IG - Jalwayu (Climatology) - 1 By Swapnil Sir Pre hall 4 Morning

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संक्षिप्त सारांश

यह वीडियो भारत की जलवायु पर केंद्रित है, जिसमें जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों, हवाओं के चलने के कारणों और वायुदाब की पेटियों की व्याख्या की गई है। वीडियो में लैटीट्यूड, एल्टीट्यूड, पवनों की दिशा, वन, समुद्री जलधारा, वर्षा, पर्वत और मृदा जैसे कारकों पर विस्तार से चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त, हवाओं के चलने के मूल कारण, वायु परिसंचरण कोष, फेरल का नियम और विभिन्न प्रकार की पवनों (स्थाई और अस्थाई) को समझाया गया है।

मुख्य बातें:

  • जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक: लैटीट्यूड, एल्टीट्यूड, पवनों की दिशा, वन, समुद्री जलधारा, वर्षा, पर्वत और मृदा।
  • हवाओं के चलने का कारण: तापमान में परिवर्तन और वायुदाब का अंतर।
  • वायुदाब की पेटियां: उष्णकटिबंध, उपोष्ण कटिबंध, शीतोष्ण कटिबंध और ध्रुवीय कटिबंध।
  • फेरल का नियम: उत्तरी गोलार्ध में पवनें दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर मुड़ती हैं।
  • पवनों के प्रकार: स्थाई पवनें (व्यापारिक, पछुआ, ध्रुवीय, जेट) और अस्थाई पवनें (मानसून, चक्रवात, प्रतिचक्रवात, समीर, स्थानीय पवनें, संवहनी धाराएं)।

परिचय

यह वीडियो "जलवायु" नामक एक महत्वपूर्ण विषय पर केंद्रित है, जो विभिन्न परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसमें जलवायु की अवधारणाओं को समझने पर जोर दिया गया है, जिसमें यह बताया गया है कि जलवायु कैसे काम करती है और विभिन्न मौसमी घटनाओं के क्या कारण हैं। वीडियो में हाल के मौसम के उदाहरणों का उल्लेख किया गया है, जैसे कि कड़ाके की ठंड और अचानक गर्मी में वृद्धि, और इन घटनाओं के पीछे के कारणों को समझने पर जोर दिया गया है।

जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक

जलवायु को प्रभावित करने वाले कारकों को समझने के लिए "लैंड फॉर्म्स" नामक एक बुनियादी शब्द का उपयोग किया जाता है। एनसीईआरटी के अनुसार, जलवायु को प्रभावित करने वाले मुख्य कारक हैं: अक्षांशीय स्थिति (लैटीट्यूड), ऊंचाई (एल्टीट्यूड), पवनों की दिशा (डायरेक्शन ऑफ़ विंड), वन (फॉरेस्ट), समुद्री जलधारा (ओशन करंट), वर्षा (रेनफॉल), पर्वत (माउंटेन) और मृदा (सोइल)। अक्षांशीय स्थिति का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि कर्क रेखा के कारण छत्तीसगढ़ में उत्तर भारत की तुलना में अधिक गर्मी पड़ती है। इसी तरह, ऊंचाई के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में मैदानी क्षेत्रों की तुलना में तापमान कम होता है। पवनों की दिशा का महत्व बताते हुए मानसूनी पवनों का उल्लेख किया गया है, जो भारत में वर्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। वन, समुद्री जलधारा, वर्षा और पर्वत भी जलवायु को विभिन्न तरीकों से प्रभावित करते हैं। मृदा जलवायु से प्रभावित होती है, लेकिन यह जलवायु को सीधे प्रभावित नहीं करती है।

हवाएँ कैसे चलती हैं

हवाओं के चलने का मुख्य कारण ताप है। गर्म क्षेत्रों में हवा हल्की होकर ऊपर उठती है, जबकि ठंडे क्षेत्रों में हवा भारी होकर नीचे दबती है। जब गर्म हवा ऊपर उठती है, तो ठंडी हवा उसका स्थान लेने के लिए आगे बढ़ती है। इसी प्रकार, जब ठंडी हवा नीचे दबती है, तो गर्म हवा उसका स्थान लेने के लिए आगे बढ़ती है। इस प्रकार हवाओं का एक चक्र चलता है। गर्म क्षेत्रों में वायुदाब कम होता है, जबकि ठंडे क्षेत्रों में वायुदाब अधिक होता है। हवाएँ हमेशा उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलती हैं। इस पूरे चक्र को वायु परिसंचरण कोष कहा जाता है।

वायुदाब की पेटियाँ

पृथ्वी पर विभिन्न अक्षांशों पर वायुदाब की पेटियाँ पाई जाती हैं। ये पेटियाँ तापमान और अन्य कारकों के आधार पर बनती हैं। मुख्य पेटियाँ हैं: उष्णकटिबंध (10° उत्तर से 10° दक्षिण), उपोष्ण कटिबंध (30° से 35° उत्तर और दक्षिण), शीतोष्ण कटिबंध (65° से 70° उत्तर और दक्षिण) और ध्रुवीय कटिबंध। उष्णकटिबंध में साल भर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं, जिसके कारण तापमान अधिक होता है और वायुदाब कम होता है। इस क्षेत्र में सर्वाधिक वर्षा होती है और जैव विविधता पाई जाती है। भूमध्य रेखा के समीप 5° उत्तर से 5° दक्षिण का क्षेत्र डोलड्रम या शांत कटिबंध कहलाता है, जहाँ संवहनी धाराएँ चलती हैं और आंधी-तूफान नहीं आते। उपोष्ण कटिबंध में उच्च वायुदाब की पेटी पाई जाती है, जबकि शीतोष्ण कटिबंध में निम्न वायुदाब की पेटी पाई जाती है। ध्रुवीय क्षेत्रों में तापमान न्यूनतम होता है, जिसके कारण उच्च वायुदाब का क्षेत्र बनता है।

फेरल का नियम

फेरल का नियम बताता है कि उत्तरी गोलार्ध में चलने वाली पवनें हमेशा अपने दाईं ओर मुड़ जाती हैं, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में चलने वाली पवनें हमेशा अपने बाईं ओर मुड़ जाती हैं। इसका मुख्य कारण उत्तरी और दक्षिणी गोलार्ध में वायुदाब की स्थिति में भिन्नता है। यदि फेरल का नियम नहीं होता, तो भारत में वर्षा नहीं होती।

पवनों के प्रकार

पवनें दो प्रकार की होती हैं: स्थाई पवनें और अस्थाई पवनें। स्थाई पवनों में व्यापारिक पवनें, पछुआ पवनें, ध्रुवीय पवनें और जेट पवनें शामिल हैं। अस्थाई पवनों में मानसून, चक्रवात, प्रतिचक्रवात, समीर, स्थानीय पवनें और संवहनी धाराएँ शामिल हैं। स्थाई पवनें हमेशा चलती हैं, जबकि अस्थाई पवनें विशेष परिस्थितियों में चलती हैं।

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Transcript

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0:04 चलिए जलवायु ठीक है। भारत भूगोल के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण टॉपिक है जलवायु। शुरू करते हैं। ठीक? जलवायु महत्वपूर्ण है। चाहे कोई भी एग्जाम हो, चाहे कल का भी एग्जाम हुआ हो। दो-तीन प्रश्न जलवायु के थे। और जलवायु से प्रश्न

