यवाद सर रूपराम सर अपना फोन को खड़ा कर लीजिए राजे सर

24:25 जी प्रणाम सर सर जीवन में प्रेम के बिना सर जीवन व्यर्थ है और अपने आप में बदलाव लाएंगे सर बहुत-बहुत धन्यवाद सर आपका एसएल प्रजापति सर एसएल प्रजापति सर आइए सर जी थैंक यू सर प्रेम पूरे जीवन का सार है यदि प्रेम हमारे अंदर नहीं होगा तो हम निरर्थक हैं किसी चीज के नहीं है लेकिन हम लोगों को सबसे प्यार करना चाहिए हमारे साथी जितने डिस्ट्रीब्यूटर मिलते हैं किसी भी टीम से हो कहीं से भी लेंगे सबके साथ प्यार से करना है सबको अच्छी चीज जो हमें नॉलेज मिला है बताना है कहीं भी किसी को डिस्टर्ब नहीं करना है। किसी को लालच नहीं देनी है कि तुम ये ऐसा कर लो, वैसा कर लो। सब नहीं करना है सर। तो प्रेम बहुत बढ़िया

25:11 सर। प्रेम से ही सब काम होगा। बहुत अच्छा है। थैंक यू सर। धन्यवाद विनोद सर। वेलकम। ये सर हम जब से आरसीएम में जुड़े हैं तो एक बदलाव आ गया है। प्रेम हमने मान लिया कि आत्मा परमात्मा और हर हर हर इंसान से प्रेम करना चाहिए। हर छोटा बड़ा सब अंदर से निकल गया। भाव एक सबके लिए समान भाव जग गया। जय आश्रम सर। जी महेश सर वेलकम। आज का सेशन शानदार गजब का रहा। जब से हम गुरुकुल में आए हैं, परिवर्तन किया है, बदलाव किया है। कुछ बातें हम पहले इंश्योरेंस में काम करें तो उसमें था। लेकिन यहां शानदार का हमने परिवर्तन किया है, बदलाव किया है। स्वार्थपन है नहीं। कहीं भी काम होता है तो हम जिम्मेदारी

25:59 लेकर के काम करते रहते हैं। तो यह किताब हम फील्ड में साथ में रखते हैं। बैग में शक्ति का खजाना यह पढ़ते रहते हैं। तो हमारे में स्वार्थप दूर होना चाहिए। संगत का सत्संग करने का ये सारी बातें हम खुद से करके और आगे बढ़ रहे हैं। शानदार बदलाव किया परिवर्तन किया है। जी जी बहुत-बहुत धन्यवाद। छोटेल सर वेलकम सर। सर प्रणाम सर आज के गुरुकुल में सर डेली के गुरुकुल में इतना बड़ा बदलाव हो रहा है सर जितने बुक की बात हो गई सर जब से मैंने भीलवाड़ा पहली बार गया था ये जीवन एक खोज बुक मैं लेके आया था फिर जैसेजैसे जाता कई बुके पढ़ता जाता हूं अभी इस समय पढ़ रहा हूं मानसा वाचक करना लोग अपने आप बुक पढ़ने से

26:47 अपने आप को बदलाव हो रहा है और गुरुकुल में आने से लगता है कि मैं सत्संग में बैठा हूं और लोगों को मैं यही प्रेरणा बोलता हूं गुरुकुल शाखा में रात को कि यदि जैसे 9 पीm में आते हैं तो यदि गुरुकुल में आ जाए सुबह की शाखा में तो हम सबका अभियान बड़ा हो जाएगा सबका सेवा संस्कार हो जाएगा तो इसी में काम कर रहा हूं सर थैंक यू बहुत अच्छा लग रहा है सर जी कुमारी मैम थोड़ा फोन को आड़ा कर लीजिए और आइए मैम जी घुमा लीजिए फोन को जी अन म्यूट कीजिए अन म्यूट कीजिए मैडम जी बोलिए

27:33 सत्संग ही बहुत अच्छा चीज है सर सत्संग यही है गुरुकुल है सत्संग यहां आएंगे तो जीवन ही बदलेगा सर जी बहुत बहुत अपने लिए भी अच्छा सोचना है और दूसरे के लिए अच्छा ही सोचना तब तो आगे बढ़ेंगे भला ही होगा। ओवर टू सर। राम सर आइए। वेलकम सर। थैंक यू। थैंक यू सर। और प्रेम ही है जीवन का सार। तो मैं चाह रहा हूं कि एक बार सभी टहाका लगाए तो बहुत अच्छा रहेगा। तो ठीक इजाजत है सर। हां। लगाते हैं हम सभी साथी। बहुत

28:19 बहुत धन्यवाद। थैंक यू। थैंक यू सर। थैंक यू संजीव सर। आज के इस जो संत वाणी सुनने को मिला। वाकई में सत्संग का महत्व क्या है? इस गुरुकुल में आने से मिला है। और सत्संग की महिमा तुलसीदास जी ने सुंदरकांड में फिर एक जगह जिक्र किया है। कि तात वर्ग अपवर्ग सुख धर तुंग तुल ता सकल मिली जो सुख लव सत्संग वाकई में सत्संग हमें अच्छी किताबों को करनी चाहिए अच्छे दोस्तों की करनी चाहिए अच्छे माहौल में रहना चाहिए तो निश्चित हमारे जीवन परिवर्तन आएगी और बड़ी अच्छी बात लगी सर ने कहा कि हमें करोड़पति बनने का पुस्तक नहीं पढ़ना चाहिए हमें बेहतर

