शुगर से पीड़ित व्यक्ति मेरी यह बात जरूर सुन लेना# premanand ji maharaj parvachan 🙏

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो स्वस्थ जीवन शैली के महत्व पर प्रकाश डालता है, जिसमें खान-पान की आदतों और मानसिक स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसमें बताया गया है कि कैसे अनुचित भोजन और नकारात्मक विचार स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकते हैं, जबकि सावधानीपूर्वक भोजन और सकारात्मक चिंतन जीवन को बेहतर बना सकते हैं।

  • मीठे का सेवन सीमित करने और सात्विक भोजन को प्राथमिकता देने का महत्व।
  • भोजन करते समय मन की स्थिति का प्रभाव और नकारात्मक विचारों से बचने की सलाह।
  • भूख नियंत्रण और कभी-कभी उपवास के अभ्यास का महत्व।

परिचय: स्वस्थ जीवन शैली का महत्व

वीडियो की शुरुआत में, यह बताया गया है कि सही जीवनशैली अपनाने से शुगर जैसी बीमारियों से बचा जा सकता है, जबकि असावधानी से जीवन नष्ट हो सकता है। शुगर, लीवर और किडनी जैसे अंगों पर बुरा प्रभाव डालती है और शरीर को खोखला कर देती है। इसलिए, अत्यधिक मीठा खाने से बचना चाहिए, क्योंकि यह रजोगुण को बढ़ाता है, जबकि थोड़ा मीठा खाना सतोगुण होता है।

भोजन का उद्देश्य और प्रकार

शरीर की रक्षा के लिए भोजन किया जाना चाहिए, न कि केवल स्वाद के लिए। अत्यधिक गर्म भोजन, भले ही वह सात्विक हो, तमोगुणी हो जाता है और उससे बचना चाहिए। समोसा, पूरी, कचौड़ी, हलवा, गुलाब जामुन, लड्डू, जलेबी और इमरती जैसे खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए। लाल मिर्च, खटाई, ज्यादा मिठाई और बासी भोजन भी हानिकारक होते हैं।

भूख नियंत्रण और उपवास का अभ्यास

भूख को नियंत्रित करने का अभ्यास करना चाहिए और कभी-कभी उपवास भी करना चाहिए। एक-दो दिन बिना कुछ खाए भजन करने का अभ्यास रखना चाहिए। भोजन मिले या न मिले, भजन का अभ्यास करते रहना चाहिए।

भोजन करते समय सावधानी

भोजन करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उस समय के विचार 24 घंटे के लिए आहार के साथ जाते हैं। इसलिए, गुस्सा, काम-वासना या गंदे विचारों से बचना चाहिए। भोजन करते समय भगवान का चिंतन करना चाहिए या नाम जप करते हुए आराम से भोजन करना चाहिए।

आहार के नियम

आहार के लिए नियम हैं कि 24 घंटे में एक या दो बार ही भोजन करना चाहिए। बार-बार भोजन करना साधक का लक्षण नहीं है। सदैव पवित्र विचार करते हुए और नाम जप करते हुए भोजन करना चाहिए।

क्रोध से बचें

भोजन करते समय क्रोध नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे भोजन विष बन जाता है और शरीर में विकृति पैदा होती है। क्रोध से आसो भाव और रक्त दोनों दूषित हो जाते हैं। इसलिए, भोजन करते समय कभी भी किसी से क्रोध नहीं करना चाहिए।

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