0:53 रहते ही हैं। चाहे आपका कोई भी एग्जाम हो और पूरा कासेप्चुअल टॉपिक है। आपका फोकस इसमें नहीं होना चाहिए कि हमको कैसे भी नोट्स बनाना है, फैक्ट डाउनलोड करना है या लिखना है जो भी है। तो आपको चीजों को समझना है क्योंकि पूरा समझने का कांसेप्ट है। जलवायु मजेदार विषय है। इंटरेस्ट यदि आप लेंगे और इंटरेस्ट तो आएगा ही। तो चीजें समझ में आएंगी और समझ में आएंगी। तो एग्जाम में जो कथन कारण के रूप में दिया है कल के भी एग्जाम में दो तीन क्वेश्चन कथन कारण वाले ही थे। देखें कल का कोई क्वेश्चन पेपर दिए हैं। कितने लोग दिए थे? एक दो लोग दिए। बाकी देखे तो है ना? पेपर दें या ना दें। जो भी व्यापम पीएससी का पेपर होता है उसको आपको देखना चाहिए ताकि नया पैटर्न आपको समझ में आए। तो चलिए शुरू

1:39 करते हैं जलवायु। बेसिक से शुरू करेंगे, धीरे-धीरे शुरू करेंगे और एकदम बारीकी से समझेंगे और यदि आप इस तरीके से समझते हैं तो आपको ए टू जेड चीजें समझ में आ जाएगी कि इस साल मतलब लास्ट ईयर जो हमारा अभी बीता है कड़ाके की ठंड पड़ी है तो क्यों पढ़ी है। अभी अचानक से गर्मी बढ़ गई है तो क्यों बढ़ गई है। जनरली हमारे यहां गर्मी फरवरी एंड से शुरू हो जाती है। लेकिन इस साल मार्च तक मौसम बढ़िया रहा है। गर्मी का प्रकोप प्रकोप अभी 10 दिन पहले ही शुरू हुआ है एक प्रकार से। तो यह सबके क्या कारण है? अगर ठंड में भी ओले पड़ गए। ठंड में क्या इस बार तो मार्च में ओले पड़े हैं कुछ-कुछ जगह में तो ओले पड़ रहे हैं तो क्यों? तूफान आ रहा है तो क्यों? हवा चल रही है तो क्यों? एक-एक चीजों के कारण को बारीकी से

2:25 समझेंगे। आप इस कदर समझ जाएंगे कि आप कहीं भी पहाड़ में खड़े होकर बता देंगे कि पानी गिरने वाला है या नहीं। ठीक है? चलो शुरू करते हैं। जलवायु। जलवायु जानने के पहले जलवायु का एक बेसिक टर्म आपको याद रखना है जो कहलाता है लैंड फॉर्म्स। लैंड फॉर्म्स कहने का मतलब है एनसीआरटी के द्वारा जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक। जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक को शॉर्ट में एनसीआरटी ने क्या कहा है? लैंडफॉर्म्स तो इसका पूरा नाम याद रखना है। जलवायु को

3:13 कौन-कौन प्रभावित करते हैं? किसी भी क्षेत्र की जलवायु हो भारत हो, छत्तीसगढ़ हो, विश्व का कोई भी देश हो। तो एल। एल का मतलब होता है लैटीट्यूड। लैटीट्यूड कहने का मतलब होता है अक्षांशीय स्थिति। लैटीट्यूड सिचुएशन अक्षांशीय स्थिति। अक्षांशीय स्थिति जैसे कि आप पढ़ते हैं छत्तीसगढ़ के उत्तर से कौन सी रेखा गुजरती है? कर्क रेखा गुजरती है। और कर्क रेखा वो अंतिम जगह है उत्तरी गोलार्ध में जहां सूरज की किरणें सीधी पड़ती है। मतलब यहां तापमान क्या होता है? अधिक होता है। यदि हम अपने राज्य को उत्तर के राज्यों से कंपेयर करें जैसे कि पंजाब हो गया, हरियाणा हो गया, हिमालय स्टेट को यदि हम

3:59 छोड़ दें तो उसके कंपैरिजन में हमारे यहां गर्मी ज्यादा पड़ती है। उसका मुख्य कारण क्या है? क्योंकि हमारे यहां से कौन सी रेखा गुजर रही है? कर्क रेखा। तो किसी भी देश की अक्षांशीय स्थिति उस देश की जलवायु को प्रभावित करती है। कैसे? यह आगे पूरा बड़ा टॉपिक रहेगा। देखेंगे। शब्द को बस अभी पहचानना है। फिर ए से होता है एलटीट्यूड। एटीट्यूड मतलब होता है ऊंचाई। ठीक? बचपन से पढ़ते आए हैं कि ऊंचाई के साथ तापमान बढ़ता है कि कम होता है? कम होता है। तो वही जो हमारे यहां पहाड़ी क्षेत्र हैं जैसे बस्तर, सरगुजा और जो हमारा मैदानी क्षेत्र है बिलासपुर, रायपुर दोनों जगह में तापमान में फर्क है। क्योंकि वहां पर ऊंचाई है तो तापमान क्या

4:45 है? थोड़ा कम है। और हमारे यहां निचला क्षेत्र है मैदानी क्षेत्र इसीलिए तापमान क्या है? अधिक है। फिर उसके बाद डी। डी होता है डायरेक्शन ऑफ विंड। सबसे महत्वपूर्ण कारक। डायरेक्शन ऑफ विंड पवनों की दिशाएं। ठीक है? इसको साथ में लिखते चलेंगे। डायरेक्शन ऑफ विंड बहुत महत्वपूर्ण है। छत्तीसगढ़ में या आप सामान्य भी आप सुने होंगे। भारत में कौन सी पवनों से वर्षा होती है? क्या सुने हैं? भारत में मुख्य रूप से कौन सी पवनों से वर्षा होगी? मानसूनी पवनों से। दक्षिण पश्चिमी मानसूनी पवन ऐसा शब्द

5:32 सुने हैं। अभी उसको कैसे पैदा कर रहे हैं वह भी हम पढ़ेंगे आगे। लेकिन दक्षिण पश्चिमी मानसूनी पवन एक पवन की दिशा पवन का प्रकार बता रहा है। अगर मान लो वो दक्षिण पश्चिमी मानसूनी पवन भारत में नहीं चलती। कोई और दिशा में चलती तो जो भारत में वर्षा हो रही है वो हो पाती क्या? तो जो भारत कृषि प्रधान देश कहला रहा है आज की डेट में अगर उस हवा वो हवाएं नहीं चलती तो भारत में भी वर्षा नहीं होती और जितना कृषि कार्य हो रहा है वह नहीं हो पाता तो इसीलिए पवनों की दिशा भी बहुत महत्वपूर्ण है। फिर उसके बाद एफ होता है फॉरेस्ट। फॉरेस्ट आपका वन क्षेत्र। ठीक? जंगल भी किसी भी जगह की जलवायु को

6:18 प्रभावित करेंगे। इतना बचपन से हम जान नहीं रहे हैं। जंगल के क्षेत्र में तापमान कम होगा कि अधिक होगा। अब तापमान कम हो रहा है तो जगह जलवायु को प्रभावित करेगी। कैसे करेगी? आगे देखते हैं। फिर ओ होता है ओशन करंट। ओशन करंट कहने का मतलब होता है समुद्री जलधारा। ओशन करंट समुद्री जलधारा ठीक अब समुद्री जलधारा नहीं सुने होंगे जनरली समुद्री जलधारा बस ये जान लेना है कि समुद्र में एक अलग से ही जल चलता है जिसका तापमान या तो ज्यादा होगा या तो क्या होगा कम होगा और तापमान में अंतर आया कहीं भी तो सीधा

