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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो टैली में लेजर ग्रुप्स के बारे में है, जो एकाउंटिंग के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसमें विभिन्न प्रकार के लेजर ग्रुप्स जैसे बैंक अकाउंट, कैश इन हैंड, ड्यूटी एंड टैक्सेस, फिक्स्ड एसेट्स, इन्वेस्टमेंट, इनडायरेक्ट एक्सपेंस, डायरेक्ट एक्सपेंस, लोन इन एडवांस एसेट्स, सिक्योर्ड लोन, अनसिक्योर्ड लोन, लोन लायबिलिटीज, सेल अकाउंट, परचेस अकाउंट, सरी डेटर्स, सरी क्रेडिटर्स, डायरेक्ट इनकम, इनडायरेक्ट इनकम, कैपिटल अकाउंट, प्रोविजन, रिजर्व एंड सरप्लस, ब्रांच डिवीजन, मिक्स एक्सपेंस एसेट्स, करंट एसेट्स, करंट लायबिलिटीज और स्टॉक इन हैंड शामिल हैं। प्रत्येक ग्रुप का उपयोग और उदाहरणों के साथ समझाया गया है।

  • विभिन्न लेजर ग्रुप्स की जानकारी
  • प्रत्येक ग्रुप का उपयोग और महत्व
  • एकाउंटिंग में लेजर ग्रुप्स का महत्व

बैंक अकाउंट ग्रुप

बैंक अकाउंट ग्रुप में उन खातों को रखा जाता है जिनमें पैसे का लेनदेन होता है, जैसे जमा करना और निकालना। उदाहरण के लिए, बैंक में पैसा जमा करना या बैंक से पैसा निकालना, इन दोनों को बैंक अकाउंट के अंडर में रखा जाता है।

बैंक ओडी अकाउंट ग्रुप

बैंक ओडी (ओवरड्राफ्ट) अकाउंट ग्रुप में बैंक ओडी अकाउंट, बैंक ओसीसी (ओपन कैश क्रेडिट) अकाउंट और क्रेडिट कार्ड जैसे लेजर रखे जाते हैं। यह ग्रुप उन खातों के लिए है जिनमें ओवरड्राफ्ट की सुविधा होती है।

कैश इन हैंड

कैश इन हैंड ग्रुप में केवल कैश का लेजर बनता है। टैली में कैश का लेजर पहले से बना होता है, इसलिए इसे बनाने की आवश्यकता नहीं होती। यह लेजर कैश अकाउंट के नाम से रहता है और इसे एक ही बार बनाना होता है।

डिपॉजिट एसेट

डिपॉजिट एसेट वह संपत्ति है जो कहीं जमा है और हमें वह कुछ समय बाद मिलनी है। जैसे सिक्योरिटी के लिए पैसा जमा करवाना या सिक्योरिटी डिपॉजिट फॉर रेंट। इसे डिपॉजिट एसेट के अंडर में रखते हैं।

ड्यूटी एंड टैक्सेस

ड्यूटी एंड टैक्सेस ग्रुप में सभी प्रकार के टैक्स के लेजर रखे जाते हैं, जैसे जीएसटी (GST), टीडीएस (TDS) और सेस (Cess)। ये सभी टैक्स होते हैं, इसलिए इन्हें ड्यूटी एंड टैक्सेस के अंडर में रखा जाता है।

फिक्स्ड एसेट्स

फिक्स्ड एसेट्स का मतलब है स्थाई संपत्ति। यह वह संपत्ति है जो हम अपने काम के लिए खरीदते हैं और वह बेचने के लिए नहीं होती। जैसे मशीनरी आइटम्स और ऑफिस में होने वाले चेयर, जिन्हें स्थाई रूप से रखने के लिए खरीदा जाता है।

इन्वेस्टमेंट

इन्वेस्टमेंट का मतलब है निवेश। इस ग्रुप में अपने प्रॉफिट के लिए इन्वेस्टमेंट करते हैं। जैसे म्यूच्यूअल फंड, शेयर बाजार, एफडी (फिक्स्ड डिपॉजिट) और आरडी (RD)। यह निवेश कहलाता है जो हम अपने बिजनेस से रिलेटिव करते हैं।

इनडायरेक्ट एक्सपेंस

इनडायरेक्ट एक्सपेंस का मतलब है अप्रत्यक्ष खर्चे। ये वे सभी खर्चे हैं जो बिजनेस को चलाने के लिए किए जाते हैं। ऑफिस के सारे खर्चे इनडायरेक्ट एक्सपेंस ग्रुप में आते हैं। जैसे स्टाफ सैलरी, रेंट (किराया), इलेक्ट्रिसिटी बिल और एडवर्टाइजमेंट।

