0:00 भरपूर लाभ ले सके आप सभी मैं आप सभी के मुस्कुराते हुए चेहरे के बीच प्राइ ऑफ़ नेशन रिस्पेक्ट सर को स्वागत करता हूं। गुरुदेव स्वागत है आपका। जी बहुत-बहुत धन्यवाद। सभी साथियों का हार्दिक स्वागत है। साथियों जैसा हमारा सोच होता है वैसा ही हमारा जीवन होता है। और सोच तो हम आजकल जानते ही हैं कि बाहर की कैसी दुनिया चल रही है। कितनी नेगेटिविटी है। कितनी समस्याएं हैं। कितनी उल्टी सीधी जो चीजें हमें सुनने को मिलती है। तो दिन भर हमारी
0:46 सोच में इतनी नेगेटिविटी का वातावरण है कि अगर हम उस सोच में ही डूबे रहे तो हमारा जीवन भी प्रभावित होता है। और जब हम प्रतिदिन एक अच्छी सोच से दिन की शुरुआत करते हैं। अच्छे माहौल से अच्छे वातावरण से हमारे जीवन पर बहुत ही सकारात्मक प्रभाव आता है। कोई [नाक से की जाने वाली आवाज़] एक साथ ही बताएंगे प्रतिदिन हमें यह ध्यान के माध्यम से हम एक अच्छे वातावरण के माध्यम से शुरू करते तो उनके जीवन में कोई परिवर्तन आया हो पहले के मुकाबले उनकी सोच में उनके भाव में एक साथ ही बताएंगे मुकेश जी आइए
1:37 धन्यवाद सर महागुरु को मेरा नमस्कार मेरा नाम मुकेश कुमार मुजफ्फरपुर बिहार से और प्रत्येक दिन हमें योगा में आने का मौका मिला। 21 दिन तक लगातार हमारा चेहरा में वातावरण में हर चीज में परिवर्तन दिखाई दे रहा है। सर जी ये हमारे लिए बहुत धन्यवाद है कि गुरुकुल में हमारे आने का बहुत-बहुत धन्यवाद सर। बहुत बढ़िया। चलिए बहुत बढ़िया। एक साथ एक और बुला लीजिए। आइए सर। पंकज जी। थैंक यू गुरुदेव। पूरा जीवन ही गुरुदेव बदल गया है। विश्वास ही नहीं हो रहा है कि कभी मैंने ऐसा सिस्टम आदरणीय चौधरी साहब सुबह सुबह 4:30 बजे कराते हैं। पहले तो नहीं सर लेकिन अब धीरे-धीरे बहुत सारा परिवर्तन गुरुदेव आता चला जा रहा है।
2:24 बहुत-बहुत धन्यवाद सर। नहीं मैं थोड़ा सा जानना ये चाह रहे थे। बदल गया क्या बदला कि पहले सोच में ऐसा होता था। आजकल ऐसा हो रहा है। वो चीज कोई बताना चाहेंगे? पूरा जीवन बदल गया है। ये एक मोटी बात हो गई। आइए रेनू दीदी का फिजिकल हैंड गुरुदेव नमस्कार सर पहले जैसे मैं है ना छोटी-छोटी बातों पे बिल्कुल हाइपर हो जाती थी जब से मेरे जीवन में गुरुकुल आया है ना बिल्कुल मेरी लाइफ में चेंज हो गया है इतनी सहनशीलता आ गई है मेरे अंदर इतनी पॉजिटिविटी हो गई है कि मैं हर टाइम पॉजिटिव सोचती हूं सर मेरे जीवन में गुरुकुल ने बहुत ही परिवर्तन किया है सर जी और मेरे अपलाइन भी बोलते हैं रेनू तू गुरुकुल से बिल्कुल चेंज हो गई है। थैंक
3:12 यू गुरु जी मौका देने के लिए। बहुत बढ़िया। तो साथियों अगर हमें आरसीएम परिवार को अच्छा बनाना है तो सबको केवल गुरुकुल का 6:30 से नहीं जोड़ना है। हमें जोड़ना है 5:30 से। अभी हम क्या करने वाले हैं? 5:25 से स्टार्ट होगा। फिर योगा होगा 6 बजे तक और 6 से 6 हम विभिन्न तरह के अपने मानसिक जो अपना जो चेतना होती है ना उसको श्रेष्ठ करने के बहुत सारी चीजें करेंगे हम तो आप सभी साथियों को यह बताएं अपना वीडियो बनाए अपने विचारों के बारे में बताएं अपने साथी
3:58 के बताएं कि प्रतिदिन ऐसे करते हैं तो हमारा जीवन वास्तविक जीवन बन जाता है जैसा होना चाहिए वैसा बन जाता है तो ये पुरुषार्थ हम निरंतर करेंगे। थोड़ा सा प्रयास और बहुत बड़ा कार्य है। किसी भी व्यवसायिक प्लेटफार्म पर इस तरह की गतिविधियां नहीं होती है और ये व्यवसायिक है भी नहीं। मैं आपको साफ बता देता हूं। यह संपूर्ण जीवन का समग्र समाधान है और हमें सबको वही विचारधारा रखनी है। आज आज जो है ना रविवार है की एक परीक्षा
4:45 होने वाली है। आज कोई भी चीज जो इस धरती पर आई है कोई भी निर्माण हुआ कुछ भी घटना हुई है। कोई इतिहास में पीछे घटनाएं हुई है। कोई खराब हुआ है तो भी और कोई अच्छा हुआ तो भी। उसकी शुरुआत होती है हमारे विचारों से। सबसे पहले कोई भी चीज हमारी सोच में आएगी। अगर हमें अच्छा करना है तो जब तक हमारी सोच में नहीं आएगा तब तक हम अच्छा नहीं कर पाएंगे। तो अभी अपन ने थोड़ी देर बात की। एक दो मिनट कुछ साथियों के साथ बात की। आपने भी सुनी, सबने सुनी।
5:30 अब मैं आज आपका एग्जाम है सोच का। आप कितना किस चीज से क्या सोच पाते हैं? अभी तक जो एक दो प्रश्न पूछे, कुछ ने जवाब दिए। अब सबने सबके माइंड में कुछ अलग-अलग चला होगा उस बात को लेकर। किसी ने ध्यान दिया भी नहीं होगा। ऐसा भी हो सकता है। किसी ने दिया होगा तो अपने लिए जरूरी नहीं माना। किसी ने लिए कुछ क्या लिया है तो आप में से कोई भी बताना चाहे कि जो हमने सुना तो हमारा माइंड भी क्या चल रहा था सबके चलता है कुछ ना कुछ और वही जीवन का निर्माण है वही आधारशिला है तो आप हैंड रे करें बताइए कि जब ये बात हो रही थी तो मेरे माइंड में क्या चल रहा था
6:17 बुलाइए आइए राम जी जी जी सर हमारे माइंड में ये चल रहा था कि इतना सारा परिवर्तन हो रहा है तो मैं उसको कैसे चेक कर पाऊं? क्या इसमें अलग हुआ? किस प्रकार से और आगे होने वाला है? जब आपने सवाल पूछा सर कि इस सुबह में जब हम ध्यान करते उससे क्या फायदा होता है या जीवन में क्या परिवर्तन आया? तो ये चल रहा था कि जो परिवर्तन आए उसको और आगे कैसे बढ़ाया जाए? क्या ऐसा किया जाए कि हर हर टाइम परिवर्तन आ जाए और हम थोड़ा ज्यादा अब सुनने लगे हैं। थोड़ा ज्यादा विचार करने लगे। नहीं तो तुरंत जवाब देने लगते थे सर ये हमें पकड़ पाया आपने बहुत बढ़िया आइए सही आंसर देने के बारे में सोच रहे थे
7:03 चलिए सर मेरे दिमाग में एक चीज आ रहा था कि 1770 हजार करोड़ का पेंट का कारोबार है तो 2030 तक मेरा और मेरी टीम का कारोबार पेंट में कहां जा रहा है इस पे मेरी सोच जा रही है। कैसे बढ़ा रहे हैं हम पूरे भारत में ये सोच जा रही है और हेल्थ कैंप हम कितना कर रहे हैं कैसे कर रहे हैं यानी पूरी प्लानिंग यानी कि सोच फट से ब्रॉड हो रहा है सोच ब्रॉड हो रही बड़ी सोच हो रही है आइए सुधीर मौरिया जी धन्यवाद सर कल से सर दिमाग में एक ही चीज चल रहा है सर जो भी सेशन देख भी रहे हैं सर मंसा वाचा करण में हमने देखा कि उसमें एक शब्द लिखा था कि जो चर्चाएं कमियां हम किसी को देखते हैं चर्चा करते
7:50 उस कमियां की हमारी जिम्मेदारी बनती है। उस कमियां को दूर करने के लिए सर वही दिमाग में बार-बार गुजरा है। सर आज सेशन जब चालू हुआ सर जब ये प्रश्न आया सर तो यही गुजरा था। धन्यवाद सर। तो साथियों आपने देख लिया ना कि अजय भैया जो सोच रहे थे कि कैसे पेंट का बड़ा करें, कैसे हेल्थ पे बड़ा करें तो वो उसका रास्ता निकालेंगे। भले चर्चाया कुछ और हो रही होगी लेकिन वो उस दिशा में सोच रहे थे तो वो जिन्होंने सोचा वो रास्ता निकालेंगे जिन्होंने नहीं सोचा हो तो नहीं निकालेंगे और अन्य साथियों ने भी जो भी बताया है कि रामाश्रेय भैया सोच रहे थे कि मैं में जो
