0:00 स्टॉक मार्केट स्कैम फ्री भी है। आसान भी बहुत है और सबसे ज्यादा रिटर्न दुनिया में भी और पाकिस्तान में भी सबसे ज्यादा रिटर्न हमेशा स्टॉक मार्केट में ही आते हैं। लोग होते हैं ना जिनको ये रिच वर्सेस पूअर माइंडसेट नहीं होता। वो करते हैं सेव। सेव करने से ना कंपाउंडिंग नहीं होती। यानी कि पैसे से पैसा नहीं बनता। वारेन बफे ने भी यही कहा कि जो स्टॉक मार्केट है ना इज अ प्लेटफार्म वेयर यू कैन बिकम इक्वल पार्टनर्स विद टॉप बिज़नेसमैन ऑफ दैट कंट्री। ओके। ब्रोकरेज फर्म्स हैं कि ये कितनी रिलायबल होती है? ब्रोकरेज पूरी इंडस्ट्री होती है वो बाय सेल पे अर्न करती है। तो आप टेंशन नहीं लें। जब पाकिस्तान के टॉप बिज़नेस में पैसा बनाएंगे आपका भी पैसा। आपका भी पैसा भाई आपने भी रिसेंटली कहा है कि पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज जो है वो यूएस की स्टॉक एक्सचेंज से ज्यादा रिटर्न दे रही है। ये आखिरी दफा 2004 में हुआ था। 20 साल बाद 204 में अचीव हुआ था। पिछले 10 सालों में Apple और मिज़ान का अगर कंपैरिजन
0:46 करें तो डॉलर में मिज़ान ज्यादा आगे। आप रियलस्टेट देख लें। आप जो है फिक्स्ड इनकम देख लें, बैंक में पैसे रखना। सबसे ज्यादा रिटर्न जो है ना हमेशा स्टॉक्स में आता है पूरी दुनिया में। सारी जो मूवीज हैं इवन हॉलीवुड, बॉलीवुड ये सब ट्रेडिंग दिखाती हैं। लोगों को ना पिछले 10 सालों में कंटेंट ही ऐसा दिखाया है कि ना हमने ट्रेडिंग करनी है। ट्रेडिंग करके जो है ना मैं एकदम से अपनी जिंदगी बदल सकता हूं। योर सेविंग्स शुड फीड योर इन्वेस्टमेंट्स। एंड योर इन्वेस्टमेंट्स शुड फीड योर लग्जरीज। ₹5 लाख अगर लेट्स से बोनस मिला है iPhone नहीं लेना उसको इन्वेस्ट करना है जब वो 5 करोड़ हो जाएगा या ₹2 करोड़ हो जाएगा फिर जब डिविडेंड आएगा ना उससे iPhone ले लें फिर कोई मसला नहीं है आर्मी बनानी है रिटेल इन्वेस्टर्स की ऑफ 10 एक्सपर्ट रिटेल इन्वेस्टर साल बाद हम दोबारा आपसे करेंगे आई विल बी इन्वेस्टिंग इन स्टॉक्स फिर हम अपना एक्सपीरियंस शेयर करेंगे सारे
1:32 जो मिसकंसेप्शन है ना फिर उसके जवाब आप देंगे अस्सलाम वालेकुम वी बॉट्स की एक नई एपिसोड के साथ मैं हूं मेहर सतार मैं हूं वाहद अहमद नाजरीन आज हमारे जो गेस्ट हैं वो स्टॉक मार्केट को लुड्डो की तरह नहीं बल्कि साइंस समझ के खेलते हैं। और आज हम हर वो सवाल लेंगे जो एक आम पाकिस्तानी के ज़हन में आता है कि आखिर क्या वाकई स्टॉक मार्केट में पैसा बनता है या डूबता है और साथ कौन से ऐसे स्टेप्स हैं जिनको लेके हम ग्रो कर सकते हैं और शुरू में कौन से ऐसे स्टेप्स हैं जिनको हमने अवॉयड करना है। जी हां नाजरीन मैं भी इन्हीं की वजह से इनसे इंस्पायर हो के स्टॉक एक्सचेंज के अंदर मैंने एक अपना अकाउंट खुलवाया है और थोड़े से पैसे मैंने अभी उस टाइम पुट इन किए हैं। बट कोशिश ये है कि मैं इनसे डिटेल में समझूं। इतने अच्छे तरीके से यह समझाते हैं कि बंदा कहता है कि सारे पैसे आप ले लें और मेरे पैसे इन्वेस्ट कर दें। इतने
2:18 मजे का अंदाज और इतना हंबल अंदाज के हर सुनने वाला कहता है कि ही इज राइट। तो मैं हम बात कर रहे हैं मिस्टर अब्दुल रहमान नजम साहब की। थैंक यू वेरी मच अब्दुल रहमान भाई। कैसे हैं आप? खैरियत से हैं? थैंक यू सो मच। बिस्मिल्लाह रहमान रहीम। मेरा तो ये सोल्ली रीज़न है कि भाईजान मैं आपकी वजह से स्टॉक एक्सचेंज में आ चुका हूं। मैं चाहता हूं कि इनको भी ये जो मेरे साथ बैठे हैं उमर सतार। आई एम कन्विंस करें। बट नहीं हम इसको एजुकेशन पॉइंट ऑफ व्यू से लगेंगे कि जो जो भी स्टार्ट करना चाहते हैं कहां से स्टार्ट करना है, किस तरह करना है। बट बिफोर आप बहुत ज्यादा सोशल मीडिया पे इस टाइम वायरल है। तो लोग आपके बारे में भी जानना चाहते हैं। तो बट वी वांटेड टू स्टार्ट इट फ्रॉम हियर कि आपकी फाइनेंसियल जर्नी कैसे स्टार्ट हुई? एजुकेशन क्या थी? बिकॉज़ पीपल वांटेड टू नो अबाउट यू नाउ। हम चलिए हम इसको ऐसे स्टार्ट करते हैं कि स्टॉक मार्केट ना एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां पे हर बंदा जो है ना इन्वेस्ट कर सकता है। ठीक है? जैसे आप कह रहे हैं ना कि अभी
3:04 मेरा माइंड ना बना नहीं है। तो ज्यादातर पाकिस्तानियों का यही हाल है। लोगों को ज्यादा जो है रियलस्टेट की तरफ जो है सिखाया गया कि इधर सबसे ज्यादा रिटर्न आते हैं। लेकिन मेरी भी जो अपनी जर्नी है ना उस पे भी मैंने सारी स्टडी की। डिफरेंट एसेट क्लासेस देखे। पहले मैं भी बड़ा सोचता होता था जब मैं यूनिवर्सिटी से आता होता था छुट्टियों में। तो घर पे ऐसी बात होती थी। घर वाले सब कहते थे कि हम तो जिसको भी जानते हैं लॉस हुआ है। तो बाहर मैं देखता होता था कि पूरी दुनिया जो है ना स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट कर रही है। सारे दोस्त बताते होते थे कि जो है ना इसमें जो है आप थोड़ा-थोड़ा इन्वेस्ट करते रहें। थोड़े टाइम बाद जो है ना आपके बहुत ज्यादा अमाउंट जो है ना एक बन जाएगी और उससे जो है आपका फाइनेंसियल फ्रीडम अचीव हो जाएगा। सबने प्लान बनाए हुए थे अपने। लेकिन इधर आके घर वालों की बात सुनते होते थे और थी भी बिज़नेस फैमिली। ऐसा नहीं था कि उनको चीजों का पता नहीं था। फिर भी वो कहते थे नहीं हम तो जिसको भी जानते हैं नुकसान हुआ है। तो मेरी खुद भी पूरी एक जर्नी पहले मैं सोचता था ये बहुत मुश्किल है।
3:51 मुझसे नहीं होगा नुकसान हो जाएगा। लेकिन जब थोड़ा टाइम लगाया तो पता चला कि स्टॉक मार्केट स्कैम फ्री भी है। इसमें आपसे कोई धोखा भी नहीं कर सकता। आसान भी बहुत है और सबसे ज्यादा रिटर्न दुनिया में भी और पाकिस्तान में भी सबसे ज्यादा रिटर्न हमेशा स्टॉक मार्केट में ही आता है। बहुत लोग उसको मुश्किल समझते हैं कि क्या है ये इसमें तो चीजें ऊपर नीचे होती रहती है। फिर हेडलाइन भी लग जाती है। पता नहीं कितने अरब का जो है आज नुकसान हो गया। ऊपर से सबसे ज्यादा हमारे रिश्तेदारों के नुकसान हो जाता है। जो बताने वाले होते हैं ना हमेशा वही डूबे होते हैं। जब ऊपर जा रही होती है ना तो 5 10 कोई माइलस्टोन अचीव होता है ना फिर खबर लगती है। लेकिन जब नीचे आ रही होती है तो एकदम से एक डिक्लाइन और उसकी एक सनसनी फैल जाती है। इसके पीछे ना क्रक्स मैंने दो चीजें समझी। एक स्टॉक मार्केट असल में है क्या? और दूसरी चीज के रिच वर्सेस पुअर माइंडसेट क्या होता है। आपने ये अगर समझ लिया ना फिर एक सोच होती
4:38 है कि मैं तो सैलरी अर्न करता हूं। सिर्फ मैं कैसे जो है एक वेल्थ अपनी बना सकता हूं या इतने पैसे एक्यूमुलेट कर हां मैं थोड़े 5000 10000 सेव करके कहां तक पहुंच जाऊंगा क्या जरूरत है मुझे ये करने की लेकिन जब आप ये समझेंगे ना और पावर ऑफ कंपाउंडिंग समझेंगे कि आप जब इन पैसों को जोड़ते हैं जोड़ते हैं और ये आहिस्ता-आहिस्ता खुद ग्रो होने लग जाते हैं तो उसकी अमाउंट बहुत बड़ी बन जाती है। तो आप जैसे अगर एग्जांपल लें एक बंदा सोचता है कि लेट्स से मैं महीने के 5000 से सेव कर सकता हूं। अभी अभी मैंने करियर शुरू किया है। 500 की अभी सैलरी है तो मैं 5000 सेव करता हूं। इससे ज्यादा नहीं कर सकता। लेकिन अगर आप यही 5000 हर महीने लगाने लग जाएंगे अगले साल आपकी जो है सैलरी इनक्रीस होगी। अभी तो हम प्रमोशन को भी नहीं डाल रहे इसमें। सिर्फ जो नॉर्मल 10% इनक्रीस हो जाती है ना उससे आप अगले साल जो है हर महीने 5500 सेव करेंगे।
5:24 अब जो लोग होते हैं ना जिनको ये रिच वर्सेस पुअर माइंडसेट नहीं होता। वो क्या करते हैं? इसको अलमारियों में रख दिया। या किसी ऐसी जगह पे लगा दे जहां पे रिटर्न नहीं आता। या कमेटी डाल दी। हां वो करते हैं सेव सेव करने से ना कंपाउंडिंग नहीं होती यानी कि पैसे से पैसा नहीं बनता लेकिन इन्वेस्ट करने से वो पैसे बढ़ते रहते हैं बढ़ते रहते हैं बढ़ते रहते हैं इसी को अगर थोड़ा ऐसे देखें कि अब लेट्स से अपने एक बंदे ने अपना करियर स्टार्ट किया अब अगले 25 30 साल 35 साल उसने काम करना है इस टाइम में अगर वो हर महीने 5000 सेव कर रहा है एक साल बाद उसको थोड़ा सा बढ़ा लेता है तो अगर इसको वो स्टॉक मार्केट में लगाता रहेगा जो एवरेज रिटर्न है एवरेज कंपनी का मतलब इसको मैं आपको बताऊंगा भी पूरा कि कैसे अकाउंट खुलता है सब कुछ होता है क्या करना इसमें ना आपको साल में 510 मिनट से ज्यादा काम नहीं है ये। तो ये जो 5 5000 हर साल आपने तकरीबन 3 लाख सेव किए। दूसरे साल में थोड़े से ज्यादा
6:11 होंगे। ये 25 साल बाद जो है ना 5 करोड़ बन जाते हैं। कंपाउंडिंग जब होती है आपने टोटल सेव जो है वो कोई तकरीबन किए होंगे मुश्किल से एक करोड़। एक करोड़ डेढ़ करोड़ से किए होंगे। लेकिन वो बढ़-बढ़ के बढ़-बढ़ के 5 करोड़ बन जाते हैं 25 साल बाद। और अगर आप उसको 10 साल और एक्सटेंड करें तो फिर जो है ये कोई 25 करोड़ वाली कहानी हो जाती है। कंपाउंडिंग कहना चाह रहे हैं कि ये लॉन्ग टर्म के लिए है बेसिकली स्टॉक एक्सचेंज देखिए शॉर्ट टर्म में भी जो इन्वेस्टर्स होते हैं सब देखते हैं कि कौन सी एसेट क्लास अच्छी है। मुझे आजकल कहां पैसे लगाने चाहिए। लेकिन लॉन्ग टर्म तो एक ऐसी चीज है ना कि बंदा अगर आंख बंद करके करे उसमें उतार-चढ़ाव आएंगे। लेकिन फिर भी जब इतने एंड में रिजल्ट आ रहा हो तो लॉन्ग टर्म तो सबको करना चाहिए। इधर से शुरू करना चाहिए। फिर जब आपकी थोड़ी-थोड़ी नॉलेज बनती है, आप देखते हैं कि अभी जो है आउटलुक अच्छी है पाकिस्तान की। मैं थोड़ा सा ज्यादा पैसे लगा लेता हूं, ज्यादा सेव कर लेता हूं। ज्यादा बढ़ जाएंगे।
