Shocking: Plastic Rain Killing Humans in Indonesia? | Microplastic warning for India| UPSC | StudyIQ

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो माइक्रोप्लास्टिक्स और इंडोनेशिया में बारिश के पानी में उनकी उपस्थिति पर केंद्रित है। यह बताता है कि माइक्रोप्लास्टिक्स क्या हैं, वे कैसे बनते हैं, और वे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए क्यों हानिकारक हैं। वीडियो माइक्रोप्लास्टिक्स के मूल कारणों, जैसे प्लास्टिक पर अत्यधिक निर्भरता और खराब अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों पर भी प्रकाश डालता है। अंत में, यह माइक्रोप्लास्टिक्स प्रदूषण को कम करने के लिए संभावित समाधानों पर चर्चा करता है, जिसमें विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) और एक वैश्विक प्लास्टिक संधि शामिल है।

  • माइक्रोप्लास्टिक्स छोटे प्लास्टिक कण होते हैं जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं।
  • इंडोनेशिया में बारिश के पानी में माइक्रोप्लास्टिक्स पाए गए हैं, जो एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या का संकेत है।
  • प्लास्टिक पर अत्यधिक निर्भरता और खराब अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियाँ माइक्रोप्लास्टिक्स प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।
  • विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) और एक वैश्विक प्लास्टिक संधि माइक्रोप्लास्टिक्स प्रदूषण को कम करने के लिए संभावित समाधान हैं।

माइक्रोप्लास्टिक्स: परिचय और प्रकार

माइक्रोप्लास्टिक्स सूक्ष्म प्लास्टिक कण होते हैं जिनका आकार 5 मिलीमीटर से कम होता है। ये दो प्रकार के होते हैं: प्राथमिक और द्वितीयक। प्राथमिक माइक्रोप्लास्टिक्स में माइक्रोबीड्स (टूथपेस्ट, फेस वॉश और शैंपू में पाए जाते हैं) और नूडल्स (प्लास्टिक उत्पादों के निर्माण में उपयोग किए जाने वाले रेजिन के पेलेट्स) शामिल हैं। द्वितीयक माइक्रोप्लास्टिक्स बड़े प्लास्टिक के टुकड़ों के टूटने से बनते हैं, जैसे कि सिंथेटिक फाइबर, वाहन टायर की धूल और अनियंत्रित प्लास्टिक कचरा जलाना। ये कण हल्के होते हैं और हवा और पानी के साथ लंबी दूरी तय कर सकते हैं, फिर बारिश या सूखे जमाव के माध्यम से जमा हो जाते हैं।

इंडोनेशिया में माइक्रोप्लास्टिक्स वर्षा

इंडोनेशिया में, शोधकर्ताओं ने बारिश के पानी में हानिकारक माइक्रोप्लास्टिक्स की उच्च सांद्रता की पुष्टि की है। यह खोज एक पूर्ण चक्र को उजागर करती है जिसमें भूमि या समुद्र आधारित प्लास्टिक जमा होते हैं, टूटते हैं, हवा से फैलते हैं और बारिश के माध्यम से जमा होते हैं। यह एक चक्रीय प्रक्रिया है जो चिंताजनक है क्योंकि यह साबित करती है कि प्लास्टिक प्रदूषण महासागरों से हवा में और वापस फैल गया है, जिससे माइक्रोप्लास्टिक्स सर्वव्यापी हो गए हैं।

माइक्रोप्लास्टिक्स के खतरे

एसिड वर्षा के विपरीत, जिसे पृथ्वी के बायोकेमिकल चक्र द्वारा संसाधित किया जा सकता है, माइक्रोप्लास्टिक्स गैर-बायोडिग्रेडेबल ठोस होते हैं और अनिश्चित काल तक बने रहते हैं। इससे मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा होता है क्योंकि वे शरीर में जमा होने लगते हैं। हाल के शोध से पता चला है कि माइक्रोप्लास्टिक्स मां के गर्भ में एमनियोटिक द्रव में भी पाए जा रहे हैं, साथ ही रक्तप्रवाह और फेफड़ों में भी। यह बायोएक्यूमुलेशन कहलाता है, जहां प्लास्टिक की बोतलों से पानी पीने जैसे छोटे-छोटे एक्सपोजर समय के साथ जमा होते रहते हैं और नकारात्मक स्वास्थ्य प्रभाव डालते हैं। माइक्रोप्लास्टिक्स रोग वैक्टर के रूप में भी काम करते हैं, बैक्टीरिया और वायरस को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाते हैं, जिससे रोगों के प्रसार में योगदान होता है।