डायरेक्ट एक्सपेंस

डायरेक्ट एक्सपेंस का मतलब है प्रत्यक्ष खर्चे। ये वे सभी खर्चे हैं जो मुख्य बिजनेस से जुड़े होते हैं या वे खर्चे जो बिजनेस को चलाने के लिए किए जाते हैं, जिनके खराब होने से आपका मुख्य काम रुक जाए। जैसे कोई सामान मंगवाना है और गाड़ी किराया तुरंत देना होता है।

लोन इन एडवांस एसेट्स

लोन इन एडवांस एसेट्स ग्रुप में ऐसा लेजर बनता है जहां हम दूसरे को लोन या एडवांस के रूप में पैसा देते हैं। जैसे एडवांस में किसी को पेमेंट कर दिए, लोन दे रहे हैं या फिर एडवांस में कोई इनकम टैक्स, जीएसटी या टीडीएस भर रहे हैं।

सिक्योर्ड लोन

सिक्योर्ड लोन में ऐसा लेजर बनता है जहां हम दूसरे से लोन लेते हैं और उस लोन के बदले कुछ सिक्योरिटी रहती है। जैसे बैंक लोन, प्रॉपर्टी लोन, गोल्ड लोन और होम लोन। इन सब में कुछ सिक्योरिटी नियम रहते हैं जिन्हें फॉलो करना होता है।

अनसिक्योर्ड लोन

अनसिक्योर्ड लोन ग्रुप में ऐसा लेजर बनता है जहां हम दूसरे से लोन लेते हैं और उस लोन के बदले कुछ भी सिक्योरिटी नहीं देना होता है। जैसे पर्सनल लोन, जिसमें कुछ नियम नहीं होते।

लोन लायबिलिटीज

लोन लायबिलिटीज का मतलब दायित्व होता है। इस ग्रुप में कोई भी बैंक से लिया हुआ लोन का लेजर बना सकते हैं। कोई भी बैंक से लोन लेते हैं तो उसको हम लोग इसके अंडर में रख सकते हैं।

सेल अकाउंट

सेल अकाउंट में ऐसा लेजर बनता है जहां हम सेल से रिलेटिव काम करते हैं। जैसे कोई सामान बेचने वाला काम कर रहा है तो हम लोग सेल अकाउंट के अंडर में रखते हैं। जैसे सेल अकाउंट, सीमेंट सेल अकाउंट, इंटरस्टेट सेल अकाउंट या फिर अपने ही स्टेट में आप सेल वगैरह कर रहे हो।

परचेस अकाउंट

परचेस अकाउंट में ऐसा लेजर बनता है जहां हम परचेस से रिलेटेड काम करते हैं। जैसे हम सब कुछ सामानवान खरीदी कर रहे हैं तो इससे संबंधित में हम लोग परचेस अकाउंट रखते हैं। जैसे परचेस अकाउंट, सीमेंट परचेस अकाउंट, इंटरस्टेट परचेस अकाउंट या फिर अपना सेम स्टेट परचेस अकाउंट भी बोल सकते हैं।

संड्री डेबिटर

संड्री डेबिटर का मतलब देनदार होता है। इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनता है जहां किसी ने हमसे उधार में माल खरीदा हो और उसके बदले में हमें पैसा देना होता है। मतलब हमसे कोई व्यक्ति दूसरा है जो हमसे उधार में सामान खरीदा हो।

संड्री क्रेडिटर

संड्री क्रेडिटर का मतलब लेनदार होता है। इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनता है जहां किसी ने हमसे उधार में माल खरीदा हो और उसके बदले हमें उसको पैसा देना होता है। जैसे मैं किसी व्यक्ति से उधार में सामान खरीद कर लाता हूं तो मेरे को पैसा देना होता है।

डायरेक्ट इनकम

डायरेक्ट इनकम का मतलब होता है प्रत्यक्ष आय। इस ग्रुप में ऐसा लेज़र बनते हैं जहां हमें मेन बिज़नेस से इनकम होती है। जो मेरा मेन बिज़नेस होता है उससे जो पैसा मिल रहा हो उसको हम लोग डायरेक्ट इनकम करके बोलते हैं।