8:36 परिवर्तन आया है इसको कैसे और अच्छा करूं कैसे पहचानू इस टाइप से सोच रहे थे तो इससे क्या साबित होता है? अब अब सवाल चेंज हो गया। आपने ये जान लिया कि हम सब अलग-अलग सोचते हैं। ये तो जान लिया। ये जानने के बाद अब क्या सोच है? आज अभ्यास हम करते हैं ना कभी जैसे बॉडी बनानी है तो एक्सरसाइज करते हैं। खेलना तो क्रिकेट का अभ्यास करेंगे। क्रिकेट खेलना है तो गाना गाना है तो सिंगिंग का अभ्यास करेंगे और कुछ नृत्य करना है तो नृत्य का अभ्यास करेंगे। तो सोचने का अभ्यास सबसे बड़ा
9:23 अभ्यास मानता हूं। क्योंकि कोई धरती पर ऐसे भी इंसान हुए हैं जिसने ऐसा सोचा कि पूरी दुनिया को प्रभावित कर दिया। ऐसे भी हुए जो खुद का पेट भी नहीं भर पाया है। तो ये अंतर कहां से आया? ये सोच से आया है। इसलिए आप अपने सोच को कंटिन्यू देखते रहिए, चेक करते रहिए और अच्छा सोचने का अभ्यास कीजिए कि क्या बाहर से क्या आ रहा है और लेकिन हम क्या सोच चलिए आइए मोहित जी थैंक यू सो मच सर और जैसा कि अभी सर ने एक सवाल पूछा था कि हम कैसे सोचते हैं और
10:10 यहां पर आकर हमारा क्या चेंजमेंट हुआ है गुरुकुल में? तो सर पहले मैं दिसंबर से पहले जनवरी से स्टार्ट हुआ है और इसके बाद पहले मैं अपनी टीम के बारे में सोचता था। अपने बारे में सोचता था। अभी जब से गुरुकुल में आया हूं तो यहां पर एक इतनी बड़ी सोच मिली कि यह हमारा परिवार इतना बड़ा है। यह अभियान इतना बड़ा है। क्यों ना पूरे जहां तक हमारी ताकत है, जहां तक हमारी पहुंच है, वहां तक इसका विस्तार किया जाए। और अभी जैसे कि 5 6 7 तारीख को बहुत बड़ा स्वास्थ्य क्रांति मनाई जा रही है। तो उसको लेके मैं सोच रहा हूं कि वैसे तो प्लानिंग मेरी एक ही दो जगह है लेकिन इसको कैसे और बड़ा विस्तार दिया जाए। कैसे हमारे आरसीएम परिवार को हिंदुस्तान का नंबर वन आरसीएम
10:58 परिवार बनाया जाए। हालांकि बहुत बड़ा मैं कर नहीं पा रहा हूं लेकिन सोच बहुत बढ़ा पा रहा हूं। तो यह अभी मैं कर करने का प्रयास क्योंकि टीसी सर कहते हैं अगर आप सोचोगे तो जरूर होगा और मुझे विश्वास है क्योंकि एक दिन अभी टीसी सर ने कहा था मोहित अभी तुझे कोई नहीं जानता है लेकिन एक साल बाद तुझे इतना बड़ा करना है कि तू बहुत बड़े स्टेज पे आए तो उस दिन से सर ने कहा था तू अलग तरीके से सोच और वास्तव में उस दिन से मैं अलग तरीके से सोच रहा हूं। अलग प्लानिंग कर रहा हूं कि कैसे हम आरसीएम को बहुत बड़ा विस्तार दे पाऊं अपने स्तर पे। तो थैंक यू सो मच। बहुत-बहुत शुक्रिया सर। भैया ना आपने वो बताया जो पहले के विषय है। अभी थोड़ा सवाल पे
11:46 रहिएगा कि अभी जो बात हुई है ना उसको लेकर आपका मन क्या कह रहा है? ओवरऑल नहीं बताना। इंस्टेंस सोचना है। अभी बात हुई थी ना। अभी क्या हुई थी बात? धन्यवाद गुरुदेव जब हम लोगों की सोच भले अलग-अलग है लेकिन सबका लक्ष्य है स्वास्थ्य क्रांति 100 50 25 और हम आरसीएम को ऐसे उच्चतम श्रेणी पर ले जाए सारे लोग कहे कि आरसीएम जैसा हमें होना चाहिए। धन्यवाद सर। यस। अब ये भी हमारी एक आदत है। देखिए हम बड़ी बात बोलने का और बड़ा बोलते हैं।
12:32 वास्तविक अंदर से आ रहा है कि नहीं आ रहा है ये हमें भी पता नहीं होता है। हम केवल बोल रहे हैं ताकि हमारी तारीफ हो जाए। लेकिन बड़ा बोलने से बड़ा हो जाएगा क्या? उसके लिए सही तरीके सोचना आना बहुत जरूरी है। तो अभी अपन विषय थोड़ा इधर उधर हो गया। अब मैं वापस एक बार विषय पे लाता हूं। मैं बताऊ नहीं सोच जो हमारी है सर माहौल से बनती है और हम लोग गुरुकुल के माहौल में है इसलिए इतनी बड़ी सोच हो रही है। यस बहुत बढ़िया। अभी आपको ना थोड़ा प्रॉपर
13:19 सोचना सीखना है। प्रॉपर अभी आप अलग-अलग बातें कर रहे हैं। जो सब्जेक्ट दिया जाएगा उसी पे सोचना है। उसी से रिलेटेड सोचना है। उसकी गहराई में आप कितना भी जा सकते हैं। 10 मंजिल जा सकते हैं कि बताया तो इतना ही था लेकिन उसने तो आपने आपके पता नहीं कहां तक सोच लिया। वो चलेगा। बताया तो यही तरीका था कि आपने 10 तरीके सोच लिए। वह सब चलेगा लेकिन जो विषय है उस पर सोचने का अभ्यास करेंगे आज। अब मान लीजिए आप यूएलपी पिक प्रतिदिन करना चाहते हैं किसी पर। यूएलपी पिक का अपने चल रहा है कि प्रतिदिन करना चाहते हैं।
14:07 आपके मान लो 10 पॉइंट है। 10 में से पांच जगह प्रतिदिन होने लग गया है। वहां पांच में से तीन जगह खूब अच्छे से चल रहा है। दो जगह हो रहा है लेकिन संख्या बराबर नहीं आ पाती है। बाकी पांच जगह है वो उसमें से दो तीन जगह कभी-कभी होता है और दो जगह अभी शुरू ही नहीं हो पा रहा है। ऐसा अलग-अलग ऐसा ही होता है प्रैक्टिकली। अभी आपके सामने विषय है। इसी पर सोचना है। आपको कुछने पर नहीं सोचना है। चलिए हैंड रे कीजिए। आइए सर। मैं कुछ नहीं बोल रहा हूं कि आपको किस विषय पे क्या सोचना चाहिए। अब यहां पर जो
14:53 सही सोचेंगे वो आगे बढ़ते जाएंगे। आइए आइए पीएस जी। थैंक यू सर। जहां सर यूएलपी के हमारे नहीं हो पा रहे हैं। वहां पर हमारे कुछ साथी जो हमारे एक्टिव साथी हैं उनको जिम्मेदारी देना है। वहां माहौल बनाना है कि वहां भी यूएलपी क्विक शुरू हो जाए और जहां निरंतर नहीं हो पा रहे हैं वहां निरंतरता हमारी लाने का प्रयास किया जाए क्योंकि हमारा एक ही उद्देश्य है कि यूएलपी क्विक के द्वारा माहौल को बड़ा किया जाए। ओवर टू यू सर। बस यह इतना सोचना काफी है भैया इससे हो जाएगा काम थोड़ा और सोचो सोचने का समय जरूरी नहीं
15:39 अपन यहां बताएं नहीं बताएं लेकिन ये सोच क्या पूरा काम करेगी ये हमें सोचना सीखना है। चलिए आगे बढ़ते हैं। आइए जी जी इस परिस्थिति में मैं यह सोच रहा हूं सर मैंने 10 को टारगेट किया था और दो तीन तो अच्छे से चल रहे हैं दो तीन आगे पीछे चल रहे हैं लेकिन अब वो हर संभव प्रयास कर रहा हूं जैसे हेल्थ कैंप हमारा जो चल रहा था उसको लेकर के मैं बहुत सीरियस हो गया जो तीन चार जगह नहीं हो रहा था उसमें हमने बोला कि एक आइए दो आइए लेकिन शुरू करिए तो मेरे मन में आ गया सर कि अभी कि शुरू करवा दूं भले एक आए दो आए तीन आए कई जगह हमारे 15 20 हो रहे हैं कई जगह पांच सात हो रहे कई जगह नहीं हो रहा है तो लोग बंद कर दे रहे हैं। तो अभी हमने जिम्मेदारी ले लिया
