UGC NET Communication Maha Marathon | Paper 1 Communication Full Revision | 8 Hours | Simran Mam

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो विज़न जेआरएफ द्वारा आयोजित 'संचार' विषय पर एक मैराथन सेशन का सारांश है। इसमें संचार के प्रकार, मॉडल, मास मीडिया और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा की गई है। मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • संचार की परिभाषा और प्रकार (शाब्दिक और अशाब्दिक)
  • अशाब्दिक संचार के उप-प्रकार (काइनेसिक्स, क्रोनॉमिक्स, आदि)
  • संचार के मॉडल (अरस्तू, लॉसवेल, आदि)
  • मास मीडिया का विकास और महत्व
  • दादा साहब फाल्के पुरस्कार और भारतीय सिनेमा

परिचय

इस वीडियो में, वक्ता आगामी परीक्षाओं के बारे में बात करते हैं और छात्रों को शांत रहने और रिवीजन पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते हैं। वे संचार मैराथन के बारे में भी बताते हैं, जिसमें फिल्मों से संबंधित प्रश्न शामिल होंगे।

संचार क्या है?

संचार विचारों, सूचनाओं और भावनाओं का आदान-प्रदान है। यह शब्दों (मौखिक) या गैर-मौखिक संकेतों के माध्यम से हो सकता है।

संचार के प्रकार

संचार मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है:

  • मौखिक (Verbal): शब्दों का उपयोग करके (बोलकर या लिखकर)। उदाहरण के लिए, एक कक्षा में पढ़ाना या एक पत्र लिखना।
  • गैर-मौखिक (Non-Verbal): शब्दों के बिना संचार करना, जैसे चेहरे के भाव, हावभाव, रंग, समय, संकेत और प्रतीक। उदाहरण के लिए, इमोजी का उपयोग करना या ट्रैफिक लाइट का रंग देखना।

अशाब्दिक संचार के उप-प्रकार

अशाब्दिक संचार के कई उप-प्रकार हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • काइनेसिक्स (Kinesics): शारीरिक भाषा और हावभाव के माध्यम से संचार। उदाहरण के लिए, चेहरे के भाव या बॉडी लैंग्वेज।
  • क्रोनॉमिक्स (Chronemics): समय के माध्यम से संचार। उदाहरण के लिए, संदेश का जवाब देने में लगने वाला समय।
  • क्रोमेटिक्स (Chromatics): रंगों के माध्यम से संचार। उदाहरण के लिए, ट्रैफिक लाइट या खाद्य उत्पादों पर रंग कोडिंग।
  • हेप्टिक्स (Haptics): स्पर्श के माध्यम से संचार। उदाहरण के लिए, हाथ मिलाना या पीठ थपथपाना।
  • माइमेसिस (Mimesis): नकल करके संचार। उदाहरण के लिए, किसी प्रसिद्ध व्यक्ति की चाल की नकल करना।
  • ऑलफैक्टिक्स (Olfactics): गंध के माध्यम से संचार। उदाहरण के लिए, भोजन की खुशबू से पता लगाना कि क्या बन रहा है।
  • ऑक्युलेसिक्स (Oculesics): आंखों के माध्यम से संचार। उदाहरण के लिए, आंखों के इशारे से कुछ समझना।
  • प्रॉक्सिमिक्स (Proxemics): शारीरिक दूरी के माध्यम से संचार। उदाहरण के लिए, किसी के साथ खड़े होने या बैठने की दूरी।
  • पैरा लैंग्वेज (Para Language): आवाज के माध्यम से संचार, जैसे पिच, टोन और वॉल्यूम।
  • आर्टिफैक्ट्स (Artifacts): संकेतों और प्रतीकों के माध्यम से संचार। उदाहरण के लिए, पुलिस की वर्दी या एम्बुलेंस पर प्लस का निशान।
  • गस्टेटरी (Gustatory): स्वाद के माध्यम से संचार। उदाहरण के लिए, भोजन में नमक या चीनी की मात्रा का पता लगाना।

संचार के अन्य प्रकार

संचार के कुछ अन्य प्रकार इस प्रकार हैं:

  • इंट्रापर्सनल (Intrapersonal): स्वयं से संचार। उदाहरण के लिए, प्रार्थना करना या ध्यान करना।
  • इंटरपर्सनल (Interpersonal): दो या दो से अधिक लोगों के बीच संचार।
  • समूह संचार (Group Communication): एक समूह में संचार।
  • जनसंचार (Mass Communication): जनता के लिए संचार, जैसे रेडियो या टेलीविजन।
  • औपचारिक संचार (Formal Communication): नियमों और प्रोटोकॉल का पालन करते हुए संचार, जैसे कार्यालय में।
  • अनौपचारिक संचार (Informal Communication): बिना नियमों के संचार, जैसे दोस्तों और परिवार के साथ।
  • ग्रेपवाइन संचार (Grapevine Communication): कार्यालय की गपशप जो अनौपचारिक रूप से फैलती है।
  • क्षैतिज संचार (Horizontal Communication): समान स्तर के लोगों के बीच संचार।
  • लंबवत संचार (Vertical Communication): अलग-अलग स्तरों के लोगों के बीच संचार (ऊपर से नीचे या नीचे से ऊपर)।
  • विकर्ण संचार (Diagonal Communication): अलग-अलग विभागों के लोगों के बीच संचार।
  • मेटा कम्युनिकेशन (Meta Communication): संचार के बारे में संचार, जैसे संदेश के पीछे का इरादा समझना।
  • अतुल्यकालिक (Asynchronous): अलग-अलग समय पर होने वाला संचार, जैसे ईमेल।
  • समकालिक (Synchronous): एक ही समय पर होने वाला संचार, जैसे फोन कॉल।

संचार के मॉडल

संचार प्रक्रिया में प्रेषक (सेंडर), संदेश (मैसेज) और रिसीवर शामिल होते हैं। प्रेषक संदेश को एन्कोड करता है, और रिसीवर उसे डिकोड करता है। शोर (नॉइज़) संचार में बाधा डाल सकता है। फीडबैक संचार को दोतरफा बना देता है।

  • अरस्तू का मॉडल (Aristotle's Model): वक्ता (स्पीकर) पर केंद्रित है, जो जितना अच्छा वक्ता होगा, उतना ही प्रभावी संदेश होगा।
  • लॉसवेल का मॉडल (Lasswell's Model): प्रभाव (इफ़ेक्ट) पर केंद्रित है। "कौन, क्या कहता है, किस माध्यम से, किससे, किस प्रभाव के साथ?"
  • शैनन और वीवर का मॉडल (Shannon and Weaver's Model): टेलीकम्युनिकेशन पर आधारित है और शोर (नॉइज़) की अवधारणा को पेश करता है।
  • ट्रांजैक्शनल मॉडल (Transactional Model): संचारकों के बीच निरंतर बातचीत पर केंद्रित है, जहां प्रत्येक व्यक्ति एक साथ प्रेषक और रिसीवर होता है।
  • बर्लो का एसएमसीआर मॉडल (Berlo's SMCR Model): स्रोत (सोर्स), संदेश (मैसेज), चैनल और रिसीवर की विशेषताओं पर केंद्रित है।

सिमेंटिक बैरियर और जार्गन

  • सिमेंटिक बैरियर (Semantic Barrier): शब्दों के अर्थ के कारण होने वाली बाधाएं। उदाहरण के लिए, एक शब्द के कई अर्थ होना।
  • जार्गन (Jargon): किसी विशेष पेशे या समूह द्वारा उपयोग किए जाने वाले तकनीकी शब्द जो दूसरों के लिए समझ में नहीं आते हैं।

मास मीडिया

मास मीडिया जनता तक पहुंचने के लिए उपयोग किए जाने वाले संचार के साधन हैं, जैसे कि प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया और फिल्में।

  • पहला मीडिया युग (First Media Age): ब्रॉडकास्ट और प्रिंट मीडिया (रेडियो, समाचार पत्र, टीवी, पुस्तकें)।
  • दूसरा मीडिया युग (Second Media Age): डिजिटल मीडिया और इंटरनेट (सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, टेलीग्राम, यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम)।

भारतीय सिनेमा का इतिहास

  • मूक युग (Silent Era): 1896 में ल्यूमियर ब्रदर्स द्वारा भारत में फिल्मों की शुरुआत। दादा साहब फाल्के ने भारतीय सिनेमा की शुरुआत की।
  • टॉकी युग (Talkie Era): 1931 में पहली बोलती फिल्म 'आलम आरा' आई।
  • स्वर्ण युग (Golden Era): 1940-1960 के दशक में सामाजिक मुद्दों पर फिल्में बनने लगीं। सत्यजीत रे जैसे निर्देशकों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • मसाला और कमर्शियल युग (Masala and Commercial Era): सिनेमा हॉल का विकास हुआ और मनोरंजन पर ध्यान केंद्रित किया गया। अमिताभ बच्चन जैसे अभिनेताओं का उदय हुआ।
  • उदारीकरण और आधुनिक युग (Liberalization and Modern Era): फिल्मों का बजट बढ़ा और भारतीय फिल्मों को विश्व स्तर पर पहचान मिली।

दादा साहब फाल्के पुरस्कार

यह भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च पुरस्कार है, जो फिल्म उद्योग में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1969 में हुई थी। पहला पुरस्कार देविका रानी को दिया गया था। इसमें एक स्वर्ण कमल मेडल, एक शॉल और 10 लाख रुपये का नकद पुरस्कार शामिल है। 2023 का पुरस्कार मोहनलाल को दिया गया।

महत्वपूर्ण भारतीय फिल्में

  • राजा हरिश्चंद्र (1913)
  • आलम आरा (1931)
  • किसान कन्या (1937)
  • मदर इंडिया (1957)
  • शोले (1975)
  • ट्रिपल आर

भारतीय सिनेमा में ऑस्कर

भानु अथैया ने 'गांधी' फिल्म में कॉस्ट्यूम डिजाइन के लिए पहला ऑस्कर जीता। सत्यजीत रे को मानद ऑस्कर मिला। ए. आर. रहमान और गुलज़ार ने 'स्लमडॉग मिलेनियर' के लिए ऑस्कर जीते। 'ट्रिपल आर' का 'नाटू नाटू' गाना ऑस्कर जीतने वाला पहला भारतीय गाना है।

भारत में प्रिंटिंग प्रेस का इतिहास

दुनिया में प्रिंटिंग प्रेस की शुरुआत जर्मनी में जोहान्स गुटेनबर्ग ने की थी। भारत में प्रिंटिंग प्रेस पुर्तगाली मिशनरियों द्वारा गोवा में लाई गई थी। पहली किताब 'डॉक्टरीना क्रिस्टा' थी। भारतीय भाषा में पहली किताब 'थंबिरन वणक्कम' थी। जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने 'बंगाल गजट' नाम से पहला समाचार पत्र शुरू किया।

महत्वपूर्ण समाचार पत्र

  • हिक्की का बंगाल गजट (1780)
  • समाचार दर्पण (1818)
  • उदंत मार्तंड (1826)
  • केसरी (तिलक)
  • यंग इंडिया और हरिजन (गांधी)

ऑल इंडिया रेडियो

1923 में बॉम्बे रेडियो क्लब द्वारा पहला प्रसारण किया गया। 1936 में इंडियन स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सर्विस (आईएसबीएस) का नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो कर दिया गया। 1957 में विविध भारती सेवा शुरू की गई। 1997 में ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन को प्रसार भारती के तहत लाया गया।

सिंप्लेक्स, हाफ डुप्लेक्स और फुल डुप्लेक्स

  • सिंप्लेक्स (Simplex): एकतरफा संचार (वन वे कम्युनिकेशन), जैसे रेडियो।
  • हाफ डुप्लेक्स (Half Duplex): एक समय में एक दिशा में संचार, जैसे वॉकी-टॉकी।
  • फुल डुप्लेक्स (Full Duplex): दोनों दिशाओं में एक साथ संचार, जैसे फोन कॉल।

प्रश्न और उत्तर

सेशन के अंत में, वक्ता संचार से संबंधित कई प्रश्नों पर चर्चा करते हैं और छात्रों को उनके उत्तर देने में मदद करते हैं।

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Transcript

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0:24 हम हेलो एवरीवन अ वेरी गुड मॉर्निंग टू ऑल ऑफ यू वेलकम बैक टू विज़ जेआरएफ आई रियली होप दैट यू ऑल आर डूइंग वेल। मेरा गला जो है थोड़ा बैठा हुआ है। आवाज भारी हो रखी है। तो प्लीज बियर विथ दैट। आई होप कि वो एक प्रॉब्लम क्रिएट ना करें। आई विल ट्राई माय बेस्ट। सारी चीजें जो है

1:09 वो हम अच्छे से करेंगे और एग्जाम बहुत पास आ चुका है। बहुत ही कम टाइम बचा है। दो से तीन दिन बचे हैं। जिनका 31 को एग्जाम है उनकी दिल की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। तो मैं यह बोलूंगी सबसे पहले तो शांत। एकदम पैनिक नहीं होना है। एकदम शांत हो जाओ क्योंकि जितनी पढ़ाई होनी थी, जो होना था, आप कर चुके हो। अब आपको सिर्फ रिवाइज़ करना है। और अगर आपने बहुत अच्छे से पढ़ाई करी है, नहीं भी करी है, जो भी है, लेकिन अब एटलीस्ट पैनिकिक मत हो। अब पैनिकिक होने से कुछ हासिल नहीं होगा। जितना आपने पढ़ा हुआ है, वह खराब हो जाएगा। तो आज हम मैराथनस को सम अप करने वाले हैं। कम्युनिकेशन की मैराथन है। जैसा कि आप लोगों को ऑलरेडी पता है। काफी सारी सारी यूनिट्स की मैराथन हम कर चुके हैं। आज कम्युनिकेशन की करेंगे। सबसे छोटी यूनिट

1:55 है लेकिन काफी डायनेमिक हो चुकी है। और जो लास्ट एग्जाम सल था जून में मूवीज से काफी क्वेश्चन आए थे। तो हां आज के सेशन में मूवीज़ का भी कंटेंट रहेगा आपके लिए। वह भी हम डिस्कस करेंगे कि मूवीज में किस हद तक आपको क्या पढ़ना है, कौन से अवार्ड पढ़ने हैं। हॉलीवुड मूवीस पे पढ़नी है, याद करनी है, देखनी है, नहीं है, क्या है? सारी चीजें आज हम डिस्कस करेंगे। आई एम ऑल गुड। आवाज आ रही है मेरे को? मेरी आवाज आ रही है आप सभी को? कैसी हो रही है मेरी आवाज? बहुत भारी-भारी लग रही है ना? एकदम दमदार आवाज। ठीक है। कितना डर लग रहा है। बहुत ज्यादा डर लग रहा है कि एग्जाम आ गया, क्या होगा? कैसा होगा?