इनडायरेक्ट इनकम

इनडायरेक्ट इनकम का मतलब होता है अप्रत्यक्ष आय। इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां बिज़नेस के अलावा किसी दूसरे सोर्सेस से इनकम होती है। जैसे कहीं से ब्याज मिल गया, इंटरेस्ट रिसीव, कहीं से कमीशन मिल गया या फिर डिस्काउंट मिल गया।

कैपिटल अकाउंट

कैपिटल अकाउंट का मतलब हिंदी में पूंजी होता है। इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां आप अपना बिजनेस को करने के लिए खुद का पैसा लगाते हैं। जो खुद का पैसा होता है उसको हम लोग पूंजी बोलते हैं।

प्रोविजन

प्रोविजन इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां हमें अपने बिजनेस में होने वाले लॉस का पहले से अनुमान लगना या डूबने वाले पैसे के बारे में पहले से अनुमान लगाना होता है।

रिर्जवस एंड सरप्लस

रिर्जवस एंड सरप्लस इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां बिजनेस को और आगे बढ़ाने के लिए कमाया हुआ संपत्ति को बचाकर रखना। बिजनेस को और आगे बढ़ाने के लिए या बिजनेस से जो भी प्रॉफिट हो, उसे आधा बचाकर रखना।

ब्रांच डिवीजन

ब्रांच डिवीजन इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां आपके बिजनेस में अलग-अलग ब्रांच हो। वहां लेजर का यूज किया जाता है।

मिक्स एक्सपेंस एसेट्स

मिक्स एक्सपेंस एसेट्स ऐसे खर्च बाद में हो सकते हैं। अभी हुआ नहीं है या ऐसे खर्च ऐसे सभी खर्च बाद में हमें देने पड़ सकते हैं।

करंट एसेट्स

करंट एसेट्स इस ग्रुप में ऐसे लेजर बनाए जाते हैं जहां संपत्ति कभी बढ़ती या कभी घटती रहती है।

करंट लायबिलिटीज

करंट लायबिलिटीज इस ग्रुप में ऐसे लेजर बनाए जाते हैं जहां हम किसी से कुछ लेते हैं। वह हमें पैसा देने होते हैं।

स्टॉक इन हैंड

स्टॉक इन हैंड इस ग्रुप में ऐसे लेजर बनाए जाते हैं जहां हमारे गोडाउन में जितना भी स्टॉक रखा हुआ है उसके लिए स्टॉक इन हैंड लेजर बनाते हैं।

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Transcript

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0:01 नमस्कार दोस्तों, आज हम देखेंगे लेजर में जो बनने वाला ग्रुप रहता है या फिर डालने वाला ग्रुप रहता है, उसके बारे में पढ़ाई करेंगे कि इसका मतलब क्या होता है? इसके बारे में पूरा हम लोग ए टू जेड इसका पढ़ेंगे कि जब भी हम लेजर नेम डालते हैं, तो उसका अंडर में यहां पर बहुत सारा कन्फ़्यूज़न रहता है कि इसमें किस ग्रुप के अंडर में हम लोग उस लेजर नेम को रखना रहता है। तो, उसी के बारे में हम लोग आज पढ़ाई करेंगे। तो, चलिए दोस्तों, अब पहला अकाउंट देखते हैं यहां पर बैंक अकाउंट ग्रुप करके। ऐसा खाता जिसमें पैसे का लेनदेन होता है जैसे पैसा जमा करते हैं और पैसा निकालते हैं। तो इस चीज से हम बैंक अकाउंट रखते हैं। जैसे एग्जांपल बैंक डिपॉजिट जैसे बैंक में जमा करना या फिर बैंक से विथड्रॉ करना बैंक से पैसा निकालना इन दोनों हम अकाउंट को किसके अंडर में रखेंगे? बैंक अकाउंट के अंडर में रखेंगे। बैंक ओडी अकाउंट ग्रुप इस ग्रुप में हम