16:24 है कि शुरू करवा दिया जाए हर हालत में चाहे एक आए दो आए तो निश्चित ही हम एक बड़े क्रांति को हम अंजाम दे पाएंगे और यूएलपी क्विक में भी बुला पाएंगे और लोगों को सेहत के सितारे भी बना पाएंगे। सर ऐसा मेरे मन में अभी भी आया। यहां भी कुछ अधूरापन है। मैं आपको बात ये भी बता देता हूं कि उससे दो एक स्टेप आगे है लेकिन अधूरापन है यहां भी। चलिए आइए मोहित जी। जी। अभी जैसा सर ने सवाल पूछा जैसा सर ने बताया कि तीन बहुत अच्छी तरीके से रन हो रहे हैं और दो कम संख्या तो जहां
17:13 पे बहुत अच्छे रन हो रहे हैं वहां के हमें छोटे-छोटे वीडियो बनाने हैं और वहां पर बताना है कि यहां पे बिगिनर साथी भी यूएलपी करने लगे और जो नई जगह है जहां पे प्रॉब्लम आ रही जहां पे चैलेंज आ रहा है वहां पे हमें ये देखना कि क्या चैलेंज है वहां पे बोलने वाला साथी है और जो बुलाता है वो बुलाने वाला कैसे बुला रहा है तो जहां पे बढ़िया हो रहा है वहां की कॉपी करके हम जहां पे कम हो रहा है वहां पे रिजल्ट दिखा सकते हैं कि यहां पे पहले यूएलपी हो नहीं रहा था इन्होंने करना स्टार्ट किया यहां पे इतने अद्भुत रिजल्ट आ रहे हैं तो नए साथी जहां पे करने के लिए एक्टिव नहीं है वो भी स्टार्ट करेंगे इस तरीके से उनको हमें बताना है और उनको गुरुकुल बताना है कि गुरुकुल में वो पावर है जो आप अगर वहां पर एक महीना आ जाइए 15 दिन आ जाइए ऑटोमेटिक वो सारी चीजें करने लगेंगे मैं तो सर यह सोच पा रहा हूं जी सर
18:02 दोनों से बेटर है। दोनों से थोड़ा एक कदम आगे सोचा है। बहुत अच्छी बात है। और साथियों मैं आपको ये बता देता हूं कि ये मोहित पहुंचे हैं लगभग लगभग 25% तक। अब आप सोचिए सारा खेल सोच में ही है। दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं है। चलिए सुधीर बघेल जी आइए। थैंक यू सर। सर पहले तो हम 10 जगह पे जो सोच पाए कि पहले टोटल वाइटल नेचुअल लोग को हम लोग सिखाएं। नए लोगों को हम लोग सिखाएं और जहां-जहां हमने जिम्मेदारी लिया है,
18:48 वहां पर हम लोग पर्सनली जाके चेक करें और जहां सेवा केंद्र सही नहीं है, वहां पर सबसे पहले हम लोग उसको ठीक करके शुरुआत कराएं और जहां दिक्कत है वहां पर पर्सनली अपन मिलके बड़ा करें। आइए लक्ष्मी लक्ष्मी बहन जहां पे नहीं हो रही है। जहां पर शुरुआत नहीं हुई है वहां पर हम लोग विशेष प्रमोशन करेंगे। क्या हो रहा है क्या नहीं हो रहा है। वहां का जो सेवा केंद्र होगा वहां का रख रखाव अच्छा है नहीं है। वहां पे कुछ अलग व्यवस्था रखेंगे ताकि मतलब नए साथी ज्यादा आकर्षित हो और वहां पे ज्यादा से ज्यादा साथी आए। इस चीज पे ज्यादा फोकस
19:33 करेंगे। थैंक यू। आइए रजा। मैं मेरा टारगेट है कि मैं जहांजहां जाऊं स्वास्थ सेवा संस्कार पे काम करूं। जो सोच है बदल लेना है वह अपनी दुनिया का दुनिया बदल सकता है। सोच की शक्ति को पहचानो यह आपका सबसे बड़ा हथियार है। बहुत बढ़िया सुधीर मौरिया जी। ठीक है धन्यवाद सर इसकी मतलब जानकारी पहले सभी को दिया जाए नए और पुराने सभी को कि इसका खासियत इसकी क्वालिटी क्या है इसमें क्या हो सकता है सबसे अच्छी बात है कि सबको बताया जाए कि यूएलपी होता क्या है सभी साथी वहां पे है सबको बहुत-ब धन्यवाद सर
20:19 डॉक्टर जी गुरुदेव जी आप आगे सर ये एनालिसिस के ऐसे कंटिन्यू [गला साफ़ करने की आवाज़] चलिए बुलाइए किसको बुलाया आइए थैंक यू सर गुरुदेव पहले अपने आपको करना होगा और उसके बाद में हमें अपना रिजल्ट दिखाकर फिर उन साथियों के साथ जहांजहां कम काम हो रहा है उस स्तर पर नहीं हो रहा है जैसा हम चाह रहे हैं तो वहां वहां हम जाकर बार-बार उनके साथ जाकर हमें उनको करवाना होगा और रिजल्ट दिखाना होगा साथ में अपना भी रिजल्ट दिखाना होगा और बार-बार फॉलो करते रहना होगा और ज्यादा से ज्यादा साथियों के साथ माहौल बनाना होगा
21:07 के साथ। यस। चलिए अभी दो तीन बातें हैं इसमें। एक तो क्या जितना मान लो बोल रहे हैं उतना ठीक कर रहे हैं कि नहीं कर रहे हैं ये भी एक प्रश्न है लेकिन साथियों सोचने में तो कंजूसी तो हम कर रहे हैं जैसे ऐसे कर रहे हैं जैसे भाई पैसा खर्च हो रहा हो पैसा खर्च हो रहा हो ऐसे सोच रहे हैं जैसे जब सोच में ही कमी होगी तो कृत में तो कमी आएगी आएगी ना। चलो एक बार अजय भैया से भी लेते हैं कि आइए सबसे पहले तो जिन तीन जगहों पर नहीं हो
21:53 रहा है वहां हम मिलके वहां की जो हमारी मूल समस्या है उसको हम देखेंगे। समस्या क्या है? अब उसका समाधान करें। दूसरी चीज जो हमारी रोज की जो कोर की हमारी ज़ूम मीटिंग मान लीजिए अजय बिहार मान लीजिए तीन जगह जो नहीं हो रहा है वहां पर मान लीजिए कि कोई लेने वाला नहीं है तैयार नहीं हुआ अभी ऐसा मान लेते हैं अपन सर वो आगे हमारी प्लानिंग में वो है वो बता रहे हैं सर अच्छा ठीक है जहां तीन जगह नहीं हो रहा है सर वहां पर हम अपने सबसे पहले तो हम वहां की जो भी हमारी टीमें आ रही है उस सेंटर पर आ रही है उन सभी के साथ हम बैठक करेंगे। पहले तो हम अपने ज़ूम पर अपनी टीम के साथ हमने रोज उसको ले लिया। दूसरा उस सेंटर पर आने वाले
22:41 आमतौर पे जो भी लोग हैं अनेक टीमों के हैं उनके लीडरवार जो है जो मेन आते हैं उनके साथ हम बैठक करेंगे और बैठक करके इसको कंटिन्यू करने का हम आगे संकल्प लेंगे। तीसरी चीज यह है सर कि हर सेंटर के लिए एक जो सक्रिय साथी है उसको हम उस यूएलपी प्रोग्राम के लिए उसकी जिम्मेवारी देंगे कि सुबह से ले आपको शाम तक रहना है। चौथी चीज ये है सर कि जो भी वहां पर सक्रिय डिस्ट्रीब्यूटर हमारे आते हैं उस सेंटर पर उन सभी की हम लोग जिम्मेवारी देंगे कि कम से कम एक लोगों को लेकर आना है। वो चाहे आरसीएम का एक्टिव इनक्टिव डिस्ट्रीब्यूटर हो या नया डिस्ट्रीब्यूटर हो। ऐसे पांचवी चीज हमारी यह है सर कि सभी टीमों के साथ जहां नहीं हो रहा है वहां के लिए एक हमको
23:28 टीम स्पष्ट बना लेना है जिस पे सभी टीमों के सदस्य कम से कम एक-ए दोद हो और सभी की जिम्मेवारी और उसकी समीक्षा रोज करें जी सर जी और किसी को लेना है साथियों कुछ हमने डिस्कस किया कुछ हमने सोच को देखा अब आप ईमानदारी से बताइए अब मैं आपके सामने सवाल पूछ रहा हूं और आप ईमानदारी से अब सोचना इस विषय पे ये यूएलपी क्विक प्रतिदिन करना
24:13 क्या इतना बड़ा विषय है जिसको हम मतलब हार मान चुके हैं कि इतनी जगह हो पाएगा इतना बड़ा हिस्सा है क्या ये होनेस्टली बताइए जिसके हम समाधान नहीं निकाल पाए क्या इसके उपाय संभव है कि नहीं है चाहे ऐसा जहां अभी बिल्कुल भी ठीक नहीं है क्या उस पर भी प्रतिदिन में बदला जा सकता है कि नहीं जा सकता है अब आज के बाद आपको कैसे सोचना है पहले थोड़ा सा आपको हिंट दे रहा हूं टिप्स दे रहा हूं आपको अभी एक बार पेन और पेपर लेना है आपको। जब भी आप किसी भी विषय पे सोच रहे हो तो पेन और पेपर लेना है।
