The True Swag of AIR 1 | Dungara Ram Choudhary

Dharamveer Jat www.youtube.com

संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो 2002 में आईआईटी-जेईई में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करने वाले डोंगरा राम चौधरी की प्रेरणादायक कहानी बताता है। यह कहानी उनकी असाधारण मेहनत, समर्पण और बाधाओं को पार करने की क्षमता पर प्रकाश डालती है।

  • डोंगरा राम चौधरी एक हिंदी माध्यम के छात्र थे और उन्होंने ड्रॉपर के तौर पर यह सफलता हासिल की, जो कि आईआईटी के इतिहास में बहुत ही दुर्लभ है।
  • उन्होंने गणित में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए और रसायन विज्ञान में भी लगभग पूर्ण अंक प्राप्त किए, जिससे उनकी प्रतिभा और मेहनत का पता चलता है।
  • उनकी कहानी वर्तमान परिस्थितियों से निराश न होकर लगातार प्रयास करने और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा देती है।

परिचय

यह वीडियो ऑल इंडिया रैंक वन के सेलिब्रेशन के बारे में बात करता है, जो हर साल कोटा में होता है। यह उस समय की बात करता है जब जेईई एडवांस का रिजल्ट आ रहा था और किसी भी कोचिंग ने ऑल इंडिया रैंक वन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। फिर, शाम को एक लड़का बंसल क्लासेस में वीके बंसल सर के पास जाता है और कहता है कि वह ऑल इंडिया रैंक वन है।

डोंगरा राम चौधरी की कहानी

डोंगरा राम चौधरी बंसल कोचिंग क्लासेस के एक औसत छात्र थे, जिन्होंने किसी स्कॉलरशिप एग्जाम में भी अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था। वह हिंदी माध्यम के छात्र थे और उन्होंने ड्रॉपर के तौर पर आईआईटी-जेईई में ऑल इंडिया रैंक वन हासिल की, जो कि बहुत ही आश्चर्यजनक था। 64 सालों के आईआईटी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी ड्रॉपर ने ऑल इंडिया रैंक वन हासिल की हो।

असाधारण प्रदर्शन

डोंगरा राम चौधरी ने आईआईटी-जेईई के गणित के पेपर में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए थे। उन्होंने इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री में भी लगभग पूर्ण अंक प्राप्त किए थे। उनका एक प्रश्न गलत था, लेकिन वह प्रश्न ओपी टंडन की किताब में भी गलत दिया हुआ था। इससे पता चलता है कि यह सफलता तुक्का नहीं थी, बल्कि उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम थी।

संघर्ष और समर्पण

12वीं के साथ आईआईटी-जेईई का पेपर देने पर डोंगरा राम चौधरी क्वालीफाई नहीं कर पाए थे। इसके बाद, वह अपने पिताजी के साथ बंसल कोचिंग क्लासेस में गए। उनके पिताजी ने वीके बंसल सर से फीस कम करने का अनुरोध किया और कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अपने खेत भी बेच देंगे। डोंगरा राम चौधरी कोचिंग में बाकी औसत छात्रों की तरह ही थे, लेकिन उन्हें अपनी काबिलियत और मेहनत पर भरोसा था।

सफलता की राह

डोंगरा राम चौधरी बंसल कोचिंग क्लासेस के स्कॉलरशिप टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे, लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत करना जारी रखा। उनका सिर्फ एक ही लक्ष्य था - आईआईटी-जेईई 2002 में एडमिशन लेना। ऑल इंडिया रैंक वन आने के बाद, उन्होंने आईआईटी कानपुर में कंप्यूटर साइंस में बीटेक में एडमिशन लिया।