7:05 किसको प्रभावित करेगा जलवायु राइट पढ़ेंगे इसको डिटेल में फिर उसके बाद आर आर होता है आपका रेनफॉल रेनफॉल कहने का मतलब वर्षा। यह तो बहुत सिंपल है। क्लियर है। जहां वर्षा अधिक हो रही है, वहां की जलवायु अलग होगी। जहां वर्षा कम हो रही है जैसे राजस्थान का क्षेत्र तो वहां की जलवायु क्या होगी? अलग होगी। फिर है एम माउंटेन। माउंटेन मतलब क्या होता है? पर्वत। और पर्वत जलवायु को प्रभावित करते ही है। जैसे हमारे यहां हम बात करें मैकल श्रेणी। माइकल श्रेणी के पश्चिम से जो मानसूनी पवनें आती हैं टकराती है तो माइकल के पश्चिम में तो खूब वर्षा करती है जो मध्य

7:50 प्रदेश का क्षेत्र है लेकिन उसके पूर्व में वृष्टि छाया क्षेत्र हो जाता है रन शैडो एरिया मतलब वहां पर वर्षा क्या कम होती है या एकदम ना के बराबर होती है तो पर्वत प्रभावित करते हैं और आखिरी जो है वह है सोइल मृदा तो मृदा जलवायु को प्रभावित नहीं करती पर जलवायु से प्रभावित होती है ठीक तो यह क्या है? एक प्रकार से जलवायु के हमारे सभी टॉपिक है जिसको एनसीआरटी ने शॉर्ट में कह दिया है कि किसी भी जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक यही सब होते हैं। इसके अलावा और कोई नहीं होता। ठीक? तो ऊपर ऊपर ये शब्द समझ में आ रहा है क्या है? क्लियर है? ठीक। लिखना हो गया है। लिख लिए हटा दें।

8:36 लिख लिए ना? नहीं लिखे। हो गया। चलो अब सबसे पहले जलवायु में देखते हैं हवाओं को चलाते हैं। ठीक सबसे पहले पवन या हवाएं

9:24 कैसे चलती है। सबसे पहले यही जान लेते हैं कि हवाएं कैसे चलती है। हम

10:21 हवा के चलने का प्रमुख कारण ताप है। पूरे जलवायु में जो भी परिवर्तन हो रहा है उसका मूल कारण कहीं ना कहीं ताप ही आता है। ठीक? तो ताप पर ही फोकस करना है। तो इसीलिए हम दो क्षेत्र बना रहे हैं। गर्म क्षेत्र है और दूसरा ठंडा क्षेत्र है। ठीक? गर्म क्षेत्र है मतलब यहां तापमान क्या होगा? अधिक होगा। और ठंडा क्षेत्र है मतलब तापमान क्या होगा? कम। सिंपल है। अब यदि हम गर्म क्षेत्र की बात कर रहे हैं तापमान अधिक है तो सामान्य हम विज्ञान में पढ़े हैं गैस का गुण होता है कि जब जब गैस गर्म होती है तो वह भारी होकर दबती है कि हल्की होकर उठती है। गैस का गुण है। जैसे ही गर्म होगी वह फैलेगी और जैसे ठंडी होगी वो उसके कण अपने पासपास आते हैं तो भारी होती है। तो जब भी हवा गर्म होगी या कोई

11:09 क्षेत्र गर्म होगा तो तय है यहां पर हवाएं क्या होंगी? हल्की होकर ऊपर उठेंगी। ये समझने में समस्या हल्की होकर ऊपर उठेंग। ठीक? और ये कैसी पवनें रहेंगी? गर्म पवनें रहेंगी। क्योंकि तापमान इनका क्या है? अधिक। तापमान अधिक हुआ है। इसीलिए यहां पर जो हवाओं के कण है वो दूर होने लग गए हैं। जिसके कारण वो हल्की हो गई और हल्की होकर क्या है? ऊपर उड़ गई। सेम आते हैं ठंडे क्षेत्र में। ठंडे क्षेत्र में तापमान कम है तो किसी भी हवा या गैस के कण क्या है? पासपास आएंगे। पासपास आएंगे तो उनका वजन क्या होगा? बढ़ेगा। तो जबजब ठंडा क्षेत्र होगा या तापमान कम होगा तो वहां पर हवाएं ठंडी

11:56 होकर ठंडी होकर क्या होंगी? नीचे दबेंग। ठंडी होकर नीचे दबेंग। यहां तक का कहानी क्लियर है? ठीक? तो यही हमेशा होता है। तापमान में परिवर्तन होता है जिसके कारण हवाएं चलती है। ठीक? फिर से समझते हैं कि अगर गर्म क्षेत्र है, तापमान अधिक है तो हवाएं हल्की होकर ऊपर उठेंग और अगर ठंडा क्षेत्र है, तापमान कम है तो हवाएं ठंडी होकर क्या होंगी? नीचे दबेंगी। अब जब यह हवाएं हल्की होकर ऊपर उठंगी हम ही रह रहे हैं यहां पर कोई ना कोई जीव जंतु या कुछ तो होगा दुनिया में तो अगर हवाएं हल्की होकर ऊपर उठेंग तो यहां क्या पूरा वैक्यूम बन जाएगा निर्वात कोई हवा नहीं रहेगी ऐसा होगा क्या तो जब भी हवाएं

12:41 हल्की होकर ऊपर उठती है उनका स्थान लेने के लिए ठंडी हवाएं आगे बढ़ती है तो जैसे ही हवा गर्म होकर हल्की होगी ऊपर उठेगी उसका स्थान लेने के लिए कौन सी हवा आ जाएगी ठंडी हवा। क्लियर कहानी? अब जब ठंडी हवा इसका स्थान लेने के लिए आएगी तो क्या यह जगह निर्वात हो जाएगी? वैक्यूम हो जाएगी। अब हवा जैसे-जैसे ऊपर उठती है बचपन से हम सुने ऊंचाई के साथ तापमान क्या होता है? कम होता है। तो पहले गर्म हुई जिसके कारण वो ऊपर उठी। लेकिन ऊपर जाते-जाते क्या होगी? फिर से ठंडी। तो अगर ठंडी होगी तो यहां नीचे तो नहीं आ सकती वापस। क्योंकि नीचे कौन आ गई है? ठंडी हवा। तो इन ठंडी हवा का स्थान लेने के लिए यह गर्म हवा आगे बढ़ जाती है। इस प्रकार हवाओं का

13:29 एक चक्र चलता है और हवाएं चलने लगती है। समझ में आ रहा है? हवाएं कैसे चल रही है? अब फिर से एक और शब्द इसमें जोड़ना है। अगर कोई क्षेत्र है जिसका तापमान ज्यादा है, गर्म क्षेत्र है तो हवाएं हल्की होकर क्या है? ऊपर उठ रही है। अब कोई चीज ऊपर उठ रही है तो वहां दबाव कम है कि दबाव अधिक है? फिर से समझना है कि अगर हवा ऊपर उठ रही है तो हवा के ऊपर दबाव ज्यादा पड़ रहा है कि कम पड़ रहा है? कम पड़ रहा है क्योंकि अगर ज्यादा पड़ता तो हवा नीचे दब जाती क्योंकि हवा में दबाव कम है इसीलिए वो क्या है? ऊपर उठ रही है। तो इसीलिए जबजब क्षेत्र में गर्मी होती है, तापमान अधिक होता है। इस स्थिति को हम क्या कहते हैं कि यहां पर