29:06 इंसान बनने का पुस्तक पढ़ना चाहिए वाकई में मैं सौभाग्यशाली समझता हूं कि आज मैं हमारा आने वाली पीढ़ियां और पूरे भारत का भविष्य एक मजबूत हाथों में है। सर को प्रणाम करता हूं। दिल से धन्यवाद देता हूं कि हम लोग आज अभियान के हिस्सा बने हैं। धन्यवाद सर। बहुत-बहुत धन्यवाद सर। सुशील सर। वेलकम सर। धन्यवाद सर। और वाकई जो है सत्संग जो है किताबों गुरुकुल गुरुकुल के वीडियो अच्छे विचारों अच्छे दोस्तों से जब सत्संग करते हैं तो खुशियों और प्रेम से जो दोस्ती करनी चाहिए और यदि यह हो जाती है और प्रेम में वो शक्ति है वाकई जो है अपने बदलाव आज यदि गुरुकुल के पहले यदि अपनी जिंदगी को देखूं

29:53 तो वहां पे जिंदगी एक नरक की तरह जी रहा था लेकिन जो प्रेम सेम यहां पे जो है लोगों को सभी को सहयोग जब हम लोगों से बात करते हैं किसी भी टीम का हो या किसी भी आरसीएम के अलावे लोगों के भी हो जो प्रेम में वो शक्ति है वो चीज सब चीज करवा सकती है जो आप जहां जाना चाहते हैं तो हमें आंतरिक सुख बहुत ही जरूरी शांति और आनंद यदि है तो हम यहां से पा सकते हैं। थैंक यू सर। धन्यवाद रवि सर। वेलकम सर। जी धन्यवाद सर। प्रेम के बिना जीवन अधूरा है क्योंकि सत्य ही प्रेम है। और सर ने कहा सत्संग तो सर गुरुकुल सत्य है। और गुरुकुल का ही सत्संग हमारे जीवन में सत्य

30:41 ला सकता है। दो साल पहले गुरुकुल में आया। क्योंकि सर जहां स्वार्थ है, लालच है, छल है, कपट है, यह सारी चीजें जहां पे है वहां प्रेम नहीं है। और जहां प्रेम है, यह नहीं है। तो मैं सभी से यही कहना चाहता हूं, हम सभी लोग मैं भी प्रयास करता हूं कि इस सत्संग से सबको जोड़ करके सर द्वारा जो वाणी निकलती है, विरल वाणी निकलती है। सबके दिलों में जो जाती है, एक प्रेम का भंडार भर देती है। और एक सही रास्ता दिखाती है जिससे हम अपने जीवन को सही रूप में जी पाए। अपनों और अपने देश के लिए हम समर्पित कर पाए जिससे पूरा भारत समझ पाए कि हमारा क्या है। धन्यवाद सर यही कहना। बहुत-बहुत धन्यवाद सर। सो सर वेलकम सर। प्रेम एक अद्भुत शक्ति है और प्रेम के

31:28 बिना ज्ञान का कोई लाभ नहीं होता। स्वार्थी व्यक्ति सिर्फ अपने लिए ही सोचता है। वो दूसरे के लिए अपने देश के लिए नहीं सोचता है। इसीलिए जिस देश में या जिस समाज में जहां स्वार्थी व्यक्ति ज्यादा होते हैं वहां पर उस जगह का उस समाज का उन्नति भी नहीं हो पाती और जहां पर अच्छे लोग होते हैं, प्रेम से भरे हुए लोग होते हैं और वहां पर उन्नति भी होती है। वो नेशन डेवलप भी होता है। वो समाज डेवलप होता है। इसलिए हमें प्रेम से रहना चाहिए। प्रेम से रहेंगे तो ही हमारा जो ज्ञान है उसका भी लाभ होगा। सतीश पंडित जी ने अपने ऑडियो में कहा है कि प्रेम से भरा एक दिल लाखों स्वार्थी दिलों से बेहतर है। आज मदर टेरेसा का हम लोग नाम लेते हैं। वो नोबेल

32:15 प्राइज विनर है। क्यों? उन्होंने अपना देश छोड़कर भारत में आकर यहां पर बसे और उन्होंने लाखों लाखों कुछ रोगियों का उन्होंने सेवा की। तो उनके मन में प्रेम ही था जो उनको इतना बड़ा काम करने पर उनको मजबूर किया और साथ में सत्संग का भी बहुत बड़ा मूल्य है और आज हम जो गुरुकुल में जो मुझे मिला है मैं पर्सनली मैं बताना चाहता हूं कि मुझे सचमुच में गुरुकुल से बहुत ज्यादा कुछ मिला है। मैं अपने जीवन की बहुत सारी चीजें मैंने यहां पर सीखी है। अच्छे गुण मिले हैं। अच्छे ज्ञान मिला है और अच्छा रास्ता एक मिला है। धन्यवाद। जी सर। धन्यवाद परमिंदर सर। जी सर बहुत-बहुत धन्यवाद। जी सर प्रेम में बहुत बड़ी शक्ति है और प्रेम से सब कुछ संभव है। जो असंभव से संभव कार्य भी प्रेम