6:57 इधर लोगों को सिखाया गया है कि ना पाकिस्तान एक ऐसा मुल्क है जहां वजीरे आजम भी बोलते रहते हैं। सही है? कुछ पता नहीं होता। कभी डिफॉल्ट के करीब आ जाते हैं। कभी जो है एकदम से हुकूमत की पॉलिसी चेंज होती है। एक बिज़नेस अच्छा खासा चल रहा होता है। वो बंद हो जाता है। तो बिजनेस में इन्वेस्ट नहीं करना। बिज़नेस में इन्वेस्ट नहीं करना। ऐसी जगह लगाओ जो कि हुकूमत आपसे नहीं ले सकती और वो है जमीन। सही है। हां। जमीन पे आप जा भी सकते हैं। उधर जाके जो है आपने एक देख भी सकते हैं। हां भाई किसी ने कब्जा नहीं किया। लेकिन जमीन की हम भी खुद जब जैसे घर में भी सब कहते थे कि इधर ना जमीन में ज्यादा रिटर्न है। आपको लैंड में इन्वेस्ट करना चाहिए। एक दफा आज से आई थिंक डेढ़ साल पहले की बात है। जब ना स्टॉक मार्केट का इंडेक्स कोई 60000 पे पहुंचा था। तो मैंने ऐसे ही अपने Twitter पे शेयर किया कि ये जो इंडेक्स है ना 25 साल में 1000 से एवरेज कंपनी 60 पे पहुंच गई है।
7:42 यानी कि आपका जो है 60 गुना फायदा हो गया। तो आप कोई सब आप घर पे रहते हैं। अपने पेरेंट्स के थ्रू या रिश्तेदारों के थ्रू कोई एग्जांपल बताएं कि किसी जमीन ने भी इतना रिटर्न दिया हो। वैसे तो हम सुनते रहते हैं कभी कोई चीज बढ़ जाती है कभी कुछ बढ़ जाता है। लेकिन लॉन्ग टर्म में अगर उसने अपनी वैल्यू बढ़ाई है तो कोई एग्जांपल होगी उसकी। लोग तो आगे-आगे होके बताते हैं। तो आप कोई भी एग्जांपल उठा लें लाहौर की डीएचए फज़ सिक्स। तो सब जो है निकल आएगी कोई ना कोई एग्जांपल। नहीं इसकी इससे इसके करीब आ जाती हैं। लेकिन ये है एक एवरेज कंपनी। ओके। यानी कि एवरेज रिटर्न ऑफ स्टॉक मार्केट जो है ना वो रियलस्टेट की टॉप एग्जांपल जो है ना उनके बराबर आगे खड़ा हो जाता है। अब आप अगर सोचे आप स्टॉक मार्केट में अगर आपने अच्छी चीज ढूंढ ली होती तो फिर अच्छी कंपनी ढूंढ ली होती तो फिर आपका जो 60 टाइम्स हो रहा है ना इतने टाइम में वो फिर 100 200 इवन 300 की एग्जांपल्स भी
8:28 हैं। सो और इसके पीछे रीज़न क्या था? रीज़न डाटा से तो नजर आ रहा था कि नंबर बहुत अच्छे हैं। लेकिन फिर मैंने अपनी जर्नी में ना वार्न बफे की एजीएम सुनी। ये दुनिया के नंबर वन इन्वेस्टर हैं। आजकल भी बहुत अच्छे आ गए हैं। लेकिन ये जो है 1956 से इन्वेस्टिंग कर रहे हैं। मतलब हर तरह की वर्ल्ड वॉर भी देखी है इन्होंने। ग्रेट डिप्रेशन इनके जो टीचर थे ना उन्होंने ग्रेट डिप्रेशन देखा है। तो आप एक तरह से कह सकते हैं कि सेकंड हैंड इनको नॉलेज ग्रेट डिप्रेशन की भी। आपको इनसे क्यों इंस्पिरेशन इतनी मिली? वारेन बुफे से। जब मैं यूनिवर्सिटी से वापस आया ना तो इन्वेस्टिंग का थोड़ा-थोड़ा शौक बन रहा था। तो ऐसे ही इस तरह से आपको जिस चीज का शौक हो आपको YouTube पे उसकी वीडियोस नजर आने लग जाती हैं। मैंने और भी बहुत सारे इन्वेस्टर्स की बुक्स पढ़ी हुई हैं। पीटर लिंच की पढ़ी हुई हैं। और भी इवन जो सेंट्रल बैंकर्स मशहूर है ना अमेरिका के जैसे 19, 70 और 80 में इनफ्लेशन बहुत हाई
9:13 हो गई थी। तो एक बड़े उनके मशहूर सेंट्रल बैंकर उन्होंने भी एक बुक लिखी हुई है। उस तरह की बुक्स भी पड़ी हुई है। रिच डैड पुअर डैड भी पड़ी हुई है। लेकिन इनकी जब वीडियो मुझे नजर आई ना YouTube पे एजीएम 1994 की थी। वो ऐसे चारप घंटे की थी। उसमें वो लोगों को बता रहे हैं। उनके जवाब दे रहे हैं। जो भी जिस तरह का भी सवाल हो, मुश्किल सवाल हो, कोई कंपनी कैसे परफॉर्म करती है? उसका बिजनेस मॉडल क्या है? ऑयल एंड गैस में क्या होता है? बैंकिंग सेक्टर में कैसे जो है बिनेस ऑपरेट करता है? तो इनको ना बिनेस की बहुत ज्यादा नॉलेज है। तो समझ आए उससे कि इन्वेस्टिंग कुछ भी नहीं है। सिर्फ ये है कि आप ना इन बिनेस में पार्टनर बन जाते हैं। ओके? अब जब आपको समझ आ जाता है ना कि ये बिज़नेस करता क्या है? फिर कभी स्टॉक मार्केट नीचे जाए, शेयर नीचे जाए, आप फिर बेचते नहीं है। हम सारी घबराहट जो है ना वो आपकी खत्म हो जाती है। इसकी मैं आपको एक और एग्जांपल देता ज्यादातर लोग अपनी जिंदगी में अगर
10:00 बिजनेसमैन हैं या बिनेस साइट पे करते हैं। एक से दो बिनेस करते हैं। ठीक है? उसमें उनको घबराहट नहीं होती। क्योंकि उनको सारी चीजों का पता होता है। अभी दो साल पहले पाकिस्तान में इंपोर्ट जो है रुक गया था। जी। अब पाकिस्तान में कितने लाखों में इंपोर्टर होंगे लेकिन किसी को घबराहट तो नहीं हुई। ऐसा तो नहीं हुआ। उन्होंने सोचा कि अब हम ये काम छोड़ देते हैं। नया काम शुरू कर देते हैं। ये हमेशा के लिए बंद हो गया। उनको पता था चीजें ठीक होंगी। आज से 6 महीने बाद 1 साल बाद चीजें नॉर्मल हो जाएंगी। लेकिन स्टॉक मार्केट में कोई भी चीज ऊपर नीचे होती है ना लोग घबराहट शुरू हो जाती है और उसकी वजह ये होती है उनको पता नहीं होता उन्होंने किस चीज में इन्वेस्ट किया। अच्छा मैं स्टॉक एक्सचेंज पे आपसे वापस आता हूं। मैं पहले आपसे जानना चाहता हूं आप वापस आए इंग्लैंड से तो आपने क्योंकि आपकी बिनेस फैमिली बैकग्राउंड है आपका तो आपने अपने फादर को किस तरह कन्विंस किया कि आप पैसे स्टॉक एक्सचेंज में डाल दें क्योंकि मेरे घर पे जो बड़े हैं वो कतन कहते हैं मैं नहीं डालता। वही वाली बात है।
10:46 वो कहते हैं हमारे बड़े हमें मशवरा ये दे के गए थे कि यार स्टॉक एक्सचेंज में पैसे मतलब हार्ट अटैक आता है ऐसे। बल्कि मुझे तो कहते थे कि मैं तो जिसको भी जानता हूं उसका नुकसान हुआ है। तो मेरी खुद भी जर्नी थी। लकीली मेरे बड़े भाई भी हैं। तो उन्होंने संभाली हुई थी चीजें। तो ऐसा नहीं था कि मुझे जो है 1% यही करना था। लेकिन फिर भी जो शुरू के दो साल थे उसमें हमारा स्टील का पहले फैमिली का बिज़नेस होता था और फिर कंस्ट्रक्शन का होता। दोनों पे मैं जाता होता था। लेकिन दो-ती साल में जब ये बुक्स काफी ज्यादा पढ़ ली और फिर जो है ना आई थिंक दो साल जब गुजर गए थे ना फिर मैंने जो सारी चीजें सीखी वारेन बफे की सारी एजीएम देख के चार-चार पांच-प घंटे की एक होती थी 2025 साल की देखी फिर उसको मैंने कहा पाकिस्तान पे इसको अप्लाई भी तो करना है ना तो जब उसको अप्लाई करना शुरू किया कुछ बिनेस मुझे जल्दी समझ आने लग गए तो एक कंपनी मुझे समझ आ गई उस वक्त 2019 का टाइम
11:31 था कोहार्ट सीमेंट ओके तो मैंने उसकी रिसर्च की सारा पढ़ा सीमेंट के बारे में लकीली ना इस सेक्टर में कंपनीज़ भी बहुत ज्यादा लिस्टेड तो ब्रीफिंग फिंग्स होती रहती है। हर तीन महीने बाद आप समझे पांच ब्रीफिंग्स हो रही है। तो आपको पांच मौके मिल रहे हैं कि आप उस इंडस्ट्री को और ज्यादा समझ सकते हैं। उसकी मैनेजमेंट जो है बात कर रही है सारा कुछ कर। तो मुझे समझ आ गया कि उस टाइम पे जो डॉलर का रेट था ना एक मिलियन टन का अगर प्लांट होगा ना वो तकरीबन 10 अरब का लगता है। ठीक है। अब उस टाइम पे जरा प्रॉफिट कम थे। सीमेंट का बैग जो है ना बड़ा सस्ता होगा। तो जितनी कॉस्ट पे बन रहा था बिक रहा था। तो हर कंपनी जो है ना वो ब्रेक इवन कर रही तो मैंने कहा चलो ठीक है अब प्रॉफिट तो कम है तो 10 अरब वाली चीज जो कभी अगर नहीं कमा रही हो तो सेल सेल हो जाती है सात पे मिलने लग जाएगी छह पे मिलने लग जाएगी लेकिन एक कंपनी मिली जिसने बैंक से कोई कर्जा भी नहीं लिया हुआ था उसका 4 मिलियन टन का प्लांट था और उसकी प्राइस चल रही थी
12:17 ₹8 अरब ₹ अरब का एक प्लांट मिल रहा था जो कि 10 का होना चाहिए था और वारेन ने सिखाया हुआ था के स्टॉक मार्केट में ना असल में जो पूरी कंपनी होती है ना उसकी वैल्यू कभी-कभी असल वैल्यू से एक शेयर की बहुत कम हो जाती है क्योंकि लोगों को इतनी समझ समझ नहीं होती। समझ नहीं होती। यानी कि आप समझिए एक बिल्डिंग है उसके अंदर 1000 ऑफिसिसेस हैं। ठीक है? एक ऑफिस है 50 लाख का। अब अगर एक जो है ऑफिस किसी को मजबूरी में बेचना होगा वो 40 का बेच देगा, 35 का बेच देगा। लेकिन अगर ऐसे 10 मिलियन ऑफिस हो जाए और एक बंदे की उसकी जो प्राइस है वो बहुत कम हो जाए। तो अगर किसी को पैसों की जरूरत होगी तो उसे आधी और 1/3 कीमत पे भी बेच के चला जाएगा। क्योंकि पैसों की अमाउंट इतनी ज्यादा नहीं है। तो शेयर मार्केट में ऐसे होता है। ओके? क्योंकि एक शेयर अगर ₹100 का है, ₹
13:03 का है, अगर किसी ने बेचने हैं तो बहुत ज्यादा लोग थोड़े टाइम बाद ना उसका एंकर भूल जाते हैं कि इसकी असर फेयर वैल्यू क्या है? तो अगर चीजें खराब चल रही हो तो उसकी वैल्यू अगर ₹100 है तो वो 30 पे भी आ सकती है। और अगर चीजें अच्छी जा रही हो ना तो वो 100 वाली चीज 200 की भी हो सकती है। मैं अभी इस पे आता हूं। स्टॉक मैनपुलेशन पे भी आता हूं आपसे। लेकिन मुझे पहले उस पे वापस आए कि वालिद साहब को कि कैसा कन्विंस किया आपने? फिर यही जो कोहाट सीमेंट वाली एग्जांपल थी ना मैं उनके पास लेके गया। मैंने उनको सारा बताया कि एक सीमेंट का जो प्लांट है ना ये आता है ₹1 अरब का। ठीक है? अब आजकल बिल्कुल प्रॉफिट नहीं हो रहा तो 5 6 अरब ठीक है होना चाहिए जो चीज नहीं कमा रही होती है उसकी फिर वैल्यू डाउन हो जाती है लेकिन मैंने कहा इस कंपनी पे कोई कर्जा भी नहीं है और जो है ना ये हमें 2 अरब पर मिलियन टन के हिसाब से मिल रही है तो हम इसमें इन्वेस्ट करते हैं दो-ती साल में जब चीजें ठीक होंगी ना थोड़ा सा कंस्ट्रक्शन का काम शुरू होगा सीमेंट बिकेगा इसकी प्राइस ऊपर चली जाएगी वो पहली