0:46 बैंक ओडी अकाउंट को रखते हैं जिसका मतलब होता है बैंक ओवरड्राफ्ट या इसी को हम बैंक ओसीसी अकाउंट कहते हैं जिसका मतलब होता है बैंक ओपन कैश क्रेडिट अकाउंट अ क्रेडिट कार्ड जो रहता है उसको भी हम लोग इसी ग्रुप के अंडर में रख सकते हैं जैसे एग्जांपल तौर पर हम लोग बैंक ओडी अकाउंट बैंक ओसीसी अकाउंट क्रेडिट कार्ड इन सारे जो लेजर नेम होता है उसको हम बैंक ओडी अकाउंट के अंडर में रख सकते हैं। नेक्स्ट देखते हैं अ कैश इन हैंड। कैश इन हैंड ग्रुप जो रहता है सिर्फ एक ही लेजर बनता है। कैश का जो लेजर रहता है टैली में पहले से बना रहता है। तो हमें इसका लेजर बनाने की आवश्यकता नहीं पड़ता है। लेजर पहले से ऑलरेडी इसमें बना रहता है जो कैश अकाउंट के नाम से रहता है और एक ही बार इसका लेजर बनाना रहता है। डिपॉजिट एसेट वह संपत्ति

1:34 जो कहीं जमा है और हमें वह कुछ समय बाद मिलना है। जैसे सिक्योरिटी के लिए पैसा जमा करवाना सिक्योरिटी डिपॉजिट फॉर रेंट ये सारे जो रहता है मतलब विस्तार रूप से कहीं पर है और जो बाद में हम यूज़ कर सकते हैं। फिर बाद में उस मिलेगा उसको डिपॉजिट सेट करके अंदर में रखते हैं। नेक्स्ट देखते हैं ड्यूटी एंड टैक्सेस करके। इस ग्रुप में हम जितना भी टैक्स होता है उसका लेजर हम लोग ड्यूटी एंड टैक्सेस के अंडर में रखते हैं। जैसे जो जीएसटी रहता है, टीडीएस रहता है, सेस रहता है। ये सारी चीज क्या होता है? टैक्स होता है। तो उसको हम लोग ड्यूटी एंड टैक्सेस के अंडर में रखते हैं। नेक्स्ट देखते हैं फिक्स्ड एसेट्स। इसका मतलब होता है स्थाई संपत्ति। ऐसा संपत्ति जो हम अपने काम के लिए खरीदते हैं या अपने काम आता है वह बेचने के लिए नहीं

2:21 होता है। जो हम स्थाई रूप से रखने के लिए खरीदी करते हैं उसको हम लोग फिक्स्ड एसेट्स कहते हैं। जैसे मशीनरी आइटम्स ऑफिस में होने वाले चेयर कंप्लीट जो स्थाई रूप से रखने के लिए हम खरीदी करते हैं। उसको बेचने के लिए उद्देश्य से नहीं करते। उन सारी चीज को हम लोग फिक्स्ड एसेट्स के अंडर में रखते हैं। नेक्स्ट देखते हैं इन्वेस्टमेंट। इन्वेस्टमेंट का मतलब होता है निवेश। इस ग्रुप में अपने प्रॉफिट के लिए इन्वेस्टमेंट करते हैं। उस लेजर को इस ग्रुप में रखते हैं। जैसे म्यूच्यूल फंड, शेयर, बाजार अभी शेयर मार्केट वगैरह चलता है या फिर एफडी, फिक्स्ड डिपॉजिट, आरडी, तो यह जो चीज रहता है इन्वेस्टमेंट कहलाता है जो हम निवेश करते हैं अपने बिजनेस से रिलेटिव। इनडायरेक्ट एक्सपेंस इसका मतलब होता है अप्रत्यक्ष खर्चे। वह सभी खर्चे जो बिजनेस को चलाने

3:07 के लिए किया जाता है। जब भी हम लोग कुछ बिजनेस चलाते हैं तो उसमें कुछ खर्चा होता है तो उसको हम लोग इनडायरेक्ट एक्सपेंस बोलते हैं। अह अप्रत्यक्षित खर्चा कहलाता है। ऑफिस का सारे खर्चा इनडायरेक्ट एक्सपेंस ग्रुप में अंडर आता है। तो इसका कुछ एग्जांपल जैसे देखते हैं। स्टाफ सैलरी हो गया, रेंट जो किराया हो गया आपका इलेक्ट्रिसिटी बिल हो गया, एडवर्टाइजमेंट वगैरह। तो इन सारी चीज को हम लोग इनडायरेक्ट एक्सपेंस करके रखते हैं इसमें। है ना? नेक्स्ट देखते हैं डायरेक्ट एक्सपेंस जो इसका मतलब रहता है प्रत्यक्ष खर्चे वह सभी खर्चे जो मुख्य बिजनेस से जुड़े होते हैं या वह खर्चे जो बिजनेस को चलाने के लिए किया जाता है जिसके खराब होने से आपका मुख्य काम रुक जाए जैसा कुछ काम ऐसा है जिसके बिना कुछ आपका आ काम हो ही नहीं सकता है या फिर कुछ आपका मशीन चल