24:59 दूसरी चीज अभी जो ध्यान आ रहा है अभी लिख लीजिए। अपने साथियों से डिस्कस कीजिए कि यार इसको अपने को करना ही करना है। आपके दिमाग में कोई आईडिया तो लीजिए। चार 10 साथियों से आईडिया लीजिए। आपके दिमाग में तीन है। तीन लिख लिए। अपने इतना लोड नहीं लेना कि मेरे को आ ही नहीं रहे तो क्या करें? यही बस एक चीज जितने आ रहे उतने लिख लीजिए अभी यहां सुना वो लिख लीजिए कहीं भी पकड़ में आया यार चलो इस सेशन को वापस देख के इतने जनों ने बोला उसमें से क्या था वो लिख लेते हैं अपने साथियों से डिस्कस करके वो लिख लीजिए सेवा केंद्र वाले से पूछ के वो लिख लीजिए उसकी कोई समस्या तो वो लिख लीजिए अभी जो ध्यान में आया अभी लिख लिया बाद
25:44 में कुछ ध्यान आया वो लिख लिया कोई लोड नहीं लेना है। इजीली भी सोचेंगे इजीली भी चाहेंगे तो भी उपाय निकलेंगे। पांच उपाय निकले पांच पे काम किया नहीं हो पाया तो इसका मतलब ये जो हमने उपाय किए वो प्रॉपर उपाय नहीं है। आपको बुखार आ रही है। डॉक्टर ने गोली लिखी है। उसने बोला दो दिन में ठीक हो जाएगी। दो दिन में नहीं लिखी है तो क्या आप गोली लेना बंद कर देंगे या वापस जाएंगे डॉक्टर के पास कि नहीं इससे तो मेरा ठीक नहीं हुआ यही करते हैं ना हम तो ये ये भी एक ट्रीटमेंट है कि आपको जो करना है वही करना है आप उपाय बढ़िया से बढ़िया एक तो ये
26:31 रवैया होना चाहिए समझ में आ गया आपको दूसरा आपका ये रवैया होना चाहिए कि करना तो है ये पांच चीजों से होता है तो ठीक है नहीं तो कुछ और करेंगे लेकिन रुकेंगे नहीं कोई फेल नहीं होएंगे फेल होना हमारी सिस्टम में नहीं है मेरे जीवन में नहीं है फेल होना जो सोच लिया हां अव्यवहारिक सोच लिया ऐसा असंभव को सोच लिया तो बात अलग है कि यार ये मैंने सोचा ही ऐसा सोच लिया जो प्रैक्टिकली नहीं है तो वहां छोड़ दो आप अपने आप को फ्री कर दो गलती से सोचने में आ गया लेकिन जो चीज हमने जो सेवा केंद्र पर प्रतिदिन ये तो सही सोचा ना तो इसमें फेल तो होना नहीं है इन उपाय से नहीं हुआ तो आपको और नहीं कुछ बड़ा करेंगे एक दिन है ना क्या करते हैं वो गुड डॉट की रसोई
27:18 का आयोजन लोगों को बुलाएंगे सारी टीमों को बुलाएंगे कोई बड़ा प्रमोशन करेंगे या कुछ और लगाएंगे कोई महिलाओं का कोई दूसरा है जिनका प्रोग्राम करेंगे और कुछ करेंगे किसी वीआईपी को बुलाएंगे एक सेवा गतिविधि करके सबको बुलाते हैं यूएलपी ये सेवा केंद्र ठीक नहीं है तो इसको सब साथी पीछे लग के उसको तैयार करते हैं वो ठीक होगा तो आज का आज सब कुछ विचार आ जाएगा वो ऐसा कोई जरूरी नहीं है हमारे माइंड में सब कुछ आ जाए ये भी छोड़ दीजिए चलो अपने आप को मान लीजिए कि यार पता नहीं सोचा कि नहीं आ
28:04 पा रहा तो परेशानी में मत रोकिए मत पीछे मत रुकिए करना यही है जो सोचा है और जितने दिन में करना है उतने दिन में पूरा करना तो आपने क्या आज ढूंढा किसी भी विषय अनेक विषय आए हुए विषय बहुत सारे लेकिन किसी भी चीज को किया जा सकता है साथियों ये आज मेन चीज हमको ये समझनी है सारी चीजें बाहर से नहीं मिलती है। बाहर से क्या मिलते हैं? इशारे। आज जो बात हो रही है वो भी इशारे हैं। पूर्ण समाधान तो आप ही निकाल पाओगे। तो बाहर से इशारे मिलते हैं। समाधान भीतर
28:50 से निकलते हैं। अब ये मैंने बोला आपने क्या समझा इससे? कोई उदाहरण से बताएंगे। चलिए आइए सर। वीर कुमार जी नमस्ते गुरु जी मैंने सर जब शुरू में स्टार्ट किया था पालीगंज में तो लोग यही बोलते थे कि इसे यहां तीन बार बंद हो चुका है लेकिन मैंने थाना शहर के से पालीगंज को हाईलाइट करना है आरसीएम को लेकर तो आज छोटी सी पीयूसी से आज बड़ा सा पीयूसी करने जा रहे हैं छ तारीख को ओपनिंग भी हो रहा है सर और वहां हमने यही ठाना है सर कि
29:36 डेली यूएलपी क प्रोग्राम भी करेंगे सर और हो भी रहा है सर तो ये ठानने के बाद ही होता है सर और वहां बहुत बड़ी रैलियां भी करेंगे सर ये वहां वीडियो भी जाएंगे लोगों को ये दिखा दिए सर किसे कैसे होता है सर थैंक यू जय आरसी सर चलिए आपने विषय थोड़ा सा पुराना वाला ले लिया वो उस विषय पे तो आप जो भी विषय है जो भी करना इसके 100 उपाय होते हैं 100 100 से भी ज्यादा होते हैं हम दो में रुक जाते हैं क्योंकि हमारी सोच में नहीं आ पाते तो वो विषय पर अभी विषय आपको मिला है कि बाहर से सारे मिलते हैं भीतर समाधान भीतर में होते हैं इसका कुछ व्याख्या करेंगे वही
30:22 सर जी का आइए जी जी सर हमने अभी [गला साफ़ करने की आवाज़] पहले तो अभी ये माइंड में आया कि तुरंत उस पर नोट बनाए। जहां भी सफलता सफलता की चीज हो या जब सोच रहे हैं कोई काम नहीं हो पा रहा तो उस नोट बनाए कि और क्या-क्या एक्टिविटी कर सकते हैं। तो अभी हमने नोट बनाया है उस पर हम ये प्लान कर रहे हैं सर कि जो पिछले हफ्ते में जहां से ज्यादा रिजल्ट आए जिस एक्टिविटी से उस पर हम ज्यादा काम करेंगे। कुछ नए-नए एक्टिविटी ऐड करते रहेंगे। जैसे अभी हमने जो रैली का एक प्लान किया था सर कि हम 28, 26, 28, 30 और एक को रैली करेंगे। उस रैली से इतना जबरदस्त रिजल्ट निकल के आया कि लोग पीछे बुला के पूछना शुरू कर दिया ऐसे क्या हो रहा है? क्यों ऐसा हो रहा है? तो उससे
31:08 ज्यादातर लोग आने के चांसेस बन गए। तो अभी हमारी टीम ने डिसाइड किया है कि शनिवार को हम क्षेत्र में रैली करेंगे हर शनिवार को। दूसरा सर ये निकल के आया कि जब जब हम प्लान करते हैं जब जब हमें रिजल्ट मिलता है तो उसको हमें तुरंत नोट डाउन करना चाहिए और समस्या सबकी सुनना चाहिए और सुनने के बाद उस पर प्रॉपर तरीके से लिख करके फिर हम काम करें। हम देखते हैं सर एक चीज और मुझे यहां मिली कि जितने साथी गुरुकुल में अटैच हो गए हैं उनके वो इजी तरीके से कर पा रहे हैं। जो कह रहे हैं आ जाऊंगा सुन लेता हूं उनको बहुत प्रयास कर रहे हैं लेकिन वो उस टॉपिक पर काम नहीं कर पा रहे हैं। चाहते तो हैं लेकिन काम नहीं कर पा रहे हैं। तो एक बहुत आसान तरीका आज मुझे मिल गया सर कि गुरुकुल में उनको जैसे तैसे हम ला दिए ना तो जो हम बताएंगे जो हम दिखाएंगे जो हम समझाएंगे जल्दी समझ जाएंगे
31:55 और तेजी से हम पूरे भारत में हम काम कर पाएंगे सर जी यस बाहर से सारे मिलते हैं भीतर समाधान होते हैं। इसका मीनिंग ये होता है कि बाहर से जैसे हमको मिल गया कि हर माह ग्रोथ करनी है। इस रेट से करनी है। मतलब उस प्रतिशत से ज्यादा से करनी है। ये इशारा मिल गया। कुछ कुछ और बातें मिल गई है। लेकिन हमको उस बात को इस तरह से लेना है कि 100 50 25 नहीं मैं तो उससे चार गुना करूंगा। जो उपाय बताया उससे भी चार गुना करूंगा।
