0:00 साथियों अपने ध्यान के अनुभव को नित प्रतिदिन गहरे करते जाना। जैसे जैसे हम निरंतर ध्यान करते हैं, अनुभव करते हैं तो हमें और गहरा होता जाता है और जो भी हमारे साथ होता है उसको खुद समझना है और उसको समाधान भी खुद ही निकालना है। बाहर से केवल इशारे मिलते हैं। एक माहौल मिलता है, एक वातावरण मिलता है। पर ध्यान करना एक निजी पुरुषार्थ है।
0:48 और निरंतर ध्यान का असर हम देख रहे होंगे। निरंतरता में बड़ी ताकत है। उसी से ही परिणाम आ पाते। कभी-कभी करने से परिणाम नहीं आते। तो आप सभी का सहयोग मिल रहा है और हम इस प्लेटफार्म पर निरंतर ध्यान कर पा रहे हैं। ये एक प्रभु कृपा है तो हम प्रभु को धन्यवाद देंगे। हम सभी एक ही ऊर्जा के स्त्रोत है।
1:33 चेतन स्वरूप में हम सभी एक ही है। चलिए हम आज के सत्र की ओर आगे बढ़ेंगे। अभी पिछले कुछ समय से हमने विभिन्न विषयों को थोड़ा सघनता से लेने का प्रयास किया है। ताकि उनको हम बड़े परिणामों में बदल सके। ट्रिकी जैसा एक विषय जो हमारे अभियान को हमारे जीवन को हमारे आसपास के जीवन को बहुत सुंदर बना सकता है।
2:19 रेकी ऊर्जा ओरा हीलिंग मैं समझता हूं आप इसका निरंतर अभ्यास कर रहे होंगे और अभी तक नहीं कर रहे हैं तो उसका निरंतर अभ्यास कर ले उसमें कोई कीमत नहीं लगती है उसमें केवल जागरूकता लगती है उसके अलावा कुछ चीजें जो मैं वापस रिपीट करना चाहूंगा। कल भी रिपीट की थी। हमने अपने जो आपस के कम्युनिकेशन सिस्टम होता है WhatsApp के माध्यम से या और किसी माध्यम से उसको सुव्यवस्थित करेंगे। अभी
3:06 अव्यवस्थित चल रहा था। बहुत सारे साथियों ने कर लिया है और बहुत सारे साथियों का अगर बाकी है करना तो उसको व्यवस्थित करना है। क्या करना है कि जो हमें संवाद मिलते हैं ऊपर से वह व्यवस्थित तरीके से मिले। हमारे हम इतने ग्रुपों में नहीं जुड़े हुए कि हम देख ही नहीं पाए और हमारे को मिलने के बाद हमारे नीचे साथियों को बराबर से जा रहे हैं कि नहीं जा रहे ये हमें सुनिश्चित करना है। उसको एक अनावश्यक ग्रुपों को या अनावश्यक मैसेजिंग सिस्टम को हटाना है। जो कुछ भी करते रहते हैं कुछ भी डालते
3:52 रहते हैं। जो अभियान की मुख्य धारा में नहीं होते हैं और जो अपने समय की कीमत को नहीं पहचानते हैं ना दूसरों की समय की कीमत को पहचानते या कुछ उनकी आदत ऐसी हो जाती है कि उनका हाथ अपने आप ही वहां जाता रहता है और कुछ ना कुछ वो करते रहते हैं। उन चीजों पे नियंत्रण हो। कुछ साथी बार-बार अलग-अलग ग्रुप बनाते रहते हैं। उनकी आदत पड़ जाती है। उनको वही आता है। उन सब चीजों पर नियंत्रण होना चाहिए। जैसे ही कोई ग्रुप बनाए तुरंत आपको सक्रिय होकर उसको आदत को ठीक करना है। तो क्या ये सब काम हो गया है या अभी भी बाकी है?
4:42 जब तक बाकी रहेगा तब तक बोझ रहेगा। जिस दिन समाप्त हो जाएगा उस दिन हम इजी होके बड़ा काम कर पाएंगे। अच्छा आप सोचते होंगे ये विषय इतना आवश्यक है कि यहां बार बार चर्चा की जा रही है। साथियों ये नेटवर्क जहां आ जाता है ना जहां एक बड़े समूह की बात आ जाती है। जहां एक प्रॉपर सिस्टम होता है कि जहां हमें सही सूचनाएं सही समय पर मिले। नहीं तो बहुत सारे नुकसान हो जाते हैं। हमारे ग्रोथ में बाधक हो जाता है। हमारे अभियान के विभिन्न उद्देश्य में बाधक होता है। इसलिए अत्यंत आवश्यक है। इसको मामूली विषय ना समझे। बहुत ज्यादा जरूरी है। अगर ये सही नहीं करेंगे तो हम कभी ठीक से
5:30 कार्य कर ही नहीं सकते। संभव ही नहीं हो। हम अभियान के सभी साथी जो एक कड़ी है और हर कड़ी मजबूत होनी चाहिए। हर कड़ी तक बराबर संवाद होना चाहिए सही तरीके से। इसलिए बहुत जरूरी विषय अत्यंत जरूरी है। तो इतनी बार चर्चा होने के बाद बाकी अगर रहता है तो हमारी वो गैर जागरूकता को दर्शाता है। एक विषय एक बार में सुनना और एक बार में पूर्ण कर लेना यह जागरूकता की निशानी होती है। तो सभी साथी अच्छी तरह से सुनिश्चित कर ले
6:19 और इतना बातचीत होने के बाद भी अगर आप नहीं करते हैं तो फिर आपका मालिक भगवान है और कोई इस धरती पर आपका कल्याण कर भी नहीं सकता है। जो इतनी बेहोशी में जीता है उसका कल्याण कोई नहीं कर सकता है। वो फिर केवल अपने भाग्य को दोष देता रहता है। दूसरों को दोष देता रहता है। मेरा प्लान सहयोग नहीं करता है। दुनिया भर की इधर उधर की बातें करेगा। लेकिन जो खुद ही बेहोश है उसका कोई भला कैसे कर सकता है? तो साथियों ये अंतिम सूचना है कि आप इसको बिल्कुल सही कर ले। अपना पॉकेट डायरी और मेन डायरी लिखने के तरीके को सही
7:06 कर ले कि आप किसी भी विषय को भूले नहीं। एक बार भूले तो उसी दिन होश आ जाना चाहिए कि नहीं मुझे कुछ सिस्टम ठीक करना कम होश आया दूसरी बार भूले तब आ जाना चाहिए यहां कई बार चर्चा होती है तब आ जाना चाहिए तो सभी साथियों ने अपने लिखने का सिस्टम इस तरह से स्ट्रांग कर लिया होगा इस तरह से बढ़िया कर लिया होगा कि अब हम कभी भी किसी विषय को भूलते नहीं उसी से जुड़ा हुआ विषय है जो हम सुनते हैं वो लिखते हैं।
7:53 लेकिन एक बहुत जरूरी चीज होती है लिखने की। स्वयं मूल्यांकन और उसके अनुसार अपने कार्यों की प्लानिंग करना। स्वयं मूल्यांकन किया जाता है कि मैं कहां ठीक हूं और मैं कहां ठीक नहीं हूं। मुझे इस दिशा में और कुछ करना चाहिए और उसको प्रतिदिन प्लानिंग में लाना ऐसा कोई साथी करते हो तो एक बार एंड रेज करें कभी किसी ने मूल्यांकन किया हो बैठ के कि मेरा जो चल रहा है सिस्टम वो कहां पर ठीक है कहां पर कुछ दिक्कत है और बुलाई
8:39 जी सर अखिलेश सर सर डायरी लिखने का जो प्रोसीजर है मैं एक्चुअली सीखा तो था बहुत पहले भी लेकिन इसको लागू करना यहां गुरुकुल में आने के बाद ही इसको तैयार किया जिसमें मुझे पता चला कि अगर हम जब किसी चीज की प्लानिंग कर लेते हैं ना तो वो चीजें हमारे दिमाग में स्थिरता प्रदान करता है और स्थिरता प्रदान करने के साथ हम फोकस हो जाते हैं अपने उस काम के जैसे अगर मैं अपने डायरी में अगर आप देख सकते हैं तो मैंने डायरी में चार पॉइंट लिखे हैं। तो मेरे पूरे दिन ये टारगेट रहता है कि इन चार कामों को स्थिरता के साथ फोकस के साथ उसी उसको अंजाम दूं और तरीके से उसका रिजल्ट ओरिएंटेड मेरे सामने आए।
9:24 थैंक यू सर। मैं एक सवाल करना चाहूंगा जी। सर डायरी लिखना वो एक विषय हो गया। मैं अभी आप पूछ रहा हूं कभी आप स्व मूल्यांकन करके कभी कोई आपने कभी कोशिश की है क्या कि इससे कितने बड़े चमत्कार हो सकते हैं बिल्कुल सर इसमें बहुत परिवार एक कोई घटना बताई गई जैसे सर क्या होता था कभी-कभी मेरे जीवन में ऐसा बहुत सारी ऐसी घटनाएं आती थी कि कई सारी बार टास्क मिल जाते थे कई सारी जिम्मेदारियां जब मिल जाती थी तो मैं बहुत ही पैनिकिक हो जाता था बहुत हड़बड़ा जाता था कि यार कौन सा शुरू करूं कौन सा खत्म करूं किसका क्या होगा और इसका रिजल्ट मेरे पूरे दिन पे इसका प्रभाव पूरे दिन पर