माइक्रोप्लास्टिक्स वर्षा के मूल कारण

माइक्रोप्लास्टिक्स वर्षा का मुख्य कारण प्लास्टिक पर अत्यधिक निर्भरता और उपभोक्तावादी संस्कृति है। सिंथेटिक पॉलिमर, लॉजिस्टिक्स, पैकेजिंग और टेक्सटाइल पर निर्भरता, जो कभी फायदे थे, अब नुकसान बन गए हैं। खराब अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियाँ, जैसे खुले लैंडफिल, माइक्रोप्लास्टिक्स को हवा और पानी के साथ स्वतंत्र रूप से संपर्क करने और चक्रीय प्रक्रिया में प्रवेश करने की अनुमति देती हैं।

माइक्रोप्लास्टिक्स प्रदूषण के समाधान

माइक्रोप्लास्टिक्स प्रदूषण को कम करने के लिए, लघु अवधि में विस्तारित उत्पादक जिम्मेदारी (ईपीआर) को लागू किया जा सकता है। ईपीआर सिद्धांत के तहत, उत्पादकों को पैकेजिंग और उत्पादों दोनों के संग्रह, प्रसंस्करण, पुनर्चक्रण और निपटान के लिए जिम्मेदार ठहराया जाता है। पुनर्चक्रित सामग्रियों का उपयोग करके, उत्पादक प्लास्टिक के उत्पादन को कम कर सकते हैं। दीर्घकालिक समाधान के लिए, एक परिपत्र अर्थव्यवस्था की ओर प्रयास करना महत्वपूर्ण है, जिसमें प्लास्टिक के उपयोग को कम करना और उत्पादों को पुनर्चक्रित करना शामिल है।

वैश्विक प्लास्टिक संधि

प्लास्टिक को विनियमित करने के लिए एक वैश्विक प्लास्टिक संधि पर बातचीत चल रही है, लेकिन यह एक जटिल प्रक्रिया है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) ने एक अंतर्राष्ट्रीय वार्ता समिति (आईएनसी) बनाई है ताकि प्लास्टिक के विनियमन पर एक समझौता विकसित किया जा सके। हालांकि, जीवाश्म ईंधन उत्पादक देश संधि को कमजोर करने के लिए प्रयास कर रहे हैं, उनका तर्क है कि संधि को केवल प्लास्टिक प्रदूषण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि प्लास्टिक उत्पादन पर। आश्चर्यजनक रूप से, भारत ने इस स्थिति का समर्थन किया है।

निष्कर्ष

इंडोनेशिया में माइक्रोप्लास्टिक्स वर्षा एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या है जो भारत सहित अन्य देशों में भी हो रही है। प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है, जिसमें प्लास्टिक उत्पादन को कम करना और अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों में सुधार करना शामिल है। वैश्विक प्लास्टिक संधि एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन सभी देशों को प्रभावी समाधानों का समर्थन करने के लिए मिलकर काम करना होगा।

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Transcript

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0:01 एस आपका सिलेक्शन हमारा मिशन। ह्यूमैनिटी ने जमीन पर प्लास्टिक्स फेंका। समंदर ने उसे निगल लिया। हवा ने उसे उड़ा लिया और आज हम देखते हैं कि वही प्लास्टिक्स बारिश के पानी के साथ मिलके जमीन पर बरस रहे हैं। रिसेंटली इंडोनेशिया एक कंट्री जो ओरंग उट्स के लिए फेमस है। वहां पर यह ऑब्जर्व किया गया कि रेनफॉल के साथ माइक्रोप्लास्टिक्स गिरे। हर एक बूंद के साथ इंसान के कचरे का हिसाब लिया जा रहा है। और अगर गवर्नेंस और ग्रीड के बीच की लड़ाई अब नहीं जीती गई तो ह्यूमैनिटी के सिस्टम को यह माइक्रोप्लास्टिक्स धो डालेगा। तो क्या है माइक्रोप्लास्टिक्स और क्या हुआ

