संक्षिप्त सारांश
यह वीडियो 2002 में आईआईटी-जेईई में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल करने वाले डोंगरा राम चौधरी की प्रेरणादायक कहानी बताता है। यह कहानी उनकी असाधारण मेहनत, समर्पण और बाधाओं को पार करने की क्षमता पर प्रकाश डालती है।
- डोंगरा राम चौधरी एक हिंदी माध्यम के छात्र थे और उन्होंने ड्रॉपर के तौर पर यह सफलता हासिल की, जो कि आईआईटी के इतिहास में बहुत ही दुर्लभ है।
- उन्होंने गणित में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए और रसायन विज्ञान में भी लगभग पूर्ण अंक प्राप्त किए, जिससे उनकी प्रतिभा और मेहनत का पता चलता है।
- उनकी कहानी वर्तमान परिस्थितियों से निराश न होकर लगातार प्रयास करने और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने की प्रेरणा देती है।
परिचय
यह वीडियो ऑल इंडिया रैंक वन के सेलिब्रेशन के बारे में बात करता है, जो हर साल कोटा में होता है। यह उस समय की बात करता है जब जेईई एडवांस का रिजल्ट आ रहा था और किसी भी कोचिंग ने ऑल इंडिया रैंक वन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी। फिर, शाम को एक लड़का बंसल क्लासेस में वीके बंसल सर के पास जाता है और कहता है कि वह ऑल इंडिया रैंक वन है।
डोंगरा राम चौधरी की कहानी
डोंगरा राम चौधरी बंसल कोचिंग क्लासेस के एक औसत छात्र थे, जिन्होंने किसी स्कॉलरशिप एग्जाम में भी अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था। वह हिंदी माध्यम के छात्र थे और उन्होंने ड्रॉपर के तौर पर आईआईटी-जेईई में ऑल इंडिया रैंक वन हासिल की, जो कि बहुत ही आश्चर्यजनक था। 64 सालों के आईआईटी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ था जब किसी ड्रॉपर ने ऑल इंडिया रैंक वन हासिल की हो।
असाधारण प्रदर्शन
डोंगरा राम चौधरी ने आईआईटी-जेईई के गणित के पेपर में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए थे। उन्होंने इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री में भी लगभग पूर्ण अंक प्राप्त किए थे। उनका एक प्रश्न गलत था, लेकिन वह प्रश्न ओपी टंडन की किताब में भी गलत दिया हुआ था। इससे पता चलता है कि यह सफलता तुक्का नहीं थी, बल्कि उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम थी।
संघर्ष और समर्पण
12वीं के साथ आईआईटी-जेईई का पेपर देने पर डोंगरा राम चौधरी क्वालीफाई नहीं कर पाए थे। इसके बाद, वह अपने पिताजी के साथ बंसल कोचिंग क्लासेस में गए। उनके पिताजी ने वीके बंसल सर से फीस कम करने का अनुरोध किया और कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह अपने खेत भी बेच देंगे। डोंगरा राम चौधरी कोचिंग में बाकी औसत छात्रों की तरह ही थे, लेकिन उन्हें अपनी काबिलियत और मेहनत पर भरोसा था।
सफलता की राह
डोंगरा राम चौधरी बंसल कोचिंग क्लासेस के स्कॉलरशिप टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे, लेकिन उन्होंने लगातार मेहनत करना जारी रखा। उनका सिर्फ एक ही लक्ष्य था - आईआईटी-जेईई 2002 में एडमिशन लेना। ऑल इंडिया रैंक वन आने के बाद, उन्होंने आईआईटी कानपुर में कंप्यूटर साइंस में बीटेक में एडमिशन लिया।
सहपाठी की राय
उनके बैचमेट पीयूष रंजन ने कहा कि यह कहानी मेहनत और समर्पण की कहानी है। उन्होंने डोंगरा राम चौधरी को सबसे विनम्र और मेहनती व्यक्ति बताया। पीयूष ने बताया कि डोंगरा रात को 9-10 बजे सोते थे और सुबह 4 बजे उठ जाते थे। उन्होंने हिंदी में जेईई दिया था और इंस्ट्रक्शन लैंग्वेज के साथ उन्हें कठिनाई हुई, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और समर्पण से सब कुछ हासिल कर लिया।
प्रेरणा
यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें अपनी वर्तमान परिस्थितियों के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि मेहनत करने पर ध्यान देना चाहिए। ऐसा करके हम कुछ ऐसा कर सकते हैं जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ हो। इसलिए, अपनी वर्तमान स्थिति को देखकर घबराइए मत, क्योंकि आप इतिहास रच सकते हैं।