2:40 देखो कुछ सोचो मत। बस क्या करना है आपको? रिवीज़ रिवीज़ और रिवीज़ और कुछ भी नहीं करना है। रिवीज़ करते रहो। सब कुछ अपने आप हो जाएगा। आपके हाथ में सिर्फ वही है अभी। तो आई थिंक ये मैथ्स सारी काफी यूज़फुल रही होंगी आपके लिए। तो चलो बिना टाइम वेस्ट करे लेट्स बिगिन। शुरू करते हैं और शुरू करने से पहले मैं आपको बता दूं कि आपको जितने भी पीवाईक्यूस जितने भी मैराथों्स में करवाए गए हैं अभी तक वो सभी के सभी इस बुक से करवाए गए हैं। पीवाईक्यू की बुक है बेसिकली ये हिंदी में है एंड ये इंग्लिश में है। जिसमें आपको 10 साल के पीवाईक्यूस मिलेंगे और इसके साथ-साथ में एक्सप्लेनेशन जो है हर एक ऑप्शन को एक्सप्लेन किया गया है। प्लस वन लाइनर भी है आपके लिए यानी कि बुक के लास्ट में रिवीजन शॉर्ट नोट्स हैं।

3:26 जहां से आप एग्ज़ाम देने से पहले बहुत इंपॉर्टेंट चीज़ें पढ़ सकते हो। यह बुक अगर आप ऑर्डर करना चाहते हैं, विज़न JRF के ऐप से कर सकते हैं। ई-बुक फ़ॉर्म में भी अवेलेबल है। यानी आप अपने फोन में टैब में भी इसको पढ़ सकते हो। अगर आप फिजिकल मोड में नहीं लेना चाहते तो। और अगर आप आने वाले एग्जाम्स की तैयारी कर रहे हो यानी कि जून में, दिसंबर में आप फाइनल ईयर में हैं तो उसके लिए हमारे फाउंडेशन बैचेस ऑलरेडी स्टार्ट हो चुके हैं। रजिस्ट्रेशन स्टार्ट है और आप कॉल पेपर वन के लिए आगाज़ बैच में एनरोल कर सकते हैं। हिस्ट्री के स्टूडेंट हैं आप तो उसके लिए अर्जुन बैच में और कॉमर्स के लिए कॉरकॉम बैच में ज्योग्राफी के लिए है गैलेक्सी बैच। अभी सारे बैचेस जितनी भी चीजें हैं अभी न्यू ईयर के लिए इन पे चल रहा है अभी के लिए आपके पास ऑफर। ठीक है? ऑफर चल रहा है अभी 25% ऑफ। तो अगर

4:14 अभी आप एनरोल करना चाहते हैं तो कर लीजिए। अगर बाद में आप एनरोल करेंगे ना तो ये ऑफर रहेगा। प्लस वैलिडिटी भी आपको नहीं मिलेगी। जैसे अभी अगर आप एनरोल करोगे तो जून 27 तक की वैलिडिटी मिलेगी। बाद में यह वैलिडिटी कम हो जाएगी। तो इट वाज़ अ इनेशन। ई बुक पेड स्टूडेंट के लिए नहीं है। यू हैव टू परचेस इट सेपरेटली। ठीक है? चलो शुरू करते हैं और इसके लिए कूपन कोड आपको यूज करना है विज़ 25 अगर आप बुक लेना चाहते हैं या कोई भी कोर्स में एनरोल करना चाहते हैं तो उसके लिए विज़न 25 आप कूपन कोड यूज़ करेंगे। स्टार्ट करें। रेडी एवरीवन? एक बार बता दो। चलो देखो मैं बता देती हूं आपको कि आज जो है हम क्या-क्या पढ़ने वाले हैं। टाइप्स ऑफ़ कम्युनिकेशन करेंगे। क्योंकि टाइप्स ऑफ

5:01 कम्युनिकेशन है। एक ऐसा श्योर-शोर टॉपिक है जहां से आपको क्वेश्चन देखने को मिलेगा ही मिलेगा। ठीक है? उसके बाद में मॉडल्स करेंगे। अब मॉडल्स को लेके जो है आप लोग हमेशा परेशानी में रहते हो। क्यों? क्योंकि मॉडल्स बहुत सारे हैं। लेकिन दिक्कत ये है कि इसका कॉस्ट बेनिफिट रेश्यो बहुत कम है। कॉस्ट बेनिफिट रेशियो कम है। इसका मतलब क्या है? आप बहुत सारे मॉडल्स पढ़ लोगे ना तब भी उसमें से एक क्वेश्चन आएगा। और ये टॉपिक ऐसा नहीं है कि हर साल इसमें से क्वेश्चन आपको देखने को मिलेगा। कोई गारंटी नहीं है। इसलिए बहुत ही शॉर्ट तरीके से क्रिस्प तरीके से आज हम मॉडल्स भी करेंगे। उसके बाद में मास मीडिया अगर सबसे ज्यादा स्कोरिंग टॉपिक सबसे ज्यादा स्कोरिंग अगर अभी कुछ बना हुआ है तो वो मास मीडिया है। मास मीडिया से भर-भर के सवाल आते हैं। और मास मीडिया सवाल क्या आते हैं? रेडियो कब आया? ठीक

5:47 है? फर्स्ट न्यूज़पेपर कौन सा था? इनकी क्रोनोलॉजी जो है वो आपसे पूछ लेंगे। प्रिंटिंग प्रेस के बारे में आपसे पूछ लेंगे। अरेंज करने को दे देंगे आप सबको। तो आज मार्स मीडिया को भी हम बहुत अच्छे से करेंगे। इसमें हम इंडियन प्रिंटिंग प्रेस की हिस्ट्री भी देखेंगे। इंपॉर्टेंट न्यूज़पेपर्स भी देखेंगे और आपका फेवरेट टॉपिक मूवीस वो तो करना ही है। फिर कुछ छोटे-छोटे टिटबिट्स टॉपिक आते हैं जो बहुत छोटे हैं लेकिन बहुत काम के हैं। सवाल एक जिसमें से हमेशा आता है। ये वो टॉपिक हैं जिनमें आपको इन्वेस्ट करना है इतना सा यानी कि टाइम इतना देना है और आपको ये पेबक करेंगे बहुत ज्यादा। ये उस इन्वेस्टमेंट की तरह है। हॉट मीडिया, कूल मीडिया वैसे मैं पहले भी करवा चुकी हूं बट आज फिर से करेंगे। और उसके बाद में यहां पर ये तो हो गया। ठीक है? हाफ डुप्लेक्स, फुल डुप्लेक्स, सिंप्लेक्स। अगर ये टॉपिक भी आपको नहीं आता है तो ये सारी चीजें

6:32 करेंगे। मेन-मेन टॉपिक्स हैं। इसके अलावा भी ड्यूरिंग द सेशन काफी सारी चीजें हम करने वाले हैं। ठीक है? तैयार हो सब लोग? रेडी एवरीवन? एक बार बता दो। सेशन को लाइक कर दो और फटाफट से शेयर कर दो। शुरू करते हैं हम। तो, टाइप्स ऑफ़ कम्युनिकेशन से हम शुरू करने वाले हैं। क्योंकि बहुत ही बड़ा टॉपिक है इटसेल्फ यह अपने आप में। शुरू करने से पहले मुझे यह बताओ कम्युनिकेशन क्या होता है? देखो, तरीके से ही पढ़ेंगे क्योंकि तरीके से अगर नहीं पढ़ोगे, तो आपको समझ में नहीं आएगा। इसलिए तरीके से स्टेप बाय स्टेप पढ़ना बहुत ज्यादा जरूरी है। कम्युनिकेशन होता क्या है? यह बताओ मुझे पहले। कम्युनिकेशन में अप्लाइड क्वेश्चन काफी सारे आपको देखने को मिलते हैं। ठीक है? कम्युनिकेशन या संचार से आप क्या समझते

7:20 हैं? देखो, कम्युनिकेशन या संचार क्या है? जब एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति तक अपनी बात पहुंचाता है, कोई मैसेज पहुंचाता है। एक्सचेंज ऑफ़ आइडियाज़, एक्सचेंज ऑफ़ इनेशन, एक्सचेंज ऑफ़ थॉट्स। ठीक है? फॉर एग्जांपल आप अपने फ्रेंड से बात कर रहे हो, फोन फोन कर रहे हो। बात करने के लिए आपको कोई बात बतानी है तो वो क्या है? कम्युनिकेशन है। मैं आपको यहां पढ़ा रही हूं। यह क्या है? यह भी कम्युनिकेशन है। तो बेसिकली जब भी दो लोग नॉट नेसेसरीली दो लोग ज्यादा लोग भी हो सकते हैं। जब एक व्यक्ति एक छोर से दूसरे छोर तक बात जाती है। अब उसमें उसके अंदर कुछ भी हो सकता है। कोई सूचना हो सकती है, इमोशंस भी हो सकते हैं, आइडियाज भी हो सकते हैं, थॉट्स भी हो सकते हैं। कुछ भी हो सकता है। उसको हम कहते हैं

8:06 कम्युनिकेशन। ठीक है? और जरूरी नहीं है कि कम्युनिकेशन जो है शब्दों से ही हो। समझ रहे हो? जरूरी नहीं है कि शब्दों से ही हो कि मैं बोल के लिख के अगर बात करूंगी तो वही संचार में आएगा। उसके अलावा कुछ भी संचार में नहीं आएगा। ऐसा कुछ भी नहीं है। तो बेसिकली कम्युनिकेशन क्या है? जब आप अगर हमने एकदम सिंपल भाषा में बात करूं तो एक्सचेंज ऑफ़ आइडियाज। ठीक है? विचारों का आदान-प्रदान। अब वो विचार कैसे भी हो सकते हैं। आपकी थॉट हो सकती है। कोई इंफॉर्मेशन हो सकती है। कोई सूचना कुछ भी हो सकता है। ये है कम्युनिकेशन। अब अगर हम बात करें इसके टाइप्स की तो मेनली मेनली मुख्यत जो है हमारे पास में इसके दो टाइप्स निकल के आते हैं।

8:53 पहला है वर्बल और दूसरा है नॉनवर्बल। वर्बल कम्युनिकेशन जो है इसको हम कहते हैं वाचिक या शाब्दिक। आप इसको कह सकते हो। वाचिक या फिर शाब्दिक और जो आपका नॉन वर्बल है इसको हम गैरवाचिक अवाचिक या गैर शाब्दिक भी कह सकते हैं। क्या मतलब है इन दोनों का? कमेंट करके बताना जरा एक बार। देखो जिनको नहीं पता वो मेरी बात सुनो। वर्बल कम्युनिकेशन वो कम्युनिकेशन होता है जिसमें आप शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। जिसमें आप वर्ड्स का यूज़ करते हैं। यस। अब वर्ड्स का यूज़ आप लिख के भी कर सकते हैं, आप बोल के भी कर सकते हैं। लेकिन जहां पर वर्ड्स का यूज़ हो गया, शब्दों का इस्तेमाल हो गया, उसको हम बोलेंगे वर्बल कम्युनिकेशन। तो वर्बल कम्युनिकेशन क्या हुआ? शाब्दिक संचार क्या

9:41 होता है? जब भी संचार के अंदर शब्दों का इस्तेमाल होता है, वर्ड्स का यूज़ होता है, तब होता है वर्बल कम्युनिकेशन या फिर वाचिक संचार। शब्दों का यूज होता है। शब्दों का इस्तेमाल होता है। कैसे? या तो बोलकर, बोलना या फिर लिखना। कि भैया बोल भी सकते हैं, लिख भी सकते हैं। जैसे ये क्लास है। यहां पर मैं बोल के पढ़ा रही हूं। ये भी वर्बल है। लिख रही हूं तो वो भी वर्बल है। इमोटिकन का यूज़ जो है या इमोजीज़ का यूज़ किस में आएगा? वर्बल में आएगा या नॉनवर्बल में आएगा? इमोजीस का यूज़ वर्बल में आएगा या नॉन वर्बल में आएगा यह बताओ। ठीक है?

10:28 तो शब्दों का इस्तेमाल हो रहा है। वह कैसे भी हो सकता है? बोल के या लिख के। फिर आगे चले अगर नॉन वर्बल की बात करें तो इसमें शब्दों के अलावा सब कुछ आ जाता है। ठीक है? शब्दों के अलावा जितने भी साधन हैं, जितने भी माध्यम है, सारी की सारी चीजें आ जाती हैं। अब शब्दों के अलावा हमारे मन में आ सकता है कि क्या-क्या आएगा भाई? तेजी से संचार हो सकता है। हावभाव आ सकता है। कलर आ सकते हैं, टाइम आ सकता है। साइन और सिंबल्स आ सकते हैं। काफी सारी चीजें हैं जिनके थ्रू नॉनवर्बल कम्युनिकेशन गैरवाचक संचार हो सकता है। इमोजीस। ठीक है? इमोजीस भी किसमें आएंगी? नॉनवर्बल में आएंगी। तो सबसे पहले तो ये फंडा क्लियर करो कि बेसिक टाइप क्या है? बेसिक टाइप है ये दोनों। कि जब आप शब्दों का यूज करोगे

11:14 चाहे बोल के करो चाहे बिना बोल मतलब बोल के करो या लिख के करो ठीक है वो आएगा वर्बल में और जब आप शब्दों के अलावा किसी भी तरीके से संचार करेंगे बस कोई भी तरीका हो सकता है संचार नहीं शब्द नहीं है ओनली वो आ जाता है नॉनवर्बल में। ठीक है? ये समझ में आया? अब हम आगे चलते हैं और हम नॉन वर्बल के टाइप्स पढ़ेंगे अब। क्योंकि नॉन वर्बल के टाइप्स बहुत सारे हैं। सब टाइप्स बेसिकली जहां से बहुत सारे क्वेश्चन आते हैं। ठीक है? एक-एक करके बताओ। सबसे पहले हम देखते हैं काइनेसिक्स। काइनेसिक्स का मतलब क्या होता है? और एक चीज़ मैं बता दूं कि इसको हिंदी में भी काइनेसिक्स ही बोलेंगे क्योंकि ये इंग्लिश वर्ड नहीं है। यह आपका लैटिन वर्ड है। क्या है? लैटिन भाषा का शब्द है। तो, मैं इसको ट्रांसलेट नहीं कर सकती। क्या मतलब

12:02 होता है काइनेसिक्स का? काइनेसिक्स का मतलब क्या होता है बताना एक बार। बॉडी लैंग्वेज यस जब कम्युनिकेशन बॉडी लैंग्वेज के थ्रू होता है तब हम उसको बोलते हैं काइनेसिक्स। बॉडी लैंग्वेज आओ भाव। एग्जांपल बताओ इसके। एग्जांपल बताओ। जब तक कम्युनिकेशन के टाइप्स में आपने एग्जांपल नहीं बता पा रहे हो ना, इसका मतलब आपने पढ़ाई सही से नहीं करी है। देयर इज़ सम प्रॉब्लम। ठीक है? एग्जांपल बताओ इसके। बॉडी लैंग्वेज हो गई, हावभाव हो गया। और इसके अलावा क्या आ जाएगा? फेशियल एक्सप्रेशनंस। ठीक है? फेशियल एक्सप्रेशन हो गए।