0:47 इंडोनेशिया में? जब माइक्रोप्लास्टिक्स बारिश के साथ गिरे। इसी को समझने और समझाने के लिए स्टडी आईक्यू की तरफ से मैं प्रस्तुत हूं। मेरा नाम है भुवन झा। सबसे पहले नजर डालते हैं दोस्तों कि आखिरकार माइक्रोप्लास्टिक्स होते क्या है? नाम से ही समझ जाएंगे यह सूक्ष्म अति सूक्ष्म पार्टिकल्स साइज में होते हैं। यानी कि इनका साइज आप देखेंगे अंडर 5 मिलीमी। प्रमुखता माइक्रोप्लास्टिक्स दो प्रकार के होते हैं। प्राइमरी और सेकेंडरी माइक्रोप्लास्टिक्स। प्राइमरी माइक्रोप्लास्टिक्स में दो नाम आपको ध्यान रखने हैं। पहला है माइक्रोबीड्स। क्या आप जानते हैं दोस्तों जो टूथपेस्ट आप यूज करते हैं, फेस वॉश यूज करते हैं, शैंपू यूज करते हैं, उसमें भी प्लास्टिक्स का प्रयोग होता है। और उसमें

1:34 प्रमुखता ये जो एक्सफोलिएटिंग एजेंट्स हैं, उसमें माइक्रोबीड्स यूज किया जाता है। दूसरा होता है नडल्स। यह नडल्स जो हैं यह बेसिकली रेजिन के पेलेट्स होते हैं जिससे हम प्लास्टिक के और प्रोडक्ट्स डिजाइन करते हैं। चाहे प्लास्टिक का बॉटल हो, प्लास्टिक का प्लेट हो वो सारे में नडल्स का प्रयोग होता है। तो आप देखते हैं कि हमारा जो सोर्सेस है सबसे पहला अब्रेशन ऑफ सिंथेटिक फाइबर्स यानी कि हमारा टेक्सटाइल इंडस्ट्री पॉलीमर इंडस्ट्री। वहां से जब यह प्लास्टिक्स के मटेरियल टूटते हैं, डिसइीग्रेट करते हैं, उसके बाद यह माइक्रोप्लास्टिक्स में तब्दील हो रहे हैं। साइड बाय साइड आप देखेंगे डेग्रेडेशन ऑफ लार्जर प्लास्टिक्स व्हीकल टायर डस्ट उसमें भी

2:19 माइक्रोप्लास्टिक्स है। सिमिलरली अनकंट्रोल्ड प्लास्टिक वेस्ट बर्निंग। जब आप प्लास्टिक जलाते हैं इनवेरिएबली आप माइक्रोप्लास्टिक्स रिलीज़ कर रहे हैं एटमॉस्फेयर में। उसके बाद हम देखेंगे दीज़ पार्टिकल्स आर लाइट। क्योंकि सूक्ष्म अति सूक्ष्म पार्टिकल्स हैं। इनका अपना मास नहीं है। बहुत कम मास है। तो ये लार्ज डिस्टेंस पर ट्रैवल कर सकते हैं हवा और पानी के साथ। और फिर जाके कहीं डिपॉजिट करेंगे। डिपॉजिशन का प्रकार क्या होगा? या तो बारिश, स्नोफॉल इत्यादि के साथ या फिर ड्राई डिपॉजिशन। हवा के साथ गया, कहीं जाके डिपॉजिट हो गया। तो, यह रहा माइक्रोप्लास्टिक्स का इंट्रोडक्शन। अब, इंडोनेशिया में क्या देखा गया? सबसे पहला कंफर्मेशन ऑफ हार्मफुल माइक्रोप्लास्टिक्स इन रेनफॉल। रिसर्चर्स ने फाइनली इस रेनफॉल को एनालाइज किया। उसका सैंपल को एनालाइज