3:53 ही नहीं सकता तो ऐसा कुछ खर्चा हो रहा है तो उसको हम लोग अह एक्स डायरेक्ट एक्सपेंस करके बोलते हैं। जैसे कोई सामान मंगवाना है गाड़ी किराया करके तो हमें गाड़ी वाले को किराया तुरंत देना होता है। वह अगर किराया हम उसको नहीं देंगे तो हमारा सामान लाएगा नहीं और लाएगा नहीं तो मेरा कुछ काम हो नहीं पाएगा तो ये क्या कहलाएगा डायरेक्ट एक्सपेंस के अंडर में रहता है जिसके द्वारा से मेरा सामान नहीं आ पाएगा और सामान नहीं आ पाएगा तो मेरा काम नहीं हो पाएगा तो इसलिए हम लोग इसको बोलते हैं डायरेक्ट एक्सपेंस करके जो फ्राइड चार्ज या वेजेस वगैरह रहते हैं हम इस सबको डायरेक्ट एक्सपेंस के अंडर में रखते हैं। नेक्स्ट देखते हैं। लोन इन एडवांस एसेट्स। इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनता है जहां हम दूसरे को लोन या एडवांस के रूप में पैसा देते हैं। जैसे एडवांस में किसी को पेमेंट

4:41 कर दिए। लोन वगैरह दे रहे हैं या फिर एडवांस में कोई इनकम टैक्स वगैरह से दे रहे हैं जीएसटी भर रहे हैं या फिर टीडीएस वगैरह या फिर एडवांस में किसी को सैलरी दे रहे हैं। तो इन सारे जो सिचुएशन होता है पेमेंट-वमेंट लोन वगैरह को तो हम लोग लोन इन एडवांस एसेट्स के अंडर में रख सकते हैं। नेक्स्ट देखते हैं सिक्यर्ड लोन। सिक्योर लोन में क्या होता है कि इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनता है जहां हम दूसरे से लोन लेते हैं। जहां उस लोन के बदले कुछ सिक्योरिटी रहता है। जैसे हम लोग कुछ किसी को लोन वगैरह दे दिए तो कुछ नियम वगैरह रहता है। उसको अपने को ध्यान रखते हुए देना रहता है। फिर उसका नियम को पालन करना रहता है। जैसे बैंक लोन हो गया, प्रॉपर्टी लोन हो गया, गोल्ड लोन हो गया, फिर होम

5:28 लोन तो इन सब में ना कुछ सिक्योरिटी क्वेश्चन रहते हैं। फिर कुछ सिक्योरिटी नियम रहता है। जिसको आपको फॉलो करना रहता है। अनसिक्यर्ड लोन इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनता है जहां हम दूसरे से लोन लेते हैं। यह उस लोन के बदले कुछ भी सिक्योरिटी नहीं देना होता है। मतलब इसमें ऐसा कुछ नहीं रहता। नियम वयम कुछ रहता नहीं है। जैसे एग्जांपल तौर पर पर्सनल लोन जो मिलता है वह ऐसे ही सिंपल मिल जाता है। ऐसा कुछ नियम ऐसा टाइप का कुछ रहता नहीं है। तो इसको हम लोग अनसिक्यर्ड लोन के अंडर में रखेंगे। लोन लायबिलिटीज लायबिलिटीज का मतलब दायित्व होता है। है ना दोस्तों ध्यान रखना लायबिलिटीज मतलब दायित्व होता है। आपका जैसे कर्तव्य नहीं रहता है। किसी को पैसा उसका लिए हो तो उसका आपका कर्तव्य कि आप उसका पैसा लौटाओ। इस टाइप का लोन लायबिलिटीज में क्या रहता है? इस ग्रुप में कोई भी बैंक से लिया हुआ लोन का लेजर