सहपाठी की राय

उनके बैचमेट पीयूष रंजन ने कहा कि यह कहानी मेहनत और समर्पण की कहानी है। उन्होंने डोंगरा राम चौधरी को सबसे विनम्र और मेहनती व्यक्ति बताया। पीयूष ने बताया कि डोंगरा रात को 9-10 बजे सोते थे और सुबह 4 बजे उठ जाते थे। उन्होंने हिंदी में जेईई दिया था और इंस्ट्रक्शन लैंग्वेज के साथ उन्हें कठिनाई हुई, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से सब कुछ हासिल कर लिया।

प्रेरणा

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें अपनी वर्तमान परिस्थितियों के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि मेहनत करने पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा करके हम कुछ ऐसा कर सकते हैं जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ हो। इसलिए, अपनी वर्तमान स्थिति को देखकर घबराइए मत, क्योंकि आप इतिहास रच सकते हैं।

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Transcript

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0:00 [प्रशंसा] ये जो आप अभी देख रहे हैं यह कोई चुनावी रैली नहीं यह ऑल इन रंग वन का सेलिब्रेशन है और सिर्फ ऐसा एक बार ही नहीं हुआ यह कोटा में हर साल इसी तरीके से ऑल न रिंग वन को सेलिब्रेट किया जाता है लेकिन सपोज कीजिए जई एडवांस जैसे बड़े एग्जाम का रिजल्ट डे है सारी कोचिंग्स अपने टॉपर्स का रिजल्ट चेक कर रही है और ऑल इंडिया रैंक वन कहीं से नहीं आ रही सिर्फ कोटा ही नहीं शाम तक पूरे इंडिया में से किसी भी कोचिंग ने किसी भी पर्सन ने यह रिवील नहीं किया कि ऑल इंडिया रैंक वन है कौन ऑल इंडिया रैंक वन वा लिटरली मिसिंग तभी शाम को कोटा की एक फेमस कोचिंग क्लास बंसल क्लासेस में एक लड़का जाता है उनके डायरेक्टर वीके बंसल सर से कहता है कि सर आई एम ओनी रंक वन इमेजिन द लेवल ऑफ शॉक दे वुड हैव गोट क कि वो लड़का किसी टॉपर बैच का टॉपर स्टूडेंट नहीं बल्कि एक एवरेज वेज

0:47 का एवरेज सा स्टूडेंट था जो कि बंसर कोचिंग क्लासेस के किसी स्कॉलरशिप एग्जाम या किसी लोकल टेस्ट में भी अच्छे से परफॉर्म नहीं कर पाया था शौक सिर्फ यही खत्म नहीं हुआ दो बड़े और शौक लगे थे पहला कि वो एक हिंदी मीडियम स्टूडेंट था जो कि शायद उस समय तक पहला स्टूडेंट था हिंदी मीडियम से जो आईआईटी जेई जैसे टफ पेपर में ओडिना रंक वन लाया हो उससे भी बड़ा शौक तो यह था कि वो एक ड्रॉपर स्टूडेंट था क्योंकि उससे पहले और उसके बाद आज दिन तक कोई नहीं कर पाया आईआईटी की 64 इयर्स की हिस्ट्री में सिर्फ एक बार ही ऐसा हुआ है जब किसी ड्रॉपर ने ऑल इंडिया रैंक वन सिक्योर किया हो और वो था 2002 मैं बात कर रहा हूं डोंगरा राम चौधरी जो कि राजस्थान के जालर डिस्ट्रिक्ट से थे उनकी इस कामयाबी को तुक्का कहने से पहले एक बात जरूर सुन लो कि इन्होंने आईआईटी जेई के मैथमेटिक के सब्जेक्टिव पेपर में 100 आउट ऑफ 100 स्कोर किया था इसके साथ ही