3:06 किया और पाया उसमें माइक्रोप्लास्टिक्स का कंसंट्रेशन हद से ज्यादा बहुत हाई है। सिमिलरली आप देखेंगे इट हाईलाइट्स अ फुल साइकिल। अब यह जो हमारा अर्थ का एक बायोजियोकेमिकल साइकिल है जहां पर हम देखते हैं फॉर एग्जांपल कार्बन साइकिल, नाइट्रोजन साइकिल, फास्फोरस साइकिल, सल्फर साइकिल ये जो बायोलॉजिकल एजेंट्स और जियोलॉजिक एक्टिविटी और उसके बाद हमारे केमिकल प्रोसेससेस के बीच में जो एक इंटरलिंकेज है कुछ सिमिलरली बिहेव कर रहे हैं हमारे माइक्रोप्लास्टिक्स। कैसे? सबसे पहले लैंड या सी बेस्ड प्लास्टिक्स डिपॉजिट हुए कहीं पे। टूटे जाके फ्रेगमेंट हुए। एयरबर्न ट्रांसपोर्ट हुए और उसके बाद डिपॉजिट हो रहे हैं बारिश के रास्ते। यह जो एक साइक्लिक प्रोसेस चालू हो गया दोस्तों, यह चिंता का विषय है। सिमिलरली

3:51 आप देखेंगे इट इज़ फिजिकल प्रूफ दैट प्लास्टिक कॉन्टैमिनेशन हैज़ स्प्रेड फ्रॉम ओशन टू एयर एंड बैक। यह जो साइक्लिकल प्रोसेस है दैट इज प्रूफ इनफ कि अब माइक्रोप्लास्टिक्स युबिक्वेटस हो रहे हैं। हर जगह मिल रहे हैं। ना सिर्फ अभी तक जमीन पे ओशंस में माइक्रोप्लास्टिक्स का कहर मचा हुआ है। और एटमॉस्फेयर में अब आ गया है तो बारिश के साथ भी हो रहा है। तो जब मैंने कहा था कि माइक्रोप्लास्टिक्स को अगर हमने सॉल्व नहीं किया तो ह्यूमैनिटी का सिस्टम ये माइक्रोप्लास्टिक्स थो डालेगा। क्या आप उससे एग्री करेंगे? आगे बढ़ते हैं और देखते हैं कि यह क्यों अलार्मिंग है। सबसे पहला अनलाइक एसिड रेन। एसिड रेन क्या होता है? जब सल्फर डाइऑ सल्फर ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड्स रिएक्ट करते हैं तो हम देखते हैं कि एसिड रेन जब होता है वो एक तरीके से

4:36 रिसाइक्लिकबल है। हमारा अर्थ का बायोजियोकेमिकल साइकिल उसे प्रोसेस कर सकता है ओवर अ पीरियड ऑफ़ टाइम। पर प्लास्टिक्स को प्रोसेस नहीं किया जा सकता। वो वहीं रहेंगे इन सम फॉर्म और द अदर। और इसीलिए माइक्रोप्लास्टिक्स आर नॉन बायोडिग्रेडेबल सॉलिड्स एंड पर्सिस्ट इनडेफिनेटली। क्योंकि यह पर्सिस्ट करते हैं। लंबे समय काल तक रहते हैं। तो दैट मींस ह्यूमन हेल्थ के लिए रिस्क होगा। ये एक्यूमुलेट करना चालू करते हैं बॉडी में। क्या आप जानते हैं रिसर्चरर्स ने रिसेंटली पता लगाया कि हम जो एक होलीएस्ट ऑफ प्लेसेस कहते हैं मां का गर्भ। जहां पे एक शिशु का डेवलपमेंट हो रहा होता है। उसके आसपास एक फ्लूइड होती है एमोटिक फ्लूइड। रिस्चर्स ने पता लगाया कि उस मां के गर्भ में एमनीोटिक फ्लूइड में भी माइक्रोप्लास्टिक्स आजकल पाए जा रहे हैं।