33:00 से किए जा सकते हैं। और मैं यह मानता हूं सर गुरुकुल से बड़ा कोई भी सत्य नहीं है। और अगर हम पूर्णत गुरुकुल से जुड़ जाए और अपनी टीम को जोड़ दें और इन लोगों को जोड़ दे जिनको कुछ पता ही नहीं तो बहुत बड़ा सत्संग हो सकता है सर। और सत्संग का मतलब सत्य का संग जो सर ने बताया। सत्य का ही संग करना हमने। असंभव कुछ भी नहीं है। सब कुछ संभव है। अगर हम करना चाहे तो हमारे अंदर की जो आत्मा है उससे भी डिपेंड करता है कि हम कैसे रूप में रहते हैं। कैसे लोगों के बीच में रहते हैं। तो सर बहुत बढ़िया आज का सेशन था और अपने आप को परिवर्तन करेंगे और मेरे को बहुत ज्यादा परिवर्तन होया गुरुकुल से और गुरुकुल एक सत्य है। जी सर बहुत-बहुत धन्यवाद। गहरीला सर आइए सर। थैंक यू सर। थैंक यू। प्रेम के बिना जीवन

33:47 ही व्यर्थ है। अपने शरीर के अंदर जो जिसके एक दूसरे के प्रति प्रेम नहीं है तो वो जीवन ही व्यर्थ है। और सत्य संग सत्संग जैसे जो किसी अच्छे की संगत करेंगे तो अच्छा इंसान बन पाएंगे। बाकी जो बुरी संगत तो वैसे ही आ ही जाती है। तो मैं भी ये आरसीएम से नहीं जुड़ा। उससे पहले मेरे भी बुरी आदत थी। तो ये सत्य का मार्ग पकड़ा और अच्छे लोगों की संगत की तो एकदम बदलाव आया। तो पूरा जीवन एक सार्थक बन गया कि एक दूसरे के प्रति प्रेम भावना कैसे रहना चाहिए। थैंक यू सर। जी उषा मैम भैया वेलकम। प्रेम है तो विश्वास है। प्रेम है तो शक्ति है। प्रेम है तो विस्तार है। और प्रेम है तो जिंदगी बहुत खूबसूरत है। और इसके लिए सबसे अच्छा मंच जो हमारा गुरुकुल है। यहां जब आते हैं तो कहने का मतलब

34:33 सत्संग जरूरी है। उसके लिए गुरुकुल है और गुरुकुल के माध्यम से हमें बहुत बहुत और रास्ते भी बताए जाते हैं। वो भी बहुत जरूरी है। थैंक यू सो मच। ओवर टू यू। गुरु वचन सर आइए सर। जी आदरणीय सर को प्रणाम। सर हमारा आरसीएम में आगमन एक पुस्तक मुझे मिली थी पढ़ने को प्रीत इस पुस्तक को पढ़ने के बाद मुझे लगा कि जिस शख्स ने पुस्तक लिखी है वही कोई आम नहीं हो सकता है कि व्यापारी आदमी इतनी बड़ी बात कैसे लिख सकता है मैंने समझा कि मुझे इसमें आना चाहिए मैंने शुरुआत किया और जो ही बात समझ में आई कि पूरी दुनिया में मैं जन्म से सत्संगी हूं बहुत सत्संग करता हूं हर जगह जगह पूरी दुनिया में जितने सत्संग है हर सत्संग में व्यापार की

35:22 बात होती है। लेकिन यहां मैंने देखा कि व्यापार में सत्संग होता है ये बहुत बड़ी बात है। ये कहीं नहीं मिल सकता है और सच्चा प्रेम सच्चा सत्संग अगर है तो अपना गुरुकुल है। तो आज बहुत दिल भाव हो गया आज सत्संग सुनकर के। तो थैंक यू सर। व्यापक सत्संग होना बहुत बड़ी बात है। थैंक यू सर। शुक्रिया। बहुत-बहुत धन्यवाद। सुधीर सर। आइए सर। थैंक यू सर। बहुत-बहुत धन्यवाद। आज प्रेम के विषय में हम लोगों ने सीखा सर अगर प्रेम है तो जीवन है और गुरुकुल से पहले और गुरुकुल के बाद का जीवन मेरा भी बहुत बदला है सर हमारे पूरे साथियों का जीवन बदला है तो गुरुकुल ही जीवन है सर मैं कल एक दिव्य जीवन की प्राप्ति का सत्संग प्लेस जिसमें सुन रहा था तो मेरा एक सवाल था वहां पर आपने बोले हैं कि अहंकार के

36:09 बारे में बताया है तो सर अहंकार को हम लोग कैसे पहचाने क्योंकि आपने बोले हैं कि सूक्ष्म जो अहंकार है सूक्ष्म जो खरपतवार टाइप हमारे जीवन में आ जाते हैं तो हमको भी पता नहीं चलता कि अहंकार हमारे जीवन में आया और हमको उस अहंकार को हम लोग किस तरीके से पहचाने ताकि हम उस अहंकार को पहचान के अपने जीवन को बेहतर कर पाए। तो ये थोड़ा सा सवाल था सर कि हम अहंकार को कैसे पहचान पाए? अहंकार को पहचानने का अभ्यास धीरे-धीरे हो जाएगा। भैया जब बाद में पता चलता है वो। हम जब करते हैं ना तो कर लेते हैं क्योंकि वो तो अचानक से कुछ हो जाता है। तो कभी-कभी ऐसा कि मैं मेरे को कोई अहंकार नहीं है। जैसे कि मैं सोचा मेरे को कोई अहंकार नहीं है। ऐसा भाव भी आया तो वो भी अहंकार है। इतना सूक्ष्म होता है कि मैं तो बहुत ही