12:47 स्थूल गति की नहीं इसको हम काइनेसिक्स ही बोलेंगे। स्थूल गति की नहीं बोलेंगे। जेस्चर भी आ जाएंगे। बिल्कुल। एग्जांपल बताओ कोई इसका। जैसे किसी को आंख मारे कोई बात बताना। नहीं यह कोई काइनेसिक्स का एग्जांपल नहीं है। जैसे कोई बीमार हो तो उसके हावभाव से पता चल जाए। यस एक्सजेक्टली। जैसे मेरी तबीयत खराब होती है तो आप मेरी शक्ल देख के पूछ लेते हो मैम आपकी तबीयत खराब है क्या? ठीक है। मैम आप गुस्से में हो क्या? तो मैंने तो आके आपको नहीं बताया। लेकिन आपको कैसे पता चला? एक्सप्रेशन से बॉडी लैंग्वेज के थ्रू पता चल जाता है। आपका कोई दोस्त है एग्जाम देके आए। बहुत ज्यादा खुश है। तो आपको देख के पता चलेगा कि भाई एग्जाम अच्छा हुआ है। ठीक है? अभी नेट का रिजल्ट आएगा और आपके दोस्त को आप देखोगे। तो देखते ही आप समझ जाओगे सिलेक्शन हुआ है या नहीं हुआ है। साथ वाले जो जितने भी मतलब

13:35 कोई भी किसी को भी देख के आप समझ जाते हो। छोटे बच्चे होते हैं छोटा-मोटा झूठ बोलते हैं तो उनकी शक्ल देख के हम उनको पकड़ लेते हैं। क्यों? क्योंकि उनके चेहरे के एक्सप्रेशन जो हैं वो चेंज हो जाते हैं कंप्लीटली। वो कंप्लीटली ही बदल जाते हैं। इतने डरे और सहमे खड़े रहते हैं वो। तो एक्सप्रेशन से ही हमें पता चलता है। ठीक है? तो इसका आंसर आंसर नहीं। इसका मतलब क्या है? कानेसिक्स में कीवर्ड आपको क्या याद रखना है? बॉडी लैंग्वेज, हावभाव और फेशियल एक्सप्रेशन। जैसे मम्मी गुस्सा कर रही है और गुस्सा हो तो आंखें बता देती हैं। हां, गुस्सा गुस्सा तो मतलब सामने वाला व्यक्ति आपको बोलेगा नहीं लेकिन आप उसके फेशियल एक्सप्रेशन से हावभाव से समझ जाओगे। बिल्कुल। इसके बाद में आता है हमारे पास में क्रोनॉमिक्स। क्रोनॉमिक्स का मतलब बताओ।

14:30 क्रोनॉमिक्स का मतलब बताओ। क्रोनॉमिक्स और क्रोमेटिक्स। क्रोनॉमिक्स को आप याद रख सकते हैं क्रोनोलॉजी से। क्रोनोलॉजी का मतलब क्या होता है? जहां टाइम की बात हो रही है तो वैसे ही क्रोनॉमिक्स में जब टाइम के थ्रू संचार होता है। समय से जब संचार होता है उसको हम बोलते हैं क्रोनॉमिक्स। कैसे होगा समय के माध्यम से संचार? आपने किसी को मैसेज किया और मैसेज का रिप्लाई जो है जब भी आप मैसेज करते हो सामने वाला पर्सन हमेशा इतना बिजी रहता है कि वो कभी आपका मैसेज देखता ही नहीं है। लेकिन टाइम पे नहीं देखता। दो दिन बाद में या चार-प घंटे बाद में रिप्लाई करता है। हमेशा ही इतना बिजी होता है। तो सामने वाला आपको नहीं बता रहा है कि आप उनकी प्रायोरिटी हो या नहीं। लेकिन आप समझ जाते हो। है ना? इस

15:16 एग्जांपल से आप सब लोग रिलेट करोगे। ठीक है? सबको अपनी-अपनी बातें याद आ रही होंगी आपको। तो क्रोनॉमिक्स का मतलब क्या है? कि जब समय ओनली समय के माध्यम से संचार हो जाए। फॉर एग्जांपल आपकी मीटिंग है और आपको जॉब इंटरव्यू के लिए जाना है तो 5:00 बजे का है तो आप 4:00 बजे 4:30 ही पहुंच जाओगे। आपको लेट नहीं होना। बिकॉज़ यू आर वेरी सीरियस फॉर दैट। लेकिन यही आपको किसी शादी में जाना है, किसी फ्रेंड से मिलने जाना है, तो हो सकता है कि हम थोड़े से लेट हो जाते हैं क्योंकि वो बहुत इनफॉर्मल चीज़ है, एंड औपचारिक चीज़ है। ठीक है? थोड़ा लेट हो गए तो क्या हो जाएगा? एग्जाम सेंटर है जैसे फॉर एग्जांपल वहां पर आप एकदम टाइम पे जाओगे। वहां पर लेट नहीं होगे। तो समय के थ्रू जब संचार होता है उसको हम बोलते हैं क्रोनॉमिक्स। ठीक है? इसके बाद में इससे मिलताजुलता एक शब्द है क्रोमेटिक्स। तो क्रोमेटिक्स क्या होता है? कलर। ठीक

16:03 है? कलर रंगों से संचार जब होता है वो आता है क्रोमेटिक्स के अंदर। क्या होता है? क्रोमेटिक्स के अंदर आता है जब रंगों के माध्यम से संचार होता है। अब रंगों के माध्यम से कैसे संचार हो सकता है? जैसे जो लोग वेजिटेरियन होते हैं वो एग या फिर नॉनवेज नहीं खाते तो वो कुछ भी खाने का सामान लेते हैं। उससे पहले उसपे एक लेबल देखते हैं। ग्रीन और रेड। तो उस ग्रीन या रेड कलर के लेबल से पता चलता है कि ये नॉनवेज है या वेज। इसके तो एग्जांपल बता दो। कितने सारे एग्जांपल हो सकते हैं इसके? इसके तो एग्जांपल्स की कमी नहीं है।

16:52 है ना? ऐसे सिंबल्स देखे हैं हमने अक्सर पैकेट्स पे। ठीक है? और इसके अलावा क्या बता रहे हैं? इसके अलावा जैसे आप बता रहे हो ट्रैफिक लाइट। ठीक है? बिल्कुल ट्रैफिक लाइट पे भी यही होता है कि आपके पास में तीन कलर होते हैं। जैसे ही रेड होता है आप समझ जाते हो कि आपको रुकना है। कोई आकर के आपको वहां नहीं बताता कि रुकना है। बट देन आल्सो यू स्टॉप। क्यों रुक जाते हो? क्योंकि इसका मतलब आपको पता है। येलो लाइट है तो इसका मतलब क्या है? कि रेड लाइट होने वाली है। रुक जाओ। और अगर ग्रीन लाइट है तो इसका मतलब क्या है? कि हां यू कैन गो। ऐसा होता है ना? तो ये क्या है? कलर। ऐसे ही नंबर प्लेट्स होती हैं। ठीक है? ज़ब्रा क्रॉसिंग। वेरी गुड। पर वो ज़ब्रा क्रॉसिंग जो है थोड़ा सिंबल और साइन वाली चीज में चला जाएगा। डॉक्टर का वाइट कोट वेरी गुड। सिग्नल का कलर सिंबल नहीं आएंगे

17:39 इसमें। सिंबल्स नहीं आएंगे। इसमें ओनली कलर्स आएंगे। जैसे एंबुलेंस का सिग्नल अगेन फिर से वही बात है। वो किसमें आएगा? वो वो भी किसमें आ जाएगा? सिग्नल वाली चीज़ जो है ना लाइन वाली चीज़ वो दूसरे कैटेगरी में आ जाएगी। इसमें नहीं आएगा। वाइट कलर डॉक्टर एग येलो रेड नॉनवेज ग्रीन वेज पुलिस पुलिस की ड्रेस भी इसमें नहीं आएगी वो आर्टिफेक्ट्स में चली जाएगी। ठीक है? आ गई बात समझ में? और इसके अलावा जैसे जो कैब्स होती हैं, टैक्सीज़ होती हैं, उनकी जो नंबर प्लेट होती है, उस नंबर प्लेट अगर येलो है तो हम समझ जाते हैं कि यह क्या है? टैक्सी का नंबर प्लेट है। डस्टबिनस वेरी गुड। जैसे कि हॉस्पिटल्स में डस्टबिनस होते हैं। ये मेडिकल वेस्ट के लिए है। ये ड्राई वेस्ट के लिए है। ये वेट वेस्ट के लिए है। उससे समझ जाते हैं। तो बहुत सारी कलर कोडिंग जो है वो होती है

18:26 जिसके थ्रू क्या होता है? संचार होता है। एक जो है पुलिस का भी सिंबल होता है। ऐसा यह ऐसा पुलिस का सिंबल होता है जो कि पुलिस की गाड़ियां होती हैं। या पुलिस ऑफिशियल्स जो होते हैं वो अपनी पर्सनल कार पे जो है ऐसा कुछ कदर करवा के रखते हैं। आपने देखा होगा। ठीक है? आपके अगर कोई फैमिली में है पुलिस में तो आपको पता होगा। तो इससे हम समझ जाते हैं कि किसकी गाड़ी है? पुलिस की गाड़ी है। आ गई बात समझ में? ईवी का ग्रीन वेरी गुड। जैसे इलेक्ट्रिक व्हीकल होते हैं तो उसका कैसे पता चलता है आपको कि यह जो है इलेक्ट्रिक व्हीकल है उसके ग्रीन ब्लेड से समझ जाते हो। ठीक है? ओके तो ये हो गया क्रोमेटिक्स अब ड्राइंग नहीं करेंगे। अब चलेंगे आगे। अब अगर हम आगे चलते हैं तो हमारे पास में

19:13 आता है हेप्टिक्स। और बताओ नाम बताओ मुझे। हेप्टिक्स हो गया। और हेप्टिक्स के बाद में क्या आ जाएगा? माइयोसिस। ठीक है और और फैक्टिक्स ठीक है ऑक्यूुलेसिक्स टच यस हेप्टिक्स के लिए कीवर्ड क्या है हेप्टिक्स के लिए यहां पर कीवर्ड है टच कि जब टच के माध्यम से किसके माध्यम से टच के माध्यम से स्पर्श के माध्यम से छूने से जब संचार होता है अब छूने से संचार कैसे होता है? बिल्कुल होता है।

19:59 स्पर्श लिखेंगे बेसिकली हम टच के थ्रू संचार कैसे हो सकता है? कोई एग्जांपल बताएगा कि टच के थ्रू जो है संचार कैसे हो सकता है? देखो जैसे कि किसी की पीठ थपथपानी है तो मैं तो शाबाशी ही दे रही हूं। तो हम पीठ थपथपाते हैं। उससे पता चलता है इलेक्ट्रॉनिकल और मैकेनिकल गुड टच बैड टच करंट लगना। वेरी गुड। हाथ में लाना। जितना फॉर्म आपका हैंडशक होगा उससे पता चलता है कि आप कितना ज्यादा कॉन्फिडेंट हैं और घर से गर्म बर्तन होता है। कोई हॉट यूटेंसिल है आप उसके हाथ लगाएंगे तो हाथ लगाते ही आपको पता चल जाएगा ये गरम है। आप अपना हाथ वापस खींच लेंगे। तो जब टच के थ्रू संचार होता है, टच के थ्रू कम्युनिकेशन होता है, उसको हम बोलते हैं हेप्टिक्स। वो आता है हेप्टिक्स के अंदर। हैंडशेक, पीठ थपथपाना। वेरी गुड। जैसे मम्मी होती है। ठीक है?

20:45 कैसे पुचकारती उनको लाड द्वार करती है। छोटे बच्चों का हम लाड करते हैं। जो हमारे पेट्स होते हैं उनका हम लाड करते हैं। तो बहुत सारी चीजें हैं। उसके बाद में आता है माइमेसिस। मायमेसिस में क्या है? नकल करना। बेसिकली अब मैंने क्या कहा था कि शब्द तो होंगे ही नहीं क्योंकि वो तो हमने सारे वर्बल में पीछे छोड़ दिए। इसमें क्या आता है? इसमें ओनली शब्दों के अलावा जो कुछ है ना सब कुछ आ सकता है। तो माय मैसेज इसमें नकल करना होता है। लेकिन आप बोल नहीं सकते। जैसे कि अमिताभ बच्चन उनका कोई फ़ेमस अह सिग्नेचर स्टेप है, कोई बॉडी लैंग्वेज है। जैसे किसीकिसी एक्ट की कोई चाल होती है। उस चाल को कॉपी करते समझ जाता है कि इस व्यक्ति की बात कर रहे हैं। तो वो आ जाएगा मायसिस में। किसी का हाथ का कोई एक्शन है। किसी का कोई भी तरीका है, खड़े होने का तरीका है, बैठने का तरीका है, खाने पीने का तरीका है। ठीक है? टू इमिटेट बेसिकली नकल करना। एग्ज़ाम में चैट जीपीटी यूज़ करना

21:31 मायमेसिस में नहीं आएगा। जैसे एसआरके का एक बहुत ही फेमस सा वो ये है सिग्नेचर स्टेप तो जो भी ऐसे करता है उससे हम समझ जाते हैं कि एसआरके की बात कर रहा है ये है माइसेस स्मेल उसके बाद में आता है ऑल प्रैक्टिस ऑल प्रैक्टिस में क्या आता है स्मेल ठीक है स्मेल के थ्रू अब स्मेल अच्छी भी हो सकती है बुरी भी हो सकती है भाई आप घर में जा एंटर कर रहे हो एंटर होते हो खाने की बहुत अच्छी खुशबू आ रही है तो आप उसे समझ जाते हो कि कुछ ना कुछ अच्छा बन रहा है ठीक है कहीं से आप निकल रहे हो अगरबत्ती की खुशबू आ रही है उसे समझ समझ जाएंगे। किसी ने बहुत अच्छा परफ्यूम लगाया है तो उसकी स्मेल से आप समझ जाएंगे कि बहुत अच्छा परफ्यूम है। चॉकलेट की स्मेल आ रही है। कॉफी की स्मेल आ रही है। तो जब स्मेल के थ्रू गंध के थ्रू संचार होता है उसको हम बोलते हैं ऑल प्रैक्टिक्स। देखो मैं ज्यादा नहीं लिख रही हूं। ओनली जो है