13:50 इन्वेस्टमेंट थी कहते हां बात तो सही है वैसे उन्होंने भी अपनी तरफ से सारा चेक किया कि हां असल में इतने का ही होता है इसने कुछ गलती तो नहीं की उसको देखा भी उसपे कर्जा है कि नहीं कहते चलो ठीक है इसमें कर लेते वो पहली इन्वेस्टमेंट की तो वो लकीली जो है एक साल में ही चार गुना हो गया। वाओ और उसमें एक ट्रिगर ये भी था के कोविड के बाद जो है ये जो कंस्ट्रक्शन पैकेज आया उसमें वो बढ़ा। बिल्कुल। लेकिन उससे पहले भी ये 2019 की बात है ना? ये कंस्ट्रक्शन पैकेज तो जून 2020 में आया था। उससे पहले ही जो है वो जो है दो-तीन गुना हो गया हुआ था। और उसकी वजह वही थी जो सिखाई थी वारेन बफे के टीचर ने। उसप एक पूरी बुक लिखी हुई है उन्होंने। सिक्योरिटी एनालिसिस और वो उस टाइम पे लिखी हुई है जब ग्रेट डिप्रेशन होता था। अब जब हालात बहुत खराब हो ना लोग ₹100 की चीज़ ₹10 में भी बेच के चले जाते हैं।
14:35 बस वो इतने तंग आ जाते हैं। कहते हैं अब बस इसका कुछ नहीं होता। मैंने तीन साल इसको होल्ड कर लिया है। इसने मुझे नुकसान ही दिया है। अब बस मुझे इससे जो है ना छुटकारा है। तो जो जिन लोगों को नॉलेज होती है वो उसका फायदा उठा के अच्छी प्राइस पे खरीद लेते हैं। सो वो जो है इवन कोविड आने से पहले ही जो है ना दो तीन गुना हो गया था। ठीक क्योंकि वो समझ आ गई थी कि स्टॉक मार्केट में चीजें जो है ना स्प्रिंग की तरह होती है। स्प्रिंग को आप दबा लेंगे लेकिन थोड़े टाइम बाद मैक्सिमम दो-ती सालों में उसने अपनी जगह पे आना जरूरी है। ऐसे ही है। तो ये पूरी नॉलेज थी इंडिविजुअल कंपनीज़ की भी। कमिंस हो गए फिर आसानी से। हां। फिर पहली इन्वेस्टमेंट की। और पैसे प्रॉफिट दे दिया और खुश हुए। फिर वो प्रॉफिट भी आया। फिर जो है दूसरी इन्वेस्टमेंट की। उसमें मैंने जाके समझाया कि ये कंपनी जो है ना ये इसका बिजली का कॉन्ट्रैक्ट है गवर्नमेंट के साथ आईपीपी। तो उसको ना फिक्स पेमेंट मिलती है। तो फिक्स पेमेंट हां ये आनी ही आनी है। अब चले या ना चले
15:20 तो वो भी उनको कहा चलो हां ठीक है। टीवी पे भी इसकी बात होती है कि ये लोग बहुत पैसे बना रहे हैं। तो ऐसे-से थोड़ा-थोड़ा करके जो नॉलेज दी ना जब बिनेस के बारे में शुरू में बिल्कुल मैं उनको कहता था ऐसी कंपनी में हम बिल्कुल नहीं करेंगे जिसने कर्जा लिया हो। लेकिन फिर 2022 के बाद जो है 21 और 22 में शेयर्स नीचे भी आए। तो उसमें जो है थोड़ा सा लॉस भी होता था। चीजें समझते थे। हमें आईडिया था कि ये चीजें जो है ऐसी होती है जब इकॉनमी थोड़ी खराब होती है। तो टेंपरेरी लोगों का रुझान बदल जाता है। आपने घबराना नहीं हां बस बस पढ़ते रहना है पढ़ते रहना है मेक श्योर करते रहना है आपने कोई गलती तो नहीं की हो सकता है आपने भी कोई गलती की हो कोई चीज गलत समझ ली हो गलत प्राइस पे ले ली हो तो एक कंटीन्यूअस रिव्यु का प्रोसेस जो है वो करते रहना है और फिर 2023 और 24 और पिछले दो साल में तो जो रिटर्न्स आए हैं और जिस तरीके से और लोग भी आ रहे हैं और उन लोगों की भी नॉलेज बहुत अच्छी हो गई
16:07 है बिनेसेस के बारे में टीम भी हमारी बन गई है तो अब तो पेरेंट्स जो हैं काफी ज्यादा खुश हैं बट शुरू में आम बंदे को भी मैं अब यही कहता हूं कि दो चीजें होती है जो ना आपको घबराहट देती है। एक होता है कि मुल्क के हालात जो है ना वो ऊपर नीचे हो रहे हैं। अब वो हमने देख लिया कि भाई पिछले 25 साल में क्या कुछ नहीं हुआ। ऐसे ही है। सही है? प्राइम मिनिस्टर भी चेंज हुए। मिलिट्री रूल भी आ गया। हर चीज हुई। इंडिया ने अटैक्स भी किए। फिर भी जो है एवरेज बिनेस जो 1000 का इंडेक्स होता था 1999 में वो आज एक 30 क्रॉस कर गया। तो इसमें तो वेल्थ क्रिएशन होनी होनी है। दूसरी चीज होती है जो जिस पे मैंने अपने फादर को कन्विंस किया। एक कंपनी के बारे में नॉलेज नहीं होती। जब उसको आप एज अ बिजनेस ओनर्स देखेंगे ना तो फिर आपकी जो है ना आपको वो चीज़ समझ आने लग जाएगी। फिर आपको पता है इसने जो है ना अगले एक साल में इतना कमाना है तो मैं इसको कम प्राइस पे क्यों बेचूं।
16:52 तो इस तरह से जब आहिस्ता-आहिस्ता लोगों को सारी चीजें समझ आती है तो फिर सब लोग जो है इन्वेस्ट भी करते हैं। वारेन बफे ने भी यही कहा कि जो स्टॉक मार्केट है ना इज अ प्लेटफार्म वेयर यू कैन बिकम इक्वल पार्टनर्स विद टॉप बिनेसमैन ऑफ दैट कंट्री। अब स्टॉक मार्केट में सबसे बड़ी कंपनीज़ कौन सी हैं? Man Bank सही है। लकी सीमेंट UBL बैंक हां Mar एनर्जी अब ये कौन है? ये पाकिस्तान की टॉप कंपनीज़ है ना अगर आप इनका शेयर लेंगे लॉन्ग टर्म के लिए होल्ड करेंगे तो इनको जो कंपनी में प्रॉफिट आएगा वो आपको भी मिलेगा। अब इसमें ना ज्यादातर लोग करते ये हैं कि किसी से जैसे उनको किसी ने कन्विंस कर लिया कि ये कंपनी बड़ी अच्छी है। उन्होंने देखा भी होता है जैसे मार्केट में मिज़ान बैंक की नई-नई ब्रांचेस खुल रही हैं। तो कहते हैं चलो हां ये कंपनी पे वो कन्विंस हो जाते हैं। हां इसका शेयर भी अच्छा परफॉर्म कर रहा है। मुझे नजर भी आ रहा है। मैं खुद इनको यूज़
17:38 भी करता हूं। मैं इनका कस्टमर भी हूं। लेकिन जैसे ही वो उसमें खरीदते हैं ना 6 महीने बाद कोई न्यूज़ आई थोड़ा सा नीचे जाने लगा तो घबराहट का शिकार हो जाते हैं। तो वो जो कंपनी होती है ना वो अपनी वेल्थ क्रिएशन कर लेती है टाइम के साथ। वो जो बंदा होता है ना वो ई ऑफ बाइंग सेलिंग की वजह से ना कहीं ना कहीं गलत टाइम पे बेच के निकल जाता है। तो इसमें बड़ा होता है कि आप लॉन्ग टर्म माइंडसेट रखें कि कंपनी अच्छी आइडेंटिफाई करें जो आपको अच्छा रिटर्न दे रही है लॉन्ग टर्म में और दो तीन चीजें लिखें एक कागज पे कि ये कंपनी जो है ना अच्छा कमाती है इस वजह से। जैसे मिलट ट्रैक्टर अच्छा कमाती है क्योंकि ट्रैक्टर जो है ना सारे पाकिस्तान में बनते हैं सारे तो जब भी डीवैल्यूएशन होती है उनकी कॉस्ट जो है उतनी ज्यादा नहीं बढ़ती जितनी जो है ट्रैक्टर की वो प्राइस बढ़ा देते हैं। इसी तरीके से अगर मिन बैंक ज्यादा कमाता है उसकी वजह ये है कि उनके बैंक में करंट अकाउंट बहुत ज्यादा है। फ्री मनी ऐसे ही है। इसी तरीके से हर कंपनी की ना कोई दो तीन
18:25 वजह होती है। जैसे mar एनर्जी है उसकी वजह ये है कि उसकी जो फील्ड है ना वो आप समझे सऊदी अरेबिया की क्वालिटी की है। सिर्फ पाकिस्तान में एक ही कंपनी है मेरे ख्याल से जो गैस नेचुरली निकालती है। सबसे बड़ी गैस फील्ड पाकिस्तान की ना वैसे तो मशहूर सुई है क्योंकि उधर सबसे पहले डिस्कवरी हुई थी लेकिन सबसे ज्यादा प्रोडक्शन ऑलमोस्ट 1/3 ऑफ पाकिस्तान की प्रोडक्शन एक फील्ड से आती है और 1960 से प्रोड्यूस करती जा रही है करती जा रही है नॉर्मल फील्ड के अंदर ना 3000 मीटर 3000 मीटर आप ड्रिल करें फिर गैस निकलती है उसमें भी प्रोबेबिलिटी होती है कि मिलेगी नहीं मिलेगी इस फील्ड में 1000 मीटर पे जो है वो सारी गैस निकल आती है और अच्छी प्राइस मिलती है आपको क्योंकि लोकल गैस जो है वो सस्ती है एलएनजी के मुकाबले में तो इस वजह से आप इन्वेस्टमेंट करते हो इस बिज़नेस बिज़नेस में उसप बहुत अच्छा रिटर्न आता है। तो ऐसे दो तीन चीज़ होती हैं जो कि कंपनी को मल्टीबैगर बनाती है जो अच्छा रिटर्न लेकर आता है। वो अगर आपको पता हो ना फिर जब ये
19:12 शेयर गिरेगा आप बेचोगे नहीं। ये बड़ा इंपॉर्टेंट होता है। नहीं तो एक मसला सबसे बड़ा जो मेजर होता है। स्टार्ट कैसे करना है? अकाउंट कैसे खिलाना है? स्टॉक चेंज काम किस तरह करती है? लोगों के लिए मिस कंफ्यूजन है। चलिए मैं आपको इसका ना तरीका बताता हूं कि हर बंदा 5 से 10 मिनट लगा के एक साल जो है ना अभी हम सारी बातें कर रहे हैं कि 99 में 1000 का इंडेक्स होता था। आज ₹1300 का इसको कैसे रेप्लिकेट कर सकते हैं। ठीक है? इसमें हम ये तो KSC 100 की एग्जांपल है। हम KMI 30 की ले लेते हैं क्योंकि बहुत ज्यादा लोगों को शरिया कंप्लाइंट कंपनीज़ में करना होता है। तो जो KSC 100 है उसमें सारी कंपनीज़ हैं उसमें बैंक्स भी आ जाते हैं। लेकिन जो KMI 30 है ना उसके अंदर 30 कंपनीज़ हैं जो कि शरिया कंप्लायंट भी हैं और जो सबसे बड़ी कंपनीज़ होंगी ना उनकी परसेंटेज ज्यादा होती है। ठीक है? अब ये कह रहे हैं कि एक इंडेक्स है उसमें 30 कंपनीज़ हैं। अब उसकी जो बड़ी कंपनीज़ हैं उसमें आए थे LKIT Man और इसके
19:57 अलावा Mar एनर्जीes इन सबकी ना ऐसे 8% किसी की 7% किसी की 6% तो आपने सबसे पहले तो क्योंकि मैंने जैसे बताया स्टॉक मार्केट है स्कैम फ्री। सारी ट्रांजैक्शन जो है ना बैंक से होंगी। आपका बैंक अकाउंट होना चाहिए। किसी को आपने कैश नहीं देना कि भैया मैं तुम्हें कैश दे रहा हूं। मेरे लिए शेयर्स ले लो। ऐसा हो नहीं सकता। बैंक से आप ट्रांसफर करेंगे ब्रोकरेज अकाउंट में। सबसे पहले आपने ब्रोकरेज अकाउंट खोलने। आज से 2 साल पहले क्योंकि पिछले 5 सालों से पाकिस्तान में एफएटीएफ के बड़े मसाइल चल रहे हैं। अकाउंट ओपनिंग मुश्किल हो गई। लेकिन 2 साल पहले सहूलत अकाउंट ल्च हुआ है जिसमें आप पीएसएक्स की वेबसाइट पे जाएं। टॉप 10 ब्रोकर्स निकालें। उसमें जो टॉप फाइव है ना सबको एक-एक कॉल करें। जिससे आपको सबसे अच्छा रिस्पांस आए ना। जिसको लग रहा हो आपको ये मेरा अकाउंट सबसे जल्दी खोल देगा। उससे कहो मैंने आपके हां सहूलत अकाउंट खुलवाना है। ठीक है? आप दो-तीन को ट्राई करेंगे तीन-चार दिन में आपका अकाउंट खुल जाएगा। सिर्फ शनाख्ती कार्ड देना कुछ भी नहीं