36:58 अच्छा हूं। मैं बदल गया हूं। तो ये सब इस तरह की बातें जब भी ख्याल आती है ना तो उसको बाद में पहचानो तो धीरे धीरे धीरे धीरे फिल्टर होएगा। ओके सर। यस। देवी जी आइए कोई। गुरु जी को प्रणाम, दादू को प्रणाम, सभी भाइयों को प्रणाम। यही तो सत्संग है, सत्संग है तो सब कुछ है। हमने किसी को दुख नहीं देना है। सत्संग खुद ही हो जाता है। जब प्यार है तो सत्संग है। अब किसी के पास जाते हैं तो हम प्यार से बोलते हैं तो ही सत्संग होता है। सत्संग हो नहीं होता है। किसी को मन दुखाओ, किसी को बुरा बोलो। कोई बुरा बोलता हो सुन लो और उनको मनन करो। इसने बुरा

37:46 बोला मैंने नहीं बुरा बोलना है। सत्संग वही चीज होती है। किसी को प्यार दो जो गलत बोलता है उनको प्यार दे दो तो जरूर उसमें भी सत्संग आएगा। यही सत्संग होता है। अपना कर्म करो अपना धर्म करो। यही सत्संग है। धन्यवाद। उठ सुधीर सर। वही तो सर। धन्यवाद। सर भाव में जो होता है प्रेम जो है भाव के अंदर पैदा होता है और भाव जो होता है दिल में होता है और इस पर एक पंक्ति है जो भरा नहीं भाव से जिसमें बहती रसधार नहीं और दिल नहीं पत्थर है जिसमें देश का प्रेम नहीं बहुत अच्छा है प्रेम के बारे में जो होता है भाव से ही पैदा होता है बहुत-बहुत धन्यवाद बहुत-बहुत धन्यवाद रसवंत सर वेलकम सर लगातार खुद को बदलने के लिए तैयार रहूंगा और सबके प्रति प्रेम की भावना रखूंगा ूंगा

38:35 रूपी गुरुकुल से हमेशा के लिए जुड़ा रहूंगा और रोजाना 30 मिनट अच्छी वीडियो देखूंगा और 15 मिनट पढ़ेंगे जी बहुत-बहुत धन्यवाद अवध राम सर वेलकम सर धन्यवाद गुरुदेव प्रेम है तो जीवन का सार है आरसीएम गुरुकुल जीवन कर दिया हमारा बेड़ा पार है बहुत-बहुत धन्यवाद राधे सर वेलकम बिल्कुल सर गुरुकुल में आने के बाद ही यह पता चला है कि प्रेम से भी इतना बड़ा काम किया जा सकता है। तो हमारा गुरुकुल प्रेम का एक भंडार है। यहां प्रेम सिखाया जाता है और प्रेम दिया जाता है लोगों को और

39:21 प्रेम से हम बहुत कुछ काम कर रहे हैं और सर आशा करते हैं ज्यादा से ज्यादा भाव यही रहता है कि हम गुरुकुल में और सारे अपने साथियों को ज्यादा से ज्यादा साथियों को ला सके यहां सच्चाई और प्रेम ये सब साथ-साथ चलता है और प्रेम ही सब कुछ है सर बिल्कुल सर बहुत-ब धन्यवाद रूप इनके साथ इनवाइट करने के लिए हम लोगों को आज प्रेम का बारे में बताया गया है। प्रेम है तो हमारा जिंदगी है। प्रेम नहीं है तो कुछ नहीं है। प्रेम के भी नहीं सब कुछ माता-पिता लोगों से भी प्रेम का भाव ही

40:06 लेते हैं। और दूसरों को भी यहां से गुरुकुल सीख के भी प्रेम भाव से भी दूसरों को सिखा सकते हैं। इतना ही जय कुमार सर जय कुमार सर सर मैंने जब से गुरुकुल अटेंड किया है और मैंने ये पाया अपने अंदर देने का भाव मेरे अंदर बहुत आया है। मैं किसी भी मामले में जब भी हूं फील्ड में रहता हूं या कहीं पर भी रहता हूं देने का भाव बहुत कुछ सीखा है इस गुरुकुल से पिछले एक साल में मेरे अंदर बहुत कुछ बदलाव आया है और ये बदलाव मेरे अभियान में भी दिख रहा है मेरे अंदर और

40:52 मैं हमेशा इस गुरुकुल को अपना बेस्ट फ्रेंड मांगता रहूंगा और आगे इसी को ले पूरा अभियान को जीता रहूंगा बहुत धन्यवाद अजय कुमार सर नमस्कार नमस्कार प्रेम बहुत बड़ी शक्ति है चाहे जो भी हो जो भी काम कर रहे हैं अगर प्रेम आपके अंदर है तो वो काम बहुत ही अच्छा होगा अपने आप में परिवर्तन करना सत्संग जाना स्वार्थी आदमी से दूर रहिए और अपने आप को स्वार्थहीन कीजिए अच्छे वीडियो देखना, अच्छी किताबें पढ़ना और हम सांस सांसों से प्रेम की तुलना कर

41:41 सकते हैं। जैसे प्राकृतिक हमको सांस दिए हैं तो हम सांस ले पा रहे हैं। लेकिन अपने आप को ठीक करने के लिए अगर प्रेम आपके अंदर है तो आप बहुत अच्छे काम कर सकते हैं। और यह सर का गुरुदेव का म विचार है जो कि आज हम बैंक में है तो मेरा बैंक बीएएम बोलती है कि तिवारी जी से सीखिए लोगों से बातचीत करने का और स्वस्थ रहने का तो ये बहुत बड़ा गुरुदेव का जी बहुत-बहुत धन्यवाद मैम आइए कोई बात नमस्कार सर हां जी सर क्योंकि मैं भी पहले बहुत नेगेटिव वगैरह रहती थी क्योंकि अच्छे संग संग में नहीं बैठती थी नेगेटिव लोगों के साथ बैठती। जब से मैंने एक डेढ़ साल हुआ गुरुकुल में बैठना स्टार्ट किया। मेरे