22:17 एक-ए एक-एक कीवर्ड लिखा है मैंने। इतना ही आपको याद रखना इनफ है। इसके बाद में आता है ऑक्युलास्टिक्स। ऑक्युलेटिक्स में क्या आएगा बताओ? हम पिज़्ज़ा स्मेलवा ओके लेसिंस में आता है आई मूवमेंट कि मम्मी घर पे गेस्ट आए गेस्ट आए थे दो समोसे थे चार दो बचे हुए हैं और गेस्ट बोल रहे हो बेटा खा लो फिर आप बोल रहे हो नहीं नहीं नहीं नहीं बेटा खा लो फिर बेटा ने हाथ आगे बढ़ाया मम्मी की तरफ गलती से नजर चलेगी मम्मी निकाल रही थी आंखें तो उस उन आंखों से आप समझ जाते हो उठा मत लेना वरना समोसे की जगह कुछ और खाना पड़ जाएगा चप्पल आएगी ठीक है ऐसे ही जैसे बुआ जी घर से जा रही हैं आपको पैसे दे रही हैं तो आपको बहुत मन है ले लूं लेकिन मम्मी की आंखें

23:02 दिख रही हैं तो उन आंखों से आप डर जाते हो। आंखें चार होना, आंखें लाल होना। ये सब कहावतें क्यों हैं? क्योंकि आंखें भी बहुत सारी चीजें क्या करती हैं? कम्युनिकेट करती हैं। ठीक है? तो जब आंखों के थ्रू आई मूवमेंट के थ्रू संचार होता है, कम्युनिकेशन होता है उसको हम बोलते हैं ऑगुलेसिक्स। देखो जो जो कंफ्यूजिंग वाले हैं ना वो मैंने साथ-साथ लिखे हैं ताकि कंफ्यूजन आपका क्लियर हो जाए। ठीक है? इसके बाद में और क्या है हमारे पास में? प्रॉक्समिक्स। प्रॉक्समिक्स क्या होता है? प्रॉक्सिममिक्स है। वी हैव पैरा लैंग्वेज।

23:47 बताओ इसका मतलब बताओ। डिस्टेंस स्पेस। यस। फिजिकल स्पेस। बेसिकली इसके लिए कीवर्ड आपको याद रखना है। फिजिकल स्पेस। क्या याद रखोगे? फिजिकल स्पेस भौतिक दूरी। किस चीज की दूरी? वही जिस डिस्टेंस पर आप अपने फ्रेंड के साथ बैठते हैं या जिस दूरी पे अपने फ्रेंड पे फ्रेंड के साथ फैमिली के साथ बैठते हैं उसी डिस्टेंस पे जो है आप ऑफिस में लोगों के साथ नहीं बैठते। एक प्रॉपर डिस्टेंस मेंटेन करके एक तरीके से बैठते हैं तो वो आता है कि वो डिस्टेंस जिस डिस्टेंस पे आप बैठे हो, खड़े हो वो आपके रिलेशनशिप को दिखाता है नेचर ऑफ़ रिलेशनशिप कि फॉर्मल है, इनफॉर्मल है, औपचारिक है, अनौपचारिक है। तो उसको हम बोलते हैं प्रॉक्सिममिक्स। ठीक है? फिर बारी आती है पैरा लैंग्वेज

24:33 की। पैरा लैंग्वेज में काफी सारी चीजें आ जाएंगी। पैरा लैंग्वेज में जैसे आपकी पिच आ जाएगी, आपकी टोन आ जाएगी, आपकी वॉल्यूम आ जाएगी। वोकेलिक्स जो है वो पैरा लैंग्वेज से ही निकला है। ठीक है? तो पैरा लैंग्वेज बेसिकली क्या है? लैंग्वेज का मतलब क्या है? भाषा। और पैरा लैंग्वेज का मतलब क्या है? भाषा को बोलने का तरीका। ठीक है? इतनी बात आपको याद रखनी है। तो पैरा लैंग्वेज के अंदर क्या होता है कि जैसे कि आप रूम में बैठे हो। बाहर से चिल्लाने की आवाज़ आ रही है गुस्सा करने की। क्या बोला वो आपको नहीं सुना। पर उस टोन से आप समझ गए। ठीक है? आपके पास में फोन आया। आपके फ्रेंड का बहुत पैनिकिक सिचुएशन है। बहुत जल्दी-जल्दी हाइपर होके बोल रहा है। तो बोलने के तरीके से आप समझ गए। ठीक है? घर पर फोन करते हो। आप बहुत दुखी हो तो आपने बताया नहीं। लेकिन आपकी जो टोन है उससे समझ जाते हो कि कुछ तो क्या है? गड़बड़ चल

25:20 रही है। घर वाले समझ जाते हैं या घर से फोन आया तो टोन से आप बहुत कुछ समझ जाते हो। तो जो बात करने का तरीका होता है कि कोई चीज बहुत इंपॉर्टेंट है। फॉर एग्जांपल जैसे कि आग लग गई कहीं पे तो कोई आकर के ऐसे नहीं बोलता। अरे यार आग लग गई ऐसे नहीं बोलता। ठीक है? वो बहुत हाइपर हो के बोलता है। तो उससे पता चलता है कि कोई बहुत बड़ा कोई बहुत बड़ी प्रॉब्लम है। ठीक है? ये खुशी की बात होती है तो आपकी आवाज में अलग एक्साइटमेंट होता है। तो आवाज के जो मॉड्यूलेशंस हैं, जो पिच है, वॉल्यूम है, जो टोन है वो सब किस में आता है? वो सब आता है पैरा लैंग्वेज में। सारी चीजें कर ली हमने। आई थिंक कुछ बचा हुआ है क्या? इसके अलावा क्या बचा हुआ है? बताओ आर्टिफेक्ट्स है और क्या बचा हुआ है?

26:08 आर्टिफेक्ट्स के अंदर क्या होता है? और कुछ बचा हुआ है के सारे टाइप्स कर लिए या कुछ छूटा है। फोनमिक्स ध्वनि विज्ञान वो आप कहीं ना कहीं पैरा लैंग्वेज में उसको डाल सकते हो। बस स्टेटरी ठीक है और ठीक है? देखो, अह सबसे पहले है आर्टिफेक्ट्स। आर्टिफेक्ट्स में क्या आते हैं? आर्टिफेक्ट्स में आते हैं आपके साइन और सिंबल्स। साइन और सिंबल्स का मतलब क्या है? मतलब कुछ ऐसे स्पेसिफिक चीज़ जो किसी पर्टिकुलर चीज़ से जुड़ी हुई है जिसको देख

26:54 के आप समझ जाते हो। फॉर एग्जांपल आप जा रहे हो रास्ते में सीट बेल्ट नहीं लगा रखा। लेकिन ट्रैफिक पुलिस को देखते ही आप सीट बेल्ट लगा लेते हो। तो ट्रैफिक पुलिस ने आपको नहीं बताया कि मैं पुलिस में हूं। लेकिन उनकी यूनिफार्म देख के आप वहां समझ गए कि ये ट्रैफिक पुलिस है। तो फॉर एग्जांपल यूनिफार्म इसके अंदर आ जाएगी। ठीक है? इसके अलावा जैसे जो पंजाबी लोग होते हैं वो टर्बन लगाते हैं। उसको देख के हम समझ जाते हैं पंजाबी है। ठीक है? इसके अलावा जो मुस्लिम लेडीज़ होती हैं वो हिजाब पहनती है तो उनको देख के हम समझ जाते हैं। बहुत सारी चीजें हैं। बहुत सारी कलर कोडिंग है। इसमें कलर्स भी आ जाएंगे। सिंबल्स भी आ जाएंगे। काफी सारी चीजें इसके अंदर आ जाएंगी। जैसे एंबुलेंस होती है। एंबुलेंस का जो प्लस का साइन है उससे समझ जाते हैं। कुछ-कुछ लोग अपनी गाड़ी पे एडवोकेट का साइन बनवा के रखते हैं। इससे हम समझ जाते हैं कि ये लॉयर हैं। ठीक है? तो बेसिकली कुछ सिंबल्स होते हैं।

27:40 सिंबल्स और साइंस जो किसी पर्टिकुलर चीज को दर्शाते हैं वो आता है आर्टिफेक्ट्स के अंदर। गस्टेटरी के अंदर क्या आता है? टेस्टिंग। टेस्ट। टेस्ट के थ्रू टेस्टिंग के थ्रू जब अह कम्युनिकेशन होता है उसको बोलते हैं गस्टेटरी। कैसे कि आपने कुछ खाया? नमक ज़्यादा है। कैसे पता चलेगा? खा के तो पता चलेगा। ठीक है? इसमें नमक नहीं है, चीनी ज्यादा है, चीनी नहीं है। कैसे पता चलेगा? टेस्ट से। तो टेस्ट के थ्रू जब संचार होता है, उसको हम बोलते हैं गस्ट्रीटरी। ठीक है? हो गया सारा कुछ बचा हुआ है अभी भी? एक बार जो है हम देखते हैं इसको रिवाइज़ करते हैं फटाफट। सबसे पहले हमने देखा काइनेसिक्स जिसके अंदर क्या आता है? कानेसिक्स में आता है आपका बॉडी लैंग्वेज, हावभाव, फेशियल एक्सप्रेशन। फिर हमने देखा

28:27 क्रोनॉमिक्स जो टाइम से संचार होता है उसको क्रोनॉमिक्स बोलते हैं। स्क्रीनशॉट ले सकते हो आप साथ-साथ में। और उसके बाद में क्रोमेटिक्स जब रंगों के माध्यम से संचार होता है। उसके बाद में हमने देखा हेप्टिक्स जो टच के थ्रू होता है। मायमेसिस जब नकल किसी की करते हैं और ऑलफक्टिक्स स्मेल के थ्रू ऑकुलस्टिक्स आई मूवमेंट। प्रॉक्सिममिक्स होता है फिजिकल स्पेस। पैरा लैंग्वेज है पिच टोन वॉल्यूम। किस तरीके से आप कोई भी बात करते हैं और आर्टिफेक्ट्स है साइंस और सिंबल्स और गस्टेटरी क्या है टेस्ट स्वाद के थ्रू जब होता है ठीक है हो गए सारे यस और नो ये सब समझ में आया आपको एक बार फटाफट से कमेंट करके बता दो यस और नो आ गया समझ में अब हम चलते हैं आगे अब जो बाकी के टाइप्स हैं वो हम करेंगे हिंदी में नहीं है ये शब्द ये

29:14 मैंने पहले ही बोल दिया था हिंदी में नहीं है ये हिंदी रूपांतरण भी इनका यही रहने वाला है क्योंकि लैटिन भाषा के शब्द हैं अब हम शुरू करते हैं सबसे पहले इंटर इंटर इंट्रा से। ठीक है? इंट्रा पर्सनल जिसको हम बोलते हैं अंतः वैक्तिक। सेकंड नंबर पे आता है हमारे पास में इंट्रा पर्सनल। इंटर सॉरी इंट्रा तो कर लिया हमने इंटर पर्सनल। जिसको हम बोलते हैं अंतर वैक्तिक। इसके बाद में हमारे पास में आता है थर्ड नंबर पे आपका ग्रुप कम्युनिकेशन।

30:03 देखो मैं फ्लो फ्लो में कुछ गलत लिख जाऊं। कुछ सीखें तो मुझे बता देना एक बार। ठीक है ना? इंडोक्सो जैसा ही है। यह हम इसके बाद में फोर्थ नंबर पे हमारे पास में आता है मास कम्युनिकेशन जनसंचार हां जी अब देखो ये जैसे मैंने लिखा है आपको इसको वैसे ही पढ़ना है। सबसे पहले आता है इंट्रा पर्सनल जिसको हम बोलते हैं अंतः वैयक्तिक। अंतः वैयक्तिक संचार क्या

30:50 होता है? जब आप खुद से ही खुद बातचीत करते हैं वो आता है अंतः व्यक्तिक में। अब इसके अंदर यह तो होगा नहीं कि आप बड़बड़ाने लग जाए। कुछ लोग ऐसे भी करते हैं। लेकिन जब भी आप कुछ बैठ के सोच रहे हो जैसे आजकल जो है आप लोग इंट्रा पर्सनल कम्युनिकेशन अंतः व्यक्ति संचार बहुत ज्यादा करते हो। कैसे? जो पूरे दिन आप सोचते रहते हो। स्ट्रेस लेते रहते हो। कैसे होगा? क्या होगा? इतने दिन बचे हैं होगा नहीं होगा यह सारी चीज़ यह आता है इंट्रा पर्सनल में अंतः व्यक्तिक में जिसके अंदर प्रेयर्स भी आ जाएंगी प्रार्थना करना मेडिटेशन भी आ जाएगा बेसिकली खुद के बारे में सोच नॉट ओनली खुद के बारे में जब आप खुद ही खुद से कम्यनिकेट करते हो

31:45 तो इंट्रा पर्सनल या अंतः वैयक्तिक क्या होता है? अंतः व्यक्ति के अंदर आप जब आप खुद ही खुद से बातचीत करते हैं, किसी के बारे में सोच रहे हो, कुछ भी कर रहे हो, वह आएगा अंतः व्यक्तिक में। फिर आता है इंट्रापर्सनल। इंट्रापर्सनल क्या है? दो या दो से ज़्यादा लोग जब आपस में बात करते हैं, वह आता है इंटरपर्सनल के अंदर। इंटरपर्नल अंतर व्यक्ति में क्या आता है? दो या दो से ज्यादा लोग जब आपस में बात करते हैं। अब इसका मतलब ये नहीं कोई लिमिट हमने एक नंबर लगा दिया कि भाई चार लोग बात करेंगे तो इंटरपर्नल है। पांच लोग करेंगे। नहीं है। एक रफ आईडिया आप मान सकते हो। पांच छह लोग तक चारप लोग तक इससे आगे आपको नहीं जाना है। क्योंकि 10-15 लोग अगर आपस में बात कर रहे हैं तो वो इंटरपर्सनल नहीं आता। वह फिर चला जाएगा समूह संचार में। कहां चला जाएगा? समूह संचार में। ग्रुप कम्युनिकेशन में चला जाएगा।

32:42 ठीक है? तो सबसे पहले आता है इंट्रा पर्सनल अंतः व्यक्तिक जिसके अंदर आप खुद ही खुद से बातचीत करते हो और इंट्रा पर्सनल अंतरक्तिक में जब दो या दो से ज्यादा लोग आपस में बातचीत करते हैं और ग्रुप कम्युनिकेशन में क्या आता है कि जब सात आठ लोग 10 लोग 15 लोग 20 लोग आपस में बातचीत कर रहे हैं कम्युनिकेशन कर रहे हैं वो आता है ग्रुप कम्युनिकेशन में समूह संचार में इसके बाद आता है मास कम्युनिकेशन जनसंचार जनसंचार क्या होता है जनता के लिए संचार ठीक है जिसके अंदर अह सेंडर एक होता है और रिसीवर क्या होते हैं? बहुत सारे होते हैं। यह है एक सेंडर और यहां पर बहुत सारे क्या होते हैं? इसके रिसीवर होते हैं। जैसे कि ये क्लास तो ये क्लास मास कम्युनिकेशन की एग्जांपल हो सकती है। रेडियो है, टीवी है। इस यहां पर क्या होता है? सेंडर एक है। जैसे न्यूज़