20:44 मांगेंगे आपसे और 10 लाख की उसकी लिमिट होती है। 10 लाख तक आप इन्वेस्ट कर सकते हैं। आपसे कोई प्रूफ ऑफ इनकम नहीं मांगेगी। ठीक है? आपने अकाउंट खुल गया आपका। मैक्सिमम एक हफ्ते में खुल जाएगा। अब आपने लेट्स से ₹1 लाख इन्वेस्ट करना है। आपने जाना है PSX की वेबसाइट पे फिर से कि MI30 की लिस्ट निकालनी है। आपने देखा ये हमारी एनर्जीज़ 8% है। मैंने भी 8% लेने हैं। तो मैं ₹1 लाख में से 8,000 के शेयर इसके ले लूंगा। फिर आपने देखा मिस है। आपने कहा 9% कितना बनता है? 9,000 ठीक है? आपने 9,000 के शेयर उसके ले लिए। जो भी प्राइस चल रही है। ठीक है? आप टॉप 15 कंपनीज़ ही करेंगे ना अगर तो 90% कवर हो जाएगा। जो उससे नीचे वाली कंपनीज़ होती है उनकी परसेंटेज कम होती है। अब आपके पास ₹100 बच गए। अब वो आप अपनी मर्जी से ऐसे ही कुछ ट्राई भी कर सकते हैं या फिर जो टॉप 10 कंपनीज़ है ना सब में 1000 और डाल और ऐड करना। ठीक है? बस अब आपने यही करना है। आपके अगले महीने
21:29 पैसे आए 5,000 10,000 आपने फिर से डिस्ट्रीब्यूट कर दिया। लेट से आपके अमाउंट कम है। आपके सारे नहीं शेयर आ रहे। आप पहले महीने में टॉप थ्री कर लें। अगले महीने में अगली तीन कर्लीट हो जाएगा और सिर्फ एक साल बाद इसकी भी जरूरत नहीं होती इतनी बट आपने एक साल बाद जो 510 मिनट लगाने हैं ना वो ये है कि आपने देखना है कि जो परसेंटेजेस आप जिसके हिसाब से पोर्टफोलियो बना रहे थे ना वो इंडेक्स की थोड़ी सी चेंज तो नहीं होगा। कभी-कभी जिसका आठ होता है वो नौ हो जाता है। कोई कंपनी ज्यादा ग्रो कर रही होती है, कोई कम ग्रो कर रही होती है वो थोड़ी सी एडजस्टमेंट आ जाती है। एक साल भर आपने देखना है कि अगर कोई फर्क आया ना बस उसको थोड़ा सा बाय सेल करके एडजस्ट कर ठीक है। अब आप यह करते रहेंगे। आपको ज़ीरो रिसर्च करनी है। आप जो भी टॉप बिज़नेस शरिया कंप्लायंट पाकिस्तान के है ना उनमें इक्वल पार्टनर बनना है। इन्वेस्ट करके सो जाओ। हां। बस अब ये आप करते रहें, करते रहें, करते रहें। और वो जो 5000 ने 5 करोड़ बनना
22:16 है ना वो खुद ही होता रहेगा। वाह! सिंपल। सी इसलिए हमने भाई को बुलाया कि इतनी आसानी से कोई नहीं समझा रहा। लिटरली कोई नहीं समझा रहा। नहीं। इसमें एक और एंगल ये भी होता है कि ज्यादातर लोग कहते हैं कि अब ये इंडेक्स जो है ना अब ये ज्यादा बढ़ गया है। अब मैं इसमें और इन्वेस्ट नहीं करता। तो देखिए बिजनेसमैन जो है ना वो जो भी हालात चल रहे होंगे उसके हिसाब से इक्वल जो है ना आपको अच्छा रिटर्न कमा के देगा। कभी चीजें ऊपरंगी कभी नीचे आ जाएंगी। लेकिन आपने जो है ना इसको करते रहना है। अब ये जो सारे यूएस बेस्ड फिफ्लूसर्स कहते हैं जो वो फाइनेंस पे थोड़ा सा बनाते हैं। इंडिया में भी बहुत बनाते हैं। वो तो ये बहुत आम हो गए हैं। तो पूरे सिस्टम्स बन गए हैं कि एक बंदे ने हर महीने 5000 डालने हैं। वो बस डालते हैं वो खुद ही डिस्ट्रीब्यूट हो जाते हैं। लेकिन अभी इधर पाकिस्तान में थोड़ा सा आपको मैनुअली करना पड़ता है। लेकिन इसके फ्रूट्स बहुत अच्छे हैं। और अगर कोई भी सोच रहा है ना ये मुश्किल है।
23:01 तो मैं आपको एक ऐसा किस्सा बताता हूं के उसके बाद तो ना किसी के पास कोई वजह नहीं रह जाती ना करने की। वो ये है कि आज से 2 साल पहले जब ये सहूलत अकाउंट खुला ना इसको तीन चार महीने जब हो गए थे ल्च हुए बड़ी अच्छी खबरें आ रही थी कि हां लोगों का आसानी से अकाउंट खुल रहा है। तो हम लोगों ने अपने घर में जो स्टाफ था ना सबका एक-एक अकाउंट खुलवाया। ठीक है? अब हर महीने ₹500 वो लोग सेव करते हैं। ₹00 हम लोग अपनी तरफ से एडिशनल सैलरी ले लेते हैं। ठीक है? तो वो जो 5000 है ना वो इसी तरीके से डिस्ट्रीब्यूट कर रहे हैं। तो वो अगर कर सकते हैं तो हर हर महीने अगर वो 5000 इन्वेस्ट कर सकते हैं और वो पिछले दो साल से कर रहे हैं तो आप मुझे बताएंगे कितना मुश्किल हो सकता है। मैं खुद पहले जैसे आपको बताया ना कि मैं सोचता था बड़ा मुश्किल है। उधर से कुछ और बताते थे दोस्त यूनिवर्सिटी में बट घर में आके बता दे थे नहीं ये बहुत मुश्किल है। ये जो है अमीरों का काम है।
23:46 इधर बहुत ज्यादा इन्वेस्ट करते हैं। काम ये है कि घर वालों को कन्विंस करना मुश्किल काम है कि पैसे डालें इसके अंदर। लेकिन मेरा ख्याल है जो आपने लिमिट बताई है 5,000 के लिए घर वालों को कंसं ही नहीं किया। 5000 से अकाउंट भी खुल जाता है और जो भी आपके अमाउंट है आपने उसको परसेंटेज में डिवाइड कर देना है। आपकी मर्जी आपकी एमआई 30 में करना चाहते हैं शरिया कंप्लेंट अगर आपको बैंक्स भी ठीक लगते हैं आपके एससी 100 में कर लें उसमें भी सेम प्रोसेस फॉलो करना है। तो अब्दुल रहमान भाई ये जो पॉइंट्स चल रहे होते हैं ₹1300 पे पहुंच गई है। ये किस तरह से कैलकुलेशन चल रही होती है? ये देखिए जैसे इनफ्लेशन का इंडेक्स होता है ना कि अब कहते हैं कि एक साल में 10% बढ़ गया तो हर जो कंपनी है ना उसको थोड़ा सा हिस्सा दिया हुआ है कि आपका जो है ना इस इंडेक्स में इतना कंट्रीब्यूशन है। तो उन सबकी जब एवरेज निकलती है ना तो एक नंबर बन जाता है। ये बस एक नंबर है। ओके? ठीक है? अब ये नंबर जब सब कंपनीज़ की वैल्यू बढ़ती है ये नंबर भी बढ़ जाता है। फिर कंपनीज़ डिविडेंड अनाउंस करती हैं और
24:32 वो भी इस नंबर में इंक्लूड हो जाता है। तो वो और बढ़ता रहता है। तो एक तरह से जितनी भी वैल्यू बढ़ रही होती है उस कंपनी की या वो जितना भी डिविडेंड दे रहा होता है ना उससे ये नंबर बढ़ता रहता है। बढ़ता रहता है, बढ़ता रहता है। तो एक तरह से ये आपको शो कर रहा है कि बिज़नेस लॉन्ग टर्म में अपनी वैल्यू कितना बढ़ा रहा है। अच्छा ये भी बताएं कि ये जो ब्रोकरेज फर्म्स हैं कि ये कितनी रिलायबल होती हैं। आप इनके पास जैसे जस्ट लाइक योर आपके बैंक में पैसे पड़े होते हैं। बैंक में पड़े हुए हैं। आपकी एक्सेस में है। तो क्या ब्रोकरेज फर्म्स के आप ऊपर इतना रिलाई कर सकते हो कि आपके पैसे सेफ हैं इनके पास? नहीं इसमें बल्कि एक चीज़ मैंने मिस कर दी। उस पे भी लोगों को गाइड करेंगे। एक तो हमने जैसे बताया टॉप फाइव में खोलना है। तो वो तो बिल्कुल रिलायबल है। यानी कि उधर जो है टॉप कंपनीज़ हैं कस्टडी अगर आपके उन्होंने रखी हुई है तो वो इतना कोई मसला नहीं है। ये सारे सीडीसी के सब अकाउंट होते हैं। अगर आप एक्स्ट्रा कॉशियस होना चाहते हैं आप सीडीसी इन्वेस्टर अकाउंट खोल। वहां ना आपके जब शेयर्स ट्रांसफर हो
25:18 जाएंगे ना फिर जब तक आप अपने ब्रोकरेज अकाउंट में नहीं लाएंगे ना कोई उसको सेल नहीं कर सकता। दूसरी चीज़ आपको यह समझनी होगी। कि अब ये जो इंडेक्सिंग है ना चुपचाप करके ज्यादा कुछ बाय सेल नहीं करना सिर्फ जो पैसे आ रहे हैं उसको इक्वली डिस्ट्रीब्यूट कर देना ये बड़ा डिसिप्लिन का काम होता है और जो ब्रोकरेज पूरी इंडस्ट्री होती है वो बाय सेल पे अर्न करती है तो वो शुरू के दो-ती महीने में जब आप नए जाएंगे ना वहां पे तो वो आपको थोड़े आइडियाज देंगे कि अभी जो है आप ये खरीद लें ये बढ़ने लगा है लेकिन आपका प्लान नहीं है ये आप अभी इतनी आपको नॉलेज नहीं है कि आप ये सब करना शुरू करें आपने जो है बड़े डिसिप्लिन के साथ वो फॉलो करना है और शुरू के दो तीन महीने अगर आप उनको थोड़ा सा कह देंगे ना कि अभी मैं ये नहीं करता मेरी मेरी स्ट्रेटजी डिफरेंट है। फिर वो उनको भी पता लग जाता है। हां उनको पता चलेगा ये क्लाइंट डिफरेंट है। अच्छा ये ब्रोकरेज ये जो ब्रोकेज फर्म्स हैं इन्होंने अपने-अपने WhatsApp पे ग्रुप्स बनाए हुए हैं। एवरीडे मुझे क्योंकि मैं भी अभी न्यू हूं
26:04 इस काम में तो मुझे डेली टिप्स आती है कि आज सुबह बाय कर लो 9:00 बजे सुबह आता है कि आप बाय कर लो और ऑलमोस्ट शाम में दोपहर में 3 4 बजे वो कहते हैं कि जस्ट सेल इट ऑफ प्रॉफिट पकड़ो और निकल जाओ। तो इन पे आप कितना रिलाई कर सकते हो? मतलब अभी तक तो मैंने जो अभी तक पास्ट एक्सपीरियंस देखा है मतलब एक महीने का अगर ट्रेंड देखा है तो वो फायदा ही दे रहे हैं। वो जो WhatsApp ग्रुप्स हैं ये आजकल जब बुल मार्केट चल रही होती है ना तो वो मतलब सब चीजें बढ़ रही होती है और पिछले 15 दिन से तो बहुत ज्यादा जैसे रैली चल रही है तो हर चीज बढ़ रही होती है बट लॉन्ग टर्म में जब आप इतनी ज्यादा ट्रेडिंग करेंगे इतनी ज्यादा ट्रेडिंग करेंगे आप हर दिन समझे 15% जो है फीस दे रहे हैं तो एक ही हफ्ते के अंदर आपने 1% जो है वो तो फीस में दे दिया एक महीने में जो है आपने 4% फीस में दे दिया अगर आप यही रोज की ट्रेडिंग करते जाएंगे तो उस साल में आप 50% आधा पोर्टफोलियो तो
26:50 आप फीस में दे रहे होंगे वो ब्रोकर ही कमा के निकल रहा है आपसे। हां। अगर या तो फिर आपकी कोई बहुत जबरदस्त स्ट्रेटजी है कि रोज ही आप कोई ऐसी चीज ढूंढ लेते हैं जो बढ़ रही है। लेकिन फीस जो है ना वो बहुत ज्यादा हो जाती है। ओके। तो ये कुछ लोग होंगे जो ये कर सकते हैं बट 99% लोगों ने ना चुपचाप जो पैसे आए हैं उनको परसेंटेज में डिवाइड करना है और जो टॉप बिज़नेसमैन है ना उनके साथ बस पार्टनर बन जाना है। और आप टेंशन नहीं लें। जब पाकिस्तान के टॉप बिज़नेसमैन पैसा बनाएंगे आपका भी पैसा। आपका भी पैसा बन जाएगा। तो आपके ख्याल से भी म्यूचुअल फंड्स की जगह पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज में पैसे डालने चाहिए। देखिए म्यूच्यूल फंड्स भी सेम करते हैं। वो भी ऑलमोस्ट उनका भी रिटर्न जो है ना इंडेक्स जैसा होता है। लेकिन उधर आपको थोड़ी सी ना फीस देनी पड़ती है। तो पहला स्टेप ये हो सकता है कि आप देखें सारे जो म्यूच्यूल फंड्स है ना इनके सबका रिकॉर्ड अवेलेबल होता है। आप देखें 10-15 साल में अगर किसी ने एवरेज से ज्यादा रिटर्न लाए ना क्योंकि एवरेज तो आप खुद भी कर सकते हैं।