42:26 मन में भी अच्छे प्रेम भाव जागे हुए हैं। तो मैं भी टीम के साथ भी ऐसे ही करती हूं। लाइफ में सर प्रेम सबसे ज्यादा जरूरी है। मेरा तो मानना यही है सर क्योंकि प्रेम बिना गति नहीं है। अगर प्रेम है तो जीवन अच्छे और सुकून से चलता है सर। थैंक यू सर। बहुत-ब संतोष कुमार सर। वेलकम। जी सर। संतोष जी अन म्यूट कीजिए अन म्यूट कीजिए पहले सर पहले अन म्यूट कीजिए संतोष सर हमारा बात नेक्स्ट बबलू बबलू रहमन सर आइए सर जय आरसीएम गुड मॉर्निंग आज के इतना

43:13 सुंदर प्रोग्राम मिला है सर बोलने का बात ही नहीं है लेकिन आज मेरा छोटा-छोटा कोई गलती हो रहा है हो रहा था लेकिन आज से मन में दिल दिल बोल रहा है यार कभी नहीं करेंगे इतना परिवर्तन आया आज का बात सुन के ना क्या बताऊं मन भर गया और ज्यादा कुछ नहीं बताऊंगा सर नहीं कभी जहां प्यार नहीं है तो दुनिया में कुछ नहीं प्यार है तो हर कुछ है हर कुछ समि हासिल करता कर सकता है और जहां प्यार नहीं मोहब्बत नहीं है उधर कुछ नहीं कर पाएंगे सर लेकिन छोटा छोटा चीज में हम लोग हार मान जाता है लेकिन प्यार से सब कुछ होता है सर बहुत बहुत ओवर टू सर

44:02 धन्यवाद सर और आज का सेशन बहुत ही शानदार रहा जैसे कि गुरुकुल ऐसा प्लेटफार्म है कि पहले हम हम भी नहीं जब स्टार्ट में आते थे तो बहुत परिवर्तन हमारे में भी आया और ऐसे ही हम जैसे हमारे में बदलाव आए हैं वैसे हम जितने भी साथी हैं सबको बदलाव में लाना चाहते हैं और आगे सभी महिलाओं को जागरूक करना चाहते हैं और ऐसे ही सर हम आगे निकलना चाहते हैं सभी महिलाओं को स्वास्थ सेवा संस्कार पे ही लाना चाहते हैं धन्यवाद सर एस के पाल सर अपना फोन को आड़ा कर लीजिए आइए सर फोन को थोड़ा घुमा लीजिए सर जी

44:51 जी बोलिए सर। बहुत-बहुत धन्यवाद सर। और जैसा कि आज बहुत शानदार बात हुई कि प्रेम से बड़ा जीवन में कुछ बड़ा नहीं हो सकता और व्यापार के साथ भारत में ये जो काम हो रहा है दुनिया का सबसे शानदार काम हो रहा है। इससे अच्छा गुरुकुल से अच्छा गुरुकुल से अच्छा प्लेटफार्म पूरे भारत में नहीं है और जिस दिन से गुरुकुल में आए बहुत परिवर्तन आया है। बहुत-बहुत धन्यवाद सर। बहुत-बत आभार कुमार सर गुरुदेव जी गुरुदेव आह प्रेम से करुणा दया क्षमा और क्रोध और सेवा से हम ऊपर उठने का जो मौका दिए हैं

45:39 हमें हम जीवन जीने के लिए नहीं श्रेष्ठ जीवन जीने के लिए हमें मौका मिला है। तो गुरुदेव इस तरह गुरुकुल के माध्यम से हमारा जीवन जिस तरह बदल रहा है कि हम दो रास्ता भी चूज़ कर सकते हैं। खराब रास्ता एक एक रास्ता एक अच्छी रास्ता तो रास्ता जीने का जो माध्यम है वो हमें गुरुकुल के माध्यम से ही मिला है। धन्यवाद शिव शरण सर वेलकम सर जी सर धन्यवाद सर मैं भी सर गुरुकुल में जब से आ रहा हूं अपने आप को काफी बदल चुका हूं सर बहुत प्रेम भाव निस्वार्थ डायरे में भी लिख लिया हूं सर प्रेम भाव निस्वार्थ के भाव से प्रेम सबसे बना के रखें सर यही कहना चाहते हैं धन्यवाद सर ओवर टू अरुण सर अपना फोन को खड़ा कर लीजिए सर

46:31 प्रणाम सर सर हमारे जो है घुमा लीजिए अरुण जी फोन को थोड़ा घुमा लीजिए जी सर ठीक है चलिए जैसे थे ऐसे ही बताइए आपका फोन का रोटेशन नहीं है हमारे गुरुकुल में सर आज इतनी शिक्षा के बाद गुरुजी ने किया कि हम प्रेम भाव रखे सर तो हम चमा पहुंचेंगे सर और सबसे पहली बात हम लोग सत्संग से पहले ही जुड़े हुए और प्रेम भाव है तो 10 लोग हमारे साथ चलते हैं और प्रेम भाव रहा तो हम कामयाबी पर सर जरूर पहुंचेंगे और सर किसी को कोई कष्ट होती है तो हमें सहयोग करना चाहिए तभी हम आगे पहुंच पाएंगे सर और हमारे गुरु जी ने इतना अच्छा सिखाया एक हमारे गुरु जी वृंदावन में है एक हमारे गुरु जी ये है कि हमारे भविष्य के लिए सर सोचते हैं और

