संक्षिप्त सारांश
यह वीडियो अल्बर्ट आइंस्टीन के जीवन, उनकी मृत्यु के बाद उनके दिमाग के साथ क्या हुआ, और उनके दिमाग की विशिष्टता के बारे में जानकारी प्रदान करता है। इसमें गैलीलियो गैलीली के शरीर के अंगों के संरक्षण का भी उल्लेख है।
- आइंस्टीन को बचपन में बोलने में कठिनाई होती थी और स्कूल में उन्हें गणित और विज्ञान को छोड़कर अन्य विषयों में कठिनाई होती थी।
- उनकी मृत्यु के बाद, पैथोलॉजिस्ट डॉ. थॉमस हार्वे ने उनके परिवार की अनुमति के बिना उनके दिमाग को निकाल लिया।
- आइंस्टीन के दिमाग का वजन एक सामान्य इंसान के दिमाग से थोड़ा कम था, लेकिन कुछ हिस्सों में यह अलग था।
अल्बर्ट आइंस्टीन, जिन्हें दुनिया के महान वैज्ञानिकों में गिना जाता है, को जन्म से ही कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका सिर अन्य बच्चों की तुलना में बड़ा था और उन्हें बोलने में भी समस्या होती थी। उन्होंने चार साल की उम्र के बाद बोलना शुरू किया, लेकिन वे भी तोतला कर बोलते थे। स्कूल के समय में वे शांत स्वभाव के थे, जिसके कारण उनके सहपाठी उन्हें तंग करते थे। आइंस्टीन के शिक्षक भी उन्हें पसंद नहीं करते थे क्योंकि वे गणित और विज्ञान को छोड़कर अन्य विषयों में फेल हो जाते थे। बड़े होने के बाद भी उनकी अजीब आदतें नहीं बदलीं। उन्हें अपना टेलीफोन नंबर तक याद नहीं रहता था और वे अपने जूतों का लेफ्ट साइड खुद नहीं बांध पाते थे। उन्हें बाल कटवाना भी पसंद नहीं था।
18 अप्रैल 1955 को आइंस्टीन की मृत्यु के बाद, पैथोलॉजिस्ट डॉ. थॉमस हार्वे को उनके शरीर की जांच के लिए बुलाया गया। हार्वे ने आइंस्टीन के परिवार की अनुमति के बिना उनके दिमाग को निकाल लिया और वहां से फरार हो गए। वे आइंस्टीन के दिमाग पर रिसर्च करके यह जानना चाहते थे कि वे आम लोगों से अलग कैसे हैं। उस समय उन्हें आइंस्टीन के दिमाग को रिसर्च में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिली थी, इसलिए उन्होंने दिमाग को एक जार में रख दिया।
डॉ. थॉमस हार्वे ने आइंस्टीन के परिवार की अनुमति के बिना उनके दिमाग को निकाल लिया क्योंकि वह उस पर रिसर्च करना चाहते थे। वह जानना चाहते थे कि आइंस्टीन का दिमाग आम लोगों से अलग कैसे है और विज्ञान को कैसे फायदा पहुंचा सकता है।
20 साल बाद, अल्बर्ट आइंस्टीन के बेटे की अनुमति पर डॉ. हार्वे ने दिमाग पर रिसर्च करना शुरू किया। उन्होंने पाया कि आइंस्टीन के दिमाग का वजन 1230 ग्राम था, जो कि एक आम इंसान के दिमाग से थोड़ा छोटा था। फिर उन्होंने आइंस्टीन के दिमाग को 240 टुकड़ों में बांट दिया और उन्हें दुनिया के फेमस रिसर्चर्स को भेज दिया। कुछ रिसर्च में यह सामने आया कि आइंस्टीन के दिमाग का सेरेब्रल कॉर्टेक्स नाम का हिस्सा औरों से अलग था। सेरेब्रल कॉर्टेक्स दिमाग का वह हिस्सा होता है जो कि दिमाग के कॉम्प्लिकेटेड प्रोसेस के लिए जिम्मेदार होता है, जैसे कि सोचना, सही या गलत का निर्णय करना और एडवांस इमेजिनेशन। हालांकि, सभी रिसर्च के बाद भी कोई ऐसा रिजल्ट सामने नहीं आया जो साइंस की मदद कर सके। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि टेक्नोलॉजी बढ़ने के बाद उन्हें कोई पॉजिटिव रिजल्ट मिलेगा। आइंस्टीन के दिमाग के कुछ हिस्से फिलाडेल्फिया के मोटर म्यूजियम एंड हिस्टॉरिकल मेडिकल लाइब्रेरी में देखे जा सकते हैं।