32:42 आपको डिजाइन करना है। फिर मतलब ये विषय किसी और का नहीं रहना चाहिए। यह विषय मेरा है। बस इतना ही चाहिए मुझे। बाकी अब मैं संभालूंगा। तो हमारे भीतर समाधान सबके होते हैं। लेकिन हम जब निर्भर बन जाते हैं कि चलो यार वो कोई आएंगे फलाने वो आएंगे तब मुझे बताएंगे मेरा वो तो हम क्या दूसरों पर जब डिपेंड हो जाते हैं तो हम भीतर से समाधान नहीं निकाल पाते। साथियों आज आपको अच्छी तरह समझ लेना चाहिए अच्छी तरह से कि हमें अपनी भूमिका को
33:28 परिवर्तित करना है। शुरू शुरू में जब मैंने प्रश्न पूछा दो तीन साथियों ने अच्छे-अच्छे जवाब भी दिए थे पर फिर भी मैंने जानबूझकर बोला कि जवाब मतलब पूरा सोच वहां तक नहीं आ पाई। जानबूझकर बोला क्योंकि मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि ऐसे सोच को रोको मत आप और वाकई में वो उस सीमा तक ही सोचा वो जो संपूर्ण सोच है ना उसमें संभावनाएं बहुत है बहुत बड़ी संभावना है आप कुछ भी कर सकते हो आप अभी तक तो हम कुछ नहीं हुआ अभी तो हम शुरू ही नहीं हुए ठीक से अभी तो हम धक्का नहीं चल रहे हैं एक चीज को 50 बार चर्चा करनी पड़ती है। यह सारे
34:14 मॉडल चेंज होंगे। अभी सारे मॉडल चेंज करने चीजों को भूलना तो छोड़ो। मतलब याद भी दिलाने की जरूरत नहीं रहती। हम 10 चीजें खुद सोच लेते हैं। उस मॉडल में आना। अभी इस साल के तीन संकल्प है। उसको लेकर कौन क्या सोच रहा था? फिर से हैंडल कीजिए। आइए मोहित जी जो सर तीन संकल्प है सबसे पहले स्वास्थ्य
35:00 क्रांति मिशन दूसरा हरित क्रांति और तीसरा है 25 50 और 100% की ग्रोथ और जिसको लेके सर जब मैंने पहली बार आपको मैं भीलवाड़ा नहीं था स्टेज पर सुना था जब आपको सुन रहे थे उसी टाइम पे रोंगटे से खड़े हो रहे थे कि इतना बड़ा मिशन हमारी कंपनी का है तो इसमें हमारा कितना बड़ा रोल होना चाहिए और तब से ले जब यह बात मेरे समझ में आ गई और इस बात को जब फील्ड में बताते हैं तो बात में पावर बढ़ जाती है और रिजल्ट में लोग जो सुनते नहीं थे जो बड़े-बड़े लोग वो भी सुनने लगे और इसको और अच्छे से बताने का प्रयास करते हैं। तो इन संकल्प का सर बहुत बड़ा योग है और इससे रिजल्ट बहुत शानदार मिल रहे हैं। ये सर मैं कर रहा हूं। के
35:46 बहुत शानदार बेनिफिट मिल रहे हैं। जी सर और इस पर लगातार मैं अपनी पूरी टीम को और जो भी हमारे सीनियर उनको भी बताता हूं कि सर इस पर कार्य करिएगा और इसी से फिर यूएलपी में भी यह पूरी बात होती है। लास्ट में जो एक वीडियो आपका रहता है और लास्ट में सारे वहां पर बड़े-बड़े राजनेता और सारे लोग बताते हैं। तो ये बिल्कुल रियल में हो जाता है सर। फिर लोगों को विश्वास हो जाता। नेक्स्ट में वह आने का प्रयास करते हैं और नए लोगों को भी लाने का प्रयास करते हैं कि यह राष्ट्रीय स्तर का एक बहुत बड़ा अभियान है। वास्तव में इसमें सहयोग करना चाहिए। तो इस तरीके से सर बहुत ही बेहतरीन रिजल्ट मिल रहे हैं। जब से हमारे आरसीएम का ये तीन संकल्प हुए हैं तब से अपने आप में मैं खुद देख पा रहा हूं कि बहुत अद्भुत रिजल्ट मिल है।
36:33 सबकी सोच अलग-अलग होती है। उसमें कोई दिक्कत की बात नहीं है। चलो पर ज्यादातर साथी तो सोच ही नहीं रहे हैं। यह तो बहुत चिंता की बात है। केवल 10 साथी है जो सोच रहे हैं हर विषय पे। बाकी सब साथी सोच ही नहीं पा रहे। कुछ भी नहीं सोच पा रहे हैं। तो हारने के लिए हम पैदा हुए हैं इस धरती पर। देखिए किसी भी सही चीज की भी शुरुआत गलत से ही होती है। पहला स्टेप सही नहीं होता है। पहला स्टेप गलत होता है। तो हम गलत स्टेप तक के लिए तैयार नहीं है। अभी तक पहला स्टेप रखे तो सही गलत होगा तो
37:18 सही होगा। बड़ी बातें करने हो तो सारे तैयार है। इस देश में क्या परंपरा है? बड़ी बातें करने हो तो आप किसी को ही खड़ा कर दो। तो ऐसा बड़ा बड़ा बोलेगा जैसे कोई बस हमारे [नाक से की जाने वाली आवाज़] जैसे तो इस धरती पर कोई है ही नहीं। पर जब असली परीक्षा की बात आएगी तो सब घबरा जाते हैं। लखन जी किसी ऐसे साथी को बुलाओ जो उनको सोचने में क्या दिक्कत आ रही है? हैंड रेज नहीं है ना उनको बुलाओ। जब कुछ सोचेंगे नहीं तो करेंगे क्या? आइए सुनेश्वर मेहतो जी
38:06 कि अभी तो हम बहुत बड़ा ये सोच रहे थे कि आज से ही नहीं गुरुकुल जब से स्टार्ट हुआ है कि हम क्या देश को दे सकते हैं। हम देश के लिए हम सोच रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को कैसे स्वस्थ पहुंचाएं। ज्यादा से ज्यादा लोगों को हम कैसे आत्मनिर्भर बना ये हमारा नहीं जब से मैं गुरुकुल में आ रहा हूं ये सोच रहा हूं कोई भी कितना हमको ब्रेक लगा रहा है हम रुक नहीं रहे आइए एसपी पांडे जी एसपी पांडे वाराणसी जी जी सर नमस्कार [गला साफ़ करने की आवाज़]
38:51 सर आरसीएम तो 100 से ऊपर हो गई हम ये सोच रहे हैं कि हम उसमें कितना कर पा रहे हैं। एक मिनट एक मिनट दिनेश कुमार यादव हो गया। एक बार अनम्यूट करो। हां अन म्यूट करो। अन म्यूट भी नहीं कर रहे आप कीजिए राम कुमार भोरिया जी बिल्कुल गुरुदेव आपके लिए प्रणाम जो आप एक मिनट आप बोलिए मत कुछ भी मैंने केवल
39:38 अन म्यूट करने के लिए बोला है आप क्या सोच नहीं रहे या कितने दिन हुए गुरुकुल आते हुए बिल्कुल हम सोच रहे हैं कि हमारा कितने दिन हुए आप गुरुकुल में आते गुरुकुल में हम करीबन छ महीने हो चुके हैं गुरुकुल से जुड़े छ महीने में तो आप सोच रहे हैं लेकिन आप बोलना नहीं चाहते आपको डर लगता है कि कुछ गलत बोल देंगे डांट पड़ जाएगी ऐसा है क्या कुछ नहीं डर नहीं लगता गुरुदेव क्योंकि जो हमारी सोच है सुनना बहुत कला होती है और जो सभी की सुनेंगे तब आगे बोलेंगे तो हमारी जो सोच है हमारा देश दो चीजों से जूझ रहा है। एक तो बेरोजगारी से रोगी से
40:24 और हमारी जो सोच है कि ज्यादातर लोगों को इसके बारे में बताएं कि हमारा जो मिशन है वो दो चीजों पर ज्यादा काम कर रहा है। एक तो हमारा देश बीमार ज्यादा हो चुका है और बेरोजगारी है। कोई भी सरकार हमारे नौजवानों को नौकरी नहीं दे रही है। तो उस चलिए वो तो आप बहुत बढ़िया सोच रहे हैं। पर थोड़ा सा क्या होता है कि जब तक हम कोई जिम्मेदारी नहीं लेंगे और बचे हुए रहेंगे ना तो हम अपने आप के साथ नुकसान कर रहे हैं। अपना नुकसान कर रहे हैं। हम हम मुक्त रहना चाहते हैं। हम स्वतंत्र रहना चाहते हैं। हम फ्री रहना चाहते हैं।