6:16 बना सकते हैं। है ना? कोई भी बैंक से लोन लेते हैं तो उसको हम लोग इसके अंडर में रख सकते हैं। या सिक्योर लोन या अनसिक्योर लोन लेजर भी इसी ग्रुप में बना सकते हैं। लेकिन हम ऐसा करते हैं तो हमें यह पता नहीं चले चल पाएगा कि वो सिक्योर लोन है कि अनसिक्योर लोन है। इसलिए इस ग्रुप के अंदर जितने भी लेजर बनते हैं उसको हम अलग-अलग जो सिक्योर लोन और अनसिक्योर लोन पढ़ाई गए हैं उस ग्रुप के अंदर में रख सकते हैं। सेल अकाउंट सेल अकाउंट में क्या रहता है? इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां हम सेल से रिलेटिव काम करते हैं। जैसे कोई सामान बेचने वाला काम कर रहा है तो हम लोग सेल अकाउंट के अंडर में रखते हैं। जैसे सेल अकाउंट हो गया, सीमेंट सेल अकाउंट हो गया, इंटरस्टेट, सेल अकाउंट या फिर अपने ही स्टेट में आप सेल वगैरह कर रहे हो तो इन सारे चीज को हम लोग सेल अकाउंट के अंडर में रखते हैं। नेक्स्ट देखते हैं, परचेस

7:03 अकाउंट। इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां हम परचेस से रिलेटेड काम करते हैं। जैसे हम सब कुछ सामानवान खरीदी कर रहे हैं तो इससे संबंधित में हम लोग परचेस अकाउंट रखते हैं। जैसे परचेस अकाउंट हो गया, सीमेंट परचेस अकाउंट, इंटरस्टेट परचेस अकाउंट या फिर अपना सेम स्टेट परचेस अकाउंट भी बोल सकते हैं जिसमें हम लोग अपने स्टेट से खरीदी- बिक्री करते हैं। तो ये परचेस वाला जो रहता है खरीदी करने वाला रहता है। फिर नेक्स्ट वाला में सेल वाला रहता है उसमें ना। ठीक है? एक आता है। फिर संड्री डेबिटर। संड्री डेबिटर हम लोग दोस्तों डेबिट क्रेडिट पक्ष पढ़े थे। उसमें आप क्लियरली देख लेना कि क्या होता है। करके उसी का यहां पर है कि लेजर नेम जो रहता है नाम रहता है उसका संडी डेबिटर क्रेडिटर आएगा। संडी डेबिटर का मतलब क्या होता है? देनदार होता है। कोई व्यक्ति का ही व्यक्ति या फिर कोई दुकान का नाम या फिर कंपनी का नाम होता है। वही आपका संडी

7:49 डेबिटर या फिर संडी क्रेडिटर एक और आता है वो संडी क्रेडिटर। उसका दो पक्ष बसश रहता है। उसी को लेजर हम लोग डालना रहता है। संडी डेबिटर क्या होता है? अ इसका मतलब रहता है देनदार। इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां किसी ने हमसे उधार में माल खरीदा हो और उसके बदले में हमें पैसा देना होता है। मतलब हमसे कोई व्यक्ति दूसरा है जो हमसे उधार में सामान खरीदा हो। ये समझ लो कि आप सामान बेचे हो सामने वाले को सेल किए हो ना। किसी ने हमसे उधार में माल खरीदा हो। हमसे किसी ने माल उधार में खरीदा हो। मतलब हम तो बेचने वाला रहेंगे और सामने वाला खरीदने वाला रहेगा। या फिर किसी ने हमसे उधार में रुपए लिया होगा। हमसे उधार में लिया होगा तो वह बाद में हमें पैसा देगा। तो इस सिचुएशन में सामने वाला जो व्यक्ति रहेगा वो क्या कहलाएगा आपका? संड्री डेबिटर कहलाता है। नेक्स्ट देखते हैं। संड्री क्रेडिटर। ये क्या होता

8:36 है? जस्ट उसका उल्टा ही रहता है। संड्री क्रेडिटर का मतलब लेनदार होता है। इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां किसी ने हमसे उधार में अह माल खरीदा हो और उसके बदले अह हमें उसको पैसा देना होता है। जैसे मैं किसी व्यक्ति से उधार में सामान खरीद कर लाता हूं तो मेरे को पैसा देना होता है। तो इस सिचुएशन में मैं क्या कहलाऊंगा? संड्री क्रेडिटर कहलाऊंगा। जैसे यहां पर किसी से हमने उधार में माल खरीदे जैसे किसी व्यक्ति जिससे मैं सामान खरीद रहा हूं परचेस कर रहा हूं तो मैं लेनदार या फिर क्रेडिटर कहलाऊंगा। किसी से हमने उधार में पैसा लिया हो तो इन दोनों सिचुएशन हम संड्री क्रेडिटर रखेंगे। नेक्स्ट देखते हैं डायरेक्ट इनकम। डायरेक्ट इनकम का मतलब होता है प्रत्यक्ष आय। इस ग्रुप में ऐसा लेज़र बनते हैं जहां हमें मेन बिज़नेस से इनकम होती है। जो मेरा