33:27 एंकर तो एक ही होता है। लेकिन कितने लाखों करोड़ों लोग जो हैं वो उनको सुनते हैं। तो ये कैटेगरी वाइज़ लिखे हुए हैं। सबसे छोटा ये फिर उससे बड़ा ये उससे बड़ा उससे बड़ा ये। तो एक टाइप है ये। इसके बाद में एक टाइप और आता है हमारे पास में जो बहुत इजी है जिसको हम बोलते हैं फॉर्मल औपचारिक संचार क्या होता है यह नाम से ही समझ में आ रहा है हमको इसके बाद में है इनफॉर्मल कम्युनिकेशन

34:14 जिसमें होता है अनौपचारिक संचार। ठीक है? यहीं पर एक चीज निकल कर के आती है। एक और टाइप निकल कर के आता है जिसको हम कहते हैं ग्रेप वाइन। कहीं पर भी ग्रेप वाइन को आप अंगूर की लता अंगूर की बेल अगर लिखा हुआ देखें तो कृपया करके उसको ना पढ़ें क्योंकि उसको हिंदी में भी आपने ग्रेप वाइन ही बोलना है। अब देखो इनका मतलब क्या होता है? सबसे पहले आता है फॉर्मल कम्युनिकेशन औपचारिक संचार। औपचारिक संचार क्या होता है? जो ऑफिस में बातचीत करते हैं। जिन लोगों के साथ आपके फॉर्मल रिलेशंस हैं, आपके टीचर्स हो गए या मेनली ऑफिस का जो सेटअप है वो आता है। जिनके साथ हमारे काम से प्रोफेशनल टर्म्स होते हैं। एक सेट रूल ऑफ़ रूल होता

35:00 है, कंडक्ट होता है, कोड ऑफ़ कंडक्ट होता है कि भाई इस तरीके से बात करने आते गुड मॉर्निंग बोलना है। अब जरूरी नहीं है कि उठते ही घर में हम गुड मॉर्निंग बोले। आप कैसे हो? आपका दिन अच्छा ऐसी बातें बोले नहीं बोलते। लेकिन ऑफिस में आने के बाद में ये सारे काम आपको करने पड़ते हैं। क्यों? क्योंकि वो एक सेट रूल के तहत है। ऑफिस में अगर आपको जीने चिल्लाने का मन कर रहा है तो आप नहीं चिल्ला सकते क्योंकि वो आपका घर नहीं है। तो इसलिए जब हम एक सुसभ्य तरीके से औपचारिक तरीके से एकदम फॉर्मल तरीके से बात करते हैं वो आता है फॉर्मल कम्युनिकेशन के अंदर और उसके बाद में आता है इनफॉर्मल संचार। इनफॉर्मल क्या है? इसका उल्टा जो आप अपने फ्रेंड्स फैमिली से बात करते हैं जिसमें कोई कोड ऑफ़ कंडक्ट नहीं है। कोई सेट रूल नहीं है, कोई तरीका नहीं है कि ऐसे ही बात करनी है। वो आ जाता है इनफॉर्मल कम्युनिकेशन के अंदर। इंटर और इंट्रा की हिंदी गलत है। अच्छा

35:48 क्या गलत है भाई? देखो मुझे तो यही पता है और गलत है तो हम इसको करेक्ट कर देंगे। लेकिन अभी के लिए मुझे यह पता है। मैं इसको चेक कर लूंगी। अगर कुछ चेंज होगा तो हम बता दूंगी। इनफॉर्मल कम्युनिकेशन के अंदर क्या होता है? फ्रेंड्स फैमिली से जो आप बातचीत करते हैं वो आती है इनफॉर्मल के अंदर। फिर अगर हम बात करें इसके बाद में ग्रेप वाइन कम्युनिकेशन। तो ग्रेप वाइन कम्युनिकेशन एक अलग टर्म है जिससे एनटीए काफी क्वेश्चन पूछता है और मोस्ट रिपीटेड क्वेश्चन है ये। ग्रेप वाइन कम्युनिकेशन के अंदर क्या होता है? बताओ एक बार कमेंट करके बताओ फटाफट से। ग्रेप वाइन कम्युनिकेशन के अंदर क्या होता है? ग्रेप वाइन संचार में जब ऑफिस की ही बात ठीक है? ऑफिस की बात ऑफिस के बाहर की

36:34 जाती है। उसको बोलते हैं हम ग्रेप वाइन। अब जरूरी नहीं है कि इसमें सच हो। इसमें बहुत ज्यादा चांसेस होते हैं कि इसमें अफवाह होती है। बेसिकली चुगली लेकिन चुगली किसकी? ऑफिस की ही होगी। ठीक? ऑफिस की ही बातें होंगी कि फॉर एग्जांपल आपका कोई फ्रेंड है या साथ में आपका कोई काम करते हैं। सुबह बॉस ने उनको बुलाया और मीटिंग करी और आपने उस बात का क्या बताया किसी को कि उनको तो बॉस ने बहुत डांटा। फिर वो जो पर्सन था उसने किसी और को क्या बताया कि वो एक्स व जेड जो थे उनको तो जॉब से निकालने की बात चल रही है। फिर वो बात आगे गई तो उन्होंने क्या बताया कि इनको तो जॉब से निकाल ही दिया है। ठीक है? इसको बोलते हैं ग्रेप मैन कम्युनिकेशन कि बात का पतंगड़ बनाना या रियल बात ना होना। ऑफिस की बातें जब ऑफिस के बाहर करी जाती हैं तो उसको हम बोलते हैं ग्रेप मैन कम्युनिकेशन और अफवाह के रूप में ज्यादा होती है। इन बातों पे बिलीव नहीं किया जा सकता। इनके

37:21 अंदर सच होने की संभावना काफी कम होती है। नेचर में इनफॉर्मल होती है, अनौपचारिक होती हैं क्योंकि कोई सेट रूल नहीं है। कोई कोड ऑफ़ कंडक्ट नहीं है। ज्यादातर चीज़ क्या है? झूठ है, अनबिलीवेबल हैं। जिनके ऊपर हम विश्वास नहीं कर सकते। इसको हम बोलते हैं ग्रेव मैन कम्युनिकेशन। हां, राई का पार्ट भी बोल सकते हो। मतलब कोई बात ही नहीं होती। बेसलेस बात हो सकती है। और ऑफिस की बात ऑफिस के बाहर करने का मतलब ये नहीं काम की बात। काम की बात नहीं। ऑफिस की गॉसिप बेसिकली। ठीक है? ऑफिस की गॉसिप ऑफिस की चुगली इसने कह दिया वो ऐसी है। वो वैसा है। ये सारी बातें ये सब आता है ग्रेप वाइन कम्युनिकेशन के अंदर। ठीक है? समझ में आ रहा है? समझ में तो आ रहा है ना? फॉर्मल कम्युनिकेशन जब औपचारिक संचार जो ऑफिस में

38:08 बातचीत होती है हमारी ठीक है उसको बोलते हैं औपचारिक जो एक सेट पैटर्न के थ्रू होती है एक तरीके से बोलना है हर किसी जो मुंह में है वो नहीं बोल सकते हैं ठीक है ये होता है फॉर्मल कम्युनिकेशन के अंदर इसके बाद हम देखेंगे आपका हॉरिजॉन्टल कम्युनिकेशन ठीक है और वर्टिकल लंबवत और इसके बाद में साथ में हम देखेंगे डायगोनल विज्ञणीय संचार होता क्या है? हां मेटा

38:56 कम्युनिकेशन भी देखेंगे। असंक्रोनसंक्रोनस भी देखेंगे। बिल्कुल मैं खत्म करूंगी ना अभी ये टॉपिक उससे पहले आपसे पूछूंगी कुछ बच गया है तो वो मैं पढ़ा दूंगी कोई इशू नहीं है। देखो हॉरिजॉन्टल कम्युनिकेशन क्या होता है? जब समान स्तर के लोग सेम लेवल के लोग जब आपस में बातचीत करते हैं उसको हम बोलते हैं हॉरिजॉन्टल कम्युनिकेशन। कैसे होती है समान स्तर पे बातचीत? एग्जांपल बताओ जरा। एग्जांपल बताते रहो। तो मुझे तो लगना चाहिए कि कोई पढ़ रहा है। समान स्तर में होने वाला संचार सेम लेवल के लोगों के बीच होने वाले संचार की घटना जो है उसको हम कहते हैं आपका हॉरिजॉन्टल कम्युनिकेशन क्षैतिज संचार क्या होता है इसके अंदर? जैसे कि अपने कजिन से बात कर रहे हो। ठीक है? वह शायद इस संसार में मम्मी मम्मी सब आपस में बात कर रहे हैं। आपकी मम्मी, आपकी चाची, आपकी ताई सब लोग और फिर दादाजी लोग

39:43 हैं। सब आपस में बात कर रहे हैं। सेम लेवल के लोग आपस में बात कर रहे हैं। वो आता है हॉरिजॉन्टल के अंदर क्षैतिज संचार के अंदर। स्कूल के अंदर आप सब लोग फ्रेंड्स आपस में बात कर रहे हो। ठीक है? ऑफिस में कलीग्स आपस में बात कर रहे हैं। और जैसे स्कूल के अंदर टीचर्स जो हैं वो सब आपस में बात कर रहे हैं। तो ये सब किस में आता है? ये सब आता है क्षैतिज धन चार में हॉरिजॉन्टल कम्युनिकेशन के अंदर। जब सेम लेवल के समान स्तर के लोग जो हैं वो आपस में बातचीत करते हैं उसको हम कहते हैं हॉरिजॉन्टल कम्युनिकेशन। समझ में आया? हॉरिजॉन्टल आ गया समझ में? हां। इस सिस्टर सिस्टर से बात कर रही है। ऐसा जरूरी नहीं है सिस्टर ब्रदर से भी बात कर सकती है। पर लेवल सेम होना चाहिए। लेवल सेम का मतलब क्या है? कोई चीज़ कॉमन होनी चाहिए उनके ऊपर कि जैसे स्कूल में स्टूडेंट्स हैं तो वो सभी स्टूडेंट्स हैं। इसलिए वो सेम लेवल

40:31 पे हैं। आपके कजिंस हैं तो वो सारे के सारे क्या हैं? सेम ऐज के हैं। आप सब लोग एक जनरेशन से बिलोंग करते हैं। इसलिए आप लोग हॉरिजॉन्टल कम्युनिकेशन में आते हैं। फिर अगर हम बात करें वर्टिकल तो वर्टिकल के अंदर दो टाइप से होता है। एक है टॉप डाउन और एक है बॉटम अप। क्या होता है? टॉप डाउन और बॉटम अप। अब ये मत बोलना इसको डाउन टॉप भी तो बोल सकते थे। ये बोल सकते थे बट इसको ऐसे ही बोलते। क्यों बोलते हैं? अच्छा लगे इसलिए बोल देते हैं। ठीक है? टॉप डाउन और बॉटम अप में क्या होता है? हॉरिजॉन्टल में जैसे हमने देखा कि सेम लेवल, सेम लेवल। तो हॉरिजॉन्टल से हमें पता चला कि बहुत सारे लेवल्स हैं। तो वर्टिकल के अंदर क्या होता है? वर्टिकल कैसे होता है? ये होता है ना वर्टिकल। इसको बोलते हैं वर्टिकल। तो वर्टिकल के अंदर क्या है? नीचे एक लेवल से जब बात

41:16 आते-आते-आते ऊपर तक जाती है उसको हम बोलेंगे बॉटम अप। या फिर ऊपर से बात आते-आते आते-आते नीचे आती है। उसको हम बोलते हैं टॉप से डाउन। दैट इज़ टॉप डाउन अप्रोच। तो हॉरिजॉन्टल में सेम लेवल पे होती है लेकिन वर्टिकल में अलग-अलग लेवल में होती है। अब अलग-अलग लेवल में क्या है? स्टेप बाय स्टेप या तो ऊपर से नीचे या फिर नीचे से ऊपर जाएगा। जैसे कि अगर ऑफिस में बात करें ऑफिस के अंदर जो सीईओ हैं ठीक है? जो कंपनी के मालिक हैं वो सीईओ से कुछ बोलेंगे। फिर सीईओ जो है वो नीचे कुछ दूसरे हेड से कुछ बोलेगा। फिर जो हेड हैं वो मैनेजर से कुछ बोलेंगे। फिर मैनेजर जो है वो एचआर से कुछ बोलेंगे। फिर एचआर एम्प्लाइजस को मैसेज भेजेंगे। यह क्या हुआ? ये कैसा कम्युनिकेशन हुआ? टॉप डाउन कम्युनिकेशन क्योंकि ऊपर से नीचे चलता हुआ

42:01 आ रहा है। इसके अलावा बॉटम अप बॉटम अप क्या हो सकता है? जैसे कि स्कूल में कोई परेशानी है तो बच्चे जो है टीचर से कंप्लेंट करेंगे। क्लास मॉनिटर को बोलेंगे। फॉर एग्जांपल क्लास मॉनिटर जो है टीचर को बोलेगा। फिर टीचर जो है प्रिंसिपल को बोलेंगे। प्रिंसिपल जो है ऊपर मैनेजमेंट में बोलेंगे। ये क्या हुआ? नीचे के लेवल से ऊपर तक बातचीत गई। घर का एग्जांपल लें। तो घर में क्या होता है? जैसे कि अह आपको परमिशन चाहिए। ठीक है? पिकनिक पे जाना है तो आप मम्मी को बोलेंगे, मम्मी पापा को बोलेंगे, पापा फिर ऊपर और दादाजी हैं तो उनको बोलेंगे या ताऊजी को बोलेंगे। यह क्या है? यह है वर्टिकल कम्युनिकेशन। क्योंकि लेवल बाय लेवल स्टेप बाय स्टेप होता आ रहा है। या तो ऊपर से नीचे या फिर नीचे से ऊपर। इसको बोलते हैं हम वर्टिकल कम्युनिकेशन या फिर लंबवत संचार। ठीक है? अब एक एग्जांपल बताओ

42:47 मुझे। वर्टिकल का और हॉरिजॉन्टल का जो है फटाफट से एक एग्जांपल बता दो। जल्दी बताओ। बॉस टू एंप्लई ठीक है वर्टिकल टीचर एंड स्टूडेंट एचओडी टू प्रोफेसर सबोर्डिनेट टू सुपीरियर ठीक है देखो अब अगर हम देखते हैं डायगोनल

43:34 तो हॉरिजॉन्टल क्या था ये वर्टिकल क्या था ये डायनल क्या होगा? ये क्या मतलब है इस बात का? जैसे हम एग्जांपल लेते हैं एक कॉलेज का। एक कॉलेज के अंदर अगर सारे स्टूडेंट्स आपस में कोई बात कर रहे हैं। आपस में बातचीत चल रही है। वो है हॉरिजॉन्टल। अगर वो स्टूडेंट अपने प्रोफेसर से कुछ कह रहे हैं। प्रोफेसर एच ओ डी से कह रहे हैं वो बात। एचओडी प्रिंसिपल को बोल रहे हैं। प्रिंसिपल ऊपर चांसलर को बोल रहे हैं। ये क्या हो गया? वर्टिकल कम्युनिकेशन हो गया। या फिर इसका रिवर्स कर लो। लेकिन मान लो कि दो कॉलेज हैं और दोनों कॉलेज कोई फंक्शन या कोई प्रोग्राम ऑर्गेनाइज कर रहे हैं तो आपस में कम्युनिकेट करना पड़ेगा। तो जब एक कॉलेज के प्रिंसिपल दूसरे कॉलेज के किसी डिपार्टमेंट के एचओडी से बातचीत करेंगे वो होगा डायगोनल। डायगोनल के अंदर