10:09 पड़ता था लेकिन जैसे ही डायरी पर लिखना स्टार्ट किया तो चीजें सीक्वेंस वाइज हो गई नंबर वाइज मैंने उसको लिखना स्टार्ट किया तो मुझे लगा कि सारी चीजें संतुलित तरीके से कर पा रहा हूं और मानसिक शांति मिला प्रधान मुझे सबसे पहले बहुत बढ़िया चलिए थोड़ा और कुछ अलग विषय है जो अपन चर्चा का करना चाह रहे हैं कोई अन्य साथी को बुलाए जी सर अ ओम प्रकाश सर जी मैम स्व मूल्यांकन तो मैं पहले भी करता था लेकिन लापरवाही ये होती थी कि मैं नोट नहीं करता था और स्व मूल्यांकन के साथ-साथ कभी-कभी हमने देखा है कि जब हमारा चित्त मन बिल्कुल शांत होता है तो अच्छे-अच्छे विचार आते हैं, अच्छे-अच्छे आईडिया आते
10:56 हैं और पहले भी आते रहे लेकिन उसको मैं नोट नहीं कर रहा था। लेकिन अब से सर उसको मैं लगातार जो भी अच्छे विचार हमारे दिमाग में आते हैं उसको नोट करता हूं और उससे उसको अमल करने का प्रयास करता हूं सर। अभी मैं नोट करना शुरू कर दिया हूं। बहुत बढ़िया और आपने लाभ भी महसूस किया होगा उसका। यस सर। की देखिए साथियों हम हम दिन भर कितने विचार चलते हैं। अच्छे विचार भी आते हैं। कभी और अलग तरह के विचार भी आते हैं। पर इन विचारों के समुद्र में कभी-कभी ऐसे अद्भुत विचार भी आते हैं। तो एक तो विचार दो तरह से आते हैं। विचार कभी तो
11:44 अपने आप आ जाते हैं। कुछ चलते चलते कुछ सुनते हुए कुछ देखते हुए अचानक से एक विचार आता है कि ऐसा किया जा सकता है लेकिन वो आता है और फिर चला भी जाता है क्योंकि उसके बाद फिर दूसरा विचार आ जाता है फिर चौथा विचार आ जाता है तो विचार आते रहते है चले जाते हैं और हम उसको भूल भी जाते हैं कि कोई ऐसा आया था या भूलते नहीं है तभी हम उसको उस अपने जीवन में उसको शामिल नहीं कर पाते उस विचार को उसको यू गवा देते एक तो यह होता है और दूसरी अवस्था एक और होती है कि जब हम किसी भी हिस्से पर बैठकर सोचते हैं कि नहीं मुझे 1 लाख महिलाओं को एनिमे करना है या 1000
12:30 को करना है 10000 करना है मुझे करना है अभी तक जो कर रहे हैं वो बात नहीं बन रही है जो मैं करना चाहता हूं तो क्या क्या कर सकते हैं ऐसा बैठ के भी हम सोचते हैं तो आईडियाज आना शुरू करते हैं। फिर हम उसको प्लान कर सकते हैं, लिख सकते हैं, एग्जीक्यूट कर सकते। नहीं हो पाया एक बार में फिर कुछ सोचेंगे। फिर भी नहीं हो पाया तो कुछ डिस्कस करेंगे, कुछ अन्य साथियों से करेंगे, किसी से राय मशवरा करेंगे। तो क्या हम चाहकर कोई ऐसी बड़ी योजनाएं नहीं बना सकते? नहीं सोच सकते? साथियों हालात यह है कि मैं बड़ी योजना की तो बात छोड़ दो।
13:16 हम सामान्य काम भी नहीं करते, बताया भी नहीं करते। जो किताब में आ गए हैं, जो बता दिए गए हैं, उनके लिए भी ठीक से योजनाबद्ध होकर हम नहीं कर पाते। तो लिखने का तरीका क्या है? आपको ये जो बुक है इसमें पीछे 35 प्रश्न दिए गए। आपको इनमें से जो प्रमुख प्रश्न लगे उनमें से आपको जो उपयोगी लगे कि इसमें
14:03 मुझे कुछ सोचना चाहिए और मैं जो कर रहा हूं इसमें क्या करना चाहिए उसको पूरी तरह से बैठ के और प्लान करो कि इस काम को ऐसे करना है तो रास्ते वहां से निकलेंगे। अभी मान लो ये प्रश्न नंबर अपन ले लेते हैं प्रश्न नंबर पांच। प्रश्न नंबर पांच क्या आपके क्षेत्र में इतनी संख्या में यूएलपी क्विक कार्यक्रम होते हैं कि आपके किसी साथी को व्यक्तिगत स्तर पर प्लान दिखाने की जरूरत नहीं रहती है?
14:51 जैसे ओम प्रकाश जी ने बताया कि हमारे यहां हम दो तीन करते हैं ताकि किसी को यह जड़ नहीं रहे कि मेरे को उस समय पर मेरा आना संभव है। फिर व्यक्तिगत स्तर पर प्लान दिखाते हैं। अब ये प्रश्न है तो अब इसको समाधान ढूंढ बैठ के सोचिए थोड़ा सा कैसे करें? उपाय तो है ना उपाय धरती पर मौजूद है हर चीज का उपाय पूरी दुनिया बदले इसका भी उपाय मौजूद है उस उपाय के साथ हमारा जुड़ना तो इसको कहते है सही तरीके से प्लानिंग करना
15:39 तो ये भी लिखना जरूरी है और हम सब क्या समझते हैं कि जब मैं फील्ड में जा रहा हूं तो मैं काम कर रहा हूं। अगर मैं घर पे बैठा हूं तो मैं कुछ नहीं कर रहा। ये हमारे दिमाग में सबसे बड़ी गलत धारणा बैठी है। ये जो विभिन्न उपाय सोचना उनको लिखना और उन पर कार्य करना यही सबसे बड़ा काम सबसे बड़ा आप फील्ड में जाके भौतिक रूप से कुछ कर सकते हैं थोड़ा बहुत लेकिन आप बैठ के नियोजित करके बहुत बड़ा कर सकते हैं।
16:26 तो ये सब हम सबको अभ्यास में लाना चाहिए। इसके बारे में आपके मन में जो जिज्ञासा है प्रश्न है आप प्रश्न पूछिए। आज प्रश्न उत्तर के माध्यम से डिस्कस करेंगे। करना सभी को है। ऐसा नहीं कि हमारी अब तक जो आदत पड़ी है ना पूरा जो जीवन हमने जो बिताया है मैं सबकी नहीं कह रहा हूं। सामान्य बात जो मैं समाज में देखता हूं। हमने अपना जीवन क्या बताया? बिताया है? जैसे देखो बुरा मत मानना एग्जांपल कुछ देने पड़ जाते हैं कभी कभी।
17:14 एक बेल जो होता है ना वो बेल स्वत कभी भी कुछ नहीं करता है। उसको कोई जब चलाता है कि इधर चल तो उधर चल जाएगा। गोल घूम तो गोल घूम जाएगा। उधर चलोगे तो उधर चला जाएगा। वो कोई प्लान नहीं करता है कि मुझे आज कोई जुताई करनी है आज मुझे कुछ ये चलाना है ये करना है वो कोई प्लान नहीं करता उसको कोई चलाता है तो वो चलता है और चलाने के बाद भी बीचबीच में रुक जाता है तो फिर उसको कोई वो फिर कुछ आगे उसको मोटिवेट करने वाला चाहिए कि नहीं चल रुकता क्यों तो ये ऐसा जीवन बन चुका है आम आदमी का।
18:01 तो हमारे भी यही हालात है कि हम अपनी ओर से तो कोई इनिशिएट नहीं करते कुछ भी। लेकिन बताई हुई चीजों को भी बार-बार बताने की आवश्यकता पड़ती है। बार-बार जगाना पड़ता है। बार-बार हम भूल जाते हैं। बार-बार हम सो जाते हैं। बार-बार उसको कटौती कर देते हैं। बताया जाएगा इतना करेंगे उसमें से 10% 5% ये इस चीज में कहीं गैप लग रहा है कि नहीं लग रहा? जब इतनी पावरफुल कोई चीज हमारे सामने आ गई, इतना स्ट्रांग सिस्टम आ गया, इतना स्ट्रांग एजुकेशन सिस्टम आ गया। उसके बावजूद हम उसको लागू नहीं कर पाते हैं।