5:23 ब्लड स्ट्रीम में मिल रहा है, लंग्स में मिल रहा है। तो यानी कि ह्यूमन हेल्थ इंपैक्ट होगा। इसको हम कहते हैं बायो एक्यूमुलेशन। ये जो छोटे-छोटे कंसंट्रेशन में जब आप प्लास्टिक के बोतल से पानी पीते हैं, थोड़ा बहुत माइक्रोप्लास्टिक आपके बॉडी में गया। ऑब्वियसली आपका बॉडी उसको नहीं तोड़ पा रहा है। वो एक्यूमुलेट करता चला जा रहा है। धीरे-धीरे उसका नेगेटिव इंपैक्ट, नेगेटिव प्रभाव दिखना शुरू होगा। ऐसे ही तो इंडिया आज कैंसर कैपिटल ऑफ द वर्ल्ड नहीं बना है। कहीं ना कहीं कुछ मेजर एरर हुआ है और यह सिर्फ इंडिया का गलती नहीं है। राष्ट्रीय इंटरनेशनल स्तर पे ये कहीं ना कहीं एरर हुआ है। तो आप देखें इन्हेलेशन इंजेशन जब आप खाएंगे पिएंगे एक्यूमुलेशन इन ऑर्गन्स लिवर ब्रेन इत्यादि में ये एक्यूमुलेट करता चला जा रहा है। बायो एक्यूमुलेशन हो रहा है। एंड एंडोक्रीन डिसररप्शन फ्रॉम एडिटिव्स थैलेड्स हो गए। बिसफिनोल हो गए। दीज़ आर ऑल

6:11 वेरी डेंजरस एजेंट्स दोस्तों। इससे हेल्थ हमारे डायरेक्टली इंपैक्ट होता है। चाहे हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम हो, चाहे हमारा रिप्रोडक्टिव सिस्टम हो, चाहे हमारा एबिलिटी टू टोलरेट हुआ। हमारा जो एक इनर एबिलिटी होता है जिसको हम कहते हैं कि हम लोग कितना टोलरेट कर सकते हैं। कितना स्ट्रांग है आप अंदर से वो भी आपका कम हो जाएगा। इम्यूनिटी कम हो जाएगा। ऐसा समझिए। लास्टली आप देखेंगे दे आर आल्सो वेक्टर्स। इसका अर्थ जानते हैं क्योंकि ये छोटे-छोटे पार्टिकल्स हवा में ऐसे तैर रहे हैं तो उससे बैक्टीरिया, वायरस इत्यादि वन प्लेस टू अदर प्लेस जा रहे हैं। एक प्लेस से दूसरी जगह जा रहे हैं। तो डिजीज को भी स्प्रेड करने में माइक्रोप्लास्टिक्स अपना योगदान दे रहे हैं। तो देखेंगे आप माइक्रोप्लास्टिक्स में कैरी पैथोज्स, माइक्रोब्स, वायरसेस, एटसेट्रा। कितना डेंजरस है माइक्रोप्लास्टिक्स। पर वही है

6:56 ना? ग्रीड और गवर्नेंस के बीच में फिलहाल ग्रीड जीत रहा है और मैं आपको बताऊंगा कैसे। आगे बढ़ते हैं और देखते हैं रूट कॉज क्या है माइक्रोप्लास्टिक्स रेन का। सबसे पहला ग्रीड। यह जो हमारा डिपेंडेंस हो गया है। इनफैक्ट ओवर डिपेंडेंस हो गया है प्लास्टिक्स के ऊपर कि प्लास्टिक्स के बगैर हम अपना वे ऑफ़ लाइफ डेली लाइफ सोच ही नहीं सकते हैं। ये जो कंज्यूमरिस्टिक कल्चर आ गया है उसके चलते माइक्रोप्लास्टिक्स का तादाद हद से ज्यादा बढ़ गया है आज के टाइम। तो आप देखेंगे डिपेंडेंस ऑन सिंथेटिक पॉलीमर्स, लॉजिस्टिक, पैकेजिंग, टेक्सटाइल्स यह जो हमारा एडवांटेज था अब हमारा डिसएडवांटेज बन चुका है। कहते हैं ना द हंटर हैज़ बिकम द हंटेड। वी आर गेटिंग हंटेड बाय द वेरी प्रोडक्ट दैट वी क्रिएटेड। सिमिलरली आप देखिएगा वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम। ये देखिए गाजीपुर लैंडफ। क्या लगता है इसमें