44:20 क्या होता है? अलग-अलग डिपार्टमेंट तो होते ही हैं। यानी अलग-अलग ज़ोन तो होते ही हैं। लेकिन उनका लेवल भी क्या होता है? अलग होता है। लेवल भी सेम नहीं होता। कैसे? भाई यहां पर प्रिंसिपल है और ये जोड़ी है। तो, ये हो गया ना डायगोनल कम्युनिकेशन। तो डायगोनल कम्युनिकेशन के अंदर विकर्ण संचार के अंदर क्या होता है? दो अलग-अलग डिपार्टमेंट के लोग जब आपस में कम्युनिकेट करते हैं। जरूरी नहीं है कि वो सेम लेवल पे हो। वो अलग-अलग लेवल पे भी हो सकते हैं। उसको हम बोलते हैं डायगोनल कम्युनिकेशन। स्टूडेंट ऑफ़ प्रिंसिपल जो है वो डायगल कम्युनिकेशन में नहीं आएगा। जैसे एचओडी ऑफ़ पॉलिटिकल साइंस, टॉकिंग विद असिस्टेंट प्रोफ़ेसर विद अदर डिपार्टमेंट। बिलकुल ही आ सकता है। लेवल सेम नहीं होता। यही मैं बोल रही हूं। लेवल डिफ़रेंट होता है। बिलकुल। ठीक है? तो हॉरिजॉन्टल में क्या है? सेम लेवल है। वर्टिकल में क्या

45:05 है? ऊपर से नीचे या फिर नीचे से ऊपर। और डायगोनल में क्या है? डिपार्टमेंट ही अलग-अलग है। दो अलग-अलग लोगों से दो अलग-अलग ऑफिस के लोग हो सकते हैं। कोई भी हो सकता है। ठीक है? लेकिन वो डिफरेंट है। सेम लेवल या सेम जगह तो है ही नहीं। और वहां लेवल भी क्या है? अलग होता है। इसको हम बोलते हैं डायगोनल या विकिरणीय संचार। समझ में आया? आ गया समझ में? सबको एक बार बता दो। अब यहां पर हमारे पास में एक टर्म आता है जिसको हम बोलते हैं मेटा कम्युनिकेशन। क्या होता है मेटा कम्युनिकेशन? बताओ जरा।

45:52 मेटा कम्युनिकेशन या अधिसंचार क्या होता है? या मेटासंचार क्या होता है? वेरी गुड। कम्युनिकेशन अबाउट कम्युनिकेशन संचार के बारे में संचार अब इसका मतलब क्या है ये भी बताओ संचार के बारे में संचार का मतलब क्या है ये भी बताओ संचार के बारे में संचार का मतलब क्या है क्या समझते हो जनसंचार नहीं है नो मेटा कम्युनिकेशन का मतलब जनसंचार नहीं होता संचार के सोचने के बारे में सोचना वो वो तो मेटा कॉग्निशन था। रुको वो मेटा कॉग्निशन था। मेटा कम्युनिकेशन नहीं था। यह मेटा कम्युनिकेशन है। एग्जांपल से बताओ। फॉर एग्जांपल आपने अपने किसी

46:38 भाई-बहन के साथ मजाक किया और वो जो है बहुत नाराज हो गए आपसे। क्योंकि उनको लगा कि आप सीरियसली बोल रहे हो। तो फिर जाके आप उनको समझाते हो कि देखो मैं तो हंस रहा था। देखो मेरा तो मतलब यह नहीं था। तो आपके संचार में आपकी बातों के पीछे छुपा हुआ जो रियल भाव है जो भाव उनके अंदर निहितार्थ है जो आपका इंटेंशन है आपने किस इंटेंशन से बात बोली थी उसको हम कहते हैं मेटा कम्युनिकेशन अधिसंचार ठीक है छुपा हुआ भाव आपकी बातों में जो छुपा हुआ भाव होता है छुपा हुआ भाव उसको हम बोलते हैं मेटा कम्युनिकेशन जो आपने स्कूल के अंदर व्याख्याएं करी है ना कवि क्या कहना चाहता है कवि का क्या भाव है? तो यह है वह कवि का भाव कि कवि यह कहना चाहता है। तो जब भी आप कोई बात बोलते हैं उस बात के पीछे शब्द

47:24 कुछ और हैं लेकिन मतलब कुछ और है। जैसे मम्मी बहुत गुस्सा हैं। आप मम्मी से पूछेंगे कि आप नाराज हो? तो बोलेंगे नहीं मैं नाराज नहीं हूं। लेकिन शब्द तो ये हैं लेकिन उनके पीछे के इमोशंस देखो। उनके पीछे के जो है वो भाव देखो। ठीक है? जब भी आप किसी लड़की से पूछोगे कि आर यू ओके? क्या तुम ठीक हो? तो बोले हां ठीक हूं। लेकिन उसका मतलब क्या है? ठीक नहीं हो। ऐसा जनरली बोला जाता है। बट ऐसा होता नहीं है। ठीक है? तो आपने जो बात बोली है जो भी संचार किया है उस संचार के पीछे का इंटेंशन या आपकी बातों के पीछे छुपे हुए भाव जो हैं जो छुपा हुआ मैसेज है जो रियल बात है ठीक है उसको हम बोलते हैं मेटा कम्युनिकेशन कुछ नहीं हुआ का मतलब क्या है कुछ हुआ है को बोला मुंह से क्या बोला कुछ नहीं हुआ लेकिन मतलब क्या है बहुत कुछ हुआ है ठीक है यह होता है मेटा कम्युनिकेशन अधिसंचार

48:11 जिसको हम कहते हैं इसके बाद में हमारे पास में आता है असिंक्रोनस और सिंक्रोनस अतुल्यकालिक और सिंक्रोनस समकालिक क्या मतलब है इन दोनों का? इन दोनों का मतलब कौन बताएगा? देखो अतुल्य कालिक क्या होता है? अलग-अलग समय पर अलग-अलग समय पर होने वाला संचार।

48:56 ठीक है? और इसमें क्या सिंक्रोनस में समकालिक में क्या होगा? एक टाइम पर। ठीक है? समान समय में। समान समय में होने वाला संचार। क्या मतलब है इन दोनों का? देखो। अतुल्यकालिक का मतलब क्या है कि आपने जो है मैसेज किया आपने मेल भेजा और आपके पास रिप्लाई आता है 24 घंटे बाद में काफी टाइम बाद में कोई कंपनी वगैरह में मेल किया ठीक है या मैसेज का रिप्लाई लेट आया वो है अतुल्यिकाली कि आपने जिस टाइम पे मैसेज भेजा था उसी टाइम पे रिसीवर की तरफ से जो है मैसेज नहीं आया सिंक्रोनस की बात करें तो सिंक्रोनस क्या होता है सिंक्रोनस यानी सेम टाइम पे जैसे फोन पे आप किसी से बात कर रहे हो तो आप किसी से कुछ पूछोगे तो वहीं आपको उसी टाइम जवाब मिलेगा अच्छा

49:42 वीडियो कॉल जो है वो किस में आएगा? असिंक्रोनस में आएगा या सिंक्रोनस में आएगा? बताओ एक बार। वीडियो कॉल किस में आएगा? सिंक्रोनस में आएगा या असिंक्रोनस में आएगा? बताओ किस में आएगा वीडियो कॉल? सिंक्रोनस में आएगा वीडियो कॉल। क्यों? क्योंकि आप उसी टाइम बात कर रहे हो ना सामने से जवाब आ रहा है। ईमेल किस में आएंगे? जब देखो ईमेल बताओ ईमेल किसमें आएंगे? जब सेम आप जब जिस टाइम पे सेंडर मैसेज भेजता है, जब सेम टाइम पे रिसीवर से उसको फीडबैक प्राप्त हो जाता है, रिसीवर उसकी बात का जवाब दे देता है, उसको हम बोलते हैं सिंक्रोनस। ठीक है? और जब सेम

50:30 टाइम पे जवाब नहीं आता है उसको हम बोलते हैं असिंक्रोनस। ईमेल जो है वो असिंक्रोनस में आते हैं। ईमेल का कभी भी ऐसा होता है कि आपने ईमेल किया तुरंत जवाब मिल जाता है। 1 मिनट, 2 मिनट, 4 मिनट, 5 मिनट, एक दिन, 2 दिन बाद मिलता है ना सेम टाइम पे नहीं मिलता। ठीक है? आई बात समझ में? तो ये है असिंक्रोनस और सिंक्रोनस। इसके अलावा कौन से टाइप बच गए हमारे? बताना एक बार। क्या कर लिया हमने? इंट्रा कर लिया, इंटर कर लिया, ग्रुप कम्युनिकेशन कर लिया, फॉर्मल। और कोई टाइप बचा है क्या हमारा? और कोई टाइप बचा है जो हमने नहीं किया हो बता दो एक बार मुझे फटाफट से

51:21 अपवर्ड डाउनवर्ड तो वर्टिकल और उसमें आ गया ना कोई टाइप बचा है डायगोनल करवा दिया ठीक है? अब हम चलते हैं आगे मॉडल्स की तरफ। यह सारे समझ में आ गए आपको? जितने भी टाइप्स के समझ में आए? यस और नो। फुल फॉर्म वाले क्वेश्चन भी करवा देंगे। डोंट वरी। टाइप्स समझ में आए या नहीं आए? ये बता दो मुझे एक बार। ओके। चलो। अब हम चलते हैं आगे। सिंप्लेक्स डुप्लेक्स हम आगे पढ़ेंगे। डोंट वरी। अब हम देखने वाले हैं मॉडल्स ऑफ कम्युनिकेशन। तो

52:07 मॉडल्स ऑफ कम्युनिकेशन शुरू होने से पहले जो है आपको बेसिक प्रोसेस समझनी जरूरी है कि संचार आखिरकार होता कैसे है? स्टेप बाय स्टेप उसके क्या तरीके हैं होने के? सबसे पहले संचार का प्रोसेस जब शुरू होता है तो ये शुरू होता है सेंडर से। इस एक डायग्राम से जो है 10 प्लस टाइप के क्वेश्चन जो है बन के आते हैं सेंडर से जिसको हम बोलते हैं प्रेषक। कम्युनिकेशन के प्रोसेस में या संचार की प्रक्रिया में सेंडर कौन होता है? जो मैसेज भेजता है। कौन होता है? जो मैसेज भेजता है। जैसे यहां पर इस क्लास में सेंडर कौन है? इस क्लास में सेंडर कौन है? तो सेंडर कौन होता है? जो मैसेज भेजता है। अब सेंडर क्या करेगा? सेंडर भेजेगा। मैसेज

52:52 मैसेज क्या है आपका? आपका संदेश जो भी आप बात बोलना चाहते हो, जो भी आप बता रहे हो ठीक है? इस क्लास में सेंडर कौन है? मैं और मैसेज क्या है? ये जो मैं आपको पढ़ा रही हूं ये सब क्या है? मैसेज है। यही तो बात चल रही है ना हमारी। मैं पढ़ा रही हूं, पढ़ रहे हो। तो ये मैसेज मुझे बताना है, बोलना है। उसके बाद में अब यह मैसेज किसके पास में जाएगा? यह मैसेज जाता है रिसीवर के पास में। यहां पर इस क्लास में रिसीवर कौन है? कौन है रिसीवर? बताओ रिसीवर कौन होता है? रिसीवर वो व्यक्ति होता है जिसके लिए मैसेज भेजा गया है या जिसको मैसेज भेजा गया है वो होता है रिसीवर। जैसे यहां पर रिसीवर कौन है? आप लोग हो। तो ये सबसे बेसिक प्रोसेस है एसएमआर सेंडर मैसेज रिसीवर। लेकिन इसके

53:38 पीछे पिक्चर में बहुत चीजें होती हैं जिसकी वजह से यह काम हो पाता है। तो इसको और डिटेल में देखते हैं। जब सेंडर मैसेज भेजता है तो मैसेज भेजने से पहले सेंडर करता है एनकोडिंग। क्या करता है? सेंडर करता है एनकोडिंग। एनकोडिंग क्या होती है? कौन बताएगा? बहुत बार बताई हुई है मैंने। एनकोडिंग क्या होती है? एक बारी बता दो मुझे। सेंडर क्या करता है? सेंडर करता है एनकोडिंग। और हिंदी को जो है एनकोडिंग को जो है हिंदी में भी एनकोडिंग ही बोलते हैं। क्या बोलते हैं? एनकोडिंग ही बोलते हैं। बताओ क्या होती है एनकोडिंग? मैसेज भेजना एनकोडिंग नहीं होती। एनकोडिंग कम्युनिकबल फॉर्म। वेरी गुड।

54:24 वेरी गुड। बहुत बार बताया मैंने। एनकोडिंग क्या किसको बोलते हैं? ध्यान से सुनना। जब सेंडर अपने मैसेज को एक कम्युनिकबल फॉर्म में कन्वर्ट करता है। क्या बोल रही हूं मैं? जब भी सेंडर अपने मैसेज को एक कम्युनिकबल फॉर्म में कन्वर्ट करता है। किसमें? कम्युनिकबल। कम्युनिकबल का मतलब क्या है? संचार करने योग्य। ठीक है? वो मैसेज जिसको एक ऐसे फॉर्म में कन्वर्ट कर लेता है जिससे उसका संचार किया जा सके उसको बोलते हैं हम कम्युनिकबल फॉर्म। फॉर क्या मतलब है? ये सब क्या बोल रहे हो? जैसे कि मैं यहां पढ़ा रही हूं। तो अगर मुझे कुछ पढ़ाना है, मैं आकर के यहां खड़ी हो जाऊंगी। कुछ बोलूंगी नहीं तो क्या आप पढ़ पाओगे? नहीं। मैं ये अगर ये सब नहीं बनाऊंगी ओनली बोलती रहूंगी तो क्या आपके समझ में आएगा? नहीं। तो आपका जो मैसेज है, आपकी जो मन की बात है या उसको आपको एक फॉर्म में तो लाना पड़ेगा ना या तो बोलना