41:10 और हम फ्री रहेंगे ना प्रोग्रेस नहीं करेंगे। हमको कहीं ना कहीं अपने आपको कमिटमेंट में आना पड़ता है। तो थोड़ा सा सक्रिय रहे आप गाइस आप बोलेंगे आप सोचेंगे आप बोल देंगे तो आपका मन फिर अपने आप को प्रेरित करेगा कि मैंने बोल दिया कुछ करना पड़ेगा। तो मैं सभी साथियों से आग्रह कर रहा हूं कि आपको सबको भाग लेना है इसमें। अभ्यास तो करना पड़ेगा बिना अभ्यास के। तो ऐसा हो गया कि हम तो खेल देखते ही पहले ही हार मान ली। मैं तो खेलने लायक ही नहीं हूं।
41:57 दिनेश कुमार यादव आप कितने दिन से आ रहे हो गुरु गोविंद? जी कितने दिन से गुरु? लगभग एक महीना हो गया सर। एक महीना हो गया। थोड़ा यहां से अपने को थोड़ा सीखना भी है। केवल ऐसे आके बैठ जाने से नहीं चलेगा। थोड़ा सीखना है तो थोड़ा बोलना भी है। नंबर आएगा नहीं आएगा पर आप थोड़ा सा बोलना शुरू कीजिएगा। तो मैं सभी से अनुरोध कर रहा हूं कि आप सभी भाग लेना शुरू कीजिए। कुछ भी बोलिए आप एक बार पहली बार बोल देंगे। कोई बात नहीं डिस्कशन हो जाएगा। गलत बोल देंगे सही हो जाएगा पर बोलना तो
42:44 पड़ेगा ना चलो मैं अब इजी सवाल दे देता हूं आपको आपको कठिन लगता है क्या सवाल दिया था मुझे सवाल भी भूल गया तीन संकल्प इस साल के जो है मैं संकल्प के नाम नहीं पूछ रहा हूं उन संकल्प को लेकर आपके मन में क्या-क्या विचार चलते हैं ये बताना आइए हैंड कीजिए सबको सबको एनरेज करने को वैसे भी देखिए आर्मी में अगर 10 लाख लोग भर्ती होते हैं तो लड़ने का मौका तो हजार 20 हजार को ही मिलता है। सबको थोड़ी मिलता है। आप एक बार सारे आइए देखो किसको मौका मिलता है या नहीं मिलता वो अलग बात है। घबराइए मत
43:34 अनीता सावंत को बुलाइए। आइए आइए जय आरसीएम सर मैं अनीता सावंत प्रॉपर महाराष्ट्र से महाराष्ट्र कोल्हापुर से बात कर रही हूं और जैसे आपने बताया कि ये स्वास्थ्य क्रांति दिन पर आपने क्या सोच रखा है तो मैं आपको ये बताना चाहती हूं सर कि हम बहुत ज्यादा तो स्कूल में जाकर स्वास्थ्य क्रांति को लेकर लोगों को अवेयरनेस आ लोगों के मन में अवेयरनेस लाकर लाने का काम कर रहे हैं सर और स्कूल में जाकर बच्चों के लिए और कल तो मुझे लगता है कि 200 महिला थी उनके
44:22 महिलाओं के लिए भी हमने काम बताया है। बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया जो भी कर रहे हैं। पर यहां पे थोड़ा सा आप थोड़ा बातचीत करते रहिए। नहीं करते तो हमें ऐसा लगता है कि हमने ऐसा क्या बुरा बोल दिया या हमसे क्या नाराजगी है तो कभी-कभी आपको सबको सामने आना है ना वो 10 जनों को यहां रख रखा है बोलने के लिए ऐसा थोड़ी है कि आप 10 जनों को बोल दिया एक एक लाइन में बोलेंगे सब बजरंग श्याम जी सर वर्ष 2026 का जो संकल्प है स्वास्थ स्वास्थ्य क्रांति के रूप में तो टीम में ज्यादा से ज्यादा सेहत के सितारे बनाना है
45:10 और सेहत बनाकर टीमें ज्यादा से ज्यादा इस मिशन का जो संदेश है घरघर तक पहुंचना है। दूसरा संकल्प है सर हर माह 100% 50% और 25% है। जो भी इसका जो हर महीना जो ग्रोथ हो इसके ऊपर काम करना है। और तीसरा संकल्प है आरपीएम अभियान को प्रेम पवित्रता भाव एकता भाव से करना है ना कि किसी प्रकार का मतलब ये भाव नहीं होना चाहिए सेवा स्वास्थ संस्कार भाव अपने अंदर हो ये मैसेज खुद को भी लेना है रोड मॉडल बनके भी मतलब यही बहुत बढ़िया [गला साफ़ करने की आवाज़] साथियों ये तो तीन संकल्प है काम भी कर
45:55 रहे हैं अब ये थोड़ी आज सोच को थोड़ा सा दायरा देना अभी हमें क्या सोचना है किस तरीके से सोचना है ये तीन संकल्प है ग्रोथ वाला है स्वास्थ्य क्रांति वाला है और पवित्र अभियान बनाने का है पहले तो अपने आप को बंदिश में लाना है कि इससे कम मेरे को सोचने का अधिकार ही नहीं है। जब मुझे ऊपर वाले का आशीर्वाद मिल रहा है तो मैं कम क्यों सोचूं? दूसरा सोचना है कि एक तरीके से पूरा नहीं होता तो तुरंत रुकना नहीं है। डेली ग्रोथ देखते हुए अगर पांच दिन में आपको लग जाता है कि नहीं हो रही उतनी तो छठे दिन बड़े उपाय डाल देना है। फिर
46:41 तीन दिन में रिजल्ट नहीं आया और बड़े डाल देना है। फिर नहीं आया और बड़े डाल देना है। रुकना नहीं है कभी। बड़े उपाय सोचिए। जो दूसरे नहीं सोचते उससे ज्यादा सोचिए। उनसे ज्यादा अच्छा करने की कोशिश कीजिए। विचारों को आंदोलित कीजिए। आंदोलित होते है ना उबाल जाता बड़े-बड़े विचार। आपने देखा होगा आरसीएम ने क्या-क्या सोच देखी कि नहीं देखी आप? यूएलपी क्विक दिया गुरुकुल एजुकेशन ने लगा कि उतना नहीं हो पा रहा जितना होना चाहिए। तो क्या किया अपन ने? क्या किया? सोचा बस और कुछ नहीं किया कि चलो एक बार
47:28 एक दिवस मना लेते हैं प्रैक्टिस का और उससे बड़ी शुरुआत करते हैं। हो गया ना सबका वो चीज सोच में ही तो आती है। सबसे पहले चलो वो भी हो गया। उसके बाद भी लगा कि अभी भी डेली पर आने में बहुत सारे साथी उतनी तरह से तैयार नहीं हो पाए। बिल्कुल और सोचो फिर सोचो थोड़ा और इसको प्रमोट करते हैं और बातचीत करते हैं। टीम को लगाते हैं थोड़ा सा साथियों उपाय तो निकलेगा निकल कर रहेगा। कोई भी विषय हो आज सोच में क्या देना है? केवल पर्टिकुलर विषय नहीं देना। हमें सोचने के सिस्टम को बदलना है। सोचने के
48:15 तरीके को बदलना है। हारना हमारी नियत नहीं है। हारना हमारी फितरत नहीं है। हारने के लिए दुनिया में लोग पैदा हुए होंगे। आरसी मौले पैदा हुए तो सिर्फ और सिर्फ जीतने के लिए पैदा हुए। ऐसे सोच लानी है। उपाय एक की जरूरत है। 100 करने पड़ेंगे तो भी जीतेंगे हम। हर ना हमें सिखाती है और हर हां हमें आगे बढ़ाती है। दोनों में लाभ है दोनों में लाभ है। कोई बोलता है कि ना कोई बोलता है कि मैं बुला नहीं पा रहा हूं। कोई बोलता है कि हमारे यहां कोई जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार नहीं हो रहे
49:01 हैं। तब आपको क्या सोचना है? मान लीजिए एक एग्जांपल लेते हैं कि आपका कोई स्टेशन है जहां आप सेवा केंद्र पर आप डेली यूएलपी क्लिक करना चाहते हैं। आपने सोच लिया करना ही करना है और आपको वहां से रिप्लाई आते हैं कि क्या करें? लोग ही नहीं आते तो आप क्या करोगे? मैं किसी को भी बुलाऊंगा ना क्योंकि आपको सोचना सबको पड़ेगा। एसपी पांडे वाराणसी जी गुरु बुलाने के लिए सर हर तरह के उपाय करेंगे उनको आकर्षित करेंगे कि किसी बहाने जो है वो यहां पे आए जैसे कोई गतिविधि