7:43 माइक्रोप्लास्टिक्स बहुत सारे नहीं होंगे? अब जब हवा चल रहा है, पानी चल रहा है, ये सारा माइक्रोप्लास्टिक्स हवा पानी में फैलेगा। तो सिमिलरली इंडोनेशिया में भी जो लैंडफिल्स हैं जहां सारा कचरा जा रहा है उसको ओपन लैंड फिल्स रखा जा रहा है। जिसके चलते दे आर फ्री फ्रीली इंटरेक्टिंग विद वाटर एयर एंड लैंड जिसकी वजह से ये साइक्लिक प्रोसेस में घुस पा रहे हैं। सिमिलरली आप देखिएगा एक्सपोज़र ऑफ़ डंप वेस्ट जितना आप बाहर छोड़ेंगे उतना हवा पानी इसको कैरी फॉरवर्ड करके जाएगा। तो आपके मन में सवाल आएगा कि आखिरकार कर क्या सकते हैं हम फिर? क्योंकि माइक्रोप्लास्टिक्स ऐसे आपने बताया कि नॉन बायोडिग्रेडेबल है वो टूटेगा नहीं। तो सबसे पहले शॉर्ट टर्म में एक्सटेंडेड प्रोड्यूसर रिस्पांसिबिलिटी ईपीआर का कांसेप्ट समझिए दोस्तों। यह है पोलटर पेस प्रिंसिपल के अंदर एक एंसिलरी कांसेप्ट।

8:29 इसका अर्थ क्या होता है कि आप यहां पे अब प्रोडक्शन कम करने के लिए एक दारूमदार एक रिस्पांसिबिलिटी डालते हैं प्रोड्यूसर के ऊपर। कैसे? सबसे पहला रिटेलर अपना सामान बेचता है। आपने खरीद लिया उसको। सामान को भी खरीदा, पैकेजिंग भी साथ में आया। अब रिसाइकल करेंगे। प्रोड्यूसर इज रिस्पांसिबल। जिसने वो प्रोड्यूस किया है वो सामान उस पर दारोमदार डाला जाता है फॉर कलेक्टिंग, प्रोसेसिंग, रिसाइक्लिंग एंड डिस्पोजिंग दोनों चीज पैकेजिंग और प्रोडक्ट ताकि हमारा जो माइक्रोप्लास्टिक्स का जो प्रोडक्शन हो रहा है उसमें कमी आए। अगर हम रिसाइकल कर रहे हैं एक ही चीज को बार-बार तो ये जो तादाद बढ़ती चली जा रही है प्लास्टिक्स की उसमें कमी आएगी। जिसके चलते हम देखते हैं कि प्रोड्यूसर यूजज़ रिसाइकल मटेरियल्स टू मैन्युफैक्चर प्रोडक्ट्स एंड मार्केट्स।

9:15 रिड्यूस, रयूज, रिसाइकल ये क्या है दोस्तों? यह एक सर्कुलर इकॉनमी की तरफ हमें बात करता है। दैट वी हैव टू स्ट्राइव टू बिकम अ सर्कुलर इकॉनमी। व्हिच मींस इस तरीके के पोल्यूटिंग एजेंट्स को कम करने के लिए हमको रिड्यूस करना पड़ेगा इसका यूज़। रिसाइकल करना पड़ेगा ये सारे प्रोडक्ट्स को और उसके बाद ही हम इनका नंबर कम कर पाएंगे हमारे अर्थ के ऊपर। पर ये तो रहा एक तरीके से कंटीन्यूअस प्रोसेस। जब हम प्लास्टिक्स को रेगुलेट करने की बात करते हैं तो सबसे बड़ा जो एक मैकेनिज्म तैयार हो रहा है यह बीरबल की खिचड़ी जैसा बन गया है। यह कब से तैयार हो रहा है पर इसमें कुछ प्रोग्रेस नहीं हो पाया है और मैं बात कर रहा हूं ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी की। यूनाइटेड नेशंस एनवायरमेंट प्रोग्राम जिसका हेड क्वार्टर है नैरोबी कीन्या में। उन्होंने बनाया था

10:03 एक इंटरनेशनल नेगोशिएटिंग कमिटी आईएसी। यह बेसिकली कमिटी था जो कंसेंस डेवलप करने की कोशिश कर रहा है। एग्रीमेंट डेवलप करने की कोशिश कर रहा है प्लास्टिक्स के रेगुलेशन के ऊपर। इसका नाम दिया गया था द जीरो ड्राफ्ट। जो पहला एक तरीके से ड्राफ्ट तैयार हुआ था। उसका नाम था जीरो ड्राफ्ट जो यूएनईपी ने निकाला था। मुद्दा क्या था? एक ग्लोबल प्लास्टिक स्ट्रीटी डिफाइन करें हम। जिससे हम प्लास्टिक के प्रोडक्शन उसके यूज को हम कम कर सकें ताकि हमारा जो एक इंटरनरेशनल इक्विटी है जिस तरीके से हमारे पूर्वजों ने हमको यह जमीन दी थी यह हवा दिया था ये पानी दिया था हमारे ऊपर भी यह दारोमदार है कि हम उसी तरीके से अपने फ्यूचर जनरेशंस को उसी क्वालिटी के साथ ये चीज आगे सौंपे पर क्या हम कर रहे हैं वो जी नहीं तो उसके लिए