27:35 तो अगर कोई एवरेज से ज्यादा रिटर्न ला रहा है कंसिस्टेंटली तो बिल्कुल उनकी उनको फीस देना और उनको अपनी इन्वेस्टमेंट देना क्योंकि है ये बिल्कुल सेफ। इनकी भी जोडी होती है ना 100% सेफ होती है। लेकिन आपने देखना होता है कि मुझे रिटर्न ज्यादा कैसे मिल रहा है। तो अगर कोई एवरेज रिटर्न लेकर आ रहा है और उस फीस ले रहा है तो फिर एक टाइम जब आपका थोड़ा पोर्टफोलियो बड़ा हो जाएगा फिर आप कहेंगे मैं क्यों दे रहा हूं यह फीस अच्छा मैं बेहतर खुद ही कर लूं 10 मिनट लगा के तो अगर तो आप बिल्कुल शुरू कर रहे हैं 55000 दे रहे हैं आप जो है अभी 1 लाख का आपका पोर्टफोलियो है उस पे आपकी साल की 34000 फीस जाएगी तो मे बी ठीक है लेकिन थोड़ा सा ना जब आपके 2 लाख 3 लाख की इन्वेस्टमेंट हो जाए फिर मेरे हिसाब से इंडेक्सिंग बेहतर है जो आप इंडेक्स में खुद करते हैं ना क्योंकि देखिए कभी ना कभी आपका पोर्टफोलियो जो है 25 30 40 50 लाख पे जाना है हम तो आपको ट्रेन भी होना है ना थोड़ा सा हम
28:22 जब आपके पास 50 लाख होंगे और आपने सिर्फ म्यूचल फंड में किए होंगे तो उधर तो कम्युनिकेशन कोई होती नहीं आपने कुछ सीखा ही नहीं होगा फिर आप घबराहट जो है वही होगा कि जिस दिन सब रिडेंशन डाल रहे होते हैं अपने पैसे निकाल रहे होते हैं मार्केट गिर रही होती है आप भी निकाल लेंगे तो अगर आपने इंडेक्स इन्वेस्टिंग करोगे ना फिर भी फिर भी आपको पता होगा यार मेरी ये 15 कंपनीज़ हैं। कभी कोई ऊपर जाती है, कभी कोई नीचे जाती है। थोड़ा बहुत न्यूज़ फॉलो कर रहे होंगे। कोई थोड़ा बहुत जो है इकॉनमी के बारे में न्यूज़ पढ़ लेते होंगे। आपका इंटरेस्ट डेवलप हो रहा होगा तो एक अनकॉन्शियसली आपकी थोड़ी सी ट्रेनिंग हो रही होगी वो मचल फंड में आई थिंक नहीं होती तो बिल्कुल बहुत छोटा सा पोर्टफोलियो है शुरू के कुछ महीने हैं तो आप स्टार्ट कर सकते हैं लेकिन जैसे ही दो चार लाख भी हो जाए ना तो फिर आई थिंक इंडेक्सिंग बेहतर है आप फीस पे भी बच जाते हैं और दूसरा आपकी ना एक अनकॉन्शियस ट्रेनिंग स्टार्ट हो जाती है और जब आप 50 लाख पे पहुंच जाए ना फिर देखें हर आपका जो फैसला है ना वो उसकी एक
29:08 कॉस्ट है फिर आपने एक अच्छा फाइनेंसियल एडवाइजर ढूंढना है वो म्यूच्यूल फंड भी हो सकते हैं या कोई और जो आपको अच्छा गाइड करे फिर वो वो होता है जैसे बायर भी सब जो है अच्छा फाइनेंसियल एडवाइजर से कांटेक्ट कर सकते हां अब जैसे जो लोग वारेन बफे के साथ इन्वेस्ट किए हैं वो बड़े खुश हैं क्योंकि एक नॉर्मल इंडेक्स अमेरिका में 8% एवरेज कमाता था तो वो लोग 20% लेकर आते थे तो इतनी तेजी से उनकी कंपाउंडिंग हुई तो इसमें भी बड़ी वैल्यू है शुरू में आप इंडेक्सिंग करें फिर जब 50 लाख 60 लाख हो जाए और फिर क्योंकि आपको इनफेशन की भी जरूरत होती है ना 50 लाख के बाद प्रॉफिट कितना आ रहा है वो भी इंपॉर्टेंट होता है और कोई आपको गाइड कर रहा है ताकि आप सही फैसला करें दोनों चीजों कीेंस होती है बिल्कुल तो आपके ख्याल से अगर एक आम सैलरी जो सैलेड क्लास है जो हर महीने पैसे डाले वो किस कंपनी का शेयर ले मतलब किस की कौन सी
29:55 इंडस्ट्री को प्रेफरेंस दे वो देखिए इसमें टाइम टाइम के साथ आउटलुक जैसे एनालिस्ट देख रहे होते हैं आजकल ये इंडस्ट्री जो है उसकी प्राइस भी कम चल रही है आउटलुक भी अच्छी है तो उस हिसाब से चेंज हो सकता है लेकिन अगर आपने जीरो रिसर्च करनी है ना तो फिर ये सबसे अच्छा तरीका है कि आपने सीधा-सीधा जो टॉप कंपनी है ना उसकी परसेंटेज मैच करें अब ज्यादातर जैसे स्पोर्ट्स में एक बिगिनर लेवल होता है। एक इंटरमीडिएट लेवल होता है। एक एक्सपर्ट लेवल होता है। इंटरमीडिएट लेवल पे भी बड़ा मजा आता है ना। आप एंजॉय करते हो, खेलते हो मजा आता है। लेकिन इन्वेस्टिंग के अंदर जो इंटरमीडिएट लेवल है ना ये बहुत खतरनाक है। आपको लगता है मुझे समझ आ रहा है लेकिन आपको नहीं आ रहा होता। मतलब जो इंटरमीडिएट इन्वेस्टर्स होते हैं ना उनका रिटर्न एवरेज से भी कम होता है। तो या तो आप फिर फुल अपने अंदर इन्वेस्टमेंट करें। सारा कुछ सीखें। एक डिसिप्लिन बनाएं और फिर जो है कंपनीज़ पिक
30:41 करने की तरफ जाएं या फिर आप फिर जो है ना एवरेज इंडेक्सिंग की तरफ आ जाए क्योंकि एवरेज इंडेक्सिंग में भी इतने अच्छे रिटर्न्स आ रहे हैं। हम सही भाई आपने भी रिसेंटली कहा है कि पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज जो है वो यूएस से यूएस की स्टॉक एक्सचेंज से ज्यादा रिटर्न दे रही है। वो किस तरह पॉसिबल है मुझे? देखिए ये जब 1 जनवरी 1999 था ना तो दोनों इंडेक्स SNP 500 और पाकिस्तान का जो है ना दोनों हजार के करीब थे। ओके। ठीक है? और अब वो जो है तकरीबन आजकल 7000 का चल रहा है। एसएb 500 अब इसमें शायद डिविडेंड्स इंक्लूडेड नहीं होते तो हम उसको थोड़ा सा इंक्लूड कर लेते हैं। दूसरा ट्रंप की पॉलिसीज भी बहुत वोलेटाइल चल रही हैं। तो हम कहते हैं कि चलो दोनों चीजों को इंक्लूड करके ये 9000 का हो जाता है। ठीक है? ठीक है? हमने उसको 202% और बढ़ा दिया। तो इसने नाइन टाइम्स आपकी वेल्थ कर दी डॉलर्स में। अब इसी टाइम में जो डॉलर बढ़ा है ना वो
31:28 बढ़ा है 5.5 टाइम्स। ₹50 से लेके 280। ठीक है? तो जो अमेरिका की स्टॉक मार्केट है उसने रुपी टर्म्स में डॉलर्स में उसने नाइन टाइम्स बढ़ाया और रुपी टर्म्स में उसने बढ़ा दिया तकरीबन 50 गुना। सही है? अब जो पाकिस्तान स्टॉक मार्केट है ये 1000 का इंडेक्स ये ₹1,300 का है। ओके? अब लॉन्ग टर्म में तो अगर कोई चीज लेट्स से मैं कहता हूं आज इंडेक्स जो है ना ये अभी पाकिस्तान जो है जैसे इंडिया से वॉर जीता उसके बाद एक रैली आई। ठीक है? नहीं आती। आज अगर हम 1 लाख पे भी होते तब भी वो जो है यूएस को बीट कर रहे हैं। यानी कि आप अगर एग्री नहीं भी करते कि जो पाकिस्तान स्टॉक मार्केट में रैली चल रही है उसको आप कम भी कर दें फिर भी जो अमेरिका से ज्यादा वेल्थ क्रिएशन होगी। तो इसका रीज़न है कि जो पाकिस्तान के बिनेसमैन है ना उनको अनसर्टेन पॉलिसीज के अंदर भी ऑपरेट करना आता है।
32:14 उनको जो है डीवैल्यूएशन से प्रोटेक्ट कैसे करना है वो भी आता है। तो वो लॉन्ग टर्म में अमेरिकन एवरेज बिज़नेसमैन को भी बीट कर देते हैं इन डॉलर टर्म्स। ओके? और ये तो चले पिछले 202 साल की बात हो गई। आउटलुक अगर हम देखें पाकिस्तान में जब इंटरेस्ट रेट नीचे आ रहे हो पॉलिटिकल स्टेबिलिटी थोड़ी सी अचीव हो गई हो। करंट अकाउंट डेफिसिट आपका जो है मैनेज है। जो ऑयल वगैरह जो चीजें आप इंपोर्ट करते हैं वो सस्ती है। आपका जो है इंपोर्ट बिल इतना ज्यादा नहीं है। तो इतनी अच्छी आउटलुक हो जाती है कि अगर आप पिछले 25 साल देखेंगे ना और उसमें ये वाले सारे टाइम्स निकालेंगे जिसको हम कहते हैं बुल मार्केट फ्रेमवर्क इज ऑन। उसकी कुछ कंडीशंस होती हैं। जब वो ऑन होता है ना तो एवरेज 30 से 35% रिटर्न आते हैं। और इन सालों में डिवैल्यूएशन भी नहीं होती। क्योंकि रुपया रुका होता है एक जगह तभी तो वो सारी बूम साइकिल चल रहा होता है। सारी चीजें चल रही होती है। प्रॉफिट्स बढ़ रहे
32:59 होते हैं। तो अगर आप इसको फॉरवर्ड लुकिंग बेसिस पे भी देखें एक से दो साल में तो अमेरिका में जितनी अनसर्टेनिटीज चल रही हैं। वहां पे रिसेशन के फियर्स हैं। वहां पे पता नहीं डेप्ट क्राइसिस आने वाला है। और दूसरी तरफ पाकिस्तान का आउटलुक आपको कह रहा है कि 30 से 35% एवरेज रिटर्न आना है। तो पास्ट में भी बहुत अच्छा रिकॉर्ड है। डॉलर टर्म्स में भी अभी और फ्यूचर का भी बहुत अच्छा लग रहा है और कंपनी लोग कंपनीज़ भी कंपेयर करते हैं। अगले 5 साल स्टॉक एक्सचेंज में इन्वेस्ट करना सिक्योर है। देखिए पाकिस्तान में थोड़ी सी चीजें कभी बदल भी जाती है। जो बुल मार्केट फ्रेमवर्क होता है ना अगर आप उसको थोड़ा सा समझ लें उसमें पॉलिटिक्स भी है। हमने भी अपने चैनल पे ना एक पूरा एक घंटे का लेक्चर लगाया हुआ है उसको समझने के इतना मुश्किल नहीं है। चार इंडिकेटर्स होते हैं और आपने देखना होता है कि पॉलिटिक्स जो है चीज़ किस तरह से चल रही हैं। तो अगर वो सारी चीज़ ठीक हो तो 2 साल, 3 साल, 5 साल जब तक ये सही रहता है उसके बहुत अच्छे रिटर्न्स आते हैं। जो लॉन्गेस्ट बुल रैली आई थी ना पाकिस्तान
33:45 में वो आई थी मुशर्रफ के टाइम। फ्रॉम 1999 टू 2007 ओके। टू द सिक्स 2007 तो 1000 वाला इंडेक्स जो है वो ₹1,000 पे चला गया था। इसने ₹1000 लगाया उसका ₹15,000 हो गया। ₹1,000 हो गया। छ से सात से आठ सालों में दूसरी फिर एक बुल मार्केट आई थी 2000 101 से शुरू हुई थी 2016 में खत्म हुई थी इसमें भी 10 टाइम्स हुआ था इसमें जो है हमने स्टार्ट किया था तकरीबन 5000 से और हम 55000 तक गए थे 2016 में तो अगर ये पाकिस्तान का ये सारी स्टेबिलिटी ठीक रहती है कमोडिटी प्राइसेस जो है थोड़ी सी कम रहती है तेल बहुत ज्यादा महंगा नहीं होता तो बहुत अच्छे चांसेस हैं कि जो हमने 40 से शुरू किया है ना ये हम 4 लाख तक भी जा सकते हो लेकिन थोड़ा टाइम लगेगा एक साल की बात नहीं है ये ये चार पांच लेकिन अभी भी जो स्पेकुलेशन चल रही है उसमें तो आम वाम बंदा भी कह रहा है ये 80 पे जाएगी मार्केट