49:48 सेवा का करें या महिलाओं को लेकर के या मेडिकल कैंप जो भी हो सकता है यस बिल्कुल सही कह रहे हैं आप जरूरी नहीं देखिए साथियों अभी के अभी मैं जैसे ही पूछा आपको सारे उपाय अभी माइंड में आएंगे। मैं वो आपको नहीं कह रहा हूं। पर आपको एक सोचने का तरीका विकसित करना है। अभी आज अपना विषय नहीं है। आज अपना विषय है सोचने का तरीका। उपाय तो सो पड़े हुए है। हमने सोचा ही नहीं। हमने झट से मान लिया कि नहीं होता है। हम मतलब जो नहीं हो रहा है ना उसको लेकर ज्यादा सोचते हैं कि क्या करें? नहीं हो रहा है। क्या करें? नहीं हो रहा है। ऐसा नहीं सोचना। ऐसे सोचना कि नहीं हो रहा
50:33 इसका मतलब वो स्थिति हमें ये कह रही है कि तरीका बदलो भैया इस तरीके से नहीं हो हमारी कोई नहीं सुन रहा है इसका मतलब ये कह रहा है कि तुम तरीका बदलो भैया मैं तो सुन तो लूंगा लेकिन मैं तुमको ये सिखाना चाह रहा हूं कि तरीका बदलो तुम्हारे कहने से मैंने सुना मुझे कुछ वीडियो दिखाओ कोई रिजल्ट दिखाओ कोई पावरफुल बात करो तो ये चीजें हमें उसको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हमें वीडियो के द्वारा दिखाने के लिए प्रेरित करती है। हमें कुछ नया करने के लिए प्रेरित करती है। तो दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं। आरसीएम में तो सारे समाधान मौजूद है। हमने सोचने की परंपरा को थोड़ा सा विकसित करना है।
51:20 सब करेंगे आज। तो चलो अब सबको बारी बारी कि नहीं यार बिल्कुल मैं नए तरीके से सोचूंगा। आज के बाद इतना ही बोलना है सब फटाफट बुलाते जाइए पता नहीं। फिर आइए धन्यवाद सर जैसे सर आप इतने सोच रहे हैं सर आपके जैसे हमको चार गुना सोचना है सर बहुत कुछ करना है सर इस भारत के लिए और पूरे स्वास्थ्य क्रांति के लिए और नए हमारे पहचान बनाने के लिए सर बहुत-बहुत धन्यवाद सर रंजीत जी जनरली लखन जी नए साथियों को बुलाइए आप पीछे से थोड़े से जो बार-बार बोलते हैं वो आज थोड़ा सा एक बार हैंड ओवर कर दे क्योंकि टाइम कम जी सर थैंक यू गुरुदेव प्रणाम गुरुदेव जो बताए हैं यूएलपी रोज करेंगे घर में भरी
52:08 ग्रोथ करेंगे इस पे सर हम काम कर रहे हैं फील्ड में जो पहले नहीं जा रहे थे वहां भी जा रहे हैं हर एक पॉइंट को बना रहे हैं और वहां पे सर अच्छी तरह जो है अपना जो स्वास्थ सेवा संस्कार जो इसके ऊपर काम करते हैं। थैंक यू सर। थोड़ा साथियों सुन लीजिए। अभी विषय को सबको छोड़ दीजिए। आज का विषय सिर्फ इतना है कि आज के बाद हम बिल्कुल अपने सोचने के तरीके को बदलेंगे। यही लाइन बोलनी है। बिल्कुल बदल देंगे सोचने के तरीके को। इससे ज्यादा कुछ नहीं बोलना है। और जो रोज बोलते रहते हैं वो एक बार हैंड ओवर कर दीजिए। तो चलिए
52:54 ज्यादा लंबा नहीं बोलना आइए अनीता जी जी जय आरसीएम सर आज से मैंने जैसे गुरुदेव ने बताया उसके ऊपर मैं ज्यादा जैसे गुरुदेव कहते हैं उससे भी बहुत ज्यादा ज्यादा सोचने के संकल्प ले रही हूं सर थैंक सतीश कुमार जी आइए जी आज से बहुत बड़ा सोचने का संकल्प लेता हूं सर जय आइए अनिल जी
53:43 थोड़ा गति गति रखिए गति रखिए स्लोली जेपी यादव जी आज से सर मैं अलग सोचने का प्रयास कर रहा हूं और अच्छे से काम करने का प्रयास कर रहा हूं सर सिराज जी जी गुरुदेव आज से मैं भी नया कुछ सोचने का अलग सोचने का प्रयास करूंगा जी दीदी जी सर सत जी धन्यवाद सर आज से हम भी सर नया कुछ सोचने का प्रयास करेंगे ताकि एक नए भारत के निर्माण में अधिक से अधिक योगदान हो सके। धन बस भरा जी
54:28 हां जी रखिए बात आज से नया सोचने का निर्णय ले रहा हूं सर। हम तो पूरे विश्व की सुख शांति का डेली निवेदन करते हैं सर। स्वास्थ्य रक्षा स्वावलंबन नारी सशक्तिकरण नए भारत का निर्माण आर्थिक आजादी विश्व सुख शांति डेली दोनों मीटिंग सर निवेदन करता हूं धन्यवाद आपको भी करण जी हां जी सर जय आरसीएम सर मैंने आज से शुरू कर दिया कि मैं बहुत बड़ा सोचूंगी और सारे विषयों पर काम करूंगी। थैंक यू सर थैंक यू बिल्कुल जी प्रदीप कुमार आज से और ज्यादा बड़ा सोचेंगे सर
55:18 आइए करण जी डूंगा जी मैं भी आज से बहुत बड़ा सोचेंगे धन्यवाद आपके पास के जय सर मैं बहुत बड़ा सोच रही हूं सर और मैं काम स्टार्ट भी किया हूं सर मैं कर रही हूं थैंक यू सर विक्रम जी सर हम संकल्प करते हैं बड़ा सोचने के साथसाथ बड़ा करने का संकल्प सर करते हैं ताकि हम यूएलपी प्रोजेक्ट को बहुत बड़ा बना थैंक यू सर चलिए शुक्ला जी
56:05 सर सर जो मैं पहले नहीं सोचता था अब मतलब मैंने मैं संकल्प लेता हूं कि उस जिन चीजों पर नहीं काम कर कर रहा था अब उस उन चीजों पर मैं जरूर काम करूंगा सेवा और स्वास्थ्य पे ज्यादा फोकस करूंगा थैंक यू सर रतन जीत जी म्यूट कीजिए अन म्यूट कीजिए अन म्यूट बात कीजिए जल्दी जी विष्णु जी जी सर जय आरसीएम सर हम भी सोच रहे हैं कि बहुत बड़ा करेंगे और हमको आरसीएम के नाम से जाने लोग ऐसा सोच रहे हैं सर हरि ओम जी
56:52 सर आज सोचूंगा आज से बड़ा करूंगा डेली करूंगा सर पुष्पा दीदी योगेश जी सर आज से मैं अलग और बड़ा सोचो पुरुषोत्तम जी भरतनाथ जी अनम्यूट कीजिए सर चलिए शुक्ला जी जी सर मैं आज से अपनी सोच के दायरे को बढ़ाऊंगा सर और बड़ा सोचूंगा जिन जिन
57:37 चीजों को नहीं मैं कर रहा था उन चीजों को अब जरूर करूंगा स्वास्थ्य के ऊपर ज्यादा फोकस रहेगा सर शर्मा जी जी सर थैंक यू आज से मैं बड़ा सोचूंगा और बड़ा करने का प्रयास करता हूं डेली अपग्रेड करने थैंक यू अभी आइए अन म्यूट कीजिए मैं भेजा हूं आपको लिया हूं जी आज से बिल्कुल नया सोच और बड़ा सोच जैसा सर आदेश कर रहे हैं वैसा करूंगा धन्यवाद जी पूनम मौर्य जी जय आरसीएम सर सर हम ये सोच रहे हैं कि
58:23 हमारा मिशन है स्वास्थ्य शांति और पहले हां राजनाथ जी हां सर आज से मैं बहुत बड़ा सोचूंगा और नए भारत के निर्माण में अपना पूरा योगदान दूंगा सोच बहुत बड़ी रखूंगा और ऐसा भारत बनाऊंगा जिसमें प्रेम के सिवा और कुछ ना हो धन्यवाद सर लक्ष्मण जी हां लक्ष्मण जी मैं [गला साफ़ करने की आवाज़] पांच से बड़ा सोचूंगा और हमेशा ज्यादा से ज्यादा बड़ा सोचने की कोशिश करूंगा। आइए भूषण जी सर आज से सोचने को बिल्कुल बदल देंगे सर। धन्यवाद अति जी
59:09 जी बड़ा सोचना ही नहीं है करके भी दिखाना है सर। धन्यवाद देखिए जी हां अनम्यूट कीजिए। रिंकी जी आप म्यूट बात रखिए। थैंक यू सर जी चांस के लिए। सर हम एक सुझाव देना चाहते हैं। जैसे सरकारी कर्मचारी होते हैं, आर्मी के जवान होते हैं। अगर हमारे प्रोडक्ट जो हैं वहां पे जो
59:54 हिंदुस्तान लीवर का प्रोडक्ट दिया गया साबुन नहाने के लिए। अगर ऐसा कुछ किया जाए तो बहुत बड़ा बदलाव आएगा। रिंकी कुमारी जी जी आप सोचेंगे हर दिन आगे बढ़ेंगे। प्रयास जो हर दिन करते रहेंगे आर्यन पवन जी आई आर सर मेरा धर्म जीतने के लिए हुआ है। आज से मैं जितना शुरू करूंगा यही नेटवर्क विनोद कुमार जी