अल्बर्ट आइंस्टीन ही एकमात्र ऐसे वैज्ञानिक नहीं हैं जिनके शरीर का अंग सुरक्षित रखा गया है। इटली के मशहूर वैज्ञानिक गैलीलियो गैलीली की उंगली, अंगूठा और रीढ़ की हड्डी इटली के फ्लोरेंस शहर में एक म्यूजियम में रखी हुई है। गैलीलियो गैलीली ने दूरबीन का आविष्कार किया था।
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Transcript
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0:00 हैं दोस्तों जिस व्यक्ति ने कभी गलती नहीं कि उसने कभी कुछ नया करने की कोशिश भी नहीं की और यह कहना था दुनिया के सबसे महान साइंटिस्ट में गिने जाने वाले अल्बर्ट आइंस्टीन का वैसे तो अल्बर्ट आइंस्टीन या किसी पहचान के मोहताज नहीं है लेकिन फिर भी मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि आइंस्टीन वहीं हैं यह जन्म से ही बहुत सारे परेशानियों का सामना करना पड़ा था क्योंकि जब वह पैदा हुए थे तब उनके स्तर का साइज और बच्चों के मुकाबले काफी बड़ा था इसके अलावा उन्हें शुरू से ही बोलने में समस्या होती थी यहां तक कि आम बच्चों से भी अलग उन्होंने चार साल के बाद से बोलना शुरू किया था लेकिन चार साल के बाद वह बोल तो लेते थे लेकिन वह भी तोतला कर और यह प्रॉब्लम खत्म हुई नौ साल की उम्र में जाकर साथ इस स्कूल के समय काफी
0:45 शांत स्वभाव के होने की वजह से उनके क्लासमेट भी उन्हें बहुत ही ज्यादा तंग करते थे यहां तक कि आइंस्टीन के टीचर्स भी उन्हें बिल्कुल भी नहीं मानते क्योंकि वह मैथ और साइंस को छोड़कर सभी सब्जेक्ट में फेल हो जाते थे कि दोस्तों आइंस्टीन की ऐसी अजीब आदतें बड़े होने के बाद भी खत्म नहीं हुई क्योंकि साइंस के कई सारे रिसर्च को बड़ी आसानी से अंजाम देने वाले आइंस्टीन को अपना खुद का नंबर तक याद नहीं रहता था और दोस्तों ऐसे एक बार की घटना बहुत ही फेमस है क्या स्पंज अपने ऑफिस में काम कर रहे थे तब उनके किसी कॉलेज ने उनका टेलीफोन नंबर मांगा और यह बात सुनकर उन्हें अपने पॉकेट से डायरी निकाली और फिर उसने अपना नंबर खोजने लगी हालांकि यह देखकर उनके करीबियों से पूछा कि आपको अपना नंबर याद
1:31 नहीं है तो इसका जवाब आइंस्टीन ने यह कह कर दिया कि जो चीज मैं अपनी डायरी में खोज कर आपको बता सकता हूं उसे याद करने की क्या जरूरत और दोस्तों कहा तो यह भी जाता है कि बड़े होने के बाद भी अपने जूतों का लेफ्ट साइड सीन खुद नहीं पाते थे और उन्हें अपने बाल कटवाने में बिल्कुल पसंद नहीं थी जिसकी वजह से आप उन्हें बड़े-बड़े बालों में देख सकते हैं लेकिन दोस्तों इसी तरह की अजीबोगरीब आदतें वाले लड़के ने ही थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी के तरह यह बहुत सारे ऐसे खोज किए इसने की पूरी दुनिया को ही बदलकर रख दिया और इसी वजह से ही लोग जानना चाहते हैं कि आखिर आइंस्टीन के ब्रेन में ऐसा क्या था जो कि एक आम इंसान के दिमाग में नहीं होता है और फिर साइंस के कई सारे कॉम्प्लिकेशंस को सॉल्व करने के बाद 18 अप्रैल 1955 को ज्वाइन स्क्रीन की मृत्यु