34:32 80 पे जाएगी नहीं भी पता वो भी कह रहा है 80 पे जाएगी जैसे मैंने आपको बताया ना कि एवरेज जो साल होता है अगर बुल मार्केट फ्रेमवर्क ऑन हो तो 30 से 35% अगर भी कोई रिटर्न अस्यूम कर रहा है तो वो हिस्टोरिकली बैक चीज है तो आप यहां से अगर 30% लगाएं आप 170 पे चले जाते हैं। एक और साल में 30% लगाएं तो जो है आप 225 पे चले जाते हैं। मेरा एक और क्वेश्चन है पॉलिटिक्स किस तरह इसको इसके ऊपर इन्फ्लुएंस करती है पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज पे। अभी रिसेंटली मैंने जो खुद पर्सनली तौर पे देखा कि इमरान खान का भी फैसला रिसेंटली आया था रिजर्व सीट्स के ऊपर के पीटीआई को रिजर्व सीट्स नहीं मिलेंगी। नून लीग और पीपल्स पार्टी को मिल जाएंगी या जेआयूआई को मिल जाएंगी। तो उस दिन स्टॉक एक्सचेंज बहुत ऊपर गई है। तो ये किस तरह से इनका कोरिलेशन है? इसका ना इसका फ्रेमवर्क है थ्री वन। पाकिस्तान में पांच चार जो है ना पावर
35:17 कॉरिडोर होते हैं। दो पॉलिटिकल पार्टीज होती हैं। एक मिलिट्री एस्टैब्लिशमेंट, एक कोर्ट्स। ठीक है। ठीक है? तो जब भी पाकिस्तान में थ्री वन होगा ना हम तो गेम सेटल है। हां मतलब कि जो भी फैसला लेना होगा आपने फिसिकल डिसिप्लिन के हिसाब से इंटरेस्ट रेट के हिसाब से वो के चांसेस नहीं है तो सब्सिडीज अनाउंस नहीं होंगी तो जब गवर्नमेंट थोड़ी एक पावर में हो और चीजें शिफ्ट हो रही हो उसको पता चलता है कि अब हमारा टाइम कम है। अगले इलेक्शन में हमारा जीतना मुश्किल है। वो लोग सब्सिडी स्टार्ट कर देते हैं। इंपोर्ट खोल देते हैं। डॉलर खत्म हो जाते हैं। डीवैल्यूएशन होती है। सारा जो है ना मतलब इकोनमिक सिस्टम खराब हो जाता है। फिर वो चेंज होता है। सारी चीजें ठीक होती है। फिर एक बुल स बनता है। इसको ना आप इस तरीके से भी देख सकते हैं। इसका जो प्राइम एग्जांपल था ना आप समझे अभी तो फिर भी बहुत अनसर्टेनिटी आ गई है। हो सकता है उस दिन स्टॉक मार्केट बढ़िया है तो कोई और भी वजह हो बट ये जो इलेक्शन 2023 के आखिर में और 24
36:05 में चल रहे थे उस वक्त जो है ना बताना मुश्किल था कि थ्री वन है कि नहीं है। एक-एक फैसला जो है ना वो डिटरमिन करता था। जब एक पेज पे ना हां। अब जो है इलेक्शन की डेट अनाउंस होती थी। फिर किसी दिन आता था कि इनके जो है इनको सिंबल मिलेगा नहीं मिलेगा। ठीक है? तो जब जिस दिन होता था सिंबल नहीं मिलेगा। स्टॉक मार्केट बढ़ जाती थी क्योंकि लोगों को लगता था हम 3 वन की तरफ जा रहे हैं। फिर जब इलेक्शन का रिजल्ट आया लोगों को लगा नहीं कि 3 वन तो नहीं हुआ तो गिर गई लेकिन फिर जैसे ही गवर्नमेंट बनी सारी चीजें मेंटेन हुई फिर से वो जो है रैली करने लग जाती है। असल में इन्वेस्टर्स ढूंढ रहे होते हैं सर्टेनिटी। उनको कोई गर्ज नहीं है कि प्राइम मिनिस्टर कौन है? क्या है? वो चाह रहे होते हैं कि जो है ना चीजें सही तरीके से चलें। एस सच कोई ना इकोनमिक अनसर्टेनिटी ना हो। मतलब आप ये कहना चाह रहे हैं इमरान खान अगर बाहर आ जाता है तो दोबारा अनसर्टेनिटी आ जाएगी। अनसर्टेनिटी बिल्कुल आएगी। लेकिन
36:52 आपने ये भी देखना होता है उसके चांसेस क्या हैं। आज के हिसाब से तो बहुत कम लग रहे हैं। आज से छ महीने पहले शायद थोड़े से चांसेस थे लेकिन आज के हिसाब से थोड़े कम लग रहे हैं। सिर्फ बाहर आना नहीं होता। वो कभी-कभी ऐसे भी हो जाता है चीजें जो है सेटल डाउन हो जाती है कि आप जो है एक से दो साल जो है कोई अनसर्टेनिटी क्रिएट नहीं करेंगे। उस तरह से अगर जो है रिलीज हो तो फिर शायद इतना प्रॉब्लमिक ना हो। बट ओवरऑल हां कह सकते हैं कि अगर ये इवेंट होता है तो लोगों को थोड़ा सा देखना चाहिए कि जो थ्री वन बैलेंस है वो चेंज हो रहा है कि नहीं। तो अब्दुल रहमान भाई आईएमएफ भी इस तरह इन्फ्लुएंस करती है स्टॉक एक्सचेंज के ऊपर। बिल्कुल बिल्कुल करती है। आईएमएफ का बड़ा रोल होता है इन फिसिकल डिसिप्लिन। अब आज से पिछले जो दो साल है ना इसमें इतनी अच्छी स्टॉक मार्केट की रैली है। इसकी दो वजह है। एक आपका जो करंट अकाउंट डेफिसिट है ना वो कंट्रोल है। दूसरा आप जो हर साल बजट बनाते हैं ना उसमें आप प्राइमरी बैलेंस जो है ना वो अचीव कर रहे हैं। यानी कि अगर आप इंटरेस्ट वाले खर्चे हटा
37:39 दें ना तो आपकी इनकम ज्यादा है और खर्चे कम है। ये आखिरी दफा 2004 में हुआ था। 20 साल बाद 204 में अचीव हुआ था। यानी कि गवर्नमेंट कोई सब्सिडी नहीं दे रही। अगर एक कंपनी जैसे होता है ना उसके रेवेन्यू ज्यादा है। कॉस्ट कम है तो प्रॉफिट कमा रही है। तो गवर्नमेंट लेवल पे ये पिछले दो साल से हो रहा है। इससे जो है असल में होता ये है लोगों का ना इकॉनमी में कॉन्फिडेंस आता है। अब एक बिज़नेस अगर ₹100 प्रॉफिट कमा रहा है ना अगर इकॉनमी अनसर्टेनिटी होगी ना तो वो उसको लोग कहेंगे अब हम इसको ₹4 में ₹400 में खरीदेंगे। ₹100 प्रॉफिट हम ₹400 में खरीदेंगे। लेकिन अगर इकॉनमी की आउटलुक अच्छी हो इंटरेस्ट रेट नीचे हो तो फिर वही बिज़नेस जो है ना ₹800 का बिकता है। लोग कहते हैं ये इकॉनमी सही जा रही है। अभी ये 101 साल बिज़नेस कमाएगा मैं इसको ₹800 में खरीदूंगा। अब यही जो हमारा इंडेक्स जब ₹4ज़ में था फुल डिफ़ॉल्ट की बातें चल रही थी।
38:24 तो एक कंपनी का अगर एवरेज ₹100 प्रॉफिट था ना उसका शेयर ₹280 का था। इतना सस्ता हो गया था। इसी वजह से ये पूरी रैली आई है कि एक चीज़ बहुत सस्ती हुई थी और अब वो अपनी नेचुरल वैल्यू पे आ रही है। जैसे गोहार सीमेंट में हुआ था। ये पूरी मार्केट के लेवल पे हो गया था। अच्छा मेरा अगला एक और क्वेश्चन है कि मैं पूछना चाह रहा हूं कि डिविडेंड के ऊपर जरा थोड़ा सा एक्सप्लेन करें कि पाकिस्तान में कौन सी अच्छी कंपनीज़ है जो अच्छा डिविडेंड्स पे कर रही हैं। अच्छा डिविडेंड्स में फर्टिलाइजर सेक्टर अब इसके पीछे समझना होगा डिविडेंड क्या है? डिविडेंड होता है कि कंपनी ने प्रॉफिट बनाया। अब अगर उसको एवन्यूस नहीं नजर आ रहे ना रीइन्वेस्टमेंट के तो वो लोगों को कहती है ये मैंने पैसा कमाया था हम बांट देते हैं। जैसे लोगों का जब घर से रेंट आता है तो वो उसको बांट देते हैं। अगर लेट्स से एक बिल्ड एक कमर्शियल बिल्डिंग तीन चार लोगों ने मिलके ली हुई है तो आपस में बांट देते हैं।
39:09 लेकिन कभी-कभी वो पार्टनर्स कहते हैं कि ये जो रेंट है ना इसको इकट्ठा करते हैं। एक और प्लाज़ा बनाते हैं। तो कंपनीज़ भी ऐसे ही करती हैं। वो प्रॉफिट कमाती हैं। फिर वो सोचती हैं कोई अच्छी ओपोरर्चुनिटी है तो उसमें लगा देते हैं ये पैसे। अगर नहीं है तो लोगों में बांट देते हैं। तो सबसे ज्यादा जो डिविडेंड देते हैं ना वो देते हैं फर्टिलाइजर। क्योंकि फर्टिलाइजर का प्लांट लगाने के लिए आपको गैस चाहिए होती है गवर्नमेंट से। तो गैस गवर्नमेंट जब तक एलोकेट नहीं करेगी आप नया प्लांट कैसे लगाएंगे। तो जब तक कोई गैस नहीं मिलेगी वो अगला प्लांट नहीं लगाएगा। तो वो जब तक अगला प्लांट नहीं लगाना होता वो डिविडेंड देता रहता है। दोनों कंपनीज़ इसमें जो बड़ी हैं फौजी फर्टिलाइजर और एंग्रो फर्टिलाइजर बड़े हाई डिविडेंड से देती है। क्योंकि उनको जरूरत नहीं है कैश की। उनके पास कोई एस सच अभी नया प्लांट लगाने का एवेन्यू नज़र नहीं आ रहा। बैंकिंग सेक्टर में बड़े अच्छे डिविडेंड्स होते हैं। उसमें भी जो है UBL आजल बड़े अच्छे डिविडेंड्स दे रहा है। एमसीबी भी बड़ी अच्छी मैंने Man के बारे में भी सुना था। काफी
39:55 अच्छे रिटर्न्स दिए हैं इसने। मिज़ान ने बहुत अच्छे रिटर्न्स दिए हैं। बल्कि लोग जैसे अभी हम अमेरिका की मार्केट और पाकिस्तान की मार्केट कंपेयर कर रहे थे। पिछले 10 सालों में Apple और मिज़ान का अगर कंपैरिजन करें तो डॉलर में मिज़ान ज्यादा आगे है। ओके। डॉलर टर्म्स हैं। हालांकि पिछले 10 सालों में बड़ी डीवैल्यूएशन हुई है। लेकिन फिर भी उनका बिज़नेस इतने अच्छे तरीके से ग्रो हुआ है कि उन्होंने Apple को भी पीछे छोड़ आप मिन बैंक के पीछे अगर इनका बैकग्राउंड देखे तो ये पीछे कतरीज है पीछे। कुवैत। कुवैत की फॅमिली हां रॉयल फॅमिली ऑफ कुवैत जो है ना ये इसके तक़रीबन 60% ओनर है। तो अगर आप मिज़ान में एक तरह से शेयर ले रहे हैं तो जितना वो कमा रहे हैं अपनी इन्वेस्टमेंट पे आप भी उतना कमा रहे हैं। कुवैतियों के साथ आप पार्टनर बन जाएंगे फिर तो। अच्छा एक और कांसेप्ट जो हम लोग जो नाइब लोग हैं उनके लिए ये पंप एंड डंप ये क्या होता है? लोगों को लगता है कि फैब्रिकेटेड कुछ होते हैं, स्टॉक्स आते हैं। पंप करते हैं, उनको बनाते हैं। आवाम
40:42 का पैसा लूटते निकल जाते हैं। मिसकंसेप्शन है। इसको दूर करें। छोटी कंपनीज़ में ये मिसकंसेप्शन नहीं है। ठीक है? देखिए अब एक कंपनी है रोज उसकी समझे 10 20 लाख की ट्रेडिंग होती है। अब ये ये रियल स्टेट में भी होता है। रियल स्टेट में लेट से एक सोसाइटी है उसका एक ब्लॉक है। उसमें जो है 20 प्लॉट है। वो इन्वेस्टर्स जो उस सोसाइटी के होते हैं ना वो 10 प्लॉट जो है 12 प्लॉट पहले तो खुद खरीद लेते हैं। फिर वो जो है ना जो 13वां प्लॉट होता है ना उसको बहुत ऊंची कीमत में खरीदते हैं। मार्केट में घुमा देते हैं कि ये 50 लाख वाला जो है ना किसी ने 1 करोड़ का खरीद लिया। ठीक है? तो अब जो स्माल क्वांटिटी वाले शेयर होते हैं ना उसमें ऐसा हो सकता है। रोज समझे 10 20 लाख की ट्रेडिंग हो रही है। किसी के पास तीन चार लोग मिले उनके पास 10 करोड़ थे तो कहते पहले तो हम इसको खरीदते हैं ₹1 करोड़ के। फिर हम इसको महंगा खरीदने लग जाए तो ₹100 वाला शेयर ₹200 पे भी खरीदेंगे।