1:00:43 कुमार जी अन म्यूट कीजिए अमृत लाल मीणा जी लखन जी एक मिनट रुकिए आज से मैं नए तरीके से सोचूंगा और बड़ा सोचूंगा और उसको करने का प्रयास करूंगा। लखन जी एक मिनट आदरणीय डी कुमार जी हां आइए स्वागत थैंक यू सर प्रणाम सर सभी को जेआरसीएम देखिए गुरुकुल में तो मैं डेली जुड़ रहा हूं और जब से जुड़ रहा हूं बहुत अपने अंदर परिवर्तन महसूस कर रहा हो। क्या होता है साथियों कि जब हम कुछ भी करते हैं ना तो
1:01:30 हमें लगता है कि हम सही ट्रैक पर चल रहे हैं। लेकिन जब हम अपने से कामयाब और सफल लोगों के साथ उनके मार्गदर्शन में चलते हैं तब हमें एहसास होता है कि नहीं यार हम कुछ गलत कर रहे हैं। आदरणीय सर हम सबके बीच में रोज आते हैं। सर दिव्य हैं। सर के पास दिव्य शक्ति है और हम लोग बहुत भाग्यशाली हैं कि हम सबको रास्ता दिखाने वाले हम सबको मार्गदर्शन देने वाले इस सदी के महानायक मेरी नजर में सर महानायक हैं और इनसे बड़ा महानायक आज की डेट में इस धरती पर कोई नहीं है। तो हम सब बहुत भाग्यशाली हैं और आज मैं भी संकल्प ले रहा हूं कि आज से हर दिन मैं बिल्कुल अलग तरीके से सोचूंगा। बिल्कुल
1:02:16 नया सोचूंगा। बहुत-बहुत धन्यवाद। थैंक यू सर। बहुत बढ़िया। गुरुदेव और ले रहे हैं लोगों को। चलिए बहुत खुशी की बात है कि इतने सारे साथी आए बोलने के लिए हैंड रेज कर रखा है। तो साथियों आपकी [नाक से की जाने वाली आवाज़] कमी नहीं थी कि आप हैंड रेज नहीं करते। कमी मेरी थी कि मैंने आपको ठीक से इनवाइट नहीं किया। अगर मैं यह सोचता रहूं कि देखो कोई आते नहीं है। कोई बोलना नहीं चाहते हैं। यह नहीं था। सत्य ये नहीं था। सत्य ये था कि आप ये कह रहे हो कि आप सिखाने का तरीका
1:03:02 बदलिए। हर चीज का समाधान ऐसे ही ढूंढना है। डी कुमार जी मेरे लिए जो भी कह रहे थे वैसा उसमें कोई सत्य नहीं है। साथियों मैं बिल्कुल आपके जैसा ही नॉर्मल सामान्य इंसान हूं। पर मेरी कुछ आदत मैं आपको बता देता हूं। मैं परंपराओं में नहीं जीना चाहता हूं कभी भी। क्योंकि जब मुझे दिख रहा है कि परंपराएं समाज को कुछ अच्छा नहीं दे रही है। ये मान्यताएं अच्छा नहीं दे रही तो हमको उनका क्यों पालन करना? परंपराओं को तोड़िए। कुछ नया सोचिए। आरसीएम में आपने देखा होगा कि दूसरी डायरेक्ट सेलिंग या दूसरे व्यवसायों की जैसे आरसीएम कोई कदम नहीं उठाता। कोई ऐसी सोच नहीं रखता है क्योंकि जब वो सही है ही
1:03:47 नहीं तो हम उनका क्यों फॉलो करें क्यों उनके अनुसार चले बस अलग सोचना है अलग जीना हर चीज संभव है साथियों लेकिन अगर दुनिया के जैसे जिओगे दुनिया से विचार उठाओगे तो हम और कमजोर होते जाएंगे आप केवल आरसीएम के विचारों को अपने अंदर आने दीजिए हमें नया अवतार लेना है हम सब में बहुत सारी क्षमता है, बहुत सारी कैपेसिटी है। पर हमारे साथ त्रासदी ये है कि हम इस दुनिया के गलत माहौल में इतना घुस गए, इतना डूब गए। और दूसरी त्रासदी ये है कि हमारे यहां एक रूप शिक्षा आ नहीं पा रही अभी भी।
1:04:33 क्योंकि वो शिक्षा बाहर की बहुत ज्यादा आ जाती है। तो साथियों आप सब गुरुकुल में कैसे सबको ला सकते है ये एक बहुत आवश्यक कदम है। इसके लिए थोड़ा आप सोचिएगा। आप उपाय निकालिए। जिस तरीके से नहीं हुआ है उसी के पीछे मत पड़े रहिए। नया उपाय निकालिए और अपनी सोच के दायरों को तोड़ दीजिए। सीमाओं को तोड़ दीजिए। हम वो कर सकते हैं जो इस धरती पर कोई नहीं कर सकता। इस चीज को याद रखिए। आप खूब चिंतन कीजिए। बैठकर मनन कीजिए दो मिनट। क्या आरसीएम में जो हो सकता है वो
1:05:19 तो कोई कर ही नहीं। ढूंढिए कि कोई और ऐसा कर सकता है क्या? तो आपको कोई मिल नहीं पाएगा। अलग-अलग विषयों पर अलग-अलग काम करने वाले मिल जाएंगे लेकिन एक संपूर्ण समाधान जो होना चाहिए वह आपको नहीं मिल पाएगा। तो ऐसे बहुत सारी बातें हैं सोचने की। तो आज हम सब क्या करेंगे? सोचने का दायरा बदलेंगे। तरीका बदलेंगे और ऐसा सोचेंगे जो आम आदमी नहीं सोच पाता है। ऐसा कुछ करेंगे जो आम आदमी नहीं कर पाता है। हमें विशेष करना है। विशेष बनना है और मार्च तो चल ही रहा है। आपके सामने एक चुनौती सामने आने वाली है कि अप्रैल में मार्च से कई
1:06:04 गुना बड़ा करना। तब हम मानेंगे कि आप सही आरसीएम करने लग गए। और जब तक ऐसा नहीं करते हैं इसका मतलब आपने अभी पुराना पैटर्न छोड़ा नहीं है। आप अभी सोचने लायक बने नहीं हो। आपकी सोच अभी उतनी खुल नहीं पाई है। समाधान तो है साथियों। सोचने में आना बाकी है। सोच में आना बाकी है। समाधान नहीं है ऐसा नहीं है। मार्च का डबल अप्रैल में करने का आराम से रास्ते हैं। लेकिन मैं सोचूंगा वो आपके काम नहीं आएंगे उतने। क्योंकि मैं सोचूंगा फिर आप में ट्रांसफर करूंगा उसमें 10 साल लग जाएंगे पांच साल लग जाएंगे आप खुद सोचेंगे तो तुरंत काम में आने लग जाएगी क्योंकि आप
1:06:50 अभी अच्छी तरह से जानते हैं कि मैंने बहुत सारी चीजें सोची लेकिन आपके भीतर ट्रांसफर होने में कितना टाइम लग रहा है लग रहा है ना क्योंकि आपका तर्क अलग बोल रहा है मेरा तर्क अलग बोल रहा है तो मेरी सोच एक सीमा तक आपके काम आएगी आपकी सोच सोच आपके जीवन में सबसे ज्यादा आपके काम आएगी। आपको ये साबित करके दिखाना है कि इस धरती पर ऐसी ऐसी चीजें जो अब तक कोई नहीं कर पाए हैं वो हम करके दिखाएंगे। सिर्फ हमारी सोच को बदलना है। हमारे भीतर सारे रास्ते मौजूद है। सब तो अप्रैल में आपको बहुत बड़ा करके दिखाना है। ये आपकी परीक्षा है और उसके लिए अभी
1:07:37 से सोचना शुरू कर दीजिए। अभी जो बात करते हैं जो अभी दो दिन में आप जो भी गतिविधियां करते हैं वो सब ऐसे कीजिए जो अभी के परिणामों के साथ अप्रैल में और बड़े परिणाम दे। ऐसे सोच जितना सोचते जाएंगे ना कि सोचने का खूब अभ्यास कीजिए साथियों ने बहुत सारे अभ्यास तो कर लिए हमने लेकिन सोचने का अभ्यास नहीं किया युद्ध के अभ्यास कर लिए पूरी दुनिया ने युद्ध के अभ्यास किए पूरी दुनिया लड़ने में लगी हुई है लेकिन उस अच्छा सोचने का अभ्यास करते हो तो शायद दुनिया स्वर्ग भी बन सकती है बहुत-बत धन्यवाद बहुत-बत धन्यवाद और क्षमा चाहता हूं बहुत सारे लोगों को नहीं ले पाए और ऐसे ही
1:08:23 माहौल बनाना है। सभी पार्टिसिपेंट करेंगे और स्पेशली मैं डी कुमार सर को धन्यवाद करता हूं। सर आप सबके सहयोग की जरूरत है और सब मिलके हम इसको अभियान को बहुत ऊंचाई तक लेकर बहुत-बत धन्यवाद गुरुदेव ओवर कर लो गुरुदेव।