55:10 पड़ेगा या लिखना पड़ेगा। मैं जो पढ़ाने के लिए लाई हूं पीपीटी लेकर के आऊं या बोल के पढ़ाऊं या लिखूं। तो ये जो बोल रही हूं या लिख रही हूं। अपने मैसेज को एक ऐसे फॉर्म में लेकर के आ रही हूं। रूप में लेकर के आई आ रही हूं जिससे उसका संचार संभव हो पा रहा है जिससे उसका संचार किया जा रहा है। तो बेसिकली एनकोडिंग क्या होती है? एनकोडिंग वो प्रक्रिया है जो सेंडर द्वारा की जाती है जिसके अंदर सेंडर अपने मैसेज को अपने संदेश को एक संचार करने योग्य रूप में एक कम्युनिकबल फॉर्म में परिवर्तित करता है। यह होती है एनकोडिंग। और एनकोडिंग कौन करता है? सेंडर करता है। इसीलिए सेंडर को हम एनकोडर भी बोल सकते हैं। क्या बोल सकते हैं सेंडर को? एनकोडर भी बोल सकते हैं। आपको काफी सारे क्वेश्चन दिखेंगे जहां पे सेंडर को हमने एनकोडर भी बोला हुआ है। ठीक है? इसके बाद में आ जाता

55:56 है मैसेज। अब मैसेज जो है यहां पर बहुत सारी चीजें आती हैं। कौन-कौन सी है वो चीजें? मैसेज ऐसे नहीं चला जाता। जब मैसेज जाता है तो यहां पर एक चीज़ आती है जिसको हम बोलते हैं माध्यम। किसके थ्रू मैसेज पास हो के जाता है? माध्यम के थ्रू, मीडियम के थ्रू या उसको हम बोलेंगे चैनल। चैनल क्या होता है? चैनल वो जरिया है जहां से मैसेज जाता है। अब कोई जरिया ही नहीं होगा तो बातचीत कैसे होगी कि फॉर एग्जांपल अगर YouTube ही नहीं है तो फिर आप पढ़ोगे कैसे? ऐप ही नहीं है तो पढ़ोगे कैसे? ऑफलाइन पढ़ोगे तो वहां पे भी तो एक चैनल होता है ना कि क्लासरूम होता है वहां पे वो चैनल है। ठीक है? WhatsApp पे किसी से बात कर रहे हो तो WhatsApp माध्यम है। तो चैनल का सीधा सा मतलब होता है माध्यम। माध्यम क्या वो जरिया जहां से मैसेज पास हो के जाता है। Telegram पे बात कर रहे

56:43 हो, Instagram पे बात कर रहे हो, कोई भी चैनल हो सकता है, जहां से बात होती है, संचार होता है, मैसेज बेसिकली पास होता है, उसको हम बोलते हैं मीडिया में माध्यम। जैसे कि आपको जयपुर से दिल्ली जाना है। फॉर एग्जांपल ट्रेन से जाना है तो उसके लिए ट्रेन की लाइन तो होनी चाहिए ना। कनेक्टिविटी तो होनी चाहिए। अगर कनेक्टिविटी ही नहीं है, चैनल ही नहीं है तो आप जाओगे कैसे? ठीक उसी तरीके से अगर माध्यम ही नहीं है तो मैसेज जाएगा कैसे? इसलिए माध्यम बहुत इंपॉर्टेंट है। माध्यम के साथ-साथ में यहां पर एक चीज और आ जाती है जिसको हम बोलते हैं नॉइज़ या शोर। क्या होता है नॉइज़ या शोर? कौन बताएगा? बताओ। नॉइज़ या शोर क्या होता है?

57:31 क्या होता है? नॉइज़ या शोर? नॉइज़ या शोर का मतलब यह नहीं है कि आप किसी से फोन में बात कर रहे हो। पीछे से बहुत चिल्लाने की आवाज आ रही है। आप नहीं सुन पाए। ओनली मतलब नहीं है। सुनो ध्यान से। नॉइज़ हर उस बाधा का नाम है। हर उस चीज का नाम है जो सेंडर को मैसेज भेजने में या रिसीवर को मैसेज रिसीव करने में प्रॉब्लम क्रिएट करती है या कर सकती है। फिर से सुनिए। नॉइज़ हर उस बाधा का नाम है। हर उस चीज का नाम है जो सेंडर को मैसेज भेजने में या रिसीवर को मैसेज प्राप्त करने में प्रॉब्लम क्रिएट करती है या कर सकती है। अब ये कुछ भी हो सकता है। यहां पर बहुत सारे टाइप्स के होते हैं। फॉर एग्जांपल मैं हिंदी में पढ़ा रही हूं लेकिन आप इंग्लिश मीडियम हो तो आपको समझ में नहीं

58:17 आएगा। बाहर से कोई फॉरेनर आया है। इंग्लिश में बोल रहा है लेकिन हमको इंग्लिश नहीं आती है। तो हमको उनकी बात समझ नहीं आएगी। उनको हमारी नहीं आएगी। ठीक है? तो ये लैंग्वेज का नहीं है। ओनली बहुत सारे। आपका पढ़ने का मन नहीं है। मैं कितना भी पढ़ा लूं आप नहीं पढ़ पाओगे। ठीक है? आपकी तबीयत भी इवन खराब है तो भी आप नहीं पढ़ पाओगे। तो क्या है? हुआ ये बैरियर। अब बैरियर जो है नॉइज़ जो है रिसीवर के एंड से भी हो सकता है और सेंडर के एंड से भी हो सकता है। दोनों तरफ से हो सकता है। जरूरी नहीं है कि एक की तरफ से ही होगा। फॉर एग्जांपल अगर नेट चला गया तो यह भी क्या है? बैरियर है। नेटवर्क चला गया ना? आप क्लास नहीं देख पा रहे। बैरियर है। मेरी तरफ से जाएगा तब भी होगा। आपकी तरफ से जाएगा तब भी होगा। लाइट चली गई बैरियर है। माइक नहीं चल रहा, आवाज़ नहीं आ रही। बैरियर है। नेट ख़ हो गया। यह भी बैरियर है। कैमरा प्रॉपर नहीं चल रहा, बैरियर है। कोई भी ऐसी चीज़ जो मैसेज भेजने में या

59:04 मैसेज रिसीव करने में प्राप्त करती है, प्रॉब्लम क्रिएट करती है, उसको हम बोलते हैं नॉइज़ या शोर। ठीक है? बैरियर जिसका दूसरा नाम है। इसके बाद में जब हम आगे चलते हैं तो फिर मैसेज भेज दिया। अब मैसेज प्राप्त कौन करेगा? रिसीवर प्राप्त करेगा। तो रिसीवर जो है मैसेज प्राप्त करने से पहले एक काम करता है जिसको हम बोलते हैं डिकोडिंग। क्या बोलते हैं? डिकोडिंग। और डिकोडिंग जो है इसको हिंदी में भी हम डिकोडिंग ही बोलेंगे। क्या होती है डिकोडिंग? कोई बताएगा? एनकोडिंग तो नहीं बताई। डिकोडिंग तो बता दो। डिकोडिंग क्या होती है?

59:50 रिसीवर द्वारा किया गया इंटरप्रिटेशन। ठीक है? रिसीवर जब मैसेज को समझता है, इंटरप्रेट करता है कि क्या भेजा है? जो आप ये बात सुन रहे हो ये समझ रहे हो कि क्या इसको क्या बोलते हैं? डिकोडिंग बोलते हैं। तो रिसीवर अगर डिकोडिंग कर रहा है तो रिसीवर को हम क्या बोल देंगे? रिसीवर को हम बोल सकते हैं डिकोडर। क्या बोल सकते हैं? डिकोडर बोल सकते हैं। ये ऐसे नाम जो है आपको काफी सारे क्वेश्चंस में देखने को मिलने वाले हैं। अब यहां पर एक डाउट आता है कि सेंडर जो है वो तो एनकोडिंग बाद में करता है और रिसीवर जो है वो पहले कर लेता है। रिसीवर की भी यहां आनी चाहिए एनकोडिंग। जब भी आप फोटो भेजते हो तो अपलोड करते हो फोटो को। तो अपलोड आप फोटो को भेजने के बाद करते हो या पहले करते हो?

1:00:36 यह बताओ। फोटो भेजने के बाद अपलोड करते हो, पहले अपलोड करते हो और उसके बाद आप फोटो देखने के बाद डाउनलोड करते हो या पहले डाउनलोड करनी पड़ती है उसको देखने के लिए। अपलोड आप पहले करेंगे मैसेज भेजने से पहले जैसे सेंड एनकोडिंग की हुई है और रिसीवर जो है फोटो देखने से पहले ही उसको क्या कर लेगा? डाउनलोड करेगा तभी तो देख पाएगा। देख ही नहीं पाएगा। ठीक वैसे ही इसको लिखा हुआ है। यहां पर अपलोडिंग और डाउनलोडिंग के जैसे ही आपको इसको समझना है और पढ़ना है। आ गई बात समझ में? ये है बेसिक सा प्रोसेस कम्युनिकेशन का संचार का एसएमआर जिसको हम बोलते हैं इस मॉडल को इस प्रोसेस को हम बोलते हैं। इसकी जो मॉडल में डायग्राम मैंने बनाया है लीनियर मॉडल। क्या बोलते हैं? लीनियर मॉडल

1:01:22 बोलते हैं। अब लीनियर मॉडल रेखीय मॉडल क्यों बोलते हैं? कौन बताएगा? बताओ जल्दी। लीनियर मॉडल या रेखीय मॉडल क्यों बोलते हैं? यह बता दो एक बार। अरे भैया लीनियर मॉडल या रेखीय मॉडल क्यों बोलते हैं? कौन बताएगा? क्योंकि इसमें क्या नहीं है? फीडबैक नहीं है। वन वे कम्युनिकेशन है। एक तरफ़ा संचार है। कैसे है एक तरफफ़ा संचार? यह देखो। एक लाइन में हो रहा है। सेंडर ने मैसेज भेजा। रिसीवर ने मैसेज प्राप्त किया। फुल स्टॉप

1:02:08 कम्युनिकेशन कंप्लीट। इसलिए ये है वन वे कम्युनिकेशन बोल सकते हो। इसको आप लीनियर बोल सकते हो। रेखीय बोल सकते हो। लीनियर क्यों बोलते हैं? क्योंकि एक लाइन में सीधा हो रहा है। ठीक है? वन वे क्यों बोलते हैं? क्योंकि सामने से रिसीवर की तरफ से कोई जवाब नहीं आ रहा है। इसलिए इसको बोल रहे हैं लीनियर। ठीक है? जैसे कि रोड होती है। रोड पे वन वे होता है जहां पर तो ओनली एक साइड से गाड़ियां आती हैं। सामने से नहीं आती। वैसे यहां पर एक साइड से गाड़ियां जा रही है। मैसेज जा रहा है। सामने से कुछ भी नहीं आ रहा है। इसलिए इसको हम बोलेंगे वन वे कम्युनिकेशन या एक तरफ़ा संचार। आ गई बात समझ में? अब इसके अंदर अगर मैं एक चीज़ ऐड कर दूं। ठीक है? इसके अंदर अगर मैं एक चीज़ ऐड कर दूं कि रिसीवर जो है रिसीवर को जैसे ही मैसेज मिलेगा रिसीवर प्रतिपुष्टि भेजेगा रिसीवर कंफर्मेशन भेजेगा सेंडर को या फिर सेंडर

1:02:56 की बात का जवाब देगा जिसको हम बोलते हैं फीडबैक। फीडबैक क्या होता है? फीडबैक या प्रतिपुष्टि क्या होता है? रिसीवर द्वारा सेंडर को पहुंचाया गया जवाब। पहुंचाया गया संदेश कि हां तुम्हारा मैसेज जो है मेरे पास में पहुंच चुका है या जो उसका जवाब देता है। जैसे मैं आपसे बोलूं कि क्या आपको समझ में आ गया तो आप बोलोगे हां मुझे समझ में आ गया। एक तो ये दो लोग अगर फोन पर बात कर रहे हैं पहले कुछ बोल रहा है दूसरा फिर वो कुछ जवाब दे रहा है। फिर वो कुछ बोल रहा है। ये भी क्या है? टू वे है। क्या है? टू वे। क्योंकि यहां पर भी क्या है? फीडबैक है। तो वो मॉडल वो संचार जिसके अंदर रिसीवर द्वारा फीडबैक दिया जाता है। उसको हम बोलते हैं टू वे। अब यह फीडबैक के साथ में क्या बन गया? टू वे बन गया। दो तरफफ़ा बन गया। सर्कुलर कह सकते हैं हम

1:03:41 इसको। चक्रीय भी कह सकते हैं। टू वे तो क्यों कह सकते हैं? क्योंकि दोनों तरफ से मैसेज का आदानप्रदान हो रहा है। सेंडर मैसेज भेज रहा है। रिसीवर वापस कुछ बोल रहा है। फिर सेंडर कुछ बोल रहा है। इसलिए टू वे है क्योंकि दोनों तरफ से हो रहा है। और ज्योग्राफी वालों का मैंने बोला था ना हम क्लासेस करेंगे। कल आपकी पेपर वन की मैराथन है। उसके बाद से जो है आपकी एग्जाम तक हम क्लासेस करेंगे। जो हमारा टाइम है ना 12:00 बजे उसी टाइम पर करेंगे। नो नीड टू वरी। परेशान नहीं होना है आपको। ठीक है? तो फीडबैक वापस आएगा रिसीवर की तरफ से और चकि रिसीवर फीडबैक दे रहा है इसलिए ये टू वे है। सर्कुलर है क्योंकि दोनों तरफ से मैसेजेस का आदानप्रदान हो रहा है। इसलिए इसको क्या बोलते हैं? सर्कुलर बोलते हैं। ठीक है? यहां से आएगा। फिर सेंडर कुछ

1:04:28 बोलेगा तो ये क्या बन गया? एक चक्र बन गया। बेसिकली एक साइकिल बन गई। इसको साइक्लिक मॉडल भी हम बोल देते हैं। आ गई बात समझ में? ये इतना क्लियर हुआ आप सबको? ये समझ में आया या नहीं आया? साइड में खड़े होके पढ़ाइए। पीपीटी नहीं दिखती। साइड में खड़े हो के कैसे पढ़ाऊं? मुझे ये बताओ। लो स्क्रीनशॉट। जिनको स्क्रीनशॉट लेना है, वह भी स्क्रीनशॉट ले सकते हैं। स्क्रीनशॉट ले लीजिए। ठीक है? अब देखो, अब दो-तीन छोटे-छोटे टर्म्स हैं जो कि समझने बहुत जरूरी हैं। जैसे कि सिमेंटिक बैरियर। सिमेंटिक भी छोटे-छोटे टर्म्स हैं

1:05:13 जहां से सवाल काफी आ जाते हैं। सिमेंटिक बैरियर क्या होता है? कौन बताएगा? सिमेंटिक बैरियर क्या होता है बताओ? बैरियर तो बाधा आप समझ गए। तो सिमेंटिक बैरियर क्या होता है? जब फैक्ट्स के थ्रू या शब्दों से बेसिकली कोई बाधा उत्पन्न होती है उसको हम बोलते हैं सिमेंटिक बैरियर। ठीक है? शब्दों से होने वाली बाधा। शब्दों से उत्पन्न होने वाली जो बाधा है उसको हम बोलते हैं सिमेंटिक बैरियर। ठीक है? जैसे मैंने बोला नो लेकिन आपको सुना