47:17 भविष्य के साथ सर सर भविष्य के साथ भी और सेहत के साथ भी धन्यवाद सर चंदन सर आइए वेलकम जी गुरुदेव को प्रणाम। एक सोनू जी का हम कहानी सुन थे कि पानी से पतला क्या है? भूमि से भारी, आंख से तेज क्या है? काजल से कार्य तो इस तरह के पूरा दुनिया तो इस तरह बैठा हुआ है और हम लोग जहां भी जैसे कि सिस्टम में हम लोग कुछ प्रॉब्लम होता है। हम किसी को बोलते नहीं है। लेकिन अगले दिन गुरुकुल में जब आते हैं तो मेरा जो सवाल है उनका आंसर मुझे मिल जाता है। तो यही है सत्संग का है प्रेम का भाव। इसीलिए हम जुड़े कभी भी अगर लाइव में जूम में नहीं आ पाते YouTube में जरूर सुन लेते हैं। पीएम से हमको गुरुकुल से बहुत कुछ सीखने मिलता है। सर बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद निर्मल सर थोड़ा से

48:03 गुरुदेव को प्रणाम। गुरुकुल का हमारा जीवन में सबसे बड़ा सत्संग है। सत युक्त संग माने सत्य जो संगत से ही हो सत्संग हमारा यूएलपी क्विक जो 7 पीएम जो 7 पीएम 8 पीएम 7 एमm ये जो मीटिंग है ये सब सत्संग है। गुरुकुल में जो आता है वो तो सत्संग है। हम तो हमारा जीवन परिवर्तन आ गया तो यही एक सत्संग तो हम जे मृपण पर हमारा रक्तदान शिविर ये सब किनतु सत्संग माध्यम ही होता है तो सत्संग जे संधान ही सत्संग गुरुदेव को प्रणाम सर को

48:53 थैंक यू सर बुलाने के लिए धन्यवाद प्रेम ही अद्भुत शक्ति है सर सबसे बड़ा विश्वास होता है अगर आप भाव अपना अच्छा है तो सब कुछ अच्छा होता है सर तब हम लोग बहुत आगे जाएंगे सर थैंक यू सर ओवर टू बहुत-बहुत धन्यवाद बोलच सर यस सर यस सर बहुत-बहुत धन्यवाद गुरुदेव आपको वाकई में सर सत्य का संग सर जी ने बताया सर बहुत ही वाणी उसका सरल स्वभाव सर वाकई में सर ऐसे हृदय वाले जो मिलते हैं सर बहुत ही सरल जैसे हमारे सद्गुरु कबीर साहिब बोलते हैं सर जीव पर दया करो जीव दया आतम पूजा जीव को दया करना चाहिए सर तो एक शब्द और है सर मन को मारने से मन को मार गगन चढ़ जाई मान सरोवर बैठ नाई मन को मारने से सर हम जैसे

49:40 हमारे जैसे मन को जैसे मारेंगे सर तो हमको जैसे जैसे रास्ता मिलेगा सर उसके हिसाब से हम चलेंगे सर वाकई में आदरणीय हमारे टीसी सर वाकई में सर इस देश के लिए इस विश्व के लिए बहुत ही जबरदस्त मतलब एक व्यापारी की सोच नहीं रखे सर वाकई में सर सर का जो कथन है एक अध्यात्म के रूप में जीवन को परिवर्तन करने वाली बात बताइए सर वाकई में सर धन्यवाद सर ओवर टू सर विजय सर वेलकम सर विजय जी प्रेम को प्रणाम और सर आज का की पॉइंट रहा सर प्रेम प्रेम पार्टिकल है और इस चीज को सभी लोग आत्मसात कर रहे हैं एक जो पुस्तक है पुस्तक बहुत बार एक जीवन

50:29 सुधारने का अवसर इसके माध्यम से मिलता है। जैसे हमारे जीवन में रामायण और महाभारत का रोल है। उसी तरह इस पुस्तक का रोल है। धन्यवाद सर। बहुत-बहुत धन्यवाद बजरंग सर। वेलकम सर। गुरुकुल के माध्यम से सर बहुत सारे बदलाव हो रहा है सर। आज का सत्र बहुत अच्छा रहा। प्रेम औरता का भाव सीखने को मिला। और अच्छे संगत में रहकर अपने टीम को और इस मिशन गुरुकुल का जी अनु जी आइए वेलकम मैम अनु जी बहुत-बहुत धन्यवाद सर और बिल्कुल मैंने

51:14 अपने आप को बदला है। जितनी भी मेरे क्वेश्चन होते थे मैंने गुरुकुलया है और बिल्कुल गुरुकुल एक सत्संग है। मैं तो शुरू दिन से ही जिस दिन से मेरे अंदर कमी अपने अंदर झांका और हकीकत में ही सब कुछ अपने अंदर भी है झांक के देखो अपने अंदर गलतियां है उनको सुधार के देखो और जीवन बदलता चला जाएगा और कारवा अपने आप आपके शामिल आपके साथ होता चला जाएगा और धन्यवाद करते हैं गुरु को जो यह सत्संग दिया है इसको हर घर तक पहुंचाएंगे हर इंसान तक पहुंचाएंगे बिल्कुल हर किसी के कानों में पड़नी चाहिए और हमारा संकल्प है हम पहुंचा के रहेंगे। जी बहुत-ब धन्यवाद। मेरा जीवन बदला ऐसे सबका जीवन बदले।