41:27 एक पूरी हाइप बनेगी कि भाई शेयर ऊपर जा रहा है। नए लोग आएंगे। फिर हम उसके साथ-साथ ना लोग फिर उस कंपनी की कोई न्यूज़ भी लगाने लग जाते हैं। कि ये कंपनी जो है ना अब ये करने जा रही है। अनाउंसमेंट ऐसे ही है। तो कुछ भी हो सकती है ना। एमओय तो पाकिस्तान में आपने देखा पिछले दो साल से बहुत हो रहे हैं। तो वो सच लीगल भी नहीं होता। तो इस तरह से लोग करते हैं लेकिन ये सिर्फ छोटी कंपनीज में हो सकता है। बड़े बैंक मिज़ान बैंक एमसीबी बैंक में आप करके देखें 100 लोग और खड़े होंगे ना जो आपको जो है ना एक मिनट के अंदर सीधा कर ये क्या सिर्फ बिग बॉयज की गेम है या फिर ये रिटेल कोई हम जैसे भी बंदा कोई पंप एंड डंप या नार्मल इन्वेस्ट नॉर्मल नार्मल इन्वेस्टमेंट देखिए नार्मल इन्वेस्टिंग तो जैसे देखा ना अब हमारे घर का स्टाफ भी कर रहा है आम बंदा भी कर सकता है 5000 से अकाउंट खुल जाता है तो फिर आप कैसे कह सकते हैं ये इज़ अ मिसकंसेप्शन मिसकसेप्शन भाई दुनिया भर में टॉप इन्वेस्टर्स की आप
42:14 लिस्ट निकालेंगे ना ज्यादातर लोग हंबल बैकग्राउंड से बैकग्राउंड से आए हैं ऐसे बफे देख लें पाकिस्तान के एग्जांपल में आरिफ हबीब भी आप देख लें उनकी भी फैमिली ठीक थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं था कि जो है पीछे से बहुत ज्यादा वेल्थ आ रही थी और भी बहुत सारी एग्जांपल्स हैं इंडिया में राकेश झुंझुनुवाला तो देखिए प्लेटफार्म आपको दे दिया स्टॉक मार्केट ने कि आप जो है ना आप टॉप बिनेसमैन के साथ इक्वल पार्टनरशिप करके अच्छा कमा सकते हैं। अब जिसके पास वो स्किल होगी ना वो जिस भी बैकग्राउंड से आया होगा वो उसको यूज़ कर सकता है। अब स्टॉक मार्केट में किसी के पास ₹1 अरब है। ठीक है? और किसी के पास जो है ₹1 लाख हैं। अगर वो सही तरीके से इन्वेस्टिंग करेंगे तो दोनों का रिटर्न बराबर होगा। ऐसा कुछ नहीं है कि उसके पास ज्यादा पैसे हैं तो वो ज्यादा जो है ना रिटर्न कमा सकता है। बल्कि अगर मैं आपको ज्यादा डिटेल में एक्सप्लेन करूं जिसके पास कम पैसे होते हैं ना उसके पास
42:59 ओपोरर्चुनिटी ज्यादा होती है। जिसके पास ₹1 अरब है वो कम से कम ऐसी कंपनी ढूंढेगा जिसमें वो 5 करोड़ लगा सके। कुछ कंपनी ऐसी होती है उसमें आप 5 करोड़ लगा ही नहीं सकते। लेकिन 10 लाख वाला इन्वेस्टर लगा सकता है। वारेन बफेस इसको बड़ा अच्छा एक्सप्लेन करते हैं। कहते हैं जब मैंने शुरू किया था ना तो मेरा रिटर्न ज्यादा होता था। क्योंकि मेरे पास पैसे कम थे। मेरे पास ओपोरर्चुनिटी ज्यादा होती थी। अब मेरे पास पैसे इतने ज्यादा हो गए हैं कि कोई 10 20 कंपनीज़ ही रह गई है उतनी बड़ी जिनमें मैं कमा सकता हूं। और जाहिर है उसको फिर हजारों लोग फॉलो कर रहे होते हैं। उसमें मिस प्राइसिंग नहीं। अच्छा एक और मिसकंसेप्शन क्लियर करें कि कई लोग कहते हैं कि थोड़े पैसे स्टॉक एक्सचेंज में नहीं डालने। ज्यादा पैसे डालोगे तो बड़े मार्जिनस मिलेंगे। हम यह क्या है? नहीं ऐसा बिलकुल भी नहीं है। अह ज़्यादा पैसे आप लगाएंगे तो भी उतना ही रिटर्न आएगा परसेंटेज में। कम पैसे लगाएंगे तो भी उतना ही रिटर्न आएगा परसेंटेज। हां, ये है कि आप थोड़े-थोड़े पैसे जोड़ जोड़ जोड़ जोड़ के
43:45 इसको बहुत बड़ी अमाउंट कर सकते हैं। रियल स्टेट में ये सबसे बड़ा प्रॉब्लम होता है कि जब तक आपके पास 2025 लाख नहीं आएंगे। आप तो पहला प्लॉट खरीद ही नहीं सकते। और फिर जब आपके पास जो है 500 जमा हो गया, 1 लाख जमा हो गया। आप कोशिश करो तो मैं किसी तरीके से ₹2 लाख पे पहुंच जाऊं। हम और उसी में आप जो है ना स्कैम में फंस जाते हो। फिर किसी को दे देते वो कहता है मैं महीने का 5% दूंगा क्योंकि फाइनेंसियल लिटरेसी नहीं है हमारे पास। फाइनेंसियल लिटरेसी नहीं है। वो किस तरह मिलेगी? देखिए स्कैम से रिलेटेड जो फाइनेंसियल लिटरेसी कॉमन आदमी मतलब मैं एक शॉपकीपर की बात करूं क्योंकि हमारे यहां पे ट्रेंड नहीं है। हम फाइनेंसियल लिटरेसी वही पुराने ऑल ओल्ड स्कूल कांसेप्ट्स में चलते हैं। एजुकेशन में भी नहीं है हमारे पास। हम बच्चों को बताते नहीं है कि इन्वेस्टमेंट भी कोई चीज है। हमने बच्चों को स्कूलों से बना के पूरी ब्रिगेड बना दी जाके सिर्फ जॉब सेंट्रिक माइंड से चलती है। देखिए इसमें ये दुनिया में भी ऐसे है। वर्ल्ड वॉर टू के बाद आपको याद होगा उधर
44:31 ना पहली दफा इंट्रोड्यूस हुआ था बल्कि वर्ल्ड वॉर वन उसमें स्कूलिंग सिस्टम इंट्रोड्यूस हुआ था। जो बेल बचती है ना स्कूल में वो वर्ल्ड वॉर वन के बाद बजती होती थी कि सब जो है ना गैदर हो जाओ। हमने जो है ना मिलके कुछ काम करना है तो थोड़ा सा पूरी इकॉनमी को चलाने के लिए स्टैंडर्डाइज करने के लिए ना स्कूलिंग सिस्टम भी जो है इवन बायर भी फाइनेंसियल लिटरेसी इतनी ज्यादा नहीं सिखाता तो इसके लिए आपको फिर बुक्स पढ़नी चाहिए लेकिन जो दो मेन क्रक्स है ना वो यही है कि एक तो रिच वर्सेस पुअर माइंडसेट से आपने समझना है कि सेविंग नहीं करनी इन्वेस्टमेंट करनी सेविंग होता है सिर्फ पैसे जमा करके जो है वैल्यू करते सेविंग गरीब लोग करते हैं अनू अन एजुकेटेड लोग और ये अमीर भी हो सकते हैं बहुत लोग हैं पाकिस्तान में जो उनके पास अरबों रुपए पड़े होंगे लेकिन वो जो है बस डॉलर खरीद के रखा होगा। इवन प्राइस बॉन्ड लेके गए जो रखे हैं
45:17 मतलब इस तरह ये तो ये फाइनेंसियल लिटरेसी और कुछ लोग होंगे वो 20 25-25 हजार इन्वेस्ट करके जो है वो फाइनेंसियल लिटरेसी का सबूत दे रहे हैं। तो फर्स्ट पिलर फाइनेंसियल लिटरेसी पे आप बहुत सारी बुक्स भी पढ़ सकते हैं। सब कुछ कर सकते हैं। कोई रेकमेंड करेंगे हमें बुक्स? रिच वर्सेस पुअर पुअर डेड काफी अच्छी है। साइकोलॉजी ऑफ मनी काफी अच्छी है। इसके अलावा एक बड़ी पुराने जमाने की है ईजी लैंग्वेज रिचेस्ट मैन ऑफ बेबिलोन। ये भी बड़ी अच्छी किताब है। तो फर्स्ट पिलर होता है कि आपने ना इन्वेस्टमेंट करनी है सेविंग नहीं करनी। यानी कि पैसे जमा करने हैं और फौरन उसको एक ऐसी चीज में लगाना है जो अपनी वैल्यू बढ़ाए टाइम के साथ। और दूसरा फिर होता है कि चूज़ क्या करना है? मतलब अब आपने जब इन्वेस्टमेंट में उसको कन्वर्ट कर रहे हैं तो एसेट क्लास कौन सी होनी चाहिए? वह हमने फिर पूरी डिस्कशन कर ली कि आप रियलस्टेट देख लें, आप जो है फिक्स्ड इनकम देख लें,
46:03 बैंक में पैसे रखना। सबसे ज्यादा रिटर्न जो है ना हमेशा स्टॉक्स में आता है पूरी दुनिया में। और एक वजह इसकी ये भी होती है के स्टॉक्स में रिटर्न ज्यादा इसलिए आता है कंपेयर टू रियल स्टेट। रियलस्टेट में डेवलपर का प्रॉफिट बहुत ज्यादा होता है कंपेयर टू जो प्लॉट खरीदते हैं। ठीक है। लेकिन स्टॉक मार्केट में ऐसा नहीं होता। स्टॉक मार्केट में अगर आपने पिछले 10 साल मिज़ान बैंक का शेयर लिया है तो पर शेयर आपको भी उतना फायदा हुआ है जितना जो कुवैत की जो फैमिली है उनको हुआ है पर शेयर के हिसाब। तो इक्वल पार्टनरशिप होती है यहां पे। रियल स्टेट में जो है ना फिर फ्रॉड भी होते हैं। डेवलपर ज्यादा भी कमाता है। एक मैं आपको नंबर भी बता देता हूं। जैसे अगर आपने 1 जनवरी 1999 को लेट से आपके पास ₹1000 थे। आपने वो सारे पैसे बैंक में रख दिए जाके सेविंग अकाउंट। करंट अकाउंट में तो बढ़ेंगे ही नहीं ना। अगर आपने सेविंग अकाउंट में रखे होते तो आज वो तकरीबन ₹1000 11000 हो जाते।
46:50 ये इनफ्लेशन बिकती हुई है तो आप बिल्कुल मतलब उसके साथ ही चल रहे होते। अगर आपने यही ₹1000 गोल्ड में लगा दिए होते। यही चारप इन्वेस्टमेंट ऑप्शन होते हैं सबके पास। गोल्ड जो है ना 1000 से तकरीबन 50 55000 पे पहुंच जाता है। रियलस्टेट की एग्जांपल आप अपनी मर्जी की भी चूज़ करेंगे ना तो वो जैसे डीएचए फज़ सिक्स साहब ने ले लिया तो वो 10 लाख जो है वो तकरीबन आज 4.5 करोड़ का है। अब उसमें हमने कोई खर्चे नहीं डाले। डेवलपमेंट चार्जेस भी होते हैं। मेंटेनेंस भी होती है। हजार चीज़ होती हैं। लेकिन सिर्फ जो प्लॉट है कॉर्नर वाला वो भी 45 टाइम्स पड़ा है। हम ठीक है? और स्टॉक एक्सचेंज की एवरेज इंडेक्स जो है ना वो 1000 को ₹1300 कर देता है। हम और एक ऐसी चीज है जो हर कोई कर सकता है। अभी आपने आपको तरीका बताया मुझे आपकी बात से एक बात याद आई कि मेरी वाल्दा ने 2002 में ₹25,000 कौमी बचत में सेव किए थे। वो मैंने 2018 में कैश करवाए
47:36 तो वो कितने पैसे होंगे आपके ख्याल से कितने पैसे हुए होंगे? मेरे ख्याल से तो उतने ही होंगे। नहीं वो मुझे ₹1,20,000 उन्होंने दिया। ₹5,000 जमा कराए और ₹1,20,000 यानी कि सिर्फ फाइव टाइम्स। कितने सालों में? 2002 से 2018 में मैंने कैश ये तो 15 साल में सिर्फ फाइव टाइम्स यानी कि 7 साल बाद पैसे जमा किए डबल डबल किए हैं। दो दफा डबल हुए थे। ये 10% का रिटर्न। और ये अगर स्टॉक एक्सचेंज में डाले होते। अब ये था 10% का रिटर्न साल का। आपके ना हर 7 साल बाद पैसे डबल होते हैं। एक ये फार्मूला भी है फाइनेंसियल लिटरेसी का कि 70ड बाय जो साल का रिटर्न आ रहा है ना वो आपको ना एक एप्रोक्सीमेट नंबर दे देता है कि कितने साल में पैसे डबल होंगे। ओके। तो अगर ये इसमें जैसे नेशनल सेविंग मैंने भी जो आपको सेविंग अकाउंट का बताया ना उसका भी इतना ही है। तकरीबन 10% तो आपके 7 साल में पैसे डबल होते हैं।