14:15 वायु दाब क्या है? कम है। ठीक? और वही यदि हम ठंडे क्षेत्र की बात करें तापमान कम है तो यहां हवा क्या है? नीचे दब रही है। नीचे दब रही है तो वायुदाब अधिक है कि कम है? तो जब जब ठंडा क्षेत्र होगा तो यहां पर वायुदाब हमेशा क्या होगा? अधिक। अब आपको हवा कहां से कहां चलती दिख रही है? उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब कि निम्न वायुदाब से उच्च वायुदाब? अरे उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब दिख रहा है कि नहीं? ठंडा क्षेत्र है मतलब यहां वायुदाब क्या है? अधिक है। गर्म क्षेत्र है मतलब वायुदाब क्या है? कम है। और हवाएं हमेशा कहां से कहां चलती है? उच्च वायुदाब से निम्न वायु। कैसे चल रही है वो समझ आ रहा है? नहीं तो एक लाइन रट

15:02 लिया जाता है कि हवाएं हमेशा कहां से कहां चलेगी? उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब। आपको कारण समझना है। उसका कारण उसका दाब या प्रेशर से कोई संबंध नहीं है। उसका संबंध किससे है? तापमान से। कि जब क्षेत्र गर्म होता है, तापमान अधिक होता है, हवाएं हल्की होकर ऊपर उठती है, इसे ही हम कहते हैं वायुदाब का कम होना। जब क्षेत्र ठंडा होता है, तापमान कम होता है, हवाएं भारी होकर नीचे दबती है, इसे ही क्या कहते हैं? वायुदाब का अधिक होना। जब हवाएं हल्की होकर ऊपर उठेंग तो उसका स्थान लेने के लिए ठंडी हवा आएंगी। इसीलिए कहते हैं कि हवाएं उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलती। क्लियर है? हवाएं कैसे चल रही है? ठीक। अब यह जो पूरा चक्र बन रहा है, इसे

15:51 ही हम कहते हैं वायु परिसंचरण कोष। वायु बना लीजिए अभी। वायु परिसंचरण कोष। एयर सर्कुलेशन सेल बना लीजिए। फिर इसके कुछ पॉइंट्स लिख लेंगे। हवा चलाने में किसी की समस्या एक बार बना लो। सोच लो। फिर कुछ डाउट है तो बताना। फिर से बोल रहा हूं। पूरा समझने का विषय है। है ना? पूरा कासेप्चुअल टॉपिक है। जलवायु। मजेदार टॉपिक है।

16:51 महादेव

18:22 हो गया। ठीक। कुछ फैक्ट इसके नीचे लिखते जाइए स्टार बना के। गर्म क्षेत्र में तापमान अधिक होने के कारण हवाएं हल्की होकर ऊपर उठती है। गर्म क्षेत्र में तापमान अधिक होने के कारण हवाएं हल्की होकर ऊपर उठती हैं।

19:12 यह स्थिति निम्न वायुदाब लो एटमॉस्फेरिक प्रेशर यह स्थिति निम्न वायुदाब लो एटमॉस्फेरिक प्रेशर की स्थिति कहलाती है। ठीक। दूसरा पॉइंट ठंडे क्षेत्र में तापमान कम होने के कारण टेंपरेचर कम होने के कारण

20:05 हवाएं भारी होकर नीचे दबती है। यह स्थिति उच्च वायुदाब हाई एटमॉस्फेरिक प्रेशर की स्थिति कहलाती है। ठीक अगला पॉइंट

20:53 गर्म हवाओं के ऊपर उठने के कारण ठंडी हवाएं उनका स्थान लेने के लिए आगे बढ़ते हैं।

21:40 इस प्रकार हवाएं हमेशा उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर चलती ध्यान रहेगा यहां तक किसी भी शब्द या कांसेप्ट में कोई समस्या हवा कैसे चलेगी

22:27 क्लियर है ठीक अब आते हैं वायुदाब की पेटियों को समझ लेते हैं। वायुदाब की पेटियां प्रेशर बेल्ट एयर प्रेशर बेल्ट या एटमॉस्फेरिक प्रेशर बेल्ट

23:28 मुख्य अक्षांश रेखाएं पता है सभी को सबसे मध्य में पृथ्वी को दो बराबर भागों में जो 0 डिग्री की अक्षांश रेखा काटती है उसे हम क्या कहते हैं? भूमध्य रेखा या इक्वेटर। ठीक? उसके अलावा उत्तर में होती है कर्क रेखा, दक्षिण में मकर रेखा, आर्कटिक वृत्त और अंटार्कटिक वृत्त। ठीक? यह मुख्य अक्षांश रेखाएं हैं। यह आपकी रहेगी कर्क रेखा। कर्क रेखा क्या रहेगी? 23 डिग्री की उत्तरी अक्षांश रेखा ट्रॉपिक ऑफ कैंसर और वैसे ही मकर रेखा रहेगी 23.5 डिग्री की

24:16 दक्षिणी अक्षांश रेखा 66.5 डिग्री का आर्कटिक िक आर्कटिक वृत्त और वैसे ही 66 डिग्री दक्षिणी का अंटार्कटिक वृत्त या इसे उत्तरी वृत्त और दक्षिणी वृत्त भी कहते हैं। अक्षांश रेखा तो पढ़े हैं सभी

25:01 तो जलवायु में क्योंकि हमारा विषय भारत की जलवायु है इसीलिए आर्कटिक और अंटार्कटिक बस जानना है इसका जलवायु में कोई काम नहीं ठीक मुख्य रूप से काम क्योंकि भारत की जलवायु है तो किसका है कर्क रेखा अब जो जो प्रभाव कर्क रेखा का गर्मी के समय भारत में होता है वही वही प्रभाव मकर रेखा का मकर रेखा संबंधित देश जैसे ऑस्ट्रेलिया वहां पर होता है। अब यह आपको वायुदाब की पेटी में यह नहीं जानना है। वायुदाब की पेटी कहने का मतलब यह होता है

25:57 10 डिग्री उत्तर से लेकर 10 डिग्री दक्षिण का जो क्षेत्र है इसे हम कहते हैं उष्ण कटिबंध। ठीक? इसे हम क्या कहेंगे? उष्णकटिबंध या ट्रॉपिकल ज़ोन। ठीक

26:49 इतना बना लीजिए साथ में उष्ण कटिबंध ट्रॉपिकल जोन थोड़ा

28:00 यह 30 डिग्री से 35 डिग्री रहेगा उत्तरी और 30 से 35 डिग्री रहेगा दक्षिणी। फिर उसके बाद यह 65 से 70 डिग्री रहेगा और इधर भी यह 65 से 70 डिग्री रहेगा। यह वाली जगह कहलाएगी उपोष्ण कटिबंध और दक्षिणी गोलार्ध में भी रहेगा आपका उपोष्ण कटिबंध। यह वाला कहलाएगा आपका उप ध्रुवीय।

28:50 या शीतोष्ण कटिबंध और यह वाला भी आपका कहलाएगा उपध्रुवी या शीतोष्ण कटिबंध और ध्रुवों पर कहलाता है ध्रुवीय ध्रुवीय या शीत कटिबंध

29:39 ठीक। तो यह है आपके वायुदाब की पेटियां। पहले एक बार बना लीजिए फिर समझते हैं। वायुदाब की पेटियां एटमॉस्फेरिक प्रेशर बेल्ट बीचोंबीच 10° उत्तर से 10 डिग्री दक्षिण यह 30 35 और यह 10 ये फिक्स रट के रखना है। अब बाकी तो क्या है? कुछ-कुछ बुक के अनुसार ये 60 70 वाला कहीं 65 से 70 रहता है, कहीं 60 से 70 रहता है। वो अलग-अलग हो जाता है। अपने को उससे मतलब भी नहीं भारत की जलवायु में। तो यह कहलाएगा उपध्रुवी या शीतोष्ण कटिबंध। यह और सबसे नीचे जो ध्रुव वाला है वह कहलाएगा ध्रुवी या शीत कटिबंध। ठीक? अंग्रेजी में लिख लेंगे। अभी सुन लेना है। उष्णकटिबंध ट्रॉपिकल ज़ोन। उपोष्ण कटिबंध