1:06:00 दो वो हो गया बैरियर और जैसे रिसेप्शन होता है। ठीक है? रिसेप्शन के बहुत सारे मतलब होते हैं। टेक्निकल फैक्ट सिमेंटिक बैरियर में नहीं आएंगे। एग्जांपल बताओ मुझे इसके कोई। सिमेंटिक बैरियर के एग्जांपल बताओ। यह शब्द है रिसेप्शन। इसके बहुत सारे मतलब होते हैं। ठीक है? सोना रिसेप्शन हो उसमें कोई कोई भी आप ऑफिस में जाते हैं वहां भी रिसेप्शन होता है और जो शादी होती है लोगों की उसके बाद वो इनवाइट करते हैं लोगों को वो भी रिसेप्शन होता है। ठीक है फाइन वेरी गुड बहुत अच्छा एग्जांपल दिया है और और बताओ इसके अलावा एक्सप्लेन करूंगी मैं एक जैसे मैम क्लास रूम में लिखा रहेगा दो हम लिख देंगे चार दिखाएं नहीं नहीं

1:06:52 अर्थगत बाधा बिल्कुल और और बताओ एग्जांपल बताओ कुछ टेक्निकल फैक्ट जो होते हैं वो इसमें नहीं आते वो जा जार्गन में आएंगे जागरण है जारगन है ये मैंने खुद इसको नहीं ये जारगन में आएगा ये जार्गन में आएगा जो आप सब बता रहे हो ना ये अलग चीज़ है ये अलग है मुझे इसके एग्जांपल बताओ ठीक है सोना सोना जैसे इसके दो मतलब हो सकते हैं। एक तो नींद ठीक है वो सोना और एक दूसरा गोल्ड। तो आप कौन से सोने की बात कर रहे हो? कैसे पता चलेगा? वीक। वेरी गुड। बहुत अच्छा एग्जांपल दिया है। वीक भी जैसे आप कौन सा वीक बोल रहे हो? ठीक है? वीक दो वीक होते हैं। एक यह वीक है और एक वीक है। इसका मतलब है कमजोर। और इसका मतलब क्या है? सप्ताह। ठीक है? कल। कल के भी दो

1:07:39 मतलब हो सकते हैं। आने वाला कल या गया हुआ। कल करूंगी, कल किया था। ये दो कल ये भी क्या है? सिमेंटिक बैरियर हैं। फाइन। फाइन के भी दो मतलब होते हैं। आई एम फाइन और आपको इतना फाइन भरना है। तो आई थिंक इतने सारे वर्ड्स से जो है आपके समझ में आ गया होगा। जैसे डेट। डेट के कई सारे मतलब होते हैं। खजूर को भी डेट बोलते हैं। तारीख को भी डेट बोलते हैं और आप कहीं बाहर जा रहे हो उसको भी डेट बोल सकते हैं। ठीक है? तो शब्दों के थ्रू होने वाला जो बेसिकली क्या है? मिसकम्युनिकेशन है, बाधा जो शब्दों से होती है, उसको हम बोलते हैं सिमेंटिक बैरियर। ठीक है? फिर उसके बाद में आता है जार्गन। अब जार्गन जो है जार्गन क्या होता है? जार्गन बेसिकली किसी

1:08:24 भी प्रोफेशन के कुछ टेक्निकल टर्म्स होते हैं। क्या होते हैं? किसी पर्टिकुलर प्रोफेशन के कुछ टेक्निकल टर्म्स होते हैं जो उसी प्रोफेशन के लोगों को समझ आते हैं और बाकी लोग उस प्रोफेशन से नहीं है वो उस वर्ड को नहीं समझ पाते इसलिए मिसकम्युनिकेशन हो जाता है। जैसे कि फॉर एग्जांपल अगर मैं बात करूं पीसीएम की पीसीएम तो पीसीएम से आप लोग क्या समझते हो? पीसीएम से आप लोग क्या समझते हो? पीसीएम का मतलब बताओ। थैंक यू। आप लोग क्या समझते हो पीसीएम से? नहीं नॉट ओनली खराब अनुवाद। अनुवाद की देखो बहुत सारे बच्चों ने लिखा है फिजिक्स, केमिस्ट्री, मैथ्स। ठीक है? जनरल

1:09:11 मतलब यही है। लेकिन जो डॉक्टर्स होते हैं या मेडिकल की जो भाषा है उसमें पीसीएम को हम का मतलब होता है पैरासिटामॉल। ठीक है? आपको कोई छोटी सी बीमारी हो गई। ठीक है? आपका गला खराब है तो यह आपको समझ में आ जाएगा। लेकिन डॉक्टर जो है उसका बहुत ही भयंकर सा नाम बता देगा। टॉन्सिलाइटिस, अल्सराइटिस ऐसे कुछ करके बोल देगा तो हमको समझ में नहीं आएगा। तो टेक्निकल वर्ड से बेसिकली जो होने वाले मिसकम्युनिकेशन होते हैं और वो टेक्निकल वर्ड किसी पर्टिकुलर प्रोफेशन से जुड़े हुए हैं। इसलिए मिसकम्युनिकेशन हो जाता है। उसको हम कहते हैं जार्गन। क्या कहते हैं? जार्गन। यह हिंदी में भी जार्गन ही रहेगा। तो ये वर्ड काफी इंपॉर्टेंट है। इसको आपको याद रखना है। ठीक है? ये दो चीजें आ गई समझ में? फॉरेंजाइटिस।

1:09:57 हां होता है ऐसा। रैपिंग मैंने कब करी रैपिंग? चलो। ठीक है? तो अब हमने बेसिक जो मॉडल है वो देख लिया। अब मॉडल भी हमारे पास मैंने बताया ना तीन टाइप के होंगे। एक लीनियर जिसके अंदर फीडबैक नहीं होता। एक साइक्लिक। साइक्लिक के अंदर क्या होता है? जैसे इसको हम यहां देखते हैं। लीनियर तो क्या है? SM और आपका R यह है लीनियर। वहीं अगर मैं बात करूं साइक्लिक की तो साइक्लिक के अंदर क्या है? SM R फिर ये कुछ बोलेगा फिर ये फिर ये फिर ये है साइक्लिक। ठीक है? और फिर इसके बाद में अगर हम देखें कि एक होता है ट्रांजैक्शनल। क्या होता है? ट्रांजैक्शनल। तो ट्रांजैक्शनल क्या होता है? कि आप घर पे गए पिकनिक की परमिशन लेने। मम्मी से बात

1:10:43 करी। बात करते-करते आप एक्सप्रेशन देख के आप समझ गए कि मम्मी मना करेगी, डांटेंगी। तो आपने अपनी बात बदल दी। तो ट्रांजैक्शनल के अंदर यह होता है कि सामने जो रिसीवर है वो मुंह से बोल के कुछ कहे फीडबैक दे उससे पहले सेंडर ही उसके फीडबैक को भांप लेता है। उसके फीडबैक को अपने आप समझ लेता है और उसके अनुसार जो है अपने मैसेज को मॉडिफाई कर देता है। यह होता है ट्रांजैक्शनल के अंदर। ठीक है? ट्रांजैक्शनल में क्या होता है? जैसे कि मैंने आपको बताया कि भाई यहां पर तो यह कुछ बोलेगा उसके बाद ही समझेगा। लेकिन ट्रांजैक्शनल के अंदर इनकी परस्पर कंटिन्यू बातचीत चलती रहती है। यह बोल रहा है यह सुन रहा है और यह जवाब देगा उससे पहले ही कुछ समझ जाएगा कि ये क्या बोलना चाहता है या इसको मेरे मैसेज से क्या प्रभाव पड़ रहा है तो फिर उसके बाद में ये

1:11:31 उस अपने मैसेज को उसके अकॉर्डिंग चेंज कर देगा। इसको हम बोलते हैं ट्रांजैक्शनल। ठीक है? आ गया समझ में? अब देखो अब ये तो बेसिक मॉडल थे। अब हम देखेंगे स्कॉलर्स ने जो है कौन-कौन से मॉडल दिए हैं वो। सबसे पहले है एरिस्टोटल का मॉडल। अरस्तु का मॉडल सुनते ही आपके दिमाग में क्या आता है? कमेंट करो। अभी पता चलेगा आपने कितना पढ़ा है अरस्तु के मॉडल का जैसे आप नाम सुनते हो दिमाग में क्या आता है बताओ एक बार ट्रांजैक्शन में फीडबैक

1:12:16 होती है क्या बिल्कुल होती है फीडबैक फीडबैक ओनली लीनियर में नहीं होती उसके अलावा फीडबैक सब में होती है बताओ जरा एथोस पैथोस लवर्स देखो मॉडल मैं बहुत सारे करवाऊंगी भी नहीं क्योंकि मैंने बताया कि कॉस्ट बेनिफिट रेशो बहुत कम है और जो इंपॉर्टेंट है वो करवाऊंगी और इसके अलावा जो है मास मीडिया पे हमारा ज्यादा फोकस रहेगा क्योंकि वहां से काफी सवाल सवाल आजकल पूछे जाते हैं। अरस्तु के मॉडल की बात करें तो देखो जितने भी मॉडल हम देखेंगे ना हर मॉडल

1:13:02 के अंदर चीज सेम ही रहेगी। सेम रहेगी का मतलब क्या है कि उसके अंदर सीक्वेंस चेंज नहीं होने वाला कि किसी में सेंडर लास्ट में है, किसी में रिसीवर पहले है, किसी में मैसेज है। नहीं तो फिर अलग क्या है? अलग या तो उनके नाम बदल दिए गए हैं या उस मॉडल में कोई एक पर्टिकुलर चीज है जिस पे ज्यादा फोकस करा गया है। बस ये जैसे अरस्तु के मॉडल में हम बात करें तो इसमें मेन फोकस है सेंडर के ऊपर। अरस्तु ने ये बोला है कि जो सेंडर है वो जितना अच्छा स्पीकर होगा जितना अच्छा वक्ता होगा ना जितनी अच्छी उसकी कम्युनिकेशन स्किल्स होंगी उतना ही ज्यादा इफेक्टिव उसका मैसेज होगा उतना ही ज्यादा उसके मैसेज का प्रभाव पड़ेगा लोगों के ऊपर एग्जांपल बताओ इसका जरा क्या एग्जांपल हो सकता है

1:13:47 1 मिनट देना मुझे आप लोग जस्ट मिनट

1:15:04 हां जी देखो तो अरस्तु के मॉडल में क्या होता है हर मॉडल की कुछ खास खासियत है। कुछ की पॉइंट्स हैं जो कि आपको याद रखने हैं। सबसे पहले बात अगर हम करें अरस्तु के मॉडल की तो अरस्तु के मॉडल में अरस्तु ने यह बोला है कि एक स्पीकर का एक सेंडर का बेसिकली एक बहुत अच्छा स्पीकर होना मस्ट है। अगर एक सेंडर अच्छा स्पीकर नहीं है। अच्छे से अपनी बात नहीं रख सकता। अगर उसकी कम्युनिकेशन स्किल अच्छी नहीं है। अगर वो ऑडियंस से रिलेट ही नहीं कर सकता तो उसकी बात बोलने का कोई मतलब ही नहीं है। उसकी बात का कोई प्रभाव ही नहीं पड़ेगा। फिर कम्युनिकेशन का भी कोई मतलब नहीं है। फॉर एग्जांपल एक टीचर है जेआरएफ टॉपर है। फॉर एग्जांपल बहुत अच्छा है। पढ़ाई में हमेशा उसने बहुत अच्छा स्कोर किया है। बहुत अच्छे मार्क्स आए हैं। लेकिन वो पढ़ा नहीं सकता। तो फिर क्या काम का? तो जैसे एक

1:15:51 अच्छे टीचर के पास नॉलेज होना जरूरी है। और नॉलेज से ज्यादा जो है उसकी कम्युनिकेशन स्किल। क्यों? क्योंकि जितना नॉलेज है एटलीस्ट वो तो अच्छे से बता पाए। उसको तो अच्छे से प्रेजेंट कर पाए। नॉलेज ओवर द टाइम पढ़ते-पढ़ते गेन कर सकते हैं। लेकिन अगर कम्युनिकेशन स्किल अच्छी नहीं है तो जितना नॉलेज है वो भी कोई काम का नहीं रहेगा। तो यह कहना है अरस्तु का कि एक सेंडर को एक बहुत ही उम्दा स्पीकर होना बहुत जरूरी है और स्पीकर ऐसा होना चाहिए कि जिस चीज के बारे में बात कर रहा है उसके बारे में उसे पता भी हो। प्लस लोगों के बारे में उसको पता हो और कम्युनिकेशन स्किल भी बहुत अच्छी हो। उसका कैरेक्टर भी बहुत हाई वर्चू का होना चाहिए। ऐसी कुछ बातें करी हैं अरस्तु ने। अब इसके मॉडल को हम देख लेते हैं। दो-तीन चीजें इसके बारे में बताऊंगी। एक तो आपको याद रखना है अरस्तु की एक बुक है जिसका नाम है

1:16:37 रटोरिक्स। क्या है? रटोरिक्स। हो सकता है आज से पहले आपने नाम नहीं सुना हो लेकिन आपको अब सुन लो और ये एग्जाम में पूछा हुआ है। ठीक है? ये मत पूछना इसको हिंदी में क्या बोलते हैं? जैसे मेरा नाम इंग्लिश में भी यही हिंदी में भी यही है। वैसे ही इस बुक का भी नाम यही है। क्योंकि ये अरस्तु की बुक है जिसका नाम है रेटोरिक्स। इसलिए इस मॉडल से कभी-कभी एग्जाम में सवाल ऐसे फ्रेम हो जाता है कि इन द रेटोरिकल मॉडल ऑफ कम्युनिकेशन ये और ये चीज बताई गई है। इसके आधार पे आप जवाब दो। रेटोरिकल मॉडल ऑफ कम्युनिकेशन के अंदर ये पूछा गया है। ऐसे तब आप ये मत सोचना कि रेटोरिकल मॉडल ऑफ कम्युनिकेशन क्या है? हमने तो पढ़ा ही नहीं। हमको तो पता ही नहीं। रेटोरिकल मॉडल ऑफ कम्युनिकेशन जो है अरस्तु के मॉडल को ही बोला जाता है। आपको अगर नहीं पता था तो ये बात अब याद

1:17:23 रखना। इनकी किताब का नाम है रटोरिक्स। पहली चीज़। दूसरी चीज़ क्या याद रखनी है? इसके अंदर अरस्तु ने तीन टर्म्स बताए हैं। तीन विशेषताएं बताई हैं कि स्पीकर की, सेंडर की तीन विशेषताएं होनी चाहिए। तीन क्वालिटीज़ होनी चाहिए स्पीकर के अंदर। ये कौन-कौन सी हैं? नाम के साथ मतलब भी बताओगे। पहले नाम बताओ। उसके बाद में जो है उसका मतलब बताना। ठीक है? देखो एक है इथोस और इनको हिंदी में भी यही

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