2:18 हुई तब उनके परिवार वालों ने पैथालॉजिस्ट डॉ थॉमस और वे को आईपीएल के डेड बॉडी की जांच के लिए बुलाया लेकिन दोस्तों थॉमस हवेली जांच करते समय आइंस्टीन के परिवार की अनुमति के बिना ही उनके दिमाग को शरीर से निकाल लिया और फिर वहां से फरार हो गए दरअसल थॉमस और वे अल्बर्ट आइंस्टीन के दिमाग पर रिसर्च करते हुए यह जानना चाहते थे कि आखिर व आम लोगों से अलग जैसे हैं ताकि वह ऐसी चीजों को भी जानना चाहते थे कि साइंस और साइंटिस्ट दोनों को ही फायदा पहुंचा सके हालांकि उन्हें उस समय आइंस्टीन के दिमाग को रिसर्च में इस्तेमाल करने के लिए परमिशन नहीं मिली और इसीलिए थॉमस ने दिमाग को एक जार में रख कर किसी बेस रूपा दिया अलग दोस्तों 20 साल के बाद जाकर अल्बर्ट आइंस्टीन के बेटे अल्बर्ट
3:05 आइंस्टीन के अनुमति पर डॉक्टर हार्वे ने उस रखे हुए दिमाग के ऊपर रिसर्च करना शुरू किया और फिर जब उन्होंने आइंस्टीन के दिमाग का वजन किया तब यहां पाया कि उनका दिमाग 1234 ग्राम का था जो कि एक आम इंसान के दिमाग से थोड़ा सा छोटा था क्योंकि आम तौर पर इंसान का दिमाग 1314 100 ग्राम के बीच में होता है और फिर रिसर्च प्रयोग करते समय थॉमस हार्वे ने आइंस्टीन के ब्रेन को 240 टुकड़ों में बांट दिया और उम्र टुकड़ों को उन्होंने पूरी दुनिया के फेमस फेस में भी रिसर्च के लिए भेज दिया और फिर दोस्तों कुछ लोगों के रिसर्च में यह सामने आया कि आइंस्टीन के दिमाग का सेरेब्रल कॉर्टेक्स नाम का एक हिस्सा औरों से अलग था दरअसल सेरेब्रल कॉर्टेक्स दिमाग का वह हिस्सा होता है जो कि दिमाग के ही
3:51 सबसे कॉम्प्लिकेटेड प्रोसेस के लिए जिम्मेदार होता है जैसे कि कुछ सोचना गलत या फिर सही का निर्णय करना और एडवांस इमेजिनेशन ही बहुत कुछ साथी इन सभी बातों के अलावा भी अलग-अलग डॉक्टर्स साइंटिस्ट्स ने कुछ और भी बातों को अपने रिपोर्ट में बताया जो कि मेडिकल लैंग्वेज में होने की वजह से ना तो मैं खुद अच्छे से समझ सकता हूं और ना ही आपको बता सकता हूं लेकिन कुल मिला जुलाकर ताकि सारे रिसर्च के बाद से आज तक कोई भी ऐसा रिजल्ट सामने नहीं आया क्योंकि साइंस की मदद कर सकता है हालांकि वैज्ञानिकों को यह उम्मीद है कि टेक्नोलॉजी पढ़ने के बाद से उनके हाथ में जरूर ही कोई पॉजिटिव रिजल्ट होंगे हालांकि अगर आप भी आइंस्टीन के करेंगे इस तेल को देखना चाहते हैं तो फिर फिलाडेल्फिया के मोटर म्यूजियम एंड हिस्टॉरिकल मेडिकल
4:38 लाइब्रेरी में देख सकते हैं और दोस्तों अल्बर्ट आइंस्टीन ही सिर्फ ऐसे वैज्ञानिक नहीं है जिसके शरीर का अंग अभी भी सुरक्षित रखा गया है बल्कि उनके अलावा इटली के मशहूर वैज्ञानिक गैलीलियो गैलीली का भी उंगली अंगूठा और रीढ़ की हड्डी इटली के फ्लोरेंस शहर में एक म्यूजियम में रखी हुई है दरअसल गैलीलियो गैलीलिी नहीं दूरबीन का आविष्कार किया हैं तो आज के इस वीडियो में तो बस इतना ही था लेकिन इसी तरह की और भी वीडियोस देखने के लिए आप लाइव इन लाइफ हैक्स को जरूर ही सब्सक्राइब करें साथ ही बैल आइकन को भी दबाना ना भूलिएगा उम्मीद करते हैं कि यह वीडियो आपको जरूर ही पसंद आई होगी आपका बहुमूल्य समय देने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद है
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