10:49 ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीट इज वेरी वेरीेंट क्या आप जानते हैं दोस्तों क्योंकि प्लास्टिक्स को क्रिएट करने में लगता है फॉसिल फ्यूल्स और इसीलिए जो फॉसिल फ्लोइंग प्रोड्यूसिंग कंट्रीज हैं चाहे वो कुवैत हो, सऊदी हो, ईरान, रशिया, चाइना, बहरेन ये सब इस ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी के डाइल्यूशन के लिए हद से ज्यादा एफर्ट लगा रहे हैं। फॉर एग्जांपल इनका क्या कहना है कि पूरा ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी सिर्फ प्लास्टिक पोल्यूशन की बात करें ना कि प्लास्टिक प्रोडक्शन की। अब बताइए प्रोडक्शन की बात नहीं करे पर पोल्यूशन की बात करें। एक के बगैर दूसरा संभव है क्या? और सरप्राइजिंग बात यह है कि भारत ने इनके पोजीशन को इंडोर्स किया है। तो सवाल मैं अपने दर्शक गण पर छोड़ता हूं। क्या लगता है आपको? क्या भारत का यह अप्रोच अच्छा

11:35 है? क्या प्लास्टिक्स को रियली कंट्रोल किया जा सकता है? इसके प्रोडक्शन पोलशन को कैसे हम कंट्रोल करेंगे? क्योंकि प्रेजेंट फॉर्मेट में यह अब अनसस्टेनेबल बन गया है दोस्तों। इंडोनेशिया में रेलफॉर्न होना ना सिर्फ इंडोनेशिया रिस्चर्स का कहना है इंडिया में भी हो चुका है ये। एंड दिस विल बिकम अ रियलिटी इन द कमिंग डेज। आई होप यह डिस्कशन आपको पसंद आया। आप सीखे समझे कुछ नया अवेयरनेस आया एक बहुत ही क्रिटिकल इशू के बारे में। इस डिस्कशन का पूरा पीडीएफ मैं अपलोड कर दूंगा मेरे Telegram चैनल पे जिसका नाम है भुवन स्टडी आईक्यू। अगर आप सिविल सर्विज के स्टूडेंट हैं तो यह बहुत इंपॉर्टेंट रिसोर्स पॉइंट है आपके लिए। आज ही जाएं Telegram पे सर्च करें बाय द नेम भुवन स्टडी आईक्यू। मैं आपके लिए उपलब्ध हूं Instagram पे भी बाय द सेम नेम भुवन स्टडी आईक्यू। आपका सजेशन, आपका कमेंट, आपका फीडबैक सर आंखों पे। जाने से पहले

12:23 लेट इज़ इट लेट मी अनाउंस वेरी क्विकली। स्टडी आईक्यू का सक्सेस इन प्रीलिम्स बैच। नाउ दैट हैज़ स्टार्टेड। इनफैक्ट इसके एडमिशंस ओपन हो गए हैं। 10 तारीख से इसके क्लासेस शेड्यूल्ड हैं। द कंप्लीट रिवीज़ कोर्स टू मेक श्योर दैट यू सक्सीड इन द प्रीलिम्स एग्जामिनेशन 26 मई 2026 को। साइन अप के लिए आप जाएंगे स्टडी आईक्यू के वेबसाइट या ऐप पे और साइन अप करेंगे यूजिंग द कूपन कोड बी ए एल आई वी ई ऑन दैट नोट फ्रेंड्स थैंक यू फॉर वाचिंग मैं बहुत जल्दी वापस आऊंगा एक और ऐसे प्रेजेंटेशन के साथ तब तक के लिए नमस्कार जय हिंद स्टडी आईक्यू आईएएस आपका सिलेक्शन हमारा मिशन

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