9:24 मेन बिज़नेस होता है उससे जो पैसा मिल रहा हो उसको हम लोग डायरेक्ट इनकम करके बोलते हैं। जैसे इलेक्ट्रिकल का कोई दुकान है इलेक्ट्रॉनिक दुकान वगैरह है तो उसमें रिपेयरिंग वगैरह काम करो। मेरा काम ही चाहिए तो मेरे को डायरेक्ट इनकम होगा। मोबाइल रिपेयरिंग काम करूंगा। वो मेरा मोबाइल का शॉप है तो मेरे को डायरेक्ट मिलेगा। मोबाइल रिचार्ज करूं तो भी डायरेक्ट मिलेगा। तो इस सारी चीज में हम लोग डायरेक्ट इनकम करके रखते हैं। नेक्स्ट देखते हैं इनडायरेक्ट इनकम। जस्ट उसका थोड़ा सा अलग रहेगा डायरेक्ट इनकम और इनडायरेक्ट इनकम। डायरेक्ट इनकम क्या अभी बताया जो मुख्य बिज़नेस से आपको मिलेगा जो आपको मुख्य काम है उससे मिलेगा तो वो डायरेक्ट इनकम बनेगा। इनडायरेक्ट इनकम क्या रहता है? इसका मतलब होता है अप्रत्यक्ष है। इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां बिज़नेस के अलावा किसी दूसरे सोर्सेस से इनकम होती है। जैसे एग्जांपल तौर पर कहीं से ब्याज मिल गया, इंटरेस्ट रिसीव, कहीं से कमीशन मिल गया या फिर

10:10 डिस्काउंट मिल गया। या फिर ऐसा है कहीं पर जैसे मान के चलो मैंने शॉप खोला हूं और वहीं पर दो चार शटर और एक्स्ट्रा मैंने किराए पर दे दिया हूं। तो उससे भी मेरे को फायदा मिलेगा। तो मेरा इनडायरेक्ट इनकम हम बोल सकते हैं। तो ये सारी चीजें जो रहता है इनडायरेक्ट इनकम कहलाता है। जो मेरा मुख्य बिजनेस या फिर मुख्य व्यवसाय है उससे छोड़कर दूसरे तरीका से और मेरा इनकम आएगा उसको हम लोग बोलते हैं। नेक्स्ट देखते हैं कैपिटल अकाउंट। इसका मतलब हिंदी में पूंजी होता है। इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां आप अपना बिजनेस को करने के लिए खुद का पैसा लगाते हैं। जो खुद का पैसा होता है उसको हम लोग पूंजी बोलते हैं। ठीक है? जो बिजनेस को चालू करने के लिए रहता है। जैसे एग्जांपल तौर पर देखोगे तो मान लो आपके पास ₹2 लाख है। कैश पड़ा हुआ है ना आपके पास है ना? और आप एक मोबाइल दुकान खोलना चाहते हो तो

10:56 उसमें आपने ₹2 लाख लगाएं। वह आपका कैपिटल हुआ। मतलब आपका पूंजी होगा। उस मोबाइल के दुकान में आपने टोटल ₹5 लाख खर्च किए जिसमें से ₹2 लाख तो आपका खुद का है और बाकी जो ₹3 लाख वो बैंक से लोन लिए हो। ठीक है? तो जो ₹2 लाख होता है वो आपका क्या कहलाएगा? कैपिटल आपका पूंजी कहलाता है। जैसे एग्जांपल तौर पर हम इस अकाउंट में हेल्थ इंश्योरेंस वाले को रख सकते हैं। LIC को रख सकते हैं। स्कूल फीस रख सकते हैं। और आपका एकदम जरूरी चीज रहता है कैपिटल अकाउंट। उसको हम लोग कैपिटल अकाउंट के अंडर में रखते हैं। प्रोविजन इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां हमें अपने बिजनेस में होने वाले लॉस का पहले से अनुमान लगना या डूबने वाले पैसे के बारे में पहले से अनुमान लगाना