30:25 सबट्रॉपिकल ज़ोन। उपध्रुवीय सब पोलर शीतोष्ण टेंपरेट और ध्रुवीय यानी पोलर और शीत यानी फ्रिजिड। यह चित्र पोजीशन पूरा रटाया रहना चाहिए ना। प्रॉपर नोट्स बनाएंगे। जलवायु को हम अच्छे से पढ़ेंगे और जो आप पढ़ोगे डेफिनेटली उतना किसी बुक में नहीं मिलने वाला है। तो इसीलिए अच्छे से तीन चार बुक को समराइज करके मैं आपको बता रहा हूं। 65 से 70 65 से 70 वही किसी बुक में उसको

31:12 75 लिख देगा किसी में 60 से 70 लिख देगा ठीक तो वो लगभग एक एरिया रहता है और यह फिक्स भी नहीं है फिक्स केवल एक ही है बीचोंबीच वाला उसके अलावा कोई फिक्स नहीं मौसम फिक्स नहीं है यहां अप्रैल में ओला पड़ा है फर्स्ट वीक में छत्तीसगढ़ में ही पड़ा है शिमला में बर्फ गिरी है परसों रात के ठीक है? तो गर्मी के मौसम में बर्फ गिर रही है। हो गया बन गया। ठीक? समझते हैं फिर बनाते जाना साथ में। सबसे पहले उष्णकटिबंध को समझते हैं।

31:59 उष्णकटिबंध मतलब भूमध्य रेखा के पास का क्षेत्र। उसे ही क्या कह दिया गया है? उष्णकटिबंध भूमध्य रेखा के पास का क्षेत्र वह क्षेत्र रहता है जहां साल भर सूरज की किरणें लगभग सीधी ही पड़ती है। अगर साल भर सूरज की किरणें सीधी ही पड़ेगी तो इस क्षेत्र में तापमान अधिक होगा कि कम होगा? अधिक होगा। तो उष्णकटिबंध इसीलिए इसे कहा जा रहा है क्योंकि इस क्षेत्र में तापमान क्या होता है? अधिक होता है। उसका कारण क्या है? साल भर सूरज की किरणें सीधी पड़ती है। क्योंकि साल भर सूरज की किरणें सीधी पड़ रही है। इसीलिए उष्णकटिबंध में तापमान अधिक है। और जब तापमान अधिक होता है तो वायुदाब निम्न होता है कि उच्च होता

32:44 है? निम्न होता है। इसीलिए भूमध्य रेखा का जो कटिबंध है, इसे हम लो प्रेशर बेल्ट बोलते हैं। निम्न वायुदाब की पेटी और यहां वायुदाब निम्न होने का मुख्य कारण क्या है? ताप। क्लियर है यहां तक का कहानी। अब इसके पहले अभी हम एक लाइन लिखे हैं कि हवाएं हमेशा कहां से कहां चलती है? उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब की ओर। यानी किस ओर चल रही है? निम्न वायुदाब की ओर। यानी जहां पर भी निम्न वायुदाब होगा। हवाएं वहां चारों तरफ से आएंगी। ये वाला पॉइंट लिंक हो रहा है। अब फिर से आते हैं यहां पर। उष्णक कटिबंध वह जगह है जहां साल भर सूरज की किरणें सीधी पड़ रही है। इसीलिए साल भर यहां पर तापमान क्या है? अधिक है।

33:31 क्योंकि साल भर तापमान अधिक है। इसीलिए साल भर यहां वायुदाब क्या है? कम है। क्योंकि साल भर यहां वायुदाब कम है। इसीलिए चारों ओर से पवनें साल भर यहां आती है। और अगर पवनें अपने साथ जल वाष्प लेकर के आएंगी तो वर्षा करेंगी कि नहीं करेंगी? अब भूमध्य रेखा का जो क्षेत्र है वह समुद्र वहां पर अधिक है। समुद्र अधिक होने के कारण जलवाष्प की मात्रा भी वायु में क्या होगी? अधिक होगी। तो इस क्षेत्र में वर्षा अधिक होगी कि कम होगी? और जिस क्षेत्र में वर्षा अधिक होगी वहां जैव विविधता सर्वाधिक होगी कि कम होगी? पूरे विश्व की सर्वाधिक प्रजातियां चाहे जीव हो चाहे वनस्पति हो कहां पाई जाती है? भूमध्य रेखा के क्षेत्र में ही पाई जाती है। एनवायरमेंट में लाइन रटे हैं। कारण

34:17 समझ आ रहा है? फिर से पूरा पॉइंट लिंक करना है कि यह वो क्षेत्र है जहां सूरज की किरणें वर्ष भर सीधी बढ़ती है। जिसके कारण वर्ष भर तापमान अधिक होता है। जिसके कारण वर्ष भर यहां कैसा वायुदाब रहता है? निम्न वायुदाब जिसके कारण वर्ष भर चारों ओर से पवनें यहां पर आती है और यदि पवनें अपने साथ जलवाष्प लाती है तो खूब वर्षा करती है। जिसके कारण पूरे विश्व में सर्वाधिक जैव विविधता कहां पाई जाएगी? भूमध्य रेखीय क्षेत्र में। उष्णकटिबंध की विशेषता समझ आ रहा है? यही सब कथन, कारण और कूट में लाइनें लिखी रहती है। क्लियर है यहां तक का? लिखिए। पॉइंट वाइज लिखते जाइए। उष्णकटिबंध में इन्हीं चीजों को हेडिंग डालिए। उष्णकटिबंध, ट्रॉपिकल ज़ोन। पहला पॉइंट

35:04 हम किसको? हां। 5 डिग्री भी है। 5 डिग्री क्या है? उसको मैं बता रहा हूं। देखिए 10 डिग्री उत्तर से 10 डिग्री दक्षिण लेना है। अच्छा यह कहीं पढ़े हैं कि अंडमान निकोबार में भी सर्वाधिक वर्षा होती है। पढ़े हैं और पश्चिमी घाट और उत्तर पूर्वी भारत यह भी हल्का-हल्का पढ़े सुने होंगे। पश्चिमी घाट तो ऊंचा पर्वत है जो वर्षा करा देता है। उत्तर पूर्वी भारत में भी हमारे ऊंचे ऊंचे पर्वत हैं जो वर्षा करा दे रहे हैं। लेकिन अंडमान निकोबार में क्या पर्वत बहुत ऊंचा है? उससे ऊंचे ऊंचे तो हमारे बिलासपुर में अमरकंटक वाला उससे ऊंचा है। तो वर्षा

35:49 कराने के लिए पर्याप्त है क्या? लेकिन ढेर वर्षा है। अंडमान निकोबार द्वीप समूह में। जंगल भी ढेर सारे हैं। पांचप छह ठो नेशनल पार्क है। एक ठो बायोस्फीयर रिजर्व है। इतना पढ़े हैं ना? कारण क्या है? क्योंकि वह कौन से क्षेत्र में आ रहा है? उष्णकटिबंध के क्षेत्र में। अगर 5 डिग्री कर दूंगा तो आएगा क्या? अंडमान निकोबार 5 डिग्री करने पे आएगा क्या? 10 डिग्री में ही आएगा ना? कांसेप्ट बना के चीजों को याद रखना है। कारण समझ में आ रहा है? 10 में क्यों है वो? और 10 तक को उष्णकटिबंध क्यों ले रहे हैं? अब जो 5 डिग्री का कहानी है वो है डोलड्रम। शांत कटिबंध। तो डोलड्रम और उष्ण कटिबंध में थोड़ा सा फर्क है। उसको मैं आपको बताता हूं। ठीक? अभी लिखिए उष्णकटिबंध को

36:36 लिखिए। यह वह क्षेत्र है या ऐसा नहीं लिखिए। लीजिए भूमध्य रेखा के चारों ओर का वह क्षेत्र भूमध्य रेखा के चारों ओर का वह क्षेत्र ब्रैकेट में लिखना 10 डिग्री उत्तर 10 डिग्री उत्तरी अक्षांश से 10 डिग्री दक्षिणी अक्षांश तक 10 डिग्री नॉर्थन लैटीट्यूड से 10 डिग्री साउथर्न लैटीट्यूड तक ब्रैकेट बंद

37:24 जहां वर्ष भर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती है या लंबवत पढ़ती हैं। ठीक। अगला पॉइंट। अतः वर्ष भर यहां तापमान अधिक रहता है।

38:19 अगला पॉइंट अतः वर्ष भर यहां निम्न वायुदाब का क्षेत्र निर्मित रहता है। अतः वर्ष भर यहां निम्न वायुदाब लो प्रेशर बेल्ट का क्षेत्र निर्मित रहता है। इसे ही निम्न वायुदाब की पेटी लो प्रेशर बेल्ट कहते हैं।

39:09 अगला पॉइंट फल स्वरूप चारों ओर से पवनें इस क्षेत्र की ओर आती है या आकर्षित होती हैं। फल स्वरूप चारों ओर से पवनें इस क्षेत्र की ओर आती है। अगला पॉइंट। अतः यहां वर्ष भर सर्वाधिक वर्षा होती है।

39:59 अतः यहां वर्ष भर सर्वाधिक वर्षा होती है। अगला पॉइंट फल स्वरूप यहां सर्वाधिक जैव विविधता फल स्वरूप यहां सर्वाधिक जैव विविधता बायोडायवर्सिटी पाई जाती है। ठीक। फिर अगला पॉइंट

40:45 यहां तक के कारण समझ में आ रहे हैं। जो लिख रहे हैं। अब इसके बाद जो लिखेंगे उसके कारण को हम एक क्लास के बाद ही समझ पाएंगे। लेकिन यही लिखेंगे। देखिए भूमध्य रेखा के समीप 5 डिग्री उत्तर से 5 डिग्री दक्षिण का क्षेत्र डोल ड्रम्स या

41:34 शांत कटिबंध कहलाता है। 5 डिग्री उत्तर से 5 डिग्री दक्षिण का क्षेत्र डोल ड्रम्स अंग्रेजी में या हिंदी में शांत कटिबंध कहलाता है। क्योंकि यह वह क्षेत्र है जहां संवहनी धाराएं जहां संवहनी कन्वेक्शनल जहां संवहनी धाराएं चलती हैं।

42:24 और कोई आंधी तूफान नहीं आते। कोई आंधी, तूफान या चक्रवात नहीं आते। ठीक। तो कहानी यह है कि जो शांत कटिबंध है वह किसके अंदर है? उष्ण कटिबंध के अंदर ही है। तो उष्ण कटिबंध को आप 5 डिग्री उत्तर से 5 डिग्री दक्षिण लिखेंगे तो भी सही है। लेकिन उष्णकटिबंध एक्चुअली कहां से कहां रहेगा? 10 डिग्री उत्तर से 10 डिग्री दक्षिण। अब शांत कटिबंध यदि पूछा जाए जो कि परीक्षा में पूछा जाता ही है। वो फिक्स

43:11 है। वो कहां से कहां रहेगा? 5 डिग्री उत्तर से 5 डिग्री दक्षिण। अब इसमें कुछ नए शब्द आप लिखे जो अभी नहीं पढ़े इसीलिए नहीं समझ में आएगा। जैसे आप क्या लिखें यहां संवहनी धाराएं चलती हैं। ठीक? और आंधी तूफान नहीं आते। लेकिन इतना अभी आप समझ सकते हैं कि इसको शांत कटिबंध क्यों कह रहे हैं? क्योंकि यहां क्या नहीं होते? आंधी तूफान नहीं आते। इसीलिए कैसी जगह है? यह शांत जगह है। तो इसीलिए इसे क्या कह रहे हैं? शांत कटिबंध। तो पहले जब हम पढ़ेंगे आंधी तूफान आते ही क्यों हैं? या संवहनी धाराएं क्या है? तब उस समय आपको इसका कारण समझ में आएगा कि इसको शांत कटिबंध क्यों कहें। क्लियर है? तो कुछ-कुछ चीजें जलवायु में रहेगी जो थोड़े समय के बाद आपको क्लियर होगी। बाकी ये शांत कटिबंध के अलावा किसी भी पॉइंट में कोई

43:56 समस्या क्लियर है? उष्णक कटिबंध। अब अगला लिखिए उपोष्ण कटिबंध। उपोष्ण कटिबंध। उपोष्ण कटिबंध सब ट्रॉपिकल जोन ठीक अब उष्ण और उपोष्ण नाम से क्या लग रहा है? ज्यादा तापमान कहां है? उष्ण वाले में कि उपोष्ण वाले में? उष्ण वाले में तो अगर

44:44 तापमान ज्यादा यहां है तो यहां वायुदाब क्या हो गया है? कम हो गया है। उसके कंपैरिजन में तापमान यहां क्या होगा? कम। तो वायुदाब क्या हो जाएगा? अधिक। तो उपोष्ण कटिबंध वो जगह होती है जहां हाई प्रेशर बेल्ट बनता है। उच्च वायुदाब की पेटी। ठीक? लेकिन इसका कारण तापमान नहीं है। यह जो मैं अभी बोला वह समझने में आसान रहता है। तुरंत तुरंत लिंक हो गया। आपके मुंह से भी निकल गया। पर एक्चुअल कारण वो नहीं है। एक्चुअल कारण क्या है? उसे हम आगे समझेंगे। अभी इतना ही समझना है कि भूमध्य रेखा तापमान सर्वाधिक। उसके कंपैरिजन में यहां तापमान क्या है? कम। इसीलिए वायुदाब क्या हो गया है? अधिक। इतना पॉइंट लिंक रहेगा। पर उसका कारण ताप

45:30 नहीं है। वो जब हवाओं को हम चलाना सीखेंगे तब उसके कारण को समझेंगे। लिखिए उपोष्ण कटिबंध में एक लाइन यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में नॉर्थन एंड साउथर्न हेमिस्फयर में यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में 30 डिग्री से 35 डिग्री 30 डिग्री से 35 डिग्री के मध्य का क्षेत्र है।

46:17 जहां उच्च वायुदाब निर्मित होने के कारण उच्च वायुदाब की पेटी का निर्माण होता है। हाई प्रेशर बेल्ट का निर्माण होता है। ठीक इसके कारण को आगे समझेंगे। फिर आइए उपोष्ण कटिबंध। ये दोनों का कारण अभी नहीं। उपोष्ण नहीं क्या? शीतोष्ण या

47:04 उपध्रुवीय कटिबंध। शीतोष्ण टेंपरेट या उपध्रुवीय सब पोलर जोन शीतोष्ण या उपध्रुवी कटिबंध शीतोष्ण मतलब टपरेट उपध्रुवी मतलब सब पोलर ठीक। अब यहां वही अगर अंदाजा हम लगाएं तो सीधी सी बात है यह उपोष्ण कटिबंध जो है यहां पर