48:22 तो 20 साल में जो है आपके तीन दफा डबल होंगे। ठीक है? ₹100 800 बन जाएंगे। स्टॉक मार्केट का एवरेज रिटर्न है 20% साल का। लेकिन हम चल इसको 18 ले लेते हैं। तो चार साल बाद पैसे डबल होते हैं। 15 साल में ऑलमोस्ट चार दफा डबल होते हैं। एक दफा एडिशनल डबल होते हैं। बल्कि नहीं भैया मैंने आपको 15 साल का बताया। उधर हमने 21 साल का किया था। हां। तो अगर 21 साल में करेंगे तो पांच दफा डबल होंगे। आपके 32 गुना हो जाएंगे पैसे। ओह माय गॉड। और बैंक बैंक में जो ₹100 800 हो रहे हैं। और वही चीज स्टॉक एक्सचेंज में ₹100 जो है वो ₹3200 हो रहे हैं। 32 गुना हो रहे हैं। ओके। तो ऑलमोस्ट चार गुना एडिशनल और उसी से फिर जो है आपकी वेल्थ बनती है। अगर आपने सिर्फ इनफ्लेशन के साथ ही चलना है तो फिर तो वेल्थ नहीं बनेगी ना। चीजें भी महंगी होंगी। ठीक है। तो आपने असल में रियल रिटर्न कमाना होता
49:08 है और वो स्टॉक से ही आता है पूरी दुनिया में। एक और चीज़ स्टॉक से रिलेटेड वो सारे कहते हैं इनसाइडेड ट्रेडिंग हो तो क्या ही बात है। ये अभी इसने कहा कि सुबह मैसेज आ जाता है। पता लग जाता है। तो इस पे रिलाई करना चाहिए नहीं करना चाहिए। कितना ये लॉन्ग टर्म नहीं है। बिल्कुल नहीं करना चाहिए। क्योंकि आप खुद सोचें ये जिसने भी अगर प्लानिंग लेट से की है बड़ी सक्सेसफुली भी कर ली है तो शुरू में तो सिर्फ अपने दोस्तों को बताएगा ना जो एक तरह से फाइनेंसियल लिटरेट या जिनके पास ज्यादा पैसा है जब तक आपके पास खबर पहुंचेगी ना तो वो फिर उसका ना आखिरी कुछ सांसे उसकी रह गई हो फिर आप उसको खरीद लेंगे ₹500 पे और थोड़ा सा और ऊपर जाएगा ₹700 पे आप और खरीद लेंगे फिर उसके बाद वो नीचे आना शुरू हो जाएगा। फिर वो ₹300 पे आएगा आप कहेंगे अब ये बहुत 100 हो गया मैं इसमें और खरीद लेता हूं। और वो फिर 100 पे आ जाएगा आखिर। फिर आप कहेंगे ये सब फ्रॉड है।
49:53 सही बात है। वो जैसे मूवीस में दिखाया जाता है वो जैसे दो इंडियन मूवीस भी आई है वो बाज़ार एक मूवी थी वो इवन व्फ वॉल स्ट्रीट कैप बट व्हाट अ मूवी इट इज़ मतलब उसमें वो दिखाते हैं कि पेनी वो पेनी स्टॉक्स में ट्रेडिंग करते हैं। तो मतलब वो पेनी स्टॉक्स पे तो नहीं जाना चाहिए। राइट? बिल्कुल भी नहीं जाना चाहिए। पेनी स्टॉक्स पे ना आपकी कॉस्ट भी ज्यादा होती है, कमीशन भी ज्यादा होता है। और ये सारी जो मूवीज हैं इवन हॉलीवुड, बॉलीवुड ये सब ट्रेडिंग दिखाती हैं। लोगों को ना पिछले 10 सालों में कंटेंट ही ऐसा दिखाया है कि ना हमने ट्रेडिंग करनी है। ट्रेडिंग करके जो है ना मैं एकदम से अपनी जिंदगी बदल सकता हूं। लेकिन जिंदगी आप हमेशा बदलेंगे अपनी जॉब से। और जो जॉब से सेविंग होगी ना उससे आप वेल्थ क्रिएशन करेंगे स्टॉक मार्केट में। यानी कि आप कोशिश करें आप अपने काम में अच्छे हो। प्रमोशन लें और जैसे-जैसे ज्यादा ज्यादा सेविंग करेंगे आप आप जो है 10 साल 15 साल
50:40 में ही इतनी इन्वेस्टमेंट इकट्ठी कर लेंगे कि फिर आपको जॉब करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। समझे किसी ने जो है 25-25,000 सेव करने शुरू कर दिए। ठीक है? आज से 15 साल बाद जब वो स्टॉक मार्केट में उसको लगाएगा और वो एक अच्छी अमाउंट बन जाएगी। लेट्स से 5 करोड़ बन जाती है। अभी मैं एक्सैक्ट ऐसे ही बस एक नंबर बता रहा हूं। तो फिर उससे जो पैसिव इनकम आ रही होगी ना 5 करोड़ से साल की वो उसकी जॉब से भी ज्यादा होगी। हम और फिर जो है ना एंटरप्रेन्योरल माइंड जो है ना बंदे का वो शुरू होता है। फिर वो कहता है कि अब मुझे जो है अपनी नॉर्मल जो जरूरी खर्चे हैं ना वो चलाने के लिए किसी अपना टाइम देने की जरूरत नहीं है। जरूरत नहीं है। और फिर वो सोचता है अब मैं क्या कर सकता हूं। एक्सपीरियंस भी होता है उसके पास। स्किल भी होती है। तो कोई ऐसा फिर प्रोजेक्ट करता है जिसकी फिर जो है ना वैल्यू बहुत ज्यादा बन जाती है। रैपिड फायर पे आए। रैपिड फायर पे प्लीज। आप करेंगे? अच्छा। कुछ हमने निकाल के रखे हैं आपके
51:26 लिए। रैपिड फायर है। तो यू हैव टू से इट फर्स्ट। आई विल से टू वर्ड्स उसके अंदर यू हैव टू सेफ और स्पेंड। स्पेंड अगर वो चीज आपकी स्किल बढ़ा देती है। ओके? अदरवाइज सेफ और एंड इन्वेस्ट। मतलब कोई भी चीज अगर आपकी स्किल बढ़ाती है ना जिससे आपकी जॉब में तनख्वाह बढ़ जाती है। वैल्यू एडिशन हो जाएगी। हां। या आप जो है ऑनलाइन काम करते हैं उससे आपकी अर्निंग बढ़ जाएगी। तो फिर स्पेंड करें। बिल्कुल करें। बिल्कुल ना रुके। अपने ऊपर स्पेंड करें। अच्छे-अच्छे जो है जगहों पे जाके चीजें सीखें। लेकिन उसके बाद अगर कोई उस लग्जरीज हैं तो बिल्कुल भी नहीं। जी फौरन सेव करके उसको इन्वेस्टमेंट में कन्वर्ट करें। डन नेक्स्ट क्रिप्टो और स्टॉक्स नहीं स्टॉक स्टॉक स्टॉक स्टॉक व्हाई नॉट क्रिप्टो क्रिप्टो में पहली तो चीज ये है कि लोग सोचते हैं कि जो पिछले 10-15 साल में रिटर्न आया ना वो
52:12 अगले 10-15 साल में भी आएगा। अब जो इसका थोड़ा कॉम्प्लिकेटेड आंसर है वो ये है कि लोग बिटकॉइन को कहते हैं कि ये डिजिटल गोल्ड बनेगा। सही है? गोल्ड आज जितना भी है ना दुनिया में उसकी वैल्यू है 20 से 22 ट्रिलियन। ठीक है? हम अस्यूम करते हैं कि 202 साल में ये जो माइलस्टोन है जिसको सारे क्रिप्टो एंथूजियस कहते हैं कि डिजिटल गोल्ड बन जाएगा वो अचीव हो जाता है। ओके। तो आज से 20-25 साल बाद जो दुनिया में एवरेज 4% इनफ्लेशन होती है ना हर साल उसके हिसाब से गोल्ड जो है ना थोड़ा सा जाहिर है और माइन भी होगा। तो ये कोई 60 ट्रिलियन डॉलर तक इसकी वैल्यू होगी 20-25 साल बाद। और 20 मिलियन बिटकॉइन है। तो एक जो बिटकॉइन है वो आज से 2025 सालों बाद जो है वो तकरीबन 3 मिलियन डॉलर का हो जाएगा। ठीक है? और ये बेस्ट केस है।
52:58 बेस्ट केस है कि ये डिजिटल गोल्ड बन गया। अब लोग जो है गोल्ड के बजाय कह रहे हैं बिटकॉइन ही आया असल हम हम ठीक है। अब हम देखते हैं कि ये कितना रिटर्न बनता है। ये बनता है तकरीबन 25 टाइम्स इन डॉलर टर्म्स। आजकल 1 लाख से ज्यादा है तो अगर 3 मिलियन पे चला भी जाता है। डिविडेंड तो इसने देना नहीं है। तो यही रिटर्न होगा जो आपका जो इसकी प्राइस बढ़ी है। अब 25 टाइम्स इन डॉलर टर्म्स कमाने के लिए 25 साल में आप इतना रिस्क ले रहे हैं। अब ये जीरो पे भी जा सकता है। इसकी इतनी लॉन्जिविटी है भी नहीं। हो सकता है कोई प्रॉब्लम हो जाए। गवर्नमेंट्स जो है मिलके इसको जो है बैन कर दें। ठीक है? और रिजल्ट जो है 25 टाइम्स इन डॉलर टर्म्स जो हमने आपको तरीका बताया ना जो 1000 वाला इंडेक्स $1300 हुआ है उसमें अगर आप डीवैल्यूएशन हटा दें तो ये भी आपको 25 टाइम्स इन डॉलर टर्म्स दे रहा है। इसमें आप एवरेज कंपनी खरीद रहे हैं। एवरेज
53:44 कंपनी तो कभी नुकसान नहीं देगी ना। अगर आपने 15 कंपनीज़ खरीदी है कोई खराब उसमें हो भी जाती है तो बाकी 14 या जितनी भी रह जाएंगी तो परफॉर्म करेंगी। वो एक अच्छा रिटर्न आपको लाके देंगी। तो जो बेस्ट केस भी है वो भी इतना अट्रैक्टिव नहीं लग रहा। और फिर उसमें एक अनसर्टेनिटी आ जाती है कि ये पता नहीं होगा कि नहीं होगा। इसलिए स्टॉक हां इसलिए स्टॉक अच्छा बुल मार्केट और बियर मार्केट नहीं मेरे लिए दोनों सेम ही होती है इसमें बल्कि हम कहेंगे कांसेप्ट ऑफ वेस्ट इन्वेस्टमेंट हमारा एक इन्वेस्टिंग फ्रेमवर्क है उसका ये थर्ड पिलर है मैं अभी उस पे आता हूं एंड फाइनशियल्स के ऊपर हम जानना चाहेंगे कि वो क्या करता है हाउ डस इट वर्क वो उस फदर हम आगे बात करते बिल्कुल मतलब एक इन्वेस्टर का काम यही होता है। उसने देखना होता है कि जो भी हालात चल रहे हैं और यह हर महीने के हिसाब से नहीं होता कि इस महीने में प्रॉपर्टी बढ़ेगी। इस महीने में स्टॉक्स बढ़ेंगे। मैं ऐसे कर लेता हूं। ये थोड़ा दो तीन चार साल का होराइजन होता है। उसमें उसने जज
54:30 करना होता है कि सबसे ज्यादा रिटर्न्स किधर आने की जो है ना चांसेस हैं। तो जब फुल बुल मार्केट चल रही होती है तो फिर जो है शायद स्टॉक्स में कम इन्वेस्ट करना चाहिए। अगर तो आप लॉन्ग टर्म स्ट्रेटजी कर रहे हैं तो आप कर सकते हैं। लेकिन अगर कोई ज्यादा इनफॉर्म्ड है रिसर्च करता है तो फिर शायद उस वक्त बेस्ट एसेट क्लास दूसरी हो। तो बुल मार्केट हो, बेयर मार्केट हो, इन्वेस्टर ने जो है ना सेंसिबल रहना होता है। बट हां ये है थोड़ा सा एंजॉयमेंट बुल मार्केट में ज्यादा। ठीक है। ट्रेडिंग और इन्वेस्टमेंट इन्वेस्टमेंट। इन्वेस्टमेंट। ओके। रिस्क और सेफ्टी 90% सेफ्टी। लेकिन 10% ऐसे होता है कि लोग सोच रहे होते हैं कि कोई कंपनी है या कोई ऐसा मुल्क है कि ये बहुत दूर से ना रिस्की लग रहा है। ओके? लेकिन जब आप उसको डिटेल में स्टडी करें और उसका पूरा बिज़नेस समझ लें तो रिस्क इतना होता नहीं है असल। ओके? तो रिस्क असल में लोग उससे एसोसिएट करते
55:16 हैं कि प्राइस ऊपर नीचे होती है कि नहीं। लेकिन असल रिस्क होता है कि लॉन्ग टर्म में रिटर्न आएंगे कि नहीं। आएंगे। तो कभी-कभी 10% ऑफ द टाइम लोग सोच रहे होते हैं रिस्की है लेकिन असल में वो सेफ होता है। ओके। और उधर बहुत अच्छे रिटर्न्स बनते हैं। वै गुड। अच्छा रेंटल इनकम और कैपिटल गेन। इसको अगर स्टॉक्स में करें तो डिविडेंड इनकम और कैपिटल गेन हो गया। हमारा तो फार्मूला ये है कि जो भी डिविडेंड इनकम उस
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