1:33 इन्होंने इनऑफ निक केमिस्ट्री में भी नियर परफेक्ट स्कोर था सिर्फ एक क्वेश्चन गलत हुआ था और वो जो एक क्वेश्चन गलत हुआ था वो ओपी टेंडन जैसी फेमस बुक में भी गलत दिया हुआ था तो इस फैक्ट से आप समझ गए होंगे कि ये कोई तुक्का तो नहीं था ये सिर्फ मेहनत हार्ड वर्क डेडिकेशन था 12थ के साथ जब इन्होंने आईआईटी जेई का पेपर दिया तब इनका क्वालीफाई नहीं हुआ और 12थ के बाद यह प्रिपेयर करने के लिए बंसल कोचिंग क्लासेस में अपने पिताजी के साथ गए इनके पिताजी ने बंसल कोचिंग क्लासेस के डायरेक्टर पी के बंसल सर से कहा कि सर फीस थोड़ी कम कर दीजिए मेरा बेटा पक्का आईआईटी निकालेगा अगर आप फीस कम नहीं करेंगे तो मुझे अपने खेत बेचने पड़ेंगे तो वीके बंसल सर ने कहा कि अगर आपको भरोसा है कि आपका बेटा आईआईटी निकालेगा तो अपने अपने खेत बेच दीजिए और उनके पिताजी ने भी सेम वही किया अपने खेत बेचकर अपने बेटे को पढ़ाना शुरू कर दिया कोचिंग में एडमिशन लेने के

2:20 बाद बाकी एवेज बच्चों की तरह ये भी टीचर की नजरों से घूम से गए टीचर्स इन पर ज्यादा ध्यान नहीं देते थे लेकिन इनकी काबिलियत पर और इनके मेहनत पर इन्हें भरोसा था जो कि इन्होंने कर दिखाया ये भले ही बंसल कोचिंग क्लासेस के जो स्कॉलरशिप टेस्ट होते हैं या जो नॉर्मल पेपर्स होते हैं उनमें अच्छे से परफॉर्म नहीं कर पा रहे थे लेकिन ये कंसिस्टेंटली मेहनत किए जा रहे थे और अपना सिर्फ एक ही टारगेट बना रखा था आईआईटी जेई 2002 और सिर्फ एक ही टारगेट था कि आईआईटी में एडमिशन चाहिए मतलब चाहिए और कुछ नहीं ऑल इरिंग वन आने के बाद उन्होंने उस समय की सबसे टॉप रैंकिंग आईआईटी आईआईटी कानपुर में कंप्यूटर साइंस बीटेक में एडमिशन लिया और इनके एक बेस मैटर है पियूष रंजन ने इनके बारे में कहा माइंड यू दिस इज डेफिनेटली नॉट एट ऑल अ स्ट्रेंज स्टोरी दिस इज द स्टोरी ऑफ प्योर डेडिकेशन एंड हार्ड वर्क ही इज वन ऑफ द मोस्ट हंबल एंड हार्ड

3:06 वर्किंग डूड आई हैव एवर एनकाउंटर्ड इन माय लाइफ आई वाज हिज बैचमेट एट आईआईटी फ्रॉम 2002 टू 2006 आई रिमेंबर्ड ही यूज टू स्लीप एट 900 टू 10 पीएम एंड वेक अप एट 4 एम आई हैव नेवर सीन एनी वन वर्क हार्डर देन हि ही रोट जेई इन हिंदी एंड पॉसिबली द फर्स्ट रैंक हु रोट जे इन हिंदी ही हैड स्ट्रगल्स विथ इंस्ट्रक्शन लैंग्वेज ही कंपाइ इट ऑल विद हार्ड वर्क एंड डेडिकेशन ये स्टोरी सुनने के बाद एक बात आपको जरूर समझ में आ गई होगी कि आपकी प्रेजेंट कंडीशन क्या है उसके बारे में ना सोचते हुए आप सिर्फ मेहनत करने पर ध्यान देंगे तो आप कुछ ऐसा कर सकते हैं जो हो सकता है इतिहास में आज दिन तक नहीं किया हो इसलिए अपनी प्रेजेंट कंडीशन को सोचकर घबराइए मत क्योंकि आप हो सकता है कुछ ऐसा कर जाए जो इतिहास रचते इतिहास बना दे मेहनत करते रहिए ऑल द बेस्ट

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