47:50 जो है वायुदाब क्या है? अधिक है। ठीक? इसको ऐसे समझो आसान जो समझने के लिए तापमान से लिंक किए तो भूमध्य रेखीय क्षेत्र में तापमान क्या हुआ? अधिक। तापमान अधिक है। इसीलिए वायुदाब क्या हो गया? कम। इसके कंपैरिजन में यहां तापमान क्या था? कम। इसीलिए वायुदाब क्या हो गया? अधिक। वही मैं ध्रुव की बात करूंगा तो यह तो समझने की जरूरत नहीं है। यहां तापमान क्या है? कम। निम्न तापमान पूरे पृथ्वी में कहां है? ध्रुवीय क्षेत्रों में है। निम्न तापमान है। इसीलिए वायुदाब क्या होगा? अधिक होगा। लेकिन इसके कंपैरिजन में यहां तापमान क्या होगा? ज्यादा होगा कि कम होगा? कम कौन बोल रहा है? अगर ध्रुवीय क्षेत्रों में तापमान निम्न है तो ये उपध्रुवीय है। यहां तापमान क्या होगा? तो

48:36 वायुदाब क्या होगा? कम। ध्यान रहेगा। अभी यही कहानी दिमाग में बैठा लेना है। तो यह कैसा है आपका? लो प्रेशर बेल्ट है। ठीक? बाकी इसका भी कारण यह नहीं है ना। कारण आगे समझेंगे। लिखिए इसमें। यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में 65 से 70 डिग्री उत्तरी अक्षांश के मध्य यह उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में 65 से 70 डिग्री

49:23 अक्षांश के मध्य 65 से 70 डिग्री अक्षांश के मध्य का क्षेत्र है। जहां निम्न वायुदाब का क्षेत्र निर्मित होने के कारण जहां निम्न वायुदाब का क्षेत्र निर्मित होने के कारण निम्न वायुदाब की पेटी लो प्रेशर बेल्ट का निर्माण होता है। निम्न वायुदाब की पेटी लो प्रेशर बेल्ट का

50:10 निर्माण होता है। ठीक। और यहां भी कारण तापमान नहीं है। कारण तापमान सिर्फ दो ही जगह है। उष्णक कटिबंध में और शीत कटिबंध में। ये दोनों के लिए कारण तापमान नहीं है। ये दोनों के कारण तब समझ में आएंगे जब हम इनके बीच हवा चलाएंगे। तो थोड़ा सा उसके लिए सब्र रखना। ये दोनों का भी कारण आपको समझ में आ जाएगा। अब आखिरी हेडिंग डालिए। ध्रुवीय कटिबंध। अच्छा बेल्ट बेल्ट क्यों लिख रहे हैं? क्लियर है ना? यह ऐसा एक पट्टी जैसा बन रहा है। इसीलिए इसे बेल्ट या पेटी कह दिया जा रहा है। और कुछ नहीं है। बेल्ट पट्टी बोलने के कारण लिखिए आखरी ध्रुवीय

50:57 या शीत कटिबंध। ध्रुवीय मतलब पोलर जोन या शीत कहने का मतलब फ्रिजिड जोन लिखिए ध्रुवीय क्षेत्रों में

51:45 तापमान न्यूनतम होने के कारण ध्रुवीय क्षेत्रों में तापमान न्यूनतम होने के कारण उच्च वायुदाब के क्षेत्र का निर्माण होता है। ठीक। और यहां पेटी नहीं बनेगा क्योंकि बेल्ट बन पाएगा क्या? पेटी मतलब क्लियर

52:30 है? एक पट्टी जैसा बन रहा था। यहां पट्टी नहीं बनेगा क्योंकि ध्रुव क्या है? आपका एक बिंदु है। तो इसीलिए यहां पर क्या है? तापमान कम है। इसीलिए वायुदाब क्या है यहां पर? उच्च है। ठीक? तो यहां कारण आपका सिंपल ताप है। क्लियर है यहां तक का कहानी। ठीक? ठीक। ठीक है? तो यह है वायुदाब की पेटियां। वायुदाब की पेटी एकदम आसान रूप में याद रखना है कि भूमध्य रेखा का जो क्षेत्र है वहां पर तापमान अधिक है। इसीलिए वायुदाब क्या है? कम रटने के लिए। उसके ऊपर दोनों उच्च होगा। अल्टरनेट चलाना है। लो हाई लो हाई। फिर

53:16 यहां भूमध्य लो फिर हाई फिर लो फिर हाई। यहां तापमान अधिक इसीलिए वायुदाब कम। ध्रुवों में तापमान बहुत कम। इसीलिए वायुदाब अधिक। ये दोनों के कारण को हम समझेंगे आगे। यहां तक कोई समस्या है? क्लियर है यहां तक? ठीक? अब हम हवाएं चलाते हैं। यहां पर हवाओं को यदि हम चलाएं तो हवाओं का फंडा हम जान चुके हैं। हवाएं कौन से वायुदाब से कौन से वायुदाब की ओर चलती है? उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब। तो यदि मैं यहां हवा को चलाऊं तो उच्च वायुदाब यहां है और निम्न वायुदाब यहां है। हवा इस प्रकार चलना चाहिए। उच्च वायुदाब यहां है। निम्न वायुदाब यहां है। यह हवा चलना चाहिए। उच्च यहां है, निम्न यहां है। ऐसा

54:04 चलना चाहिए। फिर यह उच्च से निम्न यह चलना चाहिए। यह उच्च से निम्न ऐसा चलना चाहिए। और यह उच्च से निम्न कुछ इस प्रकार से हवा चलना चाहिए। क्या हवा ऐसा सीधा-सीधा चलता है? हवा हमेशा तिरछा चलता है। थोड़ा एक्चुअल हवा जो चलता है वह किस प्रकार से चलता है कि यह जो हवा उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब सीधी-सीधी आ रही है यह इस प्रकार मुड़ जाती है। सेम यह हवा जो सीधा-सीधा चलना चाहिए, यह सीधा ना चल के क्या होती है? ऐसे मुड़ जाती है और यह भी हवा जो सीधा-सीधा चलना चाहिए यह इस प्रकार से मुड़ जाती है। किसी को पता है इसके पीछे कौन सा नियम काम करता है?

54:49 किसका नियम? न्यूटन। पृथ्वी के घूर्णन के कारण। पृथ्वी का घूर्णन तो पश्चिम से पूर्व ही है। एक ही है ना पृथ्वी का घूर्णन? पश्चिम से पूर्व। पश्चिम से पूर्व है तो हवाएं इधर की इधर कुछ होनी चाहिए ना। यह वाली हवा की मैं बात करूं तो यह इधर मुड़ रही है। यह इधर मुड़ती है और यह वाली हवा भी इधर मुड़ रही है। जिगजैग जिगजैग मुड़ रही है सब तो घूर्णन का तो लेना देना है नहीं। घूर्णन होता तो एक डायरेक्शन पश्चिम से पूर्व ही पृथ्वी घूम रही है। ठीक? और 100 बात की एक बात जब भी जलवायु में कुछ भी कारण सोचोगे वो हवा से ही संबंधित रहेगा। और हवाएं जो होती हैं वह कहां से कहां चलती है? उच्च

55:36 वायुदाब से निम्न वायुदाब अगर मुड़ भी रही है तो उसका कारण क्या होगा? वायुदाब में परिवर्तन होना कि भाई पहले उच्च वायुदाब से निम्न वायुदाब ऐसे जा रही थी। अब इससे ज्यादा निम्न वायुदाब यहां हो गया तो हवाएं अब ऐसे क्या होंगी? मुड़ जाएंगी। क्लियर हो रहा है? कभी भी हवा की चाल को सोचोगे, दिशा को सोचोगे तो एक ही चीज सोचना है कि वायुदाब कहां है? उच्च वायुदाब कहां है? निम्न। और हवा हमेशा कहां से कहां जाएगी? उच्च वायुदाब से निम्न। तो बस इसके लिए याद रखना है कि फेरल फेरल नाम के खोजकर्ता थे। उन्होंने ही इसकी खोज की कि भाई अगर हम इसे उच्च वायुदाब और इसे निम्न वायुदाब कह रहे हैं तो हवाएं यहां से यहां चलनी चाहिए। लेकिन

56:21 वास्तविक हवाएं ऐसे नहीं चलती। कि वास्तविक हवाएं अपने पथ से थोड़ा मुड़ जाती है। तो फेरल का नियम का अनुसरण करती है और फेरल की ने अपनी खोज में यह पाया कि उत्तरी गोलार्ध की जो पवनें रहती है उत्तरी गोलार्ध में वायुदाब की स्थिति अलग होती है और दक्षिणी गोलार्ध में वायुदाब की स्थिति अलग होती है। जबजब पवनें उत्तरी गोलार्ध में चलेंगी वो अपने राइट मुड़ जाएंगी और जबजब पवनें दक्षिणी गोलार्ध में चलेंगी वो अपने लेफ्ट मुड़ जाएंगी। जबजब पवनें उत्तरी गोलार्ध में चल रही है तो राइट मुड़ रही है। क्यों? क्योंकि उत्तरी गोलार्ध में बाएं तरफ उच्च वायुदाब होगा और दाएं तरफ क्या होगा? निम्न वायुदाब। अब सेम उल्टा दक्षिणी गोलार्ध में होगा। दक्षिणी गोलार्ध में पवनें अगर बाएं मुड़

57:06 रही है तो दाएं तरफ उच्च वायुदाब होगा और बाएं तरफ क्या होगा? निम्न वायुदाब। इसीलिए फेरल ने एक सिंपल नियम बना दिया कि जबजब हवाएं उत्तरी गोलार्ध में चलेंगी चाहे यहां से यहां चले यहां से यहां चले या यहां से यहां चले वो हमेशा अपने कहां मुड़ जाएगी दाएं देखो ऐसा सीधा-सीधा चलना चाहिए था अब इसका मुंह नीचे है तो दाया इधर होगा कि इस तरफ क्लियर है डायरेक्शन रीजनिंग तो इसीलिए पवन अपने दाएं मुड़ गई अब इसका मुंह उत्तर की तरफ है दाया इधर होगा कि इस तरफ तो फिर अपने दाएं मुड़ गई सेम पवनों का मुंह अभी दक्षिण की तरफ है तो दाएं इस तरफ मुड़ गई और वही अगर दक्षिणी गोलार्ध में चलेगी तो अपने बाएं लेफ्ट मुड़ेगी। उत्तर की तरफ जा रही है अपने लेफ्ट मुड़ गई। दक्षिण की तरफ जा रही है अपने लेफ्ट। क्लियर हो रहा है? हेडिंग

57:54 डालिए। फेरल का नियम। फेरल का नियम। अगर ऐसा नहीं होता तो भारत में वर्षा ही नहीं होती। भारत क्या कर्क रेशा से संबंधित किसी भी देश में वर्षा नहीं होती अगर यह नहीं होता तो आगे समझेंगे उसको अभी लिखिए फेरल का नियम सबसे पहले काम का लाइन लिखिए इसके अनुसार उत्तरी गोलार्ध में चलने वाली पवनें

58:40 इसके अनुसार उत्तरी गोलार्ध में नॉर्थन हेमिस्फयर में चलने वाली पवनें सदैव अपने दाएं राइट मुड़ जाती हैं। तथा दक्षिणी गोलार्ध में चलने वाली पवनें सदैव अपने लेफ्ट बाएं मुड़ जाती हैं।

59:42 ठीक जिसका प्रमुख कारण जिसका प्रमुख कारण उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में वायुदाब की स्थिति में जिसका प्रमुख कारण उत्तरी एवं दक्षिणी गोलार्ध में वायुदाब की स्थिति में परिवर्तन है या भिन्नता है। ठीक। तो बस यही शॉर्ट में याद रखना है कि फेरल

1:00:30 के नियम के अनुसार मतलब क्वेश्चन फेरल के नियम से जो हमारी परीक्षा में रहे हैं एक सिंपल क्वेश्चन यही रहा है। फेरल के नियम का संबंध किससे है? किससे है? हवाओं से, जलवायु से, भूगोल से। जैसा भी ऑप्शन रहेगा। तो फेरल का नियम किससे संबंधित है? हवाओं से। क्या बताता है? हवाओं की दिशा बताता है। क्या बताता है? है कि उत्तरी गोलार्ध की पवनें जबजब उत्तरी गोलार्ध में हवा चलेगी कहां मुड़ जाएगी? राइट। और जबजब दक्षिणी गोलार्ध में हवा चलेगी कहां मुड़ जाएगी? ध्यान रहेगा यह। ठीक? अब यह जो हवाएं हैं इन हवाओं के अलग-अलग प्रकार हैं। इसको हम चलाएंगे डिटेल में। तो कल अभी हम इसका वर्गीकरण लिख लेते हैं। तो अगला हेडिंग डाल लीजिए। हवाएं पवनें।

1:01:20 यह पेटियां कल याद रहना चाहिए ना तभी यह पवन चला पाओगे। पवनें या विंड्स ठीक पवनें दो प्रकार की रहेंग। एक रहेगी स्थाई पवनें। परमानेंट विंड और दूसरा रहेगी अस्थाई पवनें नॉन परमानेंट विंड

1:02:09 राइट स्थाई स्थाई पवनों के अंतर्गत रहेगा व्यापारिक पवनें ट्रेडमेंट दूसरा पछुआ या पश्चिमी पवन वेस्टलीज

1:02:55 ध्रुवीय पवनें पोलर विंड जेट पवनें जेट वेंट अस्थाई पवनों में सबसे महत्वपूर्ण रहेगा मानसून। दूसरा रहेगा चक्रवात और प्रति चक्रवात।

1:03:47 साइक्लोन एंड एंटी साइक्लोन फिर रहेगा समीर फिर स्थानीय पवनें लोकल विंड और संवहनी धाराएं

1:04:32 कन्वेक्शनल विंड इतने प्रकार की पवनें होती स्थाई अस्थाई स्थाई मतलब जो हमेशा चलेगी अस्थाई मतलब विशेष परिस्थिति में जो चलती ठीक व्यापारिक पवनें पछुआ पवनें ध्रुवीय पवनें जट पवनें स्थाई है अस्थाई में मानसून चक्रवात प्रतिचक्रवात समीर स्थानीय पवनें और संवहनी धाराएं ठीक। अब वही जो हम लिखे थे भूमध्य रेखा में आंधी तूफान चक्रवात नहीं आते। और क्यों नहीं आते? क्योंकि क्या चलती है? संवहनीय धाराएं। तो पूरा यह पढ़ेंगे फिर जब ये दोनों को पढ़ेंगे तब कारण आपको समझ में आएगा कि वहां ऐसा क्यों नहीं होता।

1:05:19 ठीक? हो गया लिखना। तो कोई समस्या ठीक। चलिए कल इसको रिवाइज करके आइए अच्छे से। यह याद रहना चाहिए फेरल का नियम और यह पूरा चित्र दिमाग में बैठा रहना चाहिए। याद रहेगा कल तक? तो यही है जलवायु। बहुत अच्छा कांसेप्ट है। बेसिक से ही चलना है एकदम धीरे-धीरे और ए टू जेड चीजें क्लियर हो जाएंगी। ठीक है? चलिए कुछ डाउट रहेगा तो कल पहले पूछना। आज के लिए इतना ही रखते हैं।

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