18:48 होना तो यह चाहिए कि एक इशारा मिल जाए कि अब इस 2026 में हर साथी को 100 50 25 से ज्यादा की ग्रोथ करनी ही करनी है। एक लाइन मिलने के बाद फिर खुद की जिम्मेदारी है कि हम उसके कैसे रास्ते निकालेंगे। कैसे प्लान करेंगे, कैसे योजनाएं बनाएंगे, कैसे हम संगठित होंगे? यह सब हम कर सकते हैं। आराम से कर सकते हैं। लेकिन आपको एक रवैया बदलना पड़ेगा। रवैया क्या बदलना पड़ेगा? स्वयं को क्या संचालक मानना पड़ेगा। बेल नहीं मानना अपने आप। कोई मुझे चलाएगा
19:34 तो चल पडूंगा। नहीं चलाया तो यूएलपी क्विक प्रतिदिन करना है ये किसी के कहने से करना है कि हजार बार कहेंगे तो करेंगे अभी तो एक ही बार कहा है अभी तो बहुत ज्यादा प्रमोट नहीं किया गया है इतना मोटिवेट नहीं किया है इसके लिए कुछ और करो अभी तो पांच सात बार ही बात हुई गुरुकुल में अभी तो एक साल ही हुआ कहते कहते अभी इतनी जल्दी थोड़ी है यह होना चाहिए रवैया या यह होना चाहिए कि एक इशारा मिल गया ना प्रतिदिन करने से गजब होता है। अब मेरी जिम्मेदारी है मैं कैसे करना है मैं देख बैठो प्लान करो डायरी में लिखो कि कैसे कैसे करना क्या किया जा सकता
20:21 है साथियों सारी चीजों पर अगर आप विधिवत प्लान करके और रोज सोचो और कुछ लिखना शुरू करो और उन चीजों को लागू करो तो क्या नहीं हो सकता कुछ भी कर सकते हो साथियों आप आप गजब कर सकते हो कमाल कर सकते हो दुनिया बदल सकते हो नए भारत का निर्माण कर सकते हो इतिहास रच सकते हो सब कुछ कर सकते हो लेकिन ये बेल वाला रवैया हटाकर बेल वाला रवैया नहीं है एक दुनिया का सबसे जागरूक और क्या जागरूक और बलशाली जिसको तो कहेंगे कि एक होश पूर्वक जीने वाला इंसान बनना
21:12 और इन चीजों को प्लान करना और लिखना जब तक आप नहीं करेंगे तब तक नहीं हो पाएगा। आपका जो जिसको एक शब्द दे देता हूं जो जीरो आवर है वही सबसे बड़ा भौतिक गतिविधि के पॉइंट पांच है लेकिन आपकी जो प्लानिंग करने का पॉइंट है वो 95 है। आप बैठे-बैठे प्लान करके पूरी दुनिया के लिए कुछ सोच सकते हो। अपनी पूरी टीम को विस्तार के लिए सोच सकते हो। आप हर जगह फैल सको उसके लिए सोच सकते हो। उन चीजों
21:59 को बना सकते हो। लेकिन आप कहीं गए हैं कि वहां से 100 किलोमीटर चल के मैं जा रहा हूं तो केवल आप उस विषय तक काम कर सकते हो। इससे ज्यादा नहीं कर सकते हो। मैं नहीं ये कह रहा हूं कि आना जाना बंद करना है। पर मैं कुछ उससे बढ़कर जो और कुछ है उसकी तरफ बात ध्यान दिला रहा हूं। आप अपनी चीजों को वेल डिजाइन तो कीजिए। कोई बात समझ में आ रही है किसी के? कितने साथियों को मैंने देखा है कि बहुत अच्छे हैं। जो कहा जाएगा उसका पालन करेंगे। पर कहा जाने की जरूरत है।
22:46 कहा जाएगा उसका पालन कर लेंगे। लेकिन कहा जाएगा तब करेंगे। और वो भी बहुत कम। ऐसे साथी भी बहुत ज्यादा नहीं है गिनती के गिने चुने ये सब आप देख रहे हैं सामने आज हम व्याख्या कर रहे हैं इसलिए किसी को बुरा मानने की जरूरत नहीं हकीकत को समझना और जानना बहुत जरूरी होता है अंधकार में जीने से अंधकारी नहीं बढ़ेंगे तो आप क्या कहना चाह रहे हो?
23:35 जी सर ये तो पहले हैंडरेस था सर। पहले लोअर करती थी। जी चलो आज के बाद से कौन क्या समझा है? आप है ना समझते भी वही हो जो पहले से समझा होता है। जबकि हर दिन अपन नहीं बात करते। जो पहले का रटा रटाया वही बोलेंगे। पहले का जो समझा समझाया वही समझेंगे। साथियों पहले का समझा तो पहले तक ही रहेंगे। उनको तो हर दिन नया मुकाम हासिल करना। हर दिन नई राह खोजनी है। हर दिन बदलना अपने आप हर दिन बदल दो। आगे बढ़ चलो जो हो गया उसका क्या करना है
24:21 आज और क्या बढ़ा मैं गारंटी करता हूं आप आज इस प्रवय को करो ना तो आप एक समय लग सकता है ऐसा भी नहीं कि कल का कल कुछ हो जाएगा लेकिन आप बहुत जल्दी जो है ना बहुत बड़ी-बड़ी चीजों को अपने हाथ में ले सकते चलिए बुलाइए जी सर मोहित जी थैंक यू सो मच सर और जैसा अभी सर आपने सोचने के बारे में बताया था क्या हम सोच सकते हैं जब सर ये यूएलपी के बारे में आपने सर बताया था कि हम ये कर सकते हैं तब उस टाइम पे मैंने डायरी में लिखा था कि
25:09 इससे कितना बड़ा काम हो सकता है क्योंकि आपने कहा था एक दिन में चारचार बार हो सकता है और इसको मैंने किया भी एक-एक एक एक पीयूसी पे प्रोजेक्टर लगा के मैंने तीन-तीन सेशन किए और उस टाइम पर फिर मैंने सोचा अगर यह हमारी सारी टीम करने लगे फिर बिगिनर तक के साथियों को आपने बताया कर सकते हैं तो अगर एलसीडी लग जाए या उनके पास जो साधन हो अगर एक दिन में दोद जगह पर प्रोग्राम होते हैं तो कितना बड़ा हो सकता है यह हमारी मात्र 50 लोगों की टीम है वह भी पूरे बहुत बड़ा रूप ले सकती ये उस टाइम पे मैंने सोचा था और अपनी टीम को बताया टीसी सर क्या करना चाहते हैं। आप सोच के देखिएगा कितना बड़ा सिस्टम हमें दे दिया।
25:54 अब तो हमें किसी अपलाइन की भी जरूरत नहीं। किसी बड़े सीनियर को दिखाने की जरूरत नहीं क्योंकि वहां पे इतने इतने बड़े लोग बोल रहे हैं, एक्टर्स बोल रहे हैं, बड़े-बड़े एमएलए बोल रहे हैं। उनसे भी इतना बड़ा काम हो सकता। यह उस टाइम पर सोचा और लगातार इस पर मैं सोचता हूं और बस यह है कि अकेले अभी चल रहा हूं। टीम उतना सपोर्ट नहीं हो पा रहा क्योंकि बहुत बड़े लेवल नहीं है हमारी टीम में लेकिन ये करके रहूंगा और जैसा कि अभी सर ने बताया है कि वास्तव में हम लोग अपने स्तर से नहीं सीख सोच पाते हैं। हमें जो टीसी सर या हमें सीनियर बताते हैं वो हम कर पाते। अपने तरीके से हम अगर सोचे तो बहुत कुछ हो सकता है। जैसे अभी कैंप के बारे में पहले बताया गया था। उस पे भी जब लगातार बात हुई तो हम लोगों
26:40 ने काम किया बाद बाकी फिर भूल जाते हैं। ऐसा रियल में सर होता है। लेकिन अगर हम उन सारी पॉइंटों पे लगातार वर्क करें तो कुछ भी असंभव है। असंभव काम हम कर सकते हैं। जी सर। थैंक यू सर। यस बिल्कुल सही कहा है तो आज मैं कुछ काम दे रहा हूं आपको कि अभी हमें ये जो टीम जितनी भी है अभी कोई बात नहीं है टीम तो बड़ी ही करनी है हमें यूएलपी क्विक को इस फॉर्मेट में लाना है कि एक जगह अभी दिमाग को बाधा मत बना बनने देना कोई भी साथी हम सबसे बड़ी गलती क्या करते हैं कि हम कोई भी चीज सुनते हैं नेगेटिव चीज साथ में ले आते हैं। ऐसा तो हो ही नहीं सकता है। ये चीज नहीं लानी
27:27 कभी। हर जगह प्रतिदिन तो करना ही है लेकिन अगर वहां की आवश्यकता है कि सबको एक समय आना नहीं बैठता है तो आपको दो टाइम तीन टाइम करना है और केवल यूएलपी क्विक नहीं करना है यूएलपी क्विक को इतना अद्भुत परिणामजनक बनाना है अद्भुत परिणामजनक बनाना है और दूसरा जो टास्क है पांच से सात अप्रैल का जो जो स्वास्थ्य क्रांति दिवस है उसके लिए अद्भुत तैयारियां करनी है और एकदम से आपकी पूरी टीम में एक इतनी क्रांति आ जानी चाहिए उछाल आ जाना चाहिए कि मोहित सिंह कुशवाहा अब किसी ना तो किसी का मोहताज है