52:00 जी अस्मिता मैम आइए वेलकम जय आरसीएम सर और एक बैग तो गुरु वाल्मीकि जैसा नहीं बन सकते सर। धीरे-धीरे ही बन सकते हैं। और गुरुकुल में आने के बाद ही हमको ये सब शिक्षा और दीक्षा मिली है। और यही माध्यम से हम आगे भी प्रेम भाव से बढ़ाते चलेंगे। और यह ऐसा मंदिर है जो किस चीज का घूमने का डर नहीं रहता है। हम मंदिर जाते हैं तो पहले दिमाग में आता है कि चप्पल किधर छुपाऊं क्या करूं। लेकिन ये ऐसा प्लेटफार्म है कि ये सब सोचना नहीं पड़ता है और अपने घर में आराम से सेफ्टी से हम ये सीख पाते हैं और प्रेम भाव तो हमारे जीवन में आरसीएम के वजह से और ये गुरुकुल के वजह से सबसे ज्यादा मायने रखता है सर कि सुबह सुबह हम आलसी थे पर बैठ के

52:46 हम आज गुरु के सामने हम अपना निश्चय रख सकते हैं कुछ भी और उसका अच्छा ही प्रमाण मिलता है सर धन्यवाद सर बहुत-ब धन्यवाद राम प्रताप जी धन्यवाद सर जिस जीवन में प्रेम नहीं वो जीवन बेकार है। प्रेम में ऐसी शक्ति होती है जो कुछ भी करवा सकती है। स्वार्थी बनकर आरसीएम करेंगे तो सबकी नजरों में गिर जाएंगे। प्रेम होता है तो अपने आप को बदलने के लिए तैयार कर पाते हैं। प्रेम में बेचैनी होती है और आप किसी सर की मैंने एक पुस्तक 2007 में पढ़ी सर जीवन एक ज्योति है। अभी भाई साहब ने अभी वो पुस्तक दिखाई थी और उस पुस्तक को पढ़ने के बाद सर आपसे इतना जुड़ा कि उसके बाद फिर 2007 में तो छोड़ दिया था लेकिन 2018 में पुनः मैंने फिर ज्वाइन किया वो आपके विचारों की

53:32 शक्ति थी और अभी 17-1 के कार्यक्रम में आपसे मुलाकात भी हुई सर और आपके विचारों में इतनी शक्ति होती है कि किसी को भी बदला जा सकता है। थैंक यू बहुत-बहुत धन्यवाद सर। थैंक यू। थैंक यू सर। राजेश सर वेलकम। धन्यवाद सर। पहले का जीवन और पिछले एक साल का जीवन में बहुत अंतर आ रहा है। मैं अपने आप को इतना बदला हूं और आगे बदल रहा हूं और मैं चाहता हूं कि मैं अपनी टीम के साथ सारे लोगों का बदलाव लाना चाहता हूं और सारे लोगों को गुरुकुल से जोड़ना चाहता हूं कि आप आए और यहां पे आकर आप अपने आप को बदल सकते हैं। थैंक यू सर। धन्यवाद। थैंक यू सर। रमेश सर। वेलकम सर। थैंक यू सर। जैसे हम सबको बोलते हैं ना जैसी संगत ऐसी रंगत। गुरुकुल एक गुरुकुल एक माध्यम है। सुबह आकर हम संगत को

54:18 परिवर्तन करेंगे। सच्चा ईमानदारी का रास्ता सुनेंगे देखेंगे। अरे ये यही तो हमारा गुरुकुल है। जीवन जीने का जो रास्ता दिखाता है इनका नाम है गुरुकुल। और क्या है गुरुकुल को कैसे वंदना किया जाए? जैसे संगत में आने का इतना फर्क होता है। सुबह गुरुकुल को बुला के हम सारे टीम को जागृत कर पाएंगे। बहुत-बत धन्यवाद। बहुत-बत धन्यवाद। एन के सिंह सर वेलकम सर। सर ने आज प्रतिपादित कर दिया। बहुत-बहुत धन्यवाद। लव इज गॉड। गॉड इज लव। तबके बरस हजारों सत्संगति पल एक तो भी नहीं बराबरी सुखदेव किया विवेक। सारी बातों का एक समन्वय इस प्लेटफार्म पर मिलता है। प्रेम न बारी उपजे प्रेम ना हाट बचाए। राजा प्रजा जेह रुचे शीश दे ले जाए। भोजपुरी

55:06 में एक रचना सुन रहा था। प्यार बा तो जग में बहार बा प्यार बिना जिंदगी बेकार बा यहां के उस जिंदगी को सवारा गया है खुद में बदलाव आया है हम बदलेंगे जग बदलेगा ओवर टू सर बहुत-बहुत धन्यवाद अनीता जी अनीता मैम वेलकम जय जय आरसी सर पिछले 2021 में मेरे ससुर के द्वारा एक सत्संग में जाने का मुझे मौका मिला और वहां सिखाया गया कि दुनिया में इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी अच्छा या बुरा हो रहा है उसके जिम्मेदार आप खुद हैं। वैसे तो यह बात मुझे हजम नहीं हुई लेकिन जब उन्होंने यह कुछ एग्जांपल देकर मुझे कहा तो उसके बाद मुझे