11:41 होता है। उस सबको हम लोग प्रोविजन करके रखते हैं। जैसे इसमें प्रोविजन अकाउंट ही रहता है। रिसी रिर्वस इन सरप सरप्लस। इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां बिजनेस को और आगे बढ़ाने के लिए कमाया हुआ संपत्ति को बचाकर रखना। बिजनेस को और आगे बढ़ाने के लिए या बिजनेस से जो भी प्रॉफिट हो, उसे आधा बचाकर रखना। बिज़नेस को आगे बढ़ाने के लिए आगे भविष्य में काम होता है। जैसे कुछ भी हम काम करें बिज़नेस है तो उसका जो प्रॉफ़िट होता है उसका आधे पैसे को हम बचा कर रखें ताकि बाद में वह हम काम कर सकें। जैसे किसी कंपनी में दो पार्टनर्स हैं। दोनों अपने प्रॉफिट का आधा पैसा कंपनी के बिजनेस

12:27 के लिए बचाते हैं ताकि वह कुछ भी लॉस हो या फिर कुछ भी प्रॉफिट या फिर कुछ भी और कुछ नया चीज करना हो तो हम काम करते हैं। ब्रांच डिवीजन इस ग्रुप में ऐसा लेजर बनते हैं जहां आपके बिजनेस में अलग-अलग ब्रांच हो। वहां लेजर का यूज किया जाता है। जैसे यहां पर हम देख सकते हैं एक महागुंटर एजुकेशन मेन ब्रांच होता है। उसका अब मेन ब्रांच कहां-कहां पर है? छत्तीसगढ़, मुंबई, दिल्ली, कोलकाता। तो इन सबको हम किसके अंडर में रखेंगे? ब्रांच डिवीजन करके। मिक्स एक्सपेंस एसेट्स। ऐसे खर्च बाद में हो सकते हैं। अभी हुआ नहीं है या ऐसे खर्च ऐसे सभी खर्च बाद में हमें देने

13:13 पड़ सकते हैं। तो ये जो खर्च होते हैं जो अभी हुआ नहीं या फिर बाद में हो सकते हैं। तो ये सारी चीज को हम लोग मिक्स एक्सपेंस एसेट से बोलते हैं। मान लो कोई स्टाफ 10 दिन ड्यूटी करके छोड़ देता है और वह चला जाता है। और अपने 10 दिनों का पेमेंट भी अभी नहीं लेता है। लेकिन बाद में वह स्टाफ कभी भी आकर अपना सैलरी ले सकता है। तो ये आपका क्या होगा? भविष्य में कभी भी कुछ भी हो सकता है वो सैलरी आकर ले जा सकते हैं कभी भी है ना 10 दिन का। तो ये जो खर्चा होता है उसको हम लोग मिक्स एक्सपेंस एसेट्स करके बोलते हैं या फिर उसके अंडर में रख सकते हैं। करंट एसेट्स इस ग्रुप में ऐसे लेजर बनाए जाते हैं जहां संपत्ति कभी बढ़ती या कभी घटती रहती है। जैसे अ इसमें सब ग्रुप करके रहता है। बैंक अकाउंट और कैश अकाउंट करके हम लोग रखते हैं। ऐसे तो बैंक अकाउंट का बैंक अकाउंट ही आता है।

13:58 कैश का तो कैश इन हैंड वगैरह आता है। बाकी इसको सब ग्रुप करके बोल सकते हैं करंट एसेट्स को। करंट लायबिलिटीज लायबिलिटीज मैंने बताया आपको दायित्व रहता है। इस ग्रुप में ऐसे लेजर बनाए जाते हैं जहां हम किसी से कुछ लेते हैं। वह हमें पैसा देने होते हैं। है ना? तो इसको हम लोग करंट लायबिलिटीज बोलते हैं। जैसे संड्री क्रेडिटर हो गया और ड्यू टिन टैक्सेस हो गए। जो टैक्स हम यूज़ करते हैं उसके लिए। स्टॉक इन हैंड। इसमें क्या रहता है? इस ग्रुप में ऐसे लेजर बनाए जाते हैं जहां हमारे गोडाउन में जितना भी स्टॉक रखा हुआ है उसके लिए स्टॉक इन हैंड लेजर बनाते हैं। जो भी हम स्टॉक को उस स्टॉक का यूज़ करते हैं। फिर गोडाउन में हमारा जो सामान पड़ा है उसको हम लोग इसका यूज कर सकते हैं। ठीक है? यहां पर सरपेंस अकाउंट करके

14:45 रहता है इसमें जैसे एग्जांपल। थैंक यू। प्लीज लाइक, सब्सक्राइब एंड शेयर।

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