28:13 और ना वो कोई छोटा-मोटा लीडर है। बहुत जल्दी साल भर के अंदर अंदर एक आरसीएम में एक जाना पहचाना और एक से परिचित एक लीडर होगा। यह मैं केवल उद्देश्य और वो लक्ष्य दे रहा हूं। अब आपको इसके बैठ के रास्ते सोचने सोच सकते हो? सोचो, खूब सोचो, सोचते रहो। एक तरीका काम नहीं करेगा। दूसरे तरीके पे आ जाओ। दूसरा नहीं करेगा। तीसरे पे आ जाओ। खुद सोचो, खुद लिखो और खुद लागू करना सीखो। यहां से तो इशारे मिलते रहेंगे। नहीं भी मिले कोई भी मान लो तो भी अपने को वही करना है। कोई इस विषय को आज के बाद याद
28:59 दिलाए नहीं दिलाए याद दिलाए नहीं दिलाए अपने को करना है क्योंकि मेरा आरसीएम में मेरा जीवन है। मुझे देखना अपना जीवन मुझे अपने जीवन को और क्यों बताने को चाहिए? करोगे डरने की जरूरत नहीं है। घबराने की भी जरूरत नहीं है। असफलताएं भी मिलेगी। जो भी सोचोगे उस असफलताएं भी मिलेगी और उनहीं असफलताओं से सीखते हुए हिम्मत नहीं हारनी। चलिए जी सर। रामाश सर।
29:46 जी धन्यवाद। आज पहले तो सर मैंने एकदम ऐड कर लिया है कि 5% भौतिक और 95% प्लानिंग में दिन निकालूंगा मैं। एकदम मैंने लिख के रख लिया है इसमें कोई बदलाव नहीं। यूएलपी को अद्भुत बनाना है उसको और भी आज प्रयास करूंगा प्लानिंग के तहत और पांच छ सात के लिए सर हमने तैयारी किया है कि अपने लोकल जो एरिया है 25 तारीख से हम एक दिन छोड़ के एक दिन रैली निकालेंगे स्वास्थ्य जागरूकता की जहां हम करने वाले हैं तो वो मैं तीन दिन से कर रहा था बोले उसको अभी हम 25 से निकालेंगे 25 को निकालेंगे फिर 27 को निकालेंगे फिर 29 को निकालेंगे फिर एक को निकालेंगे फिर चार को निकालेंगे एकदम जो अपना अपना जहां पर हम कर रहे हैं ये स्वास्थ्य केंद्र पे जो हम कर रहे हैं
30:32 चेकअप ब्लड चेकअप वगैरह उसके आसपास के 5 किलोमीटर में हम पूरी तैयारी करके पूरी रैली निकालेंगे लोगों को बताएंगे और पांच छ सात को अद्भुत तरीके से करेंगे सर और यूएलपी को भी और अद्भुत बनाएंगे धन्यवाद यस जो 95% अपन प्लानिंग की बात कर रहे है ना उसमें अपनी प्लानिंग अपनी टीम को प्लानिंग करना सिखाना और आपस में प्लानिंग के लिए संवाद करना वो सब उसमें शामिल है क्योंकि हम लोग को प्लानिंग को नीचे तक पहुंचाना होता है। यस जी सर जी रविश सर जी धन्यवाद मैम। सर मैंने आपसे ही सीखा है खोजी बनना। आज
31:20 के चार छ महीने पहले शाम का एक सेशन चला था। उसमें आपने कहा खोजी बनो तभी बड़ा कर सकते हो। तो ये विचार सर वहीं से आए। पॉकेट डायरी अपने पास हर समय रहता है। रफ कार्य और फेयर डायरी का मैंने अलग विषय पूरा बना के रखा हुआ है। दूसरी सर जो आपने मूल्यांकन कहा मैं शाम को 10 मिनट समय निकाल करके अपने पॉकेट डायरी में कल के काम को नोट करता हूं। और आपसे ही सर हमने सीखा कि रितेश मौर्या जिस लेवल पर आप हो आपको टीम को काम पे लेना चाहिए। टीम को काम सिखाना चाहिए। ये चीजें सर दो महीने पहले मैंने करना शुरू किया। उसके इतने अच्छे रिजल्ट्स है जहां मैं अपने आप को भगाता था। मैं अपने आप को दौड़ाता था। आज वो टीम रिदमम में आ रही है। वो टीम रिदमम में काम कर रही है। जिसकी वजह से हमारा यूएलपी सफल हो रहा है। हमारा स्वास्थ्य
32:06 क्रांति को लेकर के सेहत के सितारे सफल हो रहे हैं। ओवीरा पेंट का जो विषय हमारे पास है उसमें चारचार नए सेंटर्स खुलना लोगों को ट्रेन करना और हमारा जो हरी संजीवनी का विषय है, हमारा जल संचय का विषय है, हर सेक्टर्स को लेकर के मैं कहता हूं सर जो डॉक्टर है वो पेंट सेक्टर में काम नहीं कर सकता। जो पेंटर है वो डॉक्टरी सेक्टर में काम नहीं कर सकता। तो उसको स्पेशल उसी का मास्टर बना के उसी विषय का मास्टर बना देते हैं जिससे हमारे टीम में 200 की टीम है तो 200 में 20 लोग ऐसे हैं जो पेंटर पे ही काम करना चाहते हैं। तो स्पेशल उस व्यक्ति से उसकी ट्रेनिंग उससे संपर्क कराना और उससे उस विषय की जानकारी लेना जिससे सर ये सुचार रूप से हो पा रहा है। सरल हो पा रहा है। सर ने कल भी एक शब्द बोला डर आज भी बोला सर डर। मैं आपको बताऊं सर आज के दो साल पहले बहुत डर लगता था
32:53 अपलाइन क्या कहेगा कैसे करना है ये करना है सर गुरुकुल में आने के बाद यहां के विषय और आपकी बातों को सुनने के बाद और उस पर काम करने के बाद डर सर कहां डर गया पता ही नहीं चलता बस एक रिदमम है स्वास्थ्य क्रांति नए भारत का निर्माण जान लगा देंगे सर झोंक देंगे पीछे मुड़ के नहीं देखना है बस यही सर एक्सनेबल हमारा है कंटिन्यूटी चल रहा है पांच छ सात तारीख को लेकर के सर कल एक नया सेवा केंद्र की उद्घाटन हुई डॉक्टर राजकमल सर के यहां जो उनके विषय थे उस दिन वो खत्म हो गए। उसी दिन डॉक्टर साहब ने हमारे साथ बैठा। उन्होंने कहा रितेश जी हमने कहा हां सर कहे सर मैं प्लानिंग कर रहा हूं। पांच छ सात का जो एक विषय है एक दिन हमें समय दीजिए। 200 कुर्सियां और चार छह गांव में जितने हमारे एसोसिएट बायर हैं सभी से बात करके प्लानिंग करके उस दिन स्वास्थ्य जांच की
33:38 कैंप और हेल्थ एडवाइजिंग की कैंप बड़े रूप में रखा जाएगा। जिससे हमें दिखा पाएंगे 200 300 की गैदरिंग में क्या हो रहा है यहां पे। जैसे कहीं रैली होती है, गाड़ियां खड़ी है, साइकिल खड़ी है, मोटर खड़ी है। लोग सोचते हैं यहां पे क्या हो रहा है? तो उससे एक माहौल क्रिएट होता है भाई फलाने नेता है। तो यहां पे सर ये क्रिएट हम करना चाहते हैं कि लोग पूछेंगे क्या हो रहा है? तो अभियान है आरसीएम। उसके प्रति पांच छ सात तारीख को स्वास्थ्य क्रांति वर्ष बनाने के लिए यहां सेहत का सितार और सेहत मित्र के विषय चलते हैं। उसके बारे में लोगों को स्वस्थ करने का सलाह दिया जाता है। रसायन मुक्त दवा से वो निरोगी कैसे रह पाए? जीवन भर वो सलाह दिया जाता है। वह भी फ्री में। तो यह विषय चल रहा है सर। बहुत सारी प्लानिंग है। सारी बात यहां करने में समय लगेगा। बस मजबूती से सर चल रहे हैं। पीछे मुड़ के नहीं देखेंगे सर। धन्यवाद।
34:26 यस। पर अभी संभावनाएं अपार है। भैया आप लोगों के साथ एक जो प्लस पॉइंट है मैं बता देता हूं। मेरे को इस अभियान के अनुभव लेने में 202 साल लग गए। कि इतने बड़े सिस्टम में विभिन्न मस्तिष्कों के साथ मिलजुल के कैसे काम को आगे बढ़ाना चाहिए। वो अनुभव में आपके साथ सीधा आपको रेडीमेड मिल रहा है। तो मैं जो भी बात कह रहा हूं मुझे आज समझ में आ गया कि हम जो चाहे जो कर सकते हैं। लेकिन वो मुझे पहले अगर समझ में आता आज के 20 साल पहले तो शायद आरसीएम और कुछ ज्यादा
35:12 अच्छा बड़ा होता। लेकिन वो तो ठीक है वो कोई पीछे का हमें कभी भी नहीं सोचना होता है। आगे का हमें सोचना होता है। हम सब मिलजुलकर उन अनुभव को काम में ले तो हम बहुत आगे जा सकते। बहुत विस्तार दे सकते हैं। आपको केवल लक्ष्य निर्धारित करके उसके लिए सोचते ही रहना और आगे करते रहना। चलिए जी रवि सर। यस सर। पर यह बात हम लोग भी महसूस करते हैं कि जब हम लोग अपने टीम के साथियों को कुछ बोलते हैं और वो एक बार में मान लेते हैं तो अच्छा लगता है और नहीं मानते हैं तो ऐसा महसूस होता है कि ताकत बहुत ज्यादा लगाना पड़ रहा है। तो वही चीज आप भी महसूस करते होंगे। तो सर हम लोग आज से वो बैल वाली
36:01 प्रवृत्ति छोड़ेंगे और हर चीजों को वेस्ट से वेस्ट करने का प्रयास करेंगे और हो भी रहा है सर जी वेद प्रकाश सर जी मैम धन्यवाद हम भी रतेश जी के माध्यम से रतेज जी हमारे अपलाइन में आते हैं तो उनके माध्यम उनके सानिध्य में जो भी और सिस्टम बताते हैं कार्य करने एक तरीके को उसको फॉलो करते हैं और जैसेजैसे वह हमको बताते हैं करने के लिए फील्ड में उस तरीके से मैं काम करता हूं और अपने यूएलपी को अपने टीम में जितने भी हमारे टीम में लोग हैं जो बिगिनर से लेकर स्टार साथी तक सभी को मैं यूएलपी के बारे में बताता हूं और यूएलपी करता हूं वहां पर लोगों को सिखाता
36:48 हूं और पूरे सिस्टम से काम को चल रहा है। मैडम सारी जानकारी रखते जी के माध्यम से सब जो भी हमको गाइडलाइन देते हैं उनके गाइडलाइन में हम हर काम को करने का प्रयास करते रहते हैं। धन्यवाद। वेद प्रकाश जी तो बहुत अच्छी बात है कि वो जैसा बताते हैं वैसा करते हैं। पर मान लो रितेश जी नहीं बताया है तो आप उनसे बढ़कर भी तो सोचो ना कि जो बताया हो तो ठीक है। कुछ अपनी तरफ से और आप कर भी रहे हो वैसा पर हमें केवल आज्ञाकारी ही नहीं बनना बल्कि हमें एक लीडर बनना है सबको। हर एक में अलग अलग प्रतिभा होती है। हम थोड़ा और बड़ा सोचे कुछ बढ़ चढ़कर सोचे।
37:34 आज अपने आप को सबको बदल देना है। सबको अपने आप को बदल देना है। रूप ही नया आ जाना चाहिए। क्रांतिकारी रूप यस जी ओम प्रकाश सर जी मैम धन्यवाद। आज के सेशन से हमने यह निर्णय लिया है कि अब बैलों वाली जिंदगी छोड़ेंगे और खुद से योजना बनाएंगे, प्लानिंग करेंगे और उस पे काम करेंगे। दूसरी चीज है यूएलपी को लेके जो दूर दृष्टि हमको दिख रही है वो बहुत बड़ी दिख रही है सर के माध्यम से। अगर यूएलपी किट में हमारे जितने वाइटर लेवल हैं सबको हमने यूएलपी किट दिखाना सिखा दिया तो हमें लगता है हमारे लिए कोई
38:21 काम नहीं बचेगा। घर पर बैठ के हम प्लानिंग करते रहेंगे। कौन सा साथी कौन से सेंटर पर जाएगा, क्या करेगा। तो 95% जो प्लानिंग सर ने बताया है वो सीधे दिख रहा है और उस पे हम काम करेंगे और लगातार अपने उद्देश्यों को लेके घरघर तक जाने का प्रयास करेंगे। सर धन्यवाद। जी आइए एसएल प्रजापति सर थैंक यू मैडम आज सर ने जो विचार दिए हैं कि हमें अपने आप से विचार बनाना है यही नंबर वन पे है बाकी सीनियर कुछ बनना है अपने विचार को बनाने नए-नए विचार बनाएंगे और फील्ड में ऐसा हो रहा है अब
39:08 जहां भी निकलते हैं उसमें कई टॉपिक जैसे हम लोग सीड्स का पालन बताते हैं तो उन्हें हर चीज करीब-करीब हर पॉइंट आ जाता है। इसलिए उसका सीट्स का पालन करते हैं और करा रहे हैं। विचार नए-नए रोज पैदा कर रहे हैं। मीटिंग करते हैं। मीटिंग करते हैं। सब बढ़िया-बढ़िया हो रहा है। सर अब बहुत अच्छा हो रहा है सर। और यूएलपी के लिए बिल्कुल तैयारी चल रही है कि एलईडी लगा करके उसमें लोगों को बुलाना है और दिखाना। थैंक यू सर। थैंक यू। जी जी संजीव भैया। जी जी आदरणीय सर को प्रणाम। सर ने मूल्यांकन की बात की और यह हम लोग डेली शाम में आकर के मूल्यांकन करते हैं कि आज पूरे दिन में क्या हुआ और कहांहां गलती हुआ उसको ढूंढते हैं और फिर अगले दिन उसके ऊपर सुधार करते हैं और दूसरा सर ने अभी बात बोला कि 95% प्लानिंग और 5% एक्शन और
39:57 ये जरूरी है बिना प्लानिंग का तो हम बड़ा काम नहीं कर सकते हैं। और हमारे पास दो ब्रह्मास्त्र है। एक तो हमारा गैसेस है और दूसरा हमारा यूएलपी क्विक है। इसके माध्यम से हम देख रहे हैं कि कितना बड़ा काम हो सकता है क्योंकि एक यूएलपी क्विक अगर करते हैं तो वहां पर 40-50 लोग भी आते हैं और अगर हमारे टीम में अगर डेली अगर 50 लोग अगर 10 प्रोजेक्टर है और डेली 50 लोग एक यूएलपी क्विक में मिनिमम बैठते हैं तो कम से कम हम उसके माध्यम से एक दिन में 500 लोगों को कवर कर सकते हैं। तो हम इसका बहुत बड़ा रूप देख पा रहे हैं गेसेस और यूएलबी क्विक का और इसके ऊपर सर जो गुरुकुल से जो शिक्षा मिलता है सर उसके ऊपर एज इट इज 100% फॉलो करते हैं और जहां तक बात रही सर पांच छ सात स्वास्थ्य क्रांति का तो सबसे ज्यादा फोकस है सर और
40:42 जो शिक्षा सर आप दे रहे हैं उसको एज इट इज अप्लाई करें अपना दिमाग बिल्कुल नहीं लगाते हैं बस गुरुकुल को अप्लाई करते हैं पूरे टीम में सर जी सर जी धन्यवाद शाकेंद्र भैया चलिए बहुत-बहुत धन्यवाद। बस यही कहेंगे दोस्तों मूल्यांकन करे तो काम के करे तैयारी करे। जैसे अब जो है पहले इस बात के डर था कि बहुत पढ़ा लिखा आदमी है। किस तरह से हम भाषा में बोल सकते हैं। कौन भाषा में घबरा जाएगा कोई ठिकाना नहीं है। लेकिन जब से यूएलपी किक आया है कल मेरा लगभग 143 आदमी था। उसमें ऐसा ऐसा आदमी था उस आदमी के साथ में मैं खड़ा भी नहीं हो सकता था। कुछ राजनेता के प्रति व्यक्ति था जो
41:28 राजनेता जो अपना YouTube में बोला था अपना यूपी में क में बोला है उस व्यक्ति जानता था दोस्तों उस प्रोग्राम में देख के कल लगभग 21 को जॉइनिंग हुआ उसके बाद उस आदमी के यहां हर महीना अपने हल है वहां फिक्स हुआ तो दोस्तों डर बात के करना है मालदा आम खाना है तो फिजुलिया के मुलकन नहीं करना है हम घर से निकलेंगे टीम निकलेगा हम करेंगे टीम टीम करेगा जोश में रहो, जुनून में रहो। अब तो यूएलपी क्यों अपने पहले एक बार बढ़िया से घर में देख लो इसको। उसके बाद फिल्म में निकलो। डर डर के काम मत करो दोस्तों क्योंकि सब कुछ दिया हुआ है। वहां जाने के बाद बहुत बड़ा काम हो रहा है। बहुत बड़ा हो रहा है। हर एक जगह हो रहा
42:13 है। कल मेरा टीम में बहुत सा टेक्निकल अचीवर हर एक जगह लिए हैं। सिखाने का काम 12 तारीख नहीं होना चाहिए। जखने मौका मिले जखने आदमी सिखा दीजिए। ये नहीं कि 12 तारीख आगे तो फैंसी खावेंगे। जब भी मौका मिले टीम को पूरा फैट लड़ने का कीजिए। हर एक सेवा केंद्र पर डिजिटल टीवी होना चाहिए। डिजिटल टीवी बहुत महंगाम देता है दोस्तों। 8000 9000 10000 12000 20000 जैसा हो वैसा लगाइए बहुत मजा आएगा। जय आरसीएम और किसी के भी रहे सेवा केंद्र सबको प्रेरित कीजिए। अगर जो आप गलती कीजिएगा ना तो इससे बड़ा महापाप होने वाला दोस्तों बहुत बड़ा महापाप होगा। तो बहुत-बहुत बधाई। जी धन्यवाद भैया। सुधीर सर।
43:01 जी बहुत-बहुत धन्यवाद। आज के सीख से संकल्पित हो गए हैं कि ये मेरा आरसीएम है। मेरा देश है। मेरी जिम्मेदारी है। मेरा हर काम हमारा सोच हमारा हर रास्ते बनाने का खुद का काम रहेगा। और उस रास्ते पर लगातार हम तीन दिन से कंटिन्यू चल रहे हैं। यूएलपी पर जाते नए मतलब जो हमारा अभी डिस्प्ले खुला हुआ है और एक नया पीसी भी खुला हुआ है। उस पर जाके हम निश्चित ही दिखा के तभी लौटते हैं। अपने साथियों को वहां पे इकट्ठा करके बहुत ही अच्छा अपनी सोच को बदलेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद। जी मोनोरामा जी। जी सर नमस्ते। अ सर सच्ची में यूएलपी क्विक जो है हमारे लिए वरदान है। ऐसे नहीं
43:49 बोला है कि अनलिमिटेड जो प्रोसेस है तो सच्ची में ये ऐसे है जैसे कि हम रोज-रोज यूएलपी कर रही हूं मैं। हां गलती जी मुझसे गलतियां होती है। लेकिन गलती से भी मैं कुछ सीख लेती हूं। उसके साथ मुझे क्या नया करना है? अभी फिलहाल सर ने जब जब से बोला है कि 12 मार्च से खुद की प्रैक्टिस सर हमारे टीम में मैंने सीनियर के वो बोला है कि हमारे सर ने बोले हैं कि 12 मार्च को जितने एसोसिएट वायर है तो उनको बिठा के प्रैक्टिस करो प्रैक्टिस करो। तो मैंने देखा कि किसी से कहीं से नहीं आया। तो मैंने खुद से मेरे बच्चे और मेरे साथ दो चारों को बिठा के तो मैंने उसको यूएलपी को सीखा पहले फिर जाके मैंने अप्लाई किया। हर दिन तो नहीं कर पाती हूं। एज अ लेडीज मैं सुबह भी एक जॉब करती हूं। उसके साथ बच्चे
44:35 को भी देखना होता है। 4:00 बजे निकलती हूं। पार्ट टाइम में मैं कर रही हूं। तो मैंने जैसे-जैसे इसको थोड़ा-थोड़ा सीखती गई सीखती गई अपने अंदर भी चेंजेस लाई। उसके साथ मैंने उसी को टीम के ऊपर अप्लाई किया। टीम को साथ लेके मैंने जैसे किया ज्यादा लोग को नहीं। मैंने पीयूसी में हमारे पीयूसी में इतना बड़ा नहीं है। इतना सारा नहीं है। तो मेरे पास जैसे लैपटॉप है वैसे हमारे मैं हम देवेंद्र साहू के टीम से हूं। उड़ीसा से हूं तो उनसे हमने प्रोजेक्टर मांग के लाए। प्रोजेक्टर मैं मेरे पास लैपटॉप था। छोटा सा स्पीकर है मेरे पास। 10 20 लोगों को बिठा के हमने इसको स्टार्ट करना शुरू कर दिया है। एक दिन छोड़ के एक दिन छोड़ के हम एरिया ऐसे देख रहे हैं जैसे आंगनबाड़ी हो गया, कोई क्लब हो गया जो कि बिठा सके हम 10 20 लोगों को ताकि हमारे हम अभियान के बारे में बता सके सही तरीके से। तो उसी तरह से
45:23 करने के बाद बहुत ही अच्छा रिजल्ट आ रहा है। क्योंकि इसी के टाइम से ज्यादातर लेडीस जो है कुछ नहीं करते थे। हाय तो अच्छा लगता है। हमें कुछ नहीं आता। तो वो लेडीस खुद मुझे देख के मुझे ये सबसे ज्यादा खुशी होती है कि मुझे देख के बहुत सारे लेडीज भी हैं। स्टूडेंट भी है जो कि आगे आ रहे हैं। तो ये यूएलपी क्विक से हमारे मेरी टीम हमारी टीम इतनी सक्रिय नहीं हुई है। फिर भी छह हमने जॉइनिंग निकाला है ये यूएलपी क्विक के माध्यम से। तो मैं धन्यवाद दूंगी ताकि हमें सर ऐसे ही नए-नए तरीके बताते जाए और हम भी थोड़ा सा अपने में चेंजेस करके पहले तो खुद को चेंजेस करके आगे बढ़ते रहेंगे। साथियों बहुत सारे साथी उनकी हैंड रेज है। विषय भी
46:10 हम समझ चुके हैं। मैं आपसे अनुरोध करना चाहूंगा साथियों यहां आपको हम मतलब बहुत स्पष्ट मार्ग आपको मिल रहा है आगे बढ़ने का और बहुत सारे साथियों की बातों से भी हम समझ गए होंगे यूएलपी किक को लेकर कितनी ऊर्जा का निर्माण हो रहा है। क्या किया जा सकता है? क्या आप मेरी एक बात मान सकते हैं कि अब हम कुछ समय तक यूएलपी पे पूरी ऊर्जा लगाकर इसी पे फोकस हो जाए। इसके माध्यम से जो हो सकता है और कोई एक्टिविटी आपको उतना परिणाम दे ही नहीं सकती। रूपांतरण यात्रा में एक बदलाव किया था
46:57 फील्ड में। लेकिन मैं कहता हूं रूपांतरण यात्रा से 100 गुना परिणाम दे सकता है। आप अच्छे से इस पर विचार करें चिंतन मनन करे मंथन करे क्योंकि दुनिया को दिखाना पड़ेगा अपने चमत्कार और एक बार दिखाने से तो दुनिया बदलेगी नहीं तो पूरे देश में वो चमत्कार दिखाया जाए बार-बार दिखाया जाए जिसको जब समय मिल रहा है तब दिखाया जाए भूल जाए फिर दिखाया जाए तो ये तो यूएलपी क्विक के माध्यम से ही हो सकता है अगर अगर बहुत बड़ी क्रांति करनी है तो आपको फोकस होके काम करना पड़ेगा। सारे बहानों को हटाइए। इधर उधर ऊर्जा लगाना बंद
47:45 कीजिए। मैं देख रहा हूं अभी साथियों मुझे फिर याद दिलाना पड़ता है। बड़ा अफसोस होता है कि हम बहुत भटके हुए पड़े रहते हैं। बिना व्यर्थ की एनर्जी व्यस्त कर रहे हैं। दुनिया कोई यात्राएं इधर उधर की फालतू की करने की जरूरत नहीं है। अभी यात्रा का समय नहीं है। अभी हमारे यहां जहां हम रहते हैं उस जगह रहकर काम करना है। क्विक के माध्यम से और किसी के डराने से डरिए मत आप गलत कर रहे हैं क्या जो डरे हम अभियान को बड़ा ही तो कर रहे है इसमें डरने की क्या बात है यूएलपी पिक कीजिए यूएलपी पिक को ऐसा कुछ
48:32 कीजिए कि एकदम पूरा नगर में माहौल बन जाए तो मैं आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि अब आप थोड़ा इस पर प्लान कीजिए। आज अपन ने क्या बात की है? अब आपको काम मिल गया। अब आपको प्लान करना है कि मेरी टीम में प्रतिदिन यूएलपी क्विक की संख्या भी बढ़ रही है। स्थान भी बढ़ रहे हैं और धीरे-धीरे ऐसा माहौल बन रहा है कि उसको दोद तीन-तीन बार करना पड़ रहा है। फिर उसमें हम और कोई गजब की चीजें ला रहे हैं। उसी में बड़े-बड़े सिस्टम ला रहे हैं। कभी उसमें कोई वीआईपी गेस्ट बुला रहे हैं। उसके माध्यम से सेवा गतिविधियां कर रहे हैं। और ये जितने भी प्रोजेक्ट है गेसेज के वो सारे के सारे संचालन कर रहे हैं। पहली खरीदियां भी
49:17 हमारी गजब की हो रही है। वेलकम मीटिंग हो रही है। साथी बुला रहे हैं और एकदम जो जलजला आएगा तो सारे साथी मिलके अगर बहुत बड़ी एनर्जी इस पर लगाते हैं तो इसके लिए प्लानिंग तो सबको अच्छे से करनी पड़ेगी। प्लानिंग की आवश्यकता है कि नहीं है? अपने को मार्ग तो मिल गया लेकिन उस मार्ग पर सबको लाने के लिए उसको एनर्जेटिक बनाने के लिए उसको बड़ा करिश्मा करने के लिए सही प्लानिंग तो करनी पड़ेगी हर कुछ मत करो बैठो कोई किसी ने कुछ कहा और हर कुछ करने लग गए ऐसे नहीं करना अगर मैं भी कुछ गलत कह रहा हूं तो आपको मानने की जरूरत नहीं
50:03 आप सब में हम सब में मस्तिष्क सोचने की क्षमता है। गलत कह रहे तो क्यों मानना और आज मैंने यूएलपी की बात करी या भाविक बातें और भी की थी तो अब अन्य विषय की तो आज बात नहीं की स्वास्थ्य क्रांति दिवस की तो आज बात नहीं की या एक ही बार की उड़ान की तो आज बात ही नहीं की किशोर की बात की नहीं गुड डॉट की बात की नहीं तो क्या ये सब बात करेंगे तब हम उस दिन जागेंगे या एक विषय पे जाएंगे उसी तरह से हर विषय को मूल्यांकन करेंगे और हर विषय पर आगे बढ़ेंगे। अब गुड डॉट का है तो गुड डॉट रसोई में हम ज्यादा से ज्यादा साथियों को कैसे शामिल
50:49 करेंगे? इसका प्लान कीजिए। उड़ान में हम ज्यादा से ज्यादा को कैसे शामिल करेंगे? इसका प्लान कीजिए। हजीन कैंप हम ज्यादा से ज्यादा कैसे करें? सेहत जो स्वास्थ्य क्रांति दिवस है इस दिन कैसे करें? तो ये सब कितनी प्लानिंग की जरूरत है? तो हम सब आज संकल्प लेंगे कि हर विषय पर हम ठीक से प्लानिंग करेंगे और सभी विषयों को बहुत स्ट्रांग बनाएंगे सभी विषयों को। बात तो एक दिन में एक ही की जा सकती है, दो की जा सकती है। लेकिन हमको तो दिख रहा नहीं। हमको किसी को बताने की जरूरत थोड़ी है।
51:35 मुझे आके कोई बताए कि आरसीएम ऐसे करो तो फिर कैसे आरसीएम करेंगे? बताइए आप बताइए कोई कि नहीं आज इस पर काम करो कल उस पर करो तब मैं सिर्फ जगूंगा तो आरसीएम चल जाएगा। तो मेरे में आप में अंतर क्या है? किसी में कोई अंतर नहीं। हम सबको अपने अनुसार प्लानिंग के विषय को अपनी जिंदगी में शामिल करना। प्लानिंग प्लानिंग प्लानिंग को महत्वपूर्ण बनाइए और नोट कीजिए। एक चीज सफल नहीं होती है। फिर कुछ और दूसरी प्लानिंग कीजिए। तीसरी कीजिए। रोकिए मत। एकदम हमें इस साल के जो तीन संकल्प है
52:24 वह पूरे करने ही करने हैं और व स्तर पर करने हैं और जो आप सब साथी जो गुरुकुल के जो शीर्ष में आते हैं जो एकदम उनके ऊपर तो डबल ट्रिपल चार गुना जिम्मेदारी है। उनको तो कुछ अलग करिश्मा करके दिखाना पड़ेगा। तब जाके ये दुनिया बदलेगी। तब जाके लोगों को समझ में आएगा। ऐसे नहीं आता। चमत्कार को ही नमस्कार इस धरती पर अच्छी तरह से मान लीजिए। सामान्य को तो कोई गिनता भी नहीं उसके लिए। चलिए और कुछ साथियों को बुला लेते हैं। जी सर दानश कुमार सर जी रिस्पसिबिलिटी लेना अपने आप जिम्मेदारी
53:12 समझना और मालिक के तरह बड़ा सोचना और यूएलपी क्विक यदि वाइट लेवल पर होना शुरू हो जाए तो हजार गुना ग्रोथ होगा। आइए मुबारक सर 12 तारीख से हम प्रोजेक्टर प्रोसेस करके ले लिया लेकिन हमारा इतना बढ़िया तरीका से नहीं कर पाए दो चार आदमी के लेके काम कर रहा है लेकिन यहां बैठे हम एनएस खान बन रहा है हमको लीडर रोबिता सर सिकंदर सर का बात सुनके हम ऐसा बात कब कर पाता हूं वही ही हमारा अंदर में कुछ कुछ हो रहा है और एक सीनियर लीडर से हम एक सम म ये लेते आईडिया ले लेना चाह तो
54:00 हमारा बगल में एक स्कूल है तो इसमें महिला और स्टूडेंट ज्यादा है लेडीज 1500 और 300 ज्यादा ये है बॉय है तो इसमें हजिंग और कुछ करने के लिए कुछ आईडिया देने से अच्छा है सर हम हेडमा से बोल नहीं पाता है इसको हेडमा से बात करता है हमारा हेलगार्ड राइस देता हूं टर्मल देता हूं नमक खाता खा रहा है हेड मास्टर हम बोल नहीं सकता है कैसे बोलूं कुछ आईडिया देने से अच्छा है सर ठीक सर क्या
54:45 उनको आईडिया चाहिए नहीं आईडिया आपको सोचने है एक आईडिया काम नहीं करे दूसरा सोचो दूसरा नहीं करता तीसरा सोचो नहीं आ पा रहे लोग तो उनको कैसे बुलाए उसका सोचो एक तरीके पे चिपके मत रहो कि ऐसे कहने से नहीं आते कुछ रिजल्ट दिखाते हैं कुछ वीडियो दिखाते हैं कुछ ऐसा पावरफुल दिखाते हैं कि आ जाए खुद सोचना सीखिए सर उनको कोई स्कूल में हजीन कैंप करना है सर आप उनको बोले क्या ये उड़ान कोर्स करेंगे तो इसमें उनको लाभ मिलेगा सर जी मुबारक सर आप ना उड़ान कोर्स करिए ठीक है जी और मेरे पास में ही रहते हैं तो मुझे भी कॉल कर सकते हैं कोई दिक्कत नहीं
55:31 सर आप आइए क्या नाम है सर आप आइए जी शारद शरद सर शरद शरद शरद विधु बात कर रहा हूं अस्तित्व से इशारे मिलते हैं और समाधान तो अंदर से ही आते हैं आज बहुत सारे इशारे मिले हैं। बहुत सारे और एक तरीके से मैं देखूं तो रिमाइंडर हुआ है। सर हम यूएलपी प्रस्तुतकर्ता की हमने एक टीम तैयार कर ली है। यूएलपी प्रेजेंट और उसके बाद में जो फोकस है ना कि एक साधे सब सेवा केंद्र अगर हमारा अच्छा हो जाएगा तो मुझे लगता है सब कुछ अच्छा हो जाएगा। तो हम उस पर काम कर रहे हैं। ये निश्चित है कि प्रतिदिन तो नहीं हो पा रहा एक जगह पे। हां प्रतिदिन यूएलपी पे खो रहे हैं और
56:18 एक जगह पे प्रतिदिन दो बार तीन बार चार बार ऐसा हो इस पर रेगुलर काम कर रहे हैं। जी धीरज सर बहुत अच्छा सेशन सर था आज का। सर ने बोले हैं कि खुद का जिम्मेदारी लेना है और खुद एनालाइज करना है और हर पॉइंट पे हमें सोच विचार करना है और फोकस करके काम करना है। सर बहुत बड़ा जब तक हम खुद जिम्मेदारी नहीं उठाएंगे और अपने टीम को जिम्मेदारी नहीं देंगे तो बहुत बड़ा काम नहीं हो सकता है। तो बिल्कुल सर आज आपसे संकल्प लेते हैं। हम अपने आप से संकल्प लेते हैं जो हम अपनी
57:03 जिम्मेदारी उठाएंगे। हर पॉइंट पे हम सोच करके काम करेंगे। थैंक यू। ओवर टू यू। जी अंजनी जी। गुरुदेव को प्रणाम। जैसा कि गुरुदेव ने कहा कि आत्म चिंतन तो हम सभी लोग टीम के साथ आदरणीय पूरी के साथ पूरी सर के साथ शाम को 9:00 बजे आत्म चिंतन करते हैं कि आज हमने क्या किया कहां पर क्या कमी रह गई उस पर कल क्या सुधार होना चाहिए और इस पर अगली योजना के साथ अगले दिन हम लोग काम करते हैं और रही बात सर यूएलपी प्रोग्राम का तो इतना अच्छा रिस्पांस मिल रहा है और हमने अपने पूरे साथियों के साथ बैठकर एक शेड्यूल तय कर लिया है और 21 तारीख से
57:50 लगातार हमारी टीम में हमारे साथियों के द्वारा यूएलपी प्रोग्राम किया जा रहा है और जहां लोग बहुत सारे नेगेटिव भावना के होते थे आज उनकी भी सोच बदल रही है। जहां लोग गुरुकुल में आना नहीं चाहते थे। आज लोग गुरुकुल का लिंक मांग रहे हैं। गुरुकुल में आने के लिए तैयार हो रहे हैं। तो ये सर ईश्वर की कृपा है। आपकी प्रेरणा है और यूएलपी का जो असर है वो पूरा दिख रहा है। और लगातार 28 तारीख तक शेड्यूल हम लोगों का बन चुका है और आगे जैसे भी होता हम लोग शेड्यूल बना के पर दिन इसको करने का प्रयास करेंगे सर। अभी तो हमारी टीम में एक ही प्रोजेक्टर है। लेकिन हम आगे और प्रोजेक्टर बनाने का मनाने का प्रयास कर रहे हैं जिससे ज्यादा जगहों पर और ज्यादा सेवा केंद्रों पर इस कार्य को किया जा सके। धन्यवाद सर।
58:38 जी धन्यवाद सर। आइए प्रशांत सर। नमस्कार। तो सबसे पहले बात ये है कि मैं मेरे ऑफलाइन बातों को बुरा मानता था। जब मैं जब मैं गुरुकुल में बैठा हूं मैं खुद को समझ में आ गया कि मैं भी किसी का एक अपलाइन हूं। बहुत दिन से नंबर नहीं आया और रहा। अरे कई दिन से बैठे नहीं पा रहे। नंबर ना हो रहा। किनका माइक ऑन है? एक जी हां। बोलिए प्रशांत जी। मैं मैं मेरा बातों को मेरा ऑफलाइन बातों को जो बुरा मानता था तो मैं गुरुकुल में बैठा हूं। मैं मेरा मैं मैं भी किसी का ऑफलाइन हूं। मेरे को देख के भी वो मेरा टीम में वैसे काम करेंगे। मैं आज जैसे अभी प्लानिंग कर
59:24 रहे हैं स्वास्थ्य क्रांति के दिवस पर 57 अप्रैल में मैं आज हमारा जो तीन दो मेरा एक सेवा केंद्र है उसको पूरा सुधारूंगा। उसमें एक स्वास्थ्य का दिवस का पालन करूंगा और जो डिस्प्ले वाल है उस दो डिस्प्ले वाल के कैसे 57 अप्रैल में डेट फाइनल करूंगा। आज उसका फील्ड वर्क है उसमें जाऊंगा। कैसे प्लानिंग करेंगे कहां लोग बैठेंगे? किस जगह पे स्वास्थ का पालन करेंगे उसका एक डिस्कशन करेंगे बड़ा सा और बहुत बड़ा करेंगे सर और गुरुकुल बैठने के लिए मेरे को बहुत कुछ चेंज हुआ है धन्यवाद सर जी धन्यवाद सर आइए इंद्रजीत सर बहुत-बहुत धन्यवाद मैम आदरणीय सर को धन्यवाद बिल्कुल मैं संकल्प लेता हूं आज से कि हर पल माने जो बिल्कुल ही शक्ति
1:00:12 मिलती है अपनी टीम में शक्ति देंगे अपनी टीम को जगाएंगे और यूएलपी प्रूफ प्रोग्राम को बहुत तेजी से ग्रोथ करेंगे क्योंकि हम लोग फरवरी से यहां पे कर रहे हैं तो बहुत बढ़िया रिस्पांस मिल रहा है और यूं कहें कि जब हर संडे को जब यहां होता है तो लोग बाहर जब से रोड पे आए दुकान मेन रोड पे तब से यहां माहौल बन रहा है कि लोग सोचते हैं कि यहां पे क्या होता है रोज भीड़ कितनी होती है तो बिल्कुल बहुत माहौल बनाएंगे और जागरूकता जो फैलाना है अपने यहां सेवा कैंप भी जो लगाते हैं हम लोग ब्लड जांच का उसमें भी संख्या बढ़ रही लगभग पहली बार पांच सात का हुआ था लेकिन अब 10 12 ऐसे बढ़ते जा रहे हैं म ब्लड जांच वाला बिल्कुल और जी धन्यवाद सर आइए लामा सर लामा सर अनम्यूट करिए पहले फिर बोलिए
1:00:58 अनम्यूट नहीं हुआ माइक को ऑन करिए जब तक आप कर रहे हैं सुदीप हां हो गया आ गया आइए आइए बहुत-बहुत धन्यवाद सर को प्रणाम सर मैं जिस दिन से गुरुकुल में आया मेरा बहुत परिवर्तन हो रहा है और सबसे पहले तो मैं पहला यूएलपी क्विक के लिए मैं खुद को मैं अपन को ज्यादा मात्रा में मैं भरोसा करता था। कल बहुत बड़ा प्रोग्राम हुआ दार्जिलिंग में यूएलपी क्विक का तो मेरे को यूएलपी क्विक का वजह से मेरे को बहुत अच्छा लग रहा है क्योंकि यूएलपी क्विक का वजह से मेरा अच्छा टीम भी बन रहा है। तो पहले तो मैं अपलाइन का भरोसा मैं बढ़ता था। लेकिन अभी आज का जो गुरु सर ने जो बताया तो मैं खुद को जिम्मेवारी लेकर के
1:01:44 यूएलपी कुक का प्रोग्राम करने का चाहता हूं। तो बहुत-बहुत अच्छा लगता है कि यूएलपी क्विक का वजह से हम लोग का अच्छा टीम बनने जा रहा है। क्योंकि हम लोग का अभी जिस तरह से इस अभियान ने मेरे को परिवर्तन किया उसी तरह से मेरा अपना टीम में भी और सबको परिवर्तन करने के लिए कोशिश कर रहा हूं। बहुत-बहुत धन्यवाद। बोलने का मौका दिया। बहुत-बहुत थैंक यू सर। जी धन्यवाद सर लास्ट पे लेते हैं सुधीर सर आपको मैम बहुत-बहुत धन्यवाद संपूर्ण विषय पे हम लोग काम कर रहे हैं सर और स्वयं का मूल्यांकन का आज बात हुआ उस पे भी हम लोग लगातार मैं भी शुरू करूंगा और अच्छे से करूंगा और यूएलपी क्विक ऊपर हम लोग शानदार तरीके से काम कर ही रहे हैं सर वाइटल रिच वर्क को हम लोग प्रैक्टिस डे अभी लगातार
1:02:30 तीन-ती चार-चार दिन में भी हम लोग लगातार कर रहे हैं परसों भी हमने किया और यूएलपी क्विक में भी हम लोग ने एक चीज और देखा सर सेवा केंद्र के साथियों को भी हमने यूएलपी को सिखाना चालू कर दिया ताकि कई बार कुछ लोग नहीं आ पाते हैं तो सेवा केंद्र वाले ही उसको करा रहे हैं तो इसमें भी हम लोग लगातार काम कर रहे हैं और सर अभी हम लोग पांच छ सात जो अभियान स्वास्थ्य क्रांति अभियान पे भी हम लोग लगातार वेलकम मीटिंग और अन्य चीजों के माध्यम से आज भी बहुत सारा चीज सीखने को मिला उसके माध्यम से हम लोग तैयारी कर रहे हैं। ओवर टू यू। थैंक यू मैम। जी एक बार राजकुमार जी आप ठीक जी राजकुमार सर सर आप अनम्यूट का ऑप्शन दिए मुझे दिख
1:03:18 हां जी सर नमस्कार सर और ये थैंक यू काफी सारी चीजें होती है सर छूट जाती है करतेकरते काफी प्रयास किया जा रहा है सर अभी जो हमारा जो ये खास खास करके यूएलपी क्विक वाला कार्यक्रम जो ब्रेक हो गया था सर वो हम आज से फिर से शुरू कर रहे हैं सर हमने व्यवस्था कर ली है और हमें एक चीज फील हो रहा है सर जिस दिन से ये रुका है ना तब से कहीं ना कहीं बहुत खालीपन और बहुत सारी चीजें जो है फील कर रहा हूं कि जो है उस तरीके से नहीं हो पा रही है जिस तरीके से होनी चाहिए तो आज से फिर से जो है शुरू कर रहे हैं सर और हस्के टीम के अंदर भी जो है सारी चीजों के लिए बातचीत मैंने कर लिया है और आज से शुरू करेंगे सर और हमें एक चीज और समझ में आया सर कि यूएलपी क्विक एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा सारी चीजें
1:04:06 100% अपडेट हो जाएंगी और जो है पूरी की पूरी टीम अपग्रेड भी हो जाएगी सर को। बहुत-बहुत धन्यवाद सर। करेंगे सर। थैंक यू सर। जी। चलिए बहुत-बहुत धन्यवाद सभी साथियों को। तो विषय को आप थोड़ा सा नजाकत समझ रहे हैं। तो आज का जो निष्कर्ष यह है कि एक तो यूएलपी क्विक भी समाधान नहीं है। साथियों यूएलपी क्विक को सही तरीके से उपयोग में लेना समाधान है। यूएलपी क्विक अपने आप में समाधान नहीं है। इस चीज को ध्यान रखिए कि आप उतनी संख्या में उस तरीके से अगर काम में लेंगे तो बहुत कुछ करिश्मा हो सकता है। इसलिए उसको
1:04:52 सही तरीके से इस्तेमाल करो और आज का मुख्य सूत्र ये है कि हमें बेल के जैसे जिंदगी नहीं बितानी है। हमें एक जागरूक अभियान का क्रांतिकारी सिपाही बनना है। ये मुख्य सूत्र है। चलिए बहुत-बहुत धन्यवाद। कल फिर मिलेंगे इसी ऊर्जा के साथ बहुत बड़े बदलाव के साथ और आज सभी साथी प्लानिंग करके देखें बड़ी-बड़ी प्लानिंग बैठ के करके देखें कि होती है कि नहीं होती दो सर हां