55:51 एक जीवन जीने का सही तरीका उस सत्संग में भी मिला था। लेकिन जब मैं उस सत्संग से थोड़ी अनकनेक्ट रही जा नहीं पा रही ऐसा कुछ हो गया तो उसका प्रभाव कम हो गया और जब उस सत्संग में थी तो हर इंसान में मुझे एक भगवान दिखाई देता था सर जी और जैसे कि मैं उसी सत्संग की वजह से मुझे आज लगता है कि आरसीएम अभियान मेरे जिंदगी में आया और उसके बाद अगर मुझे मालूम होता कि जब मैं जुड़ी थी आरसीएम अभियान को लेकर मैं मुझे अगर मालूम होता कि यह गुरुकुल भी ऐसे ही सत्संग का माहौल है। यह मुझे मालूम नहीं था। रथ यात्रा के आप हमारी जो रूपांतरण

56:39 यात्रा के बाद हमें मालूम हुआ और वही माहौल उससे भी कई बेहतर माहौल और यह सत्संग मुझे यहां पर मिला और जैसे टीसी छाबड़ा सर बोलते हैं तो मैं उस गुरु को याद करती हूं और उनको आदर्श ले आदर्श लेकर मैं इस आरसीएम अभियान को बहुत अच्छे तरीके से बढ़िया करूंगी। जय सर। बहुत-बहुत धन्यवाद मैम। पुष्पा जी वेलकम मैम पुष्पा जी जी बिल्कुल सर प्रेम की भावना और सत्य का मार्ग हमें बिल्कुल बाहर की दुनिया से अलग बनाता है सर और गुरुकुल की शिक्षा से हमें जो कुछ मिलता है वो तो बिल्कुल अलग ही है और हमें गर्व है कि हम टीसी सर के साथ

57:24 जुड़े हैं। उनकी विचारधारा के साथ जुड़े हैं क्योंकि यहां से यहां पर जुड़ने के बाद वाकई में सही जीवन की दिशा और उद्देश्य समझ में आया सर तो थैंक यू सर बहुत-बहुत धन्यवाद सुमन वेलकम जी सर प्रेम ही जीवन है और इस गुरुकुल क्लास में मैं सही और गलत का अंतर भी पहचान पाई हूं जब से जुड़ी हूं और मैं प्रेम से ही जो है यहां पर नेगेटिव व्यक्तियों को भी सही राह दिखाकर हम उनके साथ मिलकर बहुत बड़ा काम कर सकते हैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों को गुरुकुल क्लास में बैठा के भी सर हम लोग उनको भी विजय क्लियर कर सकते हैं ताकि वो भी हमारे इस अभियान में मिलकर

58:11 हमारे साथ चलकर आगे इस अभियान को बढ़ाए। थैंक यू सर। थैंक यू। और टाइम भी हो चुका है तो रेस्पेक्टेड सर के पास चलते हैं। सर वेलकम सर। चलिए बहुत-बहुत धन्यवाद। और आज क्या हो रहा है कि जितने साथी बोलते जा रहे हैं उतनी संख्या हैंड रे की बढ़ती भी जा रही है। खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। तो सबसे माफी चाहूंगा मैं क्योंकि वक्त और आपने हैंड रेज किया है। इसका मतलब आपने यहां व्यक्त किया है विचार कि भाव भी काम करते हैं। जरूरी नहीं कि आपने बोला था ये सामने आया है। इतने सारे साथी आज इस विषय पर बात बोलने के लिए तैयार है। ये भी तो बहुत बड़ा परिवर्तन है। और आज खुशी की बात यह है कि यहां मैं

58:57 अकेला वक्ता नहीं हूं। हर साथी की बात में इतना वजन था और हम केवल अभी बातें नहीं बोल रहे हैं। वो परिवर्तन भी दिख रहे हैं। सामने आ रहे हैं। तो बहुत बढ़िया आप सबके सहयोग के लिए मैं अद्भुत अद्भुत हाव भाव से प्रेरित हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूं। पर ये बदलाव का सिलसिला बस अब चलना चाहिए। तेजी से गुरुकुल और आरसीएम में एक प्लस पॉइंट यह है कि यहां पर केवल बातें नहीं है। केवल ज्ञान नहीं है। यहां जीवन को चलाने का पूरा मार्ग भी साथ में है। तो हमें और कहीं अन्य देखने की जरूरत नहीं होती। और हमारी जो इच्छाएं होती है अपने लिए और दुनिया के लिए वो सारी की सारी यहां पूरी भी कर सकते हैं। तो ये एक अच्छा सुंदर

59:44 पैकेज ईश्वर ने हमें दिया है। तो बहुत धन्यवाद हमें ईश्वर का करना चाहिए। सबसे पहले क्योंकि उसकी कृपा के बिना कुछ हो नहीं सकता है। आप सबका जितना सहयोग मिल रहा है उसके लिए मैं क्या बोलूं पर पूरी दुनिया में इसको कैसे पहुंचाना है ये हम सबको थोड़ी जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी क्योंकि प्रेम वो याद दिलाता है कि मेरी जिम्मेदारी है कि मैं इस काम को विस्तार दूं। तो हम गुरुकुल में भी और साथियों को लाए क्योंकि परिवर्तन हृदय का बहुत जरूरी है और इस कार्य को भी विस्तार दें और इसी तरह से आते रहे बोलते रहे जितनी अच्छी-अच्छी बातें हैं सबको हम एक दूसरे के साथ शेयर

1:00:30 करते रहे यही सत्संग है तो बहुत-बहुत धन्यवाद जी सर बहुत-बहुत धन्यवाद और आज का जो सेशन है ये पूरा टीम में इसको शेयर कीजिए तभी बहुत सारे साथी गुरुकुल में भी आएंगे और उसके अंदर जो हमारा और सत्संग का भाव हो भी